PPHYS 311 Lecture 22: बसंतीकरण (Vernalization): परिभाषा, क्रियाविधि, डी-वर्नलाइजेशन एवं कृषि में महत्व

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PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
LECTURE 22 / 32 · PPHYS 311

बसंतीकरण (Vernalization): परिभाषा, क्रियाविधि, डी-वर्नलाइजेशन एवं कृषि में महत्व

Vernalization: Definition, Classification and Importance

Discovery by Klippart (1857) & Lysenko (1928), Site of Perception (Shoot Apical Meristem / Embryo – Curtis & Chang 1930), Vernalin & Gibberellin Replacement (Lang 1957), Epigenetic FLC Gene Silencing, Devernalization & Agricultural Importance

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Vernalization: Definition, Classification and Importance (Theory • Lecture 22)
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • बसंतीकरण (Vernalization — Klippart 1857, Lysenko 1928 & Chouard 1960) की परिभाषा, आवश्यक शर्तों (0∘C से 5∘C शीत उपचार + ऑक्सीजन + जल + सक्रिय रूप से विभाजित होती कोशिकाएँ) और सीत-उद्दीपन ग्रहण के स्थल ('प्ररोह शीर्षस्थ विभज्योतक / भ्रूण' — Curtis & Chang, 1930) को समझना।
  • एकवर्षीय (शीतकालीन बनाम बसंतकालीन गेहूँ/राई) और द्विवर्षीय फसलों (गाजर, चुकंदर, पत्तागोभी, हेनबेन) का वर्गीकरण, मेल्चर्स (Melchers, 1939) की 'वर्नैलिन' (Vernalin) परिकल्पना, लैंग (Lang, 1957) द्वारा जिबरेलिन (GA3) से शीत उपचार का प्रतिस्थापन और आधुनिक एपिजेनेटिक 'FLC जीन' दमन का विश्लेषण करना।
  • अ-बसंतीकरण (Devernalization — 35∘C उच्च ताप द्वारा प्रभाव नष्ट होना) और कृषि व पादप प्रजनन में बसंतीकरण के महत्व का अध्ययन करना।

प्रस्तावना · Introduction

शीतोष्ण प्रदेशों में उगाए जाने वाले शीतकालीन गेहूँ (Winter wheat), जौ, राई और द्विवर्षीय सब्जियों (जैसे गाजर, चुकंदर, पत्तागोभी व प्याज) में एक विशेष कार्यिकीय बाध्यता पाई जाती है—यदि उन्हें शरद ऋतु (अक्टूबर-नवंबर) के बजाय बसंत ऋतु (मार्च-अप्रैल) में बोया जाए, तो वे पूरे साल केवल हरी पत्तियाँ (Rosette) ही बनाते रहते हैं और उनमें बाली या फूल बिल्कुल नहीं आते! उन्हें फूलने की क्षमता प्राप्त करने के लिए अपनी अंकुर या बीज अवस्था में कुछ सप्ताह तक कड़ाके की ठंड (0∘C से 5∘C) का अनुभव करना अनिवार्य होता है। कृत्रिम शीत उपचार (Chilling treatment) देकर शीतकालीन किस्मों को बसंतकालीन किस्मों की तरह जल्दी फुलाने की इस तकनीक को रूसी वैज्ञानिक टी.डी. लाइसेंको (T.D. Lysenko, 1928) ने 'रोवित्ता / यारोविज़ात्सिया' (Jarovization = Vernalization / बसंतीकरण) नाम दिया!

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

बसंतीकरण (Vernalization – T.D. Lysenko, 1928; P. Chouard, 1960)

चौआर्ड (Chouard, 1960) की मानक परिभाषा के अनुसार: ''कम तापमान / शीत उपचार (Chilling treatment at 0∘C to 5∘C) के द्वारा पौधों में पुष्पन करने की क्षमता का अर्जन या त्वरण (Acquisition or acceleration of the ability to flower by a chilling treatment) बसंतीकरण कहलाता है।''
*(सूक्ष्म ध्यान दें: बसंतीकरण सीधे फूल नहीं बनाता, बल्कि पौधे को केवल फूलने के लिए 'तैयार / Competent' करता है; फूल वास्तविक रूप से बाद में अनुकूल दीप्तिकाल मिलने पर ही खिलते हैं!)*

शीत-उद्दीपन ग्रहण का स्थल (Site of Vernalization Perception – Curtis & Chang, 1930)

दीप्तिकालिता (जहाँ पत्तियाँ प्रकाश ग्रहण करती हैं) के ठीक विपरीत, बसंतीकरण के शीत-उद्दीपन को ग्रहण करने का स्थल 'सक्रिय रूप से विभाजित होता हुआ प्ररोह शीर्षस्थ विभज्योतक' (Dividing cells of Shoot Apical Meristem / Plumule in soaked seeds) है!

वर्नैलिन (Vernalin – Georg Melchers, 1939)

जर्मन वैज्ञानिक जॉर्ज मेल्चर्स (1939) ने द्विवर्षीय हेनबेन (*Hyoscyamus niger*) में ग्राफ्टिंग प्रयोगों के आधार पर प्रस्तावित किया कि शीत उपचार के दौरान प्ररोह शीर्ष में 'वर्नैलिन' (Vernalin) नामक एक काल्पनिक हार्मोनल अग्रदूत बनता है जो बाद में लंबे दिन मिलने पर फ्लोरिजन में बदल जाता है!

अ-बसंतीकरण एवं पुनर्बसंतीकरण (Devernalization & Revernalization – Purvis & Gregory, 1952)

यदि शीत-उपचारित (Vernalized) बीजों या पौधों को तुरंत 30∘C से 35∘C उच्च तापमान या अवायवीय स्थिति में रख दिया जाए, तो बसंतीकरण का प्रभाव नष्ट हो जाता है जिसे 'अ-बसंतीकरण' (Devernalization) कहते हैं; और पुनः ठंडा करने पर प्रभाव वापस आ जाता है (Revernalization)!

वर्गीकरण · Classification

शीत आवश्यकता के आधार पर फसलों के 2 मुख्य वर्ग (Klippart, 1857 & Gassner, 1918)

1. शीतकालीन बनाम बसंतकालीन एकवर्षीय अनाज (Winter vs Spring Annual Cereals — गेहूँ, जौ, जई एवं राई जैसे 'Petkus Rye'):
• (a) बसंतकालीन किस्में (Spring Varieties — भारत के मैदानी क्षेत्रों में उगाया जाने वाला समस्त गेहूँ व जौ इसी वर्ग का है!): इन्हें बसंतीकरण की कोई आवश्यकता नहीं होती; बोने के 3–4 माह में ही बाली देकर पक जाती हैं।
• (b) शीतकालीन किस्में (Winter Varieties — यूरोप, रूस व उत्तरी अमेरिका में): इन्हें शरद ऋतु में बोया जाता है; ये पूरी सर्दी बर्फ के नीचे 0–5°C में रहकर बसंतीकृत होती हैं और अगली बसंत/गर्मी में लंबे दिन आने पर बाली देती हैं। यदि इन्हें बिना शीत उपचार के बसंत में बो दिया जाए तो ये बाली नहीं देतीं (इनकी शीत आवश्यकता विकल्पी / Quantitative होती है—अर्थात् ठंड से पुष्पन जल्दी होता है)।
2. द्विवर्षीय पादप (Biennial Plants — अविकल्पी / Qualitative Vernalization Requirement!):
• गाजर (Carrot), चुकंदर (Sugarbeet), पत्तागोभी (Cabbage), शलजम (Turnip), मूली (यूरोपीय किस्में), अजवाइन (Celery) एवं द्विवर्षीय हेनबेन (*Hyoscyamus niger*):
• ये पौधे प्रथम वर्ष में केवल जड़ या पत्तियों का गुच्छा (Rosette habit — बिना तने के) बनाते हैं, फिर सर्दियों की ठंड से बसंतीकृत होते हैं और द्वितीय वर्ष की बसंत में इनका तना अचानक लंबा बढ़ता है ('Bolting') और फूल व बीज बनते हैं! बिना शीत उपचार (या GA3) के ये वर्षों तक शाकीय ही बने रहते हैं!

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • एंटोन लैंग (Anton Lang, 1957) की ऐतिहासिक खोज — जिबरेलिन (GA3) द्वारा बसंतीकरण का प्रतिस्थापन: लैंग (1957) ने देखा कि यदि बिना ठंड दिए रोजेट अवस्था में खड़े द्विवर्षीय पौधों (जैसे गाजर, पत्तागोभी व हेनबेन) पर बाहर से जिबरेलिक अम्ल (GA3) का छिड़काव कर दिया जाए, तो बिना किसी शीत उपचार के ही उनका तना लंबा बढ़ जाता है (Bolting) और उनमें फूल खिल जाते हैं! अर्थात् जिबरेलिन (GA3) द्विवर्षीय पौधों में बसंतीकरण (ठंड) की आवश्यकता को प्रतिस्थापित (Replace) कर सकता है!
  • बसंतीकरण की आधुनिक आणविक एवं एपिजेनेटिक क्रियाविधि (Epigenetic Silencing of 'FLC' Gene by Vernalization — परीक्षा का आधुनिक प्रश्न!): पौधे के प्ररोह शीर्ष की कोशिकाओं को यह कैसे याद रहता है कि उन्होंने महीनों पहले ठंड झेली थी?
    • बसंतीकरण से पहले पौधे में 'FLC' (Flowering Locus C — और गेहूँ/जौ में 'VRN2') नामक एक शक्तिशाली पुष्पन-दमनकारी जीन (Flowering Repressor Gene) चालू रहता है जो फ्लोरिजन (*FT* और *SOC1* जीन) को बनने ही नहीं देता!
    • जब पौधे को 0–5°C ठंड मिलती है, तो 'VIN3' (Vernalization Insensitive 3) और 'VRN1' जीन सक्रिय होते हैं जो हिस्टोन मिथाइलेशन (Epigenetic chromatin remodeling) द्वारा 'FLC' दमनकारी जीन को स्थायी रूप से बंद (Silence) कर देते हैं!
    • FLC का ताला हटते ही जैसे ही बसंत में लंबे दिन आते हैं, *FT* (फ्लोरिजन) जीन चालू हो जाता है और पौधे में फूल खिल जाते हैं!

कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics

1. Discovery, Site of Perception, Essential Conditions & Mechanism of Vernalization (बसंतीकरण की खोज, ग्रहण का स्थल, आवश्यक शर्तें एवं क्रियाविधि)

Winter Wheat, Petkus Rye, Barley, Sugarbeet, Carrot, Cabbage & Hyoscyamus

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Winter Wheat, Petkus Rye, Barley, Sugarbeet, Carrot, Cabbage & Hyoscyamus

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: ऐतिहासिक क्रम: जॉन क्लिपार्ट (Klippart, 1857 USA), गैसनर (Gassner, 1918 जर्मनी), टी.डी. लाइसेंको (Lysenko, 1928 रूस — 'Jarovization/Vernalization'), कर्टिस एवं चांग (Curtis & Chang, 1930 — प्ररोह शीर्ष स्थल), मेल्चर्स (1939 — Vernalin) एवं लैंग (1957 — Gibberellin replacement)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: बसंतीकरण द्वारा रूस और कनाडा जैसे ठंडे देशों में शीतकालीन गेहूँ के बीजों को गोदाम में ही ठंडा करके बसंत में बोया जा सका जिससे फसल पाले से बच गई।

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. बसंतीकरण के लिए 5 अनिवार्य कार्यिकीय शर्तें (Essential Requirements for Vernalization):
• (i) कम तापमान (Low Chilling Temperature): 0∘C से 5∘C (परास 0∘C–10∘C) सर्वोत्तम है (−4∘C से नीचे बर्फ जमने पर कोशिका विभाजन रुकने से बसंतीकरण नहीं होता!)।
• (ii) अवधि (Duration): फसल के अनुसार 10 दिन से लेकर 6–8 सप्ताह तक।
• (iii) पर्याप्त नमी / जल (30–40% Moisture): पूर्णतः सूखे बीजों (Dry seeds) का बसंतीकरण कभी नहीं किया जा सकता! बीजों को पानी में भिगोकर हल्का अंकुरित करना अनिवार्य है।
• (iv) ऑक्सीजन एवं वायवीय श्वसन (Oxygen / Aerobic Respiration): ऑक्सीजन की अनुपस्थिति या श्वसन अवरोधक (KCN) में बसंतीकरण बिल्कुल नहीं होता क्योंकि यह एक ऊर्जा-निर्भर प्रक्रिया है!
• (v) सक्रिय रूप से विभाजित होती विभज्योतक कोशिकाएँ (Actively Dividing Meristematic Cells): चूँकि बसंतीकरण एक एपिजेनेटिक हिस्टोन रूपांतरण है, इसलिए इसका ग्रहण व स्मृति केवल समसूत्री विभाजन कर रही भ्रूण/प्ररोह शीर्ष कोशिकाओं में ही होती है!

2. बसंतीकरण के दो शास्त्रीय सिद्धांत:
• (a) लाइसेंको का प्रावस्था विकास सिद्धांत (Phasic Development Theory — Lysenko, 1928): लाइसेंको के अनुसार पौधे के विकास में दो क्रमिक अवस्थाएँ आती हैं—प्रथम 'ताप प्रावस्था' (Thermophase / बसंतीकरण) और द्वितीय 'प्रकाश प्रावस्था' (Photophase / दीप्तिकालिता); जब तक प्रथम ताप प्रावस्था पूरी नहीं होगी तब तक प्रकाश प्रावस्था शुरू नहीं हो सकती।
• (b) मेल्चर्स का हार्मोनल 'वर्नैलिन' सिद्धांत (Hormonal Theory — Melchers, 1939): शीत उपचार से प्ररोह शीर्ष में 'Vernalin' बनता है जो लंबे दिन मिलने पर 'Florigen' बनाता है:
$Precursor→Chilling (0–5∘C)Vernalin→Long Days (LDP)Florigen (FT)⟶Flowering$

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): कर्टिस एवं चांग (Curtis & Chang, 1930) ने अजवाइन (Celery) के पौधों में केवल प्ररोह के शीर्ष (Shoot apex) पर ठंडे पानी की रबर नली लपेटकर सिद्ध किया कि जब केवल शीर्ष कलिका को ठंडा किया जाता है तभी फूल आते हैं, पत्तियों को ठंडा करने से नहीं!

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): अधिकांश बसंतीकरण-आवश्यक पौधे (जैसे शीतकालीन गेहूँ, राई, गाजर, चुकंदर, हेनबेन) शीत उपचार के बाद फूलने के लिए दीर्घ-दिवस (LDP) की माँग करते हैं; किंतु गुलदाउदी (Chrysanthemum) एक अपवाद है जिसे शीत उपचार के बाद लघु-दिवस (SDP) चाहिए!

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): जब बसंतीकृत प्ररोह शीर्ष की एक कोशिका विभाजित होती है, तो उसकी सभी पुत्री कोशिकाओं में बसंतीकरण की स्मृति बनी रहती है (Mitotically stable epigenetic memory), किंतु जब बीज बनते हैं (अर्धसूत्री विभाजन / Meiosis में), तो यह स्मृति मिट जाती है और अगली पीढ़ी के बीज को फिर से ठंड चाहिए होती है!
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Vernalization term = Lysenko (1928), Exact definition = Chouard (1960)
  • Optimum temp = 0°C to 5°C
  • Site of perception = Shoot Apical Meristem / Dividing Embryo (Curtis & Chang, 1930)
  • Dry seeds CANNOT be vernalized (water & O2 are mandatory!)
  • Vernalin proposed by Melchers (1939)
  • Gibberellin (GA3) replaces vernalization in biennials (Lang, 1957)
  • Epigenetic gene silenced by vernalization = FLC (Flowering Locus C)।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

बीजों का कृत्रिम बसंतीकरण करने के लिए उन्हें पानी में भिगोकर जैसे ही मूलांकुर (Radicle) थोड़ा सा फूटने लगे, उन्हें 0–4°C कोल्ड चैंबर में 30–40 दिन रखकर तुरंत खेत में बो दिया जाता है।

2. Devernalization & Agricultural Applications of Vernalization (अ-बसंतीकरण एवं कृषि में बसंतीकरण के अनुप्रयोग)

Cereals, Root Crops (Sugarbeet, Carrot, Radish, Onion) & Biennial Vegetables

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Cereals, Root Crops (Sugarbeet, Carrot, Radish, Onion) & Biennial Vegetables

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रमुख अनुप्रयोग: 1. Shortening crop duration, 2. Converting Winter varieties into Spring varieties, 3. Inducing Bolting for seed production vs Preventing Bolting for root yield।

🌱 कार्यिकीय महत्व: द्विवर्षीय जड़ व पत्ती वाली सब्जियों में जब हमें खाने के लिए जड़/कंद चाहिए तब हम बसंतीकरण (Bolting) को रोकते हैं, और जब हमें उनका 'बीज उत्पादन' करना होता है तब हम बसंतीकरण कराते हैं!

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. अ-बसंतीकरण (Devernalization) का व्यावसायिक उपयोग (प्याज एवं चुकंदर में बोल्टिंग रोकना!):
• यदि किसान को प्याज के छोटे कंदों ('Onion sets') या चुकंदर से बड़े कंद पैदा करने हैं और सर्दियों में वे ठंड पाकर बसंतीकृत हो गए, तो खेत में लगाते ही उनमें फूल का डंठल ('Bolting') निकल आएगा जिससे कंद छोटा व लकड़ी जैसा खराब हो जाएगा!
• इसे रोकने के लिए बुवाई से पहले उन प्याज के छोटे कंदों को 30∘C–35∘C गर्म कमरे में रखकर 'अ-बसंतीकृत' (Devernalize) कर दिया जाता है ताकि खेत में फूल न निकलें और बड़ा प्याज कंद बने!

2. कृषि एवं पादप प्रजनन में बसंतीकरण के 5 प्रमुख लाभ:
• (i) शीतकालीन किस्मों को बसंतकालीन बनाना: शीतकालीन गेहूँ व राई के भीगे बीजों को कोल्ड स्टोरेज में कृत्रिम बसंतीकरण देकर बसंत में बोया जा सकता है जिससे पाले व बर्फ से होने वाली 'Winter killing' से फसल बच जाती है।
• (ii) फसल अवधि को छोटा करना (Shortening Vegetative Phase): बसंतीकरण से पौधे के फूल आने का समय कम हो जाता है जिससे सूखा या बीमारी आने से पहले ही फसल पक जाती है ('Earliness')।
• (iii) द्विवर्षीय सब्जियों (पत्तागोभी, गाजर, चुकंदर, मूली) का 1 ही वर्ष में बीज उत्पादन: कृत्रिम शीत उपचार या GA3 छिड़काव से द्विवर्षीय फसलों में पहले ही साल बोल्टिंग व फूल लाकर प्रजनन चक्र को 2 साल से घटाकर 1 साल किया जाता है!
• (iv) भारत में समशीतोष्ण सब्जियों का बीज उत्पादन (Snowball Cauliflower, Cabbage & European Carrot/Beetroot in Himachal/Kashmir): पत्तागोभी और यूरोपीय गाजर/चुकंदर को फूल व बीज बनाने के लिए 4∘C–7∘C की 6–8 सप्ताह की बसंतीकरण ठंड चाहिए जो मैदानी भारत में नहीं मिलती—इसीलिए भारत में इनका व्यावसायिक बीज उत्पादन हिमाचल प्रदेश (कुल्लू/सोलन) और कश्मीर घाटी में ही होता है!
• (v) स्पीड ब्रीडिंग एवं शटल ब्रीडिंग में वर्ष में 3–4 पीढ़ियाँ लेने में।

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): गेहूँ में बसंतीकरण आवश्यकता को नियंत्रित करने वाले जीन 'VRN1, VRN2 एवं VRN3' हैं; भारतीय बसंतकालीन गेहूँ किस्मों में प्रभावी *Vrn-1* एलील होता है इसलिए उन्हें ठंड की आवश्यकता नहीं होती।

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): जिबरेलिन अवरोधक (जैसे CCC / Cycocel या Paclobutrazol) का छिड़काव करने से बसंतीकरण के बाद होने वाली बोल्टिंग (तना दीर्घन) रुक जाती है।

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): कुछ पौधों (जैसे मटर की देर से पकने वाली किस्में और चना) में भी हल्के शीत उपचार से पहली फली निचली गाँठ पर और जल्दी लगती है।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Devernalization = Reversal of vernalization by high temperature (30–35°C); used in Onion sets & Sugarbeet to prevent unwanted 'Bolting'
  • Temperate vegetable seed production (Cabbage, Beetroot, European Carrot) in India is restricted to HP (Kullu) & Kashmir due to mandatory vernalization requirement।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

मैदानी क्षेत्रों में यदि यूरोपीय गाजर या पत्तागोभी से प्रजनन हेतु बीज बनाना हो, तो शीर्ष पर 100–250 ppm GA3 का छिड़काव कर बोल्टिंग व पुष्पन प्रेरित किया जा सकता है।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 22.1: दीप्तिकालिता (Photoperiodism) बनाम बसंतीकरण (Vernalization) की मास्टर तुलना सारणी

तुलना का आधारदीप्तिकालिता (Photoperiodism)बसंतीकरण (Vernalization)
मुख्य पर्यावरणीय उद्दीपनदिन और रात की सापेक्ष लंबाई (Light & Dark duration)कम तापमान / शीत उपचार (0∘C से 5∘C)
खोजकर्ता वैज्ञानिकगार्नर एवं एलार्ड (1920)क्लिपार्ट (1857) एवं टी.डी. लाइसेंको (1928)
उद्दीपन ग्रहण का स्थल (Site of Perception)पूर्ण विकसित हरी पत्तियाँ (Mature Leaves — Knott 1934)प्ररोह शीर्षस्थ विभज्योतक / भ्रूण (Shoot Apex — Curtis & Chang 1930)
रासायनिक वर्णक / ग्राहीफाइटोक्रोम (Pr↔Pfr) एवं क्रिप्टोक्रोमविभाजित होती कोशिकाओं में एपिजेनेटिक हिस्टोन रूपांतरण (FLC दमन)
संबंधित हार्मोनल पदार्थफ्लोरिजन (Florigen / FT protein — Chailakhyan 1936)वर्नैलिन (Vernalin — Melchers 1939) एवं जिबरेलिन (GA3 — Lang 1957)
पुष्पन में भूमिकासीधे पुष्पन को प्रेरित (Induce) करता हैपौधे को केवल पुष्पन हेतु तैयार (Competent) करता है; बाद में दीप्तिकाल चाहिए
उत्क्रमणीयता (Reversal)रात्रि-विच्छेदन (लाल/सुदूर-लाल चमक) से उलटता हैउच्च तापमान (30∘C–35∘C) से उलटता है (Devernalization)

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. शीत इकाई / चिलिंग आवर्स (Chilling Hours — Weinberger, 1950) की गणना

Chilling Units / Hours = Total hours spent by imbibed seed/plant at 0°C to 7.2°C (45°F)

उदाहरण: यदि किसी शीतकालीन गेहूँ की किस्म को पूर्ण बसंतीकरण के लिए 2∘C पर 40 दिनों के शीत उपचार की आवश्यकता है, तो कुल चिलिंग घंटे:
• Chilling Hours=40 days×24 hours/day= 960 Chilling Hours।
• यदि इस दौरान तापमान 35∘C चला जाए तो संचित चिलिंग इकाइयाँ शून्य (Devernalized) हो जाती हैं!

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 22: बसंतीकरण (Vernalization) — परिभाषा, वर्गीकरण एवं महत्व]
├── 1. खोज एवं परिभाषा (Discovery & Definition)
│ ├── Klippart (1857) → Gassner (1918) → T.D. Lysenko (1928 — 'Jarovization/Vernalization') → P. Chouard (1960 — मानक परिभाषा)
│ ├── तापमान: 0°C से 5°C (अवधि: कुछ दिनों से 6–8 सप्ताह) | सूखे बीजों का बसंतीकरण संभव नहीं (जल व O2 अनिवार्य!)
│ └── ग्रहण का स्थल (Site of Perception) = प्ररोह शीर्षस्थ विभज्योतक / अंकुरित भ्रूण (Shoot Apical Meristem — Curtis & Chang, 1930)
├── 2. फसलों का वर्गीकरण (Classification of Plants)
│ ├── (i) शीतकालीन बनाम बसंतकालीन अनाज: Winter Wheat, Winter Barley, Petkus Rye (विकल्पी / Quantitative)
│ └── (ii) द्विवर्षीय फसलें (Biennials — अविकल्पी / Qualitative): गाजर, चुकंदर, पत्तागोभी, शलजम, प्याज एवं हेनबेन (*Hyoscyamus*)
├── 3. क्रियाविधि एवं हार्मोनल/आणविक आधार (Mechanism)
│ ├── शास्त्रीय सिद्धांत: Lysenko (Phasic development: Thermophase → Photophase) & Melchers (1939 — 'Vernalin' hormone)
│ ├── जिबरेलिन प्रतिस्थापन (Anton Lang, 1957): GA3 का छिड़काव द्विवर्षीय पौधों में ठंड (बसंतीकरण) की जगह ले लेता है (Bolting)!
│ └── आधुनिक एपिजेनेटिक तंत्र: ठंड से VIN3 / VRN1 सक्रिय होकर पुष्पन-रोधी 'FLC' (Flowering Locus C) जीन को साइलेंस कर देते हैं!
└── 4. अ-बसंतीकरण एवं कृषि महत्व (Devernalization & Importance)
├── Devernalization: 30–35°C उच्च ताप से प्रभाव समाप्त होना (प्याज व चुकंदर में अवांछित बोल्टिंग रोकने में उपयोगी!)
└── महत्व: वानस्पतिक अवधि घटाना, पाले से बचाव, पत्तागोभी/चुकंदर का हिमाचल व कश्मीर में बीज उत्पादन

प्रवाह चित्र · Flowchart

[द्विवर्षीय पादप (गाजर / पत्तागोभी / हेनबेन) एवं शीतकालीन गेहूँ में बसंतीकरण, FLC जीन दमन एवं पुष्पन का प्रवाह]
【अवस्था 1: बिना ठंड पाए (Unvernalized Plant — प्रथम वर्ष)】
प्ररोह शीर्ष में पुष्पन-दमनकारी 'FLC जीन' (Flowering Locus C) पूरी तरह सक्रिय रहता है
└──► यह *FT* (फ्लोरिजन) जीन को दबाकर रखता है ──► पौधा रोजेट (Rosette — बिना तने व बिना फूल के) बना रहता है!
│
▼ 【अवस्था 2: बसंतीकरण उपचार (Vernalization: 0°C – 5°C Chilling + H2O + O2) या बाह्य 'GA3' छिड़काव (Lang, 1957)】
│ (यहाँ यदि तुरंत 35°C ताप दे दें ──► Devernalization से वापस अवस्था 1 में लौट जाएगा!)
▼
प्ररोह शीर्षस्थ विभज्योतक में 'VIN3' एवं 'VRN1' प्रोटीन सक्रिय ──► हिस्टोन मिथाइलेशन द्वारा 'FLC जीन' स्थायी रूप से बंद (Silenced)!
│ (मेल्चर्स के अनुसार 'Vernalin' का निर्माण)
▼
【अवस्था 3: बसंत ऋतु में लंबे दिनों (Long-Day Photoperiod) का आगमन】
FLC का अवरोध हटने से पत्ती में फ्लोरिजन ('FT Protein') और तने में जिबरेलिन (GA) का निर्माण
↓
【पौधे में तना दीर्घन ('Bolting') एवं पुष्पन (Flowering & Seed Set) संपन्न!】

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • परीक्षा में सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले 5 प्रश्न:
    1. दीप्तिकालिता और बसंतीकरण के उद्दीपन ग्रहण करने वाले अंगों (Site of perception) में क्या अंतर है? उत्तर: दीप्तिकालिता को 'पत्तियाँ' (Leaves — Knott, 1934) ग्रहण करती हैं, जबकि बसंतीकरण (ठंड) को 'प्ररोह शीर्षस्थ विभज्योतक / भ्रूण' (Shoot Apical Meristem — Curtis & Chang, 1930) ग्रहण करता है!
    2. कौन सा पादप हार्मोन द्विवर्षीय पौधों में बसंतीकरण (शीत उपचार) का स्थान ले सकता है (Replace vernalization)? उत्तर: जिबरेलिन (GA3 — Anton Lang, 1957)!
    3. 'Vernalization' शब्द किसने दिया और 'Vernalin' शब्द किसने दिया? उत्तर: Vernalization = टी.डी. लाइसेंको (Lysenko, 1928); और Vernalin = जॉर्ज मेल्चर्स (Melchers, 1939)!
    4. क्या सूखे बीजों (Dry seeds) का बसंतीकरण किया जा सकता है? उत्तर: नहीं! बसंतीकरण के लिए बीज में नमी (30–40%) और ऑक्सीजन (वायवीय श्वसन) होना अनिवार्य है।
    5. बसंतीकरण के प्रभाव को किस तापमान द्वारा नष्ट (Devernalization) किया जा सकता है? उत्तर: 30∘C से 35∘C उच्च तापमान द्वारा!

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • चौआर्ड (P. Chouard, 1960): बसंतीकरण को 'शीत उपचार द्वारा पुष्पन की क्षमता का अर्जन या त्वरण' परिभाषित किया।
  • बसंतीकरण का इष्टतम तापमान 0∘C से 5∘C होता है।
  • गाजर, चुकंदर, पत्तागोभी, शलजम और द्विवर्षीय हेनबेन (*Hyoscyamus*) अविकल्पी बसंतीकरण आवश्यकता वाले द्विवर्षीय पौधे हैं।
  • आणविक स्तर पर बसंतीकरण हिस्टोन रूपांतरण द्वारा पुष्पन-दमनकारी 'FLC' (Flowering Locus C) जीन को बंद करता है।
  • प्याज और चुकंदर में खेत में अवांछित डंठल निकलने ('Bolting') को रोकने के लिए कंदों का उच्च ताप से अ-बसंतीकरण (Devernalization) किया जाता है।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. सन् 1928 में शीत उपचार द्वारा शीतकालीन अनाजों में जल्दी फूल लाने की प्रक्रिया के लिए 'बसंतीकरण' (Vernalization / Jarovization) शब्द किस वैज्ञानिक ने प्रतिपादित किया था?

  • (A) गार्नर एवं एलार्ड (1920)
  • (B) टी.डी. लाइसेंको (T.D. Lysenko, 1928)
  • (C) एफ.डब्ल्यू. वेंट (1928)
  • (D) जे.ई. नॉट (1934)
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — रूसी वैज्ञानिक टी.डी. लाइसेंको ने 1928 में 'Jarovization' शब्द दिया जिसका लैटिन अनुवाद 'Vernalization' (बसंतीकरण) है।

2. दीप्तिकालिता (जहाँ पत्ती उद्दीपन ग्रहण करती है) के विपरीत, पौधे में 'बसंतीकरण के शीत-उद्दीपन को ग्रहण करने का वास्तविक स्थल' (Site of perception of vernalization) कौन सा है?

  • (A) पुरानी परिपक्व पत्तियाँ
  • (B) सक्रिय रूप से विभाजित होता हुआ प्ररोह शीर्षस्थ विभज्योतक / भ्रूण का प्रांकुर (Shoot Apical Meristem / Embryo — Curtis & Chang, 1930)
  • (C) जड़ के मूलरोम
  • (D) फूल की पंखुड़ियाँ
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — कर्टिस एवं चांग (1930) ने अजवाइन (Celery) के पौधे पर सिद्ध किया कि ठंड को केवल प्ररोह की शीर्ष कलिका (विभज्योतक) ही ग्रहण करती है।

3. द्विवर्षीय पौधों (जैसे गाजर, पत्तागोभी व हेनबेन) में बिना शीत उपचार दिए ही किस पादप हार्मोन के छिड़काव से बसंतीकरण की आवश्यकता को प्रतिस्थापित (Replace) कर 'बोल्टिंग और पुष्पन' कराया जा सकता है?

  • (A) ऑक्सिन (IAA)
  • (B) जिबरेलिन (Gibberellic Acid – GA3 — Anton Lang, 1957)
  • (C) एब्सिसिक अम्ल (ABA)
  • (D) साइटोकाइनिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — एंटोन लैंग (1957) ने सिद्ध किया कि GA3 का छिड़काव रोजेट द्विवर्षीय पौधों में ठंड (बसंतीकरण) का स्थान लेकर तना दीर्घन (Bolting) व पुष्पन करा देता है।

4. सन् 1939 में द्विवर्षीय हेनबेन (Hyoscyamus niger) पर ग्राफ्टिंग प्रयोग करके बसंतीकरण के काल्पनिक हार्मोन 'वर्नैलिन' (Vernalin) की अवधारणा किसने दी थी?

  • (A) जॉर्ज मेल्चर्स (Georg Melchers, 1939)
  • (B) एम.के. चैलाख्यान (1936)
  • (C) पी. चौआर्ड (1960)
  • (D) जी. गैसनर (1918)
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — मेल्चर्स (1939) ने 'Vernalin' शब्द दिया, जबकि 'Florigen' शब्द चैलाख्यान (1936) ने दिया था।

5. बसंतीकृत बीजों या पौधों को तुरंत उच्च तापमान (30°C से 35°C) या अवायवीय वातावरण में रखने पर बसंतीकरण का प्रभाव समाप्त हो जाने की क्रिया क्या कहलाती है?

  • (A) पांडुरता
  • (B) अ-बसंतीकरण (Devernalization — Purvis & Gregory, 1952)
  • (C) सोलराइजेशन
  • (D) जीर्णता
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — उच्च तापमान (30–35°C) द्वारा शीत उपचार के प्रभाव को खत्म करने को 'Devernalization' कहते हैं।

6. निम्नलिखित में से किस अवस्था में गेहूँ या राई के बीजों का बसंतीकरण 'बिल्कुल नहीं' हो सकता?

  • (A) जब बीज 40% नमी युक्त और अंकुरित हो रहे हों
  • (B) जब बीज पूर्णतः सूखे हों (Completely dry seeds) या ऑक्सीजन अनुपस्थित हो (Anaerobic condition)
  • (C) जब तापमान 2°C हो
  • (D) जब भ्रूण जीवित हो
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — बसंतीकरण एक उपापचयी प्रक्रिया है जिसके लिए जल (नमी), ऑक्सीजन (वायवीय श्वसन) और कोशिका विभाजन अनिवार्य हैं; सूखे बीजों का बसंतीकरण नहीं होता।

7. आणविक एवं एपिजेनेटिक स्तर पर बसंतीकरण (शीत उपचार) पौधे के किस मुख्य 'पुष्पन-दमनकारी जीन' (Flowering Repressor Gene) को हिस्टोन मिथाइलेशन द्वारा स्थायी रूप से बंद (Silence) कर देता है?

  • (A) FLC जीन (Flowering Locus C — और अनाजों में VRN2)
  • (B) केवल RuBisCO जीन
  • (C) नाइट्रोजिनेज जीन
  • (D) फाइटोक्रोम जीन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — बसंतीकरण से पूर्व 'FLC' जीन फ्लोरिजन (FT) को रोककर रखता है; ठंड से VIN3 सक्रिय होकर FLC जीन को एपिजेनेटिक रूप से साइलेंस कर देता है।

8. भारत में पत्तागोभी (Cabbage), चुकंदर (Sugarbeet) और यूरोपीय गाजर का व्यावसायिक बीज उत्पादन मैदानी राज्यों में न होकर केवल हिमाचल प्रदेश और कश्मीर घाटी में ही क्यों होता है?

  • (A) क्योंकि मैदानों में मिट्टी नहीं है
  • (B) क्योंकि ये द्विवर्षीय फसलें हैं जिन्हें फूल और बीज डंठल (Bolting) निकालने के लिए सर्दियों में 4–7°C के अनिवार्य बसंतीकरण शीत उपचार की आवश्यकता होती है
  • (C) क्योंकि इन्हें छोटे दिन चाहिए
  • (D) क्योंकि मैदानों में बारिश नहीं होती
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — द्विवर्षीय समशीतोष्ण सब्जियों को बोल्टिंग व पुष्पन के लिए 6–8 सप्ताह की कड़ाके की ठंड (Vernalization) और उसके बाद लंबे दिन चाहिए जो हिमालय क्षेत्र में ही मिलते हैं।

9. सन् 1960 में बसंतीकरण को 'शीत उपचार द्वारा पुष्पन करने की क्षमता का अर्जन या त्वरण' के रूप में सबसे सटीक ढंग से किसने परिभाषित किया था?

  • (A) पी. चौआर्ड (P. Chouard, 1960)
  • (B) स्टीफन हेल्स
  • (C) डार्विन
  • (D) वॉन मोहल
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — फ्रांसीसी वैज्ञानिक चौआर्ड (1960) की परिभाषा विश्व भर में बसंतीकरण की सबसे प्रामाणिक परिभाषा मानी जाती है।

10. प्याज के छोटे कंदों (Onion sets) से जब किसान को बीज के बजाय बड़े प्याज कंद पैदा करने होते हैं, तो बुवाई से पहले उन्हें 30–35°C ताप देकर 'अ-बसंतीकृत' (Devernalize) क्यों किया जाता है?

  • (A) ताकि खेत में असमय फूल का डंठल ('Bolting') न निकले और सारा भोजन कंद का आकार बढ़ाने में लगे
  • (B) ताकि जल्दी फूल आ जाएँ
  • (C) ताकि पत्तियाँ सूख जाएँ
  • (D) ताकि प्याज मीठा हो जाए
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — यदि प्याज के कंद में फूल का डंठल (Bolting) निकल आए तो प्याज कंद खराब हो जाता है; अ-बसंतीकरण बोल्टिंग को रोक देता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. बसंतीकरण के लिए सर्वोत्तम तापमान परास कितना होता है?

0°C से 5°C (व्यापक परास: 0°C से 10°C)।

2. सन् 1857 में सबसे पहले अमेरिका में शीतकालीन गेहूँ और बसंतकालीन गेहूँ के अंतर को किसने पहचाना था?

जॉन एच. क्लिपार्ट (J.H. Klippart, 1857) ने।

3. बसंतीकरण अनुसंधान में सर्वाधिक प्रयुक्त राई (Secale cereale) की प्रसिद्ध किस्म का नाम क्या है?

पेटकस राई (Petkus Rye — जिस पर ग्रेगरी एवं पर्विस ने कार्य किया)।

4. भारत के मैदानी भागों में उगाई जाने वाली गेहूँ की किस्में (जैसे HD 2967, DBW 187) किस वर्ग की हैं?

बसंतकालीन गेहूँ (Spring wheat — जिन्हें बसंतीकरण की आवश्यकता नहीं होती)।

5. द्विवर्षीय पौधों में पुष्पन से ठीक पहले तने के अचानक तेजी से लंबा बढ़ने की क्रिया को क्या कहते हैं?

बोल्टिंग (Bolting — जो जिबरेलिन हार्मोन द्वारा प्रेरित होती है)।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. बसंतीकरण (Vernalization) की परिभाषा दीजिए और इसके लिए आवश्यक चार मुख्य शर्तें लिखिए।

चौआर्ड (1960) के अनुसार शीत उपचार (0–5°C) द्वारा पौधों में पुष्पन की क्षमता का अर्जन या त्वरण बसंतीकरण कहलाता है। चार अनिवार्य शर्तें: 1. कम तापमान (0°C से 5°C, कुछ दिनों से 6 सप्ताह तक), 2. बीजों में पर्याप्त नमी (30–40% जल — सूखे बीजों का बसंतीकरण नहीं होता), 3. वायवीय श्वसन के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन (O2) व कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा, और 4. प्ररोह शीर्ष में सक्रिय रूप से विभाजित होती विभज्योतक कोशिकाएँ।

2. बसंतीकरण की क्रियाविधि के 'वर्नैलिन सिद्धांत' (Melchers, 1939) और 'आधुनिक एपिजेनेटिक FLC जीन सिद्धांत' को समझाइए।

1. मेल्चर्स (1939) के अनुसार शीत उपचार पाकर प्ररोह शीर्ष की कोशिकाओं में 'वर्नैलिन' (Vernalin) नामक एक हार्मोनल अग्रदूत बनता है जो बाद में अनुकूल लंबे दिन मिलने पर फ्लोरिजन में बदलकर फूल खिलाता है। 2. आधुनिक एपिजेनेटिक सिद्धांत के अनुसार शीत उपचार से पूर्व पौधे में 'FLC (Flowering Locus C)' नामक दमनकारी जीन फ्लोरिजन (FT) को रोककर रखता है; ठंड मिलने पर VIN3 सक्रिय होकर हिस्टोन मिथाइलेशन द्वारा FLC जीन को स्थायी रूप से बंद कर देता है जिससे बसंत में फूल खिल जाते हैं।

3. अ-बसंतीकरण (Devernalization) क्या है और प्याज व चुकंदर की खेती में इसका क्या व्यावहारिक उपयोग है?

बसंतीकृत बीजों या कंदों को शीत उपचार के तुरंत बाद 30°C से 35°C उच्च तापमान में रखने पर बसंतीकरण का प्रभाव समाप्त हो जाता है और पौधा पुनः वानस्पतिक अवस्था में लौट जाता है, इसे 'अ-बसंतीकरण' कहते हैं। उपयोग: प्याज के छोटे कंदों (Onion sets) और चुकंदर में यदि शीत भंडारण के कारण खेत में फूल का डंठल (Bolting) निकल आए तो कंद की उपज नष्ट हो जाती है; अतः बोने से पहले उन्हें गर्म हवा देकर अ-बसंतीकृत कर दिया जाता है।

4. दीप्तिकालिता (Photoperiodism) और बसंतीकरण (Vernalization) में पाँच प्रमुख अंतर लिखिए।

1. दीप्तिकालिता दिन और रात की लंबाई की प्रतिक्रिया है, जबकि बसंतीकरण कम तापमान (0–5°C) की प्रतिक्रिया है। 2. दीप्तिकालिता को परिपक्व पत्तियाँ ग्रहण करती हैं, जबकि बसंतीकरण को प्ररोह शीर्ष विभज्योतक या भ्रूण ग्रहण करता है। 3. दीप्तिकालिता का ग्राही फाइटोक्रोम है, जबकि बसंतीकरण एपिजेनेटिक FLC दमन से होता है। 4. दीप्तिकालिता का हार्मोन फ्लोरिजन (FT प्रोटीन) है, जबकि बसंतीकरण में वर्नैलिन व जिबरेलिन शामिल हैं। 5. दीप्तिकालिता सीधे पुष्पन कराती है जबकि बसंतीकरण केवल पुष्पन की योग्यता देता है।

5. कृषि और पादप प्रजनन में बसंतीकरण के चार प्रमुख महत्व लिखिए।

1. शीतकालीन अनाज किस्मों (Winter wheat/rye) को कृत्रिम शीत उपचार देकर बसंत ऋतु में बोया जा सकता है जिससे फसल पाले से बच जाती है। 2. यह फसल की वानस्पतिक अवधि को छोटा कर अगेती परिपक्वता लाता है। 3. द्विवर्षीय सब्जियों (गाजर, चुकंदर, पत्तागोभी) में ठंड या GA3 देकर 2 वर्ष के बजाय 1 ही वर्ष में बीज बनाया जा सकता है। 4. यह कवक रोगों व सूखे से फसल को बचाने में मदद करता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. बसंतीकरण (Vernalization) की परिभाषा, खोज इतिहास, उद्दीपन ग्रहण के स्थल, आवश्यक कार्यिकीय शर्तों तथा एकवर्षीय और द्विवर्षीय पौधों में इसके वर्गीकरण का सविस्तर वर्णन कीजिए।

क्लिपार्ट (1857), लाइसेंको (1928) व चौआर्ड (1960) का योगदान, कर्टिस व चांग का प्ररोह शीर्ष प्रयोग, पाँचों अनिवार्य शर्तें (तापमान, जल, O2, भोजन, विभाजित होती कोशिकाएँ) तथा शीतकालीन बनाम बसंतकालीन अनाज (पेटकस राई) और द्विवर्षीय फसलों (गाजर, चुकंदर, पत्तागोभी, हेनबेन) का विस्तृत वर्णन करें।

2. बसंतीकरण की कार्यिकीय एवं आणविक क्रियाविधि (लाइसेंको का प्रावस्था सिद्धांत, मेल्चर्स का वर्नैलिन सिद्धांत, लैंग का जिबरेलिन प्रतिस्थापन एवं एपिजेनेटिक FLC जीन साइलेंसिंग) का आरेख सहित वर्णन कीजिए।

लाइसेंको की थर्मोफेज व फोटोफेज, मेल्चर्स (1939) के हेनबेन ग्राफ्टिंग प्रयोग व वर्नैलिन, लैंग (1957) द्वारा GA3 से बसंतीकरण का प्रतिस्थापन और आधुनिक एपिजेनेटिक प्रवाह चार्ट (VIN3/VRN1 द्वारा हिस्टोन रूपांतरण से FLC दमन व FT सक्रियण) का सविस्तर विवरण दें।

3. अ-बसंतीकरण (Devernalization) से आप क्या समझते हैं? दीप्तिकालिता और बसंतीकरण की तुलना (तालिका 22.1) करते हुए कृषि एवं उद्यानिकी में बसंतीकरण के व्यावहारिक अनुप्रयोगों की विवेचना कीजिए।

पर्विस एवं ग्रेगरी के अ-बसंतीकरण व पुनर्बसंतीकरण प्रयोग, तालिका 22.1 के सभी 7 बिंदुओं पर दीप्तिकालिता से तुलना और कृषि व सब्जी बीज उत्पादन (हिमाचल/कश्मीर में समशीतोष्ण सब्जी बीज उत्पादन व प्याज में बोल्टिंग रोकथाम) में इसके उपयोग का वर्णन करें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • अधिकांश द्विवर्षीय पौधे बसंतीकरण (शीत उपचार) के बाद फूलने के लिए 'दीर्घ-दिवस' (Long-day photoperiod) की आवश्यकता रखते हैं।
  • गुलदाउदी (Chrysanthemum) एक ऐसा बहुवर्षीय पौधा है जिसे बसंतीकरण के बाद फूलने के लिए 'लघु-दिवस' (Short-day) चाहिए।
  • बसंतीकरण की एपिजेनेटिक स्मृति समसूत्री विभाजन (Mitosis) में बनी रहती है, किंतु अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis / बीज बनने) पर मिट जाती है!
  • अराबिडोप्सिस में 'FRIGIDA (FRI)' जीन पुष्पन-दमनकारी 'FLC' जीन को सक्रिय करके पौधे को बसंतीकरण-आश्रित (Winter annual) बनाता है।
  • कुछ प्रजातियों (जैसे अराबिडोप्सिस और मटर) में बसंतीकृत पौधे से निकाले गए प्ररोह शीर्ष से ऊतक संवर्धन द्वारा बने पूरे पौधे बसंतीकृत रहते हैं।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।

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