PPHYS 311 Lecture 01: पादप एवं फसल कार्यिकी का परिचय: परिभाषा, महत्व एवं कार्यक्षेत्र

PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
पादप एवं फसल कार्यिकी का परिचय: परिभाषा, महत्व एवं कार्यक्षेत्र
Introduction to Plant and Crop Physiology: Definition, Importance and Scope
Foundations of Plant & Crop Physiology, Historical Milestones (Hales, Sachs, Bose)
विषय सूची · Quick Navigation
अधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्सअधिगम उद्देश्य · Learning Objectives
- पादप कार्यिकी (Plant Physiology) और फसल कार्यिकी (Crop Physiology) की सटीक वैज्ञानिक परिभाषा और दोनों के बीच मूलभूत अंतर को समझना।
- विश्व एवं भारत में पादप कार्यिकी के जनकों—स्टीफन हेल्स (Stephen Hales), जूलियस वॉन सैक्स (Julius von Sachs), सर जगदीश चंद्र बोस (J.C. Bose) और प्रो. आर.डी. आसाना—के ऐतिहासिक योगदान को जानना।
- आधुनिक कृषि, हरित क्रांति, स्रोत-सिंक संबंध और जलवायु-सहिष्णु फसल उत्पादन में फसल कार्यिकी के महत्व एवं कार्यक्षेत्र का विश्लेषण करना।
प्रस्तावना · Introduction
पादप कार्यिकी (Plant Physiology; ग्रीक शब्द 'Physis' = प्रकृति/कार्य एवं 'Logos' = विज्ञान) वनस्पति विज्ञान की वह मूलभूत शाखा है जो जीवित पौधों के अंदर होने वाली समस्त भौतिक, रासायनिक एवं जैविक जीवन प्रक्रियाओं (जैसे जल अवशोषण, वाष्पोत्सर्जन, खनिज पोषण, प्रकाश-संश्लेषण, श्वसन, हार्मोन नियमन एवं वृद्धि) का अध्ययन करती है। जब इन्हीं कार्यिकीय सिद्धांतों का अध्ययन एकल पौधे के बजाय खेत में उगाई जा रही 'संपूर्ण फसल समुदाय' (Crop Canopy / Community) की आर्थिक उपज (Economic Yield) बढ़ाने के लिए किया जाता है, तो उसे 'फसल कार्यिकी' (Crop Physiology) कहते हैं।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions
पादप कार्यिकी (Plant Physiology – Salisbury & Ross)
यह विज्ञान है कि पौधे कैसे कार्य करते हैं—अर्थात् पौधों में होने वाली उपापचयी (Metabolic), जैव-भौतिक (Biophysical) एवं विकासात्मक (Developmental) प्रक्रियाओं और उन पर पर्यावरण के प्रभाव का अध्ययन।
फसल कार्यिकी (Crop Physiology – L.T. Evans)
कृषि खेत की परिस्थितियों में फसल समुदाय (Crop stand) द्वारा सौर विकिरण के ग्रहण, शुष्क पदार्थ उत्पादन (Biomass accumulation) और उसके आर्थिक भागों (दाने/फल) में विभाजन (Partitioning) का विज्ञान।
क्रेस्कोग्राफ (Crescograph – Sir J.C. Bose)
भारतीय वैज्ञानिक सर जगदीश चंद्र बोस द्वारा आविष्कृत अत्यंत संवेदनशील यंत्र जो पौधे की सूक्ष्म वृद्धि को 10,000 से 1,00,000 गुना तक आवर्धित करके मापता है।
स्रोत और सिंक (Source and Sink)
पौधे के वे हरे अंग जो प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं (जैसे परिपक्व पत्तियाँ) 'स्रोत' (Source) कहलाते हैं, और वे अंग जहाँ यह भोजन उपयोग या संचित होता है (जैसे विकासशील दाने, फल, कंद व जड़ें) 'सिंक' (Sink) कहलाते हैं।
वर्गीकरण · Classification
पादप कार्यिकी के ऐतिहासिक मील के पत्थर (Founders & Pioneers)
1. स्टीफन हेल्स (Stephen Hales, 1677–1761): 'पादप कार्यिकी के जनक' (Father of Plant Physiology); इन्होंने 1727 में प्रसिद्ध पुस्तक 'Vegetable Staticks' लिखी और वाष्पोत्सर्जन व मूल दाब पर प्रथम मात्रात्मक प्रयोग किए।
2. जूलियस वॉन सैक्स (Julius von Sachs, 1832–1897): 'प्रायोगिक पादप कार्यिकी के जनक' (Father of Experimental Plant Physiology); इन्होंने जल संवर्धन (Hydroponics, 1860) और हरितलवक में स्टार्च निर्माण की खोज की।
3. सर जगदीश चंद्र बोस (Sir J.C. Bose, 1858–1937): 'भारतीय पादप कार्यिकी के जनक' (Father of Indian Plant Physiology); इन्होंने रसारोहण का 'स्पंदन सिद्धांत' (Pulsation Theory, 1923) और क्रेस्कोग्राफ दिया।
4. प्रो. जे.जे. चिनॉय एवं डॉ. आर.डी. आसाना (Dr. R.D. Asana): भारत में आधुनिक फसल कार्यिकी (Crop Physiology & Drought resistance in wheat) के अग्रदूत।
महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles
- पादप कार्यिकी बनाम फसल कार्यिकी का मूलभूत सिद्धांत: पादप कार्यिकी प्रयोगशाला या गमले में उगे 'एकल पौधे/कोशिका' की प्रक्रियाओं (जैसे एक पत्ती का प्रकाश-संश्लेषण) पर केंद्रित होती है; किंतु खेत में जब प्रति हेक्टेयर लाखों पौधे पास-पास उगते हैं, तो 'आपसी छाया' (Mutual shading) और जड़ प्रतिस्पर्धा के कारण संपूर्ण कैनोपी का व्यवहार बदल जाता है। फसल कार्यिकी इसी 'कैनोपी स्तर' (Canopy level LAI, Light interception & Harvest Index) पर कार्य करती है।
- आर्थिक उपज का कार्यिकीय समीकरण (Physiological Basis of Crop Yield — Monteith, 1977): किसी भी फसल की दाना उपज तीन मुख्य कार्यिकीय स्तंभों का गुणनफल होती है: Economic Yield = (Total Intercepted Solar Radiation 'PAR') × (Radiation Use Efficiency 'RUE') × (Harvest Index 'HI')।
कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics
1. Definition & Evolution of Plant and Crop Physiology (पादप एवं फसल कार्यिकी की परिभाषा एवं ऐतिहासिक विकास)
All Agricultural Crops (समस्त कृषि फसलें)
🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: जनक: स्टीफन हेल्स (विश्व जनक – पुस्तक: Vegetable Staticks, 1727) | सर जे.सी. बोस (भारतीय जनक) | डॉ. आर.डी. आसाना (भारतीय फसल कार्यिकी जनक)।
🌱 कार्यिकीय महत्व: बिना पौधे की आंतरिक कार्यप्रणाली को समझे न तो उर्वरक व सिंचाई प्रबंधन संभव है और न ही उच्च उपज वाली किस्मों का विकास।
📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
वैन हेलमोंट (J.B. van Helmont, 1648) का ऐतिहासिक विलो वृक्ष प्रयोग: इन्होंने 5 वर्ष तक 200 पाउंड मिट्टी में विलो (Willow) की टहनी उगाकर दिखाया कि पौधे का भार मिट्टी खाने से नहीं बल्कि जल से बढ़ता है—यह पादप कार्यिकी का पहला वैज्ञानिक प्रयोग माना जाता है।
जोसेफ प्रीस्टले (1771) व जान इंगेनहाउज़ (1779) ने पौधों द्वारा प्रकाश की उपस्थिति में हवा को शुद्ध करने (ऑक्सीजन उत्सर्जन) की खोज की और डी सौसुरे (De Saussure, 1804) ने सिद्ध किया कि प्रकाश-संश्लेषण में जल और CO2 दोनों समान रूप से भाग लेते हैं।
20वीं सदी में गार्नर व एलार्ड (1920 – दीप्तिकालिता), वेंट (1928 – ऑक्सिन), इमर्सन (1957 – दो प्रकाश तंत्र), केल्विन (1954 – C3 चक्र) और हैच व स्लैक (1966 – C4 चक्र) ने फसल कार्यिकी को आधुनिक स्वरूप दिया।
⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): प्रमुख शाखाएँ: जल संबंध (Water relations), खनिज पोषण (Mineral nutrition), उपापचय एवं जैव-ऊर्जाकी (Photosynthesis & Respiration), वृद्धि एवं विकास (Growth & PGRs) तथा तनाव कार्यिकी (Stress physiology)।
🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): बीज अंकुरण से लेकर वानस्पतिक वृद्धि, पुष्पन, दाना भराव और जीर्णता (Senescence) तक का संपूर्ण जीवन चक्र कार्यिकीय नियंत्रण में चलता है।
🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): सूर्य का प्रकाश (PAR: 400–700 nm), तापमान, CO2 सांद्रता (~420 ppm), मृदा नमी और पोषक तत्व फसल की कार्यिकीय दक्षता निर्धारित करते हैं।
मुख्य बिंदु · Key Points
- Father of Plant Physiology: Stephen Hales (Book: Vegetable Staticks, 1727) + Father of Indian Plant Physiology: Sir J.C. Bose (Crescograph & Pulsation theory) + First Quantitative Experiment: Van Helmont (1648 Willow tree)।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance
खेत में अधिकतम सौर विकिरण ग्रहण करने के लिए इष्टतम पर्ण क्षेत्रफल सूचकांक (Optimum LAI: 4 से 6) और सीधा पर्ण कोण बनाए रखना आवश्यक है।
2. Importance and Scope of Crop Physiology in Agriculture (कृषि में फसल कार्यिकी का महत्व एवं कार्यक्षेत्र)
Cereals, Pulses, Oilseeds, Commercial & Horticultural Crops
🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रमुख अनुप्रयोग क्षेत्र: 1. Ideotype Breeding, 2. Source-Sink Manipulation, 3. PGR Application, 4. Nutri-physiology, 5. Abiotic Stress Tolerance।
🌱 कार्यिकीय महत्व: हरित क्रांति में गेहूँ और धान की उपज दोगुनी से तिगुनी होने का मुख्य कारण दाने का प्रकाश-संश्लेषण बढ़ना नहीं था, बल्कि कार्यिकीय रूप से बौने तने द्वारा 'कटाई सूचकांक' (Harvest Index) का 30% से बढ़कर 50% होना था!
📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. फसल आइडियोटाइप एवं हार्वेस्ट इंडेक्स सुधार: सीधी खड़ी पत्तियाँ (Erect leaves), छोटा मजबूत तना, देर तक हरी रहने वाली ध्वज पत्ती (Stay-green trait) और उच्च सिंक क्षमता के चयन द्वारा उपज पठार को तोड़ना।
2. बीज कार्यिकी एवं प्रसुप्ति नियंत्रण (Seed Physiology): बीज सुषुप्तावस्था (Dormancy) को GA3, KNO3 या खुरचने (Scarification) से तोड़ना और बीज ओज (Seed vigour) का परीक्षण।
3. सिंचाई एवं जल उपयोग दक्षता (WUE): क्रांतिक वृद्धि अवस्थाओं (जैसे गेहूँ में CRI अवस्था – बुवाई के 21 दिन बाद; मक्का में Tasseling व Silking) की पहचान कर कम पानी में अधिकतम उपज लेना।
4. पादप वृद्धि नियंत्रकों (PGRs) का व्यावसायिक उपयोग: कलमों में जड़ निकालने (IBA), बिना परागण फल बनाने (Parthenocarpy – Auxin/GA), फूल व फल झड़ने से रोकने (NAA @ 10–20 ppm), अंगूर के दाने बड़े करने (GA3) और कद्दू कुल में मादा फूल बढ़ाने (Ethrel) में।
5. अजैविक तनाव सहिष्णुता (Abiotic Stress Physiology): सूखा, उच्च ताप, पाला, जलभराव और लवणता के विरुद्ध फसल की सहनशीलता (Proline, ABA, Osmotic adjustment) का विकास।
⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): पोषक तत्वों के कार्यिकीय कार्य और कमी के लक्षणों (Visual diagnosis of nutrient deficiencies) की पहचान से सटीक उर्वरक प्रबंधन (Foliar feeding) संभव होता है।
🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): कटाई के बाद फलों को पकाने (Ethylene) और प्याज/आलू को भंडारण में अंकुरण से रोकने (Maleic Hydrazide – MH) में कटाई-उपरांत कार्यिकी (Post-harvest physiology) की मुख्य भूमिका है।
🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): वातावरणीय CO2 बढ़ने और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव का अध्ययन करने हेतु 'FACE' (Free-Air CO2 Enrichment) और 'OTCs' (Open Top Chambers) का उपयोग किया जाता है।
मुख्य बिंदु · Key Points
- आर्थिक उपज = जैविक उपज × Harvest Index + हरित क्रांति का मुख्य कार्यिकीय आधार: उच्च Harvest Index (50%) व Lodging प्रतिरोध + जलवायु अध्ययन तकनीक: FACE (Free-Air CO2 Enrichment)।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance
फसल कार्यिकी वैज्ञानिक को यह बताती है कि किसी फसल की उपज 'Source-limited' (पत्ती का भोजन कम पड़ रहा है—जैसे दलहनों में निचली पत्तियाँ झड़ना) है या 'Sink-limited' (दानों की संख्या कम है)।
तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables
तालिका 1.1: पादप कार्यिकी (Plant Physiology) बनाम फसल कार्यिकी (Crop Physiology) की तुलना
| तुलना का आधार | पादप कार्यिकी (Plant Physiology) | फसल कार्यिकी (Crop Physiology) |
|---|---|---|
| अध्ययन की इकाई (Unit of Study) | एकल पौधा, अंग, ऊतक या कोशिका (Single plant/organ/cell) | खेत में उगा संपूर्ण फसल समुदाय / कैनोपी (Whole crop community / Stand) |
| मुख्य उद्देश्य | मौलिक जीवन प्रक्रियाओं व उनके तंत्र को समझना | प्रति हेक्टेयर आर्थिक उपज (Economic yield) और गुणवत्ता को अधिकतम करना |
| वातावरण (Environment) | प्रायः नियंत्रित प्रयोगशाला या ग्लासहाउस वातावरण | प्राकृतिक परिवर्तनशील खेत वातावरण व सस्य प्रतिस्पर्धा |
| मुख्य मापन प्राचल | प्रति पत्ती प्रकाश-संश्लेषण दर, एंजाइम गतिविधि, झिल्ली विभव | LAI, CGR, RGR, NAR, Radiation Use Efficiency (RUE) एवं Harvest Index |
सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations
1. मॉन्टीथ का फसल उपज समीकरण (Monteith's Yield Equation) एवं हार्वेस्ट इंडेक्स (HI) गणना
उदाहरण: यदि किसी फसल की कुल शुष्क जैविक उपज (दाना + भूसा) 12,000 kg/ha है और उसका कटाई सूचकांक (HI) 0.45 (अर्थात् 45%) है, तो:
• आर्थिक दाना उपज (Economic Grain Yield) = 12,000 × 0.45 = 5,400 kg/ha (54 क्विंटल/हेक्टेयर)।
• भूसे/पुआल की उपज (Straw Yield) = 12,000 − 5,400 = 6,600 kg/ha।
माइंड मैप · Mind Map
[Lecture 01: पादप एवं फसल कार्यिकी का परिचय (Introduction to Plant & Crop Physiology)]
├── 1. ऐतिहासिक जनक (Founders & Pioneers)
│ ├── स्टीफन हेल्स (Stephen Hales, 1727): विश्व में पादप कार्यिकी के जनक (Book: Vegetable Staticks)
│ ├── जूलियस वॉन सैक्स (Julius von Sachs, 1860): प्रायोगिक पादप कार्यिकी एवं Hydroponics के जनक
│ ├── सर जे.सी. बोस (Sir J.C. Bose): भारतीय पादप कार्यिकी के जनक (Crescograph एवं Pulsation theory)
│ └── डॉ. आर.डी. आसाना एवं प्रो. जे.जे. चिनॉय: भारत में फसल एवं तनाव कार्यिकी के अग्रदूत
├── 2. मुख्य कार्यिकीय स्तंभ (Core Physiological Pillars)
│ ├── पादप-जल संबंध (Diffusion, Osmosis, Water Potential, Transpiration, WUE)
│ ├── खनिज पोषण (Essential elements, Ion pumps/channels, Deficiency symptoms)
│ ├── कार्बन उपापचय (Photosynthesis: C3, C4, CAM, Photorespiration & Respiration)
│ └── वृद्धि एवं विकास (Growth analysis: CGR, RGR, NAR, Photoperiodism, Vernalization, PGRs)
└── 3. कृषि में महत्व एवं कार्यक्षेत्र (Scope in Modern Agriculture)
├── Ideotype Breeding (उच्च Harvest Index व सीधा पर्ण कोण) एवं Source-Sink सुधार
├── क्रांतिक सिंचाई अवस्था निर्धारण, PGR अनुप्रयोग (IBA, NAA, 2,4-D, GA3, Ethrel)
└── अजैविक तनाव सहिष्णुता (सूखा, ताप, लवणता) एवं कटाई-उपरांत प्रबंधन
प्रवाह चित्र · Flowchart
[सौर विकिरण से आर्थिक फसल उपज निर्माण का कार्यिकीय प्रवाह (Physiological Pathway of Crop Yield)]
सूर्य का प्रकाश (PAR: 400–700 nm) + वायुमंडलीय CO2 + मृदा से जल एवं खनिज अवशोषण
↓ (फसल कैनोपी द्वारा प्रकाश अंतर्ग्रहण — Leaf Area Index 'LAI' एवं सीधा पर्ण कोण)
【1. स्रोत गतिविधि (Source Activity — प्रकाश-संश्लेषण माइनस श्वसन = Net Assimilation)】
↓ (कुल शुष्क जैविक पदार्थ का निर्माण — Biological Yield)
【2. फ्लोएम स्थानांतरण एवं विभाजन (Phloem Translocation & Partitioning to Sink — Harvest Index 'HI')】
↓
【3. अंतिम आर्थिक उपज (Economic Grain / Fruit / Tuber Yield per Hectare)】
परीक्षा टिप्स · Exam Tips
- परीक्षा में तीन 'जनक' (Fathers) कभी न भूलें: 1. Father of Plant Physiology = Stephen Hales (पुस्तक: Vegetable Staticks, 1727); 2. Father of Indian Plant Physiology = Sir J.C. Bose; 3. Father of Experimental Plant Physiology = Julius von Sachs।
- सर जे.सी. बोस ने कोलकाता में 'बोस इंस्टीट्यूट' (1917) की स्थापना की और पौधे की वृद्धि मापने के लिए 'Crescograph' बनाया।
- आर्थिक उपज (Economic Yield) = कुल जैविक उपज (Biological Yield) × कटाई सूचकांक (Harvest Index)।
त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision
- Stephen Hales (1727): पादप कार्यिकी के जनक; पुस्तक—'Vegetable Staticks'।
- J.B. van Helmont (1648): विलो वृक्ष (Willow tree) पर 5-वर्षीय प्रथम मात्रात्मक पादप प्रयोग किया।
- Sir J.C. Bose: भारतीय पादप कार्यिकी के जनक; रसारोहण का 'स्पंदन सिद्धांत' (Pulsation theory) और 'क्रेस्कोग्राफ' दिया।
- Source = भोजन बनाने वाला अंग (पत्ती); Sink = भोजन संचित करने वाला अंग (दाना/फल/कंद)।
- FACE का पूरा नाम: Free-Air CO2 Enrichment (खेत में बढ़ी हुई CO2 के प्रभाव के अध्ययन की आधुनिक तकनीक)।
MCQs — उत्तर एवं व्याख्या
1. विश्व में 'पादप कार्यिकी के जनक' (Father of Plant Physiology) किसे कहा जाता है और उनकी प्रसिद्ध पुस्तक (1727) का नाम क्या है?
- (A) जूलियस वॉन सैक्स — Lectures on Plant Physiology
- (B) स्टीफन हेल्स (Stephen Hales) — Vegetable Staticks (1727)
- (C) जे.बी. वैन हेलमोंट — Ortus Medicinae
- (D) चार्ल्स डार्विन — Power of Movement in Plants
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — अंग्रेज पादप वैज्ञानिक स्टीफन हेल्स को पादप कार्यिकी का जनक कहा जाता है; उन्होंने 1727 में 'Vegetable Staticks' प्रकाशित की।
2. 'भारतीय पादप कार्यिकी के जनक' (Father of Indian Plant Physiology) कौन हैं जिन्होंने पौधे की सूक्ष्म वृद्धि मापने के लिए 'क्रेस्कोग्राफ' (Crescograph) का आविष्कार किया?
- (A) प्रो. बीरबल साहनी
- (B) सर जगदीश चंद्र बोस (Sir J.C. Bose)
- (C) प्रो. पी. माहेश्वरी
- (D) डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — सर जे.सी. बोस ने क्रेस्कोग्राफ यंत्र बनाया जो पादप वृद्धि को 10,000 गुना से अधिक आवर्धित कर सकता है।
3. सन् 1648 में गमले की 200 पाउंड मिट्टी में 5 वर्ष तक विलो (Willow) का पौधा उगाकर पादप कार्यिकी का प्रथम मात्रात्मक प्रयोग किसने किया था?
- (A) जोसेफ प्रीस्टले
- (B) जे.बी. वैन हेलमोंट (J.B. van Helmont)
- (C) स्टीफन हेल्स
- (D) थिओडोर डी सौसुरे
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — बेल्जियम के वैज्ञानिक वैन हेलमोंट (1648) ने सिद्ध किया कि पौधे का वजन मिट्टी घटने से नहीं बल्कि पानी से बढ़ता है।
4. पौधे के उन अंगों को क्या कहा जाता है जहाँ प्रकाश-संश्लेषण द्वारा निर्मित कार्बोहाइड्रेट भोजन अंतिम रूप से संचित या उपयोग होता है (जैसे विकासशील दाने व फल)?
- (A) स्रोत (Source)
- (B) सिंक (Sink)
- (C) पथ (Path)
- (D) रंध्र (Stomata)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — परिपक्व हरी पत्तियाँ 'Source' (स्रोत) हैं, जबकि विकासशील दाने, फल, कंद और जड़ें 'Sink' (सिंक) कहलाती हैं।
5. सन् 1860 में सर्वप्रथम बिना मिट्टी के पोषक घोल में पौधे उगाने (Hydroponics / Solution culture) की वैज्ञानिक विधि किसने प्रदर्शित की थी?
- (A) जूलियस वॉन सैक्स (Julius von Sachs, 1860) एवं डब्ल्यू. नॉप
- (B) आर्नन एवं स्टाउट
- (C) स्टीफन हेल्स
- (D) एफ.डब्ल्यू. वेंट
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — जर्मन पादप कार्यिकीविद् जूलियस वॉन सैक्स ने 1860 में सर्वप्रथम जलीय संवर्धन (Solution culture) तकनीक विकसित की।
6. भारत में गेहूँ की सूखा सहिष्णुता और दाना भराव कार्यिकी पर मौलिक शोध करने वाले 'भारतीय फसल कार्यिकी के अग्रदूत' कौन माने जाते हैं?
- (A) डॉ. आर.डी. आसाना (Dr. R.D. Asana) एवं प्रो. जे.जे. चिनॉय
- (B) डॉ. के.सी. मेहता
- (C) डॉ. बी.पी. पाल
- (D) डॉ. ई.जे. बटलर
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — IARI में डॉ. आर.डी. आसाना ने बारानी गेहूँ की आदर्श कार्यिकी और बाली व ध्वज पत्ती के योगदान पर ऐतिहासिक कार्य किया।
7. खेत की खुली परिस्थितियों में बढ़ी हुई वायुमंडलीय CO2 सांद्रता का फसलों की कार्यिकी पर प्रभाव जानने के लिए किस आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाता है?
- (A) एलिसा (ELISA)
- (B) फेस तकनीक (FACE — Free-Air CO2 Enrichment)
- (C) पीसीआर (PCR)
- (D) क्रोमैटोग्राफी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — FACE (Free-Air CO2 Enrichment) रिंग्स द्वारा खुले खेत में बिना किसी बंद कक्ष के CO2 स्तर बढ़ाकर फसल प्रतिक्रिया मापी जाती है।
8. हरित क्रांति के दौरान अर्ध-बौने गेहूँ और धान की किस्मों में दाने की उपज में भारी वृद्धि का मुख्य कार्यिकीय कारण क्या था?
- (A) प्रति पत्ती प्रकाश-संश्लेषण की दर दोगुनी हो जाना
- (B) श्वसन बंद हो जाना
- (C) कुल शुष्क पदार्थ का तने के बजाय दानों में अधिक विभाजन होना अर्थात् कटाई सूचकांक (Harvest Index) का 30% से बढ़कर 50% होना
- (D) जड़ों का समाप्त हो जाना
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) — अर्ध-बौनी किस्मों में पुआल/भूसे में जाने वाला भोजन बचकर दानों में गया जिससे Harvest Index बढ़ गया और फसल गिरी नहीं।
9. यदि किसी धान की फसल की कुल जैविक उपज (Biological Yield) 150 क्विंटल/हेक्टेयर है और आर्थिक दाना उपज 75 क्विंटल/हेक्टेयर है, तो उसका कटाई सूचकांक (Harvest Index %) क्या होगा?
- (A) 25%
- (B) 50%
- (C) 75%
- (D) 100%
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — HI (%) = (Economic Yield / Biological Yield) × 100 = (75 / 150) × 100 = 50%।
10. रसारोहण (Ascent of sap) समझाने के लिए जीवित प्रांतस्था कोशिकाओं की धड़कन पर आधारित 'स्पंदन सिद्धांत' (Pulsation Theory, 1923) किसने दिया था?
- (A) डिक्सन एवं जॉली
- (B) सर जे.सी. बोस (Sir J.C. Bose)
- (C) बोहम
- (D) स्ट्रॉसबर्गर
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — सर जे.सी. बोस ने इलेक्ट्रिक प्रोब की सहायता से दावा किया कि जाइलम के ठीक बाहर की अंतरतम प्रांतस्था कोशिकाएँ स्पंदन कर जल ऊपर पंप करती हैं।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. स्टीफन हेल्स द्वारा सन् 1727 में लिखित पादप कार्यिकी की प्रथम पुस्तक का नाम क्या है?
'वेजिटेबल स्टैटिक्स' (Vegetable Staticks, 1727)।
2. फसल कार्यिकी में 'PAR' का पूरा नाम और तरंगदैर्ध्य परास क्या है?
Photosynthetically Active Radiation (प्रकाश-संश्लेषी सक्रिय विकिरण; तरंगदैर्ध्य: 400 से 700 nm)।
3. सर जे.सी. बोस द्वारा कोलकाता में सन् 1917 में स्थापित शोध संस्थान का नाम लिखिए।
बोस विज्ञान मंदिर / बोस इंस्टीट्यूट (Bose Institute, Kolkata)।
4. गेहूँ में सिंचाई के लिए सबसे संवेदनशील कार्यिकीय अवस्था कौन सी होती है?
शिखर जड़ निकलने की अवस्था (Crown Root Initiation – CRI stage, बुवाई के 21 दिन बाद)।
5. पौधे में 'Source' (स्रोत) और 'Sink' (सिंक) का एक-एक उदाहरण दीजिए।
Source: परिपक्व हरी पत्ती (विशेषकर ध्वज पत्ती); Sink: विकासशील अनाज का दाना या आलू का कंद।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. पादप कार्यिकी (Plant Physiology) और फसल कार्यिकी (Crop Physiology) में क्या अंतर है?
पादप कार्यिकी एकल पौधे, अंग या कोशिका के स्तर पर होने वाली मौलिक जैव-भौतिक व जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं (जैसे रंध्र खुलना, एंजाइम क्रिया) का अध्ययन करती है। इसके विपरीत, फसल कार्यिकी खेत की परिस्थितियों में उगे पूरे फसल समुदाय (Crop canopy) द्वारा प्रकाश ग्रहण, बायोमास उत्पादन और दानों में भोजन विभाजन (Harvest Index) का अध्ययन करती है ताकि प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ाई जा सके।
2. सर जगदीश चंद्र बोस (Sir J.C. Bose) के पादप कार्यिकी में प्रमुख योगदानों का वर्णन कीजिए।
सर जे.सी. बोस को 'भारतीय पादप कार्यिकी का जनक' कहा जाता है। 1. उन्होंने पौधे की अत्यंत सूक्ष्म वृद्धि और उत्तेजना प्रतिक्रिया मापने के लिए 'Crescograph' और 'Resonant Recorder' जैसे यंत्र बनाए। 2. उन्होंने रसारोहण का 'स्पंदन सिद्धांत' (Pulsation Theory, 1923) दिया। 3. उन्होंने छुई-मुई (Mimosa pudica) और टेलीग्राफ पादप (Desmodium gyrans) में विद्युत संकेतों के संचरण को सिद्ध किया।
3. फसल उपज निर्धारण में 'स्रोत-सिंक संबंध' (Source-Sink Relationship) की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
'स्रोत' (Source – हरी पत्तियाँ) प्रकाश-संश्लेषण द्वारा शर्करा का निर्माण करता है और फ्लोएम द्वारा उसे 'सिंक' (Sink – दाने/फल) तक भेजता है। उच्च आर्थिक उपज के लिए स्रोत की क्षमता और सिंक के आकार दोनों में संतुलन होना आवश्यक है। उदाहरण के लिए अनाजों में ध्वज पत्ती (Flag leaf) और बाली के तुष अकेले दाने के 60–70% भार का निर्माण करते हैं।
4. कृषि विज्ञान में फसल कार्यिकी के चार प्रमुख व्यावहारिक उपयोग लिखिए।
1. उच्च हार्वेस्ट इंडेक्स और सीधे पर्ण कोण वाले आदर्श पादप प्रारूप (Crop Ideotypes) का निर्माण। 2. पादप वृद्धि नियंत्रकों (IBA, NAA, GA3, Ethrel, 2,4-D) द्वारा पुष्पन, फलन और खरपतवार नियंत्रण। 3. क्रांतिक सिंचाई अवस्थाओं और पर्ण पोषण से जल व उर्वरक उपयोग दक्षता बढ़ाना। 4. सूखा, लवणता और उच्च तापमान सहिष्णु किस्मों की स्क्रीनिंग।
5. स्टीफन हेल्स को 'पादप कार्यिकी का जनक' क्यों कहा जाता है?
स्टीफन हेल्स (1677–1761) ने पादप अध्ययन को दार्शनिक अनुमानों से निकालकर सटीक 'मात्रात्मक मापन' (Quantitative experimentation) पर आधारित किया। उन्होंने 1727 में अपनी पुस्तक 'Vegetable Staticks' में पौधे द्वारा अवशोषित जल और पत्तियों से वाष्पित जल की मात्रा को तौलकर तुलना की, मूल दाब (Root pressure) को मैनोमीटर से मापा और रसारोहण में वाष्पोत्सर्जन खिंचाव की भूमिका बताई।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. पादप एवं फसल कार्यिकी की परिभाषा देते हुए इसके ऐतिहासिक विकास और कृषि उत्पादन बढ़ाने में इसके महत्व एवं कार्यक्षेत्र का सविस्तर वर्णन कीजिए।
परिभाषा, पादप बनाम फसल कार्यिकी तुलना तालिका, वैन हेलमोंट, स्टीफन हेल्स, जूलियस वॉन सैक्स, सर जे.सी. बोस और डॉ. आर.डी. आसाना के योगदान तथा कृषि में इसके 6 प्रमुख कार्यक्षेत्रों (Ideotype breeding, Source-Sink, Water/Nutrient efficiency, PGRs, Stress physiology, Post-harvest physiology) का विस्तार से वर्णन करें।
2. किसी फसल की आर्थिक उपज (Economic Yield) किन कार्यिकीय कारकों पर निर्भर करती है? मॉन्टीथ के समीकरण और स्रोत-सिंक विभाजन (Harvest Index) के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
Monteith के समीकरण (Yield = Intercepted PAR × RUE × HI) के तीनों घटकों—1. कैनोपी द्वारा प्रकाश अंतर्ग्रहण (LAI व पत्ती कोण), 2. विकिरण उपयोग दक्षता (C3 बनाम C4 प्रकाश-संश्लेषण व श्वसन हानि), और 3. फोटोसिंथेट का दानों में विभाजन (Harvest Index व Stay-green गुण)—का सविस्तर विश्लेषण प्रस्तुत करें।
3. जलवायु परिवर्तन और अजैविक तनावों (सूखा, ताप, लवणता) की चुनौतियों का सामना करने में फसल कार्यिकी किस प्रकार मार्गदर्शन करती है? उदाहरण सहित समझाइए।
सूखा सहिष्णुता के कार्यिकीय सूचकांक (प्रोलिन संचय, आसमाटिक समायोजन, कैनोपी तापमान डिप्रेशन, कम ASI), उच्च ताप व बढ़ी हुई CO2 (FACE अध्ययन) के प्रभाव और जलवायु-स्मार्ट किस्मों के चयन में कार्यिकीय लक्षणों की भूमिका का वर्णन करें।
परीक्षा वन-लाइनर्स
- स्टीफन हेल्स ने 1727 में सर्वप्रथम अंगूर की बेल के कटे तने पर मैनोमीटर लगाकर 'मूल दाब' (Root Pressure) को मापा था।
- जूलियस वॉन सैक्स (1862) ने सबसे पहले सिद्ध किया कि प्रकाश-संश्लेषण का प्रथम दृश्य उत्पाद 'स्टार्च' (Starch) है जो हरितलवक में बनता है।
- सर जे.सी. बोस ने सिद्ध किया कि पौधों में भी जंतुओं के समान विद्युत-रासायनिक आवेगों (Action potentials) के माध्यम से संवेदना का संचरण होता है।
- भारतीय पादप कार्यिकी सोसाइटी (ISPP, नई दिल्ली) की स्थापना सन् 1958 में प्रो. जे.जे. चिनॉय एवं सहयोगियों द्वारा की गई थी।
- गेहूँ के दाने के कुल शुष्क भार में अकेले 'ध्वज पत्ती' (Flag leaf) और बाली (Ear photosynthesis) का योगदान लगभग 60 से 75% होता है।
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।





