PPHYS 311 Lecture 05: वाष्पोत्सर्जन (Transpiration), रंध्र संचालन की क्रियाविधि एवं बिंदुस्राव (Guttation)

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PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
LECTURE 05 / 32 · PPHYS 311

वाष्पोत्सर्जन (Transpiration), रंध्र संचालन की क्रियाविधि एवं बिंदुस्राव (Guttation)

Transpiration, Mechanism of Stomatal Movement and Guttation

Types of Transpiration, Stomatal Types, K+-Malate Pump Theory (Levitt 1974), Antitranspirants & Guttation

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Transpiration, Mechanism of Stomatal Movement and Guttation (Theory • Lecture 05)
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) की परिभाषा, इसके तीनों प्रकारों (रंध्रीय 85–90%, उपत्वचीय 3–9% व वातरंध्रीय <1%) और कर्टिस के कथन ('Transpiration is a necessary evil') को समझना।
  • द्वार कोशिकाओं (Guard cells — द्विबीजपत्री में वृक्काकार एवं घास/अनाज कुल में डंबलाकार) की विशिष्ट संरचना और रंध्र खुलने व बंद होने के सिद्धांतों—विशेषकर लेविट (Levitt, 1974) के सर्वमान्य 'सक्रिय K+–मैलैट आयन परिवहन सिद्धांत' और अंधेरे/सूखे में ABA की भूमिका—का विश्लेषण करना।
  • वाष्पोत्सर्जन-रोधी पदार्थों (Antitranspirants के 4 प्रकार: PMA, ABA, Silicon oil, Kaolin) तथा बिंदुस्राव (Guttation – बर्गरस्टीन, 1887; जलरंध्र / Hydathodes द्वारा द्रव स्राव) का अध्ययन करना।

प्रस्तावना · Introduction

पौधों के जीवित वायवीय भागों (मुख्यतः पत्तियों) से जल का वाष्प (Water vapour) के रूप में वायुमंडल में उड़ना 'वाष्पोत्सर्जन' (Transpiration) कहलाता है। फसलों द्वारा सोखे गए कुल जल का 98–99% भाग इसी प्रक्रिया में उड़ जाता है। इसीलिए कर्टिस (Curtis, 1926) ने इसे 'एक आवश्यक बुराई' (A necessary evil) और स्टीवर्ड (Steward, 1959) ने इसे 'एक अपरिहार्य बुराई' (An unavoidable evil) कहा—क्योंकि प्रकाश-संश्लेषण हेतु CO2 अंदर लेने के लिए जैसे ही पत्ती अपने रंध्र (Stomata) खोलती है, अंदर की संतृप्त गुहा से जलवाष्प का बाहर निकलना रोका नहीं जा सकता!

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

रंध्रीय वाष्पोत्सर्जन (Stomatal Transpiration)

पत्तियों की बाह्यत्वचा पर स्थित सूक्ष्म छिद्रों 'रंध्रों' (Stomata) के माध्यम से होने वाला वाष्पोत्सर्जन, जो कुल वाष्पोत्सर्जन का 85% से 92% भाग होता है (शेष 3–9% क्यूटिकल से 'Cuticular' और 0.1–1% तने के वातरंध्रों से 'Lenticular' होता है)।

द्वार कोशिकाओं की असममित भित्ति एवं अरीय माइक्रोफाइब्रिल (Radial Micellation in Guard Cells)

रंध्र को घेरने वाली दो द्वार कोशिकाओं (Guard cells) की भीतरी अवतल भित्ति मोटी व अप्रत्यास्थ और बाहरी उत्तल भित्ति पतली व लचीली होती है तथा सेल्यूलोज माइक्रोफाइब्रिल अरीय रूप (Radially oriented) से व्यवस्थित होते हैं; जिससे आशून होने पर वे बाहर की ओर खिंचकर रंध्र छिद्र को खोल देती हैं!

बिंदुस्राव (Guttation – Burgerstein, 1887)

अधिक आर्द्रता व कम वाष्पोत्सर्जन वाली रात्रि या भोर के समय मूल दाब (Root pressure) के कारण शाकीय पौधों (जैसे धान, गेहूँ, जौ, टमाटर, अरबी, स्ट्रॉबेरी) की पत्तियों के किनारों या सिरों पर स्थित 'जलरंध्रों' (Hydathodes / Epithem) से जल का लवण-युक्त द्रव की बूँदों के रूप में बाहर निकलना।

वाष्पोत्सर्जन-रोधी पदार्थ (Antitranspirants)

ऐसे रासायनिक पदार्थ जिनका पत्तियों पर छिड़काव करने से प्रकाश-संश्लेषण को न्यूनतम प्रभावित करते हुए वाष्पोत्सर्जन की दर को कम कर दिया जाता है (जैसे PMA, ABA, मोम और काओलिन)।

वर्गीकरण · Classification

द्विबीजपत्री बनाम एकबीजपत्री (घास कुल) में द्वार कोशिकाओं का आकार

1. द्विबीजपत्री पौधे (Dicots — दलहन, तिलहन, कपास, सब्जियाँ): द्वार कोशिकाएँ सेम के बीज या गुर्दे के आकार की (Kidney / Bean-shaped) होती हैं।
2. एकबीजपत्री घास कुल (Poaceae — धान, गेहूँ, मक्का, ज्वार, बाजरा, गन्ना): द्वार कोशिकाएँ डंबल के आकार की (Dumbbell-shaped) होती हैं और उनके दोनों ओर दो विशिष्ट सहायक कोशिकाएँ (Subsidiary cells) होती हैं (डंबलाकार रंध्र कम K+ व कम जल में बहुत तेजी से खुलते और बंद होते हैं, इसलिए घास कुल का जल उपयोग अधिक दक्ष होता है!)।

पत्ती की दोनों सतहों पर रंध्रों के वितरण के आधार पर 5 प्रकार

1. सेब/शहतूत प्रकार (Hypostomatic): रंध्र केवल पत्ती की निचली सतह पर (जैसे सेब, आड़ू, अखरोट)।
2. आलू प्रकार (Amphistomatic – unequal): निचली सतह पर अधिक और ऊपरी सतह पर कम रंध्र (जैसे आलू, टमाटर, सेम, पत्तागोभी)।
3. जई/घास प्रकार (Amphistomatic – Isobilateral): पत्ती की दोनों सतहों पर लगभग बराबर रंध्र (जैसे गेहूँ, धान, मक्का, ज्वार, जई)।
4. कुमुदिनी प्रकार (Epistomatic): रंध्र केवल ऊपरी सतह पर (तैरते जलीय पौधे जैसे कमल, वाटर लिली)।
5. पोटोमोजेटॉन प्रकार (Astomatic): रंध्र पूर्णतः अनुपस्थित या अक्रियाशील (डूबे हुए जलीय पौधे जैसे Hydrilla)।

रंध्र खुलने के दैनिक समय के आधार पर लॉफ्टफील्ड का वर्गीकरण (Loftfield, 1921)

1. अल्फाल्फा प्रकार (Alfalfa type): दिन भर खुले और रात भर बंद (अधिकांश मेसोफाइट फसलें—मटर, सरसों, मूली, चुकंदर)।
2. आलू प्रकार (Potato type): केवल शाम को कुछ घंटों के अलावा दिन-रात खुले रहते हैं (आलू, प्याज, पत्तागोभी)।
3. जौ/अनाज प्रकार (Barley type): दिन में केवल कुछ घंटों के लिए खुलते हैं और शेष समय बंद रहते हैं (गेहूँ, जौ, मक्का)।
4. मांसल/सकुलेंट प्रकार (Scotoactive Stomata — CAM Plants): रात में खुलते हैं और दिन में बंद रहते हैं (नागफनी/Opuntia, अनन्नास, Bryophyllum, Agave)!

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • लेविट (Levitt, 1974) का सर्वमान्य 'सक्रिय K+–मैलैट आयन परिवहन सिद्धांत' (Active Potassium Pump Theory — Fujino 1967, Fischer 1968 & Levitt 1974): पुराने स्टार्च-शर्करा सिद्धांत (Sayre 1926 & Steward 1964) को नकारते हुए आधुनिक कार्यिकी ने सिद्ध किया है कि रंध्र खुलने का मुख्य कारण शर्करा नहीं, बल्कि नीले प्रकाश (Blue light) की उपस्थिति में द्वार कोशिकाओं में पोटैशियम आयनों (K+) का सक्रिय अंतर्वाह (Active influx) है!
  • वाष्पोत्सर्जन-रोधी पदार्थों (Antitranspirants) के 4 कार्यिकीय प्रकार और उनके उदाहरण (परीक्षा में सर्वाधिक पूछा जाने वाला वर्गीकरण!):
    1. रंध्र बंद करने वाले (Stomatal Closing Type): फेनिल मर्क्यूरिक एसीटेट (PMA @ 10^-4 M), एब्सिसिक अम्ल (ABA), एट्राजीन (कम सांद्रता पर) एवं एस्पिरिन/सैलिसिलिक अम्ल।
    2. फिल्म बनाने वाले (Film-Forming Type — जो पत्ती पर पतली पारदर्शी झिल्ली बनाते हैं): मोबीलीफ (Mobileaf), हेक्साडेकानोल (Hexadecanol), सिलिकॉन तेल (Silicone oil), सीटिल अल्कोहल एवं मोम (Wax emulsions)।
    3. प्रकाश परावर्तक प्रकार (Reflectant Type — जो सफेद कोटिंग बनाकर धूप वापस मोड़ते हैं और पत्ती का तापमान 3–5°C घटाते हैं): काओलिन (Kaolin @ 5% छिड़काव), सेलाइट (Celite) एवं चूना पानी (Lime water)।
    4. वृद्धि मंदक प्रकार (Growth Retardant Type — जो प्ररोह वृद्धि घटाकर जड़ वृद्धि बढ़ाते हैं): साइकोसेल (CCC / Chlormequat) एवं फॉसफोन-D।

कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics

1. Mechanism of Stomatal Opening and Closing: Levitt's Active K+ Pump & ABA Signaling (रंध्र खुलने व बंद होने की आधुनिक क्रियाविधि)

All C3, C4 & CAM Crops

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): All C3, C4 & CAM Crops

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रमुख सिद्धांत: 1. Starch-Sugar Interconversion (Sayre 1926, Steward 1964 — ऐतिहासिक), 2. Active K+–H+ Exchange & Malate Theory (Fujino 1967, Levitt 1974 — सर्वमान्य आधुनिक सिद्धांत)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: सामान्य पत्ती की सतह का मात्र 1% से 2% क्षेत्रफल ही रंध्र छिद्रों द्वारा घिरा होता है, किंतु इसी 1% छिद्र से खुली जल सतह के 50–70% के बराबर वाष्पन हो जाता है ('Law of diffusion through small pores' — Brown & Escombe, 1900)।

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
【A. प्रकाश में रंध्र खुलने का चरणबद्ध क्रम (Stomatal Opening in Light — Levitt, 1974)】:
1. सुबह सूर्य का प्रकाश (विशेषकर नीला प्रकाश / Blue light जो Phototropin ग्राही द्वारा ग्रहण होता है) पड़ने पर द्वार कोशिकाओं में प्रकाश-संश्लेषण से CO2 घटती है, pH बढ़ता है (pH ~7.0) और ATP बनता है।
2. द्वार कोशिका का स्टार्च फॉस्फोइनोलपाइरूवेट (PEP) में बदलता है, जो PEPCase एंजाइम की सहायता से CO2 (HCO3-) से जुड़कर ऑक्जेलोएसीटिक अम्ल और फिर मैलिक अम्ल (Malic acid) बनाता है।
3. मैलिक अम्ल वियोजित होकर मैलैट आयन (Malate²⁻) और प्रोटॉन (H+) बनाता है।
4. द्वार कोशिका की प्लाज्मा झिल्ली का H+-ATPase पंप सक्रिय होकर H+ आयनों को सहायक कोशिकाओं में बाहर फेंकता है और विद्युत-रासायनिक संतुलन बनाए रखने के लिए सहायक कोशिकाओं से भारी मात्रा में पोटैशियम आयन (K+) और थोड़ा क्लोराइड (Cl⁻) द्वार कोशिकाओं के अंदर प्रवेश करते हैं!
5. रिक्तिका में पोटैशियम मैलैट (Potassium malate) संचित होने से द्वार कोशिका का परासरण दाब बढ़ जाता है (विलेय विभव Ψs व जल विभव Ψw अत्यधिक ऋणात्मक हो जाता है)।
6. पास की सहायक कोशिकाओं से अंतःपरासरण (Endosmosis) द्वारा जल द्वार कोशिकाओं में घुसता है ──► द्वार कोशिकाएँ आशून (Turgid) होती हैं ──► और रंध्र खुल जाता है (Stoma Opens)!

【B. अंधेरे या सूखे (Water Stress) में रंध्र बंद होने का क्रम (Stomatal Closing by ABA)】:
1. मिट्टी में पानी की कमी (सूखा) होते ही जड़ों और पत्तियों में तुरंत तनाव हार्मोन एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid – ABA) का संश्लेषण बढ़ जाता है (और अंधेरे में CO2 बढ़ने से pH घटकर 5.0 हो जाता है)।
2. ABA द्वार कोशिका की झिल्ली के ग्राही से जुड़कर कोशिकाद्रव्य में कैल्शियम (Ca²⁺) बढ़ाता है, जिससे H+ पंप रुक जाता है और ऋणायन चैनल (Cl⁻ व Malate²⁻) तथा बाह्यगामी K+ चैनल खुल जाते हैं।
3. द्वार कोशिकाओं से K+ और Malate/Cl⁻ तेजी से बाहर (Efflux) निकल जाते हैं ──► जल विभव बढ़ता है ──► बहिःपरासरण (Exosmosis) से पानी बाहर निकल जाता है ──► द्वार कोशिकाएँ श्लथ (Flaccid) हो जाती हैं ──► और रंध्र बंद हो जाता है!

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): रंध्र खुलने के लिए नीला प्रकाश (Blue light: 430–460 nm) लाल प्रकाश की तुलना में कई गुना अधिक प्रभावी है!

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): सूक्ष्म मात्रा में वायुमंडलीय CO2 घटने (<300 ppm) पर रंध्र खुलते हैं, और पर्णगुहा में CO2 बढ़ने (>500–600 ppm) पर रंध्र आंशिक रूप से बंद हो जाते हैं!

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): कवक विष 'फ्यूसीकोक्सिन' (Fusicoccin) अंधेरे में भी H+-ATPase पंप को चालू करके रंध्रों को जबरन खोल देता है।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Stomatal opening theory: Active K+–Malate Pump Theory (Levitt, 1974) + मोस्ट इफेक्टिव लाइट: Blue light + रंध्र बंद करने वाला तनाव हार्मोन: Abscisic Acid (ABA — K+ व Cl- को बाहर निकालता है) + Antitranspirants: PMA & ABA (Stomatal closing), Mobileaf & Hexadecanol (Film forming), Kaolin & Celite (Reflectant), CCC (Growth retardant)।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

बारानी फसलों (जैसे ज्वार, बाजरा, मूँगफली, कपास) में सूखे के समय 5% काओलिन (Kaolin) या PMA (10^-4 M) का छिड़काव वाष्पोत्सर्जन से होने वाली जल हानि को 25–35% तक बचा लेता है।

2. Transpiration Measurement, Significance & Guttation (वाष्पोत्सर्जन का मापन, महत्व एवं बिंदुस्राव)

All Field & Horticultural Crops

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): All Field & Horticultural Crops

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: मापन यंत्र: 1. पोटोमीटर (Potometer — गैनोंग व डार्विन: वाष्पोत्सर्जन दर मापता है), 2. पोरमोमीटर (Porometer / Steady-state porometer — रंध्र चालकता व रंध्र खुलने का मापन!), 3. कोबाल्ट क्लोराइड पेपर विधि (Stahl, 1894 — सूखा नीला कागज नमी पाकर गुलाबी हो जाता है!) एवं 4. लाइसिमीटर (Lysimeter — खेत स्तर पर ET मापन)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: वाष्पोत्सर्जन के लाभ (रसारोहण, खनिज परिवहन, पत्ती का शीतलन) और हानि (98% जल का व्यर्थ उड़ना व म्लानि) दोनों होने से इसे 'Necessary Evil' कहा जाता है।

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
बिंदुस्राव (Guttation — Burgerstein, 1887):
• यह मुख्यतः जई, गेहूँ, धान, जौ, मक्का, टमाटर, आलू, अरबी (Colocasia), बंदगोभी और स्ट्रॉबेरी जैसे शाकीय पौधों में सुबह के समय पत्ती की शिराओं के सिरों पर मोती जैसी पानी की बूँदों के रूप में दिखाई देता है।
• अंग: पत्ती की शिराओं के अंत पर विशेष स्थायी छिद्र होते हैं जिन्हें 'जलरंध्र' (Hydathodes / Water stomata) कहते हैं। जलरंध्र के ठीक नीचे ढीली मृदूतक कोशिकाओं का समूह होता है जिसे 'एपिथेम' (Epithem) कहते हैं जिसके नीचे जाइलम वाहिकाएँ खुलती हैं।
• कारण: जब रात में वाष्पोत्सर्जन शून्य हो और मिट्टी में पानी भरपूर हो, तब सक्रिय जल अवशोषण से उत्पन्न धनात्मक मूल दाब (Positive Root Pressure) के कारण जाइलम का रस एपिथेम से छनकर जलरंध्र से बाहर निकल आता है।
• संरचना: वाष्पोत्सर्जन का जल 100% शुद्ध जलवाष्प होता है, जबकि बिंदुस्राव का द्रव शुद्ध जल नहीं होता—उसमें कार्बनिक शर्करा, अमीनो अम्ल और अकार्बनिक लवण घुले होते हैं (इसीलिए सूखने पर पत्ती के किनारे पर सफेद पपड़ी जम जाती है और अधिक उर्वरक या कीटनाशक देने पर पत्ती की नोक जल जाती है)!

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): जलरंध्र (Hydathodes) की द्वार कोशिकाएँ अपनी गतिशीलता खो चुकी होती हैं, इसलिए सामान्य रंध्रों के विपरीत जलरंध्र दिन-रात हमेशा खुले रहते हैं!

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): जीवाणुज पत्ती अंगमारी के जीवाणु (जैसे धान में Xanthomonas oryzae pv. oryzae और पत्तागोभी के काले सड़न का जीवाणु Xanthomonas campestris) सुबह इन्हीं बिंदुस्राव की बूँदों और जलरंध्रों के रास्ते पत्ती के अंदर प्रवेश करते हैं!

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): वाष्पोत्सर्जन और बिंदुस्राव एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती हैं—जब वाष्पोत्सर्जन तेज होता है तब बिंदुस्राव नहीं होता, और जब वाष्पोत्सर्जन रुकता है तब बिंदुस्राव होता है।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Potometer = वाष्पोत्सर्जन दर मापन
  • Porometer = रंध्र छिद्र/चालकता मापन
  • CoCl2 paper = सूखा नीला (Blue) → नमी में गुलाबी (Pink)
  • Guttation (Burgerstein 1887): Hydathodes & Epithem द्वारा, कारण = Root Pressure, अशुद्ध द्रव (लवण व शर्करा युक्त)।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

कोबाल्ट क्लोराइड (CoCl2) परीक्षण: सूखा CoCl2 कागज गहरे नीले रंग (Blue) का होता है; पत्ती की सतह पर लगाने पर वाष्पोत्सर्जन की नमी से यह गुलाबी (Pink) हो जाता है (द्विबीजपत्री पत्ती की निचली सतह पर यह ऊपर की तुलना में बहुत जल्दी गुलाबी होता है)।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 5.1: वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) बनाम बिंदुस्राव (Guttation) की विस्तृत तुलना

तुलना का आधारवाष्पोत्सर्जन (Transpiration)बिंदुस्राव (Guttation)
जल हानि का रूपअदृश्य जलवाष्प (Water vapour) के रूप मेंदृश्य द्रव की बूँदों (Liquid droplets) के रूप में
संबंधित अंग / छिद्ररंध्र (Stomata), क्यूटिकल एवं वातरंध्र (Lenticels)पत्ती के किनारों पर स्थित जलरंध्र (Hydathodes / Epithem)
जल की शुद्धता100% शुद्ध जल (केवल H2O वाष्प)अशुद्ध जल (इसमें लवण, शर्करा एवं अमीनो अम्ल घुले होते हैं)
मुख्य समयदिन के समय (सूर्य के प्रकाश व गर्मी में)रात्रि एवं भोर के समय (उच्च आर्द्रता व ठंडक में)
मुख्य प्रेरक बलवाष्पोत्सर्जन खिंचाव व वाष्प दाब प्रवणता (VPD)जड़ों का धनात्मक मूल दाब (Positive Root Pressure)
छिद्र का नियंत्रणद्वार कोशिकाओं द्वारा रंध्र खुलते व बंद होते हैंजलरंध्र स्थायी रूप से हमेशा खुले रहते हैं (कोई नियंत्रण नहीं)

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. रंध्र सूचकांक (Stomatal Index – SI; Salisbury, 1927) एवं वाष्पोत्सर्जन अनुपात (Transpiration Ratio) की गणना

1. Stomatal Index (SI %) = [ S / (E + S) ] × 100 | 2. Transpiration Ratio = [ वाष्पोत्सर्जित जल का भार (g) ] / [ निर्मित शुष्क पदार्थ का भार (g) ]

उदाहरण 1 (Stomatal Index): यदि सूक्ष्मदर्शी के एक दृश्य क्षेत्र (Field of view) में पत्ती की निचली बाह्यत्वचा पर रंध्रों की संख्या (S) = 30 है और सामान्य बाह्यत्वचीय कोशिकाओं की संख्या (E) = 120 है, तो:
• रंध्र सूचकांक (SI %) = [ 30 / (120 + 30) ] × 100 = (30 / 150) × 100 = 20.0% (किसी प्रजाति के लिए SI एक स्थिर वर्गिकी लक्षण होता है)।
उदाहरण 2 (Transpiration Ratio): यदि मक्का का पौधा 1 ग्राम शुष्क पदार्थ बनाने में 300 ग्राम जल उड़ाता है, तो उसका Transpiration Ratio = 300 है (सामान्यतः CAM = 50–100, C4 = 250–350, और C3 फसलों का Transpiration Ratio = 500–800 होता है)।

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 05: वाष्पोत्सर्जन, रंध्र संचालन की क्रियाविधि एवं बिंदुस्राव]
├── 1. वाष्पोत्सर्जन के प्रकार एवं मापन (Types & Measurement)
│ ├── प्रकार: रंध्रीय (Stomatal: 85–92%), उपत्वचीय (Cuticular: 3–9%), वातरंध्रीय (Lenticular: <1%)
│ ├── Curtis (1926): 'Transpiration is a necessary evil' | Steward (1959): 'Unavoidable evil'
│ └── मापन: Potometer (दर), Porometer (रंध्र खुलना), Cobalt chloride paper (Dry Blue → Moist Pink), Lysimeter
├── 2. रंध्र संरचना एवं लेविट का K+ पंप सिद्धांत (Stomatal Mechanism — Levitt, 1974)
│ ├── द्वार कोशिकाएँ: द्विबीजपत्री में वृक्काकार (Kidney-shaped) | घास/अनाज कुल (Poaceae) में डंबलाकार (Dumbbell-shaped)
│ ├── प्रकाश में खुलना (Blue light): स्टार्च → PEP → Malic acid (H+ बाहर और K+ अंदर) → K-malate संचय → Endosmosis → Turgid → Open!
│ └── सूखे/अंधेरे में बंद होना: ABA हार्मोन → Ca2+ बढ़ना → K+ एवं Cl-/Malate बाहर (Efflux) → Exosmosis → Flaccid → Closed!
├── 3. वाष्पोत्सर्जन-रोधी पदार्थ (Antitranspirants — 4 Types)
│ ├── (i) रंध्र बंद करने वाले (Stomatal closing): PMA (Phenyl Mercuric Acetate), ABA, Atrazine (low conc.)
│ ├── (ii) फिल्म बनाने वाले (Film-forming): Mobileaf, Hexadecanol, Silicone oil, Wax
│ ├── (iii) प्रकाश परावर्तक (Reflectant): Kaolin (5% spray), Celite, Lime | (iv) वृद्धि मंदक: CCC (Cycocel)
└── 4. बिंदुस्राव (Guttation — Burgerstein, 1887)
├── अंग: जलरंध्र (Hydathodes) एवं Epithem | समय: रात्रि एवं भोर (उच्च आर्द्रता में)
└── कारण: धनात्मक मूल दाब (Root Pressure) | प्रकृति: लवण, शर्करा व अमीनो अम्ल युक्त अशुद्ध द्रव की बूँदें

प्रवाह चित्र · Flowchart

[लेविट (Levitt, 1974) के अनुसार प्रकाश में रंध्र खुलने (Opening) एवं सूखे/ABA में रंध्र बंद होने (Closing) का प्रवाह]
【A. प्रातःकाल / प्रकाश (विशेषकर Blue Light) में रंध्र खुलना】
प्रकाश + कम CO2 ──► द्वार कोशिका में स्टार्च से PEP का निर्माण ──► PEPCase एंजाइम द्वारा 'मैलिक अम्ल' का संश्लेषण
↓ (मैलिक अम्ल ──► H+ + Malate²⁻)
प्लाज्मा झिल्ली के H+-ATPase पंप द्वारा H+ बाहर और सहायक कोशिकाओं से K+ (एवं Cl⁻) का सक्रिय अंतर्वाह (Influx)
↓
रिक्तिका में 'Potassium Malate' का संचय ──► विलेय विभव (Ψs) व जल विभव (Ψw) घटना ──► अंतःपरासरण (Endosmosis)
↓
द्वार कोशिकाओं का आशून (Turgid) होना ──► मोटी भीतरी भित्ति का बाहर खिंचना ──► रंध्र खुल जाना (Stoma Opens)

【B. सूखा तनाव (Drought Stress) में ABA द्वारा रंध्र बंद होना】
जड़/पत्ती में ABA (Abscisic Acid) का तीव्र संश्लेषण ──► द्वार कोशिका से K+ एवं Malate/Cl⁻ का बहिर्वाह (Efflux)
↓
बहिःपरासरण (Exosmosis) ──► द्वार कोशिकाएँ श्लथ (Flaccid) ──► रंध्र बंद (Stoma Closes — जल की बचत!)

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • परीक्षा में रंध्र खुलने का सबसे सटीक कारण पूछा जाए तो हमेशा 'द्वार कोशिकाओं में K+ (पोटैशियम आयन) का सक्रिय अंतर्वाह (Active K+ influx — Levitt, 1974)' टिक करें; और रंध्र बंद करने वाला हार्मोन 'ABA (एब्सिसिक अम्ल)' है!
  • चारों प्रकार के Antitranspirants के उदाहरण हर कृषि प्रतियोगी परीक्षा में आते हैं: Stomatal closing = PMA व ABA; Film forming = Mobileaf व Hexadecanol; Reflectant = Kaolin (5%) व Celite; Growth retardant = CCC (Cycocel)।
  • बिंदुस्राव (Guttation) किसके कारण होता है? उत्तर: मूल दाब (Root Pressure) के कारण, और किस अंग से होता है? उत्तर: जलरंध्र (Hydathodes / Epithem) से!

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • 'Transpiration is a necessary evil' — यह प्रसिद्ध कथन कर्टिस (Curtis, 1926) का है।
  • घास कुल (धान, गेहूँ, मक्का, गन्ना, बाजरा) में द्वार कोशिकाएँ 'डंबल के आकार' (Dumbbell-shaped) की होती हैं।
  • CAM पौधों (नागफनी, अनन्नास) में 'Scotoactive stomata' पाए जाते हैं जो रात में खुलते हैं और दिन में बंद रहते हैं।
  • पोटोमीटर (Potometer) वाष्पोत्सर्जन की दर (अवशोषित जल के माध्यम से) मापता है, जबकि पोरमोमीटर (Porometer) रंध्र के खुलने का आकार मापता है।
  • कोबाल्ट क्लोराइड (CoCl2) कागज सूखी अवस्था में नीला (Blue) और नमी के संपर्क में आने पर गुलाबी (Pink) हो जाता है।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. 'वाष्पोत्सर्जन एक आवश्यक बुराई है' (Transpiration is a necessary evil)—यह प्रसिद्ध कथन किस वैज्ञानिक का है?

  • (A) स्टीफन हेल्स
  • (B) ओ.एफ. कर्टिस (O.F. Curtis, 1926)
  • (C) जे. लेविट
  • (D) सी.एम. डोनाल्ड
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — कर्टिस (1926) ने वाष्पोत्सर्जन को 'एक आवश्यक बुराई' और स्टीवर्ड (1959) ने 'एक अपरिहार्य बुराई' कहा था।

2. रंध्र खुलने और बंद होने की सर्वमान्य आधुनिक क्रियाविधि 'सक्रिय पोटैशियम आयन पंप सिद्धांत' (Active K+–Malate Ion Transport Theory) को सन् 1974 में किसने सुव्यवस्थित रूप से प्रतिपादित किया?

  • (A) जे.डी. सायरे (1926)
  • (B) जैकब लेविट (J. Levitt, 1974 — Fujino व Fischer के कार्यों के आधार पर)
  • (C) डिक्सन एवं जॉली
  • (D) वॉन मोहल
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — फुजिनो (1967) ने K+ की भूमिका देखी और लेविट (1974) ने प्रोटॉन (H+)–पोटैशियम (K+) विनिमय व मैलैट पंप सिद्धांत दिया।

3. निम्नलिखित वाष्पोत्सर्जन-रोधी पदार्थों (Antitranspirants) में से कौन सा 'रंध्र बंद करने वाला' (Stomatal Closing Type) है?

  • (A) काओलिन (Kaolin)
  • (B) मोबीलीफ एवं हेक्साडेकानोल
  • (C) फेनिल मर्क्यूरिक एसीटेट (PMA) एवं एब्सिसिक अम्ल (ABA)
  • (D) साइकोसेल (CCC)
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — PMA और ABA रंध्रों को बंद करते हैं; Mobileaf व Hexadecanol फिल्म बनाते हैं; और Kaolin प्रकाश परावर्तित करता है।

4. अनाज और घास कुल (Poaceae — गेहूँ, धान, मक्का, गन्ना) के पौधों में रंध्र की द्वार कोशिकाओं (Guard cells) का आकार कैसा होता है?

  • (A) वृक्काकार या सेम के आकार का
  • (B) डंबल के आकार का (Dumbbell-shaped)
  • (C) गोलाकार
  • (D) ताराकार
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — द्विबीजपत्री पौधों में द्वार कोशिकाएँ वृक्काकार (Kidney-shaped) और घास/अनाज कुल में डंबलाकार (Dumbbell-shaped) होती हैं।

5. रात्रि या प्रातःकाल में उच्च आर्द्रता होने पर पत्तियों के किनारों से द्रव की बूँदों के रूप में जल के बाहर निकलने की क्रिया 'बिंदुस्राव' (Guttation) किस अंग और किस बल के कारण होती है?

  • (A) सामान्य रंध्रों से, वाष्पोत्सर्जन खिंचाव के कारण
  • (B) जलरंध्रों (Hydathodes / Epithem) से, धनात्मक मूल दाब (Root Pressure) के कारण
  • (C) वातरंध्रों से, विसरण के कारण
  • (D) क्यूटिकल से, अंतःशोषण के कारण
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — बर्गरस्टीन (1887) के अनुसार बिंदुस्राव मूल दाब के कारण पत्ती की शिराओं के सिरों पर स्थित जलरंध्रों (Hydathodes) से होता है।

6. सूखे (Water stress) की स्थिति में पत्तियों में किस पादप हार्मोन का संश्लेषण तेजी से बढ़ जाता है जो द्वार कोशिकाओं से K+ बाहर निकालकर रंध्रों को तुरंत बंद कर देता है?

  • (A) काइनेटिन
  • (B) जिबरेलिक अम्ल (GA3)
  • (C) एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid – ABA / 'Stress Hormone')
  • (D) इंडोल एसिटिक अम्ल (IAA)
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — ABA को 'तनाव हार्मोन' और 'प्राकृतिक एंटी-ट्रांसपिरेंट' कहा जाता है जो सूखे में रंध्र बंद कर पौधे की जान बचाता है।

7. वाष्पोत्सर्जन परीक्षण में प्रयुक्त सूखा 'कोबाल्ट क्लोराइड (CoCl2) पेपर' नमी अवशोषित करने पर किस रंग से किस रंग में बदल जाता है?

  • (A) गुलाबी से नीला
  • (B) नीले रंग (Dry Blue) से गुलाबी रंग (Moist Pink) में
  • (C) सफेद से काला
  • (D) पीले से लाल
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — निर्जल कोबाल्ट क्लोराइड (Anhydrous CoCl2) नीले रंग का होता है जो जलवाष्प मिलते ही जलयोजित होकर गुलाबी हो जाता है।

8. रंध्रों के खुलने को प्रेरित करने के लिए दृश्य प्रकाश स्पेक्ट्रम का कौन सा रंग सबसे अधिक प्रभावी है?

  • (A) हरा प्रकाश
  • (B) नीला प्रकाश (Blue light: 430–460 nm)
  • (C) पीला प्रकाश
  • (D) अवरक्त प्रकाश
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — द्वार कोशिकाओं में स्थित फोटोट्रोपिन (Phototropin) ग्राही नीले प्रकाश को ग्रहण कर H+-ATPase पंप को सीधे सक्रिय करते हैं।

9. काओलिन (Kaolin @ 5% छिड़काव) और सेलाइट (Celite) किस प्रकार के वाष्पोत्सर्जन-रोधी (Antitranspirants) हैं?

  • (A) प्रकाश परावर्तक प्रकार (Reflectant Type — जो पत्ती का एल्बिडो बढ़ाकर तापमान 3–5°C घटाते हैं)
  • (B) रंध्र बंद करने वाले
  • (C) फिल्म बनाने वाले
  • (D) वृद्धि मंदक
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — काओलिन (सफेद चीनी मिट्टी) पत्ती की सतह से धूप को परावर्तित कर पत्ती का तापमान और वाष्पन दोनों कम करता है।

10. किन पौधों में रंध्र दिन में बंद रहते हैं और केवल रात में खुलते हैं ('Scotoactive Stomata')?

  • (A) गेहूँ एवं धान (C3)
  • (B) मक्का एवं ज्वार (C4)
  • (C) CAM पौधों (नागफनी/Opuntia, अनन्नास/Pineapple, Agave एवं Bryophyllum) में
  • (D) जलीय पौधों में
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — मरुस्थलीय CAM पौधों में जल बचाने के लिए रंध्र केवल रात के ठंडे समय में खुलते हैं (Scotoactive) और दिन में बंद रहते हैं।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. 'Guttation' (बिंदुस्राव) शब्द किस वैज्ञानिक ने और कब दिया था?

बर्गरस्टीन (Burgerstein) ने सन् 1887 में।

2. फिल्म बनाने वाले (Film-forming) किन्हीं दो एंटी-ट्रांसपिरेंट्स के नाम लिखिए।

मोबीलीफ (Mobileaf), हेक्साडेकानोल (Hexadecanol) एवं सिलिकॉन तेल (Silicone oil)।

3. पत्ती पर रंध्रों के खुलने की डिग्री (Stomatal aperture / conductance) मापने वाले यंत्र का नाम क्या है?

पोरमोमीटर (Porometer — डार्विन एवं पर्ट्ज, 1911)।

4. जलरंध्र (Hydathode) के ठीक नीचे पाई जाने वाली ढीली मृदूतक कोशिकाओं के ऊतक को क्या कहते हैं?

एपिथेम (Epithem)।

5. पत्ती की कुल सतह का लगभग कितने प्रतिशत भाग रंध्र छिद्रों (Stomatal pores) द्वारा घिरा होता है?

केवल 1% से 2% भाग।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. वाष्पोत्सर्जन को 'एक आवश्यक बुराई' (A Necessary Evil — Curtis, 1926) क्यों कहा जाता है?

वाष्पोत्सर्जन एक 'बुराई' इसलिए है क्योंकि पौधे द्वारा बड़ी मेहनत से सोखे गए जल का 98–99% भाग इसमें व्यर्थ उड़ जाता है और पानी कम होने पर फसल मुरझाकर सूख जाती है। किंतु यह 'आवश्यक' इसलिए है क्योंकि प्रकाश-संश्लेषण हेतु CO2 अंदर लेने के लिए रंध्रों का खुलना अनिवार्य है, और वाष्पोत्सर्जन ही रसारोहण, खनिज परिवहन तथा कड़ी धूप में पत्तियों को ठंडा रखने का कार्य करता है।

2. लेविट (Levitt, 1974) के 'सक्रिय K+–मैलैट पंप सिद्धांत' के अनुसार प्रकाश में रंध्र कैसे खुलते हैं?

प्रकाश (विशेषकर नीले प्रकाश) में द्वार कोशिका का स्टार्च PEP के माध्यम से मैलिक अम्ल बनाता है, जो H+ और Malate²⁻ में टूटता है। झिल्ली का H+-ATPase पंप H+ को बाहर निकालता है और बदले में सहायक कोशिकाओं से K+ आयन अंदर आते हैं। रिक्तिका में पोटैशियम मैलैट बनने से द्वार कोशिका का जल विभव (Ψw) घट जाता है, अंतःपरासरण से जल अंदर आता है और द्वार कोशिकाएँ आशून होकर रंध्र खोल देती हैं।

3. वाष्पोत्सर्जन-रोधी पदार्थ (Antitranspirants) क्या हैं? इनके चारों प्रकारों को उदाहरण सहित लिखिए।

वे रसायन जो वाष्पोत्सर्जन से होने वाली जल हानि को कम करते हैं, Antitranspirants कहलाते हैं। इसके 4 प्रकार हैं: 1. रंध्र बंद करने वाले (Stomatal closing): PMA (Phenyl Mercuric Acetate), ABA व कम सांद्रता पर एट्राजीन। 2. फिल्म बनाने वाले (Film-forming): Mobileaf, Hexadecanol व सिलिकॉन तेल। 3. प्रकाश परावर्तक (Reflectant): 5% Kaolin व Celite। 4. वृद्धि मंदक (Growth retardant): Cycocel (CCC)।

4. वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) और बिंदुस्राव (Guttation) में पाँच प्रमुख अंतर लिखिए।

1. वाष्पोत्सर्जन में जल वाष्प के रूप में निकलता है, जबकि बिंदुस्राव में द्रव की बूँदों के रूप में। 2. वाष्पोत्सर्जन रंध्रों/क्यूटिकल से होता है, जबकि बिंदुस्राव पत्ती के किनारों पर स्थित जलरंध्रों (Hydathodes) से होता है। 3. वाष्पोत्सर्जन का जल शुद्ध होता है, जबकि बिंदुस्राव के जल में लवण व शर्करा घुली होती है। 4. वाष्पोत्सर्जन दिन में और बिंदुस्राव रात/सुबह होता है। 5. बिंदुस्राव का कारण धनात्मक मूल दाब है।

5. द्वार कोशिकाओं (Guard cells) की कौन सी संरचनात्मक विशेषताएँ रंध्र को खोलने में मदद करती हैं?

1. द्वार कोशिकाओं की छिद्र की तरफ वाली भीतरी भित्ति बहुत मोटी व अप्रत्यास्थ होती है, जबकि बाहरी भित्ति पतली व लचीली होती है। 2. इनकी भित्ति में सेल्यूलोज माइक्रोफाइब्रिल लंबाई में न होकर अरीय रूप (Radially oriented) से लगे होते हैं। इसलिए जब पानी अंदर आने से आशून दाब बढ़ता है, तो कोशिका चौड़ाई में न फूलकर धनुष की तरह बाहर मुड़ती है और छिद्र खुल जाता है। 3. इनमें हरितलवक पाए जाते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. रंध्रों की संरचना (द्विबीजपत्री बनाम एकबीजपत्री), वितरण और रंध्र खुलने व बंद होने के 'सक्रिय पोटैशियम आयन परिवहन सिद्धांत' (Levitt, 1974) एवं ABA संकेतन का सविस्तर वर्णन कीजिए।

वृक्काकार बनाम डंबलाकार द्वार कोशिकाएँ, अरीय माइक्रोफाइब्रिल, रंध्र वितरण के 5 प्रकार व लॉफ्टफील्ड के 4 प्रकार तथा प्रकाश में स्टार्च → PEP → मैलिक अम्ल → H+/K+ विनिमय → K-malate → अंतःपरासरण से खुलना और सूखे में ABA द्वारा K+ बहिर्वाह से बंद होने का प्रवाह चार्ट सहित वर्णन करें।

2. वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) की परिभाषा, प्रकार, मापन विधियों, प्रभावित करने वाले कारकों और शुष्क खेती में वाष्पोत्सर्जन-रोधी पदार्थों (Antitranspirants) के व्यावहारिक उपयोग की विवेचना कीजिए।

तीनों प्रकार (Stomatal, Cuticular, Lenticular), पोटोमीटर व कोबाल्ट क्लोराइड विधि, वातावरणीय कारक (प्रकाश, आर्द्रता/VPD, ताप, वायु वेग) व आंतरिक कारक तथा चारों प्रकार के Antitranspirants (PMA, Mobileaf, Kaolin, CCC) की कार्यप्रणाली व महत्व का वर्णन करें।

3. बिंदुस्राव (Guttation) और रसस्राव (Bleeding) की क्रियाविधि, जलरंध्र (Hydathode) की संरचना तथा वाष्पोत्सर्जन और बिंदुस्राव के बीच अंतर का विस्तृत वर्णन कीजिए।

बर्गरस्टीन (1887) की खोज, जलरंध्र एवं एपिथेम ऊतक की संरचना, रात्रि में मूल दाब की भूमिका, बिंदुस्राव द्रव का रासायनिक संघटन व रोग संक्रमण में भूमिका और तालिका 5.1 के अनुसार वाष्पोत्सर्जन से तुलना प्रस्तुत करें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • पत्ती की बाह्यत्वचा की सामान्य कोशिकाओं में हरितलवक (Chloroplasts) नहीं होते, किंतु द्वार कोशिकाओं (Guard cells) में हरितलवक पाए जाते हैं!
  • रंध्र सूचकांक (Stomatal Index – SI) का सूत्र सैलिसबरी (Salisbury, 1927) ने दिया था।
  • घास कुल (Poaceae) के डंबलाकार रंध्र द्विबीजपत्री के वृक्काकार रंध्रों की तुलना में बहुत तेजी से और कम ऊर्जा में खुलते-बंद होते हैं।
  • वायुमंडल की सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) घटने पर पत्ती और हवा के बीच वाष्प दाब न्यूनता (VPD) बढ़ती है जिससे वाष्पोत्सर्जन तेज हो जाता है।
  • सूर्यमुखी और कपास की पत्तियों पर 5% काओलिन (Kaolin) का छिड़काव करने से बारानी क्षेत्रों में दाना उपज 15–20% बढ़ जाती है।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।

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