PPHYS 311 Lecture 13: प्रकाश-संश्लेषण के C₃ (केल्विन चक्र), C₄ (हैच एवं स्लैक चक्र) एवं CAM पथ

PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
प्रकाश-संश्लेषण के C₃ (केल्विन चक्र), C₄ (हैच एवं स्लैक चक्र) एवं CAM पथ
C₃, C₄ and CAM Pathways of Photosynthesis
C3 Calvin-Benson Cycle (RuBisCO, 3-PGA), C4 Hatch-Slack Pathway (Kranz Anatomy, PEPCase, OAA, 3 Subtypes), CAM Pathway (Scotoactive Stomata, Night Acidification)
विषय सूची · Quick Navigation
अधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्सअधिगम उद्देश्य · Learning Objectives
- C₃ पथ / केल्विन-बेंसन चक्र (Calvin, Benson & Bassham, 1954) के तीनों चरणों (Carboxylation, Reduction एवं Regeneration), प्राथमिक ग्राही (RuBP — 5C), प्रथम स्थिर उत्पाद (3-PGA — 3C) और ऊर्जा बजट (1 = 3 ATP + 2 NADPH; 1 ग्लूकोज = 18 ATP + 12 NADPH) को समझना।
- C₄ पथ / हैच एवं स्लैक चक्र (Kortschak 1965; Hatch & Slack, 1966) की 'क्रैंज शारीरिकी' (Kranz Anatomy — द्विरूपी हरितलवक), दोहरे कार्बोक्सिलीकरण (मीसोफिल में PEPCase द्वारा PEP से OAA — 4C और पूल-आच्छद में RuBisCO), तीनों उप-प्रकारों (NADP-ME, NAD-ME, PEP-CK) और ऊर्जा बजट (1 ग्लूकोज = 30 ATP + 12 NADPH) का विश्लेषण करना।
- CAM पथ (Crassulacean Acid Metabolism) में समय के अनुसार विभाजन (रात्रि में Scotoactive रंध्र खुलना व मैलिक अम्ल संचय और दिन में बंद रंध्रों में केल्विन चक्र) तथा C₃, C₄ व CAM की मास्टर तुलना करना।
प्रस्तावना · Introduction
प्रकाशीय अभिक्रिया में बनी स्वांगीकरण शक्ति ( एवं ) का उपयोग करके हरितलवक के स्ट्रोमा में वायुमंडलीय को शर्करा (ग्लूकोज/स्टार्च) में अपचयित करने की जैव-रासायनिक प्रक्रिया को 'अंधकार अभिक्रिया' (Dark Reaction / Blackman's Reaction / Carbon Assimilation) कहते हैं। पौधों के विकास क्रम में विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के अनुकूलन हेतु कार्बन स्थिरीकरण के तीन पथ विकसित हुए हैं—C₃ पथ (विश्व के 85% पौधों में—धान, गेहूँ, जौ, सभी दलहनें, तिलहनें, कपास), C₄ पथ (उष्णकटिबंधीय उच्च-उत्पादक फसलों में—मक्का, ज्वार, बाजरा, गन्ना, रागी, चौलाई) और CAM पथ (मरुस्थलीय मांसल पौधों में—अनन्नास, नागफनी, Agave, घृतकुमारी)।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions
C₃ पथ / केल्विन चक्र (Calvin-Benson-Bassham Cycle – 1946–1954)
मेल्विन केल्विन (नोबेल पुरस्कार 1961) द्वारा रेडियोधर्मी कार्बन () और *Chlorella* शैवाल की सहायता से खोजा गया सार्वत्रिक पथ, जिसमें 5-कार्बन ग्राही RuBP से जुड़कर 3-कार्बन वाला प्रथम स्थिर उत्पाद '3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल' (3-PGA) बनता है (इसीलिए इसे C₃ चक्र कहते हैं)।
क्रैंज शारीरिकी (Kranz Anatomy – Haberlandt, 1904; जर्मन शब्द 'Kranz' = Wreath / माला या छल्ला)
C₄ पौधों की पत्तियों की विशिष्ट आंतरिक संरचना जिसमें संवहन बंडल के चारों ओर बड़ी, मोटी भित्ति वाली और बिना अंतराकोशिकीय स्थान वाली 'पूल-आच्छद कोशिकाएँ' (Bundle sheath cells) एक अंगूठी या माला के रूप में घिरी रहती हैं और उनके बाहर मीसोफिल कोशिकाएँ होती हैं।
द्विरूपी हरितलवक (Dimorphic Chloroplasts in C₄ Plants)
C₄ पत्तियों में दो प्रकार के हरितलवक होते हैं: (1) मीसोफिल हरितलवक: छोटे, ग्रेना-युक्त (Granul, PS-II उपस्थित) किंतु इनमें RuBisCO व स्टार्च दाने अनुपस्थित होते हैं! (2) पूल-आच्छद (Bundle sheath) हरितलवक: बड़े, ग्रेना-रहित (Agranul, PS-II अनुपस्थित) किंतु इनमें RuBisCO और बड़े स्टार्च दाने भरपूर मात्रा में होते हैं!
रात्रि अम्लीकरण (Nocturnal Acidification in CAM Plants – De Saussure, 1804)
CAM पौधों में रात के समय रंध्र खुलने पर PEPCase द्वारा स्थिर होकर रिक्तिका में मैलिक अम्ल के रूप में जमा हो जाती है जिससे रात में पत्ती खट्टी (pH 4.0) हो जाती है और दिन में मैलिक अम्ल टूटकर शर्करा बनने से पत्ती का अम्ल समाप्त (Deacidification, pH 6.5) हो जाता है।
वर्गीकरण · Classification
C₃, C₄ एवं CAM फसलों के प्रमुख कृषि उदाहरण (Must-Remember Examples!)
1. C₃ फसलें (85% पादप प्रजातियाँ): धान (Rice), गेहूँ (Wheat), जौ (Barley), जई (Oats), राई, सभी दलहनी फसलें (चना, अरहर, मूँग, उड़द, मटर, सोयाबीन), सभी तिलहनी फसलें (मूँगफली, सरसों, सूरजमुखी, तिल, अलसी, अरंडी), कपास, जूट, तंबाकू, आलू, टमाटर, बैंगन, मिर्च, चुकंदर एवं सभी फल वृक्ष।
2. C₄ फसलें (उच्च ताप व तेज धूप में सर्वोच्च उत्पादक): मक्का (Maize), ज्वार (Sorghum), बाजरा (Pearl millet), गन्ना (Sugarcane), रागी (Finger millet), चीना, कांगनी, चौलाई (Amaranthus — द्विबीजपत्री C₄!), यूफोरबिया तथा खरपतवार मोथा (Cyperus rotundus) व दूब घास (Cynodon dactylon)।
3. CAM पादप (मरुद्भिद् एवं अधिपादप): अनन्नास (Pineapple — प्रमुख व्यावसायिक CAM फल फसल!), नागफनी (Opuntia / Cactus), एगेव (Agave / Sisal), अजूबा (Bryophyllum / Kalanchoe), एलोवेरा (Aloe vera), वैनिला (Vanilla), ऑर्किड एवं *Crassula*।
पूल-आच्छद में डी-कार्बोक्सिलीकरण एंजाइम के आधार पर C₄ पौधों के 3 उप-प्रकार (Hatch, Kagawa & Craig, 1975)
1. NADP-Malic Enzyme (NADP-ME) प्रकार: मीसोफिल से 'मैलैट' पूल-आच्छद के हरितलवक में जाकर टूटता है — जैसे मक्का (Maize), गन्ना (Sugarcane) एवं ज्वार (Sorghum)।
2. NAD-Malic Enzyme (NAD-ME) प्रकार: मीसोफिल से 'एस्पार्टेट' पूल-आच्छद के माइटोकॉन्ड्रिया में जाकर टूटता है — जैसे बाजरा (Pearl millet), चीना (Panicum miliaceum) एवं चौलाई (Amaranthus)।
3. PEP-Carboxykinase (PEP-CK) प्रकार: साइटोसोल में PEP-CK एंजाइम द्वारा टूटता है — जैसे गिनी घास (Panicum maximum) एवं क्लोरिस घास।
महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles
- केल्विन चक्र (C₃ Cycle) बिना C₄ या CAM के भी अकेले चल सकता है, किंतु कोई भी C₄ या CAM पौधा अंततः शर्करा बनाने के लिए केल्विन चक्र (C₃ चक्र) के बिना अधूरा है! अर्थात् केल्विन चक्र (C₃) सभी प्रकाश-संश्लेषी पौधों (C₃, C₄ एवं CAM तीनों) में शर्करा निर्माण का अंतिम सार्वत्रिक पथ है; C₄ और CAM केवल RuBisCO के पास की सांद्रता बढ़ाने वाले 'सहायक पंप' हैं!
- C₃ बनाम C₄ का सटीक ATP एवं NADPH ऊर्जा बजट (Energy Budget Comparison):
• C₃ चक्र में: प्रति 1 अणु = 3 ATP + 2 NADPH लगते हैं (2 ATP व 2 NADPH अपचयन चरण में + 1 ATP RuBP पुनर्जनन में)। अतः 1 ग्लूकोज () के लिए C₃ में = 18 ATP + 12 NADPH लगते हैं!
• C₄ चक्र में: मीसोफिल में पाइरूवेट से PEP को वापस बनाने में 'Pyruvate-phosphate dikinase (PPDK)' एंजाइम द्वारा 1 ATP टूटकर AMP + PPi बनता है जो 2 उच्च-ऊर्जा फॉस्फेट बंधों (2 ATP के बराबर) के समतुल्य है! अतः C₄ में प्रति 1 = 3 (केल्विन) + 2 (C₄ पंप) = 5 ATP + 2 NADPH लगते हैं, और 1 ग्लूकोज () के लिए C₄ में = 30 ATP + 12 NADPH लगते हैं!
कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics
1. The C3 Pathway (Calvin-Benson-Bassham Cycle): Three Stages & Energetics (C3 केल्विन चक्र के तीनों चरण एवं ऊर्जा बजट)
Rice, Wheat, Barley, Pulses, Oilseeds, Cotton, Potato (All C3 Crops)
🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: खोजकर्ता: मेल्विन केल्विन, एंड्रयू बेंसन एवं जेम्स बैशम (1946–1954; केल्विन को 1961 में नोबेल पुरस्कार) | प्रयुक्त शैवाल: *Chlorella pyrenoidosa* व *Scenedesmus* | समस्थानिक: रेडियोधर्मी ।
🌱 कार्यिकीय महत्व: यह स्ट्रोमा में चलने वाला चक्रीय पथ है; चूँकि एक बार में 1 कार्बन () जुड़ता है, इसलिए 1 अणु ग्लूकोज (6 कार्बन) बनाने के लिए केल्विन चक्र को 6 बार घूमना (6 Turns of Calvin Cycle) पड़ता है!
📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
केल्विन चक्र (C₃ Cycle) के 3 मुख्य चरण (Three Stages of Calvin Cycle):
1. चरण 1: कार्बोक्सिलीकरण (Carboxylation — 1 कार्बन का जुड़ना):
• प्राथमिक ग्राही 5-कार्बन कीटोज शर्करा 'राइबुलोज-1,5-बिसफॉस्फेट' (RuBP) है।
• RuBisCO (Ribulose-1,5-bisphosphate carboxylase-oxygenase) एंजाइम ( की उपस्थिति में) 1 अणु RuBP (5C) और 1 अणु + को जोड़कर 3-कार्बन वाले '3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल' (3-PGA) के 2 अणु बनाता है:
$$
2. चरण 2: अपचयन (Reduction — ग्लूकोज/ट्रायोज फॉस्फेट का निर्माण; इसमें 2 ATP + 2 NADPH खर्च होते हैं):
• पहले Phosphoglycerokinase एंजाइम 2 ATP खर्च करके 3-PGA के 2 अणुओं को '1,3-बिसफॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (1,3-BPGA)' में बदलता है।
• फिर Glyceraldehyde-3-phosphate dehydrogenase एंजाइम 2 NADPH + H⁺ से इसे अपचयित करके 3-कार्बन शर्करा 'ग्लिसरैल्डिहाइड-3-फॉस्फेट' (G3P / PGAL / Triose phosphate) के 2 अणु बनाता है। (6 चक्रों में बने 12 G3P अणुओं में से 2 G3P अणु बाहर निकलकर फ्रक्टोज-6-फॉस्फेट व 1 अणु ग्लूकोज बनाते हैं, और शेष 10 G3P अणु वापस चक्र में चले जाते हैं!)।
3. चरण 3: RuBP का पुनर्जनन (Regeneration of RuBP — इसमें 1 ATP प्रति खर्च होता है):
• बचे हुए 10 G3P (10 × 3C = 30 कार्बन) अणु Transketolase, Aldolase आदि एंजाइमों से 4C (Erythrose), 6C (Fructose) व 7C (Sedoheptulose) मध्यवर्ती बनाते हुए अंत में 6 अणु RuMP (Ribulose-5-phosphate, 5C) बनाते हैं।
• अंत में Phosphoribulokinase एंजाइम 6 ATP (अर्थात् 1 ATP प्रति ) खर्च करके RuMP को वापस 6 RuBP में बदल देता है ताकि चक्र चलता रहे!
⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): RuBisCO एंजाइम एक अष्ट-द्विलक ( — 8 बड़ी उप-इकाइयाँ जो क्लोरोप्लास्ट cpDNA द्वारा बनती हैं + 8 छोटी उप-इकाइयाँ जो केंद्रकीय DNA द्वारा बनती हैं) प्रोटीन है।
🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): शर्करा हरितलवक से बाहर साइटोसोल में ट्रायोज-फॉस्फेट (DHAP/G3P) के रूप में निकलती है, जहाँ वह सुक्रोज में बदलकर फ्लोएम द्वारा पूरे पौधे में भेजी जाती है, जबकि हरितलवक के अंदर वह स्टार्च के रूप में संचित होती है।
🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): C₃ पौधों के लिए प्रकाश-संश्लेषण का इष्टतम तापमान 20°C से 25°C है और इनका क्षतिपूर्ति बिंदु ( Compensation Point) उच्च (40 से 60 ppm) होता है।
मुख्य बिंदु · Key Points
- C3 Cycle (Calvin 1954 on Chlorella using 14C)
- Primary CO2 acceptor = RuBP (5-carbon)
- Carboxylating enzyme = RuBisCO
- First stable product = 3-PGA (3-carbon)
- Energy per 1 CO2 = 3 ATP + 2 NADPH
- Energy per 1 Glucose (6 turns) = 18 ATP + 12 NADPH।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance
C₃ फसलों में हरितलवक एक ही प्रकार के (Monomorphic & Granul) होते हैं और उनमें क्रैंज शारीरिकी नहीं पाई जाती।
2. The C4 Pathway (Hatch & Slack Cycle) & CAM Pathway (C4 हैच-स्लैक चक्र एवं CAM पथ)
C4: Maize, Sorghum, Pearl Millet, Sugarcane, Ragi, Amaranthus | CAM: Pineapple, Opuntia, Agave, Aloe
🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: C4 खोजकर्ता: कोर्टशाक (Kortschak et al., 1965 गन्ने में) एवं एम.डी. हैच व सी.आर. स्लैक (Hatch & Slack, 1966) | CAM: क्रैसुलेसी कुल के पौधों में खोजा गया।
🌱 कार्यिकीय महत्व: C4 और CAM दोनों में प्राथमिक ग्राही 3-कार्बन वाला फॉस्फोइनोलपाइरूवेट (PEP) है, प्रथम एंजाइम PEPCase है और प्रथम स्थिर उत्पाद 4-कार्बन वाला ऑक्जेलोएसीटिक अम्ल (OAA) है! किंतु दोनों में मूलभूत अंतर यह है कि C4 में दोनों कार्बोक्सिलीकरण दो अलग-अलग कोशिकाओं (मीसोफिल व पूल-आच्छद — Spatial separation) में एक ही समय (दिन में) होते हैं, जबकि CAM में दोनों कार्बोक्सिलीकरण एक ही कोशिका में दो अलग-अलग समय (रात और दिन — Temporal separation) पर होते हैं!
📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
【A. C₄ पथ / हैच एवं स्लैक चक्र (C4 Dicarboxylic Acid Pathway) की 2-कोशिकीय क्रियाविधि】:
1. प्रथम कार्बोक्सिलीकरण — मीसोफिल कोशिका (Mesophyll Cell) में:
• वायुमंडलीय मीसोफिल कोशिका के कोशिकाद्रव्य में घुलकर बाइकार्बोनेट () बनाती है।
• वहाँ स्थित PEPCase (Phosphoenolpyruvate carboxylase) एंजाइम 3-कार्बन ग्राही 'PEP' को से जोड़कर 4-कार्बन वाला प्रथम स्थिर उत्पाद 'ऑक्जेलोएसीटिक अम्ल' (Oxaloacetic Acid – OAA, 4C) बनाता है (ध्यान दें: मीसोफिल में RuBisCO नहीं होता और PEPCase में कोई ऑक्सीजिनेज क्रिया नहीं होती!):
$$
• OAA तुरंत हरितलवक में मैलिक अम्ल (Malate, 4C) या एस्पार्टिक अम्ल (Aspartate, 4C) में बदल जाता है और प्लाज्मोडेस्मेटा द्वारा अंदर की पूल-आच्छद कोशिका (Bundle Sheath Cell) में चला जाता है।
2. द्वितीय कार्बोक्सिलीकरण — पूल-आच्छद कोशिका (Bundle Sheath Cell) में:
• पूल-आच्छद कोशिका में मैलिक अम्ल का डी-कार्बोक्सिलीकरण (NADP-Malic enzyme द्वारा) होकर मुक्त होती है और 3-कार्बन पाइरूवेट (Pyruvate, 3C) बचता है।
• यह मुक्त हुई सांद्रित पूल-आच्छद के ग्रेना-रहित हरितलवक में स्थित RuBisCO द्वारा ग्रहण कर ली जाती है और वहाँ सामान्य केल्विन चक्र (C₃ चक्र) चलकर ग्लूकोज/स्टार्च बनता है!
• बचा हुआ पाइरूवेट (3C) वापस मीसोफिल कोशिका में लौटता है जहाँ PPDK (Pyruvate-phosphate dikinase) एंजाइम 2 उच्च-ऊर्जा फॉस्फेट बंध (2 ATP समतुल्य) खर्च करके उसे पुनः PEP में बदल देता है!
【B. CAM पथ (Crassulacean Acid Metabolism — 'Dark CO2 Fixation') की रात्रि बनाम दिन क्रियाविधि】:
1. रात्रि में (Night — जब Scotoactive रंध्र खुलते हैं: 'Acidification'):
• रात के ठंडे समय में रंध्र खुलते हैं और अंदर आती है। संचित स्टार्च ग्लाइकोलाइसिस से PEP (3C) बनाता है।
• कोशिकाद्रव्य में PEPCase एंजाइम PEP + से OAA (4C) और फिर मैलिक अम्ल (Malic acid) बनाता है, जो रात भर कोशिका की बड़ी रिक्तिका (Vacuole) में संचित होता रहता है (पत्ती खट्टी हो जाती है)।
2. दिन में (Day — जब जल बचाने के लिए रंध्र बंद रहते हैं: 'Deacidification'):
• सूरज निकलते ही रंध्र पूर्णतः बंद हो जाते हैं ताकि एक बूँद पानी भी न उड़े! रिक्तिका से मैलिक अम्ल बाहर निकलकर टूटता है और अंदर ही उच्च सांद्रता में मुक्त करता है।
• प्रकाश अभिक्रिया से बने ATP व NADPH की सहायता से RuBisCO और केल्विन चक्र इसी आंतरिक से शर्करा/स्टार्च बना लेते हैं!
⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): C₄ पौधों का PEPCase एंजाइम दिन में सक्रिय रहता है (प्रकाश द्वारा फॉस्फोराइलेशन से सक्रिय), जबकि CAM पौधों का PEPCase केवल रात में सक्रिय रहता है (क्योंकि दिन में मैलिक अम्ल उसे फीडबैक संदमन से बंद कर देता है)!
🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): C₄ पौधों का इष्टतम तापमान 30°C से 40°C है और इनका क्षतिपूर्ति बिंदु अत्यंत कम (0 से 5 ppm) होता है!
🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): कुछ पौधे (जैसे *Mesembryanthemum crystallinum* — आइस प्लांट और *Portulaca*) सामान्य नमी में C₃ पथ चलाते हैं और सूखा या लवणता आते ही अपना पथ बदलकर CAM में चले जाते हैं जिन्हें 'Facultative CAM plants' कहते हैं!
मुख्य बिंदु · Key Points
- C4 Pathway (Hatch & Slack, 1966 in Sugarcane/Maize)
- Leaf anatomy = Kranz anatomy with Dimorphic chloroplasts (Granul mesophyll + Agranul bundle sheath)
- Primary CO2 acceptor = PEP (3C) in mesophyll
- First enzyme = PEPCase
- First stable product = OAA (4C)
- Energy per 1 Glucose in C4 = 30 ATP + 12 NADPH
- C4 = Spatial separation (Mesophyll & Bundle sheath) vs CAM = Temporal separation (Night & Day in same cell)।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance
गन्ना और मक्का (C₄) खरीफ की तेज धूप और 35–40°C तापमान में भी बिना किसी प्रकाशीय संतृप्ति (No light saturation) के सर्वोच्च बायोमास देते हैं।
तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables
तालिका 13.1: प्रकाश-संश्लेषण के C₃, C₄ एवं CAM पथों की मास्टर तुलना सारणी (Most Important Table of Crop Physiology!)
| विशेषता / मानदंड | C₃ पादप (केल्विन चक्र) | C₄ पादप (हैच एवं स्लैक चक्र) | CAM पादप (क्रैसुलेशियन अम्ल उपापचय) |
|---|---|---|---|
| उदाहरण फसलें | धान, गेहूँ, जौ, दलहनें, तिलहनें, कपास, आलू | मक्का, ज्वार, बाजरा, गन्ना, रागी, चौलाई | अनन्नास, नागफनी, Agave, एलोवेरा, Bryophyllum |
| पत्ती में क्रैंज शारीरिकी (Kranz Anatomy) | अनुपस्थित (केवल मीसोफिल कोशिकाएँ) | उपस्थित (मीसोफिल + पूल-आच्छद कोशिकाएँ) | अनुपस्थित (केवल बड़ी रिक्तिका युक्त मांसल मीसोफिल) |
| हरितलवक का प्रकार | एकरूपी (Monomorphic — ग्रेना युक्त) | द्विरूपी (Dimorphic: मीसोफिल में ग्रेना युक्त, पूल-आच्छद में ग्रेना रहित) | एकरूपी (Monomorphic) |
| प्राथमिक ग्राही (Primary Acceptor) | RuBP (5-कार्बन) | PEP (3-कार्बन — मीसोफिल में); द्वितीयक: RuBP | रात्रि में PEP (3C); दिन में RuBP (5C) |
| प्रथम कार्बोक्सिलीकरण एंजाइम | RuBisCO | PEPCase (मीसोफिल में) एवं RuBisCO (पूल-आच्छद में) | रात्रि में PEPCase एवं दिन में RuBisCO |
| प्रथम स्थिर उत्पाद (First Product) | 3-PGA (3-कार्बन) | OAA — ऑक्जेलोएसीटिक अम्ल (4-कार्बन) | रात्रि में OAA (4C) मैलिक अम्ल; दिन में 3-PGA |
| रंध्र खुलने का समय | दिन में खुलते हैं (Photoactive) | दिन में खुलते हैं (Photoactive) | रात्रि में खुलते हैं और दिन में बंद (Scotoactive) |
| 1 ग्लूकोज () हेतु ऊर्जा आवश्यकता | 18 ATP + 12 NADPH | 30 ATP + 12 NADPH (12 अतिरिक्त ATP!) | 30 ATP + 12 NADPH |
| प्रकाश-श्वसन (Photorespiration) | उच्च (25–30% कार्बन हानि) | अनुपस्थित / नगण्य | नगण्य |
| क्षतिपूर्ति बिंदु ( Comp. Point) | उच्च (40 – 60 ppm) | अत्यंत कम (0 – 5 या 10 ppm) | अंधेरे में 0–5 ppm |
| इष्टतम तापमान (Optimum Temp.) | 20°C – 25°C | 30°C – 40°C | ~35°C (रात्रि में 15°C) |
| जल उपयोग दक्षता (WUE) | सबसे कम (1–2 g/kg जल) | उच्च (3–4 g/kg जल) | सर्वोच्च (10–20 g/kg जल) |
सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations
1. C₃ बनाम C₄ एवं CAM पौधों में 'n' अणु CO₂ या 'n' अणु ग्लूकोज स्थिरीकरण हेतु आवश्यक ATP एवं NADPH की गणना
उदाहरण 1: यदि गेहूँ (C₃) और मक्का (C₄) दोनों पौधे 2 अणु सुक्रोज (Sucrose = 12 कार्बन = 12 अणु ) का संश्लेषण करते हैं, तो दोनों को कितने ATP और कितने NADPH लगेंगे?
• गेहूँ (C₃) के लिए (12 ): 36 ATP; एवं 24 NADPH।
• मक्का (C₄) के लिए (12 ): 60 ATP; एवं 24 NADPH (अर्थात् NADPH बराबर लगते हैं, किंतु C₄ में 24 अतिरिक्त ATP लगते हैं)!
माइंड मैप · Mind Map
[Lecture 13: प्रकाश-संश्लेषण के C3, C4 एवं CAM पथ]
├── 1. C3 पथ / केल्विन-बेंसन चक्र (Calvin et al., 1954 — Chlorella & 14C)
│ ├── प्राथमिक ग्राही: RuBP (5C) | एंजाइम: RuBisCO | प्रथम स्थिर उत्पाद: 3-PGA (3C)
│ ├── 3 चरण: (i) Carboxylation, (ii) Reduction (2 ATP + 2 NADPH per CO2), (iii) Regeneration of RuBP (1 ATP per CO2)
│ └── ऊर्जा बजट: प्रति 1 CO2 = 3 ATP + 2 NADPH | प्रति 1 ग्लूकोज (6 चक्र) = 18 ATP + 12 NADPH
├── 2. C4 पथ / हैच एवं स्लैक चक्र (Kortschak 1965; Hatch & Slack 1966)
│ ├── पत्ती संरचना: Kranz Anatomy + Dimorphic Chloroplasts (मीसोफिल में Granul बिना RuBisCO; पूल-आच्छद में Agranul + RuBisCO)
│ ├── मीसोफिल में: PEP (3C) + HCO3⁻ ──(PEPCase)──► OAA (4C प्रथम उत्पाद) ──► Malate/Aspartate
│ ├── पूल-आच्छद में: Malate ──► CO2 + Pyruvate (3C); यह CO2 RuBisCO द्वारा केल्विन चक्र में जाती है; Pyruvate मीसोफिल में PPDK (2 ATP) से PEP बनाता है
│ ├── ऊर्जा बजट: प्रति 1 CO2 = 5 ATP + 2 NADPH | प्रति 1 ग्लूकोज = 30 ATP + 12 NADPH
│ └── उदाहरण: मक्का, ज्वार, बाजरा, गन्ना, रागी, चौलाई (Amaranthus), मोथा
└── 3. CAM पथ (Crassulacean Acid Metabolism — अनन्नास, नागफनी, Agave, Bryophyllum)
├── एक ही कोशिका में समय के अनुसार विभाजन (Temporal separation) + Scotoactive Stomata (रात में खुलना, दिन में बंद)
├── रात्रि में (Acidification): रंध्र खुले → स्टार्च से PEP → PEPCase द्वारा OAA → रिक्तिका में मैलिक अम्ल का संचय
└── दिन में (Deacidification): रंध्र बंद → मैलिक अम्ल टूटकर CO2 देता है → RuBisCO व केल्विन चक्र से स्टार्च निर्माण
प्रवाह चित्र · Flowchart
[C4 पौधों (मक्का/गन्ना) में 'मीसोफिल कोशिका' और 'पूल-आच्छद कोशिका (Bundle Sheath)' के बीच दोहरा कार्बोक्सिलीकरण प्रवाह]
┌───────────────────────────────────────────────┐ ┌───────────────────────────────────────────────┐
│ 1. मीसोफिल कोशिका (Mesophyll Cell) │ │ 2. पूल-आच्छद कोशिका (Bundle Sheath Cell) │
│ (Granul Chloroplast — PEPCase उपस्थित, │ │ (Agranul Chloroplast — RuBisCO उपस्थित, │
│ RuBisCO अनुपस्थित) │ │ गैसों के लिए मोटी अपारगम्य भित्ति) │
├───────────────────────────────────────────────┤ ├───────────────────────────────────────────────┤
│ वायुमंडलीय CO2 ──► HCO3⁻ + PEP (3C) │ │ │
│ │ (PEPCase एंजाइम) │ │ │
│ ▼ │ │ │
│ ऑक्जेलोएसीटिक अम्ल (OAA - 4C) │ │ │
│ │ (अपचयन) │ │ │
│ ▼ │ (प्लाज्मो- │ │
│ मैलिक अम्ल (Malate - 4C) ─────┼─────────►│ ──► मैलिक अम्ल (4C) │
│ │ डेस्मेटा) │ │ (NADP-Malic Enzyme) │
│ │ │ ├──► सांद्रित CO2 ──► 【RuBisCO व │
│ │ │ │ केल्विन चक्र (C3)】│
│ ▲ │ │ ▼ │ │
│ PEP (3C) ◄── (PPDK + 2 ATP) │ │ पाइरूवेट (Pyruvate - 3C) ग्लूकोज │
│ └─── पाइरूवेट (3C) ◄────┼──────────┼─────────┘ │
└───────────────────────────────────────────────┘ └───────────────────────────────────────────────┘
परीक्षा टिप्स · Exam Tips
- परीक्षा के सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न (100% पूछे जाते हैं):
1. C₃ चक्र का प्राथमिक ग्राही और प्रथम स्थिर उत्पाद क्या है? उत्तर: ग्राही = RuBP (5-कार्बन); प्रथम उत्पाद = 3-PGA (3-कार्बन)।
2. C₄ और CAM चक्र का प्राथमिक ग्राही और प्रथम स्थिर उत्पाद क्या है? उत्तर: ग्राही = PEP (फॉस्फोइनोलपाइरूवेट, 3-कार्बन); प्रथम उत्पाद = OAA (ऑक्जेलोएसीटिक अम्ल, 4-कार्बन)!
3. 1 ग्लूकोज अणु बनाने में C₃ और C₄ में कितने ATP व NADPH लगते हैं? उत्तर: C₃ में = 18 ATP + 12 NADPH; और C₄ में = 30 ATP + 12 NADPH!
4. किस व्यावसायिक फल फसल में CAM पथ पाया जाता है? उत्तर: अनन्नास (Pineapple – Ananas comosus) में! - क्रैंज शारीरिकी (Kranz anatomy) में पूल-आच्छद कोशिकाओं के हरितलवक कैसे होते हैं? उत्तर: बड़े और ग्रेना-रहित (Agranul, जिनमें PS-II नहीं होता किंतु RuBisCO भरपूर होता है)!
त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision
- मेल्विन केल्विन को C₃ चक्र की खोज के लिए सन् 1961 में रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला।
- गन्ने में C₄ पथ का प्रथम संकेत कोर्टशाक (Kortschak, 1965) ने दिया और पूरा चक्र हैच एवं स्लैक (Hatch & Slack, 1966) ने खोजा।
- C₄ पौधों की मीसोफिल कोशिकाओं में RuBisCO अनुपस्थित होता है; वहाँ केवल PEPCase पाया जाता है।
- पाइरूवेट से PEP का पुनर्जनन करने वाला ठंड-संवेदनशील C₄ एंजाइम 'PPDK' (Pyruvate-phosphate dikinase) है जिसमें 2 उच्च-ऊर्जा फॉस्फेट बंध लगते हैं।
- CAM पौधों में रात में मैलिक अम्ल कोशिका की 'रिक्तिका' (Vacuole) में जमा होता है और दिन में टूटकर देता है।
MCQs — उत्तर एवं व्याख्या
1. केल्विन चक्र (C3 Pathway) में वायुमंडलीय CO2 का 'प्राथमिक ग्राही' (Primary CO2 Acceptor) कौन सा यौगिक है और इसमें कितने कार्बन परमाणु होते हैं?
- (A) फॉस्फोइनोलपाइरूवेट (PEP — 3 कार्बन)
- (B) राइबुलोज-1,5-बिसफॉस्फेट (RuBP — 5 कार्बन कीटोज शर्करा)
- (C) 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (3-PGA — 3 कार्बन)
- (D) ऑक्जेलोएसीटिक अम्ल (OAA — 4 कार्बन)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — C3 चक्र में प्राथमिक CO2 ग्राही 5-कार्बन वाला 'RuBP' है, जो RuBisCO की उपस्थिति में CO2 से जुड़कर 3-कार्बन वाला प्रथम उत्पाद '3-PGA' बनाता है।
2. हैच एवं स्लैक चक्र (C4 Pathway) में मीसोफिल कोशिका में CO2 (HCO3⁻) का प्राथमिक ग्राही और बनने वाला 'प्रथम स्थिर उत्पाद' क्रमशः क्या हैं?
- (A) प्राथमिक ग्राही: RuBP (5C) एवं प्रथम उत्पाद: 3-PGA (3C)
- (B) प्राथमिक ग्राही: फॉस्फोइनोलपाइरूवेट (PEP – 3C) एवं प्रथम स्थिर उत्पाद: ऑक्जेलोएसीटिक अम्ल (OAA – 4C)
- (C) प्राथमिक ग्राही: पाइरूवेट एवं प्रथम उत्पाद: सिट्रेट
- (D) प्राथमिक ग्राही: ग्लूकोज एवं प्रथम उत्पाद: स्टार्च
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — C4 और CAM दोनों में प्राथमिक CO2 ग्राही 3-कार्बन वाला PEP है और PEPCase एंजाइम द्वारा बनने वाला प्रथम स्थिर उत्पाद 4-कार्बन वाला OAA है।
3. C3 पौधों (जैसे गेहूँ व धान) और C4 पौधों (जैसे मक्का व गन्ना) में '1 अणु ग्लूकोज' (6 अणु CO2 का स्थिरीकरण) बनाने के लिए आवश्यक ATP और NADPH की संख्या क्रमशः कितनी होती है?
- (A) दोनों में 18 ATP + 12 NADPH
- (B) C3 में: 18 ATP + 12 NADPH; एवं C4 में: 30 ATP + 12 NADPH
- (C) C3 में: 30 ATP + 12 NADPH; एवं C4 में: 18 ATP + 12 NADPH
- (D) C3 में: 12 ATP + 18 NADPH; एवं C4 में: 24 ATP + 12 NADPH
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — C3 में प्रति CO2 3 ATP + 2 NADPH (6 CO2 हेतु 18 ATP + 12 NADPH) लगते हैं, जबकि C4 में PPDK द्वारा PEP पुनर्जनन में प्रति CO2 2 अतिरिक्त ATP लगने से कुल 30 ATP + 12 NADPH लगते हैं।
4. C4 पौधों की पत्तियों में पाई जाने वाली विशिष्ट 'क्रैंज शारीरिकी' (Kranz Anatomy) में 'पूल-आच्छद कोशिकाओं' (Bundle Sheath Cells) के हरितलवक की क्या विशेषता होती है?
- (A) वे छोटे और ग्रेना से भरपूर होते हैं किंतु उनमें RuBisCO नहीं होता
- (B) वे बड़े और ग्रेना-रहित (Agranul, PS-II अनुपस्थित) होते हैं तथा उनमें RuBisCO और स्टार्च कण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं
- (C) उनमें कोई क्लोरोफिल नहीं होता
- (D) वे केवल रात में काम करते हैं
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — C4 पौधों में द्विरूपी हरितलवक होते हैं: मीसोफिल हरितलवक ग्रेना-युक्त (बिना RuBisCO) होते हैं और पूल-आच्छद हरितलवक ग्रेना-रहित (RuBisCO युक्त) होते हैं।
5. निम्नलिखित फसलों के समूहों में से कौन सा समूह पूर्ण रूप से 'C4 फसलों' (C4 Crops) का प्रतिनिधित्व करता है?
- (A) धान, गेहूँ, चना एवं सरसों
- (B) मक्का, ज्वार, बाजरा, गन्ना, रागी एवं चौलाई (Amaranthus)
- (C) सोयाबीन, मूँगफली, कपास एवं आलू
- (D) अनन्नास, नागफनी एवं एलोवेरा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — मक्का, ज्वार, बाजरा, गन्ना, रागी और चौलाई प्रमुख C4 फसलें हैं; अनन्नास व नागफनी CAM पौधे हैं; और धान, गेहूँ, दलहन व तिलहन C3 फसलें हैं।
6. निम्नलिखित में से कौन सी एक प्रमुख व्यावसायिक उद्यानिकी फल फसल 'CAM पथ' (Crassulacean Acid Metabolism) द्वारा प्रकाश-संश्लेषण करती है?
- (A) आम (Mango)
- (B) केला (Banana)
- (C) अनन्नास (Pineapple — Ananas comosus)
- (D) पपीता (Papaya)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) — अनन्नास (Pineapple), ड्रेगन फ्रूट और एगेव व्यावसायिक CAM फसलें हैं जिनमें रंध्र रात में खुलते हैं।
7. केल्विन चक्र (C3 Cycle) के तीन मुख्य चरणों का सही क्रम कौन सा है?
- (A) अपचयन → पुनर्जनन → कार्बोक्सिलीकरण
- (B) कार्बोक्सिलीकरण (Carboxylation) → अपचयन (Reduction) → RuBP का पुनर्जनन (Regeneration)
- (C) ग्लाइकोलाइसिस → क्रेब्स चक्र → ऑक्सीकरण
- (D) अम्लीकरण → डी-अम्लीकरण → अपचयन
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — केल्विन चक्र में पहले RuBP का कार्बोक्सिलीकरण होकर 3-PGA बनता है, फिर उसका G3P में अपचयन होता है और अंत में RuBP का पुनर्जनन होता है।
8. CAM पौधों में रात्रि के समय CO2 स्थिर होने के बाद किस कार्बनिक अम्ल के रूप में कोशिका की रिक्तिका (Vacuole) में संचित होती है?
- (A) सिट्रिक अम्ल
- (B) मैलिक अम्ल (Malic Acid)
- (C) पाइरूविक अम्ल
- (D) ग्लाइकोलिक अम्ल
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — CAM पौधों में रात में बना OAA मैलिक अम्ल में बदलकर रिक्तिका में जमा होता है (Nocturnal acidification) और दिन में टूटकर CO2 देता है।
9. मेल्विन केल्विन और बेंसन ने केल्विन चक्र (C3 पथ) के मध्यवर्ती यौगिकों का पता लगाने के लिए किस रेडियोधर्मी समस्थानिक और किस शैवाल का प्रयोग किया था?
- (A) 18O एवं स्पाइरोगाइरा
- (B) रेडियोधर्मी कार्बन-14 (14CO2) एवं हरी शैवाल क्लोरेला (Chlorella pyrenoidosa)
- (C) 32P एवं क्लेडोफोरा
- (D) 15N एवं नॉस्टॉक
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — केल्विन ने 'Lollipop apparatus' में *Chlorella* को 14CO2 देकर द्वि-विमीय पेपर क्रोमैटोग्राफी और ऑटोरेडियोग्राफी से 3-PGA की पहचान की।
10. C4 चक्र में पूल-आच्छद कोशिका से लौटे पाइरूवेट (3C) को मीसोफिल हरितलवक में वापस PEP (3C) में बदलने वाला एंजाइम कौन सा है जो 2 उच्च-ऊर्जा फॉस्फेट बंध खर्च करता है?
- (A) पाइरूवेट काइनेज
- (B) पाइरूवेट-फॉस्फेट डाइकाइनेज (Pyruvate-phosphate dikinase – PPDK)
- (C) रुबिस्को
- (D) एल्डोलेज
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — PPDK एंजाइम ATP + Pi की सहायता से पाइरूवेट को PEP + AMP + PPi में बदलता है (जिसमें 2 ATP के बराबर ऊर्जा लगती है)।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. C3 चक्र में 1 अणु CO2 के स्थिरीकरण के लिए कितने ATP और कितने NADPH अणुओं की आवश्यकता होती है?
3 ATP एवं 2 NADPH अणुओं की।
2. द्विबीजपत्री (Dicot) फसलों में से एक प्रसिद्ध C4 फसल का नाम लिखिए।
चौलाई (Amaranthus spp. — राजगिरा) एवं यूफोरबिया।
3. C4 पौधों में प्रथम स्थिर उत्पाद (OAA) को सबसे पहले सन् 1965 में किस फसल में देखा गया था?
गन्ने (Sugarcane — Kortschak, Hartt & Burr, 1965 द्वारा; और 1966 में Hatch & Slack ने पूरा चक्र स्पष्ट किया)।
4. C3 और C4 पौधों का CO2 क्षतिपूर्ति बिंदु (CO2 Compensation Point) कितना होता है?
C3 पौधों का: 40 से 60 ppm (उच्च) और C4 पौधों का: 0 से 5 ppm (अत्यंत कम)।
5. केल्विन चक्र में बनने वाली प्रथम शर्करा (First carbohydrate / sugar formed) कौन सी है?
3-कार्बन ट्रायोज फॉस्फेट — ग्लिसरैल्डिहाइड-3-फॉस्फेट (G3P / PGAL)।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. 'क्रैंज शारीरिकी' (Kranz Anatomy) और 'द्विरूपी हरितलवक' (Dimorphic Chloroplasts) क्या हैं और ये किन पौधों में पाए जाते हैं?
C4 पौधों (मक्का, गन्ना, ज्वार, बाजरा) की पत्तियों में संवहन बंडल के चारों ओर बड़ी व मोटी भित्ति वाली 'पूल-आच्छद कोशिकाएँ' (Bundle sheath cells) माला या छल्ले ('Kranz') के रूप में व्यवस्थित होती हैं और उनके बाहर मीसोफिल कोशिकाएँ होती हैं। इनमें दो प्रकार के हरितलवक होते हैं: 1. मीसोफिल हरितलवक—छोटे, ग्रेना-युक्त (PS-II उपस्थित) किंतु RuBisCO रहित; और 2. पूल-आच्छद हरितलवक—बड़े, ग्रेना-रहित (PS-II अनुपस्थित) किंतु RuBisCO और स्टार्च कणों से भरपूर।
2. केल्विन चक्र (C3 Cycle) के तीनों चरणों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
1. कार्बोक्सिलीकरण: स्ट्रोमा में RuBisCO एंजाइम 5-कार्बन RuBP को CO2 से जोड़कर 3-PGA (3C) के 2 अणु बनाता है। 2. अपचयन: प्रति CO2 2 ATP और 2 NADPH खर्च करके 3-PGA को 3-कार्बन शर्करा 'ग्लिसरैल्डिहाइड-3-फॉस्फेट (G3P)' में अपचयित किया जाता है (6 चक्रों में बने 12 G3P में से 2 अणु ग्लूकोज बनाते हैं)। 3. पुनर्जनन: शेष 10 G3P अणु प्रति CO2 1 ATP खर्च करके पुनः 6 अणु RuBP का निर्माण करते हैं।
3. C4 पौधों में 1 अणु ग्लूकोज बनाने में C3 पौधों (18 ATP) की तुलना में 12 अतिरिक्त ATP (कुल 30 ATP) क्यों खर्च होते हैं?
C4 पौधों में भी अंतिम शर्करा निर्माण पूल-आच्छद में चलने वाले केल्विन चक्र (C3 चक्र) से ही होता है जिसमें 18 ATP + 12 NADPH लगते हैं। किंतु C4 पौधों में मीसोफिल में प्राथमिक ग्राही PEP (3C) को पाइरूवेट (3C) से पुनः बनाने के लिए 'PPDK' एंजाइम 1 ATP को AMP + PPi में तोड़ता है जो प्रति CO2 '2 उच्च-ऊर्जा फॉस्फेट बंधों (2 ATP)' के बराबर होता है। अतः 6 CO2 के लिए 6 × 2 = 12 अतिरिक्त ATP (कुल 18 + 12 = 30 ATP) लगते हैं।
4. C4 पथ और CAM पथ में क्या समानताएँ और क्या मूलभूत अंतर हैं?
समानताएँ: दोनों में प्राथमिक CO2 ग्राही PEP (3C) है, प्रथम एंजाइम PEPCase है, प्रथम उत्पाद OAA (4C) है, द्वितीयक रूप से केल्विन चक्र चलता है और दोनों में 1 ग्लूकोज हेतु 30 ATP + 12 NADPH लगते हैं। मूलभूत अंतर: C4 में PEPCase और RuBisCO दो अलग-अलग कोशिकाओं (मीसोफिल व पूल-आच्छद — Spatial separation) में दिन के समय एक साथ काम करते हैं; जबकि CAM में क्रैंज शारीरिकी नहीं होती और दोनों क्रियाएँ एक ही कोशिका में अलग-अलग समय (रात में PEPCase व दिन में RuBisCO — Temporal separation) पर होती हैं।
5. मक्का व गन्ना (NADP-ME प्रकार) और बाजरा व चौलाई (NAD-ME प्रकार) के C4 उप-प्रकारों में क्या अंतर है?
मक्का, गन्ना और ज्वार 'NADP-ME' उप-प्रकार के C4 पौधे हैं जिनमें मीसोफिल से 4-कार्बन अम्ल 'मैलैट' के रूप में पूल-आच्छद के हरितलवक में जाता है और वहाँ NADP-मैलिक एंजाइम द्वारा टूटकर CO2 व NADPH देता है (इसलिए इनके पूल-आच्छद हरितलवक में ग्रेना व PS-II नहीं होते)। जबकि बाजरा और चौलाई 'NAD-ME' प्रकार के हैं जिनमें 'एस्पार्टेट' जाता है और पूल-आच्छद के माइटोकॉन्ड्रिया में टूटता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. केल्विन-बेंसन चक्र (C3 Pathway) के खोज इतिहास, तीनों चरणों की रासायनिक अभिक्रियाओं, संबंधित एंजाइमों और 1 ग्लूकोज अणु के निर्माण के संपूर्ण ऊर्जा बजट का सविस्तर वर्णन कीजिए।
केल्विन व बेंसन का 14CO2 व *Chlorella* प्रयोग, कार्बोक्सिलीकरण (RuBP + CO2 → 2 × 3-PGA), अपचयन (1,3-BPGA → G3P) और पुनर्जनन (10 G3P → 6 RuMP → 6 RuBP) की सभी अभिक्रियाएँ, एंजाइम और 6 चक्रों में 18 ATP + 12 NADPH का हिसाब विस्तार से लिखें।
2. हैच एवं स्लैक चक्र (C4 Pathway) का सचित्र वर्णन करते हुए क्रैंज शारीरिकी, द्विरूपी हरितलवकों, मीसोफिल एवं पूल-आच्छद की अभिक्रियाओं और इसके तीनों उप-प्रकारों (NADP-ME, NAD-ME एवं PEP-CK) की विवेचना कीजिए।
क्रैंज शारीरिकी व द्विरूपी हरितलवक का वर्णन, मीसोफिल व पूल-आच्छद के बीच दोहरे कार्बोक्सिलीकरण का आरेख (PEP → OAA → Malate → CO2 + Pyruvate → PEP), PPDK एंजाइम व 30 ATP बजट तथा तीनों डी-कार्बोक्सिलीकरण उप-प्रकारों का उदाहरण सहित वर्णन करें।
3. क्रैसुलेशियन अम्ल उपापचय (CAM Pathway) की रात्रि अम्लीकरण और दिवा वि-अम्लीकरण क्रियाविधि का वर्णन कीजिए तथा C3, C4 और CAM पौधों की 12 बिंदुओं पर तुलनात्मक सारणी (तालिका 13.1) प्रस्तुत कीजिए।
मरुस्थलीय अनुकूलन, Scotoactive रंध्र, रात्रि में स्टार्च → PEP → OAA → रिक्तिका में मैलिक अम्ल संचय और दिन में बंद रंध्रों में मैलिक अम्ल विखंडन व केल्विन चक्र का वर्णन करें तथा तालिका 13.1 के सभी 12 मानदंडों की तुलना लिखें।
परीक्षा वन-लाइनर्स
- C4 पौधों में 'Kranz' (माला/छल्ला) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम जर्मन वनस्पतिशास्त्री जी. हैबरलैंड्ट (Haberlandt, 1904) ने किया था।
- PEPCase एंजाइम केवल कोशिकाद्रव्य (Cytosol) में पाया जाता है, हरितलवक में नहीं; जबकि RuBisCO केवल हरितलवक के स्ट्रोमा में पाया जाता है!
- कपास, सूरजमुखी, मूँगफली, सोयाबीन, धान और गेहूँ सभी महत्वपूर्ण C3 फसलें हैं।
- दुनिया का सबसे खतरनाक बारहमासी खरपतवार 'मोथा' (Cyperus rotundus – Purple nutsedge) एक C4 पौधा है!
- C4 पौधों का ठंड (<10–15°C) के प्रति संवेदनशील होना उनके 'PPDK' (Pyruvate-phosphate dikinase) एंजाइम के ठंड में निष्क्रिय होने के कारण होता है।
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।





