PPHYS 311 Lecture 12: चक्रीय एवं अचक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Z-Scheme) तथा हिल अभिक्रिया (Hill Reaction)

Agro Path Finder official logo
AGRO PATH FINDER
PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
LECTURE 12 / 32 · PPHYS 311

चक्रीय एवं अचक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Z-Scheme) तथा हिल अभिक्रिया (Hill Reaction)

Cyclic and Non-cyclic Photophosphorylation and Hill Reaction

Hill Reaction & Hill Oxidants (DCPIP), Ruben & Kamen 18O2 Proof, Non-Cyclic Photophosphorylation (Z-Scheme of Hill & Bendall 1960), Cyclic Photophosphorylation & Mitchell's Chemiosmotic ATP Synthesis

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Cyclic and Non-cyclic Photophosphorylation and Hill Reaction (Theory • Lecture 12)
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • रॉबर्ट हिल (Robert Hill, 1937) की ऐतिहासिक 'हिल अभिक्रिया', कृत्रिम इलेक्ट्रॉन ग्राहियों (हिल ऑक्सीकारकों: Ferricyanide, DCPIP, Benzoquinone व प्राकृतिक हिल अभिकर्मक NADP+), और वैन नील (1931) तथा रूबेन व कामेन (1941 — H218O समस्थानिक प्रयोग) द्वारा यह सिद्ध करने को समझना कि प्रकाश-संश्लेषण में निकलने वाली O2 कार्बन डाइऑक्साइड से नहीं, बल्कि जल (H2O) से आती है!
  • डैनियल आर्नन (Arnon et al., 1954) द्वारा खोजे गए 'फोटोफॉस्फोराइलेशन' और हिल एवं बेंडॉल (Hill & Bendall, 1960) की 'Z-स्कीम' (अचक्रीय इलेक्ट्रॉन परिवहन: H2O→PS-II→Pheo→PQ→Cyt b6f→PC→PS-I→Fd→NADP+) तथा चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन की विस्तृत तुलना करना।
  • पीटर मिशेल (Peter Mitchell, 1961 — नोबेल पुरस्कार 1978) के 'रसोपरासरणी सिद्धांत' (Chemiosmotic Hypothesis) द्वारा थाइलाकोइड में प्रोटॉन प्रवणता और CF0−CF1 ATP Synthase से ATP निर्माण की क्रियाविधि सीखना।

प्रस्तावना · Introduction

सन् 1930 के दशक तक वैज्ञानिक यह मानते थे कि प्रकाश-संश्लेषण में निकलने वाली ऑक्सीजन (O2) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के टूटने से आती है। किंतु सी.बी. वैन नील (1931) के हरी गंधक जीवाणुओं पर कार्य, रॉबर्ट हिल (1937) के पृथक हरितलवक प्रयोग और रूबेन व कामेन (1941) के भारी ऑक्सीजन (18O) रेडियो-समस्थानिक प्रयोग ने हमेशा के लिए सिद्ध कर दिया कि मुक्त होने वाली 100% ऑक्सीजन जल (H2O) के प्रकाश-अपघटन से आती है! इसके बाद आर्नन (1954) ने प्रकाश में ATP निर्माण (Photophosphorylation) और हिल व बेंडॉल (1960) ने प्रसिद्ध 'Z-Scheme' प्रस्तुत की।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

हिल अभिक्रिया (Hill Reaction – Robert Hill, 1937)

पृथक किए गए हरितलवकों (Isolated chloroplasts) को जब CO2 की पूर्ण अनुपस्थिति में, किंतु किसी उपयुक्त इलेक्ट्रॉन ग्राही (Hydrogen acceptor / Hill oxidant जैसे फेरिक लवण या DCPIP डाई) की उपस्थिति में प्रकाश में रखा जाता है, तो जल का प्रकाश-अपघटन होकर ऑक्सीजन (O2) गैस मुक्त होती है और इलेक्ट्रॉन ग्राही अपचयित हो जाता है—इसे 'हिल अभिक्रिया' कहते हैं!

हिल अभिकर्मक / ऑक्सीकारक (Hill Reagents / Oxidants)

वे इलेक्ट्रॉन ग्राही पदार्थ जो हिल अभिक्रिया में जल से निकले इलेक्ट्रॉनों व प्रोटॉनों को ग्रहण करते हैं: प्राकृतिक हिल अभिकर्मक (Natural Hill oxidant in plants) = NADP+ (आर्नन, 1951 द्वारा खोजा गया); जबकि कृत्रिम हिल अभिकर्मक = पोटैशियम फेरीसायनाइड, बेंजोक्विनोन एवं DCPIP (2,6-Dichlorophenol indophenol — जो नीले रंग से अपचयित होकर रंगहीन हो जाता है!)।

फोटोफॉस्फोराइलेशन (Photophosphorylation – D.I. Arnon, 1954)

हरितलवक के थाइलाकोइड में प्रकाश ऊर्जा की सहायता से अकार्बनिक फॉस्फेट (Pi) और ADP को जोड़कर उच्च-ऊर्जा ATP का निर्माण करना [ADP+Pi→Light, ChlATP]। इसके दो प्रकार हैं—अचक्रीय (Non-cyclic) एवं चक्रीय (Cyclic)।

जेड-स्कीम (Z-Scheme of Electron Transport – Hill & Bendall, 1960)

अचक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन में जल (H2O) से PS-II (P680), साइटोक्रोम संकुल और PS-I (P700) से होते हुए NADP+ तक इलेक्ट्रॉन वाहकों को उनके रेडॉक्स विभव (Redox potential E0′) के क्रम में रखने पर अंग्रेजी के 'Z' अक्षर जैसी आकृति बनती है, जिसे हिल और बेंडॉल (1960) ने 'Z-स्कीम' नाम दिया!

वर्गीकरण · Classification

ऑक्सीजन जल से आती है — सिद्ध करने वाले 3 ऐतिहासिक मील के पत्थर

1. सी.बी. वैन नील (C.B. van Niel, 1931): इन्होंने बैंगनी व हरे गंधक जीवाणुओं (Green sulphur bacteria, जो H2O के स्थान पर H2S का उपयोग करते हैं) पर देखा कि वे CO2 स्थिर करते समय ऑक्सीजन न निकालकर गंधक (S) निकालते हैं: CO2+2H2S→(CH2O)+H2O+2S↓। इससे इन्होंने निष्कर्ष निकाला कि हरे पौधों में भी O2 जल (H2O) से आती है!
2. रॉबर्ट हिल (Robert Hill, 1937): *Stellaria media* से निकाले गए हरितलवक से बिना CO2 के ही केवल प्रकाश + जल + फेरिक ऑक्सलेट से O2 निकालकर दिखाई।
3. रूबेन एवं कामेन (Ruben, Randall, Kamen & Hyde, 1941): भारी समस्थानिक 18O (H218O बनाम C18O2) का उपयोग कर अंतिम रूप से सिद्ध किया कि जब पौधे को H218O दिया जाता है तभी भारी 18O2 गैस निकलती है:
6CO2+12H218O→Light, ChlC6H12O6+6H2O+618O2↑

फोटोफॉस्फोराइलेशन के 2 प्रकार (Arnon, 1954)

1. अचक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Non-Cyclic Photophosphorylation / Z-Scheme): जिसमें PS-II (P680) से निकला इलेक्ट्रॉन वापस P680 में न लौटकर PS-I से होते हुए NADP+ में चला जाता है; इसमें ATP, NADPH+H+ और O2 तीनों बनते हैं।
2. चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Cyclic Photophosphorylation): जिसमें PS-I (P700) से निकला इलेक्ट्रॉन फेरेडॉक्सिन व साइटोक्रोम b6f से घूमकर वापस P700 में ही लौट आता है; इसमें केवल ATP बनता है (NADPH और O2 नहीं बनते)!

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • हिल और बेंडॉल की 'Z-स्कीम' में इलेक्ट्रॉन वाहकों का सटीक अनुक्रम (Exact Sequence of Electron Carriers in Z-Scheme — हर परीक्षा में पूछा जाता है!):
    H2O→Mn2+,Ca2+,Cl−OEC→Tyr-Z→P680 (PS-II)→LightP680*→Pheophytin (Pheo)→QA→QB (Plastoquinone - PQ)→Cytochrome b6f Complex (FeS + Cyt b6 + Cyt f)→Plastocyanin (PC — Cu protein)→P700 (PS-I)→LightP700*→A0→A1→FeS(X,A,B)→Ferredoxin (Fd)→FNR enzymeNADP+→NADPH+H+!
  • पीटर मिशेल का रसोपरासरणी सिद्धांत (Chemiosmotic Hypothesis of ATP Synthesis — Peter Mitchell, 1961): थाइलाकोइड में ATP कैसे बनता है?
    1. जब इलेक्ट्रॉन Z-स्कीम में चलते हैं, तो दो कारणों से थाइलाकोइड की भीतरी गुहा (Thylakoid Lumen) में प्रोटॉन (H+) जमा हो जाते हैं:
    • (a) ल्यूमेन की तरफ जल के टूटने से (2H2O→O2+4H+ ल्यूमेन में छूटते हैं)।
    • (b) प्लास्टोक्विनोन (PQ — Q-cycle) जब स्ट्रोमा से 2e− लेता है तो स्ट्रोमा से 2H+ उठाकर उन्हें साइटोक्रोम b6f के माध्यम से ल्यूमेन के अंदर छोड़ देता है!
    2. इससे थाइलाकोइड ल्यूमेन में H+ की सांद्रता बहुत बढ़ जाती है (pH घटकर ~5.0, अम्लीय) और बाहर स्ट्रोमा में H+ कम हो जाते हैं (pH बढ़कर ~8.0, क्षारीय)—अर्थात् झिल्ली के आर-पार ΔpH=3.0 का प्रबल प्रोटॉन प्रेरक बल (Proton Motive Force – PMF) बन जाता है!
    3. जब ये H+ आयन उच्च सांद्रता (ल्यूमेन) से निम्न सांद्रता (स्ट्रोमा) की ओर थाइलाकोइड के CF0−CF1 ATP Synthase (जहाँ CF0 झिल्ली में प्रोटॉन चैनल है और CF1 स्ट्रोमा की ओर निकला गोलाकार उत्प्रेरक सिर है) में से होकर बाहर निकलते हैं, तो CF1 मोटर की तरह घूमकर ADP+Pi से ATP का संश्लेषण कर देता है!

कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics

1. Hill Reaction, Photolysis of Water (Oxygen Evolving Complex) & Ruben-Kamen Proof (हिल अभिक्रिया एवं जल का प्रकाश-अपघटन)

Isolated Chloroplasts & Intact Leaves

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Isolated Chloroplasts & Intact Leaves

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रमुख वैज्ञानिक: रॉबर्ट हिल (1937), वैन नील (1931), रूबेन एवं कामेन (1941) एवं बेसल कोक (1970 – S-state model of water splitting)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: पृथ्वी के वायुमंडल में उपस्थित समस्त प्राणवायु ऑक्सीजन (O2) केवल इसी हिल अभिक्रिया (जल के प्रकाश-अपघटन) की देन है!

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. हिल अभिक्रिया का समीकरण:
2H2O+2A (Hill Oxidant)→Light, Chloroplast2AH2 (Reduced acceptor)+O2↑
• जब प्रयोगशाला में नीले रंग की डाई DCPIP (2,6-Dichlorophenol indophenol) को हिल अभिकर्मक के रूप में पृथक हरितलवक के साथ प्रकाश में रखते हैं, तो जल से निकले इलेक्ट्रॉन व प्रोटॉन लेकर नीला DCPIP अपचयित होकर रंगहीन (DCPIPH2) हो जाता है—इससे प्रकाश-संश्लेषण की प्रकाशीय दर को स्पेक्ट्रोफोटोमीटर में सीधे मापा जाता है!
• जीवित पौधे में प्राकृतिक हिल अभिकर्मक NADP+ है (जिसे पहले 'विशाल की सह-कारक' एवं आर्नन द्वारा 1951 में पहचाना गया)।

2. जल के प्रकाश-अपघटन का तंत्र (Mechanism of Photolysis of Water / Kok's S-State Clock, 1970):
• स्थान: यह थाइलाकोइड झिल्ली की भीतरी सतह (Lumenal side) पर PS-II से जुड़े Oxygen Evolving Complex (OEC) में होता है।
• आवश्यक खनिज आयन: 4 मैंगनीज आयन (Mn4CaO5 cluster)+कैल्शियम (Ca2+)+क्लोराइड (Cl−)।
• बेसल कोक (1970) की 'S-अवस्था घड़ी' के अनुसार OEC का मैंगनीज क्लस्टर P680 को एक-एक करके 4 बार इलेक्ट्रॉन देता है (S0→S1→S2→S3→S4) और S4 अवस्था में पहुँचते ही एक झटके में जल के 2 अणुओं को तोड़कर 1 अणु O2 गैस, 4 प्रोटॉन (4H+) और 4 इलेक्ट्रॉन (4e−) मुक्त करता है:
2H2O→4 Photons, Mn2+,Ca2+,Cl−O2↑+4H+ (in Lumen)+4e−

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): क्योंकि प्रकाश-संश्लेषण के समीकरण में उत्पाद में 6H2O बनते भी हैं और 6O2 (अर्थात् 12 ऑक्सीजन परमाणु) पूरी तरह जल से आते हैं, इसलिए प्रकाश-संश्लेषण का सही संतुलित समीकरण 6CO2+6H2O न होकर 6CO2+12H2O→C6H12O6+6H2O+6O2↑ लिखा जाता है!

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): शाकनाशी DCMU (Diuron), Atrazine और Paraquat हिल अभिक्रिया के ही विशिष्ट अवरोधक (Inhibitors) हैं।

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): प्रोटॉन (H+) थाइलाकोइड ल्यूमेन में छूट जाते हैं जो ATP बनाने के काम आते हैं, और इलेक्ट्रॉन P680+ से होते हुए NADP+ तक जाते हैं।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Hill Reaction (1937) = Photolysis of water & O2 evolution in absence of CO2 using artificial electron acceptors (Ferricyanide, DCPIP: Blue → Colorless)
  • Natural Hill reagent in plants = NADP+
  • Ruben & Kamen (1941) used heavy isotope 18O (H2 18O) to prove O2 comes from water
  • Minerals for water splitting = Mn2+, Cl- & Ca2+ (on lumen side of PS-II)।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

फसल में मैंगनीज (Mn) या क्लोरीन (Cl) की कमी होने पर सबसे पहले हिल अभिक्रिया (जल का प्रकाश-अपघटन और O2 निकास) ही बाधित होती है।

2. Non-Cyclic (Z-Scheme) vs Cyclic Photophosphorylation & Chemiosmotic Theory (अचक्रीय व चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन एवं रसोपरासरणी सिद्धांत)

All Higher Plants, Algae & Cyanobacteria

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): All Higher Plants, Algae & Cyanobacteria

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रस्तावक: आर्नन (1954 – Photophosphorylation), हिल एवं बेंडॉल (1960 – Z-Scheme), पीटर मिशेल (1961 – Chemiosmotic theory)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: केल्विन चक्र (Dark reaction) में 1 CO2 स्थिर करने के लिए 2 NADPH और 3 ATP (अनुपात 2 : 3) चाहिए; अचक्रीय पथ 2 NADPH के साथ ~2.57 ATP देता है, और शेष अतिरिक्त ATP की पूर्ति 'चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन' द्वारा की जाती है!

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. अचक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Non-Cyclic Photophosphorylation / Z-Scheme):
• इसमें PS-II (P680) और PS-I (P700) दोनों श्रेणीक्रम में भाग लेते हैं।
• P680 से निकला इलेक्ट्रॉन Pheophytin → Plastoquinone (PQ) → Cytochrome b6f संकुल → Plastocyanin (PC) से होता हुआ P700 में पहुँचता है (यहाँ PQ से Cyt b6f के बीच प्रोटॉन पंप होने से ATP बनता है)।
• फिर P700 से उत्तेजित इलेक्ट्रॉन A0→A1→Fe-S→ Ferredoxin (Fd) से होता हुआ FNR (Ferredoxin-NADP+ Reductase) एंजाइम द्वारा स्ट्रोमा की तरफ NADP++2e−+2H+→NADPH+H+ बनाता है!
• P680+ में हुई इलेक्ट्रॉन की कमी जल (H2O) के टूटने से पूरी होती है जिससे O2 निकलती है।

2. चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Cyclic Photophosphorylation):
• यह मुख्यतः स्ट्रोमा लैमेली (Fret channels) में और C4 पौधों के पूल-आच्छद (Bundle sheath) क्लोरोप्लास्ट में तब चलता है जब: (i) प्रकाश की तरंगदैर्ध्य >680 nm हो, या (ii) कोशिका में NADPH भर चुका हो और NADP+ उपलब्ध न हो, या (iii) अतिरिक्त ATP की आवश्यकता हो।
• इसमें केवल PS-I (P700) भाग लेता है! P700 से निकला इलेक्ट्रॉन A0→A1→Fe-S→ Ferredoxin (Fd) पर जाता है; वहाँ से NADP+ पर जाने के बजाय वापस मुड़कर Plastoquinone (PQ) → Cytochrome b6f संकुल → Plastocyanin (PC) से होता हुआ पुनः P700 में ही लौट आता है!
• इसमें प्रत्येक चक्र में PQ द्वारा ल्यूमेन में H+ पंप किए जाने से केवल ATP का निर्माण होता है; न तो जल टूटता है, न O2 निकलती है और न ही NADPH बनता है!

3. छद्म-चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन / मेहलर अभिक्रिया (Pseudocyclic Photophosphorylation / Mehler Reaction, 1951):
• जब तेज धूप में NADP+ कम पड़ जाता है, तो फेरेडॉक्सिन अपना इलेक्ट्रॉन सीधे आणविक ऑक्सीजन (O2) को दे देता है जिससे सुपरऑक्साइड और H2O2 बनता है (जिसे Ascorbate peroxidase जल में बदल देता है: 'Water-Water Cycle'); इसमें भी बिना NADPH बने केवल ATP बनता है!

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): रसोपरासरणी गणना: आधुनिक जैव-ऊर्जाकी के अनुसार CF0−CF1 ATP Synthase से 1 अणु ATP बनाने में लगभग 4 H+ (या 14/3=4.67 H+) लगते हैं; अचक्रीय पथ में 4 इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह (1 O2 निकास) से ल्यूमेन में कुल 12 H+ (4 जल से + 8 PQ चक्र से) जमा होते हैं जिनसे ~2.57 से 3 ATP और 2 NADPH बनते हैं।

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): अमोनियम आयन (NH4+), ग्रैमिसिडिन और नाइजेरिसिन थाइलाकोइड की प्रोटॉन प्रवणता (ΔpH) को नष्ट करके इलेक्ट्रॉन प्रवाह रोके बिना ही ATP निर्माण बंद कर देते हैं जिन्हें 'अनकपलर' (Uncouplers of photophosphorylation) कहते हैं!

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): प्लास्टोसायनिन (Plastocyanin – PC) एक ताँबा-युक्त (Copper-containing) नीला प्रोटीन है जो थाइलाकोइड ल्यूमेन में तैरकर Cyt b6f से PS-I तक इलेक्ट्रॉन ले जाता है।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Z-Scheme sequence: H2O → PS-II (P680) → Pheo → PQ → Cyt b6f → PC (Cu-protein) → PS-I (P700) → A0/FeS → Fd → FNR → NADP+
  • Non-cyclic = Both PS-I & PS-II, produces ATP + NADPH + O2
  • Cyclic = Only PS-I (P700 → Fd → PQ → Cyt b6f → PC → P700), produces ONLY ATP (No NADPH, No O2)
  • Chemiosmotic theory (Mitchell, 1961): H+ accumulates in Thylakoid Lumen (pH ~5.0 vs Stroma pH ~8.0) → ATP synthesis via CF0-CF1।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

C4 पौधों (मक्का, गन्ना) की पूल-आच्छद (Bundle sheath) कोशिकाओं के हरितलवक में ग्रेना नहीं होते ('Agranul chloroplast'); वहाँ PS-II अनुपस्थित होता है और केवल PS-I द्वारा 'चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन' से अतिरिक्त ATP बनाया जाता है!

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 12.1: अचक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Non-Cyclic) बनाम चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Cyclic) की तुलना

तुलना का आधारअचक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Non-Cyclic / Z-Scheme)चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Cyclic Photophosphorylation)
शामिल प्रकाश-तंत्रPS-I (P700) और PS-II (P680) दोनों भाग लेते हैंकेवल PS-I (P700) भाग लेता है (PS-II शामिल नहीं)
इलेक्ट्रॉन का पथइलेक्ट्रॉन उद्गम स्रोत (H2O) में वापस नहीं लौटता (H2O→NADP+)P700 से निकला इलेक्ट्रॉन घूमकर वापस P700 में ही लौट आता है
जल का प्रकाश-अपघटन एवं O2जल का अपघटन होता है और O2 गैस निकलती हैजल का अपघटन नहीं होता और O2 नहीं निकलती
अंतिम उत्पाद (Products)ATP + NADPH+H+ + O2 तीनों बनते हैंकेवल ATP बनता है (NADPH और O2 नहीं बनते)
मुख्य स्थानसटे हुए ग्रेना थाइलाकोइड (Appressed grana)स्ट्रोमा लैमेली (Fret channels) एवं C4 पूल-आच्छद क्लोरोप्लास्ट
DCMU शाकनाशी का प्रभावपूर्णतः रुक जाता हैDCMU से अप्रभावित रहता है (क्योंकि PS-II शामिल नहीं है)

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. रसोपरासरणी प्रोटॉन प्रेरक बल (Proton Motive Force – PMF) एवं अचक्रीय पथ का ऊर्जा संतुलन समीकरण

1. Non-Cyclic Overall Equation: 2H2O + 2NADP+ + 3ADP + 3Pi ──(8 Photons)──► O2 ↑ + 2NADPH + 2H+ + 3ATP | 2. PMF (mV) = ΔΨ − 59 · ΔpH

उदाहरण (थाइलाकोइड बनाम माइटोकॉन्ड्रिया में PMF का अंतर — परीक्षा का सूक्ष्म प्रश्न!):
• सूत्र PMF=ΔΨ−59·ΔpH में: माइटोकॉन्ड्रिया में प्रोटॉन प्रेरक बल मुख्यतः विद्युत विभवांतर (ΔΨ) से बनता है; किंतु हरितलवक के थाइलाकोइड में झिल्ली Cl− और Mg2+ के लिए पारगम्य होने से ΔΨ≈0 हो जाता है और संपूर्ण ATP संश्लेषण केवल 'ΔpH प्रवणता' (ल्यूमेन pH 5.0 एवं स्ट्रोमा pH 8.0 ⟹ΔpH=3.0 इकाई ⟹3×59≈180 mV) से चलता है!

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 12: चक्रीय एवं अचक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Z-स्कीम) तथा हिल अभिक्रिया]
├── 1. हिल अभिक्रिया एवं O2 स्रोत का प्रमाण (Hill Reaction & O2 Proof)
│ ├── Van Niel (1931): गंधक जीवाणुओं (H2S → S) से सुझाया कि पौधों में O2 जल (H2O) से आती है
│ ├── Robert Hill (1937): बिना CO2 के पृथक हरितलवक + प्रकाश + कृत्रिम ऑक्सीकारक (Ferricyanide / DCPIP: नीला → रंगहीन) से O2 निकाली
│ ├── प्राकृतिक हिल अभिकर्मक = NADP+ (Arnon, 1951) | जल-अपघटन खनिज = Mn2+, Cl-, Ca2+
│ └── Ruben & Kamen (1941): भारी समस्थानिक H2(18O) से सिद्ध किया कि 100% O2 जल से आती है
├── 2. अचक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन / Z-स्कीम (Hill & Bendall, 1960; Arnon, 1954)
│ ├── दोनों तंत्र (PS-II एवं PS-I) श्रेणीक्रम में कार्य करते हैं | स्थान: ग्रेना थाइलाकोइड
│ ├── इलेक्ट्रॉन क्रम: H2O → OEC → P680 (PS-II) → Pheo → PQ → Cyt b6f → PC (Cu) → P700 (PS-I) → A0 → FeS → Fd → FNR → NADP+
│ └── उत्पाद: ATP + NADPH + H+ एवं O2
├── 3. चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Cyclic Photophosphorylation)
│ ├── केवल PS-I (P700) भाग लेता है (स्थान: Stroma lamellae एवं C4 Bundle sheath)
│ └── इलेक्ट्रॉन क्रम: P700 → A0 → FeS → Fd → PQ → Cyt b6f → PC → वापस P700 | उत्पाद: केवल ATP (No NADPH, No O2)
└── 4. रसोपरासरणी ATP संश्लेषण सिद्धांत (Chemiosmotic Hypothesis — Peter Mitchell, 1961)
├── थाइलाकोइड ल्यूमेन में H+ का संचयन (जल टूटने + PQ चक्र से) → Lumen pH = 5.0 (उच्च H+) एवं Stroma pH = 8.0 (कम H+)
└── ल्यूमेन से स्ट्रोमा की ओर CF0-CF1 ATP Synthase के रास्ते H+ बाहर निकलने पर ADP + Pi से ATP का निर्माण

प्रवाह चित्र · Flowchart

[हिल एवं बेंडॉल (Hill & Bendall, 1960) की 'Z-स्कीम' (अचक्रीय) एवं 'चक्रीय' इलेक्ट्रॉन परिवहन का एकीकृत आरेख]
रेडॉक्स विभव (E0')
-1.2 V ── [Pheophytin] [A0 → A1 → FeS]
▲ │ ▲ │
│ ▼ │ ▼
-0.4 V ── │ [PQ (QA→QB)] ◄──(Cyclic Path)── │ [Ferredoxin (Fd)]
│ │ │ │ (FNR enzyme)
(फोटॉन) ▼ (फोटॉन) ▼
0.0 V ── (PS-II) [Cytochrome b6f Complex] (PS-I) 【NADP+ ──► NADPH + H+】
│ (प्रोटॉन पंप ──► ATP) │
│ │ │
+0.4 V ── │ ▼ │
│ [Plastocyanin (PC - Cu)] ──► [P700 (PS-I)]
│
+0.8 V ── 【2H2O ──► O2 ↑ + 4H+】 ──► [P680 (PS-II)]

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • Z-स्कीम के इलेक्ट्रॉन वाहकों का क्रम हर परीक्षा में आता है: Pheophytin → Plastoquinone (PQ) → Cytochrome b6f → Plastocyanin (PC) →P700→ Ferredoxin (Fd) → NADP+! इसमें विशेष रूप से याद रखें कि Cyt b6f से P700 को इलेक्ट्रॉन देने वाला वाहक Plastocyanin (ताम्र-युक्त प्रोटीन) है!
  • रसोपरासरणी सिद्धांत (Chemiosmotic theory – Peter Mitchell, 1961) में प्रकाश के समय प्रोटॉन (H+) कहाँ एकत्रित होते हैं और कहाँ का pH कम हो जाता है? उत्तर: थाइलाकोइड ल्यूमेन (Thylakoid Lumen / Cavity) के अंदर H+ एकत्रित होते हैं और ल्यूमेन का pH घटकर 5.0 (अम्लीय) हो जाता है, जबकि स्ट्रोमा का pH बढ़कर 8.0 हो जाता है!
  • हिल अभिक्रिया में प्रयुक्त नीली डाई DCPIP अपचयित होने पर कैसी हो जाती है? उत्तर: नीले रंग से रंगहीन (Blue to Colorless) हो जाती है; और पौधे का प्राकृतिक हिल अभिकर्मक NADP+ है!

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • Hill Reaction (1937): CO2 की अनुपस्थिति में पृथक हरितलवकों द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्राही की उपस्थिति में प्रकाश में जल तोड़कर O2 निकालना।
  • Ruben & Kamen (1941): H218O समस्थानिक से सिद्ध किया कि प्रकाश-संश्लेषण की O2 जल से आती है।
  • Photophosphorylation (चक्रीय व अचक्रीय) की खोज डैनियल आर्नन (D.I. Arnon, 1954) ने की थी।
  • Z-स्कीम का प्रतिपादन रॉबर्ट हिल एवं फेय बेंडॉल (Hill & Bendall, 1960) ने किया था।
  • चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन में केवल PS-I भाग लेता है और केवल ATP बनता है (NADPH व O2 नहीं बनते)।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. सन् 1937 में किस वैज्ञानिक ने सिद्ध किया कि पृथक किए गए हरितलवक (Isolated chloroplasts) CO2 की अनुपस्थिति में भी किसी कृत्रिम हाइड्रोजन ग्राही (जैसे फेरिक लवण या DCPIP) की उपस्थिति में प्रकाश मिलने पर जल को तोड़कर ऑक्सीजन (O2) निकालते हैं?

  • (A) मेल्विन केल्विन
  • (B) रॉबर्ट हिल (Robert Hill, 1937 — 'Hill Reaction')
  • (C) डैनियल आर्नन
  • (D) पीटर मिशेल
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — रॉबर्ट हिल (1937) ने बिना CO2 के पृथक हरितलवक से O2 उत्सर्जन प्रदर्शित किया जिसे 'Hill Reaction' कहा जाता है।

2. सन् 1941 में भारी ऑक्सीजन समस्थानिक (18O — H2 18O एवं C18O2) का प्रयोग करके यह किसने निर्विवाद रूप से सिद्ध किया कि प्रकाश-संश्लेषण में मुक्त होने वाली ऑक्सीजन जल (H2O) से आती है, न कि CO2 से?

  • (A) रूबेन, रैंडल, कामेन एवं हाइड (Ruben & Kamen et al., 1941)
  • (B) जोसेफ प्रीस्टले (1771)
  • (C) इंगेनहाउज़ (1779)
  • (D) वॉन सैक्स (1862)
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — वैन नील (1931) ने परिकल्पना दी और रूबेन एवं कामेन (1941) ने H2 18O रेडियो-आइसोटोप प्रयोग से इसे प्रमाणित किया।

3. अचक्रीय इलेक्ट्रॉन परिवहन की प्रसिद्ध 'Z-स्कीम' (Z-Scheme, 1960) किन वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिपादित की गई थी?

  • (A) रॉबर्ट हिल एवं फेय बेंडॉल (Hill & Bendall, 1960)
  • (B) हैच एवं स्लैक (1966)
  • (C) इमर्सन एवं लुईस (1943)
  • (D) केल्विन एवं बेंसन (1954)
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — हिल एवं बेंडॉल (1960) ने रेडॉक्स विभव के अनुसार दोनों प्रकाश-तंत्रों को जोड़ते हुए 'Z-Scheme' मॉडल प्रस्तुत किया।

4. चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Cyclic Photophosphorylation) के दौरान निम्नलिखित में से किसका निर्माण होता है?

  • (A) ATP, NADPH और O2 तीनों का
  • (B) केवल ATP का (इसमें न तो जल टूटता है, न O2 निकलती है और न ही NADPH बनता है)
  • (C) केवल NADPH का
  • (D) केवल O2 और ग्लूकोज का
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — चक्रीय पथ में केवल PS-I (P700) भाग लेता है और इलेक्ट्रॉन वापस P700 में लौट आता है, जिससे केवल ATP बनता है।

5. Z-स्कीम में साइटोक्रोम b6f संकुल (Cytochrome b6f) से इलेक्ट्रॉन लेकर प्रकाश-तंत्र I (P700) तक पहुँचाने वाला गतिशील 'ताम्र-युक्त (Copper-containing) नीला प्रोटीन' कौन सा है?

  • (A) फेरेडॉक्सिन (Iron-sulphur protein)
  • (B) प्लास्टोसायनिन (Plastocyanin – PC)
  • (C) प्लास्टोक्विनोन (PQ)
  • (D) फियोफाइटिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — प्लास्टोसायनिन (PC) एक कॉपर-युक्त प्रोटीन है जो थाइलाकोइड ल्यूमेन में Cyt f से P700 को इलेक्ट्रॉन देता है।

6. पीटर मिशेल (Peter Mitchell, 1961 — नोबेल पुरस्कार 1978) के 'रसोपरासरणी सिद्धांत' (Chemiosmotic Hypothesis) के अनुसार हरितलवक में प्रकाश के समय प्रोटॉन (H⁺) कहाँ संचित होते हैं और कहाँ का pH घटकर ~5.0 हो जाता है?

  • (A) स्ट्रोमा में
  • (B) थाइलाकोइड की भीतरी गुहा (Thylakoid Lumen) में (जिससे ल्यूमेन का pH घटकर 5.0 और स्ट्रोमा का pH बढ़कर 8.0 हो जाता है)
  • (C) कोशिकाद्रव्य में
  • (D) माइटोकॉन्ड्रिया के बाहर
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — जल-अपघटन और PQ चक्र द्वारा H⁺ थाइलाकोइड ल्यूमेन के अंदर पंप होते हैं और CF0-CF1 से बाहर स्ट्रोमा में निकलते समय ATP बनाते हैं।

7. जीवित पादप कोशिकाओं (हरितलवक) में हिल अभिक्रिया का 'प्राकृतिक हाइड्रोजन/इलेक्ट्रॉन ग्राही' (Natural Hill Oxidant) कौन सा है?

  • (A) DCPIP डाई
  • (B) पोटैशियम फेरीसायनाइड
  • (C) NADP⁺ (Nicotinamide Adenine Dinucleotide Phosphate — Arnon, 1951)
  • (D) FAD
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — प्रयोगशाला में DCPIP या फेरीसायनाइड कृत्रिम हिल अभिकर्मक हैं, जबकि जीवित पौधे में NADP⁺ प्राकृतिक हिल अभिकर्मक है।

8. प्रकाश-संश्लेषण में जल के प्रकाश-अपघटन (Photolysis of water) और ऑक्सीजन उत्सर्जन के लिए कौन से खनिज आयनों का समूह अनिवार्य है?

  • (A) नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटाश
  • (B) मैंगनीज (Mn²⁺), क्लोराइड (Cl⁻) एवं कैल्शियम (Ca²⁺)
  • (C) जिंक, बोरॉन एवं मॉलिब्डेनम
  • (D) सोडियम एवं सिलिकॉन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — PS-II के ऑक्सीजन उत्सर्जक संकुल (OEC) में 4 मैंगनीज आयन (Mn4), 1 कैल्शियम (Ca²⁺) और क्लोराइड (Cl⁻) जल को तोड़ते हैं।

9. हिल अभिक्रिया का परीक्षण करते समय जब नीले रंग की कृत्रिम डाई 'DCPIP' (2,6-Dichlorophenol indophenol) प्रकाश में इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर अपचयित होती है, तो उसके रंग में क्या परिवर्तन आता है?

  • (A) रंगहीन से लाल हो जाती है
  • (B) गहरे नीले रंग से रंगहीन (Blue to Colorless) हो जाती है
  • (C) पीले से काली हो जाती है
  • (D) कोई परिवर्तन नहीं होता
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — ऑक्सीकृत DCPIP नीले रंग का होता है जो इलेक्ट्रॉन व H⁺ पाकर अपचयित रंगहीन DCPIPH2 में बदल जाता है।

10. थाइलाकोइड झिल्ली में स्थित ATP Synthase एंजाइम संकुल (CF0–CF1) का कौन सा भाग स्ट्रोमा की ओर उभरा रहता है और वास्तव में ADP + Pi से ATP का संश्लेषण करता है?

  • (A) CF0 (जो झिल्ली में धँसा प्रोटॉन चैनल है)
  • (B) CF1 शीर्ष भाग (Catalytic headpiece protruding into the stroma)
  • (C) साइटोक्रोम b6
  • (D) फाइटोल पूँछ
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — CF0 झिल्ली के आर-पार H⁺ चैनल बनाता है और स्ट्रोमा की ओर निकला गोलाकार 'CF1' कण घूर्णन उत्प्रेरण द्वारा ATP बनाता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. सन् 1954 में हरितलवक में प्रकाश द्वारा ATP निर्माण ('Photophosphorylation') की खोज किसने की थी?

डैनियल आई. आर्नन एवं सहयोगियों (D.I. Arnon et al., 1954) ने।

2. हरी गंधक जीवाणुओं (Green sulphur bacteria) के अध्ययन से सन् 1931 में किसने सुझाया कि प्रकाश-संश्लेषण में O2 जल से आती है?

सी.बी. वैन नील (C.B. van Niel, 1931) ने।

3. कृत्रिम हिल अभिकर्मक 'DCPIP' का पूरा नाम लिखिए।

2,6-Dichlorophenol indophenol (2,6-डाइक्लोरोफिनॉल इंडोफिनॉल)।

4. Z-स्कीम में सबसे पहला गतिशील लिपिड-घुलनशील हाइड्रोजन व इलेक्ट्रॉन वाहक कौन सा है जो स्ट्रोमा से प्रोटॉन उठाकर ल्यूमेन में डालता है?

प्लास्टोक्विनोन (Plastoquinone – PQ)।

5. मेहलर अभिक्रिया (Mehler Reaction, 1951) को किस अन्य नाम से जाना जाता है?

छद्म-चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन (Pseudocyclic photophosphorylation) या वाटर-वाटर चक्र।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. हिल अभिक्रिया (Hill Reaction, 1937) क्या है और पादप कार्यिकी में इसका क्या महत्व है?

रॉबर्ट हिल (1937) ने दिखाया कि जब पत्ती से निकाले गए पृथक हरितलवकों को CO2 की पूर्ण अनुपस्थिति में, किंतु किसी कृत्रिम इलेक्ट्रॉन ग्राही (जैसे पोटैशियम फेरीसायनाइड या DCPIP) के साथ पानी में रखकर प्रकाश डाला जाता है, तो जल टूटकर ऑक्सीजन (O2) गैस निकलती है। महत्व: इस प्रयोग ने सिद्ध किया कि 1. प्रकाश-संश्लेषण में O2 जल से आती है (न कि CO2 से), और 2. प्रकाशीय अभिक्रिया CO2 स्थिरीकरण (अंधकार अभिक्रिया) से अलग एक स्वतंत्र प्रक्रिया है।

2. अचक्रीय (Non-cyclic) और चक्रीय (Cyclic) फोटोफॉस्फोराइलेशन में पाँच प्रमुख अंतर लिखिए।

1. अचक्रीय में PS-I और PS-II दोनों भाग लेते हैं, जबकि चक्रीय में केवल PS-I (P700) भाग लेता है। 2. अचक्रीय में इलेक्ट्रॉन वापस P680 में नहीं लौटता, जबकि चक्रीय में इलेक्ट्रॉन वापस P700 में लौट आता है। 3. अचक्रीय में जल का अपघटन और O2 का निकास होता है, जबकि चक्रीय में नहीं होता। 4. अचक्रीय में ATP व NADPH दोनों बनते हैं, जबकि चक्रीय में केवल ATP बनता है। 5. अचक्रीय ग्रेना में और चक्रीय मुख्यतः स्ट्रोमा लैमेली में होता है।

3. हिल एवं बेंडॉल (1960) की 'Z-स्कीम' (Z-Scheme) में जल से NADP⁺ तक इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह का क्रम लिखिए।

प्रकाश पड़ने पर PS-II के P680 से इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर प्राथमिक ग्राही फियोफाइटिन (Pheo) पर जाता है। वहाँ से यह Plastoquinone (QA → QB) → Cytochrome b6f संकुल (जहाँ प्रोटॉन पंप होने से ATP बनता है) → ताम्र-प्रोटीन Plastocyanin (PC) से होता हुआ PS-I के P700 में जाता है। P700 से पुनः उत्तेजित इलेक्ट्रॉन A0 → A1 → Fe-S केंद्रों → Ferredoxin (Fd) से होते हुए FNR एंजाइम द्वारा स्ट्रोमा में NADP⁺ को NADPH + H⁺ में अपचयित करता है, और P680 की कमी जल के टूटने से पूरी होती है।

4. पीटर मिशेल (1961) के 'रसोपरासरणी सिद्धांत' (Chemiosmotic Theory) द्वारा हरितलवक में ATP निर्माण कैसे होता है?

जब थाइलाकोइड झिल्ली में इलेक्ट्रॉन प्रवाहित होते हैं, तो ल्यूमेन की ओर जल के टूटने (2H2O → O2 + 4H⁺) और Plastoquinone द्वारा स्ट्रोमा से ल्यूमेन में H⁺ पंप किए जाने से थाइलाकोइड ल्यूमेन में H⁺ आयनों की सांद्रता बहुत बढ़ जाती है (ल्यूमेन pH 5.0 व स्ट्रोमा pH 8.0)। इस प्रोटॉन प्रवणता (ΔpH) के कारण जब H⁺ आयन झिल्ली के CF0–CF1 ATP Synthase चैनल से तेजी से स्ट्रोमा में बाहर निकलते हैं, तो CF1 उत्प्रेरक सिर घूमकर ADP + Pi से ATP का निर्माण कर देता है।

5. वैन नील (1931) और रूबेन व कामेन (1941) ने कैसे सिद्ध किया कि प्रकाश-संश्लेषण में निकलने वाली ऑक्सीजन जल से आती है?

1. वैन नील (1931) ने देखा कि हरे गंधक जीवाणु H2O के बजाय H2S का उपयोग करते हैं और CO2 से भोजन बनाते समय O2 न निकालकर गंधक (S) निकालते हैं; अतः सामान्य पौधों में O2 का स्रोत H2O ही होना चाहिए। 2. रूबेन व कामेन (1941) ने भारी समस्थानिक 18O से युक्त जल (H2 18O) और सामान्य CO2 देकर देखा कि निकलने वाली समस्त ऑक्सीजन भारी (18O2) थी, जिससे यह 100% प्रमाणित हो गया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. हिल एवं बेंडॉल (1960) की 'Z-स्कीम' (अचक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन) और 'चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन' की क्रियाविधि का आरेख सहित सविस्तर वर्णन कीजिए तथा दोनों की तुलना कीजिए।

आर्नन की फोटोफॉस्फोराइलेशन खोज, Z-स्कीम का रेडॉक्स आरेख, जल-अपघटन से लेकर Pheophytin, PQ, Cyt b6f, PC, P700, Ferredoxin व NADP⁺ तक का चरणबद्ध विवरण, चक्रीय पथ की आवश्यकता व मार्ग और तालिका 12.1 के अनुसार दोनों की तुलना प्रस्तुत करें।

2. पीटर मिशेल (1961) के 'रसोपरासरणी सिद्धांत' (Chemiosmotic Hypothesis) की विस्तार से व्याख्या करते हुए समझाइए कि थाइलाकोइड में प्रोटॉन प्रेरक बल (PMF) कैसे बनता है और CF0–CF1 संकुल द्वारा ATP का संश्लेषण कैसे होता है।

मिशेल की रसोपरासरणी परिकल्पना की आवश्यकताएँ (अखंड थाइलाकोइड झिल्ली, प्रोटॉन पंप, असममित वाहक व ATP Synthase), ल्यूमेन में H⁺ संचयन के दोनों स्रोत, ΔpH = 3.0 प्रवणता (ल्यूमेन pH 5 बनाम स्ट्रोमा pH 8), CF0 चैनल व CF1 रोटरी मोटर की संरचना तथा माइटोकॉन्ड्रिया व क्लोरोप्लास्ट के रसोपरासरण की तुलना का वर्णन करें।

3. रॉबर्ट हिल की अभिक्रिया (Hill Reaction), ऑक्सीजन उत्सर्जक संकुल (OEC / Kok's S-state clock) द्वारा जल के प्रकाश-अपघटन और ऑक्सीजन के जल से आने के प्रायोगिक प्रमाणों की विवेचना कीजिए।

वैन नील का तुलनात्मक समीकरण, हिल का 1937 का प्रयोग, प्राकृतिक (NADP⁺) बनाम कृत्रिम (DCPIP, फेरीसायनाइड) हिल अभिकर्मक, रूबेन व कामेन का 18O प्रयोग और बेसल कोक के S0–S4 मॉडल व Mn4CaO5Cl संकुल द्वारा जल विखंडन का सविस्तर विवरण दें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • पीटर मिशेल (Peter Mitchell) को रसोपरासरणी सिद्धांत (Chemiosmotic theory, 1961) के लिए सन् 1978 में रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला था।
  • पॉल बॉयर (Paul Boyer) ने ATP Synthase के घूर्णी उत्प्रेरण तंत्र ('Binding Change / Rotary Motor Mechanism') की खोज की जिसके लिए उन्हें 1997 में नोबेल पुरस्कार मिला।
  • जॉन जगेंडोर्फ (Jagendorf & Uribe, 1966) ने अंधेरे में ही हरितलवक को pH 4 से pH 8 के बफर में डालकर ('Acid-Bath Experiment') बिना प्रकाश के ATP बनाकर मिशेल के सिद्धांत को सिद्ध किया था!
  • अचक्रीय इलेक्ट्रॉन परिवहन में 1 अणु O2 निकलने में 4 इलेक्ट्रॉन प्रवाहित होते हैं और 2 अणु NADPH बनते हैं।
  • C4 पौधों (मक्का, गन्ना) के बंडल शीथ हरितलवकों में ग्रेना व PS-II का अभाव होता है और वहाँ केवल चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन होता है।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।

Similar Posts