PPHYS 311 Lecture 11: प्रकाशीय अभिक्रियाएँ, क्वांटम आवश्यकता, क्वांटम लब्धि (Quantum Yield) एवं प्रकाश-तंत्र I और II

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PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
LECTURE 11 / 32 · PPHYS 311

प्रकाशीय अभिक्रियाएँ, क्वांटम आवश्यकता, क्वांटम लब्धि (Quantum Yield) एवं प्रकाश-तंत्र I और II

Light Reactions, Quantum Requirement, Quantum Yield, and Photosystems I and II

Red Drop & Emerson Enhancement Effect, Quantum Requirement (8–10 quanta) & Quantum Yield (Φ = 0.125), Photosystem-I (P700) vs Photosystem-II (P680)

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Light Reactions, Quantum Requirement, Quantum Yield, and Photosystems I and II (Theory • Lecture 11)
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • प्रकाश-संश्लेषण की प्रकाशीय प्रावस्था (Light / Photochemical Reaction) की अवधारणा और रॉबर्ट इमर्सन (Emerson & Lewis, 1943; Emerson et al., 1957) के 'लाल पतन' (Red Drop) व 'इमर्सन वृद्धि प्रभाव' (Emerson Enhancement Effect) से दो प्रकाश-तंत्रों की खोज को समझना।
  • क्वांटम आवश्यकता (Quantum Requirement = 8 से 10 फोटॉन प्रति O2) और क्वांटम लब्धि (Quantum Yield Φ=1/8=0.125 या 12.5%) की परिभाषा और संख्यात्मक गणना सीखना।
  • प्रकाश-तंत्र I (Photosystem-I / P700) और प्रकाश-तंत्र II (Photosystem-II / P680) की संरचना, स्थान, अभिक्रिया केंद्र, प्राथमिक इलेक्ट्रॉन ग्राही और कार्यों की विस्तृत तुलना करना।

प्रस्तावना · Introduction

सन् 1905 में एफ.एफ. ब्लैकमैन (F.F. Blackman) ने सिद्ध किया कि प्रकाश-संश्लेषण केवल एक अभिक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें दो स्पष्ट चरण होते हैं—(1) एक तीव्र प्रकाशीय-रासायनिक अभिक्रिया (Light / Photochemical Reaction) जो पूरी तरह प्रकाश पर निर्भर है और तापमान से लगभग स्वतंत्र (Q10≈1) है; तथा (2) एक धीमी एंजाइमीय अंधकार अभिक्रिया (Dark / Biochemical Reaction) जो तापमान के प्रति अत्यधिक संवेदनशील (Q10=2 से 3) है। रॉबर्ट इमर्सन के ऐतिहासिक क्वांटम लब्धि प्रयोगों ने यह रहस्य खोला कि प्रकाशीय अभिक्रिया को पूरा करने के लिए थाइलाकोइड झिल्ली में दो अलग-अलग वर्णक तंत्र—Photosystem-I (P700) और Photosystem-II (P680)—एक साथ श्रेणीक्रम में कार्य करते हैं!

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

क्वांटम आवश्यकता (Quantum Requirement – QR)

प्रकाश-संश्लेषण में 1 अणु ऑक्सीजन (O2) मुक्त करने (अथवा 1 अणु CO2 का अपचयन करने) के लिए आवश्यक प्रकाश क्वांटा / फोटॉनों की न्यूनतम संख्या को क्वांटम आवश्यकता कहते हैं। सैद्धांतिक रूप से यह 8 क्वांटा (फोटॉन) और व्यावहारिक रूप से 8 से 10 क्वांटा होती है!

क्वांटम लब्धि / क्वांटम दक्षता (Quantum Yield / Efficiency – Φ)

प्रति एकल अवशोषित प्रकाश क्वांटम (1 फोटॉन) द्वारा मुक्त की गई ऑक्सीजन (O2) के अणुओं की संख्या को क्वांटम लब्धि (Φ) कहते हैं। यह क्वांटम आवश्यकता का व्युत्क्रम होती है: Φ=1Quantum Requirement=18=0.125 (या 12.5%; व्यावहारिक रूप से 0.10–0.125)!

लाल पतन (Red Drop Phenomenon – Emerson & Lewis, 1943)

जब एकवर्णी प्रकाश की तरंगदैर्ध्य को 680 nm (सुदूर लाल प्रकाश / Far-red light) से ऊपर बढ़ाया जाता है, तो पर्णहरित द्वारा प्रकाश का अवशोषण होने के बावजूद प्रकाश-संश्लेषण की क्वांटम लब्धि (Φ) में अचानक भारी गिरावट आ जाती है, इसे 'Red Drop' कहते हैं (क्योंकि >680 nm पर PS-II बंद हो जाता है!)।

इमर्सन वृद्धि प्रभाव (Emerson Enhancement Effect – Emerson et al., 1957)

जब पौधे को छोटा लाल प्रकाश (<680 nm) और सुदूर लाल प्रकाश (>680 nm) अलग-अलग देने के बजाय दोनों एक साथ (Simultaneously) दिए जाते हैं, तो प्रकाश-संश्लेषण की दर दोनों के अलग-अलग योग से कहीं अधिक बढ़ जाती है! इस प्रयोग ने सिद्ध किया कि पौधों में दो प्रकाश-तंत्र (PS-I व PS-II) होते हैं।

वर्गीकरण · Classification

प्रकाशीय अभिक्रिया की 2 उप-प्रावस्थाएँ (Two Sub-phases of Light Reaction)

1. प्रकाशीय-भौतिक प्रावस्था (Photophysical Phase): एंटीना वर्णकों द्वारा फोटॉन का अवशोषण, इलेक्ट्रॉन का उत्तेजित अवस्था (Singlet state) में जाना और अनुनाद द्वारा ऊर्जा का अभिक्रिया केंद्र (P680 व P700) तक पहुँचना।
2. प्रकाशीय-रासायनिक प्रावस्था (Photochemical Phase): अभिक्रिया केंद्र से उच्च-ऊर्जा इलेक्ट्रॉन का निष्कासन (Photoact), जल का प्रकाश-अपघटन (O2 उत्सर्जन), इलेक्ट्रॉन परिवहन और स्वांगीकरण शक्ति (Assimilatory Power = ATP + NADPH + H⁺; Arnon, 1956) का निर्माण।

एक प्रकाश-तंत्र (Photosystem) के 2 संरचनात्मक भाग

प्रत्येक प्रकाश-तंत्र (PS-I या PS-II) दो भागों से मिलकर बनता है:
1. अभिक्रिया केंद्र (Reaction Center / Photochemical Core): एक विशिष्ट पर्णहरित-a द्विलक (Dimer of Chlorophyll-a: PS-I में P700 और PS-II में P680) जो वास्तव में उत्तेजित होकर इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है।
2. प्रकाश-संग्रहण एंटीना संकुल (Light Harvesting Complex – LHC / Antenna Complex): अभिक्रिया केंद्र के चारों ओर स्थित 200 से 300 Chl-a, Chl-b और कैरोटीनॉयड अणु जो फोटॉन पकड़कर ऊर्जा को अभिक्रिया केंद्र तक पहुँचाते हैं (LHC-I व LHC-II)।

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • 1 अणु O2 निकालने के लिए 8 फोटॉन (Quanta) ही क्यों लगते हैं? (Biophysical Proof of Quantum Requirement = 8):
    • जल के 2 अणुओं के टूटने से 1 अणु ऑक्सीजन (O2), 4 प्रोटॉन (4H+) और 4 इलेक्ट्रॉन (4e−) निकलते हैं: 2H2O→O2↑+4H++4e−।
    • अचक्रीय पथ (Z-scheme) में 1 इलेक्ट्रॉन को जल (H2O) से उठाकर NADP+ तक पहुँचाने के लिए उसे दो बार धक्का देना पड़ता है—1 फोटॉन PS-II (P680) पर और 1 फोटॉन PS-I (P700) पर = कुल 2 फोटॉन प्रति इलेक्ट्रॉन!
    • अतः 4 इलेक्ट्रॉनों को जल से 2NADP+ तक पहुँचाकर 1 अणु O2 निकालने के लिए: 4 इलेक्ट्रॉन×2 फोटॉन (1 PS-II + 1 PS-I)= न्यूनतम 8 फोटॉन (8 Quanta) अनिवार्य हैं! और इसीलिए अधिकतम क्वांटम लब्धि Φ=1/8=0.125 होती है!
  • प्रकाश-तंत्र I और II के नामकरण का रहस्य: प्रकृति के विकास क्रम और थाइलाकोइड में इलेक्ट्रॉन प्रवाह में PS-II (P680) पहले काम करता है और PS-I (P700) बाद में काम करता है; फिर भी इन्हें I और II नाम केवल इनकी खोज के ऐतिहासिक क्रम (PS-I की खोज कोक, 1960 द्वारा पहले हुई और PS-II की बाद में) के आधार पर दिया गया है!

कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics

1. Red Drop, Emerson Enhancement Effect & Quantum Requirement/Yield (लाल पतन, इमर्सन प्रभाव एवं क्वांटम लब्धि)

Chlorella & All C3/C4 Crop Plants

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Chlorella & All C3/C4 Crop Plants

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रमुख वैज्ञानिक: ऑटो वारबर्ग (1922 — जिन्होंने गलती से QR = 4 बताया था) बनाम रॉबर्ट इमर्सन (Robert Emerson, 1941–1957 — जिन्होंने सही QR = 8–10 और दो प्रकाश-तंत्र खोजे!)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: इमर्सन के प्रयोगों ने ही आधुनिक Z-स्कीम और दोनों प्रकाश-तंत्रों की खोज का मार्ग प्रशस्त किया।

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. वारबर्ग-इमर्सन विवाद और क्वांटम आवश्यकता का सच:
• 1922 में नोबेल विजेता ऑटो वारबर्ग ने दावा किया था कि 1 O2 निकालने में केवल 4 फोटॉन लगते हैं। किंतु रॉबर्ट इमर्सन और लुईस ने गहन प्रयोगों से सिद्ध किया कि वारबर्ग की गणना त्रुटिपूर्ण थी और वास्तविक न्यूनतम क्वांटम आवश्यकता 8 से 10 क्वांटा है (जिससे ऊर्जा दक्षता ~28–34% आती है)।

2. लाल पतन (Red Drop — Emerson & Lewis, 1943):
• इमर्सन ने हरी शैवाल *Chlorella* पर एकवर्णी प्रकाश डालते हुए देखा कि 600 nm से 680 nm (लाल प्रकाश) तक क्वांटम लब्धि (Φ=0.10–0.12) उच्च व स्थिर रहती है; किंतु जैसे ही तरंगदैर्ध्य 680 nm से ऊपर (680–700 nm सुदूर लाल क्षेत्र) जाती है, क्वांटम लब्धि अचानक गिरकर लगभग शून्य हो जाती है!
• *कारण*: क्योंकि PS-II (P680) केवल 680 nm तक का ही प्रकाश सोख सकता है; >680 nm के प्रकाश में केवल PS-I (P700) चलता है और PS-II बंद हो जाने से अचक्रीय इलेक्ट्रॉन प्रवाह व O2 उत्सर्जन रुक जाता है!

3. इमर्सन वृद्धि प्रभाव (Emerson Enhancement Effect — Emerson et al., 1957):
• मान लीजिए केवल 650 nm (छोटे लाल प्रकाश) में प्रकाश-संश्लेषण की दर = R1 है, और केवल 700 nm (सुदूर लाल प्रकाश) में दर = R2 है। जब दोनों प्रकाश एक साथ दिए गए, तो संयुक्त दर (R1+2) दोनों के योग (R1+R2) से 30–50% अधिक प्राप्त हुई:
E (Enhancement)=R1+2−R1R2>1.0
• *निष्कर्ष*: प्रकाश-संश्लेषण में दो भिन्न प्रकाश-तंत्र (एक <680 nm पर चलने वाला PS-II और एक >680 nm तक चलने वाला PS-I) एक साथ मिलकर (In series) कार्य करते हैं!

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): C3 पौधों में सामान्य प्राकृतिक तापमान (30°C) और वर्तमान CO2 स्तर पर प्रकाश-श्वसन (Photorespiration) होने के कारण वास्तविक क्वांटम लब्धि घटकर 0.05–0.06 रह जाती है, जबकि C4 पौधों में प्रकाश-श्वसन न होने से उच्च तापमान पर भी क्वांटम लब्धि स्थिर रहती है (Ehleringer & Björkman, 1977)।

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): स्वांगीकरण शक्ति (Assimilatory Power) शब्द डैनियल आर्नन (D.I. Arnon, 1956) ने प्रकाशीय अभिक्रिया के दोनों उत्पादों—ATP और NADPH+H+—के लिए प्रतिपादित किया था।

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): प्रकाशीय अभिक्रिया का ताप गुणांक (Q10) = 1.0 से 1.1 होता है (अर्थात् यह तापमान बदलने से प्रभावित नहीं होती)।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Quantum Requirement = 8 to 10 photons per O2 (4 electrons × 2 photoacts)
  • Quantum Yield (Φ) = 1/8 = 0.125 (12.5%)
  • Red Drop (Emerson & Lewis, 1943) = Sharp drop in quantum yield beyond >680 nm
  • Emerson Enhancement Effect (1957) = Proved existence of TWO Photosystems (PS-I & PS-II) working in series
  • Assimilatory Power (Arnon, 1956) = ATP + NADPH।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

पॉलीहाउस में कृत्रिम ग्रो-लाइट्स (LED Grow Lights) लगाते समय लाल (660 nm) और सुदूर लाल/नीले फोटॉनों का संतुलित मिश्रण दिया जाता है ताकि इमर्सन वृद्धि प्रभाव से अधिकतम प्रकाश-संश्लेषण प्राप्त हो।

2. Detailed Structure & Comparison of Photosystem I (PS-I) and Photosystem II (PS-II) (प्रकाश-तंत्र I एवं II की संरचना एवं तुलना)

Thylakoid Membranes of All Green Plants

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Thylakoid Membranes of All Green Plants

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: PS-I अभिक्रिया केंद्र: P700 (Kok, 1960 द्वारा खोजा गया) | PS-II अभिक्रिया केंद्र: P680 (Döring et al., 1967 द्वारा खोजा गया)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: PS-II जल को तोड़कर इलेक्ट्रॉन निकालता है (प्रबलतम जैविक ऑक्सीकारक!), और PS-I उन इलेक्ट्रॉनों को NADP+ को देकर अपचायक शक्ति (NADPH) बनाता है!

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. प्रकाश-तंत्र I (Photosystem-I / PS-I — 'Ferredoxin-Plastoquinone Oxidoreductase'):
• स्थान: यह ग्रेना लैमेली के बाहरी (अ-सटे) भाग और स्ट्रोमा लैमेली (Fret channels) दोनों में पाया जाता है।
• अभिक्रिया केंद्र: P700 (पर्णहरित-a का विशिष्ट द्विलक जो 700 nm का प्रकाश सर्वाधिक सोखता है)।
• वर्णक अनुपात: इसमें Chl-a की मात्रा बहुत अधिक होती है (Chl-a : Chl-b अनुपात = 4 : 1 से 5 : 1)।
• प्राथमिक इलेक्ट्रॉन ग्राही (Primary Electron Acceptor): A0 (एक रूपांतरित पर्णहरित-a अणु), जिसके बाद इलेक्ट्रॉन A1 (Phylloquinone / Vitamin K1) ──► आयरन-सल्फर केंद्र (FeSX,FeSA,FeSB) ──► और फेरेडॉक्सिन (Ferredoxin – Fd) से होते हुए FNR एंजाइम द्वारा NADP+ को अपचयित करता है।
• कार्य: यह चक्रीय (Cyclic) और अचक्रीय (Non-cyclic) दोनों फोटोफॉस्फोराइलेशन में भाग लेता है; इसका जल-अपघटन से कोई सीधा संबंध नहीं है।

2. प्रकाश-तंत्र II (Photosystem-II / PS-II — 'Water-Plastoquinone Oxidoreductase'):
• स्थान: यह केवल ग्रेना थाइलाकोइड के सटे हुए भागों (Appressed regions of Grana lamellae) में ही पाया जाता है (स्ट्रोमा लैमेली में अनुपस्थित)।
• अभिक्रिया केंद्र: P680 (पर्णहरित-a द्विलक जो 680 nm लाल प्रकाश सोखता है); यह दो मुख्य कोर प्रोटीनों D1 और D2 प्रोटीन पर स्थित होता है!
• वर्णक अनुपात: इसमें Chl-b प्रचुर मात्रा में होता है (Chl-a : Chl-b अनुपात = 1 : 1 से 2 : 1)।
• प्राथमिक इलेक्ट्रॉन ग्राही (Primary Electron Acceptor): फियोफाइटिन (Pheophytin – 'Pheo' — एक रंगहीन पर्णहरित-a अणु जिसके केंद्र से Mg2+ परमाणु निकल गया है और वहाँ 2H+ आ गए हैं!)। फियोफाइटिन से इलेक्ट्रॉन QA और QB (Plastoquinone) में जाता है।
• जल-अपघटन संकुल (Oxygen Evolving Complex – OEC / Kok's S-state clock): थाइलाकोइड ल्यूमेन की तरफ PS-II से जुड़ा Mn4CaO5 क्लस्टर (4 मैंगनीज आयन + Ca2+ + Cl−) होता है जो जल को तोड़कर O2 निकालता है और P680+ के खाली इलेक्ट्रॉन को भरता है (Tyr-Z / YZ के माध्यम से)!
• कार्य: यह केवल अचक्रीय (Non-cyclic) फोटोफॉस्फोराइलेशन में भाग लेता है।

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): ऑक्सीकृत P680+ का रेडॉक्स विभव +1.1 से +1.2 Volt होता है, जो इसे जीवित जगत का सबसे शक्तिशाली जैविक ऑक्सीकारक (Strongest biological oxidizing agent) बनाता है—तभी यह अत्यंत स्थिर जल (H2O, रेडॉक्स विभव +0.82 V) से भी इलेक्ट्रॉन छीन लेता है!

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): तेज धूप से होने वाली 'फोटो-इनहिबिशन' (Photoinhibition) क्षति मुख्य रूप से PS-II के D1 प्रोटीन को नष्ट करती है, जिसकी पौधे को लगातार मरम्मत करनी पड़ती है।

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): दोनों प्रकाश-तंत्रों को आपस में जोड़ने वाला मध्यवर्ती परिसर 'Cytochrome b6f complex' है, जिसके बीच गतिशील लिपिड वाहक Plastoquinone (PQ) और ताम्र-युक्त गतिशील प्रोटीन वाहक Plastocyanin (PC) इलेक्ट्रॉन ढोते हैं।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • PS-I = P700 (Kok 1960), Located in both Grana & Stroma lamellae, Primary acceptor = A0 (Chl-a) → Phylloquinone (A1) → Fe-S → Ferredoxin, Involved in BOTH Cyclic & Non-cyclic
  • PS-II = P680 (D1/D2 core proteins), Located ONLY in Appressed Grana, Primary acceptor = Pheophytin (Mg-free Chl-a) → Plastoquinone, Contains OEC (4Mn + Ca + Cl for water splitting), Involved ONLY in Non-cyclic।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

जब प्रकाश में सुदूर लाल प्रकाश अधिक हो या बदलता रहे, तो 'LHC-II Kinase' एंजाइम LHC-II का फॉस्फोराइलेशन करके उसे PS-II से हटाकर PS-I के पास भेज देता है ताकि दोनों तंत्रों में ऊर्जा संतुलन बना रहे ('State Transitions')।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 11.1: प्रकाश-तंत्र I (Photosystem-I) बनाम प्रकाश-तंत्र II (Photosystem-II) की मास्टर तुलना सारणी

तुलना का आधारप्रकाश-तंत्र I (Photosystem-I / PS-I)प्रकाश-तंत्र II (Photosystem-II / PS-II)
अभिक्रिया केंद्र (Reaction Center)P700 (अधिकतम अवशोषण 700 nm पर)P680 (अधिकतम अवशोषण 680 nm पर; D1-D2 प्रोटीन)
थाइलाकोइड में स्थान (Location)ग्रेना के बाहरी भाग एवं स्ट्रोमा लैमेली (Non-appressed) दोनों मेंकेवल ग्रेना के सटे भागों (Appressed Grana) में (स्ट्रोमा लैमेली में नहीं)
पर्णहरित a : b अनुपातउच्च (4 : 1 से 5 : 1 — Chl-a अधिक)कम (1 : 1 से 2 : 1 — Chl-b अधिक)
प्राथमिक इलेक्ट्रॉन ग्राहीA0 (Modified Chl-a) →A1 (Vit K1) → Fe-S (Ferredoxin)फियोफाइटिन (Pheophytin — बिना Mg का पर्णहरित) → Plastoquinone (QA,QB)
इलेक्ट्रॉन का स्रोत (Electron Donor)अचक्रीय में Plastocyanin (PC) से; चक्रीय में स्वयं P700 सेजल का प्रकाश-अपघटन (H2O via OEC & Tyr-Z)
जल-अपघटन एवं O2 उत्सर्जनकोई संबंध नहीं (O2 नहीं निकलती)जल-अपघटन एवं O2 उत्सर्जन इसी में होता है (Mn2+,Cl−,Ca2+)
फोटोफॉस्फोराइलेशन में भागीदारीचक्रीय (Cyclic) और अचक्रीय (Non-cyclic) दोनों मेंकेवल अचक्रीय (Non-cyclic) में
DCMU / Atrazine शाकनाशी का प्रभावअप्रभावित रहता हैपूर्णतः अवरुद्ध हो जाता है (QA→QB ब्लॉक)

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. क्वांटम आवश्यकता (QR), क्वांटम लब्धि (Φ) एवं 1 ग्लूकोज अणु (6 CO2) के निर्माण हेतु आवश्यक कुल फोटॉनों की गणना

1. Quantum Yield (Φ) = 1 / Quantum Requirement (QR) | 2. 1 मोल ग्लूकोज (6 CO2) हेतु न्यूनतम फोटॉन = 6 × QR

उदाहरण 1 (Quantum Yield): यदि किसी पत्ती में 1 अणु O2 मुक्त करने के लिए 8 फोटॉन (Quanta) लगते हैं (QR = 8), तो उसकी क्वांटम लब्धि:
• Φ=1/8= 0.125 मोल O2 प्रति मोल फोटॉन (या 12.5%)। (यदि व्यावहारिक रूप से 10 फोटॉन लगें, तो Φ=1/10=0.10 या 10%)।
उदाहरण 2 (1 ग्लूकोज अणु हेतु कुल क्वांटा): चूँकि 1 अणु CO2 को अपचयित करने (और 1 O2 निकालने) में 2 NADPH + 3 ATP लगते हैं जिसके लिए न्यूनतम 8 से 10 फोटॉन चाहिए, इसलिए 1 अणु ग्लूकोज (C6H12O6 = 6 अणु CO2 का स्थिरीकरण और 6 अणु O2 का उत्सर्जन) बनाने के लिए:
• न्यूनतम सैद्धांतिक फोटॉन = 6×8= 48 क्वांटा (फोटॉन) (और व्यावहारिक रूप से 6×10= 60 क्वांटा)!

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 11: प्रकाशीय अभिक्रियाएँ, क्वांटम आवश्यकता, क्वांटम लब्धि एवं PS-I व PS-II]
├── 1. ब्लैकमैन एवं इमर्सन के मील के पत्थर (Historical Discovery)
│ ├── Blackman (1905): प्रकाश-संश्लेषण में 2 चरण — Light reaction (Q10 = 1) एवं Dark reaction (Q10 = 2–3)
│ ├── Red Drop (Emerson & Lewis, 1943): >680 nm (सुदूर लाल प्रकाश) में क्वांटम लब्धि का अचानक गिरना (क्योंकि PS-II बंद हो जाता है)
│ └── Emerson Enhancement Effect (1957): <680 nm + >680 nm प्रकाश एक साथ देने पर दर का योग से अधिक बढ़ना (2 प्रकाश-तंत्र सिद्ध!)
├── 2. क्वांटम आवश्यकता एवं क्वांटम लब्धि (Quantum Requirement & Yield)
│ ├── Quantum Requirement (QR): 1 O2 (या 1 CO2) हेतु आवश्यक फोटॉन = 8 से 10 क्वांटा (1 ग्लूकोज हेतु = 48 से 60 क्वांटा!)
│ └── Quantum Yield (Φ): प्रति फोटॉन मुक्त O2 = 1/8 = 0.125 (या 12.5%) [व्यावहारिक रूप से 0.10]
└── 3. प्रकाश-तंत्र I बनाम II (Photosystem-I vs Photosystem-II)
├── PS-I (P700 — Kok 1960): Grana + Stroma lamellae दोनों में | प्राथमिक ग्राही: A0 → A1 → Fe-S (Ferredoxin) | Cyclic & Non-cyclic दोनों में
└── PS-II (P680 — D1/D2 प्रोटीन): केवल Appressed Grana में | प्राथमिक ग्राही: Pheophytin (बिना Mg का Chl-a) | OEC (4Mn, Ca, Cl) से जल-अपघटन व O2 निकास | केवल Non-cyclic में

प्रवाह चित्र · Flowchart

[इमर्सन वृद्धि प्रभाव (Emerson Enhancement Effect, 1957) का प्रायोगिक प्रदर्शन]
【प्रयोग 1: केवल छोटा लाल प्रकाश (λ < 680 nm, जैसे 650 nm)】
PS-II और PS-I दोनों चलते हैं, किंतु असंतुलित ───► ऑक्सीजन उत्सर्जन दर = 10 इकाई (R1)

【प्रयोग 2: केवल सुदूर लाल प्रकाश (λ > 680 nm, जैसे 700 nm — 'Red Drop' क्षेत्र)】
केवल PS-I चलता है, PS-II बंद रहता है ───► ऑक्सीजन उत्सर्जन दर = मात्र 2 इकाई (R2)
[अलग-अलग योग (R1 + R2) = 10 + 2 = 12 इकाई]

【प्रयोग 3: 650 nm + 700 nm दोनों प्रकाश एक साथ (Simultaneous Beam)】
PS-II (P680) और PS-I (P700) दोनों पूरी क्षमता से श्रेणीक्रम (Series) में चलते हैं!
───► वास्तविक ऑक्सीजन उत्सर्जन दर (R1+2) = 18 इकाई (> 12 इकाई — इमर्सन वृद्धि प्रभाव!)

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • परीक्षा में संख्यात्मक मान सीधे पूछे जाते हैं:
    • 1 अणु O2 निकालने (या 1 CO2 स्थिर करने) के लिए Quantum Requirement = 8 से 10 फोटॉन (Quanta)।
    • 1 अणु ग्लूकोज (C6H12O6) बनाने के लिए कुल Quantum Requirement = 48 से 60 फोटॉन।
    • अधिकतम Quantum Yield (Φ) = 1/8 = 0.125 (या 12.5%)।
  • PS-II (P680) का सबसे पहला (Primary) इलेक्ट्रॉन ग्राही कौन है? उत्तर: फियोफाइटिन (Pheophytin — वह पर्णहरित-a जिसके केंद्र में Mg2+ नहीं होता)! (और पहला स्थिर क्विनोन ग्राही प्लास्टोक्विनोन QA है)।
  • PS-I (P700) का अंतिम आयरन-सल्फर इलेक्ट्रॉन वाहक कौन है जो NADP+ को अपचयित कराता है? उत्तर: फेरेडॉक्सिन (Ferredoxin – Fd)!

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • Red Drop और Emerson Enhancement Effect की खोज रॉबर्ट इमर्सन (1943, 1957) ने हरी शैवाल *Chlorella* पर की थी।
  • Assimilatory Power (स्वांगीकरण शक्ति = ATP + NADPH) शब्द डैनियल आर्नन (1956) ने दिया था।
  • PS-II केवल सटे हुए ग्रेना लैमेली में होता है, जबकि PS-I ग्रेना और स्ट्रोमा लैमेली दोनों में होता है।
  • ऑक्सीकृत P680+ जीवित जगत का सबसे प्रबल ऑक्सीकारक है जो जल को तोड़कर इलेक्ट्रॉन खींचता है।
  • PS-II के अभिक्रिया केंद्र को धारण करने वाले दो मुख्य झिल्ली प्रोटीनों के नाम 'D1' और 'D2' प्रोटीन हैं।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. प्रकाश-संश्लेषण में 1 अणु ऑक्सीजन (O2) मुक्त करने के लिए आवश्यक न्यूनतम फोटॉनों की संख्या अर्थात् 'क्वांटम आवश्यकता' (Quantum Requirement) और 'क्वांटम लब्धि' (Quantum Yield – Φ) कितनी होती है?

  • (A) क्वांटम आवश्यकता = 4 फोटॉन एवं क्वांटम लब्धि = 0.25
  • (B) क्वांटम आवश्यकता = 8 (8–10) फोटॉन एवं क्वांटम लब्धि (Φ) = 1/8 = 0.125 (या 12.5%)
  • (C) क्वांटम आवश्यकता = 1 फोटॉन एवं क्वांटम लब्धि = 1.0
  • (D) क्वांटम आवश्यकता = 48 फोटॉन एवं क्वांटम लब्धि = 0.02
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — 4 इलेक्ट्रॉनों को जल से NADP+ तक ले जाने में दोनों प्रकाश-तंत्रों पर 4 × 2 = 8 फोटॉन लगते हैं, अतः QR = 8 और Φ = 1/8 = 0.125।

2. जब प्रकाश की तरंगदैर्ध्य 680 nm (सुदूर लाल क्षेत्र) से ऊपर बढ़ाई जाती है तो क्वांटम लब्धि में अचानक भारी गिरावट आती है—इस 'लाल पतन' (Red Drop) और 'वृद्धि प्रभाव' की खोज किसने की थी?

  • (A) रॉबर्ट इमर्सन एवं सहयोगियों ने (Emerson & Lewis, 1943; Emerson et al., 1957)
  • (B) रॉबर्ट हिल ने (1937)
  • (C) पीटर मिशेल ने (1961)
  • (D) हैच एवं स्लैक ने (1966)
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — रॉबर्ट इमर्सन ने 1943 में Red Drop और 1957 में Emerson Enhancement Effect खोजकर दो प्रकाश-तंत्रों (PS-I व PS-II) का अस्तित्व सिद्ध किया।

3. प्रकाश-तंत्र I (PS-I) और प्रकाश-तंत्र II (PS-II) के अभिक्रिया केंद्र (Reaction centers) क्रमशः कौन से हैं?

  • (A) PS-I = P680 एवं PS-II = P700
  • (B) PS-I = P700 एवं PS-II = P680
  • (C) दोनों P700 हैं
  • (D) PS-I = P870 एवं PS-II = P650
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — PS-I का अभिक्रिया केंद्र P700 (Kok, 1960) है और PS-II का अभिक्रिया केंद्र P680 है।

4. प्रकाश-तंत्र II (PS-II / P680) से उत्तेजित होकर निकलने वाले इलेक्ट्रॉन का सबसे पहला (Primary) इलेक्ट्रॉन ग्राही कौन सा अणु होता है?

  • (A) फेरेडॉक्सिन
  • (B) फियोफाइटिन (Pheophytin — बिना मैग्नीशियम परमाणु वाला पर्णहरित-a अणु)
  • (C) प्लास्टोसायनिन
  • (D) साइटोक्रोम f
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — P680 से निकला इलेक्ट्रॉन सबसे पहले पिकोसेकंड में 'Pheophytin' द्वारा ग्रहण किया जाता है और फिर प्लास्टोक्विनोन (QA → QB) में जाता है।

5. पर्णहरित-a अणु के केंद्र से यदि मैग्नीशियम (Mg²⁺) परमाणु को हटाकर उसके स्थान पर 2 हाइड्रोजन परमाणु (2H⁺) जोड़ दिए जाएँ, तो बनने वाला यौगिक क्या कहलाता है?

  • (A) पर्णहरित-b
  • (B) फियोफाइटिन (Pheophytin)
  • (C) फाइटोक्रोम
  • (D) कैरोटीन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — अम्ल की क्रिया से या प्राकृतिक रूप से पर्णहरित से Mg हटने पर भूरा-पीला 'Pheophytin' बनता है जो PS-II का प्राथमिक ग्राही है।

6. प्रकाश-संश्लेषण में '1 अणु ग्लूकोज' (C6H12O6 — अर्थात् 6 अणु CO2 का स्थिरीकरण व 6 अणु O2 का निकास) बनाने के लिए कुल कितने प्रकाश क्वांटा (Photons) की आवश्यकता होती है?

  • (A) 8 से 10 क्वांटा
  • (B) 18 क्वांटा
  • (C) 48 से 60 क्वांटा (6 × 8 = 48 सैद्धांतिक एवं 6 × 10 = 60 व्यावहारिक)
  • (D) 100 क्वांटा
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — 1 CO2 के लिए 8–10 क्वांटा लगते हैं, अतः 6 CO2 (1 ग्लूकोज) के लिए 6 × 8 = 48 से 6 × 10 = 60 क्वांटा लगते हैं।

7. प्रकाशीय अभिक्रिया के अंत में बनने वाले 'ATP और NADPH + H⁺' को संयुक्त रूप से 'स्वांगीकरण शक्ति' (Assimilatory Power) नाम किस वैज्ञानिक ने दिया था?

  • (A) डैनियल आई. आर्नन (D.I. Arnon, 1956)
  • (B) एफ.एफ. ब्लैकमैन (1905)
  • (C) मेल्विन केल्विन (1954)
  • (D) एच.एच. डिक्सन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — आर्नन (1956) ने ATP और NADPH को CO2 स्वांगीकरण चलाने वाली 'Assimilatory Power' नाम दिया।

8. निम्नलिखित में से कौन सा कथन 'Photosystem-II (PS-II)' के संबंध में पूर्णतः सत्य है?

  • (A) यह स्ट्रोमा लैमेली में पाया जाता है और चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन करता है
  • (B) यह केवल ग्रेना के सटे भागों (Appressed grana) में होता है, जल का प्रकाश-अपघटन कर O2 निकालता है और केवल अचक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन में भाग लेता है
  • (C) इसमें कोई Chl-b नहीं होता
  • (D) इसका अभिक्रिया केंद्र P700 है
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — PS-II केवल सटे हुए ग्रेना में स्थित होता है, इसमें OEC (जल-अपघटन संकुल) जुड़ा होता है और यह केवल अचक्रीय पथ में कार्य करता है।

9. प्रकाशीय अभिक्रिया (Light / Photochemical reaction) का ताप गुणांक (Temperature Coefficient – Q10) कितना होता है?

  • (A) Q10 = 1.0 (तापमान से लगभग स्वतंत्र)
  • (B) Q10 = 2.0 से 3.0
  • (C) Q10 = 5.0
  • (D) Q10 = 0
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — विशुद्ध प्रकाशीय-रासायनिक अभिक्रियाओं पर तापमान का प्रभाव नहीं पड़ता (Q10 ≈ 1.0), जबकि अंधकार एंजाइमीय अभिक्रिया का Q10 = 2 से 3 होता है।

10. जल से इलेक्ट्रॉन छीनने की क्षमता रखने वाला जीवित जगत का 'सबसे शक्तिशाली जैविक ऑक्सीकारक' (Strongest biological oxidizing agent, E0' = +1.1 to +1.2 V) कौन सा है?

  • (A) फेरेडॉक्सिन
  • (B) ऑक्सीकृत P680⁺ (PS-II का अभिक्रिया केंद्र)
  • (C) NADP⁺
  • (D) साइटोक्रोम b6
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — इलेक्ट्रॉन त्यागने के बाद बना P680⁺ इतना शक्तिशाली ऑक्सीकारक (+1.2 V) होता है कि वह जल (+0.82 V) को तोड़कर उससे इलेक्ट्रॉन खींच लेता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. इमर्सन ने अपने प्रसिद्ध 'Red Drop' और 'Enhancement Effect' प्रयोग किस एककोशिकीय हरे शैवाल पर किए थे?

क्लोरेला (Chlorella pyrenoidosa) पर।

2. PS-I (P700) में लौह-सल्फर प्रोटीन से इलेक्ट्रॉन लेकर FNR एंजाइम की सहायता से NADP⁺ को अपचयित करने वाला वाहक कौन सा है?

फेरेडॉक्सिन (Ferredoxin – Fd)।

3. PS-II के अभिक्रिया केंद्र (P680) को बांधे रखने वाले दो मुख्य झिल्ली कोर प्रोटीनों के नाम लिखिए।

D1 एवं D2 प्रोटीन।

4. यदि किसी पत्ती की क्वांटम आवश्यकता (Quantum Requirement) 10 फोटॉन प्रति O2 है, तो उसकी क्वांटम लब्धि (Φ) क्या होगी?

Φ = 1 / 10 = 0.10 (अथवा 10%)।

5. PS-II से ऑक्सीकृत P680⁺ को जल-अपघटन संकुल (Mn4CaO5) से इलेक्ट्रॉन पहुँचाने वाला अमीनो अम्ल मध्यस्थ कौन सा है?

D1 प्रोटीन का टायरोसिन अवशेष (Tyrosine-Z / Tyr-Z या Y_Z)।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. क्वांटम आवश्यकता (Quantum Requirement) और क्वांटम लब्धि (Quantum Yield) को परिभाषित कीजिए और दोनों का संबंध बताइए।

1. क्वांटम आवश्यकता (QR): प्रकाश-संश्लेषण में 1 अणु O2 मुक्त करने (या 1 CO2 स्थिर करने) के लिए आवश्यक प्रकाश फोटॉनों (Quanta) की संख्या को क्वांटम आवश्यकता कहते हैं, जिसका मान 8 से 10 क्वांटा होता है। 2. क्वांटम लब्धि (Φ): प्रति 1 अवशोषित फोटॉन द्वारा मुक्त O2 अणुओं की संख्या को क्वांटम लब्धि कहते हैं। संबंध: Φ = 1 / QR = 1 / 8 = 0.125 (या 12.5%)।

2. 'लाल पतन' (Red Drop) और 'इमर्सन वृद्धि प्रभाव' (Emerson Enhancement Effect) क्या हैं और इनसे क्या सिद्ध हुआ?

इमर्सन एवं लुईस (1943) ने देखा कि जब प्रकाश की तरंगदैर्ध्य 680 nm (सुदूर लाल) से ऊपर जाती है तो क्वांटम लब्धि अचानक गिर जाती है जिसे 'Red Drop' कहते हैं। बाद में इमर्सन (1957) ने देखा कि जब छोटा लाल प्रकाश (<680 nm) और सुदूर लाल प्रकाश (>680 nm) दोनों एक साथ दिए जाते हैं तो प्रकाश-संश्लेषण की दर दोनों के अलग-अलग योग से बहुत अधिक बढ़ जाती है ('Emerson Enhancement Effect')। इससे सिद्ध हुआ कि पौधों में दो प्रकाश-तंत्र (PS-I व PS-II) श्रेणीक्रम में कार्य करते हैं।

3. प्रकाश-तंत्र I (PS-I) और प्रकाश-तंत्र II (PS-II) में पाँच प्रमुख अंतर लिखिए।

1. अभिक्रिया केंद्र: PS-I का केंद्र P700 है जबकि PS-II का केंद्र P680 है। 2. स्थान: PS-I ग्रेना के बाहरी भाग और स्ट्रोमा लैमेली दोनों में होता है, जबकि PS-II केवल सटे हुए ग्रेना लैमेली में होता है। 3. प्राथमिक ग्राही: PS-I में A0/Fe-S (Ferredoxin) और PS-II में Pheophytin होता है। 4. जल-अपघटन: PS-I में जल-अपघटन नहीं होता, जबकि PS-II में जल टूटकर O2 निकलती है। 5. पथ: PS-I चक्रीय व अचक्रीय दोनों में और PS-II केवल अचक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन में भाग लेता है।

4. सिद्ध कीजिए कि 1 अणु ऑक्सीजन (O2) मुक्त करने के लिए न्यूनतम 8 फोटॉनों की आवश्यकता क्यों होती है?

जल के 2 अणुओं के ऑक्सीकरण से 1 अणु O2, 4H⁺ और 4 इलेक्ट्रॉन निकलते हैं (2H2O → O2 + 4H⁺ + 4e⁻)। अचक्रीय इलेक्ट्रॉन परिवहन (Z-स्कीम) में प्रत्येक 1 इलेक्ट्रॉन को जल से NADP⁺ तक पहुँचाने के लिए दो बार प्रकाश उत्तेजना (1 फोटॉन PS-II पर और 1 फोटॉन PS-I पर = 2 फोटॉन) की आवश्यकता होती है। अतः 4 इलेक्ट्रॉनों को स्थानांतरित कर 1 O2 निकालने में 4 × 2 = न्यूनतम 8 फोटॉन लगते हैं।

5. अभिक्रिया केंद्र (Reaction Center) और एंटीना संकुल (LHC / Antenna Complex) के कार्यों में क्या अंतर है?

एंटीना संकुल (LHC) में 200–300 सहायक पर्णहरित (Chl-a, Chl-b) और कैरोटीनॉयड अणु होते हैं जो केवल विभिन्न तरंगदैर्ध्य के फोटॉनों को पकड़कर उनकी ऊर्जा को अनुनाद स्थानांतरण द्वारा केंद्र की ओर भेजते हैं (वे स्वयं इलेक्ट्रॉन नहीं त्यागते)। इसके विपरीत, अभिक्रिया केंद्र (P680 या P700) वह विशिष्ट पर्णहरित-a द्विलक है जो इस संचित ऊर्जा को पाकर वास्तव में अपना उच्च-ऊर्जा इलेक्ट्रॉन प्राथमिक ग्राही को सौंपता है (Photochemical act)।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. रॉबर्ट इमर्सन के 'लाल पतन' (Red Drop) और 'इमर्सन वृद्धि प्रभाव' (Emerson Enhancement Effect) प्रयोगों का सविस्तर वर्णन करते हुए क्वांटम आवश्यकता और क्वांटम लब्धि की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।

वारबर्ग बनाम इमर्सन विवाद, क्वांटम आवश्यकता (8–10 क्वांटा प्रति O2 एवं 48–60 क्वांटा प्रति ग्लूकोज) व क्वांटम लब्धि (Φ = 0.125) की गणना, Red Drop (>680 nm पर गिरावट का ग्राफ व कारण) और Emerson Enhancement प्रयोग (तीनों चरणों का प्रवाह चार्ट व सूत्र) का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।

2. प्रकाश-तंत्र I (Photosystem-I) और प्रकाश-तंत्र II (Photosystem-II) की संरचना, वर्णक संघटन, थाइलाकोइड में वितरण, प्राथमिक इलेक्ट्रॉन ग्राही और कार्यों का तुलनात्मक वर्णन कीजिए।

अभिक्रिया केंद्र व एंटीना कॉम्प्लेक्स की संरचना, P700 एवं P680 की खोज, D1-D2 प्रोटीन व OEC (Mn4CaO5) संकुल, फियोफाइटिन व फेरेडॉक्सिन की भूमिका और तालिका 11.1 के सभी 8 बिंदुओं पर दोनों तंत्रों की विस्तृत तुलना प्रस्तुत करें।

3. प्रकाश-संश्लेषण की प्रकाशीय-भौतिक एवं प्रकाशीय-रासायनिक प्रावस्थाओं का वर्णन करते हुए समझाइए कि प्रकाश ऊर्जा किस प्रकार 'स्वांगीकरण शक्ति' (Assimilatory Power: ATP + NADPH) में रूपांतरित होती है।

ब्लैकमैन का द्वि-चरणीय सिद्धांत, फोटॉन अवशोषण व सिंगलेट उत्तेजित अवस्था, अनुनाद ऊर्जा स्थानांतरण (Funneling), अभिक्रिया केंद्र पर आवेश पृथक्करण और आर्नन की स्वांगीकरण शक्ति (ATP + NADPH) के निर्माण व महत्व का सविस्तर विवरण दें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • बिना मैग्नीशियम परमाणु वाले रंगहीन पर्णहरित-a अणु 'फियोफाइटिन' (Pheophytin) की पहचान PS-II के प्राथमिक इलेक्ट्रॉन ग्राही के रूप में क्लिमोव (Klimov, 1977) ने की थी।
  • ऑटो वारबर्ग ने 1922 में क्वांटम आवश्यकता 4 बताई थी, जिसे रॉबर्ट इमर्सन ने सुधारकर सही मान 8–10 स्थापित किया।
  • PS-I के अभिक्रिया केंद्र P700 की खोज बेसल कोक (Bessel Kok, 1960) ने की थी।
  • एकल फोटॉन के अवशोषण से अभिक्रिया केंद्र से एक इलेक्ट्रॉन के निकलने की घटना को 'Photoact' कहा जाता है।
  • C3 पौधों में तापमान 20°C से बढ़कर 35°C होने पर प्रकाश-श्वसन बढ़ने के कारण क्वांटम लब्धि (Φ) घट जाती है, जबकि C4 पौधों में यह स्थिर रहती है।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।

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