PPHYS 311 Lecture 21: दीप्तिकालिक प्रेरण (Photoperiodic Induction), फाइटोक्रोम (Phytochrome) एवं प्रकाश ग्रहण का स्थल (पत्ती व फ्लोरिजन)

PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
दीप्तिकालिक प्रेरण (Photoperiodic Induction), फाइटोक्रोम (Phytochrome) एवं प्रकाश ग्रहण का स्थल (पत्ती व फ्लोरिजन)
Photoperiodic Induction, Phytochrome and Site of Light Perception
Photoperiodic Induction, Site of Perception = Leaf (Knott 1934), Florigen Hormone (Chailakhyan 1936) & FT Protein, Phytochrome Discovery (Borthwick & Hendricks 1952, Butler 1959), Structure & Pr ↔ Pfr Interconversion
विषय सूची · Quick Navigation
अधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्सअधिगम उद्देश्य · Learning Objectives
- दीप्तिकालिक प्रेरण (Photoperiodic Induction / Photoperiodic After-effect) की अवधारणा और मॉडल पौधों को आवश्यक प्रेरक चक्रों की संख्या (*Xanthium* व *Pharbitis* को मात्र 1 चक्र!) को समझना।
- नॉट (Knott, 1934 — पालक में) के प्रयोगों से यह जानना कि दीप्तिकालिक प्रकाश ग्रहण का स्थल 'पत्तियाँ' (Leaves) हैं, और चैलाख्यान (M.Kh. Chailakhyan, 1936) की 'फ्लोरिजन' (Florigen) परिकल्पना तथा इसकी आधुनिक आणविक पहचान ('FT Protein' — Flowering Locus T) का विश्लेषण करना।
- बोर्थविक, हेंड्रिक्स एवं बटलर (1952–1959) द्वारा खोजे गए नीले-हरे क्रोमोप्रोटीन वर्णक 'फाइटोक्रोम' (Phytochrome) की रासायनिक संरचना और इसके दोनों रूपों—निष्क्रिय (660 nm लाल अवशोषक) एवं सक्रिय (730 nm सुदूर-लाल अवशोषक)—के प्रकाश-उत्क्रमणीय रूपांतरण व कार्यिकीय भूमिकाओं का अध्ययन करना।
प्रस्तावना · Introduction
जब पौधे में फूल तो प्ररोह की शीर्ष कलिका (Shoot apical meristem) पर खिलता है, तो दिन और रात की लंबाई को नापने वाली 'आँख' पौधे के किस अंग में होती है? सन् 1934 में जे.ई. नॉट (J.E. Knott) ने सिद्ध किया कि प्रकाश को कलियाँ नहीं बल्कि 'पत्तियाँ' (Leaves) ग्रहण करती हैं! पत्ती में स्थित एक अद्भुत प्रकाश-संवेदी प्रोटीन वर्णक 'फाइटोक्रोम' (Phytochrome — ) लाल और सुदूर-लाल प्रकाश के माध्यम से अंधकार की घड़ी चलाता है और अनुकूल दीप्तिकाल मिलते ही पत्ती में एक गतिशील पुष्पन संकेत 'फ्लोरिजन' (Florigen / FT protein) बनता है जो फ्लोएम के रास्ते कलिका तक जाकर उसे फूल में बदल देता है!
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions
दीप्तिकालिक प्रेरण (Photoperiodic Induction – Lubimenko & Shcheglova, 1927)
यदि किसी पौधे को अनुकूल दीप्तिकाल (Photoperiodic cycles) के कुछ ही दिनों में रखकर वापस प्रतिकूल दीप्तिकाल में रख दिया जाए, तब भी वह पौधा फूल देता है! अनुकूल दीप्तिकाल की इस स्थायी स्मृति या पश्च-प्रभाव (After-effect) को 'दीप्तिकालिक प्रेरण' कहते हैं।
दीप्तिकालिक उद्दीपन ग्रहण का स्थल (Site of Photoperiodic Perception – J.E. Knott, 1934)
नॉट (1934) ने पालक पर और कजदान व चैलाख्यान (1936) ने गुलदाउदी व *Xanthium* पर सिद्ध किया कि दीप्तिकाल को ग्रहण करने वाला अंग कलिका नहीं बल्कि 'पूर्ण विकसित युवा हरी पत्तियाँ' (Mature green leaves) हैं! (यहाँ तक कि यदि पूरे पौधे से सारी पत्तियाँ हटाकर केवल एक पत्ती के 1/8 भाग को ही अनुकूल दीप्तिकाल दिया जाए, तब भी पूरे पौधे में फूल आ जाते हैं!)।
फ्लोरिजन एवं FT प्रोटीन (Florigen – Chailakhyan, 1936; Molecular Identity = FT Protein, 2005–2007)
रूसी वैज्ञानिक एम.के. चैलाख्यान (1936) ने प्रस्तावित किया कि अनुकूल दीप्तिकाल पाकर पत्तियों में एक काल्पनिक हार्मोनल पुष्पन उद्दीपन बनता है जिसे उन्होंने 'फ्लोरिजन' (Florigen = Gibberellins + Anthesins) नाम दिया, जो फ्लोएम द्वारा कलिका तक जाता है। आधुनिक आणविक जीवविज्ञान ने सिद्ध किया है कि यह फ्लोरिजन वास्तव में 'CONSTANS (CO)' जीन द्वारा प्रेरित छोटा गतिशील प्रोटीन 'FT प्रोटीन' (Flowering Locus T protein; धान में 'Hd3a' प्रोटीन) है!
फाइटोक्रोम (Phytochrome – Borthwick, Hendricks & Butler, 1952–1959)
पौधों में दीप्तिकालिता, बीज अंकुरण (Lettuce seed) और प्रकाश-आकारजनन (Photomorphogenesis) को नियंत्रित करने वाला नीले-हरे रंग का जल-घुलनशील बाइलीप्रोटीन (Chromoprotein dimer) जो दो प्रकाश-उत्क्रमणीय रूपों— (Red light absorbing form: 660 nm) और (Far-red light absorbing active form: 730 nm)—में पाया जाता है!
वर्गीकरण · Classification
फाइटोक्रोम (Phytochrome) के दोनों अंतर-परिवर्तनीय रूपों ( बनाम ) की विशेषताएँ
1. रूप (Red-light absorbing form — ):
• यह 660 nm (लाल प्रकाश / Red light) का अधिकतम अवशोषण करता है।
• इसका रंग नीला (Blue) होता है और यह कार्यिकीय रूप से निष्क्रिय रूप (Physiologically Inactive form) है (अंधेरे में उगे अंकुरों में फाइटोक्रोम इसी रूप में संश्लेषित होता है!)।
2. रूप (Far-red light absorbing form — ):
• जब रूप पर 660 nm लाल प्रकाश पड़ता है, तो वह बदलकर रूप बन जाता है जो 730 nm (सुदूर-लाल प्रकाश / Far-red light) का अधिकतम अवशोषण करता है।
• इसका रंग नीला-हरा / जैतूनी हरा (Olive-green) होता है और यही कार्यिकीय रूप से सक्रिय रूप (Physiologically ACTIVE form) है जो केंद्रक में जाकर जीनों को चालू करता है!
अंधकार में रूपांतरण एवं फाइटोक्रोम जीन परिवार (Phytochrome Gene Family in Arabidopsis/Crops)
• जब पर 730 nm सुदूर-लाल प्रकाश पड़ता है तो वह तुरंत वापस में बदल जाता है; साथ ही अंधेरे (रात) में भी धीरे-धीरे स्वतः टूटता है या वापस में बदलता रहता है ('Dark Reversion')!
• उच्च पादपों में फाइटोक्रोम के 5 जीन (PHYA से PHYE) पाए जाते हैं जो दो प्रकार के प्रोटीन बनाते हैं:
1. Type-I (Phytochrome A — प्रकाश-अस्थिर / Light-labile): अंधेरे में उगे पौधों में सर्वाधिक होता है और प्रकाश मिलते ही नष्ट हो जाता है (LDP पुष्पन व सुदूर-लाल संवेदन में मुख्य)।
2. Type-II (Phytochrome B, C, D, E — प्रकाश-स्थिर / Light-stable): हरी पत्तियों में प्रकाश में स्थिर रहता है (PhyB लाल प्रकाश संवेदन, SDP पुष्पन रोकने और 'Shade avoidance' में सर्वप्रमुख है!)।
महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles
- फाइटोक्रोम का प्रकाश-उत्क्रमणीय मास्टर समीकरण (Photoreversible Interconversion of Phytochrome — हर परीक्षा की जान!):
$$
• सूर्य के प्रकाश (Daylight) में: चूँकि धूप में 660 nm लाल प्रकाश 730 nm सुदूर-लाल से अधिक होता है, इसलिए दिन के समय पत्ती में सक्रिय की मात्रा अधिक () रहती है!
• रात्रि के अंधकार में: रात होते ही का अंधकार-प्रत्यावर्तन (Dark reversion) और क्षय होने से सुबह तक कम और अधिक हो जाता है!
• SDP बनाम LDP में की भूमिका: उच्च स्तर LDP पौधों में पुष्पन को प्रेरित (Promote) करता है, जबकि SDP पौधों में उच्च पुष्पन को रोकता (Inhibit) है! इसीलिए SDP को एक लंबी रात चाहिए ताकि सारा खत्म होकर कम हो जाए और फ्लोरिजन बन सके! - लेट्टस (सलाद — *Lactuca sativa* cv. Grand Rapids) के बीज अंकुरण का क्लासिक प्रयोग (Borthwick, Hendricks et al., 1952): लेट्टस के प्रकाश-संवेदी बीजों (Photoblastic seeds) पर बारी-बारी से लाल (R, 660 nm) और सुदूर-लाल (FR, 730 nm) प्रकाश डालने पर:
• केवल R बना 100% अंकुरण (Germination)!
• R FR बना 0% अंकुरण (No germination)!
• R FR R बना 100% अंकुरण!
• R FR R FR बना 0% अंकुरण!
कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics
1. Photoperiodic Induction, Site of Perception (Leaves) & Florigen / FT Protein (दीप्तिकालिक प्रेरण, प्रकाश ग्रहण का स्थल एवं फ्लोरिजन)
Spinach, Xanthium, Chrysanthemum, Rice & Arabidopsis
🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रमुख वैज्ञानिक: जे.ई. नॉट (J.E. Knott, 1934 — पत्ती प्रकाश ग्रहण स्थल) एवं एम.के. चैलाख्यान (M.Kh. Chailakhyan, 1936 — Florigen एवं Anthesin परिकल्पना)।
🌱 कार्यिकीय महत्व: यदि किसी पौधे की सारी पत्तियाँ हटा दी जाएँ (Defoliated plant) और केवल तने व कलिकाओं को अनुकूल दीप्तिकाल में रखा जाए, तो पौधे में कभी भी फूल नहीं आएंगे!
📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. विभिन्न पौधों के लिए आवश्यक न्यूनतम प्रेरक चक्रों (Inductive Cycles) की संख्या:
• कॉकलेबर (*Xanthium strumarium* — SDP), जापानी मॉर्निंग ग्लोरी (*Pharbitis nil* — SDP) एवं राइग्रास (*Lolium temulentum* — LDP): इन्हें पूरे जीवन भर फूलने के लिए केवल 1 अनुकूल दीप्तिकालिक चक्र (Only 1 cycle!) ही पर्याप्त होता है!
• हेनबेन (*Hyoscyamus niger* — LDP): 2 से 3 चक्र।
• बिलोक्सी सोयाबीन (SDP): 2 से 4 चक्र।
• गुलदाउदी (Chrysanthemum) एवं *Plantago lanceolata*: 15 से 25 चक्र।
2. कलम बाँधने (Grafting) के प्रयोग और 'फ्लोरिजन' (Florigen) का प्रमाण:
• जब दीप्तिकाल-प्रेरित पौधे (Induced donor plant) की केवल एक पत्ती को अ-प्रेरित पौधे (Non-induced receptor plant — जो प्रतिकूल दिन में रखा है) पर कलमबद्ध (Graft) कर दिया जाता है, तो अ-प्रेरित पौधे में भी फूल आ जाते हैं!
• यहाँ तक कि एक प्रेरित LDP (*Hyoscyamus*) को एक अ-प्रेरित SDP (तंबाकू) पर ग्राफ्ट करने से भी SDP में फूल आ जाते हैं—इससे सिद्ध हुआ कि पुष्पन हार्मोन 'फ्लोरिजन' सभी पौधों (SDP, LDP, DNP) में एक जैसा और सार्वत्रिक है, और यह जीवित फ्लोएम चालनी नलिकाओं (Phloem sieve tubes) से होकर पत्ती से कलिका तक जाता है (यदि तने की छाल/फ्लोएम को भाप से मार दिया जाए या रिंगिंग कर दी जाए तो फ्लोरिजन रुक जाता है!)।
• चैलाख्यान (1958) का संशोधित 'Anthesin-Gibberellin' सिद्धांत: चैलाख्यान के अनुसार फ्लोरिजन दो घटकों से मिलकर बना है—(1) जिबरेलिन (Gibberellins) और (2) एंथेसिन (Anthesins)।
• आधुनिक आणविक सत्य (2005–2007): आज सिद्ध हो चुका है कि चैलाख्यान का फ्लोरिजन वास्तव में पत्ती के फ्लोएम में बनने वाला 'FT प्रोटीन' (Flowering Locus T protein; और धान में इसका समजात 'Hd3a' प्रोटीन) है, जो फ्लोएम से चलकर प्ररोह शीर्ष (Shoot apex) में पहुँचता है और वहाँ 'FD' ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर से जुड़कर पुष्पीय जीनों (*APETALA1*, *LFY*) को चालू कर देता है!
⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): पत्ती की आयु का प्रभाव: अभी-अभी निकली बहुत छोटी कोंपल या बूढ़ी पीली पत्ती दीप्तिकाल को ग्रहण नहीं कर पाती; हाल ही में पूर्ण आकार पा चुकी युवा परिपक्व पत्ती (Just fully expanded young mature leaf) दीप्तिकाल ग्रहण करने में सर्वाधिक संवेदनशील होती है!
🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): उद्दीपन के संचरण की गति फ्लोएम में शर्करा स्थानांतरण की गति के साथ चलती है (Xanthium में ~2 से 4 मिमी प्रति घंटा)।
🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): कई दीर्घ-दिवस पादपों (LDP — जैसे गाजर, पत्तागोभी, हेनबेन) पर यदि छोटे दिनों में ही बाहर से जिबरेलिक अम्ल () का छिड़काव कर दिया जाए, तो उनमें तना बढ़कर ('Bolting') फूल आ जाते हैं (किंतु SDP में से फूल नहीं आते)!
मुख्य बिंदु · Key Points
- Site of photoperiodic perception = Mature Leaf (Knott, 1934 on Spinach)
- Flowering hormone = 'Florigen' (proposed by Chailakhyan, 1936; Florigen = Gibberellins + Anthesins)
- Molecular identity of Florigen = 'FT Protein' (Flowering Locus T / Hd3a in Rice), translocated via Phloem from leaf to shoot apex
- Xanthium & Pharbitis require ONLY 1 inductive cycle।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance
धान और सोयाबीन के प्रजनन में 'Hd3a / FT' जीन के प्रमोटरों में चयन करके विभिन्न अक्षांशों के लिए सटीक समय पर फूलने वाली किस्में बनाई जाती हैं।
2. Phytochrome: Discovery, Structure, Pr ↔ Pfr Interconversion & Physiological Roles (फाइटोक्रोम: खोज, संरचना, रूपांतरण एवं कार्य)
All Seed Plants, Ferns, Mosses & Algae
🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: खोजकर्ता: एच.ए. बोर्थविक एवं एस.बी. हेंड्रिक्स (Borthwick & Hendricks, 1952); तथा डब्ल्यू.एल. बटलर एवं सहयोगी (Butler et al., 1959) जिन्होंने स्पेक्ट्रोफोटोमीटर से शलजम के अंकुरों में इसे खोजा और 'Phytochrome' नाम दिया! (शुद्ध पृथक्करण: Siegelman & Firer, 1964 जई के अंकुरों से)।
🌱 कार्यिकीय महत्व: फाइटोक्रोम केवल पुष्पन ही नहीं, बल्कि बीज अंकुरण से लेकर अंधेरे से उजाले में आने पर पौधे के हरे होने ('De-etiolation / Photomorphogenesis') और पड़ोसी पौधों की छाया पहचानने ('Shade Avoidance') तक दर्जनों कार्यों का मास्टर स्विच है!
📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. फाइटोक्रोम की रासायनिक संरचना (Chemical Structure of Phytochrome):
• फाइटोक्रोम एक घुलनशील सम-द्विलक क्रोमोप्रोटीन (Homodimeric Chromoprotein / Biliprotein, कुल अणुभार ~250 kDa; प्रत्येक एकलक = 125 kDa) है।
• इसके प्रत्येक एकलक (Monomer) में दो भाग होते हैं:
(a) एपोप्रोटीन (Apoprotein): एक लंबी पॉलीपेप्टाइड प्रोटीन शृंखला।
(b) क्रोमोफोर (Chromophore — 'Phytochromobilin'): प्रकाश को अवशोषित करने वाला वर्णक भाग, जो 4 पायरोल वलयों की एक खुली सीधी शृंखला (Open-chain linear tetrapyrrole — पर्णहरित के बंद वलय के विपरीत यह खुला होता है और इसमें कोई धातु नहीं होती!) है तथा प्रोटीन के सिस्टीन अमीनो अम्ल से थायोईथर बंध द्वारा जुड़ा रहता है!
• जब इस क्रोमोफोर पर 660 nm लाल प्रकाश पड़ता है, तो इसके चौथे पायरोल वलय (C15=C16 द्वि-बंध) पर सिस-से-ट्रांस समावयवीकरण (Cis-to-Trans isomerization) होता है जिससे रूप सक्रिय रूप में बदल जाता है!
2. फाइटोक्रोम के प्रमुख कार्यिकीय कार्य (Physiological Roles of Phytochrome / Photomorphogenesis):
• (i) दीप्तिकालिता एवं पुष्पन का नियंत्रण (LDP में पुष्पन प्रेरित करना व SDP में रात्रि-विच्छेदन से रोकना)।
• (ii) प्रकाश-संवेदी बीजों का अंकुरण (Germination of Positively Photoblastic Seeds): जैसे लेट्टस (सलाद), तंबाकू व छोटे खरपतवार बीजों में लाल प्रकाश () जिबरेलिन संश्लेषण बढ़ाकर अंकुरण कराता है।
• (iii) पांडुरता-हरण (De-etiolation / Greening of Seedlings): जब बीज मिट्टी के नीचे अंधेरे में से बाहर सूरज की रोशनी में निकलता है, तो बनते ही: तने (Hypocotyl) की अंधाधुंध लंबाई रुक जाती है, एपिकल हुक सीधा होकर खुल जाता है, पत्तियाँ फैल जाती हैं और पर्णहरित व RuBisCO बनने लगते हैं!
• (iv) छाया-बचाव प्रतिक्रिया (Shade Avoidance Syndrome — R : FR Ratio Sensing): सीधी धूप में अनुपात उच्च (~1.2) होता है; किंतु जब कोई पौधा बड़े पड़ोसी पौधे की पत्तियों की छाया के नीचे आ जाता है, तो ऊपर की पत्तियाँ लाल प्रकाश (660 nm) तो सोख लेती हैं पर सुदूर-लाल (730 nm) को छानकर नीचे जाने देती हैं जिससे नीचे अनुपात बहुत गिर जाता है (<0.2)! इसे पहचानते ही नीचे का पौधा धूप पाने के लिए तेजी से अपना तना लंबा बढ़ाता है!
• (v) निशानुकुंचन (Nyctinastic Leaf Movements): *Albizia* और छुई-मुई व दलहनों की पत्तियों का दिन में खुलना और शाम को बंद होना ( द्वारा पर्णवृंत तल्प / Pulvinus में प्रवाह के नियमन से)!
• (vi) एंथोसायनिन वर्णक एवं प्लास्टिड विकास का प्रेरण।
⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): फाइटोक्रोम के अलावा पौधों में नीले प्रकाश (Blue light: 400–500 nm) और UV-A को ग्रहण करने वाले दो अन्य फ्लेवोप्रोटीन प्रकाश-ग्राही होते हैं: (1) क्रिप्टोक्रोम (Cryptochromes – Cry1, Cry2) और (2) फोटोट्रोपिन (Phototropins – Phot1, Phot2 — जो प्रकाशानुवर्तन व रंध्र खुलने का नियंत्रण करते हैं) तथा UV-B ग्राही UVR8!
🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): फाइटोक्रोम प्रतिक्रियाएँ दो प्रकार की होती हैं: (1) LFR (Low Fluence Responses) जो कम प्रकाश में होती हैं और पूर्णतः लाल/सुदूर-लाल उत्क्रमणीय होती हैं; तथा (2) HIR (High Irradiance Responses) और VLFR (Very Low Fluence Responses) जो उत्क्रमणीय नहीं होतीं।
🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): मिट्टी की जुताई करते समय जब दबे हुए खरपतवार के बीजों को एक सेकंड के लिए भी धूप की झलक मिल जाती है, तो उनमें बनकर अंकुरण चालू हो जाता है (इसीलिए रात में जुताई करने पर खरपतवार 50% कम उगते हैं!)।
मुख्य बिंदु · Key Points
- Phytochrome discovered by Borthwick & Hendricks (1952); named & detected spectrophotometrically by W.L. Butler (1959)
- Chromophore = Open-chain linear tetrapyrrole ('Phytochromobilin' without metal)
- Pr (660 nm, Inactive) ⇄ Pfr (730 nm, Physiologically ACTIVE form!)
- Shade avoidance is triggered by LOW Red : Far-Red (R:FR) ratio under canopy
- Blue light receptors = Cryptochrome & Phototropin।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance
यदि फसल बहुत घनी बो दी जाए, तो पौधों के बीच 'R : FR' अनुपात घटने से 'Shade avoidance response' चालू हो जाता है और पौधे दानों में भोजन भेजने के बजाय तना लंबा करने में ऊर्जा बर्बाद कर गिर जाते हैं!
तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables
तालिका 21.1: फाइटोक्रोम के दोनों रूपों — रूप बनाम रूप — की विस्तृत तुलना (Exam Favourite!)
| तुलना का आधार | रूप (Red-Light Absorbing Form) | रूप (Far-Red Light Absorbing Form) |
|---|---|---|
| अधिकतम प्रकाश अवशोषण शिखर | 660 nm (लाल प्रकाश / Red light) पर | 730 nm (सुदूर-लाल प्रकाश / Far-red light) पर |
| कार्यिकीय सक्रियता (Activity) | कार्यिकीय रूप से निष्क्रिय (Physiologically INACTIVE) | कार्यिकीय रूप से सक्रिय (Physiologically ACTIVE!) |
| शुद्ध अवस्था में रंग | चमकीला नीला (Blue) | नीला-हरा / जैतूनी हरा (Blue-green / Olive-green) |
| क्रोमोफोर का समावयवी रूप | C15=C16 द्वि-बंध सिस (Cis-isomer) अवस्था में | C15=C16 द्वि-बंध ट्रांस (Trans-isomer) अवस्था में |
| कोशिका में स्थान (Subcellular location) | केवल कोशिकाद्रव्य (Cytosol) में रहता है | बनते ही कोशिकाद्रव्य से केंद्रक (Nucleus) में प्रवेश कर जीनों को सक्रिय करता है |
| स्थायित्व एवं संश्लेषण | अत्यंत स्थिर; अंधेरे में फाइटोक्रोम इसी रूप में बनता है | अस्थिर (Labile); अंधेरे में धीरे-धीरे नष्ट होता है या वापस में बदल जाता है |
सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations
1. फाइटोक्रोम प्रकाश-स्थैतिक साम्यावस्था (Photoequilibrium – Φ) एवं R : FR अनुपात की गणना
व्याख्या एवं उदाहरण:
• लाल प्रकाश (660 nm) में भी का 100% भाग में नहीं बदल पाता क्योंकि दोनों के अवशोषण स्पेक्ट्रम थोड़े ओवरलैप करते हैं। शुद्ध लाल प्रकाश (660 nm) डालने पर अधिकतम 85% भाग सक्रिय में और 15% में () रहता है!
• शुद्ध सुदूर-लाल प्रकाश (730 nm) डालने पर 97% भाग निष्क्रिय में और मात्र 3% में () रहता है!
• सीधी दोपहर की धूप () में (60% सक्रिय ) रहता है, जबकि घनी कैनोपी की छाया के नीचे () गिरकर मात्र 0.20 (20% ) रह जाता है जिससे पौधे को पता चल जाता है कि वह छाया में है!
माइंड मैप · Mind Map
[Lecture 21: दीप्तिकालिक प्रेरण, फाइटोक्रोम (Pr ↔ Pfr) एवं प्रकाश ग्रहण का स्थल]
├── 1. दीप्तिकालिक प्रेरण एवं प्रकाश ग्रहण स्थल (Induction & Perception Site)
│ ├── Photoperiodic Induction: अनुकूल दीप्तिकाल का स्थायी पश्च-प्रभाव (*Xanthium* व *Pharbitis* को केवल 1 चक्र चाहिए!)
│ ├── प्रकाश ग्रहण का स्थल = पत्तियाँ (Mature Green Leaves — J.E. Knott, 1934 पालक में)
│ └── सभी पत्तियाँ हटा देने (Defoliation) पर पौधा अनुकूल दीप्तिकाल में भी कभी नहीं फूलता!
├── 2. फ्लोरिजन एवं आणविक तंत्र (Florigen & FT Protein)
│ ├── M.Kh. Chailakhyan (1936): पत्ती में बनने वाले सार्वत्रिक पुष्पन हार्मोन को 'Florigen' नाम दिया (Florigen = Gibberellins + Anthesins)
│ ├── संचरण मार्ग: पत्ती से प्ररोह शीर्ष कलिका तक जीवित फ्लोएम (Phloem) के माध्यम से
│ └── आधुनिक आणविक पहचान: FT Protein (Flowering Locus T / धान में Hd3a प्रोटीन) जो पत्ती में CONSTANS (CO) से प्रेरित होकर कलिका में जाता है
└── 3. फाइटोक्रोम वर्णक (Phytochrome — Borthwick, Hendricks 1952 & W.L. Butler 1959)
├── संरचना: नीला-हरा जल-घुलनशील क्रोमोप्रोटीन द्विलक (Apoprotein + Open-chain tetrapyrrole 'Phytochromobilin' बिना धातु के)
├── प्रकाश-उत्क्रमणीय रूपांतरण: Pr (660 nm, निष्क्रिय) ──(Red 660 nm)──► Pfr (730 nm, सक्रिय रूप!) ──(Far-red 730 nm / Dark)──► Pr
├── कार्य: पुष्पन, लेट्टस बीज अंकुरण, पांडुरता-हरण (De-etiolation), निशानुकुंचन एवं Shade Avoidance (R:FR sensing by PhyB)
└── नीला प्रकाश ग्राही (Blue light receptors): Cryptochrome एवं Phototropin
प्रवाह चित्र · Flowchart
[पत्ती द्वारा दीप्तिकाल ग्रहण से लेकर प्ररोह शीर्ष पर फूल खिलने तक का संपूर्ण आणविक एवं कार्यिकीय मार्ग]
【1. युवा परिपक्व हरी पत्ती (Mature Green Leaf — Site of Perception, Knott 1934)】
सूर्य का प्रकाश व अंधकार काल ──► पत्ती के फाइटोक्रोम (Pr ⇄ Pfr) एवं क्रिप्टोक्रोम द्वारा समय का मापन
↓ (आंतरिक जैविक घड़ी / Circadian Clock के साथ समन्वय)
अनुकूल दीप्तिकाल मिलने पर पत्ती की फ्लोएम सहचर कोशिका में 'CONSTANS (CO)' प्रोटीन का स्थिरीकरण
↓
पत्ती में 'FT जीन' (Flowering Locus T / धान में Hd3a) का सक्रियण ──► 'FT प्रोटीन (वास्तविक फ्लोरिजन!)' का संश्लेषण
│
▼ 【2. फ्लोएम चालनी नलिकाओं (Phloem Sieve Tubes) के माध्यम से प्ररोह शीर्ष की ओर परिवहन】
│
【3. प्ररोह शीर्षस्थ विभज्योतक (Shoot Apical Meristem - SAM — Site of Response)】
FT प्रोटीन + प्ररोह शीर्ष के 'FD' ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर का मिलन
↓
पुष्पीय विभज्योतक पहचान जीनों (APETALA1 / SOC1 / LEAFY) का सक्रियण
↓
【वानस्पतिक कलिका का 'पुष्पीय कलिका (Floral Bud / Flower)' में स्थायी रूपांतरण!】
परीक्षा टिप्स · Exam Tips
- परीक्षा में हर बार पूछे जाने वाले 5 प्रश्न:
1. पौधे में दीप्तिकालिक प्रकाश को ग्रहण करने वाला अंग (Site of perception) कौन सा है और यह किसने सिद्ध किया? उत्तर: पत्तियाँ (Leaves), जिसे जे.ई. नॉट (J.E. Knott, 1934) ने पालक में सिद्ध किया!
2. पत्तियों में बनने वाले काल्पनिक पुष्पन हार्मोन 'फ्लोरिजन' (Florigen) की अवधारणा किसने दी और इसकी आधुनिक आणविक पहचान क्या है? उत्तर: एम.के. चैलाख्यान (M.Kh. Chailakhyan, 1936) ने अवधारणा दी, और इसकी आधुनिक पहचान 'FT प्रोटीन' (Flowering Locus T protein) है जो फ्लोएम से चलता है!
3. फाइटोक्रोम के दोनों रूपों ( और ) में से कौन सा रूप कार्यिकीय रूप से सक्रिय (Physiologically Active) होता है? उत्तर: रूप (जो 660 nm लाल प्रकाश पड़ने पर बनता है और स्वयं 730 nm सुदूर-लाल प्रकाश सोखता है)!
4. लेट्टस के बीजों पर R FR R FR R प्रकाश की चमकें क्रम से दी गईं—क्या बीज अंकुरित होंगे? उत्तर: हाँ, 100% अंकुरित होंगे (क्योंकि अंतिम चमक लाल 'R' थी जिसने सक्रिय बनाया)!
5. 'फाइटोक्रोम' शब्द किसने दिया? उत्तर: डब्ल्यू.एल. बटलर (W.L. Butler et al., 1959) ने!
त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision
- J.E. Knott (1934): सिद्ध किया कि दीप्तिकाल को कलिका नहीं बल्कि 'पत्ती' (Leaf) ग्रहण करती है।
- M.Kh. Chailakhyan (1936): पुष्पन हार्मोन 'Florigen' शब्द दिया (बाद में बताया: Florigen = Gibberellins + Anthesins)।
- Borthwick & Hendricks (1952): लेट्टस बीज अंकुरण व रात्रि-विच्छेदन से लाल (660 nm) व सुदूर-लाल (730 nm) उत्क्रमणीय वर्णक खोजा।
- W.L. Butler (1959): स्पेक्ट्रोफोटोमीटर से फाइटोक्रोम की पहचान की और 'Phytochrome' नाम दिया।
- फाइटोक्रोम का क्रोमोफोर एक खुली शृंखला वाला चतुष्पायरोल ('Phytochromobilin') होता है जिसमें कोई धातु नहीं होती।
MCQs — उत्तर एवं व्याख्या
1. पौधे में दीप्तिकालिक प्रकाश उद्दीपन को ग्रहण करने का वास्तविक स्थल (Site of light perception in photoperiodism) कौन सा अंग है, जिसे जे.ई. नॉट (1934) ने पालक पर प्रयोग कर सिद्ध किया था?
- (A) प्ररोह की शीर्ष कलिका
- (B) पत्तियाँ (Mature green leaves)
- (C) जड़ का मूल गोप
- (D) तने की छाल
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — नॉट (1934) और चैलाख्यान (1936) ने सिद्ध किया कि दिन-रात की लंबाई को पत्तियाँ ग्रहण करती हैं और फिर फ्लोएम से कलिका को संकेत भेजती हैं।
2. सन् 1936 में किस रूसी वैज्ञानिक ने यह प्रतिपादित किया कि अनुकूल दीप्तिकाल मिलने पर पत्तियों में 'फ्लोरिजन' (Florigen) नामक पुष्पन हार्मोन बनता है?
- (A) टी.डी. लाइसेंको
- (B) एम.के. चैलाख्यान (M.Kh. Chailakhyan, 1936)
- (C) इवानोवस्की
- (D) मैक्सिमोव
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — चैलाख्यान (1936) ने 'Florigen' परिकल्पना दी और बाद में बताया कि Florigen = Gibberellins + Anthesins का संकुल है।
3. आधुनिक आणविक जीवविज्ञान ने सिद्ध किया है कि चैलाख्यान का 'फ्लोरिजन' (जो पत्ती से फ्लोएम के रास्ते प्ररोह शीर्ष तक जाकर फूल खिलाता है) वास्तव में कौन सा प्रोटीन है?
- (A) रुबिस्को प्रोटीन
- (B) एफटी प्रोटीन (FT Protein — Flowering Locus T protein / धान में Hd3a)
- (C) एक्टिन प्रोटीन
- (D) लेगहीमोग्लोबिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — पत्ती में CONSTANS (CO) जीन द्वारा प्रेरित 'FT प्रोटीन' ही फ्लोएम में चलने वाला वास्तविक फ्लोरिजन है।
4. फाइटोक्रोम (Phytochrome) वर्णक के दोनों रूपों—Pr और Pfr—के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन पूर्णतः सत्य है?
- (A) Pr रूप 730 nm सोखता है और सक्रिय होता है
- (B) Pr रूप (660 nm लाल अवशोषक) निष्क्रिय होता है; जब उस पर लाल प्रकाश (660 nm) पड़ता है तो वह 'कार्यिकीय रूप से सक्रिय Pfr रूप' (730 nm सुदूर-लाल अवशोषक) में बदल जाता है!
- (C) दोनों रूप निष्क्रिय होते हैं
- (D) इसमें लोहा धातु होती है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — Pr (660 nm) निष्क्रिय रूप है जो लाल प्रकाश (660 nm) पाकर सक्रिय 'Pfr' (730 nm) रूप में बदल जाता है; और सुदूर-लाल (730 nm) पाकर वापस Pr बन जाता है।
5. सन् 1952 में लाल/सुदूर-लाल उत्क्रमणीय वर्णक की खोज करने वाले और सन् 1959 में उसे 'फाइटोक्रोम' (Phytochrome) नाम देने वाले वैज्ञानिक कौन थे?
- (A) बोर्थविक, हेंड्रिक्स एवं डब्ल्यू.एल. बटलर (Borthwick, Hendricks & W.L. Butler, 1952–1959)
- (B) गार्नर एवं एलार्ड (1920)
- (C) डार्विन एवं वेंट (1928)
- (D) केल्विन एवं बेंसन (1954)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — बोर्थविक व हेंड्रिक्स (1952) ने लेट्टस बीज प्रयोग से इसकी कार्यिकी खोजी और बटलर (1959) ने स्पेक्ट्रोफोटोमीटर से इसे पहचानकर 'Phytochrome' नाम दिया।
6. लेट्टस (सलाद — Lactuca sativa) के प्रकाश-संवेदी बीजों को अंधेरे में भिगोकर उन पर क्रमशः 'Red → Far-Red → Red → Far-Red → Red' प्रकाश की चमकें डाली गईं। उन बीजों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- (A) कोई भी बीज अंकुरित नहीं होगा
- (B) सभी बीज अंकुरित हो जाएँगे (क्योंकि अंतिम चमक लाल 'Red' प्रकाश की थी जिससे सक्रिय Pfr बन गया!)
- (C) बीज जल जाएँगे
- (D) केवल जड़ निकलेगी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — फाइटोक्रोम प्रतिक्रिया में केवल 'अंतिम प्रकाश चमक' (Last flash) ही परिणाम तय करती है: अंतिम R = अंकुरण; अंतिम FR = कोई अंकुरण नहीं।
7. फाइटोक्रोम अणु का प्रकाश-अवशोषक वर्णक भाग 'क्रोमोफोर' (Phytochromobilin) रासायनिक रूप से क्या होता है?
- (A) मैग्नीशियम युक्त बंद पोरफाइरिन वलय
- (B) बिना किसी धातु वाला खुली शृंखला का चतुष्पायरोल (Open-chain linear tetrapyrrole)
- (C) कैरोटीन हाइड्रोकार्बन
- (D) आयरन-सल्फर प्रोटीन
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — पर्णहरित के बंद वलय के विपरीत फाइटोक्रोम का क्रोमोफोर फाइकोबिलिन के समान एक खुली शृंखला वाला टेट्रापायरोल है जिसमें कोई धातु नहीं होती।
8. पौधों में प्रकाशानुवर्तन (Phototropism — तने का प्रकाश की ओर मुड़ना) और नीले प्रकाश द्वारा रंध्र खुलने को नियंत्रित करने वाला मुख्य 'नीला प्रकाश ग्राही' (Blue-light photoreceptor) कौन सा है?
- (A) फाइटोक्रोम
- (B) फोटोट्रोपिन (Phototropins — Phot1 & Phot2) एवं क्रिप्टोक्रोम
- (C) एंथोसायनिन
- (D) जैंथोफिल
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — फाइटोक्रोम लाल/सुदूर-लाल प्रकाश का ग्राही है, जबकि फोटोट्रोपिन (Phototropin) और क्रिप्टोक्रोम (Cryptochrome) नीले प्रकाश के ग्राही हैं।
9. जब कोई पौधा अपने पड़ोसी ऊँचे पौधों की घनी पत्तियों की छाया के नीचे आ जाता है, तो प्रकाश के किस अनुपात में गिरावट को भाँपकर वह अपना तना तेजी से लंबा बढ़ाता है ('Shade Avoidance Response')?
- (A) लाल : सुदूर-लाल अनुपात (Red : Far-Red / R:FR ratio) के घटने को भाँपकर (Phytochrome B द्वारा)
- (B) हरे प्रकाश के बढ़ने से
- (C) पराबैंगनी प्रकाश से
- (D) ऑक्सीजन से
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — ऊपरी पत्तियाँ 660 nm लाल प्रकाश सोख लेती हैं और 730 nm सुदूर-लाल को नीचे जाने देती हैं; कम R:FR अनुपात से PhyB निष्क्रिय होकर तने की लंबाई बढ़ा देता है।
10. कॉकलेबर (Xanthium strumarium) को पुष्पन प्रेरित करने के लिए न्यूनतम कितने अनुकूल लघु-दिवस चक्रों (Inductive cycles) की आवश्यकता होती है?
- (A) कम से कम 30 चक्र
- (B) केवल 1 अनुकूल दीप्तिकालिक चक्र (Only 1 cycle!)
- (C) 50 चक्र
- (D) 100 चक्र
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — Xanthium इतना संवेदनशील SDP है कि उसे मात्र 1 छोटा दिन और 1 लंबी रात (>8.5 घंटे) देने के बाद लगातार लंबे दिनों में रखने पर भी वह फूल जाता है!
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. चैलाख्यान (1958) के अनुसार पुष्पन हार्मोन 'फ्लोरिजन' किन दो रासायनिक घटकों से मिलकर बना होता है?
1. जिबरेलिन (Gibberellins) और 2. एंथेसिन (Anthesins) से।
2. पत्ती में बना फ्लोरिजन (FT प्रोटीन) किस संवहनी ऊतक के माध्यम से प्ररोह शीर्ष कलिका तक पहुँचता है?
जीवित फ्लोएम (Phloem sieve tubes) के माध्यम से।
3. जिन बीजों का अंकुरण प्रकाश की उपस्थिति से प्रभावित होता है (जैसे लेट्टस व तंबाकू), उन्हें क्या कहते हैं?
फोटोब्लास्टिक बीज (Photoblastic seeds)।
4. अंधेरे में उगाए गए पीले अंकुर को प्रकाश में रखने पर उसके हरे होने और पत्तियाँ खुलने की फाइटोक्रोम-नियंत्रित प्रक्रिया क्या कहलाती है?
पांडुरता-हरण या प्रकाश-आकारजनन (De-etiolation / Photomorphogenesis)।
5. धान (Rice) में फ्लोरिजन के रूप में कार्य करने वाले प्रोटीन/जीन का नाम क्या है?
'Hd3a' प्रोटीन (Heading date 3a — जो Arabidopsis के FT प्रोटीन का समजात है)।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. दीप्तिकालिक प्रेरण (Photoperiodic Induction) क्या है और यह कैसे सिद्ध किया गया कि पत्तियाँ ही प्रकाश ग्रहण का स्थल हैं?
अनुकूल दीप्तिकाल की एक निश्चित संख्या पाने के बाद पौधे को प्रतिकूल दीप्तिकाल में रखने पर भी उसमें पुष्पन होने के स्थायी पश्च-प्रभाव को 'दीप्तिकालिक प्रेरण' कहते हैं। जे.ई. नॉट (1934) ने पालक में और चैलाख्यान (1936) ने गुलदाउदी में देखा कि यदि केवल पत्तियों को अनुकूल दीप्तिकाल दिया जाए और कलिका को प्रतिकूल में रखा जाए तो फूल आ जाते हैं; किंतु सारी पत्तियाँ हटाकर कलिका को अनुकूल दीप्तिकाल देने पर कभी फूल नहीं आते।
2. चैलाख्यान की 'फ्लोरिजन' (Florigen) परिकल्पना और उसकी आधुनिक आणविक पहचान (FT प्रोटीन) को समझाइए।
एम.के. चैलाख्यान (1936) ने ग्राफ्टिंग प्रयोगों के आधार पर कहा कि अनुकूल दीप्तिकाल मिलने पर पत्तियों में एक हार्मोनल पुष्पन उद्दीपन 'फ्लोरिजन' (Gibberellin + Anthesin) बनता है जो फ्लोएम से कलिका में जाकर फूल खिलाता है। 2005–2007 में सिद्ध हुआ कि यह फ्लोरिजन वास्तव में पत्ती में CONSTANS (CO) जीन से प्रेरित छोटा गतिशील 'FT प्रोटीन' (Flowering Locus T; धान में Hd3a) है जो फ्लोएम द्वारा प्ररोह शीर्ष तक जाता है।
3. फाइटोक्रोम (Phytochrome) क्या है? इसके दोनों रूपों—Pr और Pfr—के अंतर-परिवर्तन को समीकरण सहित स्पष्ट कीजिए।
फाइटोक्रोम (बोर्थविक, हेंड्रिक्स एवं बटलर, 1952–1959) पौधों में पाया जाने वाला नीले-हरे रंग का जल-घुलनशील बाइलीप्रोटीन वर्णक है। यह दो रूपों में रहता है: 1. Pr रूप (660 nm लाल प्रकाश अवशोषक) जो कार्यिकीय रूप से निष्क्रिय होता है; और 2. Pfr रूप (730 nm सुदूर-लाल अवशोषक) जो कार्यिकीय रूप से सक्रिय होता है। लाल प्रकाश (660 nm) पड़ने पर Pr सक्रिय Pfr में बदल जाता है, और सुदूर-लाल प्रकाश (730 nm) या अंधेरे में Pfr वापस निष्क्रिय Pr में बदल जाता है।
4. पौधों के जीवन में फाइटोक्रोम के पाँच प्रमुख कार्यिकीय कार्य लिखिए।
1. दीप्तिकालिता एवं पुष्पन का नियमन (LDP में पुष्पन प्रेरित करना व SDP में रात्रि-विच्छेदन से रोकना)। 2. प्रकाश-संवेदी बीजों (जैसे लेट्टस व तंबाकू) के अंकुरण को प्रेरित करना। 3. अंधेरे से बाहर आए अंकुरों का पांडुरता-हरण (De-etiolation — तना छोटा व मजबूत करना, हुक खोलना व पर्णहरित बनाना)। 4. कम R:FR अनुपात को भाँपकर छाया से बचने की प्रतिक्रिया (Shade avoidance)। 5. पत्तियों की निशानुकुंचन (Nyctinastic) गतियों का नियंत्रण।
5. 'छाया-बचाव प्रतिक्रिया' (Shade Avoidance Syndrome) में फाइटोक्रोम किस प्रकार कार्य करता है?
सीधी धूप में लाल (660 nm) और सुदूर-लाल (730 nm) प्रकाश का अनुपात (R:FR) लगभग 1.2 होता है जिससे पौधे में सक्रिय Pfr (PhyB) बना रहता है जो तने की अत्यधिक लंबाई को दबाकर रखता है। जब पौधा दूसरे पौधों की पत्तियों की छाया में आ जाता है, तो ऊपर की पत्तियाँ लाल प्रकाश सोख लेती हैं और सुदूर-लाल नीचे छनकर आता है जिससे R:FR अनुपात घटकर <0.2 रह जाता है। इससे Pfr वापस Pr में बदल जाता है और पौधा धूप पाने के लिए तेजी से तना लंबा बढ़ाता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. फाइटोक्रोम (Phytochrome) की खोज के इतिहास (लेट्टस बीज प्रयोग), रासायनिक संरचना, Pr ⇄ Pfr प्रकाश-उत्क्रमणीय रूपांतरण और पौधों के प्रकाश-आकारजनन (Photomorphogenesis) में इसके कार्यों का सविस्तर वर्णन कीजिए।
बोर्थविक, हेंड्रिक्स (1952) और बटलर (1959) की खोज, लेट्टस बीज अंकुरण का R/FR प्रयोग, एपोप्रोटीन व फाइटोक्रोमोबिलिन (Open-chain tetrapyrrole) क्रोमोफोर की संरचना, सिस-ट्रांस समावयवीकरण, तालिका 21.1 के अनुसार Pr व Pfr की तुलना, PhyA बनाम PhyB और फाइटोक्रोम के 6 प्रमुख कार्यों का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
2. दीप्तिकालिक प्रेरण (Photoperiodic Induction), पत्तियों द्वारा प्रकाश ग्रहण के प्रायोगिक प्रमाण (Knott's experiment) और 'फ्लोरिजन' (Florigen / FT Protein) के संश्लेषण व संचरण तंत्र की आरेख सहित विवेचना कीजिए।
प्रेरण की परिभाषा व प्रेरक चक्रों की संख्या, नॉट (1934) व चैलाख्यान (1936) के निष्पत्रण व अर्ध-पत्ती प्रयोग, ग्राफ्टिंग प्रयोगों से फ्लोरिजन की सार्वत्रिक प्रकृति का प्रमाण, जिबरेलिन-एंथेसिन अवधारणा और आधुनिक CONSTANS (CO) → FT प्रोटीन → फ्लोएम परिवहन → प्ररोह शीर्ष FD संकुल का प्रवाह आरेख प्रस्तुत करें।
3. पादपों में पाए जाने वाले सभी प्रमुख प्रकाश-ग्राहियों—फाइटोक्रोम (लाल/सुदूर-लाल ग्राही), क्रिप्टोक्रोम एवं फोटोट्रोपिन (नीला प्रकाश ग्राही) तथा UVR8 (पराबैंगनी ग्राही)—की तुलना करते हुए फसल विकास में उनकी भूमिका समझाइए।
तीनों वर्णक परिवारों का अवशोषण स्पेक्ट्रम, क्रोमोफोर (Phytochromobilin बनाम Flavin FMN/FAD) और उनके विशिष्ट कार्य (फाइटोक्रोम: अंकुरण, पुष्पन व छाया-बचाव; क्रिप्टोक्रोम: जैविक घड़ी व तना संदमन; फोटोट्रोपिन: प्रकाशानुवर्तन, हरितलवक गति व नीले प्रकाश से रंध्र खुलना) का सविस्तर वर्णन करें।
परीक्षा वन-लाइनर्स
- फाइटोक्रोम को सर्वप्रथम जई (Oat) के अंधेरे में उगे प्रांकुर-चोल (Etiolated coleoptiles) से सीगलमैन और फायरर (1964) ने शुद्ध रूप में पृथक किया था।
- यदि किसी पौधे की सारी पत्तियाँ तोड़ दी जाएँ (Complete defoliation), तो वह अनुकूल दीप्तिकाल में रखने पर भी फूल नहीं दे सकता।
- लाल प्रकाश (660 nm) से प्रेरित होने वाली सभी फाइटोक्रोम अभिक्रियाएँ सुदूर-लाल प्रकाश (730 nm) द्वारा उलट दी जाती हैं।
- क्रिप्टोक्रोम (Cryptochrome) और फोटोट्रोपिन (Phototropin) दोनों का क्रोमोफोर विटामिन B2 व्युत्पन्न 'फ्लेविन' (FMN / FAD) होता है।
- लघु-दिवस पादप पेरिला (Perilla) की एक प्रेरित पत्ती को 5 अलग-अलग पौधों पर क्रमशः ग्राफ्ट करके पाँचों में पुष्पन कराया जा सकता है!
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।





