PPHYS 311 Lecture 27: साइटोकाइनिन, एथिलीन एवं एब्सिसिक अम्ल (ABA) की कार्यिकीय भूमिकाएँ

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PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
LECTURE 27 / 32 · PPHYS 311

साइटोकाइनिन, एथिलीन एवं एब्सिसिक अम्ल (ABA) की कार्यिकीय भूमिकाएँ

Physiological Roles of Cytokinins, Ethylene and Abscisic Acid

Cytokinins (Kinetin, Zeatin, Skoog-Miller Auxin:CK Ratio in Tissue Culture, Richmond-Lang Effect, Breaking Apical Dominance), Ethylene (Yang Cycle, Triple Response, Climacteric Fruit Ripening, Epinasty, Degreening, Femaleness) & ABA (Stress Hormone, Stomatal Closure, Seed Dormancy, Anti-GA Action)

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Physiological Roles of Cytokinins, Ethylene and Abscisic Acid (Theory • Lecture 27)
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • साइटोकाइनिन (Cytokinins) की खोज (स्कूग एवं मिलर, 1955 — काइनेटिन; लेथम, 1963 — जियाटिन), कोशिका विभाजन (Cytokinesis), ऊतक संवर्धन में स्कूग-मिलर के ऑक्सिन:साइटोकाइनिन अनुपात (Auxin:CK Ratio), रिचमंड-लैंग प्रभाव (जीर्णता विलंब) और शीर्ष प्रमुखता तोड़ने की भूमिका का अध्ययन करना।
  • एथिलीन (Ethylene) की खोज, यांग चक्र (extMethionine→extSAM→extACC→extEthylene), क्लाइमेक्टेरिक फलों को पकाने, मटर की तिहरी प्रतिक्रिया, पर्ण अधोकुंचन (Epinasty), अनन्नास में पुष्पन और कुकरबिट्स में मादा पुष्प (Femaleness) प्रेरण को समझना।
  • एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid – ABA) को 'तनाव हार्मोन' (Stress Hormone) और 'एंटी-जिबरेलिन' (Anti-GA) के रूप में समझते हुए सूखे में रंध्रों को बंद करने (Stomatal closure), बीज व कलिका प्रसुप्ति (Dormancy) और विवियरेपरी (Vivipary) रोकने की कार्यविधि का विश्लेषण करना।

प्रस्तावना · Introduction

ऑक्सिन और जिबरेलिन के बाद पादप कार्यिकी के शेष तीन शास्त्रीय हार्मोन—साइटोकाइनिन, एथिलीन और एब्सिसिक अम्ल (ABA)—पौधे के जीवन चक्र के सबसे संवेदनशील मोड़ों को नियंत्रित करते हैं। जहाँ साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन (Cytokinesis) कराता है, ऊतक संवर्धन में नए प्ररोह बनाता है और पत्तियों को लंबे समय तक हरा व युवा बनाए रखता है; वहीं गैसीय हार्मोन एथिलीन फलों में मिठास, सुगंध और रंग भरकर उन्हें पकाता है। इसके समानांतर, जब पौधे पर सूखे, लवणता या ठंड की विपत्ति आती है, तब एब्सिसिक अम्ल (ABA) एक संकटमोचक 'तनाव हार्मोन' (Stress Hormone) के रूप में रंध्रों को तुरंत बंद कर पौधे की जान बचाता है और बीजों को प्रतिकूल मौसम में अंकुरित होने से रोकता है!

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

काइनेटिन एवं जियाटिन (Kinetin & Zeatin)

1. काइनेटिन (Kinetin — 6-Furfurylaminopurine): स्कूग एवं मिलर (Skoog & Miller, 1955) द्वारा ऑटोक्लेव किए गए हैरिंग मछली के शुक्राणु डीएनए (Herring sperm DNA) से पृथक किया गया पहला साइटोकाइनिन (यह पौधों में प्राकृतिक रूप से नहीं मिलता, अतः कृत्रिम है!)।
2. जियाटिन (Zeatin): डी.एस. लेथम (D.S. Letham, 1963) द्वारा मक्का (*Zea mays*) के कच्चे दूधिया दानों से पृथक किया गया पहला और सबसे प्रचुर प्राकृतिक पादप साइटोकाइनिन (यह नारियल के पानी / Coconut milk में भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है)!

स्कूग एवं मिलर का अंगजनन सिद्धांत (Skoog & Miller's Organogenesis Hypothesis, 1957)

पादप ऊतक संवर्धन (Tissue culture) में अविभेदित कैलस (Callus) से जड़ बनेगी या प्ररोह (तना), यह किसी एक हार्मोन पर नहीं बल्कि माध्यम में ऑक्सिन और साइटोकाइनिन के सापेक्ष अनुपात (Auxin : Cytokinin Ratio) पर निर्भर करता है:
• उच्च ऑक्सिन : निम्न साइटोकाइनिन ⟹ जड़ निर्माण (Rooting / Rhizogenesis)!
• निम्न ऑक्सिन : उच्च साइटोकाइनिन ⟹ प्ररोह/तना निर्माण (Shooting / Caulogenesis)!
• मध्यम/समान अनुपात ⟹ केवल कैलस (Callus) वृद्धि!

एथिलीन का यांग चक्र (Yang Cycle of Ethylene Biosynthesis – Shang Fa Yang, 1979)

उच्च पादपों में एथिलीन गैस का निर्माण मेथियोनीन (Methionine) अमीनो अम्ल से तीन चरणों में होता है: Methionine→SAM synthetaseSAM (S-Adenosyl Methionine)→ACC Synthase (दर-सीमाकारी!)ACC (1-Aminocyclopropane-1-carboxylic acid)→ACC Oxidase (+O2)Ethylene (C2H4)!

तनाव हार्मोन (Stress Hormone — Abscisic Acid / ABA)

सूखा (Drought), जल की कमी, लवणता और शीत तनाव की स्थिति में पत्तियों के क्लोरोप्लास्ट में एब्सिसिक अम्ल (ABA) की सांद्रता कुछ ही मिनटों में 10 से 50 गुना बढ़ जाती है, जो द्वार कोशिकाओं से K+ बाहर निकालकर रंध्रों को बंद (Stomatal closure) कर देता है और वाष्पोत्सर्जन से जल हानि रोकता है; इसीलिए ABA को 'तनाव हार्मोन' कहते हैं!

वर्गीकरण · Classification

1. प्राकृतिक बनाम कृत्रिम साइटोकाइनिन (Natural vs Synthetic Cytokinins)

1. प्राकृतिक साइटोकाइनिन (Natural Cytokinins): जियाटिन (Zeatin — मक्का व नारियल पानी में), डाइहाइड्रोजियाटिन (Dihydrozeatin) और आइसोपेंटेनाइल एडेनिन (iP — N6-(Δ2-isopentenyl) adenine)। (तथा *Agrobacterium tumefaciens* जीवाणु जो पौधों में 'Crown Gall' ट्यूमर रोग पैदा करता है, वह अपने Ti-प्लाज्मिड के *ipt* जीन द्वारा साइटोकाइनिन और ऑक्सिन का अनियंत्रित निर्माण कराता है!)।
2. कृत्रिम साइटोकाइनिन (Synthetic Cytokinins): काइनेटिन (Kinetin — 6-furfurylaminopurine), BAP / BA (6-Benzylaminopurine — ऊतक संवर्धन में सर्वाधिक प्रयुक्त!), TDZ (Thidiazuron — फिनाइल यूरिया व्युत्पन्न) और CPPU (Forchlorfenuron — अंगूर व कीवी के दाने बड़े करने में प्रयुक्त)।

2. एथिलीन मोचक एवं एथिलीन संदमक रसायन (Ethylene Releasers vs Ethylene Action/Synthesis Inhibitors)

1. व्यावसायिक एथिलीन मोचक रसायन (Ethylene-releasing liquid compounds): चूँकि एथिलीन गैस है, अतः खेत में छिड़कने के लिए तरल एथेपॉन / एथ्रेल (Ethephon / Ethrel / Cepha — 2-chloroethylphosphonic acid) का उपयोग किया जाता है जो पौधे के अंदर उदासीन pH (>4.5) पर पहुँचकर धीरे-धीरे एथिलीन गैस छोड़ता है! (अन्य: Ethad, Calcium carbide — CaC2 से एसिटिलीन बनती है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और प्रतिबंधित है)।
2. एथिलीन संश्लेषण संदमक (Biosynthesis Inhibitors — जो ACC Synthase को रोकते हैं): AVG (Aminoethoxyvinylglycine) एवं AOA (Aminooxyacetic acid) तथा Co2+ (कोबाल्ट आयन — जो ACC Oxidase को रोकता है)।
3. एथिलीन क्रिया संदमक (Ethylene Action / Receptor Blockers — जो फलों व कट-फ्लावर्स की शेल्फ-लाइफ बढ़ाते हैं): सिल्वर आयन (Ag+ — Silver Nitrate AgNO3 एवं Silver Thiosulphate STS), 1-MCP (1-Methylcyclopropene — व्यापारिक नाम: SmartFresh) और उच्च CO2 (3–5%)!

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • ऑक्सिन और साइटोकाइनिन का पारस्परिक विरोध (Antagonism between Auxin and Cytokinin): पौधे में ऑक्सिन और साइटोकाइनिन दो प्रमुख प्रक्रियाओं में एक-दूसरे के ठीक विपरीत कार्य करते हैं:
    1. शीर्ष प्रमुखता (Apical Dominance): प्ररोह शीर्ष में बनने वाला ऑक्सिन पार्श्व कलियों को दबाता है (शीर्ष प्रमुखता बढ़ाता है), जबकि जड़ के शीर्ष में बनकर जाइलम द्वारा ऊपर आने वाला साइटोकाइनिन पार्श्व कलियों को जगाता है (शीर्ष प्रमुखता को तोड़ता है)!
    2. अंगजनन (Morphogenesis): ऊतक संवर्धन में अधिक ऑक्सिन जड़ (Root) बनाता है, जबकि अधिक साइटोकाइनिन प्ररोह/तना (Shoot) बनाता है!
  • जिबरेलिन और एब्सिसिक अम्ल का पारस्परिक विरोध (Antagonism between Gibberellin and ABA): बीज के जीवन में ABA और GA3 एक-दूसरे के कट्टर शत्रु (Antagonists) हैं:
    1. ABA बीज में प्रसुप्ति (Seed dormancy) प्रेरित करता है, अंकुरण रोकता है और जौ की एल्यूरोन परत में α-एमाइलेज के संश्लेषण को बंद कर देता है।
    2. GA3 बीज की प्रसुप्ति तोड़ता है, अंकुरण चालू करता है और एल्यूरोन परत में α-एमाइलेज का संश्लेषण चालू करता है! (अतः बीज अंकुरित होगा या सुप्त रहेगा, यह पूर्णतः [GA]/[ABA] अनुपात पर निर्भर करता है!)

कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics

1. साइटोकाइनिन (Cytokinins) की प्रमुख कार्यिकीय भूमिकाएँ

1. Physiological Roles of Cytokinins in Crop Plants (साइटोकाइनिन की प्रमुख कार्यिकीय भूमिकाएँ)

'साइटोकाइनिन' शब्द लेथम (Letham, 1963) ने दिया था। पौधों में साइटोकाइनिन का मुख्य संश्लेषण स्थल जड़ का शीर्षस्थ विभज्योतक (Root apical meristem) और विकासशील बीज/भ्रूणपोष (जैसे मक्का के कच्चे दाने व नारियल का तरल भ्रूणपोष / Coconut water) हैं, जहाँ से यह जाइलम रस के साथ ऊपर प्ररोह व पत्तियों में जाता है। इसके प्रमुख कार्य हैं:

1. कोशिका विभाजन / कोशिकाद्रव्य विभाजन (Cell Division / Cytokinesis):
• साइटोकाइनिन का सबसे मौलिक कार्य (ऑक्सिन की उपस्थिति में) कोशिका चक्र के G2→M चरण को उत्तेजित कर कोशिकाद्रव्य विभाजन (Cytokinesis) कराना है। बिना साइटोकाइनिन के केवल केंद्रक विभाजित हो सकता है, कोशिका नहीं!

2. ऊतक संवर्धन में अंगजनन का नियंत्रण (Morphogenesis in Tissue Culture — Skoog & Miller, 1957):
• तंबाकू के मज्जा कैलस संवर्धन में स्कूग और मिलर ने दिखाया कि:
– उच्च साइटोकाइनिन : निम्न ऑक्सिन अनुपात (High CK : Low Auxin) = प्ररोह कलिकाओं का विभेदन (Shoot bud differentiation)।
– निम्न साइटोकाइनिन : उच्च ऑक्सिन अनुपात (Low CK : High Auxin) = जड़ का विभेदन (Root differentiation)।
– मध्यम अनुपात = केवल अविभेदित कैलस (Callus) की वृद्धि।

3. पर्ण जीर्णता में देरी एवं पोषक तत्व गतिशीलन (Delay of Senescence / Richmond-Lang Effect, 1957):
• साइटोकाइनिन क्लोरोफिल, आरएनए और प्रोटीन के विघटन को रोककर पत्तियों व हरी सब्जियों को पीला पड़ने से बचाता है तथा छिड़के गए स्थान को 'पोषक तत्व सिंक' (Nutrient sink / Mobilization center) बना देता है!

4. शीर्ष प्रमुखता का निवारण (Overcoming Apical Dominance):
• पार्श्व कलियों पर साइटोकाइनिन लगाने से उनमें संवहन ऊतकों का जुड़ाव हो जाता है और प्ररोह शीर्ष के रहते हुए भी पार्श्व कलियाँ फूट पड़ती हैं (उदाहरण: कवक या *Agrobacterium* संक्रमण से बनने वाला 'Witches' Broom' / चुड़ैल की झाड़ू रोग अत्यधिक साइटोकाइनिन के कारण ही होता है)।

5. अन्य महत्वपूर्ण कार्य:
• बीजपत्र विस्तार (Cotyledon expansion), अंधेरे में भी प्रोप्लास्टिड से क्लोरोप्लास्ट का विकास (Etioplast to Chloroplast conversion) और रंध्रों को खोलने (Stomatal opening) में सहायता करना!
मुख्य बिंदु · Key Points
  • साइटोकाइनिन का मुख्य संश्लेषण स्थल = जड़ का शीर्ष (Root tips) एवं मक्का/नारियल का भ्रूणपोष।
  • स्कूग-मिलर नियम: उच्च साइटोकाइनिन/ऑक्सिन = Shoot (प्ररोह); उच्च ऑक्सिन/साइटोकाइनिन = Root (जड़)!
  • साइटोकाइनिन रंध्रों को खोलता (Opens stomata) है, जबकि ABA रंध्रों को बंद (Closes stomata) करता है।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

हर पादप जैव-प्रौद्योगिकी और टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला में केला, गन्ना, आलू और ऑर्किड के करोड़ों रोगमुक्त पौधे (Micropropagation) बनाने के लिए BAP/Kinetin द्वारा प्ररोह गुणन किया जाता है।

2. एथिलीन (Ethylene – C2H4) की प्रमुख कार्यिकीय भूमिकाएँ

2. Physiological Roles of Ethylene in Crop Plants (एथिलीन की प्रमुख कार्यिकीय भूमिकाएँ)

दिमित्री नेलजुबोव (Dimitry Neljubow, 1901) ने सबसे पहले दिखाया कि सड़क की लैम्प गैस में मौजूद एथिलीन मटर के पौधों में तिहरी प्रतिक्रिया करती है, और आर. गेन (R. Gane, 1934) ने सिद्ध किया कि पकते हुए सेब स्वयं प्राकृतिक रूप से एथिलीन गैस बनाते हैं! यह पौधे के सभी अंगों में (विशेषकर पकते फलों, जीर्ण पत्तियों और तनावग्रस्त ऊतकों में) मेथियोनीन → SAM → ACC → एथिलीन (Yang Cycle) द्वारा बनती है। इसके प्रमुख कार्य हैं:

1. क्लाइमेक्टेरिक फलों को पकाना (Fruit Ripening Hormone):
• एथिलीन सबसे प्रसिद्ध 'फल पकाने वाला हार्मोन' है! आम, केला, सेब, पपीता, अमरूद, चीकू और टमाटर में एथिलीन स्व-उत्प्रेरक (Autocatalytic) रूप से बढ़कर श्वसन में तीव्र उछाल (Climacteric rise) लाती है, पेक्टिनेज/सेल्यूलेज एंजाइमों से फल को नरम करती है, स्टार्च को मीठी शर्करा में बदलती है और हरा क्लोरोफिल तोड़कर पीला/लाल रंग (कैरोटीनॉइड/लाइकोपीन) विकसित करती है!
• नींबू और संतरे के छिलके से हरा रंग हटाकर आकर्षक पीला/नारंगी रंग लाने (Degreening of Citrus) के लिए भी एथिलीन का उपयोग होता है।

2. मटर के नवोदभिद की 'तिहरी प्रतिक्रिया' (Triple Response & Apical Hook Maintenance):
• मिट्टी के नीचे से बाहर निकलते द्विबीजपत्री नवोदभिद (Seedling) में एथिलीन तने को छोटा व मोटा करती है और कोमल प्ररोह शीर्ष को मुड़े हुए 'एपिकल हुक' (Apical hook) के रूप में रखती है ताकि मिट्टी के कणों की रगड़ से कली को चोट न लगे!

3. जीर्णता एवं विलगन का तीव्रीकरण (Acceleration of Senescence and Abscission):
• एथिलीन पत्तियों, फूलों और फलों के वृंत में सेल्यूलेज व पेक्टिनेज एंजाइम बनाकर उन्हें गिराने (Abscission) में मुख्य भूमिका निभाती है (इसी का उपयोग कपास व अखरोट में यांत्रिक तुड़ाई से पूर्व पत्तियाँ गिराने या फलों की विरलन / Thinning में होता है)।

4. पर्ण अधोकुंचन (Leaf Epinasty) एवं जलमग्न धान में एरेनकाइमा व पर्व दीर्करण:
• जलभराव (Waterlogging) में जड़ों में O2 की कमी से ACC बनता है जो ऊपर पत्तियों में जाकर एथिलीन बनाता है, जिससे टमाटर की पत्तियाँ नीचे झुक जाती हैं (Epinasty) और जड़ों में वायु गुहिकाएँ (Aerenchyma) बनती हैं।
• गहरे पानी वाले धान (Deep-water rice) में एथिलीन (जिबरेलिन के साथ मिलकर) तने के पर्वों को तेजी से पानी की सतह से ऊपर लंबा करती है!

5. अन्य महत्वपूर्ण कृषि कार्य:
• अनानास (Pineapple) और आम में समकालिक पुष्पन (Synchronized flowering) प्रेरित करना!
• खीरा, लौकी और कद्दू (Cucurbits) में मादा पुष्पों (Femaleness) की संख्या और उपज बढ़ाना!
• रबड़ के पेड़ (*Hevea brasiliensis*) में लेटेक्स (Latex) का प्रवाह लंबे समय तक बनाए रखना!
• आलू के कंदों और मूँगफली के बीजों की प्रसुप्ति तोड़ना तथा मूल रोम (Root hairs) का निर्माण बढ़ाना!
मुख्य बिंदु · Key Points
  • एथिलीन का यांग चक्र (Yang Cycle): Methionine→SAM→ACC→Ethylene (जिसमें ACC Synthase दर-सीमाकारी एंजाइम है और ACC Oxidase को O2 चाहिए!)।
  • एथिलीन क्रिया को रोकने वाले दो मुख्य रसायन: सिल्वर थायोसल्फेट (extSTS/extAg+) और 1-MCP (SmartFresh)।
  • एथिलीन अनानास में पुष्पन, कुकरबिट्स में मादा पुष्प और रबड़ में लेटेक्स प्रवाह बढ़ाती है।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

केला, आम और पपीता को सुरक्षित रूप से पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड (प्रतिबंधित) के स्थान पर आजकल एफएसएसएआई (FSSAI) द्वारा अनुमोदित एथेपॉन (Ethephon / Ethrel @ 500–1000 ppm) या एथिलीन गैस चैम्बर (100 ppm) का उपयोग किया जाता है।

3. एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid – ABA) की प्रमुख कार्यिकीय भूमिकाएँ

3. Physiological Roles of Abscisic Acid (ABA) in Crop Plants (एब्सिसिक अम्ल की प्रमुख कार्यिकीय भूमिकाएँ)

1960 के दशक में दो स्वतंत्र वैज्ञानिक समूहों—एफ.टी. एडिकॉट एवं साथियों (Addicott et al., 1963) ने कपास के फलों से 'एब्सिसिन-II' (Abscisin II) और पी.एफ. वेयरिंग एवं साथियों (Wareing et al., 1964) ने एसर (*Acer*) की सुप्त कलियों से 'डॉर्मिन' (Dormin) पृथक किया। 1965 में पता चला कि ये दोनों एक ही 15-कार्बन सेस्क्विटर्पीनॉइड यौगिक हैं, जिसे 'एब्सिसिक अम्ल' (Abscisic Acid – ABA) नाम दिया गया! इसके प्रमुख कार्य हैं:

1. सूखे के तनाव में रंध्रों को बंद करना — 'एंटी-ट्रांसपिरेंट एवं तनाव हार्मोन' (Stomatal Closure during Drought Stress):
• जब मिट्टी में पानी की कमी होती है, तो जड़ों और मुरझाती पत्तियों में ABA का संश्लेषण अचानक कई गुना बढ़ जाता है।
• यह ABA द्वार कोशिकाओं (Guard cells) की झिल्ली पर अपने ग्राही (PYR/PYL) से जुड़कर साइटोसोलिक Ca2+ बढ़ाता है और ऋणायन चैनलों (extCl−, Malate2−) तथा बाह्यमुखी K+ चैनलों को खोल देता है।
• द्वार कोशिकाओं से K+ और जल बाहर निकलते ही वे श्लथ (Flaccid) हो जाती हैं और रंध्र तुरंत बंद (Stomata close) हो जाते हैं, जिससे वाष्पोत्सर्जन रुक जाता है!

2. बीज एवं कलिका प्रसुप्ति का प्रेरण तथा विवियरेपरी की रोकथाम (Seed & Bud Dormancy and Prevention of Vivipary):
• परिपक्व होते बीजों में ABA की उच्च सांद्रता भ्रूण को समय से पहले मातृ पौधे पर फली/भुट्टे के अंदर ही अंकुरित होने (Vivipary / Pre-harvest sprouting) से रोकती है (मक्का के जिन उत्परिवर्तित पौधों *vp mutants* में ABA नहीं बनता, उनके दाने भुट्टे पर ही उग आते हैं!) और बीजों में शुष्कन-सहिष्णु LEA प्रोटीन (Late Embryogenesis Abundant proteins) बनाती है।
• शीतोष्ण वृक्षों व आलू के कंदों में शरद ऋतु में कलिकाओं को सुप्त (Dormant) रखती है।

3. एंटी-जिबरेलिन क्रिया (Anti-Gibberellin Action):
• ABA जौ के बीज में जिबरेलिन (extGA3) द्वारा प्रेरित होने वाले α-एमाइलेज संश्लेषण को रोक देता है!

4. सूखे में जड़:प्ररोह अनुपात बढ़ाना (Increasing Root-to-Shoot Ratio under Water Stress):
• सूखे के समय ABA तने व पत्तियों की वृद्धि को रोक देता है किंतु जड़ की लंबाई (Primary root elongation) को बनाए रखता है ताकि पौधा गहरी मिट्टी से पानी खोज सके!
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Addicott (1963) का 'Abscisin II' = Wareing (1964) का 'Dormin' = Abscisic Acid (ABA)!
  • ABA को 'तनाव हार्मोन' (Stress Hormone) और 'प्राकृतिक एंटी-जिबरेलिन' (Natural Anti-GA) दोनों कहा जाता है।
  • मातृ पौधे पर ही बीज के समय-पूर्व अंकुरण (Vivipary) को रोकने वाला मुख्य हार्मोन ABA है।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

सूखा-सहिष्णु फसल किस्मों के प्रजनन में उच्च ABA संवेदनशीलता और LEA प्रोटीन संचय करने वाले जीनों का चयन किया जाता है।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 27.1: साइटोकाइनिन, एथिलीन एवं एब्सिसिक अम्ल (ABA) की तुलनात्मक कार्यिकीय प्रोफाइल

विशेषतासाइटोकाइनिन (Cytokinins — Zeatin/BAP)एथिलीन (Ethylene — C2H4 / Ethrel)एब्सिसिक अम्ल (ABA — Stress Hormone)
1. मुख्य संश्लेषण स्थलजड़ का शीर्ष (Root apical meristem) एवं विकासशील भ्रूणपोष।पकते फल (Ripening fruits), जीर्ण होते ऊतक एवं तनावग्रस्त पर्वसंधियाँ।जल-तनावग्रस्त पत्तियों के क्लोरोप्लास्ट/प्लास्टिड एवं पकते बीज।
2. जीर्णता एवं विलगन पर प्रभावपर्ण जीर्णता और क्लोरोफिल नाश को रोकता है (Richmond-Lang effect)।जीर्णता (Senescence) और अंगों के विलगन (Abscission) को तीव्र करता है।पर्ण जीर्णता, कलिका प्रसुप्ति और फलों के विलगन को बढ़ाता है।
3. रंध्रों (Stomata) पर प्रभावरंध्रों को खोलने (Stomatal opening) को प्रेरित करता है।सामान्यतः तटस्थ या तनाव में बंद करने में सहायक।सूखे में K+ बाहर निकालकर रंध्रों को तुरंत बंद (Stomatal closure) करता है!
4. शीर्ष प्रमुखता एवं प्रसुप्तिशीर्ष प्रमुखता और पार्श्व कलिका प्रसुप्ति को तोड़ता है।आलू व मूँगफली की प्रसुप्ति तोड़ता है तथा एपिकल हुक बनाता है।बीज एवं कलिका प्रसुप्ति (Dormancy) को प्रेरित व बनाए रखता है।
5. सबसे प्रसिद्ध कृषि अनुप्रयोगऊतक संवर्धन में प्ररोह निर्माण (Shooting) व हरी सब्जियों की ताजगी बढ़ाना।फल पकाना (Ripening), अनानास में पुष्पन, कुकरबिट्स में मादा पुष्प व रबड़ लेटेक्स प्रवाह।मेटाबोलिक एंटी-ट्रांसपिरेंट एवं सूखा सहिष्णुता व विवियरेपरी रोकथाम।

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. स्कूग-मिलर अनुपात एवं हार्मोन प्रतिरोध (Hormonal Antagonism Ratios)

1. [Cytokinin] / [Auxin] Ratio: High (>10:1) → Shoot Buds | Low (<1:10) → Roots | Intermediate (~1:1) → Callus
2. [GA] / [ABA] Ratio: High → Seed Germination & α-Amylase | Low → Seed Dormancy

उदाहरण: यदि किसी ऊतक संवर्धन माध्यम (MS Medium) में 2.0 mg/L BAP (साइटोकाइनिन) और 0.1 mg/L NAA (ऑक्सिन) डाला गया है, तो कैलस में किस अंग का विकास होगा?
• यहाँ CK:Auxin=2.0:0.1=20:1 (अर्थात् उच्च साइटोकाइनिन अनुपात) है, अतः कैलस से अनेक प्ररोह कलिकाएँ (Multiple Shoots) विकसित होंगी!

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 27: साइटोकाइनिन, एथिलीन एवं एब्सिसिक अम्ल की कार्यिकीय भूमिकाएँ]
├── 1. साइटोकाइनिन (Cytokinins)
│ ├── खोज: Skoog & Miller (1955 — Kinetin हैरिंग शुक्राणु DNA से; कृत्रिम) | Letham (1963 — Zeatin मक्का के दानों से; प्राकृतिक)
│ ├── संश्लेषण स्थल: जड़ के शीर्ष (Root tips) एवं नारियल पानी (Coconut milk)
│ └── मुख्य कार्य: कोशिका विभाजन (Cytokinesis), ऊतक संवर्धन में Skoog-Miller अनुपात (High CK = Shoot, High Auxin = Root), Richmond-Lang Effect (जीर्णता विलंब) व शीर्ष प्रमुखता तोड़ना
├── 2. एथिलीन (Ethylene — C2H4, एकमात्र गैसीय हार्मोन)
│ ├── खोज: Neljubow (1901) एवं R. Gane (1934) | संश्लेषण: Yang Cycle (Methionine ──► SAM ──► ACC ──► Ethylene)
│ ├── मुख्य कार्य: क्लाइमेक्टेरिक फल पकाना (Ripening), मटर में Triple Response, टमाटर में Epinasty, अनानास में पुष्पन, कुकरबिट्स में मादा पुष्प (Femaleness) व रबड़ लेटेक्स प्रवाह
│ └── मोचक रसायन: Ethephon / Ethrel | अवरोधक: Ag+ (STS / AgNO3) एवं 1-MCP
└── 3. एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid — ABA, 'Stress Hormone')
├── खोज: Addicott (1963 — Abscisin II) एवं Wareing (1964 — Dormin) | पूर्ववर्ती: Violaxanthin (Carotenoid)
└── मुख्य कार्य: सूखे में रंध्र बंद करना (Stomatal closure — K+ बाहर निकालना), बीज व कलिका प्रसुप्ति (Dormancy), विवियरेपरी रोकना व Anti-GA क्रिया (α-एमाइलेज संदमन)

प्रवाह चित्र · Flowchart

[एथिलीन का यांग जैव-संश्लेषण चक्र (Yang Cycle, 1979) एवं इसके रासायनिक संदमक (Inhibitors)]
[मेथियोनीन अमीनो अम्ल (L-Methionine)]
│
▼ (+ ATP; एंजाइम: SAM Synthetase)
[S-एडेनोसिल मेथियोनीन (SAM)] ───► (5'-Methylthioadenosine पुनर्चक्रित होकर वापस Methionine बनाता है!)
│
▼ 【एंजाइम: ACC Synthase (दर-सीमाकारी चरण!)】 ◄─── ❌ संदमक: AVG एवं AOA द्वारा अवरुद्ध!
[1-अमीनोसाइक्लोप्रोपेन-1-कार्बोक्सिलिक अम्ल (ACC — तात्कालिक पूर्ववर्ती!)]
│
▼ 【एंजाइम: ACC Oxidase (+ O2 अनिवार्य!)】 ◄─── ❌ संदमक: कोबाल्ट (Co2+) व अवायवीयता (Anaerobiosis) द्वारा अवरुद्ध!
[एथिलीन गैस (Ethylene, CH2=CH2)]
│
▼ 【एथिलीन ग्राही (ETR1 — कॉपर Cu+ युक्त)】 ◄─── ❌ अवरोधक: सिल्वर आयन (Ag+ / STS) एवं 1-MCP द्वारा ब्लॉक!
[कार्यिकीय प्रभाव: फल पकना, तिहरी प्रतिक्रिया, जीर्णता एवं विलगन!]

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • परीक्षा में काइनेटिन और जियाटिन पर सबसे ज्यादा बार पूछा गया प्रश्न:
    • पहला खोजा गया साइटोकाइनिन = काइनेटिन (Kinetin — Skoog & Miller, 1955, हैरिंग मछली के शुक्राणु DNA से — कृत्रिम!)
    • पहला प्राकृतिक पादप साइटोकाइनिन = जियाटिन (Zeatin — Letham, 1963, मक्का *Zea mays* के कच्चे दानों से!)
  • स्कूग एवं मिलर (1957) का ऊतक संवर्धन नियम कंठस्थ रखें:
    • अधिक साइटोकाइनिन + कम ऑक्सिन = प्ररोह / तना (Shoot)
    • अधिक ऑक्सिन + कम साइटोकाइनिन = जड़ (Root)!
  • एथिलीन का तात्कालिक पूर्ववर्ती (Immediate precursor) कौन सा यौगिक है? उत्तर: ACC (1-Aminocyclopropane-1-carboxylic acid), जो मेथियोनीन (Methionine) से बनता है!

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • साइटोकाइनिन मुख्य रूप से जड़ के शीर्ष (Root tips) में संश्लेषित होता है और जाइलम द्वारा प्ररोह में जाता है।
  • नारियल के पानी (Coconut milk / liquid endosperm) में प्राकृतिक साइटोकाइनिन (Zeatin) प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  • एथिलीन छोड़ने वाला सबसे प्रमुख व्यावसायिक तरल रसायन 'एथेपॉन' या 'एथ्रेल' (Ethephon / Ethrel — 2-chloroethylphosphonic acid) है।
  • एब्सिसिक अम्ल (ABA) को 'तनाव हार्मोन' (Stress hormone) कहते हैं क्योंकि यह सूखे में रंध्रों को बंद कर वाष्पोत्सर्जन रोकता है।
  • ABA और जिबरेलिन (GA3) बीज प्रसुप्ति और अल्फा-एमाइलेज संश्लेषण में एक-दूसरे के प्रत्यक्ष विरोधी (Antagonists) हैं।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. मक्का (Zea mays) के कच्चे दूधिया दानों से 1963 में डी.एस. लेथम (Letham) द्वारा पृथक किया गया 'प्रथम प्राकृतिक पादप साइटोकाइनिन' कौन सा है?

  • (A) काइनेटिन (Kinetin)
  • (B) जियाटिन (Zeatin)
  • (C) बेंजाइल एडेनिन (BAP)
  • (D) जिबरेलिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — काइनेटिन (1955) हैरिंग मछली के शुक्राणु DNA से मिला कृत्रिम साइटोकाइनिन था, जबकि पौधों से मिला पहला प्राकृतिक साइटोकाइनिन जियाटिन (Zeatin, 1963) है।

2. स्कूग एवं मिलर (Skoog & Miller, 1957) के अनुसार पादप ऊतक संवर्धन (Tissue Culture) में कैलस से 'प्ररोह / तना' (Shoot) और 'जड़' (Root) बनने के लिए हार्मोन का क्या अनुपात होना चाहिए?

  • (A) उच्च साइटोकाइनिन:ऑक्सिन से जड़ और उच्च ऑक्सिन:साइटोकाइनिन से प्ररोह
  • (B) उच्च साइटोकाइनिन:निम्न ऑक्सिन अनुपात से 'प्ररोह (Shoot)' और उच्च ऑक्सिन:निम्न साइटोकाइनिन अनुपात से 'जड़ (Root)' का निर्माण होता है!
  • (C) केवल जिबरेलिन से जड़ व तना दोनों बनते हैं
  • (D) केवल एब्सिसिक अम्ल से प्ररोह बनता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — अधिक साइटोकाइनिन प्ररोह कलिका (Shooting) प्रेरित करता है और अधिक ऑक्सिन जड़ (Rooting) प्रेरित करता है।

3. उच्च पादपों में एथिलीन के जैव-संश्लेषण ('यांग चक्र' / Yang Cycle) का सही क्रम और दर-सीमाकारी एंजाइम क्या है?

  • (A) Tryptophan → IAA → Ethylene
  • (B) Methionine → SAM → ACC → Ethylene (दर-सीमाकारी एंजाइम: ACC Synthase)
  • (C) Mevalonic acid → Kaurene → Ethylene
  • (D) Adenine → Zeatin → Ethylene
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — एथिलीन मेथियोनीन अमीनो अम्ल से SAM और ACC (तात्कालिक पूर्ववर्ती) होते हुए बनती है, जिसमें ACC Synthase मुख्य नियामक एंजाइम है।

4. सूखे (Drought) या जल तनाव की स्थिति में पत्तियों में किस हार्मोन की सांद्रता अचानक बढ़ जाती है जो द्वार कोशिकाओं से K+ आयन बाहर निकालकर रंध्रों को बंद (Stomatal closure) कर देता है?

  • (A) साइटोकाइनिन
  • (B) जिबरेलिन
  • (C) एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid – ABA, जिसे 'तनाव हार्मोन' कहते हैं)
  • (D) ऑक्सिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — ABA सूखे के प्रति सबसे तेज कार्यिकीय संकेत देता है और रंध्रों को बंद कर वाष्पोत्सर्जन से पौधे की रक्षा करता है।

5. कृषि एवं बागवानी में आम, केला और टमाटर को पकाने तथा अनानास में पुष्पन के लिए प्रयुक्त होने वाला तरल रसायन 'एथ्रेल' या 'एथेपॉन' (Ethrel / Ethephon) रासायनिक रूप से क्या है?

  • (A) 2,4-डाइक्लोरोफिनॉक्सी एसिटिक अम्ल
  • (B) 2-क्लोरोएथिल फॉस्फोनिक अम्ल (2-Chloroethylphosphonic acid — जो पौधे में एथिलीन छोड़ता है)
  • (C) 6-फरफ्यूरिल अमीनोप्यूरीन
  • (D) इंडोल ब्यूटिरिक अम्ल
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — एथेपॉन (2-chloroethylphosphonic acid) एक अम्लीय तरल है जो कोशिकाद्रव्य (pH > 4.5) के संपर्क में आते ही अपघटित होकर एथिलीन गैस मुक्त करता है।

6. नारियल के पानी (Coconut milk / Liquid endosperm) को ऊतक संवर्धन माध्यम में क्यों मिलाया जाता है?

  • (A) क्योंकि इसमें एब्सिसिक अम्ल होता है
  • (B) क्योंकि इसमें प्राकृतिक साइटोकाइनिन (Zeatin एवं diphenylurea) प्रचुर मात्रा में होते हैं जो कोशिका विभाजन को प्रेरित करते हैं
  • (C) क्योंकि इसमें 2,4-D होता है
  • (D) क्योंकि यह श्वसन रोकता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — नारियल का पानी प्राकृतिक साइटोकाइनिन (Zeatin) का सबसे समृद्ध स्रोत है जो कैलस में तीव्र कोशिका विभाजन कराता है।

7. कटे हुए फूलों (Cut flowers — जैसे गुलाब व कार्नेशन) को गुलदस्ते में लंबे समय तक ताजा रखने के लिए पानी में 'सिल्वर थायोसल्फेट' (STS) या '1-MCP' क्यों मिलाया जाता है?

  • (A) ये ऑक्सिन बढ़ाते हैं
  • (B) ये एथिलीन के ग्राही (Receptor) को ब्लॉक कर 'एंटी-एथिलीन' के रूप में कार्य करते हैं और फूलों की जीर्णता/मुरझाना रोकते हैं
  • (C) ये वाष्पोत्सर्जन बढ़ाते हैं
  • (D) ये क्लोरोफिल तोड़ते हैं
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — सिल्वर आयन (Ag+) और 1-MCP एथिलीन ग्राही से जुड़कर एथिलीन की क्रिया को रोक देते हैं जिससे फूल जल्दी नहीं मुरझाते।

8. निम्नलिखित में से कौन सा हार्मोन युग्म 'बीज प्रसुप्ति एवं अंकुरण' (Seed dormancy and germination) तथा 'जौ में अल्फा-एमाइलेज संश्लेषण' के संबंध में एक-दूसरे का प्रत्यक्ष विरोधी (Antagonist) है?

  • (A) ऑक्सिन एवं एथिलीन
  • (B) जिबरेलिन (GA3) एवं एब्सिसिक अम्ल (ABA)
  • (C) साइटोकाइनिन एवं जिबरेलिन
  • (D) ऑक्सिन एवं जिबरेलिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — GA3 प्रसुप्ति तोड़ता है और α-एमाइलेज बनाता है, जबकि ABA प्रसुप्ति प्रेरित करता है और α-एमाइलेज के संश्लेषण को रोक देता है।

9. रबड़ के वृक्ष (Hevea brasiliensis) की छाल पर कट लगाने के बाद लेटेक्स (Latex) के जमने (Coagulation) को रोककर रबड़ का प्रवाह लंबे समय तक बढ़ाने के लिए किस हार्मोन का लेप किया जाता है?

  • (A) एब्सिसिक अम्ल
  • (B) एथ्रेल / एथेपॉन (Ethylene releaser)
  • (C) काइनेटिन
  • (D) साइकोसेल
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — एथ्रेल लेटेक्स वाहिकाओं के बंद होने की प्रक्रिया को विलंबित करता है जिससे रबड़ के दूध का स्राव दोगुना हो जाता है।

10. मक्का के कुछ उत्परिवर्तित पौधों (vp mutants) में दाने भुट्टे पर लगे-लगे ही अंकुरित हो जाते हैं ('Vivipary')। यह किस हार्मोन की कमी या असंवेदनशीलता के कारण होता है?

  • (A) जिबरेलिन की कमी
  • (B) एब्सिसिक अम्ल (ABA) की कमी
  • (C) एथिलीन की कमी
  • (D) साइटोकाइनिन की कमी
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — ABA परिपक्व होते बीज में प्रसुप्ति बनाए रखकर मातृ पौधे पर समय-पूर्व अंकुरण (Vivipary) को रोकता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. हैरिंग मछली के शुक्राणु डीएनए से स्कूग एवं मिलर (1955) द्वारा पृथक किए गए प्रथम साइटोकाइनिन का नाम क्या था?

काइनेटिन (Kinetin — 6-Furfurylaminopurine)।

2. पौधों में साइटोकाइनिन का मुख्य संश्लेषण किस अंग में होता है?

जड़ के शीर्षस्थ विभज्योतक (Root apical meristem / Root tips) में।

3. एथिलीन जैव-संश्लेषण में मेथियोनीन से बनने वाला तात्कालिक पूर्ववर्ती (Immediate precursor) कौन सा है?

ACC (1-Aminocyclopropane-1-carboxylic acid)।

4. किस पादप हार्मोन को 'डॉर्मिन' (Dormin) और 'एब्सिसिन-II' (Abscisin II) भी कहा जाता था?

एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid – ABA) को।

5. खीरा और लौकी में मादा फूलों (Female flowers) की संख्या बढ़ाने के लिए 2 से 4 पत्ती अवस्था पर किसका छिड़काव किया जाता है?

एथ्रेल / एथेपॉन (Ethrel @ 100–250 ppm) का।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. पादप ऊतक संवर्धन (Tissue Culture) में ऑक्सिन और साइटोकाइनिन के अनुपात का अंगजनन पर क्या प्रभाव पड़ता है? (स्कूग एवं मिलर का प्रयोग)

स्कूग एवं मिलर (1957) ने तंबाकू के मज्जा कैलस संवर्धन में सिद्ध किया कि कैलस से जड़ बनेगी या प्ररोह, यह माध्यम में ऑक्सिन और साइटोकाइनिन के अनुपात पर निर्भर करता है: 1. यदि साइटोकाइनिन : ऑक्सिन अनुपात उच्च हो, तो कैलस से प्ररोह कलिकाएँ (Shoot buds) विकसित होती हैं। 2. यदि ऑक्सिन : साइटोकाइनिन अनुपात उच्च हो, तो जड़ें (Roots) विकसित होती हैं। 3. यदि दोनों का अनुपात मध्यम या बराबर हो, तो अंग विभेदन के बिना केवल कैलस ही बढ़ता रहता है।

2. साइटोकाइनिन की प्रमुख कार्यिकीय भूमिकाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

1. कोशिका विभाजन (Cytokinesis): ऑक्सिन के साथ मिलकर कोशिका विभाजन कराता है। 2. अंगजनन: ऊतक संवर्धन में प्ररोह (Shoot) निर्माण करता है। 3. जीर्णता में देरी (Richmond-Lang effect): पत्तियों में क्लोरोफिल व प्रोटीन का विघटन रोककर और पोषक तत्वों को आकर्षित कर बुढ़ापे को टालता है। 4. शीर्ष प्रमुखता तोड़ना: पार्श्व कलियों की वृद्धि को सक्रिय कर पौधे को झाड़ीदार बनाता है। 5. रंध्र खोलना व क्लोरोप्लास्ट विकास।

3. एथिलीन के जैव-संश्लेषण का 'यांग चक्र' (Yang Cycle) क्या है और कृषि में एथिलीन के 4 प्रमुख उपयोग लिखिए।

यांग चक्र (1979) के अनुसार एथिलीन मेथियोनीन अमीनो अम्ल से बनती है: Methionine → SAM (S-Adenosyl methionine) → ACC (ACC Synthase द्वारा) → Ethylene (ACC Oxidase व O2 द्वारा)। कृषि उपयोग: 1. आम, केला, पपीता व टमाटर जैसे फलों को पकाना एवं नींबू का हरा रंग हटाना (Degreening)। 2. अनानास में समकालिक पुष्पन प्रेरित करना। 3. खीरा व लौकी में मादा पुष्पों की संख्या बढ़ाना। 4. रबड़ के पेड़ से लेटेक्स का प्रवाह बढ़ाना।

4. एब्सिसिक अम्ल (ABA) को 'तनाव हार्मोन' (Stress Hormone) क्यों कहते हैं? यह सूखे में रंध्रों को कैसे बंद करता है?

जब पौधे को सूखा, लवणता या शीत तनाव का सामना करना पड़ता है, तो पत्तियों में ABA की सांद्रता तेजी से कई गुना बढ़ जाती है जो पौधे को तनाव से बचाती है; इसलिए इसे 'तनाव हार्मोन' कहते हैं। कार्यविधि: सूखे में ABA द्वार कोशिकाओं की झिल्ली के ग्राही से जुड़कर साइटोसोलिक Ca2+ बढ़ाता है, जिससे Cl- और K+ आयन द्वार कोशिकाओं से बाहर निकल जाते हैं। परासरण द्वारा जल बाहर निकलने से द्वार कोशिकाएँ श्लथ (Flaccid) हो जाती हैं और रंध्र तुरंत बंद हो जाते हैं।

5. मटर के नवोदभिद पर एथिलीन की 'तिहरी प्रतिक्रिया' (Triple Response) क्या है और इसका पौधे के लिए क्या लाभ है?

अंधेरे में उगते मटर के नवोदभिद को एथिलीन देने पर तीन विशिष्ट लक्षण दिखाई देते हैं जिन्हें 'तिहरी प्रतिक्रिया' कहते हैं: 1. तने के दीर्करण (Elongation) का रुकना, 2. तने का अरीय रूप से मोटा और मजबूत होना (Radial swelling), और 3. तने का क्षैतिज वृद्धि करना व प्ररोह शीर्ष पर 'एपिकल हुक' (Apical hook) का कसा रहना। लाभ: यह प्रतिक्रिया अंकुरित होते पौधे को कठोर मिट्टी की पपड़ी को सुरक्षित रूप से भेदकर बाहर निकलने में मदद करती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. साइटोकाइनिन की खोज, रासायनिक प्रकृति (प्राकृतिक एवं कृत्रिम), संश्लेषण स्थल और पौधों में इसकी प्रमुख कार्यिकीय भूमिकाओं (कोशिका विभाजन, स्कूग-मिलर अंगजनन, रिचमंड-लैंग प्रभाव एवं शीर्ष प्रमुखता भंग) का वर्णन कीजिए।

काइनेटिन (1955) व जियाटिन (1963) की खोज, एडेनिन व्युत्पन्न संरचना, जड़ शीर्ष में संश्लेषण और साइटोकाइनिन के सभी 5 प्रमुख कार्यिकीय प्रभावों तथा ऊतक संवर्धन में इसके महत्व का सविस्तर वर्णन करें।

2. एथिलीन के जैव-संश्लेषण (यांग चक्र), क्रिया संदमकों और कृषि एवं बागवानी में इसकी कार्यिकीय भूमिकाओं (फल पकाना, तिहरी प्रतिक्रिया, अधोकुंचन, विलगन, पुष्पन एवं लिंग अभिव्यक्ति) की विवेचना कीजिए।

यांग चक्र (Methionine → SAM → ACC → Ethylene) और इसके एंजाइम व संदमक (AVG, Co2+, Ag+, 1-MCP) का चार्ट बनाकर एथिलीन की सभी प्रमुख कार्यिकीय व व्यावसायिक भूमिकाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।

3. एब्सिसिक अम्ल (ABA) की खोज, रासायनिक पूर्ववर्ती और एक 'तनाव हार्मोन' तथा 'एंटी-जिबरेलिन' के रूप में इसके कार्यिकीय प्रभावों (रंध्र बंद होना, प्रसुप्ति एवं विवियरेपरी नियंत्रण) का वर्णन कीजिए।

एडिकॉट व वेयरिंग द्वारा खोज, कैरोटीनॉइड (वाइओलाज़ैंथिन) पूर्ववर्ती, सूखे में रंध्र बंद करने का आयनिक तंत्र, बीज व कलिका प्रसुप्ति, विवियरेपरी की रोकथाम और जिबरेलिन के साथ इसके विरोध (Antagonism) का सविस्तर वर्णन करें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • काइनेटिन (Kinetin) एक कृत्रिम साइटोकाइनिन है, जबकि जियाटिन (Zeatin) मक्का में पाया जाने वाला पहला प्राकृतिक साइटोकाइनिन है।
  • Agrobacterium tumefaciens जीवाणु पौधों में ऑक्सिन और साइटोकाइनिन के अति-उत्पादन से 'क्राउन गॉल' (Crown Gall) ट्यूमर बनाता है।
  • एथिलीन के यांग चक्र में 'ACC Oxidase' एंजाइम को कार्य करने के लिए ऑक्सीजन (O2) की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
  • ताजे कटे हुए फूलों और सेब के भंडारण में '1-MCP' (1-Methylcyclopropene) एथिलीन की क्रिया को रोककर ताजगी बनाए रखता है।
  • एब्सिसिक अम्ल (ABA) को 'मेटाबोलिक एंटी-ट्रांसपिरेंट' (Metabolic antitranspirant) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।

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