PPHYS 311 Lecture 14: प्रकाश-श्वसन (Photorespiration / C₂ चक्र), C₄ पौधों की उच्च उत्पादकता एवं CAM अनुकूलन

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PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
LECTURE 14 / 32 · PPHYS 311

प्रकाश-श्वसन (Photorespiration / C₂ चक्र), C₄ पौधों की उच्च उत्पादकता एवं CAM अनुकूलन

Photorespiration, Productivity of C₄ Plants and CAM Adaptations

Photorespiration / Glycolate / C2 Cycle (Chloroplast → Peroxisome → Mitochondria), RuBisCO Oxygenase Activity, Why C4 Plants Have Higher Productivity, CAM Ecological Adaptations

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Photorespiration, Productivity of C₄ Plants and CAM Adaptations (Theory • Lecture 14)
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • प्रकाश-श्वसन (Photorespiration / C2 Oxidative Photosynthetic Carbon Cycle / Glycolate Pathway — Decker 1955, Krotkov 1963 & Tolbert 1971) की परिभाषा, RuBisCO की दोहरी प्रकृति (Carboxylase बनाम Oxygenase) और 2-कार्बन प्रथम उत्पाद 'फॉस्फोग्लाइकोलेट' (2-Phosphoglycolate) को समझना।
  • प्रकाश-श्वसन में भाग लेने वाले तीनों कोशिकांगों के क्रम (हरितलवक / Chloroplast → परऑक्सीसोम / Peroxisome → माइटोकॉन्ड्रिया / Mitochondria), माइटोकॉन्ड्रिया में 2 ग्लाइसिन से 1 सेरीन व CO2 तथा NH3 के निकास और इसे एक 'अपव्ययी प्रक्रिया' (Wasteful process — न ATP बनता है न शर्करा, उल्टे 25% कार्बन नष्ट होता है) कहने के कारण का विश्लेषण करना।
  • C₄ पौधों की उत्पादकता C₃ पौधों से अधिक क्यों होती है और मरुस्थलीय पर्यावरण में CAM पौधों के पारिस्थितिक व कार्यिकीय अनुकूलनों का अध्ययन करना।

प्रस्तावना · Introduction

सामान्य श्वसन (Dark respiration) दिन और रात हर समय सभी जीवित कोशिकाओं के माइटोकॉन्ड्रिया में चलता है और ऊर्जा (ATP) प्रदान करता है। किंतु C₃ पौधों (जैसे गेहूँ, धान, सोयाबीन, दलहन, कपास) की हरी पत्तियों में सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में एक अजीब और विनाशकारी प्रकार का अतिरिक्त श्वसन चलता है जिसे 'प्रकाश-श्वसन' (Photorespiration या C2 ग्लाइकोलेट चक्र) कहते हैं। यह प्रक्रिया न तो कोई ATP या NADPH बनाती है और न ही भोजन, बल्कि उल्टे पौधे की ऊर्जा खर्च करके प्रकाश-संश्लेषण द्वारा बड़ी मेहनत से स्थिर किए गए कार्बन का 25% से 30% भाग वापस CO2 के रूप में हवा में उड़ा देती है! इसके विपरीत, C₄ पौधों ने अपने विकास में इस प्रकाश-श्वसन को पूरी तरह समाप्त कर लिया है, और यही उनकी सर्वोच्च कृषि उत्पादकता का सबसे बड़ा रहस्य है!

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

प्रकाश-श्वसन / C₂ चक्र (Photorespiration / C2 Glycolate Pathway)

प्रकाश की उपस्थिति में, जब पत्ती में O2 की सांद्रता उच्च और CO2 की सांद्रता कम (तथा तापमान उच्च) होती है, तब C₃ पौधों के RuBisCO एंजाइम की ऑक्सीजिनेज क्रिया द्वारा RuBP (5C) के ऑक्सीकरण से O2 का ग्रहण और CO2 के निष्कासन की ऊर्जा-खर्च करने वाली प्रक्रिया (प्रथम खोज: Otto Warburg, 1920 — 'Warburg Effect'; प्रदर्शन: Decker, 1955; 'Photorespiration' शब्द: Krotkov, 1963; संपूर्ण पथ: N.E. Tolbert, 1971)।

वारबर्ग प्रभाव (Warburg Effect – Otto Warburg, 1920)

ऑटो वारबर्ग ने देखा कि C₃ पौधों में वायुमंडलीय ऑक्सीजन (O2) की सांद्रता बढ़ाने पर शुद्ध प्रकाश-संश्लेषण की दर घट जाती है (और O2 को 21% से घटाकर 2% कर देने पर C₃ प्रकाश-संश्लेषण 30–40% बढ़ जाता है!)—उच्च O2 द्वारा प्रकाश-संश्लेषण के इस संदमन को 'वारबर्ग प्रभाव' कहते हैं।

C₂ चक्र नाम का कारण (Why Called C₂ Cycle?)

क्योंकि जब RuBisCO एंजाइम RuBP (5-कार्बन) को CO2 के बजाय O2 से जोड़ता है, तो एक अणु 3-PGA (3-कार्बन) के साथ 2-कार्बन वाला '2-फॉस्फोग्लाइकोलेट' (2-Phosphoglycolate → Glycolate, 2C) बनता है, इसलिए इसे C2 चक्र या ग्लाइकोलेट चक्र कहते हैं!

CAM आइडलिंग (CAM-Idling — Extreme Drought Adaptation)

जब मरुस्थल में महीनों तक भयंकर सूखा पड़ता है, तब CAM पौधे (नागफनी) अपने रंध्र दिन और रात 24 घंटे बंद कर लेते हैं और श्वसन से निकली अपनी ही आंतरिक CO2 को रात में मैलिक अम्ल और दिन में शर्करा में रिसाइकिल करते रहते हैं ताकि बिना पानी खोए जीवित बने रहें!

वर्गीकरण · Classification

प्रकाश-श्वसन (C₂ चक्र) में भाग लेने वाले 3 कोशिकांग एवं प्रत्येक में होने वाली मुख्य क्रिया (100% Exam Question!)

प्रकाश-श्वसन तीन कोशिकांगों के संयुक्त सहयोग से पूरा होता है (क्रम: हरितलवक → परऑक्सीसोम → माइटोकॉन्ड्रिया):
1. हरितलवक (Chloroplast): यहाँ RuBisCO द्वारा RuBP (5C)+O2→3-PGA (3C)+2-Phosphoglycolate (2C) बनता है, जो फॉस्फेट खोकर 'ग्लाइकोलेट' (Glycolate, 2C) बनाता है।
2. परऑक्सीसोम (Peroxisome): ग्लाइकोलेट हरितलवक से परऑक्सीसोम में आता है, जहाँ Glycolate oxidase एंजाइम O2 की सहायता से उसे ग्लाइऑक्सीलेट + H2O2 (जिसे Catalase तोड़ता है) में बदलता है और फिर ट्रांसएमिनेशन से अमीनो अम्ल 'ग्लाइसिन' (Glycine, 2C) बनता है!
3. माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondrion): ग्लाइसिन के 2 अणु (2 × 2C = 4 कार्बन) माइटोकॉन्ड्रिया में प्रवेश करते हैं, जहाँ 'Glycine decarboxylase' द्वारा जुड़कर 1 अणु 'सेरीन' (Serine, 3C) + 1 अणु CO2↑ (प्रकाश-श्वसन की CO2 यहीं निकलती है!) + 1 अणु NH3↑ (अमोनिया) बनाते हैं!

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • RuBisCO की द्वि-कार्यात्मक त्रासदी (Dual Nature of RuBisCO — Carboxylase vs Oxygenase): RuBisCO के एक ही सक्रिय स्थल (Active site) के लिए CO2 और O2 के बीच प्रतिस्पर्धी संदमन (Competitive inhibition) चलता रहता है:
    • जब CO2/O2 अनुपात उच्च हो और तापमान कम (<25°C) हो ⟹ RuBisCO 'Carboxylase' का काम करता है और केल्विन चक्र (C₃) चलाता है।
    • जब तापमान बढ़ जाता है (>30–35°C) और सूखे में रंध्र आंशिक बंद होने से पत्ती के अंदर CO2 घट जाती है और O2 बढ़ जाती है (साथ ही उच्च तापमान पर जल में CO2 की घुलनशीलता O2 की तुलना में बहुत तेजी से गिरती है!) ⟹ तब RuBisCO की O2 के प्रति बंधुता बढ़ जाती है और वह 'Oxygenase' बन कर प्रकाश-श्वसन (C2 चक्र) चालू कर देता है!
  • प्रकाश-श्वसन का कार्बन और ऊर्जा नुकसान गणित: जब RuBisCO के 2 ऑक्सीजिनेज चक्र चलते हैं, तो 2 अणु फॉस्फोग्लाइकोलेट (2 × 2C = 4 कार्बन) बनते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया में इन 4 कार्बनों में से 3 कार्बन तो सेरीन (3C) से वापस 3-PGA में बचा लिए जाते हैं (75% कार्बन की रिकवरी), किंतु 1 कार्बन (अर्थात् 25% कार्बन) CO2 के रूप में नष्ट हो जाता है और निकली हुई जहरीली अमोनिया (NH3) को GS-GOGAT पथ से पुनः स्थिर करने तथा ग्लिसरेट को फॉस्फोराइलेट करने में पौधे का ATP और NADPH भी खर्च होता है!

कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics

1. Mechanism of Photorespiration (C2 Glycolate Cycle) Across Three Organelles (तीनों कोशिकांगों में प्रकाश-श्वसन की क्रियाविधि)

All C3 Crops (Rice, Wheat, Pulses, Oilseeds, Cotton)

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): All C3 Crops (Rice, Wheat, Pulses, Oilseeds, Cotton)

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: खोजकर्ता: डेकर (J.P. Decker, 1955 — तंबाकू में 'Post-illumination CO2 burst' देखा), क्रोटकोव (1963), टोलबर्ट (N.E. Tolbert, 1971) एवं ओग्रेन व बाउज (1971 — RuBisCO की ऑक्सीजिनेज क्रिया खोजी)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: यदि आनुवंशिक अभियांत्रिकी द्वारा C₃ फसलों (धान, गेहूँ, सोयाबीन) में प्रकाश-श्वसन को कम या बाईपास कर दिया जाए, तो उनकी उपज में सीधे 25% से 40% की वृद्धि हो सकती है!

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
C₂ चक्र के चरणबद्ध रासायनिक परिवर्तन:
1. हरितलवक (Chloroplast) में:
• 2×RuBP (5C)+2O2→RuBisCO Oxygenase2×3-PGA (3C)+2×2-Phosphoglycolate (2C)
• फॉस्फोग्लाइकोलेट फॉस्फेटेज एंजाइम से फॉस्फेट हटकर 2 अणु ग्लाइकोलेट (Glycolate, 2C) बनते हैं जो परऑक्सीसोम में चले जाते हैं।
2. परऑक्सीसोम (Peroxisome) में:
• ग्लाइकोलेट + O2→Glycolate oxidaseग्लाइऑक्सीलेट (Glyoxylate)+H2O2 (परऑक्सीसोम का Catalase एंजाइम तुरंत जहरीले H2O2 को H2O+12O2 में तोड़ देता है)।
• ग्लाइऑक्सीलेट पर ग्लूटामेट से अमीनो समूह जुड़कर 2 अणु ग्लाइसिन (Glycine, 2C अमीनो अम्ल) बनते हैं।
3. माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में:
• 2 अणु ग्लाइसिन (2 × 2C) +NAD+→Glycine decarboxylase & Serine hydroxymethyltransferase1 अणु सेरीन (Serine, 3C)+CO2↑+NH3↑+NADH+H+!
4. वापस परऑक्सीसोम एवं हरितलवक में (Carbon Salvage):
• सेरीन (3C) माइटोकॉन्ड्रिया से वापस परऑक्सीसोम में आकर हाइड्रॉक्सीपाइरूवेट और फिर ग्लिसरेट (Glycerate, 3C) में बदलता है।
• ग्लिसरेट वापस हरितलवक में आता है जहाँ 1 ATP खर्च करके वह 3-PGA (3C) में बदल जाता है और केल्विन चक्र में प्रवेश कर जाता है!

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): प्रकाश-श्वसन के संभावित धनात्मक कार्य (Possible Protective Role): यद्यपि यह कार्बन व ऊर्जा की दृष्टि से अपव्ययी है, फिर भी सूखे और तेज धूप में जब रंध्र बंद होते हैं, तब यह अतिरिक्त ATP व NADPH को खपाकर प्रकाश-तंत्र (PS-II) को 'फोटो-ऑक्सीडेशन / फोटो-इनहिबिशन' से बचाता है तथा ग्लाइसिन व सेरीन अमीनो अम्ल उपलब्ध कराता है।

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): सामान्य अंधकार श्वसन (Dark respiration) में O2 की सांद्रता 1% से 21% बढ़ने पर दर नहीं बदलती, किंतु प्रकाश-श्वसन की दर O2 सांद्रता (0% से 100%) के सीधे समानुपाती बढ़ती है!

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): उच्च तापमान (>30°C), तेज प्रकाश तीव्रता, उच्च O2 और निम्न CO2 सांद्रता प्रकाश-श्वसन को तीव्र करते हैं।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Photorespiration = C2 Glycolate Cycle
  • 3 Organelles in sequence: Chloroplast → Peroxisome → Mitochondria
  • First product = 2-Phosphoglycolate (2C)
  • Amino acids formed = Glycine (2C in Peroxisome) → Serine (3C in Mitochondria)
  • CO2 and NH3 are released in MITOCHONDRIA (2 Glycine → 1 Serine + CO2 + NH3)
  • No ATP is synthesized (ATP is consumed!)।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

पॉलीहाउस में CO2 संवर्धन (800–1000 ppm CO2) करने पर C₃ सब्जियों (टमाटर, खीरा, शिमला मिर्च) में प्रकाश-श्वसन दब जाता है और उपज 35–40% बढ़ जाती है!

2. Why C4 Plants Have Higher Productivity than C3 Plants & CAM Adaptations (C4 पौधों की उच्च उत्पादकता के कारण एवं CAM अनुकूलन)

Maize, Sugarcane, Sorghum, Pearl Millet vs Wheat/Rice; Pineapple & Cacti

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Maize, Sugarcane, Sorghum, Pearl Millet vs Wheat/Rice; Pineapple & Cacti

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रमुख कारण: 1. Absence of Photorespiration (CO2 Pump), 2. Kranz Anatomy, 3. High WUE & NUE, 4. No Light Saturation in Full Sunlight।

🌱 कार्यिकीय महत्व: उष्णकटिबंधीय खरीफ परिस्थितियों में गन्ना और मक्का (C₄) की प्रति हेक्टेयर शुष्क पदार्थ उत्पादकता (40–80 टन/हेक्टेयर) किसी भी C₃ फसल से डेढ़ से दो गुना अधिक होती है!

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
C₄ पौधों की उत्पादकता C₃ पौधों से अधिक होने के 6 प्रमुख कार्यिकीय कारण (Why C₄ Plants are More Productive than C₃):
1. प्रकाश-श्वसन की पूर्ण अनुपस्थिति (Zero Photorespiration due to CO2-Concentrating Pump): C₄ पौधों में मीसोफिल का PEPCase (जिसमें कोई ऑक्सीजिनेज क्रिया नहीं होती और जिसकी CO2 बंधुता बहुत उच्च है) CO2 को पकड़कर मैलैट के रूप में पूल-आच्छद में पंप कर देता है। इससे पूल-आच्छद में RuBisCO के पास CO2 की सांद्रता बाहरी हवा से 10 से 20 गुना अधिक हो जाती है, जिससे RuBisCO केवल कार्बोक्सिलीकरण करता है और 25–30% कार्बन की प्रकाश-श्वसन हानि पूर्णतः बच जाती है!
2. पूर्ण सूर्य के प्रकाश में भी प्रकाशीय असंतृप्ति (No Light Saturation in Full Sunlight): C₃ पौधे पूर्ण धूप के मात्र 30–50% प्रकाश पर ही संतृप्त (Light saturated) हो जाते हैं, जबकि C₄ पौधे 100% तेज धूप में भी प्रकाश-संश्लेषण बढ़ाते रहते हैं!
3. अत्यंत कम CO2 क्षतिपूर्ति बिंदु (CO2 Compensation Point = 0–5 ppm): C₄ पौधे पर्णगुहा की लगभग सारी CO2 (0–5 ppm तक) सोख लेते हैं, जबकि C₃ पौधे 40–60 ppm से नीचे CO2 नहीं सोख पाते।
4. दोगुनी जल उपयोग दक्षता (Double WUE): कम रंध्र खुलने पर भी पूरा CO2 स्थिरीकरण कर लेने से C₄ पौधे सूखे और उच्च तापमान (30–40°C) में भी तेजी से बढ़ते हैं।
5. उच्च नाइट्रोजन उपयोग दक्षता (High Nitrogen Use Efficiency – NUE): C₃ पौधों को अपनी पत्ती के कुल नाइट्रोजन का 30–50% भाग अकेले RuBisCO बनाने में लगाना पड़ता है; जबकि C₄ पौधों में CO2 सांद्रित होने से एक-तिहाई RuBisCO में ही काम चल जाता है, इसलिए वे कम नाइट्रोजन खाद में अधिक बायोमास बनाते हैं!
6. क्रैंज शारीरिकी से त्वरित फ्लोएम स्थानांतरण (Rapid Translocation): पूल-आच्छद कोशिकाएँ सीधे फ्लोएम के संपर्क में होती हैं, इसलिए बनी हुई शर्करा तुरंत सिंक (दाने/तने) में चली जाती है और पत्ती में शर्करा जमा होने से प्रकाश-संश्लेषण का फीडबैक संदमन नहीं होता!

CAM पौधों के पारिस्थितिक एवं कार्यिकीय अनुकूलन (CAM Adaptations for Arid Environments):
• 1. रात्रि सक्रिय रंध्र (Scotoactive Stomata): जब दिन में मरुस्थल का तापमान 45°C और आर्द्रता 10% होती है तब रंध्र बंद रखकर जल बचाते हैं, और रात के ठंडे व नम वातावरण में रंध्र खोलकर CO2 लेते हैं (जिससे इनकी WUE C₃ से 5–10 गुना अधिक होती है)।
• 2. मांसलता एवं विशाल रिक्तिकाएँ (Succulence & Large Vacuoles): रात भर बनने वाले मैलिक अम्ल और जल को संचित करने के लिए इनकी कोशिकाओं का 90%+ भाग रिक्तिका होता है।
• 3. उपापचयी लचीलापन (Metabolic Plasticity — Facultative CAM & CAM-Idling): पानी मिलने पर ये C₃ मोड में तेजी से बढ़ सकते हैं और भीषण सूखे में रंध्र 24 घंटे बंद कर 'CAM-Idling' द्वारा महीनों तक बिना मरे जीवित रहते हैं!

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): नोट करें (महत्वपूर्ण अपवाद!): यदि तापमान ठंडा (<20°C) हो और प्रकाश कम हो, तब C₃ पौधों में प्रकाश-श्वसन वैसे ही नहीं होता, और वहाँ C₄ पौधों को प्रति CO2 2 अतिरिक्त ATP (30 बनाम 18 ATP) खर्च करने का नुकसान उठाना पड़ता है—इसलिए ठंडे शीतोष्ण क्षेत्रों (<20°C) में C₃ पौधे (गेहूँ/जौ) C₄ पौधों से अधिक दक्ष होते हैं, जबकि गर्म उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों (>28–30°C, खरीफ) में C₄ पौधे (मक्का/गन्ना/ज्वार/बाजरा) सर्वश्रेष्ठ होते हैं!

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) में 'C4 Rice Project' चलाया जा रहा है ताकि धान (C3) में मक्का का C4 पथ डालकर उसकी उपज और WUE को 50% बढ़ाया जा सके।

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): कुछ प्रजातियाँ (जैसे *Flaveria* और *Moricandia arvensis*) C3 और C4 के बीच के गुण दिखाती हैं जिन्हें C3−C4 मध्यवर्ती पादप (C3−C4 Intermediates) कहते हैं।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Why C4 > C3 in Tropics: 1. No Photorespiration (PEPCase CO2 pump concentrates CO2 10–20x in bundle sheath), 2. Low CO2 compensation point (0–5 ppm), 3. No light saturation in full sun, 4. 2x higher WUE & NUE, 5. Fast phloem translocation via Kranz anatomy
  • Cool climates (<20°C): C3 is more quantum-efficient (18 ATP) than C4 (30 ATP)।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

खरीफ के बारानी और गर्म क्षेत्रों में C3 फसलों की तुलना में C4 फसलों (मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी) का चुनाव अधिक उपज और जल सुरक्षा देता है।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 14.1: सामान्य श्वसन (Dark Respiration) बनाम प्रकाश-श्वसन (Photorespiration / C₂ Cycle) की तुलना

तुलना का आधारसामान्य अंधकार श्वसन (Dark / Mitochondrial Respiration)प्रकाश-श्वसन (Photorespiration / C₂ Cycle)
प्रकाश की आवश्यकतादिन और रात हर समय (प्रकाश से स्वतंत्र) चलता हैकेवल सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ही चलता है
शामिल ऊतक एवं पौधेसभी पौधों (C₃, C₄, CAM) की सभी जीवित कोशिकाओं मेंकेवल C₃ पौधों की हरी प्रकाश-संश्लेषी कोशिकाओं में
शामिल कोशिकांगकोशिकाद्रव्य एवं माइटोकॉन्ड्रियातीन कोशिकांग: हरितलवक + परऑक्सीसोम + माइटोकॉन्ड्रिया
श्वसनीय क्रियाधार (Substrate)ग्लूकोज / स्टार्च / सुक्रोज / वसानव-निर्मित RuBP → 2-फॉस्फोग्लाइकोलेट (Glycolate)
ऊर्जा (ATP / NADH) का उत्पादनATP और NADH का प्रचुर निर्माण होता है (जीवन के लिए अनिवार्य)कोई ATP नहीं बनता; उल्टे ATP और NADPH खर्च होते हैं (अपव्ययी प्रक्रिया!)
O2 सांद्रता का प्रभाव1–2% O2 पर ही संतृप्त हो जाता है (अधिक O2 से नहीं बढ़ता)O2 सांद्रता (0% से 100%) बढ़ने के साथ लगातार बढ़ता जाता है
CO2 निकास का स्थानक्रेब्स चक्र (माइटोकॉन्ड्रिया) मेंमाइटोकॉन्ड्रिया में (2 ग्लाइसिन → 1 सेरीन + CO2 + NH3)

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. प्रकाश-श्वसन (C₂ चक्र) में कार्बन रिकवरी प्रतिशत एवं कार्बन हानि प्रतिशत की गणना

2 RuBP (10C) + 2 O2 ──► 2 × 3-PGA (6C) + 2 × Phosphoglycolate (2 × 2C = 4C) | 2 Glycine (4C) ──► 1 Serine (3C) + 1 CO2 ↑ (1C lost!)

गणना (ग्लाइकोलेट में गए कार्बन का कितना % बचता है और कितना % उड़ जाता है? — ICAR JRF प्रश्न!):
• RuBisCO की 2 ऑक्सीजिनेज अभिक्रियाओं से 2 अणु फॉस्फोग्लाइकोलेट = 2×2C= कुल 4 कार्बन परमाणु C2 चक्र में प्रवेश करते हैं।
• माइटोकॉन्ड्रिया में 2 अणु ग्लाइसिन (4C) जुड़कर 1 अणु सेरीन (3C) बनाते हैं (जो ग्लिसरेट से वापस 3-PGA बनकर केल्विन चक्र में लौट जाता है) और 1 अणु CO2 (1C) हवा में उड़ जाता है!
• अतः ग्लाइकोलेट पथ में प्रवेश करने वाले कुल 4 कार्बनों में से:
1. कार्बन रिकवरी (Carbon Salvaged / Recovered) = (3/4)×100= 75% कार्बन बचा लिया जाता है!
2. कार्बन हानि (Carbon Lost as CO2) = (1/4)×100= 25% कार्बन नष्ट हो जाता है!

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 14: प्रकाश-श्वसन (C2 चक्र), C4 पौधों की उत्पादकता एवं CAM अनुकूलन]
├── 1. प्रकाश-श्वसन / C2 ग्लाइकोलेट चक्र (Decker 1955, Krotkov 1963, Tolbert 1971)
│ ├── कारण: उच्च ताप (>30°C), तेज धूप, उच्च O2 एवं कम CO2 में RuBisCO की 'Oxygenase' क्रिया (Warburg Effect)
│ ├── 3 कोशिकांगों का क्रम: 1. हरितलवक (Chloroplast) ──► 2. परऑक्सीसोम (Peroxisome) ──► 3. माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria)
│ ├── मुख्य अभिक्रियाएँ:
│ │ ├── हरितलवक में: RuBP (5C) + O2 ──► 3-PGA (3C) + 2-Phosphoglycolate (2C प्रथम उत्पाद) ──► Glycolate (2C)
│ │ ├── परऑक्सीसोम में: Glycolate ──► Glyoxylate (+ H2O2) ──► Glycine (2C अमीनो अम्ल)
│ │ └── माइटोकॉन्ड्रिया में: 2 Glycine (4C) ──► 1 Serine (3C) + CO2 ↑ + NH3 ↑ (75% कार्बन रिकवर, 25% कार्बन नष्ट!)
│ └── ऊर्जा: कोई ATP नहीं बनता (ATP व NADPH खर्च होते हैं) — मुख्यतः C3 पौधों में
├── 2. C4 पौधों की उच्च उत्पादकता के 6 कारण (Why C4 > C3 Productivity)
│ ├── (1) PEPCase के CO2 पंप से पूल-आच्छद में 10–20 गुना CO2 सांद्रण → प्रकाश-श्वसन पूर्णतः अनुपस्थित!
│ ├── (2) 100% तेज धूप में भी प्रकाशीय संतृप्ति नहीं | (3) अत्यंत कम CO2 क्षतिपूर्ति बिंदु (0–5 ppm)
│ └── (4) दोगुनी WUE | (5) उच्च नाइट्रोजन उपयोग दक्षता (NUE) | (6) क्रैंज शारीरिकी से त्वरित शर्करा स्थानांतरण
└── 3. CAM पौधों के मरुस्थलीय अनुकूलन (CAM Adaptations)
├── रात्रि में रंध्र खुलना (Scotoactive), बड़ी रिक्तिका युक्त मांसल पत्तियाँ/तना (Succulence)
└── उपापचयी लचीलापन: Facultative CAM (Ice plant) एवं भीषण सूखे में 24 घंटे रंध्र बंद कर 'CAM-Idling'

प्रवाह चित्र · Flowchart

[प्रकाश-श्वसन (C2 ग्लाइकोलेट चक्र) का तीनों कोशिकांगों में चरणबद्ध प्रवाह आरेख]
┌───────────────────────────────────────────────────────────────────────────────┐
│ 【1. हरितलवक (Chloroplast)】 │
│ 2 RuBP (5C) + 2 O2 ──(RuBisCO Oxygenase)──► 2 × 3-PGA (3C) + 2 × 2-Phosphoglycolate (2C) │
│ │ (Pi निकलना) │
│ ◄── [3-PGA (3C) ◄──(1 ATP)── ग्लिसरेट (3C)] 2 × ग्लाइकोलेट (2C) │
└────────────────────────────────────────▲─────────────────────────────┼────────────────┘
│ ▼
┌────────────────────────────────────────┼─────────────────────────────┼────────────────┐
│ 【2. परऑक्सीसोम (Peroxisome)】 │ ▼ │
│ ग्लिसरेट (3C) ◄── हाइड्रॉक्सीपाइरूवेट (3C) 2 × ग्लाइकोलेट + O2 ──► ग्लाइऑक्सीलेट + H2O2 │
│ ▲ │ │
│ │ 2 × ग्लाइसिन (2C) │
└─────────┼─────────────────────────────────────────────────────────────────────┼───────┘
│ ▼
┌─────────┼─────────────────────────────────────────────────────────────────────┼───────┐
│ 【3. माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondrion)】 ▼ │
│ 1 × सेरीन (Serine - 3C) ◄──── [Glycine Decarboxylase] ◄──── 2 × ग्लाइसिन (2 × 2C = 4C)│
│ │ │
│ └──► 1 CO2 ↑ (25% कार्बन नष्ट!) + 1 NH3 ↑ │
└───────────────────────────────────────────────────────────────────────────────────────┘

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • परीक्षा में प्रकाश-श्वसन (Photorespiration) से पूछे जाने वाले 5 सबसे पक्के प्रश्न:
    1. प्रकाश-श्वसन में कौन से 3 कोशिकांग किस क्रम में भाग लेते हैं? उत्तर: हरितलवक (Chloroplast) → परऑक्सीसोम (Peroxisome) → माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) (ट्रिक: CPM)।
    2. प्रकाश-श्वसन का प्रथम 2-कार्बन उत्पाद क्या है? उत्तर: 2-फॉस्फोग्लाइकोलेट (2-Phosphoglycolate / Glycolate)।
    3. प्रकाश-श्वसन के दौरान CO2 और अमोनिया (NH3) किस कोशिकांग में और किस अमीनो अम्ल के टूटने से निकलती हैं? उत्तर: माइटोकॉन्ड्रिया में, 2 अणु ग्लाइसिन (Glycine, 2C) से 1 अणु सेरीन (Serine, 3C) बनते समय!
    4. उच्च O2 द्वारा C₃ प्रकाश-संश्लेषण के संदमन को क्या कहते हैं? उत्तर: वारबर्ग प्रभाव (Warburg Effect, 1920)।
    5. ग्लाइकोलेट में जाने वाले कुल कार्बन का कितने प्रतिशत CO2 के रूप में नष्ट हो जाता है और कितना बचता है? उत्तर: 25% नष्ट हो जाता है और 75% सेरीन के माध्यम से वापस बचा लिया जाता है!

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • 'Photorespiration' शब्द क्रोटकोव (Krotkov, 1963) ने दिया; प्रथम प्रदर्शन डेकर (Decker, 1955) ने किया; और पूरा C₂ पथ टोलबर्ट (Tolbert, 1971) ने स्पष्ट किया।
  • RuBisCO की ऑक्सीजिनेज क्रिया की खोज ओग्रेन एवं बाउज (Ogren & Bowes, 1971) ने सोयाबीन में की थी।
  • C₄ पौधों में क्रैंज शारीरिकी और PEPCase के CO2 पंप के कारण प्रकाश-श्वसन नहीं होता।
  • ठंडे तापमान (<20°C) पर C₃ पौधों की क्वांटम दक्षता C₄ से अधिक होती है, जबकि गर्म तापमान (>30°C) पर C₄ पौधे C₃ से बहुत आगे निकल जाते हैं।
  • CAM-Idling में भीषण सूखे के दौरान रंध्र दिन-रात बंद रहते हैं और केवल आंतरिक श्वसनीय CO2 का पुनर्चक्रण होता है।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. प्रकाश-श्वसन (Photorespiration / C2 Glycolate Cycle) की प्रक्रिया पादप कोशिका के किन तीन कोशिकांगों के संयुक्त सहयोग से संपन्न होती है?

  • (A) केंद्रक, राइबोसोम एवं गॉल्जीकाय
  • (B) हरितलवक (Chloroplast), परऑक्सीसोम (Peroxisome) एवं माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria)
  • (C) हरितलवक, रिक्तिका एवं अंतर्द्रव्यी जालिका
  • (D) परऑक्सीसोम, लाइसोसोम एवं तारककाय
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — टोलबर्ट (1971) के अनुसार प्रकाश-श्वसन हरितलवक → परऑक्सीसोम → माइटोकॉन्ड्रिया इन तीनों कोशिकांगों में क्रमशः चलता है (CPM)।

2. प्रकाश-श्वसन (C2 चक्र) के दौरान वास्तविक 'CO2 और अमोनिया (NH3) का निष्कासन' किस कोशिकांग में और किस अभिक्रिया में होता है?

  • (A) हरितलवक में, RuBP के टूटने से
  • (B) परऑक्सीसोम में, ग्लाइकोलेट के ऑक्सीकरण से
  • (C) माइटोकॉन्ड्रिया में, जब 2 अणु ग्लाइसिन (2C) जुड़कर 1 अणु सेरीन (3C) + CO2 + NH3 बनाते हैं
  • (D) कोशिकाद्रव्य में, पाइरूवेट से
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — माइटोकॉन्ड्रिया में Glycine decarboxylase एंजाइम 2 ग्लाइसिन (4C) को 1 सेरीन (3C) में बदलता है और यहीं 1 CO2 व 1 NH3 मुक्त होते हैं।

3. जब RuBisCO एंजाइम ऑक्सीजिनेज के रूप में कार्य कर RuBP (5C) को O2 से जोड़ता है, तो 3-PGA (3C) के साथ बनने वाला 'प्रथम 2-कार्बन यौगिक' कौन सा है?

  • (A) 2-फॉस्फोग्लाइकोलेट (2-Phosphoglycolate → Glycolate)
  • (B) ऑक्जेलोएसीटिक अम्ल
  • (C) मैलिक अम्ल
  • (D) पाइरूविक अम्ल
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — RuBP (5C) + O2 → 1 अणु 3-PGA (3C) + 1 अणु 2-फॉस्फोग्लाइकोलेट (2C); इसी 2-कार्बन उत्पाद के कारण इसे C2 चक्र कहते हैं।

4. वायुमंडल में ऑक्सीजन (O2) की उच्च सांद्रता द्वारा C3 पौधों के प्रकाश-संश्लेषण की दर का संदमन (Inhibition) होना क्या कहलाता है?

  • (A) इमर्सन प्रभाव
  • (B) वारबर्ग प्रभाव (Warburg Effect — Otto Warburg, 1920)
  • (C) पाश्चर प्रभाव
  • (D) रिचमंड-लैंग प्रभाव
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — वारबर्ग (1920) ने देखा कि O2 बढ़ने पर RuBisCO की ऑक्सीजिनेज क्रिया बढ़ जाती है जिससे प्रकाश-संश्लेषण घट जाता है ('Warburg Effect')।

5. उष्णकटिबंधीय परिस्थितियों में C4 फसलों (मक्का, गन्ना, ज्वार, बाजरा) की उत्पादकता C3 फसलों (गेहूँ, धान) से बहुत अधिक होने का सबसे प्रमुख कार्यिकीय कारण क्या है?

  • (A) C4 पौधों में जड़ें नहीं होतीं
  • (B) क्रैंज शारीरिकी और PEPCase के CO2-सांद्रण पंप के कारण C4 पौधों में प्रकाश-श्वसन (Photorespiration) अनुपस्थित होता है और वे पूर्ण धूप में संतृप्त नहीं होते
  • (C) C4 पौधों में पर्णहरित नहीं होता
  • (D) C4 पौधे रात में सूर्य का प्रकाश लेते हैं
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — C4 पौधों में पूल-आच्छद कोशिका में RuBisCO के पास CO2 सांद्रता 10–20 गुना अधिक रहने से प्रकाश-श्वसन नहीं होता और 25–30% कार्बन हानि बच जाती है।

6. प्रकाश-श्वसन के ग्लाइकोलेट पथ में प्रवेश करने वाले कुल कार्बन परमाणुओं (2 ग्लाइकोलेट = 4 कार्बन) में से कितने प्रतिशत कार्बन 'सेरीन (3C)' के माध्यम से वापस केल्विन चक्र में बचा लिया जाता है और कितना नष्ट होता है?

  • (A) 100% नष्ट हो जाता है
  • (B) 75% कार्बन (4 में से 3 कार्बन) बचा लिया जाता है और 25% कार्बन (4 में से 1 कार्बन) CO2 के रूप में नष्ट हो जाता है
  • (C) 50% बचता है और 50% नष्ट होता है
  • (D) 100% बच जाता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — 2 ग्लाइसिन (4 कार्बन) से 1 सेरीन (3 कार्बन = 75%) वापस 3-PGA बना लेता है और 1 CO2 (1 कार्बन = 25%) हवा में उड़ जाता है।

7. सन् 1955 में तंबाकू की पत्तियों पर प्रकाश बंद करने के तुरंत बाद होने वाले 'Post-illumination CO2 burst' द्वारा प्रकाश-श्वसन का प्रथम प्रायोगिक प्रदर्शन किसने किया था?

  • (A) जे.पी. डेकर (J.P. Decker, 1955)
  • (B) स्टीफन हेल्स
  • (C) वॉन सैक्स
  • (D) एफ.डब्ल्यू. वेंट
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — डेकर (1955) ने प्रकाश-श्वसन प्रदर्शित किया, क्रोटकोव (1963) ने शब्द दिया और टोलबर्ट (1971) ने परऑक्सीसोम व C2 पथ खोजा।

8. परऑक्सीसोम में ग्लाइकोलेट के ऑक्सीकरण से बनने वाले विषैले हाइड्रोजन पेरोक्साइड (H2O2) को तुरंत जल और ऑक्सीजन में तोड़कर नष्ट करने वाला एंजाइम कौन सा है?

  • (A) रुबिस्को
  • (B) कैटालेज (Catalase — जो परऑक्सीसोम का मार्कर एंजाइम है)
  • (C) एमाइलेज
  • (D) हेक्सोकाइनेज
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — परऑक्सीसोम में प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला लौह-युक्त 'Catalase' एंजाइम 2H2O2 → 2H2O + O2 में तोड़कर कोशिका को बचाता है।

9. जब मरुस्थल में लंबे समय तक अत्यधिक सूखा पड़ता है, तब CAM पौधे अपने रंध्र दिन और रात 24 घंटे बंद कर लेते हैं और केवल आंतरिक श्वसनीय CO2 का पुनर्चक्रण करते हैं—इस अनुकूलन को क्या कहते हैं?

  • (A) क्रैंज अनुकूलन
  • (B) कैम-आइडलिंग (CAM-Idling)
  • (C) बसंतीकरण
  • (D) बिंदुस्राव
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — भीषण सूखे में रंध्र 24 घंटे बंद रखकर श्वसन की CO2 को रिसाइकिल कर जीवित रहने की अवस्था 'CAM-Idling' कहलाती है।

10. तापमान के किस परास में C3 पौधे (18 ATP/ग्लूकोज) ऊर्जा की दृष्टि से C4 पौधों (30 ATP/ग्लूकोज) की तुलना में अधिक दक्ष (Higher quantum yield) होते हैं?

  • (A) 35°C से 45°C के गर्म तापमान में
  • (B) कम / ठंडे तापमान (< 20°C से 25°C) में, जहाँ C3 में प्रकाश-श्वसन बहुत कम होता है
  • (C) 50°C पर
  • (D) किसी भी तापमान पर नहीं
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — <20–25°C तापमान पर C3 में प्रकाश-श्वसन नगण्य होता है और वहाँ C4 की अतिरिक्त 12 ATP लागत महँगी पड़ती है; जबकि >28–30°C पर C4 श्रेष्ठ होते हैं।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. प्रकाश-श्वसन के दौरान परऑक्सीसोम और माइटोकॉन्ड्रिया में बनने वाले दो अमीनो अम्लों के नाम लिखिए।

परऑक्सीसोम में: ग्लाइसिन (Glycine, 2-कार्बन) और माइटोकॉन्ड्रिया में: सेरीन (Serine, 3-कार्बन)।

2. 'Photorespiration' शब्द का प्रतिपादन सन् 1963 में किसने किया था?

जी. क्रोटकोव (G. Krotkov, 1963) ने।

3. आइस प्लांट (Mesembryanthemum crystallinum) और नोनिया (Portulaca) जो सामान्य स्थिति में C3 चलाते हैं और सूखा/लवणता आने पर CAM में बदल जाते हैं, क्या कहलाते हैं?

विकल्पी CAM पादप (Facultative / Inducible CAM plants)।

4. क्या प्रकाश-श्वसन में ATP का संश्लेषण होता है?

नहीं, प्रकाश-श्वसन में कोई ATP नहीं बनता, बल्कि उल्टे ATP और NADPH खर्च होते हैं।

5. उच्च तापमान (>30°C) पर C3 पौधों में प्रकाश-श्वसन तेजी से क्यों बढ़ जाता है?

क्योंकि उच्च तापमान पर जल में CO2 की घुलनशीलता O2 की तुलना में तेजी से घटती है और RuBisCO की O2 के प्रति बंधुता बढ़ जाती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. प्रकाश-श्वसन (Photorespiration) क्या है और इसे 'C2 चक्र' क्यों कहा जाता है?

C3 पौधों की हरी पत्तियों में सूर्य के प्रकाश, उच्च तापमान, उच्च O2 और कम CO2 की स्थिति में RuBisCO एंजाइम की ऑक्सीजिनेज क्रिया द्वारा O2 ग्रहण करने और CO2 निकालने की प्रक्रिया को प्रकाश-श्वसन कहते हैं। इसे 'C2 चक्र' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें RuBP (5C) + O2 के जुड़ने से 3-PGA (3C) के साथ प्रथम उत्पाद 2-कार्बन वाला '2-फॉस्फोग्लाइकोलेट' (जो ग्लाइकोलेट बनाता है) निर्मित होता है।

2. प्रकाश-श्वसन में हरितलवक, परऑक्सीसोम और माइटोकॉन्ड्रिया तीनों कोशिकांगों की भूमिका संक्षेप में लिखिए।

1. हरितलवक (Chloroplast): यहाँ RuBisCO द्वारा RuBP का ऑक्सीकरण होकर 2-फॉस्फोग्लाइकोलेट और फिर 'ग्लाइकोलेट (2C)' बनता है। 2. परऑक्सीसोम (Peroxisome): ग्लाइकोलेट यहाँ आकर ग्लाइऑक्सीलेट (+ H2O2) और फिर अमीनो अम्ल 'ग्लाइसिन (2C)' में बदलता है। 3. माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria): यहाँ 2 अणु ग्लाइसिन जुड़कर 1 अणु 'सेरीन (3C)', 1 अणु CO2 और 1 अणु NH3 बनाते हैं। सेरीन वापस परऑक्सीसोम व हरितलवक में जाकर 3-PGA बना लेता है।

3. प्रकाश-श्वसन को एक 'अपव्ययी प्रक्रिया' (Wasteful Process) क्यों माना जाता है? क्या इसका कोई लाभ भी है?

इसे अपव्ययी प्रक्रिया इसलिए माना जाता है क्योंकि: 1. इसमें सामान्य श्वसन की तरह कोई ATP या NADH ऊर्जा नहीं बनती, बल्कि उल्टे ATP व NADPH खर्च होते हैं; और 2. प्रकाश-संश्लेषण से स्थिर किए गए कार्बन का 25–30% भाग बिना किसी लाभ के वापस CO2 के रूप में उड़ जाता है। संभावित लाभ: सूखे व तेज धूप में जब रंध्र बंद होते हैं, तब यह अतिरिक्त प्रकाश ऊर्जा (ATP/NADPH) को खपाकर हरितलवक को 'प्रकाशीय-ऑक्सीकरण' से बचाता है।

4. C4 पौधों (मक्का, गन्ना, ज्वार) की उत्पादकता C3 पौधों से अधिक होने के चार प्रमुख कारण लिखिए।

1. PEPCase के CO2-सांद्रण पंप और क्रैंज शारीरिकी के कारण पूल-आच्छद में RuBisCO के पास CO2 की सांद्रता बहुत उच्च रहती है जिससे प्रकाश-श्वसन (25–30% हानि) बिल्कुल नहीं होता। 2. C4 पौधे पूर्ण सूर्य के प्रकाश में भी संतृप्त नहीं होते। 3. इनका CO2 क्षतिपूर्ति बिंदु अत्यंत कम (0–5 ppm) होता है। 4. इनकी जल उपयोग दक्षता (WUE) और नाइट्रोजन उपयोग दक्षता (NUE) C3 से दोगुनी होती है।

5. सामान्य अंधकार श्वसन (Dark Respiration) और प्रकाश-श्वसन (Photorespiration) में चार अंतर लिखिए।

1. अंधकार श्वसन दिन-रात सभी जीवित कोशिकाओं में होता है, जबकि प्रकाश-श्वसन केवल प्रकाश में C3 पौधों की हरी कोशिकाओं में होता है। 2. अंधकार श्वसन कोशिकाद्रव्य व माइटोकॉन्ड्रिया में होता है, जबकि प्रकाश-श्वसन हरितलवक, परऑक्सीसोम व माइटोकॉन्ड्रिया तीनों में होता है। 3. अंधकार श्वसन में ATP बनता है, जबकि प्रकाश-श्वसन में ATP खर्च होता है। 4. अंधकार श्वसन का क्रियाधार ग्लूकोज है जबकि प्रकाश-श्वसन का ग्लाइकोलेट है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. प्रकाश-श्वसन (Photorespiration / C2 Glycolate Pathway) की परिभाषा देते हुए हरितलवक, परऑक्सीसोम और माइटोकॉन्ड्रिया में चलने वाले संपूर्ण जैव-रासायनिक चक्र का आरेख सहित सविस्तर वर्णन कीजिए।

वारबर्ग प्रभाव, डेकर, क्रोटकोव व टोलबर्ट का योगदान, RuBisCO की ऑक्सीजिनेज क्रिया के कारण (उच्च ताप व कम CO2/O2 अनुपात), तीनों कोशिकांगों का चरणबद्ध प्रवाह आरेख (RuBP → 2-Phosphoglycolate → Glycolate → Glyoxylate → Glycine → Serine + CO2 + NH3 → Glycerate → 3-PGA), 75% कार्बन रिकवरी व 25% हानि की गणना और तालिका 14.1 के अनुसार अंधकार श्वसन से तुलना लिखें।

2. उष्णकटिबंधीय खरीफ परिस्थितियों में C4 पौधों की जैविक और आर्थिक उत्पादकता C3 पौधों से अधिक क्यों होती है? कार्यिकीय, जैव-रासायनिक और शारीरिकीय कारणों की विस्तार से विवेचना कीजिए।

PEPCase बनाम RuBisCO की CO2 बंधुता, पूल-आच्छद में 10–20 गुना CO2 पंप द्वारा प्रकाश-श्वसन का उन्मूलन, पूर्ण धूप में प्रकाशीय असंतृप्ति, कम CO2 क्षतिपूर्ति बिंदु (0–5 ppm), दोगुनी जल उपयोग दक्षता (WUE), उच्च नाइट्रोजन उपयोग दक्षता (NUE), त्वरित फ्लोएम स्थानांतरण और ठंडे बनाम गर्म तापमान के प्रभाव का सविस्तर विवरण दें।

3. मरुस्थलीय एवं जल-सीमित पर्यावरण में CAM पौधों के आकारिकीय, शारीरिकीय और उपापचयी अनुकूलनों (Scotoactive stomata, Succulence, Facultative CAM एवं CAM-Idling) का वर्णन कीजिए।

CAM पौधों की आवास परिस्थितियाँ, रात्रि में रंध्र खुलने से वाष्पोत्सर्जन में 80–90% बचत, विशाल रिक्तिका युक्त मांसल कोशिकाएँ, ऑस्मोलाइट्स व मोटी क्यूटिकल, विकल्पी CAM (Mesembryanthemum) और भीषण सूखे में 'CAM-Idling' तंत्र का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • प्रकाश-श्वसन में माइटोकॉन्ड्रिया के अंदर मुक्त हुई अमोनिया (NH3) को हरितलवक में 'GS-GOGAT चक्र' द्वारा पुनः अमीनो अम्ल में स्थिर किया जाता है।
  • परऑक्सीसोम (Peroxisome) कोशिकांग की खोज डी डूवे (De Duve, 1965) ने की थी और टोलबर्ट ने पादप परऑक्सीसोम में ग्लाइकोलेट पथ खोजा।
  • यदि वायुमंडल से ऑक्सीजन को 21% से घटाकर 2% कर दिया जाए, तो गेहूँ और सोयाबीन (C3) में प्रकाश-श्वसन रुकने से प्रकाश-संश्लेषण 35% बढ़ जाता है, किंतु मक्का (C4) पर कोई फर्क नहीं पड़ता!
  • कपास, मूँगफली और सोयाबीन खरीफ में उगाई जाने वाली प्रमुख C3 फसलें हैं जिनमें उच्च प्रकाश-श्वसन होता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तंबाकू और धान में 'सिंथेटिक ग्लाइकोलेट बाईपास पथ' डालकर प्रकाश-श्वसन घटाने से बायोमास में 40% वृद्धि दर्ज की गई है।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।

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