PPHYS 311 Lecture 24: विलगन (Abscission), इसका महत्व एवं स्टे-ग्रीन (Stay-Green) अवधारणा

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PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
LECTURE 24 / 32 · PPHYS 311

विलगन (Abscission), इसका महत्व एवं स्टे-ग्रीन (Stay-Green) अवधारणा

Abscission, Its Importance and the Stay-Green Concept

Mechanism of Abscission (Abscission Zone, Cellulase & Pectinase/Polygalacturonase), Hormonal Control (Auxin Gradient Model of Addicott vs Ethylene), Agricultural Control of Fruit Drop (NAA) & Defoliation (Ethrel), Stay-Green Concept (Type A to E, Functional vs Cosmetic)

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Abscission, Its Importance and the Stay-Green Concept (Theory • Lecture 24)
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • विलगन (Abscission — पत्तियों, फूलों व फलों का पैतृक पौधे से बिना घाव बनाए प्राकृतिक रूप से अलग होकर गिरना) की परिभाषा, विलगन क्षेत्र (Abscission Zone: Separation layer + Protective suberized layer) और कोशिका भित्ति गलाने वाले दोनों मुख्य एंजाइमों (Cellulase एवं Polygalacturonase / Pectinase) को समझना।
  • विलगन के हार्मोनल नियंत्रण—एडिकॉट (Addicott) का ऑक्सिन प्रवणता मॉडल (युवा पत्ती में उच्च ऑक्सिन IAA विलगन को रोकता है) बनाम एथिलीन (C2H4 — जो विलगन कराने वाला सर्वप्रमुख प्राकृतिक हार्मोन है)—तथा कपास व फलों (आम, नींबू, सेब) में फलों का झड़ना रोकने (NAA @ 10–20 ppm) का अध्ययन करना।
  • आधुनिक फसल कार्यिकी एवं प्रजनन की 'स्टे-ग्रीन अवधारणा' (Stay-Green Concept — Thomas & Howarth, 2000), कार्यात्मक (Functional Stay-Green: Type A & B) बनाम कॉस्मेटिक (Cosmetic Stay-Green: Type C — Mendel's green cotyledon gene) और सूखा व चारकोल रॉट प्रतिरोध में इसके महत्व का विश्लेषण करना।

प्रस्तावना · Introduction

जीर्णता के बाद पुरानी पत्तियों, मुरझाए फूलों और पके हुए फलों को पौधे से अलग होकर गिरना पड़ता है। इसके लिए पर्णवृंत या फलवृंत के आधार पर एक विशेष पूर्व-निर्धारित कमजोर पट्टी बनती है जिसे 'विलगन क्षेत्र' (Abscission Zone) कहते हैं, जहाँ एंजाइम मध्य पटलिका के सीमेंट (पेक्टिन) को घोल देते हैं और अंग बिना कोई खुला घाव छोड़े साफ-सुथरे ढंग से अलग हो जाता है (Abscission)। दूसरी ओर, आधुनिक पादप प्रजनन में अनाजों (ज्वार, मक्का, गेहूँ, धान) में दाना पकते समय भी पत्तियों को हरा और प्रकाश-संश्लेषी बनाए रखने के लिए 'स्टे-ग्रीन' (Stay-Green) गुण का चयन किया जाता है, जिसने सूखा सहिष्णुता और उपज में क्रांति ला दी है!

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

विलगन (Abscission – लैटिन शब्द 'Abscindere' = टूटना / अलग होना)

पादप अंगों (जैसे पुरानी पत्तियों, फूलों, पंखुड़ियों, फलों या बीजों) के आधार पर स्थित एक विशिष्ट कोशिकीय पट्टी (विलगन क्षेत्र / Abscission Zone) की कोशिका भित्तियों के एंजाइमीय विघटन द्वारा बिना किसी संवहनी रिसाव या संक्रमण के पैतृक पौधे से अलग होकर गिरने की कार्यिकीय प्रक्रिया।

विलगन क्षेत्र की दो परतें (Separation Layer & Protective Layer)

पर्णवृंत या फलवृंत के आधार पर स्थित 'विलगन क्षेत्र' में दो परतें बनती हैं: (1) पृथक्करण परत (Separation / Abscission Layer): छोटी, पतली भित्ति वाली मृदूतक कोशिकाएँ जिनकी मध्य पटलिका गलने से अंग अलग होता है; और (2) रक्षात्मक परत (Protective / Suberized Layer): तने की तरफ बनने वाली सुबेरिन और लिग्निन युक्त कॉर्क जैसी परत जो पत्ती गिरने के बाद बने निशान (Leaf scar) को बंद कर जीवाणु/कवक संक्रमण व जल हानि से बचाती है!

विलगन के मुख्य अपघटनकारी एंजाइम (Cell Wall Degrading Enzymes in Abscission)

एथिलीन हार्मोन के प्रभाव से विलगन परत की कोशिकाओं में दो मुख्य एंजाइम संश्लेषित होते हैं: (1) पॉलीगैलेक्टुरोनेज / पेक्टिनेज (Polygalacturonase / Pectinase) — जो मध्य पटलिका के कैल्शियम पेक्टेट सीमेंट को घोलता है; और (2) सेल्यूलेज (β-1,4-Glucanase / Cellulase) — जो प्राथमिक सेल्यूलोज भित्ति को गलाता है!

स्टे-ग्रीन अवधारणा (Stay-Green Concept / Non-Senescence – Thomas & Howarth, 2000)

फसलों का वह आनुवंशिक एवं कार्यिकीय गुण जिसके कारण दाना भरने और परिपक्वता के अंतिम चरण में (विशेषकर सूखा और उच्च ताप तनाव के दौरान) जब सामान्य किस्मों की पत्तियाँ पीली पड़कर सूख जाती हैं, तब भी 'स्टे-ग्रीन' किस्मों की पत्तियाँ और तना लंबे समय तक हरे और प्रकाश-संश्लेषी रूप से सक्रिय बने रहते हैं!

वर्गीकरण · Classification

विलगन पर हार्मोनों का प्रभाव: रोकने वाले बनाम बढ़ाने वाले हार्मोन

1. विलगन को रोकने वाला मुख्य हार्मोन (Abscission Inhibitor): ऑक्सिन (Auxin — IAA एवं सिंथेटिक NAA, 2,4-D) तथा साइटोकाइनिन।
2. विलगन को तीव्र / प्रेरित करने वाला सर्वप्रमुख प्राकृतिक हार्मोन (Primary Natural Promoter of Abscission): एथिलीन (Ethylene – C2H4 — सबसे शक्तिशाली और प्रत्यक्ष प्रेरक!) तथा एब्सिसिक अम्ल (ABA — जिसका नाम तो 'Abscisin-II' से पड़ा, किंतु यह मुख्यतः पत्ती में एथिलीन बढ़ाकर और जीर्णता लाकर अप्रत्यक्ष रूप से विलगन बढ़ाता है!)।

थॉमस एवं हॉवर्थ (Thomas & Howarth, 2000) के अनुसार 'स्टे-ग्रीन' (Stay-Green) के 5 प्रकार (Type A से Type E)

इन्होंने स्टे-ग्रीन लक्षण को दो मुख्य श्रेणियों और 5 प्रकारों में बाँटा है:
【I. कार्यात्मक स्टे-ग्रीन (Functional Stay-Green — कृषि में वांछित! जिसमें पत्ती हरी भी रहती है और प्रकाश-संश्लेषण भी चालू रहता है!)】:
• Type A (Delayed Onset of Senescence): इसमें जीर्णता बहुत देर से शुरू होती है, किंतु शुरू होने के बाद सामान्य गति से पूरी होती है — इससे दाना भराव अवधि (LAD) और उपज सीधे बढ़ जाते हैं!
• Type B (Slower Rate of Senescence): इसमें जीर्णता समय पर शुरू होती है, किंतु पर्णहरित व प्रकाश-संश्लेषण के घटने की गति बहुत धीमी होती है — यह भी उच्च उपज देता है!
【II. गैर-कार्यात्मक / कॉस्मेटिक स्टे-ग्रीन (Non-Functional / Cosmetic Stay-Green — जिसमें पत्ती दिखती तो हरी है किंतु अंदर से प्रकाश-संश्लेषण बंद हो चुका होता है!)】:
• Type C (Chlorophyll Catabolism Mutant — केवल पर्णहरित तोड़ने वाला एंजाइम खराब!): इसमें RuBisCO और प्रकाश-संश्लेषण तो सामान्य समय पर नष्ट हो जाते हैं, किंतु 'Stay-Green (SGR) / PAO' एंजाइम में उत्परिवर्तन होने से पर्णहरित टूट नहीं पाता और मरी हुई पत्ती भी हरी दिखती है (ग्रिगर मेंडल के मटर का हरा बीजपत्र जीन 'i' इसी Type-C कॉस्मेटिक स्टे-ग्रीन का ऐतिहासिक उदाहरण है!)।
• Type D: कटाई पर अचानक मार देने (जैसे हरबेरियम में दबाने या पाले से जमने) से हरा रहना।
• Type E: प्रारंभ में ही बहुत अधिक पर्णहरित होने के कारण देर तक हरा दिखना।

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • एडिकॉट का 'ऑक्सिन प्रवणता मॉडल' (Auxin Gradient Model of Abscission — Addicott et al., 1955) और एथिलीन संवेदनशीलता सिद्धांत (Hall, 1952 & Abeles, 1967):
    • जब तक पत्ती या फल युवा और स्वस्थ रहता है, तब तक पत्ती के फलक या फल के विकासशील बीजों में प्रचुर मात्रा में ऑक्सिन (IAA) बनता है जो लगातार डंठल से होकर तने की ओर बहता रहता है:
    – जब पत्ती/फल की तरफ (Distal side) ऑक्सिन अधिक हो और तने की तरफ (Proximal side) ऑक्सिन कम हो ⟹ विलगन क्षेत्र की कोशिकाएँ एथिलीन के प्रति असंवेदनशील रहती हैं और विलगन नहीं होता (No Abscission)!
    • जब पत्ती या फल पुराना/जीर्ण हो जाता है या कीट/सूखे से क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो उसमें ऑक्सिन (IAA) बनना रुक जाता है और एथिलीन (C2H4) बढ़ जाती है:
    – जैसे ही पत्ती की तरफ ऑक्सिन घटता है, विलगन क्षेत्र की कोशिकाएँ एथिलीन के प्रति अत्यंत संवेदनशील हो जाती हैं ⟹ एथिलीन तुरंत Cellulase और Polygalacturonase (Pectinase) एंजाइमों के जीन चालू कर देती है ⟹ मध्य पटलिका घुल जाती है और पत्ती या फल टूटकर गिर जाता है (Abscission occurs)!
  • कपास में जाइलम वाहिकाओं का बंद होना (Tyloses formation): विलगन से ठीक पहले जाइलम वाहिकाओं में गुब्बारे जैसी संरचनाएँ (Tyloses) और फ्लोएम में कैलोज जमा होकर संवहन नलिकाओं को सील कर देते हैं ताकि पत्ती या फल गिरने पर पौधे का रस बाहर न बहे!

कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics

1. Mechanism of Abscission, Hormonal Control & Agricultural Applications (विलगन की क्रियाविधि, हार्मोनल नियमन एवं कृषि अनुप्रयोग)

Cotton, Mango, Citrus, Apple, Tomato & Chilli

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Cotton, Mango, Citrus, Apple, Tomato & Chilli

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रमुख वैज्ञानिक: एडिकॉट (Addicott, 1968 — ऑक्सिन प्रवणता व Abscisin-II खोजा), हॉल एवं एबल्स (एथिलीन-ऑक्सिन संतुलन मॉडल)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: कृषि में कभी हमें विलगन को रोकना होता है (जैसे आम, नींबू, सेब, कपास और मिर्च में फूलों व अधपके फलों को गिरने से रोकना!), और कभी हमें कृत्रिम रूप से विलगन कराना होता है (जैसे कपास की मशीनी तुड़ाई से पहले पत्तियाँ गिराना / Defoliation या फलों की विरलन / Thinning)!

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. विलगन के 3 क्रमिक कार्यिकीय चरण (Three Phases of Abscission):
• चरण I — विलगन-पूर्व / प्रेरण-असंवेदनशील अवस्था (Leaf Maintenance Phase): युवा हरी पत्ती से उच्च ऑक्सिन (IAA) का प्रवाह विलगन क्षेत्र को एथिलीन के प्रति असंवेदनशील रखता है; पत्ती मजबूती से जुड़ी रहती है।
• चरण II — शेडिंग प्रेरण अवस्था (Abscission Induction Phase): पत्ती की जीर्णता या तनाव से ऑक्सिन का स्तर गिर जाता है और एथिलीन (C2H4) बढ़ जाती है। विलगन क्षेत्र की कोशिकाएँ एथिलीन को ग्रहण कर सक्रिय हो जाती हैं।
• चरण III — कोशिका भित्ति विघटन एवं पृथक्करण अवस्था (Cell Wall Degradation & Separation Phase): एथिलीन से प्रेरित होकर विलगन परत की कोशिकाएँ भारी मात्रा में Polygalacturonase (Pectinase) और Cellulase (β-1,4-glucanase) बनाकर बाहर कोशिका भित्ति में स्रावित करती हैं। कैल्शियम पेक्टेट की मध्य पटलिका गल जाती है, कोशिकाएँ एक-दूसरे से ढीली हो जाती हैं और हवा के हल्के झोंके या गुरुत्वाकर्षण से डंठल टूटकर गिर जाता है तथा तने पर सुबेरिन की रक्षात्मक परत (Leaf scar) बन जाती है!

2. विलगन का पौधे के लिए जैविक महत्व (Biological Importance of Abscission):
• (i) पुरानी, रोगग्रस्त व छायांकित अकुशल पत्तियों को हटाकर पोषक तत्वों और जल की बर्बादी रोकना।
• (ii) पर्णपाती वृक्षों को शरद/ग्रीष्म के सूखे और पाले में वाष्पोत्सर्जन से बचाना।
• (iii) पके फलों और बीजों को गिराकर बीज प्रकीर्णन (Seed dispersal) कराना।
• (iv) आवश्यकता से अधिक लगे फलों को स्वयं गिराकर ('June drop in Apple/Mango') बचे हुए फलों का आकार व गुणवत्ता सुधारना (Self-thinning)।

3. कृषि एवं उद्यानिकी में विलगन नियंत्रण के व्यावहारिक अनुप्रयोग (Practical PGR Control — Exam Questions!):
• (A) कटाई से पूर्व फूल एवं फल झड़ना रोकना (Prevention of Pre-harvest Flower & Fruit Drop):
– आम, नींबू (Citrus), सेब, टमाटर, मिर्च एवं कपास (Boll drop) में फूल व छोटे फल झड़ने को रोकने के लिए सिंथेटिक ऑक्सिन NAA (Naphthalene Acetic Acid — व्यापारिक नाम: 'Planofix') @ 10 से 20 ppm या 2,4-D @ 5 से 10 ppm का छिड़काव किया जाता है! (ध्यान रहे: 2,4-D केवल 5–10 ppm कम सांद्रता पर ही फल गिरना रोकता है; >500 ppm उच्च सांद्रता पर वह शाकनाशी बन जाता है!)।
• (B) कपास में मशीनी तुड़ाई हेतु कृत्रिम निष्पत्रण (Harvest-Aid Defoliation in Cotton):
– कपास की मशीन से तुड़ाई (Mechanical picking) करने से पहले हरी पत्तियाँ रुई में धब्बे न लगाएँ, इसके लिए इथरेल (Ethrel / Ethephon) + थिडियाजुरॉन (Thidiazuron / Dropp) या सोडियम क्लोरेट का छिड़काव कर सारी पत्तियों का विलगन करा दिया जाता है!
• (C) अत्यधिक फलों का विरलन एवं यांत्रिक कटाई (Fruit Thinning & Mechanical Harvesting):
– सेब, आड़ू और अंगूर में गुच्छे को ढीला करने हेतु फूल आने के बाद उच्च सांद्रता पर NAA (50 ppm) या Ethrel से अतिरिक्त फूल गिराए जाते हैं; तथा अखरोट, जैतून व चेरी पर कटाई से पहले Ethrel छिड़कने से फल ढीले हो जाते हैं जिन्हें पेड़ हिलाकर (Tree shaker) एक साथ गिरा लिया जाता है!

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): इतिहास का रोचक तथ्य: सन् 1963 में एडिकॉट और ओकुमा ने कपास के गिरते हुए युवा टिंडों से एक रसायन निकाला और उसका नाम 'Abscisin-II' (बाद में Abscisic Acid – ABA) रखा क्योंकि उन्हें लगा कि यही विलगन कराता है। किंतु बाद में सिद्ध हुआ कि प्राकृतिक रूप से विलगन कराने वाला प्रत्यक्ष मुख्य हार्मोन ABA नहीं बल्कि 'एथिलीन (C2H4)' है; ABA केवल जल तनाव और एथिलीन संश्लेषण बढ़ाकर अप्रत्यक्ष रूप से विलगन को बढ़ावा देता है!

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): अंग के फलक (Blade) पर ऑक्सिन लगाने से विलगन रुकता है, किंतु यदि पत्ती काटने के बाद काफी देर बाद तने की तरफ (Proximal side) ऑक्सिन लगाया जाए तो वह विलगन को तेज भी कर सकता है (Addicott's two-stage effect)।

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): सूखा, जलभराव, नाइट्रोजन/जिंक/बोरॉन की कमी, उच्च तापमान और कीट प्रकोप पत्तियों व फलों में एथिलीन बढ़ाकर असमय विलगन (Premature fruit drop) कराते हैं।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Abscission zone has 2 layers: Separation layer + Protective suberized layer
  • Two main enzymes of abscission = Polygalacturonase (Pectinase) & Cellulase
  • Primary natural hormone promoting abscission = Ethylene (C2H4)
  • Hormone preventing abscission = Auxin (IAA; commercially NAA 'Planofix' @ 10–20 ppm & 2,4-D @ 5–10 ppm prevent pre-harvest fruit drop!)।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

मिर्च, टमाटर और कपास में फूल आते समय 'Planofix (NAA 4.5% SL)' की 1 मिली मात्रा प्रति 4.5 लीटर पानी (10 ppm) में घोलकर छिड़कने से फूल झड़ना तुरंत रुक जाता है।

2. The Stay-Green Concept: Types, Physiological Basis & Role in Crop Improvement (स्टे-ग्रीन अवधारणा: प्रकार, कार्यिकीय आधार एवं महत्व)

Sorghum (Rabi/Post-rainy Jowar), Maize, Wheat, Rice & Pearl Millet

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Sorghum (Rabi/Post-rainy Jowar), Maize, Wheat, Rice & Pearl Millet

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रस्तावक: थॉमस एवं स्मार्ट (1993) तथा थॉमस एवं हॉवर्थ (Thomas & Howarth, 2000 — 5 Types of Stay-Green)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: रबी ज्वार (Sorghum), मक्का और गेहूँ में टर्मिनल सूखा (Terminal drought) और तना सड़न (Charcoal rot) से लड़ने के लिए 'Stay-Green' आज विश्व का सबसे सफल कार्यिकीय प्रजनन लक्षण (Physiological breeding trait) है!

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. 'कार्यात्मक स्टे-ग्रीन' (Functional Stay-Green: Type A & B) बनाम 'कॉस्मेटिक स्टे-ग्रीन' (Cosmetic Stay-Green: Type C) का अंतर:
• Functional Stay-Green (Type A & B): इसमें दाना भरने के समय पत्ती में क्लोरोफिल और RuBisCO दोनों बने रहते हैं और पत्ती वास्तव में अंत तक प्रकाश-संश्लेषण करके दानों में शर्करा भेजती रहती है! इससे पर्ण क्षेत्रफल अवधि (LAD) बढ़ जाती है, दाने मोटे व भारी बनते हैं और उपज में 15–30% वृद्धि होती है!
• Cosmetic / Non-Functional Stay-Green (Type C): इसमें केवल क्लोरोफिल तोड़ने वाला एंजाइम ('Stay-Green gene *SGR* / Mg-dechelatase') उत्परिवर्तित होने से पत्ती का हरा रंग तो बना रहता है, किंतु अंदर से RuBisCO और थाइलाकोइड टूट चुके होते हैं, अतः पत्ती कोई प्रकाश-संश्लेषण नहीं करती (जैसे मेंडल के मटर का हरा बीजपत्र या लॉन की घास)! कृषि अनाज उपज के लिए केवल Functional Stay-Green ही उपयोगी है!

2. फसलों में स्टे-ग्रीन (Stay-Green) गुण के 5 प्रमुख कार्यिकीय एवं कृषि लाभ:
• (i) टर्मिनल सूखा एवं उच्च ताप सहिष्णुता (Post-Flowering Drought & Heat Tolerance): फूल आने के बाद जब मिट्टी सूख जाती है, तब भी स्टे-ग्रीन किस्मों (जिनमें ज्वार के प्रसिद्ध QTLs 'Stg1, Stg2, Stg3 एवं Stg4' होते हैं; दाता: *B35* एवं *E 36-1*) की जड़ें गहरी व सक्रिय रहकर पानी खींचती हैं और पत्तियाँ हरी रहकर दाना पूरा भरती हैं!
• (ii) तने के गिरने और 'चारकोल रॉट' रोग से सुरक्षा (Lodging & Charcoal Rot Resistance in Sorghum & Maize): सामान्य किस्मों में दाना भरते समय जब पत्तियाँ सूख जाती हैं, तो दाना तने की मज्जा (Pith) से शर्करा खींच लेता है जिससे तना खोखला होकर *Macrophomina phaseolina* (Charcoal rot) से सड़ जाता है और फसल गिर जाती है! इसके विपरीत, स्टे-ग्रीन किस्मों में पत्तियाँ अंत तक शर्करा बनाती रहती हैं जिससे तने में शर्करा भरी रहती है, तना मजबूत रहता है और चारकोल रॉट व गिरने से पूर्णतः बचा रहता है!
• (iii) उच्च कटाई सूचकांक एवं दाना भार (Higher 1000-Grain Weight & Harvest Index)।
• (iv) द्वि-उद्देश्यीय फसलों में उत्तम चारा गुणवत्ता (Superior Stover / Fodder Quality): ज्वार, बाजरा और मक्का की स्टे-ग्रीन किस्मों में दाना पकने के बाद भी कड़बी/पुआल हरा, रसीला, अधिक प्रोटीन युक्त और पशुओं के लिए सुपाच्य (High IVDMD) रहता है!
• (v) आंतरिक साइटोकाइनिन और नाइट्रोजन संतुलन: स्टे-ग्रीन किस्मों की जड़ें दाना भराव के समय अधिक साइटोकाइनिन बनाकर पत्तियों को भेजती हैं और फूल आने से पहले कम पानी खर्च कर फूल आने के बाद के लिए मृदा नमी बचाकर रखती हैं!

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): ज्वार (Sorghum) में स्टे-ग्रीन के 4 मुख्य आनुवंशिक QTLs—Stg1, Stg2, Stg3 एवं Stg4—इथियोपिया की बौनी दुर्रा लाइन 'B35' (BTx642) और 'E 36-1' से पहचाने गए हैं जिनका उपयोग ICRISAT ने रबी ज्वार सुधार में किया है।

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): आणविक जीवविज्ञान में मेंडल के प्रसिद्ध मटर के 'पीले (I) बनाम हरे (i) बीजपत्र' के जीन को क्लोन किया गया तो पता चला कि वह जीन वास्तव में 'SGR' (Stay-Green / Mg-dechelatase) जीन है जो क्लोरोफिल से Mg निकालकर उसे तोड़ता है (Armstead et al., 2007)!

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): गेहूँ में CIMMYT और भारतीय वैज्ञानिकों ने SPAD मीटर और NDVI सेंसर का उपयोग कर उच्च ताप सहिष्णु 'Stay-green' किस्में विकसित की हैं।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Stay-Green classification (Thomas & Howarth, 2000): Functional Stay-Green (Type A = delayed onset; Type B = slower rate — both maintain photosynthesis & increase yield!) vs Cosmetic Stay-Green (Type C = green color retained due to SGR mutation, but photosynthesis lost — e.g., Mendel's green pea cotyledon!)
  • Sorghum Stay-Green QTLs = Stg1, Stg2, Stg3, Stg4 (from donor B35) give drought & Charcoal rot / Lodging resistance + high fodder quality।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

बारानी रबी ज्वार और मक्का के प्रजनन में 'Functional Stay-Green' + उच्च दाना उपज का संयुक्त चयन अवश्य करना चाहिए (क्योंकि यदि सिंक कमजोर हो तो केवल दाने न बनने से भी पत्तियाँ हरी रह सकती हैं)।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 24.1: कार्यात्मक स्टे-ग्रीन (Functional Stay-Green: Type A & B) बनाम कॉस्मेटिक स्टे-ग्रीन (Cosmetic Stay-Green: Type C) की तुलना

तुलना का आधारकार्यात्मक स्टे-ग्रीन (Functional Stay-Green: Type A & B)कॉस्मेटिक / गैर-कार्यात्मक स्टे-ग्रीन (Cosmetic Stay-Green: Type C)
पर्णहरित (Chlorophyll) की स्थितिपर्णहरित दाना पकने तक हरा और सुरक्षित बना रहता हैपर्णहरित टूटने का एंजाइम (*SGR*) खराब होने से हरा रंग बना रहता है
प्रकाश-संश्लेषण क्षमता (Photosynthesis)अंत समय तक सक्रिय प्रकाश-संश्लेषण चालू रहता हैप्रकाश-संश्लेषण सामान्य समय पर ही बंद हो चुका होता है (RuBisCO नष्ट)
पर्ण क्षेत्रफल अवधि (LAD) एवं दाना भरावसक्रिय LAD बढ़ता है और दानों में अधिक शर्करा भरती हैकेवल दिखावटी हरापन रहता है, दानों को कोई अतिरिक्त शर्करा नहीं मिलती
आर्थिक दाना उपज पर प्रभावसूखे व गर्मी में दाना उपज, तना मजबूती व चारा गुणवत्ता बढ़ती हैदाना उपज में कोई वृद्धि नहीं होती (केवल हरा रंग चाहने वाली पत्ती/लॉन घास में उपयोगी)
प्रमुख उदाहरणज्वार (*B35* व्युत्पन्न Stg1–Stg4 लाइनें), संकर मक्का व गेहूँमेंडल के मटर का हरा बीजपत्र (*i/sgr* उत्परिवर्ती) एवं *Festuca* टर्फ घास

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. फलों को झड़ने से रोकने के लिए 'Planofix (NAA 4.5% SL)' के 10 ppm व 20 ppm घोल की व्यावहारिक गणना

Required Formulation (ml) = [ Desired ppm × Water Volume (Litres) ] / [ (% Active Ingredient × 10,000) ]

व्यावहारिक प्रश्न: आम या मिर्च में फूल व छोटे फल झड़ने (Abscission) से रोकने के लिए बाजार में उपलब्ध 'Planofix' (जिसमें 4.5% SL अल्फा-नेफ्थिल एसिटिक अम्ल — NAA होता है) से 20 ppm का 100 लीटर छिड़काव घोल बनाने के लिए कितने मिलीलीटर (ml) Planofix लगेगा?
हल:
• 4.5% SL का अर्थ है = 4.5×10,000= 45,000 ppm सक्रिय NAA।
• 100 लीटर पानी के लिए आवश्यक Planofix = 20 ppm×100 L45,000=200045,000=0.0444 Litres= 44.4 मिलीलीटर (ml) प्रति 100 लीटर पानी (अर्थात् 1 ml Planofix प्रति 2.25 लीटर पानी में = 20 ppm; और 1 ml प्रति 4.5 लीटर पानी में = 10 ppm — यह नियम हर कृषि अधिकारी और छात्र को याद होना चाहिए)!

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 24: विलगन (Abscission), इसका महत्व एवं स्टे-ग्रीन (Stay-Green) अवधारणा]
├── 1. विलगन की क्रियाविधि (Mechanism of Abscission)
│ ├── स्थान: पर्णवृंत/फलवृंत के आधार पर 'विलगन क्षेत्र' (Abscission Zone) = (1) Separation layer + (2) Protective suberized layer (Leaf scar)
│ ├── मुख्य एंजाइम: Polygalacturonase / Pectinase (मध्य पटलिका का Ca-pectate घोलता है) + Cellulase (β-1,4-glucanase)
│ └── संवहनी सीलिंग: जाइलम वाहिकाओं में Tyloses और फ्लोएम में कैलोज जमाव से रस रिसाव व रोग प्रवेश रुकता है
├── 2. विलगन का हार्मोनल नियंत्रण एवं कृषि अनुप्रयोग (Hormonal Control & PGRs)
│ ├── रोकने वाला हार्मोन = ऑक्सिन (IAA — Addicott का Auxin Gradient Model)
│ ├── बढ़ाने वाला मुख्य प्राकृतिक हार्मोन = एथिलीन (Ethylene - C2H4) [एवं अप्रत्यक्ष रूप से ABA]
│ ├── कृषि उपयोग 1 (फल झड़ना रोकना): आम, नींबू, सेब, टमाटर, मिर्च व कपास में NAA ('Planofix') @ 10–20 ppm या 2,4-D @ 5–10 ppm का छिड़काव
│ └── कृषि उपयोग 2 (कपास में पत्तियाँ गिराना / Defoliation): मशीनी तुड़ाई से पूर्व Ethrel + Thidiazuron (Dropp) का छिड़काव
└── 3. स्टे-ग्रीन अवधारणा (Stay-Green Concept — Thomas & Howarth, 2000)
├── Functional Stay-Green (Type A = देर से शुरुआत; Type B = धीमी दर): अंत तक प्रकाश-संश्लेषण चालू रहता है → उच्च उपज!
├── Cosmetic Stay-Green (Type C): केवल क्लोरोफिल विघटन एंजाइम (*SGR*) बंद, प्रकाश-संश्लेषण शून्य (जैसे मेंडल का हरा मटर बीजपत्र)
└── लाभ (ज्वार B35: Stg1–Stg4, मक्का, गेहूँ): सूखा व ताप सहिष्णुता + Charcoal rot व तना गिरने (Lodging) से रक्षा + उत्तम हरा चारा

प्रवाह चित्र · Flowchart

[एडिकॉट (Addicott) एवं एबल्स के अनुसार विलगन क्षेत्र (Abscission Zone) पर 'ऑक्सिन बनाम एथिलीन' नियंत्रण प्रवाह]
┌──────────────────────────────────────────────────────┐
│ 【अवस्था A: युवा, स्वस्थ एवं सक्रिय हरी पत्ती / फल】 │
│ पत्ती फलक / बीज से उच्च ऑक्सिन (IAA) का निरंतर प्रवाह │
│ ↓ (Distal IAA उच्च > Proximal IAA कम) │
│ विलगन क्षेत्र की कोशिकाएँ एथिलीन के प्रति असंवेदनशील │
│ ↓ │
│ 【कोई विलगन नहीं — पत्ती/फल मजबूती से जुड़ा रहता है!】 │
└──────────────────────────┬───────────────────────────┘
│ (जीर्णता / सूखा / कीट क्षति या फसल पकना)
▼
┌──────────────────────────────────────────────────────┐
│ 【अवस्था B: जीर्ण होती पत्ती / परिपक्व फल】 │
│ पत्ती/फल में ऑक्सिन (IAA) संश्लेषण में भारी गिरावट │
│ + एथिलीन (C2H4) और ABA के उत्पादन में तीव्र वृद्धि │
│ ↓ │
│ विलगन क्षेत्र की कोशिकाएँ एथिलीन के प्रति अति-संवेदनशील│
│ ↓ (जीन सक्रियण एवं प्रोटीन संश्लेषण) │
│ Polygalacturonase (Pectinase) + Cellulase का स्राव │
│ ↓ │
│ मध्य पटलिका (Ca-pectate) व प्राथमिक भित्ति का घुलना │
│ + तने की ओर सुबेरिन युक्त Protective Layer का बनना │
│ ↓ │
│ 【पत्ती / फल का साफ-सुथरा विलगन (Abscission)!】 │
└──────────────────────────────────────────────────────┘

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • परीक्षा में सबसे ज्यादा बार पूछे जाने वाले 5 प्रश्न:
    1. विलगन (Abscission) के दौरान कोशिका भित्ति और मध्य पटलिका को गलाने वाले दो मुख्य एंजाइम कौन से हैं? उत्तर: पेक्टिनेज / पॉलीगैलेक्टुरोनेज (Pectinase / Polygalacturonase) एवं सेल्यूलेज (Cellulase)!
    2. प्राकृतिक रूप से विलगन को प्रेरित (Promote) करने वाला सबसे मुख्य हार्मोन कौन सा है और रोकने (Inhibit) वाला हार्मोन कौन सा है? उत्तर: प्रेरित करने वाला मुख्य हार्मोन = एथिलीन (C2H4) (एवं ABA); और रोकने वाला मुख्य हार्मोन = ऑक्सिन (IAA / NAA)!
    3. आम, नींबू वर्गीय फलों, टमाटर, मिर्च और कपास में कटाई से पूर्व फूल व फलों को झड़ने (Pre-harvest fruit drop) से रोकने के लिए किस सिंथेटिक हार्मोन का छिड़काव किया जाता है? उत्तर: NAA (नेफ्थलीन एसिटिक अम्ल — 'Planofix') @ 10 से 20 ppm (या 2,4-D @ 5–10 ppm)!
    4. कपास की मशीनी तुड़ाई से पहले पत्तियों को झाड़ने (Defoliation) के लिए किसका प्रयोग होता है? उत्तर: इथरेल (Ethephon) एवं थिडियाजुरॉन (Thidiazuron / Dropp) का!
    5. थॉमस एवं हॉवर्थ (2000) के अनुसार वह कौन सा 'स्टे-ग्रीन' प्रकार है जिसमें पत्ती केवल दिखती हरी है पर प्रकाश-संश्लेषण नहीं करती? उत्तर: Type-C (Cosmetic Stay-Green — जैसे मेंडल का हरा मटर); जबकि Type-A और Type-B 'Functional Stay-Green' हैं जो प्रकाश-संश्लेषण चालू रखकर उपज बढ़ाते हैं!

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • विलगन क्षेत्र में दो परतें बनती हैं—पृथक्करण परत (Separation layer) और सुबेरिन युक्त रक्षात्मक परत (Protective layer)।
  • एडिकॉट (Addicott, 1955) ने विलगन का 'ऑक्सिन प्रवणता मॉडल' दिया।
  • Planofix (NAA 4.5% SL) की 1 ml मात्रा 4.5 लीटर पानी में मिलाने पर 10 ppm का घोल बनता है जो फूल व फल झड़ना रोकता है।
  • ज्वार और मक्का में 'Functional Stay-Green' गुण टर्मिनल सूखा, चारकोल रॉट और तना गिरने (Lodging) तीनों से सुरक्षा देता है।
  • ज्वार में स्टे-ग्रीन के प्रसिद्ध QTLs 'Stg1, Stg2, Stg3 और Stg4' हैं जो 'B35' दाता से प्राप्त हुए हैं।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. पत्ती या फल के विलगन क्षेत्र (Abscission zone) की पृथक्करण परत में मध्य पटलिका (Middle lamella) और प्राथमिक कोशिका भित्ति को घोलकर अंग को अलग करने वाले दो मुख्य एंजाइम कौन से हैं?

  • (A) रुबिस्को एवं पेपकेस
  • (B) पेक्टिनेज / पॉलीगैलेक्टुरोनेज (Pectinase / Polygalacturonase) एवं सेल्यूलेज (Cellulase / β-1,4-glucanase)
  • (C) नाइट्रोजिनेज एवं यूरिएज
  • (D) एमाइलेज एवं माल्टेज
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — एथिलीन के प्रेरण से विलगन क्षेत्र में Polygalacturonase (जो कैल्शियम पेक्टेट घोलता है) और Cellulase (जो सेल्यूलोज गलाता है) का संश्लेषण बढ़ जाता है।

2. आम, नींबू, सेब, टमाटर, मिर्च और कपास में कटाई से पूर्व फूलों और अधपके फलों के झड़ने (Pre-harvest flower and fruit drop) को रोकने के लिए किस पादप वृद्धि नियंत्रक का छिड़काव किया जाता है?

  • (A) इथरेल 1000 ppm
  • (B) नेफ्थलीन एसिटिक अम्ल (NAA — 'Planofix' @ 10–20 ppm) या कम सांद्रता पर 2,4-D (5–10 ppm)
  • (C) एब्सिसिक अम्ल (ABA)
  • (D) पैराक्वाट
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — सिंथेटिक ऑक्सिन NAA (10–20 ppm) और 2,4-D (5–10 ppm) अंग में ऑक्सिन की कमी को पूरा करके विलगन परत को बनने से रोकते हैं।

3. पौधों में प्राकृतिक रूप से विलगन क्षेत्र में कोशिका भित्ति अपघटक एंजाइमों का संश्लेषण प्रेरित कर विलगन (Abscission) कराने वाला सर्वप्रमुख प्रत्यक्ष हार्मोन कौन सा है?

  • (A) ऑक्सिन (IAA)
  • (B) साइटोकाइनिन
  • (C) एथिलीन (Ethylene — C2H4)
  • (D) जिबरेलिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — यद्यपि ABA का नाम विलगन से जुड़ा है, किंतु विलगन क्षेत्र में एंजाइम प्रेरित कर पत्ती/फल गिराने वाला प्रत्यक्ष मुख्य हार्मोन 'एथिलीन' है।

4. थॉमस एवं हॉवर्थ (Thomas & Howarth, 2000) के वर्गीकरण के अनुसार किन 'स्टे-ग्रीन' (Stay-Green) प्रकारों को 'कार्यात्मक स्टे-ग्रीन' (Functional Stay-Green) कहा जाता है जो दाना भराव के समय प्रकाश-संश्लेषण जारी रखकर उपज बढ़ाते हैं?

  • (A) केवल Type C (Cosmetic stay-green)
  • (B) Type A (जीर्णता की देर से शुरुआत) एवं Type B (जीर्णता की धीमी गति)
  • (C) केवल Type D (हरबेरियम में सुखाई पत्ती)
  • (D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — Type A और Type B 'Functional Stay-Green' हैं जिनमें पत्ती अंत तक प्रकाश-संश्लेषण करती है; जबकि Type C 'Cosmetic' है जिसमें केवल हरा रंग बचता है।

5. रबी ज्वार (Sorghum) और मक्का में 'स्टे-ग्रीन' (Stay-Green) गुण सूखे में दाने की उपज बढ़ाने के अलावा किस भयंकर रोग और समस्या से फसल की रक्षा करता है?

  • (A) कंड रोग से
  • (B) चारकोल रॉट तना सड़न (Charcoal rot — Macrophomina phaseolina) एवं फसल के गिरने (Lodging) से
  • (C) किट्ट रोग से
  • (D) विषाणु रोग से
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — स्टे-ग्रीन पत्तियों द्वारा अंत तक शर्करा बनाते रहने से तने की मज्जा (Pith) से शर्करा खाली नहीं होती, जिससे तना मजबूत रहता है और चारकोल रॉट कवक आक्रमण नहीं कर पाता।

6. ग्रिगर मेंडल द्वारा अपने आनुवंशिक प्रयोगों में प्रयुक्त मटर के 'हरे बीजपत्र' (Green cotyledon 'ii' — जो पकने पर भी पीला नहीं पड़ता) का गुण किस प्रकार के स्टे-ग्रीन का उदाहरण है?

  • (A) Type A कार्यात्मक स्टे-ग्रीन
  • (B) Type C कॉस्मेटिक स्टे-ग्रीन (Cosmetic Stay-Green — जिसमें केवल क्लोरोफिल तोड़ने वाला 'SGR' एंजाइम उत्परिवर्तित होता है)
  • (C) Type B स्टे-ग्रीन
  • (D) क्रैंज शारीरिकी
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — मेंडल के मटर का हरा बीजपत्र जीन वास्तव में 'SGR' (Mg-dechelatase) जीन का उत्परिवर्तन है जो क्लोरोफिल को टूटने नहीं देता (Type-C Cosmetic stay-green)।

7. पत्ती के विलगन (Abscission) के बाद तने पर बने घाव/निशान (Leaf scar) से जल की हानि और रोगाणुओं के प्रवेश को रोकने के लिए रक्षात्मक परत (Protective layer) की कोशिकाओं में किस पदार्थ का जमाव होता है?

  • (A) केवल स्टार्च का
  • (B) सुबेरिन (Suberin) एवं लिग्निन का (तथा जाइलम में टाइलोसेस का)
  • (C) क्लोरोफिल का
  • (D) प्रोटीन का
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — रक्षात्मक परत में जल-रोधी मोमी पदार्थ 'सुबेरिन' व लिग्निन जमा होकर कॉर्क जैसी सुरक्षा परत बना लेते हैं।

8. कपास (Cotton) में मशीन द्वारा रुई की तुड़ाई (Mechanical harvesting) को सुगम बनाने के लिए कटाई से पूर्व हरी पत्तियों को झाड़ने ('Defoliation') हेतु किस रसायन का छिड़काव किया जाता है?

  • (A) कम सांद्रता पर NAA
  • (B) इथरेल (Ethephon) एवं थिडियाजुरॉन (Thidiazuron / Dropp)
  • (C) GA3
  • (D) काइनेटिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — थिडियाजुरॉन और इथरेल कपास की पत्तियों में एथिलीन बढ़ाकर 7–10 दिन में सारी पत्तियों का विलगन करा देते हैं जिससे साफ रुई चुनी जाती है।

9. एडिकॉट (Addicott) के 'ऑक्सिन प्रवणता मॉडल' के अनुसार किसी पत्ती में विलगन कब शुरू होता है?

  • (A) जब पत्ती के फलक की ओर (Distal side) ऑक्सिन की सांद्रता बहुत अधिक होती है
  • (B) जब पत्ती के जीर्ण होने पर फलक से आने वाले ऑक्सिन (IAA) की सांद्रता घट जाती है और विलगन क्षेत्र एथिलीन के प्रति संवेदनशील हो जाता है
  • (C) जब पत्ती में प्रकाश-संश्लेषण सर्वोच्च होता है
  • (D) जब पत्ती नई निकलती है
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — युवा पत्ती से आने वाला उच्च ऑक्सिन प्रवाह विलगन को रोककर रखता है; ऑक्सिन घटते ही एथिलीन विलगन करा देती है।

10. ज्वार (Sorghum) के प्रजनन में प्रयुक्त प्रसिद्ध स्टे-ग्रीन QTLs (Stg1, Stg2, Stg3 एवं Stg4) मुख्य रूप से किस दाता वंशक्रम (Donor line) से प्राप्त किए गए हैं?

  • (A) कंबाइंड काफिर-60
  • (B) बी-35 (B35 / BTx642 — इथियोपियाई दुर्रा व्युत्पन्न) एवं E 36-1
  • (C) टिफ्ट 23A
  • (D) नोरिन-10
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — 'B35' और 'E 36-1' ज्वार में विश्व भर में स्टे-ग्रीन सूखा सहिष्णुता के सबसे प्रसिद्ध आनुवंशिक दाता हैं।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. फलों को झड़ने से रोकने के लिए प्रयुक्त बाजार में उपलब्ध प्रसिद्ध व्यापारिक उत्पाद 'प्लानोफिक्स' (Planofix) में कौन सा हार्मोन और कितने प्रतिशत होता है?

अल्फा-नेफ्थलीन एसिटिक अम्ल (α-NAA — 4.5% SL)।

2. सन् 1963 में एडिकॉट और ओकुमा ने कपास के गिरते हुए युवा टिंडों (Bolls) से किस हार्मोन को पृथक कर उसे 'Abscisin-II' नाम दिया था?

एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid – ABA) को।

3. विलगन के समय जाइलम वाहिकाओं को बंद करने के लिए उनमें बनने वाली गुब्बारे जैसी अतिवृद्धियों को क्या कहते हैं?

टाइलोसेस (Tyloses)।

4. स्टे-ग्रीन के 5 प्रकारों (Type A से E) का वर्गीकरण सन् 2000 में किन वैज्ञानिकों ने दिया था?

हॉवर्ड थॉमस एवं कैथरीन हॉवर्थ (Thomas & Howarth, 2000) ने।

5. 10 ppm NAA घोल बनाने के लिए 1 मिलीलीटर Planofix (4.5% SL) को कितने लीटर पानी में घोला जाता है?

4.5 लीटर पानी में (और 20 ppm के लिए 2.25 लीटर पानी में)।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. विलगन (Abscission) क्या है? विलगन क्षेत्र की संरचना और इसमें कार्य करने वाले एंजाइमों का वर्णन कीजिए।

पुरानी पत्तियों, फूलों या फलों का अपने आधार पर बने एक विशेष कमजोर क्षेत्र से बिना घाव बनाए पौधे से अलग होकर गिरना 'विलगन' कहलाता है। पर्णवृंत या फलवृंत के आधार पर स्थित 'विलगन क्षेत्र' में दो परतें होती हैं: 1. पृथक्करण परत (Separation layer): जहाँ एथिलीन के प्रभाव से 'Polygalacturonase (Pectinase)' और 'Cellulase' एंजाइम मध्य पटलिका के कैल्शियम पेक्टेट व सेल्यूलोज भित्ति को घोलकर अंग को अलग कर देते हैं। 2. रक्षात्मक परत (Protective layer): तने की ओर सुबेरिन व लिग्निन जमा होकर घाव को सील कर देती है।

2. विलगन के नियंत्रण में 'ऑक्सिन' और 'एथिलीन' के आपसी संतुलन (Auxin-Ethylene Balance Model) को समझाइए।

जब तक पत्ती या फल युवा और स्वस्थ रहता है, वह उच्च मात्रा में ऑक्सिन (IAA) बनाता है जो डंठल से तने की ओर बहता है और विलगन क्षेत्र की कोशिकाओं को एथिलीन के प्रति असंवेदनशील रखकर विलगन को रोकता है। जैसे ही पत्ती बूढ़ी होती है या तनाव आता है, ऑक्सिन का संश्लेषण गिर जाता है और एथिलीन (तथा ABA) का उत्पादन बढ़ जाता है। ऑक्सिन घटते ही एथिलीन विलगन क्षेत्र में पेक्टिनेज व सेल्यूलेज एंजाइम बनवाकर पत्ती या फल को गिरा देती है।

3. कृषि और उद्यानिकी में विलगन को रोकने और प्रेरित करने के व्यावसायिक अनुप्रयोग लिखिए।

1. विलगन रोकना (Pre-harvest fruit drop control): आम, नींबू (सिट्रस), सेब, टमाटर, मिर्च और कपास में फूलों और छोटे फलों को गिरने से रोकने के लिए NAA ('Planofix') @ 10–20 ppm या 2,4-D @ 5–10 ppm का छिड़काव किया जाता है। 2. विलगन प्रेरित करना (Defoliation & Harvesting): कपास की मशीन से तुड़ाई करने से पहले हरी पत्तियाँ गिराने हेतु Ethrel + Thidiazuron का छिड़काव किया जाता है, तथा अखरोट व चेरी की यांत्रिक तुड़ाई हेतु Ethrel से फलों को ढीला किया जाता है।

4. 'स्टे-ग्रीन अवधारणा' (Stay-Green Concept) क्या है? 'कार्यात्मक' (Functional) और 'कॉस्मेटिक' (Cosmetic) स्टे-ग्रीन में अंतर स्पष्ट कीजिए।

दाना भरने और पकने की अंतिम अवस्था में (विशेषकर सूखे में) पत्तियों के पीले पड़ने के बजाय लंबे समय तक हरे बने रहने के गुण को 'स्टे-ग्रीन' (Thomas & Howarth, 2000) कहते हैं। 'Functional Stay-Green' (Type A व B) में पत्ती हरी रहने के साथ-साथ अंत तक सक्रिय प्रकाश-संश्लेषण करती है जिससे दानों की उपज बढ़ती है। इसके विपरीत, 'Cosmetic Stay-Green' (Type C) में केवल पर्णहरित तोड़ने वाला एंजाइम खराब होने से पत्ती हरी दिखती है किंतु उसका प्रकाश-संश्लेषण बंद हो चुका होता है।

5. ज्वार, मक्का और गेहूँ में 'Functional Stay-Green' गुण के चार प्रमुख सस्य व प्रजनन लाभ लिखिए।

1. फूल आने के बाद पड़ने वाले सूखे (Terminal drought) और उच्च ताप में भी प्रकाश-संश्लेषण चालू रहकर दाने पूरे भरते हैं और उपज 15–30% बढ़ती है। 2. तने में शर्करा भरी रहने से 'चारकोल रॉट' (Macrophomina) रोग नहीं लगता और फसल गिरती नहीं (Lodging resistance)। 3. पर्ण क्षेत्रफल अवधि (LAD) और 1000-दाना भार बढ़ता है। 4. दाना कटाई के बाद भी पशुओं के लिए उच्च प्रोटीन व सुपाच्य हरा चारा/कड़बी मिलती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. पादप अंगों के विलगन (Abscission) की शारीरिकीय एवं जैव-रासायनिक क्रियाविधि, एडिकॉट के ऑक्सिन प्रवणता व एथिलीन मॉडल तथा कृषि एवं उद्यानिकी में इसके व्यावसायिक नियंत्रण का सविस्तर वर्णन कीजिए।

विलगन की परिभाषा व जैविक महत्व, विलगन क्षेत्र की दोनों परतों (Separation एवं Protective layer) व टाइलोसेस की संरचना, विलगन के तीनों चरण, Polygalacturonase व Cellulase की भूमिका, ऑक्सिन बनाम एथिलीन का प्रवाह आरेख और फलों को गिरने से रोकने (NAA/2,4-D) व कपास निष्पत्रण (Ethrel/Thidiazuron) तथा Planofix गणना का विस्तृत वर्णन करें।

2. फसल कार्यिकी में 'स्टे-ग्रीन अवधारणा' (Stay-Green Concept — Thomas & Howarth, 2000) की व्याख्या करते हुए इसके पाँचों प्रकारों (Type A से E), कार्यात्मक बनाम कॉस्मेटिक स्टे-ग्रीन के अंतर और जलवायु-सहिष्णु फसल प्रजनन में इसके महत्व की विवेचना कीजिए।

स्टे-ग्रीन की परिभाषा, Type A (Delayed onset), Type B (Slower rate), Type C (Cosmetic SGR mutant), Type D व Type E का ग्राफ व विवरण, तालिका 24.1 की तुलना और ज्वार (Stg1–Stg4 QTLs from B35), मक्का व गेहूँ में सूखा सहिष्णुता, चारकोल रॉट प्रतिरोध, तना मजबूती व चारा गुणवत्ता में इसकी भूमिका का सविस्तर वर्णन करें।

3. पादप जीर्णता (Senescence), विलगन (Abscission) और स्टे-ग्रीन (Stay-Green) तीनों प्रक्रियाओं के पारस्परिक संबंधों का विश्लेषण करते हुए समझाइए कि स्रोत-सिंक संतुलन (Source-Sink Balance) इन्हें कैसे नियंत्रित करता है।

जीर्णता से पोषक पुनर्गतिशीलता, उसके बाद विलगन से अंग का त्याग, और स्टे-ग्रीन द्वारा पत्ती की कार्यात्मक आयु (LAD) को बढ़ाकर स्रोत क्षमता बढ़ाने के संबंध को स्पष्ट करें; तथा बताएं कि अत्यधिक स्टे-ग्रीन में यदि नाइट्रोजन पत्ती से दानों में न जाए तो दाने का प्रोटीन कैसे प्रभावित होता है और प्रजनक दोनों में संतुलन कैसे बनाते हैं।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • सेब और आम में मई-जून में छोटे फलों के प्राकृतिक रूप से झड़ने को 'जून ड्रॉप' (June Drop) कहते हैं जिसे NAA (10–20 ppm) से रोका जाता है।
  • कपास में बॉल (टिंडा) गिरने से पहले उससे सटी पत्ती में ऑक्सिन घटता है और एथिलीन बढ़ जाती है।
  • पत्ती या फल को अलग करने वाली मुख्य क्रिया मध्य पटलिका के 'कैल्शियम पेक्टेट' का पेक्टिनेज एंजाइम द्वारा घुलना है।
  • मेंडल के प्रसिद्ध 7 लक्षणों में से 'पीला बनाम हरा बीजपत्र' जीन (I/i) गुणसूत्र-1 पर स्थित 'Stay-Green (SGR)' जीन ही है!
  • ज्वार की प्रसिद्ध रबी किस्म 'M 35-1' और दाता 'B35' दोनों में उत्कृष्ट स्टे-ग्रीन और सूखा सहिष्णुता गुण पाए जाते हैं।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।

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