PPHYS 311 Lecture 10: प्रकाश-संश्लेषी उपकरण (Chloroplast), प्रकाश-संश्लेषी वर्णक, पर्णहरित a एवं b (Chlorophyll a and b)

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PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
LECTURE 10 / 32 · PPHYS 311

प्रकाश-संश्लेषी उपकरण (Chloroplast), प्रकाश-संश्लेषी वर्णक, पर्णहरित a एवं b (Chlorophyll a and b)

Photosynthetic Apparatus, Photosynthetic Pigments, Chlorophyll a and b

Chloroplast Ultrastructure (Grana, Stroma, Quantasomes), Chlorophyll a vs b Structure & Formula, Carotenoids, Phycobilins, Absorption vs Action Spectrum

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Photosynthetic Apparatus, Photosynthetic Pigments, Chlorophyll a and b (Theory • Lecture 10)
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • प्रकाश-संश्लेषी उपकरण अर्थात् 'हरितलवक' (Chloroplast — Schimper, 1883) की द्वि-झिल्ली परा-संरचना, श्रम विभाजन (थाइलाकोइड/ग्रेना में प्रकाशीय अभिक्रिया एवं स्ट्रोमा में अंधकार अभिक्रिया) और क्वांटासोम (Quantasome — Park & Biggin, 1964) को समझना।
  • विलस्टैटर और स्टॉल (Willstätter & Stoll, 1913) द्वारा खोजी गई पर्णहरित (Chlorophyll) की 'टैडपोल' संरचना (पोरफाइरिन शीर्ष + फाइटोल पूँछ) तथा Chlorophyll-a (C55H72O5N4Mg, C-3 पर −CH3 समूह) और Chlorophyll-b (C55H70O6N4Mg, C-3 पर −CHO समूह) के बीच सभी अंतरों का विश्लेषण करना।
  • सहायक वर्णकों (Carotenoids: Carotenes एवं Xanthophylls; तथा Phycobilins) के कार्यों और अवशोषण स्पेक्ट्रम (Absorption spectrum) बनाम क्रिया स्पेक्ट्रम (Action spectrum — T.W. Engelmann, 1882) का अध्ययन करना।

प्रस्तावना · Introduction

पृथ्वी पर समस्त जीवन सूर्य के प्रकाश पर टिका है और इस सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा (कार्बोहाइड्रेट भोजन) में बदलने वाला एकमात्र जैविक कारखाना हरी पत्तियों की मीसोफिल कोशिकाओं में स्थित 'हरितलवक' (Chloroplast — प्रकाश-संश्लेषी उपकरण) है। हरितलवक की थाइलाकोइड झिल्लियों में धँसे हरे वर्णक पर्णहरित (Chlorophylls) और पीले-नारंगी कैरोटीनॉयड्स (Carotenoids) दृश्य प्रकाश (PAR: 400–700 nm) के नीले और लाल फोटॉनों को पकड़कर प्रकाश-संश्लेषण का प्रारंभ करते हैं।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

हरितलवक — अर्ध-स्वायत्त कोशिकांग (Chloroplast as a Semi-Autonomous Organelle)

हरितलवक (प्रस्तावित नाम: Schimper, 1883) एक दोहरी झिल्ली वाला कोशिकांग है जिसके स्ट्रोमा में अपना स्वयं का वृत्ताकार द्विरज्जुकी DNA (cpDNA / Plastome), 70S राइबोसोम और RNA पाए जाते हैं, इसलिए यह अपने कुछ प्रोटीन (जैसे RuBisCO की बड़ी उप-इकाई) स्वयं बना लेता है।

क्वांटासोम (Quantasome – Park & Pon, 1963; Park & Biggin, 1964)

थाइलाकोइड झिल्ली की सतह पर पाए जाने वाले प्रकाश-संश्लेषण की सबसे छोटी रूपात्मक एवं कार्यात्मक इकाई के कण, जिनमें से प्रत्येक कण में लगभग 230 पर्णहरित अणु (160 Chl-a + 70 Chl-b) और ~50 कैरोटीनॉयड अणु होते हैं।

सार्वत्रिक / प्राथमिक प्रकाश-संश्लेषी वर्णक (Universal Primary Pigment – Chlorophyll a)

पर्णहरित-a (Chlorophyll-a) जीवाणुओं को छोड़कर सभी ऑक्सीजन-उत्पादक प्रकाश-संश्लेषी जीवों (नील-हरित शैवाल से लेकर उच्च पादपों तक) में अनिवार्य रूप से पाया जाता है और केवल यही अभिक्रिया केंद्र (P680 व P700) के रूप में प्रकाश ऊर्जा को सीधे विद्युत/रासायनिक ऊर्जा में बदलता है!

अवशोषण स्पेक्ट्रम बनाम क्रिया स्पेक्ट्रम (Absorption vs Action Spectrum)

किसी वर्णक द्वारा विभिन्न तरंगदैर्ध्य के प्रकाश के अवशोषण का ग्राफ 'अवशोषण स्पेक्ट्रम' कहलाता है (पर्णहरित नीले क्षेत्र 430–450 nm में सर्वाधिक और लाल क्षेत्र 660–680 nm में द्वितीयक अवशोषण करता है); जबकि विभिन्न तरंगदैर्ध्य पर वास्तविक प्रकाश-संश्लेषण की दर (O2 उत्सर्जन) का ग्राफ 'क्रिया स्पेक्ट्रम' (Engelmann, 1882) कहलाता है।

वर्गीकरण · Classification

प्रकाश-संश्लेषी वर्णकों के 3 मुख्य वर्ग (Three Classes of Photosynthetic Pigments)

1. पर्णहरित (Chlorophylls — लिपिड/कार्बनिक विलायक में घुलनशील हरे वर्णक): कुल 9 प्रकार—Chl-a (सभी हरे पौधों में सार्वत्रिक), Chl-b (उच्च पादप एवं हरे शैवाल Chlorophyceae में), Chl-c (भूरे शैवाल एवं डायटम में), Chl-d (लाल शैवाल में), Chl-e (पीले-हरे शैवाल में), तथा जीवाणुओं में Bacteriochlorophyll-a, b एवं Chlorobium chlorophyll।
2. कैरोटीनॉयड्स (Carotenoids — लिपिड-घुलनशील पीले, नारंगी व लाल सहायक वर्णक / 'Shield Pigments'): ये 40-कार्बन टेट्राटरपीन हैं जिनके दो प्रकार हैं:
• (a) कैरोटीन (Carotenes — C40H56, शुद्ध हाइड्रोकार्बन, ऑक्सीजन अनुपस्थित, नारंगी-लाल रंग): जैसे β-carotene (सर्वाधिक प्रमुख, जो टूटकर विटामिन-A बनाता है) एवं Lycopene (टमाटर का लाल वर्णक)।
• (b) जैंथोफिल / कैरोटीनॉल (Xanthophylls — C40H56O2, ऑक्सीजन-युक्त व्युत्पन्न, पीला रंग): जैसे Lutein (हरी पत्तियों में सर्वाधिक पाया जाने वाला जैंथोफिल!), Violaxanthin एवं Zeaxanthin (Xanthophyll cycle)।
3. फाइकोबिलिन (Phycobilins — जल-घुलनशील प्रोटीन वर्णक, खुले टेट्रापायरोल जिनमें Mg व Phytol पूँछ दोनों नहीं होते!): केवल नील-हरित शैवाल (Cyanobacteria) व लाल शैवाल में पाए जाते हैं—Phycocyanin (नीला) एवं Phycoerythrin (लाल)।

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • पर्णहरित (Chlorophyll) की 'टैडपोल' रासायनिक संरचना (Willstätter, Stoll & Fischer — Nobel Prizes 1915 & 1930): प्रत्येक पर्णहरित अणु के दो भाग होते हैं:
    1. पोरफाइरिन शीर्ष (Porphyrin Head — 15×15 Å, जल-रागी / Hydrophilic): यह 4 पायरोल वलयों (Pyrrole rings I, II, III, IV + एक पाँचवीं आइसोसाइक्लिक रिंग V) से बना चपटा चतुष्पायरोल (Tetrapyrrole) वलय है जिसके ठीक केंद्र में 1 मैग्नीशियम परमाणु (Mg2+) 4 नाइट्रोजन परमाणुओं से जुड़ा रहता है।
    2. फाइटोल पूँछ (Phytol Tail — 20 Å लंबी, वसा-रागी / Lipophilic): यह 20-कार्बन युक्त लंबी श्रृंखला वाला अल्कोहल (C20H39OH) है जो चौथी पायरोल रिंग (Ring IV के C-7) से एस्टर बंध द्वारा जुड़ा रहता है और पर्णहरित को थाइलाकोइड की लिपिड झिल्ली में गाड़कर (Anchor) रखता है! (केवल Chlorophyll-c में फाइटोल पूँछ नहीं होती)।
  • Chlorophyll-a बनाम Chlorophyll-b का एकमात्र संरचनात्मक अंतर (Most Asked Exam Question!): पोरफाइरिन वलय की द्वितीय पायरोल रिंग के कार्बन-3 (C-3 position on Ring II) पर:
    • Chlorophyll-a (C55H72O5N4Mg) में मेथिल समूह (−CH3) जुड़ा होता है।
    • Chlorophyll-b (C55H70O6N4Mg) में उसी स्थान पर एल्डिहाइड / फॉर्मिल समूह (−CHO) जुड़ा होता है!

कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics

1. Ultrastructure of Chloroplast & Division of Labour (हरितलवक की परा-संरचना एवं श्रम विभाजन)

Mesophyll & Bundle Sheath Cells of Green Plants

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Mesophyll & Bundle Sheath Cells of Green Plants

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: खोजकर्ता: एंटोन वॉन ल्यूवेनहॉक एवं शिम्पर (Schimper, 1883 – 'Chloroplast' नाम) | थाइलाकोइड शब्द: मेंके (Menke, 1962)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: एक सामान्य पत्ती की एक मीसोफिल कोशिका में 20 से 100 उभयोत्तल लेंस के आकार के हरितलवक (4–6 μm चौड़े, 5–10 μm लंबे) पाए जाते हैं।

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
हरितलवक के 3 मुख्य संरचनात्मक भाग:
1. दोहरी आवरण झिल्ली (Double Envelope Membrane): बाहरी झिल्ली (Porins के कारण अधिक पारगम्य) और भीतरी झिल्ली (चयनात्मक पारगम्य, जिस पर ट्रांसपोर्टर स्थित होते हैं) तथा उनके बीच का पेरिप्लास्टिडियल स्थान।
2. थाइलाकोइड तंत्र एवं ग्रेना (Thylakoid System & Grana — 'Site of Light Reaction'): स्ट्रोमा के भीतर चपटी झिल्लीदार थैलियों का तंत्र होता है जिन्हें 'थाइलाकोइड' (Menke, 1962) कहते हैं। ये थाइलाकोइड सिक्कों के ढेर की तरह एक के ऊपर एक (10 से 100 थाइलाकोइड प्रति ढेर) व्यवस्थित होकर 'ग्रेनम' (Granum, बहुवचन: Grana; एक हरितलवक में 40–60 ग्रेना) बनाते हैं। दो ग्रेना को आपस में जोड़ने वाली लंबी नलिकाओं को 'स्ट्रोमा लैमेली या फ्रेट चैनल' (Stroma lamellae / Fret channels) कहते हैं!
• *महत्वपूर्ण वितरण*: सटे हुए ग्रेना लैमेली (Appressed grana membranes) में PS-II और PS-I दोनों पाए जाते हैं (मुख्यतः PS-II), जबकि खुले हुए स्ट्रोमा लैमेली (Non-appressed stroma lamellae) में केवल PS-I और ATP Synthase (CF0−CF1) होते हैं, वहाँ PS-II बिल्कुल नहीं होता!
3. स्ट्रोमा / पीठिका (Stroma — 'Site of Dark Reaction / Calvin Cycle'): थाइलाकोइड के बाहर का प्रोटीन-युक्त जलीय मैट्रिक्स जिसमें पृथ्वी पर सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन 'RuBisCO' एंजाइम (स्ट्रोमा के कुल घुलनशील प्रोटीन का 50%!), अंधकार अभिक्रिया के सभी एंजाइम, स्टार्च कण, वृत्ताकार cpDNA और 70S राइबोसोम पाए जाते हैं।

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): हरितलवक में स्पष्ट 'श्रम विभाजन' (Division of Labour) होता है: थाइलाकोइड झिल्ली (Grana) में प्रकाश ऊर्जा से जल का अपघटन होकर ATP और NADPH + H+ (Assimilatory power) बनते हैं, और स्ट्रोमा (Stroma) में इन्हीं ATP व NADPH का उपयोग करके CO2 का शर्करा में अपचयन (Dark reaction) होता है!

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): अंधेरे में उगाए गए पौधों में हरितलवक के स्थान पर रंगहीन 'इटियोप्लास्ट' (Etioplasts) बनते हैं जिनमें 'Protochlorophyllide' होता है; प्रकाश मिलते ही इसके प्रोटोक्लोरोफिलाइड का रिंग-IV पर अपचयन (2H जुड़ना) होकर यह हरे Chlorophyll-a में बदल जाता है!

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): लोहा (Fe), मैग्नीशियम (Mg), नाइट्रोजन (N) या प्रकाश के अभाव में पर्णहरित न बनने से पौधे पीले व लंबे हो जाते हैं जिसे 'पांडुरता' (Etiolation) कहते हैं।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Grana / Thylakoid membrane = Light reaction (Photophosphorylation)
  • Stroma = Dark reaction (Calvin cycle & RuBisCO)
  • Stroma lamellae (Fret channels) = Contains ONLY PS-I (Cyclic photophosphorylation), NO PS-II
  • Semi-autonomous = Circular dsDNA + 70S Ribosomes
  • Quantasome (Park & Biggin, 1964) = 230 Chlorophyll molecules (160 Chl-a + 70 Chl-b)।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

थाइलाकोइड गुहा (Lumen) के अंदर प्रकाश में H+ आयन एकत्रित होने से उसका pH घटकर 5.0 (अम्लीय) हो जाता है, जबकि बाहर स्ट्रोमा का pH बढ़कर 8.0 (क्षारीय) हो जाता है—जो RuBisCO एंजाइम को सक्रिय करने के लिए आदर्श है!

2. Chlorophyll a vs b, Accessory Pigments, Absorption & Action Spectra (पर्णहरित a एवं b की तुलना, सहायक वर्णक एवं स्पेक्ट्रम)

All Photosynthetic Crop Plants

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): All Photosynthetic Crop Plants

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रमुख वैज्ञानिक: विलस्टैटर एवं स्टॉल (1913), स्वेट (Tswett, 1906 — पेपर क्रोमैटोग्राफी द्वारा वर्णकों का पृथक्करण!) एवं टी.डब्ल्यू. एंगेलमैन (1882 — प्रथम क्रिया स्पेक्ट्रम)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: उच्च पादपों की सामान्य हरी पत्तियों में Chlorophyll-a और Chlorophyll-b का अनुपात लगभग 3 : 1 (C4 पौधों में 4 : 1 एवं छायाप्रिय पौधों में 2 : 1) होता है।

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. सहायक वर्णकों (Accessory Pigments: Chl-b एवं Carotenoids) के दो अनिवार्य कार्य:
• (i) प्रकाश संग्रहण (Light Harvesting Antenna): पर्णहरित-a जिन तरंगदैर्ध्य (जैसे 450–500 nm नीले-हरे प्रकाश) को सीधे अवशोषित नहीं कर पाता, उन्हें Chl-b और कैरोटीनॉयड अवशोषित करके अनुनाद ऊर्जा स्थानांतरण (Resonance energy transfer) द्वारा 100% दक्षता के साथ अभिक्रिया केंद्र Chlorophyll-a को सौंप देते हैं!
• (ii) प्रकाशीय-ऑक्सीकरण से रक्षा (Photoprotection against Photo-oxidation): तेज धूप में अत्यधिक प्रकाश ऊर्जा से जब ऑक्सीजन के घातक एकल मूलक (Singlet oxygen 1O2) बनने लगते हैं, तब कैरोटीनॉयड्स अतिरिक्त ऊर्जा को ऊष्मा के रूप में नष्ट कर Chlorophyll-a को जलने/नष्ट होने (Solarization / Photo-oxidation) से बचाते हैं! इसीलिए कैरोटीनॉयड्स को 'Shield Pigments' (रक्षा कवच वर्णक) कहा जाता है!

2. अवशोषण स्पेक्ट्रम बनाम क्रिया स्पेक्ट्रम (Absorption vs Action Spectrum):
• पर्णहरित (Chl-a व Chl-b) दृश्य प्रकाश के नीले-बैंगनी क्षेत्र (Blue-violet: 430–470 nm) में सर्वाधिक अवशोषण करते हैं और लाल क्षेत्र (Red: 640–680 nm) में दूसरे स्थान पर अवशोषण करते हैं; जबकि हरे प्रकाश (500–560 nm) को परावर्तित कर देते हैं (इसीलिए पत्तियाँ हरी दिखती हैं और हरे प्रकाश में प्रकाश-संश्लेषण न्यूनतम होता है!)।
• महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य: अवशोषण तो नीले प्रकाश (Blue light) का सर्वाधिक होता है, किंतु वास्तविक प्रकाश-संश्लेषण की दर (Action spectrum / Quantum yield) लाल प्रकाश (Red light: 660–680 nm) में सर्वाधिक होती है! (क्योंकि लाल फोटॉन की ऊर्जा अभिक्रिया केंद्र के ठीक बराबर होती है और नीले फोटॉन की अतिरिक्त ऊर्जा ऊष्मा में नष्ट हो जाती है)।
• टी.डब्ल्यू. एंगेलमैन (T.W. Engelmann, 1882) का ऐतिहासिक प्रिज्म प्रयोग: एंगेलमैन ने प्रिज्म से प्रकाश को तोड़कर हरे तंतुमय शैवाल *Cladophora* पर डाला और ऑक्सीजन की तलाश करने वाले वायवीय जीवाणु (*Pseudomonas / Bacterium termo*) छोड़े—जीवाणु केवल नीले और लाल प्रकाश वाले हिस्सों पर इकट्ठा हुए, जिससे विश्व का पहला 'Action Spectrum' तैयार हुआ!

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): रॉबर्ट इमर्सन और अर्नोल्ड (Emerson & Arnold, 1932) ने *Chlorella* में चमकते प्रकाश प्रयोगों से सिद्ध किया कि 1 O2 अणु निकालने के लिए ~2500 पर्णहरित अणुओं की एक 'प्रकाश-संश्लेषी इकाई' (Photosynthetic Unit – PSU) मिलकर कार्य करती है (और प्रत्येक इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण में 250–300 पर्णहरित अणु एक इकाई बनाते हैं)।

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): जब पर्णहरित के अल्कोहलिक विलयन पर प्रकाश डाला जाता है, तो परावर्तित प्रकाश में वह गहरा रक्त-लाल दिखाई देता है—इस घटना को 'फ्लोरोसेंस' (Fluorescence — Stokes' shift) कहते हैं।

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): पतझड़ के समय या फलों के पकने पर पर्णहरित (Chlorophyll) पहले टूट जाता है और अधिक स्थायी पीले-नारंगी कैरोटीनॉयड्स (Lutein व Carotene) बचे रहते हैं जिससे पुरानी पत्तियाँ और पके आम/टमाटर पीले-लाल हो जाते हैं।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Maximum Absorption of light by Chlorophyll = Blue light (430–450 nm) > Red light
  • Maximum Rate of Photosynthesis (Action Spectrum) = Red light (660–680 nm) > Blue light > Green light (Minimum)
  • Engelmann (1882) used Cladophora algae + aerobic bacteria for first Action Spectrum
  • Carotenoids protect Chl-a from Photo-oxidation ('Shield pigments')।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

पेपर क्रोमैटोग्राफी (Tswett, 1906) में पेट्रोलियम ईथर और एसीटोन से वर्णकों को अलग करने पर सबसे ऊपर नारंगी Carotene, फिर पीला Xanthophyll, फिर नीला-हरा Chl-a और सबसे नीचे पीला-हरा Chl-b आता है।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 10.1: पर्णहरित-a (Chlorophyll-a) बनाम पर्णहरित-b (Chlorophyll-b) का संपूर्ण तुलनात्मक विवरण (Exam Favourite!)

तुलना का आधारपर्णहरित-a (Chlorophyll-a)पर्णहरित-b (Chlorophyll-b)
आणविक सूत्र (Molecular Formula)C55H72O5N4Mg (अणुभार = 893)C55H70O6N4Mg (अणुभार = 907)
C-3 (Ring-II) पर क्रियात्मक समूहमेथिल समूह (−CH3) जुड़ा होता हैएल्डिहाइड / फॉर्मिल समूह (−CHO) जुड़ा होता है
रंग (Color in pure state)नीला-हरा (Bluish-green)पीला-हरा (Yellowish-green / Olive green)
उपस्थिति एवं भूमिकासार्वत्रिक प्राथमिक वर्णक (सभी O2-उत्पादक पौधों में; अभिक्रिया केंद्र बनाता है)सहायक वर्णक (केवल उच्च पादप, ब्रायोफाइट्स व हरे शैवाल में; सायनोबैक्टीरिया व डायटम में अनुपस्थित)
कार्बनिक विलायक में घुलनशीलतापेट्रोलियम ईथर (Petroleum ether) में अधिक घुलनशील92% मेथिल अल्कोहल (Methyl alcohol) में अधिक घुलनशील
अधिकतम अवशोषण शिखर (Peaks)430 nm (नीला) एवं 662 nm (लाल)453–455 nm (नीला) एवं 642–644 nm (लाल)
पत्ती में सापेक्ष अनुपात (Chl a : b)कुल पर्णहरित का ~75% (अनुपात 3)कुल पर्णहरित का ~25% (अनुपात 1)

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. पर्णहरित-a, पर्णहरित-b व कैरोटीन के आणविक सूत्र तथा प्लैंक का फोटॉन ऊर्जा समीकरण (Planck's Quantum Energy)

1. Chl-a = C55H72O5N4Mg | 2. Chl-b = C55H70O6N4Mg | 3. Carotene = C40H56 | 4. फोटॉन की ऊर्जा (E) = h · c / λ

व्याख्या एवं गणना (नीले बनाम लाल फोटॉन की ऊर्जा):
प्लैंक के समीकरण E=hc/λ के अनुसार प्रकाश के एक क्वांटम (फोटॉन) की ऊर्जा उसकी तरंगदैर्ध्य (λ) के व्युत्क्रमानुपाती (E∝1/λ) होती है!
• अतः कम तरंगदैर्ध्य वाले नीले प्रकाश (λ=440 nm) के 1 मोल फोटॉन (1 Einstein) की ऊर्जा = ~65 kcal होती है, जबकि अधिक तरंगदैर्ध्य वाले लाल प्रकाश (λ=680 nm) के 1 Einstein की ऊर्जा = ~42 kcal होती है!
• चूँकि प्रकाश-संश्लेषण के अभिक्रिया केंद्र (P680 व P700) केवल 42 kcal (लाल फोटॉन के बराबर) ऊर्जा ही उपयोग कर पाते हैं, इसलिए नीले फोटॉन की अतिरिक्त 23 kcal ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाती है—यही कारण है कि प्रति अवशोषित ऊर्जा इकाई पर लाल प्रकाश नीले प्रकाश से अधिक दक्ष (Higher quantum efficiency) होता है!

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 10: प्रकाश-संश्लेषी उपकरण (हरितलवक) एवं प्रकाश-संश्लेषी वर्णक (Chlorophyll a & b)]
├── 1. हरितलवक की परा-संरचना (Chloroplast Ultrastructure — Schimper, 1883)
│ ├── अर्ध-स्वायत्त कोशिकांग (Semi-autonomous): दोहरी झिल्ली + वृत्ताकार cpDNA + 70S राइबोसोम
│ ├── ग्रेना एवं थाइलाकोइड (Menke, 1962): प्रकाशीय अभिक्रिया का स्थान (ATP व NADPH निर्माण); Quantasome = 230 Chl अणु (Park & Biggin)
│ ├── स्ट्रोमा लैमेली (Fret channels): केवल PS-I उपस्थित (PS-II अनुपस्थित)
│ └── स्ट्रोमा (Stroma): अंधकार अभिक्रिया (Calvin cycle) का स्थान; पृथ्वी का सर्वाधिक प्रचुर प्रोटीन 'RuBisCO' यहीं होता है
├── 2. पर्णहरित संरचना एवं Chl-a बनाम Chl-b (Willstätter & Stoll, 1913)
│ ├── टैडपोल संरचना: Porphyrin Head (4 Pyrrole rings + केंद्रीय Mg2+ परमाणु) + Phytol Tail (C20H39OH — झिल्ली में धँसी)
│ ├── Chlorophyll-a (C55H72O5N4Mg): C-3 पर −CH3 (मेथिल) समूह; नीला-हरा; सार्वत्रिक प्राथमिक वर्णक (75%)
│ └── Chlorophyll-b (C55H70O6N4Mg): C-3 पर −CHO (एल्डिहाइड) समूह; पीला-हरा; सहायक वर्णक (25%; अनुपात a:b = 3:1)
├── 3. सहायक वर्णक (Accessory Pigments)
│ ├── कैरोटीनॉयड्स (लिपिड घुलनशील): Carotenes (C40H56 — नारंगी, β-carotene & Lycopene) + Xanthophylls (C40H56O2 — पीला, Lutein प्रमुख)
│ ├── कार्य: प्रकाश संग्रहण + पर्णहरित-a को प्रकाशीय-ऑक्सीकरण (Photo-oxidation) से बचाना ('Shield Pigments')
│ └── फाइकोबिलिन (जल घुलनशील, नील-हरित व लाल शैवाल में): Phycocyanin एवं Phycoerythrin
└── 4. अवशोषण बनाम क्रिया स्पेक्ट्रम (Absorption vs Action Spectrum)
├── अधिकतम प्रकाश अवशोषण (Absorption): नीला प्रकाश (Blue: 430–450 nm) > लाल प्रकाश (Red: 660 nm)
└── अधिकतम प्रकाश-संश्लेषण दर (Action Spectrum — Engelmann 1882 on Cladophora): लाल प्रकाश (Red) > नीला प्रकाश > हरा (न्यूनतम)

प्रवाह चित्र · Flowchart

[हरितलवक के थाइलाकोइड में सहायक वर्णकों (Antenna Pigments) से अभिक्रिया केंद्र (Chl-a) तक ऊर्जा स्थानांतरण का पदानुक्रम]
सूर्य का दृश्य प्रकाश (PAR: 400 – 700 nm के फोटॉन)
↓
【1. बाह्य एंटीना / सहायक वर्णक (Light Harvesting Complex - LHC / Accessory Pigments)】
[Carotenoids (Carotenes & Xanthophylls) / Phycobilins — उच्च ऊर्जा व छोटी तरंगदैर्ध्य का अवशोषण]
↓ (अनुनाद ऊर्जा स्थानांतरण / Förster Resonance Energy Transfer — केवल ऊर्जा जाती है, इलेक्ट्रॉन नहीं!)
[Chlorophyll-b (अवशोषण शिखर: 453 nm एवं 642 nm)]
↓ (अनुनाद ऊर्जा स्थानांतरण)
[Antenna Chlorophyll-a अणु (अवशोषण: 660–670 nm)]
↓ (ऊर्जा फनलिंग / Energy Funneling — 100% दक्षता के साथ!)
【2. अभिक्रिया केंद्र (Reaction Center Chlorophyll-a Dimer: P680 in PS-II या P700 in PS-I)】
↓ (प्रकाशीय-रासायनिक आवेश पृथक्करण — उत्तेजित इलेक्ट्रॉन का प्राथमिक ग्राही द्वारा ग्रहण!)
【प्रकाशीय ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा (ATP एवं NADPH) में रूपांतरण प्रारंभ】

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाने वाले 4 प्रश्न:
    1. पर्णहरित-a और पर्णहरित-b के आणविक सूत्र और संरचना में क्या अंतर है? उत्तर: Chl-a (C55H72O5N4Mg) में C-3 पर मेथिल समूह (−CH3) होता है, जबकि Chl-b (C55H70O6N4Mg) में C-3 पर एल्डिहाइड समूह (−CHO) होता है!
    2. पर्णहरित के केंद्र में कौन सी धातु होती है? उत्तर: मैग्नीशियम (Mg2+) (जबकि हीमोग्लोबिन व साइटोक्रोम के केंद्र में लोहा Fe होता है)।
    3. पर्णहरित किस रंग के प्रकाश का सर्वाधिक अवशोषण करता है और किस रंग में प्रकाश-संश्लेषण की दर सर्वाधिक होती है? उत्तर: सर्वाधिक अवशोषण = नीले प्रकाश (Blue light) का; और सर्वाधिक प्रकाश-संश्लेषण दर (Action spectrum) = लाल प्रकाश (Red light) में!
    4. क्वांटासोम (Quantasome) की खोज किसने की और इसमें कितने पर्णहरित अणु होते हैं? उत्तर: पार्क एवं बिगिन (Park & Biggin, 1964) ने; इसमें 230 पर्णहरित अणु (160 Chl-a + 70 Chl-b) होते हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • पर्णहरित की रासायनिक संरचना का निर्धारण विलस्टैटर एवं स्टॉल (1913) तथा हंस फिशर ने किया था।
  • पर्णहरित-a नीला-हरा होता है और पेट्रोलियम ईथर में घुलता है; पर्णहरित-b पीला-हरा होता है और मेथिल अल्कोहल में घुलता है।
  • हरी पत्तियों में पाया जाने वाला सबसे प्रमुख जैंथोफिल वर्णक 'ल्यूटिन' (Lutein, C40H56O2) है।
  • कैरोटीनॉयड्स पर्णहरित-a को 'प्रकाशीय-ऑक्सीकरण' (Photo-oxidation) से बचाते हैं, इसलिए इन्हें 'Shield pigments' कहते हैं।
  • टी.डब्ल्यू. एंगेलमैन (1882) ने *Cladophora* शैवाल और वायवीय जीवाणुओं से प्रथम 'Action Spectrum' तैयार किया था।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. पर्णहरित-a (Chlorophyll-a: C55H72O5N4Mg) और पर्णहरित-b (Chlorophyll-b: C55H70O6N4Mg) की रासायनिक संरचना में कार्बन-3 (Ring-II) पर क्या मुख्य अंतर होता है?

  • (A) Chl-a में केंद्र में लोहा होता है और Chl-b में मैग्नीशियम
  • (B) Chl-a में मेथिल समूह (−CH3) होता है, जबकि Chl-b में एल्डिहाइड समूह (−CHO) होता है
  • (C) Chl-a में एल्डिहाइड (−CHO) होता है और Chl-b में मेथिल (−CH3)
  • (D) Chl-b में फाइटोल पूँछ नहीं होती
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — Chl-a के C-3 पर स्थित मेथिल समूह (−CH3) के स्थान पर Chl-b में एल्डिहाइड समूह (−CHO) आ जाता है जिससे 2 H घटते हैं और 1 O बढ़ता है।

2. पार्क एवं बिगिन (Park & Biggin, 1964) द्वारा थाइलाकोइड झिल्ली पर खोजी गई प्रकाश-संश्लेषी इकाई 'क्वांटासोम' (Quantasome) के एक कण में कितने पर्णहरित अणु होते हैं?

  • (A) 50 पर्णहरित अणु
  • (B) 100 पर्णहरित अणु
  • (C) 230 पर्णहरित अणु (160 Chl-a + 70 Chl-b)
  • (D) 2500 पर्णहरित अणु
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — एक क्वांटासोम में लगभग 230 पर्णहरित अणु (160 Chl-a एवं 70 Chl-b) और लगभग 50 कैरोटीनॉयड अणु होते हैं।

3. पर्णहरित (Chlorophyll) अणु दृश्य प्रकाश के किस भाग का 'सर्वाधिक अवशोषण' करता है और किस भाग में 'वास्तविक प्रकाश-संश्लेषण की दर (Action spectrum)' सर्वाधिक होती है?

  • (A) दोनों हरे प्रकाश में सर्वाधिक होते हैं
  • (B) सर्वाधिक अवशोषण: नीले प्रकाश (Blue light) में; और सर्वाधिक प्रकाश-संश्लेषण दर: लाल प्रकाश (Red light) में
  • (C) सर्वाधिक अवशोषण: लाल में; और सर्वाधिक दर: नीले में
  • (D) सर्वाधिक अवशोषण: पीले में
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — पर्णहरित का Absorption peak नीले क्षेत्र (430–453 nm) में सबसे ऊँचा होता है, किंतु Action spectrum लाल क्षेत्र (660–680 nm) में सर्वोच्च होता है।

4. सन् 1882 में प्रिज्म, हरे शैवाल 'Cladophora' और ऑक्सीजन-खोजी वायवीय जीवाणुओं का उपयोग करके प्रकाश-संश्लेषण का प्रथम 'क्रिया स्पेक्ट्रम' (Action Spectrum) किसने प्रदर्शित किया था?

  • (A) टी.डब्ल्यू. एंगेलमैन (T.W. Engelmann, 1882)
  • (B) रॉबर्ट हिल (1937)
  • (C) मेल्विन केल्विन (1954)
  • (D) जूलियस वॉन सैक्स
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — एंगेलमैन (1882) ने दिखाया कि वायवीय जीवाणु *Cladophora* तंतु के नीले और लाल प्रकाश वाले क्षेत्रों पर ही एकत्रित हुए।

5. हरितलवक (Chloroplast) के किस भाग में प्रकाशीय अभिक्रिया (Light reaction) और किस भाग में अंधकार अभिक्रिया (Dark reaction / Calvin cycle) संपन्न होती है?

  • (A) प्रकाशीय: स्ट्रोमा में एवं अंधकार: ग्रेना में
  • (B) प्रकाशीय अभिक्रिया: ग्रेना / थाइलाकोइड झिल्ली में; एवं अंधकार अभिक्रिया: स्ट्रोमा (पीठिका) में
  • (C) दोनों बाहरी झिल्ली पर
  • (D) दोनों माइटोकॉन्ड्रिया में
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — थाइलाकोइड/ग्रेना में वर्णक और इलेक्ट्रॉन वाहक होने से वहाँ प्रकाशीय अभिक्रिया (ATP व NADPH निर्माण) होती है और स्ट्रोमा में RuBisCO होने से अंधकार अभिक्रिया होती है।

6. पर्णहरित अणु के चतुष्पायरोल 'पोरफाइरिन शीर्ष' (Porphyrin head) के ठीक केंद्र में कौन सा धातु परमाणु स्थित होता है?

  • (A) लोहा (Fe)
  • (B) मैग्नीशियम (Magnesium – Mg²⁺)
  • (C) कॉपर (Cu)
  • (D) जिंक (Zn)
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — पर्णहरित के पोरफाइरिन वलय के केंद्र में मैग्नीशियम (Mg²⁺) होता है जो 4 नाइट्रोजन परमाणुओं से बंधा रहता है।

7. सहायक वर्णक 'कैरोटीनॉयड्स' (Carotenoids) को 'शील्ड पिगमेंट्स' (Shield Pigments) क्यों कहा जाता है?

  • (A) क्योंकि वे जड़ों की रक्षा करते हैं
  • (B) क्योंकि वे तेज धूप में अतिरिक्त ऊर्जा व एकल ऑक्सीजन को नष्ट कर मुख्य वर्णक पर्णहरित-a को 'प्रकाशीय-ऑक्सीकरण' (Photo-oxidation) से बचाते हैं
  • (C) क्योंकि वे स्टार्च बनाते हैं
  • (D) क्योंकि वे रंध्र बंद करते हैं
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — कैरोटीनॉयड के बिना तेज धूप में पर्णहरित-a का फोटो-ऑक्सीकरण (Bleaching) होकर वह तुरंत नष्ट हो जाता है।

8. निम्नलिखित में से कौन सा वर्णक 'जल में घुलनशील' (Water-soluble) है और नील-हरित शैवाल (Cyanobacteria) व लाल शैवाल में पाया जाता है?

  • (A) पर्णहरित-a
  • (B) बीटा-कैरोटीन
  • (C) फाइकोबिलिन (Phycobilins — फाइकोसायनिन एवं फाइकोएरिथ्रिन)
  • (D) ल्यूटिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — पर्णहरित और कैरोटीनॉयड दोनों वसा/कार्बनिक विलायक में घुलनशील हैं, जबकि फाइकोबिलिन और एंथोसायनिन जल में घुलनशील हैं।

9. उच्च पादपों की हरी पत्तियों में पाया जाने वाला ऑक्सीजन-युक्त पीला कैरोटीनॉयड 'जैंथोफिल' (Xanthophyll — जैसे Lutein) का आणविक सूत्र क्या है?

  • (A) C40H56 (जो शुद्ध हाइड्रोकार्बन कैरोटीन का सूत्र है)
  • (B) C40H56O2 (ऑक्सीजन-युक्त कैरोटीनॉल)
  • (C) C55H72O5N4Mg
  • (D) C20H39OH
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — कैरोटीन का सूत्र C40H56 है और उसमें ऑक्सीजन जुड़ने से जैंथोफिल (C40H56O2, जैसे Lutein) बनता है।

10. हरितलवक के दो ग्रेना को आपस में जोड़ने वाली 'स्ट्रोमा लैमेली' (Stroma lamellae / Fret channels) की मुख्य विशेषता क्या है?

  • (A) इसमें केवल PS-II होता है
  • (B) इसमें PS-II और NADP रिडक्टेज अनुपस्थित होते हैं और केवल PS-I पाया जाता है (जहाँ चक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन होता है)
  • (C) इसमें RuBisCO होता है
  • (D) इसमें कोई पर्णहरित नहीं होता
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — स्ट्रोमा लैमेली में केवल PS-I होता है (PS-II केवल सटे हुए ग्रेना लैमेली में होता है)।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. सभी ऑक्सीजन-उत्पादक प्रकाश-संश्लेषी जीवों में पाया जाने वाला 'सार्वत्रिक वर्णक' (Universal Pigment) कौन सा है?

पर्णहरित-a (Chlorophyll-a)।

2. उच्च पादपों की सामान्य हरी पत्तियों में पर्णहरित-a और पर्णहरित-b का सामान्य अनुपात क्या होता है?

लगभग 3 : 1 (75% Chl-a और 25% Chl-b)।

3. पर्णहरित अणु की 20-कार्बन लंबी वसा-रागी पूँछ किस अल्कोहल की बनी होती है?

फाइटोल अल्कोहल (Phytol tail — C20H39OH) की।

4. हरितलवक को 'अर्ध-स्वायत्त कोशिकांग' (Semi-autonomous organelle) क्यों कहा जाता है?

क्योंकि इसके स्ट्रोमा में अपना स्वयं का वृत्ताकार द्विरज्जुकी DNA (cpDNA) और 70S राइबोसोम पाए जाते हैं।

5. सन् 1906 में पत्तियों के वर्णकों को अलग करने के लिए 'क्रोमैटोग्राफी' (Adsorption Chromatography) तकनीक का आविष्कार किसने किया था?

रूसी वनस्पतिशास्त्री माइकल स्वेट (M. Tswett, 1906) ने।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. पर्णहरित-a (Chlorophyll-a) और पर्णहरित-b (Chlorophyll-b) में पाँच प्रमुख अंतर लिखिए।

1. सूत्र: Chl-a का सूत्र C55H72O5N4Mg है और Chl-b का C55H70O6N4Mg है। 2. संरचना: Chl-a में C-3 पर मेथिल समूह (−CH3) होता है, जबकि Chl-b में एल्डिहाइड समूह (−CHO) होता है। 3. रंग: Chl-a नीला-हरा और Chl-b पीला-हरा होता है। 4. कार्य: Chl-a प्राथमिक अभिक्रिया केंद्र वर्णक है जबकि Chl-b सहायक एंटीना वर्णक है। 5. विलायकता: Chl-a पेट्रोलियम ईथर में और Chl-b मेथिल अल्कोहल में अधिक घुलनशील है।

2. हरितलवक (Chloroplast) में 'श्रम विभाजन' (Division of Labour) को स्पष्ट कीजिए।

हरितलवक में प्रकाश-संश्लेषण की दोनों अवस्थाओं के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित हैं: 1. थाइलाकोइड झिल्ली एवं ग्रेना (Grana): यहाँ सभी प्रकाश-संश्लेषी वर्णक, PS-I, PS-II और इलेक्ट्रॉन वाहक स्थित होते हैं, इसलिए यहाँ 'प्रकाशीय अभिक्रिया' होकर प्रकाश ऊर्जा से ATP व NADPH का निर्माण और O2 का उत्सर्जन होता है। 2. स्ट्रोमा (Stroma): यहाँ RuBisCO और केल्विन चक्र के सभी घुलनशील एंजाइम होते हैं, इसलिए यहाँ ATP व NADPH की सहायता से CO2 का शर्करा में अपचयन ('अंधकार अभिक्रिया') होता है।

3. अवशोषण स्पेक्ट्रम (Absorption Spectrum) और क्रिया स्पेक्ट्रम (Action Spectrum) में क्या अंतर है?

अवशोषण स्पेक्ट्रम यह दर्शाता है कि कोई शुद्ध वर्णक (जैसे पर्णहरित) दृश्य प्रकाश की विभिन्न तरंगदैर्ध्यों (400–700 nm) में से किस तरंगदैर्ध्य का कितना अवशोषण करता है (पर्णहरित नीले प्रकाश 430 nm का सर्वाधिक और लाल 662 nm का द्वितीयक अवशोषण करता है)। इसके विपरीत, क्रिया स्पेक्ट्रम (Engelmann, 1882) विभिन्न तरंगदैर्ध्यों पर वास्तविक प्रकाश-संश्लेषण की दर (O2 निकास या CO2 स्थिरीकरण) को दर्शाता है, जो लाल प्रकाश (660–680 nm) में सर्वाधिक होती है।

4. प्रकाश-संश्लेषण में 'कैरोटीनॉयड्स' (Carotenoids) के दो प्रमुख कार्य लिखिए।

कैरोटीनॉयड्स (नारंगी Carotenes C40H56 एवं पीले Xanthophylls C40H56O2) दो अनिवार्य कार्य करते हैं: 1. सहायक एंटीना वर्णक के रूप में वे नीले-हरे क्षेत्र (450–500 nm) के प्रकाश को अवशोषित कर अनुनाद स्थानांतरण द्वारा पर्णहरित-a को देते हैं। 2. 'Shield Pigments' के रूप में वे तेज धूप में बनने वाले घातक सिंगलेट ऑक्सीजन को निष्क्रिय कर मुख्य वर्णक पर्णहरित-a को 'प्रकाशीय-ऑक्सीकरण' (Photo-oxidation) से बचाते हैं।

5. पर्णहरित (Chlorophyll) अणु की 'टैडपोल संरचना' का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

विलस्टैटर और स्टॉल (1913) के अनुसार पर्णहरित अणु मेंढक के लार्वा (Tadpole) के समान होता है जिसके दो भाग हैं: 1. जल-रागी पोरफाइरिन शीर्ष (Porphyrin Head, 15×15 Å): यह 4 पायरोल वलयों से बना चपटा शीर्ष है जिसके केंद्र में एक अन-आयनिक मैग्नीशियम परमाणु (Mg) 4 नाइट्रोजनों से जुड़ा रहता है। 2. वसा-रागी फाइटोल पूँछ (Phytol Tail, 20 Å): यह चौथी पायरोल रिंग से जुड़ी 20-कार्बन लंबी हाइड्रोकार्बन शृंखला (C20H39OH) है जो अणु को थाइलाकोइड की लिपिड परत में स्थिर रखती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. प्रकाश-संश्लेषी उपकरण अर्थात् हरितलवक (Chloroplast) की परा-संरचना का सचित्र वर्णन करते हुए ग्रेना, स्ट्रोमा लैमेली, स्ट्रोमा और क्वांटासोम की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

दोहरी आवरण झिल्ली, थाइलाकोइड, ग्रेना और स्ट्रोमा लैमेली की संरचना, ग्रेना (PS-I + PS-II) बनाम स्ट्रोमा लैमेली (केवल PS-I) में प्रकाश तंत्रों का वितरण, पार्क व बिगिन का क्वांटासोम मॉडल (230 Chl अणु), स्ट्रोमा में RuBisCO, cpDNA व 70S राइबोसोम तथा श्रम विभाजन का विस्तृत वर्णन करें।

2. पादपों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकाश-संश्लेषी वर्णकों (Chlorophylls, Carotenoids एवं Phycobilins) का वर्गीकरण कीजिए तथा पर्णहरित-a और पर्णहरित-b की रासायनिक संरचना एवं गुणों की विस्तृत तुलना कीजिए।

तीनों वर्णक वर्गों का विवरण, विलस्टैटर व स्टॉल की पोरफाइरिन-फाइटोल संरचना, तालिका 10.1 के अनुसार Chl-a और Chl-b की 7 बिंदुओं पर तुलना, कैरोटीन बनाम जैंथोफिल और सहायक वर्णकों से अभिक्रिया केंद्र तक ऊर्जा स्थानांतरण के प्रवाह चार्ट का वर्णन करें।

3. प्रकाश की प्रकृति, अवशोषण स्पेक्ट्रम (Absorption Spectrum) और क्रिया स्पेक्ट्रम (Action Spectrum) की व्याख्या करते हुए एंगेलमैन के ऐतिहासिक प्रयोग की विवेचना कीजिए।

PAR (400–700 nm), प्लैंक का क्वांटम ऊर्जा नियम (E = hc/λ — नीले बनाम लाल फोटॉन की ऊर्जा), Chl-a, Chl-b व कैरोटीनॉयड का अवशोषण स्पेक्ट्रम, एंगेलमैन (1882) का *Cladophora* व वायवीय जीवाणु प्रयोग और नीले प्रकाश के उच्च अवशोषण के बावजूद लाल प्रकाश में उच्च प्रकाश-संश्लेषण दर के कार्यिकीय कारण का वर्णन करें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • पर्णहरित की रासायनिक संरचना पर कार्य करने के लिए रिचर्ड विलस्टैटर को सन् 1915 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला था।
  • पृथ्वी के जीवमंडल में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन/एंजाइम 'RuBisCO' है जो हरितलवक के स्ट्रोमा में स्थित होता है।
  • सभी प्रकार के पर्णहरित अणुओं में से केवल 'Chlorophyll-c' (भूरे शैवाल व डायटम में) में फाइटोल पूँछ (Phytol tail) अनुपस्थित होती है!
  • प्रकाश के अभाव में उगाए गए पौधों के पीले और लंबे होने की प्रक्रिया 'पांडुरता' (Etiolation) कहलाती है।
  • लाल शैवालों (Rhodophyceae) में पाया जाने वाला लाल वर्णक 'Phycoerythrin' समुद्र की गहराई में पहुँचने वाले नीले-हरे प्रकाश को अवशोषित करता है।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।

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