PPHYS 311 Lecture 04: जल विभव (Water Potential) और उसके घटक; सक्रिय एवं निष्क्रिय जल अवशोषण

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PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
LECTURE 04 / 32 · PPHYS 311

जल विभव (Water Potential) और उसके घटक; सक्रिय एवं निष्क्रिय जल अवशोषण

Water Potential and Its Components; Active and Passive Water Absorption

Thermodynamics of Water Potential (Ψw = Ψs + Ψp + Ψm), Apoplast-Symplast, Active vs Passive Water Absorption, Ascent of Sap

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Water Potential and Its Components; Active and Passive Water Absorption (Theory • Lecture 04)
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • स्लेटयर एवं टेलर (Slatyer & Taylor, 1960) द्वारा प्रतिपादित 'जल विभव' (Water Potential – Ψw) की ऊष्मागतिकी अवधारणा और इसके घटकों (Ψw = Ψs + Ψp + Ψm) की संख्यात्मक गणना सीखना।
  • जड़ द्वारा जल अवशोषण के अंग (Root hair zone), रेडियल पथ—एपोप्लास्ट (Apoplast), सिम्प्लास्ट (Symplast) एवं ट्रांसमेम्ब्रेन (Aquaporins)—तथा अंतस्त्वचा की कैस्पेरियन पट्टियों (Casparian strips) की भूमिका समझना।
  • क्रेमर (Kramer, 1949) और रेनर (Renner, 1912) के अनुसार सक्रिय जल अवशोषण (2–4%) बनाम निष्क्रिय जल अवशोषण (96–98%), उसे प्रभावित करने वाले कारकों और डिक्सन व जॉली (1894) के ससंजन-तनाव रसारोहण सिद्धांत का अध्ययन करना।

प्रस्तावना · Introduction

आधुनिक पादप कार्यिकी में पुराने 'DPD' शब्द के स्थान पर सन् 1960 में स्लेटयर एवं टेलर (R.O. Slatyer & S.A. Taylor) द्वारा प्रस्तुत ऊष्मागतिकी आधारित शब्द 'जल विभव' (Water Potential, ग्रीक प्रतीक साई 'Ψ' या 'Ψw') को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया गया है। मृदा से लेकर जड़, तने, पत्ती और वायुमंडल तक जल की संपूर्ण यात्रा 'मृदा-पादप-वायुमंडल सातत्य' (Soil-Plant-Atmosphere Continuum – SPAC) में केवल एक ही नियम से चलती है—जल सदैव उच्च जल विभव (कम ऋणात्मक मान, जैसे मृदा: −0.1 MPa) से निम्न जल विभव (अधिक ऋणात्मक मान, जैसे वायुमंडल: −50 MPa) की ओर प्रवाहित होता है!

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

जल विभव (Water Potential – Ψw; Slatyer & Taylor, 1960)

मानक ताप और वायुमंडलीय दाब पर 'शुद्ध जल के रासायनिक विभव (मुक्त ऊर्जा)' और 'किसी तंत्र/विलयन में उपस्थित जल के रासायनिक विभव' के अंतर को जल विभव कहते हैं। मानक दाब पर शुद्ध जल का जल विभव अधिकतम अर्थात् शून्य (Ψw = 0 MPa या 0 bar) माना गया है, और किसी भी विलयन या पादप कोशिका का जल विभव सदैव ऋणात्मक (Negative) होता है!

परासरणी / विलेय विभव (Solute / Osmotic Potential – Ψs या π)

शुद्ध जल में विलेय के कण मिलाने से जल की मुक्त ऊर्जा (जल विभव) में जितनी कमी आती है, उसे विलेय विभव (Ψs) कहते हैं। यह पुराने परासरण दाब (OP) के बराबर होता है किंतु इसका चिह्न सदैव ऋणात्मक (Ψs = −OP) होता है!

दाब विभव (Pressure Potential – Ψp या P)

कोशिका के अंदर आशून दाब (Turgor pressure) के कारण जल की मुक्त ऊर्जा में होने वाली वृद्धि को दाब विभव (Ψp) कहते हैं। आशून कोशिका में यह धनात्मक (+TP), श्लथ कोशिका में शून्य (0) और जाइलम वाहिकाओं में वाष्पोत्सर्जन खिंचाव के समय ऋणात्मक (Tension) होता है।

एक्वापोरिन (Aquaporins – Peter Agre, 1992 — Nobel Prize)

कोशिका की प्लाज्मा झिल्ली और टोनोप्लास्ट में पाए जाने वाले विशिष्ट समाकलित झिल्ली प्रोटीन चैनल (Intrinsic protein water channels) जो जल के अणुओं के झिल्ली के आर-पारगमन को 10 से 100 गुना तेज कर देते हैं।

वर्गीकरण · Classification

जड़ की नोक से ऊपर की ओर के 4 क्षेत्र (Zones of Root Tip)

1. मूल गोप क्षेत्र (Root Cap Zone): जड़ के शीर्ष की रक्षा करता है।
2. विभज्योतक क्षेत्र (Meristematic Zone): तेजी से विभाजित होती कोशिकाएँ; सुविकसित जाइलम न होने से यहाँ जल अवशोषण बहुत कम होता है।
3. दीर्घन क्षेत्र (Zone of Elongation): कोशिकाएँ लंबाई में बढ़ती हैं।
4. मूलरोम / परिपक्वन क्षेत्र (Root Hair / Maturation Zone): एककोशिकीय मूलरोमों (Unicellular root hairs) की उपस्थिति और पूर्ण विकसित जाइलम वाहिकाओं के कारण अधिकतम जल अवशोषण (95%+) इसी क्षेत्र से होता है!

मूलरोम से जाइलम तक जल के रेडियल गमन के 3 पथ (Münch, 1930)

1. एपोप्लास्ट पथ (Apoplast Pathway — निर्जीव एवं सबसे तेज पथ): कोशिका भित्तियों और अंतराकोशिकीय स्थानों के माध्यम से बिना किसी जीवित झिल्ली को पार किए जल का संचलन; किंतु यह पथ अंतस्त्वचा (Endodermis) की 'कैस्पेरियन पट्टियों' (सुबेरिन व लिग्निन युक्त अपारगम्य पट्टी) पर रुक जाता है!
2. सिम्प्लास्ट पथ (Symplast Pathway — सजीव पथ): जीवित कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य और उन्हें जोड़ने वाले सूक्ष्म तंतुओं 'प्लाज्मोडेस्मेटा' (Plasmodesmata) के माध्यम से जल का संचलन।
3. ट्रांसमेम्ब्रेन / रिक्तिकीय पथ (Transmembrane / Vacuolar Pathway): एक्वापोरिन चैनलों के माध्यम से एक कोशिका की प्लाज्मा झिल्ली और टोनोप्लास्ट को पार करते हुए संचलन।

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • जल विभव (Ψw) और पुराने DPD का सीधा गणितीय संबंध: चूँकि Ψw = Ψs + Ψp होता है (जहाँ पादप कोशिका में मैट्रिक विभव Ψm नगण्य होता है), और Ψs = −OP तथा Ψp = +TP है, इसलिए: Ψw = −OP + TP = −(OP − TP) = −DPD! अर्थात् जल विभव संख्यात्मक रूप से DPD के बराबर होता है किंतु उसका चिह्न ऋणात्मक होता है!
  • डिक्सन एवं जॉली (Dixon & Joly, 1894) का 'ससंजन-तनाव एवं वाष्पोत्सर्जन खिंचाव सिद्धांत' (Cohesion-Tension & Transpiration Pull Theory of Ascent of Sap): यह 100 मीटर ऊँचे वृक्षों तक रसारोहण (Ascent of sap) को समझाने वाला सर्वमान्य सिद्धांत है, जिसके 3 आधार हैं: (1) जाइलम वाहिकाओं में जल के अणुओं के बीच प्रबल ससंजन बल (Cohesion — 45 से 200 atm तक!) और भित्ति से आसंजन (Adhesion) से बना अटूट जल स्तंभ, (2) पत्तियों के मीसोफिल से वाष्पोत्सर्जन होने पर उत्पन्न ऋणात्मक जल विभव / तनाव (Transpiration pull), और (3) इस खिंचाव का जड़ तक संचरण।

कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics

1. Water Potential (Ψw) and Its Components: Ψs, Ψp, Ψm & Ψg (जल विभव एवं उसके घटक)

Soil-Plant-Atmosphere Continuum (SPAC)

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Soil-Plant-Atmosphere Continuum (SPAC)

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रस्तावक: स्लेटयर एवं टेलर (Slatyer & Taylor, 1960) | मापन की इकाई: मेगापास्कल (MPa) या बार (bar) [1 MPa = 10 bars ≈ 9.87 atm]।

🌱 कार्यिकीय महत्व: जल विभव यह सटीक रूप से बताता है कि मृदा से जड़ में और जड़ से पत्ती तक जल किस दिशा में और कितनी गति से बहेगा।

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
जल विभव का पूर्ण समीकरण: Ψw = Ψs + Ψp + Ψm + Ψg
• 1. विलेय / परासरणी विभव (Solute Potential – Ψs): सदैव ऋणात्मक (< 0); शुद्ध जल में Ψs = 0 होता है। विलेय मिलाने पर यह घटता (अधिक ऋणात्मक होता) है।
• 2. दाब विभव (Pressure Potential – Ψp): आशून कोशिका में धनात्मक (> 0), श्लथ कोशिका में शून्य (0) और जाइलम वाहिका में ऋणात्मक (< 0)।
• 3. आधात्री / मैट्रिक विभव (Matric Potential – Ψm): शुष्क बीजों, कोशिका भित्ति और असंतृप्त मृदा के कोलाइडल कणों की सतह द्वारा जल को बांधने (अधिशोषण) से उत्पन्न ऋणात्मक विभव। सूखे बीजों और सूखी मिट्टी में Ψm अत्यंत महत्वपूर्ण (अत्यधिक ऋणात्मक) होता है, किंतु जलयोजित पादप कोशिका की रिक्तिका में Ψm नगण्य (≈ 0) होता है!
• 4. गुरुत्वीय विभव (Gravitational Potential – Ψg): यह प्रति 10 मीटर ऊँचाई पर मात्र 0.1 MPa होता है, अतः सामान्य कृषि फसलों (1–3 मीटर ऊँचाई) में नगण्य माना जाता है।

अतः एक सामान्य पादप कोशिका के लिए कार्यशील सूत्र है: Ψw = Ψs + Ψp

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): SPAC में जल विभव प्रवणता (Water Potential Gradient): नम मृदा (Ψw = −0.03 से −0.1 MPa) ──► जड़ मूलरोम (−0.3 MPa) ──► तना जाइलम (−0.6 MPa) ──► पत्ती मीसोफिल (−1.0 से −1.5 MPa) ──► बाह्य वायुमंडल (50% RH पर Ψw = −95 MPa!)। चूँकि प्रत्येक कदम पर जल विभव क्रमशः अधिक ऋणात्मक (कम) होता जाता है, इसलिए जल बिना ऊर्जा खर्च किए स्वतः ऊपर चढ़ता रहता है!

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): जल विभव मापने के आधुनिक यंत्र: (1) शोलैंडर प्रेशर चैंबर / प्रेशर बम (Scholander Pressure Chamber, 1965), (2) थर्मोकपल साइक्रोमीटर (Thermocouple Psychrometer), एवं (3) शारदाकोव की डाई विधि (Shardakov's dye method)।

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): मृदा में दो प्रमुख जल स्थिरांक: 1. क्षेत्र क्षमता (Field Capacity – FC: जहाँ Ψw = −0.01 से −0.033 MPa या −1/3 bar) और 2. स्थायी म्लानि बिंदु (Permanent Wilting Point – PWP; Briggs & Shantz, 1912 सूरजमुखी को सूचक पौधा मानकर: जहाँ Ψw = −1.5 MPa या −15 bars)! FC और PWP के बीच का जल ही पौधों के लिए 'उपलब्ध जल' (Available Water) होता है।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Pure water Ψw = 0 (Maximum) + पादप कोशिका में Ψw = Ψs + Ψp (सदैव ऋणात्मक) + 1 MPa = 10 bars + Field Capacity = −0.033 MPa (−1/3 bar) + Permanent Wilting Point (PWP) = −1.5 MPa (−15 bars; Indicator plant: Sunflower)।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

जब मृदा का जल विभव −1.5 MPa (−15 bar) से भी नीचे चला जाता है, तो पौधे की जड़ें मिट्टी से पानी नहीं खींच पातीं और आर्द्र कक्ष में रखने पर भी पौधा अपनी म्लानि से उबर नहीं पाता (Permanent wilting)।

2. Active and Passive Water Absorption & Factors Affecting It (सक्रिय एवं निष्क्रिय जल अवशोषण तथा प्रभावित करने वाले कारक)

Root System & Transpiring Shoot

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Root System & Transpiring Shoot

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: वर्गीकरण प्रस्तावक: रेनर (Renner, 1912–1915) एवं क्रेमर (P.J. Kramer, 1949)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: पौधों द्वारा कुल जल अवशोषण का 96% से 98% भाग 'निष्क्रिय अवशोषण' (Passive absorption) द्वारा और मात्र 2% से 4% भाग ही 'सक्रिय अवशोषण' (Active absorption) द्वारा होता है!

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. निष्क्रिय जल अवशोषण (Passive Water Absorption — 96–98% of total water uptake):
• इसमें जल अवशोषण का प्रेरक बल जड़ में न होकर पौधे के ऊपरी वायवीय भाग (वाष्पोत्सर्जन करती पत्तियों — Transpiring shoot) में उत्पन्न होता है!
• इसमें जड़ की कोशिकाएँ कोई उपापचयी ऊर्जा (ATP) खर्च नहीं करतीं, बल्कि वे केवल एक निष्क्रिय अवशोषक सतह (Passive absorbing surface) का काम करती हैं; जल जड़ के माध्यम से ऊपर से खींचा जाता है ('Water is absorbed THROUGH the roots, not BY the roots' — Kramer)।
• यह दिन के समय जब वाष्पोत्सर्जन तेज होता है तब तीव्र गति से और मुख्यतः 'एपोप्लास्ट पथ' से होता है (यहाँ तक कि यदि पौधे की जड़ें काट दी जाएँ या उबालकर मार दी जाएँ, तब भी कटा तना पानी खींचता रहता है!)।

2. सक्रिय जल अवशोषण (Active Water Absorption — मात्र 2–4%):
• यह रात या भोर के समय जब वायुमंडल में आर्द्रता अधिक हो और वाष्पोत्सर्जन लगभग शून्य हो तथा मिट्टी में पर्याप्त नमी हो, तब जड़ की जीवित कोशिकाओं की अपनी उपापचयी ऊर्जा (श्वसन से प्राप्त ATP) खर्च करके होता है।
• इसके दो प्रकार हैं: (a) परासरणीय सक्रिय अवशोषण (Osmotic Active Theory — Atkins, 1916 & Priestley, 1920): जड़ की कोशिकाएँ श्वसन ऊर्जा से जाइलम वाहिकाओं में खनिज लवण पंप करती हैं जिससे जाइलम का परासरण दाब (OP) बढ़ जाता है और पानी परासरण से अंदर खिंचकर 'मूल दाब' (Root pressure: 1–2 atm) उत्पन्न करता है। (b) गैर-परासरणीय सक्रिय अवशोषण (Non-osmotic Theory — Thimann, 1951 & Kramer): श्वसन ऊर्जा के सीधे उपयोग से सांद्रता प्रवणता के विपरीत जल का अवशोषण।

3. जल अवशोषण को प्रभावित करने वाले 4 बाह्य कारक:
• (i) उपलब्ध मृदा जल (FC से PWP के बीच सर्वोत्तम; जलभराव/Waterlogging में ऑक्सीजन की कमी से जड़ में अवायवीय श्वसन व CO2 संचय होने से एक्वापोरिन बंद हो जाते हैं और भरी पानी की खेत में भी पौधा मुरझा जाता है जिसे 'Physiological Drought / कार्यिकीय सूखा' कहते हैं!)।
• (ii) मृदा तापमान: 20°C से 30°C सर्वोत्तम; < 5–10°C ठंडी मिट्टी में जल की श्यानता बढ़ने व झिल्ली पारगम्यता घटने से अवशोषण रुक जाता है।
• (iii) मृदा वायुसंचार (Soil Aeration) एवं (iv) मृदा विलयन की सांद्रता (लवणीय मिट्टी में कम अवशोषण)।

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): कटे हुए तने के ठूँठ से मूल दाब के कारण रस बाहर रिसने को 'रसस्राव' (Bleeding / Exudation — जैसे ताड़ी के वृक्ष व अंगूर में) कहते हैं।

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): जिम्नोस्पर्म (शंकुधारी वृक्षों जैसे चीड़/Pinus) में मूल दाब (Root pressure) कभी विकसित नहीं होता और उनमें मूलरोमों के स्थान पर 'माइकोराइजा' (Mycorrhiza) कवक सहजीवन से जल अवशोषण होता है!

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): अंतस्त्वचा (Endodermis) की कैस्पेरियन पट्टियों के बीच प्रोटोजाइलम के ठीक सामने कुछ पतली भित्ति वाली बिना सुबेरिन की कोशिकाएँ होती हैं जिन्हें 'मार्ग कोशिकाएँ' (Passage cells) कहते हैं जो जल को जाइलम में जाने देती हैं।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Passive absorption = 96–98% (Driven by transpiration pull in shoot, no ATP needed) बनाम Active absorption = 2–4% (Driven by root respiration/ATP at night, creates Root Pressure 1–2 atm) + Waterlogged या Cold/Saline soil में मुरझाना = 'Physiological Drought' + Gymnosperms में Root pressure अनुपस्थित।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

खेत में जलभराव होने पर तुरंत जल निकास (Drainage) करना चाहिए, अन्यथा जड़ में CO2 बढ़ने और O2 घटने से 'कार्यिकीय सूखा' (Wilting in standing water) होकर फसल पीली पड़कर सूख जाती है।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 4.1: सक्रिय जल अवशोषण (Active Absorption) बनाम निष्क्रिय जल अवशोषण (Passive Absorption) की तुलना

तुलना का आधारसक्रिय जल अवशोषण (Active Water Absorption)निष्क्रिय जल अवशोषण (Passive Water Absorption)
कुल जल अवशोषण में योगदानअत्यंत कम (मात्र 2% से 4%)सर्वाधिक (96% से 98%!)
प्रेरक बल की उत्पत्ति (Origin of Force)जड़ की जीवित कोशिकाओं के अंदर उत्पन्न होता हैपौधे के वायवीय भाग (वाष्पोत्सर्जन करती पत्तियों) में उत्पन्न होता है
उपापचयी ऊर्जा (ATP) की आवश्यकताजड़ के श्वसन से प्राप्त ATP ऊर्जा अनिवार्य हैकिसी उपापचयी ऊर्जा (ATP) की आवश्यकता नहीं (सौर ताप से चालित)
जाइलम में जल की स्थितिधनात्मक द्रवस्थैतिक दाब ('Root pressure' 1–2 atm) बनता हैऋणात्मक दाब / तनाव (Tension / Pull) रहता है
मुख्य समय एवं पथरात्रि व प्रातःकाल (जब वाष्पोत्सर्जन कम हो); सिम्प्लास्ट पथदिन के समय (जब वाष्पोत्सर्जन तेज हो); मुख्यतः एपोप्लास्ट पथ
श्वसन विष (KCN) या ठंड का प्रभावश्वसन रुकते ही तुरंत बंद हो जाता हैश्वसन रुकने या जड़ मरने पर भी जारी रहता है

तालिका 4.2: शास्त्रीय DPD शब्दावली बनाम आधुनिक जल विभव (Water Potential) शब्दावली की तुलना

शास्त्रीय शब्द (Meyer, 1938)आधुनिक शब्द (Slatyer & Taylor, 1960)प्रतीक एवं चिह्नपूर्ण आशून कोशिका में मानश्लथ कोशिका में मान
विसरण दाब न्यूनता (DPD / SP)जल विभव (Water Potential)Ψw (सदैव ऋणात्मक या 0)Ψw = 0 MPaΨw = Ψs (अधिकतम ऋणात्मक)
परासरण दाब (Osmotic Pressure – OP)विलेय विभव (Solute Potential)Ψs (सदैव ऋणात्मक: −OP)Ψs = −ΨpΨs = Ψw
आशून दाब (Turgor Pressure – TP)दाब विभव (Pressure Potential)Ψp (आशून में +, जाइलम में −)Ψp = −Ψs (अधिकतम +)Ψp = 0 MPa

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. जल विभव (Ψw = Ψs + Ψp) की संख्यात्मक गणना एवं दो कोशिकाओं के बीच जल प्रवाह की दिशा

Ψw = Ψs + Ψp (जहाँ शुद्ध जल का Ψw = 0 MPa; जल सदैव उच्च/कम ऋणात्मक Ψw से निम्न/अधिक ऋणात्मक Ψw की ओर जाता है)

उदाहरण: मान लीजिए दो सटी हुई पादप कोशिकाओं में:
• कोशिका-A: विलेय विभव (Ψs) = −1.2 MPa एवं दाब विभव (Ψp) = +0.5 MPa
• कोशिका-B: विलेय विभव (Ψs) = −1.8 MPa एवं दाब विभव (Ψp) = +0.6 MPa
गणना:
• कोशिका-A का जल विभव (Ψw_A) = −1.2 + 0.5 = −0.7 MPa
• कोशिका-B का जल विभव (Ψw_B) = −1.8 + 0.6 = −1.2 MPa
निष्कर्ष: चूँकि −0.7 MPa संख्या रेखा पर −1.2 MPa से बड़ा (उच्च जल विभव / कम ऋणात्मक) है, इसलिए जल कोशिका-A (−0.7 MPa) से कोशिका-B (−1.2 MPa) की ओर प्रवाहित होगा!

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 04: जल विभव (Water Potential) एवं सक्रिय व निष्क्रिय जल अवशोषण]
├── 1. जल विभव एवं उसके घटक (Water Potential — Slatyer & Taylor, 1960)
│ ├── शुद्ध जल का Ψw = 0 MPa (अधिकतम); विलयन व कोशिका का Ψw सदैव ऋणात्मक | 1 MPa = 10 bars
│ ├── सूत्र: Ψw = Ψs (विलेय विभव: −OP) + Ψp (दाब विभव: +TP) + Ψm (मैट्रिक विभव: सूखे बीज/मृदा में मुख्य)
│ └── प्रवाह नियम: जल हमेशा उच्च Ψw (कम ऋणात्मक, जैसे −0.2 MPa) से निम्न Ψw (अधिक ऋणात्मक, जैसे −1.0 MPa) की ओर जाता है
├── 2. जड़ में जल अवशोषण का पथ (Radial Pathway in Root)
│ ├── क्षेत्र: मूलरोम क्षेत्र (Root hair zone — सर्वोच्च अवशोषण) | झिल्ली चैनल: Aquaporins (Peter Agre)
│ ├── पथ: मूलरोम → प्रांतस्था (Cortex) → अंतस्त्वचा (Endodermis: Casparian strips + Passage cells) → परिरंभ → जाइलम
│ └── 3 मार्ग (Münch 1930): 1. Apoplast (निर्जीव भित्ति — सबसे तेज), 2. Symplast (Plasmodesmata), 3. Transmembrane
├── 3. सक्रिय बनाम निष्क्रिय जल अवशोषण (Renner & Kramer)
│ ├── निष्क्रिय अवशोषण (96–98%): पत्तियों के वाष्पोत्सर्जन खिंचाव से चालित; ATP नहीं लगता ('Through the roots')
│ └── सक्रिय अवशोषण (2–4%): रात में जड़ के श्वसन/ATP से चालित; जाइलम में धनात्मक 'मूल दाब' (Root pressure 1–2 atm) बनाता है
└── 4. मृदा जल स्थिरांक एवं रसारोहण (Soil Constants & Ascent of Sap)
├── Field Capacity = −0.033 MPa (−1/3 bar) | Permanent Wilting Point (PWP) = −1.5 MPa (−15 bar; सूरजमुखी सूचक)
├── कार्यिकीय सूखा (Physiological drought): जलभराव (O2 कमी/CO2 अधिकता), ठंडी (<10°C) या लवणीय मिट्टी में मुरझाना
└── रसारोहण: डिक्सन एवं जॉली (1894) का 'ससंजन-तनाव एवं वाष्पोत्सर्जन खिंचाव सिद्धांत' (सर्वमान्य)

प्रवाह चित्र · Flowchart

[मृदा से जाइलम तक जल का रेडियल गमन एवं अंतस्त्वचा की 'कैस्पेरियन पट्टी' की भूमिका]
[मृदा विलयन (Ψw = −0.05 MPa)]
↓ (परासरण एवं अंतःशोषण)
[एककोशिकीय मूलरोम (Root Hair — Epidermis / Epiblema)]
↓
【प्रांतस्था (Cortex) में दो समानांतर पथ】
├──► पथ A: एपोप्लास्ट पथ (Apoplast — निर्जीव कोशिका भित्तियों से तीव्र प्रवाह)
│ ↓ (अंतस्त्वचा / Endodermis की 'कैस्पेरियन पट्टी' — Suberin पट्टी द्वारा एपोप्लास्ट अवरुद्ध!)
│ └──► जल को बाध्य होकर जीवित झिल्ली (Symplast / Passage cells) में प्रवेश करना पड़ता है!
│
└──► पथ B: सिम्प्लास्ट पथ (Symplast — जीवद्रव्य एवं Plasmodesmata से प्रवाह)
↓
[अंतस्त्वचा की मार्ग कोशिकाएँ (Passage Cells) ──► परिरंभ (Pericycle) ──► प्रोटोजाइलम एवं मेटाजाइलम वाहिकाएँ]
↓ (डिक्सन व जॉली का ससंजन-तनाव वाष्पोत्सर्जन खिंचाव)
[तने से होते हुए पत्तियों तक रसारोहण (Ascent of Sap)]

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • संख्यात्मक प्रश्नों के लिए स्वर्णिम नियम: ऋणात्मक संख्याओं में जो संख्या छोटी दिखती है (जैसे −0.3 MPa), वह वास्तव में बड़ी (उच्च जल विभव) होती है; इसलिए जल हमेशा −0.3 MPa से −0.8 MPa की ओर (कम ऋणात्मक से अधिक ऋणात्मक की ओर) बहता है!
  • अंतस्त्वचा (Endodermis) की अरीय और अनुप्रस्थ भित्तियों पर पाई जाने वाली जल-अपारगम्य 'कैस्पेरियन पट्टियाँ' (Casparian strips — कैस्पेरी, 1865) किस पदार्थ की बनी होती हैं? उत्तर: मुख्यतः सुबेरिन (Suberin) और लिग्निन की।
  • 'कार्यिकीय सूखा' (Physiological Drought) क्या है? जब मिट्टी में पानी तो भरपूर हो (जैसे जलभराव/बाढ़ वाले खेत में, या बहुत ठंडी/बर्फीली मिट्टी में, या अत्यधिक लवणीय मिट्टी में), फिर भी पौधे की जड़ें उस पानी को अवशोषित न कर पाएँ!

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • Water Potential (Ψw) शब्द Slatyer & Taylor (1960) ने दिया; मानक दाब पर शुद्ध जल का Ψw = 0 MPa होता है।
  • पादप कोशिका के लिए Ψw = Ψs + Ψp (और सूखे बीज व मृदा के लिए Ψw = Ψm + Ψs)।
  • निष्क्रिय जल अवशोषण = कुल अवशोषण का 96–98% (वाष्पोत्सर्जन खिंचाव से); सक्रिय अवशोषण = मात्र 2–4% (मूल दाब से)।
  • स्थायी म्लानि बिंदु (PWP) पर मृदा जल विभव = −1.5 MPa (−15 bars); इसका सूचक पौधा 'सूरजमुखी' (Sunflower) है।
  • डिक्सन एवं जॉली (Dixon & Joly, 1894): रसारोहण का सर्वमान्य 'Cohesion-Tension & Transpiration Pull Theory' दिया।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. मानक ताप एवं वायुमंडलीय दाब पर 'शुद्ध जल' (Pure free water) का जल विभव (Water Potential – Ψw) कितना होता है?

  • (A) −15 बार
  • (B) शून्य (Zero — 0 MPa या 0 bar, जो कि अधिकतम संभव मान है)
  • (C) +100 MPa
  • (D) −1.0 MPa
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — शुद्ध मुक्त जल का जल विभव अधिकतम अर्थात् शून्य (0 MPa) होता है और विलेय मिलाने पर यह सदैव ऋणात्मक हो जाता है।

2. यदि कोशिका-A का जल विभव (Ψw) = −0.4 MPa है और पास स्थित कोशिका-B का जल विभव (Ψw) = −0.9 MPa है, तो जल का संचलन किस दिशा में होगा?

  • (A) कोशिका-A (−0.4 MPa) से कोशिका-B (−0.9 MPa) की ओर
  • (B) कोशिका-B से कोशिका-A की ओर
  • (C) दोनों के बीच कोई प्रवाह नहीं होगा
  • (D) दोनों से बाहर की ओर
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — जल सदैव उच्च जल विभव (कम ऋणात्मक: −0.4 MPa) से निम्न जल विभव (अधिक ऋणात्मक: −0.9 MPa) की ओर गति करता है।

3. पौधों द्वारा अपने जीवनकाल में कुल अवशोषित जल का 96% से 98% भाग किस विधि द्वारा अवशोषित किया जाता है?

  • (A) सक्रिय परासरणीय अवशोषण द्वारा
  • (B) सक्रिय गैर-परासरणीय अवशोषण द्वारा
  • (C) निष्क्रिय जल अवशोषण (Passive Water Absorption — पत्तियों के वाष्पोत्सर्जन खिंचाव द्वारा)
  • (D) केवल मूल गोप द्वारा
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — क्रेमर (1949) के अनुसार 96–98% जल पत्तियों में वाष्पोत्सर्जन से उत्पन्न तनाव के कारण जड़ों के माध्यम से निष्क्रिय रूप से खिंचता है।

4. जड़ की अंतस्त्वचा (Endodermis) में एपोप्लास्ट पथ को रोककर जल को जीवित झिल्ली से गुजरने के लिए बाध्य करने वाली 'कैस्पेरियन पट्टियाँ' (Casparian strips) मुख्यतः किस जल-रोधी पदार्थ की बनी होती हैं?

  • (A) केवल स्टार्च की
  • (B) सुबेरिन (Suberin) एवं लिग्निन की
  • (C) प्रोटीन की
  • (D) काइटिन की
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — कैस्पेरियन पट्टियों में मोमी पदार्थ 'सुबेरिन' (Suberin) का जमाव होता है जो जल के लिए अपारगम्य होता है।

5. स्थायी म्लानि बिंदु (Permanent Wilting Point – PWP) पर मृदा का जल विभव कितना होता है और इसके निर्धारण के लिए ब्रिग्स एवं शैंट्ज (1912) ने किस सूचक पौधे का प्रयोग किया था?

  • (A) −0.033 MPa, गेहूँ
  • (B) −1.5 MPa (−15 bars), सूरजमुखी (Sunflower – Helianthus annuus)
  • (C) 0 MPa, धान
  • (D) −50 MPa, नागफनी
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — PWP पर मृदा जल विभव −1.5 MPa (−15 bars) होता है और बौना सूरजमुखी इसका मानक सूचक पौधा है।

6. जब खेत में अधिक पानी भर जाने (Waterlogging) के कारण जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिलती और पानी में खड़े रहने के बावजूद पौधा मुरझा जाता है, तो इस घटना को क्या कहते हैं?

  • (A) वायुमंडलीय सूखा
  • (B) कार्यिकीय सूखा (Physiological Drought)
  • (C) स्थायी सूखा
  • (D) बिंदुस्राव
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — पानी की भौतिक उपस्थिति के बावजूद अवायवीय स्थिति, उच्च CO2, ठंड या लवणता के कारण जड़ द्वारा पानी न सोख पाना 'कार्यिकीय सूखा' कहलाता है।

7. रसारोहण (Ascent of Sap) को समझाने वाला सर्वमान्य 'ससंजन-तनाव एवं वाष्पोत्सर्जन खिंचाव सिद्धांत' (Cohesion-Tension Theory) सन् 1894 में किसने प्रतिपादित किया था?

  • (A) डिक्सन एवं जॉली (H.H. Dixon & J. Joly, 1894)
  • (B) सर जे.सी. बोस (1923)
  • (C) प्रीस्टले (1920)
  • (D) सैक्स (1874)
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — डिक्सन एवं जॉली (1894) ने जल के ससंजन बल और वाष्पोत्सर्जन खिंचाव पर आधारित सर्वमान्य रसारोहण सिद्धांत दिया।

8. यदि किसी पादप कोशिका का विलेय विभव (Ψs) = −12 बार है और उसका दाब विभव (Ψp) = +5 बार है, तो उस कोशिका का जल विभव (Ψw) कितना होगा?

  • (A) +17 बार
  • (B) −17 बार
  • (C) −7 बार (−7 bars)
  • (D) +7 बार
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — सूत्र Ψw = Ψs + Ψp के अनुसार: Ψw = −12 + 5 = −7 बार।

9. जड़ की कोशिकाओं में प्लाज्मा झिल्ली के आर-पार जल के तीव्र परिवहन के लिए जिम्मेदार विशिष्ट जल-चैनल प्रोटीनों को क्या कहते हैं?

  • (A) साइटोक्रोम
  • (B) एक्वापोरिन (Aquaporins)
  • (C) लेगहीमोग्लोबिन
  • (D) फाइटोक्रोम
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — पीटर एग्रे द्वारा खोजे गए 'Aquaporins' झिल्ली में जल के चयनात्मक चैनल प्रोटीन हैं।

10. जड़ के किस क्षेत्र से जल और खनिज लवणों का अधिकतम अवशोषण होता है?

  • (A) मूल गोप क्षेत्र से
  • (B) विभज्योतक क्षेत्र से
  • (C) मूलरोम क्षेत्र (Root Hair Zone / Zone of Maturation) से
  • (D) पुरानी कॉर्क युक्त जड़ से
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — मूलरोम क्षेत्र में करोड़ों एककोशिकीय मूलरोम सतह क्षेत्रफल को कई गुना बढ़ा देते हैं और वहीं जाइलम पूर्ण विकसित होता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. सन् 1960 में 'Water Potential' (जल विभव) शब्द और इसकी ऊष्मागतिकी अवधारणा किसने दी थी?

आर.ओ. स्लेटयर एवं एस.ए. टेलर (Slatyer & Taylor, 1960) ने।

2. 1 मेगापास्कल (1 MPa) में कितने बार (bars) और कितने वायुमंडल (atm) होते हैं?

1 MPa = 10 bars ≈ 9.87 atm।

3. अजीवित कोशिका भित्तियों से होने वाले जल पथ 'Apoplast' और जीवद्रव्य तंतुओं से होने वाले पथ 'Symplast' की अवधारणा किसने दी थी?

अर्न्स्ट मुंच (E. Münch, 1930) ने।

4. सूखे बीजों (Dry seeds) में जल विभव का कौन सा घटक सबसे प्रमुख होता है?

आधात्री / मैट्रिक विभव (Matric potential – Ψm)।

5. पौधों में जल विभव (Ψw) मापने के लिए सर्वाधिक प्रयुक्त पोर्टेबल उपकरण कौन सा है?

शोलैंडर प्रेशर चैंबर / प्रेशर बम (Scholander Pressure Chamber) एवं थर्मोकपल साइक्रोमीटर।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. जल विभव (Water Potential – Ψw) क्या है? इसके तीनों प्रमुख घटकों (Ψs, Ψp एवं Ψm) को समझाइए।

शुद्ध जल और किसी तंत्र में उपस्थित जल की प्रति मोल मुक्त ऊर्जा के अंतर को जल विभव (Ψw) कहते हैं। शुद्ध जल का Ψw = 0 होता है। इसके घटक हैं: 1. विलेय विभव (Ψs): विलेय कणों के कारण मुक्त ऊर्जा में कमी (सदैव ऋणात्मक)। 2. दाब विभव (Ψp): आशून दाब के कारण ऊर्जा में वृद्धि (आशून कोशिका में धनात्मक, श्लथ में 0, जाइलम में ऋणात्मक)। 3. मैट्रिक विभव (Ψm): कोलाइडल सतह द्वारा जल के अधिशोषण से उत्पन्न ऋणात्मक विभव (सूखे बीज व मृदा में मुख्य; रिक्तिका युक्त कोशिका में नगण्य)। अतः Ψw = Ψs + Ψp।

2. जड़ में जल के रेडियल गमन के 'एपोप्लास्ट' (Apoplast) और 'सिम्प्लास्ट' (Symplast) पथों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

एपोप्लास्ट पथ में जल जीवित झिल्ली को पार किए बिना केवल निर्जीव कोशिका भित्तियों और अंतराकोशिकीय स्थानों से होकर बहुत तेजी से बहता है, किंतु यह अंतस्त्वचा की सुबेरिन युक्त कैस्पेरियन पट्टियों पर रुक जाता है। इसके विपरीत, सिम्प्लास्ट पथ में जल जीवित कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य और उन्हें जोड़ने वाले प्लाज्मोडेस्मेटा से होकर अपेक्षाकृत धीमी गति से किंतु चयनात्मक नियंत्रण के साथ जाइलम तक जाता है।

3. सक्रिय (Active) और निष्क्रिय (Passive) जल अवशोषण में चार मुख्य अंतर लिखिए।

1. निष्क्रिय अवशोषण से कुल जल का 96–98% भाग सोखा जाता है, जबकि सक्रिय अवशोषण से मात्र 2–4%। 2. निष्क्रिय अवशोषण का बल पत्तियों में वाष्पोत्सर्जन से पैदा होता है, जबकि सक्रिय अवशोषण का बल जड़ की कोशिकाओं में पैदा होता है। 3. निष्क्रिय अवशोषण में कोई ATP खर्च नहीं होता, जबकि सक्रिय में जड़ के श्वसन से ATP खर्च होता है। 4. निष्क्रिय अवशोषण में जाइलम में ऋणात्मक तनाव रहता है, जबकि सक्रिय में धनात्मक मूल दाब (Root pressure) बनता है।

4. 'कार्यिकीय सूखा' (Physiological Drought) क्या है और यह किन परिस्थितियों में उत्पन्न होता है?

जब मृदा में भौतिक रूप से पर्याप्त जल उपस्थित होने के बावजूद पौधे की जड़ें उस जल को अवशोषित करने में असमर्थ रहती हैं और पौधा मुरझा जाता है, तो इसे 'कार्यिकीय सूखा' कहते हैं। यह मुख्यतः 3 परिस्थितियों में होता है: 1. जलभराव (Waterlogging) में O2 की कमी व CO2 की अधिकता से जड़ की पारगम्यता घटने पर, 2. अत्यधिक ठंडी मृदा (<5–10°C) में, और 3. अत्यधिक लवणीय मृदा (जहाँ मृदा घोल का Ψw जड़ से भी कम हो जाता है) में।

5. डिक्सन एवं जॉली के रसारोहण के 'ससंजन-तनाव सिद्धांत' (Cohesion-Tension Theory) के मुख्य बिंदु लिखिए।

डिक्सन एवं जॉली (1894) के अनुसार: 1. जाइलम वाहिकाओं में जल के अणु आपसी हाइड्रोजन आबंध (Cohesion) और भित्ति से आसंजन (Adhesion) के कारण जड़ से पत्ती तक एक अटूट जल स्तंभ बनाते हैं। 2. पत्तियों से वाष्पोत्सर्जन होने पर मीसोफिल कोशिकाओं का जल विभव अत्यधिक ऋणात्मक हो जाता है। 3. इससे जाइलम के जल स्तंभ पर ऊपर की ओर एक शक्तिशाली 'वाष्पोत्सर्जन खिंचाव' (Transpiration pull) पड़ता है जो पानी को 100 मीटर ऊँचे वृक्ष की चोटी तक खींच लेता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. जल विभव (Water Potential) की ऊष्मागतिकी अवधारणा का सविस्तर वर्णन करते हुए इसके घटकों (Ψs, Ψp, Ψm) की व्याख्या कीजिए तथा मृदा-पादप-वायुमंडल सातत्य (SPAC) में जल संचलन को संख्यात्मक उदाहरण सहित समझाइए।

स्लेटयर व टेलर (1960) की परिभाषा, समीकरण Ψw = Ψs + Ψp + Ψm + Ψg, प्रत्येक घटक का चिह्न व महत्व, पुराने DPD से तुलना (तालिका 4.2), श्लथ व आशून कोशिका में मान, SPAC में मृदा (−0.1 MPa) से वायुमंडल (−95 MPa) तक की प्रवणता और संख्यात्मक उदाहरण का विस्तृत वर्णन करें।

2. पौधों में सक्रिय एवं निष्क्रिय जल अवशोषण की क्रियाविधियों की तुलना कीजिए तथा मूलरोम से जाइलम वाहिका तक जल के रेडियल पथ (Apoplast, Symplast एवं Transmembrane) का सचित्र वर्णन कीजिए।

जड़ के चारों क्षेत्र, एपोप्लास्ट व सिम्प्लास्ट पथ तथा अंतस्त्वचा की कैस्पेरियन पट्टी व मार्ग कोशिकाओं (Passage cells) का प्रवाह चार्ट, क्रेमर व रेनर का सक्रिय (Osmotic एवं Non-osmotic) बनाम निष्क्रिय अवशोषण और दोनों की तुलना तालिका 4.1 का सविस्तर विवरण दें।

3. मृदा से जल अवशोषण को प्रभावित करने वाले बाह्य (मृदा जल, तापमान, वायुसंचार, सांद्रता) एवं आंतरिक कारकों का वर्णन कीजिए तथा रसारोहण के विभिन्न सिद्धांतों की विवेचना कीजिए।

क्षेत्र क्षमता (FC) व स्थायी म्लानि बिंदु (PWP), मृदा तापमान व वायुसंचार का प्रभाव, कार्यिकीय सूखा तथा रसारोहण के जैव सिद्धांत (बोस का स्पंदन सिद्धांत), मूल दाब सिद्धांत और डिक्सन व जॉली के भौतिक ससंजन-तनाव सिद्धांत का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • डिक्सन एवं जॉली के रसारोहण सिद्धांत में 'Cavitation / Embolism' (जाइलम में हवा के बुलबुले बनना) मुख्य अवरोध है जिसे पिट झिल्लियाँ रोकती हैं।
  • क्रेमर (Kramer) का प्रसिद्ध कथन है: 'निष्क्रिय अवशोषण में जल जड़ों के द्वारा (by the roots) नहीं, बल्कि जड़ों में से होकर (through the roots) अवशोषित होता है।'
  • एक्वापोरिन जल चैनलों की खोज के लिए पीटर एग्रे (Peter Agre) को सन् 2003 में रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला था।
  • जलभराव वाले खेत में CO2 की उच्च सांद्रता जड़ के कोशिकाद्रव्य का pH घटाकर एक्वापोरिन चैनलों को बंद (Gating of aquaporins) कर देती है।
  • जाइलम वाहिकाओं में वाष्पोत्सर्जन के समय दाब विभव (Ψp) धनात्मक न होकर ऋणात्मक (Negative tension) होता है।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।

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