PPHYS 311 Lecture 02: फसल कार्यिकी का अन्य फसल विज्ञानों (सस्य विज्ञान, पादप प्रजनन, मृदा विज्ञान आदि) से संबंध

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PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
LECTURE 02 / 32 · PPHYS 311

फसल कार्यिकी का अन्य फसल विज्ञानों (सस्य विज्ञान, पादप प्रजनन, मृदा विज्ञान आदि) से संबंध

Relationship of Crop Physiology with Other Crop Sciences

Interdisciplinary Linkages with Agronomy, GPB, Soil Science, Pathology, Entomology, Hort & Biotech

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Relationship of Crop Physiology with Other Crop Sciences (Theory • Lecture 02)
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • फसल कार्यिकी को समस्त कृषि विज्ञानों के 'केंद्रीय सेतु' (Central Bridge of Agricultural Sciences) के रूप में समझना।
  • सस्य विज्ञान (Agronomy), पादप प्रजनन एवं आनुवंशिकी (Genetics & Plant Breeding) और मृदा विज्ञान (Soil Science) के साथ फसल कार्यिकी के प्रत्यक्ष वैज्ञानिक संबंधों का विश्लेषण करना।
  • पादप संरक्षण (Pathology & Entomology), उद्यानिकी (Horticulture), कृषि मौसम विज्ञान (Agrometeorology & Crop Modeling) और जैव-प्रौद्योगिकी के साथ इसके समन्वय को सीखना।

प्रस्तावना · Introduction

कृषि में कोई भी विषय एकाकी रूप से कार्य नहीं करता। जहाँ पादप प्रजनन पौधे की 'आनुवंशिक क्षमता' (Genetic Potential 'G') तय करता है और सस्य विज्ञान व मृदा विज्ञान उसका 'बाह्य पर्यावरण व प्रबंधन' (Environment & Management 'E × M') तय करते हैं, वहीं 'फसल कार्यिकी' वह केंद्रीय कड़ी है जो यह समझाती है कि जीन (G) और पर्यावरण (E) आपस में मिलकर पौधे के अंदर किस प्रकार 'उपज' (Phenotype / Yield) में रूपांतरित होते हैं! बिना कार्यिकीय समझ के न तो सस्य क्रियाओं का वैज्ञानिक आधार स्पष्ट होता है और न ही लक्षित पादप प्रजनन संभव है।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

कार्यिकीय प्रजनन (Physiological / Trait-Based Breeding – Reynolds & Borlaug)

केवल दाने की उपज के आधार पर अंधाधुंध चयन करने के बजाय उपज के अंतर्निहित कार्यिकीय घटकों (जैसे कैनोपी तापमान डिप्रेशन CTD, पर्णहरित SPAD मान, हार्वेस्ट इंडेक्स व जल उपयोग दक्षता) को मापकर जनकों का चयन व संकरण करना।

कैनोपी तापमान डिप्रेशन (Canopy Temperature Depression – CTD)

वायुमंडल के तापमान और फसल की पत्तियों के तापमान का अंतर (CTD = T_air − T_canopy); जिस किस्म की जड़ें सूखे में भी गहराई से पानी खींचकर रंध्र खुले रखती हैं, उसकी पत्तियाँ वाष्पोत्सर्जन से ठंडी रहती हैं (उच्च धनात्मक CTD)—यह सूखा व ताप सहिष्णुता प्रजनन का सर्वोत्तम कार्यिकीय सूचकांक है!

फसल अनुकरण मॉडलिंग (Crop Simulation Modeling – DSSAT / APSIM)

फसल कार्यिकी के समीकरणों (प्रकाश-संश्लेषण, श्वसन, पर्ण विकास, जल व नत्रजन ग्रहण) को मौसम और मृदा के आँकड़ों के साथ कंप्यूटर प्रोग्राम में जोड़कर बुवाई से पहले ही फसल की उपज का पूर्वानुमान लगाना।

लॉ ऑफ द मिनिमम (Liebig's Law of the Minimum, 1840)

जस्टस वॉन लिबिग का नियम कि पौधे की वृद्धि उस समस्त पोषक तत्व से नहीं बल्कि उस एक आवश्यक तत्व या कार्यिकीय कारक से नियंत्रित होती है जो आवश्यकता की तुलना में सबसे कम (Minimum) मात्रा में उपलब्ध है।

वर्गीकरण · Classification

फसल कार्यिकी के 6 प्रमुख अंतर्विषयक स्तंभ (Six Interdisciplinary Linkages)

1. Crop Physiology + Agronomy = कैनोपी प्रबंधन, बुवाई समय, पादप ज्यामिति, सिंचाई व खरपतवारनाशी कार्यिकी।
2. Crop Physiology + Plant Breeding (GPB) = आइडियोटाइप प्रजनन, सूखा/लवणता/ताप सहिष्णुता स्क्रीनिंग, संकर ओज का कार्यिकीय आधार।
3. Crop Physiology + Soil Science = मूल-मृदा अंतरापृष्ठ (Rhizosphere), आयन अवशोषण गतिकी, पोषक उपयोग दक्षता (NUE) व कमी के लक्षण।
4. Crop Physiology + Plant Protection (Pathology & Entomology) = रोग/कीट आक्रमण से प्रकाश-संश्लेषण व संवहन की क्षति और पादप रक्षा हार्मोन (Salicylic acid & Jasmonic acid)।
5. Crop Physiology + Horticulture = फल लगना, फलों का झड़ना रोकना, अनिषेकफलन (Parthenocarpy), पकने की कार्यिकी (Climacteric vs Non-climacteric)।
6. Crop Physiology + Molecular Biology/Biotech = जीन अभिव्यक्ति से कार्यिकीय लक्षण (Phenomics) का संबंध, C4 धान एवं ट्रांसजेनिक तनाव सहिष्णुता।

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • G × E × M = Phenotype (Yield) में कार्यिकी की भूमिका: आनुवंशिकी (Genetics) पौधे को डीएनए का ब्लूप्रिंट देती है, किंतु डीएनए सीधे दाना नहीं बनाता—डीएनए से एंजाइम बनते हैं, एंजाइम उपापचयी पथ (C3/C4 चक्र, नाइट्रेट रिडक्टेज) चलाते हैं, और उन पथों से हार्मोन व शर्करा बनकर अंगों की वृद्धि और उपज बनती है। अतः जीनोटाइप से फीनोटाइप बनने का पूरा राजमार्ग 'फसल कार्यिकी' ही है!
  • सस्य क्रियाओं का कार्यिकीय तर्क (Physiological Rationale of Agronomic Practices): किसान और सस्य वैज्ञानिक जो भी क्रिया करते हैं—जैसे चने में 'निपिंग' (Nipping — शीर्ष कलिका तोड़कर ऑक्सिन की शीर्ष प्रमुखता समाप्त करना ताकि पार्श्व शाखाएँ बढ़ें), तंबाकू में 'टॉपिंग', कपास में 'पत्ती गिराना' (Defoliation), या धान में 'रोपाई की दूरी'—उन सभी के पीछे शुद्ध पादप कार्यिकी के सिद्धांत कार्य करते हैं।

कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics

1. Relationship with Agronomy, Genetics & Plant Breeding, and Soil Science (सस्य विज्ञान, पादप प्रजनन एवं मृदा विज्ञान से संबंध)

Field Crops (खाद्यान्न, दलहन, तिलहन एवं नकदी फसलें)

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Field Crops (खाद्यान्न, दलहन, तिलहन एवं नकदी फसलें)

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: मुख्य सेतु अवधारणाएँ: Canopy Architecture & LAI (Agronomy), Ideotype & Phenomics (GPB), Nutrient Uptake Kinetics & Deficiency Diagnosis (Soil Science)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: इन तीनों मूल कृषि विषयों की सभी आधुनिक सिफारिशें फसल कार्यिकी के प्रयोगों से ही निकलती हैं।

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. सस्य विज्ञान (Agronomy) के साथ संबंध:
• बुवाई का समय (Time of Sowing): दीप्तिकालिता (Photoperiodism) और बसंतीकरण (Vernalization) के कार्यिकीय ज्ञान से ही खरीफ व रबी फसलों की इष्टतम बुवाई तिथि तय होती है (जैसे देर से बोए गए गेहूँ में उच्च तापमान से दाना भरने की अवधि घटकर दाना सिकुड़ जाता है)।
• पादप घनत्व एवं ज्यामिति (Planting Geometry): पर्ण क्षेत्रफल सूचकांक (LAI) और प्रकाश विलुप्ति गुणांक (k) के आधार पर कतार-से-कतार और पौधे-से-पौधे की दूरी निर्धारित की जाती है।
• शाकनाशी कार्यिकी (Herbicide Physiology): चयनात्मक शाकनाशी (जैसे 2,4-D चौड़ी पत्ती के खरपतवारों को कैसे मारता है और गेहूँ को क्यों छोड़ देता है, या Atrazine प्रकाश-संश्लेषण के PS-II में इलेक्ट्रॉन प्रवाह को कैसे रोकता है) पूर्णतः कार्यिकीय सिद्धांत है!

2. पादप प्रजनन एवं आनुवंशिकी (Genetics & Plant Breeding – GPB) के साथ संबंध:
• आइडियोटाइप प्रजनन (Ideotype Breeding – Donald, 1968): अर्ध-बौना कद, सीधी खड़ी पत्तियाँ, कम ASI (मक्का में) और उच्च Harvest Index जैसे कार्यिकीय मानदंड प्रजनकों को चयन की दिशा देते हैं।
• उच्च-थ्रूपुट फीनोमिक्स (High-Throughput Physiological Phenotyping): इंफ्रारेड थर्मोमीटर से कैनोपी तापमान (CTD), क्लोरोफिल मीटर (SPAD-502) से पर्ण हरित और कार्बन आइसोटोप विभेदन (Δ13C) से जल उपयोग दक्षता (WUE) मापकर हजारों प्रजनन वंशक्रमों की तेजी से छँटाई की जाती है।

3. मृदा विज्ञान एवं पादप पोषण (Soil Science & Agricultural Chemistry) के साथ संबंध:
• जड़ द्वारा खनिज तत्वों का सक्रिय व निष्क्रिय अवशोषण, वाहक प्रोटीन (Ion channels & H+-ATPase pumps), नाइट्रेट स्वांगीकरण (Nitrate reductase एंजाइम) और जैविक नत्रजन स्थिरीकरण (Nitrogenase व Leghaemoglobin) कार्यिकी और मृदा विज्ञान का संयुक्त क्षेत्र हैं।
• पौधे में तत्वों की गतिशीलता (Mobility in phloem) के आधार पर यह पहचानना कि कमी के लक्षण पुरानी निचली पत्तियों (N, P, K, Mg, Mo) पर आएंगे या नई ऊपरी पत्तियों/शीर्ष कलिका (Ca, B, Fe, Mn, Cu, Zn, S) पर!

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): उर्वरक उपयोग दक्षता (Nutrient Use Efficiency – NUE) को दो कार्यिकीय भागों में बाँटा जाता है: 1. Nutrient Uptake Efficiency (जड़ द्वारा अवशोषण क्षमता) और 2. Nutrient Utilization Efficiency (अवशोषित तत्व से दाना बनाने की आंतरिक कार्यिकीय क्षमता)।

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): अम्लीय, लवणीय एवं क्षारीय मृदाओं में पौधों को होने वाली क्षति (जैसे लवणता में परासरणीय सूखा एवं Na+ विषाक्तता) का समाधान कार्यिकीय एवं मृदा वैज्ञानिक मिलकर करते हैं।

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): सस्य प्रबंधन द्वारा फसल की कैनोपी को फूल आने के समय इस प्रकार विकसित किया जाता है कि वह आपतित सौर विकिरण का >90–95% भाग ग्रहण कर ले।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Agronomy + Physiology = LAI, Planting geometry, Critical irrigation stages & Herbicide mode of action
  • GPB + Physiology = Ideotype, CTD, SPAD & Δ13C for WUE
  • Soil Science + Physiology = Ion uptake, Phloem mobility & Deficiency symptoms।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

चने में बुवाई के 35–40 दिन पर शीर्ष कलिका तुड़ाई (Nipping या TIBA @ 50–75 ppm का छिड़काव) शीर्ष प्रमुखता (Apical dominance) को तोड़कर फलियों की संख्या 25% बढ़ा देती है।

2. Relationship with Plant Protection, Horticulture, Agrometeorology & Biotechnology (पादप संरक्षण, उद्यानिकी, मौसम विज्ञान एवं जैव-प्रौद्योगिकी से संबंध)

Field, Horticultural & Plantation Crops

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Field, Horticultural & Plantation Crops

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: मुख्य सेतु अवधारणाएँ: Pathophysiology (SA/JA signaling), Post-harvest & PGR Physiology (Horticulture), Thermal Time / GDD & Crop Modeling (Agromet), Functional Genomics (Biotech)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: आधुनिक सटीक कृषि (Precision Agriculture) और संरक्षित खेती (Polyhouse farming) इन्हीं विषयों के एकीकरण पर टिकी है।

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. पादप रोग विज्ञान एवं कीट विज्ञान (Pathology & Entomology — Pathophysiology): जब कोई रोगजनक कवक/जीवाणु/विषाणु या कीट पौधे पर आक्रमण करता है, तो वह पौधे की किस कार्यिकीय प्रक्रिया को बाधित करता है? उदाहरण: उकठा रोगजनक (Fusarium / Ralstonia) जाइलम वाहिकाओं को बंद कर जल परिवहन रोकते हैं; विषाणु क्लोरोफिल नष्ट कर प्रकाश-संश्लेषण घटाते हैं; और पौधा अपनी रक्षा के लिए 'सैलिसिलिक अम्ल' (Salicylic Acid – SAR में) व 'जैस्मोनिक अम्ल' (Jasmonic Acid – कीट रक्षा में) तथा फाइटोएलेक्सिन बनाता है।

2. उद्यानिकी (Horticulture — Pomology, Olericulture & Floriculture): आम में एकांतर फलन (Alternate bearing — Paclobutrazol / Cultar द्वारा नियंत्रण), फलों में बहार उपचार (Bahar treatment by water stress), बीज-रहित फल (Parthenocarpy), कद्दू कुल में हार्मोन से लिंग परिवर्तन, कटे फूलों की शेल्फ-लाइफ बढ़ाना (Pulsing with Sucrose + 8-HQC + Silver thiosulphate) और फलों को पकाने व भंडारित करने की संपूर्ण तकनीक पादप कार्यिकी ही है।

3. कृषि मौसम विज्ञान एवं फसल मॉडलिंग (Agrometeorology): तापमान, आर्द्रता, पवन वेग और सौर विकिरण सीधे वाष्पोत्सर्जन (Penman-Monteith समीकरण) और प्रकाश-संश्लेषण को नियंत्रित करते हैं। 'Growing Degree Days (GDD / Thermal time)' और कार्यिकीय दरों के आधार पर DSSAT, InfoCrop (IARI द्वारा विकसित भारतीय फसल मॉडल!) और APSIM मॉडल काम करते हैं।

4. पादप जैव-प्रौद्योगिकी एवं आणविक जीवविज्ञान (Biotechnology): किसी जीन के क्लोन होने के बाद यह जानना कि वह जीन पौधे में क्या कार्य करता है ('Functional Genomics'), कार्यिकीय परीक्षण के बिना असंभव है (जैसे Sub1A जीन की Quiescence कार्यिकी या C4 धान में Kranz anatomy व PEPCase एंजाइम डालना)।

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): अजैविक कार्यिकीय विकार (Physiological Disorders — जो किसी कीट या रोगाणु से न होकर पोषक तत्व, ताप या नमी के असंतुलन से होते हैं): जैसे आम में ब्लैक टिप व स्पंजी ऊतक, टमाटर में ब्लॉसम एंड रॉट (Ca की कमी), फूलगोभी में व्हिपटेल (Mo की कमी) व ब्राउनिंग (B की कमी) और धान में खैरा रोग (Zn की कमी)।

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): IARI नई दिल्ली के वैज्ञानिकों (डॉ. पी.के. अग्रवाल एवं सहयोगियों) ने भारतीय फसलों के लिए 'InfoCrop' नामक स्वदेशी कार्यिकीय फसल अनुकरण मॉडल विकसित किया है।

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): पॉलीहाउस में CO2 फर्टिलाइजेशन (800–1000 ppm CO2) करके खीरा, टमाटर और गुलाब की उपज 30–40% बढ़ाई जाती है।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Pathology + Physiology = SAR (Salicylic acid) & ISR (Jasmonic acid/Ethylene) + Physiological disorders (Black tip, Blossom end rot, Khaira) + Agromet + Physiology = InfoCrop (IARI), DSSAT & APSIM crop models + Horticulture = Paclobutrazol in Mango & Pulsing in cut flowers।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

अंगूर और सेब जैसे शीतोष्ण फलों में शीत आवश्यकता पूरी न होने पर कलियों की सुषुप्तावस्था तोड़ने हेतु 'हाइड्रोजन सायनामाइड' (Dormex) का प्रयोग किया जाता है।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 2.1: विभिन्न फसल विज्ञानों की मुख्य समस्याओं के समाधान में फसल कार्यिकी का योगदान

सहयोगी कृषि विज्ञानप्रमुख क्षेत्रीय समस्याफसल कार्यिकी आधारित वैज्ञानिक समाधान
सस्य विज्ञान (Agronomy)अधिक उर्वरक देने पर गेहूँ/धान का गिरना व चने में कम शाखाएँजिबरेलिन-अवरोधक (Chlormequat / CCC) का प्रयोग एवं चने में शीर्ष कलिका निपिंग/TIBA
पादप प्रजनन (Plant Breeding)हजारों वंशक्रमों में सूखा व ताप सहिष्णु लाइनों की पहचानInfrared thermometer से CTD मापन, SPAD मीटर एवं कार्बन आइसोटोप विभेदन (Δ13C)
मृदा विज्ञान (Soil Science)क्षारीय/चूनायुक्त मृदा में Fe व Zn का अघुलनशील होना0.5% FeSO4 / ZnSO4 या कीलेटेड (Fe-EDTA) पोषक तत्वों का पर्ण छिड़काव (Foliar spray)
उद्यानिकी (Horticulture)आम में एकांतर फलन एवं कपास/आम में फल झड़नाआम में Paclobutrazol (Cultar) मृदा प्रयोग एवं फल झड़ने पर NAA (10–20 ppm) छिड़काव
पादप रोग विज्ञान (Pathology)सच्चे संक्रामक रोग और पोषण/पर्यावरणीय विकार में भ्रमकार्यिकीय विकारों (जैसे खैरा, व्हिपटेल, होलो हार्ट, ब्लैक हार्ट) का सटीक निदान व पोषक उपचार

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. कैनोपी तापमान डिप्रेशन (CTD) एवं ग्रोइंग डिग्री डेज (GDD / Thermal Time – Reaumur, 1735) की गणना

1. CTD (°C) = वायुमंडल का तापमान (T_air) − फसल कैनोपी का तापमान (T_canopy) | 2. GDD = Σ [ (T_max + T_min) / 2 ] − T_base

उदाहरण 1 (CTD): दोपहर 2 बजे हवा का तापमान (T_air) = 36°C है। गेहूँ की किस्म-A का कैनोपी तापमान 31°C है और किस्म-B का कैनोपी तापमान 35°C है:
• किस्म-A का CTD = 36 − 31 = +5.0°C (अर्थात् किस्म-A की गहरी जड़ें पानी खींचकर वाष्पोत्सर्जन से पत्तियों को 5°C ठंडा रख रही हैं—यह उच्च सूखा/ताप सहिष्णु किस्म है!)।
• किस्म-B का CTD = 36 − 35 = +1.0°C (रंध्र बंद होने से पत्ती गर्म हो गई—संवेदनशील किस्म)।
उदाहरण 2 (GDD): यदि मक्का (आधार तापमान T_base = 10°C) के किसी दिन T_max = 34°C और T_min = 22°C है, तो उस दिन का GDD = [(34 + 22)/2] − 10 = 28 − 10 = 18 डिग्री-दिवस।

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 02: फसल कार्यिकी का अन्य फसल विज्ञानों से अंतर्संबंध]
├── 1. सस्य विज्ञान (Agronomy) से संबंध
│ ├── कैनोपी प्रबंधन (LAI, पर्ण कोण, रोपाई दूरी) एवं क्रांतिक सिंचाई अवस्थाएँ (जैसे गेहूँ में CRI)
│ └── शाकनाशी कार्यिकी (2,4-D ऑक्सिन अति-वृद्धि से मारता है; Atrazine/Diuron PS-II रोकते हैं) एवं Nipping/Topping
├── 2. पादप प्रजनन (Genetics & Plant Breeding) से संबंध
│ ├── आइडियोटाइप प्रजनन (Donald 1968: Harvest Index, Erect leaves, Stay-green)
│ └── फीनोमिक्स स्क्रीनिंग टूल्स: CTD (Infrared thermometer), SPAD (Chlorophyll meter), Δ13C (WUE हेतु)
├── 3. मृदा विज्ञान (Soil Science) से संबंध
│ ├── खनिज अवशोषण गतिकी (Ion channels, H+-ATPase pumps), नाइट्रेट रिडक्टेज व नाइट्रोजिनेज कार्यिकी
│ └── फ्लोएम गतिशीलता के आधार पर पुरानी बनाम नई पत्तियों पर कमी के लक्षणों का निदान एवं पर्ण पोषण
└── 4. उद्यानिकी, पादप संरक्षण एवं मौसम विज्ञान से संबंध
├── उद्यानिकी: PGRs से फल लगना, Parthenocarpy, आम में Paclobutrazol, कट-फ्लावर Pulsing, कार्यिकीय विकार
├── पादप संरक्षण: Pathophysiology, SAR (Salicylic acid) एवं ISR (Jasmonic acid) रक्षा संकेत
└── मौसम विज्ञान एवं मॉडलिंग: GDD (Thermal time) एवं फसल अनुकरण मॉडल (InfoCrop - IARI, DSSAT, APSIM)

प्रवाह चित्र · Flowchart

[जीनोटाइप (G), पर्यावरण (E) और सस्य प्रबंधन (M) को जोड़ने वाले केंद्रीय सेतु के रूप में फसल कार्यिकी]
┌──────────────────────────┐ ┌──────────────────────────┐ ┌──────────────────────────┐
│ 1. पादप प्रजनन एवं बायोटेक │ │ 2. मृदा एवं मौसम विज्ञान │ │ 3. सस्य एवं उद्यानिकी │
│ (Genotype 'G' — DNA) │ │ (Environment 'E' — जल, │ │ (Management 'M' — खाद, │
│ │ │ ताप, प्रकाश, पोषक) │ │ सिंचाई, दूरी, PGRs) │
└────────────┬─────────────┘ └────────────┬─────────────┘ └────────────┬─────────────┘
└────────────────────────────────────┼────────────────────────────────────┘
↓
【केंद्रीय इंजन: फसल कार्यिकी (CROP PHYSIOLOGY)】
(जल विभव → रंध्र संचालन → प्रकाश-संश्लेषण → श्वसन → हार्मोन संतुलन → स्रोत-सिंक विभाजन)
↓
【अंतिम परिणाम: उच्च एवं स्थिर आर्थिक फसल उपज (Phenotype / Yield)】

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है: सूखा और उच्च तापमान सहिष्णुता के लिए प्रजनन वंशक्रमों की तेजी से स्क्रीनिंग करने हेतु कौन सा कार्यिकीय उपकरण प्रयोग किया जाता है? उत्तर: इंफ्रारेड थर्मोमीटर द्वारा 'Canopy Temperature Depression (CTD)' और क्लोरोफिल मीटर द्वारा 'SPAD value'।
  • IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित भारत के स्वदेशी कार्यिकीय फसल अनुकरण मॉडल (Indigenous Crop Simulation Model) का नाम 'InfoCrop' है।
  • एट्राजीन (Atrazine), सिमाजीन और डाइयूरॉन (DCMU) शाकनाशी पौधे को कैसे मारते हैं? वे प्रकाश-संश्लेषण के 'Photosystem-II (PS-II)' में प्लास्टोक्विनोन (QB) से इलेक्ट्रॉन प्रवाह को अवरुद्ध कर देते हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • CTD (Canopy Temperature Depression) = T_air − T_canopy (सूखे में उच्च धनात्मक CTD = गहरी जड़ें व उच्च उपज)।
  • SPAD-502 मीटर: बिना पत्ती तोड़े पत्ती के पर्णहरित (Chlorophyll) और नत्रजन स्तर को मापता है।
  • कार्बन आइसोटोप विभेदन (Carbon Isotope Discrimination – Δ13C; Farquhar, 1982): C3 फसलों में जल उपयोग दक्षता (WUE) मापने का सटीक सूचकांक।
  • InfoCrop (IARI), DSSAT (USA) एवं APSIM (Australia): प्रमुख कार्यिकीय फसल अनुकरण मॉडल (Crop Simulation Models)।
  • चने में निपिंग (Nipping) करने से शीर्ष कलिका का 'Auxin' हट जाता है और 'Cytokinin' से पार्श्व शाखाएँ तेजी से निकलती हैं।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. पादप प्रजनन में हजारों वंशक्रमों की सूखा और उच्च ताप सहिष्णुता जाँचने के लिए 'कैनोपी तापमान डिप्रेशन' (CTD) किस यंत्र से मापा जाता है?

  • (A) पोटोमीटर
  • (B) इंफ्रारेड थर्मोमीटर / थर्मल इमेजिंग कैमरा (Infrared Thermometer)
  • (C) ऑक्सेनोमीटर
  • (D) रेस्पिरोमीटर
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — इंफ्रारेड थर्मोमीटर से बिना पत्ती को छुए कैनोपी का तापमान मापकर हवा के तापमान से अंतर (CTD) निकाला जाता है।

2. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR-IARI, नई दिल्ली) द्वारा विकसित स्वदेशी कार्यिकीय 'फसल अनुकरण मॉडल' (Crop Simulation Model) का नाम क्या है?

  • (A) इन्फोक्रॉप (InfoCrop — डॉ. पी.के. अग्रवाल एवं टीम द्वारा विकसित)
  • (B) केवल नासा मॉडल
  • (C) क्रॉप-जीन
  • (D) एग्रो-मॉडल
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — 'InfoCrop' भारत की उष्णकटिबंधीय व उपोष्णकटिबंधीय फसलों के लिए IARI द्वारा विकसित प्रसिद्ध फसल मॉडल है।

3. चने (Chickpea) की फसल में बुवाई के 35–40 दिन बाद शीर्ष कलिका तोड़ने ('Nipping') से पार्श्व शाखाएँ और फलियाँ क्यों बढ़ जाती हैं?

  • (A) क्योंकि इससे जड़ें टूट जाती हैं
  • (B) क्योंकि शीर्ष कलिका में बनने वाले 'ऑक्सिन' (Auxin) से होने वाली 'शीर्ष प्रमुखता' (Apical Dominance) समाप्त हो जाती है और कक्षीय कलिकाएँ सक्रिय हो जाती हैं
  • (C) क्योंकि इससे प्रकाश-संश्लेषण रुक जाता है
  • (D) क्योंकि इससे पौधा लंबा हो जाता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — शीर्ष कलिका का ऑक्सिन पार्श्व कलिकाओं को दबाकर रखता है (Apical dominance); निपिंग करने या TIBA छिड़कने से पार्श्व शाखाएँ खुलकर निकलती हैं।

4. सस्य विज्ञान में प्रयुक्त प्रसिद्ध शाकनाशी 'एट्राजीन' (Atrazine) और 'डाइयूरॉन' (Diuron / DCMU) खरपतवारों की किस कार्यिकीय प्रक्रिया को अवरुद्ध करके उन्हें मारते हैं?

  • (A) क्रेब्स चक्र को
  • (B) प्रकाश-संश्लेषण के फोटोसिस्टम-II (PS-II) में इलेक्ट्रॉन परिवहन (QA से QB तक) को रोककर
  • (C) ग्लाइकोलाइसिस को
  • (D) जल अवशोषण को
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — Atrazine और DCMU PS-II के D1 प्रोटीन पर QB बाइंडिंग साइट से जुड़कर हिल अभिक्रिया (इलेक्ट्रॉन प्रवाह) को रोक देते हैं।

5. बिना पत्ती को तोड़े या नष्ट किए खड़ी फसल में पर्णहरित (Chlorophyll content) और नत्रजन की स्थिति जानने के लिए किस हैंड-हेल्ड कार्यिकीय मीटर का उपयोग किया जाता है?

  • (A) SPAD-502 क्लोरोफिल मीटर (Minolta SPAD meter)
  • (B) मैनोमीटर
  • (C) पोरमोमीटर
  • (D) साइक्रोमीटर
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — SPAD मीटर 650 nm (लाल) और 940 nm (इंफ्रारेड) प्रकाश के अवशोषण से तुरंत पत्ती का क्लोरोफिल व नत्रजन सूचकांक बताता है।

6. आम (Mango) में एकांतर फलन (Alternate bearing) की समस्या को नियंत्रित कर प्रतिवर्ष नियमित पुष्पन लाने के लिए किस जिबरेलिन-संश्लेषण अवरोधक (Anti-gibberellin PGR) का प्रयोग किया जाता है?

  • (A) पैक्लोब्यूट्राजोल (Paclobutrazol / Cultar — मृदा प्रयोग)
  • (B) GA3
  • (C) 2,4-D
  • (D) काइनेटिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — आम में जिबरेलिन की अधिकता फूल बनने को रोकती है; Paclobutrazol (Cultar) जिबरेलिन संश्लेषण रोककर नियमित फलन लाता है।

7. C3 फसलों (जैसे गेहूँ, मूँगफली व धान) में प्रजनन के दौरान 'जल उपयोग दक्षता' (Water Use Efficiency – WUE) का आकलन करने के लिए फारकुहर (Farquhar, 1982) ने कौन सा सटीक कार्यिकीय प्राचल दिया?

  • (A) कार्बन आइसोटोप विभेदन (Carbon Isotope Discrimination — Δ13C)
  • (B) मूल दाब
  • (C) बिंदुस्राव
  • (D) श्वसन गुणांक
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — RuBisCO भारी कार्बन (13CO2) की तुलना में हल्के 12CO2 को पसंद करता है; कम Δ13C मान उच्च जल उपयोग दक्षता (High WUE) को दर्शाता है।

8. पौधों में रोगजनक (कवक/विषाणु) के आक्रमण के बाद पूरे पौधे में विकसित होने वाली 'प्रणालीगत उपार्जित प्रतिरोधकता' (Systemic Acquired Resistance – SAR) का मुख्य कार्यिकीय संकेत अणु (Signaling molecule) कौन सा है?

  • (A) सैलिसिलिक अम्ल (Salicylic Acid – SA)
  • (B) केवल ऑक्सिन
  • (C) जिबरेलिन
  • (D) फ्लोरिजन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — जैव-पोषी रोगजनकों के विरुद्ध 'SAR' में सैलिसिलिक अम्ल (SA) और शाकाहारी कीटों व घाव के विरुद्ध 'जैस्मोनिक अम्ल (JA)' मुख्य रक्षा हार्मोन हैं।

9. फूलगोभी में मॉलिब्डेनम (Mo) की कमी से होने वाला 'व्हिपटेल' (Whiptail) और टमाटर में कैल्शियम (Ca) की कमी से होने वाला 'ब्लॉसम एंड रॉट' किस श्रेणी की समस्याएँ हैं?

  • (A) जीवाणु रोग
  • (B) विषाणु रोग
  • (C) कार्यिकीय एवं पोषण विकार (Physiological Disorders — अजैविक व अ-संक्रामक)
  • (D) कीट जनित रोग
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — ये किसी रोगाणु से न होकर पोषक तत्वों के कार्यिकीय असंतुलन से होने वाले अ-संक्रामक कार्यिकीय विकार हैं।

10. पौधे की वृद्धि उस आवश्यक पोषक तत्व या कारक द्वारा सीमित होती है जो आवश्यकता की तुलना में सबसे कम मात्रा में उपलब्ध है—यह प्रसिद्ध 'न्यूनतम का नियम' (Law of the Minimum, 1840) किसने दिया था?

  • (A) जस्टस वॉन लिबिग (Justus von Liebig, 1840)
  • (B) एफ.एफ. ब्लैकमैन (1905)
  • (C) मित्शर्लिक (1909)
  • (D) आर्नोल्ड
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — जस्टस वॉन लिबिग (1840) ने खनिज पोषण के संदर्भ में 'Law of the Minimum' दिया, जिसे बाद में ब्लैकमैन (1905) ने प्रकाश-संश्लेषण में 'Law of Limiting Factors' के रूप में विस्तारित किया।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. DSSAT और APSIM का पूरा नाम क्या है?

DSSAT: Decision Support System for Agrotechnology Transfer; APSIM: Agricultural Production Systems sIMulator।

2. चने में रासायनिक रूप से शीर्ष प्रमुखता तोड़कर शाखाएँ बढ़ाने के लिए किस एंटी-ऑक्सिन (Anti-auxin) का छिड़काव किया जाता है?

TIBA (2,3,5-Triiodobenzoic acid @ 50–75 ppm) का।

3. किसी फसल को एक विशेष अवस्था तक पहुँचने के लिए आवश्यक संचित ऊष्मा इकाइयों को क्या कहते हैं?

ग्रोइंग डिग्री डेज (Growing Degree Days – GDD) या थर्मल टाइम (Thermal Time)।

4. काटे गए फूलों (Cut flowers) की गुलदस्ते में आयु बढ़ाने के लिए उच्च सुक्रोज व कीटाणुनाशी घोल में रखने की क्रिया क्या कहलाती है?

पल्सिंग (Pulsing — Sucrose + 8-HQC + Silver thiosulphate)।

5. सूखे के समय जिस किस्म का कैनोपी तापमान हवा की तुलना में ठंडा (उच्च धनात्मक CTD) रहता है, वह सूखे के प्रति कैसी होती है?

सूखा सहिष्णु (Drought tolerant — क्योंकि उसकी गहरी जड़ें पानी खींचकर वाष्पोत्सर्जन चालू रखती हैं)।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. पादप प्रजनन (Plant Breeding) में फसल कार्यिकी किस प्रकार सहायता करती है?

1. प्रजनकों को अनुभवजन्य चयन के बजाय 'आइडियोटाइप मॉडल' (जैसे सीधा पर्ण कोण, उच्च हार्वेस्ट इंडेक्स, Stay-green गुण) प्रदान करती है। 2. सूखा, ताप व लवणता सहिष्णुता के लिए त्वरित कार्यिकीय स्क्रीनिंग उपकरण—जैसे कैनोपी तापमान डिप्रेशन (CTD), SPAD क्लोरोफिल मीटर, सापेक्ष जल अंश (RWC) और कार्बन आइसोटोप विभेदन (Δ13C)—उपलब्ध कराती है।

2. सस्य विज्ञान (Agronomy) की प्रमुख क्रियाओं का कार्यिकीय आधार स्पष्ट कीजिए।

सस्य विज्ञान की प्रत्येक क्रिया का मूल आधार पादप कार्यिकी है: 1. बुवाई का समय दीप्तिकालिता व तापीय आवश्यकताओं (GDD) पर आधारित है। 2. पौध अंतराल व बीज दर अधिकतम प्रकाश अंतर्ग्रहण (Optimum LAI 4–6) पर आधारित हैं। 3. सिंचाई प्रबंधन क्रांतिक कार्यिकीय अवस्थाओं (जैसे CRI व पुष्पन) पर आधारित है। 4. शाकनाशियों की चयनात्मकता उपापचयी अंतरों पर आधारित है।

3. 'कैनोपी तापमान डिप्रेशन' (CTD) क्या है और यह सूखा व ताप सहिष्णुता कैसे बताता है?

वायुमंडल के तापमान और फसल की पत्तियों के तापमान के अंतर को CTD (T_air − T_canopy) कहते हैं। जब किसी जीनोटाइप की जड़ें गहरी और सक्रिय होती हैं, तो वह सूखे या लू में भी मिट्टी से पानी खींचकर अपने रंध्र खुले रखता है; वाष्पोत्सर्जन होने से पत्तियाँ ठंडी हो जाती हैं और CTD मान उच्च धनात्मक (+3°C से +6°C) आता है, जो उच्च उपज क्षमता दर्शाता है।

4. मृदा विज्ञान और पादप कार्यिकी के आपसी संबंध को उदाहरण सहित समझाइए।

मृदा में पोषक तत्वों की उपलब्धता मृदा विज्ञान का विषय है, किंतु जड़ों द्वारा वाहक प्रोटीनों व आयन पंपों से उनका सक्रिय अवशोषण, जाइलम-फ्लोएम में स्थानांतरण, एंजाइमों (जैसे Nitrate reductase में Mo, Nitrogenase में Fe-Mo, Carbonic anhydrase में Zn) में उनकी भूमिका और पत्तियों पर कमी के लक्षणों का प्रकटन पादप कार्यिकी का विषय है।

5. फसल अनुकरण मॉडलिंग (Crop Simulation Modeling) क्या है और कृषि में इसका क्या उपयोग है?

फसल की कार्यिकीय प्रक्रियाओं (प्रकाश-संश्लेषण, श्वसन, जल व नत्रजन उपयोग तथा शुष्क पदार्थ विभाजन) के गणितीय समीकरणों को दैनिक मौसम और मृदा के आँकड़ों के साथ कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (जैसे InfoCrop, DSSAT, APSIM) में पिरोया जाता है। इससे फसल की उपज का पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का आकलन और सिंचाई/उर्वरक का अनुकूलन किया जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. 'फसल कार्यिकी समस्त कृषि विज्ञानों को जोड़ने वाला केंद्रीय सेतु है'—इस कथन की पुष्टि सस्य विज्ञान, पादप प्रजनन, मृदा विज्ञान, उद्यानिकी और पादप संरक्षण के उदाहरणों सहित कीजिए।

G × E × M = Phenotype मॉडल का चित्र बनाकर पाँचों विषयों (Agronomy, GPB, Soil Science, Horticulture एवं Plant Protection) के साथ फसल कार्यिकी के प्रत्यक्ष अंतर्संबंधों और तालिका 2.1 के व्यावहारिक उदाहरणों का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।

2. अजैविक तनावों (सूखा एवं उच्च तापमान) के विरुद्ध फसल सुधार में 'फिजियोलॉजिकल ब्रीडिंग' (Physiological Breeding) के सिद्धांतों और आधुनिक फीनोटाइपिंग उपकरणों (CTD, SPAD, Δ13C, RWC) का वर्णन कीजिए।

डॉ. रेनॉल्ड्स एवं बोरलॉग के फिजियोलॉजिकल ब्रीडिंग मॉडल, CTD की कार्यप्रणाली व गणना, SPAD मीटर से Stay-green मापन, कार्बन आइसोटोप विभेदन (Δ13C) से WUE मापन और झिल्ली ताप स्थिरता (Membrane thermostability) का सविस्तर विवरण दें।

3. शाकनाशियों (Herbicides) और पादप वृद्धि नियंत्रकों (PGRs) की क्रियाविधि को समझने में पादप कार्यिकी के योगदान की विवेचना कीजिए।

चयनात्मक बनाम अ-चयनात्मक शाकनाशियों के कार्यिकीय लक्ष्य—1. प्रकाश-संश्लेषण PS-II अवरोधक (Atrazine, Diuron), 2. PS-I इलेक्ट्रॉन डाइवर्टर (Paraquat), 3. सिंथेटिक ऑक्सिन (2,4-D), 4. अमीनो अम्ल संश्लेषण EPSPS अवरोधक (Glyphosate)—तथा उद्यानिकी व सस्य विज्ञान में PGRs के उपयोग का वर्णन करें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • ग्लाइफोसेट (Glyphosate) शाकनाशी पौधों में 'शिकिमिक अम्ल पथ' के 'EPSPS एंजाइम' को रोककर सुगंधित अमीनो अम्लों का संश्लेषण बंद कर देता है।
  • पैराक्वाट (Paraquat) प्रकाश-संश्लेषण के 'Photosystem-I (PS-I)' से इलेक्ट्रॉन छीनकर मुक्त मूलक बनाता है और कोशिका झिल्ली को जला देता है।
  • पत्ती में तत्वों की गतिशीलता के नियम की खोज ने ही यह स्पष्ट किया कि N, P, K, Mg की कमी पहले पुरानी पत्तियों पर और Ca, B की कमी शीर्ष कलिका पर क्यों दिखती है।
  • ग्रोइंग डिग्री डेज (GDD) की अवधारणा सर्वप्रथम फ्रांसीसी वैज्ञानिक रेउमुर (Reaumur, 1735) ने दी थी।
  • अंतर्राष्ट्रीय मक्का एवं गेहूँ सुधार केंद्र (CIMMYT) में डॉ. एम.पी. रेनॉल्ड्स ने 'Physiological Breeding' को वैश्विक पहचान दिलाई।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।

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