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AGRON 311 Lecture 09: शाकनाशी का वर्गीकरण एवं प्रमुख शाकनाशियों के गुणधर्म | Hindi Notes

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AGRON 311 · Weed Management
विषय सूची · Quick Navigation02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
शैक्षणिक संदर्भ: शाकनाशियों की दरें, मिश्रण और उपयोग उपलब्ध कराए गए स्रोत का हिस्सा हैं। खेत में प्रयोग से पहले फसल-विशिष्ट वर्तमान label claim तथा स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय/KVK की अनुशंसा जाँचें।
Lecture 09 Source Page Reference in Supplied Pack: 130 (AGRON 311 Theory Lecture 09)

Lecture 09: शाकनाशी का वर्गीकरण एवं प्रमुख शाकनाशियों के गुणधर्म

Herbicide classification and properties of important herbicides

02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:

  • आधुनिक रसायन-आधारित खरपतवार विज्ञान का इतिहास (1940 के दशक में Pokorny, Zimmerman, Hitchcock एवं Marth द्वारा 2,4-D की खोज) को समझना।
  • शाकनाशियों के 5 मुख्य आधारों पर वैज्ञानिक वर्गीकरण—(1) प्रयोग के समय (PPI, PE, PoE, Lay-by), (2) वरणात्मकता (Selective बनाम Non-selective), (3) गतिशीलता/स्थानांतरण (Contact बनाम Systemic — जाइलम व फ्लोएम गतिशील), (4) प्रयोग के स्थान (Soil बनाम Foliage applied), और (5) रासायनिक संरचना व कुल (Chemical Families)—का गहन अध्ययन करना।
  • 12 प्रमुख रासायनिक कुलों (Phenoxy carboxylic acids, Triazines, Substituted ureas, Dinitroanilines, Chloroacetamides, Sulfonylureas, Imidazolinones, Bipyridyliums, Organophosphonates, Aryloxyphenoxypropionates/FOPs, Diphenyl ethers, Isoxazolidinones) और उनके प्रतिनिधि शाकनाशियों को याद करना।
  • प्रमुख व्यक्तिगत शाकनाशियों—2,4-D (एस्टर, अमीन व सोडियम लवण), एट्राजिन, पेंडिमेथालिन, फ्लूक्लोरालिन, ब्यूटाक्लोर, प्रीटिलाक्लोर, सल्फोसलफ्यूरॉन, इमेजेथापायर, क्लोडिनाफॉप, पैराक्वाट और ग्लाइफोसेट—के भौतिक-रासायनिक गुणधर्म, मात्रा, लक्षित खरपतवार और सावधानियों को जानना।

03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): ‘शाकनाशी’ (Herbicide) शब्द लैटिन के दो शब्दों—‘Herba’ (पौधा/वनस्पति) और ‘Caedere’ (मारना)—से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है अवांछित पौधों (खरपतवारों) को मारने या उनकी वृद्धि को रोकने वाला रसायन। हालांकि 1896–1900 में कॉपर सल्फेट और सल्फ्यूरिक अम्ल का प्रयोग शुरू हुआ था, परंतु आधुनिक रासायनिक खरपतवार नियंत्रण क्रांति का वास्तविक सूत्रपात 1941–1944 में 2,4-D (2,4-Dichlorophenoxyacetic acid) और MCPA की खोज से हुआ, जो बिना गेहूँ/मक्का (एकबीजपत्री) को नुकसान पहुँचाए केवल चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों (द्विबीजपत्री) को चुन-चुनकर मार सकता था।

आज विश्व में 300 से अधिक सक्रिय शाकनाशी अणु उपलब्ध हैं। किसी भी फसल में सही शाकनाशी का चुनाव करने के लिए उसके प्रयोग समय (PPI / PE / PoE), वरणात्मकता, पौधे के अंदर गतिशीलता, रासायनिक कुल और विशिष्ट भौतिक-रासायनिक गुणधर्मों (जैसे वाष्पशीलता, प्रकाश-अपघटन, मृदा अवशेष अवधि) का सटीक ज्ञान अनिवार्य है।

04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

बुवाई-पूर्व मृदा समावेशित शाकनाशी (Pre-Plant Incorporation – PPI)
वे शाकनाशी जो अत्यंत वाष्पशील (Volatile) होते हैं या सूर्य के प्रकाश से टूट जाते हैं (Photodecomposition), इसलिए उन्हें फसल की बुवाई से पहले मिट्टी पर छिड़ककर तुरंत हैरो या रोटावेटर से ऊपरी 5–8 cm मिट्टी में मिला दिया जाता है। उदाहरण: फ्लूक्लोरालिन (Fluchloralin – Basalin), ट्राइफ्लूरालिन (Trifluralin), EPTC।
अंकुरण-पूर्व शाकनाशी (Pre-Emergence Herbicide – PE)
वे मृदा-सक्रिय शाकनाशी जिन्हें फसल की बुवाई के तुरंत बाद (0 से 3 दिन के भीतर), किंतु फसल और खरपतवार के जमीन से बाहर निकलने से पहले नम मिट्टी की सतह पर छिड़का जाता है। उदाहरण: पेंडिमेथालिन (Pendimethalin), एट्राजिन (Atrazine), ब्यूटाक्लोर (Butachlor), प्रीटिलाक्लोर (Pretilachlor)।
अंकुरण-पश्चात शाकनाशी (Post-Emergence Herbicide – PoE)
वे पर्ण-सक्रिय (Foliage-applied) शाकनाशी जिन्हें फसल और खरपतवार दोनों के उग आने के बाद (सामान्यतः बुवाई के 15 से 35 दिन बाद, जब खरपतवार 2–4 पत्ती अवस्था में हों) सीधे खरपतवारों की पत्तियों पर छिड़का जाता है। उदाहरण: 2,4-D, क्लोडिनाफॉप, सल्फोसलफ्यूरॉन, इमेजेथापायर, बिसपायरीबैक-सोडियम, ग्लाइफोसेट, पैराक्वाट।
संपर्क बनाम सर्वांगी शाकनाशी (Contact vs Systemic / Translocated Herbicides)
संपर्क शाकनाशी (जैसे पैराक्वाट, डाइक्वाट, ऑक्सीफ्लोरफेन) पौधे के केवल उसी भाग को झुलसाते हैं जहाँ उनकी बूंदें गिरती हैं; जबकि सर्वांगी शाकनाशी (जैसे ग्लाइफोसेट, 2,4-D, सल्फोसलफ्यूरॉन) पत्तियों या जड़ों द्वारा अवशोषित होकर जाइलम (Apysplast) या फ्लोएम (Symplast) के माध्यम से पूरे पौधे व भूमिगत कंदों तक पहुँचकर उसे जड़ से मारते हैं।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. शाकनाशियों का बहु-आयामी वैज्ञानिक वर्गीकरण (Comprehensive Classification of Herbicides)

(A) प्रयोग के समय के आधार पर (Based on Time of Application)
  1. बुवाई-पूर्व (Pre-Plant Incorporation — PPI): बुवाई से 1–2 दिन पहले मिट्टी में मिलाकर। उदाहरण: फ्लूक्लोरालिन (Fluchloralin), ट्राइफ्लूरालिन (Trifluralin), EPTC, डाइएलेट (Diallate)।
  2. अंकुरण-पूर्व (Pre-Emergence — PE): बुवाई के 0–3 दिन के अंदर नम मिट्टी पर। उदाहरण: पेंडिमेथालिन, एट्राजिन, सिमाजिन, ब्यूटाक्लोर, प्रीटिलाक्लोर, एलाक्लोर, ऑक्सीफ्लोरफेन, मेट्रीब्यूजिन, पाइरोक्सासल्फोन।
  3. अंकुरण-पश्चात (Post-Emergence — PoE): बुवाई के 15–35 दिन बाद उगे हुए खरपतवारों पर। उदाहरण: 2,4-D, मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल, सल्फोसलफ्यूरॉन, क्लोडिनाफॉप-प्रोपार्जिल, फिनोक्साप्रॉप-p-इथाइल, इमेजेथापायर, बिसपायरीबैक-सोडियम, टेम्बोट्रियोन, पैराक्वाट, ग्लाइफोसेट।
  4. ले-बाय प्रयोग (Lay-by Application): फसल में अंतिम अंतर-कर्षण गुड़ाई या मिट्टी चढ़ाने (Earthing up — जैसे गन्ना या मक्का में) के तुरंत बाद कतारों के बीच किया जाने वाला छिड़काव ताकि देर से उगने वाले खरपतवार न उगें।
(B) वरणात्मकता एवं गतिशीलता के आधार पर (Based on Selectivity & Mobility — 4-Quadrant Classification)
1. वरणात्मक एवं सर्वांगी (Selective + Systemic)

खड़ी फसल को सुरक्षित रखकर केवल लक्षित खरपतवार में प्रवाहित होते हैं। उदाहरण: 2,4-D, एट्राजिन, सल्फोसलफ्यूरॉन, इमेजेथापायर, क्लोडिनाफॉप, बिसपायरीबैक-सोडियम।

2. वरणात्मक एवं संपर्क (Selective + Contact)

फसल को बचाकर खरपतवार की पत्तियों को संपर्क से मारते हैं। उदाहरण: ऑक्सीफ्लोरफेन (प्याज में), प्रोपानिल (धान में), बेंटाजोन, ब्रोमोक्सिनिल।

3. अवरणात्मक एवं सर्वांगी (Non-Selective + Systemic)

संपर्क में आने वाली हर वनस्पति में फ्लोएम द्वारा जड़ों व कंदों तक जाकर समूल नष्ट करते हैं। उदाहरण: ग्लाइफोसेट (Glyphosate — Roundup)।

4. अवरणात्मक एवं संपर्क (Non-Selective + Contact)

संपर्क में आने वाले हर हरे भाग को 24–48 घंटे में झुलसा देते हैं (किंतु भूमिगत कंद जीवित रहते हैं)। उदाहरण: पैराक्वाट (Paraquat — Gramoxone), डाइक्वाट (Diquat), ग्लूफोसिनेट-अमोनियम।

2. प्रमुख शाकनाशियों के विशिष्ट गुणधर्म, सूत्र एवं कृषि उपयोग (Properties of Important Individual Herbicides)

  1. 2,4-D (2,4-Dichlorophenoxyacetic acid — ‘सिंथेटिक ऑक्सिन’):
    • प्रमुख रूप (3 Forms): (a) 2,4-D सोडियम लवण (80% WP): जल में घुलनशील, सबसे कम वाष्पशील, किंतु कठोर जल (Hard water) में कैल्शियम लवण का अवक्षेप बनाता है; (b) 2,4-D अमीन लवण (Dimethyl amine salt 58% SL): जल में पूर्ण घुलनशील और अवाष्पशील (Non-volatile) — पड़ोसी संवेदनशील फसलों के पास सबसे सुरक्षित; (c) 2,4-D एथिल एस्टर (Ethyl ester 38% EC): तेल में घुलनशील (Emulsion), मोमी क्यूटिकल को सबसे तेजी से भेदने के कारण सर्वाधिक प्रभावी (Most potent), किंतु अत्यधिक वाष्पशील (Highly volatile) होने से इसकी भाप उड़कर पड़ोसी कपास या सब्जी फसल को नुकसान पहुँचा सकती है।
    • लक्षित खरपतवार एवं मात्रा: गेहूँ, मक्का, ज्वार व गन्ने में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों (बथुआ, कृष्णनील, हिरणखुरी) व जलकुंभी के विरुद्ध @ 0.5–0.75 kg a.i./ha (30–35 DAS पर)।
    • विशेष सावधानी: कपास, भिंडी, टमाटर, अंगूर और दलहनी फसलों पर 2,4-D की सूक्ष्म भाप (Drift) पड़ने पर भी पत्तियाँ मेंढक के पंजे या उल्टी नाव जैसी मुड़ जाती हैं जिसे ‘इपिनैस्टी एवं स्ट्रैप-लीफ विकृति’ (Epinasty & Strap-leaf / Frog-foot malformation) कहते हैं।
  2. एट्राजिन (Atrazine — 50% WP; Triazine कुल):
    • मक्का, ज्वार, बाजरा और गन्ने (C4 फसलों) में चौड़ी पत्ती व वार्षिक घासों के नियंत्रण हेतु प्रयुक्त मृदा एवं पर्ण-सक्रिय शाकनाशी (@ 0.5–1.0 kg a.i./ha PE)। पौधे में जड़ों से अवशोषित होकर जाइलम (Apysplast) द्वारा ऊपर की ओर चलता है और PS-II प्रकाश-संश्लेषण रोकता है। मक्का में ‘ग्लूटाथियोन-S-ट्रांसफरेज’ (GST) और ‘बेंजॉक्साजिनोन’ (DIMBOA) इसे अविषैला कर देते हैं।
  3. पेंडिमेथालिन (Pendimethalin — 30% EC / 38.7% CS; Dinitroaniline कुल):
    • पीले-नारंगी रंग का सर्वाधिक बहुमुखी प्री-इमर्जेंस (PE) शाकनाशी (@ 0.75–1.0 kg a.i./ha) जिसका उपयोग गेहूँ, धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, चना, मटर, सरसों, कपास व प्याज सहित लगभग सभी फसलों में वार्षिक घासों व कुछ चौड़ी पत्ती खरपतवारों के विरुद्ध किया जाता है। यह अंकुरित होते बीज में ‘माइक्रोट्यूब्यूल असेंबली’ (Tubulin protein) को रोककर कोशिका विभाजन बंद कर देता है। (फ्लूक्लोरालिन की तुलना में इसकी वाष्पशीलता कम होने से इसे मिट्टी में मिलाने के बजाय सतह पर PE रूप में छिड़का जाता है)।
  4. ब्यूटाक्लोर (Butachlor 50% EC/EW) एवं प्रीटिलाक्लोर (Pretilachlor 50% EC; Chloroacetamide कुल):
    • रोपित धान (Transplanted Rice) में रोपाई के 2–4 दिन बाद (2–4 DAT) खड़े पानी (2–3 cm) में रेत या यूरिया में मिलाकर या स्प्रे द्वारा डाले जाने वाले प्रमुख प्री-इमर्जेंस शाकनाशी (ब्यूटाक्लोर @ 1.0–1.5 kg a.i./ha; प्रीटिलाक्लोर @ 0.5–0.75 kg a.i./ha)। ये सांवा (Echinochloa) व वार्षिक सेज के प्ररोह निर्माण को रोकते हैं। सीधी बुवाई वाले अंकुरित धान में प्रीटिलाक्लोर के साथ ‘फेनक्लोरिम’ (Fenclorim) सेफनर मिलाया जाता है (Sofit)।
  5. सल्फोसलफ्यूरॉन (Sulfosulfuron 75% WG) एवं मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (Metsulfuron-methyl 20% WP; Sulfonylurea कुल):
    • अति-सूक्ष्म मात्रा वाले शाकनाशी (Ultra-low dose herbicides — मात्र कुछ ग्राम प्रति हेक्टेयर में प्रभावी) जो ALS एंजाइम को रोकते हैं। सल्फोसलफ्यूरॉन (@ 25 g a.i./ha) गेहूँ में गेहूँसा और चौड़ी पत्ती मारता है (किंतु यदि बाद में ज्वार या मक्का बोनी हो तो अवशेष विषाक्तता कर सकता है)। मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (@ 4 g a.i./ha) गेहूँ व धान में चौड़ी पत्ती खरपतवार मारता है।
  6. इमेजेथापायर (Imazethapyr 10% SL; Imidazolinone कुल):
    • सोयाबीन, मूंगफली, उड़द, मूंग और ग्वार (दलहनी व तिलहनी फसलों) में 15–20 DAS पर (Early PoE @ 75–100 g a.i./ha) छिड़का जाने वाला प्रमुख वरणात्मक सर्वांगी शाकनाशी जो चौड़ी पत्ती और संकरी पत्ती दोनों खरपतवारों को नियंत्रित करता है।
  7. क्लोडिनाफॉप-प्रोपार्जिल (Clodinafop-propargyl 15% WP) एवं फिनोक्साप्रॉप-p-इथाइल (FOP कुल):
    • गेहूँ में आइसोप्रोट्यूरॉन-प्रतिरोधी गेहूँसा (Phalaris minor) और जंगली जई (Avena fatua) के नियंत्रण हेतु 30–35 DAS पर (@ 60 g a.i./ha) प्रयुक्त होने वाला संकरी पत्ती नाशक (ACCase inhibitor)।
  8. पैराक्वाट (Paraquat dichloride 24% SL — ‘Gramoxone’; Bipyridylium कुल):
    • अवरणात्मक संपर्क शाकनाशी (@ 0.4–0.6 kg a.i./ha) जो सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में PS-I से इलेक्ट्रॉन छीनकर ‘सुपरऑक्साइड व हाइड्रॉक्सिल मुक्त मूलक’ (Free radicals / H2O2) बनाता है और 24 घंटे में हरी पत्तियों को जला देता है। मिट्टी के कणों (Clay) पर तुरंत दृढ़ता से अधिशोषित होकर निष्क्रिय हो जाता है (Zero soil residual activity), इसलिए आलू में अंकुरण पूर्व व बागों/कपास में हुड लगाकर निदेशित स्प्रे (Directed spray) में प्रयुक्त होता है।
  9. ग्लाइफोसेट (Glyphosate 41% SL — ‘Roundup’; Organophosphonate कुल):
    • अवरणात्मक सर्वांगी (Non-selective systemic) शाकनाशी (@ 1.0–2.0 kg a.i./ha) जो पत्तियों से अवशोषित होकर फ्लोएम द्वारा भूमिगत प्रकंदों व कंदों (मोथा, दूब, काँस, बरू घास) तक पहुँचकर ‘शिकिमिक अम्ल पथ’ के EPSPS एंजाइम को रोक देता है जिससे एरोमैटिक अमीनो अम्ल (F, Y, W) नहीं बनते। इसकी भी मृदा में कोई अवशेष सक्रियता नहीं होती।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

रासायनिक कुल (Chemical Families) के अनुसार प्रमुख शाकनाशियों का वर्गीकरण:

  • 1. फिनॉक्सी कार्बोक्सिलिक अम्ल (Phenoxy carboxylic acids): 2,4-D, MCPA, 2,4-DB।
  • 2. ट्रायजीन्स (s-Triazines & Triazinones): एट्राजिन (Atrazine), सिमाजिन (Simazine), मेट्रीब्यूजिन (Metribuzin)।
  • 3. प्रतिस्थापित यूरिया (Substituted Ureas): आइसोप्रोट्यूरॉन (Isoproturon), ड्यूरॉन (Diuron), मोनूरॉन।
  • 4. डाइनाइट्रोएनिलीन (Dinitroanilines): पेंडिमेथालिन (Pendimethalin), फ्लूक्लोरालिन (Fluchloralin), ट्राइफ्लूरालिन।
  • 5. क्लोरोएसिटामाइड्स (Chloroacetamides): ब्यूटाक्लोर (Butachlor), प्रीटिलाक्लोर (Pretilachlor), एलाक्लोर (Alachlor), मेटोलाक्लोर।
  • 6. सल्फोनिलयूरिया (Sulfonylureas): सल्फोसलफ्यूरॉन, मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल, क्लोरिम्यूरॉन-इथाइल, पाइराज़ोसल्फ्यूरॉन, मेसोसल्फ्यूरॉन।
  • 7. इमिडाजोलिनोन्स (Imidazolinones): इमेजेथापायर (Imazethapyr), इमाज़ामॉक्स (Imazamox)।
  • 8. बाइपाइरिडिलियम्स (Bipyridyliums): पैराक्वाट (Paraquat), डाइक्वाट (Diquat)।
  • 9. ऑर्गेनोफॉस्फोनेट्स (Organophosphonates): ग्लाइफोसेट (Glyphosate), ग्लूफोसिनेट-अमोनियम।
  • 10. एरिलॉक्सीफिनॉक्सीप्रोपियोनेट्स (AOPP / FOPs) एवं साइक्लोहेक्सेनडायोन्स (DIMs): क्लोडिनाफॉप-प्रोपार्जिल, फिनोक्साप्रॉप-p-इथाइल, क्विज़ालोफॉप-इथाइल, पिनोक्साडेन।
  • 11. डाइफिनाइल ईथर (Diphenyl ethers): ऑक्सीफ्लोरफेन (Oxyfluorfen), लैक्टोफेन, एसीफ्लोरफेन।
  • 12. पाइरिमिडिनिलबेंजोएट्स एवं ट्राइकीटोन्स: बिसपायरीबैक-सोडियम (Bispyribac-sodium — Nominee Gold), टेम्बोट्रियोन (Tembotrione — Laudis), टोप्राजोन।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)

  • ‘जाइलम बनाम फ्लोएम गतिशीलता’ का नियम (Apoplastic vs Symplastic Translocation Rule): मृदा में दिए जाने वाले शाकनाशी (जैसे एट्राजिन, आइसोप्रोट्यूरॉन) जड़ों द्वारा अवशोषित होकर जाइलम (Apoplast) में वाष्पोत्सर्जन धारा के साथ केवल नीचे से ऊपर (Acropetal) पत्तियों की ओर जाते हैं; जबकि पत्तियों पर छिड़के जाने वाले बहुवर्षीय नाशक (जैसे ग्लाइफोसेट, 2,4-D) फ्लोएम (Symplast) में प्रकाश-संश्लेषित शर्करा (Photosynthates) के साथ ऊपर से नीचे जड़ों व कंदों (Basipetal) तक जाते हैं।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)

प्रायोगिक पहचान उदाहरण: 2,4-D के तीनों रूपों का तुलनात्मक चयन

यदि गेहूँ के खेत के बगल में कपास या टमाटर का खेत है, तो किसान को 2,4-D Ethyl Ester (38% EC) का प्रयोग कदापि नहीं करना चाहिए क्योंकि एस्टर रूप अत्यधिक वाष्पशील (Volatile) होने से हवा के साथ उड़कर (Vapour drift) कपास की पत्तियों को विकृत कर देगा। ऐसी स्थिति में अवाष्पशील 2,4-D Amine Salt (58% SL) या 2,4-D Sodium Salt (80% WP) का ही चयन किया जाता है।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 9.1: प्रमुख शाकनाशियों का रासायनिक कुल, प्रयोग समय, मात्रा एवं लक्षित फसल/खरपतवार
शाकनाशी का नाम रासायनिक कुल (Chemical Family) प्रयोग समय एवं प्रकृति मात्रा (a.i./ha) प्रमुख फसल एवं लक्षित खरपतवार
1. फ्लूक्लोरालिन (Basalin) Dinitroaniline PPI (वरणात्मक) 0.75–1.0 kg दलहन व तिलहन में वार्षिक घासें व चौड़ी पत्ती।
2. पेंडिमेथालिन (Stomp) Dinitroaniline PE (वरणात्मक) 0.75–1.0 kg गेहूँ, धान, सोयाबीन, दलहन, प्याज में वार्षिक घासें।
3. एट्राजिन (Atrataf) s-Triazine PE / Early PoE (वरणात्मक) 0.5–1.0 kg मक्का, ज्वार, बाजरा, गन्ना में चौड़ी पत्ती व घासें।
4. ब्यूटाक्लोर / प्रीटिलाक्लोर Chloroacetamide PE (2–4 DAT, वरणात्मक) 1.25 kg / 0.75 kg रोपित धान में सांवा व वार्षिक सेज।
5. बिसपायरीबैक-सोडियम Pyrimidinylbenzoate PoE (15–25 DAS, वरणात्मक) 20–25 g धान (DSR व रोपित) में सांवा, चौड़ी पत्ती व सेज।
6. 2,4-D (Na / Amine / Ester) Phenoxy carboxylic acid PoE (30–35 DAS, वरणात्मक) 0.5–0.75 kg गेहूँ, मक्का, गन्ना में केवल चौड़ी पत्ती खरपतवार।
7. सल्फोसलफ्यूरॉन (Leader) Sulfonylurea PoE (30–35 DAS, वरणात्मक) 25 g गेहूँ में गेहूँसा व चौड़ी पत्ती खरपतवार।
8. क्लोडिनाफॉप (Topik) AOPP (FOP) PoE (30–35 DAS, वरणात्मक) 60 g गेहूँ में गेहूँसा (Phalaris minor) व जंगली जई।
9. इमेजेथापायर (Pursuit) Imidazolinone PoE (15–20 DAS, वरणात्मक) 75–100 g सोयाबीन, मूंगफली, उड़द, मूंग में घास व चौड़ी पत्ती।
10. पैराक्वाट (Gramoxone) Bipyridylium PoE (अवरणात्मक, संपर्क) 0.4–0.6 kg अकृषित भूमि, बाग, आलू (PE) व कपास (Directed)।
11. ग्लाइफोसेट (Roundup) Organophosphonate PoE (अवरणात्मक, सर्वांगी) 1.0–2.0 kg बहुवर्षीय खरपतवार (मोथा, दूब, काँस), जीरो-टिलेज।

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)

प्रमुख शाकनाशी मात्रा एवं सांद्रता मानक
  • अति-सूक्ष्म मात्रा शाकनाशी (Ultra-low dose Sulfonylureas):
    • मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (Metsulfuron-methyl): 4 g a.i./ha
    • क्लोरिम्यूरॉन-इथाइल (Chlorimuron-ethyl): 4–6 g a.i./ha
    • पाइराज़ोसल्फ्यूरॉन-इथाइल (Pyrazosulfuron-ethyl): 20–25 g a.i./ha
    • सल्फोसलफ्यूरॉन (Sulfosulfuron): 25 g a.i./ha
  • अम्ल तुल्यांक (Acid Equivalent – a.e.): लवण या एस्टर शाकनाशियों (जैसे 2,4-D, ग्लाइफोसेट) में सक्रिय मूल अम्ल का सैद्धांतिक प्रतिशत भार।

11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 09: शाकनाशी का वर्गीकरण एवं गुणधर्म
प्रयोग समय अनुसार (Time of Application)
  • 1. PPI (बुवाई पूर्व मिट्टी में): फ्लूक्लोरालिन, ट्राइफ्लूरालिन, EPTC
  • 2. PE (अंकुरण पूर्व 0-3 DAS): पेंडिमेथालिन, एट्राजिन, ब्यूटाक्लोर
  • 3. PoE (अंकुरण पश्चात 15-35 DAS): 2,4-D, सल्फोसलफ्यूरॉन, इमेजेथापायर
  • 4. Lay-by: अंतिम गुड़ाई/मिट्टी चढ़ाने के बाद
वरणात्मकता व गतिशीलता (Selectivity & Mobility)
  • Selective + Systemic: 2,4-D, एट्राजिन, सल्फोसलफ्यूरॉन
  • Selective + Contact: प्रोपानिल, ऑक्सीफ्लोरफेन, बेंटाजोन
  • Non-selective + Systemic: ग्लाइफोसेट (फ्लोएम गतिशील)
  • Non-selective + Contact: पैराक्वाट, डाइक्वाट
प्रमुख रासायनिक कुल (Chemical Families)
  • Phenoxy: 2,4-D | Triazine: एट्राजिन, सिमाजिन
  • Dinitroaniline: पेंडिमेथालिन | Chloroacetamide: ब्यूटाक्लोर
  • Sulfonylurea: सल्फोसलफ्यूरॉन, मेटसल्फ्यूरॉन (Ultra-low dose)
  • Bipyridylium: पैराक्वाट | Organophosphonate: ग्लाइफोसेट
विशेष शाकनाशी गुणधर्म
  • 2,4-D के 3 रूप: Na salt (80% WP), Amine (58% SL), Ester (38% EC – वाष्पशील)
  • 2,4-D Drift से कपास में ‘Strap-leaf / Frog-foot’ विकृति
  • पैराक्वाट व ग्लाइफोसेट: शून्य मृदा अवशेष (Zero soil activity)
  • अल्ट्रा-लो डोज: मेटसल्फ्यूरॉन मात्र 4 g a.i./ha

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)

शाकनाशी वर्गीकरण एवं फसल-अवस्था के अनुसार चयन प्रवाह (Herbicide Classification & Selection Flowchart)
Step 1
चरण 1 (बुवाई से पूर्व – PPI): क्या शाकनाशी वाष्पशील/प्रकाश-अपघटनीय है? → हाँ: फ्लूक्लोरालिन / ट्राइफ्लूरालिन को मिट्टी में हैरो से मिलाएँ
⬇
Step 2
चरण 2 (बुवाई के 0–3 दिन बाद – PE): फसल व खरपतवार उगने से पहले नम मिट्टी पर सुरक्षा परत → पेंडिमेथालिन / एट्राजिन / ब्यूटाक्लोर / प्रीटिलाक्लोर का स्प्रे
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Step 3
चरण 3 (खड़ी फसल 15–35 DAS – Selective PoE): चौड़ी पत्ती हेतु (2,4-D, मेटसल्फ्यूरॉन), संकरी घास हेतु (क्लोडिनाफॉप, फिनोक्साप्रॉप), या दोनों हेतु (सल्फोसलफ्यूरॉन, इमेजेथापायर, बिसपायरीबैक)
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Step 4
चरण 4 (अकृषित भूमि / जीरो-टिलेज / बहुवर्षीय कंद – Non-Selective PoE): त्वरित पर्ण झुलसन हेतु पैराक्वाट (संपर्क) या भूमिगत कंद विनाश हेतु ग्लाइफोसेट (सर्वांगी)

13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • फ्लूक्लोरालिन (Basalin) और ट्राइफ्लूरालिन (Treflan) डाइनाइट्रोएनिलीन कुल के शाकनाशी हैं जिन्हें उच्च वाष्पशीलता (Volatility) और प्रकाश-अपघटन (Photodecomposition) के कारण हमेशा बुवाई से पूर्व मिट्टी में मिलाकर (PPI) प्रयोग किया जाता है।
  • 2,4-D के तीन व्यावसायिक रूपों में ‘एथिल एस्टर’ (Ethyl ester 38% EC) सर्वाधिक प्रभावी और सर्वाधिक वाष्पशील है, जबकि ‘अमीन लवण’ (Amine salt 58% SL) अवाष्पशील है।
  • कपास और भिंडी की फसल पर 2,4-D की सूक्ष्म भाप (Drift) लगने से पत्तियों में मेंढक के पंजे जैसी ‘स्ट्रैप-लीफ’ (Strap-leaf / Epinasty) विकृति हो जाती है।
  • सल्फोनिलयूरिया कुल के शाकनाशी (जैसे मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल @ 4 g/ha, क्लोरिम्यूरॉन @ 4 g/ha, सल्फोसलफ्यूरॉन @ 25 g/ha) ‘अति-सूक्ष्म मात्रा वाले शाकनाशी’ (Ultra-low dose herbicides) कहलाते हैं।
  • पैराक्वाट और डाइक्वाट ‘बाइपाइरिडिलियम’ (Bipyridylium) कुल के अवरणात्मक संपर्क शाकनाशी हैं, जबकि ग्लाइफोसेट ‘ऑर्गेनोफॉस्फोनेट’ कुल का अवरणात्मक सर्वांगी शाकनाशी है; दोनों की मृदा में अवशेष सक्रियता शून्य होती है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)

त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):

  • PPI शाकनाशी: फ्लूक्लोरालिन, ट्राइफ्लूरालिन, EPTC।
  • PE शाकनाशी: पेंडिमेथालिन, एट्राजिन, सिमाजिन, ब्यूटाक्लोर, प्रीटिलाक्लोर, ऑक्सीफ्लोरफेन।
  • PoE वरणात्मक शाकनाशी: 2,4-D, मेटसल्फ्यूरॉन, सल्फोसलफ्यूरॉन, क्लोडिनाफॉप, इमेजेथापायर, बिसपायरीबैक-सोडियम, प्रोपानिल।
  • PoE अवरणात्मक शाकनाशी: पैराक्वाट व डाइक्वाट (संपर्क), ग्लाइफोसेट (सर्वांगी)।
  • अल्ट्रा-लो डोज: सल्फोनिलयूरिया कुल (Metsulfuron @ 4 g/ha, Sulfosulfuron @ 25 g/ha)।

15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)

1. उच्च वाष्पशीलता (Volatility) और सूर्य के प्रकाश से विघटन (Photodecomposition) से बचाने के लिए निम्नलिखित में से किस शाकनाशी को हमेशा बुवाई से पूर्व मिट्टी में मिलाकर (PPI) प्रयोग किया जाता है?
(A) फ्लूक्लोरालिन (Fluchloralin – Basalin) एवं ट्राइफ्लूरालिन
(B) क्लोडिनाफॉप
(C) ग्लाइफोसेट
(D) पैराक्वाट
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) फ्लूक्लोरालिन (Fluchloralin – Basalin) एवं ट्राइफ्लूरालिन
व्याख्या: फ्लूक्लोरालिन और ट्राइफ्लूरालिन वाष्पशील और फोटो-लायबिल होने के कारण PPI (Pre-Plant Incorporation) के रूप में दिए जाते हैं।
2. निम्नलिखित में से कौन-सा एक ‘अवरणात्मक एवं सर्वांगी’ (Non-selective and Systemic) शाकनाशी है जो पत्तियों से अवशोषित होकर बहुवर्षीय खरपतवारों के भूमिगत कंदों व प्रकंदों को भी नष्ट कर देता है?
(A) ग्लाइफोसेट (Glyphosate)
(B) पैराक्वाट (Paraquat)
(C) 2,4-D
(D) एट्राजिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) ग्लाइफोसेट (Glyphosate)
व्याख्या: ग्लाइफोसेट अवरणात्मक सर्वांगी (फ्लोएम गतिशील) शाकनाशी है, जबकि पैराक्वाट अवरणात्मक संपर्क शाकनाशी है।
3. 2,4-D के तीन प्रमुख व्यावसायिक संरूपणों में से कौन-सा संरूपण सर्वाधिक वाष्पशील (Most volatile) और मोमी पत्तियों को भेदने में सर्वाधिक शक्तिशाली है?
(A) 2,4-D एथिल एस्टर (Ethyl ester 38% EC)
(B) 2,4-D सोडियम लवण (80% WP)
(C) 2,4-D अमीन लवण (58% SL)
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) 2,4-D एथिल एस्टर (Ethyl ester 38% EC)
व्याख्या: 2,4-D एस्टर वसा-घुलनशील होने से सबसे अधिक प्रभावी है, किंतु वाष्पशील होने के कारण वाष्प ड्रिफ्ट का खतरा रहता है।
4. सोयाबीन, मूंगफली, उड़द और मूंग जैसी दलहनी व तिलहनी फसलों में बुवाई के 15–20 दिन बाद (Early Post-emergence) चौड़ी और संकरी पत्ती के खरपतवारों के नियंत्रण हेतु कौन-सा इमिडाजोलिनोन शाकनाशी सर्वाधिक प्रयुक्त होता है?
(A) इमेजेथापायर (Imazethapyr 10% SL)
(B) एट्राजिन
(C) 2,4-D
(D) आइसोप्रोट्यूरॉन
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) इमेजेथापायर (Imazethapyr 10% SL)
व्याख्या: इमेजेथापायर (Pursuit @ 75–100 g a.i./ha) सोयाबीन और दलहनी फसलों का प्रमुख PoE शाकनाशी है।
5. पैराक्वाट (Paraquat) और डाइक्वाट (Diquat) किस रासायनिक कुल (Chemical family) से संबंधित हैं?
(A) बाइपाइरिडिलियम्स (Bipyridyliums)
(B) ट्रायजीन्स (Triazines)
(C) सल्फोनिलयूरिया (Sulfonylureas)
(D) डाइनाइट्रोएनिलीन (Dinitroanilines)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) बाइपाइरिडिलियम्स (Bipyridyliums)
व्याख्या: पैराक्वाट और डाइक्वाट चतुष्क अमोनियम लवण वाले बाइपाइरिडिलियम कुल के संपर्क शाकनाशी हैं।
6. प्रति हेक्टेयर मात्र 4 ग्राम सक्रिय तत्व (4 g a.i./ha) की अति-सूक्ष्म मात्रा (Ultra-low dose) में गेहूँ और धान के चौड़ी पत्ती खरपतवारों को नियंत्रित करने वाला सल्फोनिलयूरिया शाकनाशी कौन-सा है?
(A) मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (Metsulfuron-methyl)
(B) ब्यूटाक्लोर
(C) पेंडिमेथालिन
(D) एलाक्लोर
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (Metsulfuron-methyl)
व्याख्या: मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (Algrip 20% WP) की अनुशंसित मात्रा मात्र 4 g a.i./ha (20 g उत्पाद/ha) होती है।
7. एट्राजिन (Atrazine) और सिमाजिन (Simazine) किस रासायनिक कुल के शाकनाशी हैं और मुख्यतः किन फसलों में प्रयुक्त होते हैं?
(A) s-ट्रायजीन (s-Triazines) — मक्का, ज्वार, बाजरा व गन्ने में
(B) फिनॉक्सी — चना व सरसों में
(C) क्लोरोएसिटामाइड — केवल प्याज में
(D) बाइपाइरिडिलियम — केवल गेहूँ में
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) s-ट्रायजीन (s-Triazines) — मक्का, ज्वार, बाजरा व गन्ने में
व्याख्या: एट्राजिन और सिमाजिन सममित ट्रायजीन (s-Triazine) कुल के हैं जो C4 फसलों (मक्का, ज्वार, गन्ना) में प्रयुक्त होते हैं।
8. ब्यूटाक्लोर (Butachlor) और प्रीटिलाक्लोर (Pretilachlor) किस रासायनिक कुल से संबंधित हैं?
(A) क्लोरोएसिटामाइड्स (Chloroacetamides / Acetanilides)
(B) डाइनाइट्रोएनिलीन
(C) इमिडाजोलिनोन
(D) ट्राइकीटोन्स
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) क्लोरोएसिटामाइड्स (Chloroacetamides / Acetanilides)
व्याख्या: ब्यूटाक्लोर, प्रीटिलाक्लोर, एलाक्लोर और मेटोलाक्लोर सभी क्लोरोएसिटामाइड कुल के प्री-इमर्जेंस शाकनाशी हैं।
9. कपास और भिंडी की संवेदनशील फसल पर किस शाकनाशी की सूक्ष्म फुहार (Spray drift) पड़ने पर पत्तियाँ मेंढक के पंजे जैसी मुड़ जाती हैं (Strap-leaf / Frog-foot malformation)?
(A) 2,4-D
(B) पेंडिमेथालिन
(C) क्लोडिनाफॉप
(D) ब्यूटाक्लोर
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) 2,4-D
व्याख्या: 2,4-D एक सिंथेटिक ऑक्सिन है जिसके ड्रिफ्ट से कपास और भिंडी में गंभीर स्ट्रैप-लीफ विकृति हो जाती है।
10. धान की सीधी बुवाई (DSR) और रोपित धान दोनों में बुवाई/रोपाई के 15–25 दिन बाद सांवा, चौड़ी पत्ती और सेज तीनों को नियंत्रित करने वाला लोकप्रिय पोस्ट-इमर्जेंस शाकनाशी (Nominee Gold) कौन-सा है?
(A) बिसपायरीबैक-सोडियम (Bispyribac-sodium 10% SC @ 20–25 g a.i./ha)
(B) आइसोप्रोट्यूरॉन
(C) सिमाजिन
(D) क्लोडिनाफॉप
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) बिसपायरीबैक-सोडियम (Bispyribac-sodium 10% SC @ 20–25 g a.i./ha)
व्याख्या: बिसपायरीबैक-सोडियम धान का सबसे व्यापक स्पेक्ट्रम पोस्ट-इमर्जेंस शाकनाशी है।

16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)

  1. फ्लूक्लोरालिन (Basalin) और ट्राइफ्लूरालिन को वाष्पशीलता के कारण बुवाई से पूर्व मिट्टी में मिलाकर (PPI) दिया जाता है।
  2. 2,4-D के तीन रूपों में ‘एस्टर’ रूप सर्वाधिक वाष्पशील व प्रभावी है, जबकि ‘अमीन’ रूप अवाष्पशील व पड़ोसी फसलों हेतु सुरक्षित है।
  3. पैराक्वाट (बाइपाइरिडिलियम कुल) अवरणात्मक संपर्क शाकनाशी है, जबकि ग्लाइफोसेट (ऑर्गेनोफॉस्फोनेट कुल) अवरणात्मक सर्वांगी शाकनाशी है।
  4. मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (4 g/ha) और सल्फोसलफ्यूरॉन (25 g/ha) सल्फोनिलयूरिया कुल के अति-सूक्ष्म मात्रा वाले (Ultra-low dose) शाकनाशी हैं।
  5. सोयाबीन और दलहनी फसलों में 15–20 DAS पर खड़ी फसल में छिड़का जाने वाला प्रमुख शाकनाशी ‘इमेजेथापायर’ (Imazethapyr) है।

(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)

1. प्रयोग के समय के आधार पर PPI, PE और PoE का एक-एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर: PPI: फ्लूक्लोरालिन (Basalin); PE: पेंडिमेथालिन (या एट्राजिन); PoE: 2,4-D (या सल्फोसलफ्यूरॉन / ग्लाइफोसेट)।
2. संपर्क (Contact) और सर्वांगी (Systemic) अवरणात्मक शाकनाशियों का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर: अवरणात्मक संपर्क: पैराक्वाट (Paraquat); अवरणात्मक सर्वांगी: ग्लाइफोसेट (Glyphosate)।
3. 2,4-D का पूरा रासायनिक नाम और इसके तीन व्यावसायिक रूप लिखिए।
उत्तर: 2,4-Dichlorophenoxyacetic acid; तीन रूप: (1) सोडियम लवण (80% WP), (2) अमीन लवण (58% SL), और (3) एथिल एस्टर (38% EC)।
4. सल्फोनिलयूरिया (Sulfonylurea) कुल के दो शाकनाशियों के नाम और उनकी मात्रा लिखिए।
उत्तर: (1) सल्फोसलफ्यूरॉन (25 g a.i./ha) और (2) मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (4 g a.i./ha)।
5. डाइनाइट्रोएनिलीन (Dinitroaniline) कुल के दो प्रमुख शाकनाशियों के नाम लिखिए।
उत्तर: (1) पेंडिमेथालिन (Pendimethalin) और (2) फ्लूक्लोरालिन (Fluchloralin)।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)

1. प्रयोग के समय के आधार पर शाकनाशियों (PPI, Pre-emergence एवं Post-emergence) का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर: (1) बुवाई-पूर्व मृदा समावेशित (PPI): वाष्पशील व प्रकाश-अपघटनीय शाकनाशियों को बुवाई से पूर्व मिट्टी पर छिड़ककर हैरो से मिला दिया जाता है; जैसे फ्लूक्लोरालिन और ट्राइफ्लूरालिन। (2) अंकुरण-पूर्व (Pre-emergence – PE): बुवाई के 0–3 दिन के भीतर फसल व खरपतवार उगने से पहले नम मिट्टी पर छिड़के जाते हैं; जैसे पेंडिमेथालिन, एट्राजिन, ब्यूटाक्लोर। (3) अंकुरण-पश्चात (Post-emergence – PoE): फसल और खरपतवार उगने के 15–35 दिन बाद सीधे खरपतवार की पत्तियों पर छिड़के जाते हैं; जैसे 2,4-D, सल्फोसलफ्यूरॉन, इमेजेथापायर, ग्लाइफोसेट।
2. संपर्क शाकनाशी (Contact herbicide) और सर्वांगी शाकनाशी (Systemic herbicide) में पैराक्वाट और ग्लाइफोसेट के उदाहरण से अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: संपर्क शाकनाशी (जैसे पैराक्वाट) पौधे के केवल उसी हरे भाग को 24–48 घंटे में जला देते हैं जहाँ उनकी बूंदें गिरती हैं; ये फ्लोएम में प्रवाहित नहीं होते, अतः बहुवर्षीय खरपतवारों (मोथा, दूब) के भूमिगत कंदों से पुनः कल्ले फूट आते हैं। इसके विपरीत, सर्वांगी शाकनाशी (जैसे ग्लाइफोसेट) पत्तियों से अवशोषित होकर फ्लोएम द्वारा भूमिगत कंदों व प्रकंदों तक पहुँचते हैं और 7–15 दिनों में पूरे पौधे को जड़ सहित समूल नष्ट कर देते हैं।
3. 2,4-D के तीनों व्यावसायिक लवणों/एस्टर के गुणधर्मों की तुलना कीजिए तथा कपास में इसकी विषाक्तता का लक्षण लिखिए।
उत्तर: (1) 2,4-D सोडियम लवण (80% WP): सस्ता व अवाष्पशील, किंतु कठोर जल में कैल्शियम के साथ अवक्षेप बनाता है। (2) 2,4-D अमीन लवण (58% SL): जल में पूर्ण घुलनशील व अवाष्पशील, पड़ोसी फसलों के पास सबसे सुरक्षित। (3) 2,4-D एथिल एस्टर (38% EC): वसा-घुलनशील होने से मोमी पत्तियों वाले खरपतवारों पर सर्वाधिक प्रभावी, किंतु अत्यधिक वाष्पशील। कपास व भिंडी पर इसकी भाप (Drift) लगने से पत्तियाँ मुड़कर मेंढक के पंजे जैसी (‘Strap-leaf / Frog-foot malformation’ व Epinasty) हो जाती हैं।
4. सल्फोनिलयूरिया (Sulfonylurea) कुल के शाकनाशियों की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? किन्हीं तीन उदाहरणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: सल्फोनिलयूरिया शाकनाशी ‘अति-सूक्ष्म मात्रा वाले शाकनाशी’ (Ultra-low dose herbicides) हैं जो किलोग्राम के बजाय मात्र कुछ ग्राम प्रति हेक्टेयर (4 से 25 g a.i./ha) में ही खरपतवारों के ALS एंजाइम को रोककर उन्हें नष्ट कर देते हैं और स्तनधारियों के लिए अत्यंत सुरक्षित हैं। तीन प्रमुख उदाहरण: (1) मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (4 g/ha — गेहूँ व धान में चौड़ी पत्ती हेतु), (2) सल्फोसलफ्यूरॉन (25 g/ha — गेहूँ में गेहूँसा व चौड़ी पत्ती हेतु), और (3) पाइराज़ोसल्फ्यूरॉन-इथाइल (20–25 g/ha — धान में PE/Early PoE)।
5. पेंडिमेथालिन, एट्राजिन और इमेजेथापायर के रासायनिक कुल, प्रयोग समय और लक्षित फसलों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर: (1) पेंडिमेथालिन: डाइनाइट्रोएनिलीन कुल, प्री-इमर्जेंस (0.75–1.0 kg/ha), लगभग सभी फसलों (गेहूँ, धान, सोयाबीन, दलहन, सब्जियाँ) में वार्षिक घासों हेतु। (2) एट्राजिन: s-ट्रायजीन कुल, प्री-इमर्जेंस/अर्ली पोस्ट-इमर्जेंस (0.5–1.0 kg/ha), मक्का, ज्वार, बाजरा व गन्ने में चौड़ी पत्ती व घासों हेतु। (3) इमेजेथापायर: इमिडाजोलिनोन कुल, अर्ली पोस्ट-इमर्जेंस (15–20 DAS पर @ 75–100 g/ha), सोयाबीन, मूंगफली, मूंग व उड़द में।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)

1. शाकनाशियों का (a) प्रयोग के समय (PPI, PE, PoE, Lay-by), (b) वरणात्मकता (Selective vs Non-selective), (c) पौधे में गतिशीलता (Contact vs Systemic — जाइलम व फ्लोएम) और (d) रासायनिक कुल (Chemical families) के आधार पर विस्तृत वैज्ञानिक वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: चारों आधारों पर शाकनाशियों का वर्गीकरण करते हुए 12 प्रमुख रासायनिक कुलों और उनके प्रतिनिधि शाकनाशियों को सारणीबद्ध रूप में विस्तार से लिखें।
2. निम्नलिखित प्रमुख शाकनाशियों के रासायनिक कुल, संरूपण, प्रयोग समय, सक्रिय तत्व की मात्रा (Dose a.i./ha), लक्षित फसल व खरपतवार तथा विशेष सावधानियों का वर्णन कीजिए: (i) 2,4-D, (ii) एट्राजिन, (iii) पेंडिमेथालिन, (iv) ब्यूटाक्लोर व प्रीटिलाक्लोर, (v) पैराक्वाट और (vi) ग्लाइफोसेट।
उत्तर रूपरेखा: छहों शाकनाशियों का पूर्ण विवरण और तुलनात्मक सारणी 9.1 के समस्त तकनीकी बिंदु प्रस्तुत करें।
3. आधुनिक कम मात्रा वाले (Low-dose / High-potency) पोस्ट-इमर्जेंस शाकनाशियों—सल्फोसलफ्यूरॉन, मेटसल्फ्यूरॉन, क्लोडिनाफॉप, बिसपायरीबैक-सोडियम और इमेजेथापायर—की भारतीय कृषि में उपयोगिता, मात्रा और लाभ-हानि की विवेचना कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: पाँचों आधुनिक PoE शाकनाशियों के कुल, मात्रा (4 g से 100 g/ha), धान-गेहूँ-सोयाबीन में उनके क्रांतिकारी योगदान और अवशेष/प्रतिरोध प्रबंधन का वर्णन करें।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGRON 311 notes।

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