AGRON 311 Lecture 03: फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाले कारक; वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करने वाले कारक | Hindi Notes
AGRO PATH FINDERAGRON 311 · Weed Management
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02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)Lecture 03: फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाले कारक; वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करने वाले कारक
02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)
इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:
- फसल-खरपतवार हस्तक्षेप (Crop-Weed Interference = Competition + Allelopathy) और संसाधन प्रतिस्पर्धा (पोषक तत्व—विशेषकर नाइट्रोजन, नमी, प्रकाश एवं CO₂/स्थान) के सिद्धांत को समझना।
- फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा की क्रांतिक अवधि (Critical Period of Crop-Weed Competition – CPCWC; Nieto et al., 1968 — फसल अवधि का प्रथम 1/3 भाग) और विभिन्न फसलों के CPCWC मानों को जानना।
- फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा की तीव्रता को प्रभावित करने वाले सस्य एवं जैविक कारकों (खरपतवार घनत्व, प्रजाति, फसल प्रकार, बुवाई समय, कतार अंतराल, उर्वरक प्लेसमेंट) का विश्लेषण करना।
- थर्स्टन (Thurston, 1959) के अनुसार खरपतवार बीज प्रसुप्ति के 3 प्रकारों—अंतर्निहित (Innate), प्रेरित (Induced) और बाध्य (Enforced dormancy)—को समझना।
- खरपतवारों की वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करने वाले वातावरणीय व पादप कारकों (तापमान, प्रकाशकाल, मृदा pH, C₃ बनाम C₄ प्रकाश-संश्लेषण पथ) का अध्ययन करना।
03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)
मूल सामग्री (Core Course Content): प्रकृति के ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ (Survival of the fittest) के नियम के अनुसार जब एक ही खेत में फसल और खरपतवार साथ-साथ उगते हैं, तो सीमित वृद्धि संसाधनों—पोषक तत्व (Nutrients), मृदा नमी (Moisture), सौर प्रकाश (Light) और स्थान (Space/CO₂)—को प्राप्त करने के लिए दोनों के बीच तीव्र संघर्ष होता है, जिसे फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा (Crop-Weed Competition / Allelospoly) कहते हैं।
वैज्ञानिक हार्पर (Harper, 1977) ने भौतिक संसाधन प्रतिस्पर्धा (Competition) और रासायनिक संदमन (Allelopathy) के संयुक्त नकारात्मक प्रभाव को व्यक्त करने के लिए ‘हस्तक्षेप’ (Interference) शब्द दिया: ।
04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)
05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)
1. फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा के 4 मुख्य घटक (Components of Crop-Weed Competition)
1. पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा (Competition for Nutrients)
• सभी संसाधनों में पोषक तत्वों (विशेषकर नाइट्रोजन – N) के लिए सबसे पहले और सबसे तीव्र प्रतिस्पर्धा होती है।
• खरपतवारों में फसलों की तुलना में पोषक तत्वों का ‘विलासिता उपभोग’ (Luxury consumption) करने की क्षमता होती है—शुष्क भार के आधार पर खरपतवार फसलों से दोगुना नाइट्रोजन, दोगुना कैल्शियम और तीन गुना पोटाश सोख लेते हैं (जैसे—Amaranthus में >3% N और Chenopodium व Portulaca में >4% K₂O संचित होता है)।
2. मृदा नमी / जल के लिए प्रतिस्पर्धा (Competition for Moisture)
• बारानी और शुष्क खेती (Rainfed/Dryland farming — जैसे राजस्थान में) में जल सबसे मुख्य सीमाकारी कारक है।
• 1 kg शुष्क पदार्थ बनाने के लिए जहाँ बाजरा/ज्वार की जल मांग (Transpiration ratio) मात्र 250–300 लीटर होती है, वहीं बथुआ (Chenopodium) की 658 लीटर, दूब घास (Cynodon) की 813 लीटर और जवासा/Tridax की >1000 लीटर होती है।
3. सौर प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा (Competition for Light / PAR)
• जब पानी और उर्वरक प्रचुर मात्रा में हों (सिंचित खेती में), तब प्रकाश मुख्य सीमाकारी कारक बन जाता है।
• तेजी से बढ़ने वाले ऊँचे खरपतवार (जैसे चौलाई, साँवा, बथुआ) बौनी फसलों (मूंगफली, सोयाबीन, दलहन, सब्जियाँ) को ढककर छाया (Shading) कर देते हैं जिससे प्रकाश-संश्लेषण रुक जाता है। जल और पोषक तत्वों के विपरीत, प्रकाश को मिट्टी में संचित नहीं किया जा सकता।
4. स्थान एवं CO₂ के लिए प्रतिस्पर्धा (Space & CO₂ Competition)
• C₄ खरपतवार कम CO₂ सांद्रता (Low CO₂ compensation point) पर भी तेजी से प्रकाश-संश्लेषण कर C₃ फसलों को दबा देते हैं और जड़ क्षेत्र का स्थान घेर लेते हैं।
2. फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Crop-Weed Competition)
- खरपतवार से संबंधित कारक (Weed Factors):
- खरपतवार का घनत्व (Weed Density): खरपतवारों की संख्या बढ़ने के साथ फसल उपज में संबंध सीधी रेखा न होकर ‘सिग्मॉइड वक्र’ (Sigmoid curve) जैसा होता है।
- खरपतवार की प्रजाति (Weed Species): संकरी पत्ती की तुलना में चौड़ी पत्ती वाले व बहुवर्षीय खरपतवार अधिक हानि पहुँचाते हैं (जैसे सोयाबीन में Xanthium strumarium या गेहूँ में Phalaris minor)।
- प्रतिस्पर्धा की अवधि (Duration / Period of Weed Growth): बुवाई के तुरंत बाद (प्रथम 15–45 दिन) उगने वाले खरपतवार सर्वाधिक नुकसान करते हैं, जबकि फसल बड़ी होने के बाद उगने वाले खरपतवार नगण्य हानि करते हैं।
- फसल एवं सस्य प्रबंधन से संबंधित कारक (Crop & Agronomic Factors):
- फसल की प्रजाति (Crop Species): सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी (Smothering) फसलें: लोबिया (Cowpea), सनई (Sunnhemp), ज्वार, बाजरा, मक्का और जौ (Barley); जबकि सबसे कम प्रतिस्पर्धी (कमजोर) फसलें: प्याज (Onion), लहसुन, गाजर, मूंगफली, सोयाबीन, उड़द और सीधी बुवाई वाला धान (Direct-seeded upland rice)।
- फसल की किस्म (Crop Variety): लंबी और तेजी से छत्र फैलाने वाली किस्में बौनी किस्मों की तुलना में खरपतवारों को अधिक दबाती हैं।
- बुवाई का समय, विधि एवं पौध घनत्व (Sowing Time, Spacing & Density): कतार से कतार की दूरी कम रखने (Closer spacing), क्रॉस-बुवाई (Bi-directional sowing) करने और इष्टतम बीज दर रखने से खरपतवारों को खाली जगह नहीं मिलती।
- उर्वरक एवं सिंचाई लगाने की विधि (Fertilizer & Water Placement): उर्वरक को पूरे खेत में छिटकने (Broadcasting) पर खरपतवारों को अधिक लाभ मिलता है; इसके बजाय फसल की जड़ों के पास बैंड प्लेसमेंट (Band placement) और ड्रिप सिंचाई करने से केवल फसल को पोषण मिलता है।
3. खरपतवारों की वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Weed Growth & Development)
- 1. बीज प्रसुप्ति के 3 प्रकार (Thurston, 1959): (i) Innate Dormancy (आनुवंशिक/कठोर आवरण), (ii) Induced Dormancy (अचानक प्रतिकूल वातावरण से प्रेरित), और (iii) Enforced Dormancy (गहरी मिट्टी में दबे होने के कारण प्रकाश व ऑक्सीजन का अभाव)।
- 2. प्रकाश-संश्लेषण पथ (C₃ vs C₄ Pathway): C₄ खरपतवारों (मोथा, साँवा, दूब, चौलाई) में क्रेन्ज़ एनाटॉमी (Kranz anatomy) होती है, फोटो-रेस्पिरेशन नहीं होता और वे उच्च तापमान (30–45°C) व तेज धूप में C₃ फसलों (धान, गेहूँ, दलहन) से दोगुनी गति से बढ़ते हैं।
- 3. तापमान एवं प्रकाशकाल (Temperature & Photoperiod): Parthenium और Cyperus दिवस-निष्प्रभावी (Day-neutral) होने के कारण साल भर फूल और बीज बनाते हैं।
- 4. मृदा कारक (Soil pH, Moisture & Aeration): Echinochloa crus-galli बिना ऑक्सीजन के खड़े पानी में भी अंकुरित हो सकता है, जबकि Phalaris minor को नमी व ठंडे तापमान (15–20°C) की आवश्यकता होती है।
06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)
प्रमुख फसलों में फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा की क्रांतिक अवधि (Critical Period of Crop-Weed Competition – CPCWC):
अंगूठा नियम: कुल फसल अवधि का प्रथम एक-तिहाई (1/3rd) काल क्रांतिक होता है।
07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)
- क्रांतिक अवधि का सिद्धांत (Principle of Critical Period — Nieto et al., 1968): क्रांतिक अवधि दो अलग-अलग घटकों के ओवरलैप से बनती है: (1) बुवाई के बाद वह अधिकतम अवधि जब तक खरपतवार रहने पर भी उपज हानि शुरू नहीं होती (प्रायः प्रथम 10–15 दिन), और (2) बुवाई के बाद वह न्यूनतम अवधि जब तक खेत को साफ रखने के बाद उगने वाले खरपतवार उपज नहीं घटाते (प्रायः 40–45 दिन के बाद)। अतः 15 से 45 DAS के बीच की खिड़की (Window) ही CPCWC है।
08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)
व्यावहारिक उदाहरण: धान की विभिन्न पद्धतियों में क्रांतिक अवधि का अंतर
- सीधी बुवाई वाले बारानी धान (Upland Direct-Seeded Rice – DSR): इसमें धान और खरपतवार एक साथ उगते हैं, इसलिए क्रांतिक अवधि 15 से 60 DAS (लगभग पूरी अवस्था) होती है और उपज हानि 50–90% तक हो सकती है।
- रोपित धान (Transplanted Puddled Rice – TPR): इसमें 25 दिन पुरानी पौध को कीचड़ और खड़े पानी में लगाया जाता है जिससे धान को खरपतवारों पर प्रारंभिक बढ़त (Head-start) मिल जाती है; अतः क्रांतिक अवधि घटकर 20 से 45 DAT रह जाती है।
09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)
तुलनात्मक सारणी 3.1: भारत की प्रमुख फसलों में फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा की क्रांतिक अवधि (CPCWC)
| फसल का नाम (Crop Name) | क्रांतिक अवधि — बुवाई/रोपाई के बाद दिन (DAS / DAT) | औसत संभावित उपज हानि (%) |
|---|---|---|
| 1. धान — सीधी बुवाई (Direct-Seeded Rice) | 15 – 45 DAS (बारानी में 15–60 DAS) | 40% – 85% |
| 2. धान — रोपित (Transplanted Rice) | 20 – 45 DAT (या 30–45 DAT) | 20% – 40% |
| 3. गेहूँ (Wheat) | 30 – 45 DAS (CRI अवस्था के बाद) | 20% – 40% |
| 4. मक्का (Maize) एवं ज्वार (Sorghum) | 15 – 45 DAS (या 15–35 DAS) | 30% – 50% |
| 5. बाजरा (Pearl Millet) | 15 – 30 DAS | 25% – 40% |
| 6. मूंगफली (Groundnut) एवं सोयाबीन (Soybean) | 20 – 45 DAS (या 15–45 DAS) | 35% – 60% |
| 7. मूंग एवं उड़द (Greengram & Blackgram) | 15 – 30 DAS | 30% – 50% |
| 8. चना (Chickpea) एवं सरसों (Mustard) | 30 – 60 DAS (सरसों में 15–40 DAS) | 25% – 45% |
| 9. गन्ना (Sugarcane — लंबी अवधि फसल) | 30 – 120 DAS (कल्ले फूटने की अवस्था) | 30% – 60% |
| 10. कपास (Cotton) एवं आलू (Potato) | कपास: 15 – 60 DAS | आलू: 20 – 40 DAS | 30% – 55% |
10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)
महत्वपूर्ण पारिस्थितिक समीकरण एवं क्रांतिक नियम (Key Competition Rules)
- हस्तक्षेप समीकरण (Harper, 1977):
- क्रांतिक अवधि का अंगूठा नियम (Thumb Rule of CPCWC):
- थर्स्टन (Thurston, 1959) प्रसुप्ति सूत्र:
• Innate = आनुवंशिक (पैदाइशी) | Induced = अचानक प्रतिकूल शॉक से प्रेरित | Enforced = गहरी मिट्टी में प्रकाश/ के अभाव से बाध्य
11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)
Lecture 03 Mind Map: फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा, क्रांतिक अवधि एवं वृद्धि कारक
- फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा एवं वृद्धि कारक (Interference = Competition + Allelopathy)
- प्रतिस्पर्धा के 4 घटक (4 Resources of Competition)
- 1. पोषक तत्व (सर्वाधिक तीव्र): नाइट्रोजन (N) हेतु सर्वाधिक स्पर्धा; खरपतवारों द्वारा N व K का विलासिता उपभोग
- 2. मृदा नमी: बारानी खेती में मुख्य सीमाकारी (बथुआ TR=658, दूब TR=813)
- 3. प्रकाश (PAR) व 4. स्थान/CO₂: सिंचित व बौनी फसलों में छाया (Shading) प्रभाव
- क्रांतिक अवधि (CPCWC — प्रथम 1/3 फसल काल)
- गेहूँ: 30–45 DAS | रोपित धान: 20–45 DAT | मक्का/सोयाबीन/मूंगफली: 15–45 DAS | मूंग/उड़द/बाजरा: 15–30 DAS | गन्ना: 30–120 DAS
- वृद्धि कारक एवं प्रसुप्ति (Thurston, 1959)
- प्रसुप्ति के 3 प्रकार: Innate (आनुवंशिक), Induced (वातावरणीय शॉक), Enforced (गहराई में O₂/प्रकाश अभाव)
- पादप कारक: C₄ प्रकाश-संश्लेषण (Kranz anatomy, शून्य फोटो-रेस्पिरेशन, उच्च ताप सहनशीलता)
- प्रतिस्पर्धा के 4 घटक (4 Resources of Competition)
12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)
प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): फसल जीवन चक्र में ‘क्रांतिक प्रतिस्पर्धा खिड़की’ (CPCWC Window) का निर्धारण
(छोटे पौधे; संसाधन प्रचुर; नगण्य हानि) ➔ 15 – 45 DAS (क्रांतिक अवधि – CPCWC)
(तीव्रतम N, जल व प्रकाश स्पर्धा ➔ नियंत्रण अनिवार्य) ➔ 45 DAS से कटाई तक
(फसल छत्र बंद; फसल स्वयं खरपतवार दबाती है) ➔ अधिकतम आर्थिक उपज
(न्यूनतम लागत में उच्च लाभ)
13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)
- फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा की क्रांतिक अवधि (CPCWC) सामान्यतः फसल की कुल अवधि का ‘प्रथम एक-तिहाई’ (First 1/3rd of crop duration) होती है।
- मुख्य फसलों की क्रांतिक अवधि के दिन याद रखें: गेहूँ = 30–45 DAS; मक्का/सोयाबीन/मूंगफली = 15–45 DAS; मूंग/उड़द/बाजरा = 15–30 DAS; और गन्ना (Sugarcane) = 30–120 DAS।
- थर्स्टन (Thurston, 1959) के प्रसुप्ति वर्गीकरण से हर साल प्रश्न आता है: गहरी जुताई से मिट्टी के नीचे दबे बीज का प्रकाश व ऑक्सीजन के अभाव में अंकुरित न हो पाना ‘बाध्य प्रसुप्ति’ (Enforced dormancy) कहलाता है।
- फसल और खरपतवार के बीच सभी पोषक तत्वों में सबसे पहले और सबसे तीव्र प्रतिस्पर्धा ‘नाइट्रोजन’ (Nitrogen – N) के लिए होती है।
- सभी अनाज फसलों में ‘जौ’ (Barley) और दलहनी फसलों में ‘लोबिया’ (Cowpea) खरपतवारों के विरुद्ध सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी (Smothering crop) हैं, जबकि प्याज और सीधी बुवाई वाला बारानी धान सबसे कम प्रतिस्पर्धी हैं।
14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)
- Interference: Competition (Allelospoly) + Allelopathy।
- CPCWC (Nieto et al., 1968): प्रथम 1/3 फसल अवधि (गेहूँ: 30–45 DAS; गन्ना: 30–120 DAS; मूंग/बाजरा: 15–30 DAS)।
- Dormancy (Thurston, 1959): Innate (Primary/Genetic), Induced (Secondary), Enforced (Environmental/Deep burial)।
- Most Competitive Crops: जौ (Barley), लोबिया (Cowpea), सनई (Sunnhemp)।
15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)
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16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)
- फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा की क्रांतिक अवधि (CPCWC) सामान्यतः फसल अवधि का ‘प्रथम एक-तिहाई (1/3rd) भाग’ होती है।
- गेहूँ में क्रांतिक अवधि 30–45 DAS, गन्ने में 30–120 DAS और मूंग/उड़द/बाजरा में 15–30 DAS होती है।
- सभी पोषक तत्वों में फसल और खरपतवार के बीच सबसे तीव्र प्रतिस्पर्धा ‘नाइट्रोजन’ (N) के लिए होती है।
- थर्स्टन (1959) ने खरपतवार बीज प्रसुप्ति को 3 भागों—Innate, Induced और Enforced dormancy—में बाँटा।
- अनाज फसलों में ‘जौ’ (Barley) खरपतवारों के विरुद्ध सर्वाधिक प्रतिस्पर्धी और ‘प्याज’ सबसे कमजोर प्रतिस्पर्धी फसल है।
(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)
(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)
(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGRON 311 notes।





