AGRON 311 Lecture 13: शाकनाशी मिश्रण, कृषि-रसायनों के साथ अनुकूलता एवं शाकनाशी प्रतिरोध व प्रबंधन | Hindi Notes
AGRO PATH FINDERAGRON 311 · Weed Management
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02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)Lecture 13: शाकनाशी मिश्रण, कृषि-रसायनों के साथ अनुकूलता एवं शाकनाशी प्रतिरोध व प्रबंधन
02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)
इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:
- शाकनाशी मिश्रण (Herbicide Mixture) की अवधारणा, प्रकार (Tank-mix बनाम Ready-mix/Pre-mix) और कृषि में इसकी उपयोगिता (Broad-spectrum control, reduced dose, resistance delay) को समझना।
- भारत में पंजीकृत प्रमुख रेडी-मिक्स शाकनाशियों (Total, Vesta, Atlantis, Broadway, Valor, Odyssey, Bensulfuron+Pretilachlor) के घटक और फसलों को याद करना।
- मिश्रण अंतःक्रियाओं—सहक्रियाशीलता (Synergism), विरोध (Antagonism) और योगात्मक प्रभाव (Additive effect)—तथा कॉल्बी के समीकरण (Colby’s Equation, 1967) की गणितीय गणना में पारंगत होना।
- अन्य कृषि-रसायनों (उर्वरक, कीटनाशी, कवकनाशी) के साथ शाकनाशियों की भौतिक एवं रासायनिक अनुकूलता (Compatibility), जार परीक्षण (Jar test) और स्प्रे टैंक में मिलाने के ‘W-A-L-E-S’ क्रम को समझना।
- शाकनाशी प्रतिरोध (Herbicide Resistance — सुप्त सहनशीलता बनाम प्रतिरोध; क्रॉस प्रतिरोध बनाम बहु-प्रतिरोध; लक्ष्य-स्थल बनाम गैर-लक्ष्य-स्थल प्रतिरोध), भारत में डॉ. आर.के. मलिक (1992–93) द्वारा गेहूँसा में आइसोप्रोट्यूरॉन प्रतिरोध की ऐतिहासिक खोज और प्रतिरोध प्रबंधन रणनीतियों का गहन अध्ययन करना।
03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)
मूल सामग्री (Core Course Content): किसी भी खेत में कभी भी केवल एक ही प्रजाति का खरपतवार नहीं उगता, बल्कि संकरी पत्ती वाली घासें (Grasses), चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार (Broad-leaved weeds) और सेज (Sedges) एक साथ मिश्रित रूप में उगते हैं। कोई भी अकेला चयनात्मक शाकनाशी (जैसे केवल 2,4-D या केवल क्लोडिनाफॉप) इन सभी को एक साथ नहीं मार सकता। इसी समस्या के समाधान के लिए ‘शाकनाशी मिश्रण’ (Herbicide Mixtures) का प्रयोग किया जाता है।
परंतु दो रसायनों को मिलाते समय उनकी ‘भौतिक एवं रासायनिक अनुकूलता’ (Compatibility) की जाँच अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि गलत संयोजन (जैसे क्लोडिनाफॉप + 2,4-D) आपस में टकराकर एक-दूसरे के प्रभाव को नष्ट (Antagonism) कर देते हैं या फसल को जला देते हैं। इसके साथ ही, इस व्याख्यान का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ ‘शाकनाशी प्रतिरोध’ (Herbicide Resistance) है—जिसने उत्तर-पश्चिमी भारत के गेहूँ के खेतों में आइसोप्रोट्यूरॉन को विफल कर हरित क्रांति के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा कर दिया था।
04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)
05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)
1. शाकनाशी मिश्रण की अवधारणा एवं कृषि में उपयोगिता (Concept & Utility of Herbicide Mixtures)
(A) कृषि में शाकनाशी मिश्रण के 5 प्रमुख लाभ:
- व्यापक स्पेक्ट्रम नियंत्रण (Broad-Spectrum Control in Single Pass): एक संकरी पत्ती नाशक + एक चौड़ी पत्ती नाशक मिलाने से एक ही छिड़काव में खेत के सभी खरपतवार नष्ट हो जाते हैं, जिससे श्रम, समय और डीजल की बचत होती है।
- शाकनाशी प्रतिरोध की रोकथाम व देरी (Delays Herbicide Resistance): दो भिन्न क्रियाविधि (MoA) वाले शाकनाशी एक साथ देने पर किसी खरपतवार में दोनों के विरुद्ध एक साथ उत्परिवर्तन होने की संभावना लगभग शून्य हो जाती है।
- मृदा अवशेष विषाक्तता में कमी (Reduced Soil Residue Carryover): मिश्रण में प्रत्येक शाकनाशी की मात्रा (Dose) 30–50% कम कर दी जाती है (जैसे मक्का में अकेले एट्राजिन 1.5 kg/ha के बजाय एट्राजिन 0.5 kg + पेंडिमेथालिन 0.5 kg/ha), जिससे अगली रबी दलहनी/तिलहनी फसल को अवशेष नुकसान नहीं होता।
- सहक्रियाशील प्रभाव (Synergistic Enhancement): कम मात्रा में अधिक मारक क्षमता।
(B) भारत में प्रचलित प्रमुख रेडी-मिक्स (Pre-mix / Ready-mix) व्यावसायिक शाकनाशी:
- 1. गेहूँ (Wheat) के लिए:
- सल्फोसलफ्यूरॉन (75%) + मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (5% WG) [व्यावसायिक नाम: Total @ 32 g a.i./ha] — गेहूँसा + चौड़ी पत्ती।
- क्लोडिनाफॉप-प्रोपार्जिल (15%) + मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (1% WP) [व्यावसायिक नाम: Vesta / Agritop @ 60 + 4 g/ha]।
- मेसोसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (3%) + आयोडोसल्फ्यूरॉन-मिथाइल-सोडियम (0.6% WDG) [व्यावसायिक नाम: Atlantis @ 14.4 g a.i./ha]।
- कारफेंट्राजोन-इथाइल (20%) + सल्फोसलफ्यूरॉन (25% WDG) [व्यावसायिक नाम: Broadway]।
- 2. धान (Rice) के लिए:
- मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (10%) + क्लोरिम्यूरॉन-इथाइल (10% WP) [व्यावसायिक नाम: Almix @ 4 g a.i./ha (20 g उत्पाद/ha)] — चौड़ी पत्ती व सेज हेतु।
- बेनसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (0.6%) + प्रीटिलाक्लोर (6% G) [व्यावसायिक नाम: Londax Power @ 10 kg/ha]।
- पेनोक्ससुलम (1.02%) + सायहालोफॉप-ब्यूटाइल (5.1% OD) [व्यावसायिक नाम: Vivaya]।
- 3. सोयाबीन, मूंगफली एवं दलहन (Pulses & Oilseeds) के लिए:
- पेंडिमेथालिन (30%) + इमेजेथापायर (2% EC) [व्यावसायिक नाम: Valor 32 @ 1.0 kg/ha PE]।
- इमेजेथापायर (35%) + इमाज़ामॉक्स (35% WG) [व्यावसायिक नाम: Odyssey @ 70 g a.i./ha PoE]।
- प्रोपाक्विज़ाफॉप (2.5%) + इमेजेथापायर (3.75% ME) [व्यावसायिक नाम: Shaked]।
2. कृषि-रसायनों के साथ शाकनाशी की अनुकूलता एवं WALES नियम (Compatibility with Agro-chemicals)
(A) अंसंगति / प्रतिकूलता के 3 प्रकार (Types of Incompatibility):
- भौतिक प्रतिकूलता (Physical Incompatibility): टैंक में मिलाने पर दही जैसा फटना (Curdling), अवक्षेप बनना (Precipitation), तेल अलग होना या नोजल जाम होना (जैसे कठोर जल या कैल्शियम नाइट्रेट के साथ 2,4-D सोडियम लवण)। जाँच: छिड़काव से पूर्व 1 लीटर काँच के जार में ‘जार परीक्षण’ (Jar Test) करें।
- रासायनिक एवं जैविक विरोध (Chemical & Biological Antagonism):
- क्लोडिनाफॉप / फिनोक्साप्रॉप (FOPs) + 2,4-D या मेटसल्फ्यूरॉन का टैंक-मिक्स विरोध: गेहूँ में जब किसान क्लोडिनाफॉप (घास नाशक) के साथ 2,4-D (चौड़ी पत्ती नाशक) को टैंक में मिलाता है, तो 2,4-D घास में क्लोडिनाफॉप के अवशोषण और स्थानांतरण को घटा देता है, जिससे गेहूँसा नहीं मरता (Severe Antagonism)! समाधान: दोनों के छिड़काव में 5–7 दिन का अंतर रखें।
- ग्लाइफोसेट / पैराक्वाट + एट्राजिन / ड्यूरॉन: मिट्टी या संपर्क अवरोध के कारण ग्लाइफोसेट का फ्लोएम स्थानांतरण रुक जाता है।
- फसल-विषाक्त सहक्रियाशीलता (Phytotoxic Synergism with Insecticides):
- धान में प्रोपानिल + कार्बारिल / ऑर्गेनोफॉस्फेट कीटनाशी: कार्बारिल धान के सुरक्षात्मक एंजाइम Aryl acylamidase को रोक देता है जिससे प्रोपानिल धान की फसल को ही जला देता है।
(B) स्प्रे टैंक में रसायनों को मिलाने का अंतरराष्ट्रीय मानक क्रम — ‘W-A-L-E-S’ नियम:
- स्प्रे टैंक को पहले आधा पानी से भरें और फिर निम्नलिखित क्रम (W-A-L-E-S) में रसायन डालें:
W = Wettable Powders (WP) एवं Water Dispersible Granules (WDG/WG) सबसे पहले डालें;
A = Agitation (अच्छी तरह हिलाएँ ताकि चूर्ण पूरी तरह निलंबित हो जाए);
L = Liquid Flowables / Suspension Concentrates (SC);
E = Emulsifiable Concentrates (EC);
S = Soluble Liquids (SL) और अंत में Surfactants / Adjuvants।
3. शाकनाशी प्रतिरोध एवं उसका प्रबंधन (Herbicide Resistance & Its Management)
(A) विश्व एवं भारत में शाकनाशी प्रतिरोध का इतिहास
- विश्व का प्रथम शाकनाशी प्रतिरोध प्रकरण (1968–1970, USA): जी.एफ. रयान (G.F. Ryan, 1970) ने अमेरिका के वाशिंगटन राज्य में एक नर्सरी में ‘सिमाजिन और एट्राजिन’ (Triazines) के प्रति प्रतिरोधी Senecio vulgaris (Common groundsel) की खोज की।
- भारत का ऐतिहासिक प्रकरण (1992–93, हरियाणा): चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCSHAU, हिसार) के प्रख्यात खरपतवार वैज्ञानिक डॉ. आर.के. मलिक एवं डॉ. सैम अंडरहिल (Dr. R.K. Malik & S.W.SS. Singh, 1992–93) ने करनाल और कुरुक्षेत्र जिलों के धान-गेहूँ क्षेत्रों में लगातार 10–12 वर्षों तक ‘आइसोप्रोट्यूरॉन’ (Isoproturon) के एकल प्रयोग के कारण गेहूँसा (Phalaris minor) में विश्व का सबसे गंभीर आइसोप्रोट्यूरॉन प्रतिरोध खोजा, जिससे प्रतिरोधी गेहूँसा को मारने के लिए 8 से 16 गुना अधिक मात्रा (Resistance Factor = 8–16x) भी कम पड़ने लगी।
- वर्तमान स्थिति (Multiple Resistance in Phalaris minor): 1997 में आइसोप्रोट्यूरॉन के स्थान पर क्लोडिनाफॉप, फिनोक्साप्रॉप और सल्फोसलफ्यूरॉन की सिफारिश की गई, किंतु आज पंजाब व हरियाणा में गेहूँसा के जैव-प्रारूपों ने तीन अलग-अलग क्रियाविधियों (PS-II: आइसोप्रोट्यूरॉन + ACCase: क्लोडिनाफॉप/पिनोक्साडेन + ALS: सल्फोसलफ्यूरॉन/मेसोसल्फ्यूरॉन) के विरुद्ध खतरनाक ‘बहु-प्रतिरोध’ (Multiple Resistance) विकसित कर लिया है! वर्तमान में ऐसे बहु-प्रतिरोधी गेहूँसा के नियंत्रण हेतु प्री-इमर्जेंस पाइरोक्सासल्फोन (Pyroxasulfone — ‘Awkira’ @ 127.5 g a.i./ha) या पेंडिमेथालिन + मेट्रीब्यूजिन की सिफारिश की जाती है।
(B) शाकनाशी प्रतिरोध के दो मुख्य जैव-रासायनिक तंत्र (2 Mechanisms of Resistance):
1. लक्ष्य-स्थल प्रतिरोध (Target-Site Resistance – TSR)
खरपतवार के जीन में बिंदु उत्परिवर्तन (Point mutation — जैसे D1 प्रोटीन में Ser-264-Gly या ALS/ACCase जीन में अमीनो अम्ल बदलाव) हो जाता है जिससे लक्ष्य एंजाइम का आकार बदल जाता है और शाकनाशी उस पर लॉक नहीं हो पाता, या लक्ष्य एंजाइम का अत्यधिक उत्पादन (Gene amplification — जैसे EPSPS) होने लगता है।
2. गैर-लक्ष्य-स्थल प्रतिरोध (Non-Target-Site Resistance – NTSR)
खरपतवार के अंदर साइटोक्रोम P450 मोनोऑक्सीजिनेज (Cyt P450) और GST एंजाइमों की अत्यधिक सक्रियता से शाकनाशी लक्ष्य स्थल पर पहुँचने से पहले ही टूटकर निष्क्रिय हो जाता है (जैसे भारतीय गेहूँसा में आइसोप्रोट्यूरॉन प्रतिरोध का मुख्य कारण Cyt P450 द्वारा त्वरित डिमेथिलेशन था), या शाकनाशी रिक्तिका में बंद (Vacuolar sequestration — जैसे पैराक्वाट/ग्लाइफोसेट) कर दिया जाता है।
(C) शाकनाशी प्रतिरोध का समन्वित प्रबंधन (Management Strategies for Herbicide Resistance):
- शाकनाशी चक्रण एवं मिश्रण (Herbicide Rotation & Mixture by HRAC Group): हर साल एक ही क्रियाविधि (MoA) का शाकनाशी कभी न लगाएँ; अलग-अलग HRAC समूह के शाकनाशियों का चक्रण और प्री-मिक्स मिश्रण अपनाएँ।
- फसल चक्र (Crop Rotation — सबसे अचूक अस्त्र): गेहूँसा-प्रभावित खेतों में 2–3 वर्ष के लिए गेहूँ की जगह बरसीम, सरसों, चना, आलू या सूरजमुखी उगाने से प्रतिरोधी गेहूँसा का बीज बैंक 90% समाप्त हो जाता है।
- बुवाई समय व विधि में परिवर्तन: अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से 5 नवंबर तक हैप्पी सीडर / जीरो-टिल ड्रिल से गेहूँ की अगेती बुवाई (इस समय तापमान अधिक होने से गेहूँसा अंकुरित नहीं होता)।
- एकीकृत यांत्रिक एवं सांस्कृतिक नियंत्रण (IWM): स्टेल सीडबेड + सही अनुशंसित मात्रा में प्री-इमर्जेंस शाकनाशी (पाइरोक्सासल्फोन / पेंडिमेथालिन) + 30–35 DAS पर एक गुड़ाई तथा कटाई से पहले बचे हुए खरपतवारों की बालियों को उखाड़कर जलाना (Roguing before seed shedding)।
06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)
शाकनाशी प्रतिरोध एवं मिश्रण के प्रकारों का वर्गीकरण:
- पादप प्रतिक्रिया के प्रकार: (1) संवेदनशीलता (Susceptibility), (2) प्राकृतिक सहनशीलता (Tolerance — पहले से मौजूद स्वाभाविक क्षमता), (3) शाकनाशी प्रतिरोध (Resistance — चयन दबाव से विकसित वंशानुगत क्षमता)।
- प्रतिरोध के प्रकार: (1) एकल प्रतिरोध (Single resistance), (2) क्रॉस-प्रतिरोध (Cross-resistance — समान MoA), (3) बहु-प्रतिरोध (Multiple resistance — भिन्न MoA), (4) नकारात्मक क्रॉस-प्रतिरोध (Negative cross-resistance — एक के प्रति प्रतिरोधी होने पर दूसरे के प्रति अधिक संवेदनशील होना)।
07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)
- डार्विनियन चयन दबाव का सिद्धांत (Principle of Selection Pressure in Herbicide Resistance): शाकनाशी स्वयं खरपतवार में उत्परिवर्तन (Mutation) पैदा नहीं करता! करोड़ों खरपतवार पौधों में प्राकृतिक रूप से 1 प्रतिरोधी उत्परिवर्तित पौधा ( आवृत्ति) पहले से मौजूद होता है। जब किसान लगातार 8–10 साल एक ही शाकनाशी छिड़कता है, तो सभी संवेदनशील पौधे मर जाते हैं और केवल वही 1 प्रतिरोधी पौधा बीज बनाकर कुछ ही वर्षों में पूरे खेत पर कब्जा कर लेता है।
08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)
हल किया गया संख्यात्मक प्रश्न: कॉल्बी के समीकरण (Colby’s Equation, 1967) द्वारा शाकनाशी मिश्रण में Synergism / Antagonism की जाँच
प्रश्न: किसी खेत में शाकनाशी अकेले प्रयोग करने पर खरपतवार नियंत्रण () देता है और शाकनाशी अकेले प्रयोग करने पर खरपतवार नियंत्रण () देता है। जब को टैंक-मिक्स करके छिड़का गया, तो वास्तविक प्रेक्षित नियंत्रण (Observed control, ) प्राप्त हुआ। कॉल्बी के सूत्र से अपेक्षित नियंत्रण () ज्ञात कीजिए और बताइए कि यह मिश्रण सहक्रियाशील (Synergistic) है या विरोधी (Antagonistic)?
हल (Solution):
- कॉल्बी का सूत्र (Colby’s Formula, 1967):
$$ - मान रखने पर:
$$ - निष्कर्ष: चूँकि वास्तविक प्रेक्षित नियंत्रण () कॉल्बी के अपेक्षित नियंत्रण () से अधिक है (), अतः दोनों शाकनाशियों के बीच ‘सहक्रियाशीलता’ (Synergism) है! (यदि होता तो Antagonism और यदि होता तो Additive प्रभाव कहलाता)।
09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)
तुलनात्मक सारणी 13.1: शाकनाशी सहनशीलता बनाम प्रतिरोध एवं क्रॉस-प्रतिरोध बनाम बहु-प्रतिरोध
| तुलना का आधार | शाकनाशी सहनशीलता (Tolerance) | शाकनाशी प्रतिरोध (Resistance) | क्रॉस-प्रतिरोध (Cross-Resistance) | बहु-प्रतिरोध (Multiple Resistance) |
|---|---|---|---|---|
| 1. उत्पत्ति का कारण | प्रजाति में जन्मजात / प्राकृतिक रूप से पहले से मौजूद क्षमता (चयन दबाव आवश्यक नहीं)। | एक ही शाकनाशी के बार-बार प्रयोग (Selection pressure) से दुर्लभ उत्परिवर्तित जैव-प्रारूप का चयन। | एकल प्रतिरोध तंत्र (Single mechanism) के कारण विकसित। | दो या अधिक स्वतंत्र प्रतिरोध तंत्रों के क्रमिक संचय से विकसित। |
| 2. क्रियाविधि (MoA) का दायरा | पूरी प्रजाति किसी शाकनाशी को सहन करती है। | प्रजाति का केवल एक विशिष्ट जैव-प्रारूप (Biotype) प्रतिरोधी होता है। | समान क्रियाविधि (Same Mode of Action) के अनेक शाकनाशियों के प्रति प्रतिरोध। | भिन्न-भिन्न क्रियाविधि (Different Modes of Action) के शाकनाशियों के प्रति प्रतिरोध। |
| 3. उत्कृष्ट उदाहरण | गेहूँ में 2,4-D के प्रति प्राकृतिक सहनशीलता; मोथा में 2,4-D सहनशीलता। | हरियाणा/पंजाब में गेहूँसा (Phalaris minor) में आइसोप्रोट्यूरॉन प्रतिरोध। | क्लोरिम्यूरॉन के प्रति प्रतिरोधी खरपतवार का मेटसल्फ्यूरॉन (दोनों ALS अवरोधक) के प्रति भी प्रतिरोधी होना। | गेहूँसा का एक साथ आइसोप्रोट्यूरॉन (PS-II) + क्लोडिनाफॉप (ACCase) + सल्फोसलफ्यूरॉन (ALS) तीनों के प्रति प्रतिरोधी होना। |
10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)
शाकनाशी मिश्रण एवं प्रतिरोध मूल्यांकन के प्रमुख सूत्र
- 1. कॉल्बी का अपेक्षित प्रतिक्रिया समीकरण (Colby’s Equation for Herbicide Mixtures, 1967):
$$
• यदि
• यदि
• यदि - 2. प्रतिरोध गुणांक / सूचकांक (Resistance Factor / Index — RF or R/S Ratio):
$$
(जब होता है, तो प्रतिरोध की पुष्टि हो जाती है।) - 3. स्प्रे टैंक मिश्रण क्रम (Tank Mixing Order): $$
11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)
- Tank-mix (किसान द्वारा टैंक में) बनाम Ready-mix (कंपनी पैक)
- गेहूँ रेडी-मिक्स: Total (Sulfosulfuron+Metsulfuron), Vesta, Atlantis
- धान रेडी-मिक्स: Almix (Metsulfuron+Chlorimuron), Londax Power
- दलहन रेडी-मिक्स: Valor-32 (Pendimethalin+Imazethapyr), Odyssey
- कॉल्बी समीकरण: E = X + Y – (XY/100)
- Synergism (O > E), Antagonism (O < E), Additive (O = E)
- विरोध उदाहरण: क्लोडिनाफॉप + 2,4-D (गेहूँसा नियंत्रण विफल)
- फसल क्षति: धान में प्रोपानिल + कार्बारिल कीटनाशी | टैंक क्रम: W-A-L-E-S
- विश्व प्रथम (1970, Ryan): Senecio vulgaris में Simazine/Atrazine प्रतिरोध
- भारत प्रथम (1992-93, डॉ. आर.के. मलिक): Phalaris minor में Isoproturon प्रतिरोध
- Cross-resistance (समान MoA) बनाम Multiple resistance (भिन्न MoA)
- Target-site (उत्परिवर्तन) बनाम Non-target-site (Cyt P450 विषहरण)
- अलग-अलग HRAC क्रियाविधि समूह के शाकनाशियों का चक्रण
- बहु-प्रतिरोधी गेहूँसा हेतु: पाइरोक्सासल्फोन (Pyroxasulfone PE)
- धान-गेहूँ की जगह 2-3 वर्ष बरसीम/सरसों/आलू का फसल चक्र
- अगेती जीरो-टिल बुवाई + कटाई पूर्व बचे खरपतवार उखाड़ना (Roguing)
12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)
13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)
- विश्व में शाकनाशी प्रतिरोध का प्रथम मामला 1970 में जी.एफ. रयान (G.F. Ryan) ने ‘Senecio vulgaris’ खरपतवार में सिमाजिन और एट्राजिन (Triazines) के विरुद्ध रिपोर्ट किया था।
- भारत में शाकनाशी प्रतिरोध का प्रथम और सबसे गंभीर मामला 1992–93 में डॉ. आर.के. मलिक (CCSHAU, हिसार) ने गेहूँ के खरपतवार ‘गेहूँसा’ (Phalaris minor) में ‘आइसोप्रोट्यूरॉन’ के विरुद्ध खोजा था।
- बहु-प्रतिरोधी (Multiple-resistant) गेहूँसा के नियंत्रण के लिए वर्तमान में सर्वाधिक प्रभावी नया प्री-इमर्जेंस शाकनाशी ‘पाइरोक्सासल्फोन’ (Pyroxasulfone 85% WG @ 127.5 g a.i./ha) है।
- गेहूँ में क्लोडिनाफॉप या फिनोक्साप्रॉप (घास नाशक) के साथ 2,4-D (चौड़ी पत्ती नाशक) को टैंक-मिक्स करने पर ‘विरोध’ (Antagonism) होता है जिससे गेहूँसा नहीं मरता।
- शाकनाशी मिश्रण की सहक्रियाशीलता (Synergism) या विरोध (Antagonism) की गणना ‘कॉल्बी के सूत्र’ [E = X + Y – (XY/100)] द्वारा की जाती है।
14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)
त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):
- प्रमुख रेडी-मिक्स: Total (Sulfosulfuron + Metsulfuron), Vesta (Clodinafop + Metsulfuron), Atlantis (Mesosulfuron + Iodosulfuron), Almix (Metsulfuron + Chlorimuron), Valor-32 (Pendimethalin + Imazethapyr), Odyssey (Imazethapyr + Imazamox)।
- कॉल्बी समीकरण: ; (Synergism), (Antagonism)।
- टैंक मिश्रण क्रम: W-A-L-E-S (WP/WG Agitation SC EC SL/Surfactant)।
- शाकनाशी प्रतिरोध: विश्व प्रथम — Senecio vulgaris (Ryan, 1970); भारत प्रथम — Phalaris minor में आइसोप्रोट्यूरॉन प्रतिरोध (Dr. R.K. Malik, 1992–93)।
15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
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16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)
- भारत में 1992–93 में डॉ. आर.के. मलिक ने गेहूँसा (Phalaris minor) में ‘आइसोप्रोट्यूरॉन’ के विरुद्ध शाकनाशी प्रतिरोध खोजा था।
- विश्व में प्रथम शाकनाशी प्रतिरोध 1970 में जी.एफ. रयान ने ‘Senecio vulgaris’ में ट्रायजीन के विरुद्ध रिपोर्ट किया था।
- समान क्रियाविधि (Same MoA) के प्रति प्रतिरोध ‘क्रॉस-प्रतिरोध’ और भिन्न क्रियाविधि (Different MoA) के प्रति प्रतिरोध ‘बहु-प्रतिरोध’ कहलाता है।
- शाकनाशी मिश्रण में सहक्रियाशीलता (Synergism) या विरोध (Antagonism) की जाँच ‘कॉल्बी के समीकरण’ [E = X + Y – (XY/100)] से होती है।
- गेहूँ में क्लोडिनाफॉप और 2,4-D को साथ मिलाने पर ‘विरोध’ (Antagonism) होता है, जबकि धान में प्रोपानिल और कार्बारिल मिलाने पर धान झुलस जाता है।
(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)
(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)
(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGRON 311 notes।





