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AGRON 311 Lecture 08: जैविक एवं प्राकृतिक खेती में खरपतवार प्रबंधन | Hindi Notes

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AGRON 311 · Weed Management
विषय सूची · Quick Navigation02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
शैक्षणिक संदर्भ: शाकनाशियों की दरें, मिश्रण और उपयोग उपलब्ध कराए गए स्रोत का हिस्सा हैं। खेत में प्रयोग से पहले फसल-विशिष्ट वर्तमान label claim तथा स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय/KVK की अनुशंसा जाँचें।
Lecture 08 Source Page Reference in Supplied Pack: 130 (AGRON 311 Theory Lecture 08)

Lecture 08: जैविक एवं प्राकृतिक खेती में खरपतवार प्रबंधन

Weed management in organic/ natural farming

02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:

  • जैविक खेती (Organic Farming — NPOP/IFOAM मानक) और प्राकृतिक खेती (Natural Farming — सुभाष पालेकर के 4 स्तंभ) में खरपतवारों के प्रति पारिस्थितिक दृष्टिकोण और कृत्रिम रासायनिक शाकनाशियों के पूर्ण निषेध को समझना।
  • प्राकृतिक खेती के चौथे स्तंभ ‘आच्छादन’ (Acchadana / Mulching) के तीनों रूपों—मृदा आच्छादन (Soil mulch), काष्ठ/फसल अवशेष आच्छादन (Straw mulch) और सजीव आच्छादन (Live mulch)—की खरपतवार दमन में भूमिका का विश्लेषण करना।
  • एलीलोपैथिक फसलों एवं पादप निष्कर्षों (Allelopathic crops & water extracts — जैसे ज्वार का सोरगोलियोन, सूरजमुखी का हेलिएन्नोल, सरसों का आइसोथायोसाइनेट, नीलगिरी व कांग्रेस घास के शत्रु पौधे) के वैज्ञानिक उपयोग को जानना।
  • तापीय खरपतवार नियंत्रण (Thermal / Flame weeding, Infrared & Steam weeding), मृदा सौरीकरण (Soil solarization) और स्टेल सीडबेड (Stale seedbed) की क्रियाविधि समझना।
  • जैविक खेती में अनुमत प्राकृतिक जैव-रसायनों (Corn gluten meal, Acetic acid/Vinegar, Clove/Cinnamon essential oils, Pelargonic acid) तथा धान-बत्तख-अजोला (Rice-Duck-Azolla) प्रणाली का अध्ययन करना।

03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): जब कोई किसान रासायनिक खेती छोड़कर जैविक खेती (Organic Farming) या प्राकृतिक खेती (Subhash Palekar Natural Farming — SPNF / ZBNF) अपनाता है, तो उसके सामने सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती ‘बिना सिंथेटिक शाकनाशी के खरपतवार प्रबंधन’ ही होती है। राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP, भारत) और IFOAM के मानकों के अंतर्गत किसी भी कृत्रिम रासायनिक शाकनाशी (जैसे 2,4-D, ग्लाइफोसेट, एट्राजिन, पेंडिमेथालिन) का प्रयोग पूर्णतः वर्जित है।

जैविक और प्राकृतिक खेती का मूल दर्शन खरपतवारों से ‘युद्ध’ करने के बजाय मृदा-फसल पारिस्थितिकी को इस प्रकार प्रबंधित करना है कि खरपतवारों को उगने के लिए खाली स्थान और सूर्य का प्रकाश ही न मिले। इसके लिए भूमि को वर्ष भर ‘आच्छादन’ (Mulching / Cover crops) से ढककर रखना, एलीलोपैथी (Allelopathy) का उपयोग करना, स्टेल सीडबेड, मृदा सौरीकरण, फ्लेम वीडिंग और वानस्पतिक/सूक्ष्मजीवी बायो-हर्बिसाइड्स का एकीकृत उपयोग किया जाता है।

04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

आच्छादन (Acchadana / Mulching in Natural Farming)
पद्मश्री सुभाष पालेकर की प्राकृतिक खेती के 4 स्तंभों (बीजामृत, जीवामृत, वाप्सा और आच्छादन) में से चौथा प्रमुख स्तंभ, जिसमें मिट्टी की सतह को फसल अवशेषों या सजीव अंतःफसलों से ढककर सूर्य के प्रकाश को रोका जाता है जिससे खरपतवार अंकुरित नहीं हो पाते और जीवामृत के सूक्ष्मजीवों हेतु उत्तम सूक्ष्म-जलवायु बनती है।
एलीलोपैथी (Allelopathy — Hans Molisch, 1937)
एक पौधे (या उसके सड़े-गले अवशेषों) द्वारा वातावरण या मृदा में छोड़े गए द्वितीयक उपापचयी रसायनों (Allelochemicals — जैसे फिनोलिक्स, टर्पेनॉइड्स, सोरगोलियोन, ग्लूकोसिनोलेट्स) द्वारा पड़ोसी खरपतवारों के अंकुरण और वृद्धि को दबाने की जैव-रासायनिक परिघटना।
जैव-धूमन (Bio-fumigation)
क्रूसीफेरी कुल की फसलों (जैसे सरसों — Brassica juncea, मूली) के हरे बायोमास को फूल आने से पहले मिट्टी में जोतकर मिलाने और हल्की सिंचाई करने की प्रक्रिया, जिसमें ‘ग्लूकोसिनोलेट्स’ (Glucosinolates) के जल-अपघटन से वाष्पशील ‘आइसोथायोसाइनेट्स’ (Isothiocyanates – ITCs) गैस निकलती है जो खरपतवार के बीजों और मृदा जनित रोगजनकों को नष्ट कर देती है।
तापीय / ज्वाला निराई (Flame Weeding / Thermal Weeding)
प्रोपेन या एलपीजी गैस बर्नर से 800°C–1000°C की नियंत्रित ज्वाला को मात्र 0.1–0.5 सेकंड के लिए छोटे खरपतवारों पर गुजारने की विधि, जिससे पौधे को जलाकर राख करने के बजाय उसकी कोशिकाओं का पानी उबलकर (95–100°C) कोशिका भित्ति फट जाती है और खरपतवार 2–3 दिन में मुरझाकर मर जाता है।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. प्राकृतिक खेती में ‘आच्छादन’ (Acchadana) के तीन रूप एवं खरपतवार दमन

प्राकृतिक खेती (SPNF) में खरपतवार को भूमि का शत्रु नहीं बल्कि पोषक तत्वों का भंडार माना जाता है और उसे तीन प्रकार के आच्छादन (Mulching) द्वारा प्रबंधित किया जाता है:

1. मृदा आच्छादन (Soil Mulch)

गहरी जुताई न करके केवल ऊपरी 10–15 cm मिट्टी की हल्की जुताई/गुड़ाई करना, जिससे नीचे दबे खरपतवार बीज ऊपर आकर अंकुरित नहीं होते और केशिका नलियाँ टूटने से नमी संरक्षित रहती है।

2. काष्ठ / फसल अवशेष आच्छादन (Straw / Biomass Mulch)

पिछली फसल के सूखे डंठल, पुआल, गन्ने की पत्ती या सूखे खरपतवारों की 7.5–10 cm (5–7 t/ha) मोटी परत कतारों के बीच बिछाना। इससे प्रकाश-संवेदी खरपतवार बीज (Photoblastic weed seeds) अंधेरे के कारण अंकुरित ही नहीं हो पाते (80–90% खरपतवार दमन) और अपघटन से ह्यूमस बनता है।

3. सजीव आच्छादन (Live Mulch / Smother Intercropping)

मुख्य फसल (एकबीजपत्री) की कतारों के बीच तेजी से जमीन ढकने वाली द्विबीजपत्री दलहनी फसलें (लोबिया, मूंग, उड़द, मेथी, धनिया) उगाना जो 20–25 दिन में भूमि को ढककर खरपतवारों का दम घोंट (Smothering) देती हैं और वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिर करती हैं।

2. एलीलोपैथी एवं पादप-निष्कर्ष (Allelopathy & Botanical Extracts in Organic Weed Control)

प्रकृति ने अनेक फसलों और वनस्पतियों को स्वयं के प्राकृतिक शाकनाशी (Allelochemicals) बनाने की क्षमता दी है:

  • 1. ज्वार (Sorghum bicolor) — ‘सोरगोलियोन’ (Sorgoleone) एवं ‘धुरिन’ (Dhurrin): ज्वार की जड़ों से स्रावित ‘सोरगोलियोन’ एक अत्यंत शक्तिशाली प्राकृतिक PS-II प्रकाश-संश्लेषण अवरोधक (बिल्कुल एट्राजिन की तरह) है। पाकिस्तान और भारत में किण्वित ज्वार के जलीय अर्क ‘सोर्गैब’ (Sorgaab — Sorghum Water Extract @ 12–15 L/ha) के छिड़काव से गेहूँ में बथुआ और जंगली जई में 40–50% कमी पाई गई है।
  • 2. सूरजमुखी (Helianthus annuus) — ‘हेलिएन्नोल’ (Heliannuols) एवं सेस्क्विटरपीन लैक्टोन: सूरजमुखी की पत्तियों व अवशेषों की मल्चिंग गेहूँसा व चौड़ी पत्ती के खरपतवारों का अंकुरण रोकती है।
  • 3. सरसों एवं राई (Brassica spp.) — ‘बायो-फ्यूमिगेशन’ (Glucosinolates → Isothiocyanates): सरसों की खली या हरी खाद मिट्टी में मिलाने पर निकलने वाला एलील आइसोथायोसाइनेट (Allyl isothiocyanate) खरपतवार के बीजों को मार देता है।
  • 4. नीलगिरी (Eucalyptus globulus) — ‘सिनिओल’ (1,8-Cineole): नीलगिरी के पत्तों के वाष्पशील तेल से व्युत्पन्न प्राकृतिक शाकनाशी अणु ‘सिनमेथिलिन’ (Cinmethylin) है।
  • 5. गाजर घास के विरुद्ध प्रतिस्पर्धी एलीलोपैथिक पौधा — पवाँड़ (Cassia sericea / Cassia tora) एवं गेंदा (Tagetes erecta): सड़कों के किनारे Cassia sericea के बीज बिखेरने पर यह अपनी एलीलोपैथी और सघन छत्र से गाजर घास (Parthenium) को पूर्णतः विस्थापित कर देता है (इसे ‘Biocontrol by plant competition / Allelopathic displacement’ कहते हैं)।

3. जैविक खेती में अनुमत प्राकृतिक जैव-शाकनाशी उत्पाद (Approved Natural / Organic Bio-herbicides)

  1. कॉर्न ग्लूटेन मील (Corn Gluten Meal — CGM): मक्का के गीले पिसाई (Wet-milling) का उप-उत्पाद जिसमें 60% प्रोटीन और डाइपेप्टाइड्स (Alanyl-alanine) होते हैं। इसे बुवाई से पूर्व (Pre-emergence @ 200–300 g/m²) डालने पर यह अंकुरित होते खरपतवार के बीज की प्राथमिक जड़ (Radicle) की वृद्धि को रोक देता है। यह जैविक लॉन और सब्जियों का सर्वप्रमुख प्राकृतिक प्री-इमर्जेंस शाकनाशी है।
  2. उच्च सांद्रता सिरका / एसिटिक अम्ल (Horticultural Vinegar — 10% से 20% Acetic Acid): नए उगे छोटे खरपतवारों पर छिड़कने से यह पत्ती की क्यूटिकल को गलाकर 24 घंटे में झुलसा देता है (संपर्क अवरणात्मक जैव-शाकनाशी)।
  3. लौंग, दालचीनी और नींबू घास का वाष्पशील तेल (Clove oil — Eugenol, Cinnamon oil, d-Limonene): कोशिका झिल्ली को नष्ट करने वाले प्राकृतिक संपर्क स्प्रे (जैसे व्यावसायिक उत्पाद ‘Matran’, ‘BurnOut’, ‘GreenMatch’)।
  4. पेलार्गोनिक अम्ल / नोनैनोइक अम्ल (Pelargonic acid / Nonanoic acid — ‘Scythe’): पेलार्गोनियम पौधे में पाया जाने वाला प्राकृतिक वसीय अम्ल जो पत्तियों को तुरंत सुखा देता है।

4. तापीय एवं भौतिक नवाचार (Thermal, Physical & Integrated Livestock Methods)

  • फ्लेम वीडिंग (Flame Weeding): गाजर, प्याज और मक्का जैसी फसलों में फसल के अंकुरण से ठीक 1–2 दिन पहले (Pre-emergence flame weeding) एलपीजी फ्लेम टार्च चलाकर उगे हुए सभी खरपतवारों को उबालकर नष्ट करना। (अंगूठे का नियम: पत्ती को फ्लेम के बाद दबाने पर यदि अंगूठे का गहरा हरा निशान छप जाए — ‘Thumbprint test’ — तो कोशिकाएं फट चुकी हैं)।
  • मृदा सौरीकरण (Soil Solarization) एवं स्टेल सीडबेड (Stale Seedbed): ग्रीष्म ऋतु में 4–6 सप्ताह पारदर्शी पॉलीथीन मल्चिंग (25–50 माइक्रोन) और बुवाई पूर्व सिंचाई से खरपतवार बीज बैंक को खाली करना।
  • समन्वित धान-बत्तख-अजोला-मछली प्रणाली (Integrated Rice-Duck-Azolla-Fish System): जैविक धान में रोपाई के 10 दिन बाद 200–300 बत्तखें प्रति हेक्टेयर और अजोला (Azolla) छोड़ने पर बत्तखें चौड़ी पत्ती व सेज खरपतवारों को खा जाती हैं, पैरों से कीचड़ मथकर (Puddling effect) उगते खरपतवार दबा देती हैं और अजोला प्रकाश रोककर 90–95% खरपतवार नियंत्रण बिना किसी खर्च के कर देता है।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

जैविक/प्राकृतिक खरपतवार प्रबंधन रणनीतियों का वर्गीकरण:

  • 1. प्रकाश एवं स्थान अवरोधक (Light & Space Exclusion): आच्छादन (Straw mulch, Live mulch/Smother crops, Biodegradable paper/starch film mulch, Azolla mat)।
  • 2. बीज बैंक ह्रासक (Seed Bank Depletion): स्टेल सीडबेड, मृदा सौरीकरण, बायो-फ्यूमिगेशन (सरसों), फसल चक्र।
  • 3. जैव-रासायनिक एवं एलीलोपैथिक (Biochemical & Natural Products): ज्वार सोरगोलियोन, कॉर्न ग्लूटेन मील (PE), 20% एसिटिक एसिड, लौंग तेल (Eugenol), पेलार्गोनिक एसिड (PoE)।
  • 4. यांत्रिक, तापीय एवं पशु-एकीकृत (Mechanical, Thermal & Animal-aided): व्हील-हो, कोनो-वीडर, फ्लेम वीडिंग, धान-बत्तख प्रणाली।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)

  • ‘मृदा को कभी नग्न न छोड़ें’ का सिद्धांत (Principle of Continuous Soil Cover): प्रकृति खाली पड़ी मिट्टी को सहन नहीं करती और उसे ढकने के लिए तुरंत खरपतवार उगा देती है। यदि किसान स्वयं मिट्टी को फसल अवशेष (Straw mulch) या सजीव आच्छादन फसल (Live cover crop) से ढक दे, तो प्रकृति को खरपतवार उगाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)

व्यावहारिक जैविक खेती केस स्टडी: जैविक प्याज एवं लहसुन में खरपतवार प्रबंधन

समस्या: प्याज और लहसुन की पत्तियाँ बेलनाकार और सीधी होती हैं, जिनसे जमीन पर बिल्कुल छाया नहीं पड़ती। रासायनिक खेती में ऑक्सीफ्लोरफेन या पेंडिमेथालिन लगता है, किंतु जैविक प्याज में यह वर्जित है।

सफल जैविक प्रोटोकॉल: (1) अप्रैल-मई में नर्सरी क्यारियों का पारदर्शी पॉलीथीन (25 µm) से मृदा सौरीकरण; (2) मुख्य खेत में रोपाई से 12 दिन पूर्व स्टेल सीडबेड सिंचाई कर उगे खरपतवारों को फ्लेम वीडर या उथली हैरो से नष्ट करना; (3) रोपाई के बाद कतारों के बीच धान के पुआल या सोयाबीन भूसे की 5–7 cm मल्चिंग बिछाना; तथा (4) 30 DAT पर एक हस्त गुड़ाई। परिणाम: 88% खरपतवार नियंत्रण और रसायन-मुक्त निर्यात गुणवत्ता का प्याज।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 8.1: प्रमुख एलीलोपैथिक फसलें, उनके सक्रिय एलीलोकेमिकल्स एवं लक्षित खरपतवार
एलीलोपैथिक फसल / पादप वैज्ञानिक नाम सक्रिय जैव-रसायन (Allelochemical) क्रियाविधि एवं लक्षित खरपतवार
1. ज्वार (Sorghum) Sorghum bicolor सोरगोलियोन (Sorgoleone), धुरिन, p-कौमैरिक अम्ल जड़ों से स्रावित PS-II अवरोधक; गेहूँसा, बथुआ, जंगली चौलाई व धूप घास का दमन।
2. सूरजमुखी (Sunflower) Helianthus annuus हेलिएन्नोल (Heliannuols), क्लोरोजेनिक अम्ल कोशिका विभाजन व अंकुरण अवरोधक; गेहूँ व कपास के खरपतवारों का दमन।
3. सरसों / राई (Mustard) Brassica juncea / nigra ग्लूकोसिनोलेट्स → आइसोथायोसाइनेट्स (ITCs) बायो-फ्यूमिगेशन द्वारा जंगली जई, बथुआ व मृदा-जनित बीजों का नाश।
4. नीलगिरी (Eucalyptus) Eucalyptus globulus 1,8-सिनिओल (Cineole) एवं अल्फा-पाइनीन वाष्पशील टर्पीन; समसूत्री विभाजन व श्वसन अवरोधक।
5. पवाँड़ (Sicklepod) व गेंदा Cassia sericea & Tagetes कैसिया-अम्ल एवं अल्फा-टरथिएनिल गाजर घास (Parthenium hysterophorus) का प्रतिस्पर्धी व एलीलोपैथिक विस्थापन।

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)

जैविक खरपतवार प्रबंधन के मूल्यांकन एवं अनुप्रयोग मानक
  • आच्छादन (Straw Mulch) की अनुशंसित मात्रा: $Mulch Rate=5.0 से 7.5 tonnes/ha (मोटाई: 7.5–10 cm)$
  • कॉर्न ग्लूटेन मील (Corn Gluten Meal – Pre-emergence) की मात्रा: $Dose=200–300 g/m2 (2.0–3.0 t/ha)$
  • ज्वार जलीय अर्क (Sorgaab – Sorghum Water Extract 1:10 w/v) की छिड़काव दर: $Concentrated Sorgaab=12–15 Litres/ha in 300 L water$
  • एलीलोपैथिक अवरोध प्रतिशत (Allelopathic Inhibition %):
    $Inhibition (\%)=(Gcontrol−GextractGcontrol)×100$

11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 08: जैविक एवं प्राकृतिक खेती में खरपतवार प्रबंधन
प्राकृतिक खेती में ‘आच्छादन’ (Acchadana)
  • 1. मृदा आच्छादन (Soil Mulch): उथली गुड़ाई, गहरी जुताई निषेध
  • 2. काष्ठ आच्छादन (Straw Mulch): 5-7 t/ha सूखे फसल अवशेष
  • 3. सजीव आच्छादन (Live Mulch): लोबिया, मूंग, उड़द की अंतःफसल
  • प्रकाश अवरोधन से Photoblastic खरपतवार बीजों का दमन
एलीलोपैथी (Allelopathy)
  • ज्वार (Sorghum): सोरगोलियोन (Sorgoleone) व सोर्गैब अर्क
  • सूरजमुखी (Sunflower): हेलिएन्नोल (Heliannuols)
  • सरसों (Brassica): ग्लूकोसिनोलेट्स → आइसोथायोसाइनेट (Bio-fumigation)
  • Cassia sericea व गेंदा: गाजर घास का प्रतिस्पर्धी विस्थापन
अनुमत जैव-शाकनाशी (Organic Herbicides)
  • कॉर्न ग्लूटेन मील (CGM): प्राकृतिक Pre-emergence (जड़ अवरोधक)
  • बागवानी सिरका (10-20% Acetic acid): संपर्क Post-emergence
  • लौंग तेल (Eugenol) एवं दालचीनी तेल (Cinnamaldehyde)
  • पेलार्गोनिक अम्ल (Pelargonic acid) व d-Limonene
तापीय, भौतिक एवं पशु-एकीकृत विधियाँ
  • फ्लेम वीडिंग (Flame weeding: 800-1000°C, Thumbprint test)
  • मृदा सौरीकरण (25-50 µm पारदर्शी पॉलीथीन, 4-6 सप्ताह)
  • स्टेल सीडबेड (बुवाई पूर्व सिंचाई + उथली गुड़ाई)
  • धान-बत्तख-अजोला प्रणाली (Rice-Duck-Azolla: 90-95% नियंत्रण)

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)

जैविक / प्राकृतिक खेती में चरणबद्ध खरपतवार प्रबंधन प्रोटोकॉल (Step-by-Step Organic Weed Management Protocol)
Step 1
चरण 1 (बुवाई से 30–45 दिन पूर्व): ग्रीष्मकालीन मृदा सौरीकरण या सरसों की हरी खाद द्वारा ‘बायो-फ्यूमिगेशन’ (Bio-fumigation)
⬇
Step 2
चरण 2 (बुवाई से 10–15 दिन पूर्व): ‘स्टेल सीडबेड’ सिंचाई कर पहली लहर में उगे खरपतवारों को उथली बखरनी या फ्लेम वीडर से नष्ट करना
⬇
Step 3
चरण 3 (बुवाई के समय): संकरी कतार में प्रतिस्पर्धी किस्म की बुवाई + कतारों के बीच लोबिया/मूंग (सजीव आच्छादन) या कॉर्न ग्लूटेन मील का प्रयोग
⬇
Step 4
चरण 4 (बुवाई के 15–25 दिन बाद): कतारों के बीच फसल अवशेषों की मल्चिंग (Straw Acchadana @ 5–7 t/ha) या धान में अजोला + बत्तख छोड़ना
⬇
Step 5
चरण 5 (बुवाई के 30–35 दिन बाद): व्हील-हो / कोनो-वीडर से एक यांत्रिक गुड़ाई या एलीलोपैथिक अर्क (Sorgaab) / लौंग तेल का छिड़काव

13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • पद्मश्री सुभाष पालेकर की प्राकृतिक खेती (SPNF/ZBNF) के चार स्तंभों—बीजामृत, जीवामृत, वाप्सा और आच्छादन—में से खरपतवार नियंत्रण का मुख्य स्तंभ ‘आच्छादन’ (Acchadana / Mulching) है।
  • ‘एलीलोपैथी’ (Allelopathy) शब्द का प्रतिपादन 1937 में ऑस्ट्रियाई वैज्ञानिक ‘हैंस मोलिश’ (Hans Molisch) ने किया था।
  • ज्वार (Sorghum bicolor) की जड़ों से निकलने वाला प्रमुख एलीलोकेमिकल ‘सोरगोलियोन’ (Sorgoleone) है जो PS-II प्रकाश-संश्लेषण को रोकता है।
  • क्रूसीफेरी कुल (सरसों) के पौधों को मिट्टी में दबाने पर ‘ग्लूकोसिनोलेट्स’ के टूटने से ‘आइसोथायोसाइनेट’ (Isothiocyanate) गैस निकलती है; इस प्रक्रिया को ‘बायो-फ्यूमिगेशन’ (Bio-fumigation) कहते हैं।
  • जैविक खेती में एकमात्र प्रमुख प्राकृतिक प्री-इमर्जेंस (Pre-emergence) उत्पाद ‘कॉर्न ग्लूटेन मील’ (Corn Gluten Meal) है जो अंकुरित होते खरपतवार की प्राथमिक जड़ (Radicle) को रोक देता है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)

त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):

  • आच्छादन के 3 प्रकार: मृदा आच्छादन (Soil mulch), काष्ठ आच्छादन (Straw mulch @ 5–7 t/ha) और सजीव आच्छादन (Live mulch — लोबिया, मूंग)।
  • प्रमुख एलीलोकेमिकल्स: ज्वार → सोरगोलियोन व धुरिन; सूरजमुखी → हेलिएन्नोल; सरसों → ग्लूकोसिनोलेट्स/आइसोथायोसाइनेट्स (बायो-फ्यूमिगेशन); नीलगिरी → 1,8-सिनिओल।
  • गाजर घास का प्रतिस्पर्धी पौधा: पवाँड़ (Cassia sericea / C. tora) और गेंदा (Tagetes erecta)।
  • अनुमत जैविक उत्पाद: कॉर्न ग्लूटेन मील (PE), 10–20% एसिटिक अम्ल (सिरका), लौंग तेल (Eugenol), पेलार्गोनिक अम्ल।
  • फ्लेम वीडिंग: 800–1000°C पर 0.1–0.5 सेकंड ज्वाला संपर्क से कोशिका रस को उबालकर कोशिका भित्ति फोड़ना (Thumbprint test)।

15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)

1. पद्मश्री सुभाष पालेकर की प्राकृतिक खेती (Natural Farming) के चार स्तंभों में से कौन-सा स्तंभ सीधे तौर पर सूर्य का प्रकाश रोककर खरपतवारों के अंकुरण को दबाने का कार्य करता है?
(A) बीजामृत
(B) जीवामृत
(C) आच्छादन (Acchadana / Mulching)
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (C) आच्छादन (Acchadana / Mulching)
व्याख्या: आच्छादन (मृदा, काष्ठ एवं सजीव मल्चिंग) मिट्टी को ढककर प्रकाश-संवेदी खरपतवार बीजों का अंकुरण रोकता है और नमी बचाता है।
2. वर्ष 1937 में ‘एलीलोपैथी’ (Allelopathy) शब्द का प्रतिपादन किस वैज्ञानिक ने किया था?
(A) हैंस मोलिश (Hans Molisch)
(B) जेथ्रो टल (Jethro Tull)
(C) नॉर्मन बोरलॉग
(D) सी.टी. डी विट
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) हैंस मोलिश (Hans Molisch)
व्याख्या: ऑस्ट्रियाई पादप शरीर-क्रिया विज्ञानी हैंस मोलिश ने 1937 में एलीलोपैथी शब्द दिया था।
3. ज्वार (Sorghum bicolor) की जड़ों के रोमों से स्रावित होने वाला वह प्रमुख एलीलोकेमिकल कौन-सा है जो खरपतवारों में प्रकाश-संश्लेषण (PS-II) को रोक देता है?
(A) सोरगोलियोन (Sorgoleone)
(B) निकोटीन
(C) कैफीन
(D) कुनैन
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) सोरगोलियोन (Sorgoleone)
व्याख्या: सोरगोलियोन (Sorgoleone) ज्वार की जड़ों से निकलने वाला अत्यंत शक्तिशाली प्राकृतिक शाकनाशी यौगिक है।
4. सरसों (Brassica juncea) के हरे बायोमास को मिट्टी में दबाने पर किस यौगिक के जल-अपघटन से वाष्पशील ‘आइसोथायोसाइनेट’ (Isothiocyanate) बनता है, जो खरपतवार बीजों का ‘बायो-फ्यूमिगेशन’ करता है?
(A) ग्लूकोसिनोलेट्स (Glucosinolates)
(B) सेलुलोज
(C) स्टार्च
(D) सुक्रोज
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) ग्लूकोसिनोलेट्स (Glucosinolates)
व्याख्या: क्रूसीफेरी कुल की फसलों में पाए जाने वाले ग्लूकोसिनोलेट्स माइरोसिनेज एंजाइम की उपस्थिति में टूटकर आइसोथायोसाइनेट गैस बनाते हैं।
5. जैविक खेती (Organic farming) में उगने से पूर्व (Pre-emergence) खरपतवारों के मूलांकुर (Radicle) की वृद्धि रोकने के लिए किस प्राकृतिक उत्पाद का व्यापक उपयोग किया जाता है?
(A) कॉर्न ग्लूटेन मील (Corn Gluten Meal – CGM)
(B) पेंडिमेथालिन
(C) एट्राजिन
(D) यूरिया
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) कॉर्न ग्लूटेन मील (Corn Gluten Meal – CGM)
व्याख्या: मक्का का उप-उत्पाद कॉर्न ग्लूटेन मील (CGM) एक प्राकृतिक प्री-इमर्जेंस खरपतवार अवरोधक है।
6. अकृषित भूमि और सड़कों के किनारे गाजर घास (Parthenium hysterophorus) को अपनी एलीलोपैथी और प्रतिस्पर्धा से विस्थापित करने वाला प्रसिद्ध भारतीय पौधा कौन-सा है?
(A) पवाँड़ / चकवड़ (Cassia sericea / Cassia tora) एवं गेंदा
(B) अमरबेल
(C) सत्यानाशी
(D) प्याजी
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) पवाँड़ / चकवड़ (Cassia sericea / Cassia tora) एवं गेंदा
व्याख्या: Cassia sericea और गेंदा (Tagetes) गाजर घास को दबाकर उसका जैविक-पारिस्थितिक विस्थापन करते हैं।
7. फ्लेम वीडिंग (Flame weeding) में छोटे खरपतवारों की मृत्यु का वास्तविक वैज्ञानिक कारण क्या है?
(A) क्षणिक ताप से पत्ती की कोशिकाओं का रस उबलकर फैलता है जिससे कोशिका भित्ति फट जाती है (Cell rupture)
(B) पौधे को कोयला बनने तक 10 मिनट जलाया जाता है
(C) मिट्टी को पिघलाया जाता है
(D) बर्फ जमाई जाती है
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) क्षणिक ताप से पत्ती की कोशिकाओं का रस उबलकर फैलता है जिससे कोशिका भित्ति फट जाती है (Cell rupture)
व्याख्या: फ्लेम वीडिंग में पौधे को राख नहीं किया जाता, बल्कि 0.1–0.5 सेकंड की ऊष्मा से कोशिका झिल्ली व भित्ति फट जाती है और पौधा सूख जाता है।
8. जैविक खेती में खड़ी अवस्था में छोटे खरपतवारों को झुलसाने वाले संपर्क बायो-हर्बिसाइड (Contact bio-herbicide) में कौन-सा प्राकृतिक सक्रिय तत्व प्रयुक्त होता है?
(A) 10–20% एसिटिक अम्ल (Horticultural Vinegar) एवं लौंग का तेल (Eugenol)
(B) पैराक्वाट
(C) ग्लाइफोसेट
(D) 2,4-D
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) 10–20% एसिटिक अम्ल (Horticultural Vinegar) एवं लौंग का तेल (Eugenol)
व्याख्या: उच्च सांद्रता सिरका (Acetic acid), लौंग तेल (Eugenol) और पेलार्गोनिक अम्ल जैविक खेती में अनुमत संपर्क जैव-शाकनाशी हैं।
9. जैविक धान की खेती में रोपाई के बाद ‘अजोला + बत्तख’ (Rice-Duck-Azolla) प्रणाली अपनाने से कितने प्रतिशत तक खरपतवार नियंत्रण प्राप्त होता है?
(A) 90–95%
(B) केवल 5%
(C) 0%
(D) 15%
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) 90–95%
व्याख्या: अजोला पानी की सतह ढककर धूप रोकता है और बत्तखें खरपतवार खाकर व पैरों से कीचड़ मथकर 90–95% खरपतवार नियंत्रित करती हैं।
10. फ्लेम वीडिंग की सफलता तुरंत खेत में जाँचने के लिए कौन-सा सरल परीक्षण किया जाता है?
(A) थंबप्रिंट टेस्ट (Thumbprint test — पत्ती को अंगूठे और तर्जनी के बीच दबाकर गहरा हरा निशान देखना)
(B) लिटमस पेपर टेस्ट
(C) टेट्राजोलियम टेस्ट
(D) आयोडीन टेस्ट
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) थंबप्रिंट टेस्ट (Thumbprint test — पत्ती को अंगूठे और तर्जनी के बीच दबाकर गहरा हरा निशान देखना)
व्याख्या: फ्लेम गुजरने के तुरंत बाद पत्ती को दबाने पर यदि मोमी क्यूटिकल हटकर गहरा मटमैला हरा अंगूठे का निशान दिखे, तो कोशिकाएं फट चुकी हैं।

16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)

  1. प्राकृतिक खेती में खरपतवार नियंत्रण का मुख्य स्तंभ ‘आच्छादन’ (मृदा, काष्ठ एवं सजीव मल्चिंग) है।
  2. ज्वार की जड़ों से निकलने वाला प्रमुख एलीलोकेमिकल ‘सोरगोलियोन’ (Sorgoleone) है तथा इसका जलीय अर्क ‘सोर्गैब’ (Sorgaab) कहलाता है।
  3. सरसों के हरे बायोमास से ग्लूकोसिनोलेट्स के टूटने पर ‘आइसोथायोसाइनेट’ गैस द्वारा खरपतवार बीज नष्ट होना ‘बायो-फ्यूमिगेशन’ कहलाता है।
  4. जैविक खेती में प्रयुक्त प्राकृतिक प्री-इमर्जेंस उत्पाद ‘कॉर्न ग्लूटेन मील’ (CGM) है।
  5. गाजर घास को अपनी एलीलोपैथी व प्रतिस्पर्धा से विस्थापित करने वाला पौधा ‘पवाँड़’ (Cassia sericea) है।

(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)

1. प्राकृतिक खेती में ‘आच्छादन’ (Acchadana) के तीन प्रकार कौन-से हैं?
उत्तर: (1) मृदा आच्छादन (Soil mulch), (2) काष्ठ/फसल अवशेष आच्छादन (Straw mulch), और (3) सजीव आच्छादन (Live mulch)।
2. ज्वार और सूरजमुखी द्वारा स्रावित एक-एक प्रमुख एलीलोकेमिकल का नाम लिखिए।
उत्तर: ज्वार: सोरगोलियोन (Sorgoleone); सूरजमुखी: हेलिएन्नोल (Heliannuols)।
3. ‘सोर्गैब’ (Sorgaab) क्या है?
उत्तर: यह परिपक्व ज्वार के पौधों को पानी (1:10) में भिगोकर और उबालकर तैयार किया गया सांद्र एलीलोपैथिक जलीय अर्क (Sorghum Water Extract) है, जिसे जैविक शाकनाशी के रूप में छिड़का जाता है।
4. कॉर्न ग्लूटेन मील (Corn Gluten Meal) खरपतवार को किस अवस्था पर रोकता है?
उत्तर: यह अंकुरण के समय (Pre-emergence) खरपतवार के बीज से निकलने वाली प्राथमिक जड़ (Radicle) की वृद्धि को रोक देता है।
5. बायो-फ्यूमिगेशन (Bio-fumigation) के लिए किस कुल की फसलें सर्वाधिक उपयुक्त हैं?
उत्तर: क्रूसीफेरी / ब्रैसिकेसी कुल (Cruciferae — जैसे सरसों व मूली), जिनमें ग्लूकोसिनोलेट्स पाए जाते हैं।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)

1. प्राकृतिक खेती में ‘आच्छादन’ (Acchadana) के तीनों प्रकारों की व्याख्या कीजिए तथा बताइए कि ये खरपतवारों को कैसे नियंत्रित करते हैं।
उत्तर: (1) मृदा आच्छादन: केवल ऊपरी 10–15 cm मिट्टी की हल्की गुड़ाई करना ताकि नीचे दबे बीज ऊपर आकर अंकुरित न हों। (2) काष्ठ आच्छादन (Straw mulch): पिछली फसल के सूखे अवशेषों की 7.5–10 cm मोटी परत (5–7 t/ha) बिछाना, जिससे सूर्य का प्रकाश जमीन तक नहीं पहुँचता और प्रकाश-संवेदी (Photoblastic) खरपतवार बीज अंकुरित नहीं हो पाते। (3) सजीव आच्छादन (Live mulch): मुख्य फसल के बीच लोबिया, मूंग या उड़द उगाना जो तेजी से जमीन ढककर खरपतवारों का दम घोंट (Smothering) देती हैं।
2. खरपतवार प्रबंधन में ‘एलीलोपैथी’ (Allelopathy) की भूमिका को ज्वार, सूरजमुखी और सरसों के उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: एलीलोपैथी में फसलें ऐसे द्वितीयक जैव-रसायन छोड़ती हैं जो खरपतवारों का अंकुरण और वृद्धि रोकते हैं: (1) ज्वार की जड़ें ‘सोरगोलियोन’ (Sorgoleone) छोड़ती हैं जो PS-II प्रकाश-संश्लेषण को रोकता है तथा ज्वार का जलीय अर्क (Sorgaab @ 12–15 L/ha) गेहूँ में बथुआ व जंगली जई को दबाता है; (2) सूरजमुखी के ‘हेलिएन्नोल’ खरपतवार अंकुरण रोकते हैं; और (3) सरसों को मिट्टी में जोतने पर ‘ग्लूकोसिनोलेट्स’ से ‘आइसोथायोसाइनेट’ गैस निकलती है जो बायो-फ्यूमिगेशन द्वारा खरपतवार बीज नष्ट करती है।
3. जैविक खेती में अनुमत चार प्राकृतिक जैव-शाकनाशी उत्पादों (Natural bio-herbicides) और उनकी कार्यप्रणाली का वर्णन कीजिए।
उत्तर: (1) कॉर्न ग्लूटेन मील (CGM): मक्का प्रोटीन उप-उत्पाद जो प्री-इमर्जेंस रूप में अंकुरित होते खरपतवार की प्राथमिक जड़ (Radicle) को सुखा देता है। (2) बागवानी सिरका (10–20% Acetic acid): छोटे खरपतवारों की क्यूटिकल और कोशिका झिल्ली को गलाकर झुलसा देता है। (3) लौंग का तेल (Clove oil — Eugenol) व दालचीनी तेल: पत्तियों पर संपर्क प्रभाव से तीव्र निर्जलीकरण करता है। (4) पेलार्गोनिक अम्ल (Pelargonic acid): प्राकृतिक वसीय अम्ल जो कोशिका झिल्ली का रिसाव कर खरपतवार सुखा देता है।
4. फ्लेम वीडिंग (Flame weeding) क्या है? यह कैसे कार्य करती है और ‘थंबप्रिंट टेस्ट’ क्या होता है?
उत्तर: फ्लेम वीडिंग में एलपीजी या प्रोपेन बर्नर से 800°C–1000°C की ज्वाला को छोटे खरपतवारों पर 0.1–0.5 सेकंड के लिए गुजारा जाता है। इसका उद्देश्य पौधे को जलाकर राख करना नहीं, बल्कि कोशिका के अंदर के पानी को तुरंत 100°C तक गर्म कर कोशिका भित्ति को फोड़ना (Cell rupture) है, जिससे पौधा 2–3 दिन में सूख जाता है। फ्लेम के तुरंत बाद पत्ती को अंगूठे और उंगली के बीच दबाने पर यदि गहरा हरा निशान छप जाए (Thumbprint test), तो यह प्रमाणित करता है कि कोशिकाएं फट चुकी हैं।
5. जैविक धान की खेती में ‘समन्वित धान-बत्तख-अजोला प्रणाली’ (Integrated Rice-Duck-Azolla system) बिना रसायन के खरपतवार कैसे नियंत्रित करती है?
उत्तर: रोपित धान के खेत में 2–3 cm पानी रखकर अजोला (0.5–1 t/ha) और रोपाई के 10 दिन बाद 200–300 बत्तखें प्रति हेक्टेयर छोड़ दी जाती हैं। अजोला पानी की पूरी सतह पर हरी चटाई बनाकर सूर्य का प्रकाश रोक देता है जिससे जलीय खरपतवार अंकुरित नहीं हो पाते। साथ ही बत्तखें कतारों के बीच तैरते हुए उगे हुए कोमल खरपतवार व कीट खा जाती हैं और उनके पैरों व चोंच से कीचड़ मथने के कारण छोटे खरपतवार जड़ से उखड़कर दब जाते हैं, जिससे 90–95% नियंत्रण मिलता है।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)

1. जैविक एवं प्राकृतिक खेती (Organic and Natural Farming) में खरपतवार प्रबंधन के मूल सिद्धांतों की विवेचना करते हुए ‘आच्छादन’ (Acchadana), स्टेल सीडबेड, मृदा सौरीकरण और यांत्रिक उपायों के समन्वित उपयोग का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: NPOP/SPNF के सिद्धांत, तीनों प्रकार के आच्छादन (Soil, Straw, Live mulch), स्टेल सीडबेड, मृदा सौरीकरण और व्हील-हो/कोनो-वीडर के चरणबद्ध प्रोटोकॉल को विस्तार से समझाएँ।
2. खरपतवार प्रबंधन में ‘एलीलोपैथी’ (Allelopathy), ‘बायो-फ्यूमिगेशन’ (Bio-fumigation) और प्राकृतिक वानस्पतिक शाकनाशियों (Corn gluten meal, Acetic acid, Essential oils) की वैज्ञानिक क्रियाविधि एवं व्यावहारिक उपयोग पर एक विस्तृत निबंध लिखिए।
उत्तर रूपरेखा: सारणी 8.1 के सभी एलीलोकेमिकल्स (सोरगोलियोन, हेलिएन्नोल, आइसोथायोसाइनेट, सिनिओल), सोर्गैब अर्क निर्माण और अनुमत जैविक उत्पादों की मात्रा व कार्यप्रणाली का विस्तार से वर्णन करें।
3. किसी किसान को रसायन-मुक्त जैविक गेहूँ और जैविक धान उगाने के लिए बुवाई से कटाई तक का एक संपूर्ण खरपतवार प्रबंधन कैलेंडर बनाकर समझाइए।
उत्तर रूपरेखा: जैविक धान के लिए (हरी खाद + पडलिंग + अजोला + बत्तख + कोनो-वीडर) और जैविक गेहूँ के लिए (स्टेल सीडबेड + संकरी कतार बुवाई + चना/सरसों अंतःफसल + व्हील-हो + ज्वार अर्क सोर्गैब स्प्रे + बरसीम फसल चक्र) का पूर्ण कैलेंडर प्रस्तुत करें।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGRON 311 notes।

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