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AGRON 311 Lecture 01: खरपतवारों का परिचय, खरपतवारों की विशेषताएँ एवं पारिस्थितिकी तंत्र पर उनके हानिकारक व लाभकारी प्रभाव | Hindi Notes

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AGRON 311 · Weed Management
विषय सूची · Quick Navigation02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
शैक्षणिक संदर्भ: शाकनाशियों की दरें, मिश्रण और उपयोग उपलब्ध कराए गए स्रोत का हिस्सा हैं। खेत में प्रयोग से पहले फसल-विशिष्ट वर्तमान label claim तथा स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय/KVK की अनुशंसा जाँचें।
औषधीय उल्लेख का सही संदर्भ: नीचे पौधों के लोक-चिकित्सा उपयोगों के उल्लेख पारंपरिक दावे हैं, प्रमाणित उपचार या स्वयं प्रयोग की सलाह नहीं। साँप काटना medical emergency है—जड़ी-बूटी/घरेलू उपचार न करें और तुरंत अस्पताल पहुँचें। WHO: Snakebite treatment
Lecture 01 Source Page Reference in Supplied Pack: 129 (AGRON 311 Theory Lecture 01)

Lecture 01: खरपतवारों का परिचय, खरपतवारों की विशेषताएँ एवं पारिस्थितिकी तंत्र पर उनके हानिकारक व लाभकारी प्रभाव

Introduction to weeds, characteristics of weeds and their harmful and beneficial effects on ecosystem

02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:

  • खरपतवार (Weed) की ऐतिहासिक उत्पत्ति (Jethro Tull, 1731 — ‘Father of Weed Science’) और प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाओं को समझना।
  • खरपतवारों की 12 असाधारण जैविक एवं पारिस्थितिक विशेषताओं (प्रचुर बीज उत्पादन, दीर्घ जीवन क्षमता, प्रसुप्ति, C₄ प्रकाश-संश्लेषण, वानस्पतिक प्रजनन, प्रतिकूलता सहनशीलता) का विश्लेषण करना।
  • भारतीय कृषि में विभिन्न नाशीजीवों (खरपतवार ~33–45%, कीट ~26%, रोग ~20%) से होने वाली आर्थिक उपज हानि की तुलना करना।
  • पारिस्थितिकी तंत्र, फसल उत्पादन, मानव स्वास्थ्य (Dropsy, गाजर घास एलर्जी) और पशु स्वास्थ्य (Lantana, धतूरा, जॉनसन घास HCN विषाक्तता) पर खरपतवारों के हानिकारक प्रभावों को जानना।
  • मृदा संरक्षण, हरी खाद, औषधीय उपयोग, सब्जी/चारे और प्रदूषण सूचक के रूप में खरपतवारों के लाभकारी प्रभावों (Beneficial effects) का अध्ययन करना।

03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): प्रकृति में कोई भी पौधा जन्मजात ‘खरपतवार’ नहीं होता; यह मानव के दृष्टिकोण और उद्देश्य पर निर्भर करता है कि कौन-सा पौधा फसल है और कौन-सा खरपतवार। सर्वप्रथम वर्ष 1731 में अंग्रेज कृषि वैज्ञानिक जेथ्रो टुल (Jethro Tull) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘हॉर्स होइंग हसबैंड्री’ (Horse Hoeing Husbandry) में साहित्य में पहली बार ‘Weed’ (खरपतवार) शब्द का प्रयोग किया। इसीलिए जेथ्रो टुल को ‘खरपतवार विज्ञान का जनक’ (Father of Weed Science) कहा जाता है।

भारत में खरपतवार अनुसंधान के लिए वर्ष 1989 में जबलपुर (मध्य प्रदेश) में ‘राष्ट्रीय खरपतवार विज्ञान अनुसंधान केंद्र’ (NRCWS — वर्तमान में ICAR-DWR: Directorate of Weed Research / खरपतवार अनुसंधान निदेशालय) की स्थापना की गई। ICAR-DWR के आकलन के अनुसार भारत में केवल खरपतवारों के कारण प्रतिवर्ष लगभग 11 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹90,000 करोड़) मूल्य के कृषि उत्पादन की हानि होती है, जो कीटों और रोगों से होने वाली हानि से कहीं अधिक है।

04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

जेथ्रो टुल (Jethro Tull, 1731) की परिभाषा
“खरपतवार एक ऐसा पौधा है जो उस स्थान पर उगता है जहाँ उसकी इच्छा नहीं होती (A weed is a plant growing where it is not desired)।”
डॉ. डब्ल्यू.जे. बील (W.J. Beal, 1899) की परिभाषा
“खरपतवार एक ऐसा पौधा है जो अवांछित स्थान पर उगता है (A plant out of place)।”
ओ.पी. गुप्ता (O.P. Gupta, 1984) की परिभाषा
“खरपतवार एक ऐसा अवांछित पौधा है जो किसी विशेष समय और स्थान पर मानव के उद्देश्यों और कल्याण में लाभ की अपेक्षा अधिक बाधा पहुँचाता है।”
स्वेच्छाचारी / रोग पौधे (Volunteer / Rogue Plants)
जब पिछली ऋतु की फसल का कोई पौधा (जैसे चने के खेत में पिछली फसल का बाजरा या सरसों) या उसी फसल की किसी अन्य किस्म का पौधा बिना बोए अपने आप उग आता है, तो वह भी खरपतवार कहलाता है।
ड्रॉप्सी रोग (Epidemic Dropsy)
सरसों के बीजों में सत्यानाशी (Argemone mexicana) के काले बीजों की मिलावट होने पर तेल में आने वाले ‘सैंग्विनारिन’ (Sanguinarine) एल्कलॉइड के सेवन से मनुष्यों में होने वाला जानलेवा जलोदर/सूजन और अंधापन रोग।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. खरपतवारों की प्रमुख जैविक एवं पारिस्थितिक विशेषताएँ (Characteristics of Weeds)

खरपतवारों में कुछ ऐसी अद्भुत आनुवंशिक और अनुकूलन विशेषताएँ होती हैं जो उन्हें फसलों की तुलना में अधिक आक्रामक और अमर बनाती हैं:

1. प्रचुर बीज उत्पादन क्षमता (Prolific Seed Production)

एक एकल खरपतवार पौधा हजारों से लाखों बीज पैदा करता है:
• जंगली चौलाई (Amaranthus spp.): 1,96,000 बीज/पौधा
• मकोय (Solanum nigrum): 1,78,000 बीज/पौधा
• बथुआ (Chenopodium album): 72,000 बीज/पौधा
• अमरबेल (Cuscuta spp.): 16,000 बीज/पौधा
• गेहूँसा (Phalaris minor): 10,000 – 30,000 बीज/पौधा
• स्ट्राइगा / रूखड़ी (Striga asiatica): 50 लाख (5 Million) बीज/पौधा।

2. बीजों की दीर्घकालिक जीवन क्षमता (Long Viability & Persistence)

मृदा में दबे रहने पर भी खरपतवार के बीज दशकों तक जीवित रहते हैं:
• बथुआ (Chenopodium album) एवं हिरणखुरी (Convolvulus arvensis): 20 से 50 वर्ष तक जीवित।
• जंगली सरसों (Brassica kaber) व चौलाई: 30 से 40 वर्ष।
• कमल (Nelumbo nucifera): मंचूरिया की झील में 1000 वर्ष से अधिक जीवित पाए गए।
• मोथा (Cyperus rotundus): इसके कंदों (Tubers) की जीवन क्षमता 2–5 वर्ष होती है।

3. बीज प्रसुप्ति एवं क्रमिक अंकुरण (Seed Dormancy & Staggered Germination)

खरपतवार के सभी बीज एक साथ अंकुरित नहीं होते; उनमें अंतर्निहित प्रसुप्ति (Innate dormancy) होती है जिससे वे कई वर्षों तक टुकड़ों-टुकड़ों (Flushes) में उगते हैं और एक बार की निराई या शाकनाशी से समाप्त नहीं होते।

4. तीव्र वानस्पतिक प्रजनन (Vegetative Multiplication)

बहुवर्षीय खरपतवार यदि बीज न भी बना पाएँ, तो वे भूमिगत भागों से तेजी से फैलते हैं—जैसे मोथा (Cyperus rotundus) कंदों (Tubers) से, दूब घास (Cynodon dactylon) और काँस (Saccharum spontaneum) प्रकंदों (Rhizomes) व भूस्तारी (Stolons) से तथा हिरणखुरी जड़ों से।

5. रूपात्मक समानता / नकलची गुण (Morphological Similarity / Crop Mimicry)

कई खरपतवार वानस्पतिक अवस्था में मुख्य फसल जैसे ही दिखते हैं (जैसे—गेहूँ में गेहूँसा/Phalaris minor और धान में साँवा/Echinochloa crus-galli) तथा उनके बीज का आकार व पकने का समय भी फसल के समान होता है।

6. C₄ प्रकाश-संश्लेषण, गहरी जड़ें एवं सुरक्षात्मक आवरण

• विश्व के 18 सबसे भयानक खरपतवारों में से 14 खरपतवार C4 पादप हैं (जैसे Cyperus rotundus, Echinochloa, Cynodon, Amaranthus), जो उच्च ताप व कम CO2 में भी तेजी से बढ़ते हैं।
• जवासा (Alhagi camelorum) व हिरणखुरी की जड़ें 4 से 6 मीटर गहरी जाती हैं।
• काँटे (सत्यानाशी, गोखरू), दुर्गंध (हुलहुल) या जहरीले रसायन (आक, लैंटाना) उन्हें पशुओं द्वारा चरे जाने से बचाते हैं।

2. पारिस्थितिकी तंत्र एवं कृषि पर खरपतवारों के हानिकारक प्रभाव (Harmful Effects of Weeds)

  1. फसल उपज में भारी कमी (Reduction in Crop Yield): भारत में कुल कृषि नाशीजीव हानि में सर्वाधिक हानि खरपतवारों से (33% से 45%) होती है, इसके बाद कीटों (26%), रोगों (20%) और चूहों/अन्य (8–15%) का स्थान आता है। सीधे बोए गए धान (Aerobic DSR) में यह हानि 50–90% तक हो सकती है।
  2. कृषि उत्पाद की गुणवत्ता में गिरावट (Reduction in Produce Quality):
    • गेहूँ में जंगली प्याज (Asphodelus tenuifolius) या हिरणखुरी के बीज मिलने से आटे में दुर्गंध व कालापन आता है।
    • सरसों में सत्यानाशी (Argemone mexicana) के बीज मिलने से तेल जहरीला (Dropsy) हो जाता है।
    • चाय की पत्तियों में लोरेंथस (Loranthus) के मिलने से चाय का स्वाद खराब होता है, और भेड़ की ऊन में गोखरू (Xanthium strumarium / Tribulus) के काँटेदार फल उलझ जाते हैं।
  3. फसल कीटों और रोगों को आश्रय देना (Alternate Hosts for Insects & Diseases):
    • साँवा (Echinochloa) और जंगली धान: धान के तना छेदक (Stem borer) व टुंग्रो वायरस के परपोषी।
    • बथुआ (Chenopodium) और मकोय: कपास के हेलिकोवर्पा (Bollworm), एफिड और तंबाकू/टमाटर के मोजेक वायरस के परपोषी।
    • दूब घास एवं सैंक्रस: बाजरे के अरगट (Ergot) और गेहूँ के किट्ट (Rust — Berberis व Thalictrum) के एकांतर परपोषी।
  4. मानव एवं पशु स्वास्थ्य के लिए खतरा (Health Hazards to Humans & Livestock):
    • गाजर घास (Parthenium hysterophorus): इसमें ‘पार्थेनिन’ (Parthenin) नामक सेस्क्विटरपीन लैक्टोन होता है जिससे मनुष्यों में भयंकर चर्म रोग (Contact dermatitis/Eczema), अस्थमा और हे-फीवर (Hay fever) होता है।
    • लैंटाना (Lantana camara): इसमें ‘लैंटैडीन-ए’ (Lantadene-A) टॉक्सिन होता है जिससे पशुओं में पीलिया (Jaundice), प्रकाश-संवेदनशीलता और यकृत क्षति होती है।
    • बरू / जॉनसन घास (Sorghum halepense): सूखे की अवस्था में इसकी कोंपलों में ‘धुरिन’ / हाइड्रोसायनिक अम्ल (HCN / Prussic acid) बनता है जो मवेशियों के लिए घातक है।
    • बथुआ व चौलाई: अधिक मात्रा में खाने पर पशुओं में नाइट्रेट और ऑक्सालेट विषाक्तता।
  5. जलीय पारिस्थितिकी तंत्र एवं भूमि मूल्य का ह्रास: जलकुंभी (Eichhornia crassipes) नहरों के जल प्रवाह को 40–50% घटा देती है, वाष्पोत्सर्जन से पानी उड़ाती है और पानी में घुलित ऑक्सीजन (DO) घटाकर मछलियों को मार देती है।

3. पारिस्थितिकी तंत्र में खरपतवारों के लाभकारी प्रभाव / आर्थिक उपयोग (Beneficial Effects of Weeds)

  • 1. मृदा एवं जल संरक्षण: परती भूमि और ढलानों पर दूब घास (Cynodon dactylon), काँस (Saccharum spontaneum) और खींप (Crotalaria burhia) मृदा को जल और वायु अपरदन से बचाती हैं।
  • 2. औषधीय महत्व (Medicinal Value):
    • गुम्मे / द्रोणपुष्पी (Leucas aspera): साँप के काटने (Snake bite) के उपचार में।
    • भृंगराज (Eclipta alba): बालों की वृद्धि व यकृत टॉनिक।
    • गोखरू (Tribulus terrestris) एवं पुनर्नवा (Boerhavia diffusa): गुर्दे की पथरी (Kidney stones) व मूत्र रोगों में।
    • मकोय (Solanum nigrum) व भूम्यामलकी (Phyllanthus niruri): पीलिया (Jaundice) व यकृत विकार में।
    • सत्यानाशी (Argemone mexicana): पीला दूध चर्म रोगों में तथा आक (Calotropis) बात/दर्द निवारण में।
  • 3. हरी खाद, कंपोस्ट एवं लवणीय भूमि सुधार: जलकुंभी (उच्च पोटाश), आक (Calotropis), सत्यनाशी (क्षारीय/ऊसर मृदा सुधार में) और टेफ्रोसिया (Tephrosia purpurea – जंगली नील) उत्कृष्ट कार्बनिक खाद हैं।
  • 4. मानव साग एवं पशु चारा: बथुआ (Chenopodium album – विटामिन-A से भरपूर), चौलाई (Amaranthus viridis), कुलफा (Portulaca oleracea) सब्जी के रूप में तथा दूब, मोथा व हजारदाना चारे के रूप में।
  • 5. आर्थिक व औद्योगिक उपयोग एवं जैव-सूचक (Bio-indicators): मोथा (Cyperus rotundus) के कंदों से अगरबत्ती व इत्र; काँस व मूंज (Saccharum munja) से छप्पर, रस्सी व कागज; तथा जलकुंभी भारी धातुओं (Cd, Pb, Hg, Ni) को सोखकर जल शुद्धिकरण (Phytoremediation) करती है।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

नाशीजीवों से भारतीय कृषि में होने वाली औसत वार्षिक उपज हानि का वर्गीकरण:

  • 1. खरपतवार (Weeds): 33% से 45% (सर्वाधिक प्रथम स्थान)
  • 2. कीट (Insects/Pests): 20% से 26% (द्वितीय स्थान)
  • 3. पादप रोग (Plant Diseases): 15% से 20% (तृतीय स्थान)
  • 4. अन्य (चूहे, पक्षी, भंडारण आदि): 6% से 10%

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)

  • खरपतवार उत्तरजीविता का ‘r-चयन’ पारिस्थितिक सिद्धांत (Ecological Principle of r-Selected Strategy): पारिस्थितिकी में अधिकांश एकवर्षीय खरपतवार ‘r-strategists’ होते हैं—अर्थात् वे अपनी ऊर्जा बड़े आकार के पौधे बनाने के बजाय कम समय में अपना जीवन चक्र पूरा करने (जैसे Echinochloa या Parthenium मात्र 4–6 सप्ताह में) और लाखों छोटे-छोटे प्रसुप्त बीज पैदा करने में लगाते हैं ताकि अशांत कृषि भूमि (Disturbed habitat) पर तुरंत कब्जा कर सकें।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)

व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक उदाहरण: खरपतवारों में निहित विषैले रसायन और उनसे होने वाले रोग
  • सत्यानाशी (Argemone mexicana): विष = सैंग्विनारिन (Sanguinarine) ➔ मनुष्यों में महामारी ड्रॉप्सी (Dropsy) व ग्लूकोमा।
  • गाजर घास (Parthenium hysterophorus): विष = पार्थेनिन (Parthenin) ➔ मनुष्यों में कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस (चर्म एलर्जी) व दमा।
  • लैंटाना (Lantana camara): विष = लैंटैडीन-A (Lantadene-A) ➔ पशुओं में हेपेटोटॉक्सिसिटी (यकृत क्षति) व पीलिया।
  • जॉनसन घास / बरू (Sorghum halepense): विष = धुरिन / HCN ➔ पशुओं में प्रूसिक एसिड विषाक्तता (अचानक मृत्यु)।
  • झुनझुनिया (Crotalaria spp.): विष = पायरोलिजिडिन एल्कलॉइड ➔ घोड़ों व मवेशियों में यकृत सिरोसिस।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 1.1: प्रमुख खरपतवारों की प्रति पौधा बीज उत्पादन क्षमता एवं जीवन क्षमता (Viability)
खरपतवार का नाम (Weed Name) वानस्पतिक नाम (Botanical Name) औसत बीज उत्पादन (Seeds / Plant) विशेषता / मृदा में जीवन क्षमता (Viability)
1. स्ट्राइगा / रूखड़ी (Witchweed) Striga asiatica / S. lutea 50,00,000 (50 लाख) धूल जैसे सूक्ष्म बीज; मक्का/ज्वार/बाजरा जड़ स्राव से अंकुरण; 20 वर्ष जीवित।
2. जंगली चौलाई (Pigweed) Amaranthus viridis / A. spinosus 1,96,000 बीज/पौधा C₄ पथ; कठोर काले बीज; मृदा में 30–40 वर्ष तक जीवित।
3. मकोय (Black nightshade) Solanum nigrum 1,78,000 बीज/पौधा पक्षियों द्वारा प्रकीर्णन; औषधीय (पीलिया में उपयोगी)।
4. बथुआ (Lamb’s quarters) Chenopodium album 72,000 बीज/पौधा बहुरूपी बीज (Polymorphic seeds); 20–40 वर्ष तक जीवन क्षमता।
5. गाजर घास (Congress grass) Parthenium hysterophorus 10,000 – 25,000 बीज/पौधा प्रकाश व ताप असंवेदी (Photo & thermo-insensitive); वर्षभर पुष्पन।
6. गेहूँसा / गुल्ली डंडा Phalaris minor 10,000 – 30,000 बीज/पौधा 1000-बीज भार मात्र 2 ग्राम; गेहूँ का मुख्य नकलची खरपतवार।

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं संख्यात्मक तथ्य (Key Weed Science Facts)
  • खरपतवार विज्ञान के जनक (Father of Weed Science): जेथ्रो टुल (Jethro Tull, 1731) — पुस्तक: ‘Horse Hoeing Husbandry’
  • ICAR-DWR (Directorate of Weed Research — पूर्व नाम NRCWS): स्थापना 1989, जबलपुर (मध्य प्रदेश)
  • भारत में नाशीजीवों से कुल उपज हानि में खरपतवारों का हिस्सा: ≈33% से 45% (मौद्रिक हानि: ≈USD 11 Billion/year)
  • गेहूँसा (Phalaris minor) का परीक्षण भार (Test Weight – 1000 seeds): मात्र 2.0 ग्राम (जबकि गेहूँ का 40 ग्राम होता है)

11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 01 Mind Map: खरपतवारों का परिचय, विशेषताएँ तथा हानिकारक व लाभकारी प्रभाव
  • खरपतवार विज्ञान का परिचय (Father: Jethro Tull, 1731 | ICAR-DWR: जबलपुर, 1989 | उपज हानि: 33–45%)
    • खरपतवारों की प्रमुख विशेषताएँ (Key Characteristics)
      • प्रचुर बीज व लंबी आयु: Striga (50 लाख), चौलाई (1.96 लाख), मकोय (1.78 लाख), बथुआ (72 हजार; 30-40 वर्ष आयु)
      • प्रसुप्ति व C₄ दक्षता: टुकड़ों में अंकुरण + 18 में से 14 प्रमुख खरपतवार C₄ पादप + वानस्पतिक प्रजनन (मोथा, दूब)
    • पारिस्थितिकी तंत्र पर हानिकारक प्रभाव (Harmful Effects)
      • उपज व गुणवत्ता हानि: 33–45% उपज कमी ($11 Billion/yr) + कीट व रोगों के एकांतर परपोषी
      • मानव व पशु विषाक्तता: सत्यानाशी (Sanguinarine ➔ Dropsy), गाजर घास (Parthenin ➔ एलर्जी), लैंटाना (Lantadene-A), बरू घास (HCN)
    • पारिस्थितिकी तंत्र पर लाभकारी प्रभाव (Beneficial Effects)
      • मृदा सुधार व हरी खाद: दूब/काँस से अपरदन रोधन; सत्यानाशी से क्षारीय मृदा सुधार; जलकुंभी से फाइटो-रेमेडिएशन
      • औषधीय व खाद्य महत्व: गुम्मे (साँप काटने में), गोखरू/पुनर्नवा (पथरी), भृंगराज/मकोय (यकृत), बथुआ/चौलाई (साग)

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)

प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में खरपतवारों के बहु-आयामी प्रभाव
खरपतवार प्रकोप
(प्रचुर बीज, प्रसुप्ति, C₄ वृद्धि)
➔ संसाधन स्पर्धा व आश्रय
(N, P, K, जल शोषण + कीट-रोग आश्रय)
➔ आर्थिक व गुणवत्ता हानि
(33–45% उपज हानि + बीज संदूषण)
➔ स्वास्थ्य जोखिम
(Dropsy, डर्मेटाइटिस, पशु विषाक्तता)
➔ पारिस्थितिक उपयोग (नियंत्रित)
(मृदा संरक्षण, औषधि, हरी खाद)

13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • ‘खरपतवार विज्ञान के जनक’ (Father of Weed Science) ‘जेथ्रो टुल’ (Jethro Tull) हैं जिन्होंने 1731 में अपनी पुस्तक ‘Horse Hoeing Husbandry’ में पहली बार ‘Weed’ शब्द दिया।
  • भारत में ICAR-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DWR, पूर्व में NRCWS) वर्ष 1989 में ‘जबलपुर’ (मध्य प्रदेश) में स्थापित किया गया।
  • सरसों के तेल में सत्यानाशी (Argemone mexicana) के बीज मिलने से मनुष्यों में ‘ड्रॉप्सी’ (Epidemic Dropsy) रोग होता है और गाजर घास (Parthenium hysterophorus) में ‘पार्थेनिन’ (Parthenin) नामक विषैला तत्व होता है।
  • प्रति पौधा बीज उत्पादन क्षमता के आँकड़े याद रखें: जंगली चौलाई (Amaranthus) = 1,96,000 बीज/पौधा, मकोय (Solanum nigrum) = 1,78,000 बीज/पौधा, बथुआ (Chenopodium album) = 72,000 बीज/पौधा, और अमरबेल (Cuscuta) = 16,000 बीज/पौधा।
  • गुम्मे / द्रोणपुष्पी (Leucas aspera) का उपयोग साँप के काटने के उपचार में और सत्यानाशी (Argemone mexicana) का उपयोग क्षारीय (Alkali/Sodic) मृदा के सुधार में किया जाता है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)

  • Father of Weed Science: Jethro Tull (1731) — Horse Hoeing Husbandry।
  • ICAR-DWR: जबलपुर (म.प्र.), स्थापना 1989।
  • उपज हानि क्रम: खरपतवार (33–45%) > कीट (26%) > रोग (20%)।
  • प्रमुख विषाक्तताएँ: Argemone = Dropsy (Sanguinarine) | Parthenium = Dermatitis (Parthenin) | Lantana = Lantadene-A | Sorghum halepense = HCN (Dhurrin)।

15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)

1. वर्ष 1731 में अपनी पुस्तक ‘Horse Hoeing Husbandry’ में सर्वप्रथम ‘Weed’ (खरपतवार) शब्द का प्रयोग करने वाले वैज्ञानिक कौन हैं जिन्हें ‘खरपतवार विज्ञान का जनक’ कहा जाता है?
(A) पीटर डिक्रेसेन्जी
(B) जेथ्रो टुल (Jethro Tull)
(C) डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन
(D) ऑर्थर यंग
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (B) जेथ्रो टुल (Jethro Tull)
व्याख्या: जेथ्रो टुल ने 1731 में पहली बार ‘Weed’ शब्द परिभाषित किया और हो (Hoe) व सीड ड्रिल का आविष्कार किया।
2. सरसों के बीजों में किस खरपतवार के बीजों की मिलावट होने से मनुष्यों में जानलेवा ‘ड्रॉप्सी’ (Epidemic Dropsy) और अंधापन रोग हो जाता है?
(A) बथुआ (Chenopodium album)
(B) सत्यानाशी (Argemone mexicana)
(C) कृष्णनील (Anagallis arvensis)
(D) हिरणखुरी (Convolvulus arvensis)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (B) सत्यानाशी (Argemone mexicana)
व्याख्या: सत्यानाशी के काले बीज सरसों जैसे दिखते हैं; इनमें ‘सैंग्विनारिन’ (Sanguinarine) एल्कलॉइड होता है जिससे ड्रॉप्सी रोग होता है।
3. भाकृअनुप-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय (ICAR-Directorate of Weed Research — DWR) कहाँ स्थित है?
(A) नई दिल्ली
(B) जबलपुर (मध्य प्रदेश)
(C) हैदराबाद (तेलंगाना)
(D) लुधियाना (पंजाब)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (B) जबलपुर (मध्य प्रदेश)
व्याख्या: ICAR-DWR (पूर्व नाम NRCWS, स्थापना 1989) महाराजपुर, जबलपुर (मध्य प्रदेश) में स्थित है।
4. जंगली चौलाई (Amaranthus spp.) और बथुआ (Chenopodium album) के एक पौधे से औसतन कितने बीज प्रति पौधा उत्पन्न होते हैं?
(A) 100 और 500 बीज
(B) 1,96,000 और 72,000 बीज
(C) 1,000 और 2,000 बीज
(D) 10 और 20 बीज
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (B) 1,96,000 और 72,000 बीज
व्याख्या: जंगली चौलाई लगभग 1,96,000 बीज/पौधा, मकोय 1,78,000 बीज/पौधा और बथुआ लगभग 72,000 बीज/पौधा उत्पन्न करता है।
5. गाजर घास (Parthenium hysterophorus) में कौन-सा रासायनिक तत्व पाया जाता है जो मनुष्यों में चर्म एलर्जी (Contact dermatitis) और अस्थमा पैदा करता है?
(A) पार्थेनिन (Parthenin)
(B) लैंटैडीन-A
(C) निकोटीन
(D) कैफीन
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) पार्थेनिन (Parthenin)
व्याख्या: गाजर घास में सेस्क्विटरपीन लैक्टोन ‘पार्थेनिन’ (Parthenin) पाया जाता है जो चर्म रोग और श्वसन एलर्जी का कारण बनता है।
6. भारत में कृषि फसलों को विभिन्न जैविक कारकों (Biotic stresses) से होने वाली कुल वार्षिक उपज हानि में सर्वाधिक योगदान किसका है?
(A) पादप रोग (20%)
(B) कीट (26%)
(C) खरपतवार (33% से 45%)
(D) चूहे एवं पक्षी (6%)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (C) खरपतवार (33% से 45%)
व्याख्या: फसलों में सर्वाधिक उपज हानि खरपतवारों (33–45%) से होती है, जो कीटों और रोगों दोनों से अधिक है।
7. सूखे की स्थिति में बरू या जॉनसन घास (Sorghum halepense) की नई पत्तियों में कौन-सा विषैला तत्व बनता है जिसे चरने पर पशुओं की मृत्यु हो सकती है?
(A) हाइड्रोसायनिक अम्ल / धुरिन (HCN / Prussic acid)
(B) विटामिन C
(C) ग्लूकोज
(D) सिट्रिक अम्ल
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) हाइड्रोसायनिक अम्ल / धुरिन (HCN / Prussic acid)
व्याख्या: ज्वार कुल के इस खरपतवार में सूखे के समय सायनोजेनिक ग्लाइकोसाइड ‘धुरिन’ (HCN) बनता है।
8. निम्नलिखित में से किस खरपतवार का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में ‘साँप के काटने’ (Snake bite) के उपचार और किस खरपतवार का उपयोग ‘पथरी’ (Kidney stone) के उपचार में किया जाता है?
(A) गुम्मे (Leucas aspera) और पुनर्नवा/गोखरू (Boerhavia diffusa / Tribulus terrestris)
(B) गाजर घास और लैंटाना
(C) अमरबेल और जलकुंभी
(D) गेहूँसा और जंगली जई
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) गुम्मे (Leucas aspera) और पुनर्नवा/गोखरू (Boerhavia diffusa / Tribulus terrestris)
व्याख्या: Leucas aspera साँप के दंश में तथा गोखरू व पुनर्नवा गुर्दे की पथरी व मूत्र रोगों में औषधीय रूप से प्रयुक्त होते हैं।
9. पशुओं द्वारा लैंटाना (Lantana camara) की पत्तियाँ चर लेने पर किस विषैले तत्व के कारण उनमें पीलिया और प्रकाश-संवेदनशीलता हो जाती है?
(A) लैंटैडीन-A (Lantadene-A)
(B) मिमोसिन
(C) जग्लोन
(D) अजाडिराक्टिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) लैंटैडीन-A (Lantadene-A)
व्याख्या: लैंटाना में ‘लैंटैडीन-A’ नामक पेंटासाइक्लिक ट्राइटरपीनॉयड पाया जाता है जो पशुओं के यकृत (Liver) को क्षतिग्रस्त करता है।
10. क्षारीय / ऊसर मृदाओं (Alkali/Sodic soils) के सुधार के लिए किस खरपतवार के शुष्क पाउडर का हरी खाद के रूप में प्रयोग लाभकारी पाया गया है?
(A) सत्यानाशी (Argemone mexicana)
(B) अमरबेल (Cuscuta)
(C) ओरूबैंकी (Orobanche)
(D) स्ट्राइगा (Striga)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) सत्यानाशी (Argemone mexicana)
व्याख्या: सत्यानाशी (Argemone mexicana) में कार्बनिक अम्ल होते हैं जो क्षारीय मृदा का pH और ESP घटाकर उसे सुधारते हैं।

16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)

  1. जेथ्रो टुल (1731, पुस्तक: Horse Hoeing Husbandry) को ‘खरपतवार विज्ञान का जनक’ (Father of Weed Science) कहा जाता है।
  2. भारत में ICAR-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DWR, स्थापना 1989) जबलपुर (मध्य प्रदेश) में स्थित है।
  3. सरसों के तेल में सत्यानाशी (Argemone mexicana) के बीज की मिलावट से मनुष्यों में ‘ड्रॉप्सी’ (Dropsy) रोग होता है।
  4. जंगली चौलाई (Amaranthus) के एक पौधे से औसतन 1,96,000 बीज और बथुआ से 72,000 बीज उत्पन्न होते हैं।
  5. गाजर घास (Parthenium hysterophorus) में ‘पार्थेनिन’ और लैंटाना में ‘लैंटैडीन-A’ नामक विषैला तत्व पाया जाता है।

(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)

1. ‘खरपतवार विज्ञान के जनक’ कौन हैं और उनकी प्रसिद्ध पुस्तक का नाम क्या है?
उत्तर: जेथ्रो टुल (Jethro Tull, 1731); पुस्तक का नाम: ‘Horse Hoeing Husbandry’।
2. गेहूँसा (Phalaris minor) के 1000 बीजों का परीक्षण भार (Test weight) कितना होता है?
उत्तर: मात्र 2.0 ग्राम (जबकि गेहूँ का परीक्षण भार लगभग 40 ग्राम होता है)।
3. गाजर घास (Parthenium) और सत्यानाशी (Argemone) में पाए जाने वाले विषैले रसायनों के नाम लिखिए।
उत्तर: गाजर घास में ‘पार्थेनिन’ (Parthenin) तथा सत्यानाशी में ‘सैंग्विनारिन’ (Sanguinarine)।
4. मोथा (Cyperus rotundus) के भूमिगत कंदों का कौन-सा औद्योगिक उपयोग है?
उत्तर: अगरबत्ती, धूप और सुगंधित इत्र (Perfume) बनाने में।
5. भारत में प्रतिवर्ष खरपतवारों से अनुमानित कितनी आर्थिक हानि होती है?
उत्तर: लगभग 11 बिलियन अमेरिकी डॉलर (या कुल फसल उत्पादन का 33–45%)।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)

1. खरपतवार को परिभाषित कीजिए तथा खरपतवारों की कोई छह प्रमुख विशेषताएँ लिखिए जो उन्हें फसलों की अपेक्षा अधिक सहनशील बनाती हैं।
उत्तर: जेथ्रो टुल (1731) के अनुसार ‘खरपतवार वह अवांछित पौधा है जो बिना बोए ऐसे स्थान पर उगता है जहाँ उसकी आवश्यकता नहीं होती।’ छह विशेषताएँ: (1) प्रचुर बीज उत्पादन (जैसे चौलाई में 1,96,000 बीज/पौधा), (2) मृदा में बीजों की 20–50 वर्ष तक लंबी जीवन क्षमता, (3) बीज प्रसुप्ति और टुकड़ों में अंकुरण, (4) कंद, प्रकंद व जड़ों द्वारा तीव्र वानस्पतिक प्रजनन, (5) C₄ प्रकाश-संश्लेषण दक्षता व गहरी जड़ प्रणाली, और (6) फसलों के साथ रूपात्मक समानता (Mimicry)।
2. मानव और पशु स्वास्थ्य पर खरपतवारों के हानिकारक प्रभावों को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: (1) गाजर घास (Parthenium hysterophorus) के परागकणों और पार्थेनिन विष से मनुष्यों में एक्जिमा/चर्म एलर्जी और अस्थमा होता है; (2) सरसों में सत्यानाशी (Argemone mexicana) के बीज की मिलावट से मनुष्यों में जानलेवा ‘ड्रॉप्सी’ रोग होता है; (3) लैंटाना (Lantana camara) चरने से पशुओं में लैंटैडीन-A विष के कारण पीलिया व यकृत क्षति होती है; और (4) सूखे में बरू घास (Sorghum halepense) चरने से पशुओं में HCN विषाक्तता होती है।
3. खरपतवार किस प्रकार फसल कीटों और रोगों के एकांतर परपोषी (Alternate hosts) के रूप में कार्य करते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जब खेत में मुख्य फसल नहीं होती, तब खरपतवार कीटों और रोगजनकों को भोजन व आश्रय देकर जीवित रखते हैं: (1) साँवा (Echinochloa) धान के तना छेदक और टुंग्रो वायरस को आश्रय देता है; (2) बथुआ (Chenopodium) और मकोय कपास के अमेरिकन सुंडी (Helicoverpa) व एफिड को आश्रय देते हैं; और (3) दूब व सैंक्रस घास बाजरे के अरगट रोग को आश्रय देते हैं।
4. कृषि उत्पादों की गुणवत्ता (Quality of farm produce) को खरपतवार किस प्रकार घटाते हैं?
उत्तर: (1) गेहूँ के दानों में हिरणखुरी या जंगली प्याज (Asphodelus) के बीज मिलने से आटे का रंग काला और गंध खराब हो जाती है; (2) सरसों में सत्यानाशी के बीज मिलने से तेल विषाक्त हो जाता है; (3) चारे की फसलों (बरसीम) में कासनी (Cichorium intybus) मिलने से दूध में कड़वाहट आती है; और (4) भेड़ की ऊन में गोखरू (Xanthium) के काँटेदार बीज फँसने से ऊन का बाजार मूल्य गिर जाता है।
5. पारिस्थितिकी तंत्र में खरपतवारों के पाँच लाभकारी प्रभाव (Beneficial effects) उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: (1) मृदा संरक्षण: दूब घास, काँस व खींप परती भूमि और बालू के टीलों को अपरदन से बचाते हैं; (2) औषधीय महत्व: गुम्मे (Leucas aspera) साँप काटने में, भृंगराज बालों के लिए और गोखरू/पुनर्नवा पथरी में उपयोगी हैं; (3) मृदा सुधार व हरी खाद: सत्यानाशी से ऊसर भूमि सुधार और जलकुंभी से पोटाश-युक्त कंपोस्ट बनता है; (4) साग व चारा: बथुआ व चौलाई पौष्टिक साग हैं; और (5) मोथा के कंदों से अगरबत्ती व इत्र बनता है।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)

1. खरपतवार क्या हैं? खरपतवारों की उन सभी जैविक और पारिस्थितिक विशेषताओं (Characteristics of weeds) का उदाहरण सहित सविस्तार वर्णन कीजिए जिनके कारण वे प्रकृति में इतने आक्रामक और अविनाशी बने रहते हैं।
उत्तर रूपरेखा: जेथ्रो टुल व बील की परिभाषाएँ लिखते हुए सारणी 1.1 के बीज उत्पादन आँकड़े (Striga 50 लाख, चौलाई 1.96 लाख, मकोय 1.78 लाख, बथुआ 72 हजार), बीज जीवन क्षमता (30-50 वर्ष), प्रसुप्ति, वानस्पतिक प्रजनन (मोथा, दूब), फसल नकल (Mimicry), C₄ प्रकाश-संश्लेषण और सुरक्षात्मक आवरण का विस्तृत वर्णन करें।
2. कृषि उत्पादन, उत्पाद गुणवत्ता, मानव व पशु स्वास्थ्य और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर खरपतवारों के हानिकारक प्रभावों (Harmful effects) की विस्तृत विवेचना कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: 33–45% उपज हानि ($11 Billion/yr), गुणवत्ता ह्रास, कीट-रोग एकांतर परपोषी, स्वास्थ्य खतरे (Dropsy, Parthenium allergy, Lantadene-A, HCN poisoning) और जलकुंभी के जलीय दुष्प्रभावों का विस्तार से वर्णन करें।
3. ‘सभी खरपतवार सर्वदा हानिकारक नहीं होते’—इस कथन की पुष्टि करते हुए पारिस्थितिकी तंत्र, औषधि, मृदा सुधार और उद्योग में खरपतवारों के लाभकारी प्रभावों (Beneficial effects) पर निबंध लिखिए।
उत्तर रूपरेखा: मृदा व जल संरक्षण, 6 प्रमुख औषधीय खरपतवारों के वानस्पतिक नाम व उपयोग, ऊसर भूमि सुधार (सत्यानाशी), हरी खाद व बायोगैस (जलकुंभी), फाइटो-रेमेडिएशन और कुटीर उद्योग (मूंज, मोथा इत्र) का पूर्ण विवरण प्रस्तुत करें।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGRON 311 notes।

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