PPATH 311 Lecture 08: गुलाब, गेंदा, बेर और आँवला के प्रमुख रोग एवं उनका समन्वित प्रबंधन

PPATH 311 · Plant Pathology Smart Notes
गुलाब, गेंदा, बेर और आँवला के प्रमुख रोग एवं उनका समन्वित प्रबंधन
Major Diseases of Rose, Marigold, Ber, and Aonla & Their Management
Rose (गुलाब), Marigold (गेंदा), Ber (बेर), Aonla (आँवला)
विषय सूची · Quick Navigation
अधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsरोग वर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesफसलवार रोग एवं प्रबंधन · Disease Notesतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्सअधिगम उद्देश्य · Learning Objectives
- गुलाब के तीनों प्रमुख रोगों—शीर्षारंभी क्षय (Die-back – छँटाई के बाद कटे सिरों से सूखना), चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew) और काला पत्ती धब्बा (Black Spot – झालरदार किनारे वाले धब्बे)—की पहचान व प्रबंधन करना।
- गेंदे के बोट्राइटिस अंगमारी / धूसर फफूँद (Botrytis Blight – फूलों का भूरा सड़न) के लक्षणों व नियंत्रण को समझना।
- शुष्क फलों में बेर के चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew – Oidium erysiphoides f.sp. ziziphi) और आँवला के किट्ट रोग (Aonla Rust – Ravenelia emblicae, फलों पर काले छल्ले) का वैज्ञानिक प्रबंधन सीखना।
प्रस्तावना · Introduction
पुष्प उत्पादन (Floriculture) के अंतर्गत गुलाब (Rose – 'फूलों का राजा') और गेंदा (Marigold) भारत के सर्वाधिक व्यावसायिक फूल हैं, जबकि शुष्क उद्यानिकी (Arid Horticulture) में बेर (Ber – 'गरीब का सेब') और आँवला (Aonla – 'अमृत फल') राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात के शुष्क क्षेत्रों की प्रमुख फल फसलें हैं। इस अंतिम व्याख्यान में गुलाब के 3 रोगों तथा गेंदा, बेर और आँवला के प्रमुख रोगों का संपूर्ण वैज्ञानिक, लक्षण-आधारित और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions
झालरदार किनारे (Fringed / Feathery Margins)
गुलाब के काले पत्ती धब्बा (Diplocarpon rosae) में पत्ती की ऊपरी सतह पर बनने वाले गोल काले धब्बों के किनारों से कवक तंतुओं का पंख या पलकों की तरह बाहर की ओर फैलना।
शीर्षारंभी क्षय (Rose Die-Back)
अक्टूबर में गुलाब की कटाई-छँटाई (Pruning) के बाद कटे हुए खुले सिरों से Diplodia rosarum कवक का प्रवेश कर टहनियों को ऊपर से नीचे की ओर काला करके सुखाना।
फैनरोइड सिस्ट (multicellular Teliospore Head of Ravenelia)
आँवला के किट्ट कवक (Ravenelia emblicae) में कई टेलियोस्पोर कोशिकाओं के आपस में जुड़कर बनने वाला बहुकोशिकीय छतरीनुमा या तश्तरीनुमा बीजाणु शीर्ष जिसके नीचे पारदर्शी पुटिकाएँ (Cysts) लगी होती हैं।
रोग वर्गीकरण · Classification
Ascomycetes / Deuteromycetes जनित रोग
गुलाब का Die-back (Diplodia rosarum / Lasiodiplodia theobromae), Powdery Mildew (Podosphaera pannosa / Sphaerotheca pannosa) व Black Leaf Spot (Diplocarpon rosae / Marssonina rosae), गेंदे का Botrytis Blight (Botrytis cinerea), बेर का Powdery Mildew (Oidium erysiphoides f.sp. ziziphi)।
Basidiomycetes (किट्ट) जनित रोग
आँवला का किट्ट / रोली रोग (Ring Rust of Aonla – Ravenelia emblicae)।
महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles
- कटाई-छँटाई के घाव और रोग प्रवेश (Pruning Wounds & Pathogen Entry in Rose): गुलाब में अच्छे फूल लेने के लिए हर वर्ष अक्टूबर में कटाई-छँटाई (Pruning) अनिवार्य होती है, किंतु यही कटे हुए सिरे Diplodia rosarum के लिए सीधा प्रवेश द्वार बन जाते हैं; अतः छँटाई के तुरंत बाद कटे सिरों पर 'Chaubattia Paste' या 'Bordeaux Paste' लगाना अनिवार्य सिद्धांत है।
- बेर में रात्रि के तापमान और चूर्णिल आसिता का संबंध: बेर के चूर्णिल आसिता (Oidium erysiphoides) के कोनिडिया अंकुरण के लिए वर्षा की आवश्यकता नहीं होती; अक्टूबर-नवंबर में जब बेर के फल मटर के आकार के होते हैं और रातें ठंडी व दिन गर्म होते हैं, तब यह रोग विस्फोटक रूप से फैलता है।
फसलवार रोग एवं प्रबंधन · Disease Notes
1. Die-Back of Rose (गुलाब का शीर्षारंभी क्षय / डाई-बैक रोग)
महत्व: भारत में गुलाब का सबसे गंभीर और व्यापक रोग, जो अक्टूबर की कटाई-छँटाई (Pruning) के बाद झाड़ियों को ऊपर से नीचे की ओर सुखाकर मार देता है।
लक्षण · Symptoms
- कटाई-छँटाई (Pruning) के बाद टहनी के कटे हुए ऊपरी सिरे से नीचे की ओर (From pruned tip downwards) छाल पहले भूरी और फिर कोयले जैसी गहरी काली पड़कर सूखने लगती है।
- संक्रमित काली और स्वस्थ हरी टहनी के मिलन स्थल पर स्पष्ट भूरी रेखा दिखती है और सूखी हुई छाल पर सुई की नोक जैसे काले उभार (Pycnidia) उभर आते हैं।
- संक्रमण मुख्य तने और कलम के जोड़ (Bud union) से होते हुए जड़ों तक पहुँच जाता है जिससे पूरी गुलाब की झाड़ी मर जाती है।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- छँटाई हमेशा तेज व विसंक्रमित कैंची (70% अल्कोहल या स्पिरिट में डुबोई हुई) से स्वस्थ कली के ठीक ऊपर 45° के तिरछे कोण (Slanting cut) पर करें तथा रोगी टहनी को स्वस्थ भाग के 5 सेमी नीचे से काटें।
- निर्णायक उपचार: छँटाई के तुरंत बाद सभी कटे हुए सिरों पर 'चौबटिया पेस्ट' (Chaubattia Paste = Copper carbonate : Red lead : Linseed oil :: 1 : 1 : 1.25) अथवा 'Bordeaux Paste' या Carbendazim (2 g/L) + Chlorpyriphos का गाढ़ा लेप लगाएँ।
- छँटाई के बाद पूरी झाड़ी पर Copper Oxychloride @ 3.0 g/L या Carbendazim @ 1.0 g/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
कवक के Pycnidia में प्रारंभ में पारदर्शी व एककोशिकीय तथा परिपक्व होने पर गहरे भूरे, द्विकोशिकीय (1-septate) और लंबाई में धारियों वाले कोनिडिया बनते हैं।
रोग चक्र · Disease Cycle
सूखी टहनियों और मृदा में जीवित रहता है; गंदी छँटाई कैंची (Unsterilized secateurs), सिंचाई जल और डिगर ततैया (Digger wasps – जो कटे हुए सिरों की मज्जा में घोंसला बनाती हैं) द्वारा फैलता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
गलत तरीके से (सीधा) कट लगाना, कुंद कैंची से छाल कुचलना, अत्यधिक सिंचाई और जड़ क्षेत्र में दीमक या सूत्रकृमि का प्रकोप।
2. Powdery Mildew of Rose (गुलाब का चूर्णिल आसिता / दहिया रोग)
महत्व: सर्दियों और वसंत ऋतु (नवंबर से मार्च) में खुले खेत और पॉलीहाउस के गुलाब (Cut-flowers) की सुंदरता व बाजार मूल्य नष्ट करने वाला प्रमुख रोग।
लक्षण · Symptoms
- नई कोमल लाल-हरी पत्तियों, कोमल टहनियों, काँटों और फूल की कलियों (Flower buds) की बाह्यदलियों पर सफेद से धूसर-सफेद रंग का चूर्णमय फफूँद (White powdery coating) फैल जाता है।
- संक्रमित नई पत्तियाँ मुड़कर, सिकुड़कर और बैंगनी रंग की होकर सूख जाती हैं तथा फूल की कलियाँ या तो खिलती ही नहीं या विकृत व छोटे फूल खिलते हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- रासायनिक छिड़काव: घुलनशील गंधक (Wettable Sulphur 80 WP) @ 2.0 g/L या Dinocap (Karathane) @ 1.0 ml/L या Penconazole (Topas) 10 EC @ 0.5 ml/L या Myclobutanil @ 0.5 g/L या Triadimefon (Bayleton) @ 1.0 g/L का 10–15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
अविकल्पी बाह्य परजीवी (Obligate Ectoparasitic Ascomycete) जो ढोलक के आकार के कोनिडिया की शृंखलाएँ (Oidium stage) बनाता है।
रोग चक्र · Disease Cycle
सर्दियों में गुलाब की सुषुप्त कलियों के शल्कों (Dormant buds) में कवकजाल के रूप में जीवित रहता है और हवा द्वारा कोनिडिया से फैलता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
ठंडी और आर्द्र रातें (15–18°C, >85% RH) तथा शुष्क और सुहावने दिन (22–26°C)।
3. Black Leaf Spot of Rose (गुलाब का काला पत्ती धब्बा रोग)
महत्व: मानसून और आर्द्र क्षेत्रों में गुलाब की पत्तियों को समय से पहले गिराकर (Severe premature defoliation) पौधे को कमजोर करने वाला सर्वप्रमुख रोग।
लक्षण · Symptoms
- निर्णायक लक्षण: पत्तियों की ऊपरी सतह पर कोयले जैसे गहरे काले रंग के गोल धब्बे (2–12 मिमी व्यास) बनते हैं, जिनके किनारे एकदम सीधे न होकर पंख, झालर या पलकों की तरह रेशेदार (Characteristic fringed, feathery or radiate margins) होते हैं।
- इन काले धब्बों के चारों ओर की पत्ती का ऊतक तेजी से पीला पड़ जाता है (क्योंकि कवक और संक्रमित पत्ती 'Ethylene' गैस उत्पन्न करते हैं) और पत्तियाँ हल्का छूने पर ही झड़ जाती हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- जमीन पर गिरी हुई संक्रमित पत्तियों को इकट्ठा करके जला दें और फव्वारा सिंचाई के बजाय जड़ों में पानी दें।
- रासायनिक छिड़काव: Chlorothalonil (Kavach) 75 WP @ 2.0 g/L या Mancozeb @ 2.5 g/L या Carbendazim @ 1.0 g/L या Tebuconazole @ 1.0 ml/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
कवक पत्ती की क्यूटिकल के नीचे तश्तरीनुमा Acervuli (Marssonina अवस्था) बनाता है जिनमें द्विकोशिकीय पारदर्शी कोनिडिया बनते हैं, और गिरी हुई पत्तियों में Apothecia (Diplocarpon अवस्था) बनते हैं।
रोग चक्र · Disease Cycle
जमीन पर गिरी हुई सूखी पत्तियों और टहनियों के घावों में जीवित रहता है; वर्षा की छींटों और ऊपर से पानी छिड़कने (Overhead watering) से कोनिडिया द्वारा फैलता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
20–26°C तापमान, >85% आर्द्रता और पत्तियों का कम से कम 6–7 घंटे तक लगातार गीला रहना।
4. Botrytis Blight / Grey Mold / Flower Blight of Marigold (गेंदे का बोट्राइटिस अंगमारी / धूसर फफूँद या फूल सड़न रोग)
महत्व: सर्दियों और वर्षा ऋतु में जब गेंदे के सघन दोहरे फूल (Double flowers) खिलते हैं, तब यह फूलों को सड़ाकर भूरे-धूसर फफूँद के गोले में बदल देता है।
लक्षण · Symptoms
- खिलती हुई कलियों और पूरे खिले हुए फूलों की निचली पंखुड़ियों पर पहले जल-सिक्त भूरे धब्बे बनते हैं।
- नम और ठंडे मौसम में पूरा फूल गलकर भूरा हो जाता है और उसके ऊपर चूहे के बालों जैसी घनी धूसर-भूरी मखमली कवक वृद्धि (Fuzzy grey-brown moldy growth of conidiophores) छा जाती है।
- सड़े हुए फूल डंठल से लटक जाते हैं और सूखने पर उनके भीतर काले स्क्लेरोशिया बन जाते हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- खेत में संक्रमित व सड़े हुए फूलों को तुरंत तोड़कर नष्ट कर दें (Dead-heading) और पौधों की दूरी उचित रखें।
- रासायनिक छिड़काव: Iprodione (Rovral) 50 WP @ 2.0 g/L या Carbendazim 50 WP @ 1.0 g/L या Mancozeb @ 2.5 g/L या Boscalid + Pyraclostrobin का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
कवक के लंबे भूरे कोनिडियोफोर के शीर्ष पर अंडाकार एककोशिकीय कोनिडिया अंगूर के गुच्छे के समान (Like a bunch of grapes – 'Botrytis' का अर्थ ही अंगूर का गुच्छा है) लगे होते हैं।
रोग चक्र · Disease Cycle
मृदा में स्क्लेरोशिया के रूप में और मृत पादप अवशेषों पर जीवित रहता है तथा हवा द्वारा कोनिडिया से फैलता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
15–20°C ठंडा तापमान, कोहरा, बेमौसम बारिश और बड़े गेंदे (African marigold) के फूलों की पंखुड़ियों के बीच पानी रुक जाना।
5. Powdery Mildew of Ber (बेर का चूर्णिल आसिता / छाछिया रोग)
महत्व: बेर का सबसे भयंकर और आर्थिक रूप से सर्वाधिक हानिकारक रोग (70–80% तक फल क्षति), जो अक्टूबर-दिसंबर में मटर के आकार के फलों को झड़ा देता है।
लक्षण · Symptoms
- अक्टूबर-नवंबर में फल लगने के तुरंत बाद मटर के आकार के कोमल हरे फलों (Pea-sized young fruits) और नई पत्तियों पर सफेद आटे या चॉक जैसा चूर्ण (White powdery mass) जम जाता है।
- भीषण आक्रमण होने पर मटर के आकार के फल पीले-भूरे होकर झड़ जाते हैं।
- बड़े फलों पर आक्रमण होने से सफेद धब्बे बाद में गहरे भूरे, खुरदरे और कॉर्क जैसे पपड़ीदार (Corky, rusty-brown cracked patches on fruits) हो जाते हैं; ऐसे फल कड़े व बेस्वाद रह जाते हैं और समय से पहले गिर जाते हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- बाग के आसपास से जंगली झड़बेरी (Ziziphus nummularia) को उखाड़कर नष्ट करें और सनोउर-2 (Sanaur-2), चीनी, जोगिया या सेब जैसी सहनशील किस्में लगाएँ।
- रासायनिक छिड़काव (3 छिड़काव अनिवार्य—पहला फूल आने पर, दूसरा मटर के आकार के फल बनने पर और तीसरा 15 दिन बाद): Dinocap (Karathane) 48 EC @ 1.0 ml/L या घुलनशील गंधक (Wettable Sulphur 80 WP) @ 2.5 g/L या Hexaconazole / Triadimefon @ 1.0 ml/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
अविकल्पी बाह्य परजीवी कवक जो ढोलक के आकार (Barrel-shaped) के कोनिडिया की लंबी शृंखलाएँ बनाता है।
रोग चक्र · Disease Cycle
गर्मियों में यह कवक जंगली बेर / झड़बेरी (Ziziphus nummularia) और पेड़ की सुषुप्त कलियों (Buds) में कवकजाल के रूप में जीवित रहता है और हवा द्वारा कोनिडिया से फैलता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
अक्टूबर-दिसंबर के दौरान ठंडी रातें, गर्म-शुष्क दिन (20–28°C) और सुबह की हल्की नमी (उमराण और कैथली किस्में अत्यधिक संवेदनशील हैं)।
6. Aonla Rust / Ring Rust of Aonla (आँवला का किट्ट / रोली या वलय किट्ट रोग)
महत्व: राजस्थान (विशेषकर जयपुर व प्रतापगढ़) और उत्तर प्रदेश में आँवले का सबसे प्रमुख कवक रोग जो फलों पर काले छल्ले बनाकर उन्हें अचार व मुरब्बा बनाने के अयोग्य कर देता है।
लक्षण · Symptoms
- फलों पर निर्णायक लक्षण: अगस्त-सितंबर के बाद फलों पर पहले छोटे काले रंग के उभरे हुए फफोले (Black pustules) बनते हैं जो गोल घेरे या अंगूठी के रूप में (Concentric ring pattern—इसीलिए इसे 'Ring Rust' कहते हैं) फैलते हैं।
- बाद में ये छल्ले आपस में मिलकर फल के बड़े हिस्से को कोयले जैसा काला व खुरदरा कर देते हैं और प्रभावित भाग के ऊपर एक पतली पारभासी कागज जैसी झिल्ली (Papery cuticle covering the black spore mass) ढकी दिखती है।
- पत्तियों पर (On leaflets): छोटी पत्तियों की दोनों सतहों पर गुलाबी-भूरे से काले रंग के नन्हे फफोले बनते हैं जिनसे पत्तियाँ समय से पहले झड़ जाती हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- बाग की स्वच्छता रखें तथा गिरे हुए रोगग्रस्त फलों व पत्तियों को इकट्ठा करके जला दें।
- रासायनिक छिड़काव: अगस्त के अंत या सितंबर के प्रथम सप्ताह से 15 दिन के अंतराल पर 3 बार Mancozeb (Dithane M-45) 75 WP @ 2.5 g/L या Chlorothalonil (Kavach) @ 2.0 g/L या Wettable Sulphur @ 2.5 g/L या Triadimefon (Bayleton) @ 1.0 g/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
एक-पोषी किट्ट कवक (Autoecious Rust, Basidiomycete); इसके टेलियोस्पोर एकल न होकर कई कोशिकाओं के जुड़ने से बने एक बड़े बहुकोशिकीय तश्तरीनुमा या छतरीनुमा पिंड (Multicellular discoid teliospore head) के रूप में होते हैं जिसके नीचे पारदर्शी पुटिकाएँ (Hygroscopic cysts) जुड़ी होती हैं। (ध्यान दें: फलों व पत्तियों पर एक साथ संक्रमण हो भी सकता है और कई बार केवल फलों या केवल पत्तियों पर ही दिखता है)।
रोग चक्र · Disease Cycle
जमीन पर गिरी संक्रमित पत्तियों और फलों पर टेलियोस्पोर के रूप में जीवित रहता है और हवा द्वारा फैलता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
सितंबर से नवंबर के दौरान 20–25°C तापमान और मध्यम से उच्च सापेक्षिक आर्द्रता। चकैया (Chakaiya) और कृष्णा किस्में संवेदनशील हैं, जबकि 'बनारसी' और 'NA-7 (नीलम)' व 'NA-6' अपेक्षाकृत कम प्रभावित होती हैं।
तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables
तालिका 8.1: गुलाब के तीनों प्रमुख रोगों (Die-Back, Powdery Mildew, Black Leaf Spot) का तुलनात्मक चार्ट
| विशेषता | डाई-बैक (Die-Back) | चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew) | काला पत्ती धब्बा (Black Spot) |
|---|---|---|---|
| रोगजनक | Diplodia rosarum | Podosphaera pannosa (Sphaerotheca pannosa) | Diplocarpon rosae (Marssonina rosae) |
| मुख्य प्रभावित अंग | छँटाई के बाद कटी हुई टहनियाँ | नई कोमल पत्तियाँ, कलियाँ एवं टहनियाँ | पुरानी व मध्य पत्तियों की ऊपरी सतह |
| निदान लक्षण | कटे सिरे से नीचे की ओर छाल का काला पड़कर सूखना | कोमल पत्तियों व कलियों पर सफेद चूर्ण व मुड़ना | झालरदार/पंख जैसे किनारों (Fringed margins) वाले गोल काले धब्बे व पीलापन |
| प्रमुख प्रबंधन | छँटाई के तुरंत बाद Chaubattia Paste / Bordeaux Paste लगाना | Wettable Sulphur (0.2%) / Penconazole / Karathane | गिरी पत्तियाँ जलाना + Chlorothalonil / Mancozeb / Tebuconazole |
तालिका 8.2: गेंदा, बेर और आँवला के प्रमुख रोगों का त्वरित निदान चार्ट
| फसल एवं रोग | रोगजनक (Pathogen) | मुख्य निदान लक्षण | प्रमुख प्रबंधन |
|---|---|---|---|
| गेंदा का बोट्राइटिस अंगमारी (Botrytis Blight) | Botrytis cinerea | खिले हुए फूलों का गलकर धूसर-भूरे फफूँद (Grey mold) से ढक जाना | सड़े फूल हटाना + Iprodione (0.2%) या Carbendazim (0.1%) |
| बेर का चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew) | Oidium erysiphoides f.sp. ziziphi | मटर के आकार के फलों पर सफेद चूर्ण और बाद में कॉर्क जैसी भूरी पपड़ी | झड़बेरी उन्मूलन + Karathane (0.1%) या Wettable Sulphur (0.25%) |
| आँवला का किट्ट (Aonla Ring Rust) | Ravenelia emblicae | फलों पर काले फफोलों के संकेंद्रित छल्ले (Ring rust) और पतली कागजी झिल्ली | सितंबर से Mancozeb (0.25%) या Chlorothalonil (0.2%) के 3 छिड़काव |
सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations
1. गुलाब के डाई-बैक नियंत्रण हेतु 'चौबटिया पेस्ट' (Chaubattia Paste) बनाने का मानक सूत्र
ऐतिहासिक तथ्य एवं प्रयोग: इस पेस्ट का विकास सन् 1942 में यू.बी. सिंह (U.B. Singh) द्वारा राजकीय उद्यान चौबटिया (रानीखेत, उत्तराखंड) में सेब और गुलाब के कटे हुए घावों को कवक संक्रमण से बचाने के लिए किया गया था। अक्टूबर में गुलाब की छँटाई के तुरंत बाद इसे ब्रश से कटे सिरों पर लगाया जाता है।
माइंड मैप · Mind Map
[Lecture 08: गुलाब, गेंदा, बेर एवं आँवला के प्रमुख रोग]
├── 1. गुलाब (Rose - Rosa indica)
│ ├── Die-Back (Diplodia rosarum - Blackening downwards from pruned tip, Digger wasp, Chaubattia paste)
│ ├── Powdery Mildew (Podosphaera / Sphaerotheca pannosa - White powder on buds, Wettable Sulphur / Karathane)
│ └── Black Leaf Spot (Diplocarpon rosae / Marssonina rosae - Fringed/feathery black spots, Ethylene defoliation)
├── 2. गेंदा (Marigold - Tagetes spp.)
│ └── Botrytis Blight / Grey Mold (Botrytis cinerea - Grape-bunch conidia, Fuzzy grey mold on flowers, Iprodione)
├── 3. बेर (Ber - Ziziphus mauritiana)
│ └── Powdery Mildew (Oidium erysiphoides f.sp. ziziphi - Wild ber collateral host, Corky fruits, Karathane)
└── 4. आँवला (Aonla - Emblica officinalis)
└── Aonla Ring Rust (Ravenelia emblicae - Concentric black ring pustules on fruits, Mancozeb / Chlorothalonil)
प्रवाह चित्र · Flowchart
[गुलाब की वार्षिक छँटाई (Pruning) एवं डाई-बैक (Diplodia rosarum) निवारण प्रोटोकॉल]
अक्टूबर माह में गुलाब की कटाई-छँटाई (Annual Pruning of Rose Bushes)
↓ (यदि कुंद कैंची से सीधा कट लगाया जाए और घाव खुला छोड़ दिया जाए)
कटे हुए सिरे और Digger Wasp के छिद्रों से Diplodia rosarum के कोनिडिया का प्रवेश
↓ (ऊपर से नीचे की ओर छाल व लकड़ी का काला पड़ना - Die-Back)
कलम के जोड़ (Bud union) और जड़ों तक संक्रमण पहुँचकर पूरी झाड़ी की मृत्यु
↓ (वैज्ञानिक निवारण पथ)
स्पिरिट से विसंक्रमित तेज कैंची से कली के ऊपर 45° का तिरछा कट → कटे सिरों पर तुरंत 'Chaubattia Paste' (1:1:1.25) का लेप → COC (0.3%) छिड़काव
परीक्षा टिप्स · Exam Tips
- चौबटिया पेस्ट (Chaubattia Paste) के घटक और अनुपात (Copper carbonate : Red lead : Linseed oil :: 1 : 1 : 1.25) को कंठस्थ कर लें—यह उद्यानिकी और पादप रोगविज्ञान दोनों की परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।
- गुलाब के Black Spot (Diplocarpon rosae) की मुख्य पहचान काले धब्बों के 'झालरदार/पंख जैसे किनारे' (Fringed/Feathery margins) हैं।
- बेर का सबसे मुख्य रोग चूर्णिल आसिता (Oidium erysiphoides f.sp. ziziphi) है जबकि आँवला का सबसे मुख्य रोग किट्ट (Ravenelia emblicae) है।
त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision
- गुलाब का डाई-बैक (Diplodia rosarum): छँटाई के बाद ऊपर से नीचे सूखना, चौबटिया पेस्ट (1:1:1.25) से उपचार।
- गुलाब का चूर्णिल आसिता (Podosphaera pannosa): नई पत्तियों व कलियों पर सफेद चूर्ण, Penconazole / Karathane।
- गुलाब का काला पत्ती धब्बा (Diplocarpon rosae / Marssonina rosae): झालरदार किनारे वाले काले धब्बे।
- गेंदे का धूसर फफूँद (Botrytis cinerea): फूलों पर भूरा-धूसर मखमली सड़न, Iprodione / Carbendazim।
- बेर का चूर्णिल आसिता (Oidium erysiphoides f.sp. ziziphi) एवं आँवला का रिंग किट्ट (Ravenelia emblicae)।
MCQs — उत्तर एवं व्याख्या
1. गुलाब की छँटाई के बाद कटे हुए सिरों से टहनियों का ऊपर से नीचे की ओर काला पड़कर सूखना (Die-back of Rose) मुख्यतः किस कवक से होता है?
- (A) Diplocarpon rosae
- (B) Diplodia rosarum (Lasiodiplodia theobromae)
- (C) Sphaerotheca pannosa
- (D) Botrytis cinerea
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — गुलाब का डाई-बैक रोग मुख्यतः Diplodia rosarum कवक द्वारा कटाई-छँटाई के घावों से प्रवेश करने पर होता है।
2. गुलाब के काले पत्ती धब्बा (Black Leaf Spot of Rose – Diplocarpon rosae) की अलैंगिक (Anamorph) अवस्था का नाम क्या है?
- (A) Oidium leucoconium
- (B) Marssonina rosae
- (C) Spilocaea pomi
- (D) Phoma rosae
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — Diplocarpon rosae की अलैंगिक Acervulus अवस्था को 'Marssonina rosae' कहा जाता है।
3. चौबटिया पेस्ट (Chaubattia Paste) किन तीन घटकों को 1 : 1 : 1.25 के अनुपात में मिलाकर बनाया जाता है?
- (A) कॉपर सल्फेट + चूना + पानी
- (B) कॉपर कार्बोनेट + रेड लेड (सिंदूर) + अलसी का तेल (Linseed oil)
- (C) जिंक सल्फेट + चूना + सरसों का तेल
- (D) सल्फर + चूना + पानी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — चौबटिया पेस्ट में 1 भाग कॉपर कार्बोनेट, 1 भाग रेड लेड और 1.25 भाग कच्चा अलसी का तेल मिलाया जाता है।
4. बेर का सबसे विनाशकारी रोग 'चूर्णिल आसिता' (Powdery Mildew of Ber) किस कवक के कारण होता है?
- (A) Erysiphe pisi
- (B) Oidium erysiphoides f.sp. ziziphi
- (C) Ravenelia emblicae
- (D) Uncinula necator
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — बेर का चूर्णिल आसिता Oidium erysiphoides f.sp. ziziphi द्वारा होता है जो मटर के आकार के फलों को सुखाकर गिरा देता है।
5. आँवले के फलों पर काले फफोलों के संकेंद्रित छल्ले बनाने वाला 'रिंग किट्ट' (Aonla Ring Rust) किस कवक से होता है?
- (A) Puccinia emblicae
- (B) Ravenelia emblicae
- (C) Uromyces phaseoli
- (D) Melampsora lini
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — आँवले का किट्ट रोग Ravenelia emblicae द्वारा होता है जिसके टेलियोस्पोर बहुकोशिकीय छतरीनुमा पिंड बनाते हैं।
6. गेंदे के फूलों को सड़ाकर उन पर चूहे के बालों जैसी धूसर-भूरी मखमली फफूँद (Grey Mold) उत्पन्न करने वाला रोगजनक कौन सा है?
- (A) Alternaria tagetica
- (B) Botrytis cinerea
- (C) Septoria tageticola
- (D) Sclerotium rolfsii
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — Botrytis cinerea गेंदे में बोट्राइटिस ब्लाइट / ग्रे मोल्ड उत्पन्न करता है।
7. गुलाब के किस रोग में पत्ती की ऊपरी सतह पर झालरदार या पंख जैसे किनारों (Fringed/Feathery margins) वाले काले धब्बे बनते हैं?
- (A) डाई-बैक
- (B) चूर्णिल आसिता
- (C) काला पत्ती धब्बा (Black Spot – Diplocarpon rosae)
- (D) रस्ट
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) — Diplocarpon rosae के तंतु क्यूटिकल के नीचे विकिरण के रूप में फैलते हैं जिससे धब्बों के किनारे झालरदार दिखते हैं।
8. बेर के चूर्णिल आसिता कवक (Oidium erysiphoides) के गर्मियों में जीवित रहने का मुख्य जंगली संपार्श्विक परपोषी (Collateral Host) कौन सा है?
- (A) काँस घास
- (B) जंगली झड़बेरी (Ziziphus nummularia)
- (C) बारबेरी
- (D) बथुआ
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — जंगली झड़बेरी (Ziziphus nummularia) पर यह कवक ऑफ-सीजन में जीवित रहता है।
9. गुलाब का चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew) किस कवक द्वारा होता है?
- (A) Podosphaera pannosa (Sphaerotheca pannosa var. rosae)
- (B) Erysiphe graminis
- (C) Leveillula taurica
- (D) Phyllactinia corylea
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — गुलाब का चूर्णिल आसिता Sphaerotheca pannosa var. rosae (वर्तमान नाम Podosphaera pannosa) से होता है।
10. आँवला के रिंग किट्ट (Ravenelia emblicae) के प्रभावी नियंत्रण के लिए सितंबर से किस कवकनाशी का छिड़काव किया जाता है?
- (A) स्ट्रेप्टोसाइक्लिन
- (B) Mancozeb (Dithane M-45 @ 0.25%) या Chlorothalonil (@ 0.2%)
- (C) केवल बोरिक अम्ल
- (D) मेटालैक्सिल
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — आँवला किट्ट की रोकथाम के लिए सितंबर-अक्टूबर में Mancozeb (2.5 g/L) या Chlorothalonil (2 g/L) के 3 छिड़काव अत्यंत प्रभावी हैं।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. चौबटिया पेस्ट का विकास किसने और कहाँ किया था?
सन् 1942 में यू.बी. सिंह (U.B. Singh) ने राजकीय उद्यान चौबटिया (रानीखेत, उत्तराखंड) में किया था।
2. गुलाब के डाई-बैक रोग के प्रसार में कौन सा कीट कटे सिरों में घोंसला बनाकर सहायता करता है?
डिगर ततैया (Digger Wasp)।
3. बेर के चूर्णिल आसिता के प्रति दो सहनशील किस्मों के नाम लिखिए।
सनोउर-2 (Sanaur-2) एवं चीनी (या जोगिया)।
4. आँवला के किट्ट रोगजनक (Ravenelia emblicae) के टेलियोस्पोर की मुख्य विशेषता क्या है?
इसके टेलियोस्पोर बहुकोशिकीय तश्तरीनुमा/छतरीनुमा पिंड (Multicellular discoid head) में जुड़े होते हैं जिनके नीचे पुटिकाएँ (Cysts) होती हैं।
5. गेंदे के बोट्राइटिस अंगमारी के कवक Botrytis cinerea की लैंगिक अवस्था का नाम लिखिए।
Botryotinia fuckeliana।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. गुलाब के डाई-बैक (Die-back) रोग के लक्षण एवं प्रबंधन लिखिए।
अक्टूबर में छँटाई के बाद Diplodia rosarum कटे हुए सिरों से प्रवेश कर टहनियों को ऊपर से नीचे की ओर काला करके सुखा देता है। नियंत्रण हेतु विसंक्रमित तेज कैंची से कली के ऊपर 45° का तिरछा कट लगाएँ, कटे सिरों पर तुरंत चौबटिया पेस्ट (1:1:1.25) या बोर्डो पेस्ट लगाएँ और Copper Oxychloride (0.3%) का छिड़काव करें।
2. गुलाब के काले पत्ती धब्बा (Black Spot) की पहचान एवं नियंत्रण कैसे करेंगे?
Diplocarpon rosae (Marssonina rosae) से पत्तियों की ऊपरी सतह पर झालरदार या पंख जैसे किनारों (Fringed margins) वाले गोल काले धब्बे बनते हैं और एथिलीन बनने से पत्तियाँ पीली पड़कर झड़ जाती हैं। नियंत्रण हेतु गिरी पत्तियाँ जलाएँ और Chlorothalonil (0.2%) या Mancozeb (0.25%) का छिड़काव करें।
3. बेर के चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew) के लक्षण एवं रासायनिक नियंत्रण लिखिए।
Oidium erysiphoides f.sp. ziziphi से मटर के आकार के छोटे हरे फलों पर सफेद चूर्ण जम जाता है और बड़े फलों पर भूरी कॉर्क जैसी पपड़ी व दरारें पड़ जाती हैं। नियंत्रण हेतु बाग के पास से झड़बेरी हटाएँ तथा फूल आने व मटर के बराबर फल बनने पर Karathane (0.1%) या घुलनशील गंधक (0.25%) के 3 छिड़काव करें।
4. आँवला के रिंग किट्ट (Aonla Rust) के लक्षण एवं नियंत्रण के उपाय लिखिए।
Ravenelia emblicae के कारण आँवले के फलों पर काले फफोलों के संकेंद्रित छल्ले (Ring rust) बनते हैं जो कागज जैसी पतली झिल्ली से ढके रहते हैं और पत्तियों पर गुलाबी-भूरे फफोले बनते हैं। नियंत्रण हेतु सितंबर से 15 दिन के अंतराल पर Mancozeb (0.25%) या Chlorothalonil (0.2%) के 3 छिड़काव करें।
5. गेंदे के बोट्राइटिस अंगमारी (Botrytis Blight) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Botrytis cinerea ठंडे और आर्द्र मौसम में गेंदे के खिले हुए फूलों की पंखुड़ियों को सड़ा देता है और पूरे फूल पर धूसर-भूरा मखमली फफूँद (Grey mold) छा जाता है। नियंत्रण हेतु सड़े फूलों को तोड़कर जला दें और Iprodione (0.2%) या Carbendazim (0.1%) का छिड़काव करें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. गुलाब के तीनों प्रमुख रोगों—शीर्षारंभी क्षय (Die-back), चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew) और काला पत्ती धब्बा (Black Spot)—के रोगजनकों, लक्षणों, अनुकूल परिस्थितियों और समन्वित प्रबंधन का सविस्तर वर्णन कीजिए।
Diplodia rosarum (छँटाई के घाव व चौबटिया पेस्ट निर्माण विधि), Podosphaera pannosa (कलियों पर सफेद चूर्ण व गंधक/कैराथेन छिड़काव) और Diplocarpon rosae (झालरदार काले धब्बे, एथिलीन से पतझड़ व क्लोरोथैलोनिल छिड़काव) का विस्तृत वैज्ञानिक विवरण लिखें।
2. शुष्क फलों—बेर के चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew) और आँवला के किट्ट रोग (Aonla Rust)—तथा गेंदे के बोट्राइटिस अंगमारी का रोगजनक, लक्षण, रोग चक्र और प्रबंधन सहित वर्णन कीजिए।
Oidium erysiphoides f.sp. ziziphi (झड़बेरी की भूमिका व 3 छिड़काव अनुसूची), Ravenelia emblicae (बहुकोशिकीय टेलियोस्पोर, फलों पर रिंग रस्ट व Mancozeb छिड़काव) और Botrytis cinerea (अंगूर गुच्छे जैसे कोनिडिया व फूल सड़न नियंत्रण) का सविस्तर वर्णन करें।
3. उद्यानिकी फसलों (फल एवं फूल) में कटाई-छँटाई के घावों के उपचार हेतु प्रयुक्त होने वाले विभिन्न पेस्ट (Chaubattia Paste, Bordeaux Paste) की निर्माण विधि एवं बहुवर्षीय बागों में स्वच्छता (Orchard Sanitation) के महत्व की विवेचना कीजिए।
चौबटिया पेस्ट (1:1:1.25) और बोर्डो पेस्ट (1:1:10) की निर्माण विधि, गुलाब के डाई-बैक, नींबू के गमोसिस व कैंकर तथा सेब के स्कैब व आँवला किट्ट में बाग स्वच्छता और प्रूनिंग प्रबंधन की भूमिका को उदाहरणों सहित स्पष्ट करें।
परीक्षा वन-लाइनर्स
- गुलाब के काले पत्ती धब्बा (Diplocarpon rosae) में संक्रमित पत्तियाँ 'Ethylene' गैस बनने के कारण तेजी से पीली पड़कर झड़ जाती हैं।
- चौबटिया पेस्ट (Chaubattia Paste) का मानक अनुपात Copper carbonate : Red lead : Raw linseed oil = 1 : 1 : 1.25 होता है।
- ग्रीक भाषा में 'Botrytis' का अर्थ 'अंगूर का गुच्छा' होता है क्योंकि इसके कोनिडियोफोर पर कोनिडिया अंगूर के गुच्छे जैसे लगते हैं।
- बेर की 'उमराण' (Umran) और 'कैथली' किस्में चूर्णिल आसिता (Oidium erysiphoides) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।
- आँवला के किट्ट (Ravenelia emblicae) को फलों पर अंगूठी के आकार के काले धब्बे बनने के कारण 'Ring Rust of Aonla' भी कहते हैं।
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPATH 311 Smart Notes।





