PPATH 311 Lecture 01: धान, गेहूँ और जौ के प्रमुख रोग एवं उनका समन्वित प्रबंधन

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PPATH 311 · Plant Pathology Smart Notes
LECTURE 01 / 08 · PPATH 311

धान, गेहूँ और जौ के प्रमुख रोग एवं उनका समन्वित प्रबंधन

Major Diseases of Rice, Wheat, and Barley & Their Management

Rice (धान), Wheat (गेहूँ), Barley (जौ)

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsरोग वर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesफसलवार रोग एवं प्रबंधन · Disease Notesतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Field crops- Rice (blast, brown spot, sheath blight, bacterial leaf blight, tungro, khaira); Wheat (rusts, loose smut, Karnal bunt) Barley (Covered smut);
अध्ययन संदर्भ: यह उपलब्ध कराए गए पाठ्यक्रम के विस्तृत notes हैं। रासायनिक दवाओं, एंटीबायोटिक, पेस्ट और उनकी दरों के उल्लेख शैक्षणिक स्रोत का हिस्सा हैं; इन्हें वर्तमान पंजीकरण या खेत में प्रयोग की स्वीकृति न मानें। वास्तविक उपयोग से पहले संबंधित फसल के लिए वर्तमान label claim और स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय/KVK की सलाह जाँचें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • धान के प्रमुख कवक, जीवाणु, विषाणु एवं पोषक तत्व जनित रोगों (Blast, Brown Spot, Sheath Blight, BLB, Tungro, Khaira) की सटीक पहचान एवं निदान करना।
  • गेहूँ के तीनों किट्ट रोगों (Black/Stem, Brown/Leaf, Yellow/Stripe Rusts) के लक्षणों, वैकल्पिक परपोषियों एवं रोग चक्र (Puccinia Path) की तुलना करना।
  • गेहूँ के अंतःबीजोड़ (Internally Seed-borne) श्लथ कंड (Loose Smut) और करनाल बंट (Karnal Bunt) तथा जौ के आच्छादित कंड (Covered Smut) के बीच अंतर स्पष्ट करना।
  • रबी एवं खरीफ खाद्यान्न फसलों में बीज उपचार, प्रतिरोधी किस्मों एवं कवकनाशियों के वैज्ञानिक प्रयोग की गणना करना।

प्रस्तावना · Introduction

भारत की खाद्य सुरक्षा में धान (Rice – Oryza sativa), गेहूँ (Wheat – Triticum aestivum) और जौ (Barley – Hordeum vulgare) का सर्वोच्च योगदान है। पादप रोगविज्ञान (Plant Pathology) के अंतर्गत इन फसलों के रोग न केवल ऐतिहासिक अकालों (जैसे 1943 का बंगाल अकाल – धान का भूरा पत्ती धब्बा रोग) के कारण रहे हैं, बल्कि आज भी 15–40% तक उपज हानि पहुँचाते हैं। इस व्याख्यान में धान के 6 प्रमुख रोगों, गेहूँ के 5 प्रमुख रोगों (3 किट्ट + लूज स्मट + करनाल बंट) और जौ के कवर्ड स्मट का वैज्ञानिक, लक्षण-आधारित और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

किट्ट रोग (Rusts)

Puccinia वंश के अविकल्पी परजीवी (Obligate Parasitic) कवकों द्वारा उत्पन्न रोग, जिनमें पत्तियों व तनों पर जंग (Rust) के समान लाल-भूरे या पीले फफोले (Uredia/Telia) बनते हैं।

कंड या स्मट (Smuts)

Ustilago या Tilletia वंश के कवकों द्वारा उत्पन्न रोग, जिनमें बाली के दाने काले चूर्णमय बीजाणु समूह (Sori of Teliospores/Chlamydospores) में बदल जाते हैं।

क्रेसेक प्रावस्था (Kresek Phase)

धान के जीवाणुज पत्ती झुलसा (BLB) की सर्वाधिक विनाशकारी अवस्था, जिसमें रोपाई के 1–3 सप्ताह बाद पूरा पौधा मुरझाकर सूख जाता है।

उभयचर/द्वि-पोषी किट्ट (Heteroecious Rust)

वह किट्ट कवक जिसे अपना जीवन चक्र (5 बीजाणु अवस्थाएँ) पूरा करने के लिए दो भिन्न परपोषियों (Primary Host: गेहूँ + Alternate Host: बारबेरी) की आवश्यकता होती है।

अंतःबीजोड़ रोग (Internally Seed-Borne Disease)

ऐसा रोग जिसका रोगजनक बीज के भ्रूण (Embryo) के भीतर सुषुप्त कवकजाल (Dormant Mycelium) के रूप में जीवित रहता है, जैसे—गेहूँ का श्लथ कंड (Loose Smut)।

रोग वर्गीकरण · Classification

कवक जनित रोग (Fungal Diseases)

धान का ब्लास्ट (Pyricularia oryzae), धान का भूरा पत्ती धब्बा (Bipolaris oryzae), धान का शीथ ब्लाइट (Rhizoctonia solani), गेहूँ के किट्ट (Puccinia spp.), गेहूँ का लूज स्मट (Ustilago nuda tritici), करनाल बंट (Neovossia indica), जौ का कवर्ड स्मट (Ustilago hordei)।

जीवाणु जनित रोग (Bacterial Disease)

धान का जीवाणुज पत्ती झुलसा (Bacterial Leaf Blight – Xanthomonas oryzae pv. oryzae)।

विषाणु जनित रोग (Viral Complex Disease)

धान का टुंग्रो रोग (Rice Tungro Bacilliform Virus + Rice Tungro Spherical Virus)।

अजैविक/पोषक तत्व विकार (Abiotic/Physiological Disorder)

धान का खैरा रोग (जस्ता/Zinc – Zn की कमी से उत्पन्न)।

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • अंतःबीजोड़ (Internally Seed-borne) बनाम बाह्य बीजोड़ (Externally Seed-borne) संक्रमण: गेहूँ के लूज स्मट में कवक भ्रूण के अंदर रहता है, इसलिए केवल दैहिक (Systemic) कवकनाशी (Carboxin/Tebuconazole) या सौर ताप उपचार (Solar Heat Treatment) ही प्रभावी होता है; जबकि जौ के कवर्ड स्मट में बीजाणु बीज के बाहर चिपके रहते हैं।
  • भारत में गेहूँ के किट्ट का पुनर्चक्रण (Puccinia Path – Dr. K.C. Mehta): भारत के मैदानी भागों में बारबेरी (Alternate Host) की कोई सक्रिय भूमिका नहीं है। किट्ट के यूरेडोस्पोर (Uredospores) ग्रीष्मकाल में हिमालय व नीलगिरि/पलनी की पहाड़ियों पर स्वतः उगे गेहूँ (Self-sown wheat) पर जीवित रहते हैं और नवंबर-दिसंबर में हवा द्वारा मैदानों में आते हैं।
  • द्वि-विषाणु सहक्रिया (Viral Synergism in Tungro): टुंग्रो रोग में RTSV (RNA वायरस) अकेले हल्के लक्षण देता है, किंतु यह RTBV (DNA वायरस) के वाहक द्वारा संचरण में सहायक (Helper virus) का कार्य करता है; दोनों के संयुक्त संक्रमण से गंभीर बौनापन और नारंगी-पीलापन आता है।

फसलवार रोग एवं प्रबंधन · Disease Notes

1. Rice Blast (धान का प्रध्वंस / झोंका रोग)
Rice (धान – Oryza sativa) · Pathogen: Pyricularia oryzae (लैंगिक/Teleomorph: Magnaporthe oryzae)

महत्व: धान का सर्वाधिक विनाशकारी रोग, जिसे 'Rotten Neck' या 'Rice Fever' भी कहते हैं; अनुकूल मौसम में 70–80% तक फसल नष्ट कर सकता है।

लक्षण · Symptoms
  • पत्ती प्रध्वंस (Leaf Blast): पत्तियों पर नाव या आँख के आकार (Spindle/Eye-shaped) के धब्बे बनते हैं, जिनका मध्य भाग राख जैसा भूरा-सफेद (Ashy grey center) और किनारे गहरे भूरे-लाल (Dark brown margin) होते हैं।
  • गाँठ प्रध्वंस (Node Blast): तने की गाँठें (Nodes) काली पड़कर सड़ जाती हैं और पौधा गाँठ से टूटकर गिर जाता है।
  • ग्रीवा प्रध्वंस (Neck Blast / Rotten Neck): बाली निकलने पर मुख्य डंठल (Panicle base/Neck) पर काला-भूरा वलय बनता है; बाली टूटकर लटक जाती है और दाने खाली (Chaffy) रह जाते हैं—यह सर्वाधिक हानिकारक अवस्था है।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • प्रतिरोधी किस्में (Resistant Varieties): IR-64, Rasi, Jaya, Pusa Basmati-1637, Swarna, CO-47 की बुवाई करें।
  • बीज उपचार (Seed Treatment): Carbendazim 50 WP @ 2.0 g/kg या Tricyclazole 75 WP @ 1.5–2.0 g/kg या Pseudomonas fluorescens @ 10 g/kg बीज से उपचारित करें।
  • संतुलित उर्वरक: नत्रजन (N) को 3 बराबर भागों (Split doses) में दें; अत्यधिक यूरिया से बचें।
  • रासायनिक छिड़काव: लक्षण दिखते ही या बाली निकलने की अवस्था (Booting stage) पर Tricyclazole 75 WP @ 0.6 g/L (600 g/ha) या Isoprothiolane 40 EC @ 1.5 ml/L या Kasugamycin 3 SL @ 1.5 ml/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

अपूर्ण कवक (Deuteromycetes/Ascomycetes)। इसके कोनिडिया (Conidia) नाशपाती के आकार (Pyriform), पारदर्शी (Hyaline) और 2-पटयुक्त (2-septate, 3-celled) होते हैं। कवक 'Pyricularin' और 'Alpha-picolinic acid' नामक जीवविष (Toxins) स्रावित करता है।

रोग चक्र · Disease Cycle

प्राथमिक निवेशद्रव्य (Primary Inoculum): संक्रमित बीज, रोगी पुआल और घास कुल के खरपतवार (Panicum, Echinochloa) पर जीवित कवकजाल व कोनिडिया। द्वितीयक प्रसार (Secondary Spread): वायु-जनित कोनिडिया (Air-borne conidia) द्वारा।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

रात्रि का कम तापमान (20°C–22°C), उच्च सापेक्षिक आर्द्रता (>90%), पत्तियों पर 10 घंटे से अधिक ओस (Dew), बादल छाए रहना और नत्रजन (Nitrogen) उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग।

Exam Key: आँख/नाव के आकार (Spindle-shaped) के धब्बे + नाशपाती (Pyriform) कोनिडिया + Tricyclazole (0.06%) विशिष्ट कवकनाशी।
2. Brown Leaf Spot of Rice (धान का भूरा पत्ती धब्बा / तिलचट्टा रोग)
Rice (धान) · Pathogen: Bipolaris oryzae (पूर्व नाम: Helminthosporium oryzae; लैंगिक अवस्था: Cochliobolus miyabeanus)

महत्व: 1942-43 के महाबंगाल अकाल (Great Bengal Famine) का प्रमुख कारण, जिसमें लगभग 20–30 लाख लोगों की मृत्यु हुई थी।

लक्षण · Symptoms
  • पत्तियों तथा छिलकों (Glumes) पर तिल के बीज के आकार और रूप (Sesame seed-like) के गोल से अंडाकार गहरे भूरे धब्बे बनते हैं।
  • धब्बों के चारों ओर पीला आभामंडल (Yellow halo) दिखाई देता है और मध्य भाग मटमैला होता है।
  • बाली के दानों पर काले-भूरे मखमली धब्बे पड़ने से दाने बदरंग (Pecky rice) और सिकुड़े हुए रह जाते हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • मृदा में पोटाश (K2O) की पर्याप्त मात्रा दें तथा प्रमाणित स्वस्थ बीज का प्रयोग करें।
  • बीज उपचार: Thiram या Captan @ 2.5 g/kg या Mancozeb @ 2.5 g/kg बीज से उपचारित करें।
  • खड़ी फसल में Mancozeb 75 WP @ 2.5 g/L या Propiconazole 25 EC @ 1.0 ml/L पानी में घोलकर छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

कोनिडिया हल्के भूरे, मुड़े हुए (Slightly curved), दोनों सिरों पर पतले और 6 से 14 कूट-पटयुक्त (Pseudoseptate) होते हैं। यह 'Ophiobolin' (Cochliobolin) टॉक्सिन उत्पन्न करता है।

रोग चक्र · Disease Cycle

प्राथमिक संक्रमण संक्रमित बीज (Internally & Externally seed-borne) और फसल अवशेषों से होता है। द्वितीयक फैलाव हवा द्वारा कोनिडिया से होता है।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

यह 'कमजोर भूमि का रोग' (Poor man's / Deficient soil disease) है—मृदा में पोटाश (Potassium – K) की कमी, नत्रजन की कमी या अधिकता, सूखा तनाव, 25–30°C तापमान और >85% आर्द्रता इसके लिए अनुकूल हैं।

Exam Key: 1943 बंगाल अकाल + तिल के समान (Sesame-like) धब्बे + पोटाश की कमी से संबंध।
3. Sheath Blight of Rice (धान का पर्णच्छद अंगमारी / शीथ ब्लाइट)
Rice (धान) · Pathogen: Rhizoctonia solani (लैंगिक अवस्था / Teleomorph: Thanatephorus cucumeris)

महत्व: उच्च उपज देने वाली बौनी किस्मों और सघन रोपाई वाले क्षेत्रों में दूसरा सबसे प्रमुख कवक रोग।

लक्षण · Symptoms
  • कल्ले फूटने के अंतिम चरण (Late tillering stage) में जल स्तर (Water line) के ठीक ऊपर पर्णच्छद (Leaf sheath) पर हरे-भूरे, अंडाकार व अनियमित धब्बे बनते हैं।
  • धब्बे आपस में मिलकर साँप की केंचुली (Snake skin pattern / Cobra skin appearance) जैसी आकृति बनाते हैं।
  • आर्द्र मौसम में धब्बों की सतह पर सफेद कवकजाल और सरसों के दाने जैसे भूरे-काले स्क्लेरोशिया (Sclerotia) ढीले रूप से चिपके दिखाई देते हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • गर्मी में गहरी जुताई करें, मेंड़ों के खरपतवार नष्ट करें और पौधों की उचित दूरी (20×15 cm) रखें।
  • जैविक नियंत्रण: रोपाई से पूर्व मृदा में Trichoderma viride @ 2.5 kg/ha (गोबर की खाद में मिलाकर) प्रयोग करें।
  • रासायनिक छिड़काव: Validamycin 3 L @ 2.0 ml/L या Hexaconazole 5 EC @ 2.0 ml/L या Azoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% SC @ 1.0 ml/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

बंध्य कवकजाल (Mycelia Sterilia); इसके तंतु (Hyphae) समकोण (Right angle – 90°) पर शाखित होते हैं और शाखा के पास संकीर्णन (Constriction) व पट (Septum) पाया जाता है।

रोग चक्र · Disease Cycle

प्राथमिक निवेशद्रव्य मृदा में पड़े स्क्लेरोशिया (Sclerotia) हैं जो सिंचाई के पानी में तैरकर पौधों के तने के संपर्क में आते हैं।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

उच्च तापमान (28–32°C), अत्यधिक सापेक्षिक आर्द्रता (95–100%), सघन रोपाई (Close spacing) और भारी मात्रा में यूरिया का प्रयोग।

Exam Key: साँप की केंचुली (Snake-skin lesion) + पानी में तैरते स्क्लेरोशिया + Validamycin / Hexaconazole।
4. Bacterial Leaf Blight of Rice – BLB (धान का जीवाणुज पत्ती झुलसा)
Rice (धान) · Pathogen: Xanthomonas oryzae pv. oryzae

महत्व: 1960 के दशक में Taichung Native-1 (TN-1) और IR-8 किस्मों के आने के बाद भारत में महामारी के रूप में फैला।

लक्षण · Symptoms
  • पत्ती झुलसा अवस्था (Leaf Blight Phase): पत्तियों की नोक या दोनों किनारों (Margins) से जल-सिक्त (Water-soaked) पीली-सफेद लहरदार धारियाँ (Wavy margins) नीचे की ओर बढ़ती हैं और पत्तियाँ सूख जाती हैं।
  • क्रेसेक अवस्था (Kresek / Wilt Phase): रोपाई के 1–3 सप्ताह बाद नर्सरी से आए संक्रमण के कारण पूरा पौधा मुरझाकर मर जाता है (सर्वाधिक घातक अवस्था)।
  • जीवाणु स्राव परीक्षण (Bacterial Ooze Test): सुबह के समय रोगग्रस्त पत्ती के टुकड़े को काटकर साफ पानी के गिलास में रखने पर कटे सिरे से पीले-सफेद धुएँ जैसी जीवाणु की धारा (Cloudy bacterial ooze) निकलती है तथा पत्तियों पर सुबह पीले मोती जैसी बूँदें (Amber-colored bacterial beads) दिखती हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • रोपाई के समय पौध की पत्तियों की नोक न तोड़ें (Avoid clipping of seedling tips) और रोगग्रस्त खेत से स्वस्थ खेत में पानी न जाने दें।
  • प्रतिरोधी किस्में (Resistant Varieties): Improved Samba Mahsuri, Improved Pusa Basmati-1 (XA21 जीन युक्त), Ajay, Govind, IR-20।
  • बीज उपचार: बीज को Streptocycline (100 ppm = 1 g/10 L पानी) में 8–12 घंटे भिगोएँ, फिर 52–54°C गर्म पानी में 30 मिनट रखें।
  • खड़ी फसल में Streptocycline @ 1.5 g + Copper Oxychloride 50 WP @ 25 g प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

ग्राम-ऋणात्मक (Gram-negative), दंडाकार (Rod-shaped), वायवीय जीवाणु, जिसमें एकल ध्रुवीय कशाभिका (Monotrichous flagellum) होती है।

रोग चक्र · Disease Cycle

संक्रमित बीज, ठूँठ और Leersia तथा Cyperus जैसे खरपतवार प्राथमिक स्रोत हैं। सिंचाई के पानी, वर्षा की बौछारों और पत्तियों के आपस में रगड़ने या रोपाई के समय पत्तियों की नोक तोड़ने (Clipping of seedling tips) से घाव द्वारा प्रवेश करता है।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

25–30°C तापमान, तेज हवा के साथ भारी वर्षा, खेत से खेत में पानी बहना (Field-to-field irrigation) और उच्च नत्रजन।

Exam Key: क्रेसेक अवस्था (Kresek phase) + लहरदार किनारे (Wavy margins) + Ooze Test + XA21 प्रतिरोधी जीन।
5. Rice Tungro Disease (धान का टुंग्रो विषाणु रोग)
Rice (धान) · Pathogen: Rice Tungro Bacilliform Virus (RTBV – dsDNA virus) + Rice Tungro Spherical Virus (RTSV – ssRNA virus) का संयुक्त संक्रमण।

महत्व: दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया तथा पूर्वी/दक्षिणी भारत में धान का सबसे प्रमुख विषाणु रोग।

लक्षण · Symptoms
  • पौधे अत्यधिक बौने (Severe stunting) रह जाते हैं और कल्लों की संख्या कम हो जाती है।
  • पुरानी पत्तियों की नोक से नीचे की ओर पीला से नारंगी-पीला (Yellow to Orange-yellow discoloration) रंग फैलता है।
  • नई पत्तियों पर अंतर-शिरा हरिमाहीनता (Interveinal chlorosis) दिखती है, बालियाँ देर से या अधूरी निकलती हैं (Chaffy grains)।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • प्रतिरोधी किस्में: Vikramarya, IR-36, Nidhi, Radha का चुनाव करें।
  • प्रकाश प्रपाश (Light Traps) लगाकर हरे फुदकों की निगरानी एवं नियंत्रण करें।
  • वाहक (GLH) नियंत्रण हेतु Imidacloprid 17.8 SL @ 0.3 ml/L या Thiamethoxam 25 WG @ 0.25 g/L या Buprofezin 25 SC @ 1.5 ml/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

यह एक विषाणु संकुल (Virus complex) है। RTBV लक्षण पैदा करता है परंतु स्वयं वाहक द्वारा संचरित नहीं हो सकता; RTSV सहायक विषाणु (Helper virus) के रूप में दोनों के संचरण को संभव बनाता है।

रोग चक्र · Disease Cycle

वाहक (Vector): हरा फुदका (Green Leafhopper – GLH: Nephotettix virescens एवं N. nigropictus) द्वारा अर्ध-स्थायी (Semi-persistent / Non-propagative) रूप से संचरित। बीज से संचरण नहीं होता।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

खेत में हरे फुदकों (GLH) की अधिक संख्या, रतून फसल और असमय (Staggered) रोपाई।

Exam Key: DNA (RTBV) + RNA (RTSV) सहक्रिया + Nephotettix virescens (GLH) वाहक + नारंगी-पीली पत्तियाँ।
6. Khaira Disease of Rice (धान का खैरा रोग)
Rice (धान) · Pathogen: अजैविक विकार: मृदा में जस्ता (Zinc – Zn) की कमी। (खोज: डॉ. वाई. एल. नेने – Dr. Y.L. Nene, 1966, पंतनगर)।

महत्व: तराई क्षेत्रों और क्षारीय/चूनायुक्त (High pH / Calcareous) भूमियों में रोपाई के 2–4 सप्ताह बाद व्यापक रूप से प्रकट होता है।

लक्षण · Symptoms
  • रोपाई के 10–15 दिन बाद नई पत्तियों का आधार भाग पीला (Chlorotic) पड़ने लगता है।
  • पत्तियों पर कत्थई या लाल-भूरे रंग के धब्बे (Rusty brown / Bronze spots) उभरते हैं जो आपस में मिलकर पूरी पत्ती को सुखा देते हैं (कत्था/खैर के रंग जैसा दिखने के कारण 'खैरा' नाम पड़ा)।
  • पौधों की वृद्धि रुक जाती है (Stunted growth) और जड़ें भूरे रंग की व कम विकसित रहती हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • मृदा सुधार: रोपाई से पूर्व अंतिम जुताई के समय जिंक सल्फेट (Zinc Sulphate Heptahydrate – ZnSO4·7H2O, 21% Zn) @ 25 kg/ha खेत में मिलाएँ।
  • खड़ी फसल में उपचार (डॉ. नेने की विधि): 5 kg जिंक सल्फेट + 2.5 kg बुझा चूना (Slaked lime) (या 20 kg यूरिया) को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें; आवश्यकता पड़ने पर 10 दिन बाद दोहराएँ।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

मृदा का उच्च pH (>7.5), लगातार जलभराव और फॉस्फोरस उर्वरकों के अधिक प्रयोग से पौधों को घुलनशील जिंक उपलब्ध नहीं हो पाता।

रोग चक्र · Disease Cycle

अजैविक होने के कारण इसका कोई संक्रामक चक्र या पौधे से पौधे में प्रसार नहीं होता।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

उच्च pH वाली मृदाएँ, कम कार्बनिक पदार्थ, ठंडा मौसम और लगातार जलमग्न खेत।

Exam Key: Dr. Y.L. Nene (1966, Pantnagar) + Zinc (Zn) की कमी + 5 kg ZnSO4 + 2.5 kg चूना / 1000 L पानी।
7. Wheat Rusts: Black/Stem, Brown/Leaf & Yellow/Stripe Rust (गेहूँ के तीनों किट्ट/रोली रोग)
Wheat (गेहूँ – Triticum aestivum) · Pathogen: 1. काला/तना किट्ट (Black/Stem Rust): Puccinia graminis f.sp. tritici | 2. भूरा/पत्ती किट्ट (Brown/Leaf Rust): Puccinia triticina (P. recondita) | 3. पीला/धारीदार किट्ट (Yellow/Stripe Rust): Puccinia striiformis

महत्व: काला किट्ट को 'Killer Disease of Wheat' कहा जाता है, जबकि भारत में भूरा किट्ट (Brown Rust) सर्वाधिक व्यापक है और उत्तर-पश्चिमी मैदानों में पीला किट्ट सर्वाधिक हानिकारक है।

लक्षण · Symptoms
  • काला/तना किट्ट (Black/Stem Rust): मुख्यतः तने, पर्णच्छद और पत्तियों की दोनों सतहों पर बड़े, लंबे, लाल-भूरे फफोले (Uredia) बनते हैं जो बाह्यत्वचा को फाड़ देते हैं; फसल पकने पर ये काले रंग के टेलिया (Telia) में बदल जाते हैं।
  • भूरा/पत्ती किट्ट (Brown/Leaf Rust): मुख्यतः पत्तियों की ऊपरी सतह पर छोटे, गोल से अंडाकार, चमकीले नारंगी-भूरे फफोले अनियमित रूप से बिखरे (Scattered) होते हैं।
  • पीला/धारीदार किट्ट (Yellow/Stripe Rust): पत्तियों पर नींबू जैसे पीले रंग के छोटे-छोटे फफोले समानांतर कतारों या सिलाई की धारियों (Linear stripes like sewing machine stitches) में व्यवस्थित रहते हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • प्रतिरोधी किस्में: HD 2967, HD 3086, DBW 187 (Karan Vandana), DBW 222, PBW 343 (Sr31 जीन ने पहले सुरक्षा दी, बाद में Ug99 प्रभेद आया)।
  • रासायनिक छिड़काव: लक्षण दिखते ही Propiconazole 25 EC @ 1.0 ml/L (0.1%) या Tebuconazole 25.9 EC @ 1.0 ml/L या Mancozeb 75 WP @ 2.5 g/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

अविकल्पी परजीवी (Obligate Biotrophy), दीर्घचक्रीय एवं द्वि-पोषी (Macrocyclic & Heteroecious Basidiomycete)। इसमें 5 बीजाणु अवस्थाएँ होती हैं: Stage 0 (Spermatia), Stage I (Aeciospores – बारबेरी पर), Stage II (Uredospores – दोहराने वाली अवस्था/Repeating stage, एककोशिकीय व काँटेदार), Stage III (Teliospores – द्विकोशिकीय व मोटी भित्ति), Stage IV (Basidiospores – अगुणित)।

रोग चक्र · Disease Cycle

भारत में डॉ. के.सी. मेहता (Dr. K.C. Mehta) के अनुसार बारबेरी (Berberis vulgaris) सक्रिय नहीं है। ग्रीष्मकाल में यूरेडोस्पोर नीलगिरि व पलनी पहाड़ियों (दक्षिण भारत – Black एवं Brown rust का मुख्य स्रोत) तथा हिमालय की पहाड़ियों (उत्तर भारत – Yellow एवं Brown rust का स्रोत) पर जीवित रहते हैं और हवा द्वारा मैदानों में आते हैं।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

तापमान आवश्यकताएँ: पीला किट्ट (10–15°C, सबसे ठंडा मौसम), भूरा किट्ट (15–20°C, मध्यम तापमान), काला किट्ट (20–25°C, मार्च में गर्म मौसम) + उच्च आर्द्रता एवं सुबह की ओस।

Exam Key: Dr. K.C. Mehta (Indian Rust Cycle) + Ug99 (Stem rust race breaking Sr31) + Propiconazole @ 0.1%।
8. Loose Smut of Wheat (गेहूँ का श्लथ कंड / अनावृत कंड रोग)
Wheat (गेहूँ) · Pathogen: Ustilago nuda var. tritici (या Ustilago segetum var. tritici)

महत्व: पूर्णतः अंतःबीजोड़ (Strictly Internally Seed-borne) दैहिक रोग, जो बाली निकलने से पहले पहचान में नहीं आता और 5–10% तक सीधी उपज हानि करता है।

लक्षण · Symptoms
  • संक्रमित पौधों में स्वस्थ पौधों की तुलना में बालियाँ कुछ दिन पहले निकल आती हैं।
  • बाली के सभी दाने और तुष (Spikelets & Glumes) काले चूर्णमय बीजाणु समूह (Black powdery mass of teliospores) में बदल जाते हैं।
  • प्रारंभ में बीजाणु एक पतली झिल्ली से ढके रहते हैं जो बाली बाहर निकलते ही फट जाती है, और तेज हवा चलने पर केवल नग्न केंद्रीय अक्ष (Bare Rachis) ही शेष बचता है।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • सौर ताप उपचार (Solar Heat Treatment – डॉ. लूथरा एवं सत्तर, 1934): मई-जून की तेज धूप में बीज को सुबह 8 से 12 बजे (4 घंटे) ठंडे पानी में भिगोकर, दोपहर 12 से 4 बजे (4 घंटे) पक्के फर्श पर तेज धूप में सुखाएँ।
  • गर्म जल उपचार (Hot Water Treatment – Jensen, 1888): बीज को 52–54°C गर्म पानी में 10 मिनट तक डुबोएँ।
  • दैहिक बीज उपचार (Systemic Seed Treatment): Carboxin (Vitavax) 75 WP @ 2.0–2.5 g/kg या Tebuconazole (Raxil) 2 DS @ 1.5 g/kg या Carbendazim @ 2.5 g/kg बीज से उपचारित करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

कवक के टेलियोस्पोर (Chlamydospores) हल्के जैतूनी-भूरे, गोलाकार और सूक्ष्म काँटेदार (Minutely echinulate) होते हैं।

रोग चक्र · Disease Cycle

पुष्पन के समय हवा से उड़कर बीजाणु स्वस्थ फूलों के वर्तिकाग्र (Stigma) पर गिरते हैं और अंडाशय में प्रवेश कर भ्रूण (Embryo) में सुषुप्त कवकजाल (Dormant mycelium) के रूप में स्थापित हो जाते हैं। अगले वर्ष बीज उगने पर कवक पौधे के वृद्धि बिंदु के साथ ऊपर बढ़ता है।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

पुष्पन (Anthesis) के समय 16–22°C तापमान और हल्की नमी/आर्द्र मौसम (60–85% RH) बीजाणु अंकुरण व पुष्प संक्रमण के लिए अनुकूल हैं।

Exam Key: Internally Seed-borne (भ्रूण में सुषुप्त कवकजाल) + Luthra & Sattar (1934) Solar Treatment + Vitavax (Carboxin)।
9. Karnal Bunt of Wheat (गेहूँ का करनाल बंट / आंशिक बंट)
Wheat (गेहूँ) · Pathogen: Neovossia indica (समानार्थी: Tilletia indica)

महत्व: सर्वप्रथम मित्रा (Mitra, 1931) द्वारा करनाल (हरियाणा) से खोजा गया। इसे 'गेहूँ का कैंसर' और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में प्रमुख संगरोध रोग (Quarantine Disease) माना जाता है।

लक्षण · Symptoms
  • इसे 'आंशिक बंट' (Partial Bunt) कहते हैं क्योंकि बाली की सभी बालियाँ नहीं, बल्कि कुछ ही दाने संक्रमित होते हैं और दाना भी पूरा न सड़कर केवल भ्रूण सिरे (Embryo end) से आंशिक रूप से काले चूर्ण में बदलता है।
  • संक्रमित दानों को कुचलने पर सड़ी हुई मछली जैसी तीव्र दुर्गंध (Foul fishy odor) आती है, जो 'Trimethylamine' रसायन के कारण होती है।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • रोगमुक्त क्षेत्र से प्रमाणित बीज बोएँ तथा Durum wheat और Triticale जैसी सहनशील प्रजातियाँ उगाएँ।
  • बीज उपचार: Thiram @ 2.5 g/kg या Tebuconazole 2 DS @ 1.5 g/kg से उपचारित करें (मृदा में गिरने वाले बीजाणु रोकने हेतु)।
  • बाली निकलने की अवस्था (Boot leaf / Heading stage) पर Propiconazole 25 EC @ 1.0 ml/L का एक निवारक छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

टेलियोस्पोर गहरे भूरे-काले व जालीदार (Reticulate) होते हैं, जो अंकुरित होकर प्रोमाइसीलियम पर 60–180 दरांती के आकार के प्राथमिक स्पोरीडिया (Sickle-shaped Primary Sporidia) और फिर 'Allantoid' द्वितीयक स्पोरीडिया बनाते हैं।

रोग चक्र · Disease Cycle

यह मृदा-जनित, बीज-जनित एवं पुष्प-संक्रामक (Air-borne floral infection) रोग है। बाली निकलने (Ear-head emergence / Boot stage) पर द्वितीयक स्पोरीडिया हवा द्वारा उड़कर व्यक्तिगत फूलों के अंडाशय को संक्रमित करते हैं (यह दैहिक/Systemic नहीं है)।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

फरवरी-मार्च में बाली निकलते समय 18–22°C तापमान, बादल छाए रहना, बार-बार हल्की वर्षा और >70% आर्द्रता।

Exam Key: Mitra (1931, Karnal) + Trimethylamine (सड़ी मछली जैसी गंध) + Partial Bunt + Quarantine महत्व।
10. Covered Smut of Barley (जौ का आच्छादित कंड रोग)
Barley (जौ – Hordeum vulgare) · Pathogen: Ustilago hordei

महत्व: जौ का प्रमुख बाह्य बीजोड़ (Externally Seed-borne) रोग, जो ठंडे और पहाड़ी व मैदानी क्षेत्रों में फसल को भारी नुकसान पहुँचाता है।

लक्षण · Symptoms
  • रोगग्रस्त बाली के सभी दाने काले बीजाणु समूह (Sori) में बदल जाते हैं, किंतु ये एक मजबूत, चमकीली चाँदी जैसी सफेद झिल्ली (Persistent silvery membrane) से मजबूती से ढके रहते हैं।
  • गेहूँ के लूज स्मट के विपरीत यह झिल्ली खेत में हवा से नहीं फटती, बल्कि केवल गहाई (Threshing) के समय ही टूटती है।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • चूँकि यह बाह्य बीजोड़ है, अतः संपर्क (Contact) या दैहिक कवकनाशियों जैसे Carboxin (Vitavax) @ 2.0 g/kg या Thiram / Captan @ 2.5 g/kg या Carbendazim @ 2.0 g/kg से बीज उपचार द्वारा 100% नियंत्रण संभव है।
  • प्रतिरोधी किस्में जैसे Jyoti, Ratna, Karan-19, RD-2035 की बुवाई करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

कवक के टेलियोस्पोर भूरे-काले, गोलाकार और चिकनी भित्ति वाले (Smooth-walled) होते हैं (जबकि लूज स्मट के काँटेदार होते हैं)।

रोग चक्र · Disease Cycle

गहाई के समय झिल्ली फटने से बीजाणु स्वस्थ बीजों की सतह पर चिपक जाते हैं (Externally seed-borne)। बुवाई के बाद बीज और बीजाणु साथ-साथ अंकुरित होते हैं और कवक अंकुर (Coleoptile) को भेदकर दैहिक रूप से बढ़ता है।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

अंकुरण के समय मृदा का तापमान 15–20°C और मध्यम मृदा नमी इसके संक्रमण के लिए अनुकूल हैं।

Exam Key: Externally Seed-borne + मजबूत झिल्ली जो Threshing पर ही फटती है + Smooth-walled spores।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 1.1: गेहूँ के तीनों किट्ट (Rust) रोगों का तुलनात्मक अध्ययन

विशेषता (Feature)काला/तना किट्ट (Black/Stem Rust)भूरा/पत्ती किट्ट (Brown/Leaf Rust)पीला/धारीदार किट्ट (Yellow/Stripe Rust)
रोगजनक (Pathogen)Puccinia graminis triticiPuccinia triticina (P. recondita)Puccinia striiformis
मुख्य प्रभावित अंगतना, पर्णच्छद एवं पत्तियाँमुख्यतः पत्तियों की ऊपरी सतहपत्तियाँ, पर्णच्छद एवं बालियाँ
यूरेडिया (Uredia) का रूपबड़े, लंबे, गहरे लाल-भूरे, झिल्ली फटी हुईछोटे, गोल, चमकीले नारंगी-भूरे, अनियमित बिखरेनींबू जैसे पीले, मशीन की सिलाई जैसी सीधी कतारों में
वैकल्पिक परपोषी (Alternate Host)Berberis vulgaris (बारबेरी)Thalictrum flavumBarberis chinensis (हाल ही में खोजा गया)
अनुकूल तापमान (Optimum Temp)20°C – 25°C (मार्च में प्रकट)15°C – 20°C (फरवरी में प्रकट)10°C – 15°C (दिसंबर-जनवरी में सबसे पहले प्रकट)

तालिका 1.2: गेहूँ का लूज स्मट, करनाल बंट और जौ का कवर्ड स्मट में अंतर

आधार (Basis)गेहूँ का लूज स्मट (Loose Smut)गेहूँ का करनाल बंट (Karnal Bunt)जौ का कवर्ड स्मट (Covered Smut)
रोगजनकUstilago nuda triticiNeovossia indica (Tilletia indica)Ustilago hordei
संक्रमण की प्रकृतिअंतःबीजोड़ (Internally seed-borne, दैहिक)मृदा व बीज जनित, वायु द्वारा स्थानीय पुष्प संक्रमणबाह्य बीजोड़ (Externally seed-borne, दैहिक)
बाली पर प्रभावपूरी बाली काले चूर्ण में बदलकर केवल Rachis बचता हैबाली के कुछ दाने आंशिक रूप से काले होते हैंसभी दाने मजबूत झिल्ली से ढके काले समूह में बदलते हैं
विशिष्ट पहचानझिल्ली खेत में ही फट जाती है, गंधहीनTrimethylamine के कारण सड़ी मछली जैसी गंधझिल्ली केवल गहाई (Threshing) पर फटती है
प्रमुख प्रबंधनSolar Heat Treatment / Carboxin बीज उपचारBoot stage पर Propiconazole (0.1%) छिड़कावThiram / Carboxin (2 g/kg) बीज उपचार

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. धान के खैरा रोग के लिए जिंक-चूना घोल (Dr. Y.L. Nene Formula)

1 हेक्टेयर छिड़काव घोल = 5 kg ZnSO4·7H2O (21% Zn) + 2.5 kg बुझा चूना (Slaked Lime) + 1000 लीटर पानी (अर्थात् 0.5% ZnSO4 + 0.25% Lime)

उदाहरण: यदि किसी किसान को 0.4 हेक्टेयर (1 एकड़) धान के खेत में खैरा रोग नियंत्रण हेतु छिड़काव करना है, तो आवश्यक मात्रा:
• जिंक सल्फेट = 5 × 0.4 = 2.0 kg
• बुझा चूना = 2.5 × 0.4 = 1.0 kg
• पानी की मात्रा = 1000 × 0.4 = 400 लीटर।

2. प्रतिशत रोग तीव्रता (Percent Disease Index – PDI) सूत्र (McKinney, 1923)

PDI (%) = [ सभी प्रेक्षित पत्तियों के रोग अंकों का योग (Sum of all numerical ratings) / (कुल जाँची गई पत्तियाँ × अधिकतम रोग श्रेणी अंक) ] × 100

उदाहरण: यदि धान के ब्लास्ट रोग में 0–9 पैमाने (Maximum grade = 9) पर 50 पत्तियों का निरीक्षण करने पर कुल रेटिंग योग 180 आता है, तो:
PDI = [180 / (50 × 9)] × 100 = (180 / 450) × 100 = 40.0% रोग तीव्रता।

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 01: धान, गेहूँ एवं जौ के प्रमुख रोग]
├── 1. धान (Rice - Oryza sativa)
│ ├── कवक जनित: Blast (Pyricularia oryzae - Spindle spots, Tricyclazole)
│ ├── कवक जनित: Brown Spot (Bipolaris oryzae - 1943 Bengal Famine, K deficiency)
│ ├── कवक जनित: Sheath Blight (Rhizoctonia solani - Snake skin pattern, Validamycin)
│ ├── जीवाणु जनित: BLB (Xanthomonas oryzae pv. oryzae - Kresek wilt, Ooze test, XA21)
│ ├── विषाणु संकुल: Tungro (RTBV dsDNA + RTSV ssRNA - Vector: GLH Nephotettix virescens)
│ └── अजैविक विकार: Khaira (Zn Deficiency - Dr. Y.L. Nene 1966, 5kg ZnSO4 + 2.5kg Lime)
├── 2. गेहूँ (Wheat - Triticum aestivum)
│ ├── किट्ट (Rusts - Puccinia spp.): Black (P. graminis), Brown (P. triticina), Yellow (P. striiformis)
│ ├── श्लथ कंड (Loose Smut): Ustilago nuda tritici (Internally seed-borne, Solar treatment, Vitavax)
│ └── करनाल बंट (Karnal Bunt): Neovossia indica (Mitra 1931, Trimethylamine fishy odor)
└── 3. जौ (Barley - Hordeum vulgare)
└── आच्छादित कंड (Covered Smut): Ustilago hordei (Externally seed-borne, Persistent membrane)

प्रवाह चित्र · Flowchart

[गेहूँ के श्लथ कंड (Loose Smut - Ustilago nuda tritici) का रोग चक्र]
संक्रमित बीज (भ्रूण में सुषुप्त कवकजाल - Dormant Mycelium in Embryo)
↓ (अक्टूबर-नवंबर में बुवाई)
बीज अंकुरण के साथ कवक तंतु वृद्धि बिंदु (Growing Point) में दैहिक (Systemic) रूप से ऊपर बढ़ता है
↓ (फरवरी-मार्च में बाली निकलना)
बाली के दानों के स्थान पर काले चूर्णमय टेलियोस्पोर (Teliospores) बनते हैं; झिल्ली फटकर केवल नग्न Rachis बचता है
↓ (हवा द्वारा प्रसार - Air-borne Teliospores)
स्वस्थ गेहूँ के फूलों के पंखदार वर्तिकाग्र (Feathery Stigma) पर बीजाणुओं का अंकुरण
↓ (अंडाशय भेदन)
विकासशील दाने के भ्रूण (Embryo) में सुषुप्त कवकजाल की स्थापना → दिखने में स्वस्थ किंतु आंतरिक रूप से संक्रमित बीज

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • याद रखने की ट्रिक (Wheat Rust Temperature): Y-B-B = 10-15-20°C (Yellow rust सबसे ठंडे 10–15°C में, Brown rust 15–20°C में, Black rust सबसे गर्म 20–25°C में)।
  • सामान्य भ्रम से बचें: गेहूँ का Loose Smut अंतःबीजोड़ (Internally seed-borne) है, जबकि जौ का Covered Smut बाह्य बीजोड़ (Externally seed-borne) है।
  • धान का Brown Spot (Bipolaris oryzae) = 1943 बंगाल अकाल; आलू का Late Blight (Phytophthora infestans) = 1845 आयरिश अकाल—इन दोनों में भ्रमित न हों।
  • धान के ब्लास्ट रोग के लिए Tricyclazole (0.06%) और शीथ ब्लाइट के लिए Validamycin या Hexaconazole सबसे सटीक कवकनाशी हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • धान का ब्लास्ट (Pyricularia oryzae): नाव/आँख जैसे धब्बे, नाशपाती जैसे कोनिडिया, Neck blast अवस्था सर्वाधिक घातक।
  • धान का BLB (Xanthomonas oryzae pv. oryzae): Kresek अवस्था, लहरदार किनारे, Ooze test सकारात्मक, Streptocycline + COC से नियंत्रण।
  • धान का टुंग्रो: DNA (RTBV) + RNA (RTSV) का संयुक्त रोग, वाहक—Nephotettix virescens (GLH)।
  • गेहूँ का करनाल बंट (Neovossia indica): मित्रा (1931), Trimethylamine के कारण सड़ी मछली जैसी गंध, संगरोध (Quarantine) रोग।
  • गेहूँ का लूज स्मट (Ustilago nuda tritici): लूथरा व सत्तर (1934) ने सौर ताप उपचार दिया; Vitavax (Carboxin) से बीज उपचार।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. 1943 के महाबंगाल अकाल (Great Bengal Famine) का प्रमुख कारण कौन सा रोग था?

  • (A) धान का ब्लास्ट रोग
  • (B) धान का भूरा पत्ती धब्बा (Brown Spot of Rice)
  • (C) धान का जीवाणुज पत्ती झुलसा
  • (D) गेहूँ का काला किट्ट
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — 1942-43 का बंगाल अकाल धान के भूरा पत्ती धब्बा रोग (Bipolaris oryzae / Helminthosporium oryzae) के कारण हुआ था।

2. धान के जीवाणुज पत्ती झुलसा (BLB) की सर्वाधिक विनाशकारी मुरझान अवस्था क्या कहलाती है?

  • (A) रोटन नेक (Rotten Neck)
  • (B) क्रेसेक प्रावस्था (Kresek Phase)
  • (C) बकाने प्रावस्था
  • (D) पोकह बोएंग
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — रोपाई के 1–3 सप्ताह बाद पौधे का पूरी तरह मुरझाकर सूख जाना 'Kresek Phase' कहलाता है।

3. धान का टुंग्रो (Tungro) रोग किस प्रकार के विषाणुओं के सहक्रियात्मक संक्रमण से होता है?

  • (A) केवल एक ssRNA विषाणु
  • (B) केवल एक dsDNA विषाणु
  • (C) एक dsDNA (RTBV) एवं एक ssRNA (RTSV) विषाणु
  • (D) माइकोप्लाज्मा एवं वायरोइड
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — टुंग्रो रोग RTBV (Bacilliform dsDNA) और RTSV (Spherical ssRNA) के संयुक्त संक्रमण से होता है तथा GLH (Nephotettix virescens) इसका वाहक है।

4. धान के खैरा रोग की खोज किस वैज्ञानिक ने की थी और इसका कारण क्या है?

  • (A) डॉ. के.सी. मेहता – लोहे की कमी
  • (B) डॉ. वाई.एल. नेने (1966) – जस्ता (Zn) की कमी
  • (C) मित्रा (1931) – कॉपर की कमी
  • (D) लूथरा एवं सत्तर – बोरॉन की कमी
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — डॉ. वाई.एल. नेने ने 1966 में पंतनगर में खोजा कि धान का खैरा रोग मृदा में जस्ता (Zinc) की कमी से होता है।

5. गेहूँ के करनाल बंट संक्रमित दानों से सड़ी मछली जैसी गंध किस रसायन के कारण आती है?

  • (A) पायरीकुलेरिन
  • (B) ट्राईमेथाइलएमीन (Trimethylamine)
  • (C) ऑफियोबोलिन
  • (D) एरगोटामिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — Neovossia indica द्वारा उत्पन्न 'Trimethylamine' के कारण करनाल बंट ग्रस्त दानों से सड़ी मछली जैसी गंध आती है।

6. गेहूँ के श्लथ कंड (Loose Smut) के नियंत्रण हेतु 'सौर ताप उपचार' (Solar Heat Treatment) किसने विकसित किया?

  • (A) जेन्सन (1888)
  • (B) लूथरा एवं सत्तर (1934)
  • (C) बटलर (1906)
  • (D) दस्तूर (1935)
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — लूथरा एवं सत्तर (Luthra and Sattar, 1934) ने पंजाब में गेहूँ के लूज स्मट के नियंत्रण हेतु सौर ऊर्जा उपचार विकसित किया।

7. भारत में गेहूँ के किट्ट रोगों के वार्षिक पुनर्चक्रण (Annual Recurrence of Wheat Rusts) पर ऐतिहासिक कार्य किसने किया?

  • (A) डॉ. के.सी. मेहता (Dr. K.C. Mehta)
  • (B) डॉ. बी.बी. मुंडकुर
  • (C) डॉ. एस. नागराजन
  • (D) डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — डॉ. के.सी. मेहता ने सिद्ध किया कि भारत के मैदानों में किट्ट के बीजाणु ग्रीष्मकाल में उच्च ताप से मर जाते हैं और पहाड़ियों (नीलगिरि व हिमालय) से हर साल मैदानों में आते हैं।

8. धान के पर्णच्छद अंगमारी (Sheath Blight) के नियंत्रण के लिए कौन सा प्रतिजैविक/कवकनाशी विशेष रूप से प्रयुक्त होता है?

  • (A) स्ट्रेप्टोसाइक्लिन
  • (B) वैलिडामाइसिन (Validamycin)
  • (C) सल्फर धूल
  • (D) मेटालैक्सिल
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — Rhizoctonia solani जनित शीथ ब्लाइट के विरुद्ध Validamycin 3 L (2 ml/L) और Hexaconazole अत्यंत प्रभावी हैं।

9. निम्नलिखित में से कौन सा रोग पूर्णतः बाह्य बीजोड़ (Externally Seed-borne) है?

  • (A) गेहूँ का लूज स्मट
  • (B) जौ का आच्छादित कंड (Covered Smut of Barley)
  • (C) धान का टुंग्रो
  • (D) गेहूँ का पीला किट्ट
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — जौ का कवर्ड स्मट (Ustilago hordei) बाह्य बीजोड़ है क्योंकि इसके बीजाणु गहाई के समय स्वस्थ दानों के बाहर चिपकते हैं।

10. धान के ब्लास्ट रोग (Pyricularia oryzae) के कोनिडिया का आकार कैसा होता है?

  • (A) दरांती के आकार का
  • (B) नाशपाती के आकार का (Pyriform, 2-septate)
  • (C) गोलाकार और एककोशिकीय
  • (D) जालीदार और काला
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — Pyricularia oryzae के कोनिडिया नाशपाती के आकार (Pyriform) के, पारदर्शी तथा 2-पटयुक्त (3-कोशिकीय) होते हैं।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. धान के ब्लास्ट रोग की लैंगिक (Teleomorph) अवस्था का वैज्ञानिक नाम लिखिए।

Magnaporthe oryzae (पूर्व नाम: Magnaporthe grisea)।

2. गेहूँ के करनाल बंट की खोज कब, कहाँ और किसने की थी?

सन् 1931 में करनाल (हरियाणा) में एम. मित्रा (M. Mitra) ने की थी।

3. धान के टुंग्रो रोग के मुख्य कीट वाहक (Vector) का वैज्ञानिक नाम क्या है?

हरा फुदका (Green Leafhopper) — Nephotettix virescens।

4. काला किट्ट (Black Stem Rust) का वैकल्पिक परपोषी (Alternate Host) कौन सा पौधा है?

बारबेरी (Berberis vulgaris)।

5. धान के जीवाणुज पत्ती झुलसा (BLB) के विरुद्ध प्रसिद्ध प्रतिरोधी जीन कौन सा है?

XA21 जीन (जो जंगली धान Oryza longistaminata से प्राप्त किया गया है)।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. धान के जीवाणुज पत्ती झुलसा (BLB) की पहचान हेतु 'Ooze Test' की विधि लिखिए।

सुबह के समय रोगग्रस्त हरी-पीली पत्ती के निचले भाग को 2–3 सेमी टुकड़ों में काटकर काँच के साफ गिलास में रखे स्वच्छ पानी में डुबोते हैं। 5–10 मिनट में कटे हुए संवहनी सिरों से दूधिया या पीले-सफेद धुएँ जैसी जीवाणु की धारा (Bacterial ooze) बाहर निकलती दिखती है, जो कवक रोगों से इसे तुरंत अलग करती है।

2. गेहूँ के लूज स्मट के नियंत्रण हेतु लूथरा एवं सत्तर की सौर ताप उपचार विधि क्या है?

मई-जून के महीनों में जब तापमान >42°C हो, गेहूँ के बीज को सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक (4 घंटे) साधारण ठंडे पानी में भिगोया जाता है, जिससे सुषुप्त कवकजाल सक्रिय हो जाता है। इसके बाद दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक (4 घंटे) पक्के फर्श या तिरपाल पर तेज धूप में सुखाने से कवकजाल नष्ट हो जाता है और भ्रूण सुरक्षित रहता है।

3. धान के खैरा रोग के लक्षण एवं प्रबंधन को संक्षेप में लिखिए।

रोपाई के 2–3 सप्ताह बाद जस्ता (Zn) की कमी से नई पत्तियों के आधार पर पीलापन आता है और बाद में कत्थई-भूरे धब्बे (Rusty brown spots) बनते हैं व पौधा बौना रह जाता है। प्रबंधन हेतु रोपाई से पूर्व 25 kg/ha जिंक सल्फेट मिट्टी में मिलाएँ या खड़ी फसल में 5 kg ZnSO4 + 2.5 kg बुझा चूना प्रति 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।

4. धान के शीथ ब्लाइट (Sheath Blight) के लक्षण एवं अनुकूल परिस्थितियाँ लिखिए।

Rhizoctonia solani द्वारा जनित इस रोग में जल स्तर के ऊपर पर्णच्छद (Leaf sheath) पर साँप की केंचुली (Snake-skin pattern) जैसे धब्बे और सरसों जैसे भूरे स्क्लेरोशिया बनते हैं। 28–32°C तापमान, >95% आर्द्रता, सघन रोपाई और अधिक नत्रजन इसके प्रसार को बढ़ाते हैं।

5. गेहूँ के करनाल बंट को अंतर्राष्ट्रीय संगरोध (Quarantine) की दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?

करनाल बंट (Neovossia indica) के टेलियोस्पोर मृदा में 3–5 वर्षों तक जीवित रहते हैं और बीज के माध्यम से नए देशों में प्रवेश कर सकते हैं। साथ ही Trimethylamine के कारण आटे की गुणवत्ता व स्वाद खराब हो जाता है, इसलिए कई देश संक्रमित गेहूँ के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध (Zero tolerance) लगाते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. धान के ब्लास्ट रोग (Rice Blast) का वर्णन रोगजनक, लक्षण (तीनों अवस्थाएँ), रोग चक्र, अनुकूल परिस्थितियों एवं समन्वित प्रबंधन सहित कीजिए।

उत्तर में Pyricularia oryzae (Magnaporthe oryzae) की कोनिडिया संरचना, Leaf Blast (आँख जैसे धब्बे), Node Blast (काली गाँठें) और Neck Blast (Rotten neck व खाली दाने) का वर्णन करें। इसके पश्चात रात्रि तापमान (20–22°C), >90% आर्द्रता, नत्रजन का प्रभाव तथा प्रतिरोधी किस्में (IR-64, Swarna), बीज उपचार और Tricyclazole (0.06%) छिड़काव का विस्तृत विवरण दें।

2. गेहूँ के तीनों किट्ट (Black, Brown एवं Yellow Rusts) के रोगजनकों, लक्षणों, भारतीय परिस्थितियों में रोग चक्र (Puccinia Path) और प्रबंधन का सविस्तर तुलनात्मक वर्णन कीजिए।

तीनों Puccinia प्रजातियों का नाम, फफोलों का रंग व विन्यास, 5 बीजाणु अवस्थाएँ, डॉ. के.सी. मेहता द्वारा खोजा गया पहाड़ियों (नीलगिरि एवं हिमालय) से मैदानों की ओर यूरेडोस्पोर का आवागमन, अनुकूल तापमान (10–15°C, 15–20°C, 20–25°C) और Propiconazole (0.1%) व प्रतिरोधी किस्मों (HD 2967, DBW 187) द्वारा प्रबंधन लिखें।

3. गेहूँ के श्लथ कंड (Loose Smut) और जौ के आच्छादित कंड (Covered Smut) के लक्षणों, रोग चक्र एवं प्रबंधन के अंतर को स्पष्ट कीजिए।

Ustilago nuda tritici के अंतःबीजोड़ (Internally seed-borne) पुष्प संक्रमण बनाम Ustilago hordei के बाह्य बीजोड़ (Externally seed-borne) अंकुर संक्रमण की तुलना करें, झिल्ली के फटने के समय में अंतर बताएँ और सौर ताप उपचार व दैहिक/संपर्क कवकनाशी बीज उपचार का वर्णन करें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • धान के ब्लास्ट रोग में कवक द्वारा 'Pyricularin' एवं 'α-picolinic acid' नामक जीवविष (Toxins) उत्पन्न किए जाते हैं।
  • गेहूँ के किट्ट कवक की 'Uredospore' अवस्था को 'Repeating Stage' (बार-बार संक्रमण दोहराने वाली अवस्था) कहा जाता है।
  • करनाल बंट (Neovossia indica) को 'गेहूँ का आंशिक बंट' (Partial Bunt) भी कहा जाता है क्योंकि दाने का केवल भ्रूण सिरा सड़ता है।
  • धान का टुंग्रो विषाणु हरा फुदका (Nephotettix virescens) द्वारा अर्ध-स्थायी (Semi-persistent) रूप में संचरित होता है।
  • गेहूँ के काले किट्ट का 'Ug99' (TTKSK) प्रभेद सन् 1999 में युगांडा में खोजा गया था जिसने प्रसिद्ध Sr31 प्रतिरोधी जीन को तोड़ दिया।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPATH 311 Smart Notes।

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