AGF 311 Lecture 01: कृषि वानिकी (Agro-forestry): परिभाषा, कार्यक्षेत्र एवं प्रकार; भारत में क्षमता एवं प्रचलित प्रणालियाँ | Hindi Notes
AGRO PATH FINDERAGF 311 · Introductory Agroforestry
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02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)Lecture 01: कृषि वानिकी (Agro-forestry): परिभाषा, कार्यक्षेत्र एवं प्रकार; भारत में क्षमता एवं प्रचलित प्रणालियाँ
Agro-forestry: Definition, scope and type of agroforestry system; Potential of agroforestry in India; Prevailing agroforestry system in India
02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)
इस व्याख्यान (Lecture) के अध्ययन के पश्चात् विद्यार्थी निम्नलिखित में सक्षम होंगे:
- कृषि वानिकी (Agroforestry) की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा King & Chandler (1978), Lundgren & Raintree (1982) और ICRAF द्वारा दी गई मानक वैज्ञानिक परिभाषाओं को समझना।
- कृषि वानिकी के ‘4-I’ अभिलक्षणों (Intentional, Intensive, Integrated, Interactive) तथा 3 मूलभूत गुणों (Productivity, Sustainability, Adoptability) की व्याख्या करना।
- ग्रामीण आजीविका (5F: Food, Fuelwood, Fodder, Fiber, Finance/Fertilizer), पर्यावरण संतुलन और उद्योगों के संदर्भ में कृषि वानिकी के कार्यक्षेत्र (Scope) का विश्लेषण करना।
- पी.के.आर. नायर (P.K.R. Nair, 1985) के चार आधारों—संरचनात्मक (Structural), कार्यात्मक (Functional), सामाजिक-आर्थिक (Socio-economic) और पारिस्थितिक (Ecological)—के अनुसार कृषि वानिकी प्रणालियों का वर्गीकरण करना।
- भारत में कृषि वानिकी की वर्तमान क्षमता (~25.32 Mha क्षेत्र, राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति 2014) तथा देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में प्रचलित कृषि वानिकी प्रणालियों का अध्ययन करना।
03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)
मूल सामग्री (Core Course Content): कृषि वानिकी (Agroforestry) भूमि उपयोग की एक अत्यंत प्राचीन परंपरा है, किंतु एक आधुनिक विज्ञान के रूप में इसका संस्थागत विकास 1970 के दशक के अंत में हुआ। सरल शब्दों में, कृषि वानिकी का अर्थ है—“एक ही भूमि इकाई (Same unit of land) पर काष्ठीय बहुवर्षीय वृक्षों (Woody perennials: वृक्ष, झाड़ियाँ, ताड़, बाँस आदि) को कृषि फसलों और/अथवा पशुधन के साथ किसी निश्चित स्थानिक व्यवस्था (Spatial arrangement) या कालिक अनुक्रम (Temporal sequence) में जानबूझकर उगाना।”
भारत में वर्ष 1979 में इम्फाल (मणिपुर) में पहले राष्ट्रीय कृषि वानिकी सेमिनार का आयोजन हुआ, वर्ष 1983 में ICAR द्वारा अखिल भारतीय समन्वित कृषि वानिकी अनुसंधान परियोजना (AICRP on Agroforestry) शुरू की गई, वर्ष 1988 में झाँसी (उ.प्र.) में राष्ट्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान केंद्र (NRCAF — वर्तमान में ICAR-CAFRI, Central Agroforestry Research Institute) की स्थापना हुई, और फरवरी 2014 में भारत विश्व का पहला ऐसा देश बना जिसने ‘राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति’ (National Agroforestry Policy, 2014) लागू की।
04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)
05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)
1. कृषि वानिकी का कार्यक्षेत्र एवं महत्व (Scope & Importance of Agroforestry — Meeting ‘5F’ Needs)
- 1. ग्रामीण ‘5F’ आवश्यकताओं की पूर्ति: यह ग्रामीण और जनजातीय परिवारों की पाँच बुनियादी आवश्यकताओं—Food (खाद्यान्न/फल), Fuelwood (जलाऊ लकड़ी), Fodder (पशु चारा), Fiber (रेशा) और Finance/Fertilizer (नकद आय व हरी खाद/मृदा उर्वरता)—को एक ही खेत से पूरा करती है।
- 2. जोखिम विविधीकरण एवं आजीविका सुरक्षा (Risk Diversification): सूखा, बाढ़ या कीट प्रकोप से मौसमी फसल नष्ट होने पर भी वृक्षों से प्राप्त इमारती लकड़ी, फल, गोंद या चारे से किसान को आर्थिक सुरक्षा (Buffer/Insurance) मिलती है।
- 3. निम्नीकृत एवं समस्याग्रस्त भूमियों का सुधार (Reclamation of Degraded Lands): भारत की बंजर, लवणीय-क्षारीय (Saline-alkali), जलमग्न (Waterlogged) और बीहड़ भूमियों को उपयुक्त वृक्षों (जैसे Prosopis juliflora, Casuarina, Acacia nilotica, Eucalyptus) के माध्यम से सुधार कर पुनः कृषि योग्य बनाया जा सकता है।
- 4. वन-आधारित उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति (Industrial Raw Material): प्लाईवुड, कागज और लुगदी (Pulp & Paper), माचिस (Matchwood), पैकिंग केस और फर्नीचर उद्योगों की 65–80% काष्ठ मांग अब उत्तर भारत (पंजाब, हरियाणा, प. उत्तर प्रदेश) में किसानों के खेतों में उगाए गए पॉपलर (Populus deltoides) और सफेदा (Eucalyptus tereticornis) से पूरी हो रही है, जिससे प्राकृतिक वनों की कटाई (Deforestation) में भारी कमी आई है।
- 5. पर्यावरण स्थिरता एवं कार्बन प्रच्छादन (Carbon Sequestration): वृक्ष वायुमंडलीय को अवशोषित कर बायोमास और मृदा कार्बन के रूप में संचित करते हैं, सूक्ष्म-जलवायु (Microclimate) को सुधारते हैं और तापमान व पवन वेग को घटाते हैं।
2. भारत में कृषि वानिकी की क्षमता (Potential of Agroforestry in India)
- वर्तमान एवं संभावित क्षेत्रफल: ICAR-CAFRI (Dhyani et al. / Dagar et al., 2014) और FSI के अनुमानों के अनुसार भारत में वर्तमान में लगभग 25.32 मिलियन हेक्टेयर (Mha) क्षेत्र कृषि वानिकी के अंतर्गत है (जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 8.2% है)। भविष्य में परती भूमि, मेड़ों, बंजर भूमि और वर्षा-आधारित क्षेत्रों को जोड़कर इसे 53 मिलियन हेक्टेयर (Mha) तक विस्तारित करने की क्षमता है।
- राष्ट्रीय वन नीति (1988) का लक्ष्य: राष्ट्रीय वन नीति (National Forest Policy, 1988) के अनुसार देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 33% भाग पर वनावरण एवं वृक्षावरण (Forest and Tree Cover) होना अनिवार्य है। चूँकि प्राकृतिक वनों का क्षेत्र सीमित (~21.7%) है, इसलिए 33% के राष्ट्रीय लक्ष्य को केवल कृषि वानिकी (Trees Outside Forests – TOF) के विस्तार से ही प्राप्त किया जा सकता है।
- राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति (NAP, 2014) एवं SMAF: वर्ष 2014 में लागू इस नीति के तहत 2016-17 में ‘सब-मिशन ऑन एग्रोफोरेस्ट्री’ (SMAF – “हर मेड़ पर पेड़”) शुरू किया गया, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार का वित्तीय योगदान 60 : 40 (पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों में 90 : 10) है।
3. भारत के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित कृषि वानिकी प्रणालियाँ (Prevailing Agroforestry Systems in India)
1. शुष्क एवं पश्चिमी क्षेत्र (राजस्थान, गुजरात, हरियाणा)
• खेजड़ी आधारित प्रणाली: Prosopis cineraria (खेजड़ी) + बाजरा (Pearl millet) / ग्वार / मोठ / मूंग / तिल।
• रोहिड़ा व अर्डू प्रणाली: Tecomella undulata (रोहिड़ा) एवं Ailanthus excelsa (अर्डू) + शुष्क फसलें।
• सिल्वा-पाश्चर प्रणाली: खेजड़ी / बबूल / झड़बेरी (Ziziphus nummularia) + सेवण घास (Lasiurus sindicus) / अंजन घास (Cenchrus ciliaris)।
2. सिंधु-गंगा का मैदानी क्षेत्र (पंजाब, हरियाणा, उ.प्र., बिहार)
• पॉपलर आधारित वाणिज्यिक प्रणाली: Populus deltoides (पॉपलर) + गेहूँ / गन्ना / हल्दी / आलू / बरसीम।
• सफेदा मेड़ रोपण: Eucalyptus tereticornis + धान / गेहूँ / सरसों।
• शीशम व बबूल प्रणाली: Dalbergia sissoo एवं Acacia nilotica + रबी/खरीफ फसलें।
3. आर्द्र उष्णकटिबंधीय एवं तटीय क्षेत्र (केरल, तमिलनाडु, कोंकण, असम)
• बहु-स्तरीय होमगार्डन (Homestead Agroforestry): नारियल (Cocos nucifera) / सुपारी (Areca catechu) + काली मिर्च (वृक्षों पर लता) + केला / पपीता + अदरक / हल्दी / कसावा + डेयरी पशुपालन।
• चाय/कॉफी छाया वृक्ष प्रणाली: चाय व कॉफी बागानों में Grevillea robusta (सिल्वर ओक), Albizia एवं Erythrina छाया वृक्ष।
4. हिमालयी एवं पूर्वोत्तर पहाड़ी क्षेत्र (हिमाचल, उत्तराखंड, नागालैंड, सिक्किम)
• एल्डर आधारित बड़ी इलायची प्रणाली (सिक्किम): Alnus nepalensis (नेपाली एल्डर – N₂ स्थिरीकरणकर्ता) के नीचे बड़ी इलायची (Amomum subulatum)।
• ग्रेविया आधारित प्रणाली (प. हिमालय): Grewia optiva (भीमल) + गेहूँ / मक्का।
• झूम / शिफ्टिंग कल्टीवेशन एवं तौंग्या (Taungya) प्रणाली।
06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)
पी.के.आर. नायर (P.K.R. Nair, 1985) के अनुसार कृषि वानिकी प्रणालियों का मानक वर्गीकरण: नायर (1985) ने कृषि वानिकी प्रणालियों को 4 मुख्य आधारों पर वर्गीकृत किया है:
- (A) संरचनात्मक आधार (Structural Basis — घटकों की प्रकृति एवं व्यवस्था):
- (i) घटकों की प्रकृति के अनुसार (Nature of Components):
- एग्री-सिल्वीकल्चर प्रणाली (Agri-silvicultural System): कृषि फसलें + वन वृक्ष (जैसे—Improved fallow, Taungya, Alley cropping, Multipurpose trees on croplands, Shelterbelts)।
- सिल्वा-पाश्चर प्रणाली (Silvi-pastoral System): वन वृक्ष + चारागाह/घास एवं पशुधन (जैसे—Protein banks, Trees and shrubs on rangelands/pastures, Live fences of fodder trees)।
- एग्री-सिल्वा-पाश्चर प्रणाली (Agri-silvi-pastoral System): कृषि फसलें + वन वृक्ष + चारागाह/पशुधन (जैसे—Homegardens / गृह वाटिका, Woody hedgerows for browse, mulch & green manure)।
- अन्य या विशिष्ट प्रणालियाँ (Other / Specialized Systems):
- एक्वा-फॉरेस्ट्री / एक्वा-सिल्वीकल्चर (Aqua-forestry): मछली/झींगा पालन के तालाबों के चारों ओर या मैंग्रोव वृक्ष लगाना।
- एपी-सिल्वीकल्चर (Apiculture with trees): शहद उत्पादन हेतु मधुमक्खी पालन के लिए पुष्प-मकरंद देने वाले वृक्ष (नीम, करंज, जामुन, सहजन, सफेदा) लगाना।
- एंटोमो-सिल्वीकल्चर / सेरीकल्चर व लाख (Entomo-silviculture): रेशम कीट पालन हेतु शहतूत (Morus alba – Mulberry), अर्जुन (Terminalia arjuna – Tasar) तथा लाख कीट पालन हेतु पलाश (Butea monosperma), बेर व कुसुम (Schleichera oleosa) लगाना।
- हॉर्टी-सिल्वीकल्चर / एग्री-हॉर्टी-सिल्वीकल्चर: फलदार वृक्षों का समावेश।
- (ii) घटकों की व्यवस्था के अनुसार (Arrangement of Components):
- स्थानिक व्यवस्था (Spatial Arrangement): (a) मिश्रित सघन (Mixed dense) – जैसे होमगार्डन, (b) मिश्रित विरल (Mixed sparse) – खेतों में बिखरे खेजड़ी वृक्ष, (c) पट्टी/जोनल रोपण (Strip/Alley plantation), और (d) सीमांत/मेड़ रोपण (Boundary plantation)।
- कालिक अनुक्रम (Temporal Sequence): (a) समकालीन (Coincident) – दोनों घटक पूरे समय साथ रहें, (b) सहगामी (Concomitant) – प्रारंभ या अंत के कुछ वर्षों में साथ रहें (जैसे Taungya), (c) अंतरायिक (Intermittent) – बहुवर्षीय वृक्षों के नीचे रुक-रुक कर फसलें उगाना, और (d) अंतर्वेशित (Interpolated) – जैसे होमगार्डन में अलग-अलग जीवन चक्र की फसलें।
- (i) घटकों की प्रकृति के अनुसार (Nature of Components):
- (B) कार्यात्मक आधार (Functional Basis — मुख्य कार्य या भूमिका):
- (i) उत्पादक कार्य (Productive Functions — 5F): खाद्यान्न (Food), पशु चारा (Fodder), जलाऊ लकड़ी (Fuelwood), इमारती लकड़ी (Timber) और गैर-काष्ठ वनोपज (NTFPs: गोंद, राल, टैनिन, औषधि) का उत्पादन।
- (ii) सुरक्षात्मक या सेवा कार्य (Protective / Service Functions): वायुरोधक (Windbreak), आश्रय पट्टी (Shelterbelt), मृदा एवं जल संरक्षण, नमी संरक्षण, छाया (Shade) और मृदा उर्वरता सुधार (N₂-fixation)।
- (C) सामाजिक-आर्थिक आधार (Socio-economic Basis):
- (i) वाणिज्यिक प्रणाली (Commercial System): उत्पादन का मुख्य उद्देश्य बाजार में बिक्री (जैसे—चाय/कॉफी/रबर बागान में छाया वृक्ष या पॉपलर-गन्ना ब्लॉक प्लांटेशन)।
- (ii) मध्यवर्ती प्रणाली (Intermediate System): घरेलू उपभोग और बाजार बिक्री दोनों के लिए (जैसे—नकदी फसलों के साथ फल व इमारती वृक्ष)।
- (iii) जीवन-निर्वाह प्रणाली (Subsistence System): मुख्यतः किसान परिवार की अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने हेतु (जैसे—झूम खेती या पारंपरिक गृह वाटिका)।
- (D) पारिस्थितिक आधार (Ecological Basis):
- आर्द्र उष्णकटिबंधीय (Humid tropics – होमगार्डन), उप-आर्द्र उष्णकटिबंधीय (Sub-humid – एलै क्रॉपिंग), शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्र (Arid & Semi-arid – सिल्वा-पाश्चर व विंडब्रेक) तथा उच्च पर्वतीय शीतोष्ण क्षेत्र (Highlands)।
07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)
- बहु-स्तरीय संसाधन उपयोग सिद्धांत (Multi-tier Resource Utilization Principle): एकल फसल (Monoculture) केवल ऊपरी 15–30 cm मृदा परत और एक ही ऊँचाई के सौर प्रकाश का उपयोग करती है, जबकि कृषि वानिकी प्रणाली में विभिन्न ऊँचाई के छत्र (Canopy tiers) और विभिन्न गहराई की जड़ें सौर विकिरण, जल और मृदा पोषक तत्वों का अधिकतम उपयोग करती हैं।
08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)
व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक उदाहरण: भारत में कृषि वानिकी प्रणालियों के तहत अनुमानित क्षेत्रफल (Dagar et al., 2014)
- अनाज व तिलहन खेतों में बिखरे वृक्ष (Trees on rainfed croplands): खेजड़ी, बबूल, नीम आदि — सर्वाधिक प्रचलित पारंपरिक स्वरूप।
- कृषि-बागवानी प्रणाली (Agri-horticulture): भारत में लगभग 4.65 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र (आम, आँवला, अमरूद, बेर व किन्नू के साथ अंतःफसलें)।
- खेत की मेड़ों/सीमाओं पर वृक्ष (Trees on field boundaries/bunds): लगभग 1.58 से 2.32 Mha (पॉपलर, सफेदा, सागवान, सुबबूल)।
- समस्याग्रस्त मृदाओं का वनीकरण (Afforestation of problem soils): लगभग 2.12 Mha (लवणीय, क्षारीय व खनन क्षेत्रों में)।
09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)
तुलनात्मक सारणी 1.1: कृषि (Agriculture), वानिकी (Forestry) एवं कृषि वानिकी (Agroforestry) की तुलना
| तुलना का बिंदु (Parameter) | शुद्ध कृषि (Monoculture Agriculture) | शुद्ध वानिकी (Pure Forestry) | कृषि वानिकी (Agroforestry System) |
|---|---|---|---|
| मुख्य घटक (Components) | केवल एकवर्षीय/मौसमी फसलें। | केवल काष्ठीय बहुवर्षीय वन वृक्ष। | वृक्ष + फसलें +/अथवा पशुधन का एकीकृत मिश्रण। |
| आवर्तन काल (Rotation Period) | अल्पकालिक (3–6 माह या 1 वर्ष)। | अत्यधिक दीर्घकालिक (20 से 100+ वर्ष)। | सतत व बहुआयामी (अल्पकालिक फसल आय + दीर्घकालिक काष्ठ आय)। |
| मृदा संरक्षण एवं पोषक चक्र | कम; निरंतर जुताई से मृदा क्षरण का जोखिम। | उच्च प्राकृतिक मृदा संरक्षण व बंद पोषक चक्र। | उच्च मृदा व जल संरक्षण तथा डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग। |
| सूक्ष्म-जलवायु प्रभाव | नगण्य सूक्ष्म-जलवायु संशोधन। | सघन वन सूक्ष्म-जलवायु का निर्माण। | अनुकूल सूक्ष्म-जलवायु (तापमान व पवन वेग में कमी)। |
| आर्थिक जोखिम (Risk) | उच्च (सूखा/कीट से पूर्ण फसल हानि संभव)। | लंबी प्रतीक्षा अवधि (Gestation period)। | न्यूनतम जोखिम (फसल विफल होने पर भी वृक्षों से आय)। |
10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)
महत्वपूर्ण नीतिगत आँकड़े एवं मानक समीकरण (Key Policy & System Metrics)
- संरचनात्मक घटक समीकरण:
•
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• - राष्ट्रीय वन नीति (1988) लक्ष्य: देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का भाग (मैदानी क्षेत्रों में एवं पर्वतीय क्षेत्रों में ) वनावरण व वृक्षावरण के अंतर्गत होना चाहिए।
- भारत में कृषि वानिकी का अनुमानित क्षेत्रफल:
- राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति (NAP) लागू होने का वर्ष: फरवरी (भारत विश्व का प्रथम देश)
- SMAF (Sub-Mission on Agroforestry) वित्तपोषण अनुपात: केंद्र : राज्य = (हिमालयी व पूर्वोत्तर राज्यों में )
11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)
Lecture 01 Mind Map: कृषि वानिकी की अवधारणा, नायर (1985) वर्गीकरण एवं भारतीय परिदृश्य
- कृषि वानिकी (Agroforestry: एक ही भूमि पर वृक्ष + फसल +/या पशुधन | 4-I एवं 3 गुण)
- ऐतिहासिक मील के पत्थर (Indian Milestones)
- 1979: प्रथम राष्ट्रीय सेमिनार (इम्फाल) | 1983: AICRP on Agroforestry | 1988: NRCAF/CAFRI (झाँसी) | 2014: राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति (विश्व में प्रथम)
- नायर (P.K.R. Nair, 1985) के 4 वर्गीकरण आधार
- 1. संरचनात्मक (Structural): Agri-silviculture (फसल+वृक्ष), Silvi-pastoral (वृक्ष+चारागाह), Agri-silvi-pastoral (फसल+वृक्ष+पशु), अन्य (Aquaforestry, Apiculture, Sericulture)
- 2. कार्यात्मक (Functional): उत्पादक कार्य (5F: Food, Fodder, Fuel, Fiber, Finance) एवं सुरक्षात्मक कार्य (Windbreak, Shelterbelt, मृदा संरक्षण)
- 3. सामाजिक-आर्थिक (Socio-economic): वाणिज्यिक (Commercial), मध्यवर्ती (Intermediate) एवं जीवन-निर्वाह (Subsistence)
- 4. पारिस्थितिक (Ecological): आर्द्र उष्णकटिबंधीय, उप-आर्द्र, शुष्क व अर्ध-शुष्क (खेजड़ी प्रणाली) एवं पर्वतीय क्षेत्र
- भारत में प्रचलित प्रणालियाँ (~25.32 Mha)
- शुष्क राजस्थान: खेजड़ी + बाजरा/ग्वार | उत्तर भारत: पॉपलर/सफेदा + गेहूँ/गन्ना | केरल: बहु-स्तरीय होमगार्डन | सिक्किम: एल्डर + बड़ी इलायची
- ऐतिहासिक मील के पत्थर (Indian Milestones)
12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)
प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): कृषि वानिकी के माध्यम से टिकाऊ ग्रामीण विकास एवं 33% हरित आवरण लक्ष्य
(वृक्ष + फसल + पशुधन) ➔ 2. पारिस्थितिक अंतःक्रिया
(न्यूट्रिएंट पंपिंग, छाया, मृदा संरक्षण) ➔ 3. उत्पादक आउटपुट (5F)
(अनाज, फल, चारा, ईंधन, इमारती काष्ठ) ➔ ➔ 4. औद्योगिक व आर्थिक सुरक्षा
(प्लाईवुड/पेपर कच्चा माल + जोखिम बीमा) ➔ 5. राष्ट्रीय लक्ष्य पूर्ति
(कार्बन सिंक व 33% वृक्षावरण)
13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)
- पी.के.आर. नायर (P.K.R. Nair, 1985) द्वारा दिए गए कृषि वानिकी वर्गीकरण के 4 मुख्य आधार हमेशा याद रखें: (1) Structural, (2) Functional, (3) Socio-economic, और (4) Ecological।
- भारत विश्व का पहला देश है जिसने फरवरी 2014 में ‘राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति’ (National Agroforestry Policy, 2014) अपनाई।
- ICAR-CAFRI (Central Agroforestry Research Institute — पूर्व नाम NRCAF, स्थापना 1988) का मुख्यालय झाँसी (उत्तर प्रदेश) में है, जबकि ICRAF (World Agroforestry Centre, स्थापना 1978) का मुख्यालय नैरोबी (केन्या) में है।
- एग्री-सिल्वीकल्चर = फसल + वृक्ष; सिल्वा-पाश्चर = वृक्ष + चारागाह/पशु; एग्री-सिल्वा-पाश्चर = फसल + वृक्ष + चारागाह/पशु (केरल के होमगार्डन इसका सर्वोत्तम उदाहरण हैं)।
- तौंग्या (Taungya) प्रणाली और एलै क्रॉपिंग (Alley cropping) दोनों ‘एग्री-सिल्वीकल्चर’ (Agri-silvicultural system) के अंतर्गत आते हैं।
14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)
- 4-I सिद्धांत: Intentional, Intensive, Integrated, Interactive।
- 3 मुख्य गुण (Nair): Productivity (उत्पादकता), Sustainability (सततता), Adoptability (ग्राह्यता)।
- 5F आवश्यकताएँ: Food, Fuelwood, Fodder, Fiber, Finance/Fertilizer।
- भारत में कृषि वानिकी क्षेत्र: ~25.32 Mha (Agri-horticulture: ~4.65 Mha)।
- प्रमुख संस्थान: ICRAF (नैरोबी, केन्या – 1978) | ICAR-CAFRI (झाँसी, उ.प्र. – 1988)।
15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)
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16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)
(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर्स (5 Important Exam One-Liners)
- भारत फरवरी 2014 में ‘राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति’ (National Agroforestry Policy) लागू करने वाला विश्व का पहला देश बना।
- पी.के.आर. नायर (1985) ने कृषि वानिकी को 4 आधारों—Structural, Functional, Socio-economic और Ecological—पर वर्गीकृत किया।
- ICAR-CAFRI (केंद्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान, स्थापना 1988) झाँसी (उ.प्र.) में तथा ICRAF नैरोबी (केन्या) में स्थित है।
- कृषि वानिकी के तीन मूलभूत गुण Productivity (उत्पादकता), Sustainability (सततता) और Adoptability (ग्राह्यता) हैं।
- भारत में वर्तमान में अनुमानित 25.32 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र कृषि वानिकी के अंतर्गत है (जिसमें ~4.65 Mha एग्री-हॉर्टीकल्चर है)।
(B) 5 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions)
(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions)
(D) 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3 Long Answer Questions)
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGF 311 notes।





