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AGF 311 Lecture 09: वृक्ष प्रजातियों का प्रवर्धन एवं पुनर्जनन (बीज, कॉपिस, रूट सकर्स, प्रतिरोपण, स्टंप, शाखा कलम एवं प्रकंद) | Hindi Notes

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AGF 311 · Introductory Agroforestry
विषय सूची · Quick Navigation02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)
Lecture 09 Source Page Reference in Supplied Pack: 133 (AGF 311 Theory Lecture 09)

Lecture 09: वृक्ष प्रजातियों का प्रवर्धन एवं पुनर्जनन (बीज, कॉपिस, रूट सकर्स, प्रतिरोपण, स्टंप, शाखा कलम एवं प्रकंद)

Propagation of tree species; Regeneration by seed, coppice, root suckers, transplanting, stump, branch cutting and rhizomes

02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान (Lecture) के अध्ययन के पश्चात् विद्यार्थी निम्नलिखित में सक्षम होंगे:

  1. वन पुनर्जनन (Forest Regeneration — प्राकृतिक बनाम कृत्रिम पुनर्जनन) और पादप प्रवर्धन (Plant Propagation — लैंगिक बनाम अलैंगिक) की अवधारणा को समझना।
  2. बीज द्वारा पुनर्जनन (Regeneration by Seed), ऑर्थोडॉक्स बनाम रिकलसिट्रेंट बीज तथा बीज प्रसुप्ति (Seed dormancy) तोड़ने की पूर्व-उपचार विधियों (Scarification, Stratification, गर्म/ठंडा जल, अम्ल व गोबर घोल उपचार) को जानना।
  3. कॉपिस (Coppice — Seedling coppice vs Stool coppice) और मूल प्ररोह (Root suckers — शीशम, नीम, खेजड़ी, पलाश) द्वारा वानस्पतिक पुनर्जनन को समझना।
  4. प्रतिरोपण (Transplanting), स्टंप रोपण (Stump / Root-shoot cutting: 2–3 cm प्ररोह + 20–25 cm जड़, 1–2 cm कॉलर व्यास, सागवान व शीशम में), शाखा कलम (Branch/Stem cutting: पॉपलर, विलो, सहजन) और प्रकंद/राइजोम (Rhizomes & Offsets: बाँस/Bamboo) की विधि में पारंगत होना।

03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): वानिकी और कृषि वानिकी में पुराने परिपक्व वृक्षों की कटाई के बाद या नई भूमि पर वृक्षारोपण स्थापित करने के लिए नए पौधों के निर्माण और स्थापना की प्रक्रिया को वन पुनर्जनन या पुनरुत्पादन (Forest Regeneration) तथा पौधों की संख्या बढ़ाने की तकनीक को प्रवर्धन (Propagation) कहते हैं।

पुनर्जनन दो प्रकार से होता है—(1) प्राकृतिक पुनर्जनन (Natural Regeneration) जो प्रकृति में गिरे बीजों, कॉपिस या मूल प्ररोहों (Root suckers) से स्वतः होता है; और (2) कृत्रिम पुनर्जनन (Artificial Regeneration) जिसमें मनुष्य द्वारा सीधी बीज बुवाई अथवा नर्सरी में तैयार पौधों के प्रतिरोपण (Transplanting), स्टंप (Stump), शाखा कलम (Branch cutting) या प्रकंद (Rhizome) द्वारा वृक्ष लगाए जाते हैं।

04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

वन पुनर्जनन (Forest Regeneration)
किसी वन या कृषि वानिकी क्षेत्र में पुराने वृक्षों के स्थान पर प्राकृतिक या कृत्रिम साधनों से नए युवा वृक्षों (Young crop) के नवीनीकरण और स्थापना की प्रक्रिया।
कॉपिस पुनर्जनन (Coppice Regeneration)
जब किसी पर्णपाती वृक्ष को जमीन के पास (15–30 cm ऊँचाई पर) काटा जाता है, तो उसके ठूंठ (Stool/Stump) के कैम्बियम या सुप्त कलिकाओं (Dormant/Adventitious buds) से निकलने वाले नए प्ररोहों से नया वृक्ष तैयार होना कॉपिस कहलाता है।
मूल प्ररोह (Root Suckers)
जब किसी वृक्ष की सतही क्षैतिज जड़ों (Superficial lateral roots) पर प्राकृतिक रूप से या जड़ के कटने/घायल होने (Trenching/Ploughing) पर अपस्थानिक कलिकाओं (Adventitious buds) से नए पौधे ऊपर निकल आते हैं, तो उन्हें रूट सकर्स कहते हैं (जैसे—शीशम, नीम, खेजड़ी, अर्डू, पलाश)।
स्टंप / रूट-शूट कटिंग (Stump / Root-Shoot Cutting)
1 से 1.5 वर्ष पुराने नर्सरी पौधे की पत्तियों, पार्श्व जड़ों और मुख्य तने व जड़ के अतिरिक्त भाग को काटकर तैयार किया गया ‘गाजर जैसा’ कलम टुकड़ा, जिसमें कॉलर के ऊपर केवल 2 से 3 cm प्ररोह (Shoot) और नीचे 20 से 25 cm मूसला जड़ (Tap root) तथा 1 से 2 cm (अंगूठे जितनी) कॉलर मोटाई होती है। (सागवान व शीशम में सर्वोत्तम)।
प्रकंद / राइजोम (Rhizome & Offset)
भूमिगत रूप से क्षैतिज बढ़ने वाला रूपांतरित तना जिसमें पर्व (Internodes), पर्वसंधियाँ (Nodes) और शल्क पत्रों में कलिकाएँ होती हैं। बाँस (Bamboo) का व्यावसायिक प्रवर्धन प्रकंद और ऑफसेट (1 वर्ष पुराना 1–1.5 m कलम + राइजोम) द्वारा किया जाता है।
स्केरिफिकेशन बनाम स्ट्रैटिफिकेशन (Scarification vs Stratification)
कठोर बीज आवरण (Hard seed coat: बबूल, सुबबूल, खेजड़ी) को घिसकर, काटकर या अम्ल/गर्म पानी से नरम करना ‘स्केरिफिकेशन’ (खुरचना) कहलाता है; जबकि शीतोष्ण वृक्षों (अखरोट, सेब, देवदार, चीड़) के बीजों की भ्रूणीय प्रसुप्ति तोड़ने के लिए उन्हें नम रेत में कम तापमान (0°C–5°C) पर रखना ‘स्ट्रैटिफिकेशन’ (स्तरीकरण) कहलाता है।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. बीज द्वारा पुनर्जनन एवं पूर्व-बुवाई बीज उपचार (Regeneration by Seed & Pre-sowing Seed Treatments)

  • बीजों के प्रकार:
    • ऑर्थोडॉक्स बीज (Orthodox Seeds): जिन्हें कम नमी (5–8%) और कम तापमान पर लंबे समय तक भंडारित किया जा सकता है (जैसे—बबूल, खेजड़ी, सुबबूल, सागवान, शीशम, सिरिस)।
    • रिकलसिट्रेंट बीज (Recalcitrant Seeds): जो सूखने या बहुत कम तापमान पर तुरंत मर जाते हैं और जिनकी जीवन क्षमता (Viability) कुछ दिनों से कुछ सप्ताह की होती है (जैसे—नीम, साल/Shorea robusta, महुआ, कटहल, आम, जामुन)।
  • प्रसुप्ति तोड़ने हेतु पूर्व-बुवाई बीज उपचार (Pre-sowing Seed Treatments):
    1. ठंडे पानी में भिगोना (Cold water treatment): सामान्य बीजों को 12–24 घंटे सादे पानी में भिगोना (जैसे—शीशम, ग्मेलिना)।
    2. गर्म पानी का उपचार (Hot water treatment): Acacia nilotica (बबूल), Leucaena leucocephala (सुबबूल), Prosopis व Albizia के कठोर आवरण वाले बीजों को उबलते पानी (80∘C) में डालकर आँच बंद कर देना और पानी ठंडा होने तक 12–24 घंटे भिगोए रखना।
    3. अम्ल स्केरिफिकेशन (Acid scarification): अत्यधिक कठोर बीजों (बबूल, इमली, कैसिया) को 5 से 15 मिनट तक सांद्र गंधक अम्ल (Conc. H2SO4) में उपचारित कर साफ पानी से धोना।
    4. वैकल्पिक भीगना और सूखना (Alternate wetting and drying): सागवान (Tectona grandis) के पथरीले फलों (Drupes) को 12–14 दिनों तक दिन में धूप में सुखाया जाता है और रात में पानी या गोबर के घोल (Cow dung slurry) में भिगोया जाता है।

2. वानस्पतिक एवं कृत्रिम पुनर्जनन की 6 प्रमुख विधियाँ (6 Key Regeneration & Propagation Methods)

1. कॉपिस द्वारा पुनर्जनन (Regeneration by Coppice)

यह दो प्रकार का होता है: (i) सीडलिंग कॉपिस (Seedling coppice) — जैसे साल (Shorea robusta) के छोटे पौधों के मरने या कटने पर जड़ कॉलर से नया प्ररोह निकलना; और (ii) स्टूल कॉपिस (Stool coppice) — पेड़ कटने के बाद ठूंठ से प्ररोह निकलना।
कॉपिस क्षमता के आधार पर वृक्षों की 4 श्रेणियाँ:
• तीव्र कॉपिसर्स (Strong coppicers): सफेदा (Eucalyptus), सागवान (Tectona grandis), साल, शीशम, सुबबूल, सिरिस, पलाश, खैर।
• उचित कॉपिसर्स (Fair coppicers): अर्जुन, महुआ, हरड़।
• कमजोर कॉपिसर्स (Bad coppicers): बबूल (Acacia nilotica), आडू, बेल।
• गैर-कॉपिसर्स (Non-coppicers): सभी शंकुधारी वृक्ष — चीड़ (Pinus), देवदार (Cedrus deodara), फर और स्प्रूस।

2. मूल प्ररोह द्वारा पुनर्जनन (Regeneration by Root Suckers)

• जब वृक्ष की उथली क्षैतिज जड़ों पर चोट लगती है या मुख्य पेड़ के चारों ओर परिपत्र खाई (Circular trench) खोदी जाती है, तो जड़ों से नए प्ररोह (Root suckers) निकल आते हैं।
• प्रमुख प्रजातियाँ: शीशम (Dalbergia sissoo – सर्वोत्तम), नीम (Azadirachta indica), खेजड़ी (Prosopis cineraria), तेंदू (Diospyros melanoxylon – बीड़ी पत्ता वृद्धि हेतु), पलाश (Butea monosperma), और सेमल (Bombax ceiba)।

3. प्रतिरोपण (Transplanting of Entire Seedlings)

• नर्सरी क्यारी या पॉलीबैग में उगाए गए संपूर्ण पौधे (जड़ व प्ररोह सहित) को मानसून के समय मुख्य खेत में गड्ढों में लगाना।
• यह दो रूपों में होता है: (a) मिट्टी के पिंड सहित (With ball of earth / Polybag container) — जैसे नीम, सफेदा, खेजड़ी, कैजुआरिना; और (b) नग्न जड़ प्रतिरोपण (Bare-root transplanting) — जैसे पॉपलर (एंटायर ट्रांसप्लांट – ETP), विलो, रॉबिनिया।

4. स्टंप रोपण / रूट-शूट कटिंग (Stump Planting)

• नर्सरी में 1 वर्ष तक उगाए गए अंगूठे जितनी मोटाई वाले पौधों को उखाड़कर तेज़ चाकू से तैयार किया जाता है।
• मानक स्टंप आकार (Standard Stump Size):
– प्ररोह भाग (Shoot portion): 2 से 3 cm (या 2.5 cm)
– मूसला जड़ भाग (Tap root portion): 20 से 25 cm (अर्थात् Shoot : Root अनुपात = 1 : 8 से 1 : 10)
– कॉलर व्यास (Collar diameter / Thickness): 1.0 से 2.0 cm (पेंसिल से अंगूठे की मोटाई)।
• लाभ: परिवहन में अत्यंत आसान (एक बोरे में सैकड़ों स्टंप आ जाते हैं), कोमल पत्तियाँ न होने से वाष्पोत्सर्जन शॉक नहीं लगता और क्रोबार (Crowbar/सब्बल) से छेद कर तेजी से रोपण होता है।
• प्रमुख प्रजातियाँ: सागवान (Tectona grandis), शीशम (Dalbergia sissoo), गम्हार (Gmelina arborea) और सेमल।

5. शाखा / तना कलम (Branch / Stem Cuttings)

• 1 वर्ष पुरानी परिपक्व शाखाओं से 20 से 25 cm लंबी और 1 से 2.5 cm मोटी (कम से कम 3–4 स्वस्थ कलिकाओं वाली) कलमें काटी जाती हैं। ऊपरी कट कलिका से 1 cm ऊपर तिरछा (Slanting) और निचला कट सीधा लगाया जाता है। जड़ निकलने को प्रेरित करने के लिए निचले सिरे को IBA (Indole-3-Butyric Acid, 200–1000 ppm) से उपचारित किया जाता है।
• प्रमुख प्रजातियाँ: पॉपलर (Populus deltoides), विलो (Salix alba), शहतूत (Morus alba), सहजन (Moringa oleifera), ग्लिरिसिडिया और लाल चंदन।

6. प्रकंद एवं ऑफसेट द्वारा प्रवर्धन (Rhizomes & Offsets)

• बाँस (Bamboo — Dendrocalamus strictus, Bambusa bambos) में फूल 30–60 वर्ष में एक बार (Gregarious flowering) आते हैं, इसलिए इसका प्रवर्धन भूमिगत प्रकंद (Rhizome), ऑफसेट रोपण (Offset planting — 1 से 2 वर्ष पुराना कलम जिसे 3–5 पर्वसंधियों पर तिरछा काटा गया हो + संलग्न राइजोम व जड़ें) या कल्म कटिंग (Culm cutting) से मानसून से ठीक पहले किया जाता है।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

वन पुनर्जनन विधियों का समग्र वर्गीकरण:

  • 1. प्राकृतिक पुनर्जनन (Natural Regeneration): (a) बीज द्वारा (From seed), और (b) वानस्पतिक भागों द्वारा (From vegetative parts: Coppice, Root suckers, Pollards, Rhizomes)।
  • 2. कृत्रिम पुनर्जनन (Artificial Regeneration): (a) प्रत्यक्ष बीज बुवाई (Direct sowing – बबूल, खेजड़ी, नीम), और (b) रोपण (Planting: Entire transplanting, Bare-root ETP, Stump planting, Branch cuttings, Clonal mini-cuttings, Tissue culture)।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)

  • कोशिका पूर्णशक्तता एवं ऑक्सिन ध्रुवण सिद्धांत (Totipotency & Auxin Polarity in Cuttings): शाखा कलम और स्टंप में कैम्बियम कोशिकाएँ कैलस (Callus) बनाती हैं और अंतर्जात व बहिर्जात ऑक्सिन (IAA/IBA) के प्रभाव से निचले सिरे पर अपस्थानिक जड़ें (Adventitious roots) तथा ऊपरी कलिकाओं से नया प्ररोह विकसित होता है।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)

व्यावहारिक उदाहरण: सागवान में स्टंप रोपण और पॉपलर में ईटीपी (ETP)
  • सागवान (Teak) में स्टंप रोपण: सागवान के फलों को गोबर के घोल में भिगोने-सुखाने के बाद नर्सरी बेड में बोया जाता है। 1 वर्ष बाद पौधों को उखाड़कर 2.5 cm प्ररोह और 22.5 cm जड़ (1–2 cm कॉलर मोटाई) का स्टंप बनाया जाता है और मानसून की पहली बारिश पर क्रोबार से 25 cm गहरा छेद कर मिट्टी दबाकर रोपित कर दिया जाता है (90% से अधिक सफलता)।
  • पॉपलर में ब्रांच कटिंग व ETP: जनवरी-फरवरी में पॉपलर की 22 cm लंबी कलमें नर्सरी में 60×60 cm पर लगाई जाती हैं। 1 वर्ष में ये 3–4 मीटर ऊँचे नग्न-जड़ पौधे (Entire Transplants – ETPs) बन जाते हैं जिन्हें अगले जनवरी-फरवरी (पर्णपाती सुषुप्तावस्था) में किसानों के खेतों में 5×4 m पर लगाया जाता है।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 9.1: प्रमुख वानिकी वृक्ष प्रजातियाँ एवं उनकी सर्वोत्तम प्रवर्धन / पुनर्जनन विधियाँ
प्रवर्धन विधि (Propagation Method) मानक आकार / तकनीकी विवरण प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ (Important Examples)
1. स्टंप रोपण (Stump / Root-Shoot Cutting) 2–3 cm प्ररोह + 20–25 cm जड़; कॉलर व्यास 1–2 cm (1:8 से 1:10 अनुपात)। सागवान (Tectona grandis), शीशम (Dalbergia sissoo), गम्हार (Gmelina), सेमल।
2. शाखा / तना कलम (Stem / Branch Cutting) 20–25 cm लंबाई, 1–2.5 cm मोटाई, 3–4 कलिकाएँ (+ IBA उपचार)। पॉपलर (Populus deltoides), विलो (Salix), शहतूत (Morus), सहजन, ग्लिरिसिडिया।
3. मूल प्ररोह (Root Suckers) क्षैतिज जड़ों को घायल करने या ट्रेंच खोदने पर जड़ों से नया प्ररोह फूटना। शीशम (Dalbergia sissoo), नीम, खेजड़ी, तेंदू (Diospyros), पलाश, अर्डू।
4. कॉपिस (Coppice Regeneration) जमीन से 15–30 cm ऊपर ठूंठ काटने पर सुप्त कलिकाओं से फूटान। सफेदा (Eucalyptus), सागवान, साल, सुबबूल, पलाश (चीड़ व देवदार Non-coppicers हैं)।
5. प्रकंद एवं ऑफसेट (Rhizome & Offset) 1–2 वर्ष पुराना 1–1.5 m बाँस कलम (3–5 नोड्स) + भूमिगत राइजोम। सभी बाँस प्रजातियाँ (Dendrocalamus strictus, Bambusa bambos)।

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)

महत्वपूर्ण स्टंप एवं कलम मानक मापदंड (Standard Propagation Metrics)
  • आदर्श स्टंप (Stump) के आयाम:
    • प्ररोह लंबाई (Shoot length) = 2 से 3 cm (2.5 cm)
    • मूसला जड़ लंबाई (Root length) = 20 से 25 cm (22.5 cm)
    • Shoot : Root अनुपात = 1:8 से 1:10
    • कॉलर व्यास (Collar diameter) = 1.0 से 2.0 cm (अंगूठे जितनी मोटाई)
  • शाखा कलम (Hardwood Stem Cutting) आकार: लंबाई = 20–25 cm,   व्यास = 1.0–2.5 cm,   न्यूनतम कलिकाएँ = 3–4 nodes
  • रूटिंग हार्मोन (Rooting Auxin): IBA (Indole-3-Butyric Acid) @ 200 से 1000 ppm (या क्लोनल मिनी-कटिंग में 2000–4000 ppm टाल्क पाउडर)

11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 09 Mind Map: वृक्ष प्रजातियों का प्रवर्धन एवं पुनर्जनन विधियाँ
  • वृक्ष प्रवर्धन एवं पुनर्जनन (Tree Propagation & Regeneration: प्राकृतिक एवं कृत्रिम)
    • बीज द्वारा पुनर्जनन (Seed Regeneration)
      • बीज प्रकार: Orthodox (बबूल, सागवान – दीर्घ भंडारण) बनाम Recalcitrant (नीम, साल, महुआ – अल्प जीवन क्षमता)
      • पूर्व-बुवाई उपचार: ठंडा/गर्म जल (80°C बबूल/सुबबूल), अम्ल स्केरिफिकेशन (H₂SO₄), वैकल्पिक भीगना-सूखना (सागवान), स्ट्रैटिफिकेशन (0-5°C शीतोष्ण)
    • प्राकृतिक/वानस्पतिक पुनर्जनन (Coppice & Root Suckers)
      • कॉपिस (15-30 cm ठूंठ): Strong coppicers (सफेदा, सागवान, साल, सुबबूल) बनाम Non-coppicers (चीड़/Pinus, देवदार/Cedrus)
      • रूट सकर्स (मूल प्ररोह): शीशम (Dalbergia sissoo), नीम, खेजड़ी, तेंदू, पलाश
    • कृत्रिम रोपण तकनीकें (Planting Techniques)
      • स्टंप (Stump / Root-Shoot Cutting): 2–3 cm प्ररोह + 20–25 cm जड़ (1–2 cm व्यास) ➔ सागवान एवं शीशम
      • शाखा कलम (Branch Cutting): 20–25 cm कलम + IBA हार्मोन ➔ पॉपलर (ETP), विलो, शहतूत, सहजन
      • प्रकंद व ऑफसेट (Rhizomes/Offsets): बाँस (Bamboo) प्रवर्धन + प्रतिरोपण (Entire transplanting)

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)

प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): सागवान / शीशम में मानक ‘स्टंप’ (Stump) तैयार करने और रोपण की प्रक्रिया
1. बीज पूर्व-उपचार व बुवाई
(सागवान: भीगना-सूखना ➔ नर्सरी बेड)
➔ 2. 1 वर्ष तक पौध पालन
(कॉलर व्यास 1.0–2.0 cm प्राप्त करना)
➔ 3. उखाड़ना एवं छँटाई
(पत्तियाँ व पार्श्व जड़ें हटाना)
➔ 4. मानक स्टंप निर्माण
(2–3 cm प्ररोह + 20–25 cm मूसला जड़)
➔ 5. क्रोबार द्वारा क्षेत्र रोपण
(मानसून प्रारंभ में छेद बनाकर रोपण)

13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • स्टंप (Stump / Root-shoot cutting) के मानक आयाम हर वानिकी परीक्षा में पूछे जाते हैं: प्ररोह भाग (Shoot) = 2 से 3 cm, जड़ भाग (Root) = 20 से 25 cm (अनुपात 1:8 से 1:10), और कॉलर व्यास = 1 से 2 cm (अंगूठे की मोटाई)।
  • सागवान (Tectona grandis) और शीशम (Dalbergia sissoo) का प्रवर्धन मुख्य रूप से ‘स्टंप’ (Stump planting) द्वारा किया जाता है।
  • सभी शंकुधारी वृक्ष जैसे चीड़ (Pinus roxburghii) और देवदार (Cedrus deodara) ‘गैर-कॉपिसर्स’ (Non-coppicers) होते हैं अर्थात् कटने के बाद ठूंठ से पुनः नहीं फूटते।
  • शीशम (Dalbergia sissoo) और तेंदू (Diospyros melanoxylon) में ‘मूल प्ररोह’ (Root suckers) द्वारा उत्कृष्ट पुनर्जनन होता है।
  • बाँस (Bamboo) का व्यावसायिक वानस्पतिक प्रवर्धन ‘राइजोम / प्रकंद’ (Rhizomes) और ‘ऑफसेट रोपण’ (Offset planting) द्वारा किया जाता है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)

  • Stump Size: Shoot = 2–3 cm | Root = 20–25 cm | Collar thickness = 1–2 cm (सागवान, शीशम)।
  • Branch Cutting: पॉपलर (Populus deltoides), विलो (Salix), शहतूत (Morus), सहजन (Moringa)।
  • Root Suckers: शीशम, नीम, खेजड़ी, तेंदू, पलाश।
  • Rhizomes / Offsets: बाँस (Dendrocalamus strictus)।
  • Recalcitrant Seeds (अल्प जीवन क्षमता): नीम, साल (Shorea robusta), महुआ, आम, जामुन।

15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)

1. सागवान (Teak) और शीशम (Shisham) के प्रवर्धन में प्रयुक्त एक आदर्श ‘स्टंप’ (Stump / Root-shoot cutting) में प्ररोह (Shoot) और जड़ (Root) की मानक लंबाई क्रमशः कितनी रखी जाती है?
(A) 20–25 cm प्ररोह और 2–3 cm जड़
(B) 2–3 cm प्ररोह (Shoot) और 20–25 cm मूसला जड़ (Root)
(C) 50 cm प्ररोह और 50 cm जड़
(D) 1 mm प्ररोह और 5 mm जड़
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) 2–3 cm प्ररोह (Shoot) और 20–25 cm मूसला जड़ (Root)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): एक मानक स्टंप में कॉलर के ऊपर 2–3 cm (2.5 cm) प्ररोह और कॉलर के नीचे 20–25 cm मूसला जड़ होती है तथा कॉलर व्यास 1–2 cm होता है।
2. निम्नलिखित में से कौन-से वृक्ष ‘गैर-कॉपिसर्स’ (Non-coppicers) हैं जिनमें काटने के बाद ठूंठ से नए प्ररोह नहीं निकलते?
(A) सफेदा और सागवान
(B) साल और पलाश
(C) चीड़ (Pinus) और देवदार (Cedrus deodara)
(D) सुबबूल और शीशम
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (C) चीड़ (Pinus) और देवदार (Cedrus deodara)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): शंकुधारी वृक्ष (Conifers) जैसे चीड़, देवदार, फर और स्प्रूस में कॉपिसिंग की क्षमता नहीं होती (Non-coppicers), जबकि सफेदा व सागवान Strong coppicers हैं।
3. पॉपलर (Populus deltoides) और विलो (Salix alba) का व्यावसायिक प्रवर्धन मुख्य रूप से किस विधि द्वारा किया जाता है?
(A) केवल प्रकंद (Rhizome) द्वारा
(B) शाखा / तना कलम (Branch / Stem cuttings) और ETP द्वारा
(C) ग्राफ्टिंग द्वारा
(D) केवल बीजाणुओं द्वारा
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) शाखा / तना कलम (Branch / Stem cuttings) और ETP द्वारा
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): पॉपलर और विलो का प्रवर्धन 20–22 cm लंबी परिपक्व तना/शाखा कलमों (Stem cuttings) से किया जाता है जिनसे 1 वर्ष में नग्न-जड़ ETP तैयार होते हैं।
4. बाँस (Bamboo) का वानस्पतिक प्रवर्धन पारंपरिक रूप से किस भूमिगत भाग द्वारा किया जाता है?
(A) प्रकंद एवं ऑफसेट (Rhizomes and Offsets)
(B) पत्ती कलम
(C) हवाई दाब (Air layering)
(D) स्टंप
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) प्रकंद एवं ऑफसेट (Rhizomes and Offsets)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): बाँस का प्रवर्धन भूमिगत प्रकंद (Rhizomes), ऑफसेट (Offset planting) और कल्म कटिंग द्वारा किया जाता है।
5. सागवान (Tectona grandis) के कठोर फलों (Drupes) की प्रसुप्ति तोड़ने के लिए बुवाई से पूर्व कौन-सा विशेष उपचार किया जाता है?
(A) -20°C पर जमाना
(B) 12–14 दिनों तक वैकल्पिक रूप से पानी/गोबर घोल में भिगोना और धूप में सुखाना (Alternate wetting and drying)
(C) केवल हवा में रखना
(D) पेट्रोल में भिगोना
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) 12–14 दिनों तक वैकल्पिक रूप से पानी/गोबर घोल में भिगोना और धूप में सुखाना (Alternate wetting and drying)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): सागवान के कठोर फलों के बाह्य आवरण को नरम करने के लिए वैकल्पिक भीगने और सूखने (Alternate wetting and drying) या गोबर के गड्ढे में किण्वन की विधि अपनाई जाती है।
6. जब किसी वृक्ष की उथली क्षैतिज जड़ों (Lateral roots) पर चोट लगने या खाई खोदने से नए प्ररोह निकल आते हैं (जैसे शीशम, नीम और तेंदू में), तो उन्हें क्या कहते हैं?
(A) मूल प्ररोह (Root suckers)
(B) पोलार्ड (Pollards)
(C) स्टोलन (Stolons)
(D) बल्ब (Bulbs)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) मूल प्ररोह (Root suckers)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): जड़ों की अपस्थानिक कलिकाओं से निकलने वाले नए पौधों को ‘मूल प्ररोह’ (Root suckers) कहते हैं; शीशम व तेंदू इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
7. शाखा कलमों (Branch cuttings) में तेजी से अपस्थानिक जड़ें (Adventitious roots) निकालने के लिए किस सिंथेटिक ऑक्सिन हार्मोन का उपयोग सर्वाधिक किया जाता है?
(A) जिबरेलिक अम्ल (GA₃)
(B) इंडोल-3-ब्यूटिरिक अम्ल (IBA)
(C) एथिलीन
(D) एब्सिसिक अम्ल (ABA)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) इंडोल-3-ब्यूटिरिक अम्ल (IBA)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): कलमों में जड़ प्रेरण (Rooting hormone) के लिए IBA (Indole-3-Butyric Acid) सर्वोत्तम और सर्वाधिक प्रयुक्त हार्मोन है।
8. निम्नलिखित में से किस वृक्ष के बीज ‘रिकलसिट्रेंट’ (Recalcitrant — जिन्हें सुखाकर लंबे समय तक भंडारित नहीं किया जा सकता) श्रेणी में आते हैं?
(A) नीम (Azadirachta indica) और साल (Shorea robusta)
(B) बबूल (Acacia nilotica)
(C) सुबबूल (Leucaena leucocephala)
(D) खेजड़ी (Prosopis cineraria)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) नीम (Azadirachta indica) और साल (Shorea robusta)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): नीम, साल और महुआ के बीज रिकलसिट्रेंट होते हैं जिनकी जीवन क्षमता मात्र 1 से 3 सप्ताह होती है।
9. बबूल (Acacia nilotica) और सुबबूल के कठोर बीज आवरण की प्रसुप्ति तोड़ने के लिए कोमल और सस्ता घरेलू पूर्व-उपचार क्या है?
(A) 80°C गर्म पानी में डालकर ठंडा होने तक 12–24 घंटे भिगोना (Hot water treatment)
(B) बर्फ में रखना
(C) अंधेरे कमरे में रखना
(D) नमक के टुकड़ों के साथ पीसना
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) 80°C गर्म पानी में डालकर ठंडा होने तक 12–24 घंटे भिगोना (Hot water treatment)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): दलहनी वृक्षों के कठोर बीज आवरण को नरम करने के लिए 80°C गर्म जल उपचार या सांद्र H₂SO₄ अम्ल स्केरिफिकेशन किया जाता है।
10. एक आदर्श सागवान या शीशम के स्टंप का कॉलर व्यास (Collar thickness) कितना होना चाहिए?
(A) 0.1 से 0.2 cm (धागे जितना)
(B) 1.0 से 2.0 cm (अंगूठे जितनी मोटाई)
(C) 10 से 15 cm
(D) 50 cm
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) 1.0 से 2.0 cm (अंगूठे जितनी मोटाई)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): 1 से 2 cm कॉलर व्यास (Thumb thickness) वाले स्टंप में पर्याप्त संचित भोजन होता है और उसकी जीवितता उच्चतम होती है।

16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर्स (5 Important Exam One-Liners)

  1. सागवान और शीशम के आदर्श स्टंप (Stump) में 2–3 cm प्ररोह, 20–25 cm मूसला जड़ और 1–2 cm कॉलर व्यास होता है।
  2. चीड़ (Pinus) और देवदार (Cedrus deodara) जैसे शंकुधारी वृक्ष ‘गैर-कॉपिसर्स’ (Non-coppicers) होते हैं।
  3. शीशम (Dalbergia sissoo), तेंदू, नीम और खेजड़ी में ‘मूल प्ररोह’ (Root suckers) द्वारा उत्कृष्ट पुनर्जनन होता है।
  4. पॉपलर, विलो और शहतूत का प्रवर्धन 20–25 cm लंबी शाखा कलमों (Stem cuttings) से किया जाता है।
  5. नीम और साल (Shorea robusta) के बीज ‘रिकलसिट्रेंट’ (Recalcitrant) होते हैं जिनकी जीवन क्षमता बहुत कम होती है।

(B) 5 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions)

1. स्टंप (Stump) को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: रूट-शूट कटिंग (Root-shoot cutting)।
2. किन्हीं चार तीव्र कॉपिसर्स (Strong coppicers) वृक्षों के नाम लिखिए।
उत्तर: सफेदा (Eucalyptus), सागवान (Tectona grandis), साल (Shorea robusta) और सुबबूल (Leucaena leucocephala)।
3. मूल प्ररोह (Root suckers) से प्रवर्धित होने वाले चार वृक्षों के नाम लिखिए।
उत्तर: शीशम (Dalbergia sissoo), नीम (Azadirachta indica), खेजड़ी (Prosopis cineraria) और तेंदू (Diospyros melanoxylon)।
4. स्केरिफिकेशन (Scarification) किसे कहते हैं?
उत्तर: जल और गैसों के प्रवेश को सुगम बनाने के लिए कठोर बीज आवरण (Hard seed coat) को यांत्रिक रूप से घिसने या गर्म पानी/अम्ल से नरम करने की प्रक्रिया को स्केरिफिकेशन कहते हैं।
5. पॉपलर में ‘ETP’ का पूर्ण रूप क्या है?
उत्तर: Entire Transplant (नर्सरी में कलम से तैयार 1 वर्ष पुराना 3–4 मीटर लंबा नग्न-जड़ संपूर्ण पौधा)।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions)

1. स्टंप (Stump / Root-shoot cutting) क्या है? इसे कैसे तैयार किया जाता है और इसके क्या लाभ हैं?
उत्तर: स्टंप 1 वर्ष पुराने नर्सरी पौधे से तैयार किया गया प्ररोह और मूसला जड़ का एक कलम टुकड़ा है। पौधे को नर्सरी से उखाड़कर उसकी सभी पत्तियाँ और पार्श्व जड़ें साफ कर दी जाती हैं तथा कॉलर के ऊपर केवल 2–3 cm तना (Shoot) और नीचे 20–25 cm मूसला जड़ (Root) रखकर तेज चाकू से काट लिया जाता है (कॉलर व्यास 1–2 cm)। लाभ: इसका परिवहन अत्यंत सस्ता व आसान है, पत्तियाँ न होने से वाष्पोत्सर्जन शॉक नहीं लगता, इसे गीले बोरे में 1–2 सप्ताह तक रखा जा सकता है और सागवान व शीशम में इसकी जीवितता >90% होती है।
2. वन वृक्षों के बीजों में प्रसुप्ति (Seed dormancy) तोड़ने की चार पूर्व-बुवाई उपचार विधियाँ उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: (1) ठंडा जल उपचार: शीशम व ग्मेलिना के बीजों को 24 घंटे पानी में भिगोना; (2) गर्म जल उपचार (Hot water): बबूल व सुबबूल के कठोर बीजों को 80°C पानी में डालकर रात भर भिगोना; (3) अम्ल स्केरिफिकेशन (Acid scarification): कठोर बीजों को 5–15 मिनट सांद्र H₂SO₄ में डुबोकर धोना; और (4) वैकल्पिक भीगना व सूखना (Alternate wetting & drying): सागवान के फलों को 12–14 दिनों तक रात में पानी/गोबर घोल में भिगोना और दिन में धूप में सुखाना।
3. कॉपिस (Coppice) और मूल प्ररोह (Root suckers) द्वारा पुनर्जनन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कॉपिस पुनर्जनन में वृक्ष के मुख्य तने को जमीन के पास (15–30 cm ऊँचाई) काटने पर ठूंठ (Stump/Stool) की सुप्त कलिकाओं से नए प्ररोह निकलते हैं (जैसे सफेदा, सागवान, साल)। इसके विपरीत, मूल प्ररोह (Root suckers) में वृक्ष की जमीन के नीचे फैली क्षैतिज जड़ों (Lateral roots) पर प्राकृतिक रूप से या खाई खोदने/जुताई से चोट लगने पर अपस्थानिक कलिकाओं से नए पौधे निकलते हैं (जैसे शीशम, तेंदू, नीम, खेजड़ी)।
4. शाखा कलम (Branch/Stem cutting) द्वारा वृक्ष प्रवर्धन की विधि समझाइए।
उत्तर: पॉपलर, विलो, शहतूत, सहजन और ग्लिरिसिडिया में 1 वर्ष पुरानी परिपक्व शाखाओं से 20–25 cm लंबी और 1–2.5 cm मोटी (3–4 कलिकाओं वाली) कलमें काटी जाती हैं। निचले सिरे को IBA (200–1000 ppm) हार्मोन से उपचारित कर नर्सरी बेड में इस प्रकार लगाया जाता है कि कलम का 2/3 भाग जमीन के अंदर और 1/3 भाग (1–2 कलिकाएँ) जमीन के ऊपर रहे।
5. बाँस (Bamboo) में प्रकंद (Rhizome) और ऑफसेट (Offset) द्वारा प्रवर्धन कैसे किया जाता है?
उत्तर: बाँस में बीज बहुत लंबे अंतराल (30–60 वर्ष) पर बनते हैं, इसलिए मानसून से ठीक पहले (जून में) बाँस के झुरमुट (Clump) के बाहरी हिस्से से 1 से 2 वर्ष पुरानी 1–1.5 मीटर लंबी शाखा (3–5 पर्वसंधियों वाली) को उसके भूमिगत प्रकंद (Rhizome) और जड़ों सहित सावधानी से अलग किया जाता है। इसे ‘ऑफसेट’ कहते हैं और तुरंत गड्ढे में रोपित कर दिया जाता है।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3 Long Answer Questions)

1. वानिकी एवं कृषि वानिकी वृक्ष प्रजातियों के प्रवर्धन एवं पुनर्जनन की सभी प्रमुख विधियों—बीज, कॉपिस, मूल प्ररोह (Root suckers), प्रतिरोपण, स्टंप (Stump), शाखा कलम और प्रकंद (Rhizomes)—का उदाहरण सहित सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: प्राकृतिक व कृत्रिम पुनर्जनन का वर्गीकरण करते हुए सातों विधियों (बीज व पूर्व-उपचार, कॉपिस की 4 श्रेणियाँ, रूट सकर्स, प्रतिरोपण, स्टंप 2-3cm : 20-25cm, ब्रांच कटिंग + IBA, और बाँस में राइजोम/ऑफसेट) का तकनीकी विवरण और तुलनात्मक सारणी 9.1 प्रस्तुत करें।
2. बीज द्वारा वन वृक्षों के पुनर्जनन में आने वाली समस्याओं (ऑर्थोडॉक्स बनाम रिकलसिट्रेंट बीज एवं बीज प्रसुप्ति) का विश्लेषण कीजिए तथा विभिन्न वृक्ष प्रजातियों में प्रयुक्त पूर्व-बुवाई बीज उपचार (Pre-sowing seed treatments) की विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: Orthodox बनाम Recalcitrant (नीम, साल, महुआ) बीजों का अंतर तथा भौतिक/रासायनिक स्केरिफिकेशन, गर्म पानी उपचार, गोबर घोल उपचार, सागवान का वैकल्पिक भीगना-सूखना और शीतोष्ण वृक्षों के शीत स्तरीकरण (Stratification) की विस्तृत व्याख्या करें।
3. कृत्रिम वृक्षारोपण में सीधे बीज बोने (Direct sowing), संपूर्ण पौध प्रतिरोपण (Entire transplanting) और स्टंप रोपण (Stump planting) के तुलनात्मक गुण-दोषों और उपयुक्त वृक्ष प्रजातियों की विवेचना कीजिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: तीनों विधियों में लागत, नर्सरी समय, परिवहन सुगमता, वाष्पोत्सर्जन शॉक, जड़ विकास और जीवितता प्रतिशत (Survival %) की तुलना उदाहरणों सहित करें।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGF 311 notes।

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