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AGF 311 Lecture 12: प्रजातियों का चयन: स्थल कारक, जड़, छत्र व तना विशेषताएँ, फिनोलॉजी, पोषण व जल मांग, भूमि संक्रियाएँ, टेंडिंग एवं कटाई उपयोगिता | Hindi Notes

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AGF 311 · Introductory Agroforestry
विषय सूची · Quick Navigation02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)
Lecture 12 Source Page Reference in Supplied Pack: 133 (AGF 311 Theory Lecture 12)

Lecture 12: प्रजातियों का चयन: स्थल कारक, जड़, छत्र व तना विशेषताएँ, फिनोलॉजी, पोषण व जल मांग, भूमि संक्रियाएँ, टेंडिंग एवं कटाई उपयोगिता

Choice of species- Site factors, root, crown and bole characteristics, phenology, nutritional and water requirement, ground operation, tending, harvesting utility etc.

02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान (Lecture) के अध्ययन के पश्चात् विद्यार्थी निम्नलिखित में सक्षम होंगे:

  1. वृक्ष प्रजातियों के चयन (Choice of Species) को प्रभावित करने वाले 4 स्थल कारकों—जलवायवीय (Climatic), मृदीय (Edaphic), स्थलाकृतिक (Topographic) और जैविक (Biotic)—तथा समस्याग्रस्त मृदाओं हेतु उपयुक्त वृक्षों को जानना।
  2. वृक्ष की जड़ (Deep tap root vs superficial), छत्र (Crown: शंक्वाकार, बेलनाकार, छतरीनुमा) और तने (Bole: सीधा, बेलनाकार, गाँठ-मुक्त) की विशेषताओं का कृषि वानिकी में महत्व समझना।
  3. पादप फिनोलॉजी (Phenology: पर्णपात, पुष्पन, फलन का समय) और ‘विपरीत फिनोलॉजी’ (Reverse Phenology — Faidherbia albida) की अनूठी भूमिका का विश्लेषण करना।
  4. पोषण एवं जल की मांग (Water Use Efficiency) तथा भूमि संक्रियाओं (Ground operations: भूमि समाशोधन, जुताई, मृदा कार्य) को समझना।
  5. वन संवर्धन की प्रमुख ‘टेंडिंग संक्रियाओं’ (Tending Operations — Weeding, Cleaning, Thinning, Pruning, Climber cutting, Improvement felling, Girdling) और कटाई उपयोगिता (Harvesting & Utility) में पारंगत होना।

03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): वानिकी और कृषि वानिकी में वृक्ष एक दीर्घकालिक निवेश (5 से 50+ वर्ष) होते हैं। यदि प्रारंभ में ही गलत वृक्ष प्रजाति का चयन कर लिया जाए, तो न केवल वृक्षों की वृद्धि रुक जाती है, बल्कि सह-फसलों की उपज भी नष्ट हो जाती है। इसलिए प्रजाति का चयन (Choice of Species — ‘Right Tree at the Right Place for the Right Purpose’) स्थल कारकों, वृक्ष की आकृति (जड़, छत्र व तना), फिनोलॉजी, जल व पोषण मांग तथा टेंडिंग और अंतिम उपयोगिता के गहन वैज्ञानिक मिलान पर आधारित होता है।

04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

स्थल कारक (Site Factors / Locality Factors)
किसी स्थान के सभी प्रभावी जलवायवीय (Climatic: प्रकाश, ताप, वर्षा, पवन), मृदीय (Edaphic: गठन, pH, लवणता, जल-निकासी), स्थलाकृतिक (Topographic: ऊँचाई, ढलान, पहलू/Aspect) और जैविक (Biotic) कारकों का योग जो वहाँ उगने वाले वृक्षों के जीवन को निर्धारित करता है।
बोल / मुख्य तना (Bole / Clean Bole)
वृक्ष के आधार (जमीन) से लेकर मुख्य छत्र की पहली बड़ी शाखा (Crown point) तक का सीधा, बिना शाखा और बिना गाँठ वाला बेलनाकार मुख्य तना, जिससे इमारती लकड़ी (Timber logs) प्राप्त होती है।
फिनोलॉजी (Phenology)
जलवायु और ऋतु परिवर्तन के संदर्भ में वृक्ष की आवधिक जैविक घटनाओं—जैसे नई पत्तियाँ आना (Leaf flushing), पतझड़ (Leaf fall/Senescence), पुष्पन (Flowering) और फलन (Fruiting)—के समय का अध्ययन।
विपरीत फिनोलॉजी (Reverse Phenology — Faidherbia albida)
वह दुर्लभ और कृषि वानिकी के लिए अत्यंत वरदानकारी गुण जिसमें वृक्ष वर्षा ऋतु (खरीफ फसल की बुवाई व वृद्धि के समय) में अपनी पत्तियाँ गिरा देता है (जिससे फसल को पूरी धूप और पत्तियों की हरी खाद मिलती है) और शुष्क ग्रीष्म ऋतु में हरा-भरा रहता है। उदाहरण: सफेद बबूल / हरड़ू (Faidherbia albida / Acacia albida)।
टेंडिंग संक्रियाएँ (Tending Operations)
पौध की स्थापना (Regeneration) के समय से लेकर परिपक्व फसल की अंतिम कटाई (Harvesting) तक किसी भी अवस्था में वन फसल और उसके पर्यावरण के स्वास्थ्य, वृद्धि और काष्ठ गुणवत्ता को सुधारने के लिए की जाने वाली सभी सिल्वीकल्चरल क्रियाएँ (जैसे Weeding, Cleaning, Thinning, Pruning, Climber cutting, Girdling)। (नोट: टेंडिंग में भूमि की तैयारी और पुनर्जनन शामिल नहीं होते)।
गर्डलिंग / वलयन (Girdling / Ring Barking)
किसी अवांछित, रोगग्रस्त या कम मूल्य वाले खड़े वृक्ष को बिना गिराए सुखाने/मारने के लिए उसके तने के चारों ओर छाल और कैम्बियम (और कभी-कभी रसकाष्ठ/Sapwood) की 10–20 cm चौड़ी पट्टी को गोलाई में काटकर हटा देना।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. स्थल कारक एवं समस्याग्रस्त मृदाओं हेतु प्रजाति मिलान (Site Factors & Problem Soil Matching)

  • लवणीय एवं क्षारीय/ऊसर मृदाएँ (Saline & Alkali/Sodic Soils — pH > 8.5): विलायती बबूल (Prosopis juliflora), देशी बबूल (Acacia nilotica), करंज (Pongamia pinnata), जामुन, अर्जुन (Terminalia arjuna), कैजुआरिना, जंगल जलेबी (Pithecellobium dulce) एवं पीलू (Salvadora persica)।
  • जलमग्न एवं दलदली मृदाएँ (Waterlogged / Marshy Soils): सफेदा (Eucalyptus tereticornis), अर्जुन, जामुन (Syzygium cumini), विलो (Salix tetrasperma), करंज, बबूल और कदंब।
  • अत्यधिक शुष्क रेतीली मृदाएँ (Arid Sandy Soils < 250 mm): खेजड़ी (Prosopis cineraria), रोहिड़ा (Tecomella undulata), इजरायली बबूल (Acacia tortilis), कुमटा (Acacia senegal), फोग।
  • अम्लीय मृदाएँ (Acidic Soils — pH < 5.5): चीड़ (Pinus), एल्डर (Alnus nepalensis), बांज (Quercus), सिल्वर ओक (Grevillea robusta), अकासिया ऑरिकुलिफॉर्मिस।

2. जड़, छत्र और तना विशेषताएँ (Root, Crown and Bole Characteristics)

1. जड़ विशेषताएँ (Root Characteristics)

• गहरी मूसला जड़ (Deep Tap Root): खेजड़ी, बबूल, नीम, अंजन वृक्ष (Hardwickia binata) — कृषि फसलों के साथ अंतर-फसल हेतु सर्वश्रेष्ठ।
• उथली फैली जड़ें (Shallow Spreading Roots): सफेदा, पॉपलर, Acacia tortilis, बाँस — मुख्य खेत के बीच के बजाय मेड़ (Boundary) या बंजर भूमि हेतु उपयुक्त।

2. छत्र विशेषताएँ (Crown Characteristics)

• बेलनाकार / शंक्वाकार संकीर्ण छत्र (Cylindrical / Conical Narrow Crown): पॉपलर, सफेदा, कैजुआरिना, सिल्वर ओक — कम क्षेत्र घेरते हैं और पास-पास लगाए जा सकते हैं।
• हल्का एवं विरल छत्र (Light & Feathery Crown): सुबबूल, खेजड़ी, सिरिस, सेमल — छनकर धूप नीचे फसलों तक पहुँचती है।
• घना एवं चौड़ा छत्र (Dense & Spreading Crown): आम, बरगद, महुआ, इमली — नीचे केवल हल्दी/अदरक जैसी छाया-प्रिय फसलें ही उग सकती हैं।

3. तना / बोल विशेषताएँ (Bole Characteristics)

• प्लाईवुड, आरा मशीन (Sawmill) और बिजली के खंभों (Poles) के लिए लंबा, सीधा, बेलनाकार, टेपर-रहित और गाँठ-मुक्त तना (Straight, cylindrical, knot-free clean bole) तथा स्वतः शाखा-त्याग (Self-pruning ability: जैसे सफेदा, पॉपलर, मेलिया दुबिया, सागवान) होना अनिवार्य है।

4. फिनोलॉजी एवं पोषण/जल मांग (Phenology & Water-Nutrient Needs)

• शीतकालीन पतझड़ (Winter Deciduous): पॉपलर और शहतूत नवंबर से फरवरी तक पत्तियाँ गिरा देते हैं, जिससे रबी की मुख्य फसल गेहूँ को 100% धूप मिलती है।
• विपरीत फिनोलॉजी (Reverse Phenology): Faidherbia albida (सफेद बबूल) मानसून (खरीफ) में पत्तियाँ गिराता है और गर्मियों में हरा रहता है।
• जल उपयोग दक्षता (WUE): शुष्क क्षेत्रों में कम जल मांग (Low transpiration per unit biomass) और नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाली प्रजातियाँ चुनी जाती हैं।

3. भूमि संक्रियाएँ एवं टेंडिंग संक्रियाएँ (Ground Operations & Tending Operations)

  • (A) भूमि संक्रियाएँ (Ground Operations): वृक्षारोपण से पूर्व और प्रारंभिक वर्षों में भूमि पर की जाने वाली क्रियाएँ—जैसे झाड़ी सफाई (Site clearance), जुताई व डिस्क हैरोइंग, गड्ढा खुदाई, समोच्च नालियाँ (Contour trenching), थावला बनाना और निराई-गुड़ाई (Soil working & hoeing)।
  • (B) प्रमुख टेंडिंग संक्रियाएँ (Tending Operations — Seedling से Maturity तक):
    1. निराई (Weeding — Seedling stage): नर्सरी या रोपण के प्रथम 2–3 वर्षों में जब पौधे छोटे (Seedling stage) होते हैं, तब अवांछित शाकीय खरपतवारों को हटाना।
    2. सफाई (Cleaning — Sapling stage): जब पौधे बड़े होकर ‘सैपलिंग अवस्था’ (Sapling stage) में आ जाते हैं, तब मुख्य आर्थिक वृक्ष प्रजाति के पौधों को दबाने वाली कम मूल्य की अवांछित प्रजातियों, झाड़ियों, कॉपिस प्ररोहों और लताओं को काटकर हटाना ‘क्लीनिंग’ कहलाता है।
    3. विरलन (Thinning — Pole to Tree stage): जब वृक्षों के छत्र आपस में मिल जाते हैं (Canopy closure at Pole stage), तब बचे हुए श्रेष्ठ वृक्षों को प्रकाश और पोषण देने के लिए समान प्रजाति के कमजोर, दबे हुए या रोगग्रस्त वृक्षों को निकालना। (इसके प्रकार हैं: Mechanical thinning, Ordinary/Low thinning, Crown thinning, Free thinning)।
    4. कृंतन (Pruning): गाँठ-मुक्त इमारती लकड़ी के लिए निचली शाखाओं को तने के पास से काटना।
    5. लता कटाई (Climber Cutting): सागवान और साल के युवा वृक्षों पर लिपटकर तने को टेढ़ा करने वाली काष्ठीय लताओं (जैसे Bauhinia vahlii – मालझन) को आधार से काटना।
    6. सुधार पातन एवं गर्डलिंग (Improvement Felling & Girdling): असमान आयु के वनों में मृत, खोखले या अवांछित वृक्षों को हटाना या गर्डलिंग (छाल की रिंग काटना) द्वारा सुखाना।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

प्रकाश आवश्यकता और उपयोगिता के आधार पर वृक्ष प्रजातियों का वर्गीकरण:

  • 1. प्रकाश आवश्यकता के अनुसार:
    • प्रकाश-प्रिय (Light Demanders / Heliophytes): सागवान (Tectona grandis), शीशम, पॉपलर, सफेदा, चीड़, सेमल।
    • छाया-सहनशील (Shade Bearers / Sciophytes): तून (Toona ciliata), जामुन, देवदार (प्रारंभिक अवस्था में), फिर (Abies pindrow), बांज (Quercus)।
  • 2. कटाई एवं उपयोगिता (Harvesting & Utility) के अनुसार:
    • लघु आवर्तन (Short rotation: 3–8 वर्ष): पॉपलर, सफेदा, मेलिया दुबिया, सुबबूल, कैजुआरिना (लुगदी, कागज, प्लाईवुड, माचिस, खंभे)।
    • मध्यम आवर्तन (Medium rotation: 15–30 वर्ष): शीशम, बबूल, सिरिस, गम्हार (फर्नीचर व निर्माण काष्ठ)।
    • दीर्घ आवर्तन (Long rotation: 40–80 वर्ष): सागवान, साल, देवदार, चंदन (उच्च मूल्य इमारती व सुगंधित काष्ठ)।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)

  • वीडिंग, क्लीनिंग और थिनिंग का विकास-अवस्था सिद्धांत (Stage-Specific Tending Principle):
    • Seedling Stage (नवजात पौध अवस्था) में अवांछित शाकीय पौधों को हटाना = Weeding (निराई)।
    • Sapling Stage (किशोर पौध अवस्था) में अवांछित झाड़ियों व निकृष्ट प्रजातियों को हटाना = Cleaning (सफाई)।
    • Pole / Tree Stage (खंभा/वृक्ष अवस्था) में छत्र स्पर्धा घटाने हेतु उसी प्रजाति के अतिरिक्त वृक्षों को हटाना = Thinning (विरलन)।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)

व्यावहारिक उदाहरण: पॉपलर + गेहूँ प्रणाली में फिनोलॉजी का अद्भुत तालमेल

उत्तर भारत में किसान नवंबर में पॉपलर की कतारों के बीच गेहूँ बोते हैं। ठीक नवंबर-दिसंबर में पॉपलर अपनी सारी पत्तियाँ गिरा देता है (शीतकालीन पर्णपात फिनोलॉजी), जिससे दिसंबर से मार्च तक गेहूँ की फसल को 100% सीधी धूप मिलती है। अप्रैल में जब गेहूँ कट जाता है, तब पॉपलर में नई पत्तियाँ आ जाती हैं और वह गर्मियों की तेज धूप का पूरा उपयोग कर तेजी से मोटाई बढ़ाता है।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 12.1: वानिकी की प्रमुख टेंडिंग संक्रियाओं (Weeding, Cleaning, Thinning, Pruning, Girdling) की तुलना
टेंडिंग क्रिया (Operation) वृक्ष की विकास अवस्था (Stage) किसे हटाया जाता है? (Target Removed) मुख्य उद्देश्य (Primary Purpose)
1. निराई (Weeding) Seedling stage (प्रथम 1–3 वर्ष) अवांछित शाकीय खरपतवार और घास। छोटे पौधों को नमी व पोषण स्पर्धा और दबने से बचाना।
2. सफाई (Cleaning) Sapling stage (3–8 वर्ष) कम मूल्य की प्रजातियाँ, झाड़ियाँ, लताएँ व अतिरिक्त कॉपिस प्ररोह। मुख्य आर्थिक प्रजाति के किशोर पौधों को ऊपर बढ़ने के लिए मुक्त करना।
3. विरलन (Thinning) Pole to Tree stage (छत्र मिलने के बाद) उसी मुख्य प्रजाति के कमजोर, दबे हुए या पास-पास लगे वृक्ष। श्रेष्ठ वृक्षों के व्यास (DBH) वृद्धि को बढ़ाना और फसलों को धूप देना।
4. कृंतन (Pruning) Sapling एवं Pole stage मुख्य तने की निचली जीवित या सूखी पार्श्व शाखाएँ। गाँठ-मुक्त सीधा मुख्य तना (Knot-free clean bole) प्राप्त करना।
5. वलयन (Girdling) परिपक्व अवांछित/रोगी वृक्ष तने के चारों ओर छाल व कैम्बियम की रिंग काटकर हटाना। आसपास के युवा पौधों को नुकसान पहुँचाए बिना बड़े अवांछित पेड़ को खड़े-खड़े सुखाना।

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)

महत्वपूर्ण कटाई उपयोगिता एवं промышленные मिलान (Key Industrial Utility Matching)
  • प्लाईवुड एवं विनियर (Plywood & Veneer): पॉपलर (Populus deltoides), मेलिया दुबिया (Melia dubia), सागवान, गम्हार
  • माचिस की तीलियाँ व डिब्बी (Matchwood & Splints): सेमल (Bombax ceiba), अर्डू (Ailanthus excelsa), पॉपलर, कदम
  • कागज एवं लुगदी (Paper & Pulp): सफेदा (Eucalyptus), बाँस (Dendrocalamus), सुबबूल (Leucaena), कैजुआरिना
  • खेल का सामान (Sports Goods): क्रिकेट बैट = विलो (Salix alba)  |  हॉकी स्टिक = शहतूत (Morus alba)
  • कत्था (Katha) एवं बीड़ी पत्ता: कत्था = खैर (Acacia catechu)  |  बीड़ी पत्ता = तेंदू (Diospyros melanoxylon)

11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 12 Mind Map: वृक्ष प्रजातियों का चयन, फिनोलॉजी, टेंडिंग एवं कटाई उपयोगिता
  • प्रजातियों का चयन एवं प्रबंधन (Choice of Species: Right Tree at Right Site for Right Utility)
    • स्थल कारक एवं समस्याग्रस्त मृदा मिलान (Site Factors)
      • लवणीय/क्षारीय: बबूल, विलायती बबूल, करंज, अर्जुन | जलमग्न: सफेदा, जामुन, विलो | शुष्क: खेजड़ी, रोहिड़ा
    • जड़, छत्र, तना एवं फिनोलॉजी (Morphology & Phenology)
      • जड़ व छत्र: गहरी मूसला जड़ + हल्का/बेलनाकार छत्र + सीधा गाँठ-मुक्त तना (Clean Bole)
      • फिनोलॉजी: शीतकालीन पतझड़ (पॉपलर + गेहूँ) एवं रिवर्स फिनोलॉजी (Faidherbia albida — वर्षा में पतझड़)
    • टेंडिंग संक्रियाएँ एवं कटाई उपयोगिता (Tending & Harvesting Utility)
      • टेंडिंग क्रम: Weeding (Seedling stage) ➔ Cleaning (Sapling stage) ➔ Thinning (Pole stage) + Pruning, Climber cutting, Girdling
      • औद्योगिक उपयोगिता: प्लाईवुड (पॉपलर/मेलिया), माचिस (सेमल/अर्डू), कागज (सफेदा/बाँस), बैट (विलो), हॉकी (शहतूत)

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)

प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): वन वृक्ष के जीवन चक्र में क्रमिक ‘टेंडिंग संक्रियाएँ’ (Sequential Tending Operations)
1. Seedling अवस्था (1–3 वर्ष)
(Weeding: शाकीय खरपतवार निराई)
➔ 2. Sapling अवस्था (3–8 वर्ष)
(Cleaning: अवांछित झाड़ी व लता कटाई)
➔ 3. Pole अवस्था (छत्र मिलना)
(Thinning & Pruning: विरलन व कृंतन)
➔ 4. Tree अवस्था (व्यास वृद्धि)
(Improvement Felling & Girdling)
➔ 5. परिपक्वता व कटाई (Harvesting)
(इमारती काष्ठ, प्लाईवुड, लुगदी उपयोग)

13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न: ‘रिवर्स फिनोलॉजी’ (Reverse Phenology — वर्षा ऋतु/खरीफ में पत्तियाँ गिराना और गर्मियों में हरा रहना) किस वृक्ष में पाई जाती है? उत्तर: Faidherbia albida (पूर्व नाम Acacia albida / सफेद बबूल)।
  • तीनों टेंडिंग क्रियाओं की अवस्था याद रखें: Weeding = Seedling stage में; Cleaning = Sapling stage में; और Thinning = Pole/Tree stage (Canopy closure के बाद) में की जाती है।
  • अवांछित खड़े वृक्ष को सुखाने के लिए उसके तने के चारों ओर छाल और कैम्बियम की रिंग काटकर हटाने को ‘गर्डलिंग’ (Girdling) कहते हैं।
  • क्रिकेट का बल्ला ‘विलो’ (Salix alba) की लकड़ी से, हॉकी स्टिक ‘शहतूत’ (Morus alba) की लकड़ी से और माचिस की तीलियाँ ‘सेमल’ (Bombax ceiba) व ‘अर्डू’ (Ailanthus excelsa) की लकड़ी से बनती हैं।
  • लवणीय-क्षारीय (ऊसर) और जलमग्न दोनों भूमियों में सफल रहने वाले दो प्रमुख वृक्ष ‘अर्जुन’ (Terminalia arjuna) और ‘करंज’ (Pongamia pinnata) हैं।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)

  • Site Factors: Climatic + Edaphic + Topographic + Biotic।
  • Reverse Phenology: Faidherbia albida (खरीफ में पर्णपात, गर्मियों में हरा)।
  • Tending Operations: Weeding (Seedling) → Cleaning (Sapling) → Thinning (Pole) + Pruning + Climber cutting + Girdling।
  • Utility: क्रिकेट बैट = Salix alba | हॉकी = Morus alba | माचिस = Bombax ceiba / Ailanthus excelsa | प्लाईवुड = Populus deltoides / Melia dubia।

15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)

1. किस बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजाति में ‘विपरीत फिनोलॉजी’ (Reverse Phenology — वर्षा ऋतु में पत्तियाँ गिराना और शुष्क ग्रीष्म ऋतु में हरा रहना) पाई जाती है जो खरीफ फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी है?
(A) सागवान (Tectona grandis)
(B) फेडरबिया अल्बिडा / सफेद बबूल (Faidherbia albida / Acacia albida)
(C) चीड़ (Pinus roxburghii)
(D) आम (Mangifera indica)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) फेडरबिया अल्बिडा / सफेद बबूल (Faidherbia albida / Acacia albida)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): Faidherbia albida मानसून (खरीफ) की शुरुआत में पत्तियाँ गिरा देता है जिससे फसलों को पूरी धूप और हरी खाद मिलती है।
2. वन संवर्धन की टेंडिंग संक्रियाओं में जब पौधे ‘सैपलिंग अवस्था’ (Sapling stage) में होते हैं, तब मुख्य प्रजाति को दबाने वाली अवांछित झाड़ियों, निकृष्ट प्रजातियों और लताओं को काटकर हटाने की क्रिया क्या कहलाती है?
(A) निराई (Weeding)
(B) सफाई (Cleaning)
(C) क्लियर फेलिंग
(D) हीलिंग-इन
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) सफाई (Cleaning)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): Seedling अवस्था में शाकीय खरपतवार हटाना Weeding है, जबकि Sapling अवस्था में अवांछित झाड़ियों व निकृष्ट प्रजातियों को हटाना Cleaning कहलाता है।
3. किसी अवांछित या रोगग्रस्त खड़े वृक्ष को बिना गिराए सुखाने/मारने के लिए उसके तने के चारों ओर छाल और कैम्बियम की एक चौड़ी पट्टी (रिंग) काटकर हटाने की क्रिया क्या कहलाती है?
(A) गर्डलिंग / वलयन (Girdling)
(B) प्रिकिंग (Pricking)
(C) पडलिंग (Puddling)
(D) मल्चिंग (Mulching)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) गर्डलिंग / वलयन (Girdling)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): गर्डलिंग (Ring barking) करने से पत्तियों से जड़ों तक भोजन (फ्लोएम) व जल का प्रवाह रुक जाता है और पेड़ खड़े-खड़े सूख जाता है।
4. वृक्ष के आधार (जमीन) से लेकर मुख्य छत्र की पहली बड़ी शाखा तक के सीधे, बेलनाकार और गाँठ-मुक्त मुख्य तने को वानिकी में क्या कहा जाता है?
(A) क्लीन बोल (Clean bole)
(B) राइजोम (Rhizome)
(C) स्टोलन (Stolon)
(D) कॉलर (Collar)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) क्लीन बोल (Clean bole)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): शाखा-रहित सीधे मुख्य तने को ‘क्लीन बोल’ (Clean bole) कहा जाता है जिससे उच्च मूल्य की इमारती लकड़ी मिलती है।
5. कटाई उपयोगिता (Harvesting utility) की दृष्टि से ‘क्रिकेट के बल्ले’ (Cricket bats) और ‘हॉकी स्टिक’ (Hockey sticks) बनाने के लिए क्रमशः किन दो वृक्षों की लकड़ी सर्वोत्तम मानी जाती है?
(A) नीम और बबूल
(B) विलो (Salix alba) और शहतूत (Morus alba)
(C) खैर और तेंदू
(D) ताड़ और नारियल
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) विलो (Salix alba) और शहतूत (Morus alba)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): कश्मीर विलो (Salix alba) से क्रिकेट बैट और शहतूत (Morus alba) की लचीली व मजबूत लकड़ी से हॉकी स्टिक बनाई जाती है।
6. जब वृक्षों के छत्र आपस में मिल जाते हैं (Pole stage), तब बचे हुए श्रेष्ठ वृक्षों की व्यास वृद्धि बढ़ाने के लिए उसी प्रजाति के कमजोर व दबे हुए वृक्षों को निकालने की टेंडिंग क्रिया क्या कहलाती है?
(A) विरलन (Thinning)
(B) प्रिकिंग (Pricking)
(C) स्केरिफिकेशन
(D) पडलिंग
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) विरलन (Thinning)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): पोल अवस्था में छत्र स्पर्धा कम करने और व्यास वृद्धि बढ़ाने के लिए किए जाने वाले निष्कासन को ‘थिनिंग’ (Thinning) कहते हैं।
7. माचिस की तीलियाँ और डिब्बियाँ (Matchwood & splints) बनाने के लिए भारत में किन दो वृक्षों की नरम व सफेद लकड़ी सर्वाधिक प्रयुक्त होती है?
(A) सेमल (Bombax ceiba) और अर्डू (Ailanthus excelsa)
(B) खैर और शीशम
(C) बबूल और खेजड़ी
(D) सागवान और साल
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) सेमल (Bombax ceiba) और अर्डू (Ailanthus excelsa)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): सेमल (Bombax ceiba), अर्डू (Ailanthus excelsa) और पॉपलर माचिस उद्योग के प्रमुख वृक्ष हैं।
8. लवणीय और क्षारीय (ऊसर — Saline-alkali) मृदाओं के सुधार और वनीकरण के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा वृक्ष समूह सर्वाधिक उपयुक्त है?
(A) Prosopis juliflora, Acacia nilotica, Pongamia pinnata और Terminalia arjuna
(B) केवल सेब और नाशपाती
(C) देवदार और स्प्रूस
(D) चाय और इलायची
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) Prosopis juliflora, Acacia nilotica, Pongamia pinnata और Terminalia arjuna
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): विलायती बबूल, देशी बबूल, करंज और अर्जुन उच्च pH और लवणता को सहन करने में सक्षम हैं।
9. पॉपलर (Populus deltoides) और विलो जैसे शीतकालीन पर्णपाती वृक्षों की फिनोलॉजी (Phenology) किस ऋतु की कृषि फसलों के लिए सर्वाधिक अनुकूल होती है?
(A) रबी ऋतु की फसलों (जैसे गेहूँ, सरसों, बरसीम) के लिए
(B) केवल जलीय फसलों के लिए
(C) किसी भी फसल के लिए नहीं
(D) केवल रेगिस्तानी कैक्टस के लिए
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) रबी ऋतु की फसलों (जैसे गेहूँ, सरसों, बरसीम) के लिए
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): शीतकाल (नवंबर–फरवरी) में पॉपलर की पत्तियाँ झड़ जाती हैं जिससे नीचे उगने वाली रबी फसलों (गेहूँ) को पूरी धूप मिलती है।
10. स्थल कारकों (Site factors) में मृदा की गहराई, गठन (Texture), pH, जल-निकासी और कार्बनिक पदार्थ को किस वर्ग में रखा जाता है?
(A) जलवायवीय कारक (Climatic factors)
(B) मृदीय कारक (Edaphic factors)
(C) स्थलाकृतिक कारक (Topographic factors)
(D) जैविक कारक (Biotic factors)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) मृदीय कारक (Edaphic factors)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): मृदा के भौतिक व रासायनिक गुणों से संबंधित सभी कारक ‘मृदीय कारक’ (Edaphic factors) कहलाते हैं।

16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर्स (5 Important Exam One-Liners)

  1. फेडरबिया अल्बिडा (Faidherbia albida) में ‘रिवर्स फिनोलॉजी’ पाई जाती है—यह वर्षा ऋतु में पत्तियाँ गिराता है और गर्मियों में हरा रहता है।
  2. Seedling अवस्था में शाकीय खरपतवार हटाना ‘Weeding’, Sapling अवस्था में अवांछित झाड़ियाँ हटाना ‘Cleaning’ और Pole अवस्था में विरलन ‘Thinning’ कहलाता है।
  3. अवांछित खड़े वृक्ष को सुखाने के लिए तने के चारों ओर छाल व कैम्बियम की रिंग काटना ‘गर्डलिंग’ (Girdling) कहलाता है।
  4. क्रिकेट बैट विलो (Salix alba) से, हॉकी स्टिक शहतूत (Morus alba) से और माचिस सेमल व अर्डू की लकड़ी से बनती है।
  5. शाखा और गाँठ से मुक्त सीधे बेलनाकार मुख्य तने को वानिकी में ‘क्लीन बोल’ (Clean bole) कहा जाता है।

(B) 5 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions)

1. फिनोलॉजी (Phenology) किसे कहते हैं?
उत्तर: ऋतुओं और जलवायु के अनुसार पौधों में होने वाली आवधिक जैविक घटनाओं (जैसे नई पत्तियाँ आना, पतझड़, पुष्पन और फलन) के समय के अध्ययन को फिनोलॉजी कहते हैं।
2. ‘टेंडिंग’ (Tending) को एक वाक्य में परिभाषित कीजिए।
उत्तर: पौध की स्थापना से लेकर परिपक्व वृक्ष की कटाई तक वन फसल के स्वास्थ्य और गुणवत्ता सुधार हेतु की जाने वाली सभी सिल्वीकल्चरल क्रियाएँ (Weeding, Cleaning, Thinning, Pruning आदि) टेंडिंग कहलाती हैं।
3. किन्हीं तीन ‘प्रकाश-प्रिय’ (Light demanders) वृक्ष प्रजातियों के नाम लिखिए।
उत्तर: सागवान (Tectona grandis), शीशम (Dalbergia sissoo) और पॉपलर (Populus deltoides)।
4. सागवान और साल के वनों में युवा वृक्षों को विकृत करने वाली सबसे प्रमुख काष्ठीय लता (Climber) कौन-सी है?
उत्तर: मालझन / माहुल (Bauhinia vahlii)।
5. कागज और लुगदी (Paper & Pulp) उद्योग के लिए उगाई जाने वाली तीन प्रमुख अल्प-आवर्तन वृक्ष प्रजातियाँ लिखिए।
उत्तर: सफेदा (Eucalyptus), सुबबूल (Leucaena leucocephala) और कैजुआरिना (Casuarina equisetifolia) [तथा बाँस]।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions)

1. वन संवर्धन में निराई (Weeding), सफाई (Cleaning) और विरलन (Thinning) में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: (1) निराई (Weeding): पौध की सबसे प्रारंभिक ‘सीडलिंग अवस्था’ (Seedling stage) में अवांछित शाकीय खरपतवारों को हटाने की क्रिया है। (2) सफाई (Cleaning): ‘सैपलिंग अवस्था’ (Sapling stage) में मुख्य आर्थिक प्रजाति के किशोर पौधों को दबाने वाली अवांछित झाड़ियों, निकृष्ट प्रजातियों, कॉपिस प्ररोहों और लताओं को काटने की क्रिया है। (3) विरलन (Thinning): ‘पोल अवस्था’ (Pole stage) में छत्र मिलने के बाद श्रेष्ठ वृक्षों की मोटाई बढ़ाने के लिए उसी मुख्य प्रजाति के कमजोर व दबे हुए वृक्षों को हटाने की क्रिया है।
2. कृषि वानिकी में वृक्ष प्रजाति के चयन (Choice of species) में ‘फिनोलॉजी’ (Phenology) और ‘रिवर्स फिनोलॉजी’ का क्या महत्व है?
उत्तर: फिनोलॉजी तय करती है कि वृक्ष किस महीने में छाया करेगा और कब पत्तियाँ गिराएगा। यदि वृक्ष फसल की मुख्य वृद्धि अवस्था में पत्तियाँ गिरा दे, तो प्रकाश प्रतिस्पर्धा शून्य हो जाती है। उदाहरणार्थ, पॉपलर सर्दियों में पत्तियाँ गिराता है जो रबी गेहूँ के लिए आदर्श है। वहीं ‘Faidherbia albida’ में ‘रिवर्स फिनोलॉजी’ होती है—यह वर्षा ऋतु (खरीफ) में पत्तियाँ गिराता है जिससे बाजरा/ज्वार/मूंगफली को पूरी धूप और हरी खाद मिलती है।
3. कृषि वानिकी के लिए वृक्ष की जड़, छत्र (Crown) और मुख्य तने (Bole) की विशेषताएँ कैसी होनी चाहिए?
उत्तर: (1) जड़: उथली फैलने वाली जड़ों के बजाय गहरी मूसला जड़ (Deep tap root) होनी चाहिए ताकि फसलों से जल व पोषण स्पर्धा न हो; (2) छत्र: घने व चौड़े छत्र के बजाय हल्का, विरल या बेलनाकार/शंक्वाकार छत्र होना चाहिए ताकि फसलों तक धूप पहुँच सके; और (3) तना (Bole): लंबा, सीधा, बेलनाकार, गाँठ-मुक्त और स्वतः शाखा-त्याग (Self-pruning) करने वाला होना चाहिए।
4. स्थल कारक (Site factors) क्या हैं? लवणीय-क्षारीय, जलमग्न और शुष्क रेतीली भूमियों के लिए दो-दो उपयुक्त वृक्ष प्रजातियों के नाम लिखिए।
उत्तर: किसी स्थान के जलवायवीय, मृदीय, स्थलाकृतिक और जैविक कारकों के समूह को स्थल कारक कहते हैं। (1) लवणीय-क्षारीय मृदा हेतु: देशी बबूल (Acacia nilotica) और विलायती बबूल (Prosopis juliflora) / करंज; (2) जलमग्न मृदा हेतु: सफेदा (Eucalyptus) और अर्जुन (Terminalia arjuna); (3) शुष्क रेतीली मृदा हेतु: खेजड़ी (Prosopis cineraria) और रोहिड़ा (Tecomella undulata)।
5. गर्डलिंग (Girdling) और लता कटाई (Climber cutting) क्यों और कैसे की जाती हैं?
उत्तर: लता कटाई: काष्ठीय लताएँ (जैसे Bauhinia vahlii) युवा वृक्षों के तने पर कसकर लिपट जाती हैं जिससे तना टेढ़ा हो जाता है और वृद्धि रुक जाती है; इन्हें जमीन के पास और छाती की ऊँचाई पर दो जगह से काटकर जड़ पर खरपतवारनाशी लगाया जाता है। गर्डलिंग: जंगल या खेत में किसी बड़े अवांछित या रोगग्रस्त पेड़ को काटकर गिराने से आसपास के छोटे पौधे टूट सकते हैं, इसलिए तने के चारों ओर छाल व कैम्बियम की रिंग काटकर उसे खड़े-खड़े सुखा दिया जाता है।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3 Long Answer Questions)

1. कृषि वानिकी एवं वानिकी में ‘वृक्ष प्रजातियों के चयन’ (Choice of Species) को निर्धारित करने वाले सभी कारकों—स्थल कारक, जड़/छत्र/तना विशेषताएँ, फिनोलॉजी, जल व पोषण मांग तथा कटाई उपयोगिता—का उदाहरण सहित सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: इस प्रश्न में चारों स्थल कारकों (समस्याग्रस्त मृदा मिलान सहित), जड़-छत्र-बोल आइडियोटाइप, पॉपलर व Faidherbia albida की फिनोलॉजी, जल उपयोग दक्षता और प्लाईवुड/माचिस/कागज/खेल सामग्री की औद्योगिक उपयोगिता का विस्तृत वर्णन करें।
2. टेंडिंग संक्रियाओं (Tending Operations) से आप क्या समझते हैं? पौध अवस्था से परिपक्वता तक की जाने वाली सभी टेंडिंग क्रियाओं (Weeding, Cleaning, Thinning, Pruning, Climber cutting, Improvement felling एवं Girdling) की तुलनात्मक एवं विस्तृत व्याख्या कीजिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: टेंडिंग की परिभाषा देते हुए सारणी 12.1 और प्रवाह चित्र के अनुसार प्रत्येक टेंडिंग क्रिया की अवस्था, विधि, प्रकार (Thinning के प्रकार) और सिल्वीकल्चरल लाभों का विस्तार से वर्णन करें।
3. भारत के विभिन्न काष्ठ-आधारित उद्योगों (प्लाईवुड, कागज व लुगदी, माचिस, फर्नीचर, खेल सामग्री, कत्था, बीड़ी व गोंद) की आवश्यकताओं के अनुसार वृक्ष प्रजातियों के चयन, आवर्तन काल और कटाई उपयोगिता का विवरण दीजिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: लघु, मध्यम और दीर्घ आवर्तन काल के वृक्षों को उनके विशिष्ट औद्योगिक उपयोगों और वानस्पतिक नामों के साथ सारणीबद्ध रूप में प्रस्तुत करें।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGF 311 notes।

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