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AGF 311 Lecture 06: कृषि वानिकी प्रणाली के सामाजिक-आर्थिक पहलू | Hindi Notes

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AGF 311 · Introductory Agroforestry
विषय सूची · Quick Navigation02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)
Lecture 06 Source Page Reference in Supplied Pack: 133 (AGF 311 Theory Lecture 06)

Lecture 06: कृषि वानिकी प्रणाली के सामाजिक-आर्थिक पहलू

Socio- economic aspects of agroforestry system

02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान (Lecture) के अध्ययन के पश्चात् विद्यार्थी निम्नलिखित में सक्षम होंगे:

  1. कृषि वानिकी प्रणाली के सामाजिक पहलुओं—ग्रामीण रोजगार सृजन (200–500 मानव-दिवस/वर्ष), महिलाओं के कठिन श्रम (Drudgery) में कमी, पोषण व खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण पलायन रोकने में भूमिका—को समझना।
  2. आर्थिक पहलुओं—किसानों की आय दोगुनी करने, फसल विफलता के विरुद्ध बीमा (Living saving account / Tree insurance), नकदी प्रवाह (Cash flow) और काष्ठ-आधारित उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति—का विश्लेषण करना।
  3. राष्ट्रीय कृषि आयोग (NCA, 1976) द्वारा प्रतिपादित ‘सामाजिक वानिकी’ (Social Forestry: ‘Forestry of the people, by the people and for the people’) और इसके 4 घटकों (Farm, Extension, Community & Recreational Forestry) को जानना।
  4. कृषि वानिकी परियोजनाओं के आर्थिक मूल्यांकन (Economic Evaluation) के बट्टागत नकदी प्रवाह मापदंडों—शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV > 0), लाभ-लागत अनुपात (B:C Ratio > 1.0), आंतरिक प्रतिफल दर (IRR) और पेबैक अवधि—की गणना व व्याख्या करना।
  5. कृषि वानिकी को अपनाने में आने वाली सामाजिक-आर्थिक बाधाओं (कटाई/परिवहन नियम, लंबी प्रतीक्षा अवधि, बाजार अभाव) और उनके नीतिगत समाधानों को समझना।

03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): कोई भी कृषि वानिकी तकनीक भले ही वैज्ञानिक और पारिस्थितिक रूप से कितनी भी श्रेष्ठ क्यों न हो, वह तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक वह स्थानीय किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभप्रद (Economically viable) और सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य (Socially acceptable) न हो। भारत में जहाँ 85% से अधिक किसान छोटे और सीमांत (Small and marginal farmers, < 2 ha जोत) हैं, वहाँ कृषि वानिकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ और किसानों के लिए एक ‘जीवित बचत बैंक खाते’ (Living Saving Account / Fixed Deposit) के रूप में कार्य करती है।

04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

सामाजिक वानिकी (Social Forestry — Westoby, 1968; NCA, 1976)
‘सामाजिक वानिकी’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1968 में राष्ट्रमंडल वानिकी कांग्रेस (नई दिल्ली) में जे.सी. वेस्टोबी (J.C. Westoby) ने किया और भारत में 1976 में राष्ट्रीय कृषि आयोग (National Commission on Agriculture – NCA) ने इसे लोकप्रिय बनाया। यह ग्रामीण व शहरी समुदायों की जलाऊ लकड़ी, चारा, छोटी इमारती लकड़ी और मनोरंजन की जरूरतों को पूरा करने तथा पारंपरिक वनों पर दबाव कम करने के लिए बंजर/सामुदायिक/निजी भूमि पर किया जाने वाला ‘लोगों का, लोगों के द्वारा और लोगों के लिए वानिकी’ (Forestry of the people, by the people and for the people) कार्यक्रम है।
फार्म वानिकी (Farm Forestry)
सामाजिक वानिकी का वह घटक जिसमें व्यक्तिगत किसान अपनी निजी कृषि भूमि पर या खेत की मेड़ों (Bunds) पर घरेलू उपयोग अथवा व्यावसायिक बिक्री के लिए वृक्ष लगाते हैं।
शुद्ध वर्तमान मूल्य (Net Present Value – NPV)
कृषि वानिकी परियोजना के पूरे जीवनकाल में प्राप्त होने वाले बट्टागत कुल लाभों (Discounted gross benefits) और बट्टागत कुल लागतों (Discounted gross costs) के बीच का अंतर। आर्थिक व्यवहार्यता के लिए NPV > 0 (धनात्मक) होना चाहिए।
लाभ-लागत अनुपात (Benefit-Cost Ratio – B:C Ratio)
किसी निश्चित बट्टा दर (Discount rate) पर भविष्य के सभी लाभों के वर्तमान मूल्य और सभी लागतों के वर्तमान मूल्य का अनुपात। लाभकारी परियोजना के लिए B:C Ratio > 1.0 होना अनिवार्य है।
आंतरिक प्रतिफल दर (Internal Rate of Return – IRR)
वह बट्टा दर (Discount rate) जिस पर किसी कृषि वानिकी प्रणाली का शुद्ध वर्तमान मूल्य शून्य (NPV = 0) हो जाता है अर्थात् बट्टागत लाभ बट्टागत लागत के बराबर हो जाते हैं। परियोजना तभी स्वीकार्य होती है जब IRR बैंक ब्याज दर (Opportunity cost of capital) से अधिक हो।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. कृषि वानिकी प्रणाली के प्रमुख सामाजिक पहलू एवं लाभ (Social Aspects & Benefits)

1. ग्रामीण रोजगार सृजन एवं पलायन में कमी (Employment Generation)

• कृषि मौसमी रोजगार देती है, जबकि कृषि वानिकी (बीज संग्रहण, नर्सरी तैयार करना, वृक्षारोपण, छँगाई, कटाई, आरा मशीन, प्लाईवुड व लुगदी उद्योग) वर्षभर ऑफ-सीजन रोजगार देती है।
• वानिकी व वृक्षारोपण गतिविधियों से प्रति हेक्टेयर लगभग 200 से 500 मानव-दिवस/वर्ष (Man-days/year) रोजगार सृजित होता है (पूरे देश में कृषि वानिकी से प्रतिवर्ष ~450 मिलियन मानव-दिवस रोजगार की क्षमता है), जिससे ग्रामीण युवाओं का शहरों की ओर पलायन (Migration) रुकता है।

2. महिलाओं एवं बच्चों के श्रम में कमी (Reduction in Women’s Drudgery)

• ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं को जंगल से जलाऊ लकड़ी (Fuelwood) और चारा (Fodder) लाने के लिए प्रतिदिन कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
• खेत की मेड़ पर ही MPTS उगाने से घर के पास ईंधन व चारा मिल जाता है, जिससे महिलाओं का समय व श्रम बचता है और वनों से अवैध कटाई (Pilferage) रुकती है।

3. खाद्य, पोषण एवं स्वास्थ्य सुरक्षा (Nutritional & Health Security)

• एग्री-हॉर्टीकल्चर और होमगार्डन प्रणालियों में उगाए गए फलदार व सब्जी वृक्ष (आँवला, अमरूद, बेर, आम, कटहल, सहजन/Moringa) ग्रामीण परिवारों को विटामिन, खनिज और प्रोटीन उपलब्ध कराकर कुपोषण दूर करते हैं तथा नीम, हरड़, बहेड़ा, बेल व अर्जुन से पारंपरिक औषधियाँ मिलती हैं।

4. सामाजिक प्रतिष्ठा एवं आपातकालीन वित्तीय सुरक्षा (Social Cash Needs)

• ग्रामीण समाज में विवाह, शिक्षा, चिकित्सा या सामाजिक अनुष्ठानों (Ritual expenses) के समय किसान अपने खेत में खड़े 5–8 वर्ष पुराने पॉपलर, सागवान, शीशम या रोहिड़ा के कुछ वृक्ष बेचकर बिना साहूकार के कर्ज में फँसे एकमुश्त बड़ी नकद राशि प्राप्त कर लेते हैं।

2. कृषि वानिकी के आर्थिक पहलू एवं औद्योगिक अनुबंध (Economic & Industrial Aspects)

  • 1. उच्च एवं विविध आय (Higher & Diversified Income): शुद्ध फसल की तुलना में पॉपलर + गेहूँ/गन्ना या आँवला/किन्नू + दलहन प्रणाली से किसान को 1.5 से 3 गुना अधिक शुद्ध आय तथा 1.8 से 3.2 तक का उच्च B:C अनुपात प्राप्त होता है।
  • 2. श्रम एवं इनपुट उपयोग दक्षता (Input & Labour Efficiency): खेत में फसलों को दिए जाने वाले सिंचाई जल और उर्वरकों का उपयोग साथ में लगे वृक्ष भी कर लेते हैं, तथा वृक्षों की पत्तियों से हरी खाद मिलने से उर्वरक लागत घटती है।
  • 3. उद्योग-किसान अनुबंध खेती (Captive Plantation & Industrial Linkages): WIMCO (माचिस उद्योग — पॉपलर), ITC भद्राचलम व JK Paper (कागज उद्योग — क्लोनल सफेदा व सुबबूल) और प्लाईवुड कंपनियों ने किसानों को क्लोनल पौधे, तकनीकी मार्गदर्शन और न्यूनतम समर्थन मूल्य (Buy-back guarantee) देकर कृषि वानिकी को एक संगठित व्यवसाय बना दिया है।
  • 4. कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त आय (Carbon Trading & Ecosystem Services Payment): पेरिस जलवायु समझौते और स्वैच्छिक कार्बन बाजारों के तहत किसान अपने खेतों में उगाए गए वृक्षों द्वारा अवशोषित कार्बन (1 टन CO2 = 1 Carbon Credit) को बेचकर अतिरिक्त डॉलर/रुपये कमा सकते हैं।

3. सामाजिक वानिकी (Social Forestry — NCA, 1976) एवं इसके 4 घटक

राष्ट्रीय कृषि आयोग (NCA, 1976) ने सामाजिक वानिकी के कार्यक्षेत्र में निम्नलिखित 4 मुख्य घटक शामिल किए हैं:

  1. फार्म वानिकी (Farm Forestry): किसानों द्वारा अपने स्वयं के खेतों और मेड़ों पर वाणिज्यिक व घरेलू उद्देश्य से वृक्षारोपण।
  2. विस्तार वानिकी (Extension Forestry): पारंपरिक वनों की सीमा से बाहर—सड़कों, नहरों और रेलवे लाइनों के किनारे पट्टी वृक्षारोपण (Strip plantation) तथा बंजर व पंचायत भूमियों पर मिश्रित वानिकी।
  3. सामुदायिक / ग्रामीण वानिकी (Community / Rural Forestry): ग्राम पंचायत भूमि, गोचर और सामुदायिक बंजर भूमि पर पूरे गाँव की सहमति व भागीदारी से चारा, ईंधन और फल वृक्ष लगाना।
  4. मनोरंजन एवं शहरी वानिकी (Recreational & Urban Forestry): शहरों के पास हरित पट्टियाँ (Green belts), पार्क और सौंदर्यपरक वृक्षारोपण।

4. कृषि वानिकी को अपनाने में प्रमुख सामाजिक-आर्थिक बाधाएँ (Socio-economic Constraints)

  • 1. कटाई एवं परिवहन के जटिल वन कानून (Felling and Transit Regulations): कई राज्यों में निजी खेत से इमारती वृक्ष काटने और मंडी ले जाने के लिए ‘ट्रांजिट परमिट’ (TP) लेना पड़ता है (हालाँकि अब बाँस, पॉपलर, सफेदा, सुबबूल व मेलिया दुबिया को अधिकांश राज्यों में TP से मुक्त कर दिया गया है)।
  • 2. लंबी प्रतीक्षा अवधि (Long Gestation Period): वृक्षों से आय मिलने में 5 से 15 वर्ष लगते हैं, जिससे छोटे किसानों को शुरुआती वर्षों में नकदी की समस्या होती है।
  • 3. संगठित काष्ठ मंडी व मूल्य सूचना का अभाव (Lack of Wood Mandis & MSP): यमुनानगर (हरियाणा) जैसी कुछ काष्ठ मंडियों को छोड़कर देश के अधिकांश भागों में लकड़ी के लिए पारदर्शी मंडी और ग्रेडिंग व्यवस्था का अभाव है।
  • 4. प्रमाणित गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री (QPM) की कमी: किसानों को नर्सरी से प्रमाणित क्लोनल पौधे आसानी से उपलब्ध न होना।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

सामाजिक-आर्थिक स्तर पर कृषि वानिकी प्रणालियों का वर्गीकरण (Nair, 1985):

  • 1. वाणिज्यिक प्रणालियाँ (Commercial AF Systems): जहाँ उत्पादन का एकमात्र उद्देश्य बाजार में बिक्री होता है और श्रम वेतनभोगी होता है (जैसे—पॉपलर/सफेदा अनुबंध खेती, चाय/कॉफी/कोको बागान)।
  • 2. मध्यवर्ती प्रणालियाँ (Intermediate AF Systems): जहाँ नकदी और घरेलू उपभोग दोनों का संतुलन होता है (जैसे—मध्यम किसानों के खेतों में एग्री-हॉर्टीकल्चर या काष्ठ वृक्ष)।
  • 3. जीवन-निर्वाह प्रणालियाँ (Subsistence AF Systems): जहाँ उत्पादन का मुख्य उद्देश्य किसान परिवार की अपनी 5F जरूरतें पूरी करना होता है (जैसे—पारंपरिक होमगार्डन व शिफ्टिंग खेती)।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)

  • समय मूल्य एवं बट्टाकरण का आर्थिक सिद्धांत (Principle of Time Value of Money & Discounting): चूँकि कृषि फसलें प्रतिवर्ष आय देती हैं जबकि वृक्ष 6–15 वर्ष बाद आय देते हैं, इसलिए भविष्य में मिलने वाले लाभ और लागत की सीधे तुलना नहीं की जा सकती। अतः एक निश्चित बट्टा दर (r, जैसे 10% या 12%) का उपयोग करके भविष्य के सभी नकदी प्रवाहों को वर्तमान मूल्य (Present Value) में बदला जाता है।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)

व्यावहारिक एवं आर्थिक मूल्यांकन उदाहरण: पॉपलर + गेहूँ बनाम एकल गेहूँ-धान चक्र

हरियाणा (यमुनानगर) और पंजाब में किए गए आर्थिक अध्ययनों के अनुसार 6 वर्ष के चक्र में:

  • एकल धान-गेहूँ फसल चक्र: लाभ-लागत अनुपात (B:C Ratio) ≈1.45 से 1.60।
  • पॉपलर (5×4 m, 500 वृक्ष/ha) + गेहूँ/हल्दी कृषि वानिकी प्रणाली: 12% बट्टा दर पर उच्च धनात्मक NPV, B:C Ratio ≈2.50 से 3.10 तथा IRR >35% प्राप्त होता है।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 6.1: कृषि वानिकी परियोजनाओं के आर्थिक मूल्यांकन के प्रमुख सूचकांक (Economic Evaluation Criteria)
आर्थिक सूचकांक (Criterion) गणितीय सूत्र (Formula) स्वीकार्यता नियम (Decision Rule) आर्थिक व्याख्या (Interpretation)
1. शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV) NPV=∑t=1nBt−Ct(1+r)t NPV>0 (धनात्मक) परियोजना द्वारा पूँजी लागत के ऊपर अर्जित कुल शुद्ध वर्तमान धन।
2. लाभ-लागत अनुपात (B:C Ratio) BCR=∑t=1nBt/(1+r)t∑t=1nCt/(1+r)t B:C Ratio>1.0 निवेश किए गए प्रत्येक ₹1 के बदले प्राप्त होने वाला वर्तमान रिटर्न।
3. आंतरिक प्रतिफल दर (IRR) वह दर r जिस पर NPV=0 हो जाए IRR>बैंक ब्याज दर (r) परियोजना में लगी पूँजी की वास्तविक अर्जन क्षमता (% में)।
4. पेबैक अवधि (Payback Period) कुल प्रारंभिक लागत वसूल होने का समय जितनी कम हो उतना श्रेष्ठ अंतःफसलों के कारण कृषि वानिकी में पेबैक अवधि शुद्ध वानिकी से बहुत कम होती है।

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)

महत्वपूर्ण आर्थिक सूत्र एवं रोजगार आँकड़े (Key Socio-Economic Formulas & Figures)
  • शुद्ध वर्तमान मूल्य (Net Present Value): NPV=∑t=1nBt−Ct(1+r)t   (जहाँ Bt = वर्ष t में लाभ, Ct = वर्ष t में लागत, r = बट्टा दर, n = आवर्तन वर्ष)
  • लाभ-लागत अनुपात (B:C Ratio): B:C Ratio=Present Worth of Gross BenefitsPresent Worth of Gross Costs>1.0
  • वृक्षारोपण एवं नर्सरी से वार्षिक रोजगार सृजन: 200 से 500 मानव-दिवस/वर्ष (Man-days/year)
  • सामाजिक वानिकी (Social Forestry): शब्द प्रतिपादन = जे.सी. वेस्टोबी (1968)  |  भारत में आधिकारिक प्रारंभ = राष्ट्रीय कृषि आयोग (NCA, 1976)

11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 06 Mind Map: कृषि वानिकी के सामाजिक-आर्थिक पहलू, सामाजिक वानिकी एवं आर्थिक मूल्यांकन
  • कृषि वानिकी के सामाजिक-आर्थिक पहलू (Socio-Economic Aspects of Agroforestry)
    • सामाजिक लाभ (Social Benefits)
      • ग्रामीण रोजगार: नर्सरी, रोपण व प्रसंस्करण में 200–500 मानव-दिवस/वर्ष रोजगार व पलायन में कमी
      • महिला श्रम व पोषण: खेत पर ही जलाऊ लकड़ी व चारा मिलने से महिला श्रम में राहत + फलों से पोषण सुरक्षा
      • सामाजिक वानिकी (NCA, 1976): ‘Forestry of the people, by the people, for the people’ (Farm, Extension, Community, Recreational)
    • आर्थिक एवं औद्योगिक लाभ (Economic & Industrial Benefits)
      • जोखिम बीमा (Living Bank): सूखा/बाढ़ में फसल नष्ट होने पर वृक्षों से आय एवं सामाजिक कार्यों हेतु एकमुश्त नकदी
      • औद्योगिक कच्चा माल: प्लाईवुड, कागज/लुगदी, माचिस व पैकिंग उद्योगों से अनुबंध + कार्बन क्रेडिट आय
    • आर्थिक मूल्यांकन एवं बाधाएँ (Economic Evaluation & Constraints)
      • मूल्यांकन सूचकांक: NPV (> 0), B:C Ratio (> 1.0), IRR (> ब्याज दर) एवं Payback Period
      • बाधाएँ व समाधान: कटाई/ट्रांजिट परमिट (TP) नियम, लंबी प्रतीक्षा अवधि, QPM व संगठित काष्ठ मंडी की आवश्यकता

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)

प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): कृषि वानिकी के माध्यम से ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक रूपांतरण
1. खेत पर वृक्ष + फसल
(QPM क्लोनल रोपण)
➔ 2. वार्षिक अंतःफसल आय
(खाद्यान्न, चारा व नकदी प्रवाह)
➔ 3. 200–500 मानव-दिवस रोजगार
(महिला श्रम में कमी व पलायन रोकथाम)
➔ 4. परिपक्वता पर एकमुश्त काष्ठ आय
(प्लाईवुड/पेपर उद्योग + कार्बन क्रेडिट)
➔ 5. उच्च आर्थिक प्रतिफल
(NPV > 0, BCR > 2.0, आत्मनिर्भर किसान)

13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • ‘सामाजिक वानिकी’ (Social Forestry) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1968 में ‘वेस्टोबी’ (J.C. Westoby) ने किया था और भारत में इसे 1976 में ‘राष्ट्रीय कृषि आयोग’ (National Commission on Agriculture – NCA, 1976) की रिपोर्ट के बाद शुरू किया गया।
  • सामाजिक वानिकी का प्रसिद्ध नारा है: ‘लोगों का, लोगों के द्वारा और लोगों के लिए वानिकी’ (Forestry of the people, by the people and for the people)।
  • बीज संग्रहण, नर्सरी और वृक्षारोपण से प्रतिवर्ष लगभग 200 से 500 मानव-दिवस (200–500 man-days/yr) रोजगार सृजित होता है।
  • किसी कृषि वानिकी परियोजना के आर्थिक रूप से लाभकारी होने के लिए NPV धनात्मक (> 0), B:C Ratio 1 से अधिक (> 1.0) और IRR पूँजी की अवसर लागत (ब्याज दर) से अधिक होना चाहिए।
  • जब बट्टा दर (Discount rate) आंतरिक प्रतिफल दर (IRR) के बराबर होती है, तब शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV) शून्य (Zero) हो जाता है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)

  • सामाजिक वानिकी (NCA, 1976): Farm Forestry + Extension Forestry + Community Forestry + Recreational Forestry।
  • रोजगार सृजन: 200–500 मानव-दिवस/वर्ष।
  • आर्थिक मूल्यांकन मानक: NPV>0  |  B:C Ratio>1.0  |  IRR>r (पर IRR, NPV=0)।
  • प्रमुख काष्ठ मंडी उदाहरण: यमुनानगर (हरियाणा) — पॉपलर व सफेदा प्लाईवुड हब।

15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)

1. भारत में किस आयोग की सिफारिश पर वर्ष 1976 में ‘सामाजिक वानिकी’ (Social Forestry) कार्यक्रम को औपचारिक रूप से प्रारंभ किया गया?
(A) योजना आयोग (1951)
(B) राष्ट्रीय कृषि आयोग (National Commission on Agriculture – NCA, 1976)
(C) कोठारी आयोग (1964)
(D) वित्त आयोग (1991)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) राष्ट्रीय कृषि आयोग (National Commission on Agriculture – NCA, 1976)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): राष्ट्रीय कृषि आयोग (NCA) ने 1976 में पारंपरिक वनों पर दबाव कम करने और ग्रामीण जरूरतों की पूर्ति हेतु सामाजिक वानिकी की सिफारिश की।
2. ‘लोगों का, लोगों के द्वारा और लोगों के लिए वानिकी’ (Forestry of the people, by the people and for the people) किस वानिकी प्रणाली को कहा जाता है?
(A) केवल आरक्षित वानिकी
(B) सामाजिक वानिकी (Social Forestry)
(C) एकल वाणिज्यिक खनन
(D) अल्पाइन वानिकी
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) सामाजिक वानिकी (Social Forestry)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): सामाजिक वानिकी को जन-सहभागिता के कारण ‘Forestry of the people, by the people and for the people’ कहा जाता है।
3. बीज संग्रहण और नर्सरी तैयार करने सहित वृक्षारोपण गतिविधियों से प्रतिवर्ष लगभग कितने मानव-दिवस (Man-days/yr) रोजगार का सृजन होता है?
(A) 5 – 10 मानव-दिवस/वर्ष
(B) 20 – 30 मानव-दिवस/वर्ष
(C) 200 – 500 मानव-दिवस/वर्ष
(D) 10,000 मानव-दिवस/वर्ष
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (C) 200 – 500 मानव-दिवस/वर्ष
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): मूल पाठ्यक्रम के अनुसार बीज संग्रहण व नर्सरी सहित वृक्षारोपण से लगभग 200–500 मानव-दिवस/वर्ष रोजगार सृजित होता है।
4. किसी कृषि वानिकी प्रणाली के आर्थिक मूल्यांकन में उस बट्टा दर (Discount rate) को क्या कहते हैं जिस पर शुद्ध वर्तमान मूल्य शून्य (NPV = 0) हो जाता है?
(A) लाभ-लागत अनुपात (B:C Ratio)
(B) आंतरिक प्रतिफल दर (Internal Rate of Return – IRR)
(C) भूमि समतुल्य अनुपात (LER)
(D) मूल्यह्रास दर
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) आंतरिक प्रतिफल दर (Internal Rate of Return – IRR)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): IRR वह बट्टा दर है जिस पर बट्टागत लाभों का वर्तमान मूल्य बट्टागत लागतों के वर्तमान मूल्य के बराबर (अर्थात् NPV = 0) हो जाता है।
5. किसी कृषि वानिकी परियोजना को आर्थिक रूप से व्यवहार्य (Economically viable) मानने के लिए लाभ-लागत अनुपात (B:C Ratio) और शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV) क्या होने चाहिए?
(A) B:C Ratio < 1.0 और NPV < 0
(B) B:C Ratio > 1.0 और NPV > 0 (धनात्मक)
(C) B:C Ratio = 0 और NPV = -100
(D) B:C Ratio < 0
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) B:C Ratio > 1.0 और NPV > 0 (धनात्मक)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): लाभकारी परियोजना के लिए B:C Ratio 1.0 से अधिक और NPV शून्य से अधिक (धनात्मक) होना चाहिए।
6. जब व्यक्तिगत किसान अपनी स्वयं की कृषि भूमि या खेत की मेड़ों पर घरेलू व व्यावसायिक उद्देश्य से वृक्ष लगाते हैं, तो सामाजिक वानिकी के इस घटक को क्या कहते हैं?
(A) फार्म वानिकी (Farm Forestry)
(B) शहरी मनोरंजन वानिकी
(C) आरक्षित वन
(D) राष्ट्रीय उद्यान
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) फार्म वानिकी (Farm Forestry)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): किसानों द्वारा अपनी निजी कृषि भूमि पर वृक्ष उगाना फार्म वानिकी (Farm Forestry) कहलाता है।
7. वर्ष 1968 में नई दिल्ली में आयोजित 9वीं राष्ट्रमंडल वानिकी कांग्रेस में ‘Social Forestry’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया था?
(A) जे.सी. वेस्टोबी (J.C. Westoby)
(B) लुई पाश्चर
(C) नॉर्मन बोरलॉग
(D) चार्ल्स डार्विन
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) जे.सी. वेस्टोबी (J.C. Westoby)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): जे.सी. वेस्टोबी ने 1968 में सर्वप्रथम ‘सामाजिक वानिकी’ शब्द गढ़ा था।
8. सड़कों, नहरों और रेलवे लाइनों के दोनों किनारों पर पट्टियों में वृक्षारोपण करना सामाजिक वानिकी के किस घटक के अंतर्गत आता है?
(A) विस्तार वानिकी (Extension Forestry / Linear strip plantation)
(B) गृह वाटिका
(C) झूम खेती
(D) अल्पाइन चारागाह
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) विस्तार वानिकी (Extension Forestry / Linear strip plantation)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): पारंपरिक वन क्षेत्रों से बाहर नहरों, सड़कों व रेल लाइनों के किनारे वृक्षारोपण ‘विस्तार वानिकी’ (Extension Forestry) कहलाता है।
9. भारत में किसानों द्वारा कृषि वानिकी से उत्पादित लकड़ी को काटने और मंडी ले जाने में सबसे बड़ी कानूनी/संस्थागत बाधा कौन-सी रही है?
(A) अधिक वर्षा
(B) वृक्षों की कटाई एवं परिवहन के कठोर ट्रांजिट परमिट (Felling and Transit Permit) नियम
(C) अधिक धूप
(D) उर्वरकों की अधिक उपलब्धता
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) वृक्षों की कटाई एवं परिवहन के कठोर ट्रांजिट परमिट (Felling and Transit Permit) नियम
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): कटाई और ट्रांजिट परमिट (TP) के जटिल नियम किसानों के लिए बड़ी बाधा रहे हैं, जिन्हें राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति (2014) के तहत सरल बनाया गया है।
10. सामाजिक-आर्थिक आधार पर चाय, कॉफी या पॉपलर के बड़े पैमाने पर बाजार बिक्री हेतु किए जाने वाले रोपण को किस श्रेणी में रखा जाता है?
(A) जीवन-निर्वाह प्रणाली (Subsistence system)
(B) वाणिज्यिक कृषि वानिकी प्रणाली (Commercial agroforestry system)
(C) झूम प्रणाली
(D) गैर-आर्थिक प्रणाली
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) वाणिज्यिक कृषि वानिकी प्रणाली (Commercial agroforestry system)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): जब उत्पादन का मुख्य उद्देश्य बाजार में बिक्री और लाभ कमाना हो, तो उसे वाणिज्यिक (Commercial) प्रणाली कहते हैं।

16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर्स (5 Important Exam One-Liners)

  1. ‘सामाजिक वानिकी’ शब्द 1968 में जे.सी. वेस्टोबी ने दिया और भारत में इसे 1976 में राष्ट्रीय कृषि आयोग (NCA) की सिफारिश पर लागू किया गया।
  2. बीज संग्रहण व नर्सरी सहित वृक्षारोपण से प्रतिवर्ष लगभग 200 से 500 मानव-दिवस रोजगार का सृजन होता है।
  3. सामाजिक वानिकी को ‘लोगों का, लोगों के द्वारा और लोगों के लिए वानिकी’ कहा जाता है।
  4. आंतरिक प्रतिफल दर (IRR) वह बट्टा दर है जिस पर परियोजना का शुद्ध वर्तमान मूल्य शून्य (NPV = 0) हो जाता है।
  5. आर्थिक रूप से लाभकारी कृषि वानिकी प्रणाली के लिए NPV > 0 और B:C Ratio > 1.0 होना अनिवार्य है।

(B) 5 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions)

1. सामाजिक वानिकी (Social Forestry) शब्द किसने और कब दिया?
उत्तर: जे.सी. वेस्टोबी (J.C. Westoby) ने वर्ष 1968 में।
2. राष्ट्रीय कृषि आयोग (NCA, 1976) के अनुसार सामाजिक वानिकी के चार मुख्य घटक कौन-से हैं?
उत्तर: (1) फार्म वानिकी (Farm forestry), (2) विस्तार वानिकी (Extension forestry), (3) सामुदायिक वानिकी (Community forestry), और (4) मनोरंजन वानिकी (Recreational forestry)।
3. NPV और IRR का पूर्ण रूप लिखिए।
उत्तर: NPV = Net Present Value (शुद्ध वर्तमान मूल्य); IRR = Internal Rate of Return (आंतरिक प्रतिफल दर)।
4. कृषि वानिकी को किसानों के लिए ‘जीवित बैंक खाता’ (Living Saving Account) क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि सूखे या बाढ़ से फसल नष्ट होने अथवा विवाह/शिक्षा/बीमारी जैसी सामाजिक जरूरत पड़ने पर किसान खड़े वृक्षों को बेचकर तुरंत एकमुश्त बड़ी नकदी प्राप्त कर सकते हैं।
5. भारत के काष्ठ-आधारित उद्योगों (प्लाईवुड, कागज, माचिस) को मुख्य रूप से किन दो कृषि वानिकी वृक्षों से कच्चा माल मिलता है?
उत्तर: पॉपलर (Populus deltoides) और सफेदा (Eucalyptus tereticornis) से।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions)

1. ग्रामीण महिलाओं के श्रम (Drudgery) को कम करने और रोजगार सृजन में कृषि वानिकी की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ग्रामीण महिलाओं को जलाऊ लकड़ी और चारे के लिए जंगलों में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है; अपने ही खेत पर बहुउद्देशीय वृक्ष (MPTS) उगाने से यह समय व कठिन श्रम बचता है और धुएँ रहित जीवन व फलों से पोषण मिलता है। साथ ही, बीज संग्रहण, नर्सरी, रोपण, प्रूनिंग और काष्ठ प्रसंस्करण से प्रतिवर्ष 200–500 मानव-दिवस रोजगार सृजित होता है जिससे ग्रामीण युवाओं को गाँव में ही काम मिलता है।
2. सामाजिक वानिकी (Social Forestry) क्या है? इसके मुख्य उद्देश्य और घटक लिखिए।
उत्तर: NCA (1976) के अनुसार सामाजिक वानिकी ‘लोगों का, लोगों के द्वारा और लोगों के लिए वानिकी’ कार्यक्रम है। इसके मुख्य उद्देश्य ग्रामीण जनता को उचित दर पर जलाऊ लकड़ी, चारा, छोटी इमारती लकड़ी उपलब्ध कराना, वनों से लकड़ी की चोरी (Pilferage) रोकना और निम्नीकृत वनों का पुनर्वास करना है। इसके 4 घटक हैं: फार्म वानिकी, विस्तार वानिकी, सामुदायिक वानिकी और मनोरंजन वानिकी।
3. कृषि वानिकी प्रणालियों के आर्थिक मूल्यांकन में प्रयुक्त NPV, B:C Ratio और IRR को समझाइए।
उत्तर: चूँकि वृक्ष दीर्घकाल में आय देते हैं, इसलिए बट्टाकरण (Discounting) का उपयोग किया जाता है: (1) शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV) बट्टागत लाभों और बट्टागत लागतों का अंतर है (NPV > 0 होना चाहिए); (2) लाभ-लागत अनुपात (B:C Ratio) बट्टागत लाभ और बट्टागत लागत का अनुपात है (B:C > 1.0 होना चाहिए); और (3) आंतरिक प्रतिफल दर (IRR) वह बट्टा दर है जिस पर NPV शून्य हो जाता है (IRR बैंक ब्याज दर से अधिक होना चाहिए)।
4. कृषि वानिकी किस प्रकार छोटे किसानों के लिए जोखिम विविधीकरण (Risk diversification) और आय स्थिरता प्रदान करती है?
उत्तर: शुद्ध एकल फसल (Monoculture) में सूखा, ओलावृष्टि या कीट-रोग लगने पर किसान की पूरी फसल चौपट हो जाती है। इसके विपरीत, कृषि वानिकी में गहरी जड़ों वाले बहुवर्षीय वृक्ष सूखे को सहन कर लेते हैं और फसल खराब होने वाले वर्ष में भी चारा, फल, गोंद, ईंधन व लकड़ी देकर किसान की आय को स्थिर रखते हैं।
5. भारत में किसानों द्वारा कृषि वानिकी अपनाने में आने वाली चार प्रमुख सामाजिक-आर्थिक बाधाएँ और उनके समाधान लिखिए।
उत्तर: बाधाएँ: (1) वृक्ष कटाई व परिवहन के जटिल ट्रांजिट परमिट (TP) नियम, (2) वृक्षों की लंबी प्रतीक्षा अवधि (Gestation period), (3) प्रमाणित क्लोनल रोपण सामग्री (QPM) की कमी, और (4) संगठित काष्ठ मंडियों व MSP का अभाव। समाधान: राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति (2014) के तहत TP नियमों से छूट, नर्सरी प्रमाणन, उद्योग अनुबंध खेती (Buy-back guarantee) और संस्थागत ऋण व बीमा सुविधा देना।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3 Long Answer Questions)

1. कृषि वानिकी प्रणाली के सामाजिक एवं आर्थिक पहलुओं (Socio-economic aspects) का सविस्तार वर्णन कीजिए तथा बताइए कि यह ग्रामीण भारत में आजीविका सुरक्षा, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को कैसे गति देती है।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: सामाजिक लाभ (200-500 मानव-दिवस रोजगार, पलायन रोकथाम, महिला श्रम में कमी, पोषण व खाद्य सुरक्षा, सामाजिक खर्चों हेतु नकदी) और आर्थिक लाभ (उच्च B:C अनुपात, जोखिम बीमा, प्लाईवुड/कागज/माचिस उद्योग अनुबंध व कार्बन क्रेडिट) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करें।
2. सामाजिक वानिकी (Social Forestry) की अवधारणा, ऐतिहासिक विकास (Westoby 1968, NCA 1976), उद्देश्यों और इसके चारों घटकों (Farm, Extension, Community एवं Recreational Forestry) पर विस्तृत निबंध लिखिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: सामाजिक वानिकी की परिभाषा, उद्देश्यों और चारों घटकों की उदाहरण सहित व्याख्या करें तथा कृषि वानिकी और सामाजिक वानिकी के अंतर्संबंधों को स्पष्ट करें।
3. कृषि वानिकी परियोजनाओं के आर्थिक मूल्यांकन (Economic Evaluation of Agroforestry Systems) की आवश्यकता क्यों है? बट्टागत नकदी प्रवाह विधियों (NPV, B:C Ratio, IRR और Payback Period) की सूत्र एवं निर्णय नियमों सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: मुद्रा के समय मूल्य (Time value of money) का सिद्धांत समझाते हुए तुलनात्मक सारणी 6.1 के चारों सूचकांकों (NPV, BCR, IRR, Payback period) के सूत्र, निर्णय नियम और व्यावहारिक उदाहरण विस्तार से लिखें।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGF 311 notes।

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