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AGF 311 Lecture 03: कृषि वानिकी के पारिस्थितिक पहलू; वृक्ष-फसल अंतःक्रिया (प्रतिस्पर्धा) एवं पोषक तत्व पुनर्चक्रण | Hindi Notes

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AGF 311 · Introductory Agroforestry
विषय सूची · Quick Navigation02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)
Lecture 03 Source Page Reference in Supplied Pack: 133 (AGF 311 Theory Lecture 03)

Lecture 03: कृषि वानिकी के पारिस्थितिक पहलू; वृक्ष-फसल अंतःक्रिया (प्रतिस्पर्धा) एवं पोषक तत्व पुनर्चक्रण

Ecological aspects of agroforestry system; Tree -crop interaction – competition; Nutrient recycling

02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान (Lecture) के अध्ययन के पश्चात् विद्यार्थी निम्नलिखित में सक्षम होंगे:

  1. कृषि वानिकी प्रणाली के पारिस्थितिक पहलुओं (सूक्ष्म-जलवायु संशोधन, कार्बन प्रच्छादन, मृदा जीव-मंडल सक्रियता) को समझना।
  2. वृक्ष-फसल अंतःक्रिया (Tree-Crop Interaction) की तीनों श्रेणियों—पूरक (Complementary / +), अनुपूरक (Supplementary / 0) और प्रतिस्पर्धी (Competitive / -)—की व्याख्या करना।
  3. भूमि के ऊपर (Above-ground: सौर विकिरण/PAR, तापमान, सापेक्ष आर्द्रता) और भूमि के नीचे (Below-ground: मृदा नमी, पोषक तत्व एवं एलीलोपैथी—अखरोट में Juglone, सुबबूल में Mimosine) होने वाली प्रतिस्पर्धा का विश्लेषण करना।
  4. भूमि समतुल्य अनुपात (Land Equivalent Ratio – LER) और वृक्ष-फसल अंतराफलक समीकरण (I=F−C) की गणना करना।
  5. पोषक तत्व पुनर्चक्रण (Nutrient Recycling), डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग (Deep nutrient pumping), सेफ्टी-नेट परिकल्पना (Safety-net hypothesis) और हाइड्रोलिक लिफ्ट (Hydraulic lift) को समझना।

03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): जब एक ही भूमि इकाई पर बहुवर्षीय वृक्ष और एकवर्षीय कृषि फसलें साथ-साथ उगाई जाती हैं, तो वे एक-दूसरे के पर्यावरण को प्रभावित करती हैं और साझा संसाधनों (प्रकाश, जल, पोषक तत्व और स्थान) के लिए परस्पर क्रिया करती हैं। इसे वृक्ष-फसल अंतःक्रिया (Tree-Crop Interaction) कहा जाता है, जो मुख्यतः वृक्ष-फसल अंतराफलक (Tree-Crop Interface – TCI) पर घटित होती है।

पारिस्थितिक दृष्टि से एक सफल कृषि वानिकी प्रणाली का मूल उद्देश्य सकारात्मक अंतःक्रियाओं (Facilitation / Complementarity) जैसे नाइट्रोजन स्थिरीकरण, पर्ण करकट से पोषक तत्व पुनर्चक्रण और सूक्ष्म-जलवायु सुधार को अधिकतम करना तथा नकारात्मक अंतःक्रियाओं (Competition & Allelopathy) को न्यूनतम करना है।

04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

वृक्ष-फसल अंतःक्रिया (Tree-Crop Interaction – Nair, 1993)
कृषि वानिकी प्रणाली में एक घटक (वृक्ष) का दूसरे घटक (कृषि फसल) के प्रदर्शन एवं समग्र प्रणाली की उत्पादकता पर पड़ने वाला प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष जैव-भौतिक प्रभाव।
एलीलोपैथी (Allelopathy – Molisch, 1937)
एक पौधे (प्रायः वृक्ष) की पत्तियों के निक्षालन (Leachates), जड़ स्रावों (Root exudates) या छाल/करकट के अपघटन से निकलने वाले जैव-रासायनिक पदार्थों (Allelochemicals) द्वारा पास में उगने वाली कृषि फसल के अंकुरण या वृद्धि का संदमन (Inhibition) होना। उदाहरण: अखरोट (Walnut) में ‘जग्लोन’ (Juglone) और बिना छँटे सुबबूल (Leucaena) में ‘मिमोसिन’ (Mimosine)।
भूमि समतुल्य अनुपात (Land Equivalent Ratio – LER)
समान प्रबंधन स्तर पर अंतःफसल या कृषि वानिकी प्रणाली से प्राप्त उपज के बराबर ही एकल फसल (Monoculture / Sole crop) से उपज प्राप्त करने के लिए आवश्यक सापेक्ष भूमि क्षेत्रफल। यदि LER > 1 है, तो कृषि वानिकी लाभकारी है।
डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग (Deep Nutrient Pumping)
वृक्षों की गहरी मूसला जड़ों द्वारा मृदा की निचली परतों (Sub-soil / Weathering rock horizons, जहाँ फसलों की जड़ें नहीं पहुँच पातीं) से खनिज पोषक तत्वों को अवशोषित कर पत्तियों तक लाना और पर्ण करकट (Litterfall) के रूप में ऊपरी मृदा सतह पर वापस जमा करना।
सेफ्टी-नेट परिकल्पना (Safety-Net Hypothesis – van Noordwijk)
कृषि फसलों की उथली जड़ क्षेत्र से नीचे निक्षालित (Leached) होने वाले गतिशील पोषक तत्वों (जैसे नाइट्रेट NO₃⁻ और पोटेशियम K⁺) को वृक्षों की गहरी जड़ों के जाल द्वारा पकड़कर भूजल में बहने से बचाना।
हाइड्रोलिक लिफ्ट / पुनर्वितरण (Hydraulic Lift / Redistribution)
शुष्क परिस्थितियों में गहरी जड़ वाले वृक्षों द्वारा रात के समय गहरी नम मृदा परतों से जल सोखकर अपनी उथली जड़ों के माध्यम से ऊपरी सूखी मृदा परत में छोड़ने की प्रक्रिया, जिससे पास की फसलों को नमी मिलती है।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. कृषि वानिकी प्रणाली के पारिस्थितिक पहलू (Ecological Aspects of Agroforestry System)

  • सूक्ष्म-जलवायु संशोधन (Microclimate Modification): वृक्षों का छत्र अत्यधिक सौर विकिरण को रोककर दोपहर में मृदा और वायु के तापमान को 3°C से 5°C तक कम करता है, पवन वेग को घटाता है, सापेक्ष आर्द्रता (Relative humidity) को बढ़ाता है और फसलों के वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन (Evapotranspiration) की दर को कम कर नमी बचाता है।
  • कार्बन प्रच्छादन एवं जलवायु परिवर्तन शमन (Carbon Sequestration): कृषि वानिकी प्रणालियाँ वायुमंडलीय CO2 को वृक्ष बायोमास (Above-ground biomass) और मृदा कार्बनिक कार्बन (Soil Organic Carbon – SOC) में दीर्घकाल तक स्थिर करती हैं (भारत में औसतन 1 से 12 Mg C/ha/yr)।
  • मृदा जैव-विविधता एवं केंचुआ/माइकोराइजा सक्रियता: निरंतर पर्ण करकट गिरने और अनुकूल नमी-तापमान के कारण मृदा में केंचुओं (Earthworms), नाइट्रोजन-स्थिरीकरण करने वाले जीवाणुओं और वैस्कुलर-अरबस्कुलर माइकोराइजा (VAM fungi) की संख्या बढ़ती है।

2. वृक्ष-फसल अंतःक्रिया के प्रकार (Types of Tree-Crop Interactions)

1. पूरक / सकारात्मक अंतःक्रिया (Complementary / Facilitation: + / +)

जब वृक्ष की उपस्थिति से सह-फसल की उपज बढ़ती है।
उदाहरण: राजस्थान में खेजड़ी (Prosopis cineraria) या अफ्रीका/भारत में Faidherbia albida के नीचे उगाए गए बाजरे या ज्वार की उपज खुले खेत की तुलना में अधिक होती है (N₂-स्थिरीकरण, पर्ण खाद और सूक्ष्म-जलवायु सुधार के कारण)।

2. अनुपूरक / तटस्थ अंतःक्रिया (Supplementary / Neutral: 0 / +)

जब वृक्ष और फसल के संसाधन उपयोग का समय या स्थान अलग-अलग (Niche differentiation) होने के कारण एक घटक की उपज पर दूसरे का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
उदाहरण: शीतकाल (रबी) में जब पॉपलर (Populus deltoides) पर्णहीन (Deciduous) हो जाता है, तब नीचे उगने वाले गेहूँ को पूरी धूप मिलती है।

3. प्रतिस्पर्धी / नकारात्मक अंतःक्रिया (Competitive / Interference: – / -)

जब वृक्ष और फसल एक ही सीमित संसाधन (प्रकाश, जल या पोषक तत्व) के लिए आपस में स्पर्धा करते हैं या एलीलोपैथी होती है, जिससे फसल की उपज घट जाती है।
उदाहरण: सफेदा (Eucalyptus) या बिना छँटे घने बबूल की पंक्तियों के ठीक पास उगाई गई सरसों या गेहूँ की उपज में कमी।

3. भूमि के ऊपर बनाम भूमि के नीचे की प्रतिस्पर्धा एवं एलीलोपैथी (Above-ground vs Below-ground Competition & Allelopathy)

  • (A) भूमि के ऊपर की अंतःक्रिया एवं प्रतिस्पर्धा (Above-ground Competition):
    • मुख्य कारक सौर विकिरण / प्रकाश (Light / PAR – Photosynthetically Active Radiation, 400–700 nm) है।
    • C₄ फसलें (जैसे मक्का, ज्वार, बाजरा, गन्ना) प्रकाश-संतृप्ति के लिए उच्च धूप चाहती हैं और छाया के प्रति संवेदनशील (Shade-intolerant) होती हैं; जबकि C₃ व छाया-प्रिय (Sciophytes) फसलें (जैसे हल्दी, अदरक, बड़ी इलायची, कॉफी, चाय, अरबी) आंशिक छाया (30–50% shade) में भी उत्कृष्ट उपज देती हैं।
  • (B) भूमि के नीचे की प्रतिस्पर्धा (Below-ground Competition):
    • मुख्य कारक मृदा नमी (Soil moisture/water) और पोषक तत्व (N, P, K) हैं (विशेषकर शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में नमी मुख्य सीमाकारी कारक है)।
    • उथली और क्षैतिज रूप से फैलने वाली जड़ों वाले वृक्ष (जैसे Acacia tortilis, Eucalyptus, Populus की ऊपरी पार्श्व जड़ें) ऊपरी 0–30 cm मृदा परत में फसलों से तीव्र प्रतिस्पर्धा करते हैं।
  • (C) एलीलोपैथी (Allelopathy — रासायनिक स्पर्धा):
    • अखरोट (Walnut – Juglans regia): इसकी पत्तियों और जड़ों से ‘जग्लोन’ (Juglone) नामक विषैला रसायन निकलता है जो टमाटर, आलू व अल्फाल्फा की वृद्धि रोकता है।
    • सुबबूल (Leucaena leucocephala): इसमें ‘मिमोसिन’ (Mimosine) नामक गैर-प्रोटीन अमीनो अम्ल पाया जाता है।
    • सफेदा (Eucalyptus spp.): इसकी पत्तियों के वाष्पशील तेलों में सिनेओल (1,8-Cineole), टर्पीन्स (Terpenes) और फेनोलिक अम्ल होते हैं।
    • कैजुआरिना व चीड़ (Pinus): सुइयों (Needles) के धीमे अपघटन से टैनिन और फेनोलिक्स निकलते हैं।

4. पोषक तत्व पुनर्चक्रण तंत्र (Nutrient Recycling Mechanisms in Agroforestry)

कृषि वानिकी प्रणाली में पोषक तत्वों का संवर्धन और पुनर्चक्रण निम्नलिखित 4 प्रक्रियाओं से होता है:

  1. पर्ण करकट पात एवं अपघटन (Litterfall & Decomposition): वृक्षों से प्रतिवर्ष 2 से 10 टन/हेक्टेयर शुष्क पत्तियाँ, टहनियाँ व फूल मृदा सतह पर गिरते हैं। कम C:N अनुपात (<25:1) और कम लिग्निन/पॉलीफेनॉल वाली पत्तियाँ (जैसे Gliricidia, Leucaena, Sesbania) तेजी से सड़कर N, P, K, Ca व Mg मुक्त करती हैं।
  2. सूक्ष्म जड़ मृत्यु एवं अपघटन (Fine Root Turnover): वृक्षों की बारीक जड़ें (Fine roots <2 mm) निरंतर मरती और नई बनती रहती हैं, जिससे भूमि के भीतर सीधे कार्बन और पोषक तत्व जुड़ते हैं।
  3. डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग एवं सेफ्टी-नेट (Deep Nutrient Pumping & Safety-Net): गहरी जड़ें निचली परतों से पोषक तत्व पंप करती हैं और निक्षालित (Leached) नाइट्रेट को पकड़कर वापस ऊपर लाती हैं।
  4. जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Biological Nitrogen Fixation – BNF): दलहनी और एक्टिनोराइजल वृक्ष वायुमंडल से सीधे नाइट्रोजन जोड़ते हैं।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

वृक्ष-फसल अंतःक्रियाओं का वर्गीकरण:

  • स्थान के आधार पर: (1) Above-ground interactions (Light, Temperature, Humidity, Wind) एवं (2) Below-ground interactions (Soil water, Nutrients, Allelochemicals, Mycorrhiza)।
  • प्रभाव की प्रकृति के आधार पर: (1) Complementary (+/+), (2) Supplementary (0/+), और (3) Competitive (-/- या +/-)।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)

  • अंत (Ong, 1996) का वृक्ष-फसल अंतःक्रिया समीकरण (Tree-Crop Interaction Equation):
    कृषि वानिकी प्रणाली में फसल पर पड़ने वाला कुल निवल प्रभाव (I — Net Interaction Effect) सकारात्मक उर्वरता प्रभाव (F — Fertility/Microclimate benefit) और नकारात्मक प्रतिस्पर्धा प्रभाव (C — Competition loss) के अंतर के बराबर होता है:
    $I=F−C$
    • यदि F>C, तो I धनात्मक (+) होगा (अर्थात् कृषि वानिकी एकल फसल से अधिक उपज देगी)।
    • यदि F<C, तो I ऋणात्मक (−) होगा (प्रतिस्पर्धा हावी होगी)।
  • भूमि समतुल्य अनुपात (Land Equivalent Ratio – LER; Mead & Willey, 1980):
    $LER=Ytree (AF)Ytree (sole)+Ycrop (AF)Ycrop (sole)$
    यदि LER>1.0 (जैसे 1.35), तो इसका अर्थ है कि एकल फसलों में समान उपज लेने के लिए 35% अधिक भूमि की आवश्यकता होगी।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)

हल किया गया संख्यात्मक उदाहरण (Solved LER Numerical)

प्रश्न: एक पॉपलर + गेहूँ एग्री-सिल्वीकल्चर प्रणाली में गेहूँ की उपज 3.2 t/ha और पॉपलर काष्ठ वृद्धि 12 m3/ha/yr प्राप्त हुई। यदि शुद्ध एकल फसल (Sole crop) में गेहूँ की उपज 4.0 t/ha और शुद्ध पॉपलर ब्लॉक रोपण में काष्ठ वृद्धि 16 m3/ha/yr हो, तो इस प्रणाली का भूमि समतुल्य अनुपात (LER) ज्ञात कीजिए और परिणाम की व्याख्या कीजिए।

हल (Solution):

  • गेहूँ का सापेक्ष उपज अनुपात (Lcrop) = 3.24.0=0.80
  • पॉपलर का सापेक्ष उपज अनुपात (Ltree) = 1216=0.75
  • $LER=Lcrop+Ltree=0.80+0.75=1.55$
  • व्याख्या: चूँकि LER=1.55>1.0, अतः पॉपलर + गेहूँ कृषि वानिकी प्रणाली एकल फसल की तुलना में 55% अधिक भूमि उपयोग दक्षता (55% biological yield advantage) प्रदान करती है।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 3.1: भूमि के ऊपर (Above-ground) बनाम भूमि के नीचे (Below-ground) की वृक्ष-फसल अंतःक्रिया
तुलना का बिंदु (Feature) भूमि के ऊपर की अंतःक्रिया (Above-Ground Interaction) भूमि के नीचे की अंतःक्रिया (Below-Ground Interaction)
मुख्य संसाधन कारक सौर विकिरण (PAR), तापमान, आर्द्रता, पवन वेग। मृदा जल (Soil moisture), पोषक तत्व (N, P, K) एवं स्थान।
सकारात्मक प्रभाव (Facilitation) लू व पाले से बचाव, पवन वेग व वाष्पोत्सर्जन में कमी, छाया-प्रिय फसलों को अनुकूल प्रकाश। N₂-स्थिरीकरण, डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग, सेफ्टी-नेट, हाइड्रोलिक लिफ्ट, पर्ण करकट ह्यूमस।
नकारात्मक प्रभाव (Competition) अत्यधिक छाया (Shading) से प्रकाश-संश्लेषण में कमी एवं शाखाओं से बड़ी वर्षा बूँदों का प्रहार। उथली जड़ों द्वारा नमी व पोषक तत्वों का शोषण तथा एलीलोपैथी (Juglone, Mimosine)।
प्रबंधन उपाय (Management) पूर्व-पश्चिम पंक्ति दिशा, प्रूनिंग, लोपिंग, पोलार्डिंग, थिनिंग। गहरी मूसला जड़ वाली प्रजाति का चयन, रूट ट्रेंचिंग (खाई खोदना), डीप प्लॉइंग।

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)

महत्वपूर्ण पारिस्थितिक समीकरण एवं सूचकांक (Key Ecological Equations)
  • अंत (Ong, 1996) का अंतःक्रिया समीकरण: I=F−C   (जहाँ F = उर्वरता/सूक्ष्म-जलवायु लाभ, C = प्रतिस्पर्धा हानि)
  • भूमि समतुल्य अनुपात (LER): LER=∑Yi (intercrop)Yi (sole crop)   (LER>1⟹ सकारात्मक/लाभकारी अंतःक्रिया)
  • पर्ण करकट खनिजीकरण नियम: C:N Ratio<25:1⟹तीव्र खनिजीकरण (Net Mineralization)  |  C:N Ratio>30:1⟹नाइट्रोजन स्थिरीकरण/अवरोध (Immobilization)

11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 03 Mind Map: पारिस्थितिक पहलू, वृक्ष-फसल अंतःक्रिया एवं पोषक तत्व पुनर्चक्रण
  • कृषि वानिकी पारिस्थितिकी (Ecological Aspects & Tree-Crop Dynamics | I = F – C | LER > 1.0)
    • वृक्ष-फसल अंतःक्रिया के 3 प्रकार (Interaction Types)
      • पूरक (Complementary +/+): खेजड़ी या Faidherbia albida + बाजरा (उपज में वृद्धि)
      • अनुपूरक (Supplementary 0/+): पॉपलर (शीतकालीन पतझड़) + गेहूँ (संसाधन विभाजन)
      • प्रतिस्पर्धी (Competitive -/-): सफेदा/बबूल + सरसों (नमी व प्रकाश स्पर्धा)
    • प्रतिस्पर्धा एवं एलीलोपैथी (Competition & Allelopathy)
      • Above-ground: प्रकाश (PAR) हेतु स्पर्धा (C₄ फसलें छाया-संवेदनशील; हल्दी/अदरक/इलायची छाया-सहनशील)
      • Below-ground: नमी व पोषक स्पर्धा + एलीलोपैथी: अखरोट में Juglone, सुबबूल में Mimosine, सफेदा में Cineole
    • पोषक तत्व पुनर्चक्रण तंत्र (Nutrient Recycling Mechanisms)
      • डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग: गहरी मृदा परतों से पोषक तत्व सोखकर पर्ण करकट (Litterfall) द्वारा सतह पर लाना
      • सेफ्टी-नेट (Safety-net): फसलों के जड़ क्षेत्र से नीचे रिसने वाले नाइट्रेट (NO₃⁻) को वृक्ष जड़ों द्वारा पकड़ना
      • हाइड्रोलिक लिफ्ट एवं BNF: गहरी परत से ऊपरी परत में नमी स्थानांतरण एवं सहजीवी N₂-स्थिरीकरण

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)

प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): कृषि वानिकी में ‘डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग’ एवं ‘सेफ्टी-नेट’ पोषक चक्र
1. गहरी मृदा परत व लीचिंग
(निचले खनिज + रिसता NO₃⁻)
➔ 2. वृक्ष की गहरी जड़ें (Safety-Net)
(पोषक तत्वों का अवशोषण व पंपिंग)
➔ 3. वृक्ष छत्र व पत्तियाँ
(जैव-भार एवं N₂ स्थिरीकरण संचय)
➔ 4. पर्ण करकट व प्रूनिंग मल्च
(Litterfall & Fine root turnover)
➔ 5. सूक्ष्मजैविक खनिजीकरण
(ऊपरी 0–30 cm में फसलों को पोषण उपलब्ध)

13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • परीक्षा के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण एलीलोकेमिकल्स याद रखें: (1) अखरोट (Walnut – Juglans regia) में ‘जग्लोन’ (Juglone), और (2) सुबबूल (Leucaena leucocephala) में ‘मिमोसिन’ (Mimosine)।
  • यदि भूमि समतुल्य अनुपात (LER) का मान 1.0 से अधिक (LER > 1) है, तो वृक्ष-फसल संयोजन (Intercropping/Agroforestry) एकल फसल से श्रेष्ठ है।
  • हल्दी (Turmeric), अदरक (Ginger), अरबी (Colocasia) और बड़ी इलायची ‘छाया-सहनशील’ (Shade-tolerant / Sciophytes) फसलें हैं जो फलों या वानिकी वृक्षों के छत्र के नीचे बहुत अच्छी उपज देती हैं।
  • फसलों की जड़ क्षेत्र से नीचे रिसने वाले पोषक तत्वों को वृक्ष की जड़ों के जाल द्वारा पकड़ने को वैन नूर्डविज्क की ‘सेफ्टी-नेट परिकल्पना’ (Safety-net hypothesis) कहते हैं।
  • शुष्क क्षेत्रों में वृक्ष-फसल प्रतिस्पर्धा का सबसे मुख्य सीमाकारी कारक ‘मृदा नमी’ (Soil moisture) है, जबकि आर्द्र क्षेत्रों में ‘प्रकाश’ (Light/PAR) है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)

  • अंतःक्रिया समीकरण: I=F−C (F = उर्वरता लाभ, C = प्रतिस्पर्धा हानि)।
  • LER सूत्र: LER=(Ytree AF/Ytree sole)+(Ycrop AF/Ycrop sole)।
  • एलीलोपैथी: अखरोट = Juglone | सुबबूल = Mimosine | सफेदा = 1,8-Cineole & Phenolics।
  • पोषक पुनर्चक्रण के 4 स्तंभ: Deep nutrient pumping + Safety-net root capture + Litterfall decomposition + BNF।

15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)

1. अखरोट (Walnut – Juglans regia) के वृक्ष की जड़ों और पत्तियों से कौन-सा एलीलोपैथिक रसायन (Allelochemical) निकलता है जो पास की फसलों की वृद्धि रोकता है?
(A) मिमोसिन (Mimosine)
(B) जग्लोन (Juglone)
(C) निकोटीन (Nicotine)
(D) अजाडिराक्टिन (Azadirachtin)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) जग्लोन (Juglone)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): अखरोट के वृक्ष से ‘जग्लोन’ (Juglone) तथा बिना छँटे सुबबूल (Leucaena) से ‘मिमोसिन’ (Mimosine) नामक एलीलोपैथिक रसायन निकलता है।
2. किसी कृषि वानिकी प्रणाली को जैविक और आर्थिक रूप से एकल फसल (Monoculture) की तुलना में लाभकारी माना जाता है यदि उसका भूमि समतुल्य अनुपात (LER) हो:
(A) LER = 0
(B) LER < 1.0
(C) LER > 1.0
(D) LER = -1.0
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (C) LER > 1.0
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): जब LER का मान 1.0 से अधिक होता है, तो मिश्रित/कृषि वानिकी प्रणाली एकल फसल की तुलना में अधिक भूमि उपयोग दक्षता देती है।
3. वृक्षों की गहरी मूसला जड़ों द्वारा मृदा की निचली परतों से खनिज पोषक तत्वों को सोखकर पर्ण करकट (Litterfall) के माध्यम से ऊपरी सतह पर लाने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
(A) एलीलोपैथी (Allelopathy)
(B) डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग (Deep nutrient pumping)
(C) निक्षालन (Leaching)
(D) विनाइट्रीकरण (Denitrification)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग (Deep nutrient pumping)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): गहरी मृदा परतों से पोषक तत्वों को अवशोषित कर पत्तियों के झड़ने से ऊपरी सतह पर जमा करना ‘डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग’ कहलाता है।
4. निम्नलिखित में से कौन-सी फसलें ‘छाया-सहनशील’ (Shade-tolerant / Sciophytes) हैं और परिपक्व वृक्ष छत्र के नीचे सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं?
(A) हल्दी, अदरक और बड़ी इलायची (Turmeric, Ginger & Large Cardamom)
(B) बाजरा और ज्वार
(C) मक्का और सूरजमुखी
(D) कपास और मूंगफली
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) हल्दी, अदरक और बड़ी इलायची (Turmeric, Ginger & Large Cardamom)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): हल्दी, अदरक, अरबी, चाय, कॉफी और इलायची C₃ छाया-प्रिय फसलें हैं जो 30–50% छत्र छाया में भी अच्छी पैदावार देती हैं।
5. राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में खेजड़ी (Prosopis cineraria) के वृक्ष के नीचे उगाए गए बाजरे की उपज का खुले खेत की तुलना में अधिक होना किस प्रकार की अंतःक्रिया का उदाहरण है?
(A) प्रतिस्पर्धी अंतःक्रिया (Competitive interaction)
(B) पूरक / सकारात्मक अंतःक्रिया (Complementary interaction)
(C) एलीलोपैथिक अंतःक्रिया
(D) परजीवी अंतःक्रिया
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) पूरक / सकारात्मक अंतःक्रिया (Complementary interaction)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): खेजड़ी N₂-स्थिरीकरण, पर्ण खाद और सूक्ष्म-जलवायु सुधार द्वारा बाजरे की उपज बढ़ाती है, जो पूरक (+/+) अंतःक्रिया है।
6. फसलों के उथले जड़ क्षेत्र से नीचे रिसकर (Leaching) जाने वाले नाइट्रेट (NO₃⁻) जैसे पोषक तत्वों को वृक्ष की गहरी जड़ों के जाल द्वारा पकड़ने के तंत्र को क्या कहते हैं?
(A) सेफ्टी-नेट परिकल्पना (Safety-net hypothesis)
(B) कैनोपी इंटरसेप्शन
(C) फोटो-रेस्पिरेशन
(D) एब जनरेशन
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) सेफ्टी-नेट परिकल्पना (Safety-net hypothesis)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): वैन नूर्डविज्क द्वारा प्रतिपादित ‘सेफ्टी-नेट परिकल्पना’ के अनुसार वृक्ष की जड़ें फसल जड़ क्षेत्र के नीचे एक जाल की तरह रिसते पोषक तत्वों को पकड़ लेती हैं।
7. शुष्क और अर्ध-शुष्क (Arid & Semi-arid) कृषि वानिकी प्रणालियों में भूमि के नीचे वृक्ष और फसल के बीच प्रतिस्पर्धा का सबसे प्रमुख सीमाकारी कारक कौन-सा है?
(A) कार्बन डाइऑक्साइड
(B) मृदा नमी / जल (Soil moisture / Water)
(C) पवन की गति
(D) पराबैंगनी प्रकाश
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) मृदा नमी / जल (Soil moisture / Water)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): शुष्क क्षेत्रों में धूप प्रचुर होती है, किंतु मृदा नमी (जल) के लिए भूमि के नीचे सबसे तीव्र प्रतिस्पर्धा होती है।
8. रात के समय गहरी नम मृदा परतों से वृक्ष की गहरी जड़ों द्वारा जल सोखकर ऊपरी शुष्क मृदा परत में छोड़ने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
(A) गटेशन (Guttation)
(B) हाइड्रोलिक लिफ्ट (Hydraulic lift)
(C) ट्रांसलोकेशन
(D) प्लाज्मोलिसिस
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) हाइड्रोलिक लिफ्ट (Hydraulic lift)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): हाइड्रोलिक लिफ्ट (या हाइड्रोलिक पुनर्वितरण) द्वारा गहरी जड़ें रात में निचली नमी को ऊपरी मृदा परत में पहुँचाती हैं।
9. पर्ण करकट (Leaf litter) के सूक्ष्मजैविक अपघटन से मृदा में नाइट्रोजन का त्वरित खनिजीकरण (Net mineralization) तब होता है जब पत्तियों का C:N अनुपात हो:
(A) 100 : 1 से अधिक
(B) 60 : 1 से अधिक
(C) 20 : 1 से 25 : 1 से कम
(D) 200 : 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (C) 20 : 1 से 25 : 1 से कम
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): कम C:N अनुपात (<25:1, जैसे दलहनी वृक्षों की पत्तियाँ) तेजी से सड़कर मृदा में पोषक तत्व मुक्त करता है।
10. बिना छँटे सुबबूल (Leucaena leucocephala) की पत्तियों और जड़ों में कौन-सा विषैला अमीनो अम्ल / एलीलोकेमिकल पाया जाता है?
(A) मिमोसिन (Mimosine)
(B) जग्लोन (Juglone)
(C) गॉसिपोल (Gossypol)
(D) रिसिन (Ricin)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) मिमोसिन (Mimosine)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): सुबबूल में ‘मिमोसिन’ नामक गैर-प्रोटीन अमीनो अम्ल पाया जाता है।

16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर्स (5 Important Exam One-Liners)

  1. अखरोट (Juglans regia) से ‘जग्लोन’ (Juglone) तथा सुबबूल से ‘मिमोसिन’ (Mimosine) नामक एलीलोपैथिक रसायन निकलता है।
  2. यदि भूमि समतुल्य अनुपात (LER) का मान 1.0 से अधिक (LER > 1) हो, तो कृषि वानिकी प्रणाली लाभकारी होती है।
  3. वृक्ष की गहरी जड़ों द्वारा निचली परतों से पोषक तत्व सतह पर लाना ‘डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग’ और रिसते तत्वों को पकड़ना ‘सेफ्टी-नेट’ कहलाता है।
  4. हल्दी, अदरक, अरबी और बड़ी इलायची छाया-सहनशील (Sciophytes) फसलें हैं जो वृक्ष छत्र के नीचे उत्तम उपज देती हैं।
  5. अंत (Ong, 1996) के अनुसार वृक्ष-फसल निवल अंतःक्रिया समीकरण I = F – C होता है।

(B) 5 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions)

1. एलीलोपैथी (Allelopathy) शब्द किसने दिया और इसका क्या अर्थ है?
उत्तर: मोलिश (Molisch, 1937) ने; इसका अर्थ एक पौधे द्वारा उत्सर्जित रासायनिक पदार्थों (Allelochemicals) से दूसरे पौधे की वृद्धि पर पड़ने वाला अवरोधक प्रभाव है।
2. भूमि समतुल्य अनुपात (LER) का सूत्र लिखिए।
उत्तर: LER = (अंतःफसल में वृक्ष उपज / एकल वृक्ष उपज) + (अंतःफसल में कृषि फसल उपज / एकल कृषि फसल उपज)।
3. अखरोट (Walnut) और सुबबूल (Leucaena) में पाए जाने वाले एलीलोकेमिकल्स के नाम लिखिए।
उत्तर: अखरोट में ‘जग्लोन’ (Juglone) तथा सुबबूल में ‘मिमोसिन’ (Mimosine)।
4. अंत (Ong, 1996) का वृक्ष-फसल अंतःक्रिया समीकरण लिखिए।
उत्तर: I = F – C (जहाँ I = कुल निवल अंतःक्रिया प्रभाव, F = उर्वरता व सूक्ष्म-जलवायु लाभ, और C = प्रतिस्पर्धा से होने वाली हानि)।
5. वृक्ष छत्र के नीचे उगाई जाने वाली किन्हीं चार छाया-सहनशील (Shade-tolerant) फसलों के नाम लिखिए।
उत्तर: हल्दी (Turmeric), अदरक (Ginger), बड़ी इलायची (Large cardamom) और अरबी (Colocasia)।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions)

1. वृक्ष-फसल अंतःक्रिया में पूरक (Complementary), अनुपूरक (Supplementary) और प्रतिस्पर्धी (Competitive) संबंधों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: पूरक संबंध (+/+) में वृक्ष की उपस्थिति से फसल की उपज बढ़ती है, जैसे खेजड़ी के नीचे बाजरा। अनुपूरक संबंध (0/+) में दोनों घटक अलग-अलग समय या मृदा स्तर का उपयोग करते हैं जिससे एक-दूसरे को हानि नहीं होती, जैसे शीतकाल में पर्णहीन पॉपलर के नीचे गेहूँ। प्रतिस्पर्धी संबंध (-/-) में प्रकाश, जल या पोषक तत्वों की स्पर्धा व एलीलोपैथी से फसल उपज घटती है, जैसे सफेदा के पास सरसों।
2. कृषि वानिकी प्रणाली में ‘डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग’ (Deep Nutrient Pumping) और ‘सेफ्टी-नेट’ (Safety-Net) तंत्र कैसे कार्य करते हैं?
उत्तर: फसलों की जड़ें केवल ऊपरी 15–30 cm मृदा तक सीमित रहती हैं। वृक्षों की गहरी मूसला जड़ें निचली मृदा परतों से खनिज पोषक तत्व सोखकर पत्तियों में लाती हैं और पर्ण करकट (Litterfall) के सड़ने से उन्हें ऊपरी सतह पर फसलों के लिए उपलब्ध कराती हैं (डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग)। साथ ही, वर्षा जल के साथ फसल जड़ क्षेत्र से नीचे रिसने वाले नाइट्रेट व पोटाश को वृक्ष की जड़ें जाल की तरह पकड़कर बाहर बहने से बचाती हैं (सेफ्टी-नेट)।
3. एलीलोपैथी (Allelopathy) क्या है? कृषि वानिकी में इसके प्रभाव को कम करने के उपाय लिखिए।
उत्तर: वृक्षों की पत्तियों के निक्षालन या जड़ स्रावों से निकलने वाले रसायनों (जैसे अखरोट से जग्लोन, सुबबूल से मिमोसिन, सफेदा से सिनेओल व फेनोलिक्स) द्वारा सह-फसलों के अंकुरण व वृद्धि को रोकना एलीलोपैथी कहलाता है। इसे कम करने के लिए गैर-एलीलोपैथिक MPTS का चयन करना, समय पर छत्र प्रूनिंग करना, पत्तियों को मल्च करने से पहले कंपोस्ट बनाना और सहनशील फसलें उगाना चाहिए।
4. कृषि वानिकी द्वारा सूक्ष्म-जलवायु (Microclimate) में किस प्रकार सुधार होता है?
उत्तर: वृक्षों का छत्र सीधी धूप को आंशिक रूप से रोककर ग्रीष्मकाल में मृदा व वायु का तापमान 3°C से 5°C तक घटाता है, पवन वेग और गर्म हवा (लू) के प्रभाव को कम करता है, वायुमंडलीय सापेक्ष आर्द्रता बढ़ाता है तथा वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन (ET) घटाकर मृदा नमी को लंबे समय तक सुरक्षित रखता है।
5. भूमि समतुल्य अनुपात (LER) क्या है? इसकी सहायता से कृषि वानिकी की दक्षता कैसे मापी जाती है?
उत्तर: LER समान प्रबंधन स्तर पर कृषि वानिकी से प्राप्त उपज के बराबर ही एकल फसल से उपज लेने के लिए आवश्यक सापेक्ष भूमि क्षेत्रफल है। यदि LER = 1.0 है तो कोई अंतर नहीं है; यदि LER < 1.0 है तो प्रतिस्पर्धा से नुकसान है; और यदि LER > 1.0 (जैसे 1.40) है तो कृषि वानिकी एकल फसल से 40% अधिक भूमि उपयोग दक्षता देती है।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3 Long Answer Questions)

1. कृषि वानिकी प्रणाली में वृक्ष-फसल अंतःक्रिया (Tree-Crop Interaction) की विस्तृत विवेचना कीजिए तथा भूमि के ऊपर (Above-ground) और भूमि के नीचे (Below-ground) होने वाली प्रतिस्पर्धा एवं सकारात्मक प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: Ong (1996) के समीकरण (I = F – C), अंतःक्रिया के तीनों प्रकार (Complementary, Supplementary, Competitive), Above-ground (PAR प्रकाश, तापमान, आर्द्रता, C₃ बनाम C₄ फसलें) और Below-ground (नमी, पोषक तत्व, हाइड्रोलिक लिफ्ट एवं एलीलोपैथी: Juglone व Mimosine) की तुलनात्मक सारणी सहित व्याख्या करें।
2. कृषि वानिकी में पोषक तत्व पुनर्चक्रण (Nutrient Recycling) की प्रक्रिया को प्रवाह चित्र की सहायता से समझाइए तथा मृदा उर्वरता संवर्धन में पर्ण करकट अपघटन, सूक्ष्म जड़ मृत्यु, नाइट्रोजन स्थिरीकरण और डीप न्यूट्रिएंट पंपिंग की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: खुले कृषि तंत्र (Leaching losses) बनाम बंद/अर्ध-बंद कृषि वानिकी पोषक चक्र का वर्णन करते हुए Litterfall (2-10 t/ha/yr, C:N <25:1), Fine root turnover, BNF (Rhizobium/Frankia), Deep nutrient pumping और Safety-net hypothesis को विस्तार से लिखें।
3. कृषि वानिकी के प्रमुख पारिस्थितिक पहलुओं (Ecological aspects) और भूमि समतुल्य अनुपात (LER) की अवधारणा को एक संख्यात्मक उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: सूक्ष्म-जलवायु संशोधन, कार्बन प्रच्छादन (Carbon sequestration), जैव-जल निकासी, मृदा जीव-जगत सक्रियता और LER के सूत्र व गणना (Solved numerical) का पूर्ण विवरण प्रस्तुत करें।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGF 311 notes।

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