PPATH 311 Lecture 02: मक्का, ज्वार, बाजरा, मूँगफली, सोयाबीन और चना के प्रमुख रोग एवं प्रबंधन

PPATH 311 · Plant Pathology Smart Notes
मक्का, ज्वार, बाजरा, मूँगफली, सोयाबीन और चना के प्रमुख रोग एवं प्रबंधन
Major Diseases of Maize, Sorghum, Bajra, Groundnut, Soybean, and Gram & Their Management
Maize (मक्का), Sorghum (ज्वार), Bajra (बाजरा), Groundnut (मूँगफली), Soybean (सोयाबीन), Gram/Chickpea (चना)
विषय सूची · Quick Navigation
अधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsरोग वर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesफसलवार रोग एवं प्रबंधन · Disease Notesतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्सअधिगम उद्देश्य · Learning Objectives
- मक्का के Banded Leaf & Sheath Blight, Southern Leaf Blight (T-cytoplasm महामारी) और Downy Mildew के लक्षणों व प्रबंधन को समझना।
- ज्वार के चारों कंड रोगों (Grain Smut, Loose Smut, Long Smut, Head Smut) की तुलनात्मक पहचान करना।
- बाजरा के हरित बाली रोग (Downy Mildew / Green Ear) और अर्गट (Ergot – शहद से स्क्लेरोशिया बनने की प्रक्रिया) का विश्लेषण करना।
- मूँगफली के टिक्का रोग (Early vs Late Leaf Spot) व कॉलर रॉट, सोयाबीन के राइजोक्टोनिया ब्लाइट तथा चने के उकठा (Wilt), जड़ गलन एवं एस्कोकाइटा अंगमारी का समन्वित प्रबंधन करना।
प्रस्तावना · Introduction
मोटे अनाज (Maize, Sorghum, Pearl Millet/Bajra), तिलहनी फसलें (Groundnut, Soybean) और दलहनी फसल (Chickpea/Gram) भारतीय शुष्क एवं अर्ध-शुष्क कृषि की रीढ़ हैं। इस व्याख्यान में मक्का के 3 रोगों, ज्वार के 4 स्मट रोगों, बाजरा के 2 प्रमुख रोगों, मूँगफली के टिक्का व कॉलर रॉट, सोयाबीन के हवाई अंगमारी (Rhizoctonia Blight) और चने के 3 प्रमुख रोगों (Ascochyta Blight, Fusarium Wilt एवं Dry Root Rot) का संपूर्ण वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत है।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions
हरित बाली अवस्था (Green Ear Stage)
बाजरा के मृदुरोमिल आसिता (Sclerospora graminicola) में पुष्पक्रम के हार्मोनल असंतुलन (Hyperplasia & Hypertrophy) के कारण दानों के स्थान पर मुड़ी हुई हरी पत्तियों जैसी संरचनाओं (Phyllody/Virescence) का बनना।
अर्गट (Ergot / Sclerotium)
Claviceps प्रजाति के कवक द्वारा बाली के अंडाशय में बनाया गया कठोर, सींग जैसा (Horn-like), गहरा भूरा-काला कवक पिंड जिसमें 'Ergotamine' नामक विषैला एल्कलॉइड होता है।
टिक्का रोग (Tikka Disease Complex)
मूँगफली में Cercospora arachidicola (अगेती पत्ती धब्बा) और Phaeoisariopsis personata (पछेती पत्ती धब्बा) द्वारा संयुक्त रूप से पत्तियों पर बनने वाले गोल बिंदीदार धब्बे।
कोल्यूमेला (Columella)
ज्वार के कंड रोगों (विशेषकर Grain Smut व Loose Smut) में बीजाणु की थैली (Sorus) के फटने के बाद केंद्र में दिखने वाली कवक व परपोषी ऊतक की नुकीली केंद्रीय छड़ जैसी संरचना।
रोग वर्गीकरण · Classification
Oomycetes (मृदुरोमिल आसिता समूह)
मक्का का Downy Mildew (Peronosclerospora sorghi), बाजरा का Downy Mildew / Green Ear (Sclerospora graminicola)।
Basidiomycetes (कंड एवं स्क्लेरोशियल कवक)
ज्वार के 4 Smuts (Sporisorium spp.), मक्का व सोयाबीन का Rhizoctonia Blight (Rhizoctonia solani)।
Ascomycetes / Deuteromycetes (पत्ती धब्बा, अर्गट एवं उकठा)
मक्का का Southern Blight (Bipolaris maydis), बाजरा का Ergot (Claviceps fusiformis), मूँगफली का Tikka (Cercospora spp.) व Collar Rot (Aspergillus niger), चने का Ascochyta Blight (Ascochyta rabiei), Wilt (Fusarium oxysporum f.sp. ciceri) व Root Rot (Macrophomina phaseolina)।
महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles
- कोशिकाद्रव्यी नर बंध्यता और रोग संवेदनशीलता (Cytoplasmic Male Sterility & Disease Susceptibility): 1970 में अमेरिका में मक्का के Southern Corn Leaf Blight (Bipolaris maydis Race T) की भीषण महामारी इसलिए फैली क्योंकि लगभग सभी संकर किस्मों में 'Texas Male Sterile Cytoplasm (cms-T)' का एकसमान प्रयोग किया गया था, जो 'HmT-toxin' के प्रति अत्यंत संवेदनशील था।
- शहद अवस्था से स्क्लेरोशियम अवस्था (Honeydew to Sclerotial Phase in Ergot): बाजरा के अर्गट में पहले कोनिडिया शर्करायुक्त गुलाबी चिपचिपे द्रव (Honeydew) में बनते हैं जो कीटों द्वारा द्वितीयक फैलाव करते हैं, और 10–15 दिन बाद वही अंडाशय कठोर काले स्क्लेरोशिया में बदल जाता है जो मृदा व बीज में प्राथमिक निवेशद्रव्य बनता है।
फसलवार रोग एवं प्रबंधन · Disease Notes
1. Banded Leaf and Sheath Blight of Maize (मक्का का पट्टीदार पत्ती एवं पर्णच्छद अंगमारी)
महत्व: खरीफ मक्का का तेजी से उभरता प्रमुख रोग जो निचले पर्णच्छद से भुट्टे (Ear/Cob) तक पहुँचकर 40% तक उपज घटा देता है।
लक्षण · Symptoms
- भूमि की सतह के पास निचली पत्तियों के पर्णच्छद (Leaf sheath) पर जल-सिक्त, भूरे और पुआल के रंग की एकांतर पट्टियाँ (Concentric alternating bands) बनती हैं, जो बाघ या साँप की खाल जैसी दिखती हैं।
- संक्रमण ऊपर बढ़ते हुए भुट्टे (Ear rot) तक पहुँचता है, जिससे छिलकों और दानों पर भूरे-काले सरसों जैसे स्क्लेरोशिया (Sclerotia) बन जाते हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- पौधे के निचले 2–3 संक्रमित पर्णच्छदों/पत्तियों को तोड़कर हटा दें (Stripping of lower leaves) ताकि रोग भुट्टे तक न चढ़ सके।
- बीज एवं मृदा में Trichoderma harzianum का प्रयोग करें।
- रासायनिक छिड़काव: Validamycin 3 L @ 2.0 ml/L या Azoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% SC @ 1.0 ml/L या Hexaconazole 5 EC @ 2.0 ml/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
कवक समकोण (90°) पर शाखित होता है और गहरे भूरे रंग के गोल व चपटे स्क्लेरोशिया बनाता है।
रोग चक्र · Disease Cycle
मृदा में और फसल अवशेषों में स्क्लेरोशिया के रूप में जीवित रहता है; निचली पत्तियों के मिट्टी के संपर्क में आने से संक्रमण शुरू होता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
28–30°C तापमान, 90% से अधिक आर्द्रता, घनी बुवाई और खेत में जलभराव।
2. Southern Corn Leaf Blight of Maize / Maydis Leaf Blight (मक्का का दक्षिणी पत्ती झुलसा)
महत्व: 1970 में अमेरिका में 'T-cytoplasm' वाली संकर मक्का में ऐतिहासिक महामारी का कारण बना; भारत में खरीफ मक्का का प्रमुख पत्ती झुलसा रोग है।
लक्षण · Symptoms
- पत्तियों पर छोटे, हीरे के आकार से लेकर आयताकार (Rectangular to Spindle-shaped), समानांतर शिराओं के बीच सीमित, पीले-भूरे (Tan colored) धब्बे बनते हैं जिनके किनारे लाल-भूरे या बैंगनी होते हैं।
- Race O केवल पत्तियों पर धब्बे बनाता है, जबकि Race T पत्तियों, पर्णच्छद और भुट्टे दोनों पर बड़े धब्बे और सड़न उत्पन्न करता है।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- सामान्य कोशिकाद्रव्य (Normal cytoplasm) वाली प्रतिरोधी संकर किस्में जैसे Vivek Hybrid-9, HQPM-1, Prabhat बोएँ।
- Thiram या Captan @ 2.5 g/kg से बीज उपचार करें।
- खड़ी फसल में Mancozeb 75 WP @ 2.5 g/L या Zineb @ 2.5 g/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
इसके दो प्रमुख प्रभेद हैं—Race O और Race T। Race T 'T-toxin (HmT-toxin)' उत्पन्न करता है जो केवल Texas Male Sterile (cms-T) कोशिकाद्रव्य के माइटोकॉन्ड्रिया को नष्ट करता है। कोनिडिया हल्के मुड़े हुए (Curved) और बहु-कूटपटयुक्त होते हैं।
रोग चक्र · Disease Cycle
संक्रमित बीज व फसल अवशेषों में कवकजाल व कोनिडिया के रूप में जीवित रहता है तथा हवा द्वारा फैलता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
गर्म और आर्द्र मौसम (25–32°C तापमान एवं ओस/वर्षा)।
3. Downy Mildew of Maize (मक्का का मृदुरोमिल आसिता रोग)
महत्व: राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु और तराई क्षेत्रों में मक्का की प्रारंभिक अवस्था में 30–60% तक पौध हानि करता है।
लक्षण · Symptoms
- पत्तियों के आधार भाग से पीली-सफेद लंबी धारियाँ (Chlorotic streaks) निकलती हैं (जिसे 'Half-leaf symptom' भी कहते हैं)।
- सुबह के समय आर्द्र मौसम में पत्तियों की निचली सतह पर सफेद रुई जैसी कवक वृद्धि (White downy growth of sporangiophores) दिखाई देती है।
- पौधे बौने व झाड़ीदार रह जाते हैं और नर मंजरी (Tassel) पत्तीनुमा हरी संरचना (Crazy top / Phyllody) में बदल जाती है।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- खेत के आसपास से काँस (Saccharum spontaneum) और जंगली ज्वार को जड़ से उखाड़कर नष्ट करें।
- बीज उपचार: Metalaxyl 35 WS (Apron) @ 4.0–6.0 g/kg बीज से उपचारित करें।
- खड़ी फसल में Metalaxyl 8% + Mancozeb 64% WP (Ridomil MZ) @ 2.5 g/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
अविकल्पी परजीवी (Obligate Oomycete)। अलैंगिक बीजाणुधानीधर (Conidiophores) वृक्ष की तरह द्विभाजी शाखित (Dichotomously branched) होते हैं और लैंगिक अवस्था में मोटी भित्ति वाले निषिक्तांड (Oospores) बनते हैं।
रोग चक्र · Disease Cycle
मृदा में पड़े Oospores और संक्रमित बीज व काँस (Saccharum spontaneum – P. philippinensis का संपार्श्विक परपोषी) प्राथमिक स्रोत हैं।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
21–26°C तापमान, सुबह के समय >90% आर्द्रता और खेत के आसपास काँस व जॉनसन घास (Sorghum halepense) की उपस्थिति।
4. Smuts of Sorghum: Grain, Loose, Long & Head Smut (ज्वार के चारों कंड रोग)
महत्व: ज्वार में दाना कंड (Grain Smut) सबसे प्रमुख और सर्वाधिक व्यापक है जो उपचार न करने पर 25% तक दाना नष्ट करता है।
लक्षण · Symptoms
- 1. दाना कंड (Grain Smut): बाली के अधिकांश दाने 5–15 मिमी लंबे, अंडाकार, भूरे-सफेद मजबूत झिल्ली से ढके बीजाणु थैलों (Sori) में बदल जाते हैं; झिल्ली जल्दी नहीं फटती और अंदर लंबी केंद्रीय 'Columella' होती है।
- 2. श्लथ कंड (Loose Smut): पौधे बौने रहते हैं और बालियाँ स्वस्थ पौधों से पहले निकल आती हैं; दानों के साथ-साथ तुष (Glumes) भी लंबे हो जाते हैं और झिल्ली खेत में ही जल्दी फट जाती है।
- 3. लंबा कंड (Long Smut): बाली में केवल कुछ ही दाने (Scattered grains) संक्रमित होते हैं, जो 2–4 सेमी लंबे, बेलनाकार और सिरों पर थोड़े मुड़े हुए (Cylindrical & slightly curved) सफेद झिल्ली युक्त सोरस में बदल जाते हैं।
- 4. शीर्ष कंड (Head Smut): पूरी बाली (Entire panicle/inflorescence) एक विशाल काले बीजाणु पिंड (Large single sorus) में बदल जाती है जिसके भीतर संवहनी तंतुओं का जाल (Network of dark filaments) होता है।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- दाना कंड व श्लथ कंड (बाह्य बीजोड़) के लिए सबसे सस्ता व 100% प्रभावी उपाय: गंधक धूल (Fine Sulphur Dust) @ 4.0 g/kg या Thiram / Captan @ 3.0 g/kg या Carboxin @ 2.0 g/kg से बीज उपचार करें।
- Head Smut (मृदा-जनित) के लिए 3 वर्ष का फसल चक्र अपनाएँ और संक्रमित बालियों को पॉलीथीन में बंद करके काटकर जला दें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
Basidiomycetes कुल के कंड कवक। Long smut में बीजाणु गेंदों (Spore balls) के रूप में जुड़े रहते हैं।
रोग चक्र · Disease Cycle
Grain Smut और Loose Smut बाह्य बीजोड़ (Externally seed-borne एवं दैहिक) हैं। Long Smut वायु-जनित (Air-borne floral infection) है। Head Smut मृदा-जनित (Soil-borne) एवं दैहिक है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
बुवाई के समय 20–28°C मृदा तापमान और मध्यम नमी Grain व Loose smut के अंकुर भेदन के लिए अनुकूल हैं।
5. Downy Mildew / Green Ear Disease of Bajra (बाजरा का मृदुरोमिल आसिता / हरित बाली रोग)
महत्व: भारत में सन् 1907 में ई.जे. बटलर (E.J. Butler) द्वारा रिपोर्ट किया गया; HB-3 संकर बाजरा में महामारी फैलाने वाला प्रमुख रोग।
लक्षण · Symptoms
- मृदुरोमिल अवस्था (Downy Mildew Stage): पत्तियों पर पीली-सफेद लंबी धारियाँ बनती हैं और सुबह के समय निचली सतह पर सफेद मखमली कवक वृद्धि दिखती है; बाद में पत्तियाँ भूरे रंग की होकर लंबाई में फट जाती हैं (Shredding of leaves)।
- हरित बाली अवस्था (Green Ear Stage): बाली (Earhead) के पुष्प भाग आंशिक या पूर्ण रूप से विकृत होकर मुड़ी हुई हरी पत्तियों जैसी संरचनाओं (Leafy structures / Phyllody) में बदल जाते हैं, जिससे बाली हरी झाड़ू जैसी दिखाई देती है।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- प्रतिरोधी संकर किस्में जैसे HHB 67 Improved (पहली मार्कर-असिस्टेड ब्रीडिंग किस्म), Pusa Composite 383, ICMH 356 उगाएँ।
- रोगी पौधों को 20–30 दिन की अवस्था में उखाड़कर जला दें (Roguing)।
- बीज उपचार: Metalaxyl 35 WS (Apron) @ 6.0 g/kg बीज से उपचारित करें तथा खड़ी फसल में Metalaxyl + Mancozeb (Ridomil MZ) @ 2.0 g/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
अविकल्पी परजीवी (Oomycete)। अलैंगिक अवस्था में Sporangia अंकुरित होकर चलबीजाणु (Zoospores) बनाते हैं और लैंगिक अवस्था में मोटी भित्ति वाले Oospores बनते हैं।
रोग चक्र · Disease Cycle
प्राथमिक संक्रमण मृदा में 5–10 वर्ष तक जीवित रहने वाले Oospores और बीज के साथ चिपके Oospores से होता है। द्वितीयक प्रसार हवा व वर्षा द्वारा Sporangia से होता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
20–25°C तापमान, सुबह >90% सापेक्षिक आर्द्रता और पत्तियों पर पानी की फिल्म।
6. Ergot of Bajra (बाजरा का अर्गट / चेपा रोग)
महत्व: संकर बाजरा का प्रमुख पुष्प रोग; इसके स्क्लेरोशिया में 'Ergotamine' व 'Agroclavine' विष होते हैं जिनके खाने से मनुष्यों व पशुओं में 'Ergotism' (गैंग्रीन व तंत्रिका विकार) हो जाता है।
लक्षण · Symptoms
- मधु-रस अवस्था (Honeydew Stage): फूल आते समय संक्रमित बालियों के फूलों से गुलाबी या हल्के शहद के रंग का गाढ़ा, चिपचिपा और मीठा द्रव (Pinkish sugary honeydew) टपकता दिखता है।
- स्क्लेरोशियम अवस्था (Sclerotial Stage): 10–15 दिन बाद इन फूलों में दानों के स्थान पर गहरे भूरे से काले, कठोर एवं सींग जैसे (Hard horn-like Sclerotia) पिंड बाहर निकले दिखाई देते हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- नमक के घोल से बीज शोधन (Brine Solution Flotation): बुवाई से पूर्व बीज को 10% नमक के घोल (1 kg नमक + 10 L पानी) में डालकर हिलाएँ; हल्के स्क्लेरोशिया ऊपर तैरने लगेंगे जिन्हें छानकर जला दें और भारी बीजों को साफ पानी से धोकर बोएँ।
- थिरम (Thiram) या कार्बेन्डाजिम @ 2.0 g/kg से बीज उपचार करें।
- बाली निकलने (Boot stage) एवं फूल आने पर Carbendazim 50 WP @ 1.0 g/L या Ziram @ 2.0 g/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
Ascomycete कवक। Honeydew में असंख्य अलैंगिक कोनिडिया होते हैं और Sclerotia अंकुरित होकर छतरीनुमा स्ट्रोमा में Perithecia व धागेनुमा Ascospores बनाते हैं।
रोग चक्र · Disease Cycle
प्राथमिक संक्रमण मृदा में पड़े या बीज में मिले Sclerotia से बनने वाले वायु-जनित Ascospores द्वारा होता है। द्वितीयक प्रसार कीटों (मक्खियों) और वर्षा की छींटों द्वारा Honeydew के कोनिडिया से होता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
पुष्पन (Flowering) के समय लगातार बादल छाए रहना, रिमझिम वर्षा, >80% आर्द्रता और 20–25°C तापमान (परागकण कम मिलने पर वर्तिकाग्र लंबे समय तक संवेदनशील रहता है)।
7. Early and Late Leaf Spots of Groundnut – Tikka Disease (मूँगफली का अगेती एवं पछेती पत्ती धब्बा / टिक्का रोग)
महत्व: मूँगफली का सबसे प्रमुख पर्ण रोग जो समय से पहले पत्तियाँ गिराकर (Severe defoliation) 30–50% तक फली उपज कम कर देता है।
लक्षण · Symptoms
- अगेती पत्ती धब्बा (Early Leaf Spot): बुवाई के 3–4 सप्ताह बाद दिखता है। पत्तियों की ऊपरी सतह पर बड़े, अनियमित से गोल, लाल-भूरे धब्बे बनते हैं जिनके चारों ओर स्पष्ट चमकीला पीला घेरा (Bright yellow halo) होता है।
- पछेती पत्ती धब्बा (Late Leaf Spot): बुवाई के 6–8 सप्ताह बाद दिखता है। धब्बे छोटे, एकदम गोल और गहरे काले (Carbon black / Velvety) होते हैं; पीला घेरा या तो अनुपस्थित होता है या बहुत धुँधला होता है और निचली सतह पर बीजाणु गुच्छों के संकेंद्रित वलय दिखते हैं (यह अधिक विनाशकारी है)।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- सहनशील किस्में जैसे Girnar-1, ICGS-11, TAG-24, Kadiri-3 की बुवाई करें तथा बाजरा या ज्वार के साथ अंतःसस्यन करें।
- रासायनिक छिड़काव: बुवाई के 35–40 दिन बाद Carbendazim 50 WP @ 1.0 g/L या Tebuconazole 25.9 EC @ 1.0 ml/L या Chlorothalonil 75 WP @ 2.0 g/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
C. arachidicola के कोनिडिया लंबे, रंगहीन से जैतूनी व 3–12 पटयुक्त होते हैं और दोनों सतहों पर बनते हैं; P. personata के कोनिडिया छोटे, बेलनाकार व 1–7 पटयुक्त होते हैं और मुख्यतः निचली सतह पर घने गुच्छों में बनते हैं।
रोग चक्र · Disease Cycle
प्राथमिक निवेशद्रव्य मृदा में पड़े फसल अवशेषों में कवकजाल व कोनिडिया हैं। द्वितीयक प्रसार हवा से कोनिडिया द्वारा होता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
25–30°C तापमान, >80% आर्द्रता, पत्तियों पर लंबे समय तक नमी और मैग्नीशियम की कमी।
8. Collar Rot / Aspergillus Crown Rot of Groundnut (मूँगफली का कॉलर रॉट / गलका रोग)
महत्व: बलुई एवं हल्की मृदाओं (विशेषकर राजस्थान और गुजरात) में पौध अवस्था में 20–40% तक पौधों की संख्या (Plant stand) घटा देता है।
लक्षण · Symptoms
- अंकुरण-पूर्व सड़न (Pre-emergence rot): बोए गए बीज अंकुरित होने से पहले ही मिट्टी में सड़ जाते हैं और उन पर काले काजल जैसे बीजाणु ढक जाते हैं।
- अंकुरण-पश्चात कॉलर रॉट (Post-emergence collar rot): उगते हुए पौधे के तने के भूमिगत एवं मिट्टी की सतह वाले हिस्से (Collar region / Hypocotyl) पर जल-सिक्त भूरा धब्बा बनता है, छाल गल जाती है, उस पर काला काजल जैसा कवक समूह (Black sooty mass of conidia) दिखता है और पौधा अचानक मुरझाकर मर जाता है।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- मूँगफली छीलते समय दानों के बीजचोल (Seed coat/Testa) को क्षतिग्रस्त न होने दें और बुवाई अधिक गहरी न करें।
- बीज उपचार: Trichoderma viride @ 10 g/kg बीज + मृदा में 2.5 kg/ha प्रयोग करें।
- रासायनिक बीज उपचार: Thiram 75 WS @ 3.0 g/kg या Tebuconazole 2 DS @ 1.5 g/kg या Carbendazim 12% + Mancozeb 63% WP @ 2.5 g/kg बीज से उपचारित करके ही बुवाई करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
कवक के कोनिडियोफोर के शीर्ष पर गोलाकार आशय (Globose vesicle) पर फाइलाइड्स और काले काँटेदार कोनिडिया की शृंखलाएँ बनती हैं। यह 'Oxalic acid' स्रावित कर ऊतकों को गलाता है।
रोग चक्र · Disease Cycle
बीज-जनित (Seed-borne) एवं मृदा-जनित (Soil-borne)।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
उच्च मृदा तापमान (30–35°C), कम मृदा नमी, छिलका उतारते समय दानों पर खरोंच लगना और बीज की अधिक गहरी बुवाई (>5 सेमी)।
9. Rhizoctonia Aerial / Web Blight of Soybean (सोयाबीन का राइजोक्टोनिया अंगमारी / वेब ब्लाइट)
महत्व: मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड के खरीफ सोयाबीन क्षेत्रों में 30–35% तक उपज हानि पहुँचाने वाला प्रमुख रोग।
लक्षण · Symptoms
- पौध अवस्था में जड़ व तना गलन (Seedling blight) तथा वानस्पतिक अवस्था में निचली पत्तियों, डंठलों और फलियों पर जल-सिक्त हरे-भूरे धब्बे बनते हैं।
- अधिक आर्द्रता में पत्तियाँ मकड़ी के जाले जैसे भूरे कवकजाल (Spider-web like mycelium) से आपस में चिपक जाती हैं और उन पर राई के दाने जैसे भूरे-काले स्क्लेरोशिया दिखाई देते हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- उचित जल निकास रखें तथा पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 सेमी रखें।
- Carboxin 37.5% + Thiram 37.5% (Vitavax Power) @ 3.0 g/kg से बीज उपचार करें।
- खड़ी फसल में Hexaconazole 5 EC @ 2.0 ml/L या Pyroclostrobin 20 WG @ 1.0 g/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
समकोण (90°) पर शाखित कवक तंतु एवं बहुसंख्यक छोटे भूरे स्क्लेरोशिया।
रोग चक्र · Disease Cycle
मृदा में पड़े स्क्लेरोशिया और संक्रमित बीज प्राथमिक स्रोत हैं; वर्षा की बौछारों से मिट्टी के कणों के साथ कवक निचली पत्तियों पर पहुँचता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
26–30°C तापमान, लगातार वर्षा, >90% आर्द्रता और घनी कैनोपी।
10. Ascochyta Blight of Gram (चने का एस्कोकाइटा अंगमारी / चाँदनी रोग)
महत्व: उत्तर-पश्चिमी भारत (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल) में चने का अत्यंत विनाशकारी हवाई अंगमारी रोग।
लक्षण · Symptoms
- तने, पत्तियों और फलियों सहित पौधे के सभी वायवीय भागों (Above-ground parts) पर गोल से लंबे भूरे धब्बे बनते हैं।
- इन धब्बों के भीतर काले रंग की सूक्ष्म सुई की नोक जैसी संरचनाएँ (Pin-head sized black Pycnidia) स्पष्ट संकेंद्रित वलयों (Concentric rings) में सजी दिखाई देती हैं।
- तने पर घेरा बनने (Stem girdling) से ऊपरी शाखाएँ टूटकर सूख जाती हैं और खेत में गोल चकत्तों (Circular patches) में फसल झुलसी दिखती है।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- प्रतिरोधी किस्में जैसे Pusa 261, गौरव (Gaurav), GNG 469 (Samrat), PBG 1 की बुवाई करें।
- Thiram + Carbendazim (2:1) @ 3.0 g/kg से बीज उपचार करें।
- खड़ी फसल में Chlorothalonil 75 WP @ 2.0 g/L या Mancozeb @ 2.5 g/L या Azoxystrobin + Tebuconazole @ 1.0 ml/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
अपूर्ण कवक जो फ्लास्क के आकार के Pycnidia में पारदर्शी, एक-से-दो कोशिकीय कोनिडिया बनाता है।
रोग चक्र · Disease Cycle
संक्रमित बीज (Internally & externally seed-borne) और फसल अवशेष प्राथमिक स्रोत हैं। वर्षा की बौछारों (Rain-splash) और हवा से द्वितीयक प्रसार होता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
सर्दियों में (जनवरी-फरवरी) 20°C के आसपास तापमान, पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली बार-बार वर्षा और >85% आर्द्रता।
11. Fusarium Wilt of Gram (चने का उकठा / मुरझान रोग)
महत्व: भारत में चने का सबसे व्यापक संवहनी रोग जो पौध अवस्था से फली बनने तक 10–50% तक नुकसान करता है।
लक्षण · Symptoms
- पौधे का ऊपरी भाग और पत्तियाँ हरी रहते हुए या हल्की पीली पड़कर अचानक नीचे लटक जाती हैं (Drooping of petioles and rachis) और पूरा पौधा सूख जाता है।
- रोगी पौधे को उखाड़ने पर जड़ें बाहरी रूप से सड़ी हुई नहीं दिखतीं (छाल सुरक्षित रहती है), किंतु मुख्य मूसला जड़ को लंबाई में चीरने (Vertical splitting of tap root) पर अंदर का जाइलम संवहन ऊतक गहरा भूरा या काला (Dark brown to black vascular discoloration) दिखाई देता है।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- गहरी जुताई एवं बुवाई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के प्रथम पखवाड़े में (जब मृदा तापमान कम हो जाए) तथा 8–10 सेमी गहराई पर करें।
- प्रतिरोधी किस्में जैसे Avrodhi (अवरोधी), JG-315, JG-74, Pusa 212, विजय की बुवाई करें।
- बीज उपचार: Trichoderma viride @ 4 g + Carboxin + Thiram @ 2 g/kg बीज से उपचारित करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
कवक तीन प्रकार के बीजाणु बनाता है: Microconidia, दरांती के आकार के Macroconidia और मोटी भित्ति वाले विश्राम बीजाणु Chlamydospores। यह 'Fusaric acid' टॉक्सिन व टायलोसिस द्वारा जाइलम वाहिकाओं को अवरुद्ध करता है।
रोग चक्र · Disease Cycle
मृदा में Chlamydospores के रूप में बिना परपोषी के भी 6 वर्ष तक जीवित रहता है तथा बीज-जनित भी है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
25°C के आसपास मृदा तापमान, जल्दी बुवाई (अक्टूबर के प्रथम पखवाड़े में गर्म मिट्टी) और कम मृदा नमी।
12. Dry Root Rot of Gram (चने का शुष्क जड़ गलन रोग)
महत्व: फसल पकने की अवस्था में तापमान बढ़ने और सूखा पड़ने पर चने का प्रमुख मृदा-जनित रोग।
लक्षण · Symptoms
- फूल आने व फली बनने की अवस्था पर पौधे अचानक पुआल जैसे सूख जाते हैं।
- उखाड़ने पर पौधा आसानी से जमीन से निकल आता है क्योंकि सभी पार्श्व जड़ें (Lateral roots) सड़कर टूट चुकी होती हैं और मुख्य जड़ का निचला सिरा सड़कर भुरभुरा (Brittle & shredded) हो जाता है।
- जड़ की छाल हटाने पर अंदर व छाल के नीचे कोयले के चूरे जैसे असंख्य सूक्ष्म काले स्क्लेरोशिया (Pin-head black microsclerotia) दिखाई देते हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
- फली बनते समय यदि सूखा पड़े तो एक हल्की सिंचाई अवश्य करें ताकि मृदा तापमान कम रहे।
- बीज को Trichoderma harzianum @ 10 g/kg या Carbendazim @ 2 g/kg से उपचारित करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology
यह कवक मृदा में काले सूक्ष्म स्क्लेरोशिया (Microsclerotia) बनाता है और तने पर Pycnidial अवस्था (Macrophomina phaseolina) बनाता है।
रोग चक्र · Disease Cycle
मृदा एवं फसल अवशेषों में Microsclerotia के रूप में जीवित रहता है।
अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology
उच्च मृदा तापमान (30–35°C) और मृदा में नमी की कमी (Moisture stress / Drought) इसके मुख्य प्रेरक हैं।
तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables
तालिका 2.1: ज्वार के चारों कंड (Smut) रोगों का तुलनात्मक विवरण
| रोग का नाम | रोगजनक (Pathogen) | संक्रमण की प्रकृति | सोरस (Sorus) एवं झिल्ली की विशेषता |
|---|---|---|---|
| दाना कंड (Grain Smut) | Sporisorium sorghi | बाह्य बीजोड़ (Externally seed-borne), दैहिक | अधिकांश दाने प्रभावित; मजबूत सफेद-भूरी झिल्ली जो जल्दी नहीं फटती |
| श्लथ कंड (Loose Smut) | Sporisorium cruentum | बाह्य बीजोड़, दैहिक (पौधे बौने) | झिल्ली बहुत पतली जो बाली निकलते ही खेत में फट जाती है, तुष लंबे |
| लंबा कंड (Long Smut) | Tolyposporium ehrenbergii | वायु-जनित पुष्प संक्रमण (Air-borne, स्थानीय) | केवल कुछ दाने प्रभावित; सोरस 2–4 सेमी लंबा व सिरे पर मुड़ा हुआ |
| शीर्ष कंड (Head Smut) | Sporisorium reilianum | मृदा-जनित (Soil-borne), दैहिक | पूरी बाली एक ही विशाल काले बीजाणु पिंड और रेशों के जाल में बदल जाती है |
तालिका 2.2: चने का उकठा (Fusarium Wilt) बनाम शुष्क जड़ गलन (Dry Root Rot)
| लक्षण / आधार | चने का उकठा (Fusarium Wilt) | शुष्क जड़ गलन (Dry Root Rot) |
|---|---|---|
| रोगजनक | Fusarium oxysporum f.sp. ciceri | Rhizoctonia bataticola (Macrophomina phaseolina) |
| अनुकूल तापमान व नमी | 25°C के आसपास तापमान | उच्च तापमान (30–35°C) एवं गंभीर नमी तनाव (सूखा) |
| पौधा उखाड़ने पर जड़ की स्थिति | जड़ें मजबूत, पार्श्व जड़ें सलामत, बाहरी छाल नहीं सड़ती | पार्श्व जड़ें नष्ट, मुख्य जड़ भुरभुरी होकर आसानी से टूट जाती है |
| आंतरिक निदान चिह्न | जड़ को लंबाई में चीरने पर केवल मध्य जाइलम काला/भूरा | छाल के नीचे कोयले के चूरे जैसे काले Microsclerotia दिखते हैं |
सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations
1. बाजरा के अर्गट नियंत्रण हेतु 10% नमक का घोल (Brine Solution 10% w/v)
उदाहरण: 20 किलोग्राम बाजरा बीज को भिगोकर स्क्लेरोशिया अलग करने के लिए यदि 25 लीटर पानी लिया जाए, तो 10% घोल बनाने हेतु आवश्यक नमक:
नमक = (10 × 25) / 100 = 2.5 किलोग्राम साधारण नमक।
2. बीज उपचार हेतु कवकनाशी की मात्रा की गणना
उदाहरण: बाजरा के हरित बाली रोग नियंत्रण हेतु 5 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए (बीज दर = 4 kg/ha) Metalaxyl 35 WS @ 6 g/kg की दर से आवश्यक मात्रा:
कुल बीज = 5 × 4 = 20 kg → आवश्यक Metalaxyl = 20 × 6 = 120 ग्राम।
माइंड मैप · Mind Map
[Lecture 02: मक्का, ज्वार, बाजरा, मूँगफली, सोयाबीन एवं चना के रोग]
├── 1. मक्का (Maize)
│ ├── Banded Leaf & Sheath Blight (Rhizoctonia solani f.sp. sasakii - Stripping lower leaves, Validamycin)
│ ├── Southern Leaf Blight (Bipolaris maydis - Race T, cms-T cytoplasm, 1970 epidemic)
│ └── Downy Mildew (Peronosclerospora sorghi / P. philippinensis - Half-leaf streak, Metalaxyl)
├── 2. ज्वार (Sorghum - 4 Smuts)
│ ├── Grain Smut (Sporisorium sorghi) & Loose Smut (S. cruentum) → Externally seed-borne (Sulphur @ 4g/kg)
│ ├── Long Smut (Tolyposporium ehrenbergii) → Air-borne floral
│ └── Head Smut (Sporisorium reilianum) → Soil-borne systemic
├── 3. बाजरा (Bajra / Pearl Millet)
│ ├── Downy Mildew / Green Ear (Sclerospora graminicola - Butler 1907, Phyllody, Metalaxyl)
│ └── Ergot (Claviceps fusiformis - Pink honeydew → Horn sclerotia, 10% Brine solution)
├── 4. मूँगफली (Groundnut) एवं सोयाबीन (Soybean)
│ ├── Tikka Disease: Early (Cercospora arachidicola - Yellow halo) & Late (Phaeoisariopsis personata)
│ ├── Collar Rot (Aspergillus niger - Black conidial mass on hypocotyl)
│ └── Soybean Aerial/Web Blight (Rhizoctonia solani)
└── 5. चना (Gram / Chickpea)
├── Ascochyta Blight (Ascochyta rabiei - Concentric pycnidia,Stem girdling)
├── Wilt (Fusarium oxysporum f.sp. ciceri - Dark xylem, Avrodhi variety)
└── Dry Root Rot (Rhizoctonia bataticola / Macrophomina phaseolina - Microsclerotia under bark)
प्रवाह चित्र · Flowchart
[बाजरा के अर्गट (Claviceps fusiformis) का द्वैध रोग चक्र]
मृदा में पड़े या बीज में मिले कठोर काले स्क्लेरोशिया (Sclerotia - Primary Inoculum)
↓ (वर्षा होने पर अंकुरण)
छतरीनुमा स्ट्रोमा में Perithecia और वायु-जनित धागेनुमा Ascospores का निर्माण
↓ (फूल आने पर वर्तिकाग्र पर संक्रमण)
प्रथम अवस्था: 'Honeydew Stage' — फूलों से गुलाबी मीठा चिपचिपा स्राव (लाखों Conidia युक्त)
↓ (मक्खियों/कीटों एवं वर्षा की छींटों द्वारा स्वस्थ फूलों पर द्वितीयक प्रसार)
द्वितीय अवस्था: 'Sclerotial Stage' — 10–15 दिन बाद अंडाशय कठोर, काले सींग जैसे Sclerotia में परिवर्तित
परीक्षा टिप्स · Exam Tips
- मूँगफली के टिक्का रोग में 'अगेती (Early) = Arachidicola = पीला घेरा स्पष्ट' और 'पछेती (Late) = Personata = गहरे काले धब्बे (अधिक विनाशकारी)' याद रखें।
- ज्वार के कंड रोगों में केवल Long Smut वायु-जनित (Air-borne) है और केवल Head Smut मृदा-जनित (Soil-borne) है; शेष दोनों (Grain व Loose) बाह्य बीजोड़ हैं जो केवल 4 g/kg सल्फर से नियंत्रित हो जाते हैं।
- चने के उकठा (Wilt) में जड़ को चीरने पर जाइलम काला दिखता है, जबकि Dry Root Rot में छाल के नीचे काले Microsclerotia दिखते हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision
- मक्का का Southern Leaf Blight (Bipolaris maydis Race T): Texas Male Sterile Cytoplasm (cms-T) पर T-toxin द्वारा महामारी।
- बाजरा का Green Ear (Sclerospora graminicola): E.J. Butler (1907), बाली हरी पत्तियों में बदल जाती है (Phyllody), Metalaxyl @ 6 g/kg बीज उपचार।
- बाजरा का Ergot (Claviceps fusiformis): Honeydew अवस्था + Sclerotia (Ergotamine), 10% नमक के घोल से बीज शोधन।
- मूँगफली का Collar Rot (Aspergillus niger): कॉलर भाग पर काला काजल जैसा चूर्ण, Thiram / Tebuconazole से बीज उपचार।
- चने का उकठा (Fusarium oxysporum f.sp. ciceri): प्रतिरोधी किस्म 'अवरोधी (Avrodhi)', देर से और गहरी बुवाई (8–10 सेमी) से बचाव।
MCQs — उत्तर एवं व्याख्या
1. 1970 में अमेरिका में संकर मक्का में Southern Corn Leaf Blight (Bipolaris maydis) की महामारी किस कोशिकाद्रव्य के कारण फैली थी?
- (A) S-cytoplasm
- (B) C-cytoplasm
- (C) Texas Male Sterile Cytoplasm (cms-T)
- (D) Tift 23A cytoplasm
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) — cms-T कोशिकाद्रव्य Bipolaris maydis के Race T द्वारा स्रावित HmT-toxin के प्रति अत्यंत संवेदनशील था।
2. ज्वार के किस कंड रोग (Smut) का रोगजनक मृदा-जनित (Soil-borne) होता है और पूरी बाली को एक बड़े सोरस में बदल देता है?
- (A) दाना कंड (Grain Smut)
- (B) श्लथ कंड (Loose Smut)
- (C) लंबा कंड (Long Smut)
- (D) शीर्ष कंड (Head Smut – Sporisorium reilianum)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (D) — Head Smut (Sporisorium reilianum) मृदा-जनित दैहिक रोग है जिसमें संपूर्ण पुष्पक्रम एक बड़े बीजाणु पिंड में बदल जाता है।
3. बाजरा के हरित बाली (Green Ear) रोग को भारत में सर्वप्रथम सन् 1907 में किसने रिपोर्ट किया था?
- (A) ई.जे. बटलर (E.J. Butler)
- (B) के.सी. मेहता
- (C) एम. मित्रा
- (D) जे.एफ. दस्तूर
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — भारतीय पादप रोगविज्ञान के जनक ई.जे. बटलर (E.J. Butler) ने 1907 में बाजरा के Sclerospora graminicola को रिपोर्ट किया था।
4. बाजरा के बीज से अर्गट के स्क्लेरोशिया (Sclerotia) अलग करने के लिए कितने प्रतिशत नमक के घोल का प्रयोग किया जाता है?
- (A) 2% नमक का घोल
- (B) 5% नमक का घोल
- (C) 10% नमक का घोल (10% Brine solution)
- (D) 25% नमक का घोल
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) — 10% नमक के घोल में डालने पर हल्के स्क्लेरोशिया ऊपर तैरने लगते हैं और भारी स्वस्थ बीज नीचे बैठ जाते हैं।
5. मूँगफली के पछेती पत्ती धब्बा (Late Leaf Spot) का रोगजनक कौन सा है?
- (A) Cercospora arachidicola
- (B) Phaeoisariopsis personata
- (C) Aspergillus niger
- (D) Puccinia arachidis
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — अगेती पत्ती धब्बा Cercospora arachidicola से और पछेती पत्ती धब्बा Phaeoisariopsis personata से होता है।
6. मूँगफली के कॉलर रॉट (Collar Rot) रोग में तने के आधार भाग पर किस रंग का बीजाणु समूह बनता है?
- (A) सफेद रुई जैसा
- (B) गुलाबी चिपचिपा
- (C) काला काजल जैसा (Black sooty conidial mass)
- (D) पीला चूर्ण जैसा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) — Aspergillus niger कॉलर क्षेत्र पर काले काजल जैसे कोनिडिया का समूह बनाता है।
7. चने के किस रोग में जड़ को लंबाई में चीरने (Vertical splitting) पर अंदर का जाइलम काला/भूरा दिखाई देता है?
- (A) एस्कोकाइटा अंगमारी
- (B) चने का उकठा (Fusarium Wilt)
- (C) शुष्क जड़ गलन
- (D) ग्रे मोल्ड
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — Fusarium oxysporum f.sp. ciceri संवहन तंत्र (Xylem) में प्रवेश कर उसे भूरा-काला कर देता है।
8. चने के शुष्क जड़ गलन (Dry Root Rot) रोग की पिक्नीडियल अवस्था का नाम क्या है?
- (A) Macrophomina phaseolina
- (B) Didymella rabiei
- (C) Thanatephorus cucumeris
- (D) Cochliobolus heterostrophus
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — Rhizoctonia bataticola इसकी स्क्लेरोशियल अवस्था है और Macrophomina phaseolina इसकी पिक्नीडियल अवस्था है।
9. मक्का के Banded Leaf and Sheath Blight के प्रसार को भुट्टे तक पहुँचने से रोकने के लिए कौन सी यांत्रिक क्रिया की जाती है?
- (A) नर मंजरी हटाना (Detasseling)
- (B) निचले 2–3 पर्णच्छदों/पत्तियों को तोड़कर हटाना (Stripping of lower leaves)
- (C) जड़ों की छँटाई
- (D) ऊपरी पत्तियाँ काटना
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — निचली संक्रमित पत्तियों व पर्णच्छदों को हटाने (Stripping) से कवक का मिट्टी से भुट्टे तक का संपर्क टूट जाता है।
10. ज्वार के दाना कंड (Grain Smut) के नियंत्रण के लिए सबसे सस्ता और प्रभावी बीज उपचार क्या है?
- (A) गंधक धूल (Sulphur dust) @ 4 g/kg बीज
- (B) स्ट्रेप्टोसाइक्लिन
- (C) बोर्डो मिश्रण
- (D) कॉपर सल्फेट
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — Sporisorium sorghi बाह्य बीजोड़ है, अतः 4 ग्राम गंधक धूल प्रति किलो बीज से उपचार द्वारा पूर्णतः नियंत्रित हो जाता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. बाजरा के हरित बाली रोग के नियंत्रण हेतु विकसित प्रथम मार्कर-असिस्टेड संकर किस्म कौन सी है?
HHB 67 Improved।
2. मक्का के Philippine Downy Mildew (Peronosclerospora philippinensis) का मुख्य जंगली संपार्श्विक परपोषी (Collateral Host) कौन सा खरपतवार है?
काँस (Saccharum spontaneum)।
3. चने के एस्कोकाइटा अंगमारी (Ascochyta rabiei) की लैंगिक अवस्था का नाम क्या है?
Didymella rabiei (या Mycosphaerella rabiei)।
4. बाजरा के अर्गट में मनुष्यों व पशुओं के लिए विषैला एल्कलॉइड कौन सा होता है?
एरगोटामिन (Ergotamine) एवं एग्रोक्लेविन।
5. चने के उकठा (Wilt) रोग के प्रति प्रसिद्ध प्रतिरोधी किस्म का नाम लिखिए।
अवरोधी (Avrodhi) एवं JG-315।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. मूँगफली के अगेती (Early) एवं पछेती (Late) पत्ती धब्बा (टिक्का रोग) में क्या अंतर है?
अगेती पत्ती धब्बा (Cercospora arachidicola) बुवाई के 3–4 सप्ताह बाद आता है और धब्बों के चारों ओर स्पष्ट पीला आभामंडल (Yellow halo) होता है। पछेती पत्ती धब्बा (Phaeoisariopsis personata) 6–8 सप्ताह बाद आता है, धब्बे गहरे काले व गोल होते हैं, पीला घेरा अनुपस्थित रहता है और निचली सतह पर बीजाणु संकेंद्रित वलयों में बनते हैं।
2. बाजरा के अर्गट (Ergot) रोग की दोनों अवस्थाओं का वर्णन कीजिए।
प्रथम अवस्था 'Honeydew stage' है जिसमें पुष्पन के समय संक्रमित फूलों से गुलाबी चिपचिपा मीठा रस (कोनिडिया युक्त) टपकता है जो कीटों द्वारा फैलता है। दूसरी अवस्था 'Sclerotial stage' है जिसमें 10–15 दिन बाद दानों की जगह काले, कठोर और सींग जैसे स्क्लेरोशिया बन जाते हैं।
3. चने के उकठा (Wilt) रोग के प्रबंधन हेतु सस्य (Cultural) उपाय लिखिए।
1. बुवाई अक्टूबर के अंत या नवंबर के प्रथम पखवाड़े में करें जब मृदा तापमान कम (<25°C) हो जाए। 2. बीज को 8–10 सेमी गहराई पर बोएँ। 3. 3–4 वर्ष का फसल चक्र अपनाएँ और 'अवरोधी' या 'JG-315' जैसी प्रतिरोधी किस्में बोएँ।
4. बाजरा में 'हरित बाली' (Green Ear) क्यों बनती है?
Sclerospora graminicola के दैहिक संक्रमण के कारण बाली के पुष्प ऊतकों में ऑक्सिन (IAA) हार्मोन का असंतुलन और अतिवृद्धि (Hypertrophy एवं Hyperplasia) होती है, जिससे पुंकेसर, स्त्रीकेसर और तुष दानों के बजाय मुड़ी हुई हरी पत्तियों (Phyllody) में रूपांतरित हो जाते हैं।
5. मूँगफली के कॉलर रॉट (Collar Rot) से बचाव के तीन प्रमुख उपाय लिखिए।
1. छिलका उतारते समय दानों की बाहरी झिल्ली (Testa) को चोट न लगने दें। 2. बुवाई अधिक गहरी न करें। 3. बीज को Thiram @ 3 g/kg या Tebuconazole @ 1.5 g/kg या Trichoderma viride @ 10 g/kg से उपचारित करके बोएँ।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. ज्वार के चारों कंड रोगों (Grain Smut, Loose Smut, Long Smut एवं Head Smut) के रोगजनकों, लक्षणों, रोग चक्र के अंतर तथा प्रबंधन का विस्तृत वर्णन कीजिए।
चारों रोगजनकों (Sporisorium sorghi, S. cruentum, Tolyposporium ehrenbergii, S. reilianum) के नाम, बाली व दानों पर बनने वाले सोरस का आकार व झिल्ली की मजबूती, बाह्य बीजोड़ बनाम वायु-जनित बनाम मृदा-जनित संक्रमण की तुलना तथा सल्फर/थिरम बीज उपचार और फसल चक्र द्वारा प्रबंधन का वर्णन करें।
2. बाजरा के मृदुरोमिल आसिता (Downy Mildew / Green Ear) एवं अर्गट (Ergot) रोग का लक्षण, रोगजनक, रोग चक्र और समन्वित प्रबंधन सहित सविस्तर वर्णन कीजिए।
Sclerospora graminicola की पर्ण अवस्था व हरित बाली अवस्था, Oospores व Zoospores की भूमिका और Metalaxyl उपचार समझाएँ; साथ ही Claviceps fusiformis की Honeydew व Sclerotial अवस्था, 10% नमक घोल शोधन और कवकनाशी छिड़काव का विवरण दें।
3. चने के प्रमुख रोगों (Ascochyta Blight, Fusarium Wilt एवं Dry Root Rot) के लक्षणों की तुलना करते हुए उनके एकीकृत रोग प्रबंधन (IDM) पैकेज का वर्णन कीजिए।
Ascochyta rabiei (वायवीय अंगों पर संकेंद्रित Pycnidia), Fusarium oxysporum f.sp. ciceri (जाइलम का काला पड़ना) और Rhizoctonia bataticola (छाल के नीचे काले Microsclerotia) का अंतर स्पष्ट करें और बुवाई समय, गहराई, Trichoderma + रासायनिक बीज उपचार एवं पर्ण छिड़काव का पैकेज लिखें।
परीक्षा वन-लाइनर्स
- मक्का के Southern Leaf Blight में कवक का 'Race T' माइटोकॉन्ड्रिया-विशिष्ट 'HmT-toxin' उत्पन्न करता है।
- ज्वार के दाना कंड (Grain Smut) को 'Kernel Smut' या 'Covered Smut of Sorghum' भी कहा जाता है।
- मूँगफली के टिक्का रोग में 'Cercospora' द्वारा लाल रंग का प्रकाश-सक्रिय जीवविष 'Cercosporin' उत्पन्न किया जाता है।
- चने के उकठा रोग में मुख्य मूसला जड़ को चीरने पर जाइलम वाहिकाओं में 'Fusaric acid' के कारण कालापन दिखता है।
- बाजरा के हरित बाली रोग के नियंत्रण हेतु Metalaxyl 35 WS (Apron) @ 6 g/kg बीज उपचार सर्वाधिक प्रभावी है।
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPATH 311 Smart Notes।





