PPHYS 311 Lecture 08: खनिज परिवहन, नर्न्स्ट समीकरण (Nernst Equation), आयन पंप एवं आयन चैनल

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PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
LECTURE 08 / 32 · PPHYS 311

खनिज परिवहन, नर्न्स्ट समीकरण (Nernst Equation), आयन पंप एवं आयन चैनल

Mineral Transport, Nernst Equation, Ion Pumps and Ion Channels

Passive & Active Mineral Uptake, Donnan Equilibrium, Nernst Equation, H+-ATPase Proton Pumps, Ion Channels & Carriers

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Mineral Transport, Nernst Equation, Ion Pumps and Ion Channels (Theory • Lecture 08)
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • मृदा से जड़ में खनिज आयनों के निष्क्रिय (Passive) बनाम सक्रिय (Active) अवशोषण, बाह्य मुक्त स्थान (Outer Free Space / Apparent Free Space – Briggs, 1957) और डोनन साम्यावस्था (Donnan Equilibrium, 1911) को समझना।
  • विद्युत-रासायनिक विभव प्रवणता और नर्न्स्ट समीकरण (Nernst Equation) की सहायता से यह गणना करना कि किसी धनायन या ऋणायन का अवशोषण सक्रिय हो रहा है या निष्क्रिय।
  • झिल्ली परिवहन प्रोटीनों के तीनों वर्गों—आयन चैनल (Ion Channels), वाहक / ट्रांसपोर्टर (Carriers: Uniport, Symport, Antiport) और आयन पंप (H+-ATPase, H+-PPase, Ca2+-ATPase एवं ABC Transporters)—की क्रियाविधि सीखना।

प्रस्तावना · Introduction

पादप कोशिकाओं की प्लाज्मा झिल्ली एक लिपिड द्वि-परत (Hydrophobic lipid bilayer) होती है जो आवेशित खनिज आयनों (K+, NO3−, H2PO4−, Ca2+) के लिए लगभग अपारगम्य होती है। फिर भी पौधे की जड़ें मृदा के अत्यंत तनु घोल से खनिज आयनों को अपनी कोशिकाओं के अंदर 100 से 1000 गुना अधिक सांद्रता में एकत्रित कर लेती हैं! यह चमत्कार कोशिका झिल्ली में धँसे विशिष्ट परिवहन प्रोटीनों—आयन पंप (Ion Pumps), वाहक (Carriers/Cotransporters) और आयन चैनल (Ion Channels)—तथा विद्युत-रासायनिक विभव (जिसकी गणना नर्न्स्ट समीकरण से की जाती है) द्वारा संपन्न होता है।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

नर्न्स्ट समीकरण (Nernst Equation – Walther Nernst, 1889)

यह समीकरण किसी आयन की झिल्ली के दोनों ओर की साम्यावस्था सांद्रता अनुपात (Co/Ci) और झिल्ली के विद्युत विभवांतर (ΔEn — Nernst potential) के बीच गणितीय संबंध स्थापित करता है: ΔEn (in mV at 25∘C)=59.2zlog10(CoCi)। इसकी सहायता से यह पता लगाया जाता है कि कोई आयन निष्क्रिय रूप से अंदर आ रहा है या सक्रिय पंप द्वारा!

डोनन साम्यावस्था (Donnan Equilibrium – F.G. Donnan, 1911)

कोशिका के अंदर बड़े अ-विसरणीय स्थिर ऋणायनों (Fixed/Indiffusible anions — जैसे ऋणावेशित प्रोटीन व न्यूक्लिक अम्ल) की उपस्थिति के कारण विद्युत संतुलन बनाए रखने हेतु बिना किसी उपापचयी ऊर्जा (ATP) के बाहरी घोल से धनायनों (K+, Ca2+) का सांद्रता प्रवणता के विपरीत निष्क्रिय संचय।

वाहक संकल्पना (Carrier Concept – Van den Honert, 1937)

वैन डेन होनर्ट के अनुसार कोशिका झिल्ली में विशिष्ट घूमने या आकार बदलने वाले प्रोटीन 'वाहक' (Carriers) होते हैं जो बाहरी सतह पर आयन से जुड़कर 'आयन-वाहक संकुल' बनाते हैं और झिल्ली के भीतर जाकर आयन को छोड़ देते हैं (एंजाइम-सरूप संतृप्ति गतिकी – Epstein, 1952)।

प्राथमिक बनाम द्वितीयक सक्रिय परिवहन (Primary vs Secondary Active Transport)

'प्राथमिक सक्रिय परिवहन' में झिल्ली का H+-ATPase पंप सीधे ATP तोड़कर H+ आयनों को बाहर फेंकता है जिससे प्रोटॉन प्रवणता (Proton motive force) बनती है; और 'द्वितीयक सक्रिय परिवहन' में इसी लौटते हुए H+ की ऊर्जा के साथ जोड़कर (Symport या Antiport) अन्य खनिज आयनों (NO3−, H2PO4−, Na+) को सक्रिय रूप से खींचा जाता है!

वर्गीकरण · Classification

झिल्ली परिवहन प्रोटीनों के 3 मुख्य वर्ग (Three Classes of Membrane Transport Proteins)

1. आयन चैनल (Ion Channels — सबसे तेज, केवल निष्क्रिय परिवहन): झिल्ली में पानी से भरे छिद्र जो खुलने (Gated: Voltage-gated या Ligand-gated) पर प्रति सेकंड 106 से 108 आयनों को विद्युत-रासायनिक प्रवणता की दिशा में (Downhill / Facilitated diffusion) बिना ऊर्जा के अत्यंत तेजी से जाने देते हैं (इसकी खोज हेतु नेहर एवं सकमैन को 1991 में नोबेल पुरस्कार मिला: 'Patch-clamp technique')!
2. वाहक / ट्रांसपोर्टर / पर्मिएज (Carriers / Transporters — मध्यम गति): ये एक बार में 1 या कुछ आयनों से जुड़कर अपना त्रिविम आकार (Conformational change) बदलते हैं; इनकी गति 102 से 104 आयन/सेकंड होती है। ये 3 प्रकार के होते हैं:
• (a) यूनीपोर्टर (Uniporter): केवल एक ही प्रकार के आयन/अणु को एक दिशा में ले जाता है (सुसाध्य विसरण)।
• (b) सिम्पोर्टर / सह-परिवहन (Symporter / Co-transporter): दो भिन्न आयनों (जैसे H+ + NO3− या H+ + H2PO4− या H+ + सुक्रोज) को एक ही दिशा में साथ अंदर लाता है!
• (c) एंटीपोर्टर / प्रति-परिवहन (Antiporter / Exchanger): दो आयनों को विपरीत दिशाओं में (जैसे रिक्तिका में H+ बाहर और Na+ या Ca2+ अंदर — NHX1 लवणता सहिष्णुता जीन!) ले जाता है।
3. आयन पंप / एटीपीएज (Ion Pumps / ATPases — प्राथमिक सक्रिय परिवहन): ये सीधे ATP या पाइरॉफॉस्फेट (PPi) की रासायनिक ऊर्जा खर्च करके आयनों को विद्युत-रासायनिक प्रवणता के विपरीत (Uphill) पंप करते हैं (गति: 100 से 102 आयन/सेकंड)।

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • नर्न्स्ट समीकरण से सक्रिय बनाम निष्क्रिय अवशोषण की पहचान (How Nernst Equation Distinguishes Active vs Passive Uptake):
    मान लीजिए एक जड़ कोशिका का वास्तविक झिल्ली विभव (Membrane potential) −118 mV (अंदर ऋणात्मक) है। बाहरी मृदा घोल में K+ की सांद्रता (Co) = 1 mM है। नर्न्स्ट समीकरण (ΔEn=59.2log(Co/Ci)) के अनुसार −118 mV का ऋणात्मक विद्युत आकर्षण अकेले ही बिना किसी ATP खर्च के कोशिका के अंदर 100 गुना अधिक K+ (Ci=100 mM) खींचकर रख सकता है!
    • नियम 1 (धनायनों / Cations जैसे K+, Ca2+, Mg2+ के लिए): चूँकि कोशिका के अंदर ऋण आवेश (−110 से −150 mV) होता है, इसलिए धनायन अंदर की ओर आकर्षित होते हैं; केवल जब वास्तविक आंतरिक सांद्रता नर्न्स्ट साम्य से भी अधिक हो तब उनका सक्रिय अवशोषण होता है (जबकि Ca2+ और Na+ को कोशिका से बाहर निकालने / Efflux के लिए सक्रिय पंप लगता है!)।
    • नियम 2 (ऋणायनों / Anions जैसे NO3−, H2PO4−, SO42−, Cl− के लिए): चूँकि कोशिका के अंदर पहले से ऋण आवेश है जो ऋणायनों को प्रतिकर्षित करता है और अंदर उनकी सांद्रता भी बाहर से अधिक है, इसलिए पौधों में सभी ऋणायनों (NO3−, H2PO4−, SO42−) का कोशिका में प्रवेश सदैव 100% सक्रिय परिवहन (H+-Symport) द्वारा ही होता है!
  • एपस्टीन की द्वैध समतापी अवशोषण प्रणाली (Epstein's Dual Isotherm of Ion Uptake, 1966): इमैनुएल एपस्टीन ने जौ की जड़ों में दिखाया कि खनिज अवशोषण के लिए दो वाहक तंत्र होते हैं:
    • System-I (High-Affinity Transport System – HATS): जब मृदा में पोषक तत्व की सांद्रता बहुत कम (<0.5 mM) हो तब यह कार्य करता है (अत्यंत विशिष्ट)।
    • System-II (Low-Affinity Transport System – LATS): जब मृदा में सांद्रता उच्च (>1.0 mM) हो तब यह कार्य करता है (मुख्यतः आयन चैनलों द्वारा)।

कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics

1. Passive & Active Mineral Absorption Theories: Donnan Equilibrium, Carrier Concept & Cytochrome Pump

Root Epidermis, Cortex & Xylem Parenchyma

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): Root Epidermis, Cortex & Xylem Parenchyma

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रमुख सिद्धांत: 1. Ion Exchange (Jenny & Overstreet, 1939), 2. Donnan Equilibrium (1911), 3. Mass Flow (Hylmö, 1953), 4. Carrier Concept (Van den Honert, 1937), 5. Lundegårdh's Cytochrome Pump (1933)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: मृदा कणों (Clay micelles) से मूलरोम तक आयन कैसे पहुँचते हैं और झिल्ली कैसे पार करते हैं, यह इन सिद्धांतों से स्पष्ट होता है।

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. निष्क्रिय खनिज अवशोषण के सिद्धांत (Passive Ion Uptake — बिना ATP खर्च के):
• बाह्य मुक्त स्थान / आभासी मुक्त स्थान (Outer / Apparent Free Space – AFS; Briggs & Robertson, 1957): जड़ की कोशिका भित्तियों और अंतराकोशिकीय स्थानों (Apoplast) का वह भाग (जड़ के कुल आयतन का ~10–15%) जिसमें मृदा घोल के आयन स्वतंत्र विसरण द्वारा बिना किसी झिल्ली अवरोध के आ-जा सकते हैं।
• आयन विनिमय सिद्धांत (Ion Exchange Theory): जड़ के श्वसन से निकली CO2 जल से मिलकर कार्बोनिक अम्ल (H2CO3→H++HCO3−) बनाती है। जड़ की सतह से H+ और HCO3− आयन मृदा कणों पर चिपके K+ और NO3− के साथ सीधे बदल लिए जाते हैं ('Contact Exchange' — Jenny & Overstreet, 1939 एवं 'Carbonic Acid Exchange')।
• डोनन साम्यावस्था (Donnan Equilibrium, 1911): कोशिका के भीतर के अ-विसरणीय ऋणायनों (Fixed anions) को संतुलित करने के लिए बाह्य धनायनों का स्वतः संचय।

2. सक्रिय खनिज अवशोषण के सिद्धांत (Active Ion Uptake — श्वसन ऊर्जा / ATP से चालित):
• लुंडेगार्ड का साइटोक्रोम पंप सिद्धांत (Lundegårdh & Burström's Cytochrome Pump / Anion Respiration Theory, 1933): लुंडेगार्ड ने देखा कि जब जड़ को आसुत जल से निकालकर लवण के घोल में रखते हैं तो श्वसन की दर अचानक बढ़ जाती है जिसे 'लवण श्वसन' (Salt / Anion Respiration) कहते हैं! उनके अनुसार साइटोक्रोम शृंखला से इलेक्ट्रॉन बाहर जाते हैं और उनके बदले ऋणायन (A−) सक्रिय रूप से अंदर आते हैं जबकि धनायन (M+) निष्क्रिय रूप से खिंचे चले आते हैं।
• बेनेट-क्लार्क का प्रोटीन-लेसिथिन सिद्धांत (Bennet-Clark, 1956): फॉस्फोलिपिड 'लेसिथिन' उभयधर्मी वाहक के रूप में धनायन और ऋणायन दोनों को अंदर लाकर कोलीन व फॉस्फोरिक अम्ल में टूटता है और ATP से पुनः जुड़ता है।
• वैन डेन होनर्ट की वाहक संकल्पना (Carrier Concept, 1937) एवं पीटर मिशेल का रसोपरासरणी प्रोटॉन पंप सिद्धांत (Chemiosmotic H+-Pump Model — आधुनिक सर्वमान्य सिद्धांत)।

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): आयन अवशोषण की गतिकी माइकलिस-मेंटन एंजाइम समीकरण [v=(Vmax·[S])/(Km+[S])] का पालन करती है, जो सिद्ध करती है कि झिल्ली में सीमित संख्या में विशिष्ट प्रोटीन वाहक होते हैं (Epstein & Hagen, 1952)।

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): आयन विरोध बनाम आयन सहक्रिया (Ion Antagonism vs Synergism): समान आवेश वाले दो आयन एक ही वाहक के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं (जैसे K+ की अधिकता Mg2+ और Ca2+ के अवशोषण को रोकती है), किंतु Ca2+ की उपस्थिति झिल्ली की अखंडता बनाए रखकर अन्य आयनों के चयनात्मक अवशोषण को बढ़ाती है ('Viets Effect', 1944)!

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): श्वसन विष (जैसे सायनाइड KCN, 2,4-DNP) या ऑक्सीजन की कमी (जलभराव) होते ही सक्रिय खनिज अवशोषण तुरंत रुक जाता है।
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Apparent Free Space (AFS – Briggs 1957) = Apoplast/Cell wall (~10% of root volume) + Contact Exchange = Jenny & Overstreet (1939) + Salt/Anion Respiration & Cytochrome Pump = Lundegårdh (1933) + Protein-Lecithin theory = Bennet-Clark (1956) + Carrier concept = Van den Honert (1937) + Viets Effect (1944) = Ca2+ stimulates selective ion uptake।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

मृदा में अधिक पोटाश उर्वरक देने पर पौधों में मैग्नीशियम (Mg) की कमी प्रकट हो सकती है (Ion antagonism), इसलिए संतुलित उर्वरक अनुपात आवश्यक है।

2. Nernst Equation, Proton Pumps (H+-ATPase), Ion Channels & Xylem Loading (नर्न्स्ट समीकरण, प्रोटॉन पंप एवं आयन चैनल)

All Crop Plants (Plasma Membrane & Tonoplast Transport)

🎯 संदर्भित फसलें / तंत्र (Target Crops / System): All Crop Plants (Plasma Membrane & Tonoplast Transport)

🔬 मुख्य वैज्ञानिक नियम / समीकरण / खोजकर्ता: प्रमुख नोबेल विजेता खोजें: Walther Nernst (1889), Peter Mitchell (1961 – Chemiosmotic hypothesis), Erwin Neher & Bert Sakmann (1991 – Single ion channels via Patch-clamp)।

🌱 कार्यिकीय महत्व: समस्त खनिज पोषण, रंध्र संचालन, फ्लोएम लोडिंग और लवणता सहिष्णुता (SOS1 एवं NHX1 एंटीपोर्टर) का नियंत्रण इन्हीं पंपों और चैनलों द्वारा होता है।

📖 विस्तृत कार्यिकीय सिद्धांत एवं क्रियाविधि (Detailed Mechanism & Theory):
1. पादप कोशिका के दो मुख्य प्रोटॉन पंप (Master Electrogenic Proton Pumps):
• (a) प्लाज्मा झिल्ली H+-ATPase (P-type ATPase): यह एकल पॉलीपेप्टाइड पंप कोशिकाद्रव्य से ATP तोड़कर H+ आयनों को कोशिका भित्ति (Apoplast) में बाहर पंप करता है। इससे दो प्रभाव पड़ते हैं: (i) कोशिका भित्ति अम्लीय (pH ~5.0) हो जाती है और (ii) कोशिका के अंदर −120 से −180 mV का प्रबल ऋण विभव बन जाता है!
• (b) टोनोप्लास्ट (रिक्तिका) पंप — V-type H+-ATPase एवं H+-Pyrophosphatase (H+-PPase): ये दोनों पंप कोशिकाद्रव्य से H+ आयनों को रिक्तिका (Vacuole) के अंदर पंप करते हैं, जिससे रिक्तिका अम्लीय (pH ~5.0–5.5) रहती है और एंटीपोर्टर द्वारा रिक्तिका में NO3−, Ca2+, Na+ व मैलैट जमा किए जाते हैं।

2. प्रमुख खनिज आयनों के विशिष्ट ट्रांसपोर्टर जीन परिवार (Specific Nutrient Transporters — Modern Molecular Physiology):
• नाइट्रेट (NO3−): NRT1 / NPF (Low-affinity) एवं NRT2 (High-affinity 2H+/NO3− symporter)।
• अमोनियम (NH4+): AMT1 (Ammonium transporter / uniporter)।
• फॉस्फेट (H2PO4−): PHT1 (2–4H+/H2PO4− symporter)।
• पोटैशियम (K+): AKT1 एवं KAT1 (Inward-rectifying K+ channels — रंध्र खोलने व जड़ अवशोषण में), SKOR (Stelar K+ outward rectifier — जाइलम लोडिंग में!) एवं HAK5 (H+/K+ symporter)।
• सल्फेट (SO42−): SULTR (3H+/SO42− symporter)।
• लवणता सहिष्णुता (Salinity Tolerance Na+ Antiporters): SOS1 (Salt Overly Sensitive 1 — प्लाज्मा झिल्ली का Na+/H+ antiporter जो जहरीले Na+ को जड़ से बाहर फेंकता है!) एवं NHX1 (टोनोप्लास्ट का Na+/H+ antiporter जो Na+ को रिक्तिका में बंद कर देता है!)।

3. जड़ के सिम्प्लास्ट से जाइलम वाहिकाओं में खनिज छोड़ना ('Xylem Loading'): अंतस्त्वचा को पार करने के बाद जाइलम मृदूतक (Xylem parenchyma) कोशिकाएँ अपने प्लाज्मा झिल्ली के H+-ATPase और बाह्यगामी चैनलों (जैसे SKOR) की सहायता से खनिजों को निर्जीव जाइलम वाहिकाओं में सक्रिय/नियंत्रित रूप से डालती हैं, जहाँ से वे वाष्पोत्सर्जन धारा के साथ पत्तियों में पहुँच जाते हैं।

⚙️ जैव-रासायनिक एवं आणविक आधार (Biochemical / Molecular Basis): आयरन (Fe) अवशोषण की दो रणनीतियाँ (Römheld & Marschner, 1986):
• Strategy-I (द्विबीजपत्री व गैर-घास पौधे): जड़ से H+ निकालकर मिट्टी को अम्लीय करते हैं और झिल्ली के 'FRO2' (Ferric chelate reductase) एंजाइम से Fe3+ को Fe2+ में बदलकर 'IRT1' ट्रांसपोर्टर से सोखते हैं।
• Strategy-II (घास/अनाज कुल — धान, गेहूँ, मक्का, जौ): ये जड़ से 'फाइटोसाइडरोफोर' (Phytosiderophores — जैसे Mugineic acid) स्रावित करते हैं जो मिट्टी के अघुलनशील Fe3+ को सीधे बांधकर (Chelate) 'YS1' (Yellow Stripe 1) ट्रांसपोर्टर द्वारा बिना अपचयन के ही पूरा Fe3+-फाइटोसाइडरोफोर संकुल अंदर सोख लेते हैं!

🔄 प्रक्रिया प्रवाह एवं चरण (Process Flow & Dynamics): पत्ती से पोषक तत्वों का वर्षा या कोहरे के पानी द्वारा धुलकर बाहर निकलना 'Foliar Leaching' (Tukey, 1970) कहलाता है (पुरानी पत्तियों से K+ व Ca2+ सबसे अधिक धुलते हैं)।

🌡️ पर्यावरणीय एवं आंतरिक कारक (Environmental & Internal Factors): माइकोराइजा (VAM / Arbuscular Mycorrhiza — जैसे *Glomus* spp.) कवक तंतु पौधे की जड़ों को मुख्यतः अगतिशील फॉस्फोरस (H2PO4−) और जिंक (Zn2+) तथा कॉपर का अवशोषण 3 से 5 गुना बढ़ाकर देते हैं!
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Plasma membrane H+-ATPase = P-type (creates −120 to −180 mV & acidifies cell wall)
  • Tonoplast pumps = V-ATPase & H+-PPase
  • Anions (NO3-, H2PO4-, SO4 2-) are ALWAYS absorbed actively via H+-Symport!
  • Iron Strategy-II in Grasses/Cereals = Secretion of 'Phytosiderophores (Mugineic acid)' for Fe3+ chelation
  • VAM Mycorrhiza = Increases Phosphorus (P) & Zinc (Zn) uptake।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

लवणीय भूमि में फसलों पर कैल्शियम (जिप्सम) देने से Ca2+ आयन 'SOS' पथ को सक्रिय कर जहरीले Na+ के प्रवेश को रोकता है और K+/Na+ अनुपात को सुधारता है।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 8.1: आयन चैनल (Ion Channels), वाहक (Carriers) एवं आयन पंप (Ion Pumps) की तुलना

विशेषताआयन चैनल (Ion Channels)वाहक / ट्रांसपोर्टर (Carriers)आयन पंप (Ion Pumps / ATPases)
परिवहन की गति (आयनों की संख्या/सेकंड)अत्यधिक तीव्र (106 से 108 आयन/सेकंड)मध्यम (102 से 104 आयन/सेकंड)धीमी (100 से 102 आयन/सेकंड)
ऊर्जा एवं परिवहन का प्रकारपूर्णतः निष्क्रिय (Passive / Downhill सुसाध्य विसरण)निष्क्रिय (Uniport) या द्वितीयक सक्रिय (Symport / Antiport)प्राथमिक सक्रिय परिवहन (सीधे ATP / PPi खर्च होता है)
प्रवणता की दिशासदैव विद्युत-रासायनिक प्रवणता की दिशा में (Downhill)एक आयन Downhill (H+) और दूसरा Uphill (NO3−)सदैव विद्युत-रासायनिक प्रवणता के विपरीत (Uphill)
प्रमुख पादप उदाहरणAKT1, KAT1, SKOR (K+ channels) एवं AquaporinsNRT (NO3−), PHT (H2PO4−), SUC2 (सुक्रोज), SOS1, NHX1Plasma membrane P-type H+-ATPase, Tonoplast V-ATPase

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. नर्न्स्ट समीकरण (Nernst Equation at 25°C) द्वारा साम्य आंतरिक आयन सांद्रता एवं सक्रिय परिवहन की गणना

ΔE_n (in mV) = E_inside − E_outside = − (59.2 / z) × log10 ( C_inside / C_outside ) = + (59.2 / z) × log10 ( C_outside / C_inside )

उदाहरण (धनायन बनाम ऋणायन परीक्षा प्रश्न):
मान लीजिए जड़ की कोशिका का झिल्ली विभव (ΔE) = −118.4 mV है और बाहरी मृदा घोल में K+ और NO3− दोनों की सांद्रता (Co) = 1.0 mM है। साम्यावस्था पर कोशिका के अंदर इनकी अधिकतम निष्क्रिय सांद्रता (Ci) क्या होगी?
1. K+ (धनायन, आवेश z=+1) के लिए:
−118.4=−(59.2/+1)×log10(Ci/1.0)⟹log10(Ci)=2⟹Ci=102= 100 mM!
अर्थात् −118.4 mV विभव पर 100 mM तक K+ बिना ATP के निष्क्रिय रूप से अंदर आ सकता है!
2. NO3− (ऋणायन, आवेश z=−1) के लिए:
−118.4=−(59.2/−1)×log10(Ci/1.0)⟹log10(Ci)=−2⟹Ci=10−2= 0.01 mM!
परंतु वास्तविक कोशिका के अंदर NO3− की सांद्रता 20 से 50 mM पाई जाती है (जो 0.01 mM से हजार गुना अधिक है)—यह गणितीय रूप से सिद्ध करता है कि नाइट्रेट (NO3−) एवं सभी ऋणायनों का अवशोषण 100% सक्रिय परिवहन द्वारा ही होता है!

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 08: खनिज परिवहन, नर्न्स्ट समीकरण, आयन पंप एवं आयन चैनल]
├── 1. निष्क्रिय एवं सक्रिय खनिज अवशोषण सिद्धांत (Classical Uptake Theories)
│ ├── निष्क्रिय (Passive): Outer/Apparent Free Space (AFS - Briggs 1957), Contact Exchange (Jenny & Overstreet 1939), Donnan Equilibrium (1911)
│ └── सक्रिय (Active): Lundegårdh Cytochrome Pump / Anion Respiration (1933), Bennet-Clark Lecithin theory (1956), Van den Honert Carrier concept (1937)
├── 2. नर्न्स्ट समीकरण (Nernst Equation — Walther Nernst, 1889)
│ ├── सूत्र (25°C पर): ΔEn (mV) = (59.2 / z) × log10 (Co / Ci) [जहाँ z = आयन का आवेश]
│ └── निष्कर्ष: कोशिका के अंदर ऋण आवेश (−120 mV) होने से सभी ऋणायन (NO3⁻, H2PO4⁻, SO4²⁻, Cl⁻) सदैव सक्रिय रूप से (Uphill) सोखे जाते हैं!
├── 3. झिल्ली परिवहन प्रोटीन (Membrane Transport Proteins)
│ ├── (i) आयन पंप (Primary Active): Plasma membrane P-type H+-ATPase एवं Tonoplast V-ATPase / H+-PPase
│ ├── (ii) वाहक / को-ट्रांसपोर्टर (10²–10⁴ ions/s): Uniporter, Symporter (H+ + NO3⁻/H2PO4⁻) एवं Antiporter (SOS1, NHX1: Na+/H+)
│ └── (iii) आयन चैनल (10⁶–10⁸ ions/s — सबसे तेज, निष्क्रिय): AKT1, KAT1, SKOR (Patch-clamp: Neher & Sakmann 1991)
└── 4. विशेष खनिज अवशोषण तंत्र (Special Uptake Systems)
├── Epstein's Dual Isotherm (1966): System-I (High-affinity HATS at low conc.) & System-II (Low-affinity LATS at high conc.)
├── आयरन अवशोषण: Strategy-I (Dicots — Fe3+ से Fe2+ अपचयन) बनाम Strategy-II (Grasses/Cereals — Phytosiderophores / Mugineic acid)
└── माइकोराइजा (VAM - Glomus): अगतिशील फॉस्फोरस (P) और जिंक (Zn) का अवशोषण बढ़ाता है

प्रवाह चित्र · Flowchart

[पादप कोशिका की प्लाज्मा झिल्ली पर 'प्राथमिक H+-ATPase पंप' एवं 'द्वितीयक सह-परिवहन (Symport/Antiport)' की क्रियाविधि]
【1. प्राथमिक सक्रिय परिवहन (Primary Active Transport — Electrogenic Pump)】
कोशिकाद्रव्य में ATP ──► ADP + Pi (प्लाज्मा झिल्ली के P-type H+-ATPase पंप द्वारा ऊर्जा का उपयोग)
↓
H+ आयनों को कोशिका से बाहर (कोशिका भित्ति में) पंप किया जाता है
├──► परिणाम A: बाहरी कोशिका भित्ति अम्लीय (pH ~5.0) और उच्च H+ सांद्रता युक्त हो जाती है
└──► परिणाम B: कोशिका के अंदर −120 से −180 mV का प्रबल ऋण विभव उत्पन्न हो जाता है
│
├──► 【2A. धनायन चैनल (Passive Inward Channel — जैसे AKT1)】:
│ अंदर के ऋण आवेश से आकर्षित होकर K+ आयन चैनल से तेजी से अंदर आते हैं
│
├──► 【2B. H+-सिम्पोर्टर (Secondary Active Symport — जैसे NRT2 एवं PHT1)】:
│ बाहर से अंदर लौटते हुए 2H+ के साथ जुड़कर ऋणायन (NO3⁻, H2PO4⁻, SO4²⁻) एवं सुक्रोज सक्रिय रूप से अंदर खिंचते हैं!
│
└──► 【2C. H+-एंटीपोर्टर (Secondary Active Antiport — जैसे SOS1 एवं NHX1)】:
लौटते हुए H+ के बदले विषैला Na+ या Ca2+ कोशिका से बाहर (या रिक्तिका में) फेंक दिया जाता है!

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • परीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत: पादप कोशिका के अंदर ऋण विभव (−120 mV) होने के कारण सभी ऋणायनों (NO3−, H2PO4−, SO42−, Cl−) का अवशोषण सदैव सक्रिय परिवहन (H+-Symport) द्वारा होता है, और धनायनों में Ca2+ तथा Na+ को कोशिकाद्रव्य से बाहर निकालने (Efflux) के लिए सक्रिय पंप लगता है!
  • तीनों परिवहन प्रोटीनों की गति का अंतर याद रखें: Ion Channels (106–108 आयन/सेकंड — सबसे तेज) > Carriers (102–104 आयन/सेकंड) > Ion Pumps (100–102 आयन/सेकंड — सबसे धीमे)।
  • अनाज/घास कुल (धान, गेहूँ, मक्का, जौ, ज्वार) मिट्टी से लोहा (Fe3+) सोखने के लिए अपनी जड़ों से कौन सा कीलेटिंग यौगिक स्रावित करते हैं? उत्तर: फाइटोसाइडरोफोर (Phytosiderophores — जैसे Mugineic acid; Strategy-II)!

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • Nernst Equation (25°C): ΔEn=(59.2/z)log10(Co/Ci); यह विद्युत-रासायनिक साम्यावस्था बताता है।
  • Donnan Equilibrium (1911): कोशिका के अंदर स्थिर अ-विसरणीय ऋणायनों (प्रोटीन) के कारण धनायनों का निष्क्रिय संचय।
  • Lundegårdh & Burström (1933): 'Anion / Salt Respiration' और 'Cytochrome Pump Theory' दी।
  • Van den Honert (1937): झिल्ली में खनिज परिवहन की 'Carrier Concept' (वाहक संकल्पना) दी।
  • Symport = दोनों आयन एक ही दिशा में; Antiport = दोनों आयन विपरीत दिशाओं में; Uniport = एकल आयन एक दिशा में।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. झिल्ली के दोनों ओर किसी आयन की साम्यावस्था सांद्रता अनुपात (Co / Ci) और विद्युत विभवांतर (ΔE) के बीच संबंध बताने वाला समीकरण कौन सा है?

  • (A) वान्ट हॉफ समीकरण
  • (B) नर्न्स्ट समीकरण [Nernst Equation: ΔEn = (59.2/z) log10(Co/Ci)]
  • (C) फिक का समीकरण
  • (D) माइकलिस-मेंटन समीकरण
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — वाल्थर नर्न्स्ट (1889) द्वारा प्रतिपादित नर्न्स्ट समीकरण से यह ज्ञात किया जाता है कि किसी आयन का परिवहन सक्रिय है या निष्क्रिय।

2. कोशिका के भीतर स्थिर अ-विसरणीय ऋणायनों (Indiffusible fixed anions — जैसे ऋणावेशित प्रोटीन) की उपस्थिति के कारण बिना ATP खर्च किए धनायनों के सांद्रित होने की क्रिया क्या कहलाती है?

  • (A) साइटोक्रोम पंप
  • (B) डोनन साम्यावस्था (Donnan Equilibrium — F.G. Donnan, 1911)
  • (C) सिम्पोर्ट
  • (D) पिनोसाइटोसिस
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — डोनन साम्यावस्था (1911) एक निष्क्रिय प्रक्रिया है जिसमें आंतरिक स्थिर ऋणायनों को संतुलित करने हेतु धनायन अंदर एकत्रित होते हैं।

3. जब झिल्ली का कोई वाहक प्रोटीन दो भिन्न आयनों (जैसे H+ और NO3⁻) को एक साथ 'एक ही दिशा में' झिल्ली के आर-पार ले जाता है, तो उसे क्या कहते हैं?

  • (A) यूनीपोर्ट (Uniport)
  • (B) सिम्पोर्ट / सह-परिवहन (Symport / Co-transport)
  • (C) एंटीपोर्ट / प्रति-परिवहन (Antiport)
  • (D) एक्वापोरिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — दो आयनों का एक ही दिशा में परिवहन 'Symport' और विपरीत दिशाओं में परिवहन 'Antiport' (जैसे Na+/H+ exchanger) कहलाता है।

4. जड़ को शुद्ध जल से निकालकर खनिज लवण के विलयन में रखने पर श्वसन दर में होने वाली वृद्धि को 'ऋणायन श्वसन / लवण श्वसन' (Anion / Salt Respiration) किसने कहा और इस पर कौन सा सिद्धांत दिया?

  • (A) लुंडेगार्ड एवं बर्सट्रॉम (Lundegårdh & Burström, 1933 — Cytochrome Pump Theory)
  • (B) बेनेट-क्लार्क (1956)
  • (C) वैन डेन होनर्ट (1937)
  • (D) स्टीफन हेल्स
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — लुंडेगार्ड (1933) ने लवण श्वसन की खोज की और सक्रिय ऋणायन अवशोषण का 'साइटोक्रोम पंप सिद्धांत' दिया।

5. झिल्ली परिवहन प्रोटीनों के तीनों वर्गों में से किसकी परिवहन गति सर्वाधिक (10⁶ से 10⁸ आयन प्रति सेकंड) होती है?

  • (A) आयन पंप (ATPases)
  • (B) वाहक प्रोटीन (Carriers)
  • (C) आयन चैनल (Ion Channels — जो केवल निष्क्रिय सुसाध्य विसरण करते हैं)
  • (D) लेसिथिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — आयन चैनल (Ion channels) खुलने पर प्रति सेकंड करोड़ों आयनों को बिना बंधे सीधे छिद्र से गुजरने देते हैं।

6. पादप कोशिकाओं में द्वितीयक सक्रिय परिवहन (Symport एवं Antiport) को चलाने के लिए प्रोटॉन प्रवणता (Proton Motive Force) उत्पन्न करने वाला प्लाज्मा झिल्ली का प्राथमिक पंप कौन सा है?

  • (A) Na+/K+ ATPase (जो केवल जंतुओं में होता है)
  • (B) P-प्रकार का H+-ATPase प्रोटॉन पंप (Plasma membrane H+-ATPase)
  • (C) साइटोक्रोम ऑक्सीडेज
  • (D) केवल कैल्शियम चैनल
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — जंतुओं में Na+/K+ पंप होता है, जबकि पौधों और कवकों की प्लाज्मा झिल्ली में 'H+-ATPase प्रोटॉन पंप' मुख्य प्राथमिक पंप है।

7. अनाज और घास कुल के पौधे (धान, गेहूँ, मक्का, जौ) क्षारीय मिट्टी से अघुलनशील लोहे (Fe³⁺) को अवशोषित करने के लिए जड़ों से कौन से विशिष्ट कीलेटिंग यौगिक स्रावित करते हैं (Strategy-II)?

  • (A) साइट्रिक अम्ल
  • (B) फाइटोसाइडरोफोर (Phytosiderophores — जैसे Mugineic acid)
  • (C) लेगहीमोग्लोबिन
  • (D) ऑक्सिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — घास कुल के पौधे जड़ों से म्युजिनिक अम्ल जैसे 'Phytosiderophores' निकालते हैं जो Fe³⁺ को बांधकर YS1 ट्रांसपोर्टर से अंदर लाते हैं।

8. सन् 1937 में खनिज अवशोषण के लिए कोशिका झिल्ली में विशिष्ट वाहक अणुओं की उपस्थिति की 'वाहक संकल्पना' (Carrier Concept) किसने दी थी?

  • (A) टी.एच. वैन डेन होनर्ट (Van den Honert, 1937)
  • (B) जेनी एवं ओवरस्ट्रीट (1939)
  • (C) एफ.जी. डोनन (1911)
  • (D) जी.ई. ब्रिग्स (1957)
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — वैन डेन होनर्ट (1937) ने वाहक संकल्पना दी और एपस्टीन (1952) ने इसकी एंजाइम-सरूप गतिकी सिद्ध की।

9. पादप जड़ों के साथ सहजीवी संबंध बनाने वाले 'वैस्कुलर अर्बुस्कुलर माइकोराइजा' (VAM / AM Fungi) मुख्य रूप से किस अगतिशील पोषक तत्व के अवशोषण को कई गुना बढ़ा देते हैं?

  • (A) केवल सोडियम
  • (B) फॉस्फोरस (Phosphorus – H2PO4⁻) एवं जिंक (Zn²⁺)
  • (C) केवल क्लोरीन
  • (D) केवल लोहा
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — माइकोराइजा कवक तंतु जड़ के अवशोषण क्षेत्र से बहुत दूर तक फैलकर अगतिशील फॉस्फोरस (P) और जिंक (Zn) को सोखकर पौधे को देते हैं।

10. लवणता सहिष्णुता (Salinity tolerance) में जहरीले सोडियम आयनों (Na⁺) को कोशिकाद्रव्य से हटाकर रिक्तिका (Vacuole) के अंदर बंद करने वाला टोनोप्लास्ट एंटीपोर्टर कौन सा है?

  • (A) NHX1 (Tonoplast Na+/H+ Antiporter)
  • (B) AKT1
  • (C) NRT1
  • (D) PHT1
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — प्लाज्मा झिल्ली का 'SOS1' Na+ को जड़ से बाहर फेंकता है और टोनोप्लास्ट का 'NHX1' Na+ को रिक्तिका में बंद कर कोशिकाद्रव्य को बचाता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. जड़ के उस बाह्य भाग (कोशिका भित्ति व अंतराकोशिकीय स्थान) को क्या कहते हैं जिसमें आयन स्वतंत्र विसरण द्वारा प्रवेश कर सकते हैं?

आभासी मुक्त स्थान या बाह्य मुक्त स्थान (Apparent Free Space – AFS / Outer Space — Briggs, 1957)।

2. बेनेट-क्लार्क (Bennet-Clark, 1956) ने सक्रिय खनिज अवशोषण में किस फॉस्फोलिपिड को उभयधर्मी वाहक माना था?

लेसिथिन (Lecithin — Phosphatidylcholine) को।

3. एकल आयन चैनल (Single ion channel) से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा को मापने की नोबेल पुरस्कार विजेता तकनीक का नाम क्या है?

पैच-क्लैम्प तकनीक (Patch-Clamp Technique — Erwin Neher & Bert Sakmann, 1991)।

4. बाहरी विलयन में कैल्शियम (Ca²⁺) की उपस्थिति से पोटैशियम व अन्य आयनों के चयनात्मक अवशोषण में होने वाली वृद्धि को क्या कहते हैं?

विएट्स प्रभाव (Viets Effect, 1944)।

5. कोशिका की रिक्तिका झिल्ली (Tonoplast) पर पाए जाने वाले दो प्रोटॉन पंपों के नाम लिखिए।

1. V-type H+-ATPase और 2. H+-Pyrophosphatase (H+-PPase)।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. नर्न्स्ट समीकरण (Nernst Equation) क्या है और खनिज पोषण अध्ययन में इसका क्या उपयोग है?

नर्न्स्ट समीकरण [ΔEn = (59.2/z) log10(Co/Ci) at 25°C] किसी आयन की झिल्ली के दोनों ओर की सांद्रता और झिल्ली के विद्युत विभव के बीच साम्यावस्था संबंध बताता है। उपयोग: वास्तविक मापे गए झिल्ली विभव और आंतरिक आयन सांद्रता की नर्न्स्ट मान से तुलना करके यह पता लगाया जाता है कि वह आयन निष्क्रिय विसरण से अंदर आ रहा है या सक्रिय ऊर्जा-चालित परिवहन से।

2. आयन चैनल (Ion Channels), वाहक (Carriers) और आयन पंप (Ion Pumps) में मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।

1. आयन चैनल: झिल्ली में छिद्र बनाते हैं जो प्रति सेकंड 10⁶–10⁸ आयनों को बिना ऊर्जा खर्च किए विद्युत-रासायनिक प्रवणता की दिशा में (Downhill) बहुत तेजी से ले जाते हैं। 2. वाहक: आयन से जुड़कर अपना आकार बदलते हैं (गति 10²–10⁴ आयन/सेकंड) और Uniport, Symport या Antiport करते हैं। 3. आयन पंप (ATPases): सीधे ATP तोड़कर आयनों को प्रवणता के विपरीत (Uphill) पंप करते हैं (गति 10⁰–10² आयन/सेकंड)।

3. यूनीपोर्ट (Uniport), सिम्पोर्ट (Symport) और एंटीपोर्ट (Antiport) को पादप उदाहरणों सहित समझाइए।

1. Uniport: जब वाहक प्रोटीन केवल एक ही प्रकार के आयन/अणु को एक दिशा में ले जाता है (जैसे AMT1 द्वारा NH4+ का प्रवेश)। 2. Symport (सह-परिवहन): जब दो भिन्न पदार्थ एक साथ एक ही दिशा में झिल्ली पार करते हैं (जैसे प्रोटॉन H+ के साथ NO3⁻, H2PO4⁻ या सुक्रोज का कोशिका में प्रवेश)। 3. Antiport (प्रति-परिवहन): जब दो आयन विपरीत दिशाओं में चलते हैं (जैसे SOS1 या NHX1 द्वारा H+ के बदले Na+ को बाहर या रिक्तिका में निकालना)।

4. लुंडेगार्ड के 'साइटोक्रोम पंप सिद्धांत' (Cytochrome Pump Theory, 1933) के मुख्य बिंदु लिखिए।

लुंडेगार्ड और बर्सट्रॉम (1933) के अनुसार: 1. ऋणायनों और धनायनों के अवशोषण की क्रियाविधि अलग-अलग है। 2. जड़ को लवण घोल में रखने पर श्वसन बढ़ जाता है जिसे 'ऋणायन श्वसन' (Anion/Salt respiration) कहते हैं। 3. झिल्ली की साइटोक्रोम शृंखला से इलेक्ट्रॉन बाहर जाते हैं और उनके बदले ऋणायन (NO3⁻, Cl⁻) सक्रिय रूप से अंदर लिए जाते हैं, जबकि धनायन (K⁺) विद्युत संतुलन हेतु निष्क्रिय रूप से अंदर आते हैं।

5. पौधों में लोहे (Iron – Fe) के अवशोषण की Strategy-I और Strategy-II में क्या अंतर है?

Strategy-I सभी द्विबीजपत्री और गैर-घास एकबीजपत्री पौधों में पाई जाती है; इसमें जड़ें H+ निकालकर राइजोस्फीयर को अम्लीय करती हैं और झिल्ली के Ferric chelate reductase (FRO2) से अघुलनशील Fe³⁺ को Fe²⁺ में अपचयित करके IRT1 ट्रांसपोर्टर से सोखती हैं। इसके विपरीत, Strategy-II घास/अनाज कुल (धान, गेहूँ, मक्का, जौ) में पाई जाती है; ये जड़ों से 'फाइटोसाइडरोफोर' (Mugineic acid) निकालते हैं जो सीधे Fe³⁺ को बांधकर अंदर ले आता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. पौधों में सक्रिय और निष्क्रिय खनिज अवशोषण की क्रियाविधियों का वर्णन करते हुए नर्न्स्ट समीकरण (Nernst Equation) और रसोपरासरणी प्रोटॉन पंप मॉडल (Chemiosmotic H+-Pump Model) की विस्तार से व्याख्या कीजिए।

निष्क्रिय सिद्धांत (AFS, आयन विनिमय, डोनन साम्यावस्था), नर्न्स्ट समीकरण की व्युत्पत्ति व धनायन बनाम ऋणायन का संख्यात्मक उदाहरण तथा प्लाज्मा झिल्ली के P-type H+-ATPase पंप द्वारा उत्पन्न प्रोटॉन प्रेरक बल से चलने वाले चैनलों, सिम्पोर्टरों (NO3⁻, H2PO4⁻) और एंटीपोर्टरों का प्रवाह चार्ट सहित वर्णन करें।

2. पादप कोशिका झिल्लियों में पाए जाने वाले तीनों प्रकार के परिवहन प्रोटीनों (Ion Channels, Carriers एवं Ion Pumps) की संरचना, गतिकी (Epstein's Dual Isotherm) और प्रमुख पोषक ट्रांसपोर्टर जीन परिवारों का सविस्तर वर्णन कीजिए।

तालिका 8.1 के अनुसार तीनों प्रोटीन वर्गों की तुलना, Uniport-Symport-Antiport, एपस्टीन की उच्च-बंधुता (HATS) बनाम निम्न-बंधुता (LATS) द्वैध प्रणाली तथा NRT, PHT, AKT/SKOR, SULTR, SOS1 एवं NHX1 ट्रांसपोर्टरों की भूमिका का वर्णन करें।

3. मृदा से जड़ द्वारा खनिज लवणों के अवशोषण को प्रभावित करने वाले कारकों, आयन विरोध व सहक्रिया (Antagonism & Viets Effect) तथा माइकोराइजा और आयरन सायडरोफोर तंत्र की भूमिका की विवेचना कीजिए।

तापमान, मृदा pH, वायुसंचार (O2), आयन सांद्रता व अंतःक्रिया (K-Mg विरोध एवं Ca का Viets प्रभाव), VAM माइकोराइजा द्वारा P व Zn अवशोषण और आयरन अवशोषण की Strategy-I बनाम Strategy-II का सविस्तर विवरण प्रस्तुत करें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • पादप कोशिका की प्लाज्मा झिल्ली का सामान्य विश्राम विद्युत विभव (Resting Membrane Potential) −110 mV से −180 mV (अंदर ऋणात्मक) होता है।
  • कवक विष 'फ्यूसीकोक्सिन' (Fusicoccin) प्लाज्मा झिल्ली के H+-ATPase पंप को स्थायी रूप से सक्रिय कर देता है जबकि 'वैनेडेट' (Vanadate) इसे रोक देता है!
  • जाइलम मृदूतक से निर्जीव जाइलम वाहिकाओं में पोटैशियम (K⁺) को लोड करने वाला मुख्य बाह्यगामी चैनल 'SKOR' (Stelar K+ Outward Rectifier) है।
  • लवणता सहिष्णुता का प्रसिद्ध 'SOS' पथ (SOS1, SOS2, SOS3) पादप जड़ों से विषैले सोडियम (Na⁺) को बाहर निकालने का मुख्य कैल्शियम-निर्भर तंत्र है।
  • पत्तियों से वर्षा जल द्वारा पोषक तत्वों के धुलने (Foliar leaching) का विस्तृत अध्ययन ट्यूकी (Tukey, 1970) ने किया था।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।

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