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AGRON 311 Lecture 13: शाकनाशी मिश्रण, कृषि-रसायनों के साथ अनुकूलता एवं शाकनाशी प्रतिरोध व प्रबंधन | Hindi Notes

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AGRON 311 · Weed Management
विषय सूची · Quick Navigation02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
शैक्षणिक संदर्भ: शाकनाशियों की दरें, मिश्रण और उपयोग उपलब्ध कराए गए स्रोत का हिस्सा हैं। खेत में प्रयोग से पहले फसल-विशिष्ट वर्तमान label claim तथा स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय/KVK की अनुशंसा जाँचें।
Lecture 13 Source Page Reference in Supplied Pack: 130 (AGRON 311 Theory Lecture 13)

Lecture 13: शाकनाशी मिश्रण, कृषि-रसायनों के साथ अनुकूलता एवं शाकनाशी प्रतिरोध व प्रबंधन

Concept of herbicide mixture and utility in agriculture; Herbicide compatibility with agro-chemicals and their application; Herbicide resistance and its management

02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:

  • शाकनाशी मिश्रण (Herbicide Mixture) की अवधारणा, प्रकार (Tank-mix बनाम Ready-mix/Pre-mix) और कृषि में इसकी उपयोगिता (Broad-spectrum control, reduced dose, resistance delay) को समझना।
  • भारत में पंजीकृत प्रमुख रेडी-मिक्स शाकनाशियों (Total, Vesta, Atlantis, Broadway, Valor, Odyssey, Bensulfuron+Pretilachlor) के घटक और फसलों को याद करना।
  • मिश्रण अंतःक्रियाओं—सहक्रियाशीलता (Synergism), विरोध (Antagonism) और योगात्मक प्रभाव (Additive effect)—तथा कॉल्बी के समीकरण (Colby’s Equation, 1967) की गणितीय गणना में पारंगत होना।
  • अन्य कृषि-रसायनों (उर्वरक, कीटनाशी, कवकनाशी) के साथ शाकनाशियों की भौतिक एवं रासायनिक अनुकूलता (Compatibility), जार परीक्षण (Jar test) और स्प्रे टैंक में मिलाने के ‘W-A-L-E-S’ क्रम को समझना।
  • शाकनाशी प्रतिरोध (Herbicide Resistance — सुप्त सहनशीलता बनाम प्रतिरोध; क्रॉस प्रतिरोध बनाम बहु-प्रतिरोध; लक्ष्य-स्थल बनाम गैर-लक्ष्य-स्थल प्रतिरोध), भारत में डॉ. आर.के. मलिक (1992–93) द्वारा गेहूँसा में आइसोप्रोट्यूरॉन प्रतिरोध की ऐतिहासिक खोज और प्रतिरोध प्रबंधन रणनीतियों का गहन अध्ययन करना।

03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): किसी भी खेत में कभी भी केवल एक ही प्रजाति का खरपतवार नहीं उगता, बल्कि संकरी पत्ती वाली घासें (Grasses), चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार (Broad-leaved weeds) और सेज (Sedges) एक साथ मिश्रित रूप में उगते हैं। कोई भी अकेला चयनात्मक शाकनाशी (जैसे केवल 2,4-D या केवल क्लोडिनाफॉप) इन सभी को एक साथ नहीं मार सकता। इसी समस्या के समाधान के लिए ‘शाकनाशी मिश्रण’ (Herbicide Mixtures) का प्रयोग किया जाता है।

परंतु दो रसायनों को मिलाते समय उनकी ‘भौतिक एवं रासायनिक अनुकूलता’ (Compatibility) की जाँच अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि गलत संयोजन (जैसे क्लोडिनाफॉप + 2,4-D) आपस में टकराकर एक-दूसरे के प्रभाव को नष्ट (Antagonism) कर देते हैं या फसल को जला देते हैं। इसके साथ ही, इस व्याख्यान का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ ‘शाकनाशी प्रतिरोध’ (Herbicide Resistance) है—जिसने उत्तर-पश्चिमी भारत के गेहूँ के खेतों में आइसोप्रोट्यूरॉन को विफल कर हरित क्रांति के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा कर दिया था।

04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

शाकनाशी मिश्रण (Herbicide Mixture — Tank-mix & Ready-mix)
खरपतवार नियंत्रण के स्पेक्ट्रम को चौड़ा करने और प्रतिरोध को रोकने के लिए दो या अधिक अलग-अलग शाकनाशियों का एक साथ प्रयोग। जब किसान छिड़काव से ठीक पहले स्प्रे टैंक में दो शाकनाशी मिलाता है तो उसे ‘टैंक-मिक्स’ (Tank-mix) कहते हैं, और जब कंपनी कारखाने से ही दोनों को एक पैकेट में मिलाकर बेचती है तो उसे ‘रेडी-मिक्स / प्री-मिक्स’ (Ready-mix) कहते हैं।
सहक्रियाशीलता बनाम विरोध (Synergism vs Antagonism)
जब दो शाकनाशियों के मिश्रण का संयुक्त प्रभाव उनके अलग-अलग प्रभावों के अपेक्षित योग से अधिक होता है तो उसे ‘सहक्रियाशीलता’ (Synergism: 2+2 = 5) कहते हैं (जैसे मक्का में एट्राजिन + पेंडिमेथालिन); और जब संयुक्त प्रभाव अपेक्षित योग से कम हो जाता है तो उसे ‘विरोध’ (Antagonism: 2+2 = 1) कहते हैं (जैसे क्लोडिनाफॉप + 2,4-D)।
शाकनाशी प्रतिरोध (Herbicide Resistance — WSSA परिभाषा)
किसी खरपतवार आबादी के भीतर प्राकृतिक रूप से मौजूद किसी जैव-प्रारूप (Biotype) की वह वंशानुगत (Inherited) क्षमता, जिसके कारण वह शाकनाशी की उस सामान्य अनुशंसित मात्रा (Lethal dose) पर भी जीवित बच जाता है और बीज बना लेता है जो सामान्यतः उस प्रजाति की जंगली आबादी (Wild population) को मारने के लिए पर्याप्त होती है।
क्रॉस-प्रतिरोध बनाम बहु-प्रतिरोध (Cross-Resistance vs Multiple Resistance)
जब कोई खरपतवार एक ही आनुवंशिक तंत्र के कारण समान क्रियाविधि (Same Mode of Action — जैसे ALS समूह) के दो या अधिक शाकनाशियों के प्रति प्रतिरोधी हो जाता है तो उसे ‘क्रॉस-प्रतिरोध’ कहते हैं; जबकि जब वह दो या अधिक अलग-अलग तंत्रों के कारण भिन्न-भिन्न क्रियाविधि (Different Modes of Action — जैसे PS-II + ACCase + ALS) वाले शाकनाशियों के प्रति प्रतिरोधी हो जाता है तो उसे ‘बहु-प्रतिरोध’ (Multiple resistance) कहते हैं।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. शाकनाशी मिश्रण की अवधारणा एवं कृषि में उपयोगिता (Concept & Utility of Herbicide Mixtures)

(A) कृषि में शाकनाशी मिश्रण के 5 प्रमुख लाभ:
  1. व्यापक स्पेक्ट्रम नियंत्रण (Broad-Spectrum Control in Single Pass): एक संकरी पत्ती नाशक + एक चौड़ी पत्ती नाशक मिलाने से एक ही छिड़काव में खेत के सभी खरपतवार नष्ट हो जाते हैं, जिससे श्रम, समय और डीजल की बचत होती है।
  2. शाकनाशी प्रतिरोध की रोकथाम व देरी (Delays Herbicide Resistance): दो भिन्न क्रियाविधि (MoA) वाले शाकनाशी एक साथ देने पर किसी खरपतवार में दोनों के विरुद्ध एक साथ उत्परिवर्तन होने की संभावना लगभग शून्य हो जाती है।
  3. मृदा अवशेष विषाक्तता में कमी (Reduced Soil Residue Carryover): मिश्रण में प्रत्येक शाकनाशी की मात्रा (Dose) 30–50% कम कर दी जाती है (जैसे मक्का में अकेले एट्राजिन 1.5 kg/ha के बजाय एट्राजिन 0.5 kg + पेंडिमेथालिन 0.5 kg/ha), जिससे अगली रबी दलहनी/तिलहनी फसल को अवशेष नुकसान नहीं होता।
  4. सहक्रियाशील प्रभाव (Synergistic Enhancement): कम मात्रा में अधिक मारक क्षमता।
(B) भारत में प्रचलित प्रमुख रेडी-मिक्स (Pre-mix / Ready-mix) व्यावसायिक शाकनाशी:
  • 1. गेहूँ (Wheat) के लिए:
    • सल्फोसलफ्यूरॉन (75%) + मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (5% WG) [व्यावसायिक नाम: Total @ 32 g a.i./ha] — गेहूँसा + चौड़ी पत्ती।
    • क्लोडिनाफॉप-प्रोपार्जिल (15%) + मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (1% WP) [व्यावसायिक नाम: Vesta / Agritop @ 60 + 4 g/ha]।
    • मेसोसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (3%) + आयोडोसल्फ्यूरॉन-मिथाइल-सोडियम (0.6% WDG) [व्यावसायिक नाम: Atlantis @ 14.4 g a.i./ha]।
    • कारफेंट्राजोन-इथाइल (20%) + सल्फोसलफ्यूरॉन (25% WDG) [व्यावसायिक नाम: Broadway]।
  • 2. धान (Rice) के लिए:
    • मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (10%) + क्लोरिम्यूरॉन-इथाइल (10% WP) [व्यावसायिक नाम: Almix @ 4 g a.i./ha (20 g उत्पाद/ha)] — चौड़ी पत्ती व सेज हेतु।
    • बेनसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (0.6%) + प्रीटिलाक्लोर (6% G) [व्यावसायिक नाम: Londax Power @ 10 kg/ha]।
    • पेनोक्ससुलम (1.02%) + सायहालोफॉप-ब्यूटाइल (5.1% OD) [व्यावसायिक नाम: Vivaya]।
  • 3. सोयाबीन, मूंगफली एवं दलहन (Pulses & Oilseeds) के लिए:
    • पेंडिमेथालिन (30%) + इमेजेथापायर (2% EC) [व्यावसायिक नाम: Valor 32 @ 1.0 kg/ha PE]।
    • इमेजेथापायर (35%) + इमाज़ामॉक्स (35% WG) [व्यावसायिक नाम: Odyssey @ 70 g a.i./ha PoE]।
    • प्रोपाक्विज़ाफॉप (2.5%) + इमेजेथापायर (3.75% ME) [व्यावसायिक नाम: Shaked]।

2. कृषि-रसायनों के साथ शाकनाशी की अनुकूलता एवं WALES नियम (Compatibility with Agro-chemicals)

(A) अंसंगति / प्रतिकूलता के 3 प्रकार (Types of Incompatibility):
  1. भौतिक प्रतिकूलता (Physical Incompatibility): टैंक में मिलाने पर दही जैसा फटना (Curdling), अवक्षेप बनना (Precipitation), तेल अलग होना या नोजल जाम होना (जैसे कठोर जल या कैल्शियम नाइट्रेट के साथ 2,4-D सोडियम लवण)। जाँच: छिड़काव से पूर्व 1 लीटर काँच के जार में ‘जार परीक्षण’ (Jar Test) करें।
  2. रासायनिक एवं जैविक विरोध (Chemical & Biological Antagonism):
    • क्लोडिनाफॉप / फिनोक्साप्रॉप (FOPs) + 2,4-D या मेटसल्फ्यूरॉन का टैंक-मिक्स विरोध: गेहूँ में जब किसान क्लोडिनाफॉप (घास नाशक) के साथ 2,4-D (चौड़ी पत्ती नाशक) को टैंक में मिलाता है, तो 2,4-D घास में क्लोडिनाफॉप के अवशोषण और स्थानांतरण को घटा देता है, जिससे गेहूँसा नहीं मरता (Severe Antagonism)! समाधान: दोनों के छिड़काव में 5–7 दिन का अंतर रखें।
    • ग्लाइफोसेट / पैराक्वाट + एट्राजिन / ड्यूरॉन: मिट्टी या संपर्क अवरोध के कारण ग्लाइफोसेट का फ्लोएम स्थानांतरण रुक जाता है।
  3. फसल-विषाक्त सहक्रियाशीलता (Phytotoxic Synergism with Insecticides):
    • धान में प्रोपानिल + कार्बारिल / ऑर्गेनोफॉस्फेट कीटनाशी: कार्बारिल धान के सुरक्षात्मक एंजाइम Aryl acylamidase को रोक देता है जिससे प्रोपानिल धान की फसल को ही जला देता है।
(B) स्प्रे टैंक में रसायनों को मिलाने का अंतरराष्ट्रीय मानक क्रम — ‘W-A-L-E-S’ नियम:
  • स्प्रे टैंक को पहले आधा पानी से भरें और फिर निम्नलिखित क्रम (W-A-L-E-S) में रसायन डालें:
    W = Wettable Powders (WP) एवं Water Dispersible Granules (WDG/WG) सबसे पहले डालें;
    A = Agitation (अच्छी तरह हिलाएँ ताकि चूर्ण पूरी तरह निलंबित हो जाए);
    L = Liquid Flowables / Suspension Concentrates (SC);
    E = Emulsifiable Concentrates (EC);
    S = Soluble Liquids (SL) और अंत में Surfactants / Adjuvants।

3. शाकनाशी प्रतिरोध एवं उसका प्रबंधन (Herbicide Resistance & Its Management)

(A) विश्व एवं भारत में शाकनाशी प्रतिरोध का इतिहास
  • विश्व का प्रथम शाकनाशी प्रतिरोध प्रकरण (1968–1970, USA): जी.एफ. रयान (G.F. Ryan, 1970) ने अमेरिका के वाशिंगटन राज्य में एक नर्सरी में ‘सिमाजिन और एट्राजिन’ (Triazines) के प्रति प्रतिरोधी Senecio vulgaris (Common groundsel) की खोज की।
  • भारत का ऐतिहासिक प्रकरण (1992–93, हरियाणा): चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCSHAU, हिसार) के प्रख्यात खरपतवार वैज्ञानिक डॉ. आर.के. मलिक एवं डॉ. सैम अंडरहिल (Dr. R.K. Malik & S.W.SS. Singh, 1992–93) ने करनाल और कुरुक्षेत्र जिलों के धान-गेहूँ क्षेत्रों में लगातार 10–12 वर्षों तक ‘आइसोप्रोट्यूरॉन’ (Isoproturon) के एकल प्रयोग के कारण गेहूँसा (Phalaris minor) में विश्व का सबसे गंभीर आइसोप्रोट्यूरॉन प्रतिरोध खोजा, जिससे प्रतिरोधी गेहूँसा को मारने के लिए 8 से 16 गुना अधिक मात्रा (Resistance Factor = 8–16x) भी कम पड़ने लगी।
  • वर्तमान स्थिति (Multiple Resistance in Phalaris minor): 1997 में आइसोप्रोट्यूरॉन के स्थान पर क्लोडिनाफॉप, फिनोक्साप्रॉप और सल्फोसलफ्यूरॉन की सिफारिश की गई, किंतु आज पंजाब व हरियाणा में गेहूँसा के जैव-प्रारूपों ने तीन अलग-अलग क्रियाविधियों (PS-II: आइसोप्रोट्यूरॉन + ACCase: क्लोडिनाफॉप/पिनोक्साडेन + ALS: सल्फोसलफ्यूरॉन/मेसोसल्फ्यूरॉन) के विरुद्ध खतरनाक ‘बहु-प्रतिरोध’ (Multiple Resistance) विकसित कर लिया है! वर्तमान में ऐसे बहु-प्रतिरोधी गेहूँसा के नियंत्रण हेतु प्री-इमर्जेंस पाइरोक्सासल्फोन (Pyroxasulfone — ‘Awkira’ @ 127.5 g a.i./ha) या पेंडिमेथालिन + मेट्रीब्यूजिन की सिफारिश की जाती है।
(B) शाकनाशी प्रतिरोध के दो मुख्य जैव-रासायनिक तंत्र (2 Mechanisms of Resistance):
1. लक्ष्य-स्थल प्रतिरोध (Target-Site Resistance – TSR)

खरपतवार के जीन में बिंदु उत्परिवर्तन (Point mutation — जैसे D1 प्रोटीन में Ser-264-Gly या ALS/ACCase जीन में अमीनो अम्ल बदलाव) हो जाता है जिससे लक्ष्य एंजाइम का आकार बदल जाता है और शाकनाशी उस पर लॉक नहीं हो पाता, या लक्ष्य एंजाइम का अत्यधिक उत्पादन (Gene amplification — जैसे EPSPS) होने लगता है।

2. गैर-लक्ष्य-स्थल प्रतिरोध (Non-Target-Site Resistance – NTSR)

खरपतवार के अंदर साइटोक्रोम P450 मोनोऑक्सीजिनेज (Cyt P450) और GST एंजाइमों की अत्यधिक सक्रियता से शाकनाशी लक्ष्य स्थल पर पहुँचने से पहले ही टूटकर निष्क्रिय हो जाता है (जैसे भारतीय गेहूँसा में आइसोप्रोट्यूरॉन प्रतिरोध का मुख्य कारण Cyt P450 द्वारा त्वरित डिमेथिलेशन था), या शाकनाशी रिक्तिका में बंद (Vacuolar sequestration — जैसे पैराक्वाट/ग्लाइफोसेट) कर दिया जाता है।

(C) शाकनाशी प्रतिरोध का समन्वित प्रबंधन (Management Strategies for Herbicide Resistance):
  1. शाकनाशी चक्रण एवं मिश्रण (Herbicide Rotation & Mixture by HRAC Group): हर साल एक ही क्रियाविधि (MoA) का शाकनाशी कभी न लगाएँ; अलग-अलग HRAC समूह के शाकनाशियों का चक्रण और प्री-मिक्स मिश्रण अपनाएँ।
  2. फसल चक्र (Crop Rotation — सबसे अचूक अस्त्र): गेहूँसा-प्रभावित खेतों में 2–3 वर्ष के लिए गेहूँ की जगह बरसीम, सरसों, चना, आलू या सूरजमुखी उगाने से प्रतिरोधी गेहूँसा का बीज बैंक 90% समाप्त हो जाता है।
  3. बुवाई समय व विधि में परिवर्तन: अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से 5 नवंबर तक हैप्पी सीडर / जीरो-टिल ड्रिल से गेहूँ की अगेती बुवाई (इस समय तापमान अधिक होने से गेहूँसा अंकुरित नहीं होता)।
  4. एकीकृत यांत्रिक एवं सांस्कृतिक नियंत्रण (IWM): स्टेल सीडबेड + सही अनुशंसित मात्रा में प्री-इमर्जेंस शाकनाशी (पाइरोक्सासल्फोन / पेंडिमेथालिन) + 30–35 DAS पर एक गुड़ाई तथा कटाई से पहले बचे हुए खरपतवारों की बालियों को उखाड़कर जलाना (Roguing before seed shedding)।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

शाकनाशी प्रतिरोध एवं मिश्रण के प्रकारों का वर्गीकरण:

  • पादप प्रतिक्रिया के प्रकार: (1) संवेदनशीलता (Susceptibility), (2) प्राकृतिक सहनशीलता (Tolerance — पहले से मौजूद स्वाभाविक क्षमता), (3) शाकनाशी प्रतिरोध (Resistance — चयन दबाव से विकसित वंशानुगत क्षमता)।
  • प्रतिरोध के प्रकार: (1) एकल प्रतिरोध (Single resistance), (2) क्रॉस-प्रतिरोध (Cross-resistance — समान MoA), (3) बहु-प्रतिरोध (Multiple resistance — भिन्न MoA), (4) नकारात्मक क्रॉस-प्रतिरोध (Negative cross-resistance — एक के प्रति प्रतिरोधी होने पर दूसरे के प्रति अधिक संवेदनशील होना)।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)

  • डार्विनियन चयन दबाव का सिद्धांत (Principle of Selection Pressure in Herbicide Resistance): शाकनाशी स्वयं खरपतवार में उत्परिवर्तन (Mutation) पैदा नहीं करता! करोड़ों खरपतवार पौधों में प्राकृतिक रूप से 1 प्रतिरोधी उत्परिवर्तित पौधा (10−6 से 10−9 आवृत्ति) पहले से मौजूद होता है। जब किसान लगातार 8–10 साल एक ही शाकनाशी छिड़कता है, तो सभी संवेदनशील पौधे मर जाते हैं और केवल वही 1 प्रतिरोधी पौधा बीज बनाकर कुछ ही वर्षों में पूरे खेत पर कब्जा कर लेता है।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)

हल किया गया संख्यात्मक प्रश्न: कॉल्बी के समीकरण (Colby’s Equation, 1967) द्वारा शाकनाशी मिश्रण में Synergism / Antagonism की जाँच

प्रश्न: किसी खेत में शाकनाशी A अकेले प्रयोग करने पर 60% खरपतवार नियंत्रण (X=60) देता है और शाकनाशी B अकेले प्रयोग करने पर 50% खरपतवार नियंत्रण (Y=50) देता है। जब A+B को टैंक-मिक्स करके छिड़का गया, तो वास्तविक प्रेक्षित नियंत्रण (Observed control, O) 88% प्राप्त हुआ। कॉल्बी के सूत्र से अपेक्षित नियंत्रण (E) ज्ञात कीजिए और बताइए कि यह मिश्रण सहक्रियाशील (Synergistic) है या विरोधी (Antagonistic)?

हल (Solution):

  • कॉल्बी का सूत्र (Colby’s Formula, 1967):
    $E=X+Y−X×Y100$
  • मान रखने पर:
    $E=60+50−60×50100=110−30=80.0%$
  • निष्कर्ष: चूँकि वास्तविक प्रेक्षित नियंत्रण (O=88%) कॉल्बी के अपेक्षित नियंत्रण (E=80%) से अधिक है (O>E), अतः दोनों शाकनाशियों के बीच ‘सहक्रियाशीलता’ (Synergism) है! (यदि O<80% होता तो Antagonism और यदि O=80% होता तो Additive प्रभाव कहलाता)।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 13.1: शाकनाशी सहनशीलता बनाम प्रतिरोध एवं क्रॉस-प्रतिरोध बनाम बहु-प्रतिरोध
तुलना का आधार शाकनाशी सहनशीलता (Tolerance) शाकनाशी प्रतिरोध (Resistance) क्रॉस-प्रतिरोध (Cross-Resistance) बहु-प्रतिरोध (Multiple Resistance)
1. उत्पत्ति का कारण प्रजाति में जन्मजात / प्राकृतिक रूप से पहले से मौजूद क्षमता (चयन दबाव आवश्यक नहीं)। एक ही शाकनाशी के बार-बार प्रयोग (Selection pressure) से दुर्लभ उत्परिवर्तित जैव-प्रारूप का चयन। एकल प्रतिरोध तंत्र (Single mechanism) के कारण विकसित। दो या अधिक स्वतंत्र प्रतिरोध तंत्रों के क्रमिक संचय से विकसित।
2. क्रियाविधि (MoA) का दायरा पूरी प्रजाति किसी शाकनाशी को सहन करती है। प्रजाति का केवल एक विशिष्ट जैव-प्रारूप (Biotype) प्रतिरोधी होता है। समान क्रियाविधि (Same Mode of Action) के अनेक शाकनाशियों के प्रति प्रतिरोध। भिन्न-भिन्न क्रियाविधि (Different Modes of Action) के शाकनाशियों के प्रति प्रतिरोध।
3. उत्कृष्ट उदाहरण गेहूँ में 2,4-D के प्रति प्राकृतिक सहनशीलता; मोथा में 2,4-D सहनशीलता। हरियाणा/पंजाब में गेहूँसा (Phalaris minor) में आइसोप्रोट्यूरॉन प्रतिरोध। क्लोरिम्यूरॉन के प्रति प्रतिरोधी खरपतवार का मेटसल्फ्यूरॉन (दोनों ALS अवरोधक) के प्रति भी प्रतिरोधी होना। गेहूँसा का एक साथ आइसोप्रोट्यूरॉन (PS-II) + क्लोडिनाफॉप (ACCase) + सल्फोसलफ्यूरॉन (ALS) तीनों के प्रति प्रतिरोधी होना।

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)

शाकनाशी मिश्रण एवं प्रतिरोध मूल्यांकन के प्रमुख सूत्र
  • 1. कॉल्बी का अपेक्षित प्रतिक्रिया समीकरण (Colby’s Equation for Herbicide Mixtures, 1967):
    $E=X+Y−X·Y100$
    • यदि Observed (O)>E⟹Synergism (सहक्रियाशीलता)
    • यदि Observed (O)<E⟹Antagonism (विरोध)
    • यदि Observed (O)=E⟹Additive Effect (योगात्मक प्रभाव)
  • 2. प्रतिरोध गुणांक / सूचकांक (Resistance Factor / Index — RF or R/S Ratio):
    $Resistance Factor (RF)=GR50 (or ED50) of Resistant Biotype (R)GR50 (or ED50) of Susceptible Wild Biotype (S)$
    (जब RF≥2 से 10+ होता है, तो प्रतिरोध की पुष्टि हो जाती है।)
  • 3. स्प्रे टैंक मिश्रण क्रम (Tank Mixing Order): $W (WP/WG)→A (Agitation)→L (SC/Flowables)→E (EC)→S (SL & Surfactants)$

11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 13: शाकनाशी मिश्रण, अनुकूलता एवं प्रतिरोध
शाकनाशी मिश्रण (Herbicide Mixtures)
  • Tank-mix (किसान द्वारा टैंक में) बनाम Ready-mix (कंपनी पैक)
  • गेहूँ रेडी-मिक्स: Total (Sulfosulfuron+Metsulfuron), Vesta, Atlantis
  • धान रेडी-मिक्स: Almix (Metsulfuron+Chlorimuron), Londax Power
  • दलहन रेडी-मिक्स: Valor-32 (Pendimethalin+Imazethapyr), Odyssey
मिश्रण अंतःक्रिया व अनुकूलता
  • कॉल्बी समीकरण: E = X + Y – (XY/100)
  • Synergism (O > E), Antagonism (O < E), Additive (O = E)
  • विरोध उदाहरण: क्लोडिनाफॉप + 2,4-D (गेहूँसा नियंत्रण विफल)
  • फसल क्षति: धान में प्रोपानिल + कार्बारिल कीटनाशी | टैंक क्रम: W-A-L-E-S
शाकनाशी प्रतिरोध (Herbicide Resistance)
  • विश्व प्रथम (1970, Ryan): Senecio vulgaris में Simazine/Atrazine प्रतिरोध
  • भारत प्रथम (1992-93, डॉ. आर.के. मलिक): Phalaris minor में Isoproturon प्रतिरोध
  • Cross-resistance (समान MoA) बनाम Multiple resistance (भिन्न MoA)
  • Target-site (उत्परिवर्तन) बनाम Non-target-site (Cyt P450 विषहरण)
प्रतिरोध प्रबंधन रणनीतियाँ
  • अलग-अलग HRAC क्रियाविधि समूह के शाकनाशियों का चक्रण
  • बहु-प्रतिरोधी गेहूँसा हेतु: पाइरोक्सासल्फोन (Pyroxasulfone PE)
  • धान-गेहूँ की जगह 2-3 वर्ष बरसीम/सरसों/आलू का फसल चक्र
  • अगेती जीरो-टिल बुवाई + कटाई पूर्व बचे खरपतवार उखाड़ना (Roguing)

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)

लगातार एक ही शाकनाशी के प्रयोग से प्रतिरोध का विकास एवं उसका समाधान चक्र (Evolution & Management of Herbicide Resistance)
Step 1
चरण 1 (प्रारंभिक अवस्था): खेत में 99.9999% संवेदनशील खरपतवार और प्राकृतिक रूप से 1 प्रतिरोधी उत्परिवर्तित पौधा (1 in 10⁶)
⬇
Step 2
चरण 2 (चयन दबाव – Selection Pressure): किसान द्वारा 8–10 वर्षों तक हर साल एक ही शाकनाशी (जैसे आइसोप्रोट्यूरॉन) का लगातार प्रयोग
⬇
Step 3
चरण 3 (प्रतिरोधी आबादी का विस्फोट): सभी संवेदनशील पौधे मर जाते हैं, किंतु प्रतिरोधी जैव-प्रारूप जीवित बचकर हजारों बीज बनाता है और पूरे खेत पर छा जाता है
⬇
Step 4
चरण 4 (निदान): प्रतिरोध गुणांक (RF = GR50 R / GR50 S) की जाँच कर क्रॉस या बहु-प्रतिरोध की पुष्टि
⬇
Step 5
चरण 5 (समाधान पैकेज): शाकनाशी समूह बदलना (पाइरोक्सासल्फोन / रेडी-मिक्स) + धान-बरसीम फसल चक्र + IWM एवं गुड़ाई

13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • विश्व में शाकनाशी प्रतिरोध का प्रथम मामला 1970 में जी.एफ. रयान (G.F. Ryan) ने ‘Senecio vulgaris’ खरपतवार में सिमाजिन और एट्राजिन (Triazines) के विरुद्ध रिपोर्ट किया था।
  • भारत में शाकनाशी प्रतिरोध का प्रथम और सबसे गंभीर मामला 1992–93 में डॉ. आर.के. मलिक (CCSHAU, हिसार) ने गेहूँ के खरपतवार ‘गेहूँसा’ (Phalaris minor) में ‘आइसोप्रोट्यूरॉन’ के विरुद्ध खोजा था।
  • बहु-प्रतिरोधी (Multiple-resistant) गेहूँसा के नियंत्रण के लिए वर्तमान में सर्वाधिक प्रभावी नया प्री-इमर्जेंस शाकनाशी ‘पाइरोक्सासल्फोन’ (Pyroxasulfone 85% WG @ 127.5 g a.i./ha) है।
  • गेहूँ में क्लोडिनाफॉप या फिनोक्साप्रॉप (घास नाशक) के साथ 2,4-D (चौड़ी पत्ती नाशक) को टैंक-मिक्स करने पर ‘विरोध’ (Antagonism) होता है जिससे गेहूँसा नहीं मरता।
  • शाकनाशी मिश्रण की सहक्रियाशीलता (Synergism) या विरोध (Antagonism) की गणना ‘कॉल्बी के सूत्र’ [E = X + Y – (XY/100)] द्वारा की जाती है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)

त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):

  • प्रमुख रेडी-मिक्स: Total (Sulfosulfuron + Metsulfuron), Vesta (Clodinafop + Metsulfuron), Atlantis (Mesosulfuron + Iodosulfuron), Almix (Metsulfuron + Chlorimuron), Valor-32 (Pendimethalin + Imazethapyr), Odyssey (Imazethapyr + Imazamox)।
  • कॉल्बी समीकरण: E=X+Y−(XY/100); O>E (Synergism), O<E (Antagonism)।
  • टैंक मिश्रण क्रम: W-A-L-E-S (WP/WG → Agitation → SC → EC → SL/Surfactant)।
  • शाकनाशी प्रतिरोध: विश्व प्रथम — Senecio vulgaris (Ryan, 1970); भारत प्रथम — Phalaris minor में आइसोप्रोट्यूरॉन प्रतिरोध (Dr. R.K. Malik, 1992–93)।

15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)

1. भारत में वर्ष 1992–93 में गेहूँ के प्रमुख खरपतवार गेहूँसा (Phalaris minor) में ‘आइसोप्रोट्यूरॉन’ (Isoproturon) शाकनाशी के विरुद्ध प्रतिरोध (Resistance) की सर्वप्रथम खोज किस वैज्ञानिक ने की थी?
(A) डॉ. आर.के. मलिक (Dr. R.K. Malik, CCSHAU हिसार)
(B) डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन
(C) डॉ. वर्गीज कुरियन
(D) डॉ. सुभाष पालेकर
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) डॉ. आर.के. मलिक (Dr. R.K. Malik, CCSHAU हिसार)
व्याख्या: डॉ. आर.के. मलिक और सैम अंडरहिल ने 1992–93 में हरियाणा के करनाल-कुरुक्षेत्र क्षेत्र में आइसोप्रोट्यूरॉन-प्रतिरोधी गेहूँसा की खोज की थी।
2. जब कोई खरपतवार दो या अधिक अलग-अलग जैव-रासायनिक तंत्रों के कारण भिन्न-भिन्न क्रियाविधि (Different Modes of Action — जैसे PS-II, ACCase और ALS तीनों) वाले शाकनाशियों के प्रति प्रतिरोधी हो जाता है, तो इसे क्या कहते हैं?
(A) बहु-प्रतिरोध (Multiple Resistance)
(B) साधारण सहनशीलता
(C) नकारात्मक प्रतिरोध
(D) सुप्तावस्था
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) बहु-प्रतिरोध (Multiple Resistance)
व्याख्या: भिन्न-भिन्न क्रियाविधि (MoA) वाले शाकनाशियों के प्रति प्रतिरोध को ‘बहु-प्रतिरोध’ (Multiple resistance) और समान क्रियाविधि वालों के प्रति प्रतिरोध को ‘क्रॉस-प्रतिरोध’ कहते हैं।
3. गेहूँ में क्लोडिनाफॉप-प्रोपार्जिल (ACCase अवरोधक) के साथ 2,4-D को एक ही स्प्रे टैंक में मिलाकर छिड़कने पर गेहूँसा का नियंत्रण कम हो जाता है। यह किस प्रकार की अंतःक्रिया का उदाहरण है?
(A) विरोध / एंटागोनिज्म (Antagonism)
(B) सहक्रियाशीलता (Synergism)
(C) सेफनर प्रभाव
(D) बायो-फ्यूमिगेशन
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) विरोध / एंटागोनिज्म (Antagonism)
व्याख्या: 2,4-D संकरी पत्ती वाले गेहूँसा में क्लोडिनाफॉप के अवशोषण व स्थानांतरण को कम कर देता है जिसे एंटागोनिज्म कहते हैं।
4. धान में चौड़ी पत्ती और सेज खरपतवारों के नियंत्रण हेतु प्रयुक्त प्रसिद्ध रेडी-मिक्स शाकनाशी ‘एल्मिक्स’ (Almix @ 4 g a.i./ha) में किन दो शाकनाशियों का मिश्रण होता है?
(A) मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (10%) + क्लोरिम्यूरॉन-इथाइल (10% WP)
(B) 2,4-D + पैराक्वाट
(C) एट्राजिन + ग्लाइफोसेट
(D) ब्यूटाक्लोर + पेंडिमेथालिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (10%) + क्लोरिम्यूरॉन-इथाइल (10% WP)
व्याख्या: Almix में 10% Metsulfuron-methyl और 10% Chlorimuron-ethyl का रेडी-मिक्स होता है।
5. गेहूँ में गेहूँसा और चौड़ी पत्ती दोनों के नियंत्रण के लिए प्रयुक्त रेडी-मिक्स शाकनाशी ‘टोटल’ (Total) में कौन-से दो घटक होते हैं?
(A) सल्फोसलफ्यूरॉन (75%) + मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (5% WG)
(B) एट्राजिन + सिमाजिन
(C) पैराक्वाट + डाइक्वाट
(D) फ्लूक्लोरालिन + ब्यूटाक्लोर
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) सल्फोसलफ्यूरॉन (75%) + मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (5% WG)
व्याख्या: Total में सल्फोसलफ्यूरॉन और मेटसल्फ्यूरॉन का 75% + 5% WG पूर्व-मिश्रण होता है।
6. यदि शाकनाशी A अकेले 50% नियंत्रण (X=50) और शाकनाशी B अकेले 40% नियंत्रण (Y=40) देता है, तो कॉल्बी के सूत्र [E = X + Y – (XY/100)] के अनुसार उनके मिश्रण का अपेक्षित नियंत्रण (E) कितना होगा?
(A) 70%
(B) 90%
(C) 50%
(D) 10%
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) 70%
व्याख्या: E = 50 + 40 – (50 × 40)/100 = 90 – 20 = 70%।
7. विश्व में वर्ष 1970 में जी.एफ. रयान द्वारा खोजा गया प्रथम शाकनाशी-प्रतिरोधी खरपतवार कौन-सा था?
(A) सेनेसियो वल्गैरिस (Senecio vulgaris — Common groundsel, ट्रायजीन के विरुद्ध)
(B) जलकुंभी
(C) अमरबेल
(D) नागफनी
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) सेनेसियो वल्गैरिस (Senecio vulgaris — Common groundsel, ट्रायजीन के विरुद्ध)
व्याख्या: 1970 में अमेरिका में Senecio vulgaris में सिमाजिन और एट्राजिन के विरुद्ध विश्व का पहला प्रतिरोध दर्ज हुआ था।
8. स्प्रे टैंक में विभिन्न प्रकार के संरूपणों को मिलाने के मानक ‘W-A-L-E-S’ नियम के अनुसार सबसे पहले और सबसे अंत में क्रमशः क्या डाला जाता है?
(A) सबसे पहले WP/WDG चूर्ण और सबसे अंत में SL व सरफेक्टेंट
(B) सबसे पहले तेल और सबसे अंत में मिट्टी
(C) सबसे पहले सरफेक्टेंट और अंत में WP
(D) कोई क्रम नहीं होता
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) सबसे पहले WP/WDG चूर्ण और सबसे अंत में SL व सरफेक्टेंट
व्याख्या: WALES क्रम: Wettable powder/WG → Agitation → Liquid SC → EC → Soluble liquid & Surfactants।
9. पंजाब और हरियाणा में क्लोडिनाफॉप और सल्फोसलफ्यूरॉन दोनों के प्रति बहु-प्रतिरोधी (Multiple-resistant) हो चुके गेहूँसा (Phalaris minor) के नियंत्रण के लिए कौन-सा नया प्री-इमर्जेंस शाकनाशी सर्वाधिक प्रभावी पाया गया है?
(A) पाइरोक्सासल्फोन (Pyroxasulfone 85% WG — ‘Awkira’ @ 127.5 g a.i./ha)
(B) केवल 2,4-D
(C) केवल आइसोप्रोट्यूरॉन
(D) कॉपर सल्फेट
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) पाइरोक्सासल्फोन (Pyroxasulfone 85% WG — ‘Awkira’ @ 127.5 g a.i./ha)
व्याख्या: पाइरोक्सासल्फोन (VLCFA अवरोधक) बहु-प्रतिरोधी गेहूँसा को अंकुरण के समय ही प्रभावी रूप से नियंत्रित करता है।
10. सोयाबीन और मूंगफली में चौड़ी और संकरी पत्ती के खरपतवारों के नियंत्रण हेतु प्रयुक्त प्रसिद्ध पोस्ट-इमर्जेंस रेडी-मिक्स ‘ओडिसी’ (Odyssey) में कौन-से दो शाकनाशी होते हैं?
(A) इमेजेथापायर (35%) + इमाज़ामॉक्स (35% WG)
(B) ब्यूटाक्लोर + एट्राजिन
(C) 2,4-D + ग्लाइफोसेट
(D) आइसोप्रोट्यूरॉन + पैराक्वाट
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) इमेजेथापायर (35%) + इमाज़ामॉक्स (35% WG)
व्याख्या: Odyssey में इमेजेथापायर और इमाज़ामॉक्स (35% + 35% WG) का मिश्रण होता है।

16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)

  1. भारत में 1992–93 में डॉ. आर.के. मलिक ने गेहूँसा (Phalaris minor) में ‘आइसोप्रोट्यूरॉन’ के विरुद्ध शाकनाशी प्रतिरोध खोजा था।
  2. विश्व में प्रथम शाकनाशी प्रतिरोध 1970 में जी.एफ. रयान ने ‘Senecio vulgaris’ में ट्रायजीन के विरुद्ध रिपोर्ट किया था।
  3. समान क्रियाविधि (Same MoA) के प्रति प्रतिरोध ‘क्रॉस-प्रतिरोध’ और भिन्न क्रियाविधि (Different MoA) के प्रति प्रतिरोध ‘बहु-प्रतिरोध’ कहलाता है।
  4. शाकनाशी मिश्रण में सहक्रियाशीलता (Synergism) या विरोध (Antagonism) की जाँच ‘कॉल्बी के समीकरण’ [E = X + Y – (XY/100)] से होती है।
  5. गेहूँ में क्लोडिनाफॉप और 2,4-D को साथ मिलाने पर ‘विरोध’ (Antagonism) होता है, जबकि धान में प्रोपानिल और कार्बारिल मिलाने पर धान झुलस जाता है।

(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)

1. टैंक-मिक्स (Tank-mix) और रेडी-मिक्स (Ready-mix) शाकनाशी में क्या अंतर है?
उत्तर: छिड़काव से ठीक पहले किसान द्वारा स्प्रे टैंक में दो शाकनाशी मिलाना ‘टैंक-मिक्स’ है, जबकि कंपनी द्वारा कारखाने में ही दो शाकनाशियों को मिलाकर एक पैकेट में बेचना ‘रेडी-मिक्स’ है।
2. गेहूँ और धान के दो-दो प्रसिद्ध रेडी-मिक्स शाकनाशियों के नाम और घटक लिखिए।
उत्तर: गेहूँ: (1) Total (Sulfosulfuron + Metsulfuron), (2) Atlantis (Mesosulfuron + Iodosulfuron)। धान: (1) Almix (Metsulfuron + Chlorimuron), (2) Londax Power (Bensulfuron + Pretilachlor)।
3. कॉल्बी का समीकरण (Colby’s Equation) लिखिए।
उत्तर: E = X + Y – [(X × Y) / 100], जहाँ E अपेक्षित नियंत्रण है और X तथा Y दोनों शाकनाशियों के अलग-अलग प्रतिशत नियंत्रण हैं।
4. भारत में आइसोप्रोट्यूरॉन-प्रतिरोधी गेहूँसा की खोज कब और किसने की?
उत्तर: वर्ष 1992–93 में डॉ. आर.के. मलिक (CCSHAU, हिसार) ने।
5. स्प्रे टैंक में रसायन मिलाने के ‘W-A-L-E-S’ नियम का पूर्ण रूप लिखिए।
उत्तर: W = Wettable powders/WG, A = Agitation, L = Liquid flowables (SC), E = Emulsifiable concentrates (EC), S = Soluble liquids (SL) & Surfactants।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)

1. कृषि में शाकनाशी मिश्रण (Herbicide mixtures) के चार प्रमुख लाभ लिखिए तथा भारत में प्रयुक्त चार रेडी-मिक्स शाकनाशियों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर: लाभ: (1) एक ही छिड़काव में संकरी पत्ती, चौड़ी पत्ती और सेज का व्यापक नियंत्रण (Broad-spectrum control), (2) समय, श्रम व छिड़काव लागत की बचत, (3) व्यक्तिगत शाकनाशी की मात्रा कम होने से मृदा अवशेष विषाक्तता में कमी, और (4) शाकनाशी प्रतिरोध (Resistance) की रोकथाम। चार रेडी-मिक्स उदाहरण: (1) Total (सल्फोसलफ्यूरॉन + मेटसल्फ्यूरॉन — गेहूँ में), (2) Vesta (क्लोडिनाफॉप + मेटसल्फ्यूरॉन — गेहूँ में), (3) Almix (मेटसल्फ्यूरॉन + क्लोरिम्यूरॉन — धान में), और (4) Odyssey (इमेजेथापायर + इमाज़ामॉक्स — सोयाबीन में)।
2. सहक्रियाशीलता (Synergism) और विरोध (Antagonism) को उदाहरण और कॉल्बी के समीकरण सहित समझाइए।
उत्तर: कॉल्बी (1967) के समीकरण के अनुसार दो शाकनाशियों के मिश्रण से अपेक्षित नियंत्रण E = X + Y – (XY/100) होता है। यदि मिश्रण का वास्तविक प्रेक्षित नियंत्रण (O) अपेक्षित मान (E) से अधिक हो (O > E), तो इसे ‘सहक्रियाशीलता’ (Synergism — जैसे मक्का में एट्राजिन + पेंडिमेथालिन) कहते हैं। यदि वास्तविक नियंत्रण अपेक्षित मान से कम हो जाए (O < E), तो इसे ‘विरोध’ (Antagonism — जैसे गेहूँ में क्लोडिनाफॉप + 2,4-D मिलाने पर गेहूँसा का न मरना) कहते हैं।
3. शाकनाशी सहनशीलता (Tolerance) और शाकनाशी प्रतिरोध (Resistance) में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शाकनाशी सहनशीलता किसी पादप प्रजाति की वह जन्मजात और स्वाभाविक क्षमता है जो उस प्रजाति में शाकनाशी के प्रयोग से पहले से ही मौजूद होती है (जैसे गेहूँ या मक्का की 2,4-D के प्रति सहनशीलता)। इसके विपरीत, शाकनाशी प्रतिरोध पूर्व में संवेदनशील रही किसी खरपतवार आबादी के भीतर एक ही शाकनाशी के बार-बार प्रयोग (Selection pressure) से विकसित वह वंशानुगत क्षमता है जिससे उसका विशिष्ट जैव-प्रारूप (Biotype) शाकनाशी की मारक मात्रा पर भी जीवित बच जाता है (जैसे गेहूँसा में आइसोप्रोट्यूरॉन प्रतिरोध)।
4. क्रॉस-प्रतिरोध (Cross-resistance) और बहु-प्रतिरोध (Multiple resistance) में उदाहरण सहित अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: क्रॉस-प्रतिरोध: जब कोई खरपतवार एकल प्रतिरोध तंत्र (जैसे ALS एंजाइम में उत्परिवर्तन) के कारण एक ही क्रियाविधि समूह (Same Mode of Action) के दो या अधिक शाकनाशियों के प्रति प्रतिरोधी हो जाता है (जैसे सल्फोसलफ्यूरॉन के प्रति प्रतिरोधी खरपतवार का मेसोसल्फ्यूरॉन के प्रति भी प्रतिरोधी होना)। बहु-प्रतिरोध: जब खरपतवार दो या अधिक अलग-अलग तंत्रों के कारण भिन्न-भिन्न क्रियाविधि (Different Modes of Action) वाले शाकनाशियों के प्रति प्रतिरोधी हो जाता है (जैसे पंजाब-हरियाणा में गेहूँसा का आइसोप्रोट्यूरॉन [PS-II], क्लोडिनाफॉप [ACCase] और सल्फोसलफ्यूरॉन [ALS] तीनों के प्रति प्रतिरोधी होना)।
5. लक्ष्य-स्थल प्रतिरोध (Target-site resistance) और गैर-लक्ष्य-स्थल प्रतिरोध (Non-target-site resistance) क्या हैं?
उत्तर: लक्ष्य-स्थल प्रतिरोध (TSR): जब खरपतवार के जीन में उत्परिवर्तन (Point mutation) होने से लक्ष्य एंजाइम (जैसे ALS, ACCase या D1 प्रोटीन) की संरचना बदल जाती है और शाकनाशी अणु उस पर जुड़ नहीं पाता। गैर-लक्ष्य-स्थल प्रतिरोध (NTSR): जब लक्ष्य एंजाइम सामान्य रहता है, किंतु खरपतवार के अंदर साइटोक्रोम P450 या GST एंजाइमों की बढ़ी हुई सक्रियता शाकनाशी को लक्ष्य स्थल तक पहुँचने से पहले ही तोड़कर अविषैला कर देती है या रिक्तिका में बंद कर देती है।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)

1. शाकनाशी प्रतिरोध (Herbicide Resistance) क्या है? इसके प्रकारों (Cross बनाम Multiple; Target-site बनाम Non-target-site), भारत में गेहूँसा (Phalaris minor) में आइसोप्रोट्यूरॉन एवं बहु-प्रतिरोध के विकास की केस स्टडी तथा प्रतिरोध प्रबंधन की एकीकृत रणनीतियों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: WSSA की परिभाषा, तुलनात्मक सारणी 13.1, डॉ. आर.के. मलिक (1992-93) की खोज, बहु-प्रतिरोध विकास का प्रवाह चित्र और प्रबंधन के सभी उपायों (पाइरोक्सासल्फोन, शाकनाशी चक्रण, धान-बरसीम फसल चक्र, जीरो-टिल अगेती बुवाई, रोगिंग) का विस्तार से वर्णन करें।
2. शाकनाशी मिश्रण (Herbicide Mixture) की अवधारणा, लाभ, प्रमुख भारतीय रेडी-मिक्स शाकनाशी, कॉल्बी का समीकरण (Colby’s Equation) तथा कृषि-रसायनों के साथ शाकनाशियों की अनुकूलता एवं ‘W-A-L-E-S’ टैंक-मिक्सिंग नियम पर विस्तृत निबंध लिखिए।
उत्तर रूपरेखा: Tank-mix बनाम Ready-mix, गेहूँ-धान-सोयाबीन के सभी प्रमुख रेडी-मिक्स उत्पाद, कॉल्बी सूत्र का हल किया गया न्यूमेरिकल, भौतिक व जैविक प्रतिकूलता (Clodinafop + 2,4-D एवं Propanil + Carbaryl) और WALES नियम को विस्तार से लिखें।
3. स्प्रे टैंक में दो कृषि-रसायनों को मिलाने से पूर्व ‘जार परीक्षण’ (Jar test) कैसे किया जाता है? यदि टैंक में अंसंगति (Incompatibility) हो जाए तो फसल और स्प्रेयर पर क्या दुष्प्रभाव पड़ते हैं?
उत्तर रूपरेखा: 1 लीटर काँच के जार में WALES क्रम से आनुपातिक मात्रा मिलाकर 30 मिनट रखने की विधि, दही फटने/अवक्षेप बनने की पहचान तथा नोजल जाम होने, असमान छिड़काव और फसल झुलसने (Phytotoxicity) के दुष्प्रभावों का वर्णन करें।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGRON 311 notes।

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