PPATH 311 Lecture 07: सेम (बीन्स), भिंडी, अदरक, धनिया और जीरा के प्रमुख रोग एवं प्रबंधन

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PPATH 311 · Plant Pathology Smart Notes
LECTURE 07 / 08 · PPATH 311

सेम (बीन्स), भिंडी, अदरक, धनिया और जीरा के प्रमुख रोग एवं प्रबंधन

Major Diseases of Beans, Okra, Ginger, Coriander, and Cumin & Their Management

Beans (सेम/राजमा), Okra (भिंडी), Ginger (अदरक), Coriander (धनिया), Cumin (जीरा)

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsरोग वर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesफसलवार रोग एवं प्रबंधन · Disease Notesतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Beans (anthracnose, bacterial blight) and Okra (yellow vein mosaic); Ginger (soft rot), Coriander (stem gall); Cumin Blight and wilt
अध्ययन संदर्भ: यह उपलब्ध कराए गए पाठ्यक्रम के विस्तृत notes हैं। रासायनिक दवाओं, एंटीबायोटिक, पेस्ट और उनकी दरों के उल्लेख शैक्षणिक स्रोत का हिस्सा हैं; इन्हें वर्तमान पंजीकरण या खेत में प्रयोग की स्वीकृति न मानें। वास्तविक उपयोग से पहले संबंधित फसल के लिए वर्तमान label claim और स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय/KVK की सलाह जाँचें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • सेम/राजमा (Beans) के एंथ्रेक्नोज (Colletotrichum lindemuthianum) और जीवाणुज अंगमारी (Xanthomonas axonopodis pv. phaseoli) की पहचान व बीज उपचार सीखना।
  • भिंडी के पीत शिरा मोजैक (Yellow Vein Mosaic – BYVMV) के लक्षणों, वाहक (Bemisia tabaci) और प्रसिद्ध प्रतिरोधी किस्मों (परभणी क्रांति, अर्का अनामिका, पंजाब पद्मिनी) का अध्ययन करना।
  • अदरक के मृदु सड़न / प्रकंद गलन (Soft Rot – Pythium aphanidermatum) के प्रकंद उपचार व भंडारण प्रबंधन को समझना।
  • बीजीय मसालों—धनिया के तना पिटिका / स्टेम गॉल (Protomyces macrosporus) तथा जीरा के झुलसा (Alternaria burnsii) और उकठा (Fusarium oxysporum f.sp. cumini)—का समन्वित प्रबंधन करना।

प्रस्तावना · Introduction

सब्जियों में सेम (French Bean) और भिंडी (Okra) तथा मसाला फसलों में अदरक (Ginger), धनिया (Coriander) और जीरा (Cumin) उच्च बाजार मूल्य वाली फसलें हैं। विशेष रूप से राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में धनिया और जीरा प्रमुख नकदी फसलें हैं, जहाँ धनिया का तना पिटिका (Stem Gall) और जीरे का झुलसा (Blight) व उकठा (Wilt) किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। इसी प्रकार भिंडी का पीत शिरा मोजैक (YVMV) बिना प्रतिरोधी किस्म के खेती को असंभव बना देता है। इस व्याख्यान में इन 5 फसलों के 7 प्रमुख रोगों का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन दिया गया है।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

पीत शिरा जाल (Yellow Network of Veins)

भिंडी के पीत शिरा मोजैक (BYVMV) में पत्ती की सभी मुख्य और सहायक शिराओं का चमकीला पीला पड़ जाना, जिससे हरी पत्ती पर पीले जाल जैसी आकृति उभर आती है।

तना पिटिका / लोंगिया रोग (Stem Gall of Coriander)

Protomyces macrosporus के कारण धनिया के तने, डंठलों और फलों पर बनने वाले फूले हुए ट्यूमर जैसे उभार, जिनमें फल विकृत होकर लौंग के आकार जैसे बड़े हो जाते हैं।

प्रकंद मृदु गलन (Rhizome Soft Rot)

Pythium प्रजातियों द्वारा अदरक के भूमिगत प्रकंदों के आंतरिक ऊतकों का गलकर दुर्गंधयुक्त गूदे में बदल जाना और केवल बाहरी छिलके का बचना।

रोग वर्गीकरण · Classification

कवक एवं Oomycete जनित रोग

बीन्स का Anthracnose (Colletotrichum lindemuthianum), अदरक का Soft Rot (Pythium aphanidermatum / P. myriotylum), धनिया का Stem Gall (Protomyces macrosporus – Ascomycete), जीरा का Blight (Alternaria burnsii) एवं Wilt (Fusarium oxysporum f.sp. cumini)।

जीवाणु जनित रोग

बीन्स का कॉमन बैक्टीरियल ब्लाइट (Common Bacterial Blight of Bean – Xanthomonas axonopodis pv. phaseoli)।

विषाणु जनित रोग

भिंडी का पीत शिरा मोजैक (Bhendi Yellow Vein Mosaic Virus – BYVMV, वंश: Begomovirus)।

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • पादप रोगों में 'फिदोन' (Phytoalexin – Phaseollin) की खोज: फ्रेंच बीन (Phaseolus vulgaris) और Colletotrichum lindemuthianum के पारस्परिक संबंध पर अध्ययन करके ही पादप प्रतिरक्षा के महत्वपूर्ण यौगिक 'Phaseollin' (फाइटोएलेक्सिन) और प्रजाति-विशिष्ट प्रतिरोध (Race-specific resistance by Barrus, 1911) की खोज हुई थी।
  • मसाला फसलों में 'मोनोकल्चर' और 'ओस' का संबंध: जीरा (Cumin) में उकठा (Fusarium) मृदा में लगातार एक ही खेत में जीरा बोने से बढ़ता है, जबकि झुलसा (Alternaria burnsii) फूल आने के बाद बादल छाने और सुबह की ओस से मात्र 48–72 घंटों में पूरी फसल को काला कर देता है।

फसलवार रोग एवं प्रबंधन · Disease Notes

1. Anthracnose of Bean (सेम / राजमा का श्यामवर्ण या एंथ्रेक्नोज रोग)
French Bean / Kidney Bean (सेम / राजमा – Phaseolus vulgaris) · Pathogen: Colletotrichum lindemuthianum (लैंगिक अवस्था / Teleomorph: Glomerella lindemuthiana)

महत्व: बैरस (Barrus, 1911) ने इसी रोग में सर्वप्रथम कवक के अंदर 'शारीरिक प्रभेदों' (Physiological Races) की खोज की थी; यह ठंडे और आर्द्र क्षेत्रों में बीन्स का सबसे विनाशकारी बीज-जनित रोग है।

लक्षण · Symptoms
  • पत्तियों पर: पत्तियों की निचली सतह की शिराओं और डंठलों पर ईंट जैसे लाल से गहरे भूरे-काले लंबे धब्बे (Brick-red to dark brown necrotic streaks along veins) बनते हैं।
  • फलियों पर निर्णायक लक्षण (On Pods): हरी फलियों पर गोल, गहरे धँसे हुए (Deep sunken), जंग जैसे भूरे-काले घाव बनते हैं जिनके चारों ओर उभरी हुई लाल-भूरी किनारी (Raised reddish-brown border) होती है और नम मौसम में केंद्र में गुलाबी रंग का चिपचिपा बीजाणु समूह (Salmon-pink slimy mass of conidia) उभर आता है।
  • फलियों के अंदर स्थित बीजों पर भी भूरे-काले धँसे हुए धब्बे पड़ जाते हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • रोगमुक्त शुष्क क्षेत्रों में उत्पादित प्रमाणित बीज बोएँ और 2–3 वर्ष का फसल चक्र अपनाएँ।
  • बीज उपचार: Carbendazim 50 WP @ 2.0 g/kg या Thiram @ 3.0 g/kg से बीज उपचार करें।
  • खड़ी फसल में Carbendazim @ 1.0 g/L या Mancozeb @ 2.5 g/L या Azoxystrobin @ 1.0 ml/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

कवक तश्तरीनुमा Acervuli में काले काँटों (Setae) के बीच बेलनाकार या गुर्दे के आकार के एककोशिकीय पारदर्शी कोनिडिया बनाता है।

रोग चक्र · Disease Cycle

अंतःबीजोड़ (Internally seed-borne in cotyledons) और फसल अवशेषों में जीवित रहता है; वर्षा की बौछारों और गीली पत्तियों के संपर्क से फैलता है।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

ठंडा और आर्द्र मौसम (17–22°C तापमान एवं >90% आर्द्रता)।

Exam Key: Colletotrichum lindemuthianum + Barrus (1911 – Physiological races की खोज) + फलियों पर धँसे हुए लाल किनारे वाले घाव व गुलाबी बीजाणु समूह + Internally seed-borne।
2. Common Bacterial Blight of Bean (सेम का सामान्य जीवाणुज अंगमारी रोग)
Beans (सेम / राजमा) · Pathogen: Xanthomonas axonopodis pv. phaseoli (पूर्व नाम: Xanthomonas campestris pv. phaseoli)

महत्व: गर्म और आर्द्र मौसम में बीन्स की पत्तियों और फलियों को झुलसाने वाला प्रमुख बीज-जनित जीवाणु रोग।

लक्षण · Symptoms
  • पत्तियों पर पहले छोटे जल-सिक्त धब्बे बनते हैं जो बढ़कर अनियमित भूरे मृत क्षेत्रों में बदल जाते हैं और उनके चारों ओर नींबू के रंग का स्पष्ट संकरा पीला घेरा (Bright lemon-yellow halo) दिखाई देता है।
  • फलियों पर गोल जल-सिक्त धब्बे बनते हैं जो बाद में लाल-भूरे धँसे हुए घावों में बदल जाते हैं और उन पर पीले रंग का सूखा जीवाणु स्राव (Yellow bacterial crust) दिखता है तथा सफेद बीजों पर पीले धब्बे पड़ जाते हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • बीज को Streptocycline (100–200 ppm) के घोल में 30 मिनट डुबोकर उपचारित करें तथा खड़ी फसल में Streptocycline @ 1.0 g + Copper Oxychloride @ 25 g प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

ग्राम-ऋणात्मक, दंडाकार, एकल ध्रुवीय कशाभिका युक्त जीवाणु।

रोग चक्र · Disease Cycle

अंतः एवं बाह्य बीजोड़ (Seed-borne) तथा फसल अवशेषों में जीवित रहता है और वर्षा की छींटों से फैलता है।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

28–32°C गर्म तापमान और उच्च आर्द्रता।

Exam Key: X. axonopodis pv. phaseoli + पत्तियों पर नींबू जैसे पीले घेरे वाले झुलसे धब्बे + फलियों पर पीला जीवाणु स्राव।
3. Yellow Vein Mosaic of Okra – YVMV (भिंडी का पीत शिरा मोजैक रोग)
Okra / Bhendi (भिंडी – Abelmoschus esculentus) · Pathogen: Bhendi Yellow Vein Mosaic Virus (BYVMV — वंश: Begomovirus, कुल: Geminiviridae; एकल-रज्जुक वृत्ताकार ssDNA + Beta-satellite DNA अणु)। (सर्वप्रथम कुलकर्णी – Kulkarni, 1924 द्वारा बॉम्बे से रिपोर्ट किया गया)।

महत्व: भिंडी का सबसे विनाशकारी रोग; यदि बुवाई के 20 दिन के भीतर संक्रमण हो जाए तो 80–94% तक उपज हानि होती है।

लक्षण · Symptoms
  • निर्णायक लक्षण: पत्तियों की सभी मुख्य एवं सूक्ष्म शिराएँ पीली पड़कर हरी पृष्ठभूमि पर पीले रंग का एक अत्यंत स्पष्ट जाल (Striking yellow network of veins enclosing green islands) बनाती हैं और शिराएँ मोटी हो जाती हैं।
  • उग्र अवस्था में शिराओं के बीच का हरा भाग भी पीला होकर पूरी पत्ती मलाई जैसी पीली (Complete creamy-yellow leaf) हो जाती है।
  • संक्रमित पौधों में लगने वाली भिंडी की फलियाँ आकार में छोटी, कठोर, रेशेदार और हरे के बजाय पीले-सफेद रंग की (Yellowish-white malformed fruits) होती हैं जिनका कोई बाजार मूल्य नहीं मिलता।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • सर्वश्रेष्ठ उपाय — प्रतिरोधी किस्में (Resistant Varieties): परभणी क्रांति (Parbhani Kranti – हरभजन सिंह व साथियों के कार्य के बाद जंगली प्रजाति Abelmoschus manihot से विकसित), अर्का अनामिका (Arka Anamika), अर्का अभय (Arka Abhay), पंजाब पद्मिनी (Punjab Padmini), पूसा सावनी (पूर्व में प्रतिरोधी, अब संवेदनशील), काशी प्रगति (VRO-6), काशी विभूति, हिसार उन्नत की बुवाई करें।
  • बीज को Imidacloprid 600 FS @ 5.0 ml/kg बीज से उपचारित करें और खेत के आसपास से जंगली हॉलीहॉक व Ageratum खरपतवार नष्ट करें।
  • सफेद मक्खी नियंत्रण हेतु Yellow Sticky Traps लगाएँ तथा Imidacloprid 17.8 SL @ 0.3 ml/L या Thiamethoxam 25 WG @ 0.25 g/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

जुड़वाँ कणों वाला (Geminate) मोनोपार्टाइट Begomovirus (ssDNA) जिसके पूर्ण लक्षण प्रकटन हेतु एक छोटा 'Beta-satellite ssDNA' अणु आवश्यक होता है।

रोग चक्र · Disease Cycle

यह बीज से संचरित नहीं होता। इसका प्राथमिक स्रोत खेत के आसपास उगने वाले जंगली खरपतवार (जैसे Croton bonplandianum, Ageratum conyzoides, Malvastrum) हैं और द्वितीयक प्रसार सफेद मक्खी (Whitefly – Bemisia tabaci) द्वारा स्थायी रूप में होता है।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

वर्षा ऋतु (खरीफ) और गर्म-आर्द्र मौसम (28–35°C) जिसमें सफेद मक्खी की संख्या सर्वाधिक होती है।

Exam Key: BYVMV (Begomovirus ssDNA + Beta-satellite) + कुलकर्णी (1924) + शिराओं का चमकीला पीला जाल + वाहक: Bemisia tabaci + प्रतिरोधी किस्में: Parbhani Kranti, Arka Anamika, Punjab Padmini।
4. Soft Rot / Rhizome Rot of Ginger (अदरक का मृदु सड़न / प्रकंद गलन रोग)
Ginger (अदरक – Zingiber officinale) · Pathogen: Pythium aphanidermatum (मैदानी व गर्म क्षेत्रों में प्रमुख), Pythium myriotylum एवं Pythium vexans

महत्व: भारत के सभी अदरक उत्पादक राज्यों (केरल, मेघालय, सिक्किम, हिमाचल) में मानसून के दौरान 50–80% तक फसल नष्ट करने वाला सबसे घातक रोग।

लक्षण · Symptoms
  • मानसून शुरू होने पर जमीन की सतह के पास आभासी तने के आधार (Collar region) पर जल-सिक्त भूरा धब्बा बनता है।
  • बाहरी लक्षण: निचली पत्तियों के शीर्ष व किनारों से सुनहरा पीलापन (Golden yellowing of margins of lower leaves) शुरू होकर पूरी पत्ती में फैल जाता है और पत्तियाँ सूखकर लटक जाती हैं।
  • निर्णायक लक्षण: रोगी पौधे के तने को पकड़कर हल्का खींचने पर वह भूमिगत प्रकंद से आसानी से टूटकर हाथ में आ जाता है; प्रकंद (Rhizome) को खोदकर देखने पर उसका आंतरिक गूदा सड़कर नरम, दलदली व अत्यंत दुर्गंधयुक्त (Soft, pulpy, foul-smelling rot leaving only outer skin and fibers) हो जाता है।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • अदरक की बुवाई हमेशा 20–25 सेमी ऊँची क्यारियों (Raised beds) पर करें और जल निकास की उत्तम व्यवस्था रखें तथा बुवाई से पूर्व मृदा सौरीकरण करें।
  • बीज प्रकंद उपचार (Seed Rhizome Treatment): बुवाई से पूर्व और भंडारण में रखने से पहले प्रकंदों को Metalaxyl 8% + Mancozeb 64% WP (Ridomil MZ) @ 2.5 g/L या Mancozeb @ 3.0 g/L के घोल में 30 मिनट तक डुबोकर छाया में सुखाएँ।
  • गड्ढों में नीम खली + Trichoderma harzianum मिलाएँ तथा रोग दिखने पर जड़ क्षेत्र में Ridomil MZ @ 2.5 g/L या 1% बोर्डो मिश्रण से सिंचन (Soil drenching) करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

Oomycete कवक जो जलभराव में लोबयुक्त Sporangia, चलबीजाणु (Zoospores) और प्रकंद के शल्कों में मोटी भित्ति वाले Oospores बनाता है।

रोग चक्र · Disease Cycle

भंडारित संक्रमित बीज प्रकंदों (Seed rhizomes) और मृदा में पड़े Oospores से प्राथमिक संक्रमण होता है; बहते हुए वर्षा जल और सिंचाई से Zoospores द्वारा पूरे खेत में फैलता है।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

28–32°C तापमान, भारी मानसून वर्षा और खेत में जलभराव (Waterlogging / Poor drainage)।

Exam Key: Pythium aphanidermatum + तने का आसानी से खिंचकर आना + प्रकंद का नरम दुर्गंधयुक्त सड़न + Ridomil MZ (0.25% पर 30 मिनट प्रकंद उपचार व मृदा सिंचन)।
5. Stem Gall of Coriander (धनिया का तना पिटिका / लोंगिया रोग)
Coriander (धनिया – Coriandrum sativum) · Pathogen: Protomyces macrosporus

महत्व: राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में धनिया का सबसे विशिष्ट और प्रमुख कवक रोग जो दानों को विकृत कर मसाले की गुणवत्ता व तेल की मात्रा नष्ट कर देता है।

लक्षण · Symptoms
  • पौधे के तने, पत्ती के डंठलों (Petioles), पुष्पवृंत (Peduncles) और शिराओं पर लंबे, फूले हुए, चमकदार और ट्यूमर जैसे उभार या पिटिकाएँ (Elongated, swollen, tumor-like galls) बन जाती हैं।
  • प्रारंभ में ये गॉल चिकने और चमकदार होते हैं, किंतु बाद में फटकर खुरदरे हो जाते हैं और पौधा मुड़कर विकृत हो जाता है।
  • फलों पर प्रभाव: संक्रमण पुष्पक्रम में पहुँचने पर धनिया के दाने (Cremocarps) सामान्य से 3–4 गुना बड़े, फूले हुए और लौंग की कली जैसे (Clove-like hypertrophied fruits) हो जाते हैं (इसीलिए राजस्थान में किसान इसे 'लोंगिया रोग' कहते हैं)।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • प्रतिरोधी/सहनशील किस्में जैसे RCr-41 (राजस्थान धनिया-41), RCr-435, Hisar Anand, Pant Haritima, Sadhana की बुवाई करें तथा विकृत फूले हुए बीजों को छानकर अलग कर दें।
  • बीज उपचार: Thiram + Carbendazim (1:1) @ 3.0 g/kg या Carboxin (Vitavax) @ 2.0 g/kg या Hexaconazole @ 1.0 ml/kg बीज से उपचारित करें।
  • खड़ी फसल में बुवाई के 45 व 60 दिन पर Hexaconazole 5 EC @ 1.0 ml/L या Propiconazole 25 EC @ 1.0 ml/L या Carbendazim @ 1.0 g/L का छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

आदिम Ascomycete (Taphrinales गण) कवक; यह परपोषी ऊतकों में अतिवृद्धि (Hypertrophy एवं Hyperplasia) उत्पन्न करता है और गॉल के भीतर बड़े आकार के मोटी त्रि-स्तरीय भित्ति वाले विश्राम बीजाणु 'Chlamydospores' बनाता है। ये Chlamydospores अंकुरित होकर एक पुटिका (Vesicle/Synascus) बनाते हैं जिसमें असंख्य Ascospores/Endospores बनते हैं।

रोग चक्र · Disease Cycle

मृदा में पड़े फसल अवशेषों और संक्रमित विकृत बीजों के साथ मिले Chlamydospores द्वारा प्राथमिक संक्रमण होता है।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

सर्दियों में उच्च मृदा नमी, अधिक छाया, 15–20°C तापमान और मृदा का उच्च pH।

Exam Key: Protomyces macrosporus (Taphrinales) + तने व डंठल पर फूले हुए गॉल + दानों का लौंग जैसा फूलना ('लोंगिया रोग') + मोटी भित्ति वाले Chlamydospores + RCr-41 प्रतिरोधी किस्म।
6. Alternaria Blight of Cumin (जीरा का झुलसा / कालिया / छाछिया के बाद का अंगमारी रोग)
Cumin (जीरा – Cuminum cyminum) · Pathogen: Alternaria burnsii

महत्व: राजस्थान और गुजरात में जीरे का सबसे भयंकर हवाई रोग (किसान इसे 'कालिया' या 'झुलसा' कहते हैं); फूल आने के बाद यदि बादल छा जाएँ तो यह 2–3 दिन में 100% फसल को काला करके जला देता है।

लक्षण · Symptoms
  • फूल आने (Flowering stage) के समय पत्तियों और कोमल तनों के सिरों पर पहले छोटे सफेद-भूरे धब्बे बनते हैं जो तेजी से गहरे भूरे से काले (Dark brown to coal-black blighted appearance) हो जाते हैं।
  • संक्रमित पौधों के ऊपरी सिरे और फूलों के छत्रक (Umbels) नीचे की ओर झुक जाते हैं (Drooping of tips) और पूरा खेत ऐसा दिखता है मानो आग से झुलस गया हो।
  • दाने या तो बनते ही नहीं या काले और खोखले रह जाते हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • सहनशील किस्में जैसे GC-4 (गुजरात जीरा-4), RZ-19, RZ-209 की बुवाई करें और Mancozeb या Captan @ 3.0 g/kg से बीज उपचार करें।
  • निवारक एवं उपचारात्मक छिड़काव: बुवाई के 35–40 दिन बाद या बादल छाते ही तुरंत Mancozeb 75 WP @ 2.5 g/L या Azoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% SC (Amistar Top) @ 1.0 ml/L या Tebuconazole + Trifloxystrobin (Nativo) @ 0.6 g/L का 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

कवक गहरे भूरे, मुगदर के आकार के, आड़े व खड़े पटयुक्त और छोटी चोंच वाले कोनिडिया की शृंखलाएँ बनाता है।

रोग चक्र · Disease Cycle

संक्रमित बीज और फसल अवशेषों में जीवित रहता है तथा हवा द्वारा कोनिडिया से अत्यंत तीव्रता से फैलता है।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

जनवरी-फरवरी (पुष्पन काल) में आकाश में बादल छाए रहना (Cloudy weather), सुबह की भारी ओस, >80% आर्द्रता और 22–28°C तापमान।

Exam Key: Alternaria burnsii + फूल आने पर बादल छाने से पौधे का काला पड़कर सिरे का झुकना ('कालिया/झुलसा') + Mancozeb / Azoxystrobin + Difenoconazole छिड़काव।
7. Fusarium Wilt of Cumin (जीरा का उकठा / मुरझान रोग)
Cumin (जीरा) · Pathogen: Fusarium oxysporum f.sp. cumini

महत्व: पश्चिमी राजस्थान और उत्तरी गुजरात में जीरे का सबसे प्रमुख मृदा-जनित रोग जो खेत में बड़े-बड़े चकत्तों में 25–60% तक पौधों को सुखा देता है।

लक्षण · Symptoms
  • यह रोग पौध अवस्था (दिसंबर-जनवरी) से लेकर फूल आने तक कभी भी आ सकता है।
  • संक्रमित पौधे की पत्तियाँ और तना हरे रहते हुए ही अचानक ऐसे मुरझाकर लटक जाते हैं मानो पौधे को गर्म पानी से झुलसा दिया गया हो, और 2–3 दिन में पौधा सूखकर भूरा हो जाता है।
  • उखाड़कर जड़ को लंबाई में चीरने पर अंदर की जाइलम संवहन नलिकाएँ गहरी भूरी (Brown vascular discoloration of tap root) दिखाई देती हैं।
समन्वित प्रबंधन · IDM
  • अनिवार्य फसल चक्र: एक खेत में लगातार जीरा न बोएँ; सरसों, गेहूँ या बाजरा के साथ कम से कम 3 वर्ष का फसल चक्र अपनाएँ और मई-जून में गहरी जुताई कर मृदा सौरीकरण करें।
  • उकठा प्रतिरोधी सर्वश्रेष्ठ किस्म 'गुजरात जीरा-4' (GC-4) या 'RZ-209' की बुवाई करें।
  • बीज एवं मृदा उपचार: बुवाई से पूर्व खेत में Trichoderma harzianum @ 2.5 kg/ha (100 kg सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर) डालें तथा बीज को Carbendazim @ 2.0 g/kg + Trichoderma @ 6.0 g/kg से उपचारित करके बोएँ।
रोगजनक विज्ञान · Etiology

कवक Microconidia, दरांती जैसे Macroconidia और मृदा में वर्षों तक जीवित रहने वाले मोटी भित्ति के Chlamydospores बनाता है।

रोग चक्र · Disease Cycle

मुख्यतः मृदा-जनित (Chlamydospores) और आंशिक रूप से बीज-जनित (बीज के साथ चिपके बीजाणु)।

अनुकूल परिस्थितियाँ · Epidemiology

एक ही खेत में लगातार हर साल जीरा बोना (Monocropping), हल्की रेतीली मृदा और 20–25°C मृदा तापमान।

Exam Key: Fusarium oxysporum f.sp. cumini + हरे पौधे का अचानक मुरझाना व जड़ का जाइलम भूरा पड़ना + प्रतिरोधी किस्म 'GC-4' (गुजरात जीरा-4) + 3-वर्षीय फसल चक्र एवं Trichoderma।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 7.1: मसाला फसलों (अदरक, धनिया एवं जीरा) के प्रमुख रोगों का तुलनात्मक सारांश

फसल एवं रोगरोगजनक (Pathogen)विशिष्ट निदान लक्षणप्रमुख प्रबंधन एवं प्रतिरोधी किस्म
अदरक का मृदु सड़न (Soft Rot)Pythium aphanidermatum (Oomycete)निचली पत्तियों का सुनहरा पीलापन, तना खींचने पर टूटकर आना व प्रकंद का दुर्गंधयुक्त सड़नऊँची क्यारियाँ + Ridomil MZ (0.25%) से प्रकंद उपचार व मृदा सिंचन
धनिया का तना पिटिका (Stem Gall)Protomyces macrosporus (Ascomycete)तने व डंठल पर ट्यूमर जैसे गॉल + दानों का फूलकर लौंग जैसा बनना ('लोंगिया रोग')किस्म: RCr-41, Hisar Anand + Thiram/Carbendazim बीज उपचार + Hexaconazole छिड़काव
जीरा का झुलसा (Cumin Blight)Alternaria burnsii (Deuteromycete)फूल आने पर बादल छाने से पौधे का काला पड़ना व ऊपरी सिरे का झुक जाना ('कालिया')किस्म: GC-4, RZ-19 + बादल छाते ही Mancozeb (0.25%) या Amistar Top छिड़काव
जीरा का उकठा (Cumin Wilt)Fusarium oxysporum f.sp. cuminiहरे पौधे का अचानक मुरझाना व जड़ चीरने पर जाइलम भूरा दिखनाउकठा प्रतिरोधी किस्म: GC-4 + 3 वर्ष का फसल चक्र + Trichoderma harzianum

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. अदरक के बीज प्रकंद उपचार (Seed Rhizome Dip) एवं मृदा में ट्राइकोडर्मा संवर्धन की गणना

Ridomil MZ (0.25% घोल) = 2.5 g / L पानी | समृद्ध गोबर खाद (Enriched FYM) = 2.5 kg Trichoderma + 100 kg नम FYM / हेक्टेयर

उदाहरण: 1 हेक्टेयर अदरक की बुवाई हेतु लगभग 15–18 क्विंटल बीज प्रकंदों को डुबोने के लिए यदि 1000 लीटर घोल तैयार करना हो, तो आवश्यक Metalaxyl 8% + Mancozeb 64% WP (Ridomil MZ) = 1000 × 2.5 g = 2500 ग्राम (2.5 किलोग्राम)।

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 07: सेम (बीन्स), भिंडी, अदरक, धनिया एवं जीरा के प्रमुख रोग]
├── 1. सेम / राजमा (Beans - Phaseolus vulgaris)
│ ├── Bean Anthracnose (Colletotrichum lindemuthianum - Barrus 1911 races, Sunken pod spots with pink mass)
│ └── Common Bacterial Blight (Xanthomonas axonopodis pv. phaseoli - Lemon-yellow halo, Streptocycline)
├── 2. भिंडी (Okra - Abelmoschus esculentus)
│ └── Yellow Vein Mosaic (BYVMV - Begomovirus ssDNA + Beta-satellite, Vector: Bemisia tabaci, Parbhani Kranti)
├── 3. अदरक (Ginger - Zingiber officinale)
│ └── Soft Rot / Rhizome Rot (Pythium aphanidermatum - Foul pulpy rhizome rot, Ridomil MZ rhizome dip)
├── 4. धनिया (Coriander - Coriandrum sativum)
│ └── Stem Gall / लोंगिया (Protomyces macrosporus - Stem tumors & clove-like hypertrophied fruits, RCr-41)
└── 5. जीरा (Cumin - Cuminum cyminum)
├── Cumin Blight / कालिया (Alternaria burnsii - Cloudy weather blackening & drooping umbels, Mancozeb)
└── Cumin Wilt (Fusarium oxysporum f.sp. cumini - Vascular wilt, Resistant variety: GC-4, Trichoderma)

प्रवाह चित्र · Flowchart

[भिंडी के पीत शिरा मोजैक (BYVMV) का रोग प्रसार एवं एकीकृत प्रबंधन चक्र]
खेत के आसपास उगने वाले जंगली खरपतवार परपोषी (Croton, Ageratum, Malvastrum)
↓ (सफेद मक्खी - Bemisia tabaci द्वारा विषाणु का अर्जन)
भिंडी की स्वस्थ फसल पर सफेद मक्खी द्वारा स्थायी परिसंचारी (Persistent) संचरण
↓ (BYVMV ssDNA + Beta-satellite का फ्लोएम में गुणन)
पत्तियों की शिराओं का चमकीला पीला जाल (Yellow vein network) → फलियाँ पीली-सफेद व रेशेदार (80–94% हानि)
↓ (त्रि-स्तरीय सुरक्षा कवच)
1. आनुवंशिक प्रतिरोध: परभणी क्रांति / अर्का अनामिका / काशी प्रगति की बुवाई
2. बीज सुरक्षा: Imidacloprid 600 FS @ 5 ml/kg बीज उपचार
3. वाहक नियंत्रण: खरपतवार उन्मूलन + Yellow Sticky Traps + Thiamethoxam छिड़काव

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • भिंडी के YVMV की प्रतिरोधी किस्में ('परभणी क्रांति', 'अर्का अनामिका', 'अर्का अभय', 'पंजाब पद्मिनी') हर परीक्षा में पूछी जाती हैं; 'परभणी क्रांति' को जंगली प्रजाति Abelmoschus manihot से विकसित किया गया था।
  • धनिया का Stem Gall (Protomyces macrosporus) एक आदिम Ascomycete कवक से होता है जिसमें मोटी त्रि-स्तरीय भित्ति वाले Chlamydospores बनते हैं और इसकी प्रसिद्ध प्रतिरोधी किस्म 'RCr-41' है।
  • जीरा के उकठा (Fusarium oxysporum f.sp. cumini) के लिए 'गुजरात जीरा-4 (GC-4)' सबसे प्रसिद्ध प्रतिरोधी किस्म है।

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • सेम का एंथ्रेक्नोज (Colletotrichum lindemuthianum): फलियों पर लाल किनारे वाले धँसे हुए घाव व गुलाबी बीजाणु समूह।
  • भिंडी का पीत शिरा मोजैक (BYVMV): सफेद मक्खी वाहक, पीली शिराओं का जाल, प्रतिरोधी किस्में—परभणी क्रांति व अर्का अनामिका।
  • अदरक का मृदु सड़न (Pythium aphanidermatum): प्रकंद का दुर्गंधयुक्त गलन, Ridomil MZ (0.25%) से प्रकंद उपचार।
  • धनिया का तना पिटिका (Protomyces macrosporus): तने पर गॉल व लौंग जैसे फूले दाने, RCr-41 प्रतिरोधी किस्म।
  • जीरा का झुलसा (Alternaria burnsii) एवं उकठा (Fusarium oxysporum f.sp. cumini): उकठा रोधी किस्म—GC-4।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. भिंडी के पीत शिरा मोजैक विषाणु (BYVMV) के प्रति जंगली भिंडी (Abelmoschus manihot) के संकरण से विकसित सुप्रसिद्ध प्रतिरोधी किस्म कौन सी है?

  • (A) पूसा मखमली
  • (B) परभणी क्रांति (Parbhani Kranti)
  • (C) पर्किन्स लॉन्ग ग्रीन
  • (D) पूसा ए-4
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — डॉ. एन.डी. जांभले एवं डॉ. वाई.एस. नेरकर (MAU, परभणी) ने A. esculentus × A. manihot से 'परभणी क्रांति' विकसित की।

2. धनिया का 'तना पिटिका' या 'लोंगिया' रोग (Stem Gall of Coriander) किस कवक के कारण होता है?

  • (A) Alternaria burnsii
  • (B) Protomyces macrosporus
  • (C) Erysiphe polygoni
  • (D) Fusarium oxysporum
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — धनिया का स्टेम गॉल रोग Protomyces macrosporus नामक Ascomycete कवक द्वारा होता है।

3. अदरक के मृदु सड़न / प्रकंद गलन (Soft Rot of Ginger) का सर्वप्रमुख रोगजनक कौन सा है?

  • (A) Pythium aphanidermatum (एवं P. myriotylum)
  • (B) Colletotrichum capsici
  • (C) Ralstonia solanacearum
  • (D) Sclerotium rolfsii
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — Pythium aphanidermatum अदरक के प्रकंदों में नरम, दलदली व दुर्गंधयुक्त सड़न पैदा करता है।

4. जीरे में फूल आने के समय बादल छाए रहने पर 2–3 दिन में पूरी फसल को काला कर देने वाला 'झुलसा/कालिया' रोग किससे होता है?

  • (A) Fusarium oxysporum f.sp. cumini
  • (B) Alternaria burnsii
  • (C) Erysiphe polygoni
  • (D) Protomyces macrosporus
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — जीरे का झुलसा (Cumin Blight) रोग Alternaria burnsii कवक द्वारा होता है।

5. सन् 1911 में बैरस (M.F. Barrus) ने किस पादप रोगजनक में सर्वप्रथम 'शारीरिक प्रभेदों' (Physiological Races) का प्रदर्शन किया था?

  • (A) Colletotrichum lindemuthianum (Bean Anthracnose)
  • (B) Puccinia graminis
  • (C) Phytophthora infestans
  • (D) Ustilago nuda
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — बैरस ने सेम के एंथ्रेक्नोज कवक Colletotrichum lindemuthianum में सर्वप्रथम विभिन्न किस्मों को संक्रमित करने वाले प्रभेदों की खोज की।

6. जीरा के उकठा रोग (Fusarium oxysporum f.sp. cumini) के प्रति सर्वाधिक लोकप्रिय प्रतिरोधी किस्म कौन सी है?

  • (A) आरजेड-19
  • (B) गुजरात जीरा-4 (GC-4)
  • (C) एमसी-43
  • (D) आरजेड-143
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — SDAU, गुजरात द्वारा विकसित 'गुजरात जीरा-4 (GC-4)' उकठा रोग के प्रति उच्च प्रतिरोधी किस्म है।

7. भिंडी के पीत शिरा मोजैक (BYVMV) में पूर्ण रोग लक्षण प्रकट करने के लिए मुख्य एकल-रज्जुक डीएनए (DNA-A) के साथ कौन सा उपग्रह अणु आवश्यक होता है?

  • (A) डबल-स्ट्रैंडेड आरएनए
  • (B) बीटा-सैटेलाइट डीएनए (Beta-satellite ssDNA)
  • (C) वायरोइड
  • (D) प्लाज्मिड
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — BYVMV एक मोनोपार्टाइट Begomovirus है जिसके साथ जुड़ा 'Beta-satellite DNA' शिराओं के पीलेपन के लिए आवश्यक है।

8. धनिया की कौन सी किस्म तना पिटिका (Stem Gall – Protomyces macrosporus) के प्रति प्रतिरोधी है?

  • (A) RCr-41 (राजस्थान धनिया-41)
  • (B) स्थानीय देसी
  • (C) कोयंबटूर-1
  • (D) गुजरात धनिया-1
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — SKNAU, जोबनेर द्वारा विकसित 'RCr-41' धनिया के स्टेम गॉल के प्रति प्रतिरोधी किस्म है।

9. सेम के सामान्य जीवाणुज अंगमारी (Common Bacterial Blight of Bean) का कारक कौन सा है?

  • (A) Xanthomonas axonopodis pv. phaseoli
  • (B) Pseudomonas syringae
  • (C) Erwinia carotovora
  • (D) Clavibacter michiganensis
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — Xanthomonas axonopodis pv. phaseoli सेम की पत्तियों पर नींबू जैसे पीले घेरे वाले धब्बे और फलियों पर स्राव बनाता है।

10. अदरक के मृदु सड़न से बचाव हेतु बुवाई से पूर्व बीज प्रकंदों को किस कवकनाशी के 0.25% घोल में 30 मिनट डुबोकर उपचारित किया जाता है?

  • (A) घुलनशील गंधक
  • (B) Metalaxyl 8% + Mancozeb 64% WP (Ridomil MZ)
  • (C) डाइनोकेप
  • (D) स्ट्रेप्टोसाइक्लिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — Pythium एक Oomycete है, अतः इसके विरुद्ध Metalaxyl + Mancozeb (Ridomil MZ @ 2.5 g/L) सर्वोत्तम है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. भिंडी के पीत शिरा मोजैक (YVMV) को भारत में सर्वप्रथम (1924) किसने रिपोर्ट किया था?

जी.एस. कुलकर्णी (G.S. Kulkarni, 1924) ने बॉम्बे प्रेसीडेंसी से।

2. भिंडी की तीन YVMV-प्रतिरोधी किस्मों के नाम लिखिए।

परभणी क्रांति, अर्का अनामिका एवं पंजाब पद्मिनी (या काशी प्रगति)।

3. धनिया के स्टेम गॉल कवक (Protomyces macrosporus) के विश्राम बीजाणु क्या कहलाते हैं?

मोटी त्रि-स्तरीय भित्ति वाले क्लेमाइडोस्पोर (Chlamydospores)।

4. जीरे के उकठा रोग का वैज्ञानिक नाम क्या है?

Fusarium oxysporum f.sp. cumini।

5. सेम के एंथ्रेक्नोज रोग से पौधे में बनने वाले फाइटोएलेक्सिन (Phytoalexin) का नाम क्या है?

फेजियोलिन (Phaseollin)।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. भिंडी के पीत शिरा मोजैक (YVMV) के लक्षण एवं प्रबंधन लिखिए।

BYVMV के कारण पत्तियों की सभी शिराएँ पीली होकर पीले जाल जैसी दिखती हैं और फलियाँ छोटी व पीली-सफेद हो जाती हैं। इसका वाहक सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) है। प्रबंधन हेतु परभणी क्रांति या अर्का अनामिका किस्म बोएँ, Imidacloprid 600 FS (5 ml/kg) से बीज उपचार करें और सफेद मक्खी नियंत्रण हेतु Thiamethoxam (0.25 g/L) का छिड़काव करें।

2. अदरक के मृदु सड़न (Soft Rot) के लक्षण एवं बीज प्रकंद उपचार विधि लिखिए।

Pythium aphanidermatum के कारण निचली पत्तियों के किनारे सुनहरे पीले पड़ते हैं, तना खींचने पर आसानी से उखड़ आता है और प्रकंद सड़कर दुर्गंधयुक्त दलदल बन जाता है। नियंत्रण हेतु ऊँची क्यारियों पर बुवाई करें और बीज प्रकंदों को Ridomil MZ @ 2.5 g/L घोल में 30 मिनट डुबोकर बोएँ।

3. धनिया के तना पिटिका (Stem Gall / लोंगिया) रोग के लक्षण एवं नियंत्रण लिखिए।

Protomyces macrosporus से धनिया के तने, डंठलों व शिराओं पर फूले हुए ट्यूमर (Galls) बनते हैं और दाने फूलकर लौंग जैसे बड़े व विकृत हो जाते हैं। नियंत्रण हेतु RCr-41 किस्म बोएँ, Thiram + Carbendazim (3 g/kg) से बीज उपचार करें और फसल में Hexaconazole (1 ml/L) का छिड़काव करें।

4. जीरे में झुलसा (Blight) और उकठा (Wilt) रोग के लक्षणों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

जीरे का उकठा (Fusarium oxysporum f.sp. cumini) मृदा-जनित संवहनी रोग है जिसमें हरा पौधा अचानक मुरझाकर सूख जाता है और जड़ का जाइलम भूरा पड़ता है। जबकि झुलसा (Alternaria burnsii) वायु-जनित पर्ण रोग है जो फूल आने पर बादल छाने से पौधे के ऊपरी भाग व छत्रकों को काला करके झुका देता है।

5. सेम के एंथ्रेक्नोज (Bean Anthracnose) के लक्षण एवं नियंत्रण के उपाय लिखिए।

Colletotrichum lindemuthianum से पत्तियों की निचली शिराओं पर लाल-भूरे धब्बे और हरी फलियों पर लाल उभरी किनारी वाले गहरे धँसे हुए घाव (बीच में गुलाबी बीजाणु समूह सहित) बनते हैं। नियंत्रण हेतु रोगमुक्त बीज बोएँ, Carbendazim (2 g/kg) से बीज उपचार करें और Mancozeb (0.25%) या Azoxystrobin (0.1%) का छिड़काव करें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. भिंडी के पीत शिरा मोजैक (YVMV) और सेम (बीन्स) के एंथ्रेक्नोज व जीवाणुज अंगमारी का रोगजनक, लक्षण, रोग चक्र और समन्वित प्रबंधन सहित वर्णन कीजिए।

BYVMV (Begomovirus + Beta-satellite, सफेद मक्खी संचरण, जंगली परपोषी एवं परभणी क्रांति/अर्का अनामिका किस्में), Colletotrichum lindemuthianum (अंतःबीजोड़ प्रकृति व फलियों के घाव) और X. axonopodis pv. phaseoli का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करें।

2. बीजीय मसालों—धनिया के तना पिटिका (Stem Gall) तथा जीरा के झुलसा (Blight) और उकठा (Wilt)—के रोगजनकों, लक्षणों, अनुकूल परिस्थितियों और समन्वित प्रबंधन पैकेज का सविस्तर वर्णन कीजिए।

Protomyces macrosporus (मोटी भित्ति के Chlamydospores व लोंगिया दाने), Alternaria burnsii (बादल व ओस का प्रभाव और Mancozeb/Amistar Top छिड़काव) तथा Fusarium oxysporum f.sp. cumini (GC-4 किस्म, 3-वर्षीय फसल चक्र व Trichoderma) का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।

3. अदरक के मृदु सड़न / प्रकंद गलन (Soft Rot of Ginger) का कारण, लक्षण, महामारी विज्ञान एवं बुवाई से भंडारण तक के एकीकृत प्रबंधन का वर्णन कीजिए।

Pythium प्रजातियों का जीवन चक्र, जलभराव की भूमिका, पत्तियों का सुनहरा पीलापन व प्रकंद सड़न, ऊँची क्यारियों का निर्माण, मृदा सौरीकरण, Ridomil MZ से प्रकंद उपचार और Trichoderma + नीम खली के प्रयोग का सविस्तर विवरण दें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • भिंडी की 'परभणी क्रांति' किस्म का विकास डॉ. एन.डी. जांभले एवं डॉ. वाई.एस. नेरकर द्वारा परभणी (महाराष्ट्र) में किया गया था।
  • धनिया के तना पिटिका (Protomyces macrosporus) में संक्रमित दाने फूलकर लौंग जैसे दिखने के कारण इसे 'लोंगिया रोग' कहते हैं।
  • जीरे के झुलसा रोग (Alternaria burnsii) के प्रकोप के लिए फूल आते समय बादल छाना और ओस सबसे मुख्य कारक हैं।
  • अदरक के मृदु सड़न में पौधे का आभासी तना हल्का खींचने पर ही सड़े हुए प्रकंद से अलग होकर हाथ में आ जाता है।
  • सेम के एंथ्रेक्नोज (Colletotrichum lindemuthianum) में कवक बीजपत्रों (Cotyledons) के भीतर सुषुप्त कवकजाल के रूप में रहता है।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPATH 311 Smart Notes।

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