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AGF 311 Lecture 05: मृदा एवं जल संरक्षण में कृषि वानिकी की भूमिका; वायुरोधक (Windbreak) एवं आश्रय पट्टी (Shelterbelt) — परिभाषा एवं उद्देश्य | Hindi Notes

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AGF 311 · Introductory Agroforestry
विषय सूची · Quick Navigation02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)
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Lecture 05: मृदा एवं जल संरक्षण में कृषि वानिकी की भूमिका; वायुरोधक (Windbreak) एवं आश्रय पट्टी (Shelterbelt) — परिभाषा एवं उद्देश्य

Role of agroforestry in soil and water conservation; Windbreak & shelterbelt— Definition & objectives

02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान (Lecture) के अध्ययन के पश्चात् विद्यार्थी निम्नलिखित में सक्षम होंगे:

  1. मृदा एवं जल संरक्षण (Soil and Water Conservation) में कृषि वानिकी के यांत्रिक व जैविक तंत्रों—छत्र अवरोधन (Canopy interception), पर्ण मल्च आवरण (Soil cover approach), समोच्च हेजरो अवरोध (Contour hedgerow barrier) और अंतःस्यंदन वृद्धि—को समझना।
  2. ढालू कृषि भूमि प्रौद्योगिकी (SALT – Sloping Agricultural Land Technology) और जैव-जल निकासी (Bio-drainage) की अवधारणा को जानना।
  3. वायुरोधक (Windbreak) और आश्रय पट्टी (Shelterbelt) की वैज्ञानिक परिभाषा, मुख्य उद्देश्यों और दोनों के बीच संरचनात्मक अंतर को स्पष्ट करना।
  4. शेल्टरबेल्ट की वायुगतिकी (Aerodynamics)—पवनमुखी (Windward: 2H से 5H) व प्रतिपवन (Leeward: 10H से 30H) सुरक्षा क्षेत्र, इष्टतम छिद्रता (Porosity: 40–50%), और त्रिकोणीय/पिरामिड क्रॉस-सेक्शन डिजाइन—को समझना।
  5. शुष्क क्षेत्रों (राजस्थान) और तटीय क्षेत्रों में शेल्टरबेल्ट व बालू के टीलों के स्थिरीकरण (Sand dune stabilization) हेतु उपयुक्त वृक्ष-झाड़ी प्रजातियों को जानना।

03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): भारत में लगभग 120 मिलियन हेक्टेयर भूमि जल और वायु अपरदन (Water and wind erosion) तथा भूमि निम्नीकरण से प्रभावित है। वर्षा-आधारित कृषि क्षेत्रों में सतही अपवाह (Surface runoff) और पश्चिमी राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में तेज धूल भरी आँधियों से उपजाऊ ऊपरी मृदा परत (Topsoil) और मृदा नमी का भारी ह्रास होता है।

एंथोनी यंग (Anthony Young, 1989) की प्रसिद्ध पुस्तक ‘Agroforestry for Soil Conservation’ के अनुसार कृषि वानिकी मृदा को केवल अपरदन से ही नहीं बचाती, बल्कि मृदा की भौतिक, रासायनिक और जैविक उर्वरता को भी बनाए रखती है। इसके अतिरिक्त, पवन अपरदन और गर्म हवाओं (‘लू’) से फसलों व पशुधन की रक्षा करने में वायुरोधक (Windbreaks) और आश्रय पट्टियाँ (Shelterbelts) सबसे प्रभावी हरित ढाल हैं।

04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

वायुरोधक (Windbreak)
पवन की गति को कम करने, फसलों/बागानों/फार्म भवनों और पशुधन को ठंडी या गर्म शुष्क हवाओं (लू) से बचाने तथा मृदा नमी संरक्षित करने के लिए प्रचलित पवन की दिशा के समकोण (Right angle / Perpendicular) पर लगाई गई वृक्षों या झाड़ियों की एक या दो कतारों (1–2 rows) की संकीर्ण पट्टी।
आश्रय पट्टी (Shelterbelt)
एक बड़े कृषि क्षेत्र, नहर, सड़क या तटीय क्षेत्र को तेज पवनों, चक्रवातों और उड़ती हुई रेत (Sand drift) से बचाने के लिए पवन दिशा के समकोण पर त्रिकोणीय या छतनुमा विन्यास (Triangular/Roof-shaped cross-section) में लगाई गई वृक्षों और झाड़ियों की कई कतारों (Multiple rows: प्रायः 3 से 10 कतारें) की चौड़ी और लंबी वानिकी पट्टी।
मृदा आवरण उपागम (Soil Cover Approach – Young, 1989)
वृक्षों के पर्ण करकट (Leaf litter) और प्रूनिंग मल्च की परत द्वारा मृदा सतह को ढककर वर्षा की बूँदों के प्रहार (Raindrop splash erosion) और सतही अपवाह को रोकना।
अवरोध उपागम (Barrier Approach)
ढलान वाली भूमि पर समोच्च रेखाओं (Contours) के साथ घनी काष्ठीय झाड़ियों/हेजरो (Contour hedgerows) की पट्टियाँ लगाकर बहते पानी और मिट्टी को रोकना, जिससे समय के साथ प्राकृतिक वेदिकाएँ (Natural terraces) बन जाती हैं।
जैव-जल निकासी (Bio-drainage)
नहर सिंचित क्षेत्रों में जलमग्न (Waterlogged) या दलदली भूमि से उच्च वाष्पोत्सर्जन दर वाले गहरी जड़ के वृक्षों (Phreatophytes: जैसे क्लोनल सफेदा/Eucalyptus, पॉपलर, बबूल) द्वारा अतिरिक्त भूमिगत जल को वायुमंडल में उड़ाकर जल स्तर (Water table) नीचे लाना।
ढालू कृषि भूमि प्रौद्योगिकी (SALT – Sloping Agricultural Land Technology)
पहाड़ी ढलानों पर 4–6 मीटर के अंतराल पर समोच्च रेखाओं (Contours) पर नाइट्रोजन-स्थिरीकरण करने वाली झाड़ियों (जैसे Leucaena, Gliricidia, Flemingia) की दोहरी कतारें लगाना और उनके बीच की पट्टियों (Alleys) में फसलें उगाना।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. मृदा एवं जल संरक्षण में कृषि वानिकी की भूमिका (Role of Agroforestry in Soil and Water Conservation)

1. वर्षा बूँद प्रहार एवं सतही अपवाह में कमी (Reduction in Splash & Runoff)

• वृक्षों का बहु-स्तरीय छत्र और जमीन पर बिछा पर्ण करकट (Litter mulch) वर्षा की बूँदों की गतिज ऊर्जा (Kinetic energy) को नष्ट कर देता है, जिससे स्प्लैश अपरदन (Splash erosion) रुकता है।
• समोच्च हेजरो (Contour hedgerows) ढलान पर बहते जल के वेग को कम करती हैं और मिट्टी के कणों को छानकर खेत में ही रोक लेती हैं।

2. मृदा के भौतिक गुणों एवं जल धारण क्षमता में सुधार

• पर्ण करकट और सूक्ष्म जड़ों के अपघटन से मृदा में ह्यूमस (SOM) बढ़ता है, जिससे मृदा कणों का समुच्चयन (Soil aggregation) सुधरता है, स्थूल घनत्व (Bulk density) घटता है और रंध्राकाश (Porosity) बढ़ता है।
• वृक्षों की मृत व सड़ी हुई जड़ें मृदा में ‘मैकप्रोपोर चैनल’ (Root channels / Biopores) बनाती हैं जिनसे वर्षा जल का अंतःस्यंदन (Infiltration rate) और जल धारण क्षमता (Water retention capacity) कई गुना बढ़ जाती है।

3. वाष्पीकरण में कमी एवं मृदा नमी संरक्षण (Soil Moisture Conservation)

• वृक्षों की आंशिक छाया और पर्ण मल्च से मृदा सतह का तापमान कम रहता है तथा हवा की गति घटने से मृदा से होने वाला प्रत्यक्ष जल वाष्पीकरण (Evaporation) 20% से 40% तक कम हो जाता है, जो वर्षा-आधारित (Rainfed) खेती के लिए वरदान है।

4. जैव-जल निकासी एवं लवणता नियंत्रण (Bio-drainage in Waterlogged Soils)

• इंदिरा गांधी नहर (IGNP राजस्थान) और उत्तर भारत के नहरी क्षेत्रों में सेम (Waterlogging) व द्वितीयक लवणता की समस्या को दूर करने के लिए Eucalyptus tereticornis, Acacia nilotica, Casuarina और Prosopis juliflora की पट्टियाँ लगाई जाती हैं जो जैव-पंप (Biological pumps) की तरह अतिरिक्त पानी को वाष्पोत्सर्जित कर देती हैं।

2. वायुरोधक (Windbreak) एवं आश्रय पट्टी (Shelterbelt): उद्देश्य एवं वैज्ञानिक डिजाइन

वायुरोधक और आश्रय पट्टी के मुख्य उद्देश्य (Main Objectives):

  1. तेज हवाओं के वेग को कम करके पवन जनित मृदा अपरदन (Wind erosion) और रेत के जमाव (Sand casting) को रोकना।
  2. फसलों और फलों के बागानों को गर्म व शुष्क हवाओं (‘लू’) तथा शीतलहर/पाले (Cold wave & frost) से बचाना।
  3. खेत से होने वाले वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन (Evapotranspiration) को घटाकर मृदा नमी सुरक्षित रखना और फसल उपज में 15–30% वृद्धि करना।
  4. अनाज की फसलों और केले/गन्ने/पपीते को तेज हवा से गिरने (Lodging) और फलों को झड़ने (Fruit drop) से बचाना।
  5. ग्रामीण परिवारों को चारा, ईंधन, छोटी इमारती लकड़ी और वन्यजीवों/पक्षियों को आश्रय प्रदान करना।

शेल्टरबेल्ट की वायुगतिकी एवं डिजाइन सिद्धांत (Aerodynamics & Design Principles of Shelterbelt):

  • 1. दिशा (Orientation): वायुरोधक व आश्रय पट्टी हमेशा प्रचलित पवन की दिशा के समकोण (Perpendicular / At right angles to prevailing wind direction) पर लगाई जाती हैं (जैसे पश्चिमी राजस्थान में दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के विरुद्ध उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा में)।
  • 2. प्रभावी सुरक्षा क्षेत्र (Zone of Protection in terms of Height ‘H’):
    • यदि आश्रय पट्टी के सबसे ऊँचे केंद्रीय वृक्षों की औसत ऊँचाई H है, तो:
    • पवनमुखी दिशा (Windward side — जिस ओर से हवा आ रही है): 2H से 5H दूरी तक पवन वेग कम होता है।
    • प्रतिपवन दिशा (Leeward side — पट्टी के पीछे की ओर): 10H से 30H (सर्वाधिक प्रभावी क्षेत्र 15H–20H) दूरी तक सुरक्षा मिलती है।
    • अतः कुल सुरक्षित दूरी लगभग 15H से 35H तक होती है।
  • 3. त्रिकोणीय / पिरामिड क्रॉस-सेक्शन (Pyramidal / Roof-shaped Cross-Section):
    • एक आदर्श 3 या 5-कतार वाली आश्रय पट्टी में सबसे ऊँचे वृक्ष (Tall trees: जैसे सफेदा, नीम, शीशम, सिरिस) बीच की कतार (Central row) में लगाए जाते हैं; उनके दोनों ओर मध्यम ऊँचाई के वृक्ष (Medium trees: जैसे बबूल, कुमटा, खेजड़ी, कैजुआरिना) और सबसे बाहरी कतारों (Flank rows) में छोटी झाड़ियाँ व घास (Shrubs: जैसे केर, अरंडी, झड़बेरी, आक, सेवण घास) लगाई जाती हैं। इससे हवा जमीन के पास से रिसने के बजाय ऊपर की ओर विक्षेपित (Deflected upwards) हो जाती है।
  • 4. इष्टतम छिद्रता / पारगम्यता (Optimum Porosity / Permeability — 40% से 50%):
    • आश्रय पट्टी एक ठोस दीवार की तरह पूरी तरह अभेद्य (0% porosity) नहीं होनी चाहिए, क्योंकि अभेद्य अवरोध के ठीक पीछे कम दाब का भँवर (Turbulence/Eddy currents) बनता है जो फसलों को नुकसान पहुँचाता है। इसलिए पट्टी में 40% से 50% छिद्रता (मध्यम पारगम्यता) होनी चाहिए ताकि थोड़ी हवा छनकर निकले और भँवर न बने।
  • 5. लंबाई-चौड़ाई अनुपात: हवा को किनारों से घूमकर आने (End-effect) से रोकने के लिए शेल्टरबेल्ट की लंबाई उसकी ऊँचाई (H) की कम से कम 12 से 24 गुना (12H–24H) होनी चाहिए।

3. राजस्थान में बालू के टीलों का स्थिरीकरण (Sand Dune Stabilization in Rajasthan — CAZRI Technique)

CAZRI (जोधपुर) द्वारा विकसित तकनीक के 3 चरण हैं: (1) जैविक हस्तक्षेप (चराई व कटाई) रोकने हेतु कंटीली बाड़ लगाना, (2) टीले के ढलान पर पवन दिशा के समकोण पर Crotalaria burhia (खींप), Leptadenia pyrotechnica (खींफ/खेंप) या Ziziphus की सूखी टहनियों को 2–5 m के समानांतर या शतरंज बोर्ड पैटर्न (Checkerboard micro-windbreaks, 5×5 m) में गाड़ना, और (3) मानसून की पहली वर्षा के साथ ही इजरायली बबूल (Acacia tortilis), खेजड़ी, कुमटा, फोग (Calligonum polygonoides) तथा सेवण घास (Lasiurus sindicus) का रोपण करना।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

मृदा एवं जल संरक्षण कृषि वानिकी प्रथाओं का वर्गीकरण:

  • ढालू एवं पहाड़ी भूमि हेतु (For Sloping Lands): समोच्च हेजरो (Contour hedgerows), एलै क्रॉपिंग (Alley cropping), SALT (Sloping Agricultural Land Technology) एवं वानिकी-युक्त बेंच टैरेसिंग।
  • शुष्क एवं पवन अपरदन प्रभावित भूमि हेतु (For Arid Wind-Erosion Lands): वायुरोधक (Windbreaks – 1 से 2 कतारें), आश्रय पट्टियाँ (Shelterbelts – 3 से 10 कतारें) एवं माइक्रो-विंडब्रेक द्वारा बालू टीला स्थिरीकरण।
  • जलमग्न एवं नहरी भूमि हेतु (For Waterlogged Lands): फ्रेअटोफाइटिक वृक्षों (Eucalyptus, Casuarina, Populus) द्वारा जैव-जल निकासी (Bio-drainage) पट्टियाँ।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)

  • सार्वभौमिक मृदा हानि समीकरण (Universal Soil Loss Equation – USLE; Wischmeier & Smith):
    $A=R×K×L×S×C×P$
    कृषि वानिकी प्रणाली पर्ण छत्र व मल्च द्वारा फसल प्रबंधन कारक (C) को तथा समोच्च हेजरो/मेड़ वृक्षारोपण द्वारा संरक्षण अभ्यास कारक (P) और प्रभावी ढाल लंबाई कारक (L) को भारी मात्रा में घटाकर कुल मृदा क्षरण (A) को न्यूनतम कर देती है।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)

व्यावहारिक एवं संख्यात्मक उदाहरण: शेल्टरबेल्ट के सुरक्षा क्षेत्र की गणना एवं प्रजाति विन्यास
  • संख्यात्मक उदाहरण: यदि किसी खेत के किनारे लगी आश्रय पट्टी (Shelterbelt) के केंद्रीय वृक्षों की औसत ऊँचाई H=12 मीटर है, तो वह पट्टी:
    • पवनमुखी दिशा (Windward side, 2H–5H) में = 24 m से 60 m तक सुरक्षा देगी।
    • प्रतिपवन दिशा (Leeward side, 10H–30H) में = 120 m से 360 m तक फसलों को तेज हवा से बचाएगी।
  • CAZRI जोधपुर का आदर्श 3-कतार शेल्टरबेल्ट मॉडल (शुष्क राजस्थान हेतु):
    • बाहरी कतारें (Flank rows): Acacia tortilis (इजरायली बबूल), Cassia siamea या Prosopis juliflora / Ziziphus।
    • केंद्रीय कतार (Central tall row): Azadirachta indica (नीम), Albizia lebbeck (सिरिस) या Dalbergia sissoo (शीशम)।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 5.1: वायुरोधक (Windbreak) बनाम आश्रय पट्टी (Shelterbelt) में अंतर
तुलना का बिंदु (Parameter) वायुरोधक (Windbreak) आश्रय पट्टी (Shelterbelt)
1. परिभाषा एवं विस्तार खेत, बगीचे या फार्महाउस की सीमा पर लगाई गई वृक्षों/झाड़ियों की एक संकीर्ण रक्षात्मक कतार। एक बड़े कृषि भू-भाग, नहर या तटीय क्षेत्र की रक्षा हेतु लगाई गई वृक्षों व झाड़ियों की चौड़ी बेल्ट।
2. कतारों की संख्या (No. of Rows) सामान्यतः 1 से 2 कतारें (कभी-कभी 3 तक)। सामान्यतः 3 से 10 कतारें (बहु-पंक्ति विन्यास)।
3. क्रॉस-सेक्शन आकृति एकल स्तरीय या रैखिक पर्दा (Linear screen)। त्रिकोणीय या पिरामिडनुमा (Triangular / Roof-shaped) — बीच में ऊँचे वृक्ष, किनारों पर झाड़ियाँ।
4. मुख्य घटक प्रजातियाँ प्रायः एक ही या दो वृक्ष प्रजातियाँ (जैसे पॉपलर, सफेदा, करंज या बॉटल ब्रश की एकल कतार)। वृक्षों, मध्यम वृक्षों, झाड़ियों और घासों का सुव्यवस्थित मिश्रण।
5. सुरक्षा का पैमाना स्थानीय स्तर (एकल खेत या फलों का बगीचा)। क्षेत्रीय/वृहद स्तर (पूरा गाँव, कमांड क्षेत्र, मरुस्थलीय सीमा या तटीय चक्रवात क्षेत्र)।

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)

महत्वपूर्ण तकनीकी सूत्र एवं शेल्टरबेल्ट मानक (Key Shelterbelt & Conservation Metrics)
  • शेल्टरबेल्ट सुरक्षा दूरी (Protection Distance in terms of Tree Height H):
    • पवनमुखी पक्ष (Windward side) = 2H से 5H
    • प्रतिपवन पक्ष (Leeward side) = 10H से 30H (औसत प्रभावी: 15H–20H)
    • कुल सुरक्षित क्षेत्र = 15H से 35H
  • आदर्श शेल्टरबेल्ट छिद्रता (Optimum Porosity / Permeability): 40% से 50%
  • शेल्टरबेल्ट लंबाई : ऊँचाई अनुपात: न्यूनतम 12:1 से 24:1 (L≥12H–24H)
  • सार्वभौमिक मृदा हानि समीकरण (USLE): A=R·K·L·S·C·P

11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 05 Mind Map: मृदा एवं जल संरक्षण, वायुरोधक (Windbreak) एवं आश्रय पट्टी (Shelterbelt)
  • मृदा एवं जल संरक्षण तथा वायुरोधन (Soil & Water Conservation, Windbreak & Shelterbelt)
    • मृदा एवं जल संरक्षण तंत्र (Young, 1989)
      • Soil Cover Approach: पर्ण करकट व मल्च द्वारा वर्षा बूँद प्रहार (Splash erosion) व वाष्पीकरण में 20–40% कमी
      • Barrier Approach & SALT: ढलानों पर समोच्च हेजरो (Contour hedgerows) द्वारा अपवाह रोकना व प्राकृतिक वेदिका निर्माण
      • Bio-drainage: फ्रेअटोफाइटिक वृक्षों (सफेदा, बबूल, पॉपलर) द्वारा जलमग्न (सेम) भूमि से अतिरिक्त जल निकासी
    • वायुरोधक बनाम आश्रय पट्टी (Windbreak vs Shelterbelt)
      • Windbreak: 1–2 कतारें, खेत/बाग की सीमा पर स्थानीय सुरक्षा
      • Shelterbelt: 3–10 कतारें, त्रिकोणीय/पिरामिड क्रॉस-सेक्शन (बीच में ऊँचे वृक्ष, किनारों पर झाड़ियाँ), क्षेत्रीय सुरक्षा
    • शेल्टरबेल्ट डिजाइन मानक एवं टीला स्थिरीकरण
      • दिशा व छिद्रता: प्रचलित पवन के समकोण (Perpendicular) | इष्टतम छिद्रता: 40–50%
      • सुरक्षा क्षेत्र (ऊँचाई H के रूप में): Windward = 2H–5H | Leeward = 10H–30H
      • बालू टीला स्थिरीकरण (CAZRI): फेंसिंग ➔ चेकरबोर्ड माइक्रो-विंडब्रेक (खींप) ➔ Acacia tortilis, फोग व सेवण घास रोपण

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)

प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): 5-कतार वाली पिरामिडनुमा आश्रय पट्टी (Shelterbelt) की क्रॉस-सेक्शन संरचना एवं पवन विक्षेपण
तेज पवन आगमन
(Windward: 2H–5H सुरक्षा)
➔ कतार 1: छोटी झाड़ियाँ
(केर, झड़बेरी, खींप)
➔ कतार 2: मध्यम वृक्ष
(इजरायली बबूल, खेजड़ी)
➔ कतार 3 (केंद्र): ऊँचे वृक्ष
(नीम, शीशम, सिरिस – ऊँचाई H)
➔ कतार 4 व 5: मध्यम वृक्ष व झाड़ी
(40–50% छिद्रता से बिना भँवर पवन छनन)
➔ सुरक्षित फसल क्षेत्र
(Leeward: 10H–30H तक सुरक्षा)

13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • शेल्टरबेल्ट के सुरक्षा क्षेत्र के आँकड़े हर परीक्षा में पूछे जाते हैं: पवनमुखी तरफ (Windward side) = 2H से 5H तथा प्रतिपवन तरफ (Leeward side) = 10H से 30H (जहाँ H वृक्षों की ऊँचाई है)।
  • एक आदर्श आश्रय पट्टी (Shelterbelt) की क्रॉस-सेक्शन आकृति ‘त्रिकोणीय या पिरामिडनुमा’ (Triangular / Pyramidal / Roof-shaped) होती है और इसकी इष्टतम छिद्रता (Porosity) 40–50% होनी चाहिए।
  • विंडब्रेक और शेल्टरबेल्ट हमेशा प्रचलित हवा की दिशा के ‘समकोण’ (At right angles / Perpendicular to prevailing wind direction) पर लगाए जाते हैं।
  • राजस्थान में बालू के टीलों के स्थिरीकरण (Sand dune stabilization) के लिए CAZRI जोधपुर द्वारा सर्वाधिक अनुशंसित विदेशी वृक्ष ‘इजरायली बबूल’ (Acacia tortilis) है।
  • प्रसिद्ध पुस्तक ‘Agroforestry for Soil Conservation’ (1989) के लेखक ‘एंथोनी यंग’ (Anthony Young) हैं।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)

  • Windbreak: 1–2 कतारें | Shelterbelt: 3–10 कतारें (त्रिकोणीय क्रॉस-सेक्शन)।
  • सुरक्षित दूरी: Windward = 2H–5H | Leeward = 10H–30H | इष्टतम छिद्रता = 40–50%।
  • SALT: Sloping Agricultural Land Technology (ढलान पर समोच्च दोहरी दलहनी हेजरो)।
  • Bio-drainage: जलमग्न भूमि से Eucalyptus आदि द्वारा अतिरिक्त जल का वाष्पोत्सर्जन।

15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)

1. एक आश्रय पट्टी (Shelterbelt) अपने पीछे अर्थात् प्रतिपवन दिशा (Leeward side) में वृक्ष की ऊँचाई (H) के कितने गुना दूरी तक प्रभावी सुरक्षा प्रदान करती है?
(A) केवल 1H से 2H तक
(B) 2H से 5H तक
(C) 10H से 30H तक
(D) 100H से 200H तक
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (C) 10H से 30H तक
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): आश्रय पट्टी पवनमुखी दिशा (Windward side) में 2H–5H तक और प्रतिपवन दिशा (Leeward side) में 10H से 30H तक सुरक्षा देती है।
2. वायुरोधक (Windbreak) और आश्रय पट्टी (Shelterbelt) को प्रचलित पवन की दिशा (Prevailing wind direction) के सापेक्ष किस कोण पर लगाया जाता है?
(A) पवन की दिशा के समानांतर (Parallel)
(B) पवन की दिशा के समकोण पर (At right angles / Perpendicular – 90°)
(C) केवल उत्तर-दक्षिण में
(D) गोलाकार
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) पवन की दिशा के समकोण पर (At right angles / Perpendicular – 90°)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): अधिकतम क्षेत्र को हवा से बचाने के लिए विंडब्रेक व शेल्टरबेल्ट सदैव पवन की दिशा के समकोण (Perpendicular) पर लगाए जाते हैं।
3. एक बहु-पंक्ति आश्रय पट्टी (Multi-row Shelterbelt) का आदर्श क्रॉस-सेक्शन (Cross-section) कैसा होना चाहिए?
(A) उल्टा त्रिभुज
(B) त्रिकोणीय या छतनुमा / पिरामिडनुमा (Triangular / Pyramidal – बीच में ऊँचे वृक्ष व किनारों पर छोटी झाड़ियाँ)
(C) एक तरफ केवल घास
(D) सभी कतारों में समान ऊँचाई के बिना पत्तियों वाले वृक्ष
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) त्रिकोणीय या छतनुमा / पिरामिडनुमा (Triangular / Pyramidal – बीच में ऊँचे वृक्ष व किनारों पर छोटी झाड़ियाँ)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): बीच की कतार में ऊँचे वृक्ष और दोनों बाहरी कतारों में मध्यम वृक्ष व झाड़ियाँ लगाने से त्रिकोणीय/पिरामिड आकृति बनती है जो हवा को ऊपर की ओर मोड़ देती है।
4. भँवर (Turbulence/Eddy currents) बनने से रोकने के लिए एक आदर्श वायुरोधक या आश्रय पट्टी में कितनी छिद्रता (Porosity / Permeability) होनी चाहिए?
(A) 0% (पूरी तरह ठोस दीवार)
(B) 40% से 50% (मध्यम छिद्रिल)
(C) 90% से 95% (अत्यंत विरल)
(D) 100%
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) 40% से 50% (मध्यम छिद्रिल)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): 40–50% छिद्रता वाली पट्टी हवा की गति को धीरे-धीरे कम करती है और पट्टी के पीछे भँवर (Eddy turbulence) नहीं बनने देती।
5. प्रसिद्ध पुस्तक ‘Agroforestry for Soil Conservation’ (1989) के लेखक कौन हैं?
(A) एंथोनी यंग (Anthony Young)
(B) डाइट्रिच ब्रैंडिस
(C) जे.बी. रेनट्री
(D) चैंपियन एवं सेठ
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) एंथोनी यंग (Anthony Young)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): एंथोनी यंग (1989) ने ‘Agroforestry for Soil Conservation’ पुस्तक लिखी जिसमें मृदा संरक्षण व उर्वरता की 10 परिकल्पनाएँ दी गई हैं।
6. पश्चिमी राजस्थान के थार मरुस्थल में चलायमान बालू के टीलों के स्थिरीकरण (Sand dune stabilization) के लिए CAZRI द्वारा सर्वाधिक प्रयुक्त वृक्ष कौन-सा है?
(A) सागवान (Tectona grandis)
(B) इजरायली बबूल (Acacia tortilis)
(C) सेब (Malus domestica)
(D) देवदार (Cedrus deodara)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) इजरायली बबूल (Acacia tortilis)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): CAZRI जोधपुर द्वारा इजरायल से लाया गया Acacia tortilis (इजरायली बबूल) बालू के टीलों के स्थिरीकरण और शेल्टरबेल्ट के लिए सर्वोत्तम सिद्ध हुआ है।
7. पहाड़ी ढलानों पर समोच्च रेखाओं के साथ नाइट्रोजन-स्थिरीकरण करने वाली झाड़ियों की दोहरी कतारें लगाकर मृदा अपरदन रोकने की तकनीक ‘SALT’ का पूर्ण रूप क्या है?
(A) Saline Alkaline Land Treatment
(B) Sloping Agricultural Land Technology
(C) Sustainable Arid Land Tillage
(D) Soil and Leaf Testing
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) Sloping Agricultural Land Technology
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): SALT का पूर्ण रूप Sloping Agricultural Land Technology है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में समोच्च हेजरो द्वारा मृदा व जल संरक्षण करती है।
8. तटीय क्षेत्रों (Coastal areas) में समुद्री चक्रवातों और तेज हवाओं के विरुद्ध आश्रय पट्टी बनाने के लिए कौन-सा वृक्ष सर्वाधिक लोकप्रिय है?
(A) कैजुआरिना / झाऊ (Casuarina equisetifolia)
(B) पॉपलर (Populus deltoides)
(C) अखरोट (Juglans regia)
(D) भोजपत्र (Betula utilis)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) कैजुआरिना / झाऊ (Casuarina equisetifolia)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): Casuarina equisetifolia तटीय रेतीली भूमि और लवणीय हवाओं को सहन करता है तथा चक्रवातों के विरुद्ध सर्वोत्तम तटीय शेल्टरबेल्ट बनाता है।
9. नहरी सिंचित क्षेत्रों में सेम (Waterlogging) की समस्या को दूर करने के लिए गहरी जड़ वाले वृक्षों (जैसे सफेदा) को लगाकर भूजल स्तर नीचे लाने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
(A) ड्रिप सिंचाई
(B) जैव-जल निकासी (Bio-drainage)
(C) वाटर हार्वेस्टिंग
(D) मल्चिंग
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) जैव-जल निकासी (Bio-drainage)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): फ्रेअटोफाइटिक वृक्षों के उच्च वाष्पोत्सर्जन द्वारा जलमग्न भूमि से अतिरिक्त पानी निकालने को ‘जैव-जल निकासी’ (Bio-drainage) कहते हैं।
10. एक आश्रय पट्टी (Shelterbelt) पवनमुखी दिशा (Windward side) में वृक्ष की ऊँचाई (H) के कितने गुना दूरी तक हवा की गति कम करती है?
(A) 2H से 5H
(B) 20H से 30H
(C) 50H
(D) 0H
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) 2H से 5H
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): पवनमुखी दिशा (Windward side) में 2H से 5H दूरी तक तथा प्रतिपवन दिशा (Leeward side) में 10H से 30H दूरी तक सुरक्षा मिलती है।

16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर्स (5 Important Exam One-Liners)

  1. आश्रय पट्टी (Shelterbelt) पवनमुखी दिशा (Windward) में 2H–5H और प्रतिपवन दिशा (Leeward) में 10H–30H दूरी तक सुरक्षा देती है।
  2. एक आदर्श आश्रय पट्टी का क्रॉस-सेक्शन त्रिकोणीय/पिरामिडनुमा होता है और इसकी इष्टतम छिद्रता 40–50% होनी चाहिए।
  3. वायुरोधक में 1–2 कतारें होती हैं जबकि आश्रय पट्टी में 3–10 कतारें होती हैं और दोनों पवन दिशा के समकोण पर लगाए जाते हैं।
  4. ‘Agroforestry for Soil Conservation’ (1989) नामक प्रसिद्ध पुस्तक एंथोनी यंग (Anthony Young) ने लिखी है।
  5. राजस्थान में बालू के टीलों के स्थिरीकरण के लिए सर्वाधिक प्रयुक्त वृक्ष ‘इजरायली बबूल’ (Acacia tortilis) है।

(B) 5 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions)

1. वायुरोधक (Windbreak) और आश्रय पट्टी (Shelterbelt) में कतारों की संख्या में क्या मुख्य अंतर है?
उत्तर: वायुरोधक (Windbreak) में प्रायः 1 से 2 कतारें होती हैं, जबकि आश्रय पट्टी (Shelterbelt) में 3 से 10 कतारें (बहु-पंक्ति) होती हैं।
2. यदि किसी शेल्टरबेल्ट की ऊँचाई 10 मीटर है, तो वह प्रतिपवन दिशा (Leeward side – 10H से 30H) में कितनी दूरी तक फसलों की रक्षा करेगी?
उत्तर: 100 मीटर से 300 मीटर (10×10 m से 30×10 m) की दूरी तक।
3. बालू के टीलों पर शतरंज बोर्ड पैटर्न (Checkerboard pattern) में सूखी झाड़ियों की बाड़ लगाने को क्या कहते हैं?
उत्तर: माइक्रो-विंडब्रेक (Micro-windbreaks / Mulching barriers)।
4. तटीय शेल्टरबेल्ट और शुष्क मरुस्थलीय शेल्टरबेल्ट के लिए एक-एक प्रमुख वृक्ष का नाम लिखिए।
उत्तर: तटीय शेल्टरबेल्ट: कैजुआरिना (Casuarina equisetifolia); मरुस्थलीय शेल्टरबेल्ट: इजरायली बबूल (Acacia tortilis) / नीम।
5. जैव-जल निकासी (Bio-drainage) के लिए सबसे उपयुक्त वृक्ष प्रजाति कौन-सी है?
उत्तर: क्लोनल सफेदा (Eucalyptus tereticornis / Eucalyptus hybrid)।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions)

1. वायुरोधक (Windbreak) और आश्रय पट्टी (Shelterbelt) को परिभाषित कीजिए तथा उनके पाँच प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
उत्तर: वायुरोधक खेत या बाग की सीमा पर पवन दिशा के समकोण पर लगाई गई वृक्षों/झाड़ियों की 1–2 कतारों की संकीर्ण पट्टी है, जबकि आश्रय पट्टी बड़े क्षेत्र की सुरक्षा हेतु त्रिकोणीय विन्यास में लगाई गई 3–10 कतारों की चौड़ी पट्टी है। उद्देश्य: (1) पवन वेग घटाकर वायु अपरदन रोकना, (2) फसलों को लू व पाले से बचाना, (3) वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन घटाकर मृदा नमी बचाना, (4) फसलों को गिरने (Lodging) व फलों को झड़ने से बचाना, और (5) ईंधन, चारा व लकड़ी प्रदान करना।
2. एक आदर्श आश्रय पट्टी (Shelterbelt) की संरचना, क्रॉस-सेक्शन, छिद्रता और सुरक्षा क्षेत्र (Zone of protection) को समझाइए।
उत्तर: आश्रय पट्टी प्रचलित पवन के समकोण पर लगाई जाती है। इसका क्रॉस-सेक्शन त्रिकोणीय/पिरामिडनुमा होता है जिसमें बीच की कतार में ऊँचे वृक्ष (नीम, शीशम, सिरिस) और दोनों बाहरी कतारों में मध्यम वृक्ष (बबूल, खेजड़ी) व छोटी झाड़ियाँ (केर, झड़बेरी) होती हैं। भँवर रोकने के लिए इसमें 40–50% छिद्रता होनी चाहिए। यह पवनमुखी तरफ 2H–5H और प्रतिपवन तरफ 10H–30H दूरी तक सुरक्षा देती है।
3. मृदा एवं जल संरक्षण में कृषि वानिकी के ‘मृदा आवरण उपागम’ (Soil Cover Approach) और ‘अवरोध उपागम’ (Barrier Approach) की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: यंग (1989) के अनुसार मृदा आवरण उपागम में वृक्षों का छत्र और जमीन पर गिरा पर्ण करकट (Litter & pruning mulch) मृदा सतह को ढककर वर्षा बूँदों के प्रहार (Splash erosion) और वाष्पीकरण को रोकता है। अवरोध उपागम में ढलान वाली भूमि पर समोच्च रेखाओं (Contours) पर घनी हेजरो (जैसे सुबबूल, ग्लिरिसिडिया) लगाई जाती हैं जो बहते अपवाह जल की गति को रोकती हैं, मिट्टी को छानती हैं और अंतःस्यंदन बढ़ाती हैं।
4. पश्चिमी राजस्थान में बालू के टीलों के स्थिरीकरण (Sand Dune Stabilization) की CAZRI तकनीक के तीनों चरण लिखिए।
उत्तर: CAZRI (जोधपुर) तकनीक के तीन चरण हैं: (1) मानवीय व पशु हस्तक्षेप रोकने के लिए प्रभावित टीले की फेंसिंग करना, (2) टीले की सतह पर रेत का उड़ना रोकने के लिए पवन के समकोण पर 5×5 m के शतरंज बोर्ड (Checkerboard) पैटर्न में खींप (Crotalaria burhia) या खेंप (Leptadenia pyrotechnica) की सूखी टहनियों से माइक्रो-विंडब्रेक बनाना, और (3) मानसून आने पर उनके बीच Acacia tortilis, फोग, कुमटा और सेवण घास लगाना।
5. जैव-जल निकासी (Bio-drainage) क्या है? नहरी क्षेत्रों में इसका क्या महत्व है?
उत्तर: जैव-जल निकासी वह प्रक्रिया है जिसमें उच्च वाष्पोत्सर्जन क्षमता और गहरी जड़ प्रणाली वाले वृक्षों (Phreatophytes: जैसे सफेदा, पॉपलर, बबूल, कैजुआरिना) को नहरों के किनारे या जलमग्न (सेम ग्रस्त) भूमियों पर लगाया जाता है। ये वृक्ष जैविक पंप की तरह काम करते हुए अतिरिक्त भूमिगत जल को सोखकर वायुमंडल में उड़ा देते हैं, जिससे भूजल स्तर नीचे आ जाता है और दलदली व लवणीय भूमि पुनः खेती योग्य बन जाती है।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3 Long Answer Questions)

1. मृदा एवं जल संरक्षण (Soil and Water Conservation) में कृषि वानिकी की भूमिका का सविस्तार वर्णन कीजिए तथा बताइए कि वृक्ष किस प्रकार मृदा के भौतिक, रासायनिक और जलीय गुणों में सुधार करते हैं।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: Young (1989) के सिद्धांतों, USLE समीकरण (A = R·K·L·S·C·P), छत्र अवरोधन, पर्ण मल्च आवरण, समोच्च हेजरो व SALT तकनीक, जड़ चैनलों द्वारा अंतःस्यंदन वृद्धि, वाष्पीकरण में 20-40% कमी और जैव-जल निकासी (Bio-drainage) का विस्तृत वर्णन करें।
2. वायुरोधक (Windbreak) और आश्रय पट्टी (Shelterbelt) में अंतर स्पष्ट करते हुए एक आदर्श आश्रय पट्टी के डिजाइन सिद्धांतों (अभिविन्यास, क्रॉस-सेक्शन, छिद्रता, सुरक्षा क्षेत्र 2H-5H व 10H-30H एवं उपयुक्त प्रजातियाँ) का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: Windbreak बनाम Shelterbelt की तुलनात्मक सारणी बनाएँ, 5-कतार पिरामिडनुमा क्रॉस-सेक्शन आरेख समझाएँ, 40-50% छिद्रता का वायुगतिकीय कारण बताएँ और मरुस्थलीय व तटीय क्षेत्रों की प्रजातियों का उल्लेख करें।
3. शुष्क क्षेत्रों में पवन अपरदन की समस्या का विश्लेषण करते हुए बालू के टीलों के स्थिरीकरण (Sand dune stabilization) और ढालू भूमि पर समोच्च कृषि वानिकी (Contour hedgerow intercropping / SALT) की तकनीकों पर निबंध लिखिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: CAZRI की 3-चरणीय टीला स्थिरीकरण विधि (फेंसिंग, चेकरबोर्ड माइक्रो-विंडब्रेक, Acacia tortilis + Lasiurus sindicus रोपण) और पहाड़ी क्षेत्रों की SALT प्रणाली का विस्तार से वर्णन करें।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGF 311 notes।

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