ENT 311 Lecture 30: कृंतक (चूहे) एवं अन्य महत्वपूर्ण भंडारण नाशीकीट तथा उनका प्रबंधन

Agro Path Finder official logo
AGRO PATH FINDER
ENT 311 · Pest Management in Crops and Stored Grains — Final Notes
विषय सूची · Quick Navigation02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
यह पाठ्यक्रम की अध्ययन सामग्री है। कीटनाशक, मात्रा और उपचार के उदाहरणों को वर्तमान खेत-स्तरीय सलाह न मानें; वास्तविक उपयोग में वर्तमान पंजीकृत label, फसल–कीट अनुमोदन तथा स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करें।
Lecture 30 Theory • Lecture 30 (ENT-311 / ENTO-311) 🖼️ सचित्र विजुअल आरेख सहित (With Visual Identification Diagrams)

Lecture 30: कृंतक (चूहे) एवं अन्य महत्वपूर्ण भंडारण नाशीकीट तथा उनका प्रबंधन

Rodents and Other Important Stored-Grain Pests and Their Management

02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:

  • गैर-कीट भंडारण नाशीजीवों (Non-insect Storage Pests) के रूप में कृंतकों (Rodents / चूहे — वर्ग Mammalia, गण Rodentia, कुल Muridae) के दंत-विन्यास (जीवन भर बढ़ने वाले 1 जोड़ी छेनी जैसे कृंतक दाँत / Chisel-like rootless incisors एवं ‘डायस्टेमा’ रिक्त स्थान) और आर्थिक महत्व को समझना।
  • भारत के 5 प्रमुख खेत और गोदाम चूहों—छोटा घूस/बैंडीकूट (Bandicota bengalensis), घरेलू छत चूहा (Rattus rattus), घरेलू चुहिया (Mus musculus), नरम रोएँ वाला खेत चूहा (Millardia meltada) और भारतीय मरुस्थलीय जरबिल (Tatera indica — CAZRI जोधपुर)—की पहचान और आवास व्यवहार का अध्ययन करना।
  • कृंतकनाशकों (Rodenticides) के दो वर्गों—(1) तीव्र विष (Acute poison: जिंक फॉस्फाइड Zn3P2 @ 2% विषैला चारा) एवं ‘चारा भीति / बेट शाइनेस’ (Bait Shyness) को रोकने के लिए 2 दिन की ‘पूर्व-चुगाई’ (Pre-baiting), और (2) दीर्घकालिक एकल-खुराक रक्त-स्कंदन रोधी (Chronic Single-Dose Second-Generation Anticoagulant: ब्रोमाडिओलोन / Bromadiolone @ 0.005% केक/चारा और उसका एंटीडोट विटामिन K1)—की क्रियाविधि और प्रयोग विधि में निपुणता प्राप्त करना।
  • भंडारित अनाज की बरूथी / माइट (Grain / Flour Mite: Acarus siro — वर्ग Arachnida, गण Acarina) और भंडारण पक्षियों (कबूतर व गौरैया) की क्षति और प्रबंधन को जानना।

03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): भंडारित अनाज को कीटों के अतिरिक्त तीन प्रमुख गैर-कीट नाशीजीव (Non-insect Pests) भारी नुकसान पहुँचाते हैं: (1) कृंतक / चूहे (Rodents — वर्ग Mammalia, गण Rodentia), (2) अनाज एवं आटे की बरूथी (Grain & Flour Mites — वर्ग Arachnida, गण Acarina), और (3) पक्षी (Birds — वर्ग Aves)।

भारत में अकेले चूहे (Rodents) कुल खाद्यान्न उत्पादन का 2.5 से 5% हिस्सा खेत और गोदामों में नष्ट कर देते हैं। एक चूहा प्रतिदिन अपने शरीर के भार का लगभग 10% (15–25 g) अनाज तो खाता ही है, किंतु उससे 10 गुना अधिक अनाज अपने बालों, मल-मूत्र (Pellets & Urine) और बोरियों को काटकर (Gnawing) बर्बाद और दूषित कर देता है तथा प्लेग (Yersinia pestis) और लेप्टोस्पायरोसिस जैसे घातक जूनोटिक रोग फैलाता है। भारत में ‘अखिल भारतीय समन्वित कृंतक नियंत्रण अनुसंधान परियोजना’ (AINP on Vertebrate Pest Management / Rodent Control) का मुख्यालय ICAR-CAZRI, जोधपुर (राजस्थान) में स्थित है।

04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

कृंतक दंत-विन्यास एवं डायस्टेमा (Rodent Dentition & Diastema)
गण Rodentia (चूहे, गिलहरी, साही) के स्तनधारियों के ऊपरी और निचले दोनों जबड़ों में सामने की ओर 1-1 जोड़ी अत्यंत तीखे, छेनी के आकार के, जड़-विहीन कृंतक दाँत (Chisel-shaped rootless incisors) होते हैं जो जीवन भर प्रतिवर्ष 10–12 cm की दर से बढ़ते रहते हैं! इन कृंतक दाँतों को घिसकर छोटा रखने के लिए चूहों को लकड़ी, बोरियाँ, तार और सीमेंट को लगातार कुतरना (Gnawing) पड़ता है। इनमें रदनक दाँत (Canines) पूर्णतः अनुपस्थित होते हैं और कृंतक तथा चवर्णक (Molars) दाँतों के बीच एक खाली स्थान होता है जिसे ‘डायस्टेमा’ (Diastema) कहते हैं।
चारा भीति / विष-चारा डर (Bait Shyness / Poison Shyness)
जब चूहों को ‘जिंक फॉस्फाइड’ (Zinc phosphide) जैसा तीव्र विष (Acute poison) दिया जाता है और कोई चूहा उसकी उप-घातक मात्रा (Sub-lethal dose) खाकर पेट दर्द के बाद बच जाता है, तो चूहों की तीव्र स्मरण शक्ति के कारण वह और उसके साथी चूहे अगले 3 से 6 महीनों तक उस चारे और विष को छूते तक नहीं हैं—इसे ‘बेट शाइनेस’ (Bait shyness) कहते हैं! इसे रोकने के लिए विष रखने से पहले 2–3 दिन तक बिना जहर का सादा दाना खिलाना (‘प्री-बेटिंग’ / Pre-baiting) अनिवार्य है।
ब्रोमाडिओलोन — द्वितीय पीढ़ी का एकल-खुराक थक्का-रोधी (Bromadiolone 0.005% — Second-Generation Anticoagulant)
ब्रोमाडिओलोन (0.005% RB/CB) एक दीर्घकालिक कृंतकनाशक (Chronic rodenticide) है जो चूहे के यकृत में ‘विटामिन-K एपॉक्साइड रिडक्टेस’ एंजाइम को रोककर रक्त का थक्का जमाने वाले कारकों (Prothrombin – Factors II, VII, IX, X) का निर्माण बंद कर देता है। इससे चूहे में बिना किसी दर्द या बेट शाइनेस के 4 से 7 दिनों में आंतरिक रक्तस्राव (Internal hemorrhage) से मृत्यु हो जाती है। (दुर्घटनावश विषाक्तता का एंटीडोट: Vitamin K1 / Phytomenadione इंजेक्शन)।
अनाज एवं आटे की बरूथी (Grain & Flour Mite — Acarus siro)
वर्ग Arachnida (गण Acarina, कुल Acaridae) का अत्यंत सूक्ष्म (0.5 mm), मोती जैसा सफेद, 8 टाँगों वाला अष्टपाद जीव जो उच्च नमी (>13–14%) वाले अनाज के भ्रूण और आटे पर आक्रमण कर उसमें ‘पुदीने जैसी दुर्गंध’ (Minty taint) पैदा करता है और आटे के कामगारों में ‘ग्रॉसर्स इच’ (Grocer’s itch) त्वचा एलर्जी उत्पन्न करता है।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. भारत के 5 प्रमुख कृंतक (चूहा) प्रजातियाँ: पहचान एवं आवास (Major Rodent Species of India)

  1. छोटा घूस / लेसर बैंडीकूट चूहा (Lesser Bandicoot Rat / Indian Mole Rat — Bandicota bengalensis; कुल Muridae):
    • यह भारत के खेतों (धान, गेहूँ, गन्ना) और गोदामों दोनों का नंबर-1 सबसे विनाशकारी चूहा है।
    • यह गठीले शरीर वाला (200–350 g), गहरे भूरे-काले मोटे बालों वाला आक्रामक चूहा है जिसकी पूँछ शरीर की लंबाई से छोटी होती है और खतरे के समय यह सूअर की तरह गुर्राता (Grunts like a pig) तथा पीठ के बाल खड़े कर लेता है।
    • जमाखोरी स्वभाव (Hoarding behaviour): यह खेत में गहरे व जटिल बिल बनाकर उनके द्वार पर गीली मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर (Fresh mud mounds / Mole hills) लगाता है और एक-एक बिल के गोदाम कक्ष में 2 से 5 kg तक धान या गेहूँ की बालियाँ काटकर जमा (Hoarding) कर लेता है!
  2. घरेलू काला चूहा / छत का चूहा (House Rat / Roof Rat / Black Rat — Rattus rattus; कुल Muridae):
    • यह भारत के अनाज गोदामों, घरों और दुकानों का सबसे प्रमुख कम्युनल (Commensal) चूहा है।
    • यह मध्यम आकार (120–180 g), पतले शरीर, बड़े कान और नुकीले थूथन वाला चूहा है जिसकी पूँछ हमेशा सिर और धड़ की कुल लंबाई से अधिक लंबी (Tail longer than head + body length) होती है। यह दीवारों, पाइपों और छतों पर चढ़ने में माहिर (Arboreal/Climber) होता है।
  3. घरेलू चुहिया (House Mouse — Mus musculus; कुल Muridae):
    • यह सबसे छोटा (15–25 g), अत्यंत फुर्तीला घरेलू व गोदाम कृंतक है जो बोरियों में छोटे-छोटे अनगिनत छेद कर अनाज गिराता है। (खेतों में इसकी संबंधित प्रजाति Mus booduga — Little Indian field mouse पाई जाती है)।
  4. नरम रोएँ वाला खेत चूहा (Soft-furred Field Rat / Metad — Millardia meltada; कुल Muridae):
    • यह सिंचित और बारानी खेतों (गेहूँ, मूँगफली, कपास, ज्वार) का कोमल सलेटी-भूरे फर वाला प्रमुख चूहा है।
  5. भारतीय मरुस्थलीय जरबिल (Indian Desert Gerbil — Tatera indica एवं Meriones hurrianae; कुल Muridae):
    • राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के शुष्क व अर्ध-शुष्क रेतीले क्षेत्रों का सबसे प्रमुख कृंतक; इसके पिछले पैर लंबे (कंगारू की तरह कूदने वाले) और पूँछ के सिरे पर काले बालों का गुच्छा (Tuft of hair at tail tip) होता है।

2. कृंतकों (चूहों) का समन्वित प्रबंधन (Integrated Rodent Management — IRM)

(A) निवारक एवं चूहा-रोधी गोदाम निर्माण (Preventive Sanitation & Rodent-Proofing)
  • गोदाम का फर्श पक्का कंक्रीट का हो और जमीन से कम से कम 90 cm (3 फीट) ऊँचे प्लिंथ पर बना हो, जिसके बाहरी किनारे पर 20–30 cm बाहर निकला हुआ कॉलर या रैट-गार्ड (L-shaped metallic/concrete rat collar / baffle) लगा हो ताकि चूहे दीवार पर चढ़कर अंदर न जा सकें।
  • दरवाजों के निचले 30 cm हिस्से पर 24-गेज जस्ती लोहे की चद्दर (GI metal sheet) जड़ी हो और खिड़कियों/रोशनदानों पर 6 extmm से कम छिद्र वाली मजबूत लोहे की जाली लगी हो।
(B) यांत्रिक नियंत्रण — पिंजरे एवं पाश (Mechanical Trapping)
  • घरों और छोटे गोदामों में ‘वंडर ट्रैप’ (Wonder Trap — बहु-पकड़ जीवित पिंजरा), ‘शर्मन ट्रैप’ (Sherman Trap), ‘स्नैप / ब्रेक-बैक किल ट्रैप’ (Snap / Guillotine trap), ‘तंजौर किट्टी’ (Tanjore Bow Trap — धान के खेतों में) और ‘ग्लू बोर्ड’ (Sticky Glue Traps) को हमेशा दीवारों के किनारे (Runways) से सटाकर रखना चाहिए क्योंकि चूहे अपनी मूँछों (Vibrissae) के सहारे दीवार से सटकर चलते हैं।
(C) रासायनिक नियंत्रण — कृंतकनाशक (Chemical Control: Rodenticides)
  1. तीव्र विष: जिंक फॉस्फाइड (extZn3extP2 @ 2% विषैला चारा — Acute Poison):
    • क्रियाविधि: जब चूहा 2% जिंक फॉस्फाइड युक्त चारा खाता है, तो उसके आमाशय के हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (extHCl) से क्रिया कर घातक फॉस्फीन गैस (extPH3) बनती है: extZn3extP2+6 extHCl⟶3 extZnCl2+2 extPH3↑ext(Phosphinegas) जिससे हृदय व श्वसन तंत्र रुकने से 2 से 12 घंटे में चूहे की मृत्यु हो जाती है।
    • 2% विषैला चारा बनाने का मानक अनुपात (Standard 2% Bait Formula):
      • भुना हुआ टूटा अनाज (गेहूँ/बाजरा/मक्का दाना):96 extभाग (960 extg)
      • खाद्य तेल (मूँगफली या सरसों का तेल — चिपकाने व आकर्षित करने हेतु):2 extभाग (20 extg)
      • जिंक फॉस्फाइड (extZn3extP2 80% पाउडर):2 extभाग (20 extg से 25 extg)
      • (सावधानी: चारा बनाते समय पानी बिल्कुल न मिलाएँ, वरना फॉस्फीन गैस पहले ही निकल जाएगी और गंध से चूहे चारा नहीं खाएँगे!)
    • अनिवार्य 4-दिवसीय ‘प्री-बेटिंग’ अनुसूची (Mandatory Pre-baiting Schedule to Prevent Bait Shyness):
      • दिन 1: सभी पुराने बिलों को मिट्टी से बंद कर दें।
      • दिन 2 व दिन 3 (प्री-बेटिंग): जो बिल सुबह खुले मिलें (सक्रिय बिल / Live burrows), उनमें 2 दिन तक बिना जहर का सादा दाना (98% अनाज + 2% तेल @ 10–15 g/बिल) रखें ताकि चूहों की झिझक (Neophobia) समाप्त हो जाए।
      • दिन 4 (पॉइजन बेटिंग): चौथे दिन 2% जिंक फॉस्फाइड का विषैला चारा (10–15 g प्रति बिल) रखें।
      • दिन 5: मरे हुए चूहों और बचे हुए विषैले चारे को एकत्रित कर जमीन में गहरा गाड़ दें।
  2. दीर्घकालिक थक्का-रोधी विष: ब्रोमाडिओलोन (Bromadiolone 0.005% RB / Wax Cake — Second-Generation Anticoagulant):
    • प्रथम पीढ़ी के थक्का-रोधी (First-generation anticoagulants जैसे वारफेरिन / Warfarin 0.025% और कूमाटेट्रालिल / Coumatetralyl) को चूहों को मारने के लिए लगातार 5–7 दिन खिलाना पड़ता था।
    • इसके विपरीत, ब्रोमाडिओलोन (Bromadiolone 0.005%) और फ्लोकोमाफेन (Flocoumafen) ‘द्वितीय पीढ़ी के एकल-खुराक थक्का-रोधी’ (Single-dose second-generation anticoagulants) हैं जिनकी केवल एक बार खाई गई खुराक ही चूहे के रक्त का थक्का जमना बंद कर 4–7 दिन में उसे मार देती है!
    • सबसे बड़ा लाभ: इसमें कोई बेट शाइनेस (Bait shyness) नहीं होती, इसलिए इसमें प्री-बेटिंग की आवश्यकता नहीं होती और गोदामों व घरों में इसके रेडी-टू-यूज मोमी केक (0.005% Wax blocks) सीधे बैट-स्टेशनों में रखे जा सकते हैं। बचे हुए चूहों (Residual population) को मारने के लिए भी जिंक फॉस्फाइड के बाद हमेशा ब्रोमाडिओलोन का ही प्रयोग किया जाता है।
    • एंटीडोट (Antidote): ब्रोमाडिओलोन या वारफेरिन विषाक्तता का विशिष्ट प्रतिविष ‘विटामिन extK1‘ (Phytomenadione) है।
  3. खेत के बिलों का धूम्रन (Burrow Fumigation with Aluminium Phosphide):
    • खेत के सक्रिय चूहा बिलों में एल्युमिनियम फॉस्फाइड (Celphos) की 0.6 g की 2 पैलेट (या 3 g की आधी टिकिया = 1.5 g) प्रति सक्रिय बिल डालकर बिल के मुँह को गीली मिट्टी से अच्छी तरह बंद कर देने से अंदर निकलने वाली फॉस्फीन गैस से सभी चूहे बिल के अंदर ही मर जाते हैं।

3. अन्य गैर-कीट भंडारण नाशीजीव: अनाज बरूथी एवं पक्षी (Grain Mites & Storage Birds)

  • अनाज एवं आटे की बरूथी (Flour / Grain Mite — Acarus siro; कुल Acaridae, गण Acarina):
    • यह कीट नहीं बल्कि 8 टाँगों वाला सूक्ष्म अष्टपाद (Arachnid) है। यह तभी पनपती है जब अनाज या आटे में नमी 13–14% से अधिक हो। यह गेहूँ के दाने का केवल भ्रूण (Germ) खाती है और आटे में ‘पुदीने जैसी दुर्गंध’ (Minty odor) पैदा करती है।
    • प्रबंधन: अनाज को धूप में सुखाकर नमी 10% से कम करते ही सभी माइट्स निर्जलीकरण से मर जाती हैं; गंभीर प्रकोप में एल्युमिनियम फॉस्फाइड से धूम्रन करें।
  • भंडारण पक्षी (Storage Birds — कबूतर Columba livia एवं गौरैया Passer domesticus):
    • गोदाम के दरवाजों पर प्लास्टिक पट्टियों के पर्दे (PVC strip curtains) और रोशनदानों पर पक्षी-रोधी जाली (Bird-proof wire mesh <1.2 extcm) लगाकर पक्षियों का प्रवेश रोकें।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

1. तीव्र कृंतकनाशक (Acute / Single-Dose Fast Poisons)
  • जिंक फॉस्फाइड (extZn3extP2 @ 2% चारा): भारत में सर्वाधिक प्रयुक्त; आमाशय के extHCl से क्रिया कर extPH3 गैस बनाता है; बेट शाइनेस पैदा करता है, अतः 2 दिन प्री-बेटिंग अनिवार्य; कोई विशिष्ट एंटीडोट नहीं।
  • एल्युमिनियम फॉस्फाइड (extAlP पैलेट 1.2–1.5 g/बिल): केवल खेत के बिलों के धूम्रन (Burrow fumigation) हेतु।
2. दीर्घकालिक थक्का-रोधी (Chronic Anticoagulant Rodenticides)
  • प्रथम पीढ़ी (बहु-खुराक / Multiple-dose): वारफेरिन (Warfarin 0.025%), फ्यूमारिन, कूमाटेट्रालिल (Racumin 0.0375%)।
  • द्वितीय पीढ़ी (एकल-खुराक / Single-dose Potent): ब्रोमाडिओलोन (Bromadiolone 0.005% RB/CB), फ्लोकोमाफेन, ब्रोडिफाकौम।
  • विशेषता: 4–7 दिन में आंतरिक रक्तस्राव से मृत्यु; कोई बेट शाइनेस नहीं; एंटीडोट = विटामिन extK1।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)

वैज्ञानिक चूहा नियंत्रण का ‘जिंक फॉस्फाइड → ब्रोमाडिओलोन अनुक्रम सिद्धांत’ (Sequential Rodent Control Principle):

जब खेत या बड़े क्षेत्र में चूहों की आबादी बहुत अधिक हो, तो पहले 2 दिन प्री-बेटिंग करके 2% जिंक फॉस्फाइड का प्रयोग किया जाता है जिससे एक ही रात में 70–80% चूहे मर जाते हैं। किंतु जो 20–30% चूहे बच जाते हैं, उनमें जिंक फॉस्फाइड के प्रति ‘बेट शाइनेस’ (Bait shyness) पैदा हो जाती है और वे दोबारा जिंक फॉस्फाइड कभी नहीं खाएँगे! इसलिए 10 दिन बाद उन बचे हुए ‘बेट-शाई’ चूहों को समाप्त करने के लिए 0.005% ब्रोमाडिओलोन (थक्का-रोधी केक) या एल्युमिनियम फॉस्फाइड बिल-धूम्रन का प्रयोग किया जाता है।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)

प्रायोगिक गणना केस स्टडी: 10 हेक्टेयर गेहूँ के खेत में चूहा नियंत्रण अभियान हेतु आवश्यक जिंक फॉस्फाइड की गणना

प्रश्न: 10 हेक्टेयर गेहूँ के खेत में औसतन 40 सक्रिय चूहा बिल प्रति हेक्टेयर हैं। यदि प्रत्येक सक्रिय बिल में 10 extg विषैला चारा (2% जिंक फॉस्फाइड) रखना हो, तो कुल कितना विषैला चारा और उसमें कितना जिंक फॉस्फाइड व तेल लगेगा?

  • कुल सक्रिय बिल (10 ha में):10imes40=400 extबिल
  • आवश्यक कुल विषैला चारा (@ 10 g/बिल):400imes10 extg=4000 extg=4.0 extkg
  • 4.0 extkg (4000 extg) चारे के घटक (96 : 2 : 2 अनुपात):
    1. भुना अनाज (96%): 0.96imes4000=3840 extg(3.84 extkg)
    2. खाद्य तेल (2%): 0.02imes4000=80 extg
    3. जिंक फॉस्फाइड (2%): 0.02imes4000=80 extg (यदि 80% शुद्धता वाला extZn3extP2 हो तो 100 extg)।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

सारणी 30.1: भारत के प्रमुख कृंतकों (चूहों) एवं गैर-कीट नाशीजीवों की पहचान तालिका

क्र.सं. सामान्य नाम (Common Name) वैज्ञानिक नाम (Scientific Name) प्रमुख आवास (Habitat) विशिष्ट पहचान एवं क्षति व्यवहार
1 छोटा घूस / बैंडीकूट चूहा (Lesser Bandicoot Rat) Bandicota bengalensis खेत एवं गोदाम दोनों (भारत का #1 सबसे विनाशकारी चूहा) पूँछ शरीर से छोटी, मोटे खड़े बाल, सूअर जैसी गुर्राहट; बिल के बाहर मिट्टी के ढेर और बिल में 2–5 kg अनाज की जमाखोरी (Hoarding)।
2 घरेलू छत का चूहा (House / Roof Rat) Rattus rattus गोदाम, घर एवं दुकानें (#1 घरेलू कम्युनल चूहा) पतला शरीर, बड़े कान, पूँछ शरीर की लंबाई से अधिक लंबी; छतों व पाइपों पर चढ़ने में माहिर।
3 घरेलू चुहिया (House Mouse) Mus musculus गोदाम एवं घर अत्यंत छोटा आकार (15–25 g), बोरियों को कुतरकर अनगिनत छोटे छेद करना।
4 नरम रोएँ वाला खेत चूहा (Soft-furred Field Rat) Millardia meltada सिंचित एवं बारानी खेत अत्यंत मुलायम सलेटी-भूरा फर, बड़े गोल कान।
5 भारतीय मरुस्थलीय जरबिल (Indian Desert Gerbil) Tatera indica / Meriones hurrianae शुष्क व रेतीले खेत (राजस्थान/थार) लंबे पिछले पैर (कंगारू जैसी छलांग) और पूँछ के सिरे पर काले बालों का गुच्छा (Tail tuft)।
6 अनाज एवं आटे की बरूथी (Grain / Flour Mite) Acarus siro (Acarina : Arachnida) नमी-युक्त गोदाम (>13% नमी) 8 टाँगों वाली सूक्ष्म सफेद माइट; दाने का भ्रूण खाना व आटे में पुदीने जैसी गंध (Minty odor) पैदा करना।

सारणी 30.2: तीव्र विष (Zinc Phosphide) बनाम दीर्घकालिक थक्का-रोधी (Bromadiolone) की तुलना

तुलना का आधार जिंक फॉस्फाइड (Zinc Phosphide — Zn3P2) ब्रोमाडिओलोन (Bromadiolone)
1. कृंतकनाशक श्रेणी तीव्र अकार्बनिक विष (Acute Inorganic Poison) द्वितीय पीढ़ी का एकल-खुराक थक्का-रोधी (Second-Generation Single-Dose Anticoagulant)
2. चारे में मानक सांद्रता 2.0% (20 ext–25 extg/kg चारा) 0.005% (50 extmg/kg रेडी-टू-यूज केक/चारा)
3. जैव-रासायनिक क्रियाविधि आमाशय के extHCl से क्रिया कर फॉस्फीन गैस (extPH3) बनाना यकृत में विटामिन-K व प्रोथ्रॉम्बिन को रोककर आंतरिक रक्तस्राव कराना
4. मृत्यु में लगने वाला समय 2 से 12 घंटे (उसी रात) 4 से 7 दिन (धीमी व दर्द-रहित मृत्यु)
5. चारा भीति (Bait Shyness) एवं प्री-बेटिंग तीव्र बेट शाइनेस पैदा करता है; अतः 2–3 दिन सादा दाना (Pre-baiting) खिलाना अनिवार्य है कोई बेट शाइनेस नहीं होती; प्री-बेटिंग की आवश्यकता नहीं है
6. विशिष्ट प्रतिविष (Specific Antidote) कोई विशिष्ट एंटीडोट नहीं (आमाशय प्रक्षालन व लाक्षणिक उपचार) विटामिन extK1 (Phytomenadione) इंजेक्शन

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)

1. कृंतक नियंत्रण दक्षता / सफलता प्रतिशत सूत्र (Rodent Control Success % by Live Burrow Count)

खेत में चूहा नियंत्रण अभियान से पूर्व और उपचार के 4 दिन बाद सक्रिय (खुले) बिलों की संख्या गिनकर नियंत्रण सफलता प्रतिशत निकाला जाता है:

Rodent Control Success (\%)=Pre-treatment Live Burrows (B1)−Post-treatment Live Burrows (B2)Pre-treatment Live Burrows (B1)×100

2. जिंक फॉस्फाइड की आमाशय में रासायनिक अभिक्रिया:

Zn3P2+6HCl (Gastric acid)⟶3ZnCl2+2PH3↑ (Phosphine gas)

11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 30: कृंतक (चूहे) एवं अन्य गैर-कीट भंडारण नाशीजीव व प्रबंधन
प्रमुख कृंतक प्रजातियाँ (Order Rodentia, Family Muridae)
  • Bandicota bengalensis (छोटा घूस — भारत का #1 खेत व गोदाम चूहा, बिल में अनाज जमाखोरी)
  • Rattus rattus (घरेलू छत चूहा — गोदामों का #1 चूहा, पूँछ शरीर से लंबी)
  • Mus musculus (घरेलू चुहिया) व Millardia meltada (नरम फर वाला खेत चूहा)
  • Tatera indica (मरुस्थलीय जरबिल — CAZRI जोधपुर में राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र)
तीव्र विष: जिंक फॉस्फाइड (Zn3P2 @ 2%)
  • आमाशय के HCl से क्रिया कर फॉस्फीन गैस (PH3) बनाता है (2–12 घंटे में मृत्यु)
  • चारा सूत्र: 96 भाग अनाज + 2 भाग खाद्य तेल + 2 भाग Zn3P2 (पानी बिल्कुल न मिलाएँ)
  • उप-घातक मात्रा से ‘बेट शाइनेस’ (Bait shyness) पैदा होती है
  • रोकथाम हेतु विष रखने से पूर्व 2 दिन सादा दाना (‘प्री-बेटिंग’) खिलाना अनिवार्य
थक्का-रोधी: ब्रोमाडिओलोन (0.005%)
  • द्वितीय पीढ़ी का एकल-खुराक रक्त-स्कंदन रोधी (Single-dose anticoagulant)
  • विटामिन-K व प्रोथ्रॉम्बिन रोककर 4–7 दिन में आंतरिक रक्तस्राव से मृत्यु
  • कोई बेट शाइनेस नहीं — प्री-बेटिंग अनावश्यक; गोदामों हेतु सबसे सुरक्षित
  • विशिष्ट एंटीडोट: विटामिन K1 (Phytomenadione); बिल धूम्रन: AlP (1.5 g/बिल)
अनाज बरूथी एवं चूहा-रोधी गोदाम
  • अनाज व आटे की बरूथी: Acarus siro (Acarina — 8 टाँगें, >13% नमी, पुदीने जैसी गंध)
  • अनाज को <10% नमी तक सुखाने से माइट्स स्वतः नष्ट
  • गोदाम प्लिंथ जमीन से 90 cm ऊँचा + 25 cm बाहर निकला L-आकार का रैट-गार्ड कॉलर
  • दरवाजों के निचले 30 cm पर 24-गेज GI लोहे की चद्दर

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)

वैज्ञानिक सामुदायिक चूहा नियंत्रण अभियान की 5-दिवसीय मानक कार्यप्रणाली (5-Day Rodent Campaign SOP)
Step 1
दिन 1 (बिल चिह्नीकरण): खेत/गोदाम के सभी चूहा बिलों का निरीक्षण कर उन्हें मिट्टी से पूरी तरह बंद (Plug) करना
⬇
Step 2
दिन 2 एवं दिन 3 (प्री-बेटिंग — Pre-baiting): अगली सुबह जो बिल खुले मिलें (सक्रिय बिल), उनमें 2 दिन तक बिना जहर का सादा चारा (98% अनाज + 2% खाद्य तेल @ 10 g/बिल) रखना ताकि चूहों का डर खत्म हो
⬇
Step 3
दिन 4 (तीव्र विष चुगाई — Zinc Phosphide 2%): चौथे दिन सभी सक्रिय बिलों में 2% जिंक फॉस्फाइड का विषैला चारा (96:2:2 @ 10 g/बिल) रखना → रात भर में 75–80% चूहों की मृत्यु
⬇
Step 4
दिन 5 (सफाई व सुरक्षा): सुबह सभी मृत चूहों और बचे हुए विषैले चारे को इकट्ठा कर जमीन में गहरा गाड़ना (ताकि कुत्ते/मोर/पक्षी न खाएँ) और बिल बंद करना
⬇
Step 5
दिन 12–15 (अवशिष्ट ‘बेट-शाई’ चूहों का सफाया): जो 20% चूहे जिंक फॉस्फाइड से बच गए हैं, उनके खुले बिलों में 0.005% ब्रोमाडिओलोन केक रखना या एल्युमिनियम फॉस्फाइड (1.5 g/बिल) से धूम्रन कर बिल बंद करना

13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • भारत के खेतों और गोदामों में सर्वाधिक नुकसान पहुँचाने वाला नंबर-1 चूहा ‘लेसर बैंडीकूट चूहा’ (Bandicota bengalensis — कुल Muridae, गण Rodentia) है जो अपने बिलों में 2–5 kg अनाज जमा (Hoard) कर लेता है।
  • गोदामों और घरों में पाया जाने वाला मुख्य छत का चूहा ‘Rattus rattus’ है जिसकी पूँछ हमेशा उसके शरीर की लंबाई से अधिक लंबी होती है।
  • जिंक फॉस्फाइड (Zn3P2) का प्रयोग चारे में ‘2%’ सांद्रता पर किया जाता है और इसमें ‘बेट शाइनेस’ (Bait shyness) की समस्या को रोकने के लिए 2–3 दिन तक ‘प्री-बेटिंग’ (बिना जहर का सादा दाना खिलाना) अनिवार्य है।
  • ब्रोमाडिओलोन (Bromadiolone) एक ‘द्वितीय पीढ़ी का एकल-खुराक रक्त-स्कंदन रोधी’ (Second-generation single-dose anticoagulant) कृंतकनाशक है जिसका प्रयोग ‘0.005%’ सांद्रता पर किया जाता है और इसका विशिष्ट एंटीडोट ‘विटामिन K1’ है।
  • अनाज और आटे की बरूथी (Grain/Flour Mite) का वैज्ञानिक नाम ‘Acarus siro’ (वर्ग Arachnida, गण Acarina) है जो >13% नमी वाले आटे में पुदीने जैसी गंध (Minty taint) पैदा करती है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)

त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):

  • प्रमुख चूहा प्रजातियाँ (कुल Muridae): Bandicota bengalensis (खेत व गोदाम का #1 चूहा), Rattus rattus (घरेलू छत चूहा), Mus musculus (चुहिया), Millardia meltada (नरम फर खेत चूहा), Tatera indica (मरुस्थलीय जरबिल)।
  • जिंक फॉस्फाइड (extZn3extP2): तीव्र विष @ 2% चारा (96 अनाज : 2 तेल : 2 विष); आमाशय में extPH3 गैस; बेट शाइनेस रोकने हेतु 2 दिन प्री-बेटिंग अनिवार्य।
  • ब्रोमाडिओलोन (Bromadiolone): द्वितीय पीढ़ी एकल-खुराक थक्का-रोधी @ 0.005% केक; कोई बेट शाइनेस नहीं; एंटीडोट = विटामिन extK1।
  • अनाज बरूथी: Acarus siro (Acarina — 8 टाँगें; <10% नमी तक सुखाने से नियंत्रण)।

15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)

1. भारत के खेतों (धान, गेहूँ) और गोदामों दोनों में सर्वाधिक नुकसान पहुँचाने वाला और अपने बिलों में 2–5 kg तक अनाज की बालियाँ जमा (Hoard) करने वाला सबसे विनाशकारी चूहा कौन-सा है?
(A) छोटा घूस / लेसर बैंडीकूट चूहा (Lesser Bandicoot Rat — Bandicota bengalensis; कुल Muridae)
(B) घरेलू चुहिया (Mus musculus)
(C) गिलहरी (Funambulus pennanti)
(D) साही (Hystrix indica)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) छोटा घूस / लेसर बैंडीकूट चूहा (Lesser Bandicoot Rat — Bandicota bengalensis; कुल Muridae)
व्याख्या: Bandicota bengalensis भारत का सबसे प्रमुख कृषि एवं गोदाम कृंतक है जो भारी जमाखोरी करता है।
2. चूहों के नियंत्रण के लिए प्रयुक्त तीव्र विष ‘जिंक फॉस्फाइड’ (Zinc phosphide — Zn3P2) की विषैले चारे में मानक अनुशंसित सांद्रता कितनी होती है?
(A) 2.0% (20–25 g प्रति kg चारा)
(B) 0.005%
(C) 50%
(D) 0.5%
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) 2.0% (20–25 g प्रति kg चारा)
व्याख्या: जिंक फॉस्फाइड का चारा हमेशा 2% सांद्रता (96 भाग अनाज + 2 भाग तेल + 2 भाग जिंक फॉस्फाइड) पर बनाया जाता है।
3. जिंक फॉस्फाइड (Zn3P2) का विषैला चारा रखने से पहले 2–3 दिन तक चूहों को बिना जहर का सादा दाना खिलाना (‘प्री-बेटिंग’ / Pre-baiting) क्यों अनिवार्य होता है?
(A) चूहों में ‘चारा भीति / बेट शाइनेस’ (Bait shyness) और नए भोजन के डर (Neophobia) को रोकने के लिए
(B) चूहों का वजन बढ़ाने के लिए
(C) चूहों को पानी पिलाने के लिए
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) चूहों में ‘चारा भीति / बेट शाइनेस’ (Bait shyness) और नए भोजन के डर (Neophobia) को रोकने के लिए
व्याख्या: जिंक फॉस्फाइड तीव्र विष है; यदि बिना प्री-बेटिंग के रखा जाए तो चूहे थोड़ा-सा चखकर बीमार पड़ जाते हैं और उनमें ‘बेट शाइनेस’ पैदा हो जाती है।
4. ‘ब्रोमाडिओलोन’ (Bromadiolone) किस श्रेणी का कृंतकनाशक है और चारे/केक में इसकी मानक सांद्रता कितनी होती है?
(A) द्वितीय पीढ़ी का एकल-खुराक रक्त-स्कंदन रोधी (Second-generation single-dose anticoagulant) — सांद्रता 0.005%
(B) तीव्र अकार्बनिक विष — सांद्रता 2%
(C) ऑर्गेनोफॉस्फेट — सांद्रता 10%
(D) धूम्रक गैस — सांद्रता 100%
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) द्वितीय पीढ़ी का एकल-खुराक रक्त-स्कंदन रोधी (Second-generation single-dose anticoagulant) — सांद्रता 0.005%
व्याख्या: Bromadiolone 0.005% एकल-खुराक एंटीकोआगुलेंट है जो बिना बेट शाइनेस के 4–7 दिन में आंतरिक रक्तस्राव से चूहों को मारता है।
5. ब्रोमाडिओलोन (Bromadiolone) या वारफेरिन जैसे रक्त-स्कंदन रोधी कृंतकनाशकों की आकस्मिक विषाक्तता का विशिष्ट प्रतिविष (Specific Antidote) क्या है?
(A) विटामिन K1 (Vitamin K1 / Phytomenadione)
(B) एट्रोपिन सल्फेट (Atropine)
(C) विटामिन C
(D) कैल्शियम ग्लूकोनेट
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) विटामिन K1 (Vitamin K1 / Phytomenadione)
व्याख्या: एंटीकोआगुलेंट कृंतकनाशक यकृत में विटामिन-K चक्र को रोकते हैं, इसलिए इनका विशिष्ट एंटीडोट Vitamin K1 है।
6. जब चूहा ‘जिंक फॉस्फाइड’ (Zn3P2) खाता है, तो उसके आमाशय के हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) से क्रिया करके कौन-सी घातक गैस बनती है जिससे चूहे की मृत्यु होती है?
(A) फॉस्फीन गैस (Phosphine gas — PH3)
(B) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)
(C) अमोनिया (NH3)
(D) ऑक्सीजन (O2)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) फॉस्फीन गैस (Phosphine gas — PH3)
व्याख्या: Zn3P2 + 6HCl → 3ZnCl2 + 2PH3 (फॉस्फीन गैस)।
7. कृंतक गण (Order Rodentia) के सदस्यों के दंत-विन्यास में कौन-से दाँत पूर्णतः अनुपस्थित होते हैं जिसके कारण कृंतक (Incisors) और चवर्णक (Molars) दाँतों के बीच खाली स्थान ‘डायस्टेमा’ (Diastema) पाया जाता है?
(A) रदनक दाँत (Canine teeth)
(B) कृंतक दाँत (Incisors)
(C) चवर्णक दाँत (Molars)
(D) सभी दाँत
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) रदनक दाँत (Canine teeth)
व्याख्या: चूहों में Canines नहीं होते और सामने के 1 जोड़ी छेनी जैसे Incisors जीवन भर बढ़ते रहते हैं।
8. नमी-युक्त गोदामों (>13% नमी) में भंडारित अनाज के भ्रूण को खाने और आटे में ‘पुदीने जैसी गंध’ (Minty odor) पैदा करने वाली गैर-कीट ‘अनाज बरूथी’ (Grain/Flour Mite) का वैज्ञानिक नाम क्या है?
(A) एकारस सिरो (Acarus siro — कुल Acaridae, गण Acarina, वर्ग Arachnida)
(B) टेट्रानिकस अर्टिकी
(C) एसेरिया केजानी
(D) साइटोफिलस ओराइजी
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) एकारस सिरो (Acarus siro — कुल Acaridae, गण Acarina, वर्ग Arachnida)
व्याख्या: Acarus siro भंडारित अनाज और आटे की सबसे प्रमुख बरूथी (Mite) है।
9. भारत में ‘अखिल भारतीय समन्वित कृंतक नियंत्रण अनुसंधान परियोजना’ (AINP on Rodent Control / Vertebrate Pest Management) का मुख्यालय कहाँ स्थित है?
(A) ICAR-CAZRI, जोधपुर (राजस्थान)
(B) ICAR-IIPR, कानपुर
(C) ICAR-NRRI, कटक
(D) ICAR-IISR, कोझिकोड
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) ICAR-CAZRI, जोधपुर (राजस्थान)
व्याख्या: केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI), जोधपुर में राष्ट्रीय कृंतक नियंत्रण अनुसंधान परियोजना का मुख्यालय है।
10. गोदाम को चूहा-रोधी (Rodent-proof) बनाने के लिए गोदाम के प्लिंथ की जमीन से न्यूनतम ऊँचाई और उस पर बाहर की ओर निकले हुए रैट-गार्ड कॉलर (Rat guard collar) की चौड़ाई कितनी रखी जाती है?
(A) प्लिंथ ऊँचाई 90 cm (3 फीट) एवं बाहर निकला रैट-गार्ड कॉलर 20–30 cm
(B) प्लिंथ ऊँचाई 10 cm
(C) प्लिंथ जमीन के बराबर
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) प्लिंथ ऊँचाई 90 cm (3 फीट) एवं बाहर निकला रैट-गार्ड कॉलर 20–30 cm
व्याख्या: 90 cm ऊँचे प्लिंथ और 25–30 cm बाहर निकले L-आकार के कॉलर के कारण चूहे गोदाम की दीवार पर चढ़ नहीं पाते।

16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)

  1. भारत के खेतों और गोदामों का नंबर-1 सबसे विनाशकारी चूहा ‘लेसर बैंडीकूट चूहा’ (Bandicota bengalensis — कुल Muridae) है।
  2. गोदामों और घरों के छत के चूहे का वैज्ञानिक नाम ‘Rattus rattus’ है जिसकी पूँछ शरीर की लंबाई से अधिक लंबी होती है।
  3. जिंक फॉस्फाइड (Zn3P2) का विषैला चारा ‘2%’ सांद्रता (96 अनाज : 2 तेल : 2 विष) पर बनाया जाता है और इसके लिए 2 दिन की प्री-बेटिंग अनिवार्य है।
  4. ब्रोमाडिओलोन (Bromadiolone) 0.005% एकल-खुराक थक्का-रोधी कृंतकनाशक है जिसका विशिष्ट एंटीडोट ‘विटामिन K1’ है।
  5. भंडारित अनाज और आटे की प्रमुख बरूथी (Mite) ‘Acarus siro’ (Acarina) है जो >13% नमी पर आटे में पुदीने जैसी गंध पैदा करती है।

(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)

1. भारत के दो प्रमुख गोदाम व खेत चूहों के वैज्ञानिक नाम और कुल लिखिए।
उत्तर: (1) छोटा घूस / बैंडीकूट चूहा: Bandicota bengalensis और (2) घरेलू छत का चूहा: Rattus rattus (कुल: Muridae, गण: Rodentia)।
2. जिंक फॉस्फाइड और ब्रोमाडिओलोन की चारे में मानक सांद्रता कितनी होती है?
उत्तर: जिंक फॉस्फाइड (तीव्र विष): 2.0%; ब्रोमाडिओलोन (थक्का-रोधी): 0.005%।
3. ‘चारा भीति’ (Bait shyness) किस कृंतकनाशक के प्रयोग से उत्पन्न होती है और इसे कैसे रोकते हैं?
उत्तर: तीव्र विष ‘जिंक फॉस्फाइड’ के प्रयोग से; इसे रोकने के लिए विष रखने से पहले 2–3 दिन तक बिना जहर का सादा दाना (‘प्री-बेटिंग’) खिलाया जाता है।
4. ब्रोमाडिओलोन विषाक्तता का विशिष्ट प्रतिविष (Antidote) क्या है?
उत्तर: विटामिन K1 (Phytomenadione) इंजेक्शन।
5. भंडारित अनाज और आटे की प्रमुख बरूथी (Mite) का वैज्ञानिक नाम और गण लिखिए।
उत्तर: Acarus siro (कुल: Acaridae, गण: Acarina, वर्ग: Arachnida)।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)

1. भारत के चार प्रमुख कृंतकों (Bandicota bengalensis, Rattus rattus, Mus musculus एवं Tatera indica) की पहचान और आवास की तुलना कीजिए।
उत्तर: (1) Bandicota bengalensis (छोटा घूस): खेत और गोदाम दोनों का सबसे विनाशकारी चूहा; पूँछ शरीर से छोटी, मोटे बाल, बिल के बाहर मिट्टी के ढेर और बिल में 2–5 kg अनाज की जमाखोरी। (2) Rattus rattus (छत का चूहा): गोदामों और घरों का सबसे प्रमुख चूहा; पतला शरीर और पूँछ हमेशा शरीर से अधिक लंबी। (3) Mus musculus (घरेलू चुहिया): सबसे छोटा (15–25 g) गोदाम कृंतक। (4) Tatera indica (भारतीय मरुस्थलीय जरबिल): रेतीले और शुष्क खेतों (राजस्थान) का प्रमुख कृंतक जिसके पिछले पैर लंबे और पूँछ के सिरे पर बालों का गुच्छा होता है।
2. ‘जिंक फॉस्फाइड’ (2%) और ‘ब्रोमाडिओलोन’ (0.005%) की क्रियाविधि, सांद्रता, बेट शाइनेस और एंटीडोट में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: (1) जिंक फॉस्फाइड (Zn3P2 @ 2%): यह तीव्र अकार्बनिक विष है जो आमाशय के HCl से क्रिया कर फॉस्फीन गैस बनाता है और 2–12 घंटे में चूहे को मार देता है। यह तीव्र ‘बेट शाइनेस’ पैदा करता है, इसलिए 2 दिन प्री-बेटिंग अनिवार्य है; इसका कोई विशिष्ट एंटीडोट नहीं है। (2) ब्रोमाडिओलोन (@ 0.005%): यह द्वितीय पीढ़ी का एकल-खुराक थक्का-रोधी (Anticoagulant) है जो यकृत में विटामिन-K और प्रोथ्रॉम्बिन का संश्लेषण रोककर 4–7 दिन में आंतरिक रक्तस्राव से मृत्यु करता है। इसमें कोई बेट शाइनेस नहीं होती (प्री-बेटिंग अनावश्यक) और इसका विशिष्ट एंटीडोट ‘विटामिन K1’ है।
3. ‘चारा भीति’ (Bait Shyness) क्या है? खेत में जिंक फॉस्फाइड से चूहा नियंत्रण करने की 5-दिवसीय मानक कार्यप्रणाली (SOP) लिखिए।
उत्तर: जब कोई चूहा तीव्र विष (जिंक फॉस्फाइड) की उप-घातक मात्रा खाकर बीमार पड़ता है और बच जाता है, तो वह अगले 3–6 माह तक उस चारे को नहीं खाता—इसे ‘चारा भीति’ (Bait shyness) कहते हैं। 5-दिवसीय SOP: दिन 1 को सभी बिल मिट्टी से बंद करें; दिन 2 व 3 को खुले मिले सक्रिय बिलों में बिना जहर का सादा दाना (98% अनाज + 2% तेल @ 10 g/बिल) डालकर प्री-बेटिंग करें; दिन 4 को 2% जिंक फॉस्फाइड चारा (96 भाग अनाज + 2 भाग तेल + 2 भाग Zn3P2 @ 10 g/बिल) रखें; और दिन 5 को मृत चूहों व बचे चारे को गहरा गाड़ दें।
4. अनाज गोदाम को ‘चूहा-रोधी’ (Rodent-proof) बनाने के लिए कौन-कौन से अभियांत्रिकी उपाय किए जाते हैं?
उत्तर: (1) गोदाम का फर्श पक्का कंक्रीट का और जमीन से कम से कम 90 cm (3 फीट) ऊँचे प्लिंथ पर होना चाहिए। (2) प्लिंथ के ऊपरी किनारे पर चारों ओर 20–30 cm बाहर निकला हुआ चिकना धातु या कंक्रीट का ‘रैट-गार्ड कॉलर’ (L-shaped baffle) लगा हो। (3) गोदाम में प्रवेश की सीढ़ियाँ स्थायी न होकर हटाने योग्य हों। (4) दरवाजों के निचले 30 cm हिस्से पर 24-गेज लोहे की चद्दर (GI sheet) जड़ी हो और रोशनदानों व नालियों पर 6 mm से कम छिद्र वाली लोहे की जाली लगी हो।
5. भंडारित अनाज की बरूथी (Acarus siro) की पहचान, क्षति के लक्षण और नियंत्रण के उपाय लिखिए।
उत्तर: अनाज और आटे की बरूथी (Acarus siro — कुल Acaridae, गण Acarina, वर्ग Arachnida) 0.5 mm लंबी, मोती जैसी सफेद और 8 टाँगों वाली माइट है। यह तभी पनपती है जब अनाज या आटे में नमी 13–14% से अधिक हो। यह गेहूँ के दाने का भ्रूण खाकर अंकुरण नष्ट करती है, आटे में ‘पुदीने जैसी दुर्गंध’ (Minty taint) पैदा करती है और कामगारों में ‘ग्रॉसर्स इच’ त्वचा एलर्जी करती है। नियंत्रण: अनाज को धूप में सुखाकर नमी 10% से कम रखना और एल्युमिनियम फॉस्फाइड (3 टिकिया/टन) से धूम्रन करना।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)

1. भारत के खेतों और अनाज गोदामों में पाए जाने वाले प्रमुख कृंतकों (Rodents) की प्रजातियों का वर्णन करते हुए उनके समन्वित प्रबंधन (चूहा-रोधी गोदाम निर्माण, यांत्रिक पिंजरे, 2% जिंक फॉस्फाइड प्री-बेटिंग प्रोटोकॉल, 0.005% ब्रोमाडिओलोन और एल्युमिनियम फॉस्फाइड बिल-धूम्रन) का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: तुलनात्मक सारणी 30.1 व 30.2 तथा 5-दिवसीय प्रवाह चित्र सहित संपूर्ण एकीकृत कृंतक प्रबंधन (IRM) पैकेज का विस्तार से वर्णन करें।
2. कृंतकनाशकों (Rodenticides) को तीव्र विष (Acute) और दीर्घकालिक थक्का-रोधी (Chronic Anticoagulants) में वर्गीकृत कीजिए तथा बताइए कि बड़े पैमाने पर चूहा नियंत्रण अभियान में पहले जिंक फॉस्फाइड और उसके 10 दिन बाद ब्रोमाडिओलोन का अनुक्रमिक प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर रूपरेखा: दोनों वर्गों की रासायनिक क्रियाविधि, जिंक फॉस्फाइड द्वारा 75–80% तात्कालिक नॉकडाउन और शेष 20% बेट-शाई चूहों को ब्रोमाडिओलोन से समाप्त करने के वैज्ञानिक सिद्धांत की व्याख्या करें।
3. भंडारित अनाज को नुकसान पहुँचाने वाले गैर-कीट नाशीजीवों—(i) चूहे (Rodents), (ii) अनाज बरूथी (Acarus siro), और (iii) भंडारण पक्षी (कबूतर व गौरैया)—द्वारा होने वाली प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष हानियों और उनके निवारक व उपचारात्मक प्रबंधन का वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: तीनों गैर-कीट वर्गों की क्षति (अनाज भक्षण, मल-मूत्र/बाल प्रदूषण, जूनोटिक रोग, पुदीना गंध) और उनके विशिष्ट नियंत्रण उपायों की विवेचना करें।

Similar Posts