ENT 311 Lecture 14: कपास के रसचूसक नाशीकीट: हरा तेला (Jassids) एवं सफेद मक्खी (Whiteflies)

Agro Path Finder official logo
AGRO PATH FINDER
ENT 311 · Pest Management in Crops and Stored Grains — Final Notes
विषय सूची · Quick Navigation02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
यह पाठ्यक्रम की अध्ययन सामग्री है। कीटनाशक, मात्रा और उपचार के उदाहरणों को वर्तमान खेत-स्तरीय सलाह न मानें; वास्तविक उपयोग में वर्तमान पंजीकृत label, फसल–कीट अनुमोदन तथा स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करें।
Lecture 14 Theory • Lecture 14 (ENT-311 / ENTO-311) 🖼️ सचित्र विजुअल आरेख सहित (With Visual Identification Diagrams)

Lecture 14: कपास के रसचूसक नाशीकीट: हरा तेला (Jassids) एवं सफेद मक्खी (Whiteflies)

Sucking Insect Pests of Cotton: Jassids and Whiteflies

02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:

  • Bt कपास के युग में रसचूसक नाशीकीटों (Sucking Pests — जिन पर Bt टॉक्सिन Cry1Ac/Cry2Ab का कोई असर नहीं होता!) के मुख्य शत्रु के रूप में उभरने के कारणों को समझना।
  • कपास के हरे तेले / जैसिड (Cotton Leafhopper / Jassid — Amrasca biguttula biguttula; कुल Cicadellidae, गण Hemiptera) के तिरछा चलने (Diagonal movement) के व्यवहार, पत्तियों के किनारों से पीले-ईंट जैसे लाल होकर ‘नीचे की ओर प्याले जैसा मुड़ने’ (Downward cupping & Hopper burn) और रोमयुक्त प्रतिरोधी किस्मों का अध्ययन करना।
  • कपास की सफेद मक्खी (Cotton Whitefly — Bemisia tabaci; कुल Aleyrodidae, गण Hemiptera) की जीवन अवस्थाओं, मधुस्राव से रुई काली होने, ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (Cotton Leaf Curl Virus – CLCuV) फैलाने और सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड से इसके पुनरुत्थान (Resurgence) को समझना।
  • कपास के अन्य रसचूसक कीटों (थ्रिप्स, माहू, मिलीबग, लाल कपास बग व डस्की कॉटन बग) के मुख्य लक्षणों तथा जैसिड व सफेद मक्खी के ETL और आधुनिक चयनात्मक कीटनाशकों (Flonicamid, Diafenthiuron, Spiromesifen, Pyriproxyfen, Dinotefuran) को कंठस्थ करना।

03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): वर्ष 2002 में भारत में Bt कपास (Bacillus thuringiensis transgenic cotton — जिसमें लेपिडोप्टेरा बॉलवर्म्स के विरुद्ध Cry1Ac एवं Cry2Ab जीन डाले गए हैं) के आने के बाद गूलर छेदकों पर शुरुआती नियंत्रण मिला और कीटनाशक छिड़काव घटने से कपास में ‘रसचूसक कीट’ (Sucking Pests — विशेषकर हरा तेला Amrasca biguttula biguttula और सफेद मक्खी Bemisia tabaci, जिन पर Bt प्रोटीन बिल्कुल असर नहीं करता) सबसे बड़े मुख्य नाशीकीट बन गए हैं।

उत्तर भारत (पंजाब, हरियाणा और श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़, राजस्थान) में वर्ष 2015 में सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) और उसके द्वारा फैलाए गए ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (CLCuV) ने कपास की 60% से अधिक फसल तबाह कर दी थी। इसलिए कपास में रसचूसक कीटों की सटीक पहचान और पुनरुत्थान-मुक्त (Resurgence-free) प्रबंधन अनिवार्य है।

04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

जैसिड हॉपर बर्न एवं अधोमुखी कुंचन (Jassid Hopper Burn & Downward Cupping in Cotton)
कपास का हरा तेला (Amrasca biguttula biguttula) पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते समय विषाक्त लार (Phytotoxic saliva) छोड़ता है, जिससे पत्तियाँ पहले किनारों से पीली पड़ती हैं, फिर ‘ईंट जैसी लाल-भूरी (Brick-red)’ होकर ‘नीचे की ओर उल्टे प्याले की तरह मुड़ जाती हैं (Downward curling/cupping)’ और सूखकर झड़ जाती हैं।
कपास पर्ण कुंचन विषाणु (Cotton Leaf Curl Virus — CLCuV; Begomovirus)
कपास की सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) द्वारा प्रसारित होने वाला एक अत्यंत विनाशकारी जेमिनी-विषाणु रोग, जिसमें कपास की पत्तियाँ ऊपर या नीचे की ओर मुड़ जाती हैं, शिराएँ मोटी व गहरी हरी हो जाती हैं और पत्ती की निचली सतह पर शिराओं के ऊपर ‘छोटी पत्ती जैसी संरचनाएँ (Enations / Cup-shaped outgrowths)’ निकल आती हैं।
रोमयुक्त किस्मों का विरोधाभास (Hairiness Paradox between Jassid & Whitefly)
कपास की जिन किस्मों की पत्तियों पर घने रोम (Pubescent / Hairy varieties) होते हैं, वे ‘हरे तेले (Jassid)’ के प्रति प्रतिरोधी होती हैं (क्योंकि रोम तेले को रस चूसने व अंडे देने से रोकते हैं); किंतु वही रोमयुक्त किस्में ‘सफेद मक्खी (Whitefly)’ के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं (क्योंकि रोम सफेद मक्खी के शिशुओं को हवा व परजीवियों से सुरक्षा देते हैं)!
लिंट संदूषण / स्टिकी कॉटन (Sticky Cotton due to Whitefly Honeydew)
जब कपास के गूलर खिलने (Boll opening) की अवस्था में सफेद मक्खी और माहू पत्तियों पर मीठा चिपचिपा ‘मधुस्राव’ (Honeydew) छोड़ते हैं, तो वह खुली हुई सफेद रुई (Lint) पर गिरता है और उस पर काली फफूंद (Sooty mould) जमने से रुई काली, चिपचिपी और कताई के अयोग्य हो जाती है।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. कपास का हरा तेला / जैसिड (Cotton Jassid / Leafhopper — Amrasca biguttula biguttula)

  • वैज्ञानिक नाम, कुल एवं गण: Amrasca biguttula biguttula (पूर्व नाम: Empoasca devastans) | कुल: Cicadellidae | गण: Hemiptera। (अन्य मुख्य परपोषी: भिंडी, बैंगन, आलू, सूरजमुखी, अरंडी)।
  • पहचान एवं जीवविज्ञान (Biology — अपूर्ण कायांतरण):
    • वयस्क एवं शिशु: पीले-हरे रंग का पच्चर के आकार (Wedge-shaped, 3.5 mm) का कीट जिसके अग्र-पंखों के सिरे पर एक-एक काला बिंदु और सिर (Vertex) पर दो काले बिंदु होते हैं। छूने पर इसके शिशु और वयस्क तिरछे (Diagonally / Sideways) तेजी से चलते हैं!
    • अंडरोपण: मादा पत्ती की निचली सतह की मोटी शिराओं (Parenchymatous tissue of midrib/veins) के अंदर धँसाकर 15–30 पीले-सफेद अंडे देती है। 4–6 दिन में शिशु निकलते हैं और 5 निर्मोचन अवस्थाओं के बाद 10–15 दिन में वयस्क बन जाते हैं (वर्ष में 10–12 पीढ़ियाँ)।
  • क्षति के विशिष्ट लक्षण (ETL: 1–2 शिशु या वयस्क प्रति पत्ती):
    1. शिशु और वयस्क दोनों पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते हैं और विषाक्त लार डालते हैं।
    2. क्रमिक लक्षण विकास: पत्ती के किनारे पीले पड़ना → पत्तियों का नीचे की ओर उल्टे प्याले जैसा मुड़ना (Downward cupping/curling)→ किनारों का ईंट जैसा लाल या ताँबे जैसा भूरा (Brick-red / Bronzing) होना → पत्तियों का सूखकर झड़ना (‘हॉपर बर्न’)।
  • हरे तेले (Jassid) का समन्वित प्रबंधन (IPM):
    1. सस्य एवं HPR उपाय: पत्तियों पर रोम वाली प्रतिरोधी किस्में उगाना; बुवाई से पूर्व इमिडाक्लोप्रिड 48% FS या 70% WS (@ 5–7 g/kg बीज) या थायोमेथोक्साम 30% FS (@ 5–7 mL/kg बीज) से बीज उपचार करना (यह बुवाई के बाद 30–40 दिनों तक तेले से पूर्ण सुरक्षा देता है); तथा यूरिया का संतुलित प्रयोग।
    2. यांत्रिक एवं जैविक उपाय: खेत में पीले चिपचिपे पाश (Yellow sticky traps @ 20–25/ha) लगाना; परभक्षी क्राइसोपर्ला (Chrysoperla zastrowi sillemi @ 10,000 लार्वा/ha), लेडीबर्ड भृंग, मकड़ी और कवक Lecanicillium lecanii का प्रयोग।
    3. रासायनिक नियंत्रण (ETL >1–2 शिशु/पत्ती होने पर):
      • फ्लोनिकामिड 50% WG (Flonicamid — ‘Ulala’ @ 150 g/ha) या डाइनोटफ्यूरान 20% SG (Token/Osheen @ 150 g/ha) या इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL (@ 100–125 mL/ha) या थायोमेथोक्साम 25% WG (@ 100 g/ha) या डाइफेंथियूरॉन 50% WP (@ 600 g/ha)।

2. कपास की सफेद मक्खी (Cotton Whitefly — Bemisia tabaci)

  • वैज्ञानिक नाम, कुल एवं गण: Bemisia tabaci | कुल: Aleyrodidae | गण: Hemiptera।
  • पहचान एवं जीवविज्ञान:
    • वयस्क मक्खी: अत्यंत सूक्ष्म (1.0–1.5 mm) पीले शरीर वाली मक्खी जिसके पंख सफेद मोमी पाउडर (White waxy bloom) से ढके होते हैं।
    • अंडा एवं शिशु: मादा पत्ती की निचली सतह पर डंठल-युक्त (Stalked/Pedicellate) नाशपाती के आकार के पीले अंडे देती है। पहली अवस्था का शिशु (‘क्रॉलर / Crawler’) चलने वाला होता है, जिसके बाद की शिशु अवस्थाएँ और चौथी अवस्था (‘प्यूपेरियम / Puparium — Red-eyed nymph’) पत्ती के नीचे शल्क की तरह अचल चिपकी रहती हैं।
  • क्षति के तीन दोहरे-तिहरे प्रभाव (ETL: 6–8 वयस्क मक्खी प्रति पत्ती):
    1. प्रत्यक्ष रस चूसना: पत्तियों का पीला पड़ना, पौधों की वृद्धि रुकना और गूलरों का समय से पहले खुलना या झड़ना।
    2. मधुस्राव एवं काली रुई (Sooty Mould & Sticky Lint): चिपचिपे मधुस्राव पर काली फफूंद उगने से प्रकाश-संश्लेषण रुकता है और खिली हुई रुई काली व चिपचिपी हो जाती है।
    3. विषाणु रोग वाहक (CLCuV Vector — सबसे भयानक क्षति!): 1 भी संक्रमित सफेद मक्खी ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (Cotton Leaf Curl Virus — CLCuV) फैला सकती है जिससे शिराएँ फूल जाती हैं और पत्ती के नीचे छोटी पत्तियाँ (Enations) निकल आती हैं।
  • सफेद मक्खी का समन्वित प्रबंधन (IPM):
    1. सस्य एवं स्वच्छता उपाय: कपास की अगेती व समय पर बुवाई (मई के मध्य से पहले); खेत और मेड़ों से CLCuV और सफेद मक्खी के वैकल्पिक खरपतवार परपोषियों—कंघी बूटी (Abutilon indicum), पीली बूटी, कांग्रेस घास व जंगली भिंडी—को समूल नष्ट करना; कपास के पास भिंडी या मूंग न बोना; तथा अत्यधिक यूरिया न डालना।
    2. सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड्स का पूर्ण निषेध (Strictly Avoid Synthetic Pyrethroids!): कपास में साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन, फेनवेलरेट या एसीफेट के बार-बार प्रयोग से सफेद मक्खी में भयानक ‘पुनरुत्थान’ (Resurgence) होता है, अतः इनका प्रयोग न करें।
    3. यांत्रिक एवं जैविक उपाय: बुवाई के 30 दिन से ही पीले चिपचिपे पाश (Yellow sticky traps @ 25–40/ha) लगाना; शुरुआती अवस्था में 5% नीम निंबोली अर्क (NSKE 5%) या नीम तेल (@ 5 mL/L + सर्फ/साबुन) का स्प्रे; परजीवी ततैया Encarsia formosa व Eretmocerus तथा परभक्षी Chrysoperla का संरक्षण।
    4. रासायनिक नियंत्रण (ETL >6–8 वयस्क/पत्ती पर — आधुनिक IGR व कीटोएनोल रसायन):
      • स्पाइरोमेसिफेन 22.9% SC (Spiromesifen — ‘Oberon’ @ 600 mL/ha — लिपिड संश्लेषण अवरोधक) या
      • पायरीप्रॉक्सीफेन 10% EC (Pyriproxyfen — ‘Lano’ @ 1.0–1.25 L/ha — जुवेनाइल हार्मोन IGR जो अंडों व प्यूपेरिया को बांझ कर देता है) या
      • डाइफेंथियूरॉन 50% WP (Diafenthiuron — ‘Polo’ @ 600 g/ha) या
      • फ्लोनिकामिड 50% WG (Ulala @ 150 g/ha) या बुप्रोफेजिन 25% SC (@ 1.0 L/ha) या अफीडोपायरोपेन 50 g/L DC (Sefina @ 1.0 L/ha)।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

कपास के अन्य प्रमुख रसचूसक कीटों की त्वरित परीक्षा पहचान:

  • 1. कपास का थ्रिप्स (Cotton Thrips — Thrips tabaci; Thysanoptera): पत्तियों को खुरचकर रस चूसता है जिससे पत्तियों पर चाँदी जैसी चमक (Silvery sheen) आती है और पत्तियाँ ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं (Upward curling — जबकि जैसिड में नीचे मुड़ती हैं!)।
  • 2. कपास का माहू (Cotton Aphid — Aphis gossypii; Aphididae): पत्तियों का मुड़ना व चिपचिपा मधुस्राव।
  • 3. लाल कपास बग / रेड कॉटन बग (Dysdercus koenigii; Pyrrhocoridae): गूलर के बिनौले (बीज) से तेल चूसती है और नेमाटोस्पोरा कवक द्वारा रुई को पीला-भूरा दागदार (Cotton Stainer) बना देती है।
  • 4. डस्की कॉटन बग (Oxycarenus hyalinipennis; Lygaeidae): खिले गूलरों में रहकर जिनिंग (ओटाई) के समय कुचलने से रुई को बदरंग करती है।
  • 5. कपास का मिलीबग (Phenacoccus solenopsis; Pseudococcidae): मोमी सफेद परत वाला आक्रामक कीट; परजीवी: Aenasius bambawalei।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)

  • ‘जैसिड बनाम थ्रिप्स पत्ती-कुंचन दिशा’ का नियम (Leaf-Curling Direction Rule in Cotton): कपास में यदि पत्ती के किनारे लाल पड़कर नीचे की ओर (Downward cupping) मुड़ें तो वह हरा तेला (Jassid) है; और यदि पत्ती चाँदी जैसी चमकदार व खुरदरी होकर ऊपर की ओर (Upward boat-curling) मुड़े तो वह थ्रिप्स (Thrips) है!

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)

केस स्टडी: उत्तर भारत में कपास में ‘पायरीप्रॉक्सीफेन + डाइफेंथियूरॉन’ का प्रयोग क्यों सफल रहा?

सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) के नियंत्रण में साधारण कीटनाशक केवल उड़ती हुई वयस्क मक्खियों को मारते हैं, जबकि पत्ती के नीचे चिपके हजारों अंडे और प्यूपेरिया 4 दिन बाद फिर से वयस्क बन जाते हैं। जब किसान पायरीप्रॉक्सीफेन (JH mimic IGR — जो अंडों के स्फुटन और प्यूपेरिया के वयस्क बनने को रोकता है) और डाइफेंथियूरॉन / स्पाइरोमेसिफेन (जो वयस्क व शिशु दोनों को मारता है) का प्रयोग करता है, तो सफेद मक्खी का पूरा जीवन चक्र एक साथ टूट जाता है।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 14.1: कपास का हरा तेला (Jassid) बनाम कपास की सफेद मक्खी (Whitefly)
तुलना का आधार हरा तेला / जैसिड (Cotton Jassid) सफेद मक्खी (Cotton Whitefly)
1. वैज्ञानिक नाम एवं कुल Amrasca biguttula biguttula (Cicadellidae) Bemisia tabaci (Aleyrodidae)
2. विशिष्ट शारीरिक पहचान हरा पच्चर जैसा शरीर; तिरछा (Diagonally) चलता है सफेद मोमी पंख; डंठल-युक्त अंडे व अचल प्यूपेरियम
3. विशिष्ट क्षति लक्षण पत्तियों का किनारों से लाल होकर नीचे की ओर मुड़ना (Downward cupping / Hopper burn) मधुस्राव व काली फफूंद से रुई काली पड़ना + CLCuV विषाणु रोग का संचरण
4. पत्ती के रोमों (Hairiness) का प्रभाव रोमयुक्त किस्में प्रतिरोधी (Resistant) होती हैं रोमयुक्त किस्में अधिक संवेदनशील (Susceptible) होती हैं
5. आर्थिक दहलीज स्तर (ETL) 1–2 शिशु या वयस्क प्रति पत्ती 6–8 वयस्क मक्खी प्रति पत्ती
6. प्रमुख आधुनिक कीटनाशक इमिडाक्लोप्रिड बीज उपचार, फ्लोनिकामिड (Ulala), डाइनोटफ्यूरान स्पाइरोमेसिफेन (Oberon), पायरीप्रॉक्सीफेन (Lano), डाइफेंथियूरॉन (Polo)

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)

कपास के रसचूसक कीटों के मानक ETL एवं बीज उपचार सूत्र
  • 1. कपास के रसचूसक कीटों के आर्थिक दहलीज स्तर (Standard ETLs in Cotton):
    • हरा तेला (Jassid):1–2 nymphs/adults per leaf (या द्वितीय ग्रेड हॉपर बर्न लक्षण)
    • सफेद मक्खी (Whitefly):6–8 adults per leaf
    • थ्रिप्स (Thrips):10 thrips per leaf
  • 2. रसचूसक कीटों हेतु कपास बीज उपचार (Seed Treatment):
    Imidacloprid 70\% WS or 48\% FS=5–7 g or mL/kg acid-delinted seed (30–40 दिन सुरक्षा)

11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 14: कपास के रसचूसक नाशीकीट (हरा तेला एवं सफेद मक्खी)
हरा तेला / जैसिड (Amrasca biguttula)
  • कुल: Cicadellidae, गण: Hemiptera | तिरछा (Sideways) चलता है
  • लक्षण: पत्ती किनारे से ईंट जैसी लाल होकर नीचे मुड़ती है (Downward cupping)
  • ETL: 1–2 शिशु/पत्ती | रोमयुक्त (Hairy) कपास किस्में प्रतिरोधी
  • प्रबंधन: इमिडाक्लोप्रिड बीज उपचार, पीला पाश, फ्लोनिकामिड (Ulala), डाइनोटफ्यूरान
सफेद मक्खी (Bemisia tabaci)
  • कुल: Aleyrodidae, गण: Hemiptera | ETL: 6–8 वयस्क/पत्ती
  • क्षति 1: रस चूसना + मधुस्राव पर काली फफूंद से रुई खराब होना
  • क्षति 2: ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (CLCuV — शिरा फूलना व Enations) वाहक
  • पायरेथ्रॉइड स्प्रे व रोमयुक्त किस्मों से प्रकोप बढ़ता है (Resurgence)
सफेद मक्खी का IPM पैकेज
  • 1. मेड़ों से कंघी बूटी (Abutilon) हटाना + समय पर बुवाई
  • 2. पीले चिपचिपे पाश (25-40/ha) + NSKE 5% / नीम तेल स्प्रे
  • 3. परजीवी: Encarsia formosa व Eretmocerus
  • 4. रसायन: स्पाइरोमेसिफेन, पायरीप्रॉक्सीफेन (IGR), डाइफेंथियूरॉन (Polo)
अन्य कपास रसचूसक कीट
  • थ्रिप्स (Thrips tabaci): चाँदी जैसी चमक व पत्ती ऊपर मुड़ना
  • माहू (Aphis gossypii): मधुस्राव व स्टिकी कॉटन
  • रेड कॉटन बग (Dysdercus koenigii): रुई को रंगने वाला (Cotton stainer)
  • कॉटन मिलीबग (Phenacoccus solenopsis): परजीवी Aenasius bambawalei

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)

Bt कपास में रसचूसक नाशीकीटों (जैसिड एवं सफेद मक्खी) का पुनरुत्थान-मुक्त प्रबंधन (Resurgence-Free Cotton Sucking Pest IPM)
Step 1
चरण 1 (बुवाई से पूर्व): मेड़ों से कंघी बूटी (CLCuV परपोषी) नष्ट करना + इमिडाक्लोप्रिड 70 WS (5–7 g/kg) से उपचारित बीज की समय पर बुवाई (पहले 35 दिन सुरक्षा)
⬇
Step 2
चरण 2 (30–50 DAS — निगरानी व गैर-रासायनिक): खेत में 25–40 पीले चिपचिपे पाश/ha लगाना + NSKE 5% या नीम तेल का छिड़काव (सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड कदापि न छिड़कें)
⬇
Step 3
चरण 3 (50–75 DAS — ETL आधारित प्रथम रासायनिक प्रहार): यदि जैसिड >1–2/पत्ती हो तो फ्लोनिकामिड 50 WG (150 g/ha) या डाइनोटफ्यूरान; यदि सफेद मक्खी >6–8/पत्ती हो तो पायरीप्रॉक्सीफेन 10 EC (1 L/ha) का स्प्रे
⬇
Step 4
चरण 4 (75–100 DAS — द्वितीय रोटेशन): सफेद मक्खी व माइट दोनों के नियंत्रण हेतु स्पाइरोमेसिफेन 22.9 SC (600 mL/ha) या डाइफेंथियूरॉन 50 WP (600 g/ha) का स्प्रे

13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • कपास के हरे तेले (Amrasca biguttula biguttula; कुल Cicadellidae) के आक्रमण से पत्तियाँ किनारों से ईंट जैसी लाल होकर ‘नीचे की ओर’ (Downward cupping — Hopper burn) मुड़ जाती हैं, जबकि थ्रिप्स से ‘ऊपर की ओर’ मुड़ती हैं।
  • कपास की सफेद मक्खी (Bemisia tabaci; कुल Aleyrodidae) खतरनाक ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (Cotton Leaf Curl Virus — CLCuV) की वाहक है।
  • कपास में सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड्स (साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन) के अंधाधुंध प्रयोग से सफेद मक्खी में तीव्र ‘कीट पुनरुत्थान’ (Resurgence) होता है।
  • कपास की रोमयुक्त (Hairy) किस्में जैसिड के प्रति प्रतिरोधी होती हैं, किंतु सफेद मक्खी के प्रति संवेदनशील होती हैं।
  • लाल कपास बग (Dysdercus koenigii; कुल Pyrrhocoridae) को ‘कॉटन स्टेनर’ (Cotton stainer) कहा जाता है क्योंकि यह नेमाटोस्पोरा कवक से रुई को बदरंग कर देती है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)

त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):

  • हरा तेला (Amrasca biguttula biguttula): Cicadellidae; तिरछा चलना; पत्ती नीचे मुड़ना व हॉपर बर्न; ETL: 1–2/पत्ती; नियंत्रण: इमिडाक्लोप्रिड बीज उपचार, फ्लोनिकामिड (Ulala), डाइनोटफ्यूरान।
  • सफेद मक्खी (Bemisia tabaci): Aleyrodidae; CLCuV वाहक; स्टिकी कॉटन; ETL: 6–8/पत्ती; नियंत्रण: पीला चिपचिपा पाश, स्पाइरोमेसिफेन (Oberon), पायरीप्रॉक्सीफेन (Lano), डाइफेंथियूरॉन (Polo)।
  • अन्य: थ्रिप्स (Thrips tabaci), रेड कॉटन बग (Dysdercus koenigii), डस्की कॉटन बग (Oxycarenus hyalinipennis), मिलीबग (Phenacoccus solenopsis — परजीवी Aenasius bambawalei)।

15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)

1. कपास में पत्तियों का किनारों से पीला और ईंट जैसा लाल पड़कर ‘नीचे की ओर उल्टे प्याले की तरह मुड़ जाना’ (Downward cupping & Hopper burn) किस रसचूसक कीट का विशिष्ट लक्षण है?
(A) कपास का हरा तेला / जैसिड (Amrasca biguttula biguttula)
(B) गुलाबी गूलर छेदक
(C) दीमक
(D) चने की इल्ली
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) कपास का हरा तेला / जैसिड (Amrasca biguttula biguttula)
व्याख्या: जैसिड पत्तियों के नीचे से रस चूसते समय विषाक्त लार छोड़ता है जिससे पत्तियाँ नीचे की ओर मुड़कर लाल (Hopper burn) हो जाती हैं।
2. उत्तर भारत में कपास के विनाशकारी विषाणु रोग ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (Cotton Leaf Curl Virus — CLCuV) का प्रसार किस कीट द्वारा किया जाता है?
(A) कपास की सफेद मक्खी (Cotton Whitefly — Bemisia tabaci)
(B) हरा तेला (Amrasca)
(C) लाल कपास बग (Dysdercus)
(D) थ्रिप्स (Thrips tabaci)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) कपास की सफेद मक्खी (Cotton Whitefly — Bemisia tabaci)
व्याख्या: Bemisia tabaci (Aleyrodidae) जेमिनी-ग्रुप के CLCuV विषाणु की एकमात्र वाहक है।
3. कपास की रोमयुक्त पत्तियों वाली किस्मों (Hairy/Pubescent varieties) का ‘हरे तेले’ और ‘सफेद मक्खी’ पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(A) रोमयुक्त किस्में हरे तेले (Jassid) के प्रति प्रतिरोधी होती हैं, किंतु सफेद मक्खी (Whitefly) को अधिक आकर्षित करती हैं
(B) दोनों के प्रति संवेदनशील होती हैं
(C) दोनों को मार देती हैं
(D) कोई प्रभाव नहीं पड़ता
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) रोमयुक्त किस्में हरे तेले (Jassid) के प्रति प्रतिरोधी होती हैं, किंतु सफेद मक्खी (Whitefly) को अधिक आकर्षित करती हैं
व्याख्या: पत्ती के रोम जैसिड को अंडे देने से रोकते हैं, किंतु सफेद मक्खी को आश्रय और अनुकूल सूक्ष्म-जलवायु प्रदान करते हैं।
4. कपास की फसल में किन कीटनाशकों के बार-बार छिड़काव से सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) का भयानक ‘पुनरुत्थान’ (Resurgence) हो जाता है?
(A) सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड्स (जैसे साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन, फेनवेलरेट)
(B) नीम का तेल (NSKE 5%)
(C) पायरीप्रॉक्सीफेन
(D) पानी का स्प्रे
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड्स (जैसे साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन, फेनवेलरेट)
व्याख्या: सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड्स प्राकृतिक शत्रुओं को मार देते हैं और सफेद मक्खी की प्रजनन दर को उत्तेजित कर Resurgence पैदा करते हैं।
5. कपास के किस रसचूसक कीट को ‘कॉटन स्टेनर’ (Cotton Stainer) कहा जाता है क्योंकि यह नेमाटोस्पोरा कवक के माध्यम से सफेद रुई को पीला-भूरा दागदार बना देता है?
(A) लाल कपास बग (Red Cotton Bug — Dysdercus koenigii)
(B) हरा तेला
(C) सफेद मक्खी
(D) माहू
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) लाल कपास बग (Red Cotton Bug — Dysdercus koenigii)
व्याख्या: Dysdercus koenigii (कुल Pyrrhocoridae) बिनौले का रस चूसती है और रुई पर अमिट पीला दाग छोड़ती है।
6. सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) के अंडों के स्फुटन और प्यूपेरिया को वयस्क बनने से रोकने के लिए प्रयुक्त होने वाला ‘जुवेनाइल हार्मोन एनालॉग’ (IGR) कौन-सा है?
(A) पायरीप्रॉक्सीफेन 10% EC (Pyriproxyfen — Lano @ 1.0 L/ha)
(B) डीडीटी
(C) फोरेट
(D) मैलाथियान
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) पायरीप्रॉक्सीफेन 10% EC (Pyriproxyfen — Lano @ 1.0 L/ha)
व्याख्या: पायरीप्रॉक्सीफेन एक जुवेनॉइड (IGR) है जो सफेद मक्खी के जीवन चक्र को अंड व निम्फ अवस्था पर ही रोक देता है।
7. कपास में हरे तेले (Jassid) और सफेद मक्खी (Whitefly) दोनों के नियंत्रण के लिए प्रयुक्त चयनात्मक कोर्डोटोनल अंग मॉड्यूलेटर कीटनाशक कौन-सा है?
(A) फ्लोनिकामिड 50% WG (Flonicamid — Ulala @ 150 g/ha) एवं डाइफेंथियूरॉन (Polo)
(B) केवल यूरिया
(C) 2,4-D
(D) सल्फोसलफ्यूरॉन
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) फ्लोनिकामिड 50% WG (Flonicamid — Ulala @ 150 g/ha) एवं डाइफेंथियूरॉन (Polo)
व्याख्या: फ्लोनिकामिड रसचूसक कीटों की सुई (Stylet) को लकवाग्रस्त कर देता है और मित्र कीटों के लिए सुरक्षित है।
8. कपास में हरे तेले (Jassid) और सफेद मक्खी (Whitefly) का मानक आर्थिक दहलीज स्तर (ETL) क्रमशः क्या है?
(A) हरा तेला: 1–2 शिशु/पत्ती तथा सफेद मक्खी: 6–8 वयस्क/पत्ती
(B) दोनों का 500 कीट/पत्ती
(C) हरा तेला: 100/पत्ती तथा सफेद मक्खी: 1/पत्ती
(D) कोई ETL नहीं होता
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) हरा तेला: 1–2 शिशु/पत्ती तथा सफेद मक्खी: 6–8 वयस्क/पत्ती
व्याख्या: कपास में जैसिड का ETL 1–2 शिशु/पत्ती और सफेद मक्खी का ETL 6–8 वयस्क/पत्ती है।
9. कपास के मिलीबग (Phenacoccus solenopsis) का प्राकृतिक रूप से 90% तक सफाया करने वाला प्रसिद्ध अंतःपरजीवी ततैया (Parasitoid) कौन-सा है?
(A) एनासियस बाम्बावालेई (Aenasius bambawalei / Aenasius arizonensis)
(B) ट्राइकोग्रामा जापोनिकम
(C) एपिरिकैनिया
(D) ओफियोमिया
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) एनासियस बाम्बावालेई (Aenasius bambawalei / Aenasius arizonensis)
व्याख्या: Aenasius bambawalei (कुल Encyrtidae) ने भारत में कपास मिलीबग को बिना रसायन के नियंत्रित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
10. कपास की फसल को बुवाई के बाद शुरुआती 30 से 40 दिनों तक हरे तेले, माहू और थ्रिप्स से सुरक्षित रखने के लिए किस रसायन से बीज उपचार किया जाता है?
(A) इमिडाक्लोप्रिड 70% WS या 48% FS (@ 5–7 g या mL/kg बीज) या थायोमेथोक्साम 30% FS
(B) केवल नमक
(C) कॉपर ऑक्सीक्लोराइड
(D) बोरिक एसिड
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) इमिडाक्लोप्रिड 70% WS या 48% FS (@ 5–7 g या mL/kg बीज) या थायोमेथोक्साम 30% FS
व्याख्या: नियोनिकोटिनॉइड बीज उपचार से अंकुरित पौध के रस में दवा पहुँच जाती है और शुरुआती 30–40 दिन रसचूसक कीट नहीं लगते।

16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)

  1. कपास में पत्तियों का लाल होकर नीचे मुड़ना (Downward cupping / Hopper burn) ‘हरे तेले’ (Amrasca biguttula biguttula) से होता है।
  2. कपास की सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) घातक ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (CLCuV) की वाहक है।
  3. कपास में सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड छिड़कने पर सफेद मक्खी का भयानक ‘पुनरुत्थान’ (Resurgence) होता है।
  4. लाल कपास बग (Dysdercus koenigii; कुल Pyrrhocoridae) को रुई पर पीला दाग लगाने के कारण ‘कॉटन स्टेनर’ कहते हैं।
  5. कपास मिलीबग (Phenacoccus solenopsis) का प्रमुख प्राकृतिक अंतःपरजीवी ‘Aenasius bambawalei’ है।

(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)

1. कपास के हरे तेले (Jassid) और सफेद मक्खी (Whitefly) का वैज्ञानिक नाम, कुल व गण लिखिए।
उत्तर: हरा तेला: Amrasca biguttula biguttula (कुल: Cicadellidae, गण: Hemiptera); सफेद मक्खी: Bemisia tabaci (कुल: Aleyrodidae, गण: Hemiptera)।
2. कपास में ‘CLCuV’ का पूर्ण रूप क्या है और इसका वाहक कौन है?
उत्तर: CLCuV = Cotton Leaf Curl Virus (कपास पर्ण कुंचन विषाणु); इसका वाहक सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) है।
3. कपास के थ्रिप्स और लाल कपास बग (Red cotton bug) का वैज्ञानिक नाम लिखिए।
उत्तर: थ्रिप्स: Thrips tabaci (Thripidae, Thysanoptera); लाल कपास बग: Dysdercus koenigii (Pyrrhocoridae, Hemiptera)।
4. कपास में जैसिड और थ्रिप्स द्वारा पत्ती के मुड़ने (Leaf curling) की दिशा में क्या अंतर है?
उत्तर: जैसिड (हरा तेला) से पत्तियाँ लाल होकर ‘नीचे की ओर’ (Downward cupping) मुड़ती हैं, जबकि थ्रिप्स से चाँदी जैसी चमकदार होकर ‘ऊपर की ओर’ (Upward curling) मुड़ती हैं।
5. सफेद मक्खी के दो प्रमुख परजीवी मित्र कीटों (Parasitoids) के नाम लिखिए।
उत्तर: (1) Encarsia formosa (या E. lutea) और (2) Eretmocerus mundus।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)

1. Bt कपास में रसचूसक कीट (Sucking pests) मुख्य शत्रु क्यों बन गए हैं? हरे तेले (Amrasca biguttula biguttula) के लक्षण और प्रबंधन लिखिए।
उत्तर: Bt कपास में डाले गए Cry1Ac और Cry2Ab जीन केवल लेपिडोप्टेरा गण के गूलर छेदकों (Bollworms) को मारते हैं; रसचूसक कीटों (Hemiptera) पर इनका कोई असर नहीं होता और बॉलवर्म स्प्रे घटने से रसचूसक कीट मुख्य शत्रु बन गए हैं। हरे तेले के लक्षण: शिशु व वयस्क तिरछे चलते हैं और पत्ती के नीचे से रस चूसते हैं जिससे पत्तियाँ किनारों से पीली और ईंट जैसी लाल होकर नीचे की ओर मुड़ जाती हैं (‘हॉपर बर्न’)। प्रबंधन: रोमयुक्त किस्में, इमिडाक्लोप्रिड (5–7 g/kg) बीज उपचार, पीला चिपचिपा पाश और ETL (>1–2/पत्ती) पर फ्लोनिकामिड 50 WG (@ 150 g/ha) या डाइनोटफ्यूरान का स्प्रे।
2. कपास की सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) किस प्रकार तिहरा नुकसान पहुँचाती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: सफेद मक्खी कपास को तीन प्रकार से भारी नुकसान पहुँचाती है: (1) प्रत्यक्ष रस शोषण: शिशु और वयस्क पत्तियों के नीचे से रस चूसकर पौधे को कमजोर कर देते हैं जिससे कलियाँ व गूलर झड़ जाते हैं; (2) अप्रत्यक्ष मधुस्राव क्षति: इसके द्वारा छोड़े गए चिपचिपे मधुस्राव पर काली फफूंद (Sooty mould) जमने से प्रकाश-संश्लेषण रुकता है और खिली हुई सफेद रुई (Lint) काली व चिपचिपी होकर बाजार मूल्य खो देती है; और (3) विषाणु संचरण: यह घातक ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (CLCuV) फैलाती है जिससे पत्तियाँ मुड़कर पौधा बौना व बांझ रह जाता है।
3. कपास में सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) के समन्वित प्रबंधन (IPM) का पैकेज लिखिए।
उत्तर: (1) सस्य व स्वच्छता उपाय: मई के मध्य तक समय पर बुवाई करना; खेत व मेड़ों से कंघी बूटी (Abutilon) व कांग्रेस घास जैसे वैकल्पिक खरपतवार हटाना; और अत्यधिक यूरिया न डालना। (2) पुनरुत्थान रोकथाम: सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड्स (साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन) और टैंक-मिक्स कॉकटेल का छिड़काव कभी न करना। (3) यांत्रिक व जैविक उपाय: 25–40 पीले चिपचिपे पाश/ha लगाना, शुरुआती अवस्था में NSKE 5% या नीम तेल का स्प्रे और Encarsia व Chrysoperla का संरक्षण। (4) रासायनिक उपाय (ETL >6–8 वयस्क/पत्ती पर): पायरीप्रॉक्सीफेन 10% EC (@ 1.0 L/ha) या स्पाइरोमेसिफेन 22.9% SC (@ 600 mL/ha) या डाइफेंथियूरॉन 50% WP (@ 600 g/ha) का स्प्रे।
4. कपास की रोमयुक्त किस्मों (Hairy varieties) का हरे तेले और सफेद मक्खी पर विपरीत प्रभाव क्यों पड़ता है?
उत्तर: कपास की पत्तियों और तने पर पाए जाने वाले सूक्ष्म रोम (Trichomes) हरे तेले (Amrasca biguttula biguttula) के लिए भौतिक अवरोध का काम करते हैं—वे तेले की मादा को पत्ती की शिरा तक पहुँचकर अंडे देने और शिशुओं को रस चूसने से रोकते हैं, इसलिए रोमयुक्त किस्में तेले के प्रति प्रतिरोधी होती हैं। इसके विपरीत, सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) को पत्ती के रोमों के बीच शांत हवा, उच्च आर्द्रता और परभक्षी/परजीवी कीटों से सुरक्षा मिलती है, इसलिए रोमयुक्त किस्मों में सफेद मक्खी का प्रकोप अधिक होता है।
5. लाल कपास बग (Dysdercus koenigii), डस्की कॉटन बग (Oxycarenus hyalinipennis) और कपास मिलीबग (Phenacoccus solenopsis) की क्षति की प्रकृति संक्षेप में लिखिए।
उत्तर: (1) लाल कपास बग (Dysdercus koenigii): यह हरे व खुलते गूलरों के बिनौले (बीज) से तेल चूसती है जिससे बीज की अंकुरण क्षमता व तेल नष्ट हो जाता है और यह अपनी विष्ठा व नेमाटोस्पोरा कवक से सफेद रुई को पीला-भूरा दागदार (‘Cotton stainer’) कर देती है। (2) डस्की कॉटन बग (Oxycarenus hyalinipennis): खिले हुए गूलरों के अंदर सैकड़ों की संख्या में रहती है और ओटाई (Ginning) के समय कुचलने से रुई पर काले धब्बे लगाती है। (3) कपास मिलीबग (Phenacoccus solenopsis): प्ररोहों व गूलरों पर सफेद मोमी गुच्छों में चिपककर पौधे को सुखा देता है (परजीवी: Aenasius bambawalei)।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)

1. कपास के दो सबसे प्रमुख रसचूसक नाशीकीटों—हरा तेला (Amrasca biguttula biguttula) और सफेद मक्खी (Bemisia tabaci)—के वैज्ञानिक नाम, कुल, गण, पहचान, जीवन चक्र, क्षति लक्षण (Hopper burn, Sticky cotton एवं CLCuV संचरण), ETL और समन्वित प्रबंधन (IPM) का सारणीबद्ध वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: तुलनात्मक सारणी 14.1, प्रवाह चित्र और दोनों कीटों के संपूर्ण जीवविज्ञान, रोमयुक्त किस्मों के विरोधाभास, पायरेथ्रॉइड पुनरुत्थान और आधुनिक चयनात्मक कीटनाशकों (Flonicamid, Pyriproxyfen, Spiromesifen, Diafenthiuron) का विस्तार से वर्णन करें।
2. कपास में ‘सफेद मक्खी पुनरुत्थान’ (Whitefly Resurgence) और ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (CLCuV) महामारी के कारणों का विश्लेषण कीजिए तथा इसकी रोकथाम के लिए एक वैज्ञानिक रणनीति तैयार कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: देर से बुवाई, अधिक यूरिया, संवेदनशील रोमयुक्त संकर, कंघी बूटी खरपतवार और सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड छिड़काव से मित्र कीटों के विनाश व हॉर्मोलिगोसिस की व्याख्या करते हुए चरणबद्ध रोकथाम रणनीति प्रस्तुत करें।
3. कपास के अन्य रसचूसक कीटों—थ्रिप्स (Thrips tabaci), माहू (Aphis gossypii), लाल कपास बग (Dysdercus koenigii), डस्की कॉटन बग (Oxycarenus hyalinipennis) और मिलीबग (Phenacoccus solenopsis)—की पहचान, क्षति के लक्षण और प्रबंधन का वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: पाँचों कीटों के वैज्ञानिक नाम, कुल, विशिष्ट क्षति चिह्न (Silvery upward leaf curl, Cotton staining, Ginning crushing, Mealybug wax & Aenasius parasitoid) और नियंत्रण उपायों का वर्णन करें।

Similar Posts