ENT 311 Lecture 14: कपास के रसचूसक नाशीकीट: हरा तेला (Jassids) एवं सफेद मक्खी (Whiteflies)

ENT 311 · Pest Management in Crops and Stored Grains — Final Notes
विषय सूची · Quick Navigation
02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)Lecture 14: कपास के रसचूसक नाशीकीट: हरा तेला (Jassids) एवं सफेद मक्खी (Whiteflies)
चित्रमय कीट पहचान एवं क्षति आरेख (Visual Identification — Lecture 14)
कपास का हरा तेला / जैसिड (Amrasca biguttula — पत्ती किनारों का ईंट जैसा लाल पड़ना) एवं सफेद मक्खी (Bemisia tabaci — CLCuV वाहक)
02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)
इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:
- Bt कपास के युग में रसचूसक नाशीकीटों (Sucking Pests — जिन पर Bt टॉक्सिन Cry1Ac/Cry2Ab का कोई असर नहीं होता!) के मुख्य शत्रु के रूप में उभरने के कारणों को समझना।
- कपास के हरे तेले / जैसिड (Cotton Leafhopper / Jassid — Amrasca biguttula biguttula; कुल Cicadellidae, गण Hemiptera) के तिरछा चलने (Diagonal movement) के व्यवहार, पत्तियों के किनारों से पीले-ईंट जैसे लाल होकर ‘नीचे की ओर प्याले जैसा मुड़ने’ (Downward cupping & Hopper burn) और रोमयुक्त प्रतिरोधी किस्मों का अध्ययन करना।
- कपास की सफेद मक्खी (Cotton Whitefly — Bemisia tabaci; कुल Aleyrodidae, गण Hemiptera) की जीवन अवस्थाओं, मधुस्राव से रुई काली होने, ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (Cotton Leaf Curl Virus – CLCuV) फैलाने और सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड से इसके पुनरुत्थान (Resurgence) को समझना।
- कपास के अन्य रसचूसक कीटों (थ्रिप्स, माहू, मिलीबग, लाल कपास बग व डस्की कॉटन बग) के मुख्य लक्षणों तथा जैसिड व सफेद मक्खी के ETL और आधुनिक चयनात्मक कीटनाशकों (Flonicamid, Diafenthiuron, Spiromesifen, Pyriproxyfen, Dinotefuran) को कंठस्थ करना।
03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)
मूल सामग्री (Core Course Content): वर्ष 2002 में भारत में Bt कपास (Bacillus thuringiensis transgenic cotton — जिसमें लेपिडोप्टेरा बॉलवर्म्स के विरुद्ध Cry1Ac एवं Cry2Ab जीन डाले गए हैं) के आने के बाद गूलर छेदकों पर शुरुआती नियंत्रण मिला और कीटनाशक छिड़काव घटने से कपास में ‘रसचूसक कीट’ (Sucking Pests — विशेषकर हरा तेला Amrasca biguttula biguttula और सफेद मक्खी Bemisia tabaci, जिन पर Bt प्रोटीन बिल्कुल असर नहीं करता) सबसे बड़े मुख्य नाशीकीट बन गए हैं।
उत्तर भारत (पंजाब, हरियाणा और श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़, राजस्थान) में वर्ष 2015 में सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) और उसके द्वारा फैलाए गए ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (CLCuV) ने कपास की 60% से अधिक फसल तबाह कर दी थी। इसलिए कपास में रसचूसक कीटों की सटीक पहचान और पुनरुत्थान-मुक्त (Resurgence-free) प्रबंधन अनिवार्य है।
04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)
05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)
1. कपास का हरा तेला / जैसिड (Cotton Jassid / Leafhopper — Amrasca biguttula biguttula)
- वैज्ञानिक नाम, कुल एवं गण: Amrasca biguttula biguttula (पूर्व नाम: Empoasca devastans) | कुल: Cicadellidae | गण: Hemiptera। (अन्य मुख्य परपोषी: भिंडी, बैंगन, आलू, सूरजमुखी, अरंडी)।
- पहचान एवं जीवविज्ञान (Biology — अपूर्ण कायांतरण):
- वयस्क एवं शिशु: पीले-हरे रंग का पच्चर के आकार (Wedge-shaped, 3.5 mm) का कीट जिसके अग्र-पंखों के सिरे पर एक-एक काला बिंदु और सिर (Vertex) पर दो काले बिंदु होते हैं। छूने पर इसके शिशु और वयस्क तिरछे (Diagonally / Sideways) तेजी से चलते हैं!
- अंडरोपण: मादा पत्ती की निचली सतह की मोटी शिराओं (Parenchymatous tissue of midrib/veins) के अंदर धँसाकर 15–30 पीले-सफेद अंडे देती है। 4–6 दिन में शिशु निकलते हैं और 5 निर्मोचन अवस्थाओं के बाद 10–15 दिन में वयस्क बन जाते हैं (वर्ष में 10–12 पीढ़ियाँ)।
- क्षति के विशिष्ट लक्षण (ETL: 1–2 शिशु या वयस्क प्रति पत्ती):
- शिशु और वयस्क दोनों पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते हैं और विषाक्त लार डालते हैं।
- क्रमिक लक्षण विकास: पत्ती के किनारे पीले पड़ना पत्तियों का नीचे की ओर उल्टे प्याले जैसा मुड़ना (Downward cupping/curling) किनारों का ईंट जैसा लाल या ताँबे जैसा भूरा (Brick-red / Bronzing) होना पत्तियों का सूखकर झड़ना (‘हॉपर बर्न’)।
- हरे तेले (Jassid) का समन्वित प्रबंधन (IPM):
- सस्य एवं HPR उपाय: पत्तियों पर रोम वाली प्रतिरोधी किस्में उगाना; बुवाई से पूर्व इमिडाक्लोप्रिड 48% FS या 70% WS (@ 5–7 g/kg बीज) या थायोमेथोक्साम 30% FS (@ 5–7 mL/kg बीज) से बीज उपचार करना (यह बुवाई के बाद 30–40 दिनों तक तेले से पूर्ण सुरक्षा देता है); तथा यूरिया का संतुलित प्रयोग।
- यांत्रिक एवं जैविक उपाय: खेत में पीले चिपचिपे पाश (Yellow sticky traps @ 20–25/ha) लगाना; परभक्षी क्राइसोपर्ला (Chrysoperla zastrowi sillemi @ 10,000 लार्वा/ha), लेडीबर्ड भृंग, मकड़ी और कवक Lecanicillium lecanii का प्रयोग।
- रासायनिक नियंत्रण (ETL >1–2 शिशु/पत्ती होने पर):
• फ्लोनिकामिड 50% WG (Flonicamid — ‘Ulala’ @ 150 g/ha) या डाइनोटफ्यूरान 20% SG (Token/Osheen @ 150 g/ha) या इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL (@ 100–125 mL/ha) या थायोमेथोक्साम 25% WG (@ 100 g/ha) या डाइफेंथियूरॉन 50% WP (@ 600 g/ha)।
2. कपास की सफेद मक्खी (Cotton Whitefly — Bemisia tabaci)
- वैज्ञानिक नाम, कुल एवं गण: Bemisia tabaci | कुल: Aleyrodidae | गण: Hemiptera।
- पहचान एवं जीवविज्ञान:
- वयस्क मक्खी: अत्यंत सूक्ष्म (1.0–1.5 mm) पीले शरीर वाली मक्खी जिसके पंख सफेद मोमी पाउडर (White waxy bloom) से ढके होते हैं।
- अंडा एवं शिशु: मादा पत्ती की निचली सतह पर डंठल-युक्त (Stalked/Pedicellate) नाशपाती के आकार के पीले अंडे देती है। पहली अवस्था का शिशु (‘क्रॉलर / Crawler’) चलने वाला होता है, जिसके बाद की शिशु अवस्थाएँ और चौथी अवस्था (‘प्यूपेरियम / Puparium — Red-eyed nymph’) पत्ती के नीचे शल्क की तरह अचल चिपकी रहती हैं।
- क्षति के तीन दोहरे-तिहरे प्रभाव (ETL: 6–8 वयस्क मक्खी प्रति पत्ती):
- प्रत्यक्ष रस चूसना: पत्तियों का पीला पड़ना, पौधों की वृद्धि रुकना और गूलरों का समय से पहले खुलना या झड़ना।
- मधुस्राव एवं काली रुई (Sooty Mould & Sticky Lint): चिपचिपे मधुस्राव पर काली फफूंद उगने से प्रकाश-संश्लेषण रुकता है और खिली हुई रुई काली व चिपचिपी हो जाती है।
- विषाणु रोग वाहक (CLCuV Vector — सबसे भयानक क्षति!): 1 भी संक्रमित सफेद मक्खी ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (Cotton Leaf Curl Virus — CLCuV) फैला सकती है जिससे शिराएँ फूल जाती हैं और पत्ती के नीचे छोटी पत्तियाँ (Enations) निकल आती हैं।
- सफेद मक्खी का समन्वित प्रबंधन (IPM):
- सस्य एवं स्वच्छता उपाय: कपास की अगेती व समय पर बुवाई (मई के मध्य से पहले); खेत और मेड़ों से CLCuV और सफेद मक्खी के वैकल्पिक खरपतवार परपोषियों—कंघी बूटी (Abutilon indicum), पीली बूटी, कांग्रेस घास व जंगली भिंडी—को समूल नष्ट करना; कपास के पास भिंडी या मूंग न बोना; तथा अत्यधिक यूरिया न डालना।
- सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड्स का पूर्ण निषेध (Strictly Avoid Synthetic Pyrethroids!): कपास में साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन, फेनवेलरेट या एसीफेट के बार-बार प्रयोग से सफेद मक्खी में भयानक ‘पुनरुत्थान’ (Resurgence) होता है, अतः इनका प्रयोग न करें।
- यांत्रिक एवं जैविक उपाय: बुवाई के 30 दिन से ही पीले चिपचिपे पाश (Yellow sticky traps @ 25–40/ha) लगाना; शुरुआती अवस्था में 5% नीम निंबोली अर्क (NSKE 5%) या नीम तेल (@ 5 mL/L + सर्फ/साबुन) का स्प्रे; परजीवी ततैया Encarsia formosa व Eretmocerus तथा परभक्षी Chrysoperla का संरक्षण।
- रासायनिक नियंत्रण (ETL >6–8 वयस्क/पत्ती पर — आधुनिक IGR व कीटोएनोल रसायन):
• स्पाइरोमेसिफेन 22.9% SC (Spiromesifen — ‘Oberon’ @ 600 mL/ha — लिपिड संश्लेषण अवरोधक) या
• पायरीप्रॉक्सीफेन 10% EC (Pyriproxyfen — ‘Lano’ @ 1.0–1.25 L/ha — जुवेनाइल हार्मोन IGR जो अंडों व प्यूपेरिया को बांझ कर देता है) या
• डाइफेंथियूरॉन 50% WP (Diafenthiuron — ‘Polo’ @ 600 g/ha) या
• फ्लोनिकामिड 50% WG (Ulala @ 150 g/ha) या बुप्रोफेजिन 25% SC (@ 1.0 L/ha) या अफीडोपायरोपेन 50 g/L DC (Sefina @ 1.0 L/ha)।
06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)
कपास के अन्य प्रमुख रसचूसक कीटों की त्वरित परीक्षा पहचान:
- 1. कपास का थ्रिप्स (Cotton Thrips — Thrips tabaci; Thysanoptera): पत्तियों को खुरचकर रस चूसता है जिससे पत्तियों पर चाँदी जैसी चमक (Silvery sheen) आती है और पत्तियाँ ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं (Upward curling — जबकि जैसिड में नीचे मुड़ती हैं!)।
- 2. कपास का माहू (Cotton Aphid — Aphis gossypii; Aphididae): पत्तियों का मुड़ना व चिपचिपा मधुस्राव।
- 3. लाल कपास बग / रेड कॉटन बग (Dysdercus koenigii; Pyrrhocoridae): गूलर के बिनौले (बीज) से तेल चूसती है और नेमाटोस्पोरा कवक द्वारा रुई को पीला-भूरा दागदार (Cotton Stainer) बना देती है।
- 4. डस्की कॉटन बग (Oxycarenus hyalinipennis; Lygaeidae): खिले गूलरों में रहकर जिनिंग (ओटाई) के समय कुचलने से रुई को बदरंग करती है।
- 5. कपास का मिलीबग (Phenacoccus solenopsis; Pseudococcidae): मोमी सफेद परत वाला आक्रामक कीट; परजीवी: Aenasius bambawalei।
07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)
- ‘जैसिड बनाम थ्रिप्स पत्ती-कुंचन दिशा’ का नियम (Leaf-Curling Direction Rule in Cotton): कपास में यदि पत्ती के किनारे लाल पड़कर नीचे की ओर (Downward cupping) मुड़ें तो वह हरा तेला (Jassid) है; और यदि पत्ती चाँदी जैसी चमकदार व खुरदरी होकर ऊपर की ओर (Upward boat-curling) मुड़े तो वह थ्रिप्स (Thrips) है!
08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)
केस स्टडी: उत्तर भारत में कपास में ‘पायरीप्रॉक्सीफेन + डाइफेंथियूरॉन’ का प्रयोग क्यों सफल रहा?
सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) के नियंत्रण में साधारण कीटनाशक केवल उड़ती हुई वयस्क मक्खियों को मारते हैं, जबकि पत्ती के नीचे चिपके हजारों अंडे और प्यूपेरिया 4 दिन बाद फिर से वयस्क बन जाते हैं। जब किसान पायरीप्रॉक्सीफेन (JH mimic IGR — जो अंडों के स्फुटन और प्यूपेरिया के वयस्क बनने को रोकता है) और डाइफेंथियूरॉन / स्पाइरोमेसिफेन (जो वयस्क व शिशु दोनों को मारता है) का प्रयोग करता है, तो सफेद मक्खी का पूरा जीवन चक्र एक साथ टूट जाता है।
09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)
तुलनात्मक सारणी 14.1: कपास का हरा तेला (Jassid) बनाम कपास की सफेद मक्खी (Whitefly)
| तुलना का आधार | हरा तेला / जैसिड (Cotton Jassid) | सफेद मक्खी (Cotton Whitefly) |
|---|---|---|
| 1. वैज्ञानिक नाम एवं कुल | Amrasca biguttula biguttula (Cicadellidae) | Bemisia tabaci (Aleyrodidae) |
| 2. विशिष्ट शारीरिक पहचान | हरा पच्चर जैसा शरीर; तिरछा (Diagonally) चलता है | सफेद मोमी पंख; डंठल-युक्त अंडे व अचल प्यूपेरियम |
| 3. विशिष्ट क्षति लक्षण | पत्तियों का किनारों से लाल होकर नीचे की ओर मुड़ना (Downward cupping / Hopper burn) | मधुस्राव व काली फफूंद से रुई काली पड़ना + CLCuV विषाणु रोग का संचरण |
| 4. पत्ती के रोमों (Hairiness) का प्रभाव | रोमयुक्त किस्में प्रतिरोधी (Resistant) होती हैं | रोमयुक्त किस्में अधिक संवेदनशील (Susceptible) होती हैं |
| 5. आर्थिक दहलीज स्तर (ETL) | 1–2 शिशु या वयस्क प्रति पत्ती | 6–8 वयस्क मक्खी प्रति पत्ती |
| 6. प्रमुख आधुनिक कीटनाशक | इमिडाक्लोप्रिड बीज उपचार, फ्लोनिकामिड (Ulala), डाइनोटफ्यूरान | स्पाइरोमेसिफेन (Oberon), पायरीप्रॉक्सीफेन (Lano), डाइफेंथियूरॉन (Polo) |
10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)
कपास के रसचूसक कीटों के मानक ETL एवं बीज उपचार सूत्र
- 1. कपास के रसचूसक कीटों के आर्थिक दहलीज स्तर (Standard ETLs in Cotton):
• हरा तेला (Jassid): (या द्वितीय ग्रेड हॉपर बर्न लक्षण)
• सफेद मक्खी (Whitefly):
• थ्रिप्स (Thrips): - 2. रसचूसक कीटों हेतु कपास बीज उपचार (Seed Treatment):
11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)
- कुल: Cicadellidae, गण: Hemiptera | तिरछा (Sideways) चलता है
- लक्षण: पत्ती किनारे से ईंट जैसी लाल होकर नीचे मुड़ती है (Downward cupping)
- ETL: 1–2 शिशु/पत्ती | रोमयुक्त (Hairy) कपास किस्में प्रतिरोधी
- प्रबंधन: इमिडाक्लोप्रिड बीज उपचार, पीला पाश, फ्लोनिकामिड (Ulala), डाइनोटफ्यूरान
- कुल: Aleyrodidae, गण: Hemiptera | ETL: 6–8 वयस्क/पत्ती
- क्षति 1: रस चूसना + मधुस्राव पर काली फफूंद से रुई खराब होना
- क्षति 2: ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (CLCuV — शिरा फूलना व Enations) वाहक
- पायरेथ्रॉइड स्प्रे व रोमयुक्त किस्मों से प्रकोप बढ़ता है (Resurgence)
- 1. मेड़ों से कंघी बूटी (Abutilon) हटाना + समय पर बुवाई
- 2. पीले चिपचिपे पाश (25-40/ha) + NSKE 5% / नीम तेल स्प्रे
- 3. परजीवी: Encarsia formosa व Eretmocerus
- 4. रसायन: स्पाइरोमेसिफेन, पायरीप्रॉक्सीफेन (IGR), डाइफेंथियूरॉन (Polo)
- थ्रिप्स (Thrips tabaci): चाँदी जैसी चमक व पत्ती ऊपर मुड़ना
- माहू (Aphis gossypii): मधुस्राव व स्टिकी कॉटन
- रेड कॉटन बग (Dysdercus koenigii): रुई को रंगने वाला (Cotton stainer)
- कॉटन मिलीबग (Phenacoccus solenopsis): परजीवी Aenasius bambawalei
12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)
13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)
- कपास के हरे तेले (Amrasca biguttula biguttula; कुल Cicadellidae) के आक्रमण से पत्तियाँ किनारों से ईंट जैसी लाल होकर ‘नीचे की ओर’ (Downward cupping — Hopper burn) मुड़ जाती हैं, जबकि थ्रिप्स से ‘ऊपर की ओर’ मुड़ती हैं।
- कपास की सफेद मक्खी (Bemisia tabaci; कुल Aleyrodidae) खतरनाक ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (Cotton Leaf Curl Virus — CLCuV) की वाहक है।
- कपास में सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड्स (साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन) के अंधाधुंध प्रयोग से सफेद मक्खी में तीव्र ‘कीट पुनरुत्थान’ (Resurgence) होता है।
- कपास की रोमयुक्त (Hairy) किस्में जैसिड के प्रति प्रतिरोधी होती हैं, किंतु सफेद मक्खी के प्रति संवेदनशील होती हैं।
- लाल कपास बग (Dysdercus koenigii; कुल Pyrrhocoridae) को ‘कॉटन स्टेनर’ (Cotton stainer) कहा जाता है क्योंकि यह नेमाटोस्पोरा कवक से रुई को बदरंग कर देती है।
14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)
त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):
- हरा तेला (Amrasca biguttula biguttula): Cicadellidae; तिरछा चलना; पत्ती नीचे मुड़ना व हॉपर बर्न; ETL: 1–2/पत्ती; नियंत्रण: इमिडाक्लोप्रिड बीज उपचार, फ्लोनिकामिड (Ulala), डाइनोटफ्यूरान।
- सफेद मक्खी (Bemisia tabaci): Aleyrodidae; CLCuV वाहक; स्टिकी कॉटन; ETL: 6–8/पत्ती; नियंत्रण: पीला चिपचिपा पाश, स्पाइरोमेसिफेन (Oberon), पायरीप्रॉक्सीफेन (Lano), डाइफेंथियूरॉन (Polo)।
- अन्य: थ्रिप्स (Thrips tabaci), रेड कॉटन बग (Dysdercus koenigii), डस्की कॉटन बग (Oxycarenus hyalinipennis), मिलीबग (Phenacoccus solenopsis — परजीवी Aenasius bambawalei)।
15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)
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16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)
- कपास में पत्तियों का लाल होकर नीचे मुड़ना (Downward cupping / Hopper burn) ‘हरे तेले’ (Amrasca biguttula biguttula) से होता है।
- कपास की सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) घातक ‘कपास पर्ण कुंचन विषाणु’ (CLCuV) की वाहक है।
- कपास में सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड छिड़कने पर सफेद मक्खी का भयानक ‘पुनरुत्थान’ (Resurgence) होता है।
- लाल कपास बग (Dysdercus koenigii; कुल Pyrrhocoridae) को रुई पर पीला दाग लगाने के कारण ‘कॉटन स्टेनर’ कहते हैं।
- कपास मिलीबग (Phenacoccus solenopsis) का प्रमुख प्राकृतिक अंतःपरजीवी ‘Aenasius bambawalei’ है।





