ENT 311 Lecture 31: भंडारण संरचनाएँ, अनाज भंडारण की पारंपरिक एवं आधुनिक विधियाँ

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ENT 311 · Pest Management in Crops and Stored Grains — Final Notes
विषय सूची · Quick Navigation02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
यह पाठ्यक्रम की अध्ययन सामग्री है। कीटनाशक, मात्रा और उपचार के उदाहरणों को वर्तमान खेत-स्तरीय सलाह न मानें; वास्तविक उपयोग में वर्तमान पंजीकृत label, फसल–कीट अनुमोदन तथा स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करें।
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Lecture 31: भंडारण संरचनाएँ, अनाज भंडारण की पारंपरिक एवं आधुनिक विधियाँ

Storage Structures, Traditional and Modern Methods of Grain Storage

02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:

  • अनाज, दलहन और तिलहन के दीर्घकालिक सुरक्षित भंडारण के लिए आवश्यक ‘सुरक्षित नमी स्तर’ (Safe Moisture Content: खाद्यान्न <10 ext–12%, दलहन <8 ext–9%, तिलहन <6 ext–8%) और एक आदर्श भंडारण संरचना के अभियांत्रिकी गुणों को समझना।
  • भारत के विभिन्न राज्यों में प्रचलित पारंपरिक ग्रामीण भंडारण संरचनाओं—बुखारी (Bukhari), कोठार (Kothar), मोराई (Morai), मुड्डा/कनजा, ठेक्का और भूमिगत खत्ती/बांदा (Underground Khatti)—की संरचना और कमियों का अध्ययन करना।
  • वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा विकसित उन्नत घरेलू भंडारण संरचनाओं—विशेषकर **’पूसा बिन’ (Pusa Bin — IARI नई दिल्ली द्वारा विकसित: कच्ची ईंटों की दो परतों के बीच 700-गेज काली LDPE पॉलीथीन शीट)**, पूसा क्यूबिकल, **हापुड़ कोठी/बिन (IGSI/IGMRI हापुड़)**, PAU बिन और कोयंबटूर बिन—की डिजाइन और कार्यप्रणाली में निपुणता प्राप्त करना।
  • वाणिज्यिक एवं आधुनिक भंडारण विधियों—**CAP (Cover and Plinth) भंडारण**, FCI पारंपरिक बैग गोदाम, आधुनिक धातु/कंक्रीट **साइलो (Bulk Silos)**, **वायुरुद्ध हर्मेटिक भंडारण (Hermetic Storage — SuperGrain / GrainPro bags & Silo bags)** और **नियंत्रित वातावरण भंडारण (Controlled / Modified Atmosphere Storage — उच्च CO2>60% एवं निम्न O2<1 ext–2%)**—का गहन अध्ययन करना।

03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): भारत में उत्पादित कुल खाद्यान्न का लगभग 60 से 70% हिस्सा किसानों द्वारा अपने घरों और गाँवों में ही अगले मौसम के बीज और परिवार के उपभोग के लिए रखा जाता है, जबकि शेष 30 से 40% व्यावसायिक अधिशेष अनाज भारतीय खाद्य निगम (FCI), केंद्रीय भंडारण निगम (CWC), राज्य भंडारण निगमों (SWCs) और निजी व्यापारियों द्वारा बड़े गोदामों में भंडारित किया जाता है।

पारंपरिक मिट्टी, बाँस और भूमिगत संरचनाओं में बाहर की नमी, ऑक्सीजन, कीट और चूहे आसानी से प्रवेश कर जाते हैं जिससे भारी नुकसान होता है। इस समस्या के समाधान हेतु IARI (नई दिल्ली) ने ‘पूसा बिन’ (Pusa Bin) और IGMRI (हापुड़, उ.प्र.) ने ‘हापुड़ कोठी’ (Hapur Bin) जैसी वैज्ञानिक नमी-रोधी व वायुरुद्ध संरचनाएँ विकसित कीं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर साइलो (Silos), हर्मेटिक बैग और नियंत्रित वातावरण (CA/MA) ने बिना रसायन के सुरक्षित अनाज भंडारण की क्रांति ला दी है।

04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

सुरक्षित अनाज नमी सीमा (Safe Grain Moisture Content for Storage)
भंडारण में कीटों, माइट्स और फफूंद (Aspergillus) की वृद्धि को रोकने के लिए अनाज को गोदाम में रखने से पहले सुखाकर नमी को निम्नलिखित सुरक्षित स्तर से नीचे लाना अनिवार्य है: (1) खाद्यान्न फसलें (गेहूँ, चावल, मक्का, ज्वार): 10 से 12% से कम, (2) दलहनी फसलें (चना, मूँग, अरहर): 8 से 9% से कम, और (3) तिलहनी फसलें (मूँगफली, सरसों, सोयाबीन): 6 से 8% से कम।
पूसा बिन (Pusa Bin — IARI New Delhi)
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली द्वारा विकसित एक अत्यंत लोकप्रिय उन्नत घरेलू भंडारण संरचना (क्षमता 0.4 से 3.2 टन), जिसमें कच्ची मिट्टी या ईंटों की दो दीवारों, फर्श और छत के ठीक बीच में ‘700-गेज (0.175 mm) मोटी काली कम घनत्व वाली पॉलीथीन शीट’ (700-gauge black LDPE sheet) सैंडविच की तरह दबाकर लगाई जाती है। इसमें मिट्टी ऊष्मा-रोधी (Thermal insulator) और 700-गेज पॉलीथीन नमी-रोधी व वायुरुद्ध (Moisture & gas-proof barrier) का कार्य करती है!
CAP भंडारण (Cover and Plinth Storage)
भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा बंपर फसल के दौरान खुले मैदान में कम लागत पर अस्थायी रूप से अनाज की बोरियाँ भंडारित करने की वैज्ञानिक विधि। इसमें जमीन से 1.5 फीट ऊँचे पक्के चबूतरे (Plinth) पर लकड़ी के क्रेट (Dunnage) रखकर उन पर लगभग 130–150 टन अनाज की बोरियों का गुंबदाकार ढेर (Stack: 9.1 m × 6.1 m) लगाया जाता है और ऊपर से 800–1000 गेज की काली UV-स्थिर एलडीपीई पॉलीथीन कवर (Cover) से ढककर नायलॉन रस्सियों से बाँध दिया जाता है।
वायुरुद्ध हर्मेटिक एवं नियंत्रित वातावरण भंडारण (Hermetic & Controlled Atmosphere Storage — MA/CA)
बिना किसी रासायनिक कीटनाशक के अनाज को गैस-रोधी (Airtight) बैग या साइलो में रखने की हरित तकनीक। (1) हर्मेटिक भंडारण (Hermetic storage — जैसे SuperGrain bag / PICS bag): इसमें अनाज और कीटों के स्वयं के श्वसन से अंदर की ऑक्सीजन (O2) घटकर <2% रह जाती है और CO2 बढ़कर >15–20% हो जाती है जिससे कीट दम घुटने व निर्जलीकरण से मर जाते हैं। (2) नियंत्रित वातावरण (CA/MA): इसमें बाहर से सिलेंडर द्वारा CO2 गैस (>60%) या नाइट्रोजन (N2 >98%) भरी जाती है।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. भारत की पारंपरिक ग्रामीण भंडारण संरचनाएँ (Traditional Rural Storage Structures of India)

  • (1) बुखारी (Bukhari): उत्तर और पूर्वी भारत में मिट्टी, बाँस और फूस से बनी बेलनाकार या चौकोर ऊँची संरचना (क्षमता 3.5–18 टन) जो लकड़ी या ईंट के स्तंभों पर टिकी होती है।
  • (2) कोठार (Kothar): उत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्रों में देवदार की लकड़ी के तख्तों से बना कमरा-नुमा कोठार (क्षमता 9–35 टन) जो स्तंभों पर खड़ा होता है।
  • (3) मोराई (Morai): पूर्वी और दक्षिणी भारत में धान भंडारण के लिए लकड़ी के चबूतरे पर धान की पुआल की मोटी रस्सियों को गोल लपेटकर बनाई गई उल्टे शंकु जैसी संरचना (क्षमता 3.5–18 टन)।
  • (4) मुड्डा / मुडी एवं कनजा (Mudda / Kanaja): कर्नाटक और तटीय राज्यों में पुआल की रस्सियों से बना बंडल (‘मुड्डा’) या बाँस की टोकरी पर मिट्टी व गोबर का लेप लगाकर बना ‘कनजा’।
  • (5) कुठार / कोठी (Mud Kothi): राजस्थान, म.प्र., उ.प्र. और बिहार के गाँवों में चिकनी मिट्टी, भूसा और गोबर मिलाकर घर के अंदर बनाई जाने वाली आयताकार या बेलनाकार कोठियाँ (क्षमता 0.5–2 टन)।
  • (6) खत्ती या बांदा (Underground Khatti / Banda / Pev): उ.प्र., म.प्र., महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में जमीन के नीचे खोदे गए सुराही के आकार के भूमिगत गड्ढे (Underground pits — क्षमता 5–50 टन)। इनमें ऑक्सीजन की कमी से ऊपर के कीट तो मर जाते हैं, किंतु मिट्टी की सीलन से अनाज में फफूंद और अजीब गंध आ जाती है तथा खत्ती खोलते समय जहरीली extCO2 गैस से दुर्घटना का खतरा रहता है।

2. वैज्ञानिक रूप से उन्नत घरेलू भंडारण संरचनाएँ (Improved Domestic Storage Structures)

  1. पूसा बिन (Pusa Bin — विकसित: IARI, नई दिल्ली):
    • यह पारंपरिक मिट्टी की कोठी का सबसे सफल वैज्ञानिक रूपांतरण है (क्षमता 0.4 से 3.2 टन)।
    • संरचना: इसे पक्के फर्श पर कच्ची मिट्टी की ईंटों (Unburnt sun-dried mud bricks) से बनाया जाता है। फर्श, चारों दीवारों और छत में कच्ची ईंटों की दो परतों (प्रत्येक 7 cm मोटी) के ठीक बीच में 700-गेज (0.175 mm) मोटी काली एलडीपीई पॉलीथीन शीट (700-gauge black LDPE sheet) को सैंडविच कर गर्म लोहे से हीट-सील (Heat-sealed) कर दिया जाता है।
    • ऊपर अनाज भरने के लिए 50imes50 extcm का मेनहोल और नीचे अनाज निकालने के लिए तिरछा लोहे का पाइप (Outlet pipe with locking lid) लगाया जाता है, जिसके निचले 50 cm हिस्से पर चूहों से बचाव के लिए पक्की ईंट या टिन की पट्टी लगाई जाती है।
    • लाभ: मिट्टी की दीवार तापमान को स्थिर रखती है (उच्च तापीय प्रतिरोध), जबकि 700-गेज पॉलीथीन शीट बाहरी नमी और हवा को अंदर नहीं जाने देती तथा एल्युमिनियम फॉस्फाइड धूम्रन के लिए इसे 100% वायुरुद्ध बनाती है!
  2. पूसा क्यूबिकल (Pusa Cubicle — IARI): यह पूसा बिन का बड़ा रूप (क्षमता 12–24 टन) है जिसमें बोरे और खुला अनाज दोनों रखे जा सकते हैं।
  3. हापुड़ कोठी / हापुड़ बिन (Hapur Kothi / Hapur Metal Bin — विकसित: IGSI / IGMRI, हापुड़, उ.प्र.):
    • भारतीय अन्न भंडारण प्रबंधन एवं अनुसंधान संस्थान (IGMRI — पूर्व में IGSI, हापुड़, 1958) द्वारा विकसित जस्ती लोहे की चद्दर (20–24 gauge GI sheet) या एल्युमिनियम से बनी बेलनाकार धातु की कोठी (क्षमता 0.2 से 1.0 टन), जो पूरी तरह चूहा-रोधी, नमी-रोधी और धूम्रन के लिए वायुरुद्ध होती है।
  4. PAU बिन (विकसित: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना): जस्ती लोहे (GI sheet) से बनी वायुरुद्ध घरेलू कोठी।
  5. कोयंबटूर बिन एवं TNAU स्वचालित कीट-निष्कासन बिन (TNAU Automatic Insect Removal Bin): TNAU कोयंबटूर द्वारा विकसित विशेष छिद्रित आंतरिक नलिकाओं वाली कोठी जो कीटों के नीचे की ओर जाने के स्वभाव (Wandering behaviour) का लाभ उठाकर बिना किसी रसायन के अनाज से 90% भृंगों को नीचे लगे कलेक्शन बॉक्स में अलग कर देती है!

3. आधुनिक वाणिज्यिक एवं थोक भंडारण विधियाँ (Modern Bulk & Commercial Storage Systems)

  1. बोरियों में पारंपरिक वैज्ञानिक गोदाम भंडारण (Conventional Bag Storage Godowns — FCI/CWC):
    • जूट की बोरियों (B-twill gunny bags — 50 kg क्षमता) को पक्के गोदाम के फर्श पर सीधे कभी नहीं रखा जाता, बल्कि उन्हें फर्श की सीलन से बचाने के लिए लकड़ी के क्रेट, बाँस की चटाई या पॉलीथीन पैलेट (‘डनेज’ / Dunnage) के ऊपर क्रिस-क्रॉस (आड़ा-तिरछा) तरीके से अधिकतम 15 बोरियों की ऊँचाई (9.1 extmimes6.1 extm आधार) तक छल्ली (Stack) लगाकर रखा जाता है।
    • निरीक्षण और धूम्रन कवर डालने के लिए छल्ली और गोदाम की दीवार के बीच कम से कम 60–75 cm (2–2.5 फीट) का गलियारा (Alleyway) और दो छल्लियों के बीच 1 मीटर का रास्ता छोड़ा जाता है।
  2. CAP भंडारण (Cover and Plinth Storage):
    • खुले में ऊँचे प्लिंथ पर डनेज रखकर 130–150 टन बोरियों का गुंबदाकार ढेर बनाना और उसे 800–1000 गेज की काली पॉलीथीन चादर से ढककर रस्सियों से बाँधना। यह गेहूँ के अल्पकालिक भंडारण (6–10 माह) की सबसे सस्ती विधि है, किंतु इसमें प्रत्येक 15 दिन में साफ मौसम में कवर हटाकर हवा लगाना (Aeration) आवश्यक है।
  3. आधुनिक थोक साइलो भंडारण (Modern Bulk Silo Storage — Metal & Concrete Silos):
    • बिना बोरियों के खुले अनाज (Bulk grain) को 5,000 से 50,000 टन क्षमता वाले विशाल बेलनाकार जस्ती इस्पात (Galvanized corrugated steel silos) या प्रबलित कंक्रीट (RCC Silos) के टावरों में भंडारित किया जाता है।
    • इनमें कन्वेयर बेल्ट, बकेट एलिवेटर, तापमान व नमी सेंसर केबल, स्वचालित वातन पंखे (Aeration fans) और फॉस्फीन गैस री-सर्कुलेशन धूम्रन प्रणाली (Phosphine recirculation system) लगी होती है जिससे भंडारण हानि घटकर <0.2% रह जाती है!
  4. वायुरुद्ध हर्मेटिक भंडारण (Hermetic Storage — SuperGrain / PICS Bags & Silo Bags):
    • सुपरग्रेन बैग (SuperGrain Bag — IRRI) एवं पिक्स बैग (PICS — Purdue Improved Crop Storage three-layer bag): इसमें बाहरी साधारण बोरी के अंदर 80 माइक्रोन मोटी बहु-स्तरीय गैस-रोधी एचडीपीई (HDPE) लाइनर थैली होती है। सूखे बीज या अनाज को भरकर इसे एयरटाइट बाँध देने पर अंदर की ऑक्सीजन (extO2) घटकर 1 ext–2% रह जाती है और extCO2 बढ़कर 15 ext–20% हो जाती है, जिससे बिना किसी जहर के सभी घुन और ब्रूकिड मर जाते हैं और बीज का अंकुरण 1 वर्ष से अधिक समय तक 95% से ऊपर बना रहता है!
    • साइलो बैग (Hermetic Silo Bags): खेत में ही 200 टन अनाज रखने के लिए 60 मीटर लंबी तीन-परत (बाहर सफेद, अंदर काली) वाली विशाल हर्मेटिक प्लास्टिक ट्यूब।
  5. नियंत्रित एवं संशोधित वातावरण भंडारण (Controlled / Modified Atmosphere Storage — CA / MA):
    • वायुरुद्ध भंडारगृहों में सामान्य हवा (78% extN2,21% extO2,0.04% extCO2) को बदलकर कृत्रिम रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (extCO2) की सांद्रता 60% से अधिक (Hypercarbia) या नाइट्रोजन (extN2) की सांद्रता 98 ext–99% कर ऑक्सीजन (extO2) को 1% से कम (Hypoxia/Anoxia) कर दिया जाता है।
    • उच्च extCO2 (>60%) के संपर्क में कीटों के श्वास रंध्र (Spiracles) स्थायी रूप से खुल जाते हैं जिससे 10–14 दिनों में कीट के अंडे, लार्वा, प्यूपा और वयस्क सभी निर्जलीकरण और श्वसन अवरोध से मर जाते हैं तथा अनाज पर शून्य रासायनिक अवशेष (Zero chemical residue — जैविक अनाज व बासमती निर्यात हेतु सर्वश्रेष्ठ) रहता है!

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

1. घरेलू / किसान-स्तरीय संरचनाएँ (Farm-Level Storage)
  • पारंपरिक: बुखारी, कोठार, मोराई, मुड्डा, कनजा, मिट्टी की कोठी, भूमिगत खत्ती/बांदा।
  • वैज्ञानिक उन्नत: पूसा बिन (IARI — 700-गेज LDPE सैंडविच), पूसा क्यूबिकल, हापुड़ कोठी (IGMRI), PAU बिन, TNAU कीट-निष्कासन बिन, सुपरग्रेन / PICS हर्मेटिक बैग।
2. वाणिज्यिक / FCI-स्तरीय भंडारण (Commercial Storage)
  • बैग भंडारण (Bag Storage): FCI पारंपरिक गोदाम (डनेज पर 15 बोरियों की छल्ली) एवं CAP (Cover & Plinth — खुले में अस्थायी भंडारण)।
  • थोक एवं हरित भंडारण (Bulk & Green Storage): स्टील/RCC साइलो (Silos), हर्मेटिक साइलो बैग और नियंत्रित वातावरण (CA/MA: >60% extCO2,<1% extO2)।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)

पूसा बिन (Pusa Bin) और हर्मेटिक भंडारण के भौतिक-रासायनिक सिद्धांत:

  1. पूसा बिन का द्वैध अवरोध सिद्धांत (Dual-Barrier Principle of Pusa Bin): लोहे की कोठियों (Metal bins) में यह दोष होता है कि धूप पड़ने पर लोहा जल्दी गर्म होता है और रात में ठंडा होने पर अंदर की दीवार पर नमी संघनित (Moisture condensation / sweating) हो जाती है जिससे किनारे का अनाज सड़ जाता है। पूसा बिन में बाहर और अंदर कच्ची मिट्टी की ईंटें होने से तापीय चालकता नगण्य (Thermal insulation) रहती है और बीच में दबी 700-गेज काली LDPE पॉलीथीन शीट जल-वाष्प और गैसों को 100% रोक देती है—इस प्रकार यह मिट्टी और प्लास्टिक दोनों के गुणों का सर्वोत्तम संयोजन है!
  2. हर्मेटिक बायो-जनरेटेड एनोक्सिया (Bio-generated Anoxia in Hermetic Storage): वायुरुद्ध सुपरग्रेन या PICS बैग में कीट स्वयं अपने श्वसन से extO2 खर्च कर extCO2 बनाते हैं: extC6extH12extO6+6 extO2⟶6 extCO2+6 extH2extO+extEnergy जब extO2<2% हो जाती है, तो कीटों की उपापचय क्रिया रुक जाती है और वे अपने ही बनाए वातावरण में दम घुटने से मर जाते हैं।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)

व्यावहारिक उदाहरण: बीज उत्पादक किसानों के लिए चना और मूँग के बीज को ब्रूकिड (धोरा) से 1 वर्ष तक बिना रसायन बचाने की ‘PICS / SuperGrain Bag’ विधि

दलहनी बीजों (मूँग, चना, अरहर) में धोरा (Callosobruchus) सबसे बड़ी समस्या है। यदि किसान बीज को कटाई के बाद धूप में सुखाकर नमी <8 ext–9% कर ले और उसे तीन-परत वाले PICS बैग या SuperGrain हर्मेटिक बैग में भरकर हवा निकालकर कसकर बाँध दे, तो अंदर मौजूद अंडे और लार्वा 10 दिन के भीतर ऑक्सीजन की कमी (<2% extO2) से मर जाते हैं और बीज बिना किसी सल्फास या कीटनाशक के 12 महीने तक 100% सुरक्षित व उच्च अंकुरण वाला बना रहता है।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

सारणी 31.1: प्रमुख अनाज भंडारण संरचनाओं एवं आधुनिक विधियों की तुलनात्मक तालिका

भंडारण संरचना / विधि विकसित करने वाला संस्थान / क्षेत्र निर्माण सामग्री एवं विशिष्ट तकनीकी लक्षण क्षमता एवं उपयोग
1. पूसा बिन (Pusa Bin) ICAR-IARI, नई दिल्ली कच्ची मिट्टी की ईंटों की दो परतों के बीच 700-गेज (0.175 mm) काली LDPE पॉलीथीन शीट का सैंडविच; ऊष्मा-रोधी व नमी/गैस-रोधी। 0.4 से 3.2 टन (किसान/घरेलू स्तर)
2. हापुड़ कोठी / बिन (Hapur Bin) IGMRI (IGSI), हापुड़ (उ.प्र.) 20–24 गेज जस्ती लोहे (GI sheet) या एल्युमिनियम से बनी बेलनाकार धातु कोठी; चूहा-रोधी व धूम्रन हेतु वायुरुद्ध। 0.2 से 1.0 टन (घरेलू स्तर)
3. TNAU कीट-निष्कासन बिन TNAU, कोयंबटूर अंदर छिद्रित शंकु नलिकाएँ लगी होती हैं जो कीटों के भटकने के स्वभाव से बिना रसायन 90% भृंगों को नीचे अलग कर देती हैं। 0.1 से 0.5 टन (घरेलू/बीज स्तर)
4. बुखारी, कोठार एवं मोराई पारंपरिक ग्रामीण भारत मिट्टी, बाँस, लकड़ी और धान की पुआल की रस्सियों से बनी ऊँची संरचनाएँ (नमी व चूहा अवरोध कम)। 3.5 से 35 टन (पारंपरिक ग्रामीण)
5. CAP (Cover and Plinth) FCI / CWC खुले में 1.5 फीट ऊँचे प्लिंथ पर लकड़ी के डनेज रखकर बोरियों का ढेर और ऊपर से 800–1000 गेज काली LDPE पॉलीथीन कवर। 130–150 टन/स्टैक (आपातकालीन/अल्पकालिक)
6. थोक साइलो (Bulk Silos) FCI एवं आधुनिक मंडी जस्ती स्टील या RCC के विशाल बेलनाकार टावर; स्वचालित कन्वेयर, तापमान सेंसर, वातन व फॉस्फीन री-सर्कुलेशन। 5,000 से 50,000 टन (दीर्घकालिक थोक भंडारण)
7. हर्मेटिक बैग (SuperGrain / PICS) IRRI / Purdue Univ. 80 माइक्रोन बहु-स्तरीय गैस-रोधी HDPE लाइनर; जैव-जनित निम्न O2(<2%) व उच्च CO2 से रसायन-मुक्त कीट नाश। 50–100 kg (बीज व जैविक अनाज)
8. नियंत्रित वातावरण (CA / MA) आधुनिक निर्यात भंडारगृह वायुरुद्ध चैंबर में बाहर से >60% CO2 या >98% N2 तथा <1% O2 प्रवाहित कर 100% अवशेष-मुक्त कीट नियंत्रण। निर्यात एवं जैविक खाद्यान्न

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)

1. अनाज सुखाने पर भार में कमी एवं अंतिम भार की गणना सूत्र (Grain Drying Moisture Reduction Formula)

जब W1 किलोग्राम अनाज को प्रारंभिक नमी M1(%) से सुखाकर सुरक्षित भंडारण नमी M2(%) तक लाया जाता है, तो सूखने के बाद अनाज का अंतिम भार (W2) निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है:

W2=W1×(100−M1100−M2)

उदाहरण (Solved Example): एक किसान के पास 1000 kg (10 क्विंटल) मक्का है जिसमें कटाई के समय नमी 19% (M1=19) है। पूसा बिन में सुरक्षित भंडारण के लिए इसे सुखाकर 10% नमी (M2=10) पर लाने के बाद मक्का का अंतिम भार (W2) कितना रह जाएगा और कुल कितना पानी उड़ेगा?

  • सूखने के बाद अंतिम भार (W2):W2=1000×(100−19100−10)=1000×8190=900 kg (9 क्विंटल)
  • वाष्पित जल का भार:1000−900=100 kg पानी।

11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 31: भंडारण संरचनाएँ, पारंपरिक एवं आधुनिक अनाज भंडारण विधियाँ
सुरक्षित नमी सीमा एवं पारंपरिक संरचनाएँ
  • सुरक्षित नमी: खाद्यान्न <10-12%, दलहन <8-9%, तिलहन <6-8%
  • पारंपरिक ऊपरी संरचनाएँ: बुखारी, कोठार (लकड़ी), मोराई (पुआल रस्सी), मुड्डा, कनजा, मिट्टी की कोठी
  • भूमिगत संरचना: खत्ती / बांदा / पेव (सीलन व CO2 घुटन का दोष)
वैज्ञानिक उन्नत घरेलू संरचनाएँ
  • पूसा बिन (IARI नई दिल्ली): कच्ची ईंटों की दो परतों के बीच 700-गेज काली LDPE पॉलीथीन शीट सैंडविच
  • पूसा क्यूबिकल (12-24 टन) एवं PAU बिन (लुधियाना)
  • हापुड़ कोठी / बिन (IGMRI हापुड़, उ.प्र. — GI धातु शीट)
  • TNAU स्वचालित कीट-निष्कासन बिन (बिना रसायन 90% भृंग पृथक्करण)
FCI एवं वाणिज्यिक भंडारण (CAP & Silo)
  • FCI गोदाम: लकड़ी के डनेज (Dunnage) पर अधिकतम 15 बोरियों की छल्ली, दीवार से 60-75 cm दूर
  • CAP (Cover and Plinth): खुले में 1.5 फीट ऊँचे प्लिंथ पर 800-1000 गेज पॉलीथीन कवर से अस्थायी भंडारण
  • आधुनिक थोक साइलो (Bulk Silos): 5000-50,000 टन स्टील/RCC टावर (<0.2% हानि)
हर्मेटिक एवं नियंत्रित वातावरण (MA/CA)
  • हर्मेटिक बैग: SuperGrain Bag (IRRI), PICS 3-layer Bag व Silo Bag
  • जैव-जनित ऑक्सीजन कमी (<2% O2) से बिना रसायन कीटों की मृत्यु
  • नियंत्रित वातावरण (CA/MA): >60% CO2 (Hypercarbia) या >98% N2 एवं <1% O2 (Anoxia)
  • शून्य रासायनिक अवशेष — जैविक अनाज व बासमती निर्यात हेतु सर्वश्रेष्ठ

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)

कटाई के बाद अनाज को ‘पूसा बिन’ या ‘हर्मेटिक सुपरग्रेन बैग’ में सुरक्षित भंडारित करने का वैज्ञानिक प्रोटोकॉल
Step 1
चरण 1 (सफाई व श्रेणीकरण): थ्रेशिंग के बाद अनाज से टूटे दाने, भूसा, डंठल और खरपतवार के बीज अलग करना (क्योंकि टूटे दाने द्वितीयक कीटों को बुलाते हैं)
⬇
Step 2
चरण 2 (धूप में सुखाना — Sun Drying): पक्के फर्श या तिरपाल पर अनाज को सुखाकर नमी को खाद्यान्न में <10–12% और दलहन में <8–9% तक लाना (दाँत से दबाने पर ‘कट’ की तेज आवाज आए)
⬇
Step 3
चरण 3 (ठंडा करना — Cooling before Filling): धूप में सूखे गर्म अनाज को सीधे कभी बिन में न भरें (वरना पसीना/संघनन आएगा); उसे छाया में 4–6 घंटे कमरे के तापमान तक ठंडा करें
⬇
Step 4
चरण 4 (वायुरुद्ध भराव — Airtight Filling): ठंडे व सूखे अनाज को ‘पूसा बिन’ (700-गेज LDPE सैंडविच) या ‘SuperGrain/PICS हर्मेटिक बैग’ में ऊपर तक पूरा भरकर ढक्कन व आउटलेट को मिट्टी/टेप से वायुरुद्ध सील करना

13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • ‘पूसा बिन’ (Pusa Bin) का विकास भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI, नई दिल्ली) द्वारा किया गया है, जिसमें कच्ची मिट्टी की ईंटों की दो परतों के बीच ‘700-गेज की काली LDPE पॉलीथीन शीट’ लगी होती है।
  • भारतीय अन्न भंडारण प्रबंधन एवं अनुसंधान संस्थान (IGMRI — पूर्व में IGSI, 1958) ‘हापुड़ (उत्तर प्रदेश)’ में स्थित है, जिसने ‘हापुड़ कोठी/बिन’ विकसित की।
  • भंडारण में ‘CAP’ का पूर्ण रूप ‘Cover and Plinth’ (कवर एंड प्लिंथ) है, जिसका उपयोग FCI द्वारा खुले में अस्थायी वैज्ञानिक भंडारण के लिए किया जाता है।
  • अनाज के सुरक्षित दीर्घकालिक भंडारण के लिए सुरक्षित नमी का स्तर खाद्यान्न में ’10–12% से कम’, दलहन में ‘8–9% से कम’ और तिलहन में ‘6–8% से कम’ होना चाहिए।
  • नियंत्रित वातावरण भंडारण (Controlled Atmosphere Storage) में कीटों को मारने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की सांद्रता ‘60% से अधिक’ और ऑक्सीजन (O2) की सांद्रता ‘1–2% से कम’ रखी जाती है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)

त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):

  • सुरक्षित नमी सीमा: खाद्यान्न <10 ext–12%, दलहन <8 ext–9%, तिलहन <6 ext–8%।
  • पारंपरिक संरचनाएँ: बुखारी, कोठार, मोराई, मुड्डा, कनजा, खत्ती/बांदा।
  • पूसा बिन (IARI): कच्ची ईंटों की दो परतों के बीच 700-गेज काली LDPE पॉलीथीन शीट।
  • हापुड़ कोठी: IGMRI (हापुड़, उ.प्र.) द्वारा विकसित GI धातु बिन।
  • वाणिज्यिक व आधुनिक: CAP (Cover & Plinth), साइलो (Bulk Silos), हर्मेटिक बैग (SuperGrain / PICS) एवं CA/MA (>60% extCO2,<1 ext–2% extO2)।

15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)

1. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI, नई दिल्ली) द्वारा विकसित उन्नत घरेलू भंडारण संरचना ‘पूसा बिन’ (Pusa Bin) में नमी और हवा को रोकने के लिए कच्ची ईंटों की दो परतों के बीच कितने गेज की काली एलडीपीई पॉलीथीन शीट लगाई जाती है?
(A) 700-गेज (700-gauge black LDPE sheet / 0.175 mm)
(B) 100-गेज
(C) 50-गेज
(D) 2000-गेज
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) 700-गेज (700-gauge black LDPE sheet / 0.175 mm)
व्याख्या: पूसा बिन की सबसे प्रमुख पहचान कच्ची ईंटों की दो दीवारों के बीच 700-गेज की काली पॉलीथीन शीट का सैंडविच होना है।
2. भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा खुले में अस्थायी वैज्ञानिक अनाज भंडारण के लिए प्रयुक्त ‘CAP’ विधि का पूर्ण रूप (Full Form) क्या है?
(A) कवर एंड प्लिंथ (Cover and Plinth)
(B) कोल्ड एंड प्रिजर्व्ड (Cold and Preserved)
(C) कंक्रीट एंड प्लास्टिक (Concrete and Plastic)
(D) क्रॉप एंड पेस्ट (Crop and Pest)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) कवर एंड प्लिंथ (Cover and Plinth)
व्याख्या: CAP (Cover and Plinth) में ऊँचे प्लिंथ पर डनेज रखकर अनाज की बोरियों को पॉलीथीन कवर से ढककर रखा जाता है।
3. भारत का शीर्ष ‘भारतीय अन्न भंडारण प्रबंधन एवं अनुसंधान संस्थान’ (IGMRI — पूर्व में Indian Grain Storage Institute, 1958) कहाँ स्थित है जिसने ‘हापुड़ कोठी’ विकसित की?
(A) हापुड़ (उत्तर प्रदेश)
(B) जोधपुर (राजस्थान)
(C) कोयंबटूर (तमिलनाडु)
(D) कटक (ओडिशा)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) हापुड़ (उत्तर प्रदेश)
व्याख्या: IGMRI (Indian Grain Storage Management and Research Institute) हापुड़, उत्तर प्रदेश में स्थित है।
4. गेहूँ और चावल जैसी खाद्यान्न फसलों (Cereals) तथा चना और मूँग जैसी दलहनी फसलों (Pulses) के सुरक्षित दीर्घकालिक भंडारण के लिए दाने में नमी की अधिकतम सुरक्षित सीमा क्या होनी चाहिए?
(A) खाद्यान्न में 10–12% से कम एवं दलहन में 8–9% से कम
(B) खाद्यान्न में 20% एवं दलहन में 18%
(C) दोनों में 25%
(D) खाद्यान्न में 2% एवं दलहन में 1%
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) खाद्यान्न में 10–12% से कम एवं दलहन में 8–9% से कम
व्याख्या: खाद्यान्न <10-12%, दलहन <8-9% और तिलहन <6-8% नमी पर कीटों और फफूंद से सुरक्षित रहते हैं।
5. बिना किसी रासायनिक कीटनाशक के ‘नियंत्रित वातावरण भंडारण’ (Controlled Atmosphere Storage — CA) में भंडारण कीटों को मारने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और ऑक्सीजन (O2) का क्या स्तर रखा जाता है?
(A) CO2 > 60% (उच्च CO2) एवं O2 < 1–2% (निम्न O2)
(B) CO2 = 0% एवं O2 = 50%
(C) CO2 = 5% एवं O2 = 21%
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) CO2 > 60% (उच्च CO2) एवं O2 < 1–2% (निम्न O2)
व्याख्या: >60% CO2 (Hypercarbia) और <1-2% O2 (Hypoxia) पर कीटों के श्वास रंध्र खुल जाते हैं और वे निर्जलीकरण व दम घुटने से मर जाते हैं।
6. गोदामों में अनाज की बोरियों की छल्ली (Stack) लगाते समय फर्श की सीलन को बोरियों में जाने से रोकने के लिए बोरियों के नीचे रखे जाने वाले लकड़ी के क्रेट, बाँस की चटाई या पॉलीथीन पैलेट को क्या कहते हैं?
(A) डनेज (Dunnage)
(B) एलिवेटर (Elevator)
(C) साइलो (Silo)
(D) बुखारी (Bukhari)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) डनेज (Dunnage)
व्याख्या: फर्श और पहली बोरी की परत के बीच नमी रोकने के लिए लगाए जाने वाले आधार को ‘डनेज’ (Dunnage) कहते हैं।
7. निम्नलिखित में से कौन-सी एक पारंपरिक ‘भूमिगत’ (Underground pit) अनाज भंडारण संरचना है?
(A) खत्ती / बांदा / पेव (Khatti / Banda / Pev)
(B) मोराई (Morai)
(C) बुखारी (Bukhari)
(D) कोठार (Kothar)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) खत्ती / बांदा / पेव (Khatti / Banda / Pev)
व्याख्या: खत्ती या बांदा जमीन के नीचे खोदे गए सुराही के आकार के भूमिगत भंडारण गड्ढे हैं, जबकि बुखारी, कोठार व मोराई जमीन के ऊपर की संरचनाएँ हैं।
8. किस विश्वविद्यालय ने ऐसी ‘स्वचालित कीट-निष्कासन बिन’ (Automatic Insect Removal Bin) विकसित की है जो कीटों के भटकने के स्वभाव का उपयोग कर बिना किसी रसायन के अनाज से 90% भृंगों को अलग कर देती है?
(A) तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU), कोयंबटूर
(B) IARI, नई दिल्ली
(C) PAU, लुधियाना
(D) CAZRI, जोधपुर
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU), कोयंबटूर
व्याख्या: TNAU (मोहन एवं सहयोगियों) ने स्वचालित कीट-निष्कासन बिन और TNAU कीट प्रोब ट्रैप विकसित किया है।
9. यदि 1000 kg गेहूँ को 20% प्रारंभिक नमी से सुखाकर 10% अंतिम नमी पर लाया जाए, तो सूखने के बाद गेहूँ का अंतिम भार कितना रह जाएगा?
(A) 888.9 kg
(B) 900.0 kg
(C) 950.0 kg
(D) 800.0 kg
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) 888.9 kg
व्याख्या: W2 = W1 × (100 – M1)/(100 – M2) = 1000 × (80 / 90) = 888.89 kg।
10. ‘सुपरग्रेन बैग’ (SuperGrain Bag) और ‘पिक्स बैग’ (PICS — Purdue Improved Crop Storage Bag) किस आधुनिक भंडारण सिद्धांत पर कार्य करते हैं?
(A) वायुरुद्ध हर्मेटिक भंडारण (Hermetic Storage — जैव-जनित ऑक्सीजन ह्रास व CO2 वृद्धि)
(B) रासायनिक धूम्रन
(C) प्रशीतन (Refrigeration)
(D) गामा विकिरण
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) वायुरुद्ध हर्मेटिक भंडारण (Hermetic Storage — जैव-जनित ऑक्सीजन ह्रास व CO2 वृद्धि)
व्याख्या: SuperGrain और PICS बैग गैस-रोधी हर्मेटिक बैग हैं जिनमें कीट स्वयं की सांस से ऑक्सीजन खत्म कर मर जाते हैं।

16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)

  1. ‘पूसा बिन’ (Pusa Bin) का विकास IARI (नई दिल्ली) द्वारा किया गया है जिसमें कच्ची ईंटों के बीच ‘700-गेज काली LDPE पॉलीथीन शीट’ लगाई जाती है।
  2. ‘हापुड़ कोठी’ का विकास IGMRI (पूर्व में IGSI), हापुड़ (उत्तर प्रदेश) द्वारा किया गया है।
  3. भंडारण में ‘CAP’ का अर्थ ‘Cover and Plinth’ (कवर एंड प्लिंथ) है जो FCI की खुले में अस्थायी भंडारण विधि है।
  4. सुरक्षित भंडारण हेतु अनाज में नमी खाद्यान्न में <10–12%, दलहन में <8–9% और तिलहन में <6–8% होनी चाहिए।
  5. नियंत्रित वातावरण (CA) भंडारण में कीट नियंत्रण हेतु CO2 > 60% और O2 < 1–2% रखी जाती है।

(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)

1. ‘पूसा बिन’ का विकास किस संस्थान ने किया और इसमें कितने गेज की पॉलीथीन शीट प्रयुक्त होती है?
उत्तर: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने; इसमें 700-गेज (0.175 mm) मोटी काली LDPE पॉलीथीन शीट प्रयुक्त होती है।
2. ‘CAP’ भंडारण का पूर्ण रूप लिखिए।
उत्तर: कवर एंड प्लिंथ (Cover and Plinth Storage)।
3. भारत की किन्हीं चार पारंपरिक ग्रामीण अनाज भंडारण संरचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर: (1) बुखारी (Bukhari), (2) कोठार (Kothar), (3) मोराई (Morai), और (4) भूमिगत खत्ती/बांदा (Khatti)।
4. खाद्यान्न, दलहन और तिलहन के सुरक्षित भंडारण के लिए नमी की अधिकतम सुरक्षित सीमा क्या है?
उत्तर: खाद्यान्न (गेहूँ/चावल): <10–12%; दलहन (चना/मूँग): <8–9%; तिलहन (सरसों/मूँगफली): <6–8%।
5. गोदाम में बोरियों के नीचे ‘डनेज’ (Dunnage) क्यों लगाया जाता है?
उत्तर: फर्श से उठने वाली जमीन की सीलन (Capillary moisture) को सबसे नीचे वाली बोरियों के अनाज को खराब करने से रोकने के लिए।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)

1. ‘पूसा बिन’ (Pusa Bin) की संरचना, कार्यप्रणाली और धातु की कोठियों (Metal bins) की तुलना में इसके लाभ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पूसा बिन (IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित) एक उन्नत घरेलू भंडारण संरचना (क्षमता 0.4–3.2 टन) है। इसे पक्के आधार पर कच्ची मिट्टी की ईंटों की दो परतों (प्रत्येक 7 cm मोटी) से बनाया जाता है और दोनों परतों के ठीक बीच में 700-गेज (0.175 mm) मोटी काली LDPE पॉलीथीन शीट को सैंडविच कर हीट-सील किया जाता है। धातु की कोठियों (Metal bins) में धूप से गर्म और रात में ठंडा होने के कारण अंदर की दीवार पर नमी संघनित (Moisture sweating) हो जाती है जिससे अनाज सड़ता है; जबकि पूसा बिन में कच्ची मिट्टी उत्कृष्ट ऊष्मा-रोधी (Thermal insulator) का काम करती है और 700-गेज पॉलीथीन बाहरी नमी व हवा को 100% रोककर इसे धूम्रन हेतु पूर्णतः वायुरुद्ध बनाती है।
2. ‘CAP भंडारण’ (Cover and Plinth Storage) और ‘आधुनिक साइलो भंडारण’ (Bulk Silo Storage) की तुलना कीजिए।
उत्तर: (1) CAP (कवर एंड प्लिंथ) भंडारण: यह खुले में कम लागत पर बोरियों में अस्थायी भंडारण (6–10 माह) की विधि है। इसमें जमीन से 1.5 फीट ऊँचे पक्के प्लिंथ पर लकड़ी के डनेज रखकर 130–150 टन बोरियों का गुंबदाकार ढेर बनाया जाता है और ऊपर से 800–1000 गेज की काली पॉलीथीन से ढककर रस्सियों से बाँधा जाता है। इसमें मौसम व पक्षियों से क्षति का जोखिम रहता है। (2) साइलो (Bulk Silo) भंडारण: यह बिना बोरियों के खुले अनाज को 5,000–50,000 टन के विशाल स्टील या कंक्रीट के टावरों में दीर्घकाल तक रखने की स्वचालित विधि है, जिसमें तापमान सेंसर, वातन पंखे और री-सर्कुलेशन धूम्रन से भंडारण हानि <0.2% रहती है।
3. ‘हर्मेटिक भंडारण’ (Hermetic Storage — SuperGrain / PICS Bags) और ‘नियंत्रित वातावरण भंडारण’ (CA/MA Storage) कैसे बिना रसायन के कीटों को मारते हैं?
उत्तर: (1) हर्मेटिक भंडारण: जब सूखे अनाज (<10% नमी) को बहु-स्तरीय गैस-रोधी प्लास्टिक बैग (SuperGrain या PICS 3-layer bag) में वायुरुद्ध बंद किया जाता है, तो अनाज और कीटों के स्वयं के श्वसन से अंदर की ऑक्सीजन घटकर <2% रह जाती है और CO2 बढ़कर >15–20% हो जाती है, जिससे कीट दम घुटने और निर्जलीकरण से मर जाते हैं। (2) नियंत्रित वातावरण (CA/MA) भंडारण: इसमें वायुरुद्ध गोदाम या साइलो में बाहर से सिलेंडर द्वारा CO2 गैस (>60%) या N2 गैस (>98%) प्रवाहित कर O2 को <1% कर दिया जाता है। दोनों विधियों में अनाज पर शून्य रासायनिक अवशेष रहता है।
4. एक आदर्श अनाज भंडारण संरचना (Ideal Grain Storage Structure) के प्रमुख अभियांत्रिकी गुण लिखिए।
उत्तर: (1) यह जमीन की सीलन और वर्षा जल से पूर्णतः सुरक्षित (Moisture-proof) होनी चाहिए। (2) इसकी दीवारें कम तापीय चालकता वाली (Thermally insulated) होनी चाहिए ताकि तापमान में उतार-चढ़ाव से अंदर नमी संघनित न हो। (3) यह चूहों, पक्षियों और बाहरी कीटों के प्रवेश से पूर्णतः सुरक्षित (Rodent & Bird-proof) होनी चाहिए। (4) यह धूम्रन (Fumigation) के समय फॉस्फीन गैस को रोकने के लिए पूर्णतः वायुरुद्ध (Airtight / Gas-proof) होनी चाहिए और इसमें अनाज भरने (Inlet) व निकालने (Outlet) की सुगम व्यवस्था होनी चाहिए।
5. भारत की किन्हीं चार पारंपरिक भंडारण संरचनाओं (बुखारी, कोठार, मोराई एवं खत्ती) का संक्षिप्त वर्णन कीजिए और उनके प्रमुख दोष बताइए।
उत्तर: (1) बुखारी: मिट्टी व बाँस से बनी बेलनाकार संरचना। (2) कोठार: लकड़ी के तख्तों से बना कमरा-नुमा भंडार। (3) मोराई: धान की पुआल की रस्सियों से बनी उल्टे शंकु जैसी संरचना। (4) खत्ती/बांदा: जमीन के नीचे खोदे गए भूमिगत गड्ढे। प्रमुख दोष: ये संरचनाएँ नमी-रोधी और वायुरुद्ध नहीं होतीं, इनमें चूहे आसानी से बिल बना लेते हैं, दीवारों की दरारों में खपड़ा भृंग छिपे रहते हैं और इनमें प्रभावी धूम्रन (Fumigation) करना असंभव होता है।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)

1. भारत में प्रचलित पारंपरिक ग्रामीण भंडारण संरचनाओं (बुखारी, कोठार, मोराई, खत्ती), वैज्ञानिक रूप से उन्नत घरेलू संरचनाओं (पूसा बिन, हापुड़ कोठी, TNAU बिन) और आधुनिक वाणिज्यिक भंडारण प्रणालियों (CAP, FCI गोदाम एवं थोक साइलो) का सचित्र एवं तुलनात्मक वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: तुलनात्मक सारणी 31.1 के साथ तीनों श्रेणियों की संरचनाओं, पूसा बिन के 700-गेज LDPE सैंडविच डिजाइन, CAP और साइलो की कार्यप्रणाली का विस्तार से वर्णन करें।
2. रासायनिक धूम्रकों के विकल्प के रूप में आधुनिक हरित भंडारण प्रौद्योगिकियों—’हर्मेटिक भंडारण’ (SuperGrain / PICS Bags & Silo Bags) और ‘नियंत्रित/संशोधित वातावरण भंडारण’ (Controlled/Modified Atmosphere Storage: उच्च CO2 व निम्न O2)—के सिद्धांत, क्रियाविधि और लाभों की विवेचना कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: जैव-जनित एनोक्सिया (<2% O2), बाह्य CO2 (>60%) व N2 (>98%) प्रवाहन, श्वास रंध्र खुलने से कीट निर्जलीकरण और जैविक व निर्यात खाद्यान्नों में इनके महत्व की व्याख्या करें।
3. भंडारण में अनाज की नमी (Grain Moisture) और तापमान किस प्रकार कीटों, बरूथियों और अफलाटॉक्सिन फफूंद के विकास को नियंत्रित करते हैं? विभिन्न फसलों की सुरक्षित नमी सीमा और सुखाने पर भार हानि सूत्र का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: खाद्यान्न (<10–12%), दलहन (<8–9%) व तिलहन (<6–8%) की सुरक्षित नमी सीमा, हॉट-स्पॉट निर्माण और W2=W1(100−M1)/(100−M2) सूत्र के संख्यात्मक उदाहरण का वर्णन करें।

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