ENT 311 Lecture 28: आक्रामक विदेशी नाशीकीटों के प्रबंधन की रणनीतियाँ (Management Strategies for Invasive Insect Pests)

ENT 311 · Pest Management in Crops and Stored Grains — Final Notes
विषय सूची · Quick Navigation
02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)Lecture 28: आक्रामक विदेशी नाशीकीटों के प्रबंधन की रणनीतियाँ (Management Strategies for Invasive Insect Pests)
विजुअल लर्निंग एवं वैज्ञानिक चित्र (Visual Concept Diagrams — Lecture 28)
आक्रामक विदेशी कीटों की 4-स्तरीय राष्ट्रीय रक्षा प्रणाली: पादप संगरोध (DIP Act 1914) एवं शास्त्रीय जैविक नियंत्रण (ICAR-NBAIR)
02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)
इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:
- आक्रामक विदेशी नाशीकीटों के प्रबंधन के चार-स्तरीय रक्षा ढाँचे—(1) प्रवेश-पूर्व रोकथाम व संगरोध (Pre-border & Border Plant Quarantine), (2) प्रवेश-पश्चात त्वरित निगरानी व उन्मूलन (Early Detection & Rapid Eradication), (3) शास्त्रीय जैविक नियंत्रण (Classical Biological Control — मूल देश से प्राकृतिक शत्रु का आयात), और (4) फसल-विशिष्ट आपातकालीन IPM—को समझना।
- भारत में पादप संगरोध के कानूनी व संस्थागत तंत्र—विनाशकारी कीट एवं नाशीजीव अधिनियम, 1914 (DIP Act, 1914), पादप संगरोध आदेश, 2003 (Plant Quarantine Order, 2003), फाइटोसैनिटरी प्रमाणपत्र (Phytosanitary Certificate – PSC), DPPQS फरीदाबाद और ICAR-NBPGR नई दिल्ली—का अध्ययन करना।
- ICAR-NBAIR (बेंगलुरु) द्वारा पपीता मिलीबग हेतु ‘Acerophagus papayae’, कसावा मिलीबग हेतु ‘Anagyrus lopezi’, रगोज व्हाइटफ्लाई हेतु ‘Encarsia guadeloupae’ और कॉटनिया कुशन स्केल हेतु ‘Rodolia cardinalis’ के ऐतिहासिक सफल शास्त्रीय जैविक नियंत्रण उदाहरणों को कंठस्थ करना।
- मक्का में फॉल आर्मीवर्म (FAW — Spodoptera frugiperda) के राष्ट्रीय IPM प्रोटोकॉल (बीज उपचार, फेरोमोन ट्रैप, Telenomus remus, Metarhizium rileyi, SfNPV एवं स्पिनोटोरम/क्लोरेंट्रानिलीप्रोल/इमामेक्टिन) में पारंगत होना।
03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)
मूल सामग्री (Core Course Content): पिछले व्याख्यान (Lecture 27) में हमने देखा कि आक्रामक विदेशी कीट क्यों इतने विनाशकारी होते हैं। इस व्याख्यान (Lecture 28) में हम यह सीखेंगे कि किसी देश की सीमा पर और सीमा के अंदर प्रवेश कर जाने के बाद इन विदेशी आक्रामक नाशीकीटों का वैज्ञानिक प्रबंधन कैसे किया जाता है।
आक्रामक कीट प्रबंधन के दो सबसे शक्तिशाली स्तंभ हैं: पहला—’पादप संगरोध’ (Plant Quarantine — DIP Act, 1914 एवं PQ Order, 2003) जो बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर ही विदेशी कीटों का प्रवेश रोकता है; और दूसरा—जब कोई विदेशी कीट देश में घुसकर फैल जाए, तब उसके मूल देश से उसका प्राकृतिक शत्रु (परजीवी ततैया या परभक्षी भृंग) आयात करके छोड़ना, जिसे ‘शास्त्रीय जैविक नियंत्रण’ (Classical Biological Control) कहते हैं। वर्ष 2010 में भारत में पपीता मिलीबग का परजीवी Acerophagus papayae द्वारा किया गया नियंत्रण विश्व के कृषि इतिहास की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है!
04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)
05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)
1. स्तर 1: विधिक एवं पादप संगरोध रणनीतियाँ (Legal & Plant Quarantine Strategies — Pre-Border & Border Defense)
- 1. विनाशकारी कीट एवं नाशीजीव अधिनियम, 1914 (Destructive Insects and Pests Act — DIP Act, 1914): ब्रिटिश भारत सरकार द्वारा 3 फरवरी 1914 को पारित भारत का प्रथम पादप संगरोध कानून।
- 2. पादप संगरोध (भारत में आयात का विनियमन) आदेश, 2003 [Plant Quarantine (Regulation of Import into India) Order, 2003]: 1 जनवरी 2004 से लागू वर्तमान मुख्य संगरोध कानून, जिसमें आयात से पूर्व Import Permit (IP), Phytosanitary Certificate (PSC) और बंदरगाह/हवाई अड्डे पर Post-Entry Quarantine (PEQ) निरीक्षण व मिथाइल ब्रोमाइड/फॉस्फीन धूम्रन अनिवार्य है।
- 3. प्रमुख राष्ट्रीय संगरोध संस्थाएँ:
- DPPQS (Directorate of Plant Protection, Quarantine & Storage, फरीदाबाद — स्थापना 1946): व्यावसायिक कृषि आयात-निर्यात के लिए देश के 70+ बंदरगाहों, हवाई अड्डों और भूमि सीमाओं पर पादप संगरोध स्टेशन संचालित करता है।
- ICAR-NBPGR (National Bureau of Plant Genetic Resources, नई दिल्ली — स्थापना 1976): अनुसंधान एवं प्रजनन हेतु आयातित जननद्रव्य (Germplasm seeds/planting material) की संगरोध जाँच और ‘National Plant Quarantine Station’ का संचालन करता है।
- 4. घरेलू संगरोध (Domestic Quarantine in India): देश के अंदर एक राज्य से दूसरे राज्य में कीट के फैलाव को रोकने का कानून—जैसे:
• लद्दाख से सेब के कॉडलिंग मॉथ (Cydia pomonella) को कश्मीर/हिमाचल में जाने से रोकना;
• दक्षिण भारत से कॉफी बेरी बोरर (Hypothenemus hampei) और केले के बंची टॉप वायरस का प्रसार रोकना;
• तमिलनाडु के कोडाइकनाल/नीलगिरि से आलू के गोल्डन सिस्ट नेमाटोड (Globodera rostochiensis) को बाहर जाने से रोकना।
2. स्तर 2: शास्त्रीय जैविक नियंत्रण (Classical Biological Control — भारत की विश्व-प्रसिद्ध सफलता कथाएँ!)
जब कोई विदेशी आक्रामक कीट संगरोध को चकमा देकर देश में स्थापित हो जाता है, तो रासायनिक कीटनाशक उसे रोक नहीं पाते। तब ‘शास्त्रीय जैविक नियंत्रण’ द्वारा उसके मूल देश से विशिष्ट परजीवी या परभक्षी मँगाया जाता है:
- पपीता मिलीबग (Paracoccus marginatus, 2008) परजीवी Acerophagus papayae (2010):
- 2008–09 में पपीता मिलीबग ने तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र में पपीता व शहतूत को तबाह कर दिया और कोई कीटनाशक काम नहीं कर रहा था।
- 2010 में ICAR-NBAIR (बेंगलुरु) ने USDA की मदद से प्यूर्टो रिको से तीन एनसिरटिड परजीवी ततैया—Acerophagus papayae (सर्वश्रेष्ठ!), Anagyrus loecki और Pseudleptomastix mexicana—आयात कर किसानों को मुफ्त बाँटे। मात्र 5–6 महीनों में पपीता मिलीबग 95% समाप्त हो गया और देश को प्रतिवर्ष ₹1,500 करोड़ से अधिक की बचत हुई!
- कसावा मिलीबग (Phenacoccus manihoti, 2020) परजीवी Anagyrus lopezi (2021):
- केरल और तमिलनाडु में 2020 में आए कसावा मिलीबग के नियंत्रण हेतु NBAIR ने बेनिन (अफ्रीका/थाईलैंड IITA) से विशिष्ट परजीवी ततैया Anagyrus lopezi आयात कर छोड़ा।
- रगोज स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई (Aleurodicus rugioperculatus, 2016) परजीवी Encarsia guadeloupae एवं कवक Isaria fumosorosea:
- नारियल पर रगोज व्हाइटफ्लाई के नियंत्रण हेतु एफेलिनिड परजीवी Encarsia guadeloupae और Encarsia dispersa के संरक्षण व केला पत्तियों से पुनर्वितरण, परभक्षी Dichochrysa astur तथा कवक Isaria fumosorosea (Cordyceps fumosorosea — NBAIR-Pfu-5) के छिड़काव और कीटनाशक-मुक्त नीति (‘No-Insecticide Holiday Policy’) से शानदार नियंत्रण मिला!
- यूकेलिप्टस गॉल वास्प (Leptocybe invasa, 2006) परजीवी Quadrastichus mendeli एवं Megastigmus viggianii।
- कॉटनिया कुशन स्केल (Icerya purchasi, 1921 नीलगिरि) ऑस्ट्रेलिया से आयातित परभक्षी वेडालिया लेडीबर्ड भृंग Rodolia cardinalis (1929 — आधुनिक जैविक नियंत्रण का क्लासिक ऐतिहासिक उदाहरण!)।
- सेब का ऊनी माहू (Eriosoma lanigerum) इंग्लैंड से आयातित परजीवी Aphelinus mali (1930); तथा सबबूल साइलिड (Heteropsylla cubana) परभक्षी भृंग Curinus coeruleus (1988)।
3. स्तर 3: मक्का के आक्रामक ‘फॉल आर्मीवर्म’ (Spodoptera frugiperda) का संपूर्ण IPM पैकेज
- 1. बुवाई-पूर्व एवं सस्य उपाय: ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई (प्यूपा नाश); मानसून आते ही पूरे गाँव में एक साथ समकालिक बुवाई (Synchronous sowing); मक्का के साथ अरहर, लोबिया या उड़द की अंतःफसल उगाना तथा खेत के चारों ओर नेपियर घास की 3–4 कतारें (Trap crop) लगाना।
- 2. बीज उपचार (Seed Treatment — शुरुआती 2–3 सप्ताह की सुरक्षा हेतु):
• मक्का के बीज को सायनट्रानिलीप्रोल 19.8% + थायोमेथोक्साम 19.8% FS (‘Fortenza Duo’ @ 6 mL/kg बीज) या थायोमेथोक्साम 30% FS (@ 8–10 mL/kg बीज) से उपचारित कर बोना। - 3. यांत्रिक एवं फेरोमोन निगरानी:
• अंकुरण के तुरंत बाद निगरानी हेतु 5 FAW फेरोमोन पाश/ha और मास-ट्रैपिंग हेतु 15–25 फनेल फेरोमोन पाश/ha लगाना; पत्तियों से अंड-समूहों को कुचलना; तथा पोंगली में रेत + चूना (9:1 अनुपात) या लकड़ी की राख की एक चुटकी डालना। - 4. जैविक एवं वानस्पतिक नियंत्रण (अंड-स्फुटन से प्रथम-द्वितीय इल्ली अवस्था पर):
- अंड परजीवी Telenomus remus या Trichogramma pretiosum (@ 50,000–1,00,000/ha) के कार्ड लगाना।
- प्रारंभिक पिन-होल दिखते ही 5% नीम निंबोली अर्क (NSKE 5% / Azadirachtin 1500 ppm @ 5 mL/L) का स्प्रे।
- पोंगली की ओर नोजल रखकर विशिष्ट विषाणु SfNPV (Spodoptera frugiperda NPV @ 250–500 LE/ha) या हरित कवक Metarhizium (Nomuraea) rileyi (@ 3–5 g/L) या Bacillus thuringiensis var. kurstaki (@ 2 g/L) का छिड़काव।
- 5. रासायनिक नियंत्रण (जब क्षति ETL पार कर जाए — नोजल को सीधे पोंगली/Whorl में निशाना बनाकर छिड़कें!):
• स्पिनोटोरम 11.7% SC (Delegate/Largo @ 0.5 mL/L पानी या 250 mL/ha) या
• क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC (Coragen @ 0.4 mL/L या 150–200 mL/ha) या
• इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (Proclaim @ 0.4 g/L या 200 g/ha) या
• नोवालुरॉन + इंडोक्साकार्ब (और दानों के दुग्धावस्था में जहरीले रसायन न छिड़कें)।
06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)
आक्रामक कीट प्रबंधन की 4-स्तरीय राष्ट्रीय रक्षा प्रणाली का वर्गीकरण:
- 1. निषेध / अपवर्जन (Exclusion / Prevention): अंतरराष्ट्रीय व घरेलू पादप संगरोध (DIP Act 1914, PQ Order 2003, PSC, PEQ)।
- 2. प्रारंभिक पहचान एवं उन्मूलन (Early Detection & Eradication): बंदरगाहों के आसपास फेरोमोन निगरानी व नए छोटे पैच का समूल विनाश।
- 3. रोकथाम एवं शास्त्रीय जैविक नियंत्रण (Containment & Classical Biocontrol): मूल देश से सह-विकसित परजीवी/परभक्षी का आयात (ICAR-NBAIR)।
- 4. दीर्घकालिक समन्वित प्रबंधन (Long-term Bio-intensive IPM): बीज उपचार, ट्रैप क्रॉपिंग, मास-ट्रैपिंग, रोगाणु (NPV/कवक) व सुरक्षित हरित रसायन।
07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)
- ‘रगोज व्हाइटफ्लाई में कीटनाशक-निषेध’ का सिद्धांत (Principle of Insecticide Holiday in Rugose Spiralling Whitefly Management): नारियल पर रगोज स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई आने पर यदि किसान रासायनिक कीटनाशक छिड़कता है, तो सफेद मक्खी के मोमी कवच के कारण मक्खी नहीं मरती, बल्कि उसका प्राकृतिक परजीवी Encarsia guadeloupae मर जाता है और प्रकोप दोगुना हो जाता है! अतः इसमें सिंथेटिक कीटनाशक पूर्णतः बंद रखकर केवल पानी की धार, पीली पॉलीथीन स्टिकी शीट, Encarsia संरक्षण और Isaria fumosorosea कवक का ही प्रयोग किया जाता है।
08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)
केस स्टडी: पपीता मिलीबग (Paracoccus marginatus) पर ICAR-NBAIR की ₹1,500 करोड़ की जैविक विजय
वर्ष 2008–09 में जब विदेशी पपीता मिलीबग ने तमिलनाडु में पपीते के बाग और रेशम कीट के शहतूत के बागानों को पूरी तरह सफेद मोम से ढककर सुखा दिया, तब किसानों ने अंधाधुंध कीटनाशक छिड़के पर कोई लाभ नहीं हुआ। जुलाई 2010 में ICAR-NBAIR (बेंगलुरु) ने प्यूर्टो रिको से परजीवी ततैया Acerophagus papayae मँगाया और उसका बड़े पैमाने पर गुणन कर किसानों के खेतों में छोड़ा। मात्र 5 महीने के भीतर Acerophagus papayae ने मिलीबग को 95% से अधिक समाप्त कर दिया और आज यह परजीवी प्रकृति में स्वतः स्थापित होकर बिना किसी खर्च के पपीते की रक्षा कर रहा है!
09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)
तुलनात्मक सारणी 28.1: भारत में आक्रामक विदेशी नाशीकीटों के विरुद्ध आयातित प्रमुख शास्त्रीय जैविक नियंत्रण कारक (Classical Biocontrol Agents)
| आक्रामक विदेशी नाशीकीट | वैज्ञानिक नाम | सफल जैविक नियंत्रण कारक (Bio-agent) | बायो-एजेंट की प्रकृति एवं कुल |
|---|---|---|---|
| 1. कॉटनिया कुशन स्केल (1921) | Icerya purchasi | वेडालिया भृंग (Rodolia cardinalis — ऑस्ट्रेलिया से, 1929) | परभक्षी भृंग (Coccinellidae : Coleoptera) |
| 2. सेब का ऊनी माहू (1889) | Eriosoma lanigerum | Aphelinus mali (इंग्लैंड से, 1930) | अंतःपरजीवी ततैया (Aphelinidae : Hymenoptera) |
| 3. सबबूल साइलिड (1988) | Heteropsylla cubana | Curinus coeruleus (मेक्सिको/थाईलैंड से, 1988) | परभक्षी लेडीबर्ड भृंग (Coccinellidae) |
| 4. पपीता मिलीबग (2008) | Paracoccus marginatus | Acerophagus papayae (प्यूर्टो रिको/USA से, 2010) | अंतःपरजीवी ततैया (Encyrtidae : Hymenoptera) |
| 5. यूकेलिप्टस गॉल वास्प (2006) | Leptocybe invasa | Quadrastichus mendeli & Megastigmus viggianii | परजीवी ततैया (Eulophidae / Torymidae) |
| 6. रगोज स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई (2016) | Aleurodicus rugioperculatus | Encarsia guadeloupae एवं कवक Isaria fumosorosea | परजीवी ततैया (Aphelinidae) एवं कीट-रोगजनक कवक |
| 7. फॉल आर्मीवर्म (2018) | Spodoptera frugiperda | Telenomus remus, Trichogramma pretiosum, SfNPV & Metarhizium rileyi | अंड परजीवी ततैया, विषाणु एवं हरित कवक |
| 8. कसावा मिलीबग (2020) | Phenacoccus manihoti | Anagyrus lopezi (बेनिन/IITA से, 2021) | अंतःपरजीवी ततैया (Encyrtidae : Hymenoptera) |
10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)
पादप संगरोध कानून एवं फॉल आर्मीवर्म (FAW) प्रबंधन मानक
- 1. भारत के प्रमुख पादप संगरोध कानून:
• - 2. मक्का में फॉल आर्मीवर्म (FAW) हेतु बीज उपचार एवं मुख्य रसायन दर:
•
•
11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)
- DIP Act (विनाशकारी कीट एवं नाशीजीव अधिनियम): 1914
- Plant Quarantine (Regulation of Import) Order: 2003
- Phytosanitary Certificate (PSC) एवं Post-Entry Quarantine (PEQ)
- संस्थाएँ: DPPQS (फरीदाबाद, 1946) एवं ICAR-NBPGR (नई दिल्ली)
- लद्दाख से सेब के कॉडलिंग मॉथ (Cydia pomonella) का रोधन
- नीलगिरि/कोडाइकनाल से आलू के गोल्डन नेमाटोड (Globodera) का रोधन
- दक्षिण भारत से कॉफी बेरी बोरर व केला बंची टॉप का रोधन
- पपीता मिलीबग (Paracoccus) ➔ परजीवी Acerophagus papayae (2010)
- कसावा मिलीबग (P. manihoti) ➔ परजीवी Anagyrus lopezi (2021)
- रगोज व्हाइटफ्लाई ➔ Encarsia guadeloupae + Isaria fumosorosea
- कॉटनिया कुशन स्केल ➔ वेडालिया भृंग Rodolia cardinalis (1929)
- 1. सायनट्रानिलीप्रोल+थायोमेथोक्साम (6 mL/kg) बीज उपचार + नेपियर ट्रैप
- 2. FAW फेरोमोन पाश (5-15/ha) + पोंगली में रेत व चूना (9:1)
- 3. जैविक: Telenomus remus, SfNPV, Metarhizium rileyi, NSKE 5%
- 4. रसायन: स्पिनोटोरम (0.5 mL/L), क्लोरेंट्रानिलीप्रोल (0.4 mL/L), इमामेक्टिन
12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)
13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)
- भारत में ‘विनाशकारी कीट एवं नाशीजीव अधिनियम’ (DIP Act) वर्ष 1914 में पारित हुआ और वर्तमान ‘पादप संगरोध आदेश’ (Plant Quarantine Order) वर्ष 2003 में जारी किया गया।
- पपीता मिलीबग (Paracoccus marginatus) के नियंत्रण के लिए वर्ष 2010 में ICAR-NBAIR (बेंगलुरु) द्वारा प्यूर्टो रिको से आयातित अत्यंत सफल परजीवी ततैया ‘Acerophagus papayae’ है।
- कसावा मिलीबग (Phenacoccus manihoti) के शास्त्रीय जैविक नियंत्रण हेतु वर्ष 2021 में आयातित परजीवी ततैया ‘Anagyrus lopezi’ है।
- नारियल की रगोज स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई (Aleurodicus rugioperculatus) का प्रमुख परजीवी ‘Encarsia guadeloupae’ है और इसके नियंत्रण हेतु कीट-रोगजनक कवक ‘Isaria (Cordyceps) fumosorosea’ प्रयुक्त होता है।
- मक्का में फॉल आर्मीवर्म (Spodoptera frugiperda) के नियंत्रण के लिए सर्वाधिक प्रभावी तीन अनुशंसित रसायन ‘स्पिनोटोरम 11.7% SC, क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC और इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG’ हैं तथा अंड परजीवी ‘Telenomus remus’ है।
14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)
त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):
- संगरोध कानून व संस्थाएँ: DIP Act (1914), Plant Quarantine Order (2003), DPPQS (फरीदाबाद), ICAR-NBPGR (नई दिल्ली), ICAR-NBAIR (बेंगलुरु)।
- शास्त्रीय जैविक नियंत्रण मिलान: पपीता मिलीबग Acerophagus papayae; कसावा मिलीबग Anagyrus lopezi; रगोज व्हाइटफ्लाई Encarsia guadeloupae + Isaria fumosorosea; कॉटनिया कुशन स्केल Rodolia cardinalis।
- FAW प्रबंधन: Fortenza Duo बीज उपचार, नेपियर घास ट्रैप, फेरोमोन पाश, Telenomus remus, SfNPV, Metarhizium rileyi, स्पिनोटोरम, क्लोरेंट्रानिलीप्रोल, इमामेक्टिन बेंजोएट।
15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)
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16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)
- भारत में ‘DIP Act’ वर्ष 1914 में पारित हुआ और वर्तमान ‘पादप संगरोध आदेश’ (Plant Quarantine Order) वर्ष 2003 में लागू हुआ।
- पपीता मिलीबग (Paracoccus marginatus) के जैविक नियंत्रण हेतु 2010 में आयातित सफल परजीवी ‘Acerophagus papayae’ है।
- कसावा मिलीबग के नियंत्रण हेतु 2021 में परजीवी ‘Anagyrus lopezi’ और रगोज व्हाइटफ्लाई हेतु ‘Encarsia guadeloupae’ प्रयुक्त हुआ।
- मक्का में फॉल आर्मीवर्म (FAW) के नियंत्रण हेतु अंड परजीवी ‘Telenomus remus’, विषाणु ‘SfNPV’ और कवक ‘Metarhizium rileyi’ प्रयुक्त होते हैं।
- मक्का में फॉल आर्मीवर्म के लिए स्पिनोटोरम 11.7% SC, क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC और इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG प्रमुख अनुशंसित रसायन हैं।





