ENT 311 Lecture 27: आक्रामक विदेशी नाशीकीट (Invasive Insect Pests): पहचान, वितरण एवं आर्थिक महत्व

ENT 311 · Pest Management in Crops and Stored Grains — Final Notes
विषय सूची · Quick Navigation
02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)Lecture 27: आक्रामक विदेशी नाशीकीट (Invasive Insect Pests): पहचान, वितरण एवं आर्थिक महत्व
चित्रमय कीट पहचान एवं क्षति आरेख (Visual Identification — Lecture 27)
फॉल आर्मीवर्म (Spodoptera frugiperda — सिर पर उल्टा ‘Y’ व 8वें खंड पर वर्ग में 4 काले बिंदु) एवं रगोज स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई (सर्पिलाकार मोमी चक्र)
02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)
इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:
- आक्रामक विदेशी नाशीकीटों (Invasive Alien Insect Pests) की परिभाषा और उनके नए देश में प्रवेश करने के बाद विस्फोटक रूप से फैलने के पारिस्थितिक कारण (‘शत्रु-मुक्ति परिकल्पना / Enemy Release Hypothesis’ एवं वैश्वीकरण) को समझना।
- भारत में 1889 से 2021 तक प्रवेश करने वाले सभी प्रमुख विदेशी आक्रामक कीटों का ऐतिहासिक कालक्रम (प्रवेश वर्ष, प्रथम रिपोर्ट स्थान, मूल देश और मुख्य परपोषी फसल) कंठस्थ करना।
- मक्का के सबसे खतरनाक हालिया आक्रामक कीट ‘फॉल आर्मीवर्म’ (Fall Armyworm – FAW: Spodoptera frugiperda; मई 2018, शिवमोग्गा कर्नाटक) के लार्वा के दो अचूक पहचान चिह्नों—(1) सिर पर सफेद उल्टा ‘Y’ निशान (Inverted Y-shaped suture on head) और (2) 8वें उदरीय खंड पर वर्ग के आकार में 4 काले बिंदु (Four-dot square pinacula)—का गहन अध्ययन करना।
- नारियल की रगोज स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई (Aleurodicus rugioperculatus, 2016), टमाटर पिनवर्म (Tuta absoluta, 2014), पपीता मिलीबग (Paracoccus marginatus, 2008), यूकेलिप्टस गॉल वास्प (Leptocybe invasa, 2006) और कसावा मिलीबग (Phenacoccus manihoti, 2020) की पहचान और आर्थिक महत्व को जानना।
03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)
मूल सामग्री (Core Course Content): अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कृषि उत्पादों के आयात और जलवायु परिवर्तन के कारण जब कोई विदेशी कीट प्रजाति अपने मूल भौगोलिक क्षेत्र से बाहर निकलकर किसी नए देश (जैसे भारत) में अनजाने में प्रवेश कर जाती है, तो वहाँ उसके प्राकृतिक शत्रुओं (परजीवी व परभक्षी कीटों) के अनुपस्थित होने के कारण वह जंगल की आग की तरह फैलकर अरबों रुपये की फसल तबाह कर देती है—ऐसे विदेशी कीटों को ‘आक्रामक विदेशी नाशीकीट’ (Invasive Alien Insect Pests) कहा जाता है।
भारत में अब तक 23 से अधिक विदेशी आक्रामक कीट प्रवेश कर चुके हैं, जिनमें मई 2018 में कर्नाटक (शिवमोग्गा) में मक्का पर देखा गया ‘फॉल आर्मीवर्म’ (Spodoptera frugiperda), 2016 में तमिलनाडु (पोल्लाची) में नारियल पर देखी गई ‘रगोज स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई’ (Aleurodicus rugioperculatus), 2014 में पुणे में देखा गया ‘टमाटर पिनवर्म’ (Tuta absoluta) और 2008 में कोयंबटूर में देखा गया ‘पपीता मिलीबग’ (Paracoccus marginatus) प्रतियोगी और विश्वविद्यालयीय परीक्षाओं के सबसे महत्वपूर्ण विषय हैं।
04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)
05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)
1. भारत के 5 सबसे महत्वपूर्ण हालिया आक्रामक विदेशी नाशीकीट: पहचान, वितरण एवं आर्थिक महत्व
(1) मक्का का फॉल आर्मीवर्म (Fall Armyworm – FAW: Spodoptera frugiperda)
- कुल एवं गण: Noctuidae : Lepidoptera | मूल स्थान: उष्णकटिबंधीय अमेरिका (Tropical Americas)।
- भारत में प्रथम रिपोर्ट एवं वितरण: मई 2018 में शिवमोग्गा (कर्नाटक) में मक्का की फसल पर (शरणबासप्पा एवं सहयोगी तथा ICAR-NBAIR द्वारा रिपोर्ट)। मात्र 1 वर्ष के भीतर यह लक्षद्वीप और लद्दाख को छोड़कर भारत के सभी राज्यों (मक्का, ज्वार, बाजरा व गन्ने) में फैल गया क्योंकि इसका वयस्क पतंगा एक रात में 100 km तक उड़ सकता है!
- अचूक शारीरिक पहचान (Identification):
- इल्ली का सिर: गहरे भूरे/काले सिर पर सामने की ओर सफेद-पीले रंग का स्पष्ट ‘उल्टा Y’ (Inverted ‘Y’ mark) का निशान।
- उदरीय खंड 8 और 9: 8वें उदरीय खंड के पृष्ठ भाग पर एक वर्ग (Square) के रूप में 4 स्पष्ट काले उभरे बिंदु (Pinacula) और 9वें खंड पर समलंब (Trapezoid) के रूप में 4 बिंदु।
- अंड-समूह: पत्ती पर 100–200 अंडों का गुच्छा जो सलेटी-भूरे रोमों से ढका होता है।
- क्षति एवं आर्थिक महत्व: इल्ली मक्का की पोंगली/गोभ (Whorl) के अंदर घुसकर खाती है जिससे पत्तियों पर बड़े कटे-फटे छेद और लकड़ी के गीले बुरादे जैसी भारी मात्रा में विष्ठा (Sawdust-like wet fecal matter in whorl) भरी दिखती है। यह भुट्टों (Cobs) को भी खाती है और उपचार न करने पर 30% से 60% तक मक्का उपज नष्ट कर देती है।
(2) रगोज स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई (Rugose Spiralling Whitefly – RSW: Aleurodicus rugioperculatus)
- कुल एवं गण: Aleyrodidae : Hemiptera | मूल स्थान: मध्य अमेरिका (फ्लोरिडा/बेलीज)।
- भारत में प्रथम रिपोर्ट एवं वितरण: जुलाई-अगस्त 2016 में पोल्लाची (कोयंबटूर, तमिलनाडु) और पलक्कड़ (केरल) में नारियल पर। अब यह आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गोवा व असम में नारियल, केला, अमरूद, आम, सुपारी और ऑयल पाम में फैल चुकी है।
- पहचान एवं आर्थिक महत्व: सामान्य सफेद मक्खी से तिगुनी बड़ी (2.5 mm), पंखों पर दो भूरे धब्बे। पत्ती की निचली सतह पर सफेद मोमी जलेबी जैसे सर्पिलाकार छल्ले (Concentric waxy spirals) बनाती है। इसके भारी मधुस्राव से पूरी निचली पत्तियाँ काली फफूंद (Sooty mould) से ढक जाती हैं जिससे नारियल की उपज 20–30% घट जाती है।
(3) दक्षिण अमेरिकी टमाटर पिनवर्म (South American Tomato Pinworm: Tuta absoluta)
- कुल एवं गण: Gelechiidae : Lepidoptera | मूल स्थान: पेरू (दक्षिण अमेरिका)।
- भारत में प्रथम रिपोर्ट: अक्टूबर 2014 में पुणे (महाराष्ट्र) और बेंगलुरु (कर्नाटक) में टमाटर पर।
- पहचान एवं आर्थिक महत्व: 6–7 mm छोटा चाँदी-भूरा पतंगा; इल्ली के सिर के पीछे एक काली कॉलर जैसी पट्टी (Black prothoracic shield) होती है। यह टमाटर की पत्तियों में चौड़े फफोले जैसी सुरंगें (Blotch mines) और फलों में सुई जैसे छिद्र (Pin-holes) बनाकर पॉलीहाउस और खुले खेत में 50% से 100% तक टमाटर नष्ट कर सकता है।
(4) पपीता मिलीबग (Papaya Mealybug: Paracoccus marginatus) एवं कसावा मिलीबग (Phenacoccus manihoti)
- पपीता मिलीबग (Paracoccus marginatus — Pseudococcidae, Hemiptera): मूल स्थान: मेक्सिको/मध्य अमेरिका। भारत में प्रथम रिपोर्ट: जुलाई 2008 में कोयंबटूर (तमिलनाडु) में पपीते पर। पीले शरीर वाला मिलीबग (दबाने पर पीला द्रव निकलता है) जिसने पपीता, शहतूत (रेशम उद्योग), कसावा और कपास में भारी तबाही मचाई।
- कसावा मिलीबग (Phenacoccus manihoti): वर्ष 2020 में त्रिशूर (केरल) और तमिलनाडु में टैपिओका/कसावा (Manihot esculenta) पर रिपोर्ट हुआ गुलाबी रंग का नवीनतम आक्रामक मिलीबग।
(5) अन्य ऐतिहासिक विदेशी आक्रामक नाशीकीट:
- यूकेलिप्टस गॉल वास्प (Blue Gum Chalcid — Leptocybe invasa; Eulophidae, Hymenoptera): ऑस्ट्रेलिया मूल; 2006 में तमिलनाडु/कर्नाटक में प्रवेश; नीलगिरी (Eucalyptus) की नर्सरी व पेड़ों की डंठल और मध्य शिरा पर गाँठें (Galls) बनाकर कागज उद्योग को भारी नुकसान पहुँचाया।
- इराइथ्रिना गॉल वास्प (Quadrastichus erythrinae): 2005 में केरल में काली मिर्च के सहारे के वृक्ष (Erythrina) को सुखाया।
- नारियल की एरियोफिड माइट (Aceria guerreronis): 1998 में एर्नाकुलम (केरल) में प्रवेश।
- सर्पिलाकार सफेद मक्खी (Aleurodicus dispersus): 1993 में केरल में और अमेरिकी सर्पिलाकार लीफ माइनर (Liriomyza trifolii): 1990-91 में हैदराबाद में प्रवेश।
- कॉफी बेरी बोरर (Hypothenemus hampei): 1990 में गुडलूर (नीलगिरि, तमिलनाडु) में और सबबूल साइलिड (Heteropsylla cubana): 1988 में चेंगलपट्टू (तमिलनाडु) में प्रवेश।
06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)
आक्रामक विदेशी नाशीकीटों का गण (Order) के अनुसार वर्गीकरण:
- Hemiptera (सर्वाधिक संख्या!): Aleurodicus rugioperculatus (2016), Paracoccus marginatus (2008), Phenacoccus solenopsis (2005), Phenacoccus manihoti (2020), Aleurodicus dispersus (1993), Heteropsylla cubana (1988), Icerya purchasi (1921), Eriosoma lanigerum (1889), Quadraspidiotus perniciosus (1879)।
- Lepidoptera: Spodoptera frugiperda (2018), Tuta absoluta (2014), Plutella xylostella (1914), Phthorimaea operculella (1906)।
- Diptera, Hymenoptera, Coleoptera & Acarina: Liriomyza trifolii (1990), Leptocybe invasa (2006), Hypothenemus hampei (1990), Aceria guerreronis (1998)।
07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)
- ‘दस का नियम’ (Tens Rule of Biological Invasion — Williamson & Fitter, 1996): किसी नए देश में बाहर से आने वाली कुल विदेशी प्रजातियों में से लगभग 10% ही जीवित बच पाती हैं, उन बची हुई में से 10% ही प्राकृतिक रूप से स्थापित हो पाती हैं, और स्थापित प्रजातियों में से 10% ही ‘आक्रामक नाशीकीट’ (Invasive Pest) बनती हैं—किंतु जो 1 प्रजाति आक्रामक बनती है, वह पूरे देश की कृषि अर्थव्यवस्था को हिला देती है!
08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)
क्षेत्रीय निदान कुंजी: मक्का के खेत में ‘फॉल आर्मीवर्म (Spodoptera frugiperda)’ और ‘चितकबरे तना छेदक (Chilo partellus)’ में अंतर
1. यदि मक्का की पोंगली (Whorl) में बड़े कटे-फटे छेद हैं, पोंगली में गीले बुरादे जैसी भारी विष्ठा भरी है और अंदर मिली इल्ली के सिर पर सफेद ‘उल्टा Y’ तथा 8वें खंड पर वर्ग के रूप में ‘4 काले बिंदु’ हैं यह आक्रामक फॉल आर्मीवर्म (Spodoptera frugiperda — Noctuidae) है।
2. यदि पत्ती पर केवल छोटे गोल पिन-होल की सीधी कतार है और इल्ली पर 4 बैंगनी धारियाँ हैं (सिर पर उल्टा Y और 8वें खंड पर 4 वर्गाकार बिंदु नहीं हैं) यह देशी चितकबरा तना छेदक (Chilo partellus — Crambidae) है।
09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)
तुलनात्मक सारणी 27.1: भारत में प्रवेश करने वाले प्रमुख आक्रामक विदेशी नाशीकीटों (Invasive Pests) का मास्टर कालक्रम
| प्रवेश वर्ष | आक्रामक कीट का नाम | वैज्ञानिक नाम एवं कुल | भारत में प्रथम रिपोर्ट स्थान | मुख्य प्रभावित फसलें |
|---|---|---|---|---|
| 1988 | सबबूल साइलिड | Heteropsylla cubana (Psyllidae) | चेंगलपट्टू (तमिलनाडु) | सबबूल (Leucaena) |
| 1990 | कॉफी बेरी बोरर | Hypothenemus hampei (Curculionidae) | गुडलूर, नीलगिरि (तमिलनाडु) | कॉफी |
| 1990–91 | सर्पिलाकार लीफ माइनर | Liriomyza trifolii (Agromyzidae) | हैदराबाद (तेलंगाना/आंध्र) | टमाटर, कद्दूवर्गीय, कपास, अरंडी |
| 1998 | नारियल एरियोफिड माइट | Aceria guerreronis (Eriophyidae) | एर्नाकुलम (केरल) | नारियल |
| 2006 | यूकेलिप्टस गॉल वास्प | Leptocybe invasa (Eulophidae) | तमिलनाडु एवं कर्नाटक | नीलगिरी (Eucalyptus) |
| 2008 | पपीता मिलीबग | Paracoccus marginatus (Pseudococcidae) | कोयंबटूर (तमिलनाडु) | पपीता, शहतूत, टैपिओका |
| 2014 | टमाटर पिनवर्म | Tuta absoluta (Gelechiidae) | पुणे (महाराष्ट्र) एवं बेंगलुरु | टमाटर, आलू, बैंगन |
| 2016 | रगोज स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई | Aleurodicus rugioperculatus (Aleyrodidae) | पोल्लाची (तमिलनाडु) एवं पलक्कड़ | नारियल, केला, आम, अमरूद |
| 2018 | फॉल आर्मीवर्म (FAW) | Spodoptera frugiperda (Noctuidae) | शिवमोग्गा (कर्नाटक — मई 2018) | मक्का, ज्वार, बाजरा, गन्ना |
| 2020 | कसावा मिलीबग | Phenacoccus manihoti (Pseudococcidae) | त्रिशूर (केरल) | कसावा (टैपिओका) |
10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)
फॉल आर्मीवर्म (FAW) की पहचान एवं आर्थिक दहलीज मानक
- 1. फॉल आर्मीवर्म (Spodoptera frugiperda) का द्वि-चिह्न पहचान सूत्र:
- 2. मक्का में फॉल आर्मीवर्म का आर्थिक दहलीज स्तर (ETL):
• पौध से अगेती पोंगली अवस्था (Seedling to early whorl stage):
• मध्य से पछेती पोंगली अवस्था (Mid to late whorl stage):
11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)
- मई 2018 में शिवमोग्गा (कर्नाटक) में मक्का पर प्रथम रिपोर्ट
- पहचान 1: सिर के सामने सफेद ‘उल्टा Y’ (Inverted Y suture)
- पहचान 2: 8वें उदरीय खंड पर वर्ग के रूप में ‘4 काले बिंदु’
- गोभ (Whorl) में बड़े छेद व बुरादे जैसी गीली विष्ठा; 30-60% हानि
- रगोज व्हाइटफ्लाई: Aleurodicus rugioperculatus (2016, पोल्लाची तमिलनाडु)
- नारियल व केले की पत्ती के नीचे जलेबी जैसे सफेद मोमी चक्र
- टमाटर पिनवर्म: Tuta absoluta (2014, पुणे महाराष्ट्र)
- टमाटर की पत्ती में ब्लॉच माइन व फलों में पिन-होल (50-100% हानि)
- पपीता मिलीबग: Paracoccus marginatus (2008, कोयंबटूर — पीला शरीर)
- कसावा मिलीबग: Phenacoccus manihoti (2020, त्रिशूर केरल — गुलाबी)
- कॉटन मिलीबग: Phenacoccus solenopsis (2005)
- यूकेलिप्टस गॉल वास्प: Leptocybe invasa (2006)
- नारियल एरियोफिड माइट: Aceria guerreronis (1998, केरल)
- सर्पिलाकार सफेद मक्खी: Aleurodicus dispersus (1993, केरल)
- सर्पिलाकार लीफ माइनर: Liriomyza trifolii (1990-91, हैदराबाद)
- कॉफी बेरी बोरर (1990) एवं सबबूल साइलिड (1988)
12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)
13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)
- मक्का के आक्रामक कीट ‘फॉल आर्मीवर्म’ (Spodoptera frugiperda; कुल Noctuidae) को भारत में सर्वप्रथम ‘मई 2018 में शिवमोग्गा (कर्नाटक)’ में देखा गया था।
- फॉल आर्मीवर्म के लार्वा की दो अचूक पहचान हैं—सिर पर सफेद ‘उल्टा Y’ (Inverted Y) का निशान और 8वें उदरीय खंड की पीठ पर ‘वर्ग के रूप में 4 काले बिंदु’ (Four black spots in a square)。
- रगोज स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई (Aleurodicus rugioperculatus) ने वर्ष 2016 में पोल्लाची (तमिलनाडु) में, टमाटर पिनवर्म (Tuta absoluta) ने 2014 में पुणे (महाराष्ट्र) में और पपीता मिलीबग (Paracoccus marginatus) ने 2008 में कोयंबटूर में प्रवेश किया।
- वर्ष 2020 में केरल (त्रिशूर) में टैपिओका पर देखा गया नवीनतम आक्रामक कीट ‘कसावा मिलीबग’ (Phenacoccus manihoti) है।
- भारत में अब तक प्रवेश करने वाले विदेशी आक्रामक कीटों में सर्वाधिक प्रजातियाँ ‘हेमिप्टेरा’ (Hemiptera — सफेद मक्खी, मिलीबग, शल्क कीट व माहू) गण की हैं।
14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)
त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):
- फॉल आर्मीवर्म (Spodoptera frugiperda): मई 2018, शिवमोग्गा (कर्नाटक); मक्का/ज्वार; सिर पर उल्टा ‘Y’ + 8वें खंड पर 4 वर्गाकार काले बिंदु।
- रगोज स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई (Aleurodicus rugioperculatus): 2016, पोल्लाची (तमिलनाडु); नारियल व केला; जलेबी जैसे मोमी चक्र।
- टमाटर पिनवर्म (Tuta absoluta): 2014, पुणे (महाराष्ट्र); टमाटर में ब्लॉच माइन व पिन-होल।
- पपीता मिलीबग (Paracoccus marginatus): 2008, कोयंबटूर; एवं कसावा मिलीबग (Phenacoccus manihoti): 2020, केरल।
15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)
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16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)
- फॉल आर्मीवर्म (Spodoptera frugiperda) भारत में सर्वप्रथम ‘मई 2018 में शिवमोग्गा (कर्नाटक)’ में मक्का पर रिपोर्ट हुआ था।
- फॉल आर्मीवर्म के लार्वा के सिर पर ‘उल्टा Y’ और 8वें उदरीय खंड पर ‘वर्ग के रूप में 4 काले बिंदु’ होते हैं।
- रगोज स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई (Aleurodicus rugioperculatus) ने 2016 में पोल्लाची (तमिलनाडु) में नारियल पर प्रवेश किया।
- दक्षिण अमेरिकी टमाटर पिनवर्म (Tuta absoluta) ने 2014 में पुणे (महाराष्ट्र) में और पपीता मिलीबग (Paracoccus marginatus) ने 2008 में कोयंबटूर में प्रवेश किया।
- वर्ष 2020 में केरल में टैपिओका पर देखा गया नवीनतम आक्रामक कीट ‘कसावा मिलीबग’ (Phenacoccus manihoti) है।





