PPHYS 311 Lecture 31: पुनरीक्षण (Revision III): दीप्तिकालिता, बसंतिकरण, पादप जीर्णता एवं विलगन (Lectures 20–24 Master Synthesis)

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PPHYS 311 · Crop Physiology — Final Notes
LECTURE 31 / 32 · PPHYS 311

पुनरीक्षण (Revision III): दीप्तिकालिता, बसंतिकरण, पादप जीर्णता एवं विलगन (Lectures 20–24 Master Synthesis)

Revision: Photoperiodism, Vernalization, Senescence and Abscission

High-Yield Master Revision of Lectures 20 to 24: Garner & Allard Photoperiodism (SDP, LDP, DNP Crop Master List), Critical Dark Period & Night Break, Phytochrome (Pr 660 nm ↔ Pfr 730 nm) & Florigen (FT Protein), Vernalization (Lysenko, Vernalin, Devernalization), Leopold's 4 Senescence Types, Richmond-Lang Effect, Abscission Enzymes (Cellulase & Pectinase) & Functional vs Cosmetic Stay-Green

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesकार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Revision: Photoperiodism, Vernalization, Senescence and Abscission (Theory • Lecture 31)
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • दीप्तिकालिता (Lectures 20–21) के गार्नर व एलार्ड (1920 — मैरीलैंड मैमथ तंबाकू) प्रयोग, SDP, LDP व DNP फसलों की मास्टर सूची, रात्रि-भंग प्रयोग, फाइटोक्रोम (Pr 660 nm↔Pfr 730 nm) और फ्लोरिजेन (FT Protein — पत्ती से प्ररोह शीर्ष तक फ्लोएम परिवहन) का त्वरित पुनरीक्षण करना।
  • बसंतिकरण (Lecture 22) के लाइसेंको (1928), गुप्तवस्था (Site: प्ररोह शीर्ष विभज्योतक), वर्नेलिन → जिबरेलिन, *FLC* जीन के एपिजेनेटिक दमन और दीप्तिकालिता बनाम बसंतिकरण के अंतर को दोहराना।
  • जीर्णता एवं विलगन (Lectures 23–24) के लियोपोल्ड के 4 प्रकारों, रिचमंड-लैंग प्रभाव, ऑक्सिन-प्रवणता सिद्धांत, सेल्यूलेज व पॉलीगैलेक्ट्यूरोनेज एंजाइमों और कार्यात्मक बनाम कॉस्मेटिक स्टे-ग्रीन को समेकित करना।

प्रस्तावना · Introduction

यह व्याख्यान (Lecture 31) हमारे पाठ्यक्रम के व्याख्यान 20 से 24 (Lectures 20–24)—अर्थात् दीप्तिकालिता (Photoperiodism), फाइटोक्रोम एवं फ्लोरिजेन, बसंतिकरण (Vernalization), पादप जीर्णता (Senescence) और विलगन एवं स्टे-ग्रीन अवधारणा (Abscission & Stay-Green)—का परीक्षा-केंद्रित 'मास्टर पुनरीक्षण' (Master Revision) है! इस इकाई से परीक्षा में सबसे ज्यादा SDP, LDP और DNP फसलों के उदाहरण, लाल (660 nm) व सुदूर-लाल (730 nm) प्रकाश का फाइटोक्रोम पर प्रभाव और प्रत्येक प्रक्रिया का ग्रहण स्थल (Site of Perception) पूछा जाता है। आइए इन सभी बिंदुओं को एक ही स्थान पर पक्का करें!

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

दीप्तिकालिता बनाम बसंतिकरण में ग्रहण स्थल का स्वर्ण नियम (Golden Rule of Perception Sites)

1. दीप्तिकालिता (Photoperiodism) का ग्रहण स्थल = परिपक्व हरी पत्ती (Mature Leaf Lamina) [जबकि पुष्पन प्रतिक्रिया प्ररोह शीर्ष कलिका में होती है; संवाहक संकेत = फ्लोरिजेन / FT प्रोटीन (फ्लोएम द्वारा)]!
2. बसंतिकरण (Vernalization / शीत उपचार) का ग्रहण स्थल = सक्रिय रूप से विभाजित होता प्ररोह शीर्ष विभज्योतक (Dividing Shoot Apical Meristem / Embryo tip) [संभावित संकेत = वर्नेलिन / जिबरेलिन]!

फाइटोक्रोम प्रकाश-उत्क्रमणीयता नियम (Phytochrome Photoreversibility Rule – Borthwick & Hendricks, 1952)

$Pr (660 nm — नीला, निष्क्रिय)⇌लाल प्रकाश (Red Light, 660 nm)सुदूर-लाल प्रकाश (730 nm) या अंधकारPfr (730 nm — नीला-हरा, जैविक रूप से सक्रिय!)$
• अंतिम प्रकाश फ्लैश ही परिणाम तय करता है: लाल प्रकाश (660 nm) सलाद के बीज का अंकुरण और LDP का पुष्पन कराता है, परंतु SDP के पुष्पन को रोक देता है!

विलगन बनाम स्टे-ग्रीन का हार्मोनल नियम (Hormonal Rule of Abscission & Stay-Green)

1. विलगन (Abscission) = पर्ण फलक में ऑक्सिन घटने से विलगन क्षेत्र एथिलीन के प्रति संवेदनशील हो जाता है और एथिलीन द्वारा सेल्यूलेज (β-1,4-glucanase) व पेक्टिनेज (Polygalacturonase) एंजाइम सक्रिय होकर मध्य पटलिका को गला देते हैं!
2. कार्यात्मक स्टे-ग्रीन (Functional Stay-Green — ज्वार, मक्का, गेहूँ) = जड़ों से उच्च साइटोकाइनिन प्रवाह द्वारा दाना भरते समय और सूखे में भी पत्तियों का हरा व प्रकाश-संश्लेषी बने रहना!

वर्गीकरण · Classification

1. कृषि फसलों का दीप्तिकालिक मास्टर वर्गीकरण (Master List of SDP, LDP & DNP Crops — 100% Exam Guaranteed!)

1. अल्प-दिवस पौधे (Short-Day Plants – SDP / Long-Night Plants):
• खरीफ अनाज: धान (Rice — अमन/साली), ज्वार (Sorghum), बाजरा (Pearl millet), मक्का (कुछ किस्में)।
• खरीफ दलहन व तिलहन: सोयाबीन (Soybean — *Biloxi*), मूँग, उड़द, अरहर, तिल, मूँगफली।
• नकदी व अन्य फसलें: गन्ना (Sugarcane), मैरीलैंड मैमथ तंबाकू (Tobacco), जूट, सनई, शकरकंद, आलू (कंद निर्माण / Tuberization हेतु SDP!), गुलदाउदी (Chrysanthemum), कॉसमॉस, डहलिया, *Xanthium* (कॉकलेबर — मात्र 1 चक्र पर्याप्त!), स्ट्रॉबेरी!
2. दीर्घ-दिवस पौधे (Long-Day Plants – LDP / Short-Night Plants):
• रबी अनाज व दलहन: गेहूँ (Wheat), जौ (Barley), जई (Oats), राई (Rye), चना (Chickpea), मटर (Pea), मसूर (Lentil)।
• रबी तिलहन व चारा: सरसों (Mustard), अलसी, कुसुम, बरसीम (Berseem), रिजका (Lucerne)।
• सब्जियाँ व मॉडल पौधे: पालक (Spinach), मूली (Radish), गाजर, चुकंदर (Sugarbeet), पत्तागोभी, प्याज (शल्ककंद निर्माण / Bulbing हेतु LDP!), सलाद (Lettuce), आलू (पुष्पन हेतु LDP!), हेनबेन (*Hyoscyamus niger*), *Arabidopsis thaliana*!
3. दिवस-तटस्थ पौधे (Day-Neutral Plants – DNP — किसी भी मौसम में फूलने वाले!):
• टमाटर (Tomato), मिर्च (Chilli), बैंगन (Brinjal), कपास (Cotton), सूरजमुखी (Sunflower), मक्का (आधुनिक संकर), राजमा (French bean), लोबिया (Cowpea), ककड़ी/खीरा (Cucumber), पपीता, अमरूद, केला, बकव्हीट और सदाबहार (*Catharanthus*)!

2. जीर्णता (Senescence) के 4 प्रकार (Leopold, 1961) एवं स्टे-ग्रीन के 5 प्रकार (Thomas & Howarth, 2000)

1. लियोपोल्ड (1961) के 4 जीर्णता प्रकार:
• (i) संपूर्ण पादप जीर्णता (Overall / Whole Plant Senescence — एकफलनी / Monocarpic): गेहूँ, धान, मक्का, चना, सरसों, सोयाबीन एवं बांस (फल पकते ही पूरा पौधा मर जाता है; सोयाबीन में फलियों को तोड़ देने — Depodding — से जीर्णता रुक जाती है!)।
• (ii) शीर्ष या प्ररोह जीर्णता (Top / Shoot Senescence): आलू, प्याज, लहसुन, हल्दी, अदरक, केला, गन्ना (ऊपरी प्ररोह सूखता है, भूमिगत अंग जीवित रहता है)।
• (iii) पर्णपाती जीर्णता (Deciduous Senescence): सेब, आड़ू, बादाम, चिनार, सागौन (सारी पत्तियाँ एक साथ गिरती हैं, तना जीवित रहता है)।
• (iv) प्रगतिशील / क्रमिक जीर्णता (Progressive / Sequential Senescence): आम, नींबू, यूकेलिप्टस और बढ़ते पौधों की सबसे पुरानी निचली पत्तियाँ।
2. स्टे-ग्रीन के प्रकार: Type A और Type B = कार्यात्मक स्टे-ग्रीन (Functional Stay-Green — प्रकाश-संश्लेषण व उपज दोनों बढ़ते हैं!), जबकि Type C (Mendel's green cotyledon *stay-green / sgr* mutant), Type D व Type E = कॉस्मेटिक स्टे-ग्रीन (केवल हरा रंग रहता है, प्रकाश-संश्लेषण बंद हो जाता है)!

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • दीप्तिकालिता बनाम बसंतिकरण का त्वरित तुलनात्मक सार (Photoperiodism vs Vernalization Summary):
    1. उद्दीपन: दीप्तिकालिता में दिन और रात की सापेक्ष अवधि (विशेषकर निर्बाध अंधकार काल) उद्दीपन है; जबकि बसंतिकरण में कम तापमान (0∘C से 5∘C शीत उपचार) उद्दीपन है।
    2. ग्रहण स्थल: दीप्तिकालिता को परिपक्व पत्तियाँ ग्रहण करती हैं; जबकि बसंतिकरण को विभाजित होता प्ररोह शीर्ष विभज्योतक / भ्रूण ग्रहण करता है।
    3. रासायनिक प्रतिस्थापन: अधिकांश दीर्घ-दिवस (LDP) और शीत-आवश्यक (द्विवर्षी रोज़ेट) पौधों में जिबरेलिन (extGA3) के छिड़काव से दीप्तिकाल और बसंतिकरण दोनों की आवश्यकता को प्रतिस्थापित (Replace) किया जा सकता है!
    4. उत्क्रमण (Reversal): दीप्तिकालिक प्रेरण (SDP में) अंधकार काल के बीच लाल प्रकाश (660 nm) के रात्रि-भंग से नष्ट हो जाता है (जिसे 730 nm सुदूर-लाल प्रकाश पुनः बहाल कर देता है); जबकि बसंतिकरण का प्रभाव उच्च तापमान (35–40∘C — निर्बसंतिकरण / Devernalization) से नष्ट हो जाता है!

कार्यिकीय प्रक्रियाएँ · Detailed Topics

1. व्याख्यान 20 से 24 के वैज्ञानिकों, खोजों एवं हार्मोनल नियंत्रण का मास्टर सार

1. Master Revision Table of Lectures 20 to 24: Discoverers, Coined Terms, Receptors & Hormones (व्याख्यान 20 से 24 के खोजकर्ताओं, शब्दों एवं हार्मोनल नियंत्रण का सार)

नीचे दी गई तालिका 31.1 में दीप्तिकालिता, फाइटोक्रोम, बसंतिकरण, जीर्णता और विलगन से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, मॉडल पौधों और हार्मोनल नियमों को एक साथ संकलित किया गया है। विशेष रूप से याद रखें:
• आलू (Potato) की दोहरी दीप्तिकालिक प्रकृति: आलू में पुष्पन (Flowering) के लिए दीर्घ-दिवस (LDP) चाहिए, किंतु भूमिगत कंद निर्माण (Tuberization) के लिए अल्प-दिवस (SDP) और कम रात्रि तापमान (15 ext–20∘extC) अनिवार्य है!
• गन्ने (Sugarcane — *Saccharum officinarum*) में पुष्पन ('Arrow' निकलना): गन्ना एक अल्प-दिवस पौधा (SDP) है; व्यावसायिक गन्ने के खेत में पुष्पन होना हानिकारक है क्योंकि फूल आते ही गन्ने के तने से सुक्रोज खत्म होकर स्पंजी हो जाता है। इसलिए गन्ने में फूल आने से रोकने के लिए रात में कृत्रिम प्रकाश दिया जाता है या एथ्रेल/पैराक्वाट छिड़का जाता है (जबकि प्रजनन हेतु कोयंबटूर में SDP परिस्थितियाँ दी जाती हैं)!
मुख्य बिंदु · Key Points
  • Garner & Allard (1920) = Photoperiodism (*Maryland Mammoth* Tobacco & *Biloxi* Soybean)।
  • Chailakhyan (1936) = Florigen (= FT Protein, *FLOWERING LOCUS T*)।
  • Borthwick, Hendricks & Butler (1952–59) = Phytochrome (Pr 660 nm↔Pfr 730 nm)।
  • T.D. Lysenko (1928) = Vernalization | G. Melchers (1939) = Vernalin।
  • Richmond & Lang (1957) = Cytokinin द्वारा *Xanthium* पत्ती की जीर्णता में देरी।
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

गन्ने में 'एरोइंग' (पुष्पन) को रोककर चीनी की रिकवरी बचाना और प्याज व मूली में समय-पूर्व बोल्टिंग रोकना इन्हीं कार्यिकीय सिद्धांतों का प्रत्यक्ष अनुप्रयोग है।

2. जीर्णता एवं विलगन के हार्मोनल तथा एंजाइमीय नियंत्रण का त्वरित पुनरीक्षण

2. Hormonal & Enzymatic Control of Senescence and Abscission (जीर्णता एवं विलगन के हार्मोनल तथा एंजाइमीय नियंत्रण का पुनरीक्षण)

जीर्णता (Senescence) और विलगन (Abscission) दोनों ही आनुवंशिक रूप से क्रमादेशित (Programmed) प्रक्रियाएँ हैं जिनमें वृद्धि प्रवर्तक और वृद्धि संदमक हार्मोन आमने-सामने कार्य करते हैं:
1. जीर्णता को रोकने वाले (Senescence Inhibitors / Juvenility Hormones):
• साइटोकाइनिन (सर्वोच्च प्रभावी — Richmond-Lang Effect), जिबरेलिन (अंगूर, नींबू व रूमैक्स में) और ऑक्सिन।
2. जीर्णता एवं विलगन को बढ़ाने वाले (Senescence & Abscission Promoters):
• एथिलीन (सर्वोच्च प्रभावी विलगन प्रवर्तक!), एब्सिसिक अम्ल (ABA), जैस्मोनिक अम्ल और सैलिसिलिक अम्ल।
3. विलगन परत (Abscission Zone) के दो मुख्य कोशिका-भित्ति पाचक एंजाइम:
• (i) सेल्यूलेज (Cellulase / β-1,4-endoglucanase): प्राथमिक कोशिका भित्ति के सेलूलोज को गलाता है।
• (ii) पेक्टिनेज / पॉलीगैलेक्ट्यूरोनेज (Pectinase / Polygalacturonase – PG): मध्य पटलिका (Middle lamella) के कैल्शियम पेक्टेट सीमेंट को घोलकर पत्ती या फल को डंठल से अलग कर देता है!
4. सुरक्षात्मक परत (Protective Layer): अंग गिरने के बाद घाव पर सुबेरिन और लिग्निन जमा होकर 'कॉक परत' (Periderm) बनती है जो रोगाणुओं के प्रवेश को रोकती है तथा जाइलम वाहिकाओं में 'टाइलोसिस' (Tyloses) और फ्लोएम में 'कैलोज प्लग' (Callose plugs) बन जाते हैं!
मुख्य बिंदु · Key Points
  • युवा पत्ती क्यों नहीं गिरती? क्योंकि पर्ण फलक में बनने वाला उच्च ऑक्सिन (IAA) विलगन क्षेत्र को एथिलीन के प्रति असंवेदनशील बनाए रखता है!
  • पुरानी पत्ती या पका फल क्यों गिरता है? क्योंकि ऑक्सिन घट जाता है और एथिलीन बढ़कर सेल्यूलेज व पेक्टिनेज एंजाइम बना देती है!
  • NAA (Planofix @ 10–20 ppm) का छिड़काव पत्ती/फल की तरफ ऑक्सिन की पूर्ति कर समय-पूर्व झड़ना (Pre-harvest drop) रोक देता है!
कृषीय महत्व · Agricultural Importance

टमाटर की 'Flavr Savr' ट्रांसजेनिक किस्म में एंटीसेंस तकनीक से पॉलीगैलेक्ट्यूरोनेज (PG) एंजाइम के जीन को शांत कर फलों को गलने से बचाया गया था।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 31.1: व्याख्यान 20 से 24 (दीप्तिकालिता, फाइटोक्रोम, बसंतिकरण, जीर्णता एवं विलगन) का मास्टर रिवीजन चार्ट

कार्यिकीय घटना (Process)खोजकर्ता एवं वर्ष (Discoverer)उद्दीपन का ग्रहण स्थल (Site of Perception)मुख्य अणु / हार्मोन / एंजाइम (Key Molecule / Hormone)
1. दीप्तिकालिता (Photoperiodism)Garner & Allard (1920) (*Maryland Mammoth* तंबाकू)परिपक्व हरी पत्ती (Mature Leaf)वर्णक: Phytochrome; संवाहक हार्मोन: Florigen (FT Protein)
2. रात्रि-भंग एवं फाइटोक्रोम (Phytochrome)Hamner & Bonner (1938); Borthwick & Hendricks (1952)पत्ती एवं प्रकाश-संवेदी बीज (*Lettuce*)Pr (660 nm निष्क्रिय) ↔Pfr (730 nm सक्रिय क्रोमोप्रोटीन)
3. बसंतिकरण (Vernalization / शीत उपचार)J.G. Gassner (1918); T.D. Lysenko (1928)विभाजित होता प्ररोह शीर्ष विभज्योतक (Shoot Apical Meristem)Vernalin (Melchers, 1939) → Gibberellin (extGA3); *FLC* जीन दमन
4. पर्ण जीर्णता एवं उसका विलंब (Senescence)Leopold (1961); Richmond & Lang (1957)पुरानी पत्तियाँ (क्लोरोप्लास्ट का Gerontoplast में बदलना)प्रवर्तक: Ethylene & ABA | रोधक: Cytokinin (Richmond-Lang effect)
5. अंग विलगन (Abscission of leaf/fruit)Addicott (1963); Rubinstein & Leopold (1963)पर्णवृंत या फलवृंत का आधार (Abscission Zone)एंजाइम: Cellulase एवं Polygalacturonase (Pectinase); नियंत्रण: Auxin बनाम Ethylene
6. स्टे-ग्रीन गुण (Stay-Green Trait)Thomas & Howarth (2000) (ज्वार, मक्का, गेहूँ)ध्वज पर्ण (Flag leaf) एवं जड़ें (उच्च साइटोकाइनिन प्रवाह)उच्च Cytokinin व कम एथिलीन ──► दाना भराव व सूखा सहिष्णुता (*Charcoal rot* रोधी)

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. दीप्तिकालिता (Critical Photoperiod & Night Break) निर्णय नियम

SDP flowers when: Day Length < Critical Day Length AND Uninterrupted Dark Period > Critical Night Length
LDP flowers when: Day Length > Critical Day Length AND Dark Period < Critical Night Length

उदाहरण: सोयाबीन (SDP, क्रांतिक दिन = 14 घंटे) और गेहूँ (LDP, क्रांतिक दिन = 12 घंटे) दोनों को 10 घंटे प्रकाश + 14 घंटे अंधकार में रखा गया, परंतु 14 घंटे की रात के बीच में 660 nm लाल प्रकाश की 2 मिनट की फ्लैश दी गई। किसमें फूल आएंगे?
• बिना फ्लैश के 14 घंटे की लंबी रात में सोयाबीन (SDP) फूलता और गेहूँ (LDP) नहीं फूलता।
• परंतु लाल प्रकाश (660 nm) के रात्रि-भंग ने लंबी रात को दो छोटी रातों (7 + 7 घंटे) में तोड़ दिया और Pr→Pfr बना दिया!
• परिणाम: सोयाबीन (SDP) में पुष्पन रुक जाएगा, और गेहूँ (LDP) में पुष्पन प्रेरित हो जाएगा!

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 31: मास्टर पुनरीक्षण III — दीप्तिकालिता, बसंतिकरण, जीर्णता एवं विलगन (Lectures 20–24)]
├── 1. दीप्तिकालिता एवं फाइटोक्रोम (Lectures 20–21)
│ ├── Garner & Allard (1920): SDP (धान, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन, गन्ना, तंबाकू, जूट, आलू कंद) | LDP (गेहूँ, जौ, जई, चना, मटर, सरसों, पालक, मूली, प्याज कंद) | DNP (टमाटर, कपास, सूरजमुखी, मिर्च, मक्का)
│ ├── Hamner & Bonner (1938): अंधकार काल (Skotoperiod) अधिक महत्वपूर्ण है! | ग्रहण स्थल = पत्ती (Leaf) | फ्लोएम संकेत = Florigen (FT Protein)
│ └── Phytochrome: Pr (660 nm, निष्क्रिय) ◄══► Pfr (730 nm, सक्रिय) | लाल प्रकाश (660 nm) रात्रि-भंग से SDP का पुष्पन रुकता है व LDP का होता है!
├── 2. बसंतिकरण (Vernalization — Lecture 22)
│ ├── Lysenko (1928): शीतकालीन गेहूँ व द्विवर्षी रोज़ेट पौधों (पत्तागोभी, गाजर, चुकंदर, हेनबेन) को 0–5°C शीत उपचार देकर पुष्पन प्रेरित करना
│ └── ग्रहण स्थल = विभाजित होता प्ररोह शीर्ष (Shoot Apical Meristem) | हार्मोन: Vernalin (Melchers) ──► GA3 | उच्च ताप (35–40°C) से Devernalization
└── 3. जीर्णता, विलगन एवं स्टे-ग्रीन (Lectures 23–24)
├── Leopold (1961): Overall (Monocarpic — गेहूँ, चना, सोयाबीन), Top (आलू, केला), Deciduous (सेब, चिनार), Progressive
├── Richmond-Lang Effect (1957): Cytokinin क्लोरोफिल व प्रोटीन बचाकर जीर्णता रोकता है (पोषक सिंक बनाता है)
├── Abscission: पत्ती में Auxin घटने व Ethylene बढ़ने से Cellulase + Polygalacturonase मध्य पटलिका गलाते हैं | रोकथाम: NAA (10–20 ppm)
└── Stay-Green: Functional (Type A & B — ज्वार, मक्का, गेहूँ में उच्च उपज व सूखा सहिष्णुता) बनाम Cosmetic (Type C — Mendel's *sgr* pea)

प्रवाह चित्र · Flowchart

[दीप्तिकालिता और बसंतिकरण का प्ररोह शीर्ष में पुष्पन प्रेरित करने का संयुक्त आणविक-हार्मोनल पथ]
【1. बाह्य पर्यावरण: अनुकूल दिन/रात की लंबाई (Photoperiod)】 【2. बाह्य पर्यावरण: शीत ऋतु की ठंड (0°C से 5°C — Vernalization)】
│ │
▼ ▼
[ग्रहण स्थल: परिपक्व हरी पत्ती (Leaf)] [ग्रहण स्थल: प्ररोह शीर्ष विभज्योतक (Shoot Apex)]
• फाइटोक्रोम (Pr 660 nm ──► Pfr 730 nm) • हिस्टोन मिथाइलेशन द्वारा पुष्पन-दमनकारी FLC जीन का दमन!
• पत्ती के फ्लोएम में CONSTANS (CO) ──► FT जीन सक्रिय • वर्नेलिन ──► जिबरेलिन (GA3) का संश्लेषण एवं बोल्टिंग!
│ │
▼ (फ्लोएम द्वारा Florigen / FT प्रोटीन का परिवहन) │
└──────────────────────────────────┬─────────────────────────────────┘
▼
【प्ररोह शीर्ष विभज्योतक में पुष्पन जीन (APETALA1 / LFY) सक्रिय!】
│
▼
★ 【वानस्पतिक कलिका का 'पुष्प कलिका' (Floral Meristem) में रूपांतरण एवं पुष्पन!】

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • परीक्षा में सबसे ज्यादा बार पूछे जाने वाले 5 फसल वर्गीकरण:
    1. गन्ना, सोयाबीन, धान, ज्वार, बाजरा एवं तंबाकू = SDP (अल्प-दिवस पौधे)।
    2. गेहूँ, जौ, जई, चना, मटर, सरसों, पालक, मूली एवं चुकंदर = LDP (दीर्घ-दिवस पौधे)।
    3. टमाटर, मिर्च, बैंगन, कपास एवं सूरजमुखी = DNP (दिवस-तटस्थ पौधे)।
    4. आलू में कंद बनना (Tuberization) = SDP, किंतु आलू में फूल आना = LDP!
    5. प्याज में शल्ककंद बनना (Bulbing) = LDP!
  • सलाद (*Lactuca sativa*) के प्रकाश-संवेदी बीजों को क्रमशः R – FR – R – FR – R (अंतिम फ्लैश: लाल प्रकाश / Red light, 660 nm) दिया गया। क्या बीज अंकुरित होंगे? उत्तर: हाँ, 100% अंकुरित होंगे (क्योंकि अंतिम लाल फ्लैश से सक्रिय Pfr बन गया)!
  • विलगन क्षेत्र (Abscission zone) की मध्य पटलिका को गलाने वाले दो एंजाइम कौन से हैं? उत्तर: सेल्यूलेज (Cellulase) और पेक्टिनेज / पॉलीगैलेक्ट्यूरोनेज (Polygalacturonase)!

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • गार्नर और एलार्ड (1920) ने मैरीलैंड मैमथ तंबाकू और बिलोक्सी सोयाबीन में दीप्तिकालिता की खोज की थी।
  • चैलाख्यान (1936) द्वारा प्रस्तावित फ्लोरिजेन हार्मोन वास्तव में FT प्रोटीन (FLOWERING LOCUS T) है जो फ्लोएम से चलता है।
  • लाइसेंको (1928) ने शीत उपचार द्वारा पुष्पन प्रेरण के लिए 'बसंतिकरण' (Vernalization) शब्द दिया था।
  • सोयाबीन और चने जैसे एकफलनी (Monocarpic) पौधों से फलियों को तोड़ देने (Depodding) पर पौधे की जीर्णता रुक जाती है।
  • कार्यात्मक स्टे-ग्रीन (Functional Stay-Green) ज्वार और मक्का में पर्ण नाइट्रोजन व साइटोकाइनिन बनाए रखकर सूखे में भी उपज और चारकोल रॉट प्रतिरोध बढ़ाता है।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. निम्नलिखित फसलों के समूहों में से कौन सा समूह पूर्णतः 'दीर्घ-दिवस पौधों' (Long-Day Plants – LDP) का है?

  • (A) धान, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन एवं गन्ना (ये सभी SDP हैं)
  • (B) गेहूँ, जौ, जई, चना, मटर, सरसों, पालक एवं मूली (ये सभी रबी के LDP हैं!)
  • (C) टमाटर, कपास, सूरजमुखी एवं मिर्च (ये सभी DNP हैं)
  • (D) तंबाकू, जूट एवं गुलदाउदी
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — रबी ऋतु की फसलें (गेहूँ, जौ, जई, चना, मटर, सरसों, पालक, मूली, चुकंदर) वसंत के बढ़ते दिनों में फूलती हैं, अतः ये दीर्घ-दिवस पौधे (LDP) हैं।

2. पौधों में क्रमशः 'दीप्तिकालिक उद्दीपन' (Photoperiodic stimulus) और 'बसंतिकरण के शीत उद्दीपन' (Vernalization cold stimulus) को ग्रहण करने वाले अंग कौन से हैं?

  • (A) दोनों को जड़ें ग्रहण करती हैं
  • (B) दीप्तिकाल को 'परिपक्व हरी पत्तियाँ (Leaves)' और बसंतिकरण को 'विभाजित होता प्ररोह शीर्ष विभज्योतक (Shoot Apical Meristem / Embryo)' ग्रहण करता है!
  • (C) दीप्तिकाल को तना और बसंतिकरण को पत्ती ग्रहण करती है
  • (D) दोनों को केवल फूल ग्रहण करते हैं
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — नॉट (1934) ने सिद्ध किया कि दिन/रात की लंबाई पत्ती ग्रहण करती है, जबकि कर्टिस (1929) ने सिद्ध किया कि शीत उपचार प्ररोह शीर्ष कलिका ग्रहण करती है।

3. फाइटोक्रोम वर्णक के दो अंतर-परिवर्तनीय रूपों—निष्क्रिय Pr और जैविक रूप से सक्रिय Pfr—के अधिकतम प्रकाश अवशोषण तरंगदैर्घ्य क्या हैं?

  • (A) Pr = 400 nm एवं Pfr = 500 nm
  • (B) Pr = 660 nm (लाल प्रकाश / Red light) एवं Pfr = 730 nm (सुदूर-लाल प्रकाश / Far-red light)
  • (C) Pr = 730 nm एवं Pfr = 660 nm
  • (D) दोनों का 680 nm
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — Pr रूप 660 nm लाल प्रकाश सोखकर सक्रिय Pfr में बदलता है, और Pfr रूप 730 nm सुदूर-लाल प्रकाश सोखकर वापस निष्क्रिय Pr में बदल जाता है।

4. यदि एक अल्प-दिवस पौधे (SDP — जैसे सोयाबीन या Xanthium) की लंबी अंधकार अवधि (Long night) को बीच में '660 nm लाल प्रकाश' (Red light) की एक छोटी फ्लैश से तोड़ दिया जाए और तुरंत बाद में '730 nm सुदूर-लाल प्रकाश' (Far-red light) की फ्लैश दे दी जाए, तो क्या होगा?

  • (A) पौधे में फूल नहीं आएंगे
  • (B) पौधे में सामान्य रूप से पुष्पन होगा (क्योंकि 730 nm सुदूर-लाल प्रकाश ने लाल प्रकाश के अवरोध को उलट कर Pfr को वापस Pr में बदल दिया!)
  • (C) पौधा सूख जाएगा
  • (D) केवल जड़ें बढ़ेंगी
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — अंतिम फ्लैश सुदूर-लाल (730 nm) होने के कारण सक्रिय Pfr वापस निष्क्रिय Pr में बदल जाता है जिससे SDP में पुष्पन बहाल हो जाता है।

5. कटी हुई पत्तियों पर किस पादप हार्मोन का छिड़काव करने से क्लोरोफिल और प्रोटीन का विघटन रुक जाता है तथा पत्ती की जीर्णता (Senescence) में देरी होती है, जिसे 'रिचमंड-लैंग प्रभाव' (Richmond-Lang Effect, 1957) कहते हैं?

  • (A) एब्सिसिक अम्ल (ABA)
  • (B) साइटोकाइनिन (Cytokinin — जैसे Kinetin, BAP, Zeatin)
  • (C) एथिलीन
  • (D) 2,4-D
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — रिचमंड और लैंग (1957) ने Xanthium की पत्तियों में दिखाया कि साइटोकाइनिन पर्णहरित नाश रोककर और पोषक तत्व खींचकर जीर्णता को टालता है।

6. पत्ती या फल के डंठल के आधार पर स्थित 'विलगन परत' (Abscission Layer) की मध्य पटलिका (Middle lamella) और कोशिका भित्ति को गलाने वाले दो मुख्य एंजाइम कौन से हैं?

  • (A) एमाइलेज एवं माल्टेज
  • (B) सेल्यूलेज (Cellulase) एवं पेक्टिनेज / पॉलीगैलेक्ट्यूरोनेज (Pectinase / Polygalacturonase)
  • (C) रुबिस्को एवं पेपकेज
  • (D) नाइट्रोजिनेज एवं यूरिएज
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — एथिलीन हार्मोन विलगन क्षेत्र में सेल्यूलेज और पॉलीगैलेक्ट्यूरोनेज एंजाइमों का संश्लेषण कराता है जो कोशिकाओं को जोड़े रखने वाले पेक्टिन सीमेंट को घोल देते हैं।

7. गेहूँ, धान, मक्का, चना और सोयाबीन जैसे एकवर्षीय फसली पौधों में अपने जीवनकाल में केवल एक बार फूल और बीज बनाने के बाद संपूर्ण पौधे का एक साथ सूखकर मर जाना लियोपोल्ड (1961) के अनुसार किस प्रकार की जीर्णता है?

  • (A) पर्णपाती जीर्णता
  • (B) संपूर्ण पादप या एकफलनी जीर्णता (Overall / Monocarpic Senescence)
  • (C) शीर्ष जीर्णता
  • (D) क्रमिक जीर्णता
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — मोनोकार्पिक (एकफलनी) पौधों में दाना भरते समय सारी पत्तियों का नाइट्रोजन दानों में खिंच जाता है और पूरा पौधा एक साथ जीर्ण होकर मर जाता है।

8. निम्नलिखित फसलों में से कौन सा समूह 'दिवस-तटस्थ पौधों' (Day-Neutral Plants – DNP) का है जिनमें किसी भी मौसम या दिन की लंबाई में पुष्पन हो सकता है?

  • (A) गेहूँ, चना एवं सरसों
  • (B) धान, सोयाबीन एवं गन्ना
  • (C) टमाटर, मिर्च, बैंगन, कपास एवं सूरजमुखी (Tomato, Chilli, Brinjal, Cotton & Sunflower)
  • (D) पालक, मूली एवं चुकंदर
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — टमाटर, मिर्च, बैंगन, कपास, सूरजमुखी, राजमा और लोबिया दिवस-तटस्थ (DNP) पौधे हैं।

9. बसंतिकरण (Vernalization) किए गए बीजों या अंकुरों को पुष्पन से पहले 35°C से 40°C के उच्च तापमान पर रखने से शीत उपचार का प्रभाव समाप्त हो जाने की घटना क्या कहलाती है?

  • (A) पुनर्बसंतिकरण
  • (B) निर्बसंतिकरण (Devernalization)
  • (C) दीप्तिकालिक प्रेरण
  • (D) बोल्टिंग
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — उच्च तापमान (35–40°C) या अवायवीय परिस्थितियों द्वारा शीत उपचार के प्रभाव का नष्ट होना 'निर्बसंतिकरण' (Devernalization) कहलाता है।

10. ज्वार, मक्का और गेहूँ में 'कार्यात्मक स्टे-ग्रीन' (Functional Stay-Green — Type A & B) और मेंडल की हरी मटर के 'कॉस्मेटिक स्टे-ग्रीन' (Cosmetic Stay-Green — Type C) में मुख्य अंतर क्या है?

  • (A) दोनों में प्रकाश-संश्लेषण बंद हो जाता है
  • (B) कार्यात्मक स्टे-ग्रीन में पत्तियाँ हरी रहने के साथ-साथ सक्रिय प्रकाश-संश्लेषण कर उच्च उपज व सूखा सहिष्णुता देती हैं; जबकि कॉस्मेटिक स्टे-ग्रीन में केवल क्लोरोफिल तोड़ने वाला एंजाइम खराब होने से पत्ती हरी दिखती है किंतु प्रकाश-संश्लेषण बंद हो चुका होता है!
  • (C) कॉस्मेटिक स्टे-ग्रीन से उपज दोगुनी होती है
  • (D) दोनों एक समान हैं
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — फसल सुधार के लिए केवल 'कार्यात्मक स्टे-ग्रीन' ही उपयोगी है क्योंकि इसमें पर्ण-छत्र वास्तव में जीवित और प्रकाश-संश्लेषी रूप से सक्रिय रहता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. आलू में कंद निर्माण (Tuberization) और प्याज में शल्ककंद निर्माण (Bulbing) के लिए क्रमशः किस प्रकार के दीप्तिकाल की आवश्यकता होती है?

आलू में कंद निर्माण के लिए अल्प-दिवस (SDP) और प्याज में शल्ककंद निर्माण के लिए दीर्घ-दिवस (LDP) चाहिए।

2. पत्ती में बनने वाला पुष्पन हार्मोन 'फ्लोरिजेन' (Florigen) आणविक रूप से कौन सा प्रोटीन है और किस ऊतक से प्ररोह शीर्ष तक जाता है?

FT प्रोटीन (FLOWERING LOCUS T); यह फ्लोएम (Phloem) चालनी नलिकाओं द्वारा प्ररोह शीर्ष तक जाता है।

3. अरैबिडोप्सिस और गेहूँ में बसंतिकरण (शीत उपचार) किस मुख्य पुष्पन-दमनकारी जीन को एपिजेनेटिक रूप से शांत करता है?

FLC जीन (FLOWERING LOCUS C) को।

4. जीर्ण होती पीली पत्तियों के रूपांतरित क्लोरोप्लास्ट को क्या कहते हैं जिनमें थाइलाकोइड नष्ट हो जाते हैं और प्लास्टोग्लोब्यूली भर जाते हैं?

जेरोन्टोप्लास्ट (Gerontoplast)।

5. कपास में मशीन से तुड़ाई (Mechanical picking) करने से पहले पत्तियों को एक साथ गिराने (Defoliation) के लिए किस हार्मोन रसायन का छिड़काव किया जाता है?

एथ्रेल / एथेपॉन (Ethrel — जो विलगन प्रेरित करता है) या थिडियाजुरॉन (TDZ)।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. अल्प-दिवस (SDP), दीर्घ-दिवस (LDP) और दिवस-तटस्थ (DNP) पौधों की परिभाषा और 4-4 कृषि फसलों के उदाहरण लिखिए।

1. अल्प-दिवस पौधे (SDP): जिन्हें पुष्पन के लिए क्रांतिक दिन की लंबाई से कम प्रकाश और एक लंबी निर्बाध रात चाहिए—उदाहरण: धान, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन, गन्ना, तंबाकू। 2. दीर्घ-दिवस पौधे (LDP): जिन्हें क्रांतिक दिन की लंबाई से अधिक प्रकाश और छोटी रात चाहिए—उदाहरण: गेहूँ, जौ, चना, मटर, सरसों, पालक, मूली। 3. दिवस-तटस्थ पौधे (DNP): जिनका पुष्पन दिन की लंबाई से प्रभावित नहीं होता—उदाहरण: टमाटर, मिर्च, बैंगन, कपास, सूरजमुखी।

2. फाइटोक्रोम क्या है? लाल प्रकाश (660 nm) और सुदूर-लाल प्रकाश (730 nm) इसके दोनों रूपों को कैसे नियंत्रित करते हैं?

फाइटोक्रोम पौधों में पाया जाने वाला नीला-हरा जल-घुलनशील क्रोमोप्रोटीन प्रकाश-ग्राही वर्णक है। इसके दो अंतर-परिवर्तनीय रूप होते हैं: 1. Pr रूप (निष्क्रिय): यह 660 nm के लाल प्रकाश (Red light) को अवशोषित कर जैविक रूप से सक्रिय Pfr रूप में बदल जाता है। 2. Pfr रूप (सक्रिय): यह 730 nm के सुदूर-लाल प्रकाश (Far-red light) को अवशोषित कर (या अंधकार में धीमे तापीय रूपांतरण से) वापस निष्क्रिय Pr रूप में बदल जाता है। सक्रिय Pfr रूप ही सलाद के बीज अंकुरण और LDP के पुष्पन को प्रेरित करता है।

3. दीप्तिकालिता (Photoperiodism) और बसंतिकरण (Vernalization) में 4 मुख्य अंतर लिखिए।

1. उद्दीपन: दीप्तिकालिता में दिन व रात की सापेक्ष अवधि उद्दीपन है, जबकि बसंतिकरण में कम तापमान (0–5°C शीत उपचार) उद्दीपन है। 2. ग्रहण स्थल: दीप्तिकाल को परिपक्व हरी पत्तियाँ ग्रहण करती हैं, जबकि बसंतिकरण को विभाजित होता प्ररोह शीर्ष विभज्योतक ग्रहण करता है। 3. संवाहक पदार्थ: दीप्तिकालिता में फ्लोरिजेन (FT प्रोटीन) बनता है, जबकि बसंतिकरण में वर्नेलिन व जिबरेलिन बनते हैं। 4. उत्क्रमण: दीप्तिकालिक प्रेरण रात्रि-भंग (लाल प्रकाश) से और बसंतिकरण उच्च तापमान (35–40°C — निर्बसंतिकरण) से समाप्त हो जाता है।

4. विलगन (Abscission) का 'ऑक्सिन-प्रवणता सिद्धांत' और इसमें एथिलीन तथा कोशिका-भित्ति पाचक एंजाइमों की भूमिका समझाइए।

जब तक पत्ती या फल युवा और स्वस्थ रहता है, उसके फलक में उच्च ऑक्सिन (IAA) बनता है जो डंठल से तने की ओर ध्रुवीय प्रवणता बनाए रखता है और विलगन क्षेत्र को एथिलीन के प्रति असंवेदनशील रखता है। जब पत्ती बूढ़ी होती है या फल पकता है, तो ऑक्सिन का संश्लेषण घट जाता है और एथिलीन बढ़ जाती है। एथिलीन विलगन परत की कोशिकाओं में 'सेल्यूलेज' और 'पेक्टिनेज (पॉलीगैलेक्ट्यूरोनेज)' एंजाइमों का संश्लेषण कराती है, जो मध्य पटलिका के कैल्शियम पेक्टेट को घोल देते हैं और अंग टूटकर गिर जाता है।

5. 'स्टे-ग्रीन' (Stay-Green) अवधारणा क्या है और सूखा-प्रवण क्षेत्रों में ज्वार, मक्का व गेहूँ की उपज बढ़ाने में इसका क्या महत्व है?

सामान्य फसलों में फूल आने के बाद दाना भरते समय पत्तियाँ तेजी से पीली पड़कर सूख जाती हैं। इसके विपरीत, जिन किस्मों में पत्तियाँ दाना पकने की अंतिम अवस्था तक हरी और प्रकाश-संश्लेषी रूप से सक्रिय बनी रहती हैं, उन्हें 'स्टे-ग्रीन' कहते हैं। महत्व: 1. दाना भरने की अवधि बढ़ जाने से दानों का आकार (Test weight) और उपज 15–20% बढ़ जाती है। 2. सूखे के तनाव में जड़ों से साइटोकाइनिन प्रवाह बना रहता है जिससे तने में शर्करा बनी रहती है और पौधा 'चारकोल रॉट' व गिरने (Lodging) से बच जाता है। 3. दाने के साथ पौष्टिक हरा चारा भी मिलता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. दीप्तिकालिता (Photoperiodism) के गार्नर एवं एलार्ड प्रयोग, फसलों के वर्गीकरण (SDP, LDP, DNP), क्रांतिक अंधकार काल और फाइटोक्रोम व फ्लोरिजेन की भूमिका का समेकित पुनरीक्षण कीजिए।

गार्नर व एलार्ड (1920) की खोज, SDP, LDP व DNP फसलों की विस्तृत सूची, हैमनर व बोनर के रात्रि-भंग प्रयोग, फाइटोक्रोम की प्रकाश-उत्क्रमणीयता (Pr 660 nm ↔ Pfr 730 nm) और पत्ती से प्ररोह शीर्ष तक फ्लोरिजेन (FT प्रोटीन) के संवहन का वर्णन करें।

2. बसंतिकरण (Vernalization) की परिभाषा, शीतकालीन एवं वसंतकालीन किस्मों, ग्रहण स्थल, क्रियाविधि (वर्नेलिन एवं FLC जीन दमन), निर्बसंतिकरण और कृषि महत्व का वर्णन कीजिए।

लाइसेंको (1928) के गेहूँ प्रयोग, द्विवर्षी रोज़ेट पौधों में शीत आवश्यकता, प्ररोह शीर्ष विभज्योतक द्वारा ग्रहण, मेल्चर्स का वर्नेलिन व GA3 प्रतिस्थापन, FLC जीन का एपिजेनेटिक साइलेंसिंग और फसल प्रजनन में इसके महत्व का वर्णन करें।

3. पादप जीर्णता (Senescence) के प्रकारों व जैव-रासायनिक परिवर्तनों तथा विलगन (Abscission) की क्रियाविधि और 'स्टे-ग्रीन' (Stay-Green) अवधारणा की तुलनात्मक विवेचना कीजिए।

लियोपोल्ड के 4 जीर्णता प्रकार, क्लोरोफिल व प्रोटीन विघटन एवं रिचमंड-लैंग प्रभाव, विलगन परत में ऑक्सिन बनाम एथिलीन तथा सेल्यूलेज/पेक्टिनेज की भूमिका, NAA द्वारा फल झड़ना रोकना और कार्यात्मक बनाम कॉस्मेटिक स्टे-ग्रीन का सविस्तर वर्णन करें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • गार्नर और एलार्ड (1920) ने तंबाकू की 'मैरीलैंड मैमथ' किस्म और 'बिलोक्सी' सोयाबीन में दीप्तिकालिता की खोज की थी।
  • कॉकलेबर (Xanthium strumarium) एक ऐसा अत्यधिक संवेदनशील अल्प-दिवस पौधा (SDP) है जिसे पुष्पन के लिए केवल 1 अनुकूल चक्र ही पर्याप्त है!
  • सलाद (Lettuce) के बीजों का अंकुरण लाल प्रकाश (660 nm) से प्रेरित होता है और सुदूर-लाल प्रकाश (730 nm) से रुक जाता है।
  • अधिकांश दीर्घ-दिवस पौधों (LDP) और शीत-आवश्यक द्विवर्षी पौधों में जिबरेलिन (GA3) का छिड़काव पुष्पन प्रेरित कर देता है।
  • ज्वार में 'E1' से 'E4' और 'Ma1' से 'Ma6' जीन परिपक्वता और दीप्तिकालिक संवेदनशीलता को नियंत्रित करते हैं।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध PPHYS 311 Smart Notes।

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