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AGF 311 Lecture 14: भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) द्वारा विकसित कृषि वानिकी मॉडल | Hindi Notes

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AGF 311 · Introductory Agroforestry
विषय सूची · Quick Navigation02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)
Lecture 14 Source Page Reference in Supplied Pack: 133 (AGF 311 Theory Lecture 14)

Lecture 14: भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) द्वारा विकसित कृषि वानिकी मॉडल

Agroforestry models developed by Indian Council of Forestry Research and Education

02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान (Lecture) के अध्ययन के पश्चात् विद्यार्थी निम्नलिखित में सक्षम होंगे:

  1. भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE, देहरादून — स्थापना 1986, स्वायत्त परिषद 1991; पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन) तथा इसके 9 क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थानों और 5 केंद्रों को जानना।
  2. FRI (देहरादून) द्वारा सिंधु-गंगा के मैदानों के लिए विकसित उच्च-आय वाले पॉपलर (G-48, उदई, L-49) और क्लोनल यूकेलिप्टस आधारित वाणिज्यिक कृषि वानिकी मॉडलों का अध्ययन करना।
  3. AFRI (जोधपुर) द्वारा राजस्थान व गुजरात के शुष्क क्षेत्रों के लिए विकसित खेजड़ी (Prosopis cineraria), रोहिड़ा (Tecomella undulata) और अर्डू (Ailanthus excelsa) आधारित मॉडलों को समझना।
  4. IFGTB (कोयंबटूर) के मालाबार नीम (Melia dubia) व कैजुआरिना क्लोनल मॉडल तथा IWST (बेंगलुरु) के उच्च-मूल्य वाले चंदन (Santalum album — अर्ध-जड़ परजीवी + परपोषी पौधे) कृषि वानिकी मॉडल का विश्लेषण करना।
  5. TFRI (जबलपुर), RFRI (जोरहाट — अगरवुड व बाँस), IFP (राँची — लाख आधारित) और HFRI (शिमला) के क्षेत्रीय कृषि वानिकी मॉडलों की तुलना करना।

03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): भारत में वानिकी और काष्ठ-आधारित कृषि वानिकी अनुसंधान की सर्वोच्च संस्था ‘भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद’ (Indian Council of Forestry Research and Education — ICFRE) है। इसकी स्थापना वर्ष 1986 में (और 1991 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय – MoEFCC के अंतर्गत एक स्वायत्त परिषद के रूप में) हुई तथा इसका मुख्यालय देहरादून (उत्तराखंड) में स्थित है।

ICFRE ने अपने 9 क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से देश के सभी प्रमुख कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए उच्च उत्पादक क्लोनल वृक्ष किस्में और वैज्ञानिक क्षेत्र-विशिष्ट कृषि वानिकी मॉडल (Agroforestry Models Developed by ICFRE) विकसित किए हैं, जिन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और काष्ठ उद्योगों को आत्मनिर्भर बनाने में ऐतिहासिक योगदान दिया है।

04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

ICFRE (देहरादून — स्थापना 1986)
भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अधीन देश में वानिकी अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार का संचालन करने वाली शीर्ष स्वायत्त परिषद (मुख्यालय: देहरादून)।
FRI (वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून — 1906)
भारत का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित वानिकी संस्थान (1878 में फॉरेस्ट स्कूल के रूप में प्रारंभ, 1906 में Imperial Forest Research Institute बना), जिसने उत्तर भारत में पॉपलर और यूकेलिप्टस क्रांति का नेतृत्व किया।
AFRI (शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर — 1988)
राजस्थान, गुजरात और दादरा व नगर हवेली के गर्म शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए वानिकी व कृषि वानिकी मॉडल विकसित करने वाला ICFRE का संस्थान (मुख्यालय: जोधपुर, राजस्थान)।
अर्ध-मूल परजीवी चंदन मॉडल (Hemiparasitic Sandalwood Model — IWST)
चंदन (Santalum album) एक आंशिक जड़ परजीवी (Root hemiparasite) वृक्ष है जिसकी जड़ें ‘हॉस्टोरिया’ (Haustoria) द्वारा पास के परपोषी पौधे (Host plant: जैसे अरहर, कैजुआरिना, आँवला, सुबबूल) की जड़ों से खनिज व जल लेती हैं। IWST बेंगलुरु ने चंदन + आँवला/कैजुआरिना/अरहर का अत्यंत लाभकारी मॉडल विकसित किया है।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. ICFRE के प्रमुख संस्थानों द्वारा विकसित क्षेत्रीय कृषि वानिकी मॉडल

1. FRI, देहरादून के मॉडल (उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा, प. उ.प्र., उत्तराखंड)

• (a) पॉपलर आधारित मॉडल (Poplar-based Agri-silviculture Model):
– वृक्ष एवं क्लोन: Populus deltoides (उन्नत क्लोन: G-48, Udai, Kranti, L-49, S7C8, Wimco-110)।
– रोपण अंतराल व चक्र: ब्लॉक रोपण में 5 m × 4 m (500 वृक्ष/ha) या मेड़ रोपण में 3 m अंतराल; आवर्तन चक्र: 6 से 8 वर्ष।
– अंतःफसल अनुक्रम: प्रथम 2 वर्षों में गन्ना (Sugarcane); 3रे से 6ठे वर्ष तक रबी में गेहूँ (Wheat), आलू, सरसों या बरसीम (पॉपलर के शीतकालीन पतझड़ के कारण) और खरीफ में छाया-सहनशील हल्दी (Turmeric) या अदरक व चारा ज्वार।
– आर्थिक लाभ: 6–8 वर्ष में 150–200 m³/ha प्लाईवुड काष्ठ (B:C अनुपात 2.8 से 3.5)।
• (b) क्लोनल सफेदा एवं मेलिया मॉडल: Eucalyptus tereticornis (FRI-4, FRI-5, क्लोन 316, 413) या Melia composita + गेहूँ / धान / हल्दी (4–5 वर्ष कागज लुगदी व पोल चक्र)।

2. AFRI, जोधपुर के मॉडल (शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्र: राजस्थान व गुजरात)

• (a) खेजड़ी आधारित कृषि वानिकी मॉडल (Khejri Model):
– संयोजन: Prosopis cineraria (खेजड़ी, 8 m × 8 m या 10 m × 10 m, 100–150 वृक्ष/ha) + खरीफ में बाजरा (Pearl millet), मूंग (Moong bean), मोठ (Moth bean) एवं ग्वार (Cluster bean)।
– लाभ: खेजड़ी के नीचे मूंग व बाजरे की उपज खुले खेत से 15–25% अधिक मिलती है + प्रति वृक्ष 15–25 kg सूखा ‘लूंग’ चारा व ‘सांगरी’।
• (b) अर्डू आधारित मॉडल (Ardu Model for Semi-Arid Rajasthan):
– संयोजन: Ailanthus excelsa (अर्डू, 6 m × 6 m या खेत की मेड़ों पर) + बाजरा / ग्वार / चना / सरसों। बकरी पालन हेतु वर्ष में दो बार हरी पत्ती चारा (लोपिंग) एवं 8–10 वर्ष में माचिस/पैकिंग काष्ठ।
• (c) रोहिड़ा एवं हार्डविकिया मॉडल: Tecomella undulata (रोहिड़ा) या Hardwickia binata (अंजन वृक्ष) + ग्वार / मोठ / सेवण घास (Lasiurus sindicus)।

3. IFGTB, कोयंबटूर के मॉडल (दक्षिणी प्रायद्वीपीय एवं तटीय क्षेत्र: तमिलनाडु, केरल, आंध्र)

• (a) मालाबार नीम क्लोनल मॉडल (Melia dubia Model):
– Melia dubia भारत का सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्लाईवुड काष्ठ वृक्ष है (IFGTB द्वारा विकसित क्लोन)।
– संयोजन: Melia dubia (5 m × 5 m या 6 m × 4 m; आवर्तन मात्र 5–6 वर्ष) + मूंगफली (Groundnut), उड़द, लोबिया, हल्दी, केला या चारा ज्वार।
• (b) कैजुआरिना आधारित मॉडल (Casuarina Clonal Model):
– Casuarina equisetifolia / C. junghuhniana (युग्मित पंक्ति या 4 m × 2 m, आवर्तन 3–4 वर्ष कागज लुगदी व पोल हेतु) + मूंगफली / तिल / तरबूज / दलहन।

4. IWST, बेंगलुरु का उच्च-मूल्य चंदन कृषि वानिकी मॉडल (Sandalwood Model)

• भारतीय चंदन (Santalum album) विश्व की सबसे महँगी सुगंधित अंतःकाष्ठ (Heartwood & Sandalwood oil) देता है। चूँकि चंदन एक अर्ध-मूल परजीवी (Root hemiparasite) है, अतः IWST मॉडल में:
– मुख्य वृक्ष: Santalum album (चंदन @ 6 m × 3 m या 5 m × 5 m; आवर्तन 12–15 वर्ष)।
– प्राथमिक परपोषी (Primary Host in pot/initial stage): अरहर (Cajanus cajan) या अल्टरनेंथेरा।
– दीर्घकालिक परपोषी सह-वृक्ष (Secondary/Permanent Host between sandalwood rows): आँवला (Emblica officinalis), कैजुआरिना (Casuarina equisetifolia), अमलतास या नीम + कतारों के बीच रागी / चना / मूंगफली / अश्वगंधा।

2. अन्य ICFRE संस्थानों के प्रमुख क्षेत्रीय मॉडल

  • 5. TFRI, जबलपुर (मध्य भारत: म.प्र., छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र):
    • सागवान एवं खम्हार (गम्हार) मॉडल: Tectona grandis (सागवान) या Gmelina arborea (खम्हार/गम्हार @ 4×4 m या मेड़ों पर) + सोयाबीन / चना / अरहर / गेहूँ / हल्दी।
    • बबूल आधारित धान मॉडल (छत्तीसगढ़ पारंपरिक व उन्नत प्रणाली): Acacia nilotica + धान (Paddy)।
  • 6. RFRI, जोरहाट (असम एवं पूर्वोत्तर भारत):
    • अगरवुड एवं सुपारी/चाय मॉडल: Aquilaria malaccensis (अगरवुड / साँची — बहुमूल्य इत्र काष्ठ) + चाय / सुपारी / काली मिर्च / हल्दी / अदरक।
    • बाँस आधारित एग्री-सिल्वीकल्चर मॉडल: Bambusa balcooa / B. tulda + अदरक / हल्दी / अनानास।
  • 7. IFP, राँची (झारखंड, बिहार, प. बंगाल — पूर्वी पठार):
    • लाख आधारित कृषि वानिकी मॉडल (Lac-based Agroforestry Model): फ्लेमिंगिया सेमियालाटा (Flemingia semialata — झाड़ी परपोषी, 1 वर्ष में लाख उत्पादन) तथा पलाश (Butea monosperma), बेर और कुसुम (Schleichera oleosa) पर केरिया लैक्का (Kerria lacca) कीट पालन + बीच में सब्जियाँ व दलहन।
  • 8. HFRI, शिमला (हिमाचल व जम्मू-कश्मीर — शीतोष्ण हिमालय):
    • Salix alba (विलो) / Populus ciliata / Grewia optiva (भीमल) + मटर / राजमा / आलू / सेब व औषधीय पौधे।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

ICFRE (देहरादून) के अधीन कार्यरत सभी 9 क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान (9 Institutes of ICFRE):

  1. FRI (Forest Research Institute) — देहरादून (उत्तराखंड)
  2. AFRI (Arid Forest Research Institute) — जोधपुर (राजस्थान)
  3. IFGTB (Institute of Forest Genetics and Tree Breeding) — कोयंबटूर (तमिलनाडु)
  4. IWST (Institute of Wood Science and Technology) — बेंगलुरु (कर्नाटक)
  5. TFRI (Tropical Forest Research Institute) — जबलपुर (मध्य प्रदेश)
  6. RFRI (Rain Forest Research Institute) — जोरहाट (असम)
  7. HFRI (Himalayan Forest Research Institute) — शिमला (हिमाचल प्रदेश)
  8. IFP (Institute of Forest Productivity) — राँची (झारखंड)
  9. IFB (Institute of Forest Biodiversity) — हैदराबाद (तेलंगाना)

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)

  • उच्च उत्पादक क्लोनल कृषि वानिकी का सिद्धांत (Principle of Clonal Agroforestry): बीज से उगाए गए पौधों में आनुवंशिक भिन्नता के कारण कुछ पेड़ मोटे और कुछ पतले रह जाते हैं तथा उपज कम (8–10 m³/ha/yr) होती है। ICFRE संस्थानों ने सुपीरियर प्लस वृक्षों (Plus trees) के चयन और क्लोनल प्रवर्धन से एकसमान छत्र, रोग-प्रतिरोधकता और 25 से 45 m³/ha/yr की उच्च काष्ठ उत्पादकता (MAI – Mean Annual Increment) वाले क्लोन (पॉपलर, सफेदा, मेलिया दुबिया, कैजुआरिना) विकसित किए हैं।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)

व्यावहारिक उदाहरण: चंदन (Santalum album) के साथ परपोषी (Host) प्रबंधन का वैज्ञानिक कारण

यदि किसान अकेले चंदन का पौधा लगा दे, तो वह कुछ ही समय में पीला पड़कर मर जाता है क्योंकि चंदन की जड़ें स्वयं पर्याप्त नाइट्रोजन, फास्फोरस और लोहा अवशोषित नहीं कर पातीं। IWST बेंगलुरु के मॉडल के अनुसार रोपण के समय चंदन के गड्ढे से 30–50 cm दूरी पर अरहर (Cajanus cajan) लगाई जाती है और दो चंदन वृक्षों के बीच स्थायी परपोषी के रूप में आँवला (Emblica officinalis) या कैजुआरिना लगाया जाता है। इससे चंदन की जड़ें परपोषी की जड़ों से जुड़कर तेजी से बढ़ती हैं और किसान को आँवला/अरहर से वार्षिक आय तथा 15 वर्ष बाद चंदन से करोड़ों रुपये की आय मिलती है।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 14.1: ICFRE के प्रमुख क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान एवं उनके प्रतिनिधि कृषि वानिकी मॉडल
ICFRE संस्थान एवं मुख्यालय लक्षित कृषि-जलवायु क्षेत्र प्रमुख विकसित कृषि वानिकी मॉडल (Tree + Crop Combination) मुख्य औद्योगिक/आर्थिक आउटपुट
1. FRI, देहरादून सिंधु-गंगा के सिंचित मैदान (पंजाब, हरियाणा, प. उ.प्र.) पॉपलर (5×4 m) + गन्ना (वर्ष 1–2) ➔ गेहूँ + हल्दी/अदरक (वर्ष 3–6) प्लाईवुड, माचिस, कागज लुगदी (6–8 वर्ष चक्र)।
2. AFRI, जोधपुर गर्म शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्र (राजस्थान, गुजरात) खेजड़ी / रोहिड़ा / अर्डू + बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार व सेवण घास लूंग चारा, सांगरी, मारवाड़ सागवान काष्ठ, माचिस काष्ठ।
3. IFGTB, कोयंबटूर दक्षिणी प्रायद्वीप एवं तटीय क्षेत्र (तमिलनाडु, केरल) मालाबार नीम (Melia dubia) / कैजुआरिना + मूंगफली, दलहन, केला तीव्रतम प्लाईवुड काष्ठ (5–6 वर्ष) एवं कागज लुगदी (3–4 वर्ष)।
4. IWST, बेंगलुरु दक्षिणी एवं मध्य भारत (कर्नाटक, आंध्र, महाराष्ट्र) चंदन (Santalum album) + परपोषी आँवला/अरहर/कैजुआरिना + दलहन उच्च मूल्य सुगंधित चंदन अंतःकाष्ठ व तेल + आँवला फल।
5. TFRI, जबलपुर मध्य भारत (म.प्र., छत्तीसगढ़, विदर्भ) सागवान / खम्हार (Gmelina arborea) / बबूल + सोयाबीन, धान, चना प्रथम श्रेणी इमारती फर्नीचर काष्ठ व कृषि औजार।
6. RFRI, जोरहाट एवं IFP, राँची पूर्वोत्तर भारत एवं पूर्वी पठार (असम, झारखंड) अगरवुड / बाँस + चाय/हल्दी (RFRI) | Flemingia/कुसुम लाख मॉडल (IFP) अगर तेल, बाँस उत्पाद एवं प्राकृतिक लाख (Lac) उत्पादन।

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)

महत्वपूर्ण संस्थानिक मुख्यालय एवं आवर्तन काल (Key ICFRE Facts & Rotation Periods)
  • ICFRE मुख्यालय एवं स्थापना: देहरादून (उत्तराखंड), 1986 (स्वायत्त परिषद: 1991; मंत्रालय: MoEFCC)
  • राजस्थान में स्थित ICFRE संस्थान: AFRI (Arid Forest Research Institute — शुष्क वन अनुसंधान संस्थान), जोधपुर (स्थापना 1988)
  • प्रमुख वाणिज्यिक आवर्तन चक्र (Harvesting Rotation):
    • कैजुआरिना (पल्पवुड) = 3–4 वर्ष  |  क्लोनल सफेदा = 4–6 वर्ष  |  मालाबार नीम (Melia dubia) = 5–6 वर्ष
    • पॉपलर (Populus deltoides) = 6–8 वर्ष  |  अर्डू = 8–10 वर्ष  |  चंदन (Santalum album) = 12–15 वर्ष

11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 14 Mind Map: भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) के क्षेत्रीय कृषि वानिकी मॉडल
  • ICFRE कृषि वानिकी मॉडल (मुख्यालय: देहरादून, 1986 | कुल 9 क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान)
    • उत्तरी एवं पश्चिमी भारत के मॉडल (FRI, AFRI, HFRI)
      • FRI देहरादून: पॉपलर (G-48, उदई; 5×4m, 6–8 वर्ष) + गन्ना (वर्ष 1-2) व गेहूँ/हल्दी (वर्ष 3-6) तथा क्लोनल सफेदा मॉडल
      • AFRI जोधपुर: खेजड़ी (Prosopis cineraria) / रोहिड़ा / अर्डू (Ailanthus excelsa) + बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार व सेवण घास
      • HFRI शिमला: विलो (Salix) / पॉपलर / भीमल + मटर, राजमा, सेब व औषधीय पौधे
    • दक्षिणी भारत के क्लोनल एवं उच्च-मूल्य मॉडल (IFGTB, IWST, IFB)
      • IFGTB कोयंबटूर: मालाबार नीम (Melia dubia — प्लाईवुड, 5–6 वर्ष) एवं कैजुआरिना क्लोन + मूंगफली/दलहन/केला
      • IWST बेंगलुरु: चंदन (Santalum album — अर्ध-मूल परजीवी) + परपोषी (अरहर/आँवला/कैजुआरिना) + रागी/दलहन
    • मध्य एवं पूर्वी भारत के मॉडल (TFRI, RFRI, IFP)
      • TFRI जबलपुर: सागवान / गम्हार (Gmelina arborea) + सोयाबीन/चना एवं बबूल + धान मॉडल
      • RFRI जोरहाट व IFP राँची: अगरवुड/बाँस + चाय/अदरक (RFRI) एवं फ्लेमिंगिया/पलाश/कुसुम लाख मॉडल (IFP)

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)

प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): FRI देहरादून के 6-वर्षीय ‘पॉपलर आधारित वाणिज्यिक कृषि वानिकी मॉडल’ का फसल चक्र
जनवरी-फरवरी (वर्ष 1)
(पॉपलर ETP 5×4m = 500 वृक्ष/ha रोपण)
➔ वर्ष 1 से 2 (खुला छत्र)
(कतारों के बीच गन्ना मुख्य व पेड़ी फसल)
➔ वर्ष 3 से 6 (रबी — पतझड़)
(पर्णहीन पॉपलर के नीचे गेहूँ/बरसीम/आलू)
➔ वर्ष 3 से 6 (खरीफ — छाया)
(छाया-सहनशील हल्दी / अदरक / चारा)
➔ वर्ष 6–8 (अंतिम कटाई)
(150–200 m³ प्लाईवुड काष्ठ + उच्च लाभ)

13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • ICFRE के मुख्य संस्थानों के मुख्यालय अवश्य याद रखें: ICFRE व FRI = देहरादून; AFRI (शुष्क वन अनुसंधान संस्थान) = जोधपुर (राजस्थान); IFGTB = कोयंबटूर; IWST = बेंगलुरु; TFRI = जबलपुर; RFRI = जोरहाट (असम); HFRI = शिमला; IFP = राँची; और IFB = हैदराबाद।
  • चंदन (Santalum album) एक ‘अर्ध-मूल परजीवी’ (Root hemiparasite) वृक्ष है, इसलिए IWST (बेंगलुरु) के चंदन कृषि वानिकी मॉडल में इसके साथ अरहर (प्राथमिक परपोषी) और आँवला या कैजुआरिना (स्थायी परपोषी) लगाना अनिवार्य होता है।
  • FRI देहरादून के पॉपलर मॉडल (5m × 4m) में शुरुआती 2 वर्षों में ‘गन्ना’ और बाद के वर्षों (3–6 वर्ष) में रबी में ‘गेहूँ’ तथा खरीफ में छाया-सहनशील ‘हल्दी या अदरक’ की सिफारिश की जाती है।
  • IFGTB कोयंबटूर द्वारा विकसित ‘मालाबार नीम’ (Melia dubia) प्लाईवुड उद्योग के लिए मात्र 5–6 वर्ष में तैयार होने वाला अत्यधिक लोकप्रिय कृषि वानिकी वृक्ष है।
  • IFP राँची द्वारा लाख (Lac) उत्पादन के लिए प्रचारित झाड़ीदार दलहनी परपोषी पौधा ‘फ्लेमिंगिया सेमियालाटा’ (Flemingia semialata) है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)

  • ICFRE: स्थापना 1986, मुख्यालय देहरादून (MoEFCC के अधीन)।
  • AFRI जोधपुर मॉडल: खेजड़ी / रोहिड़ा / अर्डू + बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार व सेवण घास।
  • FRI देहरादून मॉडल: पॉपलर (G-48, उदई; 5×4m) + गन्ना / गेहूँ / हल्दी।
  • IFGTB कोयंबटूर मॉडल: Melia dubia एवं Casuarina क्लोनल मॉडल।
  • IWST बेंगलुरु मॉडल: चंदन (Santalum album) + परपोषी आँवला / अरहर / कैजुआरिना।

15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)

1. भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) का मुख्यालय कहाँ स्थित है और इसके अधीन शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (AFRI) कहाँ स्थित है?
(A) नई दिल्ली और जयपुर
(B) देहरादून (उत्तराखंड) और जोधपुर (राजस्थान)
(C) भोपाल और बीकानेर
(D) कोलकाता और शिमला
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (B) देहरादून (उत्तराखंड) और जोधपुर (राजस्थान)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): ICFRE और FRI का मुख्यालय देहरादून में है, जबकि शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (AFRI) जोधपुर (राजस्थान) में स्थित है।
2. FRI देहरादून द्वारा विकसित पॉपलर (Populus deltoides, 5×4 m) आधारित कृषि वानिकी मॉडल में प्रथम 2 वर्षों में और 3रे से 6ठे वर्ष के दौरान कौन-सा फसल चक्र सर्वाधिक अनुशंसित है?
(A) प्रथम 2 वर्ष गन्ना; और 3–6 वर्ष में रबी में गेहूँ तथा खरीफ में हल्दी/अदरक
(B) केवल 6 वर्ष तक धान
(C) केवल कपास और बाजरा
(D) केवल सेब
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) प्रथम 2 वर्ष गन्ना; और 3–6 वर्ष में रबी में गेहूँ तथा खरीफ में हल्दी/अदरक
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): शुरुआती 2 वर्षों में धूप अधिक होने से गन्ना और बाद में शीतकालीन पतझड़ में गेहूँ तथा खरीफ की छाया में हल्दी/अदरक सर्वोत्तम प्रतिफल देते हैं।
3. काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IWST, बेंगलुरु) द्वारा विकसित चंदन (Santalum album) आधारित कृषि वानिकी मॉडल में चंदन के साथ अरहर, आँवला या कैजुआरिना क्यों लगाए जाते हैं?
(A) क्योंकि चंदन एक ‘अर्ध-मूल परजीवी’ (Root hemiparasite) है जिसे पोषण हेतु परपोषी पौधे (Host plant) की आवश्यकता होती है
(B) केवल सुंदरता के लिए
(C) चंदन को सुखाने के लिए
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) क्योंकि चंदन एक ‘अर्ध-मूल परजीवी’ (Root hemiparasite) है जिसे पोषण हेतु परपोषी पौधे (Host plant) की आवश्यकता होती है
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): चंदन की जड़ें हॉस्टोरिया बनाकर परपोषी पौधों (अरहर, आँवला, कैजुआरिना) की जड़ों से जल और खनिज पोषक तत्व प्राप्त करती हैं।
4. वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान (IFGTB, कोयंबटूर) ने प्लाईवुड उद्योग के लिए मात्र 5–6 वर्ष के छोटे आवर्तन काल वाली किस देशी तीव्र-वृद्धि वृक्ष प्रजाति के उच्च उपज क्लोन विकसित किए हैं?
(A) मालाबार नीम (Melia dubia)
(B) भोजपत्र (Betula utilis)
(C) देवदार (Cedrus deodara)
(D) खैर (Acacia catechu)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) मालाबार नीम (Melia dubia)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): IFGTB कोयंबटूर ने मालाबार नीम (Melia dubia) और कैजुआरिना के उच्च उत्पादक क्लोन विकसित किए हैं जो दक्षिण व मध्य भारत में अत्यंत लोकप्रिय हैं।
5. शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (AFRI, जोधपुर) द्वारा राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में बकरी पालन (पत्ती चारा) और माचिस उद्योग के लिए किस वृक्ष पर आधारित कृषि वानिकी मॉडल विकसित किया गया है?
(A) अर्डू (Ailanthus excelsa) + बाजरा/ग्वार/दलहन मॉडल
(B) रबर वृक्ष मॉडल
(C) नारियल-सुपारी मॉडल
(D) अगरवुड-चाय मॉडल
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) अर्डू (Ailanthus excelsa) + बाजरा/ग्वार/दलहन मॉडल
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): AFRI जोधपुर ने शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए खेजड़ी (Prosopis cineraria), रोहिड़ा (Tecomella undulata) और अर्डू (Ailanthus excelsa) आधारित मॉडल विकसित किए हैं।
6. पूर्वोत्तर भारत के लिए वर्षा वन अनुसंधान संस्थान (RFRI, जोरहाट) द्वारा विकसित उच्च-मूल्य सुगंधित काष्ठ कृषि वानिकी मॉडल में चाय और काली मिर्च के साथ कौन-सा वृक्ष लगाया जाता है?
(A) अगरवुड / साँची (Aquilaria malaccensis)
(B) खेजड़ी
(C) रोहिड़ा
(D) भोजपत्र
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) अगरवुड / साँची (Aquilaria malaccensis)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): RFRI जोरहाट (असम) ने अगरवुड (Aquilaria malaccensis) और बाँस पर आधारित कृषि वानिकी मॉडल विकसित किए हैं।
7. वन उत्पादकता संस्थान (IFP, राँची) द्वारा छोटे किसानों की त्वरित आय के लिए लाख कीट (Kerria lacca) पालन हेतु किस झाड़ीदार दलहनी पौधे पर आधारित मॉडल प्रचारित किया गया है?
(A) फ्लेमिंगिया सेमियालाटा (Flemingia semialata)
(B) आक (Calotropis)
(C) लैंटाना (Lantana camara)
(D) गाजर घास
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) फ्लेमिंगिया सेमियालाटा (Flemingia semialata)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): Flemingia semialata एक बहुवर्षीय दलहनी झाड़ी है जिस पर रोपण के मात्र 1 वर्ष बाद से ही कुसुमी लाख का उत्पादन लिया जा सकता है।
8. निम्नलिखित में से कौन-से क्लोन पॉपलर (Populus deltoides) की प्रसिद्ध उन्नत किस्में हैं?
(A) G-48, Udai (उदई), Kranti (क्रांति), L-49 और Wimco-110
(B) NA-7, कृष्णा और कंचन
(C) गोला, सेव और उमरान
(D) IGFRI-3 और IGFRI-6
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) G-48, Udai (उदई), Kranti (क्रांति), L-49 और Wimco-110
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): G-48, Udai, Kranti, L-49 पॉपलर के प्रसिद्ध क्लोन हैं (जबकि NA-7/कृष्णा/कंचन आँवले की और गोला/सेव/उमरान बेर की किस्में हैं)।
9. उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान (TFRI) का मुख्यालय कहाँ स्थित है?
(A) जबलपुर (मध्य प्रदेश)
(B) कोयंबटूर (तमिलनाडु)
(C) शिमला (हिमाचल प्रदेश)
(D) हैदराबाद (तेलंगाना)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) जबलपुर (मध्य प्रदेश)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): TFRI (Tropical Forest Research Institute) जबलपुर (म.प्र.) में स्थित है।
10. भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) भारत सरकार के किस मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है?
(A) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)
(B) रेल मंत्रालय
(C) कपड़ा मंत्रालय
(D) रक्षा मंत्रालय
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
सही उत्तर (Answer): (A) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)
वैज्ञानिक व्याख्या (Explanation): ICFRE पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) के अधीन एक स्वायत्त परिषद है।

16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर्स (5 Important Exam One-Liners)

  1. ICFRE की स्थापना 1986 में देहरादून में हुई और इसके अधीन कुल 9 क्षेत्रीय वानिकी अनुसंधान संस्थान कार्यरत हैं।
  2. शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (AFRI) जोधपुर (राजस्थान) में तथा वन अनुसंधान संस्थान (FRI) देहरादून में स्थित है।
  3. FRI के पॉपलर मॉडल में पॉपलर (5×4 m) के साथ शुरुआती 2 वर्ष गन्ना और 3–6 वर्ष में गेहूँ व हल्दी उगाई जाती है।
  4. चंदन (Santalum album) एक अर्ध-मूल परजीवी वृक्ष है जिसके लिए IWST बेंगलुरु मॉडल में अरहर व आँवला/कैजुआरिना परपोषी लगाए जाते हैं।
  5. IFGTB कोयंबटूर ने मालाबार नीम (Melia dubia) और कैजुआरिना के उच्च उपज वाले क्लोनल कृषि वानिकी मॉडल विकसित किए हैं।

(B) 5 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions)

1. ICFRE का पूर्ण रूप, स्थापना वर्ष और मुख्यालय लिखिए।
उत्तर: Indian Council of Forestry Research and Education (भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद); स्थापना: 1986; मुख्यालय: देहरादून (उत्तराखंड)।
2. राजस्थान में स्थित ICFRE के क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान का पूरा नाम और स्थान लिखिए।
उत्तर: शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (Arid Forest Research Institute – AFRI), जोधपुर (राजस्थान; स्थापना 1988)।
3. पॉपलर (Populus deltoides) के किन्हीं चार उन्नत क्लोनों के नाम लिखिए।
उत्तर: G-48, उदई (Udai), क्रांति (Kranti) और L-49 (तथा Wimco-110)।
4. चंदन (Santalum album) के साथ लगाए जाने वाले दो प्रमुख दीर्घकालिक परपोषी (Host) वृक्षों के नाम लिखिए।
उत्तर: आँवला (Emblica officinalis) और कैजुआरिना (Casuarina equisetifolia)।
5. IFGTB और IWST के मुख्यालय कहाँ स्थित हैं?
उत्तर: IFGTB (Institute of Forest Genetics and Tree Breeding): कोयंबटूर (तमिलनाडु); IWST (Institute of Wood Science and Technology): बेंगलुरु (कर्नाटक)।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions)

1. FRI (देहरादून) द्वारा विकसित पॉपलर आधारित कृषि वानिकी मॉडल की संरचना, फसल चक्र और आर्थिक लाभ लिखिए।
उत्तर: FRI देहरादून द्वारा पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उ.प्र. और उत्तराखंड के सिंचित क्षेत्रों के लिए पॉपलर (क्लोन G-48, उदई, L-49) का मॉडल विकसित किया गया है। इसमें जनवरी-फरवरी में 5m × 4m (500 वृक्ष/ha) पर नग्न-जड़ ETP लगाए जाते हैं। पहले 2 वर्षों में गन्ना उगाया जाता है। 3रे से 6ठे वर्ष तक शीतकाल (जब पॉपलर पर्णहीन होता है) में गेहूँ, आलू या बरसीम तथा खरीफ में छाया-सहनशील हल्दी या अदरक उगाई जाती है। 6–8 वर्ष में प्लाईवुड काष्ठ से उच्च आय (B:C > 2.8) मिलती है।
2. AFRI (जोधपुर) द्वारा राजस्थान और गुजरात के शुष्क क्षेत्रों के लिए विकसित प्रमुख कृषि वानिकी मॉडलों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (AFRI, जोधपुर) ने कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए तीन प्रमुख मॉडल विकसित किए हैं: (1) खेजड़ी (Prosopis cineraria @ 8×8m या 10×10m) + बाजरा / मूंग / मोठ / ग्वार मॉडल — जिससे अनाज उपज बढ़ती है और लूंग चारा व सांगरी मिलती है; (2) अर्डू (Ailanthus excelsa @ 6×6m) + बाजरा/ग्वार/चना मॉडल — बकरी चारा व माचिस काष्ठ हेतु; और (3) रोहिड़ा (Tecomella undulata) + मरुस्थलीय दलहन व सेवण घास मॉडल।
3. IWST (बेंगलुरु) द्वारा विकसित चंदन (Santalum album) आधारित कृषि वानिकी मॉडल की वैज्ञानिक विशेषता समझाइए।
उत्तर: चंदन विश्व की सबसे मूल्यवान सुगंधित काष्ठ देता है, किंतु यह एक ‘अर्ध-मूल परजीवी’ (Root hemiparasite) है जो अपनी जड़ों के हॉस्टोरिया से दूसरे पौधों की जड़ों से पोषण लेता है। IWST मॉडल में चंदन (5×5m या 6×3m) के साथ गड्ढे के पास प्राथमिक परपोषी के रूप में अरहर (Cajanus cajan) और कतारों में स्थायी परपोषी सह-वृक्ष के रूप में आँवला (Emblica officinalis) या कैजुआरिना लगाया जाता है तथा बीच में दलहन या औषधीय पौधे उगाए जाते हैं।
4. IFGTB (कोयंबटूर) के मालाबार नीम (Melia dubia) और कैजुआरिना क्लोनल मॉडलों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर: IFGTB कोयंबटूर ने प्लाईवुड उद्योग के लिए देशी वृक्ष मालाबार नीम (Melia dubia) के उच्च उपज वाले क्लोन विकसित किए हैं जो मात्र 5–6 वर्ष में कटाई योग्य हो जाते हैं; इसके साथ मूंगफली, उड़द, केला या हल्दी उगाई जाती है। इसी प्रकार कागज लुगदी और खंभों के लिए कैजुआरिना (Casuarina) के क्लोन (3–4 वर्ष चक्र) के साथ मूंगफली व तिल का मॉडल विकसित किया गया है।
5. ICFRE के अधीन कार्यरत सभी 9 क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थानों के नाम और उनके मुख्यालय लिखिए।
उत्तर: (1) FRI — देहरादून (उत्तराखंड), (2) AFRI — जोधपुर (राजस्थान), (3) IFGTB — कोयंबटूर (तमिलनाडु), (4) IWST — बेंगलुरु (कर्नाटक), (5) TFRI — जबलपुर (म.प्र.), (6) RFRI — जोरहाट (असम), (7) HFRI — शिमला (हिमाचल प्रदेश), (8) IFP — राँची (झारखंड), और (9) IFB — हैदराबाद (तेलंगाना)।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3 Long Answer Questions)

1. भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE, देहरादून) और इसके विभिन्न क्षेत्रीय संस्थानों (FRI, AFRI, IFGTB, IWST, TFRI, RFRI, IFP) द्वारा भारत के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए विकसित प्रमुख कृषि वानिकी मॉडलों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: ICFRE (1986, देहरादून) और उसके 9 संस्थानों का परिचय देते हुए सारणी 14.1 के अनुसार प्रत्येक संस्थान के प्रमुख मॉडलों (पॉपलर-गेहूँ-हल्दी, खेजड़ी/अर्डू-बाजरा/मूंग, मेलिया दुबिया/कैजुआरिना, चंदन-आँवला परपोषी मॉडल, सागवान/गम्हार-सोयाबीन, अगरवुड-चाय और फ्लेमिंगिया लाख मॉडल) का विस्तार से वर्णन करें।
2. उत्तर भारत में पॉपलर व क्लोनल सफेदा (FRI मॉडल) तथा दक्षिण भारत में मेलिया दुबिया व चंदन (IFGTB एवं IWST मॉडल) पर आधारित वाणिज्यिक कृषि वानिकी की सफलता के कारणों, रोपण तकनीक और आर्थिक प्रतिफल की तुलनात्मक विवेचना कीजिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: क्लोनल तकनीक, फिनोलॉजी अनुकूलता, छोटा आवर्तन काल (4-8 वर्ष), प्लाईवुड व कागज उद्योग अनुबंध और चंदन में अर्ध-परजीवी हॉस्ट प्रबंधन का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करें।
3. राजस्थान के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की पारिस्थितिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए AFRI (जोधपुर) द्वारा विकसित कृषि वानिकी मॉडलों की उपयुक्तता और किसानों की आजीविका में उनके योगदान पर निबंध लिखिए।
उत्तर रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु: AFRI जोधपुर के खेजड़ी, रोहिड़ा, अर्डू, कुमटा और हार्डविकिया आधारित मॉडलों द्वारा सूखे में चारा (लूंग), सब्जी (सांगरी), गोंद, इमारती काष्ठ और मृदा उर्वरता संवर्धन की व्याख्या करें।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGF 311 notes।

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