AGF 311 Lecture 02: बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियाँ (MPTS): परिभाषा, भूमिका, चयन एवं भारत की प्रमुख MPTS | Hindi Notes
AGRO PATH FINDERAGF 311 · Introductory Agroforestry
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02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)Lecture 02: बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियाँ (MPTS): परिभाषा, भूमिका, चयन एवं भारत की प्रमुख MPTS
MPTS- Definition, role of MPTS in agroforestry system, its selection for different agroforestry system, MPTS of India
02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)
इस व्याख्यान (Lecture) के अध्ययन के पश्चात् विद्यार्थी निम्नलिखित में सक्षम होंगे:
- बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियों (Multipurpose Tree Species – MPTS) तथा नाइट्रोजन-स्थिरीकरण करने वाले वृक्षों (NFTs) की वैज्ञानिक परिभाषा (Burley & von Carlowitz, 1984) को समझना।
- कृषि वानिकी प्रणाली में MPTS की उत्पादक (Food, Fodder, Fuelwood, Timber, Biofuels/Exudates) और सुरक्षात्मक (Soil fertility, Shade, Microclimate) भूमिकाओं का विश्लेषण करना।
- विभिन्न कृषि वानिकी प्रणालियों के लिए एक आदर्श बहुउद्देशीय वृक्ष (Ideotype of MPTS) के चयन मानदंडों (जड़, छत्र, फिनोलॉजी, कॉपिसिंग, एलीलोपैथी-मुक्ति) को जानना।
- राइजोबियम (Leguminous) और फ्रैंकिया (Actinorhizal non-leguminous: Casuarina, Alnus) द्वारा सहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण के महत्व को समझना।
- भारत के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों की प्रमुख MPTS के वानस्पतिक नाम, कुल (Family) और विशिष्ट उपयोगों में दक्षता प्राप्त करना।
03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)
मूल सामग्री (Core Course Content): किसी भी कृषि वानिकी प्रणाली की सफलता सही वृक्ष प्रजाति के चयन पर निर्भर करती है। एकल-उद्देश्यीय वानिकी के विपरीत, कृषि वानिकी में किसान ऐसी वृक्ष प्रजातियों को प्राथमिकता देते हैं जो एक ही समय में एक से अधिक उत्पाद या सेवाएँ (Multiple products and services) प्रदान कर सकें। इन्हें बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियाँ (Multipurpose Tree Species — MPTS) या बहुउद्देशीय वृक्ष एवं झाड़ियाँ (MPTs) कहा जाता है।
उदाहरण के लिए, राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी (Prosopis cineraria) एक आदर्श MPTS है जो मानव भोजन के लिए ‘सांगरी’ (Pods), पशुओं के लिए उच्च प्रोटीन युक्त ‘लूंग’ चारा (Fodder), जलाऊ व कृषि यंत्रों हेतु लकड़ी (Fuel & Timber), और जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण द्वारा मृदा उर्वरता (Soil fertility)—ये सभी लाभ एक साथ प्रदान करता है।
04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)
05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)
1. कृषि वानिकी प्रणाली में MPTS की भूमिका एवं विविध लाभ (Role & Various Benefits of MPTS)
मूल पाठ्यक्रम के अनुसार MPTS से प्राप्त होने वाले लाभों को निम्नलिखित श्रेणियों में बाँटा गया है:
1. खाद्य एवं चारा उत्पादन (Food & Fodder)
• मानव आहार (Human Food): वृक्षों से फल, मेवे (Nuts), खाद्य पत्तियाँ (जैसे सहजन/Moringa oleifera, अगस्त्य) और अनाज के विकल्प प्राप्त होते हैं।
• पशु आहार (Livestock Feed / Top Feed): सूखे के समय जब हरी घास सूख जाती है, तब MPTS की पत्तियाँ और फलियाँ (जैसे खेजड़ी की लूंग, सुबबूल, अर्डू, बबूल, भीमल, नीम) पशुओं को उच्च क्रूड प्रोटीन (दलहनी वृक्षों में औसत 21.91% CP तथा गैर-दलहनी में 16.07% CP) वाला पौष्टिक चारा प्रदान करती हैं।
2. ऊर्जा एवं जैव-ईंधन (Fuelwood & Biofuels)
• ग्रामीण घरों के लिए प्रत्यक्ष जलाऊ लकड़ी (Firewood) जिससे वनों से लकड़ी चोरी (Pilferage) रुकती है।
• पायरोलिटिक रूपांतरण उत्पाद: चारकोल, बायो-ऑयल और प्रोड्यूसर गैस।
• उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले फलों (महुआ आदि) के किण्वन से एथेनॉल तथा काष्ठ के भंजक आसवन (Destructive distillation) से मेथेनॉल।
• बीज व छाल से बायोडीजल तेल (करंज/Pongamia pinnata, नीम, महुआ), लेटेक्स, ज्वलनशील रस (Saps) और रेजिन।
3. इमारती काष्ठ एवं औद्योगिक कच्चा माल (Timber & Raw Materials)
• कृषि औजार, बैलगाड़ी, घर निर्माण व फर्नीचर हेतु इमारती लकड़ी (शीशम, सागवान, रोहिड़ा, बबूल)।
• प्लाईवुड, माचिस, कागज व लुगदी, पैकिंग केस, रेयॉन, टैनिन, गोंद (Gum arabic – Acacia senegal), लाख और रेशम।
4. मृदा, जल एवं सूक्ष्म-जलवायु सेवाएँ (Ecological & Service Roles)
• नाइट्रोजन स्थिरीकरण और पर्ण करकट (Leaf litter) अपघटन से मृदा कार्बनिक पदार्थ व उर्वरता में सुधार।
• मृदा एवं जल संरक्षण तथा फ्रेअटोफाइटिक वृक्षों द्वारा जलमग्न/लवणीय मृदाओं से जल निकासी (Drainage improvement)।
• मनुष्यों, पशुओं और छाया-प्रिय फसलों (चाय, कॉफी, इलायची, हल्दी, अदरक) के लिए छाया (Shade trees) तथा वायुरोधक (Windbreak)।
2. विभिन्न कृषि वानिकी प्रणालियों के लिए MPTS के चयन मानदंड (Selection Criteria for Ideal MPTS)
कृषि फसलों के साथ उगाने के लिए चयनित बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजाति (Ideotype of Agroforestry Tree) को निम्नलिखित मानदंड पूरे करने चाहिए:
- गहरी मूसला जड़ प्रणाली (Deep Tap Root System): वृक्ष की जड़ें सतही मृदा में फैलने के बजाय सीधी गहराई में जाने वाली होनी चाहिए ताकि कृषि फसलों की उथली जड़ों के साथ जल और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा न हो।
- हल्का, छोटा और खुला छत्र (Light, Small and Open Crown): वृक्ष का छत्र (Canopy) विरल या बेलनाकार होना चाहिए ताकि नीचे उगने वाली फसलों तक पर्याप्त सौर विकिरण (Photosynthetically Active Radiation – PAR) पहुँच सके।
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण एवं मृदा सुधार क्षमता (N₂-Fixing Ability): प्रजाति में वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिर करने और तेजी से सड़ने वाला पर्ण करकट (Fast-decomposing leaf litter) गिराने की क्षमता होनी चाहिए।
- अनुकूल पर्णपाती स्वभाव / फिनोलॉजी (Favorable Phenology): वृक्ष मुख्य फसल की सक्रिय वृद्धि अवस्था के दौरान पत्तियाँ गिराने वाला (Deciduous) होना चाहिए (जैसे—शीतकालीन फसलों के साथ पॉपलर और खरीफ फसलों के साथ Faidherbia albida)।
- उच्च कॉपिसिंग एवं प्रूनिंग सहनशीलता (High Coppicing, Pollarding & Lopping Ability): बार-बार कटाई-छँटाई (Lopping/Pruning) करने पर भी वृक्ष तेजी से पुनः फूटने (Regenerate) वाला होना चाहिए।
- एलीलोपैथिक प्रभाव से मुक्ति (Free from Allelopathy): वृक्ष की पत्तियों या जड़ों से ऐसे विषाक्त रसायन (Allelochemicals) नहीं निकलने चाहिए जो पास की कृषि फसल के अंकुरण या वृद्धि को रोकें।
- तीव्र वृद्धि एवं बहु-उपयोगिता (Fast Growth & Market Demand): वृक्ष कम समय में तैयार होने वाला, स्थानीय जलवायु/सूखे/लवणता के प्रति सहनशील तथा किसानों की सामाजिक-आर्थिक मांग के अनुरूप होना चाहिए।
06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)
भारत के प्रमुख बहुउद्देशीय वृक्षों (MPTS) का जलवायु एवं उपयोग आधारित वर्गीकरण:
- 1. शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्र की MPTS (Arid & Semi-Arid): खेजड़ी (Prosopis cineraria), रोहिड़ा (Tecomella undulata), बबूल (Acacia nilotica), कुमटा (Acacia senegal), इजरायली बबूल (Acacia tortilis), अर्डू (Ailanthus excelsa), नीम (Azadirachta indica), जाल/पीलू (Salvadora oleoides), झड़बेरी (Ziziphus nummularia)।
- 2. उप-आर्द्र एवं सिंचित मैदानी क्षेत्र की MPTS (Sub-humid & Irrigated Plains): सुबबूल (Leucaena leucocephala), शीशम (Dalbergia sissoo), पॉपलर (Populus deltoides), सफेदा (Eucalyptus tereticornis), सिरिस (Albizia lebbeck), करंज (Pongamia pinnata), सहजन (Moringa oleifera), सागवान (Tectona grandis), कदंब (Anthocephalus cadamba), सेमल (Bombax ceiba)।
- 3. तटीय एवं आर्द्र उष्णकटिबंधीय क्षेत्र की MPTS (Coastal & Humid Tropics): कैजुआरिना/झाऊ (Casuarina equisetifolia), मालाबार नीम (Melia dubia), ग्लिरिसिडिया (Gliricidia sepium), नारियल (Cocos nucifera), कटहल (Artocarpus heterophyllus), सिल्वर ओक (Grevillea robusta)।
- 4. पर्वतीय एवं हिमालयी क्षेत्र की MPTS (Temperate & Sub-tropical Hills): भीमल (Grewia optiva), नेपाली एल्डर (Alnus nepalensis), रॉबिनिया (Robinia pseudoacacia), कचनार (Bauhinia variegata), विलो (Salix alba), शहतूत (Morus alba)।
07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)
- सहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण सिद्धांत (Symbiotic N₂ Fixation Principle):
- राइजोबियम सहजीविता (Rhizobium in Legumes): Fabaceae (उप-कुल Mimosoideae व Papilionoideae) के वृक्ष जैसे सुबबूल (Leucaena leucocephala: 100–500 kg N/ha/yr), ग्लिरिसिडिया, बबूल, सिरिस, खेजड़ी और शीशम Rhizobium / Bradyrhizobium जीवाणु द्वारा नाइट्रोजन स्थिर करते हैं। (ध्यान दें: उप-कुल Caesalpinioideae के अधिकांश वृक्ष जैसे इमली/Tamarindus indica और अमलतास/Cassia fistula सामान्यतः ग्रंथियाँ नहीं बनाते)।
- फ्रैंकिया सहजीविता (Frankia in Non-legumes): गैर-दलहनी वृक्ष जैसे कैजुआरिना (Casuarina equisetifolia) और एल्डर (Alnus nepalensis) एक्टिनोमाइसिटीज जीवाणु Frankia द्वारा 60–150 kg N/ha/yr स्थिर करते हैं।
08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)
व्यावहारिक उदाहरण: विभिन्न कृषि वानिकी उद्देश्यों के लिए विशिष्ट MPTS का मिलान
- एलै क्रॉपिंग (Alley Cropping / Hedgerow Intercropping) हेतु सर्वोत्तम MPTS: Leucaena leucocephala (सुबबूल), Gliricidia sepium, Cassia siamea एवं Sesbania sesban (क्योंकि इनमें तीव्र कॉपिसिंग और उच्च नाइट्रोजन युक्त हरी खाद पत्तियाँ होती हैं)।
- चारा बैंक (Protein Bank / Fodder Bank) हेतु सर्वोत्तम MPTS: Prosopis cineraria (खेजड़ी), Ailanthus excelsa (अर्डू), Grewia optiva (भीमल), Morus alba (शहतूत), Albizia lebbeck (सिरिस) और Bauhinia variegata (कचनार)।
- बायोडीजल एवं अखाद्य तेल हेतु MPTS: Pongamia pinnata (करंज), Jatropha curcas (रतनजोत), Azadirachta indica (नीम) एवं Madhuca longifolia (महुआ)।
09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)
तुलनात्मक सारणी 2.1: भारत की 12 प्रमुख बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियाँ (MPTS of India) — वानस्पतिक नाम, कुल एवं उपयोग
| सामान्य नाम (Common Name) | वानस्पतिक नाम (Botanical Name) एवं कुल | N₂ स्थिरीकरण | प्रमुख बहुउद्देशीय उपयोग (Multiple Uses in Agroforestry) |
|---|---|---|---|
| 1. खेजड़ी (Khejri) | Prosopis cineraria (Fabaceae) | हाँ (Rhizobium) | चारा (लूंग), सब्जी (सांगरी), ईंधन, कृषि औजार, शुष्क मृदा उर्वरता सुधार। |
| 2. सुबबूल (Subabul) | Leucaena leucocephala (Fabaceae) | हाँ (100–500 kg/ha) | उच्च प्रोटीन चारा, एलै क्रॉपिंग हरी खाद, लुगदी/कागज, ईंधन (‘Miracle Tree’)। |
| 3. बबूल (Desi Babul) | Acacia nilotica (Fabaceae) | हाँ (Rhizobium) | कृषि यंत्र काष्ठ, बबूल गोंद, छाल टैनिन, फलियाँ व पत्ती चारा, क्षारीय भूमि सुधार। |
| 4. शीशम (Shisham) | Dalbergia sissoo (Fabaceae) | हाँ (Rhizobium) | प्रथम श्रेणी फर्नीचर काष्ठ (इमारती लकड़ी), चारा, छाया, नहर किनारे रोपण। |
| 5. अर्डू / महारुख (Ardu) | Ailanthus excelsa (Simaroubaceae) | नहीं | बकरियों व भेड़ों हेतु उत्कृष्ट पत्ती चारा, माचिस की तीलियाँ (Matchwood), पैकिंग केस। |
| 6. रोहिड़ा (Rohida) | Tecomella undulata (Bignoniaceae) | नहीं | ‘मारवाड़ सागवान’ (Marwar Teak) — नक्काशीदार फर्नीचर, चारा, औषधि, टीला स्थिरीकरण। |
| 7. पॉपलर (Poplar) | Populus deltoides (Salicaceae) | नहीं | प्लाईवुड, माचिस, खेल का सामान, कागज लुगदी; रबी फसलों (गेहूँ) के साथ आदर्श। |
| 8. कैजुआरिना / झाऊ | Casuarina equisetifolia (Casuarinaceae) | हाँ (Frankia) | तटीय शेल्टरबेल्ट, कागज लुगदी, खंभे (Poles), उच्च कैलोरी ईंधन, बालू स्थिरीकरण। |
| 9. भीमल (Bhimal) | Grewia optiva (Malvaceae/Tiliaceae) | नहीं | हिमालयी क्षेत्र में शीतकालीन पौष्टिक हरा चारा, रस्सी हेतु बास्ट रेशा (Fiber), ईंधन। |
| 10. करंज (Karanj) | Pongamia pinnata (Fabaceae) | हाँ (Rhizobium) | बीजों से बायोडीजल तेल, खली जैविक खाद, हरी खाद, जलमग्न/लवणीय भूमि सुधार। |
| 11. ग्लिरिसिडिया (Gliricidia) | Gliricidia sepium (Fabaceae) | हाँ (Rhizobium) | चाय/कॉफी छाया वृक्ष, जीवित बाड़ (Live fence), एलै क्रॉपिंग हरी खाद (N-rich)। |
| 12. एल्डर (Nepalese Alder) | Alnus nepalensis (Betulaceae) | हाँ (Frankia) | पूर्वी हिमालय में बड़ी इलायची हेतु छाया वृक्ष, भूस्खलन नियंत्रण, ईंधन व चारा। |
10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)
महत्वपूर्ण पोषण एवं नाइट्रोजन स्थिरीकरण मानक (Key Nutritional & N₂-Fixation Figures)
- दलहनी बनाम गैर-दलहनी वृक्ष चारे में औसत क्रूड प्रोटीन (Crude Protein – CP %):
• दलहनी वृक्ष (Legume trees): CP | गैर-दलहनी वृक्ष (Non-legume trees): CP - सुबबूल (Leucaena leucocephala) द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण क्षमता:
- कैजुआरिना (Casuarina) एवं एल्डर (Alnus) में सहजीवी सूक्ष्मजीव: एक्टिनोमाइसिटीज Frankia ()
11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)
Lecture 02 Mind Map: बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियाँ (MPTS) — भूमिका, चयन एवं वर्गीकरण
- बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियाँ (MPTS: एक से अधिक उत्पाद व सेवा देने वाले काष्ठीय बहुवर्षीय वृक्ष)
- प्रमुख भूमिकाएँ (Roles in Agroforestry)
- उत्पादक (Productive): मानव खाद्य (फल, फलियाँ), पशु चारा (Legumes ~21.91% CP), ईंधन व बायोडीजल, इमारती लकड़ी व रेशा
- सुरक्षात्मक/सेवा (Service): N₂ स्थिरीकरण (Rhizobium व Frankia), पर्ण करकट खाद, छाया, वायुरोधक एवं जैव-जल निकासी
- आदर्श MPTS चयन मानदंड (Selection Criteria / Ideotype)
- गहरी मूसला जड़ (Deep tap root) + हल्का व विरल छत्र (Light open crown)
- उच्च कॉपिसिंग व लोपिंग क्षमता + एलीलोपैथी से मुक्त + तीव्र वृद्धि व स्थानीय अनुकूलन
- भारत की प्रमुख MPTS (Important MPTS of India)
- शुष्क क्षेत्र: खेजड़ी (Prosopis cineraria), रोहिड़ा (Tecomella undulata), अर्डू (Ailanthus excelsa), कुमटा (Acacia senegal)
- मैदानी व उप-आर्द्र: सुबबूल (Leucaena), पॉपलर (Populus), शीशम (Dalbergia sissoo), बबूल, करंज, सिरिस
- एक्टिनोराइजल (Frankia N₂-fixers): कैजुआरिना (Casuarina equisetifolia) एवं नेपाली एल्डर (Alnus nepalensis)
- प्रमुख भूमिकाएँ (Roles in Agroforestry)
12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)
प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): कृषि वानिकी प्रणाली के लिए उपयुक्त MPTS के वैज्ञानिक चयन की प्रक्रिया
(शुष्क, सिंचित, लवणीय, पर्वतीय) ➔ 2. किसान की प्राथमिकता निर्धारण
(चारा, इमारती लकड़ी, फल, हरी खाद) ➔ 3. वृक्ष आइडियोटाइप जाँच
(गहरी जड़, हल्का छत्र, गैर-एलीलोपैथिक) ➔ 4. N₂ स्थिरीकरण व कॉपिसिंग
(Rhizobium/Frankia व प्रूनिंग क्षमता) ➔ 5. अंतिम MPTS चयन
(जैसे राजस्थान हेतु खेजड़ी/अर्डू)
13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)
- परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है: ‘कौन-से गैर-दलहनी (Non-leguminous) वृक्ष नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं और किस सूक्ष्मजीव द्वारा?’ उत्तर: कैजुआरिना (Casuarina equisetifolia) और एल्डर (Alnus nepalensis), जो ‘फ्रैंकिया’ (Frankia – एक एक्टिनोमाइसिटीज) द्वारा नाइट्रोजन स्थिर करते हैं।
- कृषि वानिकी के लिए आदर्श वृक्ष (Tree Ideotype) में ‘गहरी मूसला जड़’ (Deep tap root) और ‘हल्का/विरल छत्र’ (Light/sparse crown) होना चाहिए ताकि फसलों से प्रतिस्पर्धा न हो।
- सुबबूल (Leucaena leucocephala) को ‘मिरेकल ट्री’ (Miracle tree) कहा जाता है; लेकिन इसके चारे में ‘मिमोसिन’ (Mimosine) नामक एल्कलॉइड पाया जाता है, इसलिए इसे कुल चारे में 30% से अधिक नहीं खिलाना चाहिए।
- रोहिड़ा (Tecomella undulata) को ‘मारवाड़ का सागवान’ (Marwar Teak / Desert Teak) और खेजड़ी (Prosopis cineraria) को ‘थार का कल्पवृक्ष’ कहा जाता है।
- अर्डू (Ailanthus excelsa) माचिस की तीलियाँ (Matchwood) बनाने और बकरियों के चारे के लिए अत्यंत प्रसिद्ध बहुउद्देशीय वृक्ष है।
14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)
- MPTS: एक से अधिक उत्पाद (Food, Fodder, Fuel, Timber) व सेवा (N₂-fixation, Shade, Soil conservation) देने वाले वृक्ष।
- आदर्श गुण: Deep tap root + Light crown + High coppicing/lopping + Non-allelopathic + N₂-fixing।
- प्रमुख वानस्पतिक नाम: खेजड़ी = Prosopis cineraria | रोहिड़ा = Tecomella undulata | सुबबूल = Leucaena leucocephala | अर्डू = Ailanthus excelsa | भीमल = Grewia optiva | करंज = Pongamia pinnata।
15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)
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16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)
(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर्स (5 Important Exam One-Liners)
- गैर-दलहनी वृक्ष कैजुआरिना (Casuarina equisetifolia) और एल्डर (Alnus nepalensis) ‘फ्रैंकिया’ (Frankia) द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं।
- कृषि वानिकी के आदर्श वृक्ष में ‘गहरी मूसला जड़’ (Deep tap root) और ‘हल्का विरल छत्र’ (Light crown) होना चाहिए।
- दलहनी चारा वृक्षों की पत्तियों में औसतन 21.91% क्रूड प्रोटीन (CP) पाया जाता है, जो गैर-दलहनी वृक्षों (16.07%) से अधिक है।
- सुबबूल (Leucaena leucocephala) प्रतिवर्ष 100 से 500 kg N/ha वायुमंडलीय नाइट्रोजन मृदा में स्थिर कर सकता है।
- रोहिड़ा (Tecomella undulata) को ‘मारवाड़ सागवान’ और खेजड़ी (Prosopis cineraria) को ‘मरुस्थल का कल्पवृक्ष’ कहा जाता है।
(B) 5 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions)
(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions)
(D) 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3 Long Answer Questions)
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGF 311 notes।





