GPB 311 Lecture 10: कद्दू वर्गीय फसलों (Cucurbitaceous Crops) में फसल सुधार: लिंग अभिव्यक्ति, स्त्रीलिंगी वंशक्रम एवं संकर प्रजनन

GPB 311 · Kharif Crop Improvement Smart Notes
कद्दू वर्गीय फसलों (Cucurbitaceous Crops) में फसल सुधार: लिंग अभिव्यक्ति, स्त्रीलिंगी वंशक्रम एवं संकर प्रजनन
Crop Improvement in Cucurbitaceous Crops (Gourds, Melons, Cucumber, Pumpkin & Squash)
Cucumber (खीरा), Bitter gourd (करेला), Bottle gourd (लौकी), Muskmelon (खरबूजा), Watermelon (तरबूज), Ridge/Sponge gourd (तोरई), Pointed gourd (परवल), Pumpkin & Squash (कद्दू/चप्पन कद्दू)
विषय सूची · Quick Navigation
अधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesफसल सुधार के विस्तृत विषय · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्सअधिगम उद्देश्य · Learning Objectives
- प्रमुख कद्दू वर्गीय फसलों (खीरा 2n=14; तरबूज व लौकी 2n=22; करेला 2n=22; खरबूजा 2n=24; तोरई 2n=26; कद्दू 2n=40) के वानस्पतिक नाम, उत्पत्ति केंद्र और गुणसूत्र संख्याओं को व्यवस्थित रूप से याद करना।
- कद्दू कुल में लिंग अभिव्यक्ति के 8 रूपों—विशेषकर Monoecious (अधिकांश कद्दू), Andromonoecious (खरबूजा), Dioecious (परवल, कुंदरू, ककोड़ा) और संकर बीज उत्पादन हेतु 'स्त्रीलिंगी वंशक्रम' (Gynoecious lines in Cucumber & Bitter gourd)—तथा पादप हार्मोनों व सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3) के प्रभाव को समझना।
- त्रिगुणित बीज-रहित तरबूज ('पूसा बेदाना' – डॉ. कीहारा सिद्धांत: 4x मादा × 2x नर = 3x) के निर्माण और प्रमुख किस्मों/संकरों का अध्ययन करना।
प्रस्तावना · Introduction
कद्दू वर्गीय फसलें (Cucurbits — कुल: Cucurbitaceae) भारत में उगाई जाने वाली ग्रीष्म एवं खरीफ ऋतु की सब्जियों का सबसे बड़ा समूह हैं। पादप प्रजनन में यह कुल दो कारणों से अत्यंत अनूठा है: (1) इनमें लिंग अभिव्यक्ति (Sex expression) की अद्भुत विविधता पाई जाती है और एथिलीन/जिबरेलिन/सिल्वर थायोसल्फेट द्वारा फूलों का लिंग बदला जा सकता है; तथा (2) पर-परागित होने के बावजूद इनमें लगभग शून्य अंतःप्रजनन अवसाद (Negligible or Zero Inbreeding Depression!) पाया जाता है, इसलिए इनमें स्व-परागित और पर-परागित दोनों फसलों की प्रजनन विधियाँ समान रूप से सफल हैं!
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions
पर-परागित किंतु अंतःप्रजनन अवसाद से मुक्त (Cross-Pollinated without Inbreeding Depression)
कद्दू कुल की फसलें एकलिंगी फूलों व कीट परागण के कारण उच्च पर-परागित हैं, किंतु छोटे जनसंख्या आकार में उगाए जाने के विकासवादी इतिहास के कारण इनमें लगातार स्व-परागण (Selfing) करने पर भी ओज या उपज में कोई गिरावट (No inbreeding depression) नहीं आती!
स्त्रीलिंगी वंशक्रम (Gynoecious Line – 'F' gene)
खीरा (जैसे 'Pusa Sanyog' की मादा लाइन 'Japanese Gynoecious') और करेला ('DBGy-201') का वह वंशक्रम जिसके प्रत्येक पर्वसंधि पर 100% केवल मादा (Pistillate) फूल ही लगते हैं; इस पर AgNO3 या GA3 छिड़कने से नर फूल निकल आते हैं जिससे इसका अपना बीज गुणन हो जाता है।
पुं-उभयलिंगाश्रयी (Andromonoecious in Muskmelon)
खरबूजा (Cucumis melo) की अधिकांश भारतीय किस्मों में एक ही बेल पर 'नर फूल (Staminate)' और 'द्विलिंगी फूल (Hermaphrodite/Perfect flowers)' दोनों लगते हैं, इसे Andromonoecious कहते हैं।
एकलिंगाश्रयी परवल एवं कुंदरू (Dioecious Cucurbits)
परवल (Pointed gourd – Trichosanthes dioica), कुंदरू (Ivy gourd – Coccinia grandis) और ककोड़ा/कंटोला (Spine gourd – Momordica dioica) में नर पौधा और मादा पौधा अलग-अलग (Dioecious) होते हैं और इनका प्रवर्धन वानस्पतिक रूप से (Cutting/Rooted vines) होता है।
कुकरबिटासिन (Cucurbitacins)
कद्दू कुल के फलों (विशेषकर खीरा व लौकी) में कड़वाहट और विषाक्तता पैदा करने वाले टेट्रासाइक्लिक ट्राइटरपीन यौगिक (प्रभावी 'Bi' जीन द्वारा नियंत्रित); तनावग्रस्त सूखी लौकी का कड़वा जूस जानलेवा हो सकता है।
वर्गीकरण · Classification
कद्दू वर्गीय फसलों की गुणसूत्र संख्या, उत्पत्ति केंद्र एवं लिंग रूप (Master Taxonomic Key)
1. 2n = 14: खीरा (Cucumber – Cucumis sativus; उत्पत्ति: भारत — एकमात्र प्रमुख कद्दू जिसकी गुणसूत्र संख्या 14 है!)।
2. 2n = 22: (a) लौकी (Bottle gourd – Lagenaria siceraria; उत्पत्ति: अफ्रीका; सफेद फूल जो शाम को खिलते हैं!), (b) तरबूज (Watermelon – Citrullus lanatus; उत्पत्ति: कालाहारी मरुस्थल, अफ्रीका), (c) करेला (Bitter gourd – Momordica charantia; उत्पत्ति: इंडो-बर्मा/भारत), (d) परवल (Pointed gourd – Trichosanthes dioica; उत्पत्ति: भारत; Dioecious)।
3. 2n = 24: खरबूजा (Muskmelon – Cucumis melo; उत्पत्ति: अफ्रीका/उत्तर-पश्चिम भारत; Andromonoecious), फूट/कचरी व ककड़ी (C. melo var. utilissimus)।
4. 2n = 26: चिकनी तोरई (Sponge gourd – Luffa cylindrica) एवं धारीदार तोरई (Ridge gourd – Luffa acutangula; दोनों की उत्पत्ति: भारत; धारीदार तोरई की 'सतपुतिया' किस्म – L. acutangula var. hermaphrodita में गुच्छों में द्विलिंगी फूल लगते हैं!)।
5. 2n = 40: कद्दू/सीताफल (Pumpkin – Cucurbita moschata), चप्पन कद्दू (Summer squash – C. pepo) एवं विंटर स्क्वैश (C. maxima; तीनों की उत्पत्ति: मेक्सिको/अमेरिका)।
महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles
- कद्दू कुल में लिंग परिवर्तन का रासायनिक नियंत्रण (Chemical Sex Modification in Cucurbits): कद्दू वर्गीय पौधों में '2 से 4 सच्ची पत्ती की अवस्था' (2 to 4 true-leaf stage) पर हार्मोन छिड़ककर नर : मादा फूल का अनुपात बदला जा सकता है:
• मादा फूल (Femaleness) बढ़ाने वाले रसायन: Ethrel / Ethephon (100–250 ppm), NAA (100 ppm), TIBA (25–50 ppm) एवं Maleic Hydrazide (50 ppm) तथा कम तापमान व छोटा दिन।
• नर फूल (Maleness — Gynoecious लाइन के रखरखाव हेतु) बढ़ाने वाले रसायन: जिबरेलिक अम्ल (GA3 @ 1000–1500 ppm), सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3 @ 200–300 ppm) एवं सिल्वर थायोसल्फेट (STS @ 400 ppm — जो एथिलीन क्रिया के अवरोधक हैं) तथा उच्च तापमान व लंबा दिन! - प्रो. एच. कीहारा (Prof. H. Kihara, 1951) की त्रिगुणित बीज-रहित तरबूज तकनीक (Triploid Seedless Watermelon): द्विगुणित तरबूज (2n = 2x = 22) के अंकुरों पर 0.2–0.4% कोलचीसिन (Colchicine) लगाकर पहले चतुर्गुणित मादा पंक्ति (Tetraploid Female: 4x = 44) बनाई जाती है। फिर इस चतुर्गुणित मादा (4x ♀) का संकरण सामान्य द्विगुणित नर (2x ♂) से कराया जाता है, जिससे त्रिगुणित F1 बीज (3x = 33) प्राप्त होता है। इसी विधि से डॉ. कीहारा के मार्गदर्शन में IARI में 'पूसा बेदाना (Pusa Bedana = Tetra-2 × Pusa Rasaal)' विकसित किया गया!
फसल सुधार के विस्तृत विषय · Detailed Topics
1. Cucumber (खीरा), Bottle Gourd (लौकी) & Bitter Gourd (करेला) Breeding
महत्व: तीनों फसलों का फल वानस्पतिक रूप से एक रूपांतरित सरस फल 'पेपो' (Pepo — अधोवर्ती त्रि-अंडपी अंडाशय से विकसित) कहलाता है।
महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
- 1. खीरा (Cucumber, 2n=14): पीले एकलिंगी फूल सुबह 5:30–7:00 बजे खिलते हैं। पॉलीहाउस (Greenhouse) के लिए 'अनिषेकफलनी एवं स्त्रीलिंगी' (Parthenocarpic Gynoecious — जो बिना परागण व बिना मधुमक्खी के बीज-रहित फल देते हैं, जैसे 'पंत पार्थेनोकार्पिक खीरा-2 व 3', 'पूसा सीडलेस खीरा-6') किस्मों का विकास प्रमुख उपलब्धि है।
• खीरे की प्रसिद्ध किस्में: जापानी लॉन्ग ग्रीन, स्ट्रेट एट, पूसा उदय, स्वर्ण अगेती, हिमांगी (सफेद छिलका); प्रथम स्त्रीलिंगी संकर (First Gynoecious Hybrid of India, 1973): 'पूसा संयोग' (Pusa Sanyog = Japanese Gynoecious Line × Green Long of Naples — IARI कटराइन द्वारा विकसित!), पूसा बरखा (खरीफ हेतु)। - 2. लौकी (Bottle Gourd, 2n=22): अन्य कद्दू फसलों (जिनके फूल पीले होते हैं और सुबह खिलते हैं) के विपरीत लौकी के फूल 'सफेद रंग' के होते हैं और 'शाम 5 से 8 बजे' (Anthesis in evening!) खिलते हैं!
• लौकी की प्रसिद्ध किस्में व संकर: पूसा समर प्रोलिफिक लॉन्ग (PSPL), पूसा समर प्रोलिफिक राउंड (PSPR), पूसा नवीन (सीधे बेलनाकार फल), सम्राट (चयन से सर्वोच्च उपज किस्म!), अर्का बहार, काशी गंगा, नरेंद्र रश्मि; संकर: पूसा मेघदूत (PSPL × Sel-2 — भारत के प्रथम लौकी संकरों में से एक), पूसा मंजरी (गोल संकर: PSPR × Sel-11), पूसा हाइब्रिड-3, काशी बहार; औरनर-मादा फूल एक साथ लगने वाली अजूबा किस्म: 'नरेंद्र शिवानी' (Andromonoecious bottle gourd)! - 3. करेला (Bitter Gourd, 2n=22): फलों में रक्त-शर्करा कम करने वाला मधुमेह-रोधी यौगिक 'चैरेंटिन' (Charantin), 'मोमोरडिसिन' और 'Polypeptide-p (Plant insulin)' तथा उच्च आयरन व विटामिन-C पाया जाता है।
• करेले की प्रसिद्ध किस्में व संकर: पूसा दो मौसमी (PDM), पूसा विशेष (झाड़ीदार अगेती किस्म), कोयंबटूर लॉन्ग, अर्का हरित, प्रिया (Priya), प्रीति; संकर: पूसा हाइब्रिड-1, पूसा हाइब्रिड-2, और स्त्रीलिंगी लाइन 'DBGy-201' से विकसित भारत का प्रथम गायनोशियस करेला संकर: 'पूसा रसिक (Pusa Rasदार)'!
सुधार रणनीति · Breeding Approach
- संकर बीज उत्पादन में यदि उभयलिंगाश्रयी (Monoecious) मादा लाइन ली जाए, तो मादा कतारों (4 मादा : 1 नर) से सभी नर फूलों की कलियों को खिलने से पहले ही प्रतिदिन तोड़कर हटा दिया जाता है (Pinching of male buds) और मधुमक्खियों से प्राकृतिक संकर परागण कराया जाता है!
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ
तीनों फसलों में मधुमक्खियों द्वारा परागण (Entomophilous) होता है (लौकी में रात्रिचर शलभ/Moths व भृंग भी परागण करते हैं)।
जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ
प्रजनन विधियाँ: अंतःप्रजात चयन (Inbreeding & selection), वंशावली विधि, संकर प्रजनन (हाथ से परागण या Gynoecious लाइन द्वारा) और उत्परिवर्तन।
पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ
चूर्णिल आसिता, मृदुरोमिल आसिता, मोजैक विषाणु और फल मक्खी (Bactrocera cucurbitae) प्रमुख प्रजनन चुनौतियाँ हैं।
2. Watermelon (तरबूज), Muskmelon (खरबूजा), Gourds & Pointed Gourd (परवल) Breeding
महत्व: तरबूज में लाल रंग शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट 'लाइकोपीन' (Lycopene) के कारण होता है और मिठास के लिए कुल घुलनशील ठोस (TSS > 11–13°Brix) प्रजनन का मुख्य मानदंड है।
महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
- 1. तरबूज (Watermelon – Citrullus lanatus, 2n=22): जंगली कड़वा संबंधी 'तुम्बा' (Citrullus colocynthis, 2n=22 — थार मरुस्थल का बहुवर्षीय सूखा व रोग प्रतिरोधी पौधा) है।
• तरबूज की प्रसिद्ध किस्में व संकर: शुगर बेबी (Sugar Baby — USA से पुरःस्थापित सबसे प्रसिद्ध गहरे हरे छिलके वाली मीठी किस्म!), आसाही यामाटो (जापान से पुरःस्थापित), अर्का मानिक (Arka Manik — एंथ्रेक्नोज, चूर्णिल आसिता व मृदुरोमिल आसिता तीनों रोगों के प्रति तिहरा प्रतिरोध / Triple disease resistant!), दुर्गापुरा मीठा, दुर्गापुरा केसर (पीले गूदे वाली किस्म!), काशी पीतांबर; संकर: अर्का ज्योति (IIHR 20 × Crimson Sweet), पूसा बेदाना (Pusa Bedana = Tetra-2 (4x) × Pusa Rasaal (2x) — डॉ. कीहारा द्वारा विकसित प्रथम त्रिगुणित 3x बीज-रहित तरबूज!), अर्का मधुर (त्रिगुणित बीज-रहित)। - 2. खरबूजा (Muskmelon – Cucumis melo, 2n=24): भारतीय किस्में मुख्यतः 'Andromonoecious' (नर + द्विलिंगी फूल) होती हैं और पकने पर फल डंठल से अपने आप छूट जाता है ('Full-slip stage')।
• खरबूजे की प्रसिद्ध किस्में व संकर: हरा मधु (Hara Madhu — PAU द्वारा विकसित, अति मीठा TSS 13–15%, पकने पर डंठल नहीं छोड़ती अर्थात् 'Non-slip' किस्म!), पूसा शरबती, पूसा मधुरस, अर्का जीत (अति मीठी TSS 15%), अर्का राजहंस, दुर्गापुरा मधु (राजस्थान की प्रसिद्ध अगेती व मीठी किस्म!); संकर: पंजाब हाइब्रिड (Punjab Hybrid = MS-1 × Hara Madhu — आनुवंशिक नर बंध्य लाइन 'ms-1' के उपयोग से विकसित भारत का प्रथम GMS खरबूजा संकर!), पूसा रसराज (Monoecious लाइन M-3 × Durgapura Madhu से विकसित)। - 3. अन्य प्रमुख कद्दू वर्गीय किस्में:
• तोरई (Luffa, 2n=26): चिकनी तोरई—पूसा सुप्रिया, पूसा चिकनी, पूसा स्नेहा, काशी दिव्या; धारीदार तोरई—पूसा नसदार, अर्का सुजात, अर्का सुमित, सतपुतिया (गुच्छेदार द्विलिंगी)।
• परवल (Pointed gourd – Trichosanthes dioica, 2n=22, Dioecious): स्वर्ण रेखा, स्वर्ण अलौकिक, काशी अलंकार, राजेंद्र परवल-1 व 2; तथा विश्व का प्रथम बीज-रहित (Parthenocarpic) परवल क्लोन: 'IIVR PG-105 / काशी सुफल' (जिसमें खेत में 10% नर पौधे लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती!)।
• कद्दू / सीताफल (Pumpkin – Cucurbita moschata, 2n=40): पूसा विश्वास, पूसा विकास (बौनी किस्म), अर्का चंदन (उच्च कैरोटीन), काशी हरित; एवं चप्पन कद्दू (Summer squash – C. pepo): पंजाब चप्पन कद्दू-1, पूसा अलंकार (संकर), ऑस्ट्रेलियन ग्रीन।
सुधार रणनीति · Breeding Approach
- परवल (Dioecious) के व्यावसायिक खेत में मादा पौधों पर अच्छी फलत के लिए प्रत्येक 9–10 मादा पौधों के बीच 1 नर पौधा (10% male plants) लगाना आवश्यक होता है।
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ
त्रिगुणित तरबूज (3x) के परागकण बंध्य होते हैं, किंतु फल फूलने की उत्तेजना (Pollination stimulus) देने के लिए त्रिगुणित तरबूज के खेत में हर 4–5 कतारों के बाद 1 कतार सामान्य द्विगुणित (2x) परागणकर्ता तरबूज की लगानी पड़ती है!
जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ
खरबूजे में 'ms-1' व 'ms-2' आनुवंशिक नर बंध्य (GMS) जीनों और 'Monoecious (M-3)' लाइनों ने हाथ से विपुंसन की आवश्यकता को समाप्त कर दिया है।
पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ
शुष्क, गर्म और तेज धूप वाला मौसम (30–38°C) तरबूज और खरबूजे में शर्करा संचय (High TSS) के लिए अनिवार्य है।
तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables
तालिका 10.1: प्रमुख कद्दू वर्गीय सब्जियों की गुणसूत्र संख्या (2n), लिंग रूप एवं प्रथम संकरों की मास्टर सारणी
| फसल का नाम | वानस्पतिक नाम | गुणसूत्र (2n) | प्रमुख लिंग रूप (Sex Form) | प्रसिद्ध संकर / मील का पत्थर किस्म |
|---|---|---|---|---|
| खीरा (Cucumber) | Cucumis sativus | 2n = 14 | Monoecious एवं Gynoecious | पूसा संयोग (प्रथम Gynoecious संकर), जापानी लॉन्ग ग्रीन |
| लौकी (Bottle gourd) | Lagenaria siceraria | 2n = 22 | Monoecious (सफेद फूल शाम को खिलते हैं) | पूसा मेघदूत, पूसा मंजरी, पूसा नवीन, सम्राट, नरेंद्र शिवानी |
| करेला (Bitter gourd) | Momordica charantia | 2n = 22 | Monoecious एवं Gynoecious (DBGy-201) | पूसा दो मौसमी, पूसा विशेष, प्रिया, पूसा हाइब्रिड-1 व 2 |
| तरबूज (Watermelon) | Citrullus lanatus | 2n = 22 | Monoecious (एवं Andromonoecious) | पूसा बेदाना (3x बीज-रहित), अर्का मानिक (3-रोग प्रतिरोधी), शुगर बेबी |
| परवल (Pointed gourd) | Trichosanthes dioica | 2n = 22 | Dioecious (नर व मादा पौधे अलग-अलग) | स्वर्ण रेखा, स्वर्ण अलौकिक, राजेंद्र परवल-1 (कटिंग से प्रवर्धित) |
| खरबूजा (Muskmelon) | Cucumis melo | 2n = 24 | Andromonoecious (नर + द्विलिंगी फूल) | पंजाब हाइब्रिड (MS-1 × हरा मधु), पूसा रसराज, दुर्गापुरा मधु, अर्का जीत |
| तोरई (Sponge/Ridge gourd) | Luffa cylindrica / acutangula | 2n = 26 | Monoecious (सतपुतिया: Hermaphrodite) | पूसा सुप्रिया, पूसा नसदार, पूसा स्नेहा, सतपुतिया |
| कद्दू / स्क्वैश (Pumpkin) | Cucurbita moschata / pepo | 2n = 40 | Monoecious | पूसा विश्वास, पूसा विकास, अर्का चंदन, पूसा अलंकार (चप्पन कद्दू) |
सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations
1. त्रिगुणित बीज-रहित तरबूज (पूसा बेदाना) की गुणसूत्र गणना एवं हार्मोन सांद्रता (ppm)
हार्मोन घोल गणना (2-4 पत्ती अवस्था पर मादा फूल बढ़ाने हेतु):
• यदि लौकी या खीरे में मादा फूल बढ़ाने के लिए 150 ppm Ethrel (Ethephon 39% SL = 3,90,000 ppm सक्रिय तत्व) का 100 लीटर घोल बनाना हो:
आवश्यक Ethrel = (150 × 100,000 ml) / 3,90,000 = 38.4 ml (लगभग 3.8 ml प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर 2 पत्ती और 4 पत्ती अवस्था पर छिड़कें)।
माइंड मैप · Mind Map
[Lecture 10: कद्दू वर्गीय फसलों (Cucurbitaceous Crops) में फसल सुधार]
├── 1. गुणसूत्र संख्या मास्टर ट्रिक (Chromosome Numbers)
│ ├── 2n = 14: खीरा (Cucumis sativus — एकमात्र 14 वाला कद्दू!)
│ ├── 2n = 22: लौकी (Lagenaria), तरबूज (Citrullus), करेला (Momordica), परवल (Trichosanthes dioica)
│ ├── 2n = 24: खरबूजा एवं ककड़ी (Cucumis melo)
│ ├── 2n = 26: चिकनी एवं धारीदार तोरई (Luffa spp.)
│ └── 2n = 40: कद्दू, सीताफल एवं चप्पन कद्दू (Cucurbita moschata, C. pepo, C. maxima)
├── 2. लिंग अभिव्यक्ति एवं हार्मोन नियंत्रण (Sex Expression & Modification)
│ ├── Monoecious (अधिकांश कद्दू) | Andromonoecious (खरबूजा) | Dioecious (परवल, कुंदरू, ककोड़ा) | Hermaphrodite (सतपुतिया तोरई)
│ ├── Gynoecious Lines (100% मादा फूल): खीरा (Pusa Sanyog) & करेला (DBGy-201)
│ └── हार्मोन (2–4 पत्ती अवस्था): मादा फूल बढ़ाएँ—Ethrel (100–250 ppm), NAA; नर फूल बढ़ाएँ (Gynoecious रखरखाव)—AgNO3 (200 ppm), STS, GA3 (1500 ppm)
└── 3. ऐतिहासिक प्रजनन उपलब्धियाँ (Landmark Varieties & Hybrids)
├── तरबूज: Pusa Bedana (3x Seedless = Tetra-2 × Pusa Rasaal - Dr. Kihara), Arka Manik (Triple disease resistant), Sugar Baby
├── खरबूजा: Punjab Hybrid (MS-1 × Hara Madhu — GMS hybrid), Pusa Rasraj (Monoecious M-3 × Durgapura Madhu), Hara Madhu
└── लौकी: Pusa Meghdoot, Pusa Manjari, Pusa Naveen, Samrat | परवल: Swarna Rekha, Swarna Alaukik
प्रवाह चित्र · Flowchart
[प्रो. एच. कीहारा की विधि द्वारा 'त्रिगुणित बीज-रहित तरबूज (पूसा बेदाना)' के निर्माण के 3 चरण]
【चरण 1: चतुर्गुणित मादा वंशक्रम (Tetraploid Female Line) का निर्माण】
सामान्य द्विगुणित तरबूज (2n = 2x = 22) के उगते अंकुर के वृद्धि बिंदु पर 0.2–0.4% कोलचीसिन (Colchicine) की बूँद डालना
↓ (गुणसूत्र द्विगुणन)
चतुर्गुणित मादा पंक्ति 'Tetra-2' (2n = 4x = 44) का विकास
【चरण 2: त्रिगुणित F1 संकर बीज उत्पादन】
[चतुर्गुणित मादा: Tetra-2 (4x = 44, युग्मक 2x = 22) ♀] × [द्विगुणित नर: Pusa Rasaal (2x = 22, युग्मक x = 11) ♂]
↓ (ध्यान दें: व्युत्क्रम संकरण 2x ♀ × 4x ♂ सफल नहीं होता!)
त्रिगुणित संकर बीज 'पूसा बेदाना' (3x = 33) की प्राप्ति
【चरण 3: किसान के खेत में बीज-रहित फल उत्पादन】
त्रिगुणित (3x) पौधों के साथ हर 5वीं कतार पर द्विगुणित (2x) परागणकर्ता लगाना ───► परागण उत्तेजना से बीज-रहित मीठे तरबूज फलों का विकास
परीक्षा टिप्स · Exam Tips
- कद्दू कुल की गुणसूत्र संख्या याद रखने का क्रम: 14 (खीरा) → 22 (लौकी, तरबूज, करेला, परवल) → 24 (खरबूजा, ककड़ी) → 26 (तोरई) → 40 (कद्दू/चप्पन कद्दू)।
- खीरे की स्त्रीलिंगी लाइन (Gynoecious line) में स्व-परागण हेतु नर फूल उत्पन्न करने के लिए 'सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3 @ 200–300 ppm)' या 'सिल्वर थायोसल्फेट (STS)' या 'GA3 (1000–1500 ppm)' का छिड़काव किया जाता है।
- तीनों ऐतिहासिक संकर और उनके जनक रट लें: 1. पूसा संयोग (खीरा: Japanese Gynoecious × Green Long of Naples); 2. पूसा बेदाना (तरबूज: Tetra-2 × Pusa Rasaal); 3. पंजाब हाइब्रिड (खरबूजा: MS-1 × Hara Madhu)।
त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision
- पर-परागित होने के बावजूद कद्दू वर्गीय फसलों में अंतःप्रजनन अवसाद (Inbreeding depression) नहीं पाया जाता।
- परवल (Trichosanthes dioica), कुंदरू (Coccinia grandis) और ककोड़ा (Momordica dioica) एकलिंगाश्रयी (Dioecious) और वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित फसलें हैं।
- सतपुतिया तोरई (Luffa acutangula var. hermaphrodita) में द्विलिंगी फूल गुच्छों में लगते हैं।
- लौकी के फूल सफेद होते हैं और शाम को खिलते हैं; शेष अधिकांश कद्दू फसलों के फूल पीले होते हैं और सुबह खिलते हैं।
- तरबूज की 'अर्का मानिक' किस्म एंथ्रेक्नोज, चूर्णिल आसिता और मृदुरोमिल आसिता तीनों रोगों के प्रति प्रतिरोधी (Triple resistant) है।
MCQs — उत्तर एवं व्याख्या
1. प्रो. एच. कीहारा द्वारा IARI में विकसित प्रथम त्रिगुणित बीज-रहित तरबूज 'पूसा बेदाना' (Pusa Bedana, 3x = 33) किस संकरण से तैयार किया गया था?
- (A) द्विगुणित मादा (2x) × चतुर्गुणित नर (4x)
- (B) Tetra-2 (चतुर्गुणित मादा 4x) × Pusa Rasaal (द्विगुणित नर 2x)
- (C) Sugar Baby × Arka Manik
- (D) Durgapura Meetha × Asahi Yamato
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — त्रिगुणित तरबूज हमेशा चतुर्गुणित मादा (Tetra-2, 4x=44) और द्विगुणित नर (Pusa Rasaal, 2x=22) के संकरण से ही बनता है।
2. निम्नलिखित कद्दू वर्गीय फसलों में से किस एक में द्विगुणित गुणसूत्र संख्या 2n = 14 होती है?
- (A) खरबूजा (2n = 24)
- (B) खीरा (Cucumber – Cucumis sativus, 2n = 14)
- (C) तरबूज (2n = 22)
- (D) तोरई (2n = 26)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — खीरा (Cucumis sativus) में 2n = 2x = 14 गुणसूत्र होते हैं, जबकि खरबूजे (C. melo) में 2n = 24 होते हैं।
3. भारत का प्रथम स्त्रीलिंगी (Gynoecious) खीरा संकर 'पूसा संयोग' (Pusa Sanyog) किन दो जनकों के संकरण से विकसित किया गया था?
- (A) Japanese Gynoecious Line × Green Long of Naples
- (B) Poinsette × Straight Eight
- (C) MS-1 × Hara Madhu
- (D) PSPL × Sel-2
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — IARI के कटराइन (कुल्लू) केंद्र पर 'Japanese Gynoecious line × Green Long of Naples' से पूसा संयोग विकसित किया गया।
4. खीरे की 100% स्त्रीलिंगी (Gynoecious) वंशक्रम का बीज बनाए रखने (Maintenance) के लिए उस पर नर फूल प्रेरित करने हेतु किस रसायन का छिड़काव किया जाता है?
- (A) इथरेल (Ethrel 200 ppm)
- (B) सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3 @ 200–300 ppm) या GA3 (1000–1500 ppm) या सिल्वर थायोसल्फेट
- (C) मैलिक हाइड्राजाइड
- (D) 2,4-D
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — AgNO3, STS और उच्च सांद्रता पर GA3 एथिलीन के प्रभाव को रोककर स्त्रीलिंगी खीरे की बेल पर नर फूल (Staminate flowers) उत्पन्न करते हैं।
5. निम्नलिखित में से कौन सी कद्दू वर्गीय सब्जी 'एकलिंगाश्रयी' (Dioecious — नर व मादा पौधे अलग-अलग) है और लता की कलमों (Vine cuttings) से लगाई जाती है?
- (A) लौकी एवं तोरई
- (B) परवल (Pointed gourd – Trichosanthes dioica) एवं कुंदरू (Ivy gourd)
- (C) खीरा एवं खरबूजा
- (D) तरबूज एवं कद्दू
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — परवल, कुंदरू और ककोड़ा एकलिंगाश्रयी (Dioecious) बहुवर्षीय कद्दू वर्गीय फसलें हैं।
6. तरबूज की कौन सी प्रसिद्ध किस्म एंथ्रेक्नोज, चूर्णिल आसिता और मृदुरोमिल आसिता तीनों रोगों के प्रति संयुक्त प्रतिरोधी (Triple Disease Resistant) है?
- (A) शुगर बेबी
- (B) अर्का मानिक (Arka Manik – IIHR बेंगलुरु द्वारा विकसित)
- (C) अर्का ज्योति
- (D) दुर्गापुरा केसर
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — IIHR द्वारा विकसित 'अर्का मानिक' तीन प्रमुख रोगों के प्रति तिहरा प्रतिरोध रखती है।
7. खरबूजा (Cucumis melo) की अधिकांश भारतीय किस्मों में प्रमुख लिंग रूप (Predominant Sex Form) कौन सा होता है?
- (A) उभयलिंगाश्रयी (Monoecious)
- (B) पुं-उभयलिंगाश्रयी (Andromonoecious — नर एवं द्विलिंगी फूल एक ही पौधे पर)
- (C) एकलिंगाश्रयी (Dioecious)
- (D) केवल द्विलिंगी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — खरबूजे में एक ही पौधे पर नर और द्विलिंगी (Hermaphrodite) फूल लगते हैं जिसे Andromonoecious कहते हैं।
8. आनुवंशिक नर बंध्यता (GMS line 'MS-1') का उपयोग कर विकसित खरबूजे का प्रसिद्ध संकर 'पंजाब हाइब्रिड' (Punjab Hybrid) किन जनकों का संकरण है?
- (A) MS-1 × Hara Madhu
- (B) M-3 × Durgapura Madhu
- (C) Arka Jeet × Pusa Sharbati
- (D) Tetra-2 × Pusa Rasaal
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — PAU लुधियाना द्वारा विकसित 'पंजाब हाइब्रिड' का संकरण MS-1 (GMS line) × हरा मधु है (जबकि M-3 × दुर्गापुरा मधु से 'पूसा रसराज' बना)।
9. कद्दू वर्गीय फसलों में फल की कड़वाहट के लिए कौन सा यौगिक और कौन सा जीन उत्तरदायी है?
- (A) कुकरबिटासिन (Cucurbitacins — प्रभावी 'Bi' जीन)
- (B) लाइकोपीन
- (C) सोलासोडीन
- (D) कैप्साइसिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — कद्दू कुल में टेट्रासाइक्लिक ट्राइटरपीन 'Cucurbitacins' से कड़वाहट आती है जो प्रभावी जीन 'Bi' द्वारा नियंत्रित होती है।
10. अन्य कद्दू वर्गीय फसलों (जिनके पीले फूल सुबह खिलते हैं) के विपरीत किस फसल के फूल 'सफेद' होते हैं और 'शाम के समय' खिलते हैं?
- (A) खीरा
- (B) लौकी / घीया (Bottle gourd – Lagenaria siceraria)
- (C) करेला
- (D) तरबूज
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — लौकी (Lagenaria siceraria) और चिचिंडा के फूल सफेद रंग के होते हैं और शाम 5–8 बजे खिलते हैं।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. दारीदार तोरई की उस प्रजाति का नाम लिखिए जिसमें द्विलिंगी (Hermaphrodite) फूल गुच्छों में लगते हैं?
सतपुतिया (Luffa acutangula var. hermaphrodita)।
2. करेले में पाया जाने वाला प्रमुख मधुमेह-रोधी (Hypoglycemic / Anti-diabetic) तत्व कौन सा है?
चैरेंटिन (Charantin), मोमोरडिसिन एवं पॉलीपेप्टाइड-p।
3. राजस्थान के दुर्गापुरा केंद्र से विकसित पीले गूदे (Yellow flesh) वाली तरबूज किस्म का नाम लिखिए।
दुर्गापुरा केसर (Durgapura Kesar)।
4. खरबूजे की कौन सी प्रसिद्ध मीठी किस्म पकने पर डंठल से अलग नहीं होती ('Non-slip' variety)?
हरा मधु (Hara Madhu — PAU, लुधियाना द्वारा विकसित)।
5. लौकी के प्रथम दो संकर 'पूसा मेघदूत' और 'पूसा मंजरी' में फलों के आकार में क्या अंतर है?
पूसा मेघदूत के फल लंबे बेलनाकार होते हैं, जबकि पूसा मंजरी के फल गोल होते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. कद्दू वर्गीय फसलों पर पर-परागण होने के बावजूद 'अंतःप्रजनन अवसाद' (Inbreeding Depression) क्यों नहीं पाया जाता?
विकासवादी इतिहास में कद्दू वर्गीय फसलों को किसानों द्वारा बाड़ियों में बहुत कम पौधों (Small population size of 2–5 vines) में उगाया जाता रहा है। इस कारण प्राकृतिक व मानवीय चयन के दौरान इन फसलों से घातक अप्रभावी जीन (Deleterious recessive alleles) पहले ही बाहर निकल (Purged out) चुके हैं। फलस्वरूप इनमें 8–10 पीढ़ियों तक स्व-परागण करने पर भी ओज में कमी नहीं आती।
2. त्रिगुणित बीज-रहित तरबूज (Triploid Seedless Watermelon – पूसा बेदाना) कैसे तैयार किया जाता है?
प्रो. कीहारा की विधि में पहले सामान्य द्विगुणित तरबूज (2n=22) पर कोलचीसिन लगाकर चतुर्गुणित मादा वंशक्रम (4x=44, जैसे Tetra-2) बनाया जाता है। फिर इस चतुर्गुणित मादा (4x ♀) का संकरण द्विगुणित नर (2x=22 ♂, जैसे Pusa Rasaal) से कराया जाता है। प्राप्त त्रिगुणित बीज (3x=33) से उगे पौधों में विषम गुणसूत्र होने से युग्मक बंध्य रहते हैं और द्विगुणित परागणकर्ता की उपस्थिति में बीज-रहित तरबूज बनते हैं।
3. कद्दू वर्गीय फसलों में पादप वृद्धि नियंत्रकों (PGRs) द्वारा लिंग परिवर्तन (Sex Modification) को समझाइए।
कद्दू कुल में 2 से 4 सच्ची पत्ती की अवस्था (2–4 true leaf stage) लिंग निर्धारण की संवेदनशील अवस्था होती है। इस समय Ethrel/Ethephon (100–250 ppm), NAA (100 ppm) या MH (50 ppm) का छिड़काव करने से नर फूल दब जाते हैं और पहली ही गाँठों से मादा फूल अधिक निकलते हैं जिससे अगेती व अधिक उपज मिलती है। इसके विपरीत GA3 (1500 ppm) या AgNO3 (200 ppm) छिड़कने से नर फूल बढ़ते हैं।
4. खीरे में 'स्त्रीलिंगी वंशक्रम' (Gynoecious Line) का संकर बीज उत्पादन और पॉलीहाउस खेती में क्या महत्व है?
1. संकर बीज उत्पादन में जब Gynoecious लाइन को मादा पितृ बनाते हैं, तो उसमें 100% मादा फूल ही लगने के कारण हाथ से नर फूल तोड़ने या विपुंसन का खर्च शून्य हो जाता है (जैसे पूसा संयोग)। 2. पॉलीहाउस (Protected cultivation) में मधुमक्खियाँ नहीं होतीं, वहाँ 'पार्थेनोकार्पिक गायनोशियस' खीरे की किस्में बिना परागण के हर गाँठ पर बीज-रहित खीरा देती हैं।
5. खरबूजे में 'पंजाब हाइब्रिड' और 'पूसा रसराज' के संकर बीज उत्पादन तंत्र की तुलना कीजिए।
चूँकि भारतीय खरबूजे Andromonoecious (द्विलिंगी फूल युक्त) होते हैं, इसलिए उनमें हाथ से विपुंसन बहुत कठिन है। इसे हल करने के लिए 'पंजाब हाइब्रिड' में आनुवंशिक नर बंध्य लाइन (GMS line 'MS-1' × हरा मधु) का उपयोग किया गया, जबकि 'पूसा रसराज' में उभयलिंगाश्रयी मादा लाइन (Monoecious line 'M-3' × दुर्गापुरा मधु) का उपयोग कर हाथ से विपुंसन की आवश्यकता समाप्त कर दी गई।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. कद्दू वर्गीय फसलों (Cucurbits) में पाए जाने वाले विभिन्न लिंग रूपों (Sex Forms), उनके आनुवंशिक एवं पर्यावरणीय/हार्मोनल नियंत्रण तथा संकर बीज उत्पादन में उनके उपयोग का सविस्तर वर्णन कीजिए।
8 लिंग रूपों (Monoecious, Andromonoecious, Gynoecious, Androecious, Hermaphrodite, Gynomonoecious, Trimonoecious, Dioecious) को उदाहरणों सहित स्पष्ट करें, खीरे में F और M जीन तथा तापमान/दीप्तिकाल व Ethrel बनाम AgNO3/GA3 की भूमिका और Gynoecious/GMS/Monoecious लाइनों से संकर बीज उत्पादन का वर्णन करें।
2. खीरा, लौकी और करेला के उत्पत्ति केंद्र, गुणसूत्र संख्या, पुष्प जीवविज्ञान, प्रमुख प्रजनन उद्देश्यों और उन्नत किस्मों व संकरों का वर्णन कीजिए।
तीनों फसलों का वानस्पतिक नाम व 2n (14, 22, 22), पुष्पन समय का अंतर (सुबह बनाम शाम), कुकरबिटासिन व चैरेंटिन का महत्व तथा प्रमुख किस्मों/संकरों (पूसा संयोग, पार्थेनोकार्पिक खीरा; पूसा मेघदूत, पूसा मंजरी, पूसा नवीन, सम्राट; पूसा दो मौसमी, पूसा विशेष, DBGy-201) का सविस्तर विवरण दें।
3. तरबूज, खरबूजा और परवल में फसल सुधार के उद्देश्यों, प्रजनन विधियों (त्रिगुणित तरबूज निर्माण सहित) और प्रमुख किस्मों की विवेचना कीजिए।
तरबूज में कीहारा की त्रिगुणित विधि (पूसा बेदाना), अर्का मानिक (तिहरा रोग प्रतिरोध), शुगर बेबी व दुर्गापुरा केसर; खरबूजे में Full-slip बनाम Non-slip (हरा मधु), पंजाब हाइब्रिड व पूसा रसराज; तथा परवल में एकलिंगाश्रयी (Dioecious) प्रजनन, नर:मादा अनुपात (1:10) और स्वर्ण रेखा व स्वर्ण अलौकिक किस्मों का वर्णन करें।
परीक्षा वन-लाइनर्स
- कद्दू वर्गीय फलों का वानस्पतिक प्रकार 'पेपो' (Pepo) कहलाता है जो अधोवर्ती (Inferior) त्रि-अंडपी अंडाशय से बनता है।
- लौकी की 'नरेंद्र शिवानी' एक अद्वितीय किस्म है जिसमें नर और मादा फूल अलग न होकर द्विलिंगी (Andromonoecious) रूप में लगते हैं।
- करेले की स्त्रीलिंगी (Gynoecious) लाइन 'DBGy-201' का विकास IARI और सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा भारत में किया गया है।
- खरबूजे की 'अर्का जीत' किस्म अपने छोटे आकार और अत्यंत उच्च मिठास (TSS 14–16° Brix) व विटामिन-C के लिए प्रसिद्ध है।
- परवल (Pointed gourd) का प्रवर्धन बीज से न करके 1–1.5 मीटर लंबी लता की कलमों ('Lachi' / Rooted vine cuttings) से किया जाता है।
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध GPB 311 Smart Notes।





