GPB 311 Lecture 07: कपास (Cotton) और अरंडी (Castor) में फसल सुधार: उत्पत्ति, प्रजातियाँ, संकर प्रजनन एवं Bt कपास

GPB 311 · Kharif Crop Improvement Smart Notes
कपास (Cotton) और अरंडी (Castor) में फसल सुधार: उत्पत्ति, प्रजातियाँ, संकर प्रजनन एवं Bt कपास
Crop Improvement in Cotton and Castor
Cotton (कपास – Gossypium spp.), Castor (अरंडी – Ricinus communis)
विषय सूची · Quick Navigation
अधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesफसल सुधार के विस्तृत विषय · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्सअधिगम उद्देश्य · Learning Objectives
- कपास (Gossypium) की चारों कृष्य प्रजातियों—2 पुरानी दुनिया की द्विगुणित देसी कपास (G. arboreum एवं G. herbaceum, 2n=2x=26, AA) और 2 नई दुनिया की चतुर्गुणित कपास (G. hirsutum एवं G. barbadense, 2n=4x=52, AADD)—की उत्पत्ति व उद्विकास को समझना।
- विश्व में संकर कपास की भारतीय क्रांति—डॉ. सी.टी. पटेल द्वारा विकसित विश्व का प्रथम अंतरा-प्रजातीय संकर 'H-4' (1970) और डॉ. बी.एच. कटारकी द्वारा विकसित प्रथम अंतर्विशिष्ट संकर 'वरलक्ष्मी' (1972)—तथा डोएक की विपुंसन विधि व Bt कपास (Cry1Ac + Cry2Ab) को सीखना।
- अरंडी (Castor – Ricinus communis, 2n=20) की उभयलिंगाश्रयी पुष्प संरचना, मादा वंशक्रमों (Pistillate lines – N-type व S-type, VP-1) और भारत के प्रथम अरंडी संकर 'GCH-3' व 'GCH-4' के प्रजनन का अध्ययन करना।
प्रस्तावना · Introduction
भारत ने कपास (Cotton – 'White Gold / King of Fibres') और अरंडी (Castor – प्रमुख अखाद्य औद्योगिक तिलहन) दोनों ही फसलों में विश्व को व्यावसायिक संकर प्रजनन (Commercial Hybrid Breeding) का मार्ग दिखाया है! भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जहाँ कपास की चारों कृष्य प्रजातियाँ और उनके संकर व्यावसायिक रूप से उगाए जाते हैं, और अरंडी के विश्व उत्पादन व निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 80% से अधिक है।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions
नई दुनिया की पर-चतुर्गुणित कपास का उद्विकास (Allotetraploid Cotton Evolution – Beasley, 1940)
नई दुनिया की कपास (G. hirsutum एवं G. barbadense, 2n=4x=52, AADD) का विकास पुरानी दुनिया की द्विगुणित प्रजाति G. herbaceum/arboreum (AA genome, 2n=26 — छोटे गुणसूत्र नहीं बल्कि बड़े गुणसूत्र!) और अमेरिकी जंगली प्रजाति G. raimondii (DD genome, 2n=26) के संकरण व गुणसूत्र द्विगुणन से हुआ।
डोएक की नाखून विपुंसन विधि (Doak's Thumbnail Method, 1934)
कपास के संकर बीज उत्पादन में शाम के समय बंद कली (Candle stage) के बाह्यदल, दलपुंज और पुमंग नलिका (Staminal column) को अंगूठे के नाखून से एक ही झटके में छीलकर हटाने की तीव्र विपुंसन विधि।
अग्रगामिता एवं गॉसिपॉल-मुक्त कपास (Glandless Cotton)
कपास के बीज और पत्तियों की काली तेल ग्रंथियों में विषैला फेनोलिक वर्णक 'Gossypol' पाया जाता है (जो अजुगाली करने वाले पशुओं के लिए जहरीला है); अप्रभावी जीनों (gl2gl2 gl3gl3) द्वारा बिना गॉसिपॉल वाली कपास बनाई गई, किंतु उसमें कीट अधिक लगते हैं।
मादा वंशक्रम / पिस्टिलेट लाइन (Pistillate Line in Castor)
अरंडी की सामान्य उभयलिंगाश्रयी (Monoecious) मंजरी में नीचे नर और ऊपर मादा फूल होते हैं; किंतु अप्रभावी 'f' जीन (N-type) या पर्यावरण-संवेदनशील 'S-type' (जैसे VP-1, Geeta) के कारण पूरी मंजरी में 100% केवल मादा फूल ही लगते हैं, जिसका उपयोग संकर बीज बनाने में मादा पितृ (Female parent) के रूप में होता है।
वर्गीकरण · Classification
कपास (Genus Gossypium, कुल: Malvaceae, मूल संख्या x = 13) की 4 कृष्य प्रजातियाँ
【A. पुरानी दुनिया की द्विगुणित देसी कपास (Old World Diploid Cottons: 2n = 2x = 26, Genome AA)】
1. Gossypium arboreum (वृक्ष/देसी कपास): उत्पत्ति—भारत (सिंधु घाटी सभ्यता); रेशा छोटा व मोटा (15–22 mm), सूखा, उकठा व चूसक कीट प्रतिरोधी।
2. Gossypium herbaceum (वागड़/एशियाई कपास): उत्पत्ति—अफ्रीका/मध्य-पूर्व; गुजरात व कर्नाटक के तटीय/शुष्क क्षेत्रों में प्रचलित।
【B. नई दुनिया की पर-चतुर्गुणित कपास (New World Tetraploid Cottons: 2n = 4x = 52, Genome AADD)】
3. Gossypium hirsutum (अमेरिकन / अपलैंड कपास): उत्पत्ति—मेक्सिको व मध्य अमेरिका; मध्यम से लंबा रेशा (24–30 mm); विश्व व भारत के >90% क्षेत्रफल पर यही (Bt संकरों के रूप में) उगाई जाती है।
4. Gossypium barbadense (मिस्र / ईजिप्शियन / सी-आइलैंड / सुविन कपास): उत्पत्ति—पेरू (दक्षिण अमेरिका); अति-लंबा व रेशमी महीन रेशा (Extra-long staple: 32–40 mm; जैसे भारत की 'Suvin' किस्म जो 120s काउंट का सूत बनाती है!)।
कपास की प्रमुख जंगली प्रजातियाँ (46 Wild Species)
G. raimondii (2n=26, D5 genome — चतुर्गुणित कपास का D-जीनोम दाता एवं जासिड प्रतिरोधी), G. harknessii (2n=26, D2 genome — संकर कपास हेतु CMS कोशिकाद्रव्य का मुख्य स्रोत!), G. anomalum (2n=26, B1 genome — अति महीन रेशा व ब्लैक आर्म प्रतिरोधी), G. thurberi (2n=26, D1 — Pink bollworm प्रतिरोधी), G. tomentosum (2n=52, AD3 — पत्तियों पर घने रोम व सूखा प्रतिरोधी)।
महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles
- विश्व में संकर कपास की भारतीय क्रांति (World's First Cotton Hybrids in India): 1. सन् 1970 में गुजरात कृषि विश्वविद्यालय (सूरत) के डॉ. चंद्रकांत टी. पटेल (Dr. C.T. Patel — 'Father of Hybrid Cotton') ने हाथ से विपुंसन व परागण (Doak's method) द्वारा विश्व का प्रथम व्यावसायिक कपास संकर 'Hybrid-4 (H-4 / Shankar-4)' [G. hirsutum अंतरा-प्रजातीय संकर: Gujarat-67 × American Nectariless] विकसित किया! 2. सन् 1972 में धारवाड़ (कर्नाटक) के डॉ. बी.एच. कटारकी ने विश्व का प्रथम अंतर्विशिष्ट चतुर्गुणित संकर (Interspecific Tetraploid Hybrid) 'वरलक्ष्मी (Varalaxmi)' [Laxmi (G. hirsutum) × SB 289-E (G. barbadense)] विकसित किया!
- कपास में प्लॉइडी अवरोध (Ploidy Barrier in Desi × American Cross): यदि सीधे चतुर्गुणित G. hirsutum (2n=52) और द्विगुणित देसी G. arboreum (2n=26) का संकरण किया जाए तो त्रिगुणित (2n=39) बंध्य संकर बनता है; इसलिए पहले देसी कपास के गुणसूत्रों को कोलचीसिन से दोगुना (Autotetraploid 2n=52) करके संकरण किया जाता है।
फसल सुधार के विस्तृत विषय · Detailed Topics
1. Crop Improvement in Cotton (कपास — Gossypium spp., 2n = 26 & 52)
महत्व: भारत में कपास के क्षेत्रफल का ~95% भाग आज ट्रांसजेनिक 'Bt Cotton' संकरों के अंतर्गत है।
महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
- पुष्प जीवविज्ञान (Floral Biology): फूल पत्ती के सम्मुख एकल (Solitary) लगते हैं और उनके बाहर 3 बड़े दाँतेदार सहपत्रों का 'Epicalyx (Squares)' होता है। दलपुंज में 5 बड़े पीले या क्रीम रंग के दल होते हैं जो खिलने के दूसरे दिन गुलाबी-बैंगनी होकर झड़ जाते हैं। पुंकेसर असंख्य होते हैं जो जुड़कर वर्तिका के चारों ओर एक लंबी 'पुमंग नलिका' (Monadelphous Staminal Column) बनाते हैं। अंडाशय 3 से 5 कोष्ठीय होता है और फल को 'टिंडा' (Boll / Loculicidal capsule) कहते हैं।
- परागण: सुबह 7–10 बजे फूल खिलने पर स्व-परागण होता है, किंतु बड़े चमकीले फूल और मकरंद ग्रंथियों के कारण मधुमक्खियों द्वारा 5% से 25% तक पर-परागण होता है (Often cross-pollinated crop)।
सुधार रणनीति · Breeding Approach
- रंगीन कपास (Naturally Colored Cotton): भूरी कपास—KC 94-2 (कोकण) एवं हरी कपास—अركা सबुज।
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ
प्रमुख प्रजनन उद्देश्य: (1) उच्च कपास (Seed cotton / Kapas) व रुई उपज, (2) उच्च ओटाई प्रतिशत (Ginning Out-Turn – GOT: 35–42%), (3) रेशे की गुणवत्ता के 3 मानक—रेशे की लंबाई (Staple length), रेशे की मजबूती (Fibre strength in g/tex) एवं रेशे की महीनता (Micronaire value: 3.5–4.5), (4) टिंडा छेदक संकुल (Helicoverpa, Pink bollworm), सफेद मक्खी (CLCuV वाहक) एवं जैसिड प्रतिरोध (पत्तियों पर रोम/Hairiness 'H1' जीन से जैसिड प्रतिरोध मिलता है), (5) फ्यूजेरियम उकठा व ब्लैक आर्म प्रतिरोध।
जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ
ऐतिहासिक किस्में एवं संकरों की सूची:
• उत्कृष्ट किस्में: एमसीयू-5 (MCU-5 — प्रथम अतिरिक्त लंबे रेशे वाली किस्म), सुविन (Suvin = सुजाता × St. Vincent — भारत की सर्वश्रेष्ठ रेशे वाली G. barbadense किस्म!), एलआरए-5166, नरसिम्हा, बीकानेरी नरमा, आरजी-8 (RG-8 — देसी कपास)।
• अंतरा-हिर्सुटम संकर (Intra-hirsutum Hybrids: H × H): H-4 (शंकर-4, 1970 — विश्व का प्रथम संकर), H-6, सविता, संकर-8, संकर-10, NHH-44।
• अंतर्विशिष्ट चतुर्गुणित संकर (Interspecific Tetraploid: G. hirsutum × G. barbadense): वरलक्ष्मी (Varalaxmi, 1972), DCH-32 (जयलक्ष्मी — सर्वाधिक लोकप्रिय लंबे रेशे का संकर!), HB-224, TCHB-213।
• देसी द्विगुणित संकर (Diploid Hybrids: G. herbaceum × G. arboreum): G.Cot.DH-7 (1984 — विश्व का प्रथम देसी द्विगुणित संकर: G. herbaceum × G. arboreum!), G.Cot.DH-9, DDH-2, Pha-46।
• CMS एवं GMS आधारित कपास संकर: सुगना, PKV Hy-3 (G. harknessii CMS से), हाइब्रिड LDHR-1 (Gregg GMS जीन ms5ms6 से)।
पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ
Bt कपास (Transgenic Cotton in India): मृदा जीवाणु Bacillus thuringiensis से प्राप्त क्रिस्टल एंडोटॉक्सिन जीन—Bollgard-I (2002 में भारत में स्वीकृत प्रथम GM फसल: केवल 'Cry1Ac' जीन – Mon531 event) और Bollgard-II (2006 में स्वीकृत: 'Cry1Ac + Cry2Ab' दोहरे जीन – Mon15985 event, जो अमेरिकन व स्पॉटेड बॉलवर्म को रोकते हैं)। इसके अलावा CICR नागपुर और PAU ने सीधे बीज बचाने योग्य 'Bt किस्में' (जैसे PAU Bt-1) भी विकसित की हैं।
2. Crop Improvement in Castor (अरंडी — Ricinus communis L., 2n = 2x = 20)
महत्व: अरंडी के बीज में 48–56% अखाद्य तेल होता है जिसमें 85–90% 'रिसिनोलिक अम्ल' (Ricinoleic acid — एक हाइड्रॉक्सी वसा अम्ल) पाया जाता है। यह तेल -18°C तक जमता नहीं और उच्च ताप पर जलता नहीं, इसलिए हवाई जहाज के इंजन (Jet engines) के लुब्रिकेंट, नायलॉन-11, पेंट व औषधियों में अपरिहार्य है। इसकी खली में 'Ricin' नामक घातक प्रोटीन विष और 'Ricinine' एल्कलॉइड होता है।
महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
- पुष्प जीवविज्ञान एवं लिंग अभिव्यक्ति (Floral Biology & Sex Expression): अरंडी का पुष्पक्रम एक शीर्षस्थ संयुक्त असीमाक्षी मंजरी ('Raceme / Spike / Candle') होता है। सामान्य अरंडी 'उभयलिंगाश्रयी' (Monoecious) होती है—जिसमें एक ही मंजरी के निचले 30–50% भाग में पीले रंग के नर फूल (Staminate flowers — बहुशाखित पुंकेसरों सहित) और ऊपरी 50–70% भाग में लाल/हरे काँटेदार वर्तिकाग्र वाले मादा फूल (Pistillate flowers — त्रि-अंडपी अंडाशय) लगते हैं। यह पूर्णतः वायु-परागित (Wind-pollinated / Anemophilous) और पर-परागित फसल है।
- मादा वंशक्रम (100% Pistillate Lines for Hybrid Seed Production): संकर बीज बनाने हेतु मादा पंक्ति का 100% मादा (Pistillate – जिसमें एक भी नर फूल न हो) होना आवश्यक है। इसके 2 तंत्र हैं:
1. N-प्रकार (Normal recessive gene 'ff'): जैसे CNES-1 (इसमें 50% उभयलिंगाश्रयी पौधे उखाड़ने पड़ते हैं)।
2. S-प्रकार एवं NES-प्रकार (Environmentally Sensitive interspersed staminate flowers): कम तापमान (<30°C – सर्दियों में) पर यह पंक्ति 100% मादा (Pistillate) रहती है जिससे संकर बीज बनता है, और गर्मी के मौसम (>32°C) में इसी पंक्ति में बीच-बीच में कुछ नर फूल (Interspersed staminate flowers – ISF) निकल आते हैं जिससे इस मादा पंक्ति का अपना बीज गुणन आसानी से हो जाता है!
सुधार रणनीति · Breeding Approach
- अरंडी के संकर बीज उत्पादन में 'Modified Method' अपनाई जाती है जिसमें S-type पिस्टिलेट लाइन को अक्टूबर-नवंबर (ठंड) में बोने से वह 100% मादा रहती है।
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ
प्रमुख मादा वंशक्रम (Famous Pistillate Lines): 'VP-1' (विजापुर पिस्टिलेट-1 — TSP 10R से विकसित भारत की सबसे प्रसिद्ध बौनी मादा लाइन!), 'गीता' (Geeta), 'SKP-84', 'DPC-9', 'M-591'।
जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ
प्रजनन उद्देश्य एवं उपलब्धियाँ:
1. छोटे कद, जल्दी पकने वाली (120–150 दिन), न-चटकने वाले कैप्सूल (Non-shattering capsules), फ्यूजेरियम उकठा (Fusarium oxysporum f.sp. ricini) एवं ग्रे मोल्ड (Botrytis) प्रतिरोधी संकर।
2. प्रसिद्ध किस्में: अरुणा (Aruna — HC-6 पर थर्मल न्यूट्रॉन उत्परिवर्तन से विकसित, 250 दिन से घटाकर 120 दिन में पकने वाली क्रांतिकारी किस्म!), भाग्य, सौभाग्य, ज्योति (DCS-9), क्रांति, हरिता, GC-3।
पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ
3. भारत की संकर अरंडी क्रांति (SDAU सरदारकृषिनगर, दांतीवाड़ा गुजरात एवं IIOR हैदराबाद): विश्व एवं भारत का प्रथम अरंडी संकर = 'GCH-3' (Gujarat Castor Hybrid-3 = TSP 10R × Junagadh-1, 1968)! इसके बाद 'VP-1' मादा लाइन से बने मेगा संकर: GAUCH-1, GCH-2, GCH-4 (VP-1 × 48-1 — पूरे भारत में सर्वाधिक लोकप्रिय संकर), GCH-5, GCH-6, GCH-7 (SKP-84 × SKI-215 — फ्यूजेरियम उकठा व सूत्रकृमि प्रतिरोधी सर्वोच्च उपज संकर!), DCH-32 (दीप्ति), DCH-177, DCH-519, RHC-1।
तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables
तालिका 7.1: कपास (Gossypium) की चारों कृष्य प्रजातियों का तुलनात्मक वर्गीकरण
| प्रजाति का नाम | सामान्य नाम | गुणसूत्र एवं जीनोम | उत्पत्ति केंद्र | रेशे की लंबाई व विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| 1. Gossypium arboreum | देसी / वृक्ष कपास | 2n = 2x = 26 (A2A2) | भारत (सिंधु घाटी) | छोटा व मोटा रेशा (15–22 mm); सूखा व कीट प्रतिरोधी (RG-8, लोहित) |
| 2. Gossypium herbaceum | एशियाई / वागड़ कपास | 2n = 2x = 26 (A1A1) | अफ्रीका / अरब | छोटा से मध्यम रेशा (18–23 mm); तटीय लवणता सहिष्णु (दिग्विजय, संजय) |
| 3. Gossypium hirsutum | अमेरिकन / अपलैंड / नरमा | 2n = 4x = 52 (AD)1 | मेक्सिको / मध्य अमेरिका | मध्यम से लंबा रेशा (24–30 mm); >90% क्षेत्रफल पर प्रचलित (MCU-5, H-4) |
| 4. Gossypium barbadense | मिस्र / सी-आइलैंड कपास | 2n = 4x = 52 (AD)2 | पेरू (दक्षिण अमेरिका) | अति-लंबा रेशमी रेशा (32–40 mm); सर्वोत्तम सूत गुणवत्ता (Suvin) |
सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations
1. कपास में 'ओटाई प्रतिशत' (Ginning Out-Turn – GOT %) एवं 'लिंट इंडेक्स' (Lint Index) की गणना
उदाहरण: यदि किसी कपास किस्म के 100 किलोग्राम कपास (Seed cotton / Kapas) की ओटाई (Ginning) करने पर 36 किलोग्राम रुई (Lint) और 64 किलोग्राम बिनौला (Cotton seed) मिलता है, तथा 100 बिनौलों का भार (Seed Index) 8.0 ग्राम है, तो:
• ओटाई प्रतिशत (GOT %) = (36 / 100) × 100 = 36%
• लिंट इंडेक्स (100 बीजों से प्राप्त रुई का भार) = (8.0 × 36) / (100 − 36) = 288 / 64 = 4.5 ग्राम रुई प्रति 100 बीज।
माइंड मैप · Mind Map
[Lecture 07: कपास (Cotton) एवं अरंडी (Castor) में फसल सुधार]
├── 1. कपास (Gossypium spp., Malvaceae, x=13)
│ ├── 4 कृष्य प्रजातियाँ:
│ │ ├── पुरानी दुनिया (Diploid 2n=26, AA): G. arboreum (भारत) & G. herbaceum (अफ्रीका)
│ │ └── नई दुनिया (Tetraploid 2n=52, AADD = AA × G. raimondii DD): G. hirsutum & G. barbadense (Suvin)
│ ├── पुष्प एवं विपुंसन: Epicalyx (3 bracts) + Monadelphous staminal column → Doak's Thumbnail Method (1934)
│ ├── भारतीय संकर कपास क्रांति:
│ │ ├── प्रथम संकर (H × H): Hybrid-4 / Shankar-4 (1970, Dr. C.T. Patel, Surat)
│ │ ├── प्रथम अंतर्विशिष्ट संकर (H × B): Varalaxmi (1972, Dr. B.H. Katarki) एवं DCH-32 (Jayalaxmi)
│ │ └── प्रथम देसी द्विगुणित संकर: G.Cot.DH-7 (1984) | CMS स्रोत: G. harknessii
│ └── Bt कपास: Bollgard-I (Cry1Ac, 2002) & Bollgard-II (Cry1Ac + Cry2Ab, 2006)
└── 2. अरंडी (Ricinus communis, Euphorbiaceae, 2n=20)
├── उत्पत्ति: इथियोपिया | तेल (48–56%) में 85–90% Ricinoleic acid (Jet lubricant) + खली में 'Ricin' विष
├── पुष्प: Monoecious raceme (नीचे नर फूल, ऊपर मादा फूल) → वायु-परागित (Anemophilous)
├── मादा वंशक्रम (100% Pistillate lines): VP-1, Geeta, SKP-84 (ठंड में 100% मादा, गर्मी में ISF नर फूलों से स्व-गुणन)
└── प्रमुख किस्में व संकर: Aruna (थर्मल न्यूट्रॉन उत्परिवर्ती, 120 दिन), GCH-3 (प्रथम संकर, 1968), GCH-4, GCH-7 (उकठा प्रतिरोधी)
प्रवाह चित्र · Flowchart
[अरंडी (Castor) में पर्यावरण-संवेदनशील 'S-Type मादा वंशक्रम (VP-1 / SKP-84)' से दो-पंक्ति संकर बीज उत्पादन]
【A. मादा वंशक्रम (Pistillate Line - VP-1 / SKP-84) का अपना बीज गुणन — ग्रीष्म ऋतु (तापमान > 32°C)】
उच्च तापमान पर मादा मंजरी में बीच-बीच में नर फूल (Interspersed Staminate Flowers - ISF) निकल आते हैं
↓ (आपसी परागण / Sib-mating)
बिना किसी अनुरक्षक पंक्ति (No B-line needed) के मादा वंशक्रम (VP-1) का शुद्ध बीज गुणन
【B. व्यावसायिक संकर बीज उत्पादन (Certified Hybrid Seed Plot) — रबी/शीत ऋतु (तापमान < 30°C)】
कम तापमान पर मादा वंशक्रम (VP-1 / SKP-84) की मंजरी 100% मादा (Strictly Pistillate) बनी रहती है
↓ (हवा द्वारा परागण — 3 मादा : 1 नर कतार अनुपात)
[Pistillate Female Line (VP-1 / SKP-84)] × [Monoecious Male Pollinator Line (48-1 / SKI-215)]
↓
व्यावसायिक संकर अरंडी बीज (GCH-4 / GCH-7)
परीक्षा टिप्स · Exam Tips
- परीक्षा में ये तीन कपास संकर हमेशा पूछे जाते हैं: 1. विश्व का प्रथम कपास संकर (Intra-hirsutum) = 'H-4' (1970, डॉ. सी.टी. पटेल); 2. विश्व का प्रथम अंतर्विशिष्ट चतुर्गुणित संकर (G. hirsutum × G. barbadense) = 'वरलक्ष्मी' (1972, डॉ. कटारकी); 3. विश्व का प्रथम देसी द्विगुणित संकर (G. herbaceum × G. arboreum) = 'G.Cot.DH-7' (1984)।
- अरंडी की मंजरी में सामान्यतः 'नीचे नर फूल और ऊपर मादा फूल' होते हैं (जबकि मक्का में इसके ठीक उल्टा 'ऊपर नर Tassel और नीचे मादा Cob' होता है!)।
- अरंडी की 'अरुणा (Aruna)' किस्म थर्मल न्यूट्रॉन विकिरण द्वारा विकसित प्रसिद्ध उत्परिवर्तित अगेती किस्म है।
त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision
- कपास: देसी (G. arboreum, G. herbaceum: 2n=26, AA); अमेरिकन/मिस्र (G. hirsutum, G. barbadense: 2n=52, AADD)।
- चतुर्गुणित कपास का D-जीनोम दाता = Gossypium raimondii; CMS कोशिकाद्रव्य दाता = Gossypium harknessii।
- सुविन (Suvin): G. barbadense की भारत में सर्वोत्तम अतिरिक्त लंबे रेशे वाली किस्म; MCU-5: G. hirsutum की प्रमुख किस्म।
- Bollgard-II Bt कपास में 'Cry1Ac + Cry2Ab' दो जीन होते हैं; विपुंसन की विधि 'Doak's Thumbnail Method' है।
- अरंडी (Ricinus communis, 2n=20): प्रसिद्ध मादा लाइन—VP-1; प्रथम संकर—GCH-3; उकठा रोधी मेगा संकर—GCH-7।
MCQs — उत्तर एवं व्याख्या
1. सन् 1970 में सूरत (गुजरात) में विश्व का प्रथम व्यावसायिक कपास संकर 'Hybrid-4 (H-4)' किस वैज्ञानिक ने विकसित किया था?
- (A) डॉ. बी.एच. कटारकी
- (B) डॉ. चंद्रकांत टी. पटेल (Dr. C.T. Patel)
- (C) डॉ. डी.एस. अठवाल
- (D) डॉ. हरभजन सिंह
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — डॉ. सी.टी. पटेल ('Father of Hybrid Cotton') ने गुजरात-67 × अमेरिकन नेक्टरीलेस के संकरण से 1970 में H-4 विकसित किया।
2. Gossypium hirsutum (♀) × Gossypium barbadense (♂) के अंतर्विशिष्ट संकरण से सन् 1972 में डॉ. बी.एच. कटारकी द्वारा विकसित प्रथम संकर कौन सा है?
- (A) H-4
- (B) वरलक्ष्मी (Varalaxmi)
- (C) G.Cot.DH-7
- (D) बीकानेरी नरमा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — धारवाड़ में डॉ. कटारकी द्वारा विकसित 'वरलक्ष्मी' (Laxmi × SB 289-E) विश्व का पहला अंतर्विशिष्ट चतुर्गुणित कपास संकर है।
3. नई दुनिया की चतुर्गुणित कपास (G. hirsutum, 2n=4x=52, AADD) के उद्विकास में 'D-genome' का दाता कौन सी जंगली द्विगुणित प्रजाति है?
- (A) Gossypium raimondii (2n=26, D5)
- (B) Gossypium anomalum
- (C) Gossypiumstocksii
- (D) Gossypium arboreum
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — पेरू की जंगली प्रजाति G. raimondii (DD) और पुरानी दुनिया की कपास (AA) के संकरण से AADD चतुर्गुणित कपास बनी।
4. कपास के संकर बीज उत्पादन में अंगूठे के नाखून से दलपुंज और पुमंग नलिका को एक साथ छीलकर हटाने की प्रसिद्ध विपुंसन विधि किसने दी थी?
- (A) जॉनसन (1910)
- (B) डोएक (Doak's Thumbnail Method, 1934)
- (C) जोडो (1938)
- (D) स्टीफेंस (1954)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — डोएक (Doak, 1934) की थम्बनेल विधि द्वारा एक प्रशिक्षित श्रमिक प्रतिदिन सैकड़ों कपास कलियों का विपुंसन कर सकता है।
5. भारत में सन् 2006 में स्वीकृत 'Bollgard-II' ट्रांसजेनिक Bt कपास में कौन से दो जीन सम्मिलित हैं?
- (A) केवल Cry1Ac
- (B) Cry1Ac एवं Cry2Ab
- (C) Cry1Ab एवं Cry9C
- (D) barnase एवं barstar
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — Bollgard-I में केवल Cry1Ac जीन था, जबकि Bollgard-II में प्रतिरोध प्रबंधन हेतु Cry1Ac + Cry2Ab दोनों जीन जोड़े गए।
6. अरंडी (Ricinus communis) के तेल में 85–90% कौन सा विशिष्ट हाइड्रॉक्सी वसा अम्ल पाया जाता है जो इसे जेट इंजन लुब्रिकेंट बनाता है?
- (A) इरुसिक अम्ल
- (B) रिसिनोलिक अम्ल (Ricinoleic Acid)
- (C) लिनोलेनिक अम्ल
- (D) पामिटिक अम्ल
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — अरंडी के तेल में 85–90% 'Ricinoleic acid' (18-carbon hydroxy fatty acid) होता है जो अन्य किसी वनस्पति तेल में नहीं मिलता।
7. अरंडी में व्यावसायिक संकर बीज उत्पादन को सफल बनाने वाली भारत की सबसे प्रसिद्ध 100% मादा वंशक्रम (Pistillate line) कौन सी है?
- (A) Tift 23A
- (B) VP-1 (विजापुर पिस्टिलेट-1) एवं SKP-84
- (C) CK 60A
- (D) MS Prabhat
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — 'VP-1' (गुजरात में विकसित) ने अरंडी में GCH-2 और GCH-4 जैसे क्रांतिकारी संकरों के निर्माण को संभव बनाया।
8. HC-6 किस्म पर थर्मल न्यूट्रॉन (Thermal neutrons) के प्रयोग से विकसित अरंडी की प्रसिद्ध 120-दिवसीय अगेती उत्परिवर्तित किस्म कौन सी है?
- (A) अरुणा (Aruna)
- (B) GCH-7
- (C) क्रांति
- (D) वरलक्ष्मी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — हैदराबाद में विकसित 'अरुणा' ने अरंडी की पकने की अवधि को 250–270 दिन से घटाकर 120–130 दिन कर दिया।
9. भारत की सर्वोत्तम रेशे वाली कपास किस्म कौन सी है जो 'Gossypium barbadense' प्रजाति से संबंधित है और 120s काउंट का धागा बनाती है?
- (A) सुविन (Suvin = Sujata × St. Vincent)
- (B) H-4
- (C) RG-8
- (D) दिग्विजय
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — CICR कोयंबटूर द्वारा विकसित 'सुविन (Suvin)' भारत की सर्वश्रेष्ठ अतिरिक्त लंबे रेशे वाली किस्म है।
10. कपास के संकर प्रजनन में कोशिकाद्रव्यी नर बंध्यता (CMS) का सर्वप्रमुख स्रोत कौन सी जंगली प्रजाति है?
- (A) Gossypium harknessii (D2-2 genome)
- (B) G. arboreum
- (C) G. barbadense
- (D) G. herbaceum
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — मेयर (Meyer, 1975) ने जंगली प्रजाति Gossypium harknessii से कपास में सबसे स्थिर CMS कोशिकाद्रव्य विकसित किया।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. विश्व का प्रथम देसी द्विगुणित कपास संकर (First Diploid Cotton Hybrid, 1984) कौन सा है?
G.Cot.DH-7 (सूरत से विकसित: G. herbaceum × G. arboreum)।
2. कपास के बीज और पत्तियों की काली ग्रंथियों में पाया जाने वाला विषैला फेनोलिक वर्णक कौन सा है?
गॉसिपॉल (Gossypol)।
3. विश्व एवं भारत का प्रथम अरंडी संकर (First Castor Hybrid, 1968) कौन सा था?
GCH-3 (Gujarat Castor Hybrid-3 = TSP 10R × Junagadh-1)।
4. अरंडी की खली (Castor cake) में पाया जाने वाला घातक जल-घुलनशील प्रोटीन विष कौन सा है?
रिसिन (Ricin — जो राइबोसोम को निष्क्रिय कर प्रोटीन संश्लेषण रोक देता है) एवं रिसिनीन एल्कलॉइड।
5. अरंडी का उकठा एवं सूत्रकृमि प्रतिरोधी सर्वाधिक लोकप्रिय संकर कौन सा है?
GCH-7 (गुजरात कैस्टर हाइब्रिड-7)।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. पुरानी दुनिया (Old World) और नई दुनिया (New World) की कृष्य कपास प्रजातियों में मुख्य अंतर लिखिए।
पुरानी दुनिया की कपास (G. arboreum एवं G. herbaceum) द्विगुणित (2n=2x=26, AA genome) हैं, इनकी उत्पत्ति भारत/अफ्रीका में हुई और इनका रेशा छोटा व मोटा किंतु पौधा सूखा व कीट सहिष्णु होता है। नई दुनिया की कपास (G. hirsutum एवं G. barbadense) पर-चतुर्गुणित (2n=4x=52, AADD genome) हैं, इनकी उत्पत्ति अमेरिका में हुई और इनका रेशा लंबा व महीन तथा उपज अधिक होती है।
2. कपास में 'डोएक की विपुंसन विधि' (Doak's Method of Emasculation) और संकर बीज उत्पादन की प्रक्रिया लिखिए।
शाम 3 से 6 बजे के बीच अगले दिन खिलने वाली सफेद बंद कलियों (Candle stage) को चुना जाता है। डोएक विधि में अंगूठे के नाखून से बाह्यदल, दलपुंज और पुमंग नलिका को अंडाशय के आधार से एक साथ गोल घुमाकर छील दिया जाता है और विपुंसित कली पर लाल कागज की थैली पहनाई जाती है। अगली सुबह 8–11 बजे नर फूल से परागण कर सफेद थैली पहना देते हैं।
3. अरंडी की उभयलिंगाश्रयी (Monoecious) मंजरी और संकर बीज उत्पादन में 'S-type Pistillate Line' की भूमिका समझाइए।
सामान्य अरंडी की मंजरी में नीचे नर फूल और ऊपर मादा फूल होते हैं। किंतु संकर बीज बनाने हेतु प्रयुक्त 'S-type Pistillate Line' (जैसे VP-1, SKP-84) कम तापमान (<30°C, रबी बुवाई) में 100% मादा फूल ही बनाती है जिससे नर लाइन के साथ संकर बीज बनता है; और गर्मी (>32°C) में इसी लाइन में कुछ नर फूल (ISF) आ जाते हैं जिससे इसका स्वयं का बीज गुणन हो जाता है।
4. कपास के रेशे की गुणवत्ता (Fibre Quality Parameters) के प्रमुख मानदंड कौन से हैं?
1. रेशे की लंबाई (Staple Length / 2.5% Span length in mm): छोटा (<20 mm), मध्यम (20–24 mm), लंबा (25–30 mm) व अतिरिक्त लंबा (>32 mm)। 2. रेशे की महीनता (Fibre Fineness / Micronaire value: 3.5 से 4.5 आदर्श)। 3. रेशे की मजबूती (Fibre Bundle Strength in g/tex)। 4. एकरूपता अनुपात (Uniformity ratio >48%) और परिपक्वता।
5. Bt कपास (Bollgard-I एवं Bollgard-II) क्या है और इसने कपास उत्पादन में क्या परिवर्तन किया?
मृदा जीवाणु Bacillus thuringiensis से प्राप्त Cry1Ac (BG-I, 2002) और Cry1Ac + Cry2Ab (BG-II, 2006) जीनों को कपास में जोड़कर ट्रांसजेनिक Bt कपास विकसित की गई। यह प्रोटीन लेपिडोप्टेरान टिंडा छेदक (Helicoverpa armigera, Earias, Pectinophora) की आँत में क्षारीय pH पर छिद्र कर उन्हें मार देता है, जिससे कीटनाशकों की खपत घटी और भारत की रुई उपज दोगुनी हो गई।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. कपास (Gossypium spp.) की चारों कृष्य प्रजातियों की उत्पत्ति, गुणसूत्र उद्विकास (Beasley का AADD सिद्धांत), जंगली प्रजातियों के महत्व और पुष्प जीवविज्ञान का सविस्तर वर्णन कीजिए।
G. arboreum, G. herbaceum (2n=26, AA) एवं G. hirsutum, G. barbadense (2n=52, AADD) की उत्पत्ति व विशेषताएँ, G. raimondii (D-genome) व G. harknessii (CMS) की भूमिका तथा Epicalyx, Monadelphous पुमंग नलिका और बहुधा पर-परागण का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
2. भारत में संकर कपास प्रजनन (Intra-hirsutum, Interspecific Tetraploid एवं Desi Diploid Hybrids), विपुंसन विधि, CMS/GMS उपयोग और Bt कपास की उपलब्धियों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
डॉ. सी.टी. पटेल के H-4 (1970), डॉ. कटारकी के वरलक्ष्मी (1972) व DCH-32, देसी संकर G.Cot.DH-7, Doak की थम्बनेल विपुंसन विधि, Gregg GMS व harknessii CMS तथा Bollgard-I व II संकरों का सविस्तर विवरण प्रस्तुत करें।
3. अरंडी (Ricinus communis) की उत्पत्ति, तेल के औद्योगिक महत्व, पुष्प जीवविज्ञान (Sex expression), पिस्टिलेट वंशक्रमों (N-type एवं S-type) और संकर अरंडी प्रजनन (GCH शृंखला) का वर्णन कीजिए।
इथियोपिया-भारत उत्पत्ति, 85–90% रिसिनोलिक अम्ल व रिसिन विष, उभयलिंगाश्रयी मंजरी, N-type बनाम S-type (ISF तंत्र) पिस्टिलेट लाइन (VP-1, SKP-84), उत्परिवर्तित किस्म अरुणा और GCH-3, GCH-4 एवं GCH-7 संकरों के विकास का विस्तार से वर्णन करें।
परीक्षा वन-लाइनर्स
- भारत विश्व का पहला और एकमात्र देश है जिसने कपास में व्यावसायिक संकर (H-4, 1970) विकसित कर बड़े पैमाने पर उगाए।
- कपास की पत्ती पर सूक्ष्म रोम (Hairiness – H1 जीन) हरा तेला (Jassid – Amrasca biguttula) के विरुद्ध यांत्रिक प्रतिरोध प्रदान करते हैं।
- कपास में बिनौले रहित केवल रुई (Lint) के 1 गांठ (1 Bale of Cotton) का मानक वजन 170 किलोग्राम (जूट की गांठ में 180 kg) होता है।
- अरंडी (Ricinus communis) Euphorbiaceae कुल का एक मोनोटाइपिक वंश है जिसमें केवल एक ही प्रजाति पाई जाती है।
- गुजरात के सरदारकृषिनगर (दांतीवाड़ा) केंद्र ने विश्व का प्रथम अरंडी संकर 'GCH-3' (1968) विमोचित किया था।
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध GPB 311 Smart Notes।





