AGENGG 311 Lecture 05: बायोमास गैसीकरण एवं विभिन्न गैसीफायरों से परिचय | Hindi Notes
AGRO PATH FINDERAGENGG 311 · Renewable Energy in Agriculture
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02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)Lecture 05: बायोमास गैसीकरण एवं विभिन्न गैसीफायरों से परिचय
Biomass gasification and familiarization with different gasifiers
02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)
इस व्याख्यान (Lecture) के अध्ययन के पश्चात् विद्यार्थी निम्नलिखित में सक्षम होंगे:
- बायोमास (Biomass) और जैव-ऊर्जा (Bio-energy) की परिभाषा, रासायनिक संघटन (25% लिग्निन + 75% कार्बोहाइड्रेट) और 5 प्रमुख बायोमास संसाधनों को समझना।
- बायोमास रूपांतरण की 8 तकनीकों तथा बायोमास गैसीकरण (Biomass Gasification) की अवधारणा को समझना।
- प्रोड्यूसर गैस / सिनगैस (Producer Gas / Wood Gas) के संघटन (20% H₂, 20% CO, थोड़ा CH₄, 50–60% N₂), कैलोरी मान (1000–1200 kcal/m³) और उपज (1 kg बायोमास = 2.5–3.0 m³ गैस) को जानना।
- बायोमास गैसीकरण की 6 मूलभूत परिघटनाओं तथा गैसीफायर के 4 ताप-रासायनिक क्षेत्रों (Drying, Pyrolysis, Oxidation, Reduction Zones) की अभिक्रियाओं को समझना।
- विभिन्न प्रकार के गैसीफायरों—अपड्राफ्ट (Updraft), डाउनड्राफ्ट (Downdraft), क्रॉसड्राफ्ट (Crossdraft) और फ्लूडाइज्ड बेड (Fluidized Bed)—की संरचना, कार्यप्रणाली, लाभ-हानि और इंजन अनुप्रयोगों की तुलना करना।
03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)
मूल सामग्री (Core Course Content): बायोमास (Biomass) वह दहनशील कार्बनिक पदार्थ (Combustible organic matter) है जो प्रकाश-संश्लेषण रूपांतरण प्रक्रिया (Photosynthetic conversion process) के परिणामस्वरूप जीवित जीवों से प्राप्त होता है। बायोमास मानव जाति और उसकी संबद्ध गतिविधियों के लिए आहार (Feed), रेशा (Fiber), उर्वरक (Fertilizer) और ईंधन (Fuel) [4F] के उत्पादन का मुख्य स्रोत है।
जैव-ऊर्जा (Bio-energy) पौधों और जंतु पदार्थों—जैसे वनों की लकड़ी, कृषि और वानिकी प्रक्रियाओं के अवशेष, तथा औद्योगिक, मानव और पशु अपशिष्टों—से प्राप्त ऊर्जा है। यह पौधों और जंतुओं में संचित रासायनिक ऊर्जा (Chemical energy) के रूप में होती है और नवीकरणीय ऊर्जा का एक प्रमुख रूप है। शुष्क भार के आधार पर शाकीय फसलों (गेहूँ का भूसा, गन्ने की खोई) का ऊष्मीय मान 17.5 GJ/टन से लेकर लकड़ी के लिए 20 GJ/टन तक होता है।
04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)
05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)
1. प्रमुख बायोमास संसाधन (Biomass Resources — 5 Categories)
- कृषि फसलें (Agricultural Crops): विशेष रूप से ऊर्जा स्रोतों के रूप में उगाई जाने वाली फसलें—जैसे गन्ना, मक्का, गेहूँ, ज्वार, सूरजमुखी, रेपसीड और सोयाबीन (मुख्यतः एथेनॉल व बायोडीजल हेतु)।
- कृषि अवशेष (Agricultural Residues): धान की भूसी (Rice husk), गन्ने की खोई (Bagasse), नारियल के छिलके व खोल (Coconut husks & shells), मूंगफली के छिलके (Groundnut shells), अनाज की पुआल/भूसा (Cereal straw) आदि।
- पशु अपशिष्ट (Animal Waste): दहनशील कार्बनिक पदार्थ जिसका उपयोग उपले और बायोगैस बनाने में होता है। प्रतिदिन गोबर उत्पादन: एक गाय 10 kg, भैंस 15 kg और ऊँट (Camel) लगभग 6 kg गोबर प्रतिदिन देता है।
- वन फसलें (Forest Crops): तेजी से बढ़ने वाले और कॉपिसिंग (Coppicing – कटाई के बाद पुनः फूटने) के लिए उपयुक्त काष्ठ वृक्ष तथा जंगल की सफाई व छँटाई से प्राप्त अवशेष।
- औद्योगिक अपशिष्ट (Industrial Wastes): लकड़ी का बुरादा (Sawdust), इमारती लकड़ी के टुकड़े, वुडचिप्स, खाद्य प्रसंस्करण और कागज व लुगदी उद्योग के अपशिष्ट (तथा मांस, फल-सब्जी धुलाई व डेयरी के तरल अपशिष्ट जिनसे बायोगैस बनती है)।
2. बायोमास रूपांतरण की 8 प्रमुख तकनीकें (8 Biomass Conversion Technologies)
(1) अवायवीय पाचन (Anaerobic digestion), (2) सघनीकरण: ब्रिकेटिंग एवं पैलेटाइजिंग (Densification: Briquetting & Pelletising), (3) प्रत्यक्ष दहन एवं सह-उत्पादन (Direct combustion & cogeneration), (4) पायरोलिसिस (Pyrolysis), (5) गैसीकरण (Gasification), (6) चारकोल उत्पादन (Charcoal production), (7) को-फायरिंग (Co-firing), और (8) एथेनॉल उत्पादन (Ethanol production)।
3. बायोमास गैसीकरण की 6 मूलभूत परिघटनाएँ (Fundamental Phenomena of Biomass Gasification)
- (a) सतही नमी का वाष्पीकरण (Evaporation of surface moisture): जल के क्वथनांक (~100°C, दाब पर निर्भर) पर कच्चे माल से सतही नमी वाष्पित होती है।
- (b) अंतर्निहित नमी का वाष्पीकरण (Evaporation of inherent moisture): सतही नमी के बाद, सामग्री के भीतर की अंतर्निहित नमी 110°C – 120°C पर वाष्पित होती है।
- (c) वाष्पशीलीकरण (Volatilization): 200°C – 300°C पर बायोमास का तापीय अपघटन (Thermal decomposition) शुरू होता है और तथा गैस के रूप में वाष्पित होते हैं। यह बायोमास की एक ऊष्मा-जनक (Heat generating) अभिलाक्षणिक प्रक्रिया है।
- (d) वाष्पशीलीकरण एवं गैसीकरण अभिक्रिया (Volatilization & Gasification reaction): तापमान और बढ़ने पर हल्के हाइड्रोकार्बन भारी हाइड्रोकार्बन में और फिर गैसीफाइंग एजेंट से क्रिया कर स्वच्छ हल्की गैस में बदलते हैं (यदि गैसीफाइंग एजेंट का विसरण धीमा हो तो टार और कालिख बन सकते हैं)।
- (e) चार गैसीकरण (Char Gasification): वाष्पशील पदार्थ निकलने के बाद बचा हुआ फिक्स्ड कार्बन और राख ‘चार’ (Char) बन जाते हैं। गैसीफाइंग एजेंट के साथ अभिक्रिया कर कार्बन और में बदलता है। जब भाप (Steam) की अधिकता हो और तापमान 750°C से ऊपर हो, तो वेट गैस अभिक्रिया (Wet gas reaction: ) होती है।
- (f) चार अवशेष (Char Residue): वेट गैस अभिक्रिया की दर धीमी होने से चार अवशेष, टार (Tar) और कालिख (Soot) बन सकते हैं जो दक्षता घटाते हैं।
4. गैसीफायर में गैसीकरण की अवधारणा एवं 4 अभिक्रिया क्षेत्र (Concept & 4 Reaction Zones in Gasifier)
गैसीफायर में सामान्यतः 2.5 से 5 cm आकार के लकड़ी के चिप्स (Wood chips) कच्चे माल के रूप में ऊपर के फीड पोर्ट से डाले जाते हैं। लगभग 1 किलोग्राम वायु-शुष्क बायोमास (Air-dried biomass) के गैसीकरण से 2.5 से 3.0 m³ प्रोड्यूसर गैस प्राप्त होती है। गैसीफायर के भीतर निम्नलिखित 4 क्षेत्र (Zones) बनते हैं:
- शुष्कन क्षेत्र (Drying Zone — < 120°C): बायोमास की नमी वाष्प बनकर निकलती है।
- पायरोलिसिस क्षेत्र (Pyrolysis Zone — 200°C से 500°C): ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में बायोमास टूटकर चारकोल (Char), टार और वाष्पशील गैसों में बदलता है।
- ऑक्सीकरण / दहन क्षेत्र (Oxidation / Combustion Zone — 900°C से 1200°C): ट्यूयर (Tuyeres/Air nozzles) से प्रवेश करने वाली वायु की ऑक्सीजन के साथ कार्बन और हाइड्रोजन जलकर , और अत्यधिक ऊष्मा (Exothermic heat) उत्पन्न करते हैं।
- अपचयन क्षेत्र (Reduction Zone — 600°C से 900°C): ऑक्सीकरण क्षेत्र से निकली और जलवाष्प () तप्त चारकोल (Red hot char) के बिस्तर से गुजरती हैं और ऊष्मा-शोषी अभिक्रियाओं (Boudouard & Water-gas reactions) द्वारा ज्वलनशील और (प्रोड्यूसर गैस) का निर्माण करती हैं। नीचे राख गड्ढा (Ash Pit) होता है।
5. विभिन्न प्रकार के गैसीफायरों से परिचय (Familiarization with Different Gasifiers)
1. अपड्राफ्ट गैसीफायर (Updraft / Counter-current Gasifier)
कार्यप्रणाली: इसमें बायोमास ईंधन ऊपर से नीचे की ओर आता है और गैसीफाइंग एजेंट (वायु) नीचे से ऊपर की ओर प्रवाहित होता है (प्रति-धारा प्रवाह / Counter-current)। जोन का क्रम (नीचे से ऊपर): ऑक्सीकरण ➔ अपचयन ➔ पायरोलिसिस ➔ शुष्कन। गर्म गैस ईंधन बेड को गर्म करते हुए ऊपर से कम तापमान पर निकलती है।
लाभ: उच्च तापीय दक्षता (Higher thermal efficiency); ईंधन के आकार और नमी के प्रति कम संवेदनशील।
हानि: कच्ची गैस में टार की अत्यधिक मात्रा (Excessive tar) होती है और लोडिंग क्षमता कम होती है। यह केवल कम टार वाले ईंधन (चारकोल, कोक) या सीधे भट्टी में जलाने (Thermal heating) के लिए उपयुक्त है, इंजन के लिए नहीं।
2. डाउनड्राफ्ट गैसीफायर (Downdraft / Co-current Gasifier)
कार्यप्रणाली: इसमें ईंधन और वायु/गैस दोनों ऊपर से नीचे एक ही दिशा में चलते हैं (सह-धारा प्रवाह / Co-current)। पायरोलिसिस क्षेत्र में बना टार नीचे के संकीर्ण उच्च-तापमान ऑक्सीकरण क्षेत्र (Throat / Hearth zone) से होकर गुजरता है, जिससे टार के भारी अणु टूट जाते हैं (Thermal cracking of tar)।
लाभ: इसमें अपेक्षाकृत बहुत स्वच्छ गैस (Low tar content) मिलती है, इसलिए यह अंतर्दहन इंजनों (IC Engine applications) और जनरेटर चलाने के लिए सर्वोत्तम एवं सर्वाधिक पसंदीदा है। यह उच्च वाष्पशील ईंधन (लकड़ी, कृषि बायोमास) को कम टार वाली गैस में बदल देता है।
हानि: ईंधन के एकसमान आकार और कम नमी (<20%) के प्रति अधिक संवेदनशील।
3. क्रॉसड्राफ्ट गैसीफायर (Crossdraft Gasifier)
कार्यप्रणाली: इसमें ईंधन ऊपर से नीचे आता है जबकि वायु ईंधन बेड के लंबवत (Perpendicular) एक तरफ से प्रवेश करती है और प्रोड्यूसर गैस ठीक सामने विपरीत दिशा से बाहर निकलती है।
विशेषता व सीमा: इसमें तापमान बहुत उच्च (1500°C तक) होता है जिससे शुष्क ईंधन (चारकोल) उपयोग करने पर गैस में उच्च कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और कम हाइड्रोजन व मीथेन मिलती है। यह डिजाइन केवल कम राख वाले ईंधनों जैसे लकड़ी, चारकोल और कोक (Low ash fuels) तक सीमित है।
4. फ्लूडाइज्ड बेड गैसीफायर (Fluidized Bed Gasifier)
कार्यप्रणाली: इसमें अक्रिय ठोस कणों (जैसे रेत/Silica sand) के बेड के नीचे से पर्याप्त वेग से हवा फूंकी जाती है ताकि कण निलंबन (State of suspension / fluid-like) की अवस्था में रहें। बेड को पहले बाहर से गर्म किया जाता है और उच्च तापमान पहुँचने पर रिएक्टर के निचले भाग में ईंधन कण डाले जाते हैं, जो तुरंत गर्म होकर बहुत तेजी से पायरोलाइज और गैसीकृत हो जाते हैं।
विशेषता: चार (Char) को बाहर उड़ने से रोकने के लिए इसमें आंतरिक साइक्लोन (Internal cyclone) लगा होता है।
समस्या (Agglomeration): बायोमास में मौजूद सोडियम (Sodium – Na) और पोटेशियम (Potassium – K) फ्लूडाइज्ड बेड में कणों के चिपकने या समूह बनने (Agglomeration) के मुख्य कारण हैं।
06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)
गैसीफायरों का वर्गीकरण (Classification of Gasifiers): ईंधन स्तंभ में वायु झोंके (Air blast) के प्रवेश और रिएक्टर में प्रोड्यूसर गैस की यात्रा की दिशा के आधार पर गैसीफायर को 6 श्रेणियों में बाँटा गया है:
- अपड्राफ्ट गैसीफायर (Updraft Gasifier)
- डाउनड्राफ्ट गैसीफायर (Downdraft Gasifier)
- ट्विन-फायर गैसीफायर (Twin-fire Gasifier)
- क्रॉसड्राफ्ट गैसीफायर (Crossdraft Gasifier)
- फ्लूडाइज्ड बेड गैसीफायर (Fluidized Bed Gasifier)
- अन्य गैसीफायर (Other – जैसे Entrained flow आदि)
07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)
- गैसीकरण बनाम पायरोलिसिस का सिद्धांत: गैसीकरण वास्तव में पायरोलिसिस का ही एक रूप है, जिसे गैस उत्पादन को अनुकूलित (Optimize) करने के लिए अधिक वायु (आंशिक ऑक्सीकरण, Stoichiometric air का 20-40%) और उच्च तापमान (700°C–1200°C) पर संपन्न किया जाता है।
- प्रमुख ताप-रासायनिक समीकरण:
- पूर्ण दहन (Oxidation):
- बौडौअर्ड अभिक्रिया (Boudouard Reaction – Reduction):
- जल-गैस अभिक्रिया (Wet Gas / Water-Gas Reaction at ):
08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)
व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक उदाहरण: इंजन संचालन बनाम तापीय भट्टी हेतु गैसीफायर चयन
- डीजल इंजन व सिंचाई पंप (Engine Application): यदि किसान को धान की भूसी या लकड़ी के टुकड़ों (2.5–5 cm) से 5 HP का डीजल पंपसेट या जनरेटर चलाना है, तो डाउनड्राफ्ट गैसीफायर (Downdraft Gasifier) का उपयोग किया जाता है क्योंकि इसमें टार (Tar) जलकर टूट जाता है और इंजन के वाल्व जाम नहीं होते।
- अनाज सुखाने या बॉयलर भट्टी (Direct Thermal Application): जहाँ गैस को सीधे बर्नर में जलाकर ऊष्मा प्राप्त करनी हो, वहाँ अपड्राफ्ट गैसीफायर (Updraft Gasifier) उपयुक्त रहता है क्योंकि इसकी तापीय दक्षता उच्च होती है और बर्नर में टार भी जलकर ऊष्मा दे देता है।
09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)
तुलनात्मक सारणी 5.1: अपड्राफ्ट (Updraft) बनाम डाउनड्राफ्ट (Downdraft) गैसीफायर (मूल पाठ्यक्रम तुलना)
| तुलना का बिंदु (Parameter) | अपड्राफ्ट गैसीफायर (Updraft Gasifier) | डाउनड्राफ्ट गैसीफायर (Downdraft Gasifier) |
|---|---|---|
| 1. ईंधन व गैस प्रवाह की दिशा | बायोमास नीचे आता है और वायु/गैस ऊपर जाती है (Counter-current प्रवाह)। | बायोमास और वायु/गैस दोनों नीचे की ओर चलते हैं (Co-current प्रवाह)। |
| 2. ईंधन आकार व नमी के प्रति संवेदनशीलता | ईंधन के आकार और नमी की मात्रा के प्रति कम संवेदनशील (Less sensitive)। | ईंधन के आकार और नमी के प्रति अधिक संवेदनशील। |
| 3. गैस में टार (Tar) एवं स्वच्छता | कच्ची गैस में अत्यधिक टार (Excessive tar) होता है। | अपेक्षाकृत बहुत स्वच्छ गैस (Low tar content) मिलती है; इंजन अनुप्रयोगों हेतु श्रेष्ठ। |
| 4. तापीय दक्षता (Thermal Efficiency) | अधिक होती है क्योंकि गर्म गैस ईंधन बेड से गुजरकर कम तापमान पर बाहर निकलती है। | अपड्राफ्ट की तुलना में थोड़ी कम (गैस उच्च तापमान पर निकलती है)। |
| 5. उपयुक्त ईंधन एवं अनुप्रयोग | कम टार वाले ईंधन (चारकोल, कोक) या प्रत्यक्ष तापीय तापन (Direct heat) हेतु उपयुक्त। | उच्च वाष्पशील ईंधन (लकड़ी, कृषि बायोमास) को कम टार वाली इंजन-ग्रेड गैस में बदलने हेतु विकसित। |
10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)
महत्वपूर्ण संख्यात्मक मान एवं रासायनिक सूत्र (Key Gasification Metrics)
- प्रोड्यूसर गैस का कैलोरी मान: (निम्न ऊष्मीय मान ईंधन)
- 1 kg वायु-शुष्क बायोमास से गैस उत्पादन: प्रोड्यूसर गैस
- प्रोड्यूसर गैस (Wood Gas) संघटन (भारानुसार): , , , (अज्वलनशील) +
- कोल्ड गैस दक्षता ():
- बायोमास हीटिंग वैल्यू (शुष्क भार आधार): शाकीय फसलें (गेहूँ भूसा, खोई) = | लकड़ी =
11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)
Lecture 05 Mind Map: बायोमास गैसीकरण, अभिक्रिया क्षेत्र एवं गैसीफायर के प्रकार
- बायोमास गैसीकरण (1 kg बायोमास ➔ 2.5–3.0 m³ प्रोड्यूसर गैस | CV: 1000–1200 kcal/m³)
- प्रोड्यूसर गैस संघटन (Producer Gas Composition)
- ज्वलनशील घटक: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO ~20%), हाइड्रोजन (H₂ ~20%), मीथेन (CH₄ अल्प)
- अज्वलनशील घटक: नाइट्रोजन (N₂ ~50–60%) एवं कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)
- 4 ताप-रासायनिक जोन व तापमान (4 Reaction Zones)
- 1. शुष्कन क्षेत्र (Drying Zone): 100–120°C (सतही व अंतर्निहित नमी का वाष्पीकरण)
- 2. पायरोलिसिस क्षेत्र (Pyrolysis Zone): 200–500°C (वाष्पशीलीकरण ➔ चार + टार + गैसें)
- 3. ऑक्सीकरण क्षेत्र (Oxidation Zone): 900–1200°C (दहन ➔ CO₂ + H₂O + ऊष्मा)
- 4. अपचयन क्षेत्र (Reduction Zone): >750°C (C + H₂O → CO + H₂ एवं C + CO₂ → 2CO)
- गैसीफायर के प्रकार (Types of Gasifiers)
- Updraft (Counter-current): उच्च तापीय दक्षता, नमी के प्रति कम संवेदनशील, परंतु अत्यधिक टार (Excessive tar)
- Downdraft (Co-current): न्यूनतम टार (Low tar), स्वच्छ गैस, IC इंजन चलाने हेतु सर्वोत्तम
- Crossdraft: लंबवत वायु प्रवाह, उच्च तापमान, उच्च CO व कम H₂/CH₄, चारकोल/कोक हेतु
- Fluidized Bed: निलंबित बेड, तीव्र पायरोलिसिस, साइक्लोन सेपरेटर, Na व K से एग्लोमरेशन समस्या
- प्रोड्यूसर गैस संघटन (Producer Gas Composition)
12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)
प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): गैसीफायर के अंदर ठोस बायोमास का प्रोड्यूसर गैस में रूपांतरण
(लकड़ी चिप्स / कृषि अवशेष) ➔ 1. शुष्कन क्षेत्र (100–120°C)
(नमी का वाष्पीकरण) ➔ 2. पायरोलिसिस (200–500°C)
(वाष्पशील गैसें + टार + चार) ➔ 3. ऑक्सीकरण क्षेत्र (+ Air)
(दहन से उच्च ताप व CO₂, H₂O) ➔ 4. अपचयन क्षेत्र (>750°C)
(C+H₂O → CO+H₂ व C+CO₂ → 2CO) ➔ प्रोड्यूसर गैस आउटपुट
(20% CO, 20% H₂, 50-60% N₂)
13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)
- परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न: ‘अंतर्दहन इंजन (IC Engine) चलाने के लिए कौन-सा गैसीफायर सबसे उपयुक्त है?’ उत्तर: ‘डाउनड्राफ्ट गैसीफायर’ (Downdraft Gasifier), क्योंकि इसमें टार (Tar) की मात्रा न्यूनतम होती है।
- प्रोड्यूसर गैस का कैलोरी मान 1000–1200 kcal/m³ होता है और 1 kg वायु-शुष्क बायोमास से 2.5 से 3.0 m³ प्रोड्यूसर गैस बनती है।
- फ्लूडाइज्ड बेड गैसीफायर में बेड के कणों के चिपकने (Agglomeration) के लिए बायोमास में मौजूद ‘सोडियम (Sodium) और पोटेशियम (Potassium)’ मुख्य रूप से जिम्मेदार होते हैं।
- अपड्राफ्ट गैसीफायर में प्रवाह ‘काउंटर-करंट’ (Counter-current) होता है जबकि डाउनड्राफ्ट में ‘को-करंट’ (Co-current) होता है।
- पशु गोबर उत्पादन आँकड़ा: गाय = 10 kg/दिन, भैंस = 15 kg/दिन, और ऊँट (Camel) = 6 kg/दिन।
14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)
- बायोमास 4F: Feed (आहार), Fiber (रेशा), Fertilizer (उर्वरक), Fuel (ईंधन)।
- प्रोड्यूसर गैस: | कैलोरी मान: ।
- गैसीफायर जोन: Drying (), Pyrolysis (), Oxidation (), Reduction ()।
- कोल्ड गैस दक्षता: कक्ष तापमान पर उत्पाद गैस की कैलोरी और बायोमास की कैलोरी का अनुपात।
15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
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16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)
(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर्स (5 Important Exam One-Liners)
- प्रोड्यूसर गैस का कैलोरी मान 1000–1200 kcal/m³ होता है और 1 kg बायोमास से 2.5–3.0 m³ गैस बनती है।
- प्रोड्यूसर गैस में लगभग 20% CO, 20% H₂, अल्प मात्रा में CH₄ (ज्वलनशील) तथा 50–60% N₂ (अज्वलनशील) होती है।
- इंजन चलाने के लिए डाउनड्राफ्ट गैसीफायर (Co-current) सर्वोत्तम है क्योंकि यह न्यूनतम टार (Low tar) वाली स्वच्छ गैस देता है।
- अपड्राफ्ट गैसीफायर (Counter-current) की तापीय दक्षता उच्च होती है किंतु इसकी कच्ची गैस में टार की मात्रा अत्यधिक होती है।
- फ्लूडाइज्ड बेड गैसीफायर में सोडियम और पोटेशियम के कारण एग्लोमरेशन (बेड कणों का चिपकना) होता है।
(B) 5 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions)
(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions)
(D) 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3 Long Answer Questions)
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGENGG 311 notes। पुराने उपकरणों के model-specific data को वर्तमान सार्वभौमिक specification न मानें।





