AGENGG 311 Lecture 02: बायोमास से परिचय: जैव-ईंधन उत्पादन हेतु उपयोग एवं उनके अनुप्रयोग | Hindi Notes
AGRO PATH FINDERAGENGG 311 · Renewable Energy in Agriculture
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02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)Lecture 02: बायोमास से परिचय: जैव-ईंधन उत्पादन हेतु उपयोग एवं उनके अनुप्रयोग
Familiarization with biomass: their utilization for biofuel production and their application
02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)
इस व्याख्यान (Lecture) के अध्ययन के पश्चात् विद्यार्थी निम्नलिखित में सक्षम होंगे:
- बायोमास (Biomass) एवं जैव-ईंधन (Biofuel) की वैज्ञानिक परिभाषा तथा बायोमास के रासायनिक संघटन (कार्बोहाइड्रेट व लिग्निन) को समझना।
- बायो-एथेनॉल (Bio-ethanol) के फीडस्टॉक, किण्वन (Fermentation) द्वारा उत्पादन प्रक्रिया तथा E10 और E85 ईंधन मिश्रणों (Blends) का अध्ययन करना।
- बायोडीजल (Biodiesel) के नवीकरणीय स्रोतों, ट्रांस-एस्टरीफिकेशन (Transesterification) अभिक्रिया तथा B20 और B100 मिश्रणों को समझना।
- जैव-ईंधन के 10 प्रमुख अभिलक्षणों—श्यानता (Kinematic Viscosity), घनत्व (Density), कैलोरी मान, पोर पॉइंट (Pour Point), क्लाउड पॉइंट (Cloud Point), फ्लैश पॉइंट (Flash Point), सीटेन संख्या (Cetane Number), कार्बन अवशेष, राख (Ash %) एवं सल्फर प्रतिशत (<15 ppm)—का डीजल के साथ तुलनात्मक विश्लेषण करना।
03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)
मूल सामग्री (Core Course Content): जैव-ईंधन (Biofuel) वह ईंधन है जो बायोमास (Biomass)—अर्थात् पादप सामग्री (Plant material), शैवाल (Algae material) या पशु अपशिष्ट (Animal waste)—से प्राप्त किया जाता है। चूँकि ऐसे फीडस्टॉक (कच्चे माल) को प्राकृतिक एवं कृषि प्रक्रियाओं द्वारा आसानी से पुनः प्राप्त (Replenish) किया जा सकता है, इसलिए जैव-ईंधन को नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का एक प्रमुख स्रोत माना जाता है।
वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले दो सबसे प्रमुख जैव-ईंधन एथेनॉल (Ethanol) और बायोडीजल (Biodiesel) हैं। कृषि क्षेत्र न केवल इन जैव-ईंधनों के लिए कच्चा माल (गन्ना, मक्का, ज्वार, अखाद्य तिलहन जैसे जेट्रोफा व करंज) प्रदान करता है, बल्कि कृषि ट्रैक्टरों और इंजनों में बायोडीजल (B20) के उपयोग से किसानों की जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता भी घटती है।
04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)
05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)
1. बायोमास का रासायनिक संघटन (Chemical Composition of Biomass)
विभिन्न पादप प्रजातियों में बायोमास का रासायनिक संघटन भिन्न होता है, परंतु सामान्यतः एक शुष्क पादप बायोमास में दो मुख्य भाग होते हैं:
- कार्बोहाइड्रेट या शर्करा भाग (Carbohydrates or Sugars — 75%): इसमें अनेक शर्करा अणु लंबी श्रृंखला वाले बहुलकों (Long-chain polymers) के रूप में जुड़े होते हैं। इसके दो सबसे महत्वपूर्ण घटक सेल्यूलोज (Cellulose) और हेमी-सेल्यूलोज (Hemi-cellulose) हैं।
- लिग्निन भाग (Lignin Fraction — 25%): इसमें गैर-शर्करा प्रकार के अणु (Non-sugar type molecules) होते हैं, जो पौधे की कोशिका भित्ति को यांत्रिक दृढ़ता प्रदान करते हैं और ब्रिकेटिंग में प्राकृतिक बाइंडर का कार्य करते हैं।
2. बायो-एथेनॉल: उत्पादन एवं अनुप्रयोग (Bio-Ethanol: Production & Applications)
- कच्चा माल (Feedstock): मक्का (Corn – वर्तमान में सर्वाधिक प्रयुक्त), ज्वार (Sorghum), गेहूँ (Wheat), जौ (Barley), आलू के छिलके, चावल, गन्ना (Sugarcane), चुकंदर (Sugar beets), मक्का के डंठल, धान की पुआल, गन्ने की खोई (Bagasse), पल्पवुड और स्विचग्रास।
- उत्पादन विधि (Fermentation): बायोमास को एथेनॉल में बदलने की सामान्य विधि किण्वन (Fermentation) है। इसमें सूक्ष्मजीव (जैसे—यीस्ट Saccharomyces cerevisiae और जीवाणु) पादप शर्करा का उपापचय (Metabolize) करके एथेनॉल () और बनाते हैं। गन्ने के रस या शीरे (Molasses) से सीधे किण्वन और आसवन (Distillation) द्वारा एथेनॉल बनाया जाता है, जबकि स्टार्च युक्त अनाजों को पहले एंजाइमों द्वारा शर्करा में बदला जाता है। ईंधन-ग्रेड एथेनॉल को मानव उपभोग के अयोग्य (Denatured) बनाने और गैसोलीन के साथ पृथक्करण रोकने हेतु उच्च शुद्धता (Anhydrous >99.5%) तक निर्जलीकृत किया जाता है।
- गैसोलीन के साथ ब्लेंडिंग (Blending with Gasoline): एथेनॉल का उपयोग अकेले वाहन ईंधन के रूप में न करके गैसोलीन (पेट्रोल) के साथ ब्लेंडिंग एजेंट के रूप में किया जाता है ताकि ऑक्टेन रेटिंग (Octane rating) बढ़ाई जा सके और कार्बन मोनोऑक्साइड () व स्मॉग पैदा करने वाले उत्सर्जन को घटाया जा सके:
- E10 ब्लेंड: 10% एथेनॉल + 90% गैसोलीन (सबसे सामान्य ब्लेंड)।
- E85 ब्लेंड: 85% एथेनॉल + 15% गैसोलीन (व्यावहारिक रूप से 51%–83% एथेनॉल; इसका उपयोग फ्लेक्सिबल फ्यूल वाहनों – Flexible Fuel Vehicles / FFVs में किया जाता है)।
3. बायोडीजल: उत्पादन एवं अनुप्रयोग (Biodiesel: Production & Applications)
- परिचय एवं स्रोत: बायोडीजल एक स्वच्छ-दहन करने वाला तरल ईंधन है जो नए या उपयोग किए गए वनस्पति तेलों (Vegetable oils – जैसे जेट्रोफा, करंज, सोयाबीन, रेपसीड, सूरजमुखी), पशु वसा (Animal fats) या रिसाइकल कुकिंग ग्रीस से बनाया जाता है।
- उत्पादन प्रक्रिया (Transesterification – मानक शैक्षणिक पूरक): वनस्पति तेल या वसा (ट्राइग्लिसराइड्स) की उत्प्रेरक (NaOH या KOH) की उपस्थिति में अल्कोहल (मेथेनॉल या एथेनॉल) के साथ रासायनिक अभिक्रिया कराई जाती है, जिससे फैटी एसिड मिथाइल एस्टर (FAME – बायोडीजल) और उप-उत्पाद के रूप में ग्लिसरॉल (Glycerol) प्राप्त होता है।
- इंजन अनुप्रयोग एवं ब्लेंडिंग: पेट्रोलियम डीजल की तरह ही बायोडीजल का उपयोग कंप्रेशन-इग्निशन (डीजल) इंजनों में किया जाता है। इसे डीजल के साथ किसी भी प्रतिशत में मिलाया जा सकता है:
- B20 ब्लेंड (सबसे सामान्य): 20% बायोडीजल + 80% पेट्रोलियम डीजल (बिना किसी इंजन परिवर्तन के ट्रैक्टरों में उपयुक्त)।
- B100: 100% शुद्ध बायोडीजल (Pure Biodiesel)।
4. जैव-ईंधन के 10 प्रमुख अभिलक्षण (10 Key Characteristics of Biofuels)
1. गतिक श्यानता (Kinematic Viscosity)
यह तरल के प्रवाह गुण (Flow characteristics) को दर्शाती है और ईंधन के कणीकरण (Atomization) को प्रभावित करती है। उच्च श्यानता वाले ईंधन इंजेक्शन के समय बड़ी बूँदें बनाते हैं, जिससे अपूर्ण दहन, अधिक धुआँ और उत्सर्जन होता है। ट्रांस-एस्टरीफिकेशन से वनस्पति तेल की उच्च श्यानता घटकर डीजल के समकक्ष आ जाती है।
2. घनत्व (Density)
इकाई आयतन का भार (Weight per unit volume)। अधिक घनत्व वाले तेलों में प्रति लीटर अधिक ऊर्जा होती है। पेट्रोलियम डीजल का घनत्व 835 kg/m³ होता है, जबकि बायोडीजल डीजल से अधिक सघन होता है और इसका घनत्व फीडस्टॉक के अनुसार 877 kg/m³ से 884 kg/m³ के बीच होता है।
3. कैलोरी मान (Calorific Value)
ईंधन के इकाई द्रव्यमान या आयतन के पूर्ण दहन से प्राप्त ऊष्मा। राख (Ash) की मात्रा बढ़ने पर हीटिंग वैल्यू घटती है।
4. मेल्ट या पोर पॉइंट (Melt or Pour Point)
जब परिवेश का तापमान मेल्ट/पोर पॉइंट से नीचे गिर जाता है, तो ईंधन जम जाता है और पूरे फ्यूल सिस्टम (फ्यूल लाइन और टैंक) को गर्म करने की आवश्यकता होती है।
5. क्लाउड पॉइंट (Cloud Point)
वह तापमान जिस पर तेल ठोस होना (मोम बनना / Waxing) शुरू करता है। क्लाउड पॉइंट से कम तापमान पर इंजन चलाने के लिए ईंधन में वैक्सिंग (Waxing) रोकने हेतु हीटिंग आवश्यक होती है।
6. फ्लैश पॉइंट (Flash Point)
वह न्यूनतम तापमान जिस पर प्रज्वलन स्रोत लाने पर ईंधन चमक (Flash) के साथ जल उठता है। यह ईंधन की वाष्पशीलता (Volatility) के व्युत्क्रमानुपाती होता है और सुरक्षित रखरखाव व भंडारण के लिए महत्वपूर्ण है। शुद्ध बायोडीजल (Neat Biodiesel) का फ्लैश पॉइंट 150°C होता है, जो पेट्रोलियम डीजल (±70°C) से बहुत अधिक है, अतः बायोडीजल परिवहन व भंडारण में अत्यंत सुरक्षित है।
7. सीटेन संख्या (Cetane Number)
कम सीटेन संख्या वाले ईंधन से इंजन स्टार्ट होने में कठिनाई, शोर (Knocking) और धुआँ होता है। सामान्यतः डीजल इंजन 50 से अधिक सीटेन संख्या पर सर्वोत्तम चलते हैं।
• वनस्पति तेल (Vegetable Oil): 35 से 45
• पेट्रोलियम डीजल (Diesel Fuel): 45 से 50
• बायोडीजल (Biodiesel): 50 से 60 (सर्वोत्तम प्रज्वलन गुणवत्ता)।
8. कार्बन अवशेष (Carbon Residue)
यह इंजन में कार्बन जमाव (Carbon deposits) बनाने की ईंधन की प्रवृत्ति को दर्शाता है। बायोडीजल में कार्बन अवशेष उसमें बचे ग्लिसराइड्स, मुक्त वसीय अम्ल (Free fatty acids), साबुन, पॉलिमर और शेष उत्प्रेरक की मात्रा का सूचक है।
9. राख प्रतिशत (Ash Percentage)
राख ईंधन में मौजूद धातुओं (Metals) की मात्रा का माप है। इसकी उच्च सांद्रता से इंजेक्टर टिप जाम होना (Plugging), दहन जमाव और इंजेक्शन सिस्टम में घिसाव होता है। राख बढ़ने से कैलोरी मान घटता है।
10. सल्फर प्रतिशत (Sulphur Percentage)
ईंधन में भार के अनुसार सल्फर का प्रतिशत। ताजे वनस्पति तेल और पशु वसा आधारित बायोडीजल में सल्फर की मात्रा 15 ppm से भी कम (< 15 ppm) होती है, जिससे अम्लीय वर्षा () का प्रदूषण नहीं होता।
06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)
जैव-ईंधन का वर्गीकरण (Classification of Biofuels):
- भौतिक अवस्था के आधार पर:
- ठोस जैव-ईंधन (Solid Biofuels): जलाऊ लकड़ी, चारकोल, बायोमास ब्रिकेट्स और पैलेट्स।
- तरल जैव-ईंधन (Liquid Biofuels): बायो-एथेनॉल, बायोडीजल, बायो-ऑयल (पायरोलिसिस ऑयल)।
- गैसीय जैव-ईंधन (Gaseous Biofuels): बायोगैस (मीथेन + कार्बन डाइऑक्साइड) एवं प्रोड्यूसर गैस (CO + H₂ + N₂)।
- पीढ़ियों के आधार पर (मानक शैक्षणिक ज्ञान):
- प्रथम पीढ़ी (1st Generation): खाद्य फसलों (गन्ना, मक्का, गेहूँ, खाद्य वनस्पति तेल) से निर्मित एथेनॉल व बायोडीजल।
- द्वितीय पीढ़ी (2nd Generation): अखाद्य लिग्नो-सेल्यूलोजिक कृषि अवशेषों (पुआल, खोई, भूसी) तथा अखाद्य तिलहनों (जेट्रोफा, करंज) से निर्मित जैव-ईंधन।
- तृतीय पीढ़ी (3rd Generation): सूक्ष्म शैवाल (Micro-algae) से निर्मित जैव-ईंधन।
07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)
- किण्वन का सिद्धांत (Principle of Fermentation): सूक्ष्मजीवों (यीस्ट Saccharomyces cerevisiae) द्वारा स्रावित इनवर्टेज (Invertase) और जाइमेज (Zymase) एंजाइमों की सहायता से अवायवीय परिस्थितियों में 6-कार्बन शर्करा (ग्लूकोज) का एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड में विखंडन होता है:
- ट्रांस-एस्टरीफिकेशन का सिद्धांत (Principle of Transesterification): कच्चे वनस्पति तेल की उच्च श्यानता (Viscosity) के कारण उसे सीधे डीजल इंजन में जलाने पर इंजेक्टर चोक हो जाते हैं। अतः 1 मोल ट्राइग्लिसराइड (तेल) की 3 मोल मेथेनॉल के साथ क्षारीय उत्प्रेरक (NaOH/KOH) की उपस्थिति में अभिक्रिया कराकर कम श्यानता वाले 3 मोल मिथाइल एस्टर (बायोडीजल) और 1 मोल ग्लिसरॉल में बदला जाता है।
08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)
व्यावहारिक उदाहरण: गन्ने से सीधे एथेनॉल उत्पादन एवं बायोडीजल की सुरक्षा
- गन्ने से एथेनॉल (Directly from Sugarcane): गन्ने की पेराई (Crushing) कर रस निकाला जाता है ➔ रस या शीरे (Molasses) का यीस्ट द्वारा किण्वन किया जाता है (जिसमें 8-12% अल्कोहल बनता है) ➔ प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation) द्वारा 95.5% रेक्टिफाइड स्पिरिट प्राप्त होती है ➔ मॉलिक्यूलर सीव डिहाइड्रेशन (Molecular Sieve Dehydration) द्वारा 99.8% शुद्ध ईंधन-ग्रेड एथेनॉल बनता है जिसे पेट्रोल में 10% (E10) या 20% (E20) मिलाया जाता है।
- फ्लैश पॉइंट का व्यावहारिक लाभ: खेत में ट्रैक्टर के लिए डीजल (Flash point ±70°C) की तुलना में बायोडीजल (Flash point 150°C) का भंडारण करने पर आग लगने का जोखिम नगण्य होता है।
09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)
तुलनात्मक सारणी 2.1: पेट्रोलियम डीजल, वनस्पति तेल एवं बायोडीजल के अभिलक्षणों की तुलना
| अभिलक्षण / गुण (Property) | पेट्रोलियम डीजल (Petroleum Diesel) | वनस्पति तेल (Vegetable Oil) | बायोडीजल (Biodiesel – B100) |
|---|---|---|---|
| घनत्व (Density at 15°C) | ~ 835 kg/m³ | 910 – 930 kg/m³ | 877 – 884 kg/m³ |
| सीटेन संख्या (Cetane Number) | 45 – 50 | 35 – 45 | 50 – 60 (उत्कृष्ट प्रज्वलन) |
| फ्लैश पॉइंट (Flash Point) | ± 70°C | > 220°C | 150°C (उच्च सुरक्षा) |
| सल्फर की मात्रा (Sulphur Content) | उच्च (High) | नगण्य | < 15 ppm (अत्यंत कम) |
| जैव-निम्नीकरणीयता (Biodegradability) | गैर-जैवनिम्नीकरणीय एवं विषैला | जैव-निम्नीकरणीय | गैर-विषैला एवं पूर्णतः जैव-निम्नीकरणीय |
10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)
महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र एवं मानक मान (Formulas & Standard Values)
- बायोमास का औसत संघटन:
- एथेनॉल का रासायनिक सूत्र: (या )
- ईंधन ब्लेंड सूत्र: |
- फ्लैश पॉइंट संबंध:
11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)
Lecture 02 Mind Map: बायोमास एवं जैव-ईंधन (Biofuel) उत्पादन व गुण
- बायोमास एवं जैव-ईंधन (Biomass: 75% कार्बोहाइड्रेट + 25% लिग्निन)
- बायो-एथेनॉल (Bio-Ethanol: CH₃CH₂OH)
- फीडस्टॉक: मक्का (प्रमुख), गन्ना, ज्वार, गेहूँ, चुकंदर, आलू छिलका, लिग्नो-सेल्यूलोजिक अवशेष
- प्रक्रिया: शर्करा/स्टार्च ➔ सूक्ष्मजैविक किण्वन (Yeast/Bacteria) ➔ आसवन एवं निर्जलीकरण
- ब्लेंड व लाभ: E10 (10%), E85 (51-83% Flex-Fuel वाहनों में) | लाभ: ऑक्टेन संख्या में वृद्धि व CO उत्सर्जन में कमी
- बायोडीजल (Biodiesel: FAME)
- फीडस्टॉक: वनस्पति तेल (जेट्रोफा, करंज), पशु वसा, रिसाइकल कुकिंग ग्रीस + अल्कोहल
- प्रक्रिया व ब्लेंड: ट्रांस-एस्टरीफिकेशन ➔ B20 (20% बायोडीजल + 80% डीजल), B100 (100% शुद्ध)
- जैव-ईंधन के 10 अभिलक्षण (10 Fuel Properties)
- प्रवाह व घनत्व: गतिक श्यानता (Atomization), घनत्व (877-884 kg/m³ vs डीजल 835 kg/m³), कैलोरी मान
- तापीय बिंदु: क्लाउड पॉइंट (मोम बनना शुरू), पोर/मेल्ट पॉइंट (जमना), फ्लैश पॉइंट (बायोडीजल 150°C vs डीजल ±70°C)
- दहन व शुद्धता: सीटेन संख्या (बायोडीजल 50-60, डीजल 45-50, तेल 35-45), कार्बन अवशेष, राख %, सल्फर (<15 ppm)
- बायो-एथेनॉल (Bio-Ethanol: CH₃CH₂OH)
12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)
प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): गन्ने एवं स्टार्च फसलों से बायो-एथेनॉल तथा तिलहन से बायोडीजल निर्माण
(शर्करा व स्टार्च फीडस्टॉक) ➔ पेराई एवं शर्करीकरण
(Milling & Saccharification) ➔ यीस्ट द्वारा किण्वन
(Fermentation) ➔ आसवन एवं निर्जलीकरण
(Distillation & Dehydration) ➔ एथेनॉल ब्लेंडिंग
(E10 / E85 Fuel)
(जेट्रोफा, करंज, कुकिंग ग्रीस) ➔ छानना एवं नमी हटाना
(Filtration & Pre-treatment) ➔ ट्रांस-एस्टरीफिकेशन
(+ मेथेनॉल + NaOH/KOH) ➔ ग्लिसरॉल पृथक्करण व धुलाई
(Washing & Drying) ➔ बायोडीजल ईंधन
(B20 / B100 CI Engine)
13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)
- सीटेन संख्या (Cetane Number) की तीनों रेंज कंठस्थ कर लें: वनस्पति तेल (35–45) < पेट्रोलियम डीजल (45–50) < बायोडीजल (50–60)। सामान्यतः डीजल इंजन 50 से अधिक सीटेन संख्या पर बेहतर चलते हैं।
- फ्लैश पॉइंट (Flash Point) ईंधन की वाष्पशीलता (Volatility) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। शुद्ध बायोडीजल का फ्लैश पॉइंट 150°C होता है जबकि डीजल का ±70°C।
- बायोडीजल का घनत्व (877 से 884 kg/m³) साधारण डीजल (835 kg/m³) से अधिक होता है।
- Cloud Point वह तापमान है जहाँ तेल जमना या मोम बनाना शुरू (Starts to solidify) करता है, जबकि Pour/Melt Point पर पूरा ईंधन तंत्र जम जाता है।
- प्रथम बार प्रयुक्त वनस्पति तेल या पशु वसा से बने बायोडीजल में सल्फर की मात्रा 15 ppm से कम (< 15 ppm) होती है।
14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)
- बायोमास संघटन: 75% कार्बोहाइड्रेट (सेल्यूलोज + हेमी-सेल्यूलोज) एवं 25% लिग्निन।
- एथेनॉल (): किण्वन द्वारा निर्मित; गैसोलीन में मिलाकर ऑक्टेन संख्या बढ़ाता है; ब्लेंड्स: E10 (10%) व E85 (51-83% Flex-fuel)।
- बायोडीजल: कंप्रेशन-इग्निशन (डीजल) इंजन का ईंधन; सबसे प्रचलित ब्लेंड B20 (20% बायोडीजल + 80% डीजल)।
- श्यानता का प्रभाव: अधिक श्यानता ➔ बड़ी ईंधन बूँदें ➔ खराब कणीकरण (Atomization) ➔ अपूर्ण दहन व अधिक धुआँ।
15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)
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16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)
(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर्स (5 Important Exam One-Liners)
- पादप बायोमास में औसतन 75% कार्बोहाइड्रेट (सेल्यूलोज व हेमी-सेल्यूलोज) तथा 25% लिग्निन पाया जाता है।
- बायोडीजल का घनत्व 877 से 884 kg/m³ होता है, जबकि पेट्रोलियम डीजल का घनत्व 835 kg/m³ होता है।
- शुद्ध बायोडीजल का फ्लैश पॉइंट 150°C होता है, जो पेट्रोलियम डीजल (±70°C) से दोगुने से भी अधिक सुरक्षित है।
- बायोडीजल की सीटेन संख्या 50 से 60 होती है, जबकि डीजल की 45-50 और कच्चे वनस्पति तेल की 35-45 होती है।
- ताजे वनस्पति तेल या पशु वसा से निर्मित बायोडीजल में सल्फर की मात्रा 15 ppm से कम होती है।
(B) 5 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions)
(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions)
(D) 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3 Long Answer Questions)
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGENGG 311 notes। पुराने उपकरणों के model-specific data को वर्तमान सार्वभौमिक specification न मानें।





