ENT 311 Lecture 26: मसाला फसलों (Spices and Condiments) के प्रमुख नाशीकीट: माहू (Aphids) एवं अन्य कीट

ENT 311 · Pest Management in Crops and Stored Grains — Final Notes
विषय सूची · Quick Navigation
02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)Lecture 26: मसाला फसलों (Spices and Condiments) के प्रमुख नाशीकीट: माहू (Aphids) एवं अन्य कीट
चित्रमय कीट पहचान एवं क्षति आरेख (Visual Identification — Lecture 26)
बीजीय मसालों (जीरा, धनिया, सौंफ) का माहू (Hyadaphis coriandri — छत्रक पर आक्रमण), काली मिर्च का पोलू भृंग एवं इलायची का थ्रिप्स
02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)
इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:
- भारत (विशेषकर राजस्थान व गुजरात — ICAR-NRCSS अजमेर) की प्रमुख बीजीय मसाला फसलों—धनिया (Coriander), जीरा (Cumin), सौंफ (Fennel), अजवायन व सोया (Ajwain & Dill) [कुल Apiaceae/Umbelliferae] तथा मेथी (Fenugreek)—के सबसे विनाशकारी नाशीकीट ‘माहू / चेपा’ (Coriander/Cumin Aphid — Hyadaphis coriandri एवं Myzus persicae व Aphis craccivora; कुल Aphididae, गण Hemiptera) की पहचान, जीवन चक्र और क्षति को समझना।
- माहू द्वारा मसाला फसलों के फूलों के छत्रक (Umbels) और विकासशील दानों से रस चूसने, मधुस्राव से दानों के काले व खुशबू-रहित होने और 40–60% उपज हानि का विश्लेषण करना।
- धनिया, सौंफ और जीरा में पर-परागण करने वाली मधुमक्खियों (Apis florea, A. mellifera) की रक्षा करते हुए माहू के समन्वित प्रबंधन (अगेती बुवाई, पीले चिपचिपे पाश, परभक्षी लेडीबर्ड भृंग, NSKE 5% व शाम 4 बजे बाद फ्लोनिकामिड/इमिडाक्लोप्रिड/थायोमेथोक्साम छिड़काव) का अध्ययन करना।
- प्रमुख रोपण व प्रकंद मसाला फसलों के विशिष्ट कीटों—काली मिर्च का पोलू भृंग (Longitarsus nigripennis), छोटी इलायची का थ्रिप्स (Sciothrips cardamomi) और हल्दी व अदरक का प्ररोह छेदक (Conogethes punctiferalis)—के परीक्षा तथ्यों को कंठस्थ करना।
03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)
मूल सामग्री (Core Course Content): भारत को ‘मसालों का घर’ (Land of Spices) कहा जाता है और राजस्थान व गुजरात देश के 80% से अधिक बीजीय मसालों (Seed Spices — जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी, अजवायन, ईसबगोल; राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र ICAR-NRCSS तबीजी, अजमेर में स्थित है) का उत्पादन करते हैं। इन सभी रबी बीजीय मसाला फसलों का सबसे बड़ा और सर्वप्रमुख शत्रु ‘माहू / चेपा / मोयला’ (Aphids — विशेषकर Hyadaphis coriandri और Myzus persicae) है।
जनवरी-फरवरी में जब जीरा, धनिया और सौंफ में छत्रक पुष्पक्रम (Umbel inflorescence) निकलता है, तब माहू की कॉलोनियाँ पूरे छत्रक को ढककर रस चूस लेती हैं। यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो 50% से अधिक उपज और दानों में मौजूद सुगंधित वाष्पशील तेल (Essential oil content) नष्ट हो जाता है।
04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)
05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)
1. बीजीय मसाला फसलों (जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी) का माहू / चेपा (Seed Spice Aphids — Hyadaphis coriandri & Myzus persicae)
- वैज्ञानिक नाम, कुल एवं गण:
- Hyadaphis coriandri (धनिया, सौंफ व जीरा का मुख्य माहू — स्लेटी-हरा रंग, छोटे कॉर्निकल्स),
- Myzus persicae (जीरा व धनिया का हरा माहू — पीला-हरा रंग), एवं
- Aphis craccivora एवं Acyrthosiphon pisum (मेथी / Fenugreek का काला व हरा माहू)।
- कुल: Aphididae | गण: Hemiptera।
- जीवविज्ञान एवं मौसमी अनुकूलता:
- दिसंबर के अंत से मार्च तक सक्रिय रहता है। मादाएं बिना निषेचन के (अनिषेकजनन / Parthenogenesis) सीधे जीवित शिशुओं (Viviparous nymphs) को जन्म देती हैं। एक मादा 40–60 शिशु पैदा करती है और 7–10 दिन में एक पीढ़ी पूरी हो जाती है।
- जब जनवरी-फरवरी में बादल छाए हों, पश्चिमी विक्षोभ से आर्द्रता हो और तापमान हो, तो चेपा जंगल की आग की तरह पूरे खेत में फैल जाता है।
- क्षति की प्रकृति (ETL: जीरा/धनिया में 10–15 माहू प्रति छत्रक/Umbel या 20% पौधे ग्रसित):
- शिशु और वयस्क दोनों कोमल तने, पत्तियों और विशेष रूप से फूलों के छत्रक (Umbels) तथा बनते हुए कोमल दानों (Cremocarps) पर हजारों की संख्या में चिपककर रस चूसते हैं।
- ग्रसित फूल सूखकर झड़ जाते हैं जिससे दाने नहीं बनते।
- अत्यधिक मधुस्राव (Honeydew) के कारण पूरा छत्रक चिपचिपा हो जाता है और उस पर काली फफूंद (Sooty mould) जमने से दाने काले, सिकुड़े हुए व कड़वे हो जाते हैं तथा उनमें वाष्पशील तेल (Essential oil %) और बाजार भाव 50% तक गिर जाता है।
- बीजीय मसालों में माहू का समन्वित प्रबंधन (IPM — ICAR-NRCSS अजमेर प्रोटोकॉल):
- सस्य उपाय: अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के प्रथम पखवाड़े तक समय पर बुवाई करना (देर से बोई गई फसल में चेपा अधिक लगता है); बुवाई से पूर्व इमिडाक्लोप्रिड 48% FS या थायोमेथोक्साम 30% FS (@ 3–4 g/kg बीज) से बीज उपचार; तथा नाइट्रोजन का संतुलित प्रयोग और शाम के समय अत्यधिक सिंचाई से बचना।
- यांत्रिक उपाय: दिसंबर के अंत से ही खेत में पीले चिपचिपे पाश (Yellow sticky traps @ 20–25 पाश/ha) लगाना।
- जैविक एवं वानस्पतिक नियंत्रण (मधुमक्खी सुरक्षा सहित!):
- धनिया और सौंफ के फूल बड़ी संख्या में परभक्षी मित्र कीटों—लेडीबर्ड भृंग (Coccinella septempunctata व Menochilus sexmaculatus), सिरफिड/हॉवर मक्खी (Episyrphus balteatus) और क्राइसोपर्ला—को आकर्षित करते हैं; इनका संरक्षण करें।
- प्रारंभिक प्रकोप पर 5% नीम निंबोली अर्क (NSKE 5%) या नीम तेल (Azadirachtin 1500 ppm @ 3 mL/L) या कवक Lecanicillium (Verticillium) lecanii (@ 5 g/L पानी) का छिड़काव।
- रासायनिक नियंत्रण (अनिवार्य नियम: धनिया, सौंफ और जीरा में मधुमक्खियों द्वारा परागण से 30% उपज बढ़ती है, इसलिए कीटनाशक हमेशा शाम 4 बजे के बाद ही छिड़कें!):
• फ्लोनिकामिड 50% WG (Flonicamid — ‘Ulala’ @ 150 g/ha या 0.3 g/L पानी — मधुमक्खियों के लिए सबसे सुरक्षित!) या
• इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL (@ 100–125 mL/ha या 0.3 mL/L पानी) या
• थायोमेथोक्साम 25% WG (@ 100 g/ha या 0.25 g/L पानी) या
• डाइमेथोएट 30% EC (@ 1.0 L/ha) या एसीटामिप्रिड 20% SP (@ 100 g/ha)।
2. अन्य प्रमुख मसाला फसलों के विशिष्ट नाशीकीट (Major Pests of Plantation & Rhizomatous Spices)
1. काली मिर्च का ‘पोलू’ भृंग (Black Pepper Pollu Beetle — Longitarsus nigripennis; Chrysomelidae, Coleoptera)
काली मिर्च का सबसे गंभीर नाशीकीट (30–40% हानि)। चमकीला पीला-भूरा पिसू भृंग (Flea beetle) जिसके पिछले पैर कूदने वाले होते हैं। मादा हरे दानों (Berries) में छेद कर अंडे देती है और ग्रब अंदर का बीज खाकर दानों को खोखला और काला (‘Pollu’ = Hollow berry) कर देता है। नियंत्रण: बाग में छाया का नियमन (Regulation of shade), नीम तेल व क्विनालफॉस 25% EC (2 mL/L) या क्लोरपायरीफॉस का जुलाई और सितंबर में स्प्रे।
2. छोटी इलायची का थ्रिप्स (Cardamom Thrips — Sciothrips cardamomi; Thripidae, Thysanoptera)
छोटी इलायची का नंबर-1 कीट (70% तक फलियों को दागदार करता है)। फूलों और कोमल फलियों को खुरचकर रस चूसता है जिससे हरी इलायची की फलियों पर भूरे खुरदरे पपड़ीदार निशान बन जाते हैं जिसे ‘इलायची खुजली’ (Cardamom itch) कहते हैं, फलियाँ छोटी रह जाती हैं और दानों की सुगंध घट जाती है। नियंत्रण: सूखे पत्ती आच्छद हटाना (Trashing), फिप्रोनिल 5% SC (1.5 mL/L) या स्पिनोसैड या क्विनालफॉस का स्प्रे।
3. हल्दी एवं अदरक का प्ररोह छेदक (Turmeric & Ginger Shoot Borer — Conogethes [Dichocrocis] punctiferalis; Crambidae, Lepidoptera)
हल्दी, अदरक, इलायची और अरंडी का प्रमुख कीट। नारंगी-पीले पंखों पर काले धब्बों वाला पतंगा; इल्ली आभासी तने (Pseudostem) में छेद कर गोभ खाती है जिससे ‘डेड हार्ट’ बनता है और पत्ती खुलने पर छेदों की कतार दिखती है। नियंत्रण: क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC (0.3 mL/L) या फ्लूबेंडियामाइड या मैलाथियान का स्प्रे।
4. हल्दी एवं अदरक की प्रकंद मक्खी (Rhizome Fly — Mimegralla coeruleifrons; Micropezidae, Diptera)
मैगट जमीन के अंदर अदरक और हल्दी के प्रकंद (Rhizome) में सुरंग बनाते हैं और Pythium कवक के साथ मिलकर प्रकंद सड़न (Rhizome rot) पैदा करते हैं। नियंत्रण: स्वस्थ प्रकंद का क्लोरपायरीफॉस + मैनकोजेब से बीज उपचार।
06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)
मसाला फसलों के नाशीकीटों का फसल-समूह के अनुसार वर्गीकरण:
- 1. बीजीय मसाले (जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी): माहू (Hyadaphis coriandri, Myzus persicae, Aphis craccivora — Aphididae), थ्रिप्स (Thrips tabaci), भंडारण में सिगरेट भृंग (Lasioderma serricorne — Anobiidae)।
- 2. वृक्ष एवं लता मसाले (काली मिर्च, इलायची): काली मिर्च का पोलू भृंग (Longitarsus nigripennis — Chrysomelidae), इलायची थ्रिप्स (Sciothrips cardamomi — Thripidae), इलायची माहू (Pentalonia nigronervosa f. caladii — ‘काट्टे / Katte’ मोजैक विषाणु का वाहक!)।
- 3. प्रकंद मसाले (हल्दी, अदरक): प्ररोह छेदक (Conogethes punctiferalis — Crambidae), प्रकंद मक्खी (Mimegralla coeruleifrons — Micropezidae), प्रकंद शल्क (Aspidiella hartii)।
07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)
- ‘मसाला छत्रक में मधुमक्खी-मित्र कीट सह-संरक्षण’ का सिद्धांत (Principle of Pollinator-Predator Co-Conservation in Umbelliferous Spices): धनिया और सौंफ के छत्रक फूल (Umbels) खुले मकरंद वाले होते हैं जिन पर एक साथ मधुमक्खियाँ (परागणकर्ता) और सिरफिड मक्खी व लेडीबर्ड भृंग (माहू भक्षी) आते हैं। दिन में जहरीला रसायन छिड़कने से दोनों मित्र कीट मर जाते हैं; अतः शाम 4 बजे बाद चयनात्मक फ्लोनिकामिड (Ulala) या नीम अर्क का छिड़काव ही वैज्ञानिक सिद्धांत है।
08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)
विशेष परीक्षा तथ्य: इलायची का ‘काट्टे रोग’ (Katte / Marble Mosaic Disease) कौन फैलाता है?
छोटी इलायची में फलियों को खुरचने वाला मुख्य कीट तो थ्रिप्स (Sciothrips cardamomi) है, किंतु इलायची के सबसे घातक विषाणु रोग ‘काट्टे या मार्बल मोजैक रोग’ (Katte Virus) का वाहक केले और इलायची का माहू (Pentalonia nigronervosa f. caladii) है!
09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)
तुलनात्मक सारणी 26.1: प्रमुख मसाला फसलों के नाशीकीटों, उनके वैज्ञानिक नाम, क्षति लक्षणों एवं प्रबंधन की मास्टर तालिका
| मसाला फसल एवं नाशीकीट | वैज्ञानिक नाम एवं कुल | विशिष्ट क्षति लक्षण | प्रमुख प्रबंधन उपाय |
|---|---|---|---|
| 1. धनिया, जीरा व सौंफ का माहू | Hyadaphis coriandri & Myzus persicae (Aphididae) | छत्रक (Umbel) से रस चूसना, मधुस्राव, काली फफूंद व सिकुड़े गोंदिया दाने | अक्टूबर-नवंबर बुवाई, पीला पाश, शाम को फ्लोनिकामिड (150 g/ha) या इमिडाक्लोप्रिड स्प्रे |
| 2. मेथी का काला माहू | Aphis craccivora (Aphididae) | कोमल कोपलों व पत्तियों का मुड़ना व सूखना | NSKE 5%, Lecanicillium lecanii, डाइमेथोएट |
| 3. काली मिर्च का ‘पोलू’ भृंग | Longitarsus nigripennis (Chrysomelidae) | ग्रब द्वारा काली मिर्च के दानों को अंदर से खाकर खोखला व काला (‘Pollu’) करना | छाया नियमन (Shade regulation), नीम तेल व क्विनालफॉस (2 mL/L) स्प्रे |
| 4. छोटी इलायची का थ्रिप्स | Sciothrips cardamomi (Thripidae) | फलियों पर भूरे खुरदरे पपड़ीदार निशान — ‘इलायची खुजली’ (Cardamom itch) | सूखे पत्ते हटाना (Trashing), फिप्रोनिल 5 SC (1.5 mL/L) या स्पिनोसैड |
| 5. हल्दी व अदरक का प्ररोह छेदक | Conogethes punctiferalis (Crambidae) | आभासी तने में सुरंग, ‘डेड हार्ट’ व पत्तियों पर छेदों की कतार | क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5 SC (0.3 mL/L) या फ्लूबेंडियामाइड |
10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)
बीजीय मसाला फसलों में माहू प्रबंधन मानक (ICAR-NRCSS Ajmer)
- 1. धनिया, जीरा व सौंफ में माहू का आर्थिक दहलीज स्तर (ETL):
- 2. मधुमक्खी-सुरक्षित सायंकालीन छिड़काव मानक (Evening Spray after 4:00 PM):
11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)
- धनिया, जीरा व सौंफ का मुख्य माहू: Hyadaphis coriandri (Aphididae)
- अन्य प्रजातियाँ: Myzus persicae (हरा माहू) व Aphis craccivora (मेथी)
- जनवरी-फरवरी में छत्रक (Umbel) से रस चूसना व मधुस्राव (‘गोंदिया’ रोग)
- दाने काले व सिकुड़े रह जाते हैं तथा वाष्पशील तेल 50% घट जाता है
- 1. नवंबर के प्रथम पखवाड़े तक समय पर बुवाई + थायोमेथोक्साम बीज उपचार
- 2. खेत में 20-25 पीले चिपचिपे पाश/ha लगाना
- 3. जैविक: लेडीबर्ड भृंग (Coccinella), सिरफिड मक्खी, NSKE 5%, Lecanicillium
- 4. शाम 4 बजे बाद स्प्रे: फ्लोनिकामिड (Ulala) या इमिडाक्लोप्रिड (मधुमक्खी रक्षा)
- काली मिर्च का पोलू भृंग: Longitarsus nigripennis (Chrysomelidae — खोखले दाने)
- छोटी इलायची का थ्रिप्स: Sciothrips cardamomi (‘Cardamom itch’)
- इलायची का माहू: Pentalonia nigronervosa (‘Katte’ मोजैक रोग वाहक)
- हल्दी व अदरक का प्ररोह छेदक: Conogethes punctiferalis (Crambidae)
- हल्दी व अदरक की प्रकंद मक्खी: Mimegralla coeruleifrons (Micropezidae)
- भंडारित मसालों का भृंग: सिगरेट भृंग (Lasioderma serricorne)
12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)
13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)
- धनिया, जीरा और सौंफ (बीजीय मसाला फसलों) पर आक्रमण करने वाला सबसे प्रमुख विशिष्ट माहू ‘Hyadaphis coriandri’ और ‘Myzus persicae’ (कुल Aphididae, गण Hemiptera) है।
- राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र (ICAR-NRCSS) ‘तबीजी, अजमेर (राजस्थान)’ में स्थित है, जबकि भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR) ‘कोझिकोड (कालीकट), केरल’ में स्थित है।
- काली मिर्च के दानों को अंदर से खाकर खोखला (‘Pollu’) करने वाला कीट ‘पोलू भृंग’ (Longitarsus nigripennis; कुल Chrysomelidae, गण Coleoptera) है।
- छोटी इलायची की फलियों पर पपड़ीदार दाग (‘Cardamom itch’) बनाने वाला मुख्य कीट ‘इलायची थ्रिप्स’ (Sciothrips cardamomi) है, जबकि इलायची के ‘काट्टे विषाणु रोग’ (Katte disease) का वाहक माहू ‘Pentalonia nigronervosa’ है।
- हल्दी और अदरक के प्ररोह छेदक का वैज्ञानिक नाम ‘Conogethes (Dichocrocis) punctiferalis’ (कुल Crambidae) है और प्रकंद मक्खी का नाम ‘Mimegralla coeruleifrons’ है।
14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)
त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):
- धनिया, जीरा व सौंफ का माहू: Hyadaphis coriandri एवं Myzus persicae (Aphididae); छत्रक से रस चूसना व मधुस्राव; ETL: 10–15 माहू/छत्रक; नियंत्रण: अगेती बुवाई, पीला पाश, शाम 4 बजे बाद फ्लोनिकामिड (150 g/ha) या इमिडाक्लोप्रिड स्प्रे।
- काली मिर्च का पोलू भृंग: Longitarsus nigripennis (Chrysomelidae — खोखले दाने)।
- इलायची का थ्रिप्स: Sciothrips cardamomi (Thripidae — इलायची खुजली)।
- हल्दी व अदरक: प्ररोह छेदक (Conogethes punctiferalis) एवं प्रकंद मक्खी (Mimegralla coeruleifrons)।
15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)
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16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)
- धनिया, जीरा और सौंफ का सबसे प्रमुख विशिष्ट माहू ‘Hyadaphis coriandri’ एवं ‘Myzus persicae’ (कुल Aphididae) है।
- काली मिर्च के दानों को अंदर से खोखला करने वाले ‘पोलू भृंग’ का वैज्ञानिक नाम ‘Longitarsus nigripennis’ (Chrysomelidae) है।
- छोटी इलायची की फलियों पर पपड़ीदार ‘इलायची खुजली’ (Cardamom itch) थ्रिप्स ‘Sciothrips cardamomi’ के कारण होती है।
- हल्दी और अदरक के प्ररोह छेदक का वैज्ञानिक नाम ‘Conogethes punctiferalis’ और प्रकंद मक्खी का ‘Mimegralla coeruleifrons’ है।
- राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र (ICAR-NRCSS) ‘तबीजी, अजमेर (राजस्थान)’ में स्थित है।





