ENT 311 Lecture 26: मसाला फसलों (Spices and Condiments) के प्रमुख नाशीकीट: माहू (Aphids) एवं अन्य कीट

Agro Path Finder official logo
AGRO PATH FINDER
ENT 311 · Pest Management in Crops and Stored Grains — Final Notes
विषय सूची · Quick Navigation02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
यह पाठ्यक्रम की अध्ययन सामग्री है। कीटनाशक, मात्रा और उपचार के उदाहरणों को वर्तमान खेत-स्तरीय सलाह न मानें; वास्तविक उपयोग में वर्तमान पंजीकृत label, फसल–कीट अनुमोदन तथा स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करें।
Lecture 26 Theory • Lecture 26 (ENT-311 / ENTO-311) 🖼️ सचित्र विजुअल आरेख सहित (With Visual Identification Diagrams)

Lecture 26: मसाला फसलों (Spices and Condiments) के प्रमुख नाशीकीट: माहू (Aphids) एवं अन्य कीट

Major Insect Pests of Spices and Condiments: Aphids

02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:

  • भारत (विशेषकर राजस्थान व गुजरात — ICAR-NRCSS अजमेर) की प्रमुख बीजीय मसाला फसलों—धनिया (Coriander), जीरा (Cumin), सौंफ (Fennel), अजवायन व सोया (Ajwain & Dill) [कुल Apiaceae/Umbelliferae] तथा मेथी (Fenugreek)—के सबसे विनाशकारी नाशीकीट ‘माहू / चेपा’ (Coriander/Cumin Aphid — Hyadaphis coriandri एवं Myzus persicae व Aphis craccivora; कुल Aphididae, गण Hemiptera) की पहचान, जीवन चक्र और क्षति को समझना।
  • माहू द्वारा मसाला फसलों के फूलों के छत्रक (Umbels) और विकासशील दानों से रस चूसने, मधुस्राव से दानों के काले व खुशबू-रहित होने और 40–60% उपज हानि का विश्लेषण करना।
  • धनिया, सौंफ और जीरा में पर-परागण करने वाली मधुमक्खियों (Apis florea, A. mellifera) की रक्षा करते हुए माहू के समन्वित प्रबंधन (अगेती बुवाई, पीले चिपचिपे पाश, परभक्षी लेडीबर्ड भृंग, NSKE 5% व शाम 4 बजे बाद फ्लोनिकामिड/इमिडाक्लोप्रिड/थायोमेथोक्साम छिड़काव) का अध्ययन करना।
  • प्रमुख रोपण व प्रकंद मसाला फसलों के विशिष्ट कीटों—काली मिर्च का पोलू भृंग (Longitarsus nigripennis), छोटी इलायची का थ्रिप्स (Sciothrips cardamomi) और हल्दी व अदरक का प्ररोह छेदक (Conogethes punctiferalis)—के परीक्षा तथ्यों को कंठस्थ करना।

03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): भारत को ‘मसालों का घर’ (Land of Spices) कहा जाता है और राजस्थान व गुजरात देश के 80% से अधिक बीजीय मसालों (Seed Spices — जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी, अजवायन, ईसबगोल; राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र ICAR-NRCSS तबीजी, अजमेर में स्थित है) का उत्पादन करते हैं। इन सभी रबी बीजीय मसाला फसलों का सबसे बड़ा और सर्वप्रमुख शत्रु ‘माहू / चेपा / मोयला’ (Aphids — विशेषकर Hyadaphis coriandri और Myzus persicae) है।

जनवरी-फरवरी में जब जीरा, धनिया और सौंफ में छत्रक पुष्पक्रम (Umbel inflorescence) निकलता है, तब माहू की कॉलोनियाँ पूरे छत्रक को ढककर रस चूस लेती हैं। यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो 50% से अधिक उपज और दानों में मौजूद सुगंधित वाष्पशील तेल (Essential oil content) नष्ट हो जाता है।

04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

धनिया एवं जीरा का विशिष्ट माहू (Coriander & Cumin Aphid — Hyadaphis coriandri)
एपिएसी (Apiaceae / Umbelliferae) कुल की बीजीय मसाला फसलों (धनिया, जीरा, सौंफ, सोया) पर आक्रमण करने वाला सबसे प्रमुख विशिष्ट माहू ‘Hyadaphis coriandri’ (कुल Aphididae, गण Hemiptera) है, जिसके साथ हरा आड़ू माहू ‘Myzus persicae’ और मेथी पर काला माहू ‘Aphis craccivora’ भी आक्रमण करता है।
छत्रक झुलसन एवं गोंदिया दाना (Umbel Blight & Sticky Shriveled Seeds)
जब माहू धनिया, जीरा या सौंफ के फूलों के छत्रक (Umbel) से रस चूसता है और चिपचिपा मधुस्राव (Honeydew) छोड़ता है, तो फूल व छोटे दाने आपस में चिपक जाते हैं, उन पर काली फफूंद उग आती है और दाने सिकुड़े, काले व बिना सुगंध के (‘गोंदिया दाने’) रह जाते हैं।
काली मिर्च का पोलू भृंग (Black Pepper ‘Pollu’ Beetle — Longitarsus nigripennis; Chrysomelidae)
मलयालम में ‘पोलू’ (Pollu) का अर्थ है ‘खोखला दाना’। काली मिर्च का यह पिसू भृंग (Flea beetle) व उसका ग्रब काली मिर्च के हरे दानों (Berries) के अंदर का बीज खाकर उन्हें खोखला और काला कर देता है।
इलायची खुजली / कार्डामम इच (Cardamom Itch by Sciothrips cardamomi)
छोटी इलायची का थ्रिप्स (Sciothrips cardamomi — Thripidae) इलायची की फलियों (Capsules) की बाहरी त्वचा को खुरचकर रस चूसता है जिससे हरी इलायची की फलियाँ भूरी, खुरदरी और पपड़ीदार हो जाती हैं—इस विशिष्ट लक्षण को ‘इलायची खुजली’ (Cardamom itch / scab) कहते हैं!

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. बीजीय मसाला फसलों (जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी) का माहू / चेपा (Seed Spice Aphids — Hyadaphis coriandri & Myzus persicae)

  • वैज्ञानिक नाम, कुल एवं गण:
    1. Hyadaphis coriandri (धनिया, सौंफ व जीरा का मुख्य माहू — स्लेटी-हरा रंग, छोटे कॉर्निकल्स),
    2. Myzus persicae (जीरा व धनिया का हरा माहू — पीला-हरा रंग), एवं
    3. Aphis craccivora एवं Acyrthosiphon pisum (मेथी / Fenugreek का काला व हरा माहू)।
    4. कुल: Aphididae | गण: Hemiptera।
  • जीवविज्ञान एवं मौसमी अनुकूलता:
    • दिसंबर के अंत से मार्च तक सक्रिय रहता है। मादाएं बिना निषेचन के (अनिषेकजनन / Parthenogenesis) सीधे जीवित शिशुओं (Viviparous nymphs) को जन्म देती हैं। एक मादा 40–60 शिशु पैदा करती है और 7–10 दिन में एक पीढ़ी पूरी हो जाती है।
    • जब जनवरी-फरवरी में बादल छाए हों, पश्चिमी विक्षोभ से आर्द्रता >70% हो और तापमान 15∘ext–22∘extC हो, तो चेपा जंगल की आग की तरह पूरे खेत में फैल जाता है।
  • क्षति की प्रकृति (ETL: जीरा/धनिया में 10–15 माहू प्रति छत्रक/Umbel या 20% पौधे ग्रसित):
    1. शिशु और वयस्क दोनों कोमल तने, पत्तियों और विशेष रूप से फूलों के छत्रक (Umbels) तथा बनते हुए कोमल दानों (Cremocarps) पर हजारों की संख्या में चिपककर रस चूसते हैं।
    2. ग्रसित फूल सूखकर झड़ जाते हैं जिससे दाने नहीं बनते।
    3. अत्यधिक मधुस्राव (Honeydew) के कारण पूरा छत्रक चिपचिपा हो जाता है और उस पर काली फफूंद (Sooty mould) जमने से दाने काले, सिकुड़े हुए व कड़वे हो जाते हैं तथा उनमें वाष्पशील तेल (Essential oil %) और बाजार भाव 50% तक गिर जाता है।
  • बीजीय मसालों में माहू का समन्वित प्रबंधन (IPM — ICAR-NRCSS अजमेर प्रोटोकॉल):
    1. सस्य उपाय: अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के प्रथम पखवाड़े तक समय पर बुवाई करना (देर से बोई गई फसल में चेपा अधिक लगता है); बुवाई से पूर्व इमिडाक्लोप्रिड 48% FS या थायोमेथोक्साम 30% FS (@ 3–4 g/kg बीज) से बीज उपचार; तथा नाइट्रोजन का संतुलित प्रयोग और शाम के समय अत्यधिक सिंचाई से बचना।
    2. यांत्रिक उपाय: दिसंबर के अंत से ही खेत में पीले चिपचिपे पाश (Yellow sticky traps @ 20–25 पाश/ha) लगाना।
    3. जैविक एवं वानस्पतिक नियंत्रण (मधुमक्खी सुरक्षा सहित!):
      • धनिया और सौंफ के फूल बड़ी संख्या में परभक्षी मित्र कीटों—लेडीबर्ड भृंग (Coccinella septempunctata व Menochilus sexmaculatus), सिरफिड/हॉवर मक्खी (Episyrphus balteatus) और क्राइसोपर्ला—को आकर्षित करते हैं; इनका संरक्षण करें।
      • प्रारंभिक प्रकोप पर 5% नीम निंबोली अर्क (NSKE 5%) या नीम तेल (Azadirachtin 1500 ppm @ 3 mL/L) या कवक Lecanicillium (Verticillium) lecanii (@ 5 g/L पानी) का छिड़काव।
    4. रासायनिक नियंत्रण (अनिवार्य नियम: धनिया, सौंफ और जीरा में मधुमक्खियों द्वारा परागण से 30% उपज बढ़ती है, इसलिए कीटनाशक हमेशा शाम 4 बजे के बाद ही छिड़कें!):
      • फ्लोनिकामिड 50% WG (Flonicamid — ‘Ulala’ @ 150 g/ha या 0.3 g/L पानी — मधुमक्खियों के लिए सबसे सुरक्षित!) या
      • इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL (@ 100–125 mL/ha या 0.3 mL/L पानी) या
      • थायोमेथोक्साम 25% WG (@ 100 g/ha या 0.25 g/L पानी) या
      • डाइमेथोएट 30% EC (@ 1.0 L/ha) या एसीटामिप्रिड 20% SP (@ 100 g/ha)।

2. अन्य प्रमुख मसाला फसलों के विशिष्ट नाशीकीट (Major Pests of Plantation & Rhizomatous Spices)

1. काली मिर्च का ‘पोलू’ भृंग (Black Pepper Pollu Beetle — Longitarsus nigripennis; Chrysomelidae, Coleoptera)

काली मिर्च का सबसे गंभीर नाशीकीट (30–40% हानि)। चमकीला पीला-भूरा पिसू भृंग (Flea beetle) जिसके पिछले पैर कूदने वाले होते हैं। मादा हरे दानों (Berries) में छेद कर अंडे देती है और ग्रब अंदर का बीज खाकर दानों को खोखला और काला (‘Pollu’ = Hollow berry) कर देता है। नियंत्रण: बाग में छाया का नियमन (Regulation of shade), नीम तेल व क्विनालफॉस 25% EC (2 mL/L) या क्लोरपायरीफॉस का जुलाई और सितंबर में स्प्रे।

2. छोटी इलायची का थ्रिप्स (Cardamom Thrips — Sciothrips cardamomi; Thripidae, Thysanoptera)

छोटी इलायची का नंबर-1 कीट (70% तक फलियों को दागदार करता है)। फूलों और कोमल फलियों को खुरचकर रस चूसता है जिससे हरी इलायची की फलियों पर भूरे खुरदरे पपड़ीदार निशान बन जाते हैं जिसे ‘इलायची खुजली’ (Cardamom itch) कहते हैं, फलियाँ छोटी रह जाती हैं और दानों की सुगंध घट जाती है। नियंत्रण: सूखे पत्ती आच्छद हटाना (Trashing), फिप्रोनिल 5% SC (1.5 mL/L) या स्पिनोसैड या क्विनालफॉस का स्प्रे।

3. हल्दी एवं अदरक का प्ररोह छेदक (Turmeric & Ginger Shoot Borer — Conogethes [Dichocrocis] punctiferalis; Crambidae, Lepidoptera)

हल्दी, अदरक, इलायची और अरंडी का प्रमुख कीट। नारंगी-पीले पंखों पर काले धब्बों वाला पतंगा; इल्ली आभासी तने (Pseudostem) में छेद कर गोभ खाती है जिससे ‘डेड हार्ट’ बनता है और पत्ती खुलने पर छेदों की कतार दिखती है। नियंत्रण: क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC (0.3 mL/L) या फ्लूबेंडियामाइड या मैलाथियान का स्प्रे।

4. हल्दी एवं अदरक की प्रकंद मक्खी (Rhizome Fly — Mimegralla coeruleifrons; Micropezidae, Diptera)

मैगट जमीन के अंदर अदरक और हल्दी के प्रकंद (Rhizome) में सुरंग बनाते हैं और Pythium कवक के साथ मिलकर प्रकंद सड़न (Rhizome rot) पैदा करते हैं। नियंत्रण: स्वस्थ प्रकंद का क्लोरपायरीफॉस + मैनकोजेब से बीज उपचार।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

मसाला फसलों के नाशीकीटों का फसल-समूह के अनुसार वर्गीकरण:

  • 1. बीजीय मसाले (जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी): माहू (Hyadaphis coriandri, Myzus persicae, Aphis craccivora — Aphididae), थ्रिप्स (Thrips tabaci), भंडारण में सिगरेट भृंग (Lasioderma serricorne — Anobiidae)।
  • 2. वृक्ष एवं लता मसाले (काली मिर्च, इलायची): काली मिर्च का पोलू भृंग (Longitarsus nigripennis — Chrysomelidae), इलायची थ्रिप्स (Sciothrips cardamomi — Thripidae), इलायची माहू (Pentalonia nigronervosa f. caladii — ‘काट्टे / Katte’ मोजैक विषाणु का वाहक!)।
  • 3. प्रकंद मसाले (हल्दी, अदरक): प्ररोह छेदक (Conogethes punctiferalis — Crambidae), प्रकंद मक्खी (Mimegralla coeruleifrons — Micropezidae), प्रकंद शल्क (Aspidiella hartii)।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)

  • ‘मसाला छत्रक में मधुमक्खी-मित्र कीट सह-संरक्षण’ का सिद्धांत (Principle of Pollinator-Predator Co-Conservation in Umbelliferous Spices): धनिया और सौंफ के छत्रक फूल (Umbels) खुले मकरंद वाले होते हैं जिन पर एक साथ मधुमक्खियाँ (परागणकर्ता) और सिरफिड मक्खी व लेडीबर्ड भृंग (माहू भक्षी) आते हैं। दिन में जहरीला रसायन छिड़कने से दोनों मित्र कीट मर जाते हैं; अतः शाम 4 बजे बाद चयनात्मक फ्लोनिकामिड (Ulala) या नीम अर्क का छिड़काव ही वैज्ञानिक सिद्धांत है।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)

विशेष परीक्षा तथ्य: इलायची का ‘काट्टे रोग’ (Katte / Marble Mosaic Disease) कौन फैलाता है?

छोटी इलायची में फलियों को खुरचने वाला मुख्य कीट तो थ्रिप्स (Sciothrips cardamomi) है, किंतु इलायची के सबसे घातक विषाणु रोग ‘काट्टे या मार्बल मोजैक रोग’ (Katte Virus) का वाहक केले और इलायची का माहू (Pentalonia nigronervosa f. caladii) है!

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 26.1: प्रमुख मसाला फसलों के नाशीकीटों, उनके वैज्ञानिक नाम, क्षति लक्षणों एवं प्रबंधन की मास्टर तालिका
मसाला फसल एवं नाशीकीट वैज्ञानिक नाम एवं कुल विशिष्ट क्षति लक्षण प्रमुख प्रबंधन उपाय
1. धनिया, जीरा व सौंफ का माहू Hyadaphis coriandri & Myzus persicae (Aphididae) छत्रक (Umbel) से रस चूसना, मधुस्राव, काली फफूंद व सिकुड़े गोंदिया दाने अक्टूबर-नवंबर बुवाई, पीला पाश, शाम को फ्लोनिकामिड (150 g/ha) या इमिडाक्लोप्रिड स्प्रे
2. मेथी का काला माहू Aphis craccivora (Aphididae) कोमल कोपलों व पत्तियों का मुड़ना व सूखना NSKE 5%, Lecanicillium lecanii, डाइमेथोएट
3. काली मिर्च का ‘पोलू’ भृंग Longitarsus nigripennis (Chrysomelidae) ग्रब द्वारा काली मिर्च के दानों को अंदर से खाकर खोखला व काला (‘Pollu’) करना छाया नियमन (Shade regulation), नीम तेल व क्विनालफॉस (2 mL/L) स्प्रे
4. छोटी इलायची का थ्रिप्स Sciothrips cardamomi (Thripidae) फलियों पर भूरे खुरदरे पपड़ीदार निशान — ‘इलायची खुजली’ (Cardamom itch) सूखे पत्ते हटाना (Trashing), फिप्रोनिल 5 SC (1.5 mL/L) या स्पिनोसैड
5. हल्दी व अदरक का प्ररोह छेदक Conogethes punctiferalis (Crambidae) आभासी तने में सुरंग, ‘डेड हार्ट’ व पत्तियों पर छेदों की कतार क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5 SC (0.3 mL/L) या फ्लूबेंडियामाइड

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)

बीजीय मसाला फसलों में माहू प्रबंधन मानक (ICAR-NRCSS Ajmer)
  • 1. धनिया, जीरा व सौंफ में माहू का आर्थिक दहलीज स्तर (ETL):
    ETL=10–15 aphids per umbel (छत्रक) OR 20% infested plants
  • 2. मधुमक्खी-सुरक्षित सायंकालीन छिड़काव मानक (Evening Spray after 4:00 PM):
    Flonicamid 50\% WG=150 g/ha|Imidacloprid 17.8\% SL=100–125 mL/ha

11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 26: मसाला फसलों के प्रमुख नाशीकीट (माहू एवं अन्य विशिष्ट कीट)
बीजीय मसालों का माहू (Seed Spice Aphids)
  • धनिया, जीरा व सौंफ का मुख्य माहू: Hyadaphis coriandri (Aphididae)
  • अन्य प्रजातियाँ: Myzus persicae (हरा माहू) व Aphis craccivora (मेथी)
  • जनवरी-फरवरी में छत्रक (Umbel) से रस चूसना व मधुस्राव (‘गोंदिया’ रोग)
  • दाने काले व सिकुड़े रह जाते हैं तथा वाष्पशील तेल 50% घट जाता है
बीजीय मसालों में माहू का IPM
  • 1. नवंबर के प्रथम पखवाड़े तक समय पर बुवाई + थायोमेथोक्साम बीज उपचार
  • 2. खेत में 20-25 पीले चिपचिपे पाश/ha लगाना
  • 3. जैविक: लेडीबर्ड भृंग (Coccinella), सिरफिड मक्खी, NSKE 5%, Lecanicillium
  • 4. शाम 4 बजे बाद स्प्रे: फ्लोनिकामिड (Ulala) या इमिडाक्लोप्रिड (मधुमक्खी रक्षा)
काली मिर्च एवं इलायची के कीट
  • काली मिर्च का पोलू भृंग: Longitarsus nigripennis (Chrysomelidae — खोखले दाने)
  • छोटी इलायची का थ्रिप्स: Sciothrips cardamomi (‘Cardamom itch’)
  • इलायची का माहू: Pentalonia nigronervosa (‘Katte’ मोजैक रोग वाहक)
हल्दी, अदरक एवं भंडारण मसाला कीट
  • हल्दी व अदरक का प्ररोह छेदक: Conogethes punctiferalis (Crambidae)
  • हल्दी व अदरक की प्रकंद मक्खी: Mimegralla coeruleifrons (Micropezidae)
  • भंडारित मसालों का भृंग: सिगरेट भृंग (Lasioderma serricorne)

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)

धनिया, जीरा एवं सौंफ में मधुमक्खी-सुरक्षित समन्वित माहू प्रबंधन (Pollinator-Safe Seed Spice Aphid IPM Flow)
Step 1
चरण 1 (बुवाई: अक्टूबर अंत – 15 नवंबर): थायोमेथोक्साम 30 FS (3–4 g/kg) से उपचारित बीज की समय पर बुवाई + संतुलित उर्वरक
⬇
Step 2
चरण 2 (वानस्पतिक अवस्था: दिसंबर): खेत में 20–25 पीले चिपचिपे पाश/ha लगाना + परभक्षी लेडीबर्ड भृंग व सिरफिड मक्खी की निगरानी
⬇
Step 3
चरण 3 (प्रारंभिक छत्रक व पुष्पन: जनवरी): शुरुआती माहू दिखने पर शाम को NSKE 5% या नीम तेल (1500 ppm @ 3 mL/L) या Lecanicillium lecanii (5 g/L) का स्प्रे
⬇
Step 4
चरण 4 (मुख्य पुष्पन व दाना भराव — ETL >10–15 माहू/छत्रक): परागण करने वाली मधुमक्खियों के छत्ते में लौटने के बाद शाम 4 बजे के पश्चात फ्लोनिकामिड 50 WG (150 g/ha) या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL (125 mL/ha) का छिड़काव

13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • धनिया, जीरा और सौंफ (बीजीय मसाला फसलों) पर आक्रमण करने वाला सबसे प्रमुख विशिष्ट माहू ‘Hyadaphis coriandri’ और ‘Myzus persicae’ (कुल Aphididae, गण Hemiptera) है।
  • राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र (ICAR-NRCSS) ‘तबीजी, अजमेर (राजस्थान)’ में स्थित है, जबकि भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR) ‘कोझिकोड (कालीकट), केरल’ में स्थित है।
  • काली मिर्च के दानों को अंदर से खाकर खोखला (‘Pollu’) करने वाला कीट ‘पोलू भृंग’ (Longitarsus nigripennis; कुल Chrysomelidae, गण Coleoptera) है।
  • छोटी इलायची की फलियों पर पपड़ीदार दाग (‘Cardamom itch’) बनाने वाला मुख्य कीट ‘इलायची थ्रिप्स’ (Sciothrips cardamomi) है, जबकि इलायची के ‘काट्टे विषाणु रोग’ (Katte disease) का वाहक माहू ‘Pentalonia nigronervosa’ है।
  • हल्दी और अदरक के प्ररोह छेदक का वैज्ञानिक नाम ‘Conogethes (Dichocrocis) punctiferalis’ (कुल Crambidae) है और प्रकंद मक्खी का नाम ‘Mimegralla coeruleifrons’ है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)

त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):

  • धनिया, जीरा व सौंफ का माहू: Hyadaphis coriandri एवं Myzus persicae (Aphididae); छत्रक से रस चूसना व मधुस्राव; ETL: 10–15 माहू/छत्रक; नियंत्रण: अगेती बुवाई, पीला पाश, शाम 4 बजे बाद फ्लोनिकामिड (150 g/ha) या इमिडाक्लोप्रिड स्प्रे।
  • काली मिर्च का पोलू भृंग: Longitarsus nigripennis (Chrysomelidae — खोखले दाने)।
  • इलायची का थ्रिप्स: Sciothrips cardamomi (Thripidae — इलायची खुजली)।
  • हल्दी व अदरक: प्ररोह छेदक (Conogethes punctiferalis) एवं प्रकंद मक्खी (Mimegralla coeruleifrons)।

15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)

1. धनिया, जीरा और सौंफ जैसी एपिएसी (Apiaceae / Umbelliferae) कुल की बीजीय मसाला फसलों के छत्रक (Umbels) से रस चूसकर उन्हें सुखाने वाला विशिष्ट माहू कौन-सा है?
(A) हायडाफिस कोरिआंड्री (Hyadaphis coriandri) एवं Myzus persicae
(B) इरियोसोमा लैनिजेरम
(C) पेंटालोनिया नाइग्रोनर्वोसा
(D) टोक्सोप्टेरा ऑरेंटी
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) हायडाफिस कोरिआंड्री (Hyadaphis coriandri) एवं Myzus persicae
व्याख्या: Hyadaphis coriandri धनिया, सौंफ और जीरा का सबसे मुख्य माहू (Coriander aphid) है।
2. काली मिर्च (Black pepper) के हरे दानों (Berries) में छेद करके उन्हें अंदर से खोखला और काला कर देने वाले ‘पोलू भृंग’ (Pollu Beetle) का वैज्ञानिक नाम और कुल क्या है?
(A) लोंगीटार्सस नाइग्रीपेनिस (Longitarsus nigripennis — कुल Chrysomelidae, गण Coleoptera)
(B) सायोथ्रिप्स कार्डामोमी
(C) कोनोगेथेस पंक्टिफेरालिस
(D) लासियोडर्मा सेरिकोर्ने
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) लोंगीटार्सस नाइग्रीपेनिस (Longitarsus nigripennis — कुल Chrysomelidae, गण Coleoptera)
व्याख्या: Longitarsus nigripennis काली मिर्च का सबसे विनाशकारी भृंग है जो ‘पोलू’ (खोखले दाने) पैदा करता है।
3. छोटी इलायची (Small cardamom) की फलियों को खुरचकर उन पर भूरे पपड़ीदार निशान — ‘इलायची खुजली’ (Cardamom Itch) — पैदा करने वाला मुख्य नाशीकीट कौन-सा है?
(A) इलायची का थ्रिप्स (Cardamom Thrips — Sciothrips cardamomi; कुल Thripidae)
(B) पोलू भृंग
(C) सरसों का माहू
(D) दीमक
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) इलायची का थ्रिप्स (Cardamom Thrips — Sciothrips cardamomi; कुल Thripidae)
व्याख्या: Sciothrips cardamomi इलायची की फलियों की त्वचा खुरचकर ‘Cardamom itch/scab’ पैदा करता है।
4. हल्दी और अदरक (Turmeric and Ginger) के आभासी तने में सुरंग बनाकर ‘डेड हार्ट’ पैदा करने वाले प्ररोह छेदक (Shoot Borer) का वैज्ञानिक नाम क्या है?
(A) कोनोगेथेस (डाइकोक्रोसिस) पंक्टिफेरालिस (Conogethes / Dichocrocis punctiferalis — कुल Crambidae)
(B) माइमेग्राला कोएरुलीफ्रोंस
(C) स्किर्पोफागा इंसर्टुलस
(D) ल्यूसिनोड्स ऑर्बोनालिस
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) कोनोगेथेस (डाइकोक्रोसिस) पंक्टिफेरालिस (Conogethes / Dichocrocis punctiferalis — कुल Crambidae)
व्याख्या: Conogethes punctiferalis हल्दी, अदरक, इलायची और अरंडी का प्रमुख छेदक कीट है।
5. छोटी इलायची के विनाशकारी विषाणु रोग ‘काट्टे या मार्बल मोजैक रोग’ (Katte / Marble Mosaic Virus) का प्रसार किस माहू द्वारा होता है?
(A) पेंटालोनिया नाइग्रोनर्वोसा (Pentalonia nigronervosa f. caladii)
(B) हायडाफिस कोरिआंड्री
(C) लिपाफिस एरिसिमी
(D) मैक्रोसिफम रोजी
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) पेंटालोनिया नाइग्रोनर्वोसा (Pentalonia nigronervosa f. caladii)
व्याख्या: Pentalonia nigronervosa केले में ‘बंची टॉप’ और इलायची में ‘काट्टे रोग’ फैलाता है।
6. राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र (ICAR-National Research Centre on Seed Spices — NRCSS) कहाँ स्थित है?
(A) तबीजी, अजमेर (राजस्थान)
(B) कोझिकोड (केरल)
(C) शिमला
(D) कटक
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) तबीजी, अजमेर (राजस्थान)
व्याख्या: ICAR-NRCSS तबीजी, अजमेर (राजस्थान) में और ICAR-IISR कोझिकोड (केरल) में स्थित है।
7. धनिया और सौंफ की खड़ी फसल में जब फूल खिले हों, तब माहू नियंत्रण के लिए कीटनाशक का छिड़काव हमेशा शाम 4 बजे के बाद ही क्यों किया जाता है?
(A) फूलों पर परागण करने वाली मधुमक्खियों (Honeybees) और मित्र कीटों को बचाने के लिए
(B) क्योंकि रात में पानी सस्ता होता है
(C) क्योंकि सुबह माहू उड़ जाते हैं
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) फूलों पर परागण करने वाली मधुमक्खियों (Honeybees) और मित्र कीटों को बचाने के लिए
व्याख्या: धनिया व सौंफ के छत्रक फूलों पर दिन भर मधुमक्खियाँ परागण करती हैं; शाम को वे छत्ते में लौट जाती हैं।
8. हल्दी और अदरक के भूमिगत प्रकंदों (Rhizomes) में सुरंग बनाकर प्रकंद सड़न पैदा करने वाली ‘प्रकंद मक्खी’ (Rhizome Fly) का वैज्ञानिक नाम क्या है?
(A) माइमेग्राला कोएरुलीफ्रोंस (Mimegralla coeruleifrons — कुल Micropezidae, गण Diptera)
(B) एथेरिगोना सोकाटा
(C) बैक्ट्रोसेरा डॉर्सालिस
(D) कार्पोमिया वेसुवियाना
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) माइमेग्राला कोएरुलीफ्रोंस (Mimegralla coeruleifrons — कुल Micropezidae, गण Diptera)
व्याख्या: Mimegralla coeruleifrons हल्दी और अदरक की प्रकंद मक्खी है।
9. गोदामों में भंडारित सूखे धनिया, जीरा, सौंफ, हल्दी और मिर्च पाउडर को छेदकर नष्ट करने वाला प्रमुख भंडारण भृंग कौन-सा है?
(A) सिगरेट भृंग / तंबाकू भृंग (Lasioderma serricorne) एवं ड्रग स्टोर भृंग (Stegobium paniceum)
(B) गैंडा भृंग
(C) लाल कद्दू भृंग
(D) हड्डा भृंग
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) सिगरेट भृंग / तंबाकू भृंग (Lasioderma serricorne) एवं ड्रग स्टोर भृंग (Stegobium paniceum)
व्याख्या: Lasioderma serricorne और Stegobium paniceum (कुल Anobiidae) भंडारित मसालों के सबसे प्रमुख भृंग हैं।
10. जीरा और धनिया में माहू के नियंत्रण के लिए मधुमक्खियों के प्रति सबसे सुरक्षित चयनात्मक कीटनाशक कौन-सा है?
(A) फ्लोनिकामिड 50% WG (Flonicamid — Ulala @ 150 g/ha) या नीम अर्क (NSKE 5%)
(B) मोनोक्रोटोफॉस
(C) मिथाइल पैराथियान
(D) फोरेट
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) फ्लोनिकामिड 50% WG (Flonicamid — Ulala @ 150 g/ha) या नीम अर्क (NSKE 5%)
व्याख्या: फ्लोनिकामिड केवल रसचूसक माहू की सुई को लॉक करता है और मधुमक्खियों व लेडीबर्ड भृंगों के लिए अत्यंत सुरक्षित है।

16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)

  1. धनिया, जीरा और सौंफ का सबसे प्रमुख विशिष्ट माहू ‘Hyadaphis coriandri’ एवं ‘Myzus persicae’ (कुल Aphididae) है।
  2. काली मिर्च के दानों को अंदर से खोखला करने वाले ‘पोलू भृंग’ का वैज्ञानिक नाम ‘Longitarsus nigripennis’ (Chrysomelidae) है।
  3. छोटी इलायची की फलियों पर पपड़ीदार ‘इलायची खुजली’ (Cardamom itch) थ्रिप्स ‘Sciothrips cardamomi’ के कारण होती है।
  4. हल्दी और अदरक के प्ररोह छेदक का वैज्ञानिक नाम ‘Conogethes punctiferalis’ और प्रकंद मक्खी का ‘Mimegralla coeruleifrons’ है।
  5. राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र (ICAR-NRCSS) ‘तबीजी, अजमेर (राजस्थान)’ में स्थित है।

(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)

1. धनिया, जीरा और सौंफ के दो प्रमुख माहू (Aphids) के वैज्ञानिक नाम लिखिए।
उत्तर: (1) Hyadaphis coriandri और (2) Myzus persicae (कुल: Aphididae, गण: Hemiptera)।
2. काली मिर्च के पोलू भृंग और छोटी इलायची के थ्रिप्स का वैज्ञानिक नाम लिखिए।
उत्तर: पोलू भृंग: Longitarsus nigripennis (Chrysomelidae, Coleoptera); इलायची थ्रिप्स: Sciothrips cardamomi (Thripidae, Thysanoptera)।
3. हल्दी और अदरक के प्ररोह छेदक और प्रकंद मक्खी का वैज्ञानिक नाम लिखिए।
उत्तर: प्ररोह छेदक: Conogethes (Dichocrocis) punctiferalis (Crambidae); प्रकंद मक्खी: Mimegralla coeruleifrons (Micropezidae)।
4. जीरा और धनिया में माहू का आर्थिक दहलीज स्तर (ETL) क्या है?
उत्तर: 10 से 15 माहू प्रति छत्रक (Umbel) या 20% ग्रसित पौधे।
5. छोटी इलायची में ‘काट्टे विषाणु रोग’ (Katte disease) किस कीट द्वारा फैलाया जाता है?
उत्तर: माहू ‘Pentalonia nigronervosa f. caladii’ द्वारा।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)

1. धनिया, जीरा और सौंफ जैसी बीजीय मसाला फसलों में माहू (Hyadaphis coriandri एवं Myzus persicae) की क्षति की प्रकृति और अनुकूल मौसम का वर्णन कीजिए।
उत्तर: जनवरी-फरवरी में जब बादल छाए हों, तापमान 15–22°C और आर्द्रता 70% से अधिक हो, तब अनिषेकजनन और जरायुजता के कारण माहू की आबादी विस्फोटक रूप से बढ़ती है। इसके शिशु और वयस्क कोमल प्ररोहों और फूलों के छत्रक (Umbels) तथा बनते हुए दानों पर सघन कॉलोनी बनाकर रस चूसते हैं। इससे फूल सूखकर झड़ जाते हैं। इनके द्वारा छोड़े गए चिपचिपे मधुस्राव (Honeydew) से छत्रक के दाने आपस में चिपक जाते हैं (‘गोंदिया’), उन पर काली फफूंद जम जाती है, दाने सिकुड़े व काले रह जाते हैं और वाष्पशील तेल 50% तक घट जाता है।
2. बीजीय मसाला फसलों (जीरा, धनिया, सौंफ) में परागणकर्ताओं की रक्षा करते हुए माहू का समन्वित प्रबंधन (IPM) कैसे किया जाता है?
उत्तर: (1) सस्य उपाय: नवंबर के प्रथम पखवाड़े तक समय पर बुवाई करना, थायोमेथोक्साम 30% FS (@ 3–4 g/kg) से बीज उपचार और संतुलित नाइट्रोजन देना। (2) यांत्रिक उपाय: खेत में 20–25 पीले चिपचिपे पाश/ha लगाना। (3) जैविक व वानस्पतिक उपाय: परभक्षी लेडीबर्ड भृंग (Coccinella) व सिरफिड मक्खी का संरक्षण तथा प्रारंभिक अवस्था में 5% NSKE या नीम तेल (3 mL/L) या Lecanicillium lecanii (5 g/L) का स्प्रे। (4) सायंकालीन रासायनिक उपाय: मधुमक्खियों की रक्षा हेतु हमेशा शाम 4 बजे के बाद ही फ्लोनिकामिड 50% WG (@ 150 g/ha) या इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL (@ 125 mL/ha) या थायोमेथोक्साम 25% WG (@ 100 g/ha) का स्प्रे करना।
3. काली मिर्च के ‘पोलू भृंग’ (Longitarsus nigripennis) की पहचान, क्षति के लक्षण और नियंत्रण के उपाय लिखिए।
उत्तर: पोलू भृंग (Longitarsus nigripennis — कुल Chrysomelidae) काली मिर्च का सबसे गंभीर नाशीकीट है। यह चमकीला पीला-भूरा छोटा कूदने वाला पिसू भृंग (Flea beetle) है। मादा भृंग काली मिर्च के विकासशील हरे दानों (Berries) में छोटा छेद कर अंडे देती है। अंडे से निकला पीला ग्रब दाने के अंदर का बीज खाकर उसे अंदर से पूरी तरह खोखला कर देता है। ऐसे ग्रसित दाने काले पड़कर सूख जाते हैं और दबाने पर पिचक जाते हैं, जिन्हें मलयालम में ‘पोलू’ (खोखला दाना) कहते हैं। नियंत्रण: सहारे के वृक्षों की छँटाई कर छाया कम करना, नीम तेल (5 mL/L) का स्प्रे तथा जुलाई व सितंबर में क्विनालफॉस 25% EC (2 mL/L) का छिड़काव।
4. छोटी इलायची के थ्रिप्स (Sciothrips cardamomi) की क्षति (‘इलायची खुजली’) और प्रबंधन का वर्णन कीजिए।
उत्तर: इलायची का थ्रिप्स (Sciothrips cardamomi — कुल Thripidae) पत्तियों के सूखे आच्छद और फूलों के गुच्छों में छिपकर रहता है। इसके शिशु और वयस्क अपने खुरचने वाले मुखांगों से फूलों, डंठलों और युवा हरी फलियों (Capsules) को खुरचकर रस चूसते हैं। इससे फूल झड़ जाते हैं और बची हुई फलियों की बाहरी त्वचा पर भूरे-धूसर रंग के खुरदरे पपड़ीदार दाग बन जाते हैं, जिसे ‘इलायची खुजली’ (Cardamom itch / scab) कहते हैं। ऐसी फलियाँ छोटी व बिना सुगंध की रह जाती हैं। नियंत्रण: फरवरी-मार्च में सूखे पत्ते व आच्छद हटाना (Trashing) तथा फिप्रोनिल 5% SC (1.5 mL/L) या स्पिनोसैड का स्प्रे।
5. हल्दी और अदरक के प्ररोह छेदक (Conogethes punctiferalis) और प्रकंद मक्खी (Mimegralla coeruleifrons) के लक्षण और नियंत्रण लिखिए।
उत्तर: (1) प्ररोह छेदक (Conogethes punctiferalis — कुल Crambidae): नारंगी-पीले पंखों पर काले बिंदुओं वाला पतंगा। इसकी गुलाबी-भूरी इल्ली हल्दी व अदरक के आभासी तने (Pseudostem) में छेद कर केंद्रीय गोभ को खा जाती है जिससे ‘डेड हार्ट’ बनता है; नियंत्रण हेतु क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC (0.3 mL/L) का स्प्रे करें। (2) प्रकंद मक्खी (Mimegralla coeruleifrons — कुल Micropezidae): इसके सफेद मैगट जमीन के अंदर प्रकंदों में सुरंग बनाकर उन्हें सड़ा देते हैं; नियंत्रण हेतु बुवाई पूर्व प्रकंदों को क्लोरपायरीफॉस (2 mL/L) + मैनकोजेब के घोल में उपचारित कर बोएँ।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)

1. भारत की प्रमुख बीजीय मसाला फसलों (धनिया, जीरा, सौंफ एवं मेथी) के सबसे विनाशकारी नाशीकीट ‘माहू / चेपा’ (Hyadaphis coriandri, Myzus persicae एवं Aphis craccivora) की पहचान, जीवन चक्र, क्षति की प्रकृति और मधुमक्खी-सुरक्षित समन्वित प्रबंधन (IPM) का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: प्रवाह चित्र सहित तीनों माहू प्रजातियों, अनिषेकजनन व जरायुजता, छत्रक झुलसन व गोंदिया दाने, ETL (10–15 माहू/छत्रक) और बुवाई से कटाई तक के ICAR-NRCSS अजमेर के IPM पैकेज का विस्तार से वर्णन करें।
2. प्रमुख मसाला फसलों के पाँच विशिष्ट नाशीकीटों—(i) धनिया/जीरा माहू, (ii) काली मिर्च का पोलू भृंग, (iii) छोटी इलायची का थ्रिप्स, (iv) हल्दी/अदरक का प्ररोह छेदक, और (v) हल्दी/अदरक की प्रकंद मक्खी—की तुलनात्मक सारणी बनाकर उनके वैज्ञानिक नाम, कुल, क्षति लक्षण और नियंत्रण का वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: तुलनात्मक सारणी 26.1 और पाँचों कीटों का पूर्ण विवरण प्रस्तुत करें।
3. बीजीय मसालों के निर्यात में ‘अधिकतम कीटनाशक अवशेष सीमा’ (MRL) और ‘अफलाटॉक्सिन / कालापन’ दो सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं; किसान जैव-सघन IPM (नीम, Lecanicillium, पीले पाश व सायंकालीन कम-PHI रसायन) अपनाकर कैसे निर्यात-योग्य जीरा और धनिया पैदा कर सकते हैं?
उत्तर रूपरेखा: मसाला बोर्ड (Spices Board) के निर्यात मानकों, पुष्पन अवस्था में घातक ऑर्गेनोफॉस्फेट से बचने और जैव-नियंत्रण व फ्लोनिकामिड आधारित सुरक्षित उत्पादन की विवेचना करें।

Similar Posts