ENT 311 Lecture 17: भिंडी के प्रमुख नाशीकीट एवं उनका प्रबंधन (Major Insect Pests of Okra and Their Management)

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ENT 311 · Pest Management in Crops and Stored Grains — Final Notes
विषय सूची · Quick Navigation02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
यह पाठ्यक्रम की अध्ययन सामग्री है। कीटनाशक, मात्रा और उपचार के उदाहरणों को वर्तमान खेत-स्तरीय सलाह न मानें; वास्तविक उपयोग में वर्तमान पंजीकृत label, फसल–कीट अनुमोदन तथा स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करें।
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Lecture 17: भिंडी के प्रमुख नाशीकीट एवं उनका प्रबंधन (Major Insect Pests of Okra and Their Management)

Major Insect Pests of Okra and Their Management

02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:

  • भिंडी (Okra / Bhindi — Abelmoschus esculentus; कुल Malvaceae) और कपास के एक ही वानस्पतिक कुल (Malvaceae) का होने के कारण दोनों के समान कीट परिसर (Shared pest complex) को समझना।
  • भिंडी के सबसे प्रमुख नाशीकीट ‘प्ररोह एवं फल छेदक’ (Okra Shoot and Fruit Borer — Earias vittella एवं E. insulana; कुल Nolidae) द्वारा वानस्पतिक अवस्था में शीर्ष प्ररोह सुखाने और फलन अवस्था में भिंडी के फलों को टेढ़ा-मेढ़ा, मुड़ा हुआ व विष्ठा से भरा बनाने की क्रियाविधि और प्रबंधन को जानना।
  • भिंडी के हरे तेले (Jassid — Amrasca biguttula biguttula) द्वारा पत्तियों में कपिंग व हॉपर बर्न और इसके प्रबंधन का अध्ययन करना।
  • भिंडी की सफेद मक्खी (Whitefly — Bemisia tabaci) द्वारा भिंडी के सबसे विनाशकारी विषाणु रोग ‘पीत शिरा मोजैक विषाणु’ (Yellow Vein Mosaic Virus — YVMV) एवं ‘एनेशन लीफ कर्ल विषाणु’ (ELCV) के संचरण तथा इसके समन्वित प्रबंधन में पारंगत होना।

03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): भिंडी (Abelmoschus esculentus) मालवेसी (Malvaceae — कपास और गुड़हल का कुल) कुल की प्रमुख ग्रीष्म एवं खरीफ सब्जी फसल है। एक ही कुल का होने के कारण कपास के लगभग सभी प्रमुख कीट भिंडी पर भी आक्रमण करते हैं (इसीलिए कपास के पास भिंडी को या तो ट्रैप फसल के रूप में बोया जाता है या सफेद मक्खी/बॉलवर्म के कैरी-ओवर से बचने के लिए वर्जित किया जाता है!)।

भिंडी के उत्पादन में दो सबसे बड़ी बाधाएँ हैं: पहली—’प्ररोह एवं फल छेदक’ (Earias vittella) जो 30–50% भिंडी के फलों में छेद कर उन्हें टेढ़ा-मेढ़ा और खाने के अयोग्य बना देता है; और दूसरी—’सफेद मक्खी’ (Bemisia tabaci) तथा ‘हरा तेला’ (Amrasca biguttula biguttula), जिनमें सफेद मक्खी प्रसिद्ध ‘पीत शिरा मोजैक रोग’ (Yellow Vein Mosaic Virus — YVMV) फैलाकर पूरी फसल को पीला कर देती है।

04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

टेढ़े-मेढ़े / विकृत भिंडी फल (Malformed / Curved Okra Fruits by Earias vittella)
जब भिंडी के प्ररोह एवं फल छेदक (Earias vittella) की इल्ली कोमल बढ़ती हुई भिंडी में छेद करके एक तरफ के ऊतक को खाती है, तो दूसरी तरफ की वृद्धि जारी रहने से भिंडी का फल सीधा न बढ़कर ‘दरांती की तरह टेढ़ा या मुड़ा हुआ (Sickle-shaped / Curved & distorted)’ हो जाता है और छेद पर विष्ठा चिपकी रहती है।
भिंडी का पीत शिरा मोजैक विषाणु (Okra Yellow Vein Mosaic Virus — YVMV; Begomovirus)
सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) द्वारा प्रसारित होने वाला भिंडी का सबसे भयानक विषाणु रोग, जिसमें पत्तियों की सभी बड़ी और छोटी शिराएँ चमकीले पीले रंग का जाल (Yellow network of veins) बना लेती हैं तथा फल भी पीले, छोटे व कड़े हो जाते हैं (80–90% उपज हानि)।
लाल मकड़ी का जाला (Webbing & Bronzing by Two-Spotted Red Spider Mite — Tetranychus urticae)
गर्मी की भिंडी (मार्च–जून) में और पायरेथ्रॉइड छिड़काव के बाद अष्टपाद लाल मकड़ी (Tetranychus urticae — Acarina) पत्तियों की निचली सतह पर बारीक रेशमी जाला बुनती है और रस चूसकर पत्तियों पर सफेद-पीले सूक्ष्म धब्बे (Stippling) व तांबे जैसा रंग (Bronzing) पैदा कर देती है।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. भिंडी का प्ररोह एवं फल छेदक (Okra Shoot and Fruit Borer — Earias vittella & E. insulana)

  • वैज्ञानिक नाम, कुल एवं गण: Earias vittella (प्रमुख) एवं Earias insulana | कुल: Nolidae (Noctuidae) | गण: Lepidoptera।
  • पहचान एवं जीवविज्ञान:
    • E. vittella के हल्के पीले अग्र-पंख के बीच में एक हरी पच्चर जैसी पट्टी होती है। मादा कोमल प्ररोह, फूल की कली या छोटे फलों पर नीले-हरे रंग के मुकुट जैसे नक्काशीदार अंडे देती है।
    • इल्ली (Caterpillar) भूरी-हरी व नारंगी धब्बों तथा छोटे मांसल काँटों वाली होती है। प्यूपा नाव के आकार के सख्त मटमैले कोकून में बनता है।
  • क्षति की प्रकृति (ETL: 5% मुरझाए प्ररोह या 5% क्षतिग्रस्त फल):
    1. वानस्पतिक अवस्था (बुवाई के 3–5 सप्ताह पर): इल्ली भिंडी के कोमल शीर्ष प्ररोह (Terminal shoot) में छेद करके नीचे की ओर सुरंग बनाती है जिससे ऊपरी कोपल मुरझाकर लटक जाती है और सूख जाती है तथा पौधे में पार्श्व शाखाएँ निकलती हैं।
    2. पुष्पन एवं फलन अवस्था: इल्ली फूल की कलियों, फूलों और कोमल भिंडी फलों में छेद करके अंदर के बीज व गूदा खाती है। ग्रसित भिंडी के फल मुड़कर टेढ़े-मेढ़े (Curved/Twisted) हो जाते हैं और प्रवेश छिद्र इल्ली की विष्ठा से बंद रहता है।
  • प्ररोह एवं फल छेदक का प्रबंधन:
    1. सस्य एवं यांत्रिक उपाय: भिंडी के बाद कपास या गुड़हल न लगाएँ; हर 3–4 दिन पर मुरझाए हुए प्ररोहों को काटकर और टेढ़े काने फलों को तोड़कर जमीन में दबा दें।
    2. फेरोमोन एवं जैविक उपाय: बुवाई के 25 दिन बाद से एरविटल्यूर (Ervitlure) फेरोमोन पाश (@ 12–20/ha) लगाना; अंड परजीवी Trichogramma chilonis (@ 50,000/ha) छोड़ना; तथा NSKE 5% या Bacillus thuringiensis (Bt @ 1.0 kg/ha) का छिड़काव।
    3. सुरक्षित रासायनिक छिड़काव (तुड़ाई के तुरंत बाद प्रयोग करें — कम PHI):
      • इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (@ 150–200 g/ha; PHI: 3–5 दिन) या
      • क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC (@ 125–150 mL/ha; PHI: 5 दिन) या
      • स्पाइनोसैड 45% SC (@ 150 mL/ha; PHI: 3 दिन) या
      • इंडोक्साकार्ब 14.5% SC (@ 400 mL/ha) या पाइरिप्रोक्सीफेन + फेनप्रोपैथ्रिन।

2. भिंडी का हरा तेला / जैसिड (Okra Jassid — Amrasca biguttula biguttula)

  • वैज्ञानिक नाम, कुल एवं गण: Amrasca biguttula biguttula | कुल: Cicadellidae | गण: Hemiptera।
  • क्षति के लक्षण (ETL: 2–3 शिशु प्रति पत्ती): हरे रंग के पच्चर जैसे शिशु और वयस्क (जो तिरछे चलते हैं) पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते हैं और विषाक्त लार छोड़ते हैं। इससे पत्तियों के किनारे पीले पड़कर ईंट जैसे लाल हो जाते हैं और पत्तियाँ नीचे की ओर प्याले की तरह मुड़ जाती हैं (‘Cupping & Hopper burn’) तथा पौधे बौने रह जाते हैं।
  • प्रबंधन: (1) बुवाई से पूर्व इमिडाक्लोप्रिड 48% FS या 70% WS (@ 5 g/kg बीज) से बीज उपचार (30 दिन सुरक्षा); (2) पीले चिपचिपे पाश (@ 15–20/ha); और (3) खड़ी फसल में फ्लोनिकामिड 50% WG (@ 150 g/ha) या इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL (@ 100 mL/ha) या थायोमेथोक्साम 25% WG (@ 100 g/ha) का स्प्रे।

3. भिंडी की सफेद मक्खी (Okra Whitefly — Bemisia tabaci) एवं लाल मकड़ी (Red Spider Mite)

  • 1. सफेद मक्खी (Bemisia tabaci; कुल Aleyrodidae, गण Hemiptera):
    • मुख्य क्षति: रस चूसने व मधुस्राव के अतिरिक्त यह भिंडी के सबसे भयानक ‘पीत शिरा मोजैक विषाणु’ (Yellow Vein Mosaic Virus — YVMV) और ‘भिंडी एनेशन लीफ कर्ल विषाणु’ (OELCV) की वाहक है।
    • प्रबंधन: (i) YVMV-प्रतिरोधी किस्में (जैसे पंजाब पद्मिनी, परभणी क्रांति, अर्का अनामिका, अर्का अभय, काशी प्रगति, पूसा A-4, हिसार उन्नत) उगाना; (ii) इमिडाक्लोप्रिड (@ 5 g/kg) बीज उपचार; (iii) पीले चिपचिपे पाश और रोगग्रस्त पौधों को दिखते ही उखाड़कर (Roguing) नष्ट करना; तथा (iv) स्पाइरोमेसिफेन 22.9% SC (@ 500 mL/ha) या डाइफेंथियूरॉन 50% WP (@ 600 g/ha) का स्प्रे।
  • 2. दो-धब्बेदार लाल मकड़ी (Two-Spotted Red Spider Mite — Tetranychus urticae / T. cinnabarinus; कुल Tetranychidae, गण Acarina):
    • अष्टपाद (8 पैरों वाला गैर-कीट); पत्तियों के नीचे जाला बनाकर रस चूसता है जिससे पत्तियाँ सफेद-तांबे जैसी होकर सूख जाती हैं। नियंत्रण: सल्फर 80% WP (@ 2.5 kg/ha) या विशिष्ट मकड़ीनाशी (Acaricides) — प्रोपार्गाइट 57% EC (Omite @ 1.0 L/ha) या फेनाजाक्विन 10% EC (Magister @ 1.0 L/ha) या स्पाइरोमेसिफेन 22.9% SC (@ 500 mL/ha) या हेक्सीथायाजॉक्स 5.45% EC (@ 500 mL/ha)।
  • 3. भिंडी के अन्य कीट: फल छेदक Helicoverpa armigera, पत्ती लपेटक (Sylepta derogata), फफोला भृंग (Blister beetle — Mylabris pustulata: फूलों को खाता है) एवं लाल कपास बग (Dysdercus koenigii)।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

भिंडी के नाशीकीटों का वर्गिकी एवं कार्यात्मक वर्गीकरण:

  • छेदक एवं पर्ण-भक्षी (Lepidoptera & Coleoptera): प्ररोह व फल छेदक (Earias vittella / E. insulana — Nolidae), फल छेदक (Helicoverpa armigera — Noctuidae), पत्ती लपेटक (Sylepta derogata — Crambidae), फफोला भृंग (Mylabris pustulata — Meloidae, Coleoptera)।
  • रसचूसक कीट एवं अष्टपाद (Hemiptera & Acarina): हरा तेला (Amrasca biguttula — Cicadellidae), सफेद मक्खी (Bemisia tabaci — Aleyrodidae; YVMV वाहक), माहू (Aphis gossypii), लाल मकड़ी (Tetranychus urticae — Tetranychidae, Acarina)।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)

  • ‘प्रतिरोधी किस्म + बीज उपचार’ से YVMV रोकथाम का सिद्धांत (Principle of HPR + Seed Treatment against Okra YVMV): एक बार पौधे में पीत शिरा मोजैक विषाणु (YVMV) प्रवेश कर जाने के बाद किसी भी रसायन से पौधा ठीक नहीं हो सकता; अतः YVMV-प्रतिरोधी किस्म (अर्का अनामिका/परभणी क्रांति) को इमिडाक्लोप्रिड (5 g/kg) से उपचारित करके बोना ही इसे रोकने का एकमात्र अचूक उपाय है।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)

क्षेत्रीय निदान उदाहरण: भिंडी के फल में ‘Earias vittella’ और ‘Helicoverpa armigera’ के छेद में अंतर

1. यदि भिंडी का फल दरांती जैसा मुड़कर टेढ़ा-मेढ़ा (Curved/Distorted) हो गया है और छेद का मुँह विष्ठा से भरा है तथा अंदर छोटी भूरी-हरी काँटेदार इल्ली है ⟹ यह भिंडी का प्ररोह व फल छेदक (Earias vittella) है।
2. यदि भिंडी का फल सीधा है, उस पर एकदम गोल साफ छेद है और बड़ी इल्ली अपना आधा शरीर अंदर व आधा बाहर रखे हुए है⟹ यह Helicoverpa armigera है।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 17.1: भिंडी के प्रमुख नाशीकीटों, उनके क्षति लक्षणों एवं प्रबंधन की मास्टर तालिका
नाशीकीट का नाम वैज्ञानिक नाम एवं कुल विशिष्ट क्षति लक्षण प्रमुख प्रबंधन / रसायन
1. प्ररोह एवं फल छेदक Earias vittella / E. insulana (Nolidae) वानस्पतिक अवस्था में प्ररोह मुरझाना + फलन में मुड़े हुए टेढ़े-मेढ़े काने फल Ervitlure ट्रैप, T. chilonis, इमामेक्टिन (200 g/ha), Coragen (150 mL/ha)
2. हरा तेला (Jassid) Amrasca biguttula biguttula (Cicadellidae) पत्तियों का किनारों से लाल होकर नीचे मुड़ना (Cupping & Hopper burn) इमिडाक्लोप्रिड (5 g/kg) बीज उपचार, फ्लोनिकामिड (150 g/ha)
3. सफेद मक्खी (Whitefly) Bemisia tabaci (Aleyrodidae) रस चूसना + पीत शिरा मोजैक विषाणु (YVMV — पीली शिराओं का जाल) वाहक अर्का अनामिका/परभणी क्रांति किस्म, पीला पाश, डाइफेंथियूरॉन/स्पाइरोमेसिफेन
4. लाल मकड़ी (Red Mite) Tetranychus urticae (Tetranychidae) पत्ती के नीचे जाला + ऊपरी सतह पर सफेद धब्बे व तांबे जैसा रंग प्रोपार्गाइट 57 EC (1 L/ha) या फेनाजाक्विन या स्पाइरोमेसिफेन
5. फफोला भृंग (Blister Beetle) Mylabris pustulata (Meloidae) लाल-काले पट्टों वाला भृंग जो पीले फूलों को खाकर फल बनने से रोकता है सुबह हाथ के जाल से पकड़कर नष्ट करना (शरीर से ‘कैंथारिडिन’ निकलता है)

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)

भिंडी में नाशीकीट प्रबंधन के मानक मापदंड
  • 1. रसचूसक कीटों व YVMV रोकथाम हेतु बीज उपचार:Imidacloprid 70\% WS or 48\% FS=5.0 g or mL/kg seed
  • 2. भिंडी प्ररोह एवं फल छेदक का आर्थिक दहलीज स्तर (ETL):ETL=5% wilted shoots OR 5% bored fruits
  • 3. भिंडी हरा तेला (Jassid) का ETL:ETL=2–3 nymphs per leaf

11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 17: भिंडी के प्रमुख नाशीकीट एवं उनका प्रबंधन
प्ररोह व फल छेदक (Earias vittella)
  • कुल: Nolidae, गण: Lepidoptera | भिंडी का मुख्य छेदक
  • अगेती अवस्था: शीर्ष प्ररोह मुरझाकर लटकना (Drooping shoot)
  • फलन अवस्था: फलों में विष्ठा से भरा छेद व फलों का टेढ़ा/मुड़ जाना
  • प्रबंधन: Ervitlure ट्रैप, T. chilonis, इमामेक्टिन, स्पाइनोसैड, Coragen
हरा तेला (Amrasca biguttula)
  • कुल: Cicadellidae, गण: Hemiptera | ETL: 2–3 शिशु/पत्ती
  • लक्षण: पत्ती किनारे से ईंट जैसी लाल होकर नीचे मुड़ना (Hopper burn)
  • प्रबंधन: इमिडाक्लोप्रिड (5 g/kg) बीज उपचार व फ्लोनिकामिड स्प्रे
सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) व YVMV
  • कुल: Aleyrodidae | पीत शिरा मोजैक विषाणु (YVMV) का वाहक
  • YVMV प्रतिरोधी किस्में: अर्का अनामिका, परभणी क्रांति, पंजाब पद्मिनी
  • प्रबंधन: पीले चिपचिपे पाश, रोगी पौधे उखाड़ना, डाइफेंथियूरॉन/स्पाइरोमेसिफेन
लाल मकड़ी एवं फफोला भृंग
  • लाल मकड़ी: Tetranychus urticae (Acarina — पत्ती के नीचे जाला)
  • मकड़ीनाशी: प्रोपार्गाइट (Omite), फेनाजाक्विन, स्पाइरोमेसिफेन
  • फफोला भृंग: Mylabris pustulata (Meloidae — फूलों को खाता है)

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)

भिंडी की फसल में बुवाई से अंतिम तुड़ाई तक समन्वित नाशीकीट प्रबंधन (Okra Crop-Stage IPM Flowchart)
Step 1
चरण 1 (बुवाई): YVMV-प्रतिरोधी किस्म (अर्का अनामिका / परभणी क्रांति) के बीज को इमिडाक्लोप्रिड 70 WS (@ 5 g/kg) से उपचारित कर बोना (पहले 30 दिन जैसिड व सफेद मक्खी से सुरक्षा)
⬇
Step 2
चरण 2 (20–35 DAS — वानस्पतिक अवस्था): 15 पीले चिपचिपे पाश/ha व 12 Ervitlure फेरोमोन पाश/ha लगाना + मुरझाए प्ररोहों व YVMV रोगी पौधों को उखाड़कर नष्ट करना
⬇
Step 3
चरण 3 (35–50 DAS — पुष्पन प्रारंभ): NSKE 5% का स्प्रे + Trichogramma chilonis (@ 50,000/ha) छोड़ना + यदि जैसिड/सफेद मक्खी ETL पार करें तो फ्लोनिकामिड या डाइफेंथियूरॉन स्प्रे
⬇
Step 4
चरण 4 (50+ DAS — फल तुड़ाई चरण): स्वस्थ फलों की तुड़ाई के तुरंत बाद काने फल नष्ट करना और कम PHI (3–5 दिन) वाले इमामेक्टिन बेंजोएट (200 g/ha) या स्पाइनोसैड (150 mL/ha) या Coragen (150 mL/ha) का स्प्रे

13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • भिंडी के फलों का छेद होने के बाद मुड़कर दरांती जैसा टेढ़ा-मेढ़ा (Curved/Distorted fruits) हो जाना ‘प्ररोह एवं फल छेदक’ (Earias vittella) का विशिष्ट लक्षण है।
  • भिंडी का सबसे विनाशकारी विषाणु रोग ‘पीत शिरा मोजैक’ (Yellow Vein Mosaic Virus — YVMV) सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) द्वारा फैलाया जाता है।
  • परभणी क्रांति, अर्का अनामिका, अर्का अभय, पंजाब पद्मिनी और पूसा A-4 भिंडी की प्रसिद्ध YVMV-प्रतिरोधी किस्में हैं।
  • भिंडी के पीले फूलों को खाकर नष्ट करने वाला लाल-काले पट्टों वाला भृंग ‘फफोला भृंग’ (Blister beetle — Mylabris pustulata; कुल Meloidae) है जिसके शरीर से ‘कैंथारिडिन’ (Cantharidin) नामक छाले पैदा करने वाला रसायन निकलता है।
  • गर्मी की भिंडी में पत्तियों के नीचे जाला बनाने वाली लाल मकड़ी (Tetranychus urticae) एक कीट न होकर ‘अष्टपाद’ (Arachnida : Acarina) है जिसके नियंत्रण हेतु प्रोपार्गाइट या स्पाइरोमेसिफेन प्रयुक्त होता है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)

त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):

  • प्ररोह एवं फल छेदक (Earias vittella / E. insulana): Nolidae; मुरझाता प्ररोह व टेढ़े-मेढ़े काने फल; Ervitlure; इमामेक्टिन बेंजोएट, क्लोरेंट्रानिलीप्रोल, स्पाइनोसैड।
  • हरा तेला (Amrasca biguttula): Cicadellidae; पत्तियों का नीचे मुड़ना व हॉपर बर्न; इमिडाक्लोप्रिड बीज उपचार, फ्लोनिकामिड।
  • सफेद मक्खी (Bemisia tabaci): Aleyrodidae; YVMV वाहक; अर्का अनामिका/परभणी क्रांति किस्म, डाइफेंथियूरॉन।
  • लाल मकड़ी (Tetranychus urticae): Tetranychidae (Acarina); प्रोपार्गाइट, फेनाजाक्विन, स्पाइरोमेसिफेन।

15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)

1. भिंडी की फसल में प्ररोह का मुरझाना और कोमल फलों में छेद होने के कारण फलों का दरांती जैसा मुड़कर टेढ़ा-मेढ़ा (Curved and distorted fruits) हो जाना किस मुख्य कीट का लक्षण है?
(A) भिंडी का प्ररोह एवं फल छेदक (Earias vittella एवं E. insulana)
(B) सफेद मक्खी (Bemisia tabaci)
(C) लाल मकड़ी (Tetranychus urticae)
(D) माहू (Aphis gossypii)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) भिंडी का प्ररोह एवं फल छेदक (Earias vittella एवं E. insulana)
व्याख्या: Earias vittella की इल्ली बढ़ती हुई भिंडी में एक तरफ छेद करती है जिससे फल मुड़कर टेढ़ा हो जाता है।
2. भिंडी के सबसे विनाशकारी विषाणु रोग ‘पीत शिरा मोजैक विषाणु’ (Yellow Vein Mosaic Virus — YVMV, जिसमें पत्तियों की नसें पीली पड़ जाती हैं) का वाहक कौन-सा कीट है?
(A) सफेद मक्खी (Whitefly — Bemisia tabaci)
(B) हरा तेला (Amrasca biguttula)
(C) फफोला भृंग (Mylabris pustulata)
(D) प्ररोह छेदक (Earias)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) सफेद मक्खी (Whitefly — Bemisia tabaci)
व्याख्या: सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) भिंडी में YVMV और ELCV दोनों विषाणु रोगों का प्रसार करती है।
3. निम्नलिखित में से कौन-सी भिंडी की प्रसिद्ध ‘पीत शिरा मोजैक विषाणु’ (YVMV) प्रतिरोधी किस्में हैं?
(A) परभणी क्रांति, अर्का अनामिका, पंजाब पद्मिनी एवं हिसार उन्नत
(B) पूसा सावनी (यह अत्यंत संवेदनशील है)
(C) कल्याण सोना
(D) पूसा बासमती
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) परभणी क्रांति, अर्का अनामिका, पंजाब पद्मिनी एवं हिसार उन्नत
व्याख्या: परभणी क्रांति, अर्का अनामिका, अर्का अभय और पंजाब पद्मिनी YVMV-प्रतिरोधी भिंडी किस्में हैं।
4. भिंडी और कपास दोनों पर समान नाशीकीट (जैसे Earias, Helicoverpa, Amrasca, Bemisia) आक्रमण क्यों करते हैं?
(A) क्योंकि भिंडी और कपास दोनों एक ही वानस्पतिक कुल ‘मालवेसी’ (Malvaceae) के सदस्य हैं
(B) क्योंकि दोनों जलीय पौधे हैं
(C) क्योंकि दोनों एकबीजपत्री घास हैं
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) क्योंकि भिंडी और कपास दोनों एक ही वानस्पतिक कुल ‘मालवेसी’ (Malvaceae) के सदस्य हैं
व्याख्या: समान कुल (Malvaceae) होने से दोनों में समान द्वितीयक पादप रसायन (जैसे गोसिपॉल/म्यूसिलेज) होते हैं जो समान कीटों को आकर्षित करते हैं।
5. भिंडी के पीले फूलों को खाकर फल बनने से रोकने वाला काले और लाल-नारंगी आड़ी पट्टियों वाला भृंग कौन-सा है जिसके छूने पर मानव त्वचा पर फफोले (Blisters) पड़ जाते हैं?
(A) फफोला भृंग / ब्लिस्टर बीटल (Mylabris pustulata — कुल Meloidae)
(B) हड्डा भृंग
(C) गैंडा भृंग
(D) खपड़ा भृंग
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) फफोला भृंग / ब्लिस्टर बीटल (Mylabris pustulata — कुल Meloidae)
व्याख्या: Mylabris pustulata (Meloidae) फूलों का भक्षण करता है और इसके रक्त से ‘कैंथारिडिन’ (Cantharidin) निकलता है।
6. गर्मी की भिंडी में पत्तियों की निचली सतह पर बारीक रेशमी जाला बुनकर रस चूसने वाली ‘दो-धब्बेदार लाल मकड़ी’ (Tetranychus urticae) के नियंत्रण के लिए कौन-सा विशिष्ट मकड़ीनाशी (Acaricide) प्रयुक्त होता है?
(A) प्रोपार्गाइट 57% EC (Omite @ 1.0 L/ha) या फेनाजाक्विन या स्पाइरोमेसिफेन
(B) केवल बैसिलस थुरिंजिएंसिस (Bt)
(C) केवल HaNPV
(D) 2,4-D
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) प्रोपार्गाइट 57% EC (Omite @ 1.0 L/ha) या फेनाजाक्विन या स्पाइरोमेसिफेन
व्याख्या: लाल मकड़ी (Acarina) के नियंत्रण हेतु विशिष्ट Acaricides जैसे प्रोपार्गाइट, फेनाजाक्विन, हेक्सीथायाजॉक्स या स्पाइरोमेसिफेन प्रयुक्त होते हैं।
7. भिंडी की फसल को बुवाई के बाद पहले 30–35 दिनों तक हरे तेले (Jassid) और सफेद मक्खी (YVMV वाहक) से बचाने का सबसे सस्ता और प्रभावी उपाय क्या है?
(A) बुवाई से पूर्व इमिडाक्लोप्रिड 48% FS या 70% WS (@ 5 g या mL/kg बीज) से बीज उपचार करना
(B) खड़ी फसल में 2,4-D छिड़कना
(C) खेत में पानी भर देना
(D) पत्तियाँ काट देना
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) बुवाई से पूर्व इमिडाक्लोप्रिड 48% FS या 70% WS (@ 5 g या mL/kg बीज) से बीज उपचार करना
व्याख्या: इमिडाक्लोप्रिड बीज उपचार से पौध के रस में सर्वांगी कीटनाशक आ जाता है और शुरुआती 30-35 दिन तेला व सफेद मक्खी नहीं लगते।
8. भिंडी की पत्तियों को मोड़कर चोंगे (Roll) जैसा बनाने वाली ‘पत्ती लपेटक इल्ली’ (Leaf roller) का वैज्ञानिक नाम क्या है?
(A) साइलेप्टा डेरोगेटा (Sylepta / Haritalodes derogata — कुल Crambidae)
(B) एग्रोटिस इप्सिलॉन
(C) पायरिला परपुसिला
(D) एथेरिगोना सोकाटा
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) साइलेप्टा डेरोगेटा (Sylepta / Haritalodes derogata — कुल Crambidae)
व्याख्या: Sylepta derogata भिंडी और कपास दोनों में पत्तियों को मोड़कर लपेटने वाली इल्ली है।
9. भिंडी में फल तुड़ाई की अवस्था में प्ररोह एवं फल छेदक (Earias vittella) के नियंत्रण के लिए कौन-सा कम प्रतीक्षा अवधि (3–5 दिन PHI) वाला सुरक्षित कीटनाशक छिड़कना चाहिए?
(A) इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (@ 150–200 g/ha) या स्पाइनोसैड 45% SC या क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC
(B) फोरेट 10G
(C) मोनोक्रोटोफॉस (सब्जियों में पूर्णतः प्रतिबंधित!)
(D) कार्बोफ्यूरान
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (@ 150–200 g/ha) या स्पाइनोसैड 45% SC या क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC
व्याख्या: सब्जियों में मोनोक्रोटोफॉस प्रतिबंधित है; कम PHI वाले इमामेक्टिन, स्पाइनोसैड या क्लोरेंट्रानिलीप्रोल ही सुरक्षित हैं।
10. भिंडी में प्ररोह एवं फल छेदक (Earias vittella) की निगरानी और मास-ट्रैपिंग के लिए कौन-सा फेरोमोन ल्यूर लगाया जाता है?
(A) एरविटल्यूर (Ervitlure)
(B) ल्यूसील्यूर (Lucilure)
(C) गोसिपल्यूर (Gossyplure)
(D) मिथाइल यूजेनॉल
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) एरविटल्यूर (Ervitlure)
व्याख्या: Earias vittella के सेक्स फेरोमोन ल्यूर का व्यापारिक नाम ‘Ervitlure’ है।

16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)

  1. भिंडी के फलों का मुड़कर टेढ़ा-मेढ़ा (Curved fruits) हो जाना ‘प्ररोह एवं फल छेदक’ (Earias vittella) का विशिष्ट लक्षण है।
  2. भिंडी में ‘पीत शिरा मोजैक विषाणु’ (YVMV) का प्रसार ‘सफेद मक्खी’ (Bemisia tabaci) द्वारा होता है।
  3. परभणी क्रांति, अर्का अनामिका और पंजाब पद्मिनी भिंडी की प्रसिद्ध YVMV-प्रतिरोधी किस्में हैं।
  4. भिंडी के फूलों को खाने वाला लाल-काले पट्टों वाला भृंग ‘फफोला भृंग’ (Mylabris pustulata; कुल Meloidae) है।
  5. भिंडी और कपास दोनों ‘मालवेसी’ (Malvaceae) कुल के होने के कारण समान नाशीकीटों से ग्रसित होते हैं।

(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)

1. भिंडी के तीन सबसे प्रमुख नाशीकीटों के वैज्ञानिक नाम लिखिए।
उत्तर: (1) प्ररोह एवं फल छेदक: Earias vittella, (2) हरा तेला: Amrasca biguttula biguttula, और (3) सफेद मक्खी: Bemisia tabaci।
2. भिंडी में पीत शिरा मोजैक रोग (YVMV) किसके द्वारा फैलता है? दो प्रतिरोधी किस्मों के नाम लिखिए।
उत्तर: सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) द्वारा; प्रतिरोधी किस्में: अर्का अनामिका और परभणी क्रांति (या पंजाब पद्मिनी)।
3. भिंडी के फूलों को खाने वाले फफोला भृंग (Blister beetle) का वैज्ञानिक नाम और कुल लिखिए।
उत्तर: Mylabris pustulata (कुल: Meloidae, गण: Coleoptera)।
4. भिंडी की लाल मकड़ी का वैज्ञानिक नाम और उसके नियंत्रण हेतु दो मकड़ीनाशियों के नाम लिखिए।
उत्तर: वैज्ञानिक नाम: Tetranychus urticae; मकड़ीनाशी: (1) प्रोपार्गाइट 57% EC और (2) स्पाइरोमेसिफेन 22.9% SC (या फेनाजाक्विन)।
5. सब्जियों (जैसे भिंडी व बैंगन) में किस ऑर्गेनोफॉस्फेट कीटनाशक का प्रयोग सरकार द्वारा सख्त रूप से प्रतिबंधित है?
उत्तर: मोनोक्रोटोफॉस (Monocrotophos) का प्रयोग सभी सब्जियों पर प्रतिबंधित है।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)

1. भिंडी के प्ररोह एवं फल छेदक (Earias vittella) की क्षति की प्रकृति और समन्वित प्रबंधन (IPM) लिखिए।
उत्तर: क्षति की प्रकृति: वानस्पतिक अवस्था में इल्ली कोमल शीर्ष प्ररोह में सुरंग बनाती है जिससे प्ररोह मुरझाकर झुक जाता है। फल बनने पर इल्ली फलों में छेद कर अंदर के बीज खाती है, जिससे भिंडी के फल मुड़कर दरांती जैसे टेढ़े-मेढ़े (Curved & distorted) हो जाते हैं और छेद विष्ठा से भरा रहता है। प्रबंधन: (1) मुरझाए प्ररोह व टेढ़े काने फल तोड़कर जमीन में दबाना; (2) खेत में 12–20 Ervitlure फेरोमोन पाश/ha लगाना; (3) Trichogramma chilonis (@ 50,000/ha) छोड़ना व NSKE 5% या Bt का स्प्रे करना; और (4) फल तुड़ाई के बाद इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (@ 200 g/ha) या क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC (@ 150 mL/ha) का स्प्रे करना।
2. भिंडी में हरे तेले (Jassid) और सफेद मक्खी (Whitefly) की क्षति के लक्षण और एकीकृत नियंत्रण लिखिए।
उत्तर: लक्षण: हरा तेला (Amrasca biguttula biguttula) पत्तियों के नीचे से रस चूसता है जिससे पत्तियों के किनारे पीले-लाल होकर नीचे की ओर प्याले जैसे मुड़ जाते हैं (‘हॉपर बर्न’)। सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) रस चूसने के साथ-साथ भिंडी का सबसे भयानक ‘पीत शिरा मोजैक विषाणु’ (YVMV — पीली नसों का जाल) फैलाती है। नियंत्रण: (1) अर्का अनामिका या परभणी क्रांति जैसी YVMV-प्रतिरोधी किस्म बोना; (2) इमिडाक्लोप्रिड 70% WS (@ 5 g/kg बीज) से बीज उपचार; (3) 15–20 पीले चिपचिपे पाश/ha लगाना और रोगी पौधे उखाड़ना; तथा (4) फ्लोनिकामिड 50% WG (@ 150 g/ha) या डाइफेंथियूरॉन 50% WP (@ 600 g/ha) का स्प्रे।
3. भिंडी में लाल मकड़ी (Red spider mite — Tetranychus urticae) का प्रकोप कब बढ़ता है और इसका नियंत्रण कैसे किया जाता है?
उत्तर: लाल मकड़ी (Tetranychus urticae) का प्रकोप मार्च से जून के गर्म और शुष्क मौसम में तथा किसान द्वारा फल छेदक के लिए सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड्स का अंधाधुंध छिड़काव करने पर (जिससे परभक्षी माइट्स मर जाती हैं) अत्यधिक बढ़ जाता है। यह पत्तियों के नीचे जाला बुनकर रस चूसती है जिससे पत्तियाँ तांबे जैसी होकर सूख जाती हैं। नियंत्रण: पायरेथ्रॉइड्स न छिड़कना, परभक्षी माइट (Amblyseius / Phytoseiulus) का संरक्षण और प्रोपार्गाइट 57% EC (@ 1.0 L/ha) या स्पाइरोमेसिफेन 22.9% SC (@ 500 mL/ha) या घुलनशील गंधक (Wettable sulphur @ 2.5 kg/ha) का छिड़काव।
4. भिंडी और कपास की फसल को एक-दूसरे के पास या एक के बाद एक उगाने के क्या कीट-वैज्ञानिक परिणाम होते हैं?
उत्तर: भिंडी और कपास दोनों मालवेसी (Malvaceae) कुल की फसलें हैं, इसलिए इनके सभी मुख्य कीट—धब्बेदार बॉलवर्म (Earias), अमेरिकी बॉलवर्म (Helicoverpa), हरा तेला (Amrasca), सफेद मक्खी (Bemisia), लाल कपास बग और लाल मकड़ी—दोनों फसलों पर समान रूप से पलते हैं। गर्मी की भिंडी पर पनपे ये कीट जून-जुलाई में पास में बोई गई कपास की फसल पर तुरंत स्थानांतरित (Carryover) हो जाते हैं। अतः कपास क्षेत्र में या तो भिंडी को कपास के चारों ओर नियंत्रित ‘ट्रैप फसल’ के रूप में लगाकर उस पर कीट नष्ट किए जाते हैं, या भिंडी-कपास फसल चक्र से बचा जाता है।
5. फफोला भृंग (Blister beetle — Mylabris pustulata) भिंडी को कैसे नुकसान पहुँचाता है और इसे कैसे नियंत्रित करें?
उत्तर: फफोला भृंग लगभग 2–2.5 cm लंबा भृंग होता है जिसके काले पंखों पर चमकीले लाल या नारंगी रंग के आड़े पट्टे होते हैं। इसके वयस्क भृंग झुंड में आकर भिंडी (तथा अरहर व मूंग) के पीले फूलों की पंखुड़ियों और पुंकेसरों को खा जाते हैं जिससे फल नहीं बन पाते। इसके शरीर को कुचलने पर ‘कैंथारिडिन’ रसायन निकलता है जो मानव त्वचा पर छाले डाल देता है। नियंत्रण: सुबह के समय जब भृंग सुस्त होते हैं, हाथ में दस्ताने पहनकर या कीट जाल से पकड़कर केरोसिन मिले पानी में डालकर नष्ट करना तथा साइपरमेथ्रिन या कार्बारिल का स्प्रे करना।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)

1. भिंडी के प्रमुख नाशीकीटों—प्ररोह एवं फल छेदक (Earias vittella), हरा तेला (Amrasca biguttula biguttula), सफेद मक्खी (Bemisia tabaci), लाल मकड़ी (Tetranychus urticae) और फफोला भृंग (Mylabris pustulata)—के वैज्ञानिक नाम, कुल, गण, क्षति के लक्षण और समन्वित प्रबंधन (IPM) का सारणीबद्ध वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: तुलनात्मक सारणी 17.1, प्रवाह चित्र और पाँचों कीटों के जीवन चक्र, क्षति लक्षणों (टेढ़े फल, हॉपर बर्न, YVMV, जाला व फूल भक्षण) तथा प्रबंधन उपायों का विस्तार से वर्णन करें।
2. भिंडी में ‘पीत शिरा मोजैक विषाणु’ (YVMV) और उसके वाहक ‘सफेद मक्खी’ (Bemisia tabaci) के संबंध को स्पष्ट करते हुए, रोग-मुक्त और कीटनाशक-अवशेष-मुक्त भिंडी उत्पादन के लिए बुवाई से तुड़ाई तक का संपूर्ण पैकेज लिखिए।
उत्तर रूपरेखा: YVMV के लक्षण, सफेद मक्खी द्वारा संचरण, प्रतिरोधी किस्मों (अर्का अनामिका, परभणी क्रांति), इमिडाक्लोप्रिड बीज उपचार, पीले पाश, रोगी पौधों की रोगिंग और कम PHI रसायनों की भूमिका की व्याख्या करें।
3. बैंगन के तना व फल छेदक (Leucinodes orbonalis) और भिंडी के प्ररोह व फल छेदक (Earias vittella) की वर्गिकी, परपोषी कुल, क्षति लक्षणों और फेरोमोन ल्यूर्स में समानताएँ और अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: दोनों में द्वि-प्रावस्था क्षति (प्ररोह मुरझाना → फल छेदन) की समानता तथा कुल (Crambidae बनाम Nolidae), परपोषी (Solanaceae बनाम Malvaceae), फल विकृति (काने गोल बैंगन बनाम मुड़ी हुई टेढ़ी भिंडी) और ल्यूर (Lucilure बनाम Ervitlure) के अंतर को स्पष्ट करें।

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