ENT 311 Lecture 11: दलहनी फसलों के प्रमुख नाशीकीट: चने की फली छेदक (Gram Pod Borer) एवं कटुआ इल्ली (Cutworm)

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ENT 311 · Pest Management in Crops and Stored Grains — Final Notes
विषय सूची · Quick Navigation02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
यह पाठ्यक्रम की अध्ययन सामग्री है। कीटनाशक, मात्रा और उपचार के उदाहरणों को वर्तमान खेत-स्तरीय सलाह न मानें; वास्तविक उपयोग में वर्तमान पंजीकृत label, फसल–कीट अनुमोदन तथा स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करें।
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Lecture 11: दलहनी फसलों के प्रमुख नाशीकीट: चने की फली छेदक (Gram Pod Borer) एवं कटुआ इल्ली (Cutworm)

Major Insect Pests of Pulses: Gram Pod Borer and Cutworm

02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:

  • चने और अरहर की फली छेदक इल्ली (Gram Pod Borer — Helicoverpa [Heliothis] armigera; कुल Noctuidae, गण Lepidoptera) की बहुरंगी पहचान, जीवन चक्र, स्व-भक्षण (Cannibalism) और विशिष्ट भक्षण मुद्रा (आधा शरीर फली के अंदर और आधा बाहर रखकर गोल छेद बनाना) को समझना।
  • चने की फली छेदक के आदर्श जैव-सघन IPM पैकेज (गहरी जुताई, चना+धनिया/सरसों अंतःफसल, फेरोमोन ट्रैप Helilure @ 5/ha, 20–25 T-खूँटियाँ/ha, HaNPV @ 250 LE/ha + नील/गुड़ एवं इमामेक्टिन बेंजोएट/क्लोरेंट्रानिलीप्रोल) का अध्ययन करना।
  • चने की कटुआ इल्ली (Gram Cutworm — Agrotis ipsilon; कुल Noctuidae, गण Lepidoptera) के रात्रिचर (Nocturnal) व्यवहार, पौधों को जमीन की सतह से काटने, दिन में मिट्टी की दरारों में छुपने (छूने पर ‘C’ जैसा कुंडलित होने) और बाढ़/दियारा भूमि में इसके प्रकोप को समझना।
  • अरहर की प्लूम मॉथ (Exelastis atomosa), पॉड फ्लाई (Melanagromyza obtusa) और चित्तीदार फली छेदक (Maruca vitrata) से तुलनात्मक पहचान करना।

03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): भारत विश्व का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक और उपभोक्ता देश है, किंतु चना (Chickpea — Cicer arietinum) और अरहर (Pigeonpea — Cajanus cajan) में केवल नाशीकीटों के कारण प्रतिवर्ष 30% से 50% तक उपज नष्ट हो जाती है। दलहनी फसलों का सबसे बड़ा राष्ट्रीय शत्रु ‘चने की फली छेदक इल्ली’ (Gram Pod Borer — Helicoverpa armigera) है। इसकी एक अकेली इल्ली अपने जीवनकाल में नष्ट होने से पहले 30 से 40 चने की फलियों (Pods) को छेदकर उनके दाने खा जाती है!

दूसरी ओर, अंकुरण और वानस्पतिक अवस्था (विशेषकर निचली नमी वाली व बाढ़ के पानी के उतरने के बाद बोई जाने वाली ताल/दियारा भूमि) में ‘कटुआ इल्ली’ (Cutworm — Agrotis ipsilon) रात के अंधेरे में निकलकर कोमल पौधों के तनों को जमीन की सतह से आरी की तरह काटकर गिरा देती है।

04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

अर्ध-शरीर भक्षण मुद्रा एवं स्व-भक्षण (Half-Body Feeding Posture & Cannibalism in Helicoverpa)
चने की फली छेदक इल्ली (Helicoverpa armigera) में अपने ही साथियों को खा जाने की तीव्र प्रवृत्ति (‘स्व-भक्षण / Cannibalism’) होती है; इसलिए एक फली पर एक ही इल्ली रहती है और वह अपना ‘केवल अगला आधा शरीर (सिर व वक्ष) फली में गोल छेद करके अंदर घुसाती है जबकि पिछला आधा शरीर फली के बाहर’ रखती है!
HaNPV एवं यूवी प्रोटेक्टेंट (HaNPV with UV Protectant & Phagostimulant)
Helicoverpa armigera Nuclear Polyhedrosis Virus (HaNPV @ 250 LE/ha = 1.5 × 10¹² PIBs/ha) फली छेदक का अत्यंत विशिष्ट विषाणु कीटनाशक है। सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों से विषाणु को बचाने हेतु इसमें 0.1% कपड़ों का नील (Robin Blue / Tinopal) या बोरिक एसिड और इल्ली को खाने के लिए ललचाने हेतु 0.5% गुड़ (Jaggery) मिलाकर शाम के समय छिड़का जाता है।
रात्रिचर तना कर्तन (Nocturnal Basal Stem Cutting by Agrotis ipsilon)
कटुआ इल्ली (Agrotis ipsilon) दिन भर मिट्टी के ढेलों व दरारों के नीचे 3–5 cm गहराई पर छिपी रहती है और रात में बाहर निकलकर चने, आलू, मटर व तंबाकू के नए पौधों के तने को जमीन की सतह से काटकर गिरा देती है (जितना खाती है, उससे कई गुना अधिक पौधे काटकर बर्बाद करती है)।
विषाक्त पेड़ से उल्टा लटकना (Tree-Top Disease / Wipfelkrankheit by NPV)
HaNPV विषाणु से संक्रमित होने के 4–6 दिन बाद इल्ली का शरीर गुलाबी-सफेद पड़कर सड़ने लगता है; मरने से ठीक पहले इल्ली पौधे की सबसे ऊपरी टहनी पर चढ़कर अपने पिछले पैरों (Prolegs) से उल्टी लटककर (‘V’ आकार में) मर जाती है और फटने पर करोड़ों विषाणु कण पत्तियों पर बिखर जाते हैं।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. चने की फली छेदक इल्ली (Gram Pod Borer / American Bollworm — Helicoverpa armigera)

  • वैज्ञानिक नाम, कुल एवं गण: Helicoverpa armigera (पूर्व नाम: Heliothis armigera) | कुल: Noctuidae | गण: Lepidoptera।
  • परपोषी पौधे (अत्यंत बहुभक्षी — >180 पादप प्रजातियाँ): चना, अरहर, मटर, मूंग, उड़द, कपास, टमाटर, ज्वार, मक्का, सूरजमुखी और भिंडी।
  • पहचान एवं जीवविज्ञान (Biology — पूर्ण कायांतरण):
    • वयस्क पतंगा: पीले-भूरे से जैतूनी भूरे रंग का मजबूत पतंगा जिसके अग्र-पंखों पर एक गहरा गुर्दे जैसा धब्बा और पिछले पंखों के बाहरी किनारे पर चौड़ी काली पट्टी होती है।
    • अंडरोपण (Single Sculptured Eggs): मादा पतंगा कोमल पत्तियों, कलियों और फूलों पर एक-एक करके (Singly) खरबूजे जैसी धारियों वाले पीले-सफेद गोल अंडे (कुल 500–1000 अंडे) देती है।
    • इल्ली (Caterpillar): रंग में अत्यधिक परिवर्तनशील (हरी, पीली, गुलाबी से भूरी) जिसके शरीर के दोनों पार्श्वों (Sides) पर लहरदार हल्की सफेद-पीली धारी (Broken lateral whitish stripes) होती है। 14–20 दिन में पूर्ण विकसित होकर यह मिट्टी में 5–10 cm नीचे मिट्टी की कोठरी में प्यूपा (Pupation in soil) बनाती है।
  • क्षति की प्रकृति एवं विशिष्ट पहचान चिह्न:
    1. छोटी इल्लियाँ चने की कोमल पत्तियों के हरे भाग को खुरचकर खाती हैं (परंतु चने की पत्तियों पर मैलिक और ऑक्जेलिक अम्ल की खटास के कारण इसके परजीवी कम आते हैं)।
    2. फूल और फली बनने पर इल्ली फली में एकदम गोल छेद (Circular bore hole) बनाती है और अपना सिर व आगे का आधा शरीर फली के अंदर घुसाकर तथा पीछे का आधा शरीर बाहर रखकर अंदर के सारे दाने खा जाती है।
    3. एक इल्ली अपने जीवनकाल में 30 से 40 फलियों को नष्ट कर देती है।
  • फली छेदक का समन्वित प्रबंधन (Bio-Intensive IPM — ETL: 1–2 इल्ली प्रति मीटर कतार या 5–10% क्षतिग्रस्त फलियाँ):
    1. सस्य उपाय: ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई (मिट्टी में प्यूपा नष्ट करने हेतु); अक्टूबर के मध्य में अगेती बुवाई; तथा चने के साथ धनिया (Coriander), सरसों या अलसी की अंतःफसल (10:2 अनुपात) उगाना (धनिया के फूल परजीवी ततैया और परभक्षी कीटों को आकर्षित करते हैं)।
    2. यांत्रिक एवं व्यवहारिक उपाय:
      • बुवाई के 25–30 दिन बाद खेत में कीटभक्षी पक्षियों (मैना, बुलबुल, ड्रोंगो — Black Drongo) के बैठने हेतु 20 से 25 ‘T-आकार की बांस की खूँटियाँ’ (Bird perches @ 20–25/ha) लगाना (फूल व फली बनने के बाद खूँटियाँ हटा लें ताकि पक्षी दाने न खाएँ)।
      • निगरानी हेतु 5 फेरोमोन पाश प्रति हेक्टेयर (Helilure @ 5 traps/ha) लगाना (जब लगातार 3 रातों तक 4–5 पतंगे प्रति ट्रैप मिलें तो नियंत्रण शुरू करें)।
      • चने की अगेती वानस्पतिक अवस्था में ऊपरी कोपलों की तुड़ाई (Nipping at 30–40 DAS) करने से शाखाएँ बढ़ती हैं और उन कोपलों पर दिए गए अंडे भी हट जाते हैं।
    3. जैविक एवं वानस्पतिक नियंत्रण:
      • फूल आने की शुरुआत पर 5% नीम निंबोली अर्क (NSKE 5%) या अजाडिराक्टिन 1500 ppm का स्प्रे।
      • छोटी इल्लियों (1st–2nd instar) पर HaNPV @ 250 LE/ha (1.5×1012 PIBs/ha) + 0.5% गुड़ + 0.1% नील (Robin Blue — UV रक्षक) का शाम के समय छिड़काव या Bacillus thuringiensis (Bt @ 1.0–1.5 kg/ha) तथा लार्वा परजीवी Campoletis chlorideae का संरक्षण।
    4. रासायनिक नियंत्रण (जब आबादी ETL पार कर जाए):
      • इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (Proclaim @ 220 g/ha) या क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC (Coragen @ 125–150 mL/ha) या स्पाइनोसैड 45% SC (@ 150 mL/ha) या इंडोक्साकार्ब 14.5% SC (@ 400–500 mL/ha) या फ्लूबेंडियामाइड 39.35% SC (@ 100 mL/ha)।

2. चने की कटुआ इल्ली (Gram Cutworm / Greasy Cutworm — Agrotis ipsilon)

  • वैज्ञानिक नाम, कुल एवं गण: Agrotis ipsilon (एवं Agrotis flammatra) | कुल: Noctuidae | गण: Lepidoptera।
  • परपोषी एवं पारिस्थितिकी: चना, मसूर, मटर, आलू, तंबाकू, गोभी और गेहूँ। यह मुख्यतः नदियों के किनारे की बाढ़-प्रभावित ‘ताल’ या ‘दियारा’ भूमि (Low-lying flooded areas like Mokama Tal in Bihar & eastern UP) में रबी बुवाई के समय भारी तबाही मचाता है।
  • पहचान एवं रात्रिचर जीवविज्ञान:
    • इल्ली: चिकनी, तैलीय या चिकनाई युक्त गहरे भूरे-काले रंग की इल्ली (40–45 mm लंबी) जो छूने पर तुरंत कुंडली मारकर ‘C’ या छल्ले के आकार में मुड़ जाती है।
    • रात्रिचर स्वभाव (Nocturnal Habit): इल्लियाँ दिन के समय पौधे के पास मिट्टी की दरारों या ढेलों के नीचे 3–5 cm गहराई पर छिपी रहती हैं और केवल रात में बाहर निकलकर पौधों को काटती हैं तथा कटे हुए टुकड़ों को अपने बिल में खींच ले जाती हैं। प्यूपा भी मिट्टी में बनता है।
  • क्षति के विशिष्ट लक्षण: सुबह खेत में जाने पर चने के नए उगे पौधे या कोमल शाखाएँ जमीन की सतह के ठीक बराबर से (At ground level) आरी से कटी हुई और मुरझाई हुई पड़ी मिलती हैं तथा पास की मिट्टी खोदने पर काली कुंडलित इल्ली मिलती है।
  • कटुआ इल्ली का समन्वित प्रबंधन (IPM):
    1. सस्य एवं भौतिक उपाय: बुवाई से पूर्व जुताई कर मिट्टी के ढेले तोड़ना; प्रभावित खेत में सिंचाई करना (पानी भरने से दरारों में छिपी इल्लियाँ दम घुटने के डर से बाहर निकल आती हैं जिन्हें पक्षी खा जाते हैं); तथा खेत में जगह-जगह हरी घास की छोटी ढेरियाँ (Grass heaps) रखना जिनके नीचे सुबह छिपी इल्लियों को इकट्ठा कर नष्ट करना।
    2. विष-चारा (Poison Baiting — शाम के समय बिखेरें):10 extkg गेहूँ का चोकर + 1 extkg गुड़ + 500 extg मैलाथियान या क्लोरपायरीफॉस या थायोडिकार्ब को थोड़े पानी में मिलाकर गोलियाँ बनाकर शाम को पौधों के पास बिखेरना।
    3. रासायनिक नियंत्रण: शाम के समय पौधों के आधार और मिट्टी पर क्लोरपायरीफॉस 20% EC (@ 2.0 L/ha) का छिड़काव या क्विनालफॉस 1.5% DP (@ 25 kg/ha) का भुरकाव।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

दलहनी फसलों के अन्य प्रमुख फली छेदकों की तुलनात्मक परीक्षा पहचान (Other Pulse Pod Borers):

  • 1. अरहर की प्लूम मॉथ (Redgram Plume Moth — Exelastis atomosa; Pterophoridae, Lepidoptera): पतंगे के पंख पक्षी के पंखों जैसे कटे हुए (Plume-like) होते हैं; छोटी हरी काँटेदार इल्ली फली के बाहर रहकर दाने के ठीक ऊपर छेद करती है।
  • 2. अरहर की फली मक्खी (Tur Pod Fly — Melanagromyza obtusa; Agromyzidae, Diptera): फली के बाहर कोई छेद नहीं दिखता (केवल वयस्क निकलने पर पिन जैसा छेद बनता है) और अंदर के दाने सिकुड़े व धारियों वाले हो जाते हैं।
  • 3. चित्तीदार फली छेदक (Spotted Pod Borer — Maruca vitrata / M. testulalis; Crambidae): फूलों, कलियों और फलियों को रेशमी जाल (Webbing) से जोड़कर अंदर खाता है।
  • 4. मटर व मसूर की नीली तितली (Blue Butterfly — Lampides boeticus; Lycaenidae)।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)

  • ‘HaNPV का सायंकालीन एवं UV-संरक्षित छिड़काव’ का सिद्धांत (Principle of Evening Application of HaNPV with UV-Screen): HaNPV विषाणु सूर्य की तेज पराबैंगनी (UV) किरणों से 2–3 घंटे में निष्क्रिय हो जाता है और चने की पत्तियों के अम्लीय स्राव (pH 2–3) से भी प्रभावित होता है; अतः इसे हमेशा शाम 4 बजे के बाद 0.1% नील (Robin Blue/Tinopal — UV protectant) और 0.5% गुड़ (Phagostimulant) मिलाकर ही छिड़का जाता है।

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)

हल किया गया संख्यात्मक प्रश्न: चने की फसल के लिए HaNPV विषाणु कणों (PIBs) की गणना

प्रश्न: एक किसान को अपने 2.0 extहेक्टेयर चने के खेत में फली छेदक (Helicoverpa armigera) के विरुद्ध 250 extLE/ha की दर से HaNPV का छिड़काव करना है। यदि 1 extLE=6×109extPIBs है और 1 संक्रमित पूर्ण विकसित इल्ली से 2×109extPIBs प्राप्त होते हैं, तो किसान को 2 extहेक्टेयर के लिए कुल कितने LE, कितने PIBs और कितनी संक्रमित इल्लियों की आवश्यकता होगी?

हल (Solution):

  • 1. कुल आवश्यक लार्वा तुल्यांक (Total LE for 2 ha):250 extLE/ha×2 extha=500 LE।
  • 2. कुल आवश्यक विषाणु कण (Total PIBs):500×6×109=3.0×1012 PIBs (1 extha हेतु =1.5×1012extPIBs)।
  • 3. आवश्यक संक्रमित इल्लियों की संख्या: चूँकि 1 extLE=3 extइल्लियाँ, अतः 500 extLE×3=1,500 संक्रमित इल्लियाँ (1 extha हेतु 750 इल्लियाँ)।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 11.1: चने की फली छेदक इल्ली (Helicoverpa armigera) बनाम चने की कटुआ इल्ली (Agrotis ipsilon)
तुलना का आधार चने की फली छेदक इल्ली (Gram Pod Borer) चने की कटुआ इल्ली (Gram Cutworm)
1. वैज्ञानिक नाम एवं कुल Helicoverpa armigera (Noctuidae : Lepidoptera) Agrotis ipsilon (Noctuidae : Lepidoptera)
2. मुख्य आक्रमण अवस्था पुष्पन एवं फली बनने की अवस्था (Flowering & Podding stage) अंकुरण एवं प्रारंभिक पौध अवस्था (Seedling stage)
3. भक्षण का समय व स्थान दिन व रात दोनों समय पौधे के ऊपरी भाग व फलियों पर केवल रात में (Nocturnal) जमीन की सतह पर; दिन में मिट्टी में छिपी रहती है
4. विशिष्ट क्षति चिह्न फली में गोल छेद कर आधा शरीर अंदर व आधा शरीर बाहर रखना पौधे के तने को जमीन की सतह से आरी की तरह काटकर गिराना
5. प्रमुख लार्वा परजीवी Campoletis chlorideae (Ichneumonidae) Microgaster spp., Bracon spp.
6. विशिष्ट प्रबंधन Helilure ट्रैप, T-खूँटियाँ, HaNPV @ 250 LE/ha, इमामेक्टिन, Coragen खेत में सिंचाई, घास की ढेरी, शाम को विष-चारा व मिट्टी पर क्लोरपायरीफॉस

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)

दलहनी कीट प्रबंधन के मानक दर एवं सूत्र
  • 1. चने में HaNPV की मानक मात्रा:Dose=250 LE/ha=1.5×1012 PIBs/ha (750 संक्रमित इल्लियों से प्राप्त)
  • 2. चने में फली छेदक का आर्थिक दहलीज स्तर (ETL):ETL=1–2 larvae per meter row length OR 5–10% damaged pods
  • 3. फली क्षति प्रतिशत (Pod Damage %):Pod Damage (\%)=छेद वाली क्षतिग्रस्त फलियाँनिरीक्षित कुल फलियाँ×100

11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 11: दलहनी फसलों के प्रमुख नाशीकीट (फली छेदक एवं कटुआ इल्ली)
चने की फली छेदक (Helicoverpa armigera)
  • कुल: Noctuidae, गण: Lepidoptera | >180 परपोषी पौधे
  • अकेला अंडा (Singly) | इल्ली में स्व-भक्षण (Cannibalism)
  • विशिष्ट मुद्रा: आधा शरीर फली के अंदर व आधा बाहर (गोल छेद)
  • एक इल्ली 30 से 40 फलियों को नष्ट करती है | मिट्टी में प्यूपा
फली छेदक का IPM पैकेज
  • 1. ग्रीष्म जुताई + चना+धनिया/सरसों अंतःफसल + अगेती निपिंग
  • 2. Helilure फेरोमोन पाश (5/ha) + T-खूँटियाँ (20-25/ha)
  • 3. जैविक: NSKE 5%, HaNPV @ 250 LE/ha (+ नील व गुड़), Campoletis परजीवी
  • 4. रसायन: इमामेक्टिन बेंजोएट (220 g/ha) या क्लोरेंट्रानिलीप्रोल (150 mL/ha)
कटुआ इल्ली (Agrotis ipsilon)
  • कुल: Noctuidae, गण: Lepidoptera | ताल/दियारा भूमि में गंभीर
  • रात्रिचर (Nocturnal) चिकनी काली इल्ली (दिन में मिट्टी में छिपती है)
  • लक्षण: रात में नए पौधों के तने को जमीन की सतह से काटना
  • प्रबंधन: सिंचाई करना, घास की ढेरी, शाम को विष-चारा व क्लोरपायरीफॉस
अन्य प्रमुख दलहनी कीट
  • अरहर प्लूम मॉथ: Exelastis atomosa (Pterophoridae)
  • अरहर फली मक्खी: Melanagromyza obtusa (Agromyzidae)
  • चित्तीदार फली छेदक (Webber): Maruca vitrata (Crambidae)
  • मटर की नीली तितली: Lampides boeticus (Lycaenidae)

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)

चने की फसल में फली छेदक (Helicoverpa armigera) का जैव-सघन समन्वित प्रबंधन (Bio-Intensive Chickpea IPM Flow)
Step 1
चरण 1 (बुवाई पूर्व एवं बुवाई): मई में गहरी जुताई + अक्टूबर मध्य में चने के साथ धनिया/सरसों (10:2) की अंतःफसल बुवाई
⬇
Step 2
चरण 2 (वानस्पतिक अवस्था: 30–40 DAS): ऊपरी कोपलों की तुड़ाई (Nipping) + खेत में 5 Helilure फेरोमोन पाश/ha और 20–25 T-आकार की बर्ड पर्च लगाना
⬇
Step 3
चरण 3 (कली एवं फूल आना: 50–65 DAS): अंडों व प्रथम अवस्था इल्लियों पर 5% NSKE का स्प्रे तथा 7 दिन बाद शाम को HaNPV @ 250 LE/ha (+ 0.1% नील + 0.5% गुड़) का छिड़काव
⬇
Step 4
चरण 4 (फली बनना: >70 DAS): बर्ड पर्च हटा लेना; यदि इल्ली संख्या ETL (1–2 इल्ली/मीटर कतार) से अधिक हो तो इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (220 g/ha) या क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC (125 mL/ha) का स्प्रे

13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • फली में गोल छेद करके ‘अपना आधा शरीर फली के अंदर और पिछला आधा शरीर फली के बाहर’ रखकर दाने खाना चने की फली छेदक (Helicoverpa armigera; कुल Noctuidae) का अद्वितीय पहचान लक्षण है।
  • चने की फली छेदक की एक अकेली इल्ली अपने जीवनकाल में ’30 से 40 फलियों’ को नष्ट कर देती है और इसमें ‘स्व-भक्षण’ (Cannibalism) पाया जाता है।
  • चने में फली छेदक नियंत्रण के लिए ‘HaNPV @ 250 LE/ha’ (1.5 × 10¹² PIBs/ha) का प्रयोग शाम के समय 0.1% नील (UV-screen) और 0.5% गुड़ के साथ किया जाता है।
  • चने की फली छेदक इल्ली का प्रमुख लार्वा अंतःपरजीवी (Larval parasitoid) ‘Campoletis chlorideae’ (कुल Ichneumonidae) है।
  • चने की कटुआ इल्ली (Agrotis ipsilon; कुल Noctuidae) एक रात्रिचर (Nocturnal) कीट है जो दिन में मिट्टी की दरारों में छिपी रहती है और रात में पौधों के तने को जमीन की सतह से काट देती है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)

त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):

  • चने की फली छेदक (Helicoverpa armigera): Noctuidae; आधा शरीर अंदर-बाहर; स्व-भक्षण; परजीवी Campoletis chlorideae; फेरोमोन Helilure; HaNPV @ 250 LE/ha; इमामेक्टिन बेंजोएट, क्लोरेंट्रानिलीप्रोल।
  • कटुआ इल्ली (Agrotis ipsilon): Noctuidae; रात्रिचर; जमीन की सतह से तना काटना; बाढ़/ताल भूमि में गंभीर; सिंचाई, घास ढेरी, विष-चारा व क्लोरपायरीफॉस।
  • अरहर के अन्य कीट: प्लूम मॉथ (Exelastis atomosa), फली मक्खी (Melanagromyza obtusa), मरुका (Maruca vitrata)।

15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)

1. चने की फली में गोल छेद बनाकर ‘अपना अगला आधा शरीर फली के अंदर और पिछला आधा शरीर फली के बाहर’ रखकर दाने खाने का विशिष्ट व्यवहार किस कीट में पाया जाता है?
(A) चने की फली छेदक इल्ली (Gram Pod Borer — Helicoverpa armigera)
(B) कटुआ इल्ली (Agrotis ipsilon)
(C) अरहर की फली मक्खी (Melanagromyza obtusa)
(D) माहू (Aphis craccivora)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) चने की फली छेदक इल्ली (Gram Pod Borer — Helicoverpa armigera)
व्याख्या: Helicoverpa armigera की इल्ली सिर व वक्ष फली के अंदर डालकर और उदर बाहर रखकर दाने खाती है।
2. चने की फली छेदक इल्ली (Helicoverpa armigera) के नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर कितने ‘लार्वा तुल्यांक’ (Larval Equivalent — LE) HaNPV विषाणु की सिफारिश की जाती है?
(A) 250 LE/ha (अर्थात् 1.5 × 10¹² PIBs/ha)
(B) 5 LE/ha
(C) 10,000 LE/ha
(D) 0.5 LE/ha
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) 250 LE/ha (अर्थात् 1.5 × 10¹² PIBs/ha)
व्याख्या: चने में HaNPV की मानक दर 250 LE/ha (और टमाटर व कपास में 250–500 LE/ha) होती है।
3. दिन के समय मिट्टी के ढेलों और दरारों के नीचे छिपी रहने वाली और रात में बाहर निकलकर चने व आलू के कोमल पौधों के तनों को जमीन की सतह से काटकर गिराने वाली इल्ली कौन-सी है?
(A) कटुआ इल्ली (Cutworm — Agrotis ipsilon)
(B) फली छेदक (Helicoverpa armigera)
(C) प्लूम मॉथ (Exelastis atomosa)
(D) नीली तितली (Lampides boeticus)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) कटुआ इल्ली (Cutworm — Agrotis ipsilon)
व्याख्या: Agrotis ipsilon (Noctuidae) रात्रिचर कटुआ इल्ली है जो पौधों को जमीन के बराबर से काट देती है।
4. चने के खेत में फली छेदक की छोटी इल्लियों का प्राकृतिक रूप से परजीवीकरण करने वाला सबसे प्रमुख इकन्यूमोनिड लार्वा-परजीवी (Larval parasitoid) कौन-सा है?
(A) कैम्पोलेटिस क्लोराइडिया (Campoletis chlorideae)
(B) एपिरिकैनिया मेलानोल्यूका
(C) एफेलिनस माली
(D) एनकार्सिया
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) कैम्पोलेटिस क्लोराइडिया (Campoletis chlorideae)
व्याख्या: Campoletis chlorideae चने में Helicoverpa armigera की प्रथम व द्वितीय अवस्था की इल्लियों का मुख्य प्राकृतिक परजीवी है।
5. HaNPV का छिड़काव हमेशा शाम के समय क्यों किया जाता है और उसमें ‘कपड़ों का नील’ (Robin Blue / Tinopal @ 0.1%) क्यों मिलाया जाता है?
(A) सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों से विषाणु को निष्क्रिय होने से बचाने के लिए (UV Protectant के रूप में)
(B) पौधों को नीला रंगने के लिए
(C) मिट्टी का pH बढ़ाने के लिए
(D) खरपतवार मारने के लिए
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों से विषाणु को निष्क्रिय होने से बचाने के लिए (UV Protectant के रूप में)
व्याख्या: NPV विषाणु धूप की UV किरणों के प्रति संवेदनशील होता है; नील या टिनोपाल UV-रक्षक और गुड़ भक्षण-उत्तेजक का कार्य करता है।
6. चने की फली छेदक इल्ली (Helicoverpa armigera) की एक अकेली इल्ली अपने पूरे लार्वा काल में औसतन कितनी फलियों को नष्ट कर देती है?
(A) 30 से 40 फलियाँ
(B) केवल 1 फली
(C) 5000 फलियाँ
(D) 0 फली
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) 30 से 40 फलियाँ
व्याख्या: एक इल्ली एक फली के दाने खाकर दूसरी फली पर जाती है और प्यूपा बनने से पहले 30–40 फलियों को नष्ट कर देती है।
7. अरहर (Pigeonpea) में फूलों, कलियों और फलियों को रेशमी जाले (Webbing) से एक साथ बाँधकर अंदर ही अंदर खाने वाला ‘चित्तीदार फली छेदक’ (Spotted Pod Borer) कौन-सा है?
(A) मरुका विट्टाटा (Maruca vitrata / Maruca testulalis — कुल Crambidae)
(B) एग्रोटिस इप्सिलॉन
(C) पायरिला परपुसिला
(D) ओडोंटोटर्मिस
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) मरुका विट्टाटा (Maruca vitrata / Maruca testulalis — कुल Crambidae)
व्याख्या: Maruca vitrata अरहर, लोबिया और मूंग में फूलों व फलियों का जाला बनाकर भारी नुकसान करता है।
8. अरहर की फली मक्खी (Tur Pod Fly — Melanagromyza obtusa) किस कीट गण और कुल से संबंधित है?
(A) गण: Diptera, कुल: Agromyzidae
(B) गण: Lepidoptera, कुल: Noctuidae
(C) गण: Coleoptera, कुल: Bruchidae
(D) गण: Hemiptera, कुल: Coreidae
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) गण: Diptera, कुल: Agromyzidae
व्याख्या: Melanagromyza obtusa डिप्टेरा गण के एग्रोमाइजिडी कुल की मक्खी है जिसका मैगट फली के अंदर दाने खाता है।
9. चने की फसल में फली छेदक (Helicoverpa armigera) की निगरानी के लिए लगाए जाने वाले फेरोमोन पाश में कौन-सा ल्यूर (Lure) प्रयुक्त होता है?
(A) हेलील्यूर (Helilure)
(B) स्पोडोल्यूर (Spodolure)
(C) गोसिपल्यूर (Gossyplure)
(D) ल्यूसील्यूर (Lucilure)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) हेलील्यूर (Helilure)
व्याख्या: Helicoverpa armigera के नर पतंगों को आकर्षित करने वाले सेक्स फेरोमोन ल्यूर को ‘Helilure’ कहते हैं।
10. नदियों के किनारे बाढ़ का पानी उतरने के बाद देर से बोई जाने वाली रबी चने की फसल (ताल/दियारा भूमि) में कौन-सा कीट सबसे गंभीर समस्या होता है?
(A) कटुआ इल्ली (Gram Cutworm — Agrotis ipsilon)
(B) धान का भूरा फुदका
(C) आम का भुनगा
(D) गन्ने का पायरिला
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) कटुआ इल्ली (Gram Cutworm — Agrotis ipsilon)
व्याख्या: बाढ़-प्रभावित नम व दरारों वाली ताल भूमि में कटुआ इल्ली (Agrotis ipsilon) का प्रकोप सर्वाधिक होता है।

16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)

  1. फली में गोल छेद कर ‘आधा शरीर अंदर व आधा बाहर’ रखकर खाना चने की फली छेदक (Helicoverpa armigera) की मुख्य पहचान है।
  2. चने में फली छेदक नियंत्रण हेतु ‘HaNPV @ 250 LE/ha’ (1.5 × 10¹² PIBs/ha) का शाम के समय छिड़काव किया जाता है।
  3. चने की फली छेदक इल्ली का प्रमुख प्राकृतिक लार्वा परजीवी ‘Campoletis chlorideae’ है।
  4. चने की कटुआ इल्ली (Agrotis ipsilon) एक रात्रिचर कीट है जो पौधों के तने को जमीन की सतह से काट देती है।
  5. अरहर की फली मक्खी का वैज्ञानिक नाम ‘Melanagromyza obtusa’ (Agromyzidae) और प्लूम मॉथ का ‘Exelastis atomosa’ है।

(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)

1. चने की फली छेदक इल्ली और कटुआ इल्ली का वैज्ञानिक नाम, कुल व गण लिखिए।
उत्तर: फली छेदक: Helicoverpa armigera; कटुआ इल्ली: Agrotis ipsilon (दोनों कुल: Noctuidae, गण: Lepidoptera)।
2. चने की फली छेदक का आर्थिक दहलीज स्तर (ETL) क्या है?
उत्तर: प्रति मीटर कतार में 1 से 2 इल्ली (1–2 larvae per meter row) या 5–10% क्षतिग्रस्त फलियाँ।
3. अरहर के तीन प्रमुख फली छेदक कीटों के वैज्ञानिक नाम लिखिए।
उत्तर: (1) चना फली छेदक: Helicoverpa armigera, (2) प्लूम मॉथ: Exelastis atomosa, और (3) फली मक्खी: Melanagromyza obtusa (एवं Maruca vitrata)।
4. चने में परजीवी व परभक्षी कीटों को बढ़ावा देने के लिए कौन-सी अंतःफसल उगाई जाती है?
उत्तर: धनिया (Coriander), सरसों या अलसी (10:2 के अनुपात में)।
5. चने में 30–40 दिन की अवस्था पर ‘निपिंग’ (Nipping — शीर्ष कोपल तोड़ना) करने से कीट प्रबंधन में क्या लाभ होता है?
उत्तर: निपिंग से पार्श्व शाखाएँ बढ़ती हैं और शीर्ष कोमल पत्तियों पर फली छेदक द्वारा दिए गए अंडे भी साथ में हट जाते हैं।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)

1. चने की फली छेदक इल्ली (Helicoverpa armigera) की पहचान, जीवन चक्र और क्षति की प्रकृति का वर्णन कीजिए।
उत्तर: पहचान व जीवन चक्र: मादा पतंगा कोमल पत्तियों व फूलों पर एक-एक करके खरबूजे जैसी धारियों वाले गोल अंडे देती है। इल्ली के शरीर के दोनों किनारों पर सफेद-पीली टूटी हुई धारियाँ होती हैं और इनमें स्व-भक्षण (Cannibalism) पाया जाता है। प्यूपा मिट्टी में बनता है। क्षति की प्रकृति: छोटी इल्लियाँ पत्तियों को खुरचकर खाती हैं और बड़ी इल्लियाँ फली में गोल छेद कर अपना अगला आधा शरीर अंदर और पिछला आधा शरीर बाहर रखकर दाने खा जाती हैं। एक इल्ली 30–40 फलियों को नष्ट कर देती है।
2. चने में फली छेदक (Helicoverpa armigera) के लिए एक आदर्श जैव-सघन समन्वित कीट प्रबंधन (Bio-intensive IPM) पैकेज लिखिए।
उत्तर: (1) सस्य उपाय: ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई, अक्टूबर में अगेती बुवाई, चना + धनिया/सरसों (10:2) अंतःफसल और 30–40 DAS पर शीर्ष तुड़ाई (Nipping)। (2) यांत्रिक/व्यवहारिक उपाय: निगरानी हेतु 5 Helilure फेरोमोन पाश/ha और पक्षियों के बैठने हेतु 20–25 T-खूँटियाँ/ha लगाना। (3) जैविक उपाय: फूल आने पर 5% NSKE का स्प्रे तथा छोटी इल्लियों पर शाम के समय HaNPV @ 250 LE/ha (+ 0.1% नील + 0.5% गुड़) या Bt (1 kg/ha) का स्प्रे। (4) रासायनिक उपाय (ETL पार होने पर): इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (@ 220 g/ha) या क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC (@ 125 mL/ha) का छिड़काव।
3. चने की कटुआ इल्ली (Agrotis ipsilon) के रात्रिचर व्यवहार, क्षति के लक्षण और प्रबंधन का वर्णन कीजिए।
उत्तर: व्यवहार व क्षति: कटुआ इल्ली गहरे भूरे-काले रंग की चिकनी इल्ली होती है जो छूने पर ‘C’ आकार में कुंडलित हो जाती है। यह दिन भर मिट्टी की दरारों या ढेलों के नीचे छिपी रहती है और केवल रात में बाहर निकलकर चने की कोमल पौध के तने को जमीन की सतह के बराबर से काटकर गिरा देती है। प्रबंधन: (1) खेत में सिंचाई करना ताकि इल्लियाँ बाहर निकल आएँ और पक्षी उन्हें खा लें; (2) खेत में हरी घास की ढेरियाँ रखकर सुबह उनके नीचे छिपी इल्लियों को मारना; (3) शाम को गेहूँ के चोकर + गुड़ + क्लोरपायरीफॉस का विष-चारा बिखेरना; और (4) शाम को पौधों के आधार पर क्लोरपायरीफॉस 20% EC (2 L/ha) का स्प्रे करना।
4. HaNPV क्या है? खेत में इसका अधिकतम लाभ लेने के लिए छिड़काव करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर: HaNPV (Helicoverpa armigera Nuclear Polyhedrosis Virus) फली छेदक इल्ली का एक अत्यंत विशिष्ट विषाणु जैव-कीटनाशक है जो इल्ली के पेट में जाकर उसे गला देता है (Tree-top disease)। सावधानियाँ: (1) इसे तब छिड़कें जब इल्लियाँ बहुत छोटी (प्रथम या द्वितीय अवस्था) हों; (2) इसकी मानक मात्रा 250 LE/ha (1.5 × 10¹² PIBs/ha) रखें; (3) सूर्य की UV किरणों से बचाने के लिए हमेशा शाम के समय छिड़कें और घोल में 0.1% कपड़ों का नील (Robin Blue/Tinopal) तथा इल्लियों को ललचाने के लिए 0.5% गुड़ (Jaggery) अवश्य मिलाएँ।
5. अरहर के तीन अन्य प्रमुख कीटों—प्लूम मॉथ (Exelastis atomosa), फली मक्खी (Melanagromyza obtusa) और चित्तीदार फली छेदक (Maruca vitrata)—के क्षति लक्षणों में अंतर बताइए।
उत्तर: (1) प्लूम मॉथ (Exelastis atomosa): पंख कटे हुए होते हैं; छोटी काँटेदार इल्ली फली के बाहर बैठकर ठीक दाने के ऊपर छोटा गोल छेद कर दाना खाती है। (2) फली मक्खी (Melanagromyza obtusa): फली के ऊपर से कोई बड़ा छेद या लक्षण नहीं दिखता; मैगट फली के अंदर रहकर दाने में सुरंग बनाता है जिससे दाना सिकुड़कर खराब हो जाता है और केवल मक्खी निकलने पर पिन जैसा छेद दिखता है। (3) चित्तीदार छेदक (Maruca vitrata): यह फूलों, कलियों और फलियों को रेशमी जाले से बाँधकर गुच्छा बना लेता है और अंदर रहकर खाता है।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)

1. दलहनी फसलों के सबसे विनाशकारी नाशीकीट ‘चने की फली छेदक इल्ली’ (Helicoverpa armigera) के वर्गीकरण, पहचान, जीवन चक्र, विशिष्ट भक्षण व्यवहार, ETL तथा बुवाई से कटाई तक के संपूर्ण जैव-सघन समन्वित प्रबंधन (IPM) का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: प्रवाह चित्र सहित फली छेदक का जीवन चक्र, 30–40 फलियाँ नष्ट करने की क्षमता, स्व-भक्षण और सस्य, यांत्रिक (Helilure, Bird perches), जैविक (NSKE, HaNPV 250 LE/ha, Campoletis) व रासायनिक (Emamectin, Chlorantraniliprole) प्रबंधन का पूर्ण वर्णन करें।
2. चने की कटुआ इल्ली (Agrotis ipsilon) और चने की फली छेदक इल्ली (Helicoverpa armigera) की तुलनात्मक सारणी बनाते हुए कटुआ इल्ली के जीवविज्ञान, ताल/दियारा भूमि में प्रकोप और प्रबंधन उपायों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: तुलनात्मक सारणी 11.1 और कटुआ इल्ली के रात्रिचर व्यवहार, सिंचाई प्रभाव, घास ढेरी, विष-चारा और रासायनिक नियंत्रण का विस्तार से वर्णन करें।
3. अरहर (Pigeonpea) की फसल में फूल और फली बनने की अवस्था पर आक्रमण करने वाले चार प्रमुख कीटों (Helicoverpa armigera, Exelastis atomosa, Melanagromyza obtusa एवं Maruca vitrata) की तुलनात्मक पहचान और उनके एकीकृत प्रबंधन का वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: चारों कीटों के वैज्ञानिक नाम, कुल, फली पर उनके द्वारा बनाए जाने वाले छिद्रों व जालों के अंतर और पुष्पन से फली पकने तक के स्प्रे शेड्यूल (NSKE 5% → HaNPV → Indoxacarb/Spinosad/Chlorantraniliprole) का वर्णन करें।

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