ENT 311 Lecture 06: बहुभक्षी नाशीकीट: टिड्डी, फुदका (ग्रासहॉपर) एवं सफेद लट (White Grubs)

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ENT 311 · Pest Management in Crops and Stored Grains — Final Notes
विषय सूची · Quick Navigation02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
यह पाठ्यक्रम की अध्ययन सामग्री है। कीटनाशक, मात्रा और उपचार के उदाहरणों को वर्तमान खेत-स्तरीय सलाह न मानें; वास्तविक उपयोग में वर्तमान पंजीकृत label, फसल–कीट अनुमोदन तथा स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करें।
Lecture 06 Theory • Lecture 06 (ENT-311 / ENTO-311) 🖼️ सचित्र विजुअल आरेख सहित (With Visual Identification Diagrams)

Lecture 06: बहुभक्षी नाशीकीट: टिड्डी, फुदका (ग्रासहॉपर) एवं सफेद लट (White Grubs)

Polyphagous Pests: Locusts, Grasshoppers and White Grubs

02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)

इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:

  • बहुभक्षी नाशीकीटों (Polyphagous Pests — अनेक कुल की विविध फसलों को खाने वाले राष्ट्रीय महत्व के कीट) की अवधारणा को समझना।
  • रेगिस्तानी टिड्डी (Desert Locust — Schistocerca gregaria; कुल Acrididae, गण Orthoptera), प्रवासी टिड्डी व बंबई टिड्डी की पहचान, डॉ. बी.पी. यूवारोव (B.P. Uvarov, 1921) के ‘प्रावस्था सिद्धांत’ (Phase Theory: Solitaria vs Gregaria phase), जीवन चक्र, क्षति और टिड्डी चेतावनी संगठन (LWO, जोधपुर) की नियंत्रण रणनीतियों का गहन अध्ययन करना।
  • खरीफ फुदका / फड़का (Kharif Grasshopper — Hieroglyphus nigrorepletus) एवं धान के फुदके (Hieroglyphus banian) के जीवविज्ञान, अंड-फली (Egg pods) और प्रबंधन को जानना।
  • सफेद लट / भृंगक (White Grub — Holotrichia consanguinea एवं H. serrata; कुल Melolonthidae/Scarabaeidae, गण Coleoptera) के ‘C-आकार’ के ग्रब की पहचान, एकवर्षीय जीवन चक्र, मानसून की पहली वर्षा पर शाम को खेजड़ी/नीम/बेर पर वयस्क भृंगों के मिलन व्यवहार और सामुदायिक प्रबंधन को कंठस्थ करना।

03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)

मूल सामग्री (Core Course Content): वे नाशीकीट जो किसी एक फसल या कुल तक सीमित न रहकर रास्ते में आने वाली लगभग हर खाद्यान्न, दलहनी, तिलहनी, सब्जी और वृक्ष प्रजाति को खा जाते हैं, ‘बहुभक्षी नाशीकीट’ (Polyphagous Pests) कहलाते हैं। इनमें रेगिस्तानी टिड्डी (Desert Locust), फड़का (Grasshopper) और सफेद लट (White Grub — जिसे राजस्थान व गुजरात में मूंगफली और बाजरा का ‘राष्ट्रीय शत्रु’ माना जाता है) सर्वोपरि हैं।

टिड्डी दल का एक वर्ग किलोमीटर का झुंड (जिसमें 4 से 8 करोड़ टिड्डियाँ होती हैं) एक ही दिन में उतना भोजन चट कर जाता है जितना 35,000 मनुष्यों के एक दिन के भोजन के बराबर होता है! वहीं सफेद लट के ‘C’ आकार के भृंगक जमीन के अंदर रहकर मूंगफली, बाजरा, ज्वार, गन्ना और मिर्च की जड़ों को काटकर पूरी फसल सुखा देते हैं।

04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)

बहुभक्षी नाशीकीट (Polyphagous Pests)
वे कीट जो विभिन्न वानस्पतिक कुलों (Multiple plant families) से संबंधित अनेक फसलों, सब्जियों और जंगली पौधों को अपना भोजन बनाते हैं; जैसे टिड्डी, सफेद लट, दीमक, कातरा, चने की फली छेदक (Helicoverpa) और तंबाकू की इल्ली (Spodoptera)।
यूवारोव का प्रावस्था सिद्धांत (Uvarov’s Phase Theory of Locusts — Sir Boris P. Uvarov, 1921)
इस सिद्धांत के अनुसार टिड्डी (Locust) दो पारिस्थितिक और शारीरिक रूप से भिन्न अवस्थाओं (Phases) में पाई जाती है: (1) ‘एकल प्रावस्था’ (Solitaria phase — जब आबादी कम होती है तो ये हरे/भूरे रंग के शांत टिड्डे की तरह अलग-अलग रहते हैं और झुंड नहीं बनाते), तथा (2) ‘यूथचारी / दल प्रावस्था’ (Gregaria phase — जब अनुकूल वर्षा से संख्या बढ़ती है और इनके पिछले पैरों के फीमर आपस में रगड़ते हैं तो ‘सेरोटोनिन’ हार्मोन निकलने से इनका रंग गुलाबी/पीला हो जाता है और ये करोड़ों के विनाशकारी उड़ने वाले दल/Swarm बना लेते हैं)।
हॉपर बैंड बनाम टिड्डी दल (Hopper Bands vs Locust Swarms)
यूथचारी टिड्डी के पंखहीन शिशुओं (Nymphs / Hoppers — काले व पीले रंग के) के जमीन पर पैदल मार्च करते हुए चलने वाले विशाल समूह को ‘हॉपर बैंड’ कहते हैं, जबकि पंखयुक्त वयस्कों के आकाश में हवा की दिशा में उड़ने वाले विशाल झुंड को ‘टिड्डी दल’ (Swarm) कहते हैं।
स्कारैबीफॉर्म ग्रब (Scarabaeiform / C-Shaped White Grub)
सफेद लट (Holotrichia spp.) का लार्वा जो मलाईदार सफेद रंग का, मांसल, अंग्रेजी के अक्षर ‘C’ के आकार में मुड़ा हुआ होता है, जिसका सिर भूरा व मजबूत जबड़ों वाला और वक्ष पर 3 जोड़ी पैर होते हैं तथा जो मिट्टी में जड़ों को खाता है।

05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)

1. रेगिस्तानी टिड्डी (Desert Locust — Schistocerca gregaria)

  • वैज्ञानिक नाम, कुल एवं गण: Schistocerca gregaria | कुल: Acrididae | गण: Orthoptera।
  • भारत में पाई जाने वाली टिड्डियों की 3 प्रमुख प्रजातियाँ:
    1. रेगिस्तानी टिड्डी (Desert Locust — Schistocerca gregaria): सबसे विनाशकारी अंतरराष्ट्रीय प्रवासी कीट।
    2. प्रवासी टिड्डी (Migratory Locust — Locusta migratoria): घास व अनाज फसलों पर।
    3. बंबई टिड्डी (Bombay Locust — Nomadacris succincta / Patanga succincta): पश्चिमी घाट व महाराष्ट्र में।
  • पहचान एवं प्रावस्था अंतर (Uvarov’s Phases):
    • एकल प्रावस्था (Solitaria): शिशु (Hopper) हरा होता है; वयस्क धूसर-भूरा होता है। (नुकसान नहीं करता)।
    • यूथचारी प्रावस्था (Gregaria): शिशु काला व पीला होता है; अपरिपक्व उड़ने वाला वयस्क गुलाबी (Pink — सबसे अधिक पेटू और विनाशकारी अवस्था!) होता है और प्रजनन के लिए परिपक्व वयस्क चमकीला पीला (Bright Yellow) हो जाता है।
  • जीवन चक्र (Biology):
    • मादा परिपक्व पीली टिड्डी अपने उदर के सिरे से नम रेतीली मिट्टी (Breeding grounds in Thar desert) में 10–15 cm गहरा छेद खोदकर झागदार प्लग के साथ अंड-फली (Egg pod — प्रति फली 60–120 चावल जैसे पीले अंडे) देती है। एक वर्ग मीटर में 1000 तक अंड-फलियाँ हो सकती हैं।
    • अंड-स्फुटन: 10–14 दिन में। शिशु (Hopper) 5 निर्मोचन अवस्थाओं (5 Nymphal instars in Gregaria; 6 in Solitaria) से गुजरकर 4–6 सप्ताह में पंखयुक्त वयस्क बनता है। (अपूर्ण कायांतरण: Egg → Nymph/Hopper → Adult)।
  • क्षति की प्रकृति: शिशु (Hopper bands) और वयस्क (Swarms — विशेषकर गुलाबी वयस्क) दोनों फसलों, पेड़ों की पत्तियों, फूलों, फलों और यहाँ तक कि हरी छाल तक को पूरी तरह चबाकर पेड़ को ठूँठ बना देते हैं।
  • टिड्डी निगरानी एवं प्रबंधन (Locust Management & LWO):
    • अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय निगरानी: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर FAO (रोम) की ‘Desert Locust Information Service (DLIS)’ और भारत में 1939 में स्थापित ‘टिड्डी चेतावनी संगठन’ (Locust Warning Organization — LWO, मुख्यालय: जोधपुर, राजस्थान; प्रशासनिक नियंत्रण: DPPQS फरीदाबाद) अपने 10 सर्किल कार्यालयों से थार मरुस्थल (Scheduled Desert Area) में निगरानी करता है।
    • भौतिक व यांत्रिक उपाय: अंड-फलियों को जुताई कर नष्ट करना; हॉपर बैंड के आगे 45 cm गहरी व 30 cm चौड़ी खंदक (Trench) खोदकर उसमें दबाना; ढोल/थाली/डीजे व ट्रैक्टर के साइलेंसर की तेज आवाज से दल को फसल पर बैठने से रोकना।
    • जैविक एवं वानस्पतिक नियंत्रण: खड़ी फसल पर 5% नीम निंबोली अर्क (NSKE 5% / Azadirachtin 1500 ppm) का छिड़काव (अचूक भक्षण-रोधी!) तथा कीट-रोगजनक कवक Metarhizium acridum (Green Muscle @ 25–50 g/ha ULV)।
    • रासायनिक नियंत्रण (ULV & Dusting): अंड-स्थलों व हॉपर बैंड पर फेनवेलरेट 0.4% DP या क्विनालफॉस 1.5% DP (@ 20–25 kg/ha) का भुरकाव; तथा उड़ते या पेड़ों पर बैठे टिड्डी दलों पर वाहन-माउंटेड अल्ट्रा-लो वॉल्यूम स्प्रेयर, ड्रोन या हेलीकॉप्टर से मैलाथियान 96% ULV (@ 1.0 L/ha) या लैम्ब्डा-साइहैलोथ्रिन 5% EC (@ 400 mL/ha) या क्लोरपायरीफॉस 20% EC (@ 1.2 L/ha) या डेल्टामेथ्रिन 2.8% EC (@ 500 mL/ha) का छिड़काव।

2. खरीफ का फुदका / फड़का (Kharif Grasshopper / Phadka — Hieroglyphus nigrorepletus)

  • वैज्ञानिक नाम, कुल एवं गण: Hieroglyphus nigrorepletus (फड़का — ज्वार, बाजरा, मक्का में) एवं Hieroglyphus banian (धान का हरा फुदका) | कुल: Acrididae | गण: Orthoptera।
  • पहचान एवं जीवविज्ञान: हरा-भूरा फुदका जिसके वक्ष (Pronotum) पर काले रंग की धारियाँ होती हैं और अधिकांश वयस्क छोटे पंखों वाले (Brachypterous) होते हैं जो लंबी उड़ान नहीं भर सकते।
  • एकवर्षीय जीवन चक्र (Univoltine): वर्ष में केवल 1 पीढ़ी होती है। मादा अक्टूबर-नवंबर में खेत की मेड़ों (Bunds) की कड़ी मिट्टी में 5–8 cm नीचे अंड-फलियाँ (Egg pods) देती है। अंडे पूरी सर्दी व गर्मी सुप्तावस्था में रहते हैं और जून-जुलाई में पहली मानसूनी वर्षा होने पर ही फूटते हैं।
  • प्रबंधन: (1) ग्रीष्म ऋतु में मेड़ों को छीलकर व तोड़कर नई मेड़ बनाना ताकि अंड-फलियाँ धूप में नष्ट हो जाएँ; (2) मानसून की पहली वर्षा के 7–10 दिन बाद मेड़ों की घास पर ही शिशुओं पर क्विनालफॉस 1.5% DP या फेनवेलरेट 0.4% DP (@ 25 kg/ha) का भुरकाव करना।

3. सफेद लट / भृंगक (White Grub / Root Grub / June Beetle — Holotrichia consanguinea)

  • वैज्ञानिक नाम, कुल एवं गण: Holotrichia consanguinea (उत्तर व पश्चिम भारत — राजस्थान, गुजरात में प्रमुख) एवं Holotrichia serrata (दक्षिण व मध्य भारत — गन्ना व ज्वार में) | कुल: Melolonthidae (Scarabaeidae) | गण: Coleoptera।
  • परपोषी पौधे (Two-Host Requirement):
    • लार्वा (सफेद लट — मुख्य हानिकारक अवस्था): मूंगफली, बाजरा, ज्वार, मक्का, गन्ना, मिर्च, आलू व अदरक की जड़ें (Roots) खाता है।
    • वयस्क भृंग (May-June Beetle / Chafer Beetle): रात में खेजड़ी (Prosopis cineraria), बेर (Ziziphus), नीम (Azadirachta), बबूल और सहजन जैसे वृक्षों की पत्तियाँ खाता है!
  • जीवन चक्र (Univoltine — वर्ष में केवल 1 पीढ़ी, पूर्ण कायांतरण):
    1. मानसूनी भृंग निर्गमन (Beetle Emergence — सबसे महत्वपूर्ण व्यवहार): मई-जून में प्री-मानसून या मानसून की पहली अच्छी वर्षा (>20 extmm) होने के बाद शाम को गोधूलि बेला (Dusk: 7:15 PM से 8:00 PM के बीच) गहरे भूरे रंग के वयस्क भृंग मिट्टी से बाहर निकलकर पास के खेजड़ी, बेर या नीम के पेड़ों पर इकट्ठा होते हैं, संभोग (Mating) करते हैं और रात भर पत्तियाँ खाकर सुबह सूर्योदय से पहले वापस मिट्टी में घुस जाते हैं।
    2. अंडरोपण एवं ग्रब अवस्था: मादा भृंग गीली भुरभुरी मिट्टी में 10 cm नीचे 20–40 सफेद अंडे देती है। 7–10 दिन में ‘C’ आकार की सफेद लट निकलती है जो जुलाई से अक्टूबर तक (8–10 सप्ताह) फसलों की जड़ें काटती है (तीसरी अवस्था का ग्रब सबसे भयानक नुकसान करता है)।
    3. प्यूपा एवं शीतनिद्रा: नवंबर में ग्रब मिट्टी में 30–60 cm गहराई पर जाकर प्यूपा और वयस्क भृंग बनकर अगली बारिश तक मिट्टी में ही सुप्त पड़ा रहता है।
  • क्षति के लक्षण: खेत में पौधे टुकड़ों (Patches) में अचानक मुरझाकर सूखने लगते हैं; सूखे पौधे को खींचने पर वह बिना किसी जोर के आसानी से हाथ में आ जाता है क्योंकि उसकी मूसला जड़ व फलियाँ (मूंगफली के पॉप) पूरी तरह कटी होती हैं।
  • सफेद लट का समन्वित प्रबंधन (Integrated White Grub Management):
    1. सामुदायिक वयस्क भृंग नियंत्रण (सबसे सस्ता व प्रभावी!): मानसून की पहली बारिश के तुरंत बाद लगातार 3–4 दिन तक खेत के आसपास खड़े खेजड़ी, बेर और नीम के पेड़ों पर क्लोरपायरीफॉस 20% EC (2.0 mL/L) या क्विनालफॉस 25% EC (2.0 mL/L) या कार्बारिल 50% WP (4 g/L) का छिड़काव करना तथा रात 8–10 बजे प्रकाश पाश (Light trap) व बांस से पेड़ों को हिलाकर भृंगों को केरोसिन मिले पानी में गिराकर मारना।
    2. बीज उपचार (Seed Treatment — अनिवार्य): मूंगफली या बाजरा की बुवाई से पूर्व इमिडाक्लोप्रिड 600 FS (@ 6.5 mL/kg बीज) या क्लोरपायरीफॉस 20% EC (@ 12.5–25 mL/kg बीज) या थायोमेथोक्साम 30 FS (@ 4 mL/kg बीज) या क्लोथियानिडिन 50 WDG (@ 2 g/kg बीज) से बीज उपचार।
    3. जैविक नियंत्रण (Biological Control): गोबर की खाद में मिलाकर कीट-रोगजनक कवक Metarhizium anisopliae (हरा मस्कर्डाइन) या Beauveria bassiana (@ 5 kg/ha) या कीट-रोगजनक सूत्रकृमि Heterorhabditis indica (EPN) तथा जीवाणु Bacillus popilliae (जिससे सफेद लट में प्रसिद्ध ‘मिल्की डिजीज / Milky disease’ होता है) का प्रयोग।
    4. खड़ी फसल में मृदा उपचार: सिंचाई के पानी के साथ या कतारों में रेत में मिलाकर फिप्रोनिल 0.3% GR (@ 25 kg/ha) या क्लोरपायरीफॉस 20% EC (@ 4.0 L/ha) या फोरेट/कार्बोफ्यूरान के सुरक्षित विकल्प के रूप में इमिडाक्लोप्रिड + फिप्रोनिल (Lesenta 80 WG @ 125–150 g/ha) का प्रयोग।

06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)

व्याख्यान 06 के तीनों बहुभक्षी कीटों का वर्गिकी सारांश (Taxonomic Summary):

  • 1. रेगिस्तानी टिड्डी (Schistocerca gregaria): गण Orthoptera, कुल Acrididae (अपूर्ण कायांतरण; शिशु व वयस्क दोनों हानिकारक)।
  • 2. फड़का / खरीफ ग्रासहॉपर (Hieroglyphus nigrorepletus): गण Orthoptera, कुल Acrididae (वर्ष में 1 पीढ़ी; मेड़ों में अंड-फली)।
  • 3. सफेद लट (Holotrichia consanguinea / H. serrata): गण Coleoptera, कुल Melolonthidae (पूर्ण कायांतरण; वर्ष में 1 पीढ़ी; फसल में केवल ग्रब जड़ें काटता है और वयस्क भृंग खेजड़ी/बेर की पत्तियाँ खाता है)।

07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)

  • ‘परपोषी वृक्ष पर वयस्क भृंग संहार’ का सिद्धांत (Principle of Host-Tree Beetle Suppression in White Grub): मिट्टी में 10 cm नीचे छिपे करोड़ों सफेद लटों को मारने के लिए पूरे खेत की मिट्टी में कीटनाशक डालना अत्यंत महँगा है, किंतु मानसून की पहली बारिश की शाम को जब सभी मादा भृंग अंडे देने से पहले खेजड़ी और बेर के गिने-चुने पेड़ों पर इकट्ठा होते हैं, तब केवल उन पेड़ों पर स्प्रे करने से 90% प्रजनन चक्र वहीं समाप्त हो जाता है!

08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)

क्षेत्रीय निदान केस स्टडी: राजस्थान के रेतीले क्षेत्रों (सीकर, नागौर, जोधपुर, बीकानेर) में मूंगफली का सूखना

यदि अगस्त माह में मूंगफली के खेत में पौधे अचानक मुरझा रहे हैं और उखाड़ने पर जड़ का निचला सिरा सीधा कटा हुआ (Cleanly severed taproot) मिले तथा मिट्टी खोदने पर अंग्रेजी के ‘C’ आकार की सफेद मांसल लट (भूरा सिर व 3 जोड़ी वक्षीय पैर) मिले, तो यह सफेद लट (Holotrichia consanguinea) का प्रकोप है (जबकि यदि जड़ में सुरंग हो और मिट्टी की नलियाँ भरी हों, तो वह दीमक का प्रकोप होता है)।

09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)

तुलनात्मक सारणी 6.1: रेगिस्तानी टिड्डी, खरीफ फड़का एवं सफेद लट का तुलनात्मक अध्ययन
विशेषता रेगिस्तानी टिड्डी (Desert Locust) खड़िया / फड़का (Phadka Grasshopper) सफेद लट (White Grub)
1. वैज्ञानिक नाम Schistocerca gregaria Hieroglyphus nigrorepletus Holotrichia consanguinea
2. गण एवं कुल Orthoptera : Acrididae Orthoptera : Acrididae Coleoptera : Melolonthidae
3. हानिकारक अवस्था शिशु (Hopper) एवं वयस्क (दोनों पर्ण-भक्षी) शिशु एवं वयस्क (दोनों पर्ण-भक्षी) फसल में केवल ग्रब (जड़ भक्षी); वयस्क वृक्षों (खेजड़ी/बेर) पर
4. अंडरोपण स्थल नम रेतीली भूमि में 10–15 cm नीचे (Egg pods) खेत की मेड़ों (Bunds) की कड़ी मिट्टी में भुरभुरी मिट्टी में 10 cm नीचे एकल अंडे
5. विशिष्ट प्रबंधन LWO निगरानी, खंदक खोदना, NSKE 5%, मैलाथियान 96% ULV गर्मी में मेड़ें तोड़ना, मेड़ों पर क्विनालफॉस 1.5% DP भुरकाव पहली बारिश पर खेजड़ी/बेर पर स्प्रे, इमिडाक्लोप्रिड बीज उपचार, Metarhizium व Bacillus popilliae

10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)

बहुभक्षी कीट प्रबंधन के मानक अनुप्रयोग सूत्र एवं दरें
  • 1. टिड्डी दल हेतु ULV छिड़काव मानक:Malathion 96\% ULV=1.0 Litre/ha (बिना पानी के)
  • 2. मूंगफली में सफेद लट हेतु बीज उपचार (Seed Treatment per kg Seed):
    • Imidacloprid 600 FS=6.5 mL/kg seed
    • Chlorpyrifos 20\% EC=12.5–25.0 mL/kg seed
  • 3. सफेद लट में जैविक मिल्की डिजीज जीवाणु:Milky Spore Disease Agent=Bacillus popilliae

11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)

Lecture 06: बहुभक्षी कीट — टिड्डी, फड़का एवं सफेद लट
रेगिस्तानी टिड्डी (Schistocerca gregaria)
  • कुल: Acrididae, गण: Orthoptera | LWO मुख्यालय: जोधपुर (1939)
  • यूवारोव का प्रावस्था सिद्धांत (1921): Solitaria (हरा) बनाम Gregaria
  • गुलाबी अपरिपक्व वयस्क सर्वाधिक विनाशकारी | परिपक्व वयस्क: पीला
  • नियंत्रण: खंदक, NSKE 5%, Metarhizium acridum, मैलाथियान 96% ULV
फड़का / ग्रासहॉपर (Hieroglyphus)
  • H. nigrorepletus (फड़का) एवं H. banian (धान का फुदका)
  • वर्ष में केवल 1 पीढ़ी (Univoltine) | मेड़ों में अंड-फली
  • गर्मी में मेड़ों की जुताई व मानसून पर मेड़ों पर क्विनालफॉस 1.5% DP
सफेद लट (Holotrichia consanguinea)
  • कुल: Melolonthidae, गण: Coleoptera | मूंगफली व बाजरा का मुख्य शत्रु
  • ‘C’ आकार का सफेद मांसल ग्रब जमीन में जड़ें काटता है (1 पीढ़ी/वर्ष)
  • वयस्क भृंग पहली बारिश के बाद शाम (7:15-8 PM) को खेजड़ी/बेर पर मिलते हैं
सफेद लट का एकीकृत प्रबंधन
  • 1. पहली बारिश पर खेजड़ी/बेर/नीम वृक्षों पर क्लोरपायरीफॉस/कार्बारिल स्प्रे
  • 2. बीज उपचार: इमिडाक्लोप्रिड 600 FS @ 6.5 mL/kg या क्लोरपायरीफॉस
  • 3. जैविक: Metarhizium anisopliae, EPN एवं Bacillus popilliae (मिल्की डिजीज)
  • 4. मृदा में फिप्रोनिल 0.3% GR या Lesenta (इमिडाक्लोप्रिड+फिप्रोनिल)

12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)

सफेद लट (Holotrichia consanguinea) का एकवर्षीय जीवन चक्र एवं प्रहार-बिंदु (Annual Life Cycle & Intervention Points of White Grub)
Step 1
चरण 1 (मई-जून: पहली मानसूनी वर्षा): शाम 7:15–8:00 बजे मिट्टी से वयस्क भृंगों का निर्गमन और खेजड़ी/बेर/नीम के पेड़ों पर मिलन [प्रहार बिंदु 1: प्रकाश पाश + परपोषी पेड़ों पर क्लोरपायरीफॉस स्प्रे]
⬇
Step 2
चरण 2 (जुलाई: बुवाई समय): मादा भृंग द्वारा मिट्टी में अंडे देना [प्रहार बिंदु 2: मूंगफली/बाजरा बीज का इमिडाक्लोप्रिड 600 FS @ 6.5 mL/kg से बीज उपचार + गोबर खाद में Metarhizium]
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Step 3
चरण 3 (अगस्त-अक्टूबर: ग्रब अवस्था): ‘C’ आकार की लटों (विशेषकर तृतीय अवस्था) द्वारा फसलों की जड़ें काटना [प्रहार बिंदु 3: खड़ी फसल में फिप्रोनिल/इमिडाक्लोप्रिड या क्लोरपायरीफॉस सिंचाई के साथ]
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Step 4
चरण 4 (नवंबर से मई: प्यूपा व सुप्त वयस्क): मिट्टी में 30–60 cm गहराई पर प्यूपा व सुप्त भृंग [प्रहार बिंदु 4: ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई]

13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)

  • टिड्डियों में ‘प्रावस्था सिद्धांत’ (Phase Theory — Solitaria एवं Gregaria प्रावस्था) का प्रतिपादन वर्ष 1921 में ‘सर बोरिस पी. यूवारोव’ (Sir B.P. Uvarov) ने किया था।
  • भारत में ‘टिड्डी चेतावनी संगठन’ (Locust Warning Organization — LWO) की स्थापना 1939 में हुई थी और इसका क्षेत्रीय मुख्यालय ‘जोधपुर (राजस्थान)’ में स्थित है।
  • यूथचारी टिड्डी की ‘गुलाबी अपरिपक्व वयस्क अवस्था’ (Pink immature adult swarm) फसलों को सर्वाधिक नुकसान पहुँचाती है।
  • उत्तर और पश्चिम भारत (विशेषकर राजस्थान व गुजरात में मूंगफली और बाजरा) में सफेद लट की प्रमुख प्रजाति ‘Holotrichia consanguinea’ है, जिसका पसंदीदा वयस्क परपोषी वृक्ष ‘खेजड़ी’ (Prosopis cineraria) और ‘बेर’ है।
  • सफेद लट (White grub) में प्रसिद्ध ‘मिल्की डिजीज’ (Milky spore disease) जीवाणु ‘Bacillus popilliae’ के कारण होता है।

14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)

त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):

  • रेगिस्तानी टिड्डी: Schistocerca gregaria (Orthoptera: Acrididae); LWO जोधपुर; यूवारोव प्रावस्था सिद्धांत; नियंत्रण: NSKE 5%, Metarhizium acridum, मैलाथियान 96% ULV।
  • फड़का: Hieroglyphus nigrorepletus; मेड़ों में अंड-फली; वर्ष में 1 पीढ़ी; गर्मी में मेड़ें तोड़ना।
  • सफेद लट: Holotrichia consanguinea (Coleoptera: Melolonthidae); C-आकार ग्रब; खेजड़ी/बेर पर शाम को भृंग; इमिडाक्लोप्रिड बीज उपचार व Bacillus popilliae।

15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)

1. भारत में रेगिस्तानी टिड्डी (Schistocerca gregaria) की निगरानी और नियंत्रण करने वाले ‘टिड्डी चेतावनी संगठन’ (Locust Warning Organization — LWO) का क्षेत्रीय मुख्यालय कहाँ स्थित है?
(A) जोधपुर (राजस्थान)
(B) शिमला
(C) चेन्नई
(D) गुवाहाटी
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) जोधपुर (राजस्थान)
व्याख्या: LWO (स्थापना 1939) का प्रशासनिक मुख्यालय फरीदाबाद (DPPQS) और मुख्य क्षेत्रीय संचालन मुख्यालय जोधपुर (राजस्थान) में है।
2. वर्ष 1921 में टिड्डियों का प्रसिद्ध ‘प्रावस्था सिद्धांत’ (Phase Theory — Solitaria एवं Gregaria प्रावस्था) किस वैज्ञानिक ने प्रतिपादित किया था?
(A) सर बोरिस पी. यूवारोव (Sir B.P. Uvarov)
(B) चार्ल्स डार्विन
(C) पॉल मुलर
(D) वी.एम. स्टर्न
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) सर बोरिस पी. यूवारोव (Sir B.P. Uvarov)
व्याख्या: रूसी-ब्रिटिश कीटविज्ञानी सर बी.पी. यूवारोव ने 1921 में टिड्डियों के एकल और यूथचारी प्रावस्था परिवर्तन का सिद्धांत दिया था।
3. राजस्थान और गुजरात में मूंगफली व बाजरा की जड़ों को काटकर भारी नुकसान पहुँचाने वाली ‘सफेद लट’ (White Grub) का वैज्ञानिक नाम और कुल क्या है?
(A) होलोट्राइकिया कोंसैंग्विनिया (Holotrichia consanguinea — कुल Melolonthidae, गण Coleoptera)
(B) शिस्टोसर्का ग्रेगेरिया (Acrididae)
(C) ओडोंटोटर्मिस ओबेसस (Termitidae)
(D) एमसैक्टा मूरेई (Arctiidae)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) होलोट्राइकिया कोंसैंग्विनिया (Holotrichia consanguinea — कुल Melolonthidae, गण Coleoptera)
व्याख्या: Holotrichia consanguinea उत्तर-पश्चिम भारत की प्रमुख सफेद लट प्रजाति है जबकि H. serrata दक्षिण भारत में प्रमुख है।
4. सफेद लट (White grub) के वयस्क भृंग मानसून की पहली वर्षा के बाद शाम को (7:15–8:00 PM) मिट्टी से निकलकर मिलन और भोजन के लिए किस पेड़ पर सर्वाधिक एकत्रित होते हैं?
(A) खेजड़ी (Prosopis cineraria), बेर (Ziziphus) एवं नीम
(B) नारियल
(C) देवदार
(D) बांस
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) खेजड़ी (Prosopis cineraria), बेर (Ziziphus) एवं नीम
व्याख्या: खेजड़ी और बेर सफेद लट के वयस्क भृंगों के सबसे पसंदीदा परपोषी वृक्ष हैं जिन पर क्लोरपायरीफॉस का छिड़काव कर भृंगों को मारा जाता है।
5. सफेद लट (White grub) के लार्वा में प्रसिद्ध जीवाणु रोग ‘मिल्की डिजीज’ (Milky disease) किस जीवाणु द्वारा उत्पन्न किया जाता है?
(A) बैसिलस पोपिली (Bacillus popilliae)
(B) राइजोबियम
(C) एजोटोबैक्टर
(D) ई. कोलाई
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) बैसिलस पोपिली (Bacillus popilliae)
व्याख्या: Bacillus popilliae सफेद लट के हीमोलिम्फ (रक्त) को दूधिया सफेद कर उसे मार देता है जिसे ‘Milky disease’ कहते हैं।
6. यूथचारी रेगिस्तानी टिड्डी दल (Gregarious Locust Swarm) की कौन-सी अवस्था सबसे अधिक पेटू (Voracious feeder) और फसलों के लिए सर्वाधिक विनाशकारी होती है?
(A) गुलाबी अपरिपक्व वयस्क (Pink immature adult)
(B) अंडा
(C) एकल हरा टिड्डा
(D) मृत वयस्क
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) गुलाबी अपरिपक्व वयस्क (Pink immature adult)
व्याख्या: गुलाबी रंग के युवा उड़ने वाले वयस्क टिड्डे (Pink adults) सबसे लंबी उड़ान भरते हैं और सर्वाधिक मात्रा में वनस्पति खाते हैं।
7. खरीफ फुदका / फड़का (Hieroglyphus nigrorepletus) और सफेद लट (Holotrichia consanguinea) एक वर्ष में कितनी पीढ़ियाँ (Generations per year) पूरी करते हैं?
(A) वर्ष में केवल 1 पीढ़ी (Univoltine)
(B) वर्ष में 12 पीढ़ियाँ
(C) वर्ष में 50 पीढ़ियाँ
(D) 10 वर्ष में 1 पीढ़ी
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) वर्ष में केवल 1 पीढ़ी (Univoltine)
व्याख्या: फड़का और सफेद लट दोनों एकवर्षीय (Univoltine) कीट हैं जो वर्ष में केवल एक ही पीढ़ी पूरी करते हैं।
8. फड़का कीट (Hieroglyphus nigrorepletus) की मादा अक्टूबर-नवंबर में अपनी अंड-फलियाँ (Egg pods) कहाँ देती है?
(A) खेत की मेड़ों (Bunds) की कड़ी मिट्टी में 5–8 cm नीचे
(B) पत्तियों की नोक पर
(C) पानी की सतह पर
(D) फूलों के अंदर
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) खेत की मेड़ों (Bunds) की कड़ी मिट्टी में 5–8 cm नीचे
व्याख्या: फड़का के अंडे खेत की मेड़ों में रहते हैं, इसलिए गर्मी में मेड़ों को छीलकर तोड़ना इसके नियंत्रण का प्रमुख उपाय है।
9. मूंगफली की फसल को सफेद लट से बचाने के लिए बुवाई से पूर्व इमिडाक्लोप्रिड 600 FS से बीज उपचार की अनुशंसित दर क्या है?
(A) 6.5 mL प्रति किलोग्राम बीज
(B) 500 mL प्रति किलोग्राम बीज
(C) 0.1 mL प्रति टन बीज
(D) 10 लीटर प्रति किलोग्राम बीज
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) 6.5 mL प्रति किलोग्राम बीज
व्याख्या: इमिडाक्लोप्रिड 600 FS @ 6.5 mL/kg बीज (या क्लोरपायरीफॉस 20 EC @ 12.5–25 mL/kg बीज) सफेद लट के विरुद्ध मानक बीज उपचार है।
10. टिड्डी दल के जैविक नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर FAO द्वारा अनुशंसित विशिष्ट कीट-रोगजनक कवक (Mycoinsecticide — ‘Green Muscle’) कौन-सा है?
(A) मेटाराइजियम एक्रिडम (Metarhizium acridum / M. anisopliae var. acridum)
(B) पक्सीनिया ग्रैमिनिस
(C) एस्परजिलस फ्लेवस
(D) राइजोपस
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer)
सही उत्तर: (A) मेटाराइजियम एक्रिडम (Metarhizium acridum / M. anisopliae var. acridum)
व्याख्या: Metarhizium acridum टिड्डी और ग्रासहॉपर कुल के विरुद्ध अत्यंत विशिष्ट और पर्यावरण-सुरक्षित जैव-कीटनाशक है।

16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)

(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)

  1. टिड्डी चेतावनी संगठन (LWO, स्थापना 1939) का मुख्य क्षेत्रीय मुख्यालय ‘जोधपुर (राजस्थान)’ में स्थित है।
  2. टिड्डियों में ‘प्रावस्था सिद्धांत’ (Solitaria एवं Gregaria प्रावस्था) का प्रतिपादन 1921 में ‘सर बी.पी. यूवारोव’ ने किया था।
  3. उत्तर-पश्चिम भारत में मूंगफली व बाजरा की सफेद लट का वैज्ञानिक नाम ‘Holotrichia consanguinea’ (कुल Melolonthidae) है।
  4. सफेद लट के वयस्क भृंग पहली मानसूनी बारिश की शाम को ‘खेजड़ी, बेर और नीम’ के पेड़ों पर मिलन व भोजन हेतु एकत्रित होते हैं।
  5. सफेद लट में ‘मिल्की डिजीज’ जीवाणु ‘Bacillus popilliae’ द्वारा होती है।

(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)

1. भारत में पाई जाने वाली टिड्डियों की तीन प्रजातियों के वैज्ञानिक नाम लिखिए।
उत्तर: (1) रेगिस्तानी टिड्डी: Schistocerca gregaria, (2) प्रवासी टिड्डी: Locusta migratoria, और (3) बंबई टिड्डी: Nomadacris (Patanga) succincta।
2. सफेद लट की दो प्रमुख भारतीय प्रजातियों और उनके गण व कुल का नाम लिखिए।
उत्तर: प्रजातियाँ: Holotrichia consanguinea और Holotrichia serrata; गण: Coleoptera; कुल: Melolonthidae (Scarabaeidae)।
3. यूवारोव के प्रावस्था सिद्धांत की दोनों प्रावस्थाओं के नाम लिखिए।
उत्तर: (1) एकल प्रावस्था (Solitaria phase) और (2) यूथचारी / दल प्रावस्था (Gregaria phase)।
4. सफेद लट के वयस्क भृंगों के तीन पसंदीदा परपोषी वृक्षों के नाम लिखिए।
उत्तर: (1) खेजड़ी (Prosopis cineraria), (2) बेर (Ziziphus mauritiana), और (3) नीम (Azadirachta indica)।
5. फड़का (Phadka grasshopper) का वैज्ञानिक नाम लिखिए।
उत्तर: Hieroglyphus nigrorepletus (कुल: Acrididae, गण: Orthoptera)।

(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)

1. रेगिस्तानी टिड्डी (Schistocerca gregaria) के संदर्भो में यूवारोव के ‘प्रावस्था सिद्धांत’ (Phase Theory) को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: सर बी.पी. यूवारोव (1921) के अनुसार रेगिस्तानी टिड्डी पर्यावरण और जनसंख्या घनत्व के अनुसार दो रूपों में रहती है: (1) एकल प्रावस्था (Solitaria phase): जब संख्या कम होती है तो शिशु हरे रंग के और वयस्क भूरे रंग के होते हैं; ये अलग-अलग रहते हैं और फसलों को गंभीर नुकसान नहीं पहुँचाते। (2) यूथचारी प्रावस्था (Gregaria phase): जब अच्छी वर्षा से प्रजनन बढ़ता है और टिड्डे पास-पास आकर टकराते हैं, तो हार्मोनल परिवर्तन से शिशु काले-पीले (Hopper bands) और अपरिपक्व वयस्क गुलाबी व परिपक्व वयस्क चमकीले पीले हो जाते हैं तथा करोड़ों के झुंड (Swarms) में उड़कर फसलों को नष्ट कर देते हैं।
2. रेगिस्तानी टिड्डी के समन्वित प्रबंधन (IPM) के प्रमुख उपाय लिखिए।
उत्तर: (1) निगरानी: LWO (जोधपुर) द्वारा थार मरुस्थल में प्रजनन स्थलों का सर्वेक्षण। (2) यांत्रिक उपाय: अंड-फलियों को जुताई कर नष्ट करना तथा पैदल चलते हॉपर बैंड के आगे 45 cm गहरी खंदक (Trench) खोदकर उन्हें दबाना। (3) वानस्पतिक व जैविक उपाय: खड़ी फसल को बचाने हेतु तुरंत 5% नीम निंबोली अर्क (NSKE 5% — भक्षण-रोधी) का स्प्रे तथा Metarhizium acridum कवक का प्रयोग। (4) रासायनिक उपाय: हॉपर बैंड पर फेनवेलरेट 0.4% DP (20–25 kg/ha) का भुरकाव तथा टिड्डी दल पर ड्रोन/ULV स्प्रेयर से मैलाथियान 96% ULV (1 L/ha) या क्लोरपायरीफॉस 20% EC का छिड़काव।
3. सफेद लट (Holotrichia consanguinea) के एकवर्षीय जीवन चक्र और मौसमी व्यवहार का वर्णन कीजिए।
उत्तर: सफेद लट वर्ष में केवल एक पीढ़ी (Univoltine) पूरी करती है। मई-जून में मानसून की पहली अच्छी वर्षा के बाद शाम को गोधूलि बेला (7:15–8:00 PM) में वयस्क भूरे भृंग मिट्टी से बाहर निकलकर खेजड़ी, बेर व नीम के पेड़ों पर मिलन और भोजन के लिए एकत्रित होते हैं तथा सुबह होने से पहले वापस मिट्टी में घुस जाते हैं। मादा गीली मिट्टी में 10 cm नीचे अंडे देती है। 7–10 दिन में ‘C’ आकार की सफेद लट निकलती है जो जुलाई से अक्टूबर तक मूंगफली, बाजरा, ज्वार व गन्ने की जड़ें काटती है और नवंबर में 30–60 cm गहराई पर प्यूपा व सुप्त वयस्क बनकर अगली बारिश तक मिट्टी में रहती है।
4. मूंगफली और बाजरा की फसल में सफेद लट (White grub) के समन्वित प्रबंधन (IPM) का पैकेज लिखिए।
उत्तर: (1) वयस्क भृंग संहार: मानसून की पहली बारिश के तुरंत बाद खेत के आसपास के खेजड़ी, बेर व नीम के पेड़ों पर क्लोरपायरीफॉस 20% EC (2 mL/L) का छिड़काव करना और प्रकाश पाश लगाना। (2) बीज उपचार: बुवाई से पूर्व मूंगफली/बाजरा के बीज को इमिडाक्लोप्रिड 600 FS (@ 6.5 mL/kg बीज) या क्लोरपायरीफॉस 20% EC (@ 12.5–25 mL/kg बीज) से उपचारित करना। (3) जैविक नियंत्रण: गोबर की खाद में Metarhizium anisopliae (@ 5 kg/ha) या Bacillus popilliae व EPN मिलाना। (4) खड़ी फसल में सिंचाई के साथ फिप्रोनिल 0.3% GR (25 kg/ha) या क्लोरपायरीफॉस (4 L/ha) देना।
5. फड़का कीट (Hieroglyphus nigrorepletus) की क्षति की प्रकृति और नियंत्रण के उपाय लिखिए।
उत्तर: फड़का के शिशु और वयस्क दोनों ज्वार, बाजरा, मक्का और धान की पत्तियों को किनारों से खाकर केवल मध्य शिरा (Midrib) छोड़ देते हैं और कोमल भुट्टों/सिट्टों को भी काट देते हैं। चूँकि इसकी मादा अक्टूबर-नवंबर में खेत की मेड़ों (Bunds) में अंड-फलियाँ देती है और वर्ष में केवल 1 पीढ़ी होती है, इसलिए: (1) ग्रीष्म ऋतु में मेड़ों को छीलकर व तोड़कर अंड-फलियाँ नष्ट करना, और (2) पहली बारिश के बाद मेड़ों की घास पर उभरे शिशुओं पर क्विनालफॉस 1.5% DP या फेनवेलरेट 0.4% DP (@ 25 kg/ha) बुरकना इसका अचूक नियंत्रण है।

(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)

1. रेगिस्तानी टिड्डी (Schistocerca gregaria) के वर्गीकरण, यूवारोव के प्रावस्था सिद्धांत (Solitaria एवं Gregaria प्रावस्था), जीवन चक्र, क्षति की प्रकृति तथा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके समन्वित प्रबंधन (LWO, यांत्रिक, वानस्पतिक, जैविक एवं ULV रासायनिक) का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: टिड्डी की तीनों प्रजातियों, यूवारोव के सिद्धांत, हॉपर बैंड बनाम गुलाबी/पीले स्वार्म, अंड-फली निर्माण और LWO जोधपुर के प्रबंधन प्रोटोकॉल की पूर्ण व्याख्या करें।
2. सफेद लट (White Grub — Holotrichia consanguinea एवं H. serrata) को खरीफ फसलों का ‘राष्ट्रीय नाशीकीट’ क्यों कहा जाता है? इसके जीवन चक्र, भृंग निर्गमन व्यवहार, क्षति लक्षणों और सामुदायिक IPM कार्यक्रम का प्रवाह चित्र सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: प्रवाह चित्र सहित मानसूनी भृंग निर्गमन (खेजड़ी/बेर पर मिलन), ‘C’ आकार के ग्रब द्वारा जड़ कटाई और चारों प्रबंधन चरणों (वृक्ष स्प्रे, बीज उपचार, Metarhizium/Bacillus popilliae एवं खड़ी फसल उपचार) का विस्तार से वर्णन करें।
3. तुलनात्मक सारणी बनाते हुए रेगिस्तानी टिड्डी, खरीफ फड़का और सफेद लट के वैज्ञानिक नाम, कुल, गण, हानिकारक अवस्था, अंडरोपण स्थल और प्रमुख नियंत्रण उपायों की तुलना कीजिए।
उत्तर रूपरेखा: तुलनात्मक सारणी 6.1 के सभी बिंदुओं को विस्तार से प्रस्तुत करें।

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