GPB 311 Lecture 08: बैंगन (Brinjal) और भिंडी (Okra) में फसल सुधार: उत्पत्ति, पुष्प जीवविज्ञान, हेटेरोस्टाइली एवं प्रजनन

GPB 311 · Kharif Crop Improvement Smart Notes
बैंगन (Brinjal) और भिंडी (Okra) में फसल सुधार: उत्पत्ति, पुष्प जीवविज्ञान, हेटेरोस्टाइली एवं प्रजनन
Crop Improvement in Brinjal (Eggplant) and Okra (Bhendi)
Brinjal / Eggplant (बैंगन – Solanum melongena), Okra / Bhendi (भिंडी – Abelmoschus esculentus)
विषय सूची · Quick Navigation
अधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesफसल सुधार के विस्तृत विषय · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्सअधिगम उद्देश्य · Learning Objectives
- बैंगन (Solanum melongena, 2n=24) की भारतीय उत्पत्ति, जंगली पूर्वज (Solanum incanum), 'विषमवर्तिकात्व' (Heterostyly — वर्तिका की लंबाई के आधार पर 4 प्रकार के फूल) और संकर प्रजनन को समझना।
- भिंडी (Abelmoschus esculentus, 2n=130) की बहुगुणित प्रकृति, जंगली प्रजातियों (A. manihot, A. caillei), डॉ. हरभजन सिंह द्वारा विकसित 'पूसा सावनी' और 'परभणी क्रांति' (YVMV प्रतिरोध प्रजनन) का अध्ययन करना।
प्रस्तावना · Introduction
सब्जी फसलों में बैंगन (Brinjal / Eggplant / Aubergine – Solanum melongena, 'गरीब का सब्जी राजा') और भिंडी (Okra / Lady's Finger – Abelmoschus esculentus, 'रानी सब्जी') वर्ष भर उगाई जाने वाली भारत की दो सबसे लोकप्रिय सब्जियाँ हैं। प्रजनन की दृष्टि से दोनों ही 'बहुधा पर-परागित' (Often cross-pollinated) फसलें हैं, और दोनों में ही कम बीज दर तथा प्रत्येक संकरित फल में सैकड़ों बीज बनने के कारण 'हाथ से विपुंसन और परागण' (Hand emasculation and pollination) द्वारा व्यावसायिक F1 संकर बीज उत्पादन अत्यंत लाभप्रद है।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions
विषमवर्तिकात्व (Heterostyly in Brinjal)
बैंगन में एक ही पौधे या पुष्प गुच्छे में वर्तिका (Style) की लंबाई के आधार पर 4 प्रकार के फूल पाए जाते हैं—(1) लंबी वर्तिका (Long-styled), (2) मध्यम वर्तिका (Medium-styled), (3) छोटी वर्तिका (Short-styled) और (4) आभासी छोटी वर्तिका (Pseudo-short styled); जिनमें से केवल लंबी और मध्यम वर्तिका वाले फूलों में ही फल लगते हैं!
छिद्रिल परागकोष स्फुटन (Poricidal / Apical Dehiscence in Brinjal)
बैंगन के पीले परागकोष शंकु की तरह जुड़े (Connivent cone) होते हैं और वे लंबाई में न फटकर केवल अपने शीर्ष के दो सूक्ष्म छिद्रों (Apical pores) से खुलते हैं (जिनसे भँवरों के कंपन/'Buzz pollination' द्वारा पराग निकलता है)।
सोलासोडीन (Solasodine)
बैंगन के फलों में पाया जाने वाला ग्लाइकोएल्कलॉइड जो कड़वाहट पैदा करता है (अधिक मात्रा >20 mg/100g हानिकारक है, किंतु कम मात्रा स्वास्थ्यवर्धक है)।
उभय-द्विगुणित भिंडी (Amphidiploid Okra, 2n = 130)
कृष्य भिंडी (Abelmoschus esculentus, 2n=130) का विकास A. tuberculatus (2n=58) और A. ficulneus (2n=72) के प्राकृतिक संकरण और गुणसूत्र द्विगुणन (58 + 72 = 130) से हुआ माना जाता है (Joshi & Hardas, 1956)।
वर्गीकरण · Classification
बैंगन (Solanum melongena, 2n = 2x = 24) की 3 वानस्पतिक किस्में (Bailey Classification)
1. Solanum melongena var. esculentum: गोल या अंडाकार फल (Round/Egg-shaped — जैसे Pusa Purple Round, Pant Rituraj)।
2. Solanum melongena var. serpentinum: लंबे और पतले फल (Long & slender — जैसे Pusa Purple Long, Pusa Kranti)।
3. Solanum melongena var. depressum: बौने पौधे और छोटे नाशपाती के आकार के फल जो गुच्छों में लगते हैं (Dwarf & early cluster-bearing — जैसे Pusa Purple Cluster)।
बैंगन की प्रमुख जंगली प्रजातियाँ एवं उनके प्रतिरोधी जीन
1. Solanum incanum (प्रत्यक्ष जंगली पूर्वज — सूखा व लिटिल लीफ सहिष्णु), 2. Solanum viarum / S. khasianum (तने व फल छेदक प्रतिरोधी तथा स्टेरॉयड सोलासोडीन का स्रोत), 3. Solanum torvum (जीवाणुज उकठा/Bacterial wilt, Verticillium wilt व सूत्रकृमि प्रतिरोधी — ग्राफ्टिंग हेतु सर्वोत्तम मूलवृंत!), 4. Solanum sisymbriifolium (Little leaf एवं सूत्रकृमि प्रतिरोधी), 5. Solanum integrifolium (फ्यूजेरियम व जीवाणुज उकठा प्रतिरोधी)।
भिंडी (Genus Abelmoschus, कुल: Malvaceae) की प्रजातियाँ व गुणसूत्र संख्या
1. Abelmoschus esculentus (सामान्य कृष्य भिंडी: 2n = 130, परास 72–144), 2. A. caillei (पश्चिम अफ्रीकी भिंडी: 2n = 194 — YVMV प्रतिरोधी), 3. A. manihot एवं A. manihot subsp. tetraphyllus (जंगली भिंडी: 2n = 60, 66, 138 — YVMV प्रतिरोध का सर्वप्रमुख दाता!), 4. A. tuberculatus (2n = 58 — भारत की जंगली पूर्वज, फल व प्ररोह छेदक प्रतिरोधी), 5. A. ficulneus (2n = 72), 6. A. moschatus (कस्तूरी भिंडी / Ambrette: 2n = 72 — सुगंधित बीज तेल हेतु)।
महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles
- बैंगन में 'Heterostyly' और फल लगने का सीधा संबंध (Krishnamurthi & Subramanian, 1954): बैंगन में केवल उन्हीं फूलों में फल बनते हैं जिनका वर्तिकाग्र परागकोष शंकु के बराबर (Medium-styled: 12–55% फलन) या उससे ऊपर निकला (Long-styled: 70–85% फलन!) होता है। छोटी वर्तिका (Short-styled) और आभासी छोटी वर्तिका वाले फूलों में अंडाशय अविकसित रहता है और वर्तिकाग्र पर पैपिला नहीं बनते, अतः उनमें परागण करने पर भी 0% फल लगते हैं! इसलिए संकरण के समय केवल मोटे डंठल वाले एकल 'Long-styled' फूलों का ही विपुंसन किया जाता है।
- भिंडी में YVMV प्रतिरोध का इतिहास (पूसा सावनी से परभणी क्रांति तक): 1960 में डॉ. हरभजन सिंह (IARI) ने बिहार की एक काँटेदार देसी किस्म (IC 1542) और पूसा मखमली के संकरण से पहली लक्षण-सहिष्णु (Symptomless carrier) किस्म 'पूसा सावनी (Pusa Sawani)' बनाई, जिसने 20 वर्षों तक देश पर राज किया। जब पूसा सावनी का प्रतिरोध टूट गया, तब परभणी में डॉ. जांभले व डॉ. नेरकर ने जंगली प्रजाति 'Abelmoschus manihot' से सच्चा प्रतिरोधी जीन लेकर 'परभणी क्रांति' (1985) और IIHR ने 'अर्का अनामिका' विकसित की।
फसल सुधार के विस्तृत विषय · Detailed Topics
1. Crop Improvement in Brinjal / Eggplant (बैंगन — Solanum melongena L., 2n = 2x = 24)
महत्व: बैंगन के सफेद बैंगन मोटापा व मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी माने जाते हैं और बैंगनी फलों के छिलके में 'Nasunin' नामक शक्तिशाली एंथोसायनिन एंटीऑक्सीडेंट होता है।
महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
- पुष्प जीवविज्ञान एवं परागण: फूल पत्ती कक्ष के बाहर एकल (Solitary – प्रायः उर्वर व Long-styled) या 2–5 के गुच्छे (Cymose cluster) में लगते हैं। 5 जुड़े हुए स्थायी बाह्यदल (Persistent calyx जो फल के सिर पर ताज की तरह रहता है), 5 बैंगनी दल और 5 पीले पुंकेसर होते हैं जो शंकु बनाते हैं और शीर्ष छिद्रों (Apical pores) से खुलते हैं। भँवरों (Bumblebees – Xylocopa) द्वारा 6–20% (कभी-कभी 30–40%) पर-परागण होता है, अतः यह 'बहुधा पर-परागित' फसल है।
- प्रजनन उद्देश्य: (1) प्ररोह एवं फल छेदक (Shoot and Fruit Borer – Leucinodes orbonalis — बैंगन का सबसे भयंकर कीट) के प्रति प्रतिरोध, (2) जीवाणुज उकठा (Ralstonia solanacearum — प्रतिरोधी स्रोत: S. torvum, पंत सम्राट, अर्का केशव, अर्का निधि, SM 6-6), फोमोप्सिस ब्लाइट (प्रतिरोधी: पूसा भैरव, पंत सम्राट) और फाइटोप्लाज्मा लिटिल लीफ (प्रतिरोधी: पूसा पर्पल क्लस्टर, अर्का शील) प्रतिरोध, (3) कम बीज, नरम गूदा, कम सोलासोडीन और क्षेत्रीय पसंद के अनुसार चमकदार बैंगनी/हरा/सफेद रंग।
सुधार रणनीति · Breeding Approach
- जीवाणुज उकठा (Bacterial wilt) ग्रस्त क्षेत्रों में जंगली बैंगन 'Solanum torvum' के मूलवृंत (Rootstock) पर संकर बैंगन की ग्राफ्टिंग करना अत्यंत सफल तकनीक है।
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ
प्रजनन विधियाँ एवं प्रसिद्ध किस्में:
1. शुद्ध वंशक्रम वरण (Pureline Selection): पूसा पर्पल लॉन्ग (PPL), पूसा पर्पल राउंड (PPR), पूसा पर्पल क्लस्टर (PPC), पंत सम्राट (जीवाणुज उकठा व फोमोप्सिस दोनों के प्रति प्रतिरोधी!), अर्का शिरीष (अत्यंत लंबे हरे फल), अर्का शील, अर्का कुसुमकर, मंजरी गोटा।
2. वंशावली विधि (Pedigree): पूसा क्रांति (PPL × Hyderpur × Wynad Giant), पूसा अनुपम, पूसा भैरव (फोमोप्सिस ब्लाइट प्रतिरोधी), पंत ऋतुराज (गोल फल), पंजाब बरसाती, हिसार श्यामल (H-8), काशी तरु।
3. संकर प्रजनन (Heterosis Breeding — एक फल में 400–800 बीज बनने से अत्यंत सस्ता संकर बीज बनता है; प्रथम रिपोर्ट: Nagai & Kida, 1926): अर्का नवनीत (Arka Navneet = IIHR 22-1 × Supreme — भारत के सर्वाधिक उपज देने वाले गोल बैंगन संकरों में से एक!), पूसा हाइब्रिड-5 (लंबे फल), पूसा हाइब्रिड-6 (गोल फल), पूसा हाइब्रिड-9, पूसा अनमोल (PPL × Hyderpur), काशी संदेश, नरेंद्र हाइब्रिड-1।
जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ
4. ट्रांसजेनिक Bt बैंगन (Event EE-1): Mahyco व कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा तना एवं फल छेदक (Leucinodes orbonalis) नियंत्रण हेतु 'Cry1Ac' जीन डालकर Bt बैंगन बनाया गया (भारत में 2010 से व्यावसायिक खेती पर मोराटोरियम है, किंतु बांग्लादेश में 2013 से 'BARI Bt Begun 1–4' के रूप में उगाया जा रहा है)।
पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ
संकरण हेतु केवल 'Long-styled' फूल की बंद कली को शाम को विपुंसित कर अगली सुबह परागकोष को सुई से कुरेदकर या वाइब्रेटर से पराग निकालकर वर्तिकाग्र पर लगाते हैं।
2. Crop Improvement in Okra / Bhendi (भिंडी — Abelmoschus esculentus L. Moench, 2n = 130)
महत्व: भिंडी के फलों में प्रचुर मात्रा में आयोडीन (Iodine — घेंघा/Goitre रोग से बचाव हेतु) और तने व फलों में श्लेष्मक/म्यूसिलेज (Mucilage) पाया जाता है जिसका उपयोग गुड़ साफ करने (Gur clarification in sugarcane) और कागज उद्योग में होता है।
महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
- पुष्प जीवविज्ञान (Floral Biology): पत्ती कक्ष में बड़े, आकर्षक पीले रंग के एकल फूल लगते हैं जिनके केंद्र में गहरा बैंगनी-लाल धब्बा (Crimson/Maroon center) होता है। फूल के बाहर 8–10 संकरे सहपत्रों का Epicalyx, 5 जुड़े बाह्यदल, 5 पीले दल और वर्तिका को घेरे हुए असंख्य एकसंघी पुंकेसरों की नलिका (Monadelphous staminal column) होती है। वर्तिकाग्र 5-शाखित व मखमली लाल होता है।
- परागण: सुबह 8–10 बजे फूल खिलता है और दोपहर बाद बंद होकर मुरझा जाता है; कीटों द्वारा 4% से 20% तक पर-परागण होने से यह 'बहुधा पर-परागित' (Often cross-pollinated) फसल है।
सुधार रणनीति · Breeding Approach
- भिंडी में संकरण हेतु शाम को बंद कली (जो अगले दिन खिलने वाली हो) की पुमंग नलिका को नाखून या ब्लेड से रिंग बनाकर उतार दिया जाता है और अगली सुबह 8–10 बजे परागण करते हैं।
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ
प्रमुख प्रजनन उद्देश्य:
1. पीत शिरा मोजैक विषाणु (YVMV) और भिंडी एनेशन लीफ कर्ल विषाणु (OELCuV — पत्तियों का मुड़ना व निचली शिराओं पर पत्तीनुमा उभार; दोनों सफेद मक्खी Bemisia tabaci से फैलते हैं) के प्रति प्रतिरोध।
2. प्ररोह एवं फल छेदक (Earias vittella) व जैसिड प्रतिरोध।
3. गहरे हरे, कोमल, 5-धारी वाले, रोमरहित (Smooth/spineless) एवं कम रेशे वाले मध्यम लंबाई के फल तथा लाल भिंडी (एंथोसायनिन समृद्ध – Kashi Lalima)।
जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ
प्रजनन विधियाँ एवं ऐतिहासिक किस्में:
1. पादप पुरःस्थापन: Perkins Long Green, Clemson Spineless (USA से)।
2. शुद्ध वंशक्रम वरण: पूसा मखमली (Pusa Makhmali — पश्चिम बंगाल से हरभजन सिंह द्वारा चयनित, मुलायम फल किंतु YVMV के प्रति अत्यंत संवेदनशील), CO-1, गुजरात भिंडी-1।
3. अंतरा-प्रजातीय संकरण (Pedigree): पूसा सावनी (Pusa Sawani = IC-1542 × Pusa Makhmali, डॉ. हरभजन सिंह 1960), पूसा ए-4 (Pusa A-4 — माहू व जैसिड सहिष्णु), वर्षा उपहार, हिसार उन्नत, आजाद क्रांति, काशी प्रगति (VRO-6), काशी क्रांति, काशी सातधारी।
4. अंतर्विशिष्ट संकरण (Interspecific Hybridization: A. esculentus × A. manihot / A. caillei — YVMV प्रतिरोध की क्रांति!): परभणी क्रांति (Parbhani Kranti — डॉ. जांभले एवं डॉ. नेरकर, 1985), अर्का अनामिका (Arka Anamika — IIHR बेंगलुरु), अर्का अभय (Arka Abhay), पंजाब पद्मिनी (Punjab Padmini — PAU लुधियाना), पंजाब-7, पंजाब-8 (EMS उत्परिवर्ती)।
5. संकर किस्में (F1 Hybrids): काशी भैरव, अर्का निकिता (GMS आधारित संकर!), DOH-2, शीतल।
पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ
IIVR वाराणसी द्वारा विकसित विशेष किस्म: 'काशी लालिमा' (Kashi Lalima — बैंगनी-लाल रंग की एंथोसायनिन एवं एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भिंडी किस्म!)।
तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables
तालिका 8.1: बैंगन में पाए जाने वाले चारों प्रकार के फूलों (Heterostyly) एवं फल लगने की क्षमता की तुलना
| फूल का प्रकार (Flower Type) | वर्तिका (Style) एवं परागकोष की स्थिति | अंडाशय का विकास | फल लगने का प्रतिशत (Fruit Set %) |
|---|---|---|---|
| 1. लंबी वर्तिका (Long-styled) | वर्तिकाग्र परागकोष शंकु के शीर्ष से स्पष्ट रूप से ऊपर निकला रहता है | बड़ा व पूर्ण विकसित अंडाशय | 70% – 85% (सर्वोच्च फलन!) |
| 2. मध्यम वर्तिका (Medium-styled) | वर्तिकाग्र और परागकोष के शीर्ष छिद्र एक ही स्तर पर बराबर होते हैं | सामान्य विकसित अंडाशय | 12% – 55% (मध्यम फलन) |
| 3. आभासी छोटी वर्तिका (Pseudo-short) | वर्तिका परागकोष शंकु से छोटी व अंदर छिपी होती है | अविकसित/अल्पविकसित अंडाशय | 0% (कोई फल नहीं लगता) |
| 4. वास्तविक छोटी वर्तिका (True short) | वर्तिका अत्यंत छोटी व मुड़ी हुई तथा पैपिला रहित होती है | बंध्य/अविकसित अंडाशय | 0% (कोई फल नहीं लगता) |
सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations
1. बैंगन में हाथ से संकरण (Hand Emasculation & Pollination) द्वारा 1 हेक्टेयर संकर बीज उत्पादन की गणना
उदाहरण: बैंगन के एक संकरित फल में लगभग 500–800 बीज (लगभग 2.5 से 3.5 ग्राम बीज) बनते हैं और 1 हेक्टेयर बैंगन रोपाई के लिए केवल 200 ग्राम संकर बीज पर्याप्त होता है!
• अतः 1 हेक्टेयर की बुवाई के लिए आवश्यक संकर बीज (200 g) बनाने हेतु केवल: 200 / 3.0 = ~67 से 70 संकरित फल (Crossed fruits) ही पर्याप्त हैं! यही कारण है कि बैंगन और टमाटर में बिना CMS के भी हाथ से विपुंसन व परागण द्वारा व्यावसायिक संकर बीज सस्ते में बनाया जाता है।
माइंड मैप · Mind Map
[Lecture 08: बैंगन (Brinjal) एवं भिंडी (Okra) में फसल सुधार]
├── 1. बैंगन (Solanum melongena, Solanaceae, 2n=24)
│ ├── उत्पत्ति: भारत | 3 प्रकार: var. esculentum (Round), var. serpentinum (Long), var. depressum (Dwarf cluster)
│ ├── जंगली दाता: S. incanum (पूर्वज), S. torvum (Bacterial wilt & Nematode प्रतिरोधी मूलवृंत), S. viarum (Shoot borer)
│ ├── विषमवर्तिकात्व (Heterostyly): 4 प्रकार के फूल — केवल Long-styled (70–85%) और Medium-styled (12–55%) में ही फल लगते हैं!
│ ├── परागकोष का शीर्ष छिद्रों से खुलना (Apical pore dehiscence) | कड़वाहट: Solasodine | छिलका वर्णक: Nasunin
│ └── प्रमुख किस्में व संकर: PPL, PPC, Pusa Kranti, Pusa Bhairav & Pant Samrat (Phomopsis प्रतिरोधी), Arka Keshav (Wilt प्रतिरोधी), Arka Navneet, Pusa Hybrid-5 & 6
└── 2. भिंडी (Abelmoschus esculentus, Malvaceae, 2n=130)
├── उभय-द्विगुणित (Amphidiploid): A. tuberculatus (2n=58) × A. ficulneus (2n=72) = 2n=130
├── महत्व: फलों में उच्च Iodine (घेंघा निवारक) + तने के म्यूसिलेज से गन्ने के रस/गुड़ की सफाई
├── ऐतिहासिक किस्में: Pusa Makhmali (Pureline) → Pusa Sawani (IC 1542 × Pusa Makhmali, Dr. Harbhajan Singh 1960)
├── अंतर्विशिष्ट YVMV प्रतिरोधी क्रांति (A. esculentus × A. manihot): Parbhani Kranti, Arka Anamika, Arka Abhay, Punjab Padmini
└── आधुनिक किस्में: Pusa A-4, Varsha Uphar, Kashi Pragati, Kashi Kranti, Kashi Lalima (एंथोसायनिन-युक्त लाल भिंडी)
प्रवाह चित्र · Flowchart
[भिंडी में 'पीत शिरा मोजैक (YVMV)' प्रतिरोध प्रजनन का ऐतिहासिक विकास क्रम]
चरण 1 (1955): 'पूसा मखमली' (पश्चिम बंगाल के स्थानीय जननद्रव्य से शुद्ध वंशक्रम वरण — कोमल फल, किंतु YVMV के प्रति अत्यधिक संवेदनशील)
↓
चरण 2 (1960 — डॉ. हरभजन सिंह, IARI): [IC 1542 (बिहार की काँटेदार सहिष्णु लाइन)] × [पूसा मखमली]
───► 'पूसा सावनी (Pusa Sawani)' (प्रथम YVMV सहिष्णु किस्म; बाद में नए विषाणु प्रभेद से प्रतिरोध टूटा)
↓
चरण 3 (1980 के दशक — अंतर्विशिष्ट संकरण / Wide Hybridization):
[Abelmoschus esculentus (कृष्य भिंडी)] × [Abelmoschus manihot / A. tetraphyllus (जंगली प्रतिरोधी प्रजाति)]
↓ (प्रतीप संकरण एवं वंशावली वरण)
'परभणी क्रांति' (MAU परभणी, 1985), 'अर्का अनामिका' व 'अर्का अभय' (IIHR बेंगलुरु) एवं 'पंजाब पद्मिनी' (PAU लुधियाना)
परीक्षा टिप्स · Exam Tips
- बैंगन का सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न: बैंगन में 4 प्रकार के फूल (Heterostyly) होते हैं, जिनमें से केवल 'Long-styled' और 'Medium-styled' फूलों में ही फल लगते हैं; 'Short-styled' और 'Pseudo-short styled' फूलों में कोई फल नहीं लगता!
- बैंगन में 'पंत सम्राट (Pant Samrat)' फोमोप्सिस ब्लाइट और जीवाणुज उकठा दोनों के प्रति प्रतिरोधी है, जबकि 'पूसा भैरव (Pusa Bhairav)' फोमोप्सिस ब्लाइट के प्रति और 'पूसा पर्पल क्लस्टर (PPC)' लिटिल लीफ के प्रति प्रतिरोधी है।
- भिंडी में गुणसूत्र संख्या सभी सब्जियों में सर्वाधिक अर्थात् 2n = 130 होती है और लाल भिंडी की प्रसिद्ध किस्म 'काशी लालिमा' है।
त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision
- बैंगन (Solanum melongena, 2n=24): उत्पत्ति—भारत; पूर्वज—S. incanum; पुष्प विशेषता—Heterostyly व Apical pore dehiscence।
- Solanum torvum: जीवाणुज उकठा (Bacterial wilt) और सूत्रकृमि प्रतिरोधी जंगली बैंगन (ग्राफ्टिंग मूलवृंत)।
- बैंगन के प्रसिद्ध संकर: अर्का नवनीत, पूसा हाइब्रिड-5, पूसा हाइब्रिड-6, पूसा अनमोल।
- भिंडी (Abelmoschus esculentus, 2n=130): A. tuberculatus (58) + A. ficulneus (72); उच्च आयोडीन युक्त फल।
- भिंडी की YVMV प्रतिरोधी अंतर्विशिष्ट किस्में: परभणी क्रांति, अर्का अनामिका, अर्का अभय एवं पंजाब पद्मिनी।
MCQs — उत्तर एवं व्याख्या
1. बैंगन (Solanum melongena) में विषमवर्तिकात्व (Heterostyly) के कारण बनने वाले चार प्रकार के फूलों में से किन फूलों में फल लगते हैं?
- (A) सभी चारों प्रकार के फूलों में
- (B) केवल लंबी वर्तिका (Long-styled) एवं मध्यम वर्तिका (Medium-styled) वाले फूलों में
- (C) केवल छोटी वर्तिका (Short-styled) वाले फूलों में
- (D) केवल आभासी छोटी वर्तिका वाले फूलों में
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — बैंगन में केवल Long-styled (70–85% फलन) और Medium-styled (12–55% फलन) फूलों में ही फल लगते हैं; शेष दोनों बंध्य होते हैं।
2. भिंडी (Abelmoschus esculentus) की सामान्य द्विगुणित/उभय-द्विगुणित गुणसूत्र संख्या (2n) कितनी होती है?
- (A) 2n = 24
- (B) 2n = 48
- (C) 2n = 130 (A. tuberculatus 2n=58 + A. ficulneus 2n=72)
- (D) 2n = 26
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) — जोशी एवं हरदास (1956) के अनुसार भिंडी में सामान्यतः 2n = 130 गुणसूत्र होते हैं।
3. डॉ. हरभजन सिंह द्वारा सन् 1960 में 'IC-1542 × पूसा मखमली' के संकरण से विकसित भिंडी की ऐतिहासिक किस्म कौन सी है?
- (A) परभणी क्रांति
- (B) पूसा सावनी (Pusa Sawani)
- (C) अर्का अनामिका
- (D) काशी लालिमा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — डॉ. हरभजन सिंह ने बिहार के काँटेदार जननद्रव्य IC-1542 से 'पूसा सावनी' विकसित की थी।
4. बैंगन के परागकोषों (Anthers) से परागकण बाहर निकलने (Dehiscence) का तरीका क्या होता है?
- (A) लंबाई में दरार द्वारा
- (B) परागकोष के शीर्ष पर स्थित सूक्ष्म छिद्रों द्वारा (Apical / Poricidal dehiscence)
- (C) कपाटों द्वारा
- (D) आधार से फटने द्वारा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — बैंगन (एवं आलू) में परागकोष अपने शीर्ष के छिद्रों (Apical pores) से खुलते हैं।
5. जंगली बैंगन की कौन सी प्रजाति जीवाणुज उकठा (Bacterial Wilt) और मूल-ग्रंथि सूत्रकृमि दोनों के प्रति उच्च प्रतिरोधी है तथा ग्राफ्टिंग में मूलवृंत के रूप में प्रयुक्त होती है?
- (A) Solanum torvum
- (B) Solanum tuberosum
- (C) Solanum nigrum
- (D) Solanum lycopersicum
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — 'Solanum torvum' जीवाणुज उकठा, वर्टिसिलियम उकठा और सूत्रकृमि तीनों के प्रति प्रतिरोधी है।
6. भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR, वाराणसी) द्वारा विकसित एंथोसायनिन एवं एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर 'लाल रंग की भिंडी' किस्म कौन सी है?
- (A) काशी प्रगति
- (B) काशी लालिमा (Kashi Lalima)
- (C) पूसा सावनी
- (D) अर्का अभय
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — 'काशी लालिमा' लाल-बैंगनी रंग की पोषण-समृद्ध भिंडी किस्म है।
7. बैंगन की कौन सी किस्म फोमोप्सिस अंगमारी (Phomopsis Blight) और जीवाणुज उकठा दोनों के प्रति प्रतिरोधी है?
- (A) पंत सम्राट (Pant Samrat)
- (B) पूसा पर्पल लॉन्ग
- (C) मंजरी गोटा
- (D) पंत ऋतुराज
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — पंतनगर द्वारा विकसित 'पंत सम्राट' फोमोप्सिस ब्लाइट, जीवाणुज उकठा और प्ररोह छेदक के प्रति प्रतिरोधी है।
8. भिंडी में 'परभणी क्रांति', 'अर्का अनामिका' और 'पंजाब पद्मिनी' किस्मों का विकास किस जंगली प्रजाति के साथ अंतर्विशिष्ट संकरण से किया गया है?
- (A) Abelmoschus manihot (एवं A. manihot subsp. tetraphyllus)
- (B) Gossypium hirsutum
- (C) Hibiscus cannabinus
- (D) Corchorus olitorius
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — पीत शिरा मोजैक (YVMV) के विरुद्ध सच्चा प्रतिरोध जंगली प्रजाति Abelmoschus manihot से स्थानांतरित किया गया है।
9. IIHR बेंगलुरु द्वारा 'IIHR 22-1 × Supreme' के संकरण से विकसित बैंगन का अत्यंत उच्च उपज देने वाला गोल फल वाला संकर कौन सा है?
- (A) अर्का नवनीत (Arka Navneet)
- (B) अर्का शिरीष
- (C) पूसा हाइब्रिड-5
- (D) पूसा क्रांति
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — 'अर्का नवनीत' भारत के सबसे लोकप्रिय और सर्वाधिक उपज देने वाले बैंगन संकरों में से एक है।
10. बैंगन के फलों में कड़वाहट किस ग्लाइकोएल्कलॉइड यौगिक के कारण होती है?
- (A) कुकरबिटासिन
- (B) सोलासोडीन (Solasodine)
- (C) कैप्साइसिन
- (D) मोमोरडिसिन
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — बैंगन में 'Solasodine' और आलू में 'Solanine' नामक ग्लाइकोएल्कलॉइड पाया जाता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. बैंगन (Solanum melongena) का प्रत्यक्ष जंगली पूर्वज किसे माना जाता है?
Solanum incanum को।
2. भिंडी के फलों में किस खनिज तत्व की प्रचुरता होती है जो घेंघा (Goitre) रोग से बचाता है?
आयोडीन (Iodine) की।
3. बैंगन के बैंगनी छिलके में कौन सा एंथोसायनिन वर्णक पाया जाता है?
नैसुनिन (Nasunin)।
4. IIHR बेंगलुरु द्वारा आनुवंशिक नर बंध्यता (GMS) का उपयोग कर विकसित भिंडी संकर का नाम लिखिए।
अर्का निकिता (Arka Nikita)।
5. सुगंधित बीज तेल (Ambrette seed oil) के लिए उगाई जाने वाली कस्तूरी भिंडी का वानस्पतिक नाम क्या है?
Abelmoschus moschatus (2n = 72)।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. बैंगन में 'विषमवर्तिकात्व' (Heterostyly) क्या है और संकर बीज उत्पादन में इसका क्या महत्व है?
बैंगन में वर्तिका की लंबाई के आधार पर 4 प्रकार के फूल (Long-styled, Medium-styled, Pseudo-short एवं True short-styled) बनते हैं। इनमें से केवल Long-styled (70–85% फलन) और Medium-styled में ही फल लगते हैं, जबकि दोनों छोटी वर्तिका वाले फूल बंध्य होते हैं। अतः संकर बीज उत्पादन में श्रम व समय बचाने के लिए केवल एकल 'Long-styled' कलियों का ही विपुंसन व परागण किया जाता है।
2. भिंडी में पीत शिरा मोजैक (YVMV) प्रतिरोध प्रजनन में जंगली प्रजातियों के योगदान को स्पष्ट कीजिए।
कृष्य भिंडी (Abelmoschus esculentus) के जननद्रव्य में YVMV के प्रति स्थायी प्रतिरोध नहीं था। प्रजनकों ने जंगली प्रजाति 'Abelmoschus manihot' और 'A. manihot subsp. tetraphyllus' तथा 'A. caillei' के साथ अंतर्विशिष्ट संकरण और प्रतीप संकरण (Backcrossing) द्वारा 'परभणी क्रांति', 'अर्का अनामिका', 'अर्का अभय' और 'पंजाब पद्मिनी' जैसी प्रतिरोधी किस्में विकसित कीं।
3. बैंगन की वानस्पतिक किस्मों (var. esculentum, var. serpentinum एवं var. depressum) को उदाहरण सहित समझाइए।
1. var. esculentum: इसमें गोल व अंडाकार फल लगते हैं (जैसे पूसा पर्पल राउंड, पंत ऋतुराज)। 2. var. serpentinum: इसमें लंबे और पतले फल लगते हैं (जैसे पूसा पर्पल लॉन्ग, पूसा क्रांति)। 3. var. depressum: इसके पौधे बौने, जल्दी फलने वाले और छोटे गुच्छेदार फल वाले होते हैं (जैसे पूसा पर्पल क्लस्टर)।
4. बैंगन में तना एवं फल छेदक (Shoot and Fruit Borer) और जीवाणुज उकठा (Bacterial Wilt) के विरुद्ध प्रतिरोध के स्रोत लिखिए।
तना एवं फल छेदक (Leucinodes orbonalis) के प्रतिरोध के स्रोत जंगली प्रजाति 'Solanum viarum (S. khasianum)' व 'S. incanum' और पतले कठोर छिलके वाली किस्में (जैसे पूसा पर्पल क्लस्टर, SM 17-4) हैं। जीवाणुज उकठा (Ralstonia solanacearum) के प्रतिरोध के स्रोत 'Solanum torvum' तथा 'पंत सम्राट', 'अर्का केशव' और 'अर्का निधि' किस्में हैं।
5. भिंडी की उभय-द्विगुणित (Amphidiploid) उत्पत्ति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
जोशी एवं हरदास (1956) के कोशिका-आनुवंशिक अध्ययनों के अनुसार कृष्य भिंडी (Abelmoschus esculentus, 2n=130) एक प्राकृतिक उभय-द्विगुणित (Allopolyploid) प्रजाति है। इसके एक सेट के 29 गुणसूत्र (n=29) भारतीय जंगली प्रजाति 'A. tuberculatus' (2n=58) से और दूसरे सेट के 36 गुणसूत्र (n=36) 'A. ficulneus' (2n=72) से आए हैं (29 + 36 = 65; 2n = 130)।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. बैंगन (Solanum melongena) के उत्पत्ति केंद्र, वानस्पतिक वर्गीकरण, जंगली प्रजातियों, पुष्प जीवविज्ञान (Heterostyly) और प्रजनन विधियों व उन्नत किस्मों/संकरों का सविस्तर वर्णन कीजिए।
भारतीय उत्पत्ति, तीनों वानस्पतिक समूह, S. incanum, S. torvum व S. viarum की भूमिका, 4 प्रकार के फूलों की संरचना व फलन क्षमता, शीर्ष छिद्र परागकोष स्फुटन तथा शुद्ध वंशक्रम (PPL, Pant Samrat), वंशावली (Pusa Kranti, Pusa Bhairav) और संकर किस्मों (Arka Navneet, Pusa Hybrid-5 & 6) का विस्तृत विवरण दें।
2. भिंडी (Abelmoschus esculentus) की उत्पत्ति, गुणसूत्र उद्विकास, जंगली प्रजातियों, पुष्प जीवविज्ञान और YVMV प्रतिरोध एवं गुणवत्ता हेतु प्रजनन उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
अफ्रीकी-भारतीय उत्पत्ति, 2n=130 उभय-द्विगुणित प्रकृति, Epicalyx व Monadelphous पुमंग नलिका, पूसा मखमली से पूसा सावनी (डॉ. हरभजन सिंह) और A. manihot से परभणी क्रांति, अर्का अनामिका, पंजाब पद्मिनी तथा काशी प्रगति व काशी लालिमा के विकास का सविस्तर वर्णन करें।
3. बैंगन और भिंडी में व्यावसायिक F1 संकर बीज उत्पादन (Hybrid Seed Production) की तकनीक, विपुंसन व परागण विधि और नर बंध्यता के उपयोग की विवेचना कीजिए।
दोनों फसलों में एक फल में सैकड़ों बीज बनने का आर्थिक लाभ, बैंगन में केवल Long-styled कलियों का चुनाव व भँवरा/वाइब्रेटर परागण, भिंडी में पुमंग नलिका रिंग विपुंसन, पृथक्करण दूरी (बैंगन: 200/100 m; भिंडी: 400/200 m) और GMS के उपयोग का वर्णन करें।
परीक्षा वन-लाइनर्स
- महान भारतीय पादप प्रजनक डॉ. हरभजन सिंह को भारत में सब्जी प्रजनन व पादप जननद्रव्य संग्रहण का अग्रदूत ('Indian Vavilov') कहा जाता है।
- बैंगन में संकर ओज (Heterosis) का सर्वप्रथम अध्ययन जापान में नागाई एवं किडा (Nagai & Kida, 1926) ने किया था।
- बैंगन की 'पूसा पर्पल क्लस्टर (PPC)' किस्म फाइटोप्लाज्मा जनित 'लिटिल लीफ' (Little Leaf) रोग के प्रति प्रतिरोधी है।
- भिंडी के तने और जड़ों से निकाले गए श्लेष्मक (Mucilage) का उपयोग गन्ने के रस से जैविक गुड़ बनाते समय मैल साफ करने में किया जाता है।
- भिंडी की 'अर्का अनामिका' किस्म A. esculentus × A. manihot subsp. tetraphyllus के संकरण से IIHR बेंगलुरु में विकसित की गई थी।
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध GPB 311 Smart Notes।





