GPB 311 Lecture 03: ज्वार, बाजरा और रागी (मोटे अनाज / श्री अन्न) में फसल सुधार: उत्पत्ति, पुष्प जीवविज्ञान एवं प्रजनन

GPB 311 · Kharif Crop Improvement Smart Notes
ज्वार, बाजरा और रागी (मोटे अनाज / श्री अन्न) में फसल सुधार: उत्पत्ति, पुष्प जीवविज्ञान एवं प्रजनन
Crop Improvement in Sorghum, Pearl Millet, and Finger Millet (Ragi)
Sorghum (ज्वार), Pearl Millet / Bajra (बाजरा), Finger Millet / Ragi (रागी / मंडुआ)
विषय सूची · Quick Navigation
अधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesफसल सुधार के विस्तृत विषय · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्सअधिगम उद्देश्य · Learning Objectives
- ज्वार (Sorghum bicolor, 2n=20) की 5 मूल नस्लों (Bicolor, Guinea, Caudatum, Kafir, Durra), पुष्प जीवविज्ञान, Combined Kafir-60 (Milo CMS) और भारत के प्रथम संकर CSH-1 (1964) को समझना।
- बाजरा (Pennisetum glaucum, 2n=14) की स्त्रीपूर्वता (Protogyny), Tift 23A CMS प्रणाली, डॉ. डी.एस. अठवाल द्वारा विकसित प्रथम संकर HB-1 (1965) और HHB 67 Improved का विश्लेषण करना।
- रागी/मंडुआ (Eleusine coracana, 2n=4x=36) की स्व-परागित प्रकृति, उच्च कैल्शियम गुण और प्रजनन उपलब्धियों (Indaf किस्में, GPU-28) का अध्ययन करना।
प्रस्तावना · Introduction
पोषक अनाजों / 'श्री अन्न' (Nutri-cereals / Millets) में ज्वार (Sorghum), बाजरा (Pearl Millet) और रागी (Finger Millet) शुष्क एवं अर्ध-शुष्क भारत की खाद्य, चारा एवं पोषण सुरक्षा के आधार हैं। प्रजनन की दृष्टि से ये तीनों फसलें परागण के तीनों भिन्न प्रतिमान प्रस्तुत करती हैं—ज्वार एक 'बहुधा पर-परागित' (Often cross-pollinated, 5–25% पर-परागण) फसल है, बाजरा 'स्त्रीपूर्वता' (Protogyny) के कारण उच्च पर-परागित (>80%) फसल है, और रागी 'अनुन्मील्य परागण' (Cleistogamy) के कारण पूर्णतः स्व-परागित (<1% पर-परागण) चतुर्गुणित फसल है।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions
बहुधा पर-परागित फसल (Often Cross-Pollinated Crop)
ज्वार (Sorghum) और अरहर जैसी फसलें जिनमें सामान्यतः स्व-परागण होता है, किंतु प्राकृतिक पर-परागण की दर 5% से 30% तक होती है, इसलिए इनमें स्व-परागित व पर-परागित दोनों की प्रजनन विधियाँ लगती हैं।
स्त्रीपूर्वता (Protogyny in Pearl Millet)
बाजरा के द्विलिंगी फूलों में पुंकेसर निकलने से 2–3 दिन पहले ही मादा वर्तिकाग्र (Feathery stigma) बाहर निकलकर ग्रहणशील हो जाता है, जिससे स्व-परागण रुकता है और 80–85% पर-परागण सुनिश्चित होता है।
माइलो-काफिर प्रणाली (Milo-Kafir A1 CMS System)
स्टीफेंस और हॉलैंड (Stephens & Holland, 1954) द्वारा खोजी गई ज्वार की कोशिकाद्रव्यी-आनुवंशिक नर बंध्यता प्रणाली, जिसमें 'Milo' का कोशिकाद्रव्य और 'Kafir' के केंद्रकीय अप्रभावी जीन मिलकर 'Combined Kafir-60 (CK-60A)' बंध्य पंक्ति बनाते हैं।
टिफ्ट 23A (Tift 23A in Pearl Millet)
जी.डब्ल्यू. बर्टन (G.W. Burton, 1958, टिफ्टन जॉर्जिया) द्वारा खोजा गया बाजरा का प्रथम CMS स्रोत (A1 cytoplasm), जिसका उपयोग कर डॉ. डी.एस. अठवाल ने 1965 में विश्व का प्रथम बाजरा संकर 'HB-1' विकसित किया।
वर्गीकरण · Classification
ज्वार (Sorghum bicolor, 2n=20) की 5 मूल नस्लें (Harlan & de Wet, 1972 Classification)
तुष (Glume) और दाने के आकार के आधार पर 5 मुख्य नस्लें: 1. Bicolor (सबसे आदिम, दाना तुष से पूरी तरह ढका), 2. Guinea (पश्चिम अफ्रीका, दाने चपटे व तुष खुले), 3. Caudatum (मध्य अफ्रीका, दाना एक तरफ चपटा व एक तरफ उभरा), 4. Kafir (दक्षिण अफ्रीका, सममित दाना, CMS में Maintainer का स्रोत), 5. Durra (भारत एवं मध्य-पूर्व में सर्वाधिक प्रमुख, मोटी व मुड़ी हुई गर्दन वाली बाली, सूखा सहिष्णु और Milo cytoplasm/Restorer का स्रोत) — तथा इनके संकरण से बनी 10 मध्यवर्ती नस्लें।
बाजरा (Pennisetum) के तीन जीन पूल (Harlan & de Wet)
1. Primary Gene Pool (2n=14, AA genome): कृष्य Pennisetum glaucum (P. americanum / P. typhoides) एवं जंगली पूर्वज P. glaucum subsp. monodii तथा P. stenostachyum। 2. Secondary Gene Pool: नेपियर घास — Pennisetum purpureum (2n = 4x = 28, A'A'BB genome; कृष्य बाजरा × नेपियर घास = 'Pusa Giant Napier' त्रिगुणित बहुवर्षीय चारा संकर, 2n=3x=21)। 3. Tertiary Gene Pool: P. squamulatum (2n=54), P. orientale (2n=36 — असंगजनन/Apomixis जीन के स्रोत)।
रागी (Eleusine) की प्रजातियाँ
कृष्य रागी: Eleusine coracana subsp. coracana (2n = 4x = 36, AABB allotetraploid); प्रत्यक्ष जंगली चतुर्गुणित पूर्वज: E. coracana subsp. africana (2n=36); द्विगुणित दाता (AA genome): Eleusine indica (2n=18)।
महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles
- ज्वार में 'HCN (Dhurrin)' विषाक्तता एवं चारा प्रजनन: ज्वार के छोटे पौधों (30–40 दिन से पूर्व, विशेषकर सूखे में) की पत्तियों में 'Dhurrin' नामक सायनोजेनिक ग्लूकोसाइड बनता है जो जल-अपघटन से विषैला 'हाइड्रोसायनिक अम्ल (HCN / Prussic acid)' बनाता है (>200 ppm पशुओं के लिए घातक)। इसलिए चारा ज्वार (Forage Sorghum) प्रजनन का मुख्य उद्देश्य कम HCN (<50 ppm) वाली किस्में (जैसे Pusa Chari, HC-136, SSG 59-3 मीठी सूडान) बनाना है।
- बाजरा में एकल CMS स्रोत (Tift 23A) की सुभेद्यता: 1965 में HB-1 से लेकर HB-5 तक सभी संकरों में एक ही 'Tift 23A (A1)' कोशिकाद्रव्य था, जिसके कारण 1970 के दशक के प्रारंभ में हरित बाली रोग (Sclerospora graminicola) की भयंकर महामारी फैली। इसके बाद लुधियाना में A2, A3 व A4/A5 CMS स्रोत और प्रतिरोधी पंक्तियाँ (Pb 111A, MS 5141A, ICMA 841) विकसित कर BJ-104, BK-560, MH-179 और HHB-67 जैसे प्रतिरोधी संकर बनाए गए।
फसल सुधार के विस्तृत विषय · Detailed Topics
1. Crop Improvement in Sorghum (ज्वार — Sorghum bicolor L. Moench, 2n = 2x = 20)
महत्व: ज्वार एक C4 और लघु-दिवस (Short-day) फसल है। इसके जंगली संबंधियों में Sorghum propinquum (2n=20), S. bicolor subsp. verticilliflorum (प्रत्यक्ष पूर्वज) और जॉनसन घास (Sorghum halepense, 2n=4x=40 — राइजोम युक्त खरपतवार) प्रमुख हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
- पुष्प जीवविज्ञान (Floral Biology): पुष्पक्रम को 'Panicle' (या Head/Ear) कहते हैं जो ढीला या ठोस (Compact) हो सकता है। स्पाइकलेट्स जोड़े में लगते हैं—एक अवृंत द्विलिंगी उर्वर स्पाइकलेट (Sessile fertile spikelet जिसमें 3 पुंकेसर व 2 पंखदार वर्तिकाग्र होते हैं) और एक सवृंत नर या बंध्य स्पाइकलेट (Pedicellate male/sterile spikelet)। बाली में पुष्पन ऊपर से नीचे (Basipetal) सुबह 6 से 10 बजे के बीच होता है; इसमें औसतन 6% (5–25%) पर-परागण होता है (Often cross-pollinated)।
- प्रजनन उद्देश्य: (1) खरीफ एवं रबी ('Maldandi' प्रकार – M 35-1) के लिए उच्च दाना व कड़बी (Stover) उपज, (2) प्ररोह मक्खी (Shoot fly – Atherigona soccata; प्रतिरोध तंत्र: पत्तियों पर रोम/Trichomes एवं Glossy leaf trait), तना छेदक, मिज और ग्रेन मोल्ड (Grain mold) प्रतिरोध, (3) चारा ज्वार में कम HCN (<50 ppm) व बहु-कटाई क्षमता, (4) मीठी ज्वार (Sweet Sorghum – इथेनॉल उत्पादन हेतु उच्च ब्रिक्स >18%)।
सुधार रणनीति · Breeding Approach
- रबी ज्वार सुधार हेतु 'Durra' नस्ल के भारतीय मालदंडी जननद्रव्य और अफ्रीकी 'Caudatum/Guinea' नस्लों के बीच संकरण कर ठंड एवं टर्मिनल सूखा सहिष्णु किस्में (जैसे Phule Yashoda, Phule Vasudha, CSV 22R) विकसित की गई हैं।
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ
प्रजनन विधियाँ एवं संकर विकास: (A) शुद्ध वंशक्रम वरण: M 35-1 (मालदंडी से चयनित—रबी ज्वार की पिछले 85 वर्षों से अजेय मानक किस्म!), Co-1, PJ-8K। (B) वंशावली विधि: CSV-1 से CSV-27 तक, SPV-462, Parbhani Moti। (C) संकर प्रजनन (Milo A1 cytoplasm + Kafir nuclear genes): भारत का प्रथम ज्वार संकर 'CSH-1' (1964, संकरण: CK 60A × IS 84; डॉ. एन.जी.पी. राव को भारत में संकर ज्वार का जनक कहा जाता है)। अन्य संकर: CSH-5, CSH-6, CSH-9, CSH-14, CSH-16, CSH-15R (रबी संकर)।
जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ
जैव-प्रबलित (Biofortified) ज्वार किस्म: 'परभणी शक्ति' (Parbhani Shakti / PVK 801 व्युत्पन्न, 2018 — ICRISAT व VNMKV परभणी द्वारा विकसित भारत की प्रथम उच्च आयरन 42 ppm व उच्च जिंक 25 ppm युक्त ज्वार किस्म)।
पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ
विपुंसन हेतु हाथ से चिमटी द्वारा या उष्ण जल विधि (42–48°C पर 10 मिनट) अथवा प्लास्टिक बैग विधि (उच्च आर्द्रता से परागकोष न फटना) का प्रयोग करते हैं।
2. Crop Improvement in Pearl Millet / Bajra (बाजरा — Pennisetum glaucum L. R. Br., 2n = 2x = 14)
महत्व: बाजरा एक C4, उच्च पर-परागित (>80% Cross-pollinated) द्विगुणित (2n=14, 7 बड़े गुणसूत्र) फसल है जिसमें सभी अनाजों की तुलना में सर्वाधिक सूखा व ताप सहिष्णुता तथा उच्च आयरन व वसा (5%) पाई जाती है।
महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
- पुष्प जीवविज्ञान एवं स्त्रीपूर्वता (Floral Biology & Protogyny): पुष्पक्रम एक ठोस बेलनाकार 'Panicle / Spike-like raceme / Candlesticks' होता है। प्रत्येक शूकयुक्त आवरण (Involucre of bristles) में 1 से 2 स्पाइकलेट्स होते हैं; प्रत्येक स्पाइकलेट में निचला फूल नर (3 पुंकेसर) और ऊपरी फूल द्विलिंगी (3 पुंकेसर + द्विशाखित वर्तिकाग्र) होता है।
- दो चरणों में पुष्पन: प्रथम चरण (Female phase) में बाली के मध्य से ऊपर व नीचे की ओर सभी फूलों के केवल द्विशाखित वर्तिकाग्र (Stigmas) बाहर निकलते हैं। इसके 2–3 दिन बाद जब वर्तिकाग्र सूख जाते हैं, तब द्वितीय चरण (Male phase) में पुंकेसर बाहर निकलते हैं—इस स्पष्ट 'Protogyny' के कारण बिना विपुंसन (Without emasculation) के ही संकरण किया जा सकता है!
सुधार रणनीति · Breeding Approach
- जैव-प्रबलित (Biofortified High-Fe & High-Zn) किस्में: 'धनशक्ति' (Dhanshakti — ICTP 8203 से विकसित भारत की किसी भी फसल की प्रथम बायोफोर्टिफाइड किस्म, 2014: 71 ppm Fe एवं 40 ppm Zn), AHB 1200 Fe, HHB 299 (73 ppm Fe)।
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ
प्रजनन उपलब्धियाँ: 1. संकर प्रजनन: जी.डब्ल्यू. बर्टन द्वारा खोजे गए 'Tift 23A' (A1 cytoplasm) का उपयोग कर पीएयू लुधियाना में डॉ. डी.एस. अठवाल ने सन् 1965 में विश्व एवं भारत का प्रथम बाजरा संकर 'HB-1' (Hybrid Bajra-1 = Tift 23A × BIL-3B) विकसित किया। 2. अन्य संकर: HB-3 (Tift 23A × J-104), BJ-104, BK-560, HHB-67 (MS 843A × H 77/833-2 — 60-65 दिन में पकने वाला सबसे लोकप्रिय संकर), RHB-121, RHB-173, GHB-558।
जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ
मार्कर-सहायता प्राप्त प्रजनन (MAS) मील का पत्थर: 'HHB 67 Improved' (2005 — ICRISAT व CCS HAU हिसार द्वारा विकसित भारत की किसी भी फसल की प्रथम मार्कर-असिस्टेड ब्रीडिंग किस्म, जिसमें हरित बाली रोग/Downy mildew प्रतिरोध जोड़ा गया)।
पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ
कम्पोजिट / खुली परागित किस्में (Composites/OPVs): WCC-75 (World Composite Cross-75), ICTP 8203, राज-171 (Raj-171), पूसा कम्पोजिट-383।
3. Crop Improvement in Finger Millet / Ragi (रागी / मंडुआ — Eleusine coracana L. Gaertn., 2n = 4x = 36)
महत्व: रागी एक पर-चतुर्गुणित (Allotetraploid, 2n = 4x = 36, AABB genome) C4 फसल है। इसके दानों में समस्त अनाजों की तुलना में सर्वाधिक कैल्शियम (Calcium: 344 mg/100g — दूध से भी 3 गुना अधिक!), आयरन, मेथियोनीन अमीनो अम्ल और आहारीय रेशा होता है तथा इसके दाने भंडारण में कीट न लगने के कारण 10–50 वर्षों तक सुरक्षित रहते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
- पुष्प जीवविज्ञान (Floral Biology): पुष्पक्रम के शीर्ष पर हाथ की उँगलियों के समान 4 से 8 मुड़ी हुई या सीधी बालियाँ (Digitately arranged spikes / 'Fingers') निकलती हैं (इसीलिए 'Finger Millet' नाम पड़ा)। प्रत्येक बाली में 60–80 स्पाइकलेट्स और प्रत्येक स्पाइकलेट में 4 से 7 द्विलिंगी फूल होते हैं जिनमें 3 पुंकेसर और 2 पंखदार वर्तिकाग्र होते हैं।
- परागण: फूल खुलने से पहले या खुलते ही परागण हो जाता है (Cleistogamous / Chasmogamous), अतः यह 99% से अधिक स्व-परागित (Strictly Self-pollinated) फसल है।
सुधार रणनीति · Breeding Approach
- प्रमुख किस्में: बेंगलुरु (GKVK) में अफ्रीकी जर्मप्लाज्म (IE 927, IE 980) और भारतीय किस्मों के संकरण से विकसित प्रसिद्ध 'Indaf' शृंखला (Indaf-1, Indaf-5, Indaf-8, Indaf-9) तथा 'GPU' शृंखला—विशेषकर 'GPU-28' (ब्लास्ट प्रतिरोधी, देश में सर्वाधिक उगाई जाने वाली रागी किस्म), GPU-45, GPU-67, PR-202, VL Mandua-149, CFMV-1 (Indravati) व CFMV-2 (बायोफोर्टिफाइड उच्च Ca, Fe, Zn किस्में)।
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ
छोटे फूलों के कारण हाथ से विपुंसन कठिन होता है, इसलिए रागी में संकरण के लिए 'संपर्क विधि' (Contact Method — नर और मादा बालियों को एक ही बटर पेपर बैग में साथ बाँधना और आनुवंशिक मार्कर जैसे बैंगनी वर्णक/Purple pigmentation से संकर पौधों की पहचान करना) या उष्ण जल विधि (52°C पर 5 मिनट) का प्रयोग किया जाता है।
जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ
प्रमुख प्रजनन उद्देश्य: (1) उच्च उपज व मजबूत तना, (2) रागी ब्लास्ट (Pyricularia grisea — गर्दन व अंगुली ब्लास्ट) के प्रति प्रतिरोध, (3) सूखा सहिष्णुता, और (4) सफेद दाने वाली (White-grained) उच्च प्रोटीन व कैल्शियम युक्त किस्मों का विकास।
पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ
प्रजनन विधियाँ: शुद्ध वंशक्रम वरण (Pureline Selection – H-22, K-1, PR-202/Godavari), अंतर-किस्मीय संकरण एवं 'अफ्रीकी × भारतीय' संकरण (Indaf series)।
तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables
तालिका 3.1: ज्वार, बाजरा और रागी (श्री अन्न) का तुलनात्मक प्रजनन चार्ट
| विशेषता | ज्वार (Sorghum) | बाजरा (Pearl Millet) | रागी (Finger Millet / Ragi) |
|---|---|---|---|
| वानस्पतिक नाम एवं 2n | Sorghum bicolor (2n = 2x = 20) | Pennisetum glaucum (2n = 2x = 14) | Eleusine coracana (2n = 4x = 36) |
| उत्पत्ति केंद्र | इथियोपिया एवं सूडान (NE Africa) | पश्चिम अफ्रीका (Sahel region) | युगांडा एवं इथियोपिया (East Africa) |
| परागण की प्रकृति | बहुधा पर-परागित (Often cross-pollinated, ~6%) | उच्च पर-परागित (>80% — Protogyny के कारण) | पूर्णतः स्व-परागित (>99% Self-pollinated) |
| CMS स्रोत एवं प्रथम संकर | Combined Kafir-60 (Milo A1) → CSH-1 (1964) | Tift 23A (A1) → HB-1 (1965, डॉ. अठवाल) | संकर नहीं; शुद्ध वंशक्रम व वंशावली किस्में |
| प्रमुख एवं बायोफोर्टिफाइड किस्में | M 35-1, CSV-15, CSH-16, परभणी शक्ति (High Fe/Zn) | HHB 67 Improved, WCC-75, धनशक्ति (High Fe 71 ppm) | GPU-28 (Blast प्रतिरोधी), Indaf-5, PR-202, CFMV-1 |
सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations
1. ज्वार एवं बाजरा के संकर बीज उत्पादन में मादा : नर पंक्ति अनुपात (Planting Ratio) एवं पृथक्करण दूरी
पृथक्करण दूरी (Isolation Distance):
• ज्वार संकर बीज उत्पादन: आधार बीज (Foundation Seed) = 300 मीटर, प्रमाणित बीज (Certified Seed) = 200 मीटर (यदि चारों ओर जॉनसन घास/चारा ज्वार हो तो 400 मीटर)।
• बाजरा संकर बीज उत्पादन: आधार बीज = 1000 मीटर (1 किमी!), प्रमाणित बीज = 200 मीटर।
माइंड मैप · Mind Map
[Lecture 03: ज्वार, बाजरा एवं रागी (Millets) में फसल सुधार]
├── 1. ज्वार (Sorghum bicolor, 2n=20)
│ ├── उत्पत्ति: इथियोपिया/सूडान | 5 मूल नस्लें: Bicolor, Guinea, Caudatum, Kafir, Durra (भारत में प्रमुख)
│ ├── बहुधा पर-परागित (6% पर-परागण) | कोंपल में Dhurrin (HCN) विषाक्तता (<50 ppm चारा प्रजनन लक्ष्य)
│ ├── Milo-Kafir (A1) CMS (Stephens & Holland 1954): CK 60A × IS 84 = CSH-1 (1964, प्रथम संकर)
│ └── प्रमुख किस्में: M 35-1 (रबी मानक), CSV-15, CSH-9, CSH-16, Parbhani Shakti (Biofortified Fe & Zn)
├── 2. बाजरा (Pennisetum glaucum, 2n=14)
│ ├── उत्पत्ति: पश्चिम अफ्रीका | P. glaucum (2n=14) × P. purpureum (2n=28) = Pusa Giant Napier (2n=3x=21)
│ ├── स्पष्ट स्त्रीपूर्वता (Protogyny) → >80% पर-परागण (बिना विपुंसन के संकरण संभव)
│ ├── Tift 23A CMS (Burton 1958) → HB-1 (Tift 23A × BIL-3B, 1965 - Dr. D.S. Athwal)
│ └── मील के पत्थर: HHB 67 Improved (प्रथम MAS किस्म), Dhanshakti (प्रथम बायोफोर्टिफाइड किस्म - 71 ppm Fe), WCC-75
└── 3. रागी / मंडुआ (Eleusine coracana, 2n=4x=36)
├── उत्पत्ति: युगांडा | Allotetraploid (AABB) | सर्वोच्च कैल्शियम (344 mg/100g) एवं लंबी भंडारण क्षमता
├── पूर्णतः स्व-परागित (>99%) | संकरण हेतु 'Contact Method' (बैंगनी मार्कर के साथ)
└── प्रमुख किस्में: Indaf-5, Indaf-8 (Indian × African), GPU-28 (Blast प्रतिरोधी), PR-202, CFMV-1 & 2
प्रवाह चित्र · Flowchart
[बाजरा में 'स्त्रीपूर्वता (Protogyny)' के दो चरण एवं प्राकृतिक पर-परागण तंत्र]
बाजरा की बाली (Spike-like Panicle) का ध्वज पत्ती के आवरण से बाहर निकलना
↓
【प्रथम चरण: मादा प्रावस्था (Female Phase — दिन 1 से 3)】
बाली के मध्य से ऊपर व नीचे की ओर केवल द्विशाखित पंखदार वर्तिकाग्र (Stigmas) बाहर निकलते हैं
↓ (इस समय उसी बाली के पुंकेसर अंदर बंद रहते हैं → स्व-परागण असंभव)
हवा द्वारा दूसरे पौधों से आए परागकणों से 80–85% पर-परागण (Cross-pollination) संपन्न होता है
↓
【द्वितीय चरण: नर प्रावस्था (Male Phase — दिन 4 से 6)】
वर्तिकाग्र के सूखने के बाद उसी बाली से पुंकेसर (Stamens in 2 waves: पहले द्विलिंगी फूलों के, फिर नर फूलों के) बाहर निकलकर पराग बिखेरते हैं
परीक्षा टिप्स · Exam Tips
- परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है: भारत का प्रथम ज्वार संकर = CSH-1 (1964, CK 60A × IS 84); भारत का प्रथम बाजरा संकर = HB-1 (1965, Tift 23A × BIL-3B, प्रजनक: डॉ. डी.एस. अठवाल)।
- भारत की किसी भी फसल की प्रथम मार्कर-असिस्टेड चयन (MAS) किस्म = बाजरा की 'HHB 67 Improved' (2005) है, और प्रथम बायोफोर्टिफाइड किस्म = बाजरा की 'धनशक्ति (Dhanshakti)' (2014) है।
- रागी (Eleusine coracana) में संकरण के लिए हाथ से विपुंसन के बजाय 'Contact Method' प्रयोग की जाती है।
त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision
- ज्वार (Sorghum bicolor, 2n=20): Often cross-pollinated, Milo-Kafir CMS, CSH-1 (प्रथम संकर), M 35-1 (रबी मानक किस्म)।
- बाजरा (Pennisetum glaucum, 2n=14): Protogyny, Tift 23A CMS, HB-1 (प्रथम संकर), WCC-75 (कम्पोजिट), धनशक्ति (71 ppm Fe)।
- पूसा जायंट नेपियर (Pusa Giant Napier, 2n=3x=21): बाजरा (2n=14) × नेपियर घास (2n=28) का त्रिगुणित बंध्य संकर।
- रागी (Eleusine coracana, 2n=4x=36): स्व-परागित, सर्वाधिक कैल्शियम (344 mg/100g), किस्में—GPU-28 (ब्लास्ट प्रतिरोधी) व Indaf शृंखला।
- ज्वार में प्ररोह मक्खी (Shoot fly) प्रतिरोध का मुख्य लक्षण पत्ती पर सूक्ष्म रोम (Trichomes) और चमकदार पत्ती (Glossy trait) है।
MCQs — उत्तर एवं व्याख्या
1. सन् 1965 में 'Tift 23A × BIL-3B' संकरण से विश्व एवं भारत का प्रथम बाजरा संकर 'HB-1' किस भारतीय वैज्ञानिक ने विकसित किया था?
- (A) डॉ. एन.जी.पी. राव
- (B) डॉ. दिलबाग सिंह अठवाल (Dr. D.S. Athwal, PAU लुधियाना)
- (C) डॉ. सी.टी. पटेल
- (D) डॉ. हरभजन सिंह
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — डॉ. डी.एस. अठवाल ने टिफ्टन (अमेरिका) से प्राप्त Tift 23A का BIL-3B से संकरण कर 1965 में HB-1 विकसित किया।
2. सन् 1964 में विमोचित भारत के प्रथम ज्वार संकर 'CSH-1' का वंशावली संकरण (Pedigree) क्या है?
- (A) Tift 23A × BIL-3B
- (B) CK 60A (Combined Kafir-60) × IS 84
- (C) 296A × CS 3541
- (D) M 35-1 × CSV-1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — CSH-1 (Coordinated Sorghum Hybrid-1) का विकास Combined Kafir-60A और पीले भ्रूणपोष वाली IS-84 के संकरण से हुआ।
3. बाजरा (Pearl Millet) में उच्च पर-परागण (>80%) का मुख्य कारण कौन सी पुष्पीय विशेषता है?
- (A) पूर्वपुंसी (Protandry)
- (B) स्त्रीपूर्वता (Protogyny — वर्तिकाग्र का पुंकेसर से पहले निकलना)
- (C) स्व-अनिषेच्यता
- (D) एकलिंगाश्रयी पौधे
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — बाजरा में वर्तिकाग्र पुंकेसर निकलने से 2–3 दिन पहले ही बाहर आ जाते हैं (Protogyny), जिससे पर-परागण होता है।
4. भारत में किसी भी फसल में 'मार्कर-सहायता प्राप्त चयन' (MAS) द्वारा विकसित एवं विमोचित प्रथम किस्म कौन सी है?
- (A) पूसा बासमती 1121
- (B) HHB 67 Improved (बाजरा संकर, 2005)
- (C) स्वर्णा-सब1
- (D) विवेक क्यूपीएम-9
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — ICRISAT एवं HAU हिसार द्वारा विकसित बाजरा का 'HHB 67 Improved' भारत का पहला MAS उत्पाद है।
5. ज्वार की कौन सी ऐतिहासिक रबी किस्म सन् 1937 में 'मालदंडी' (Maldandi) स्थानीय किस्म से शुद्ध वंशक्रम वरण द्वारा चुनी गई थी और आज भी मानक है?
- (A) M 35-1 (मालदंडी 35-1)
- (B) CSV-15
- (C) परभणी मोती
- (D) फुले यशोदा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — मोहोल (महाराष्ट्र) में मालदंडी से चयनित 'M 35-1' रबी ज्वार की सबसे प्रसिद्ध सूखा-सहिष्णु और उत्तम रोटी गुणवत्ता वाली किस्म है।
6. समस्त अनाज फसलों में सर्वाधिक कैल्शियम (344 mg / 100g दाना) किस फसल में पाया जाता है?
- (A) गेहूँ
- (B) मक्का
- (C) रागी / मंडुआ (Finger Millet – Eleusine coracana)
- (D) ज्वार
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (C) — रागी (Eleusine coracana, 2n=36) में सभी अनाजों से अधिक कैल्शियम (344 mg/100g) पाया जाता है।
7. कृष्य बाजरा (Pennisetum glaucum, 2n=14) और नेपियर घास (P. purpureum, 2n=28) के अंतर्विशिष्ट संकरण से विकसित बहुवर्षीय चारा संकर 'Pusa Giant Napier' की गुणितता क्या होती है?
- (A) द्विगुणित (2n = 14)
- (B) त्रिगुणित एवं बंध्य (Triploid & Sterile, 2n = 3x = 21, AA'B)
- (C) चतुर्गुणित (2n = 28)
- (D) षट्गुणित (2n = 42)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — AA (n=7) और A'A'BB (n=14) के संकरण से बना बाजरा-नेपियर संकर त्रिगुणित (2n=21, AA'B) और बीज-बंध्य होता है जिसे जड़ टुकड़ों (Root slips) से लगाते हैं।
8. ज्वार की छोटी अवस्था में पत्तियों में पाया जाने वाला कौन सा सायनोजेनिक ग्लूकोसाइड पशुओं में HCN विषाक्तता पैदा करता है?
- (A) गोसिपॉल
- (B) धुरिन (Dhurrin)
- (C) BOAA
- (D) इरुसिक अम्ल
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — ज्वार में 'Dhurrin' नामक ग्लाइकोसाइड होता है जो जल-अपघटित होकर विषैला HCN (Prussic acid) बनाता है।
9. भारत की प्रथम लौह-समृद्ध (High-Iron, 71 ppm) बायोफोर्टिफाइड बाजरा किस्म कौन सी है?
- (A) धनशक्ति (Dhanshakti)
- (B) डब्ल्यूसीसी-75
- (C) पूसा-23
- (D) राज-171
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) — ICRISAT द्वारा ICTP 8203 में अंतःसमष्टि आवर्ती वरण से विकसित 'धनशक्ति' (71 ppm Fe, 40 ppm Zn) भारत की पहली बायोफोर्टिफाइड किस्म है।
10. रागी (Finger Millet) के छोटे स्व-परागित फूलों में संकरण कराने के लिए कौन सी विशेष विधि अपनाई जाती है?
- (A) डिटैसलिंग
- (B) संपर्क विधि (Contact Method — बैंगनी वर्णक मार्कर के साथ)
- (C) एसिड डिलिंटिंग
- (D) ट्रिपिंग
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B) — रागी में नर (बैंगनी मार्कर युक्त) और मादा (हरी) बालियों को सटाकर एक साथ बाँध देते हैं (Contact method) और F1 में बैंगनी पौधों से सच्चे संकर पहचानते हैं।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. ज्वार के 'Milo-Kafir' CMS तंत्र की खोज किसने और कब की थी?
जे.सी. स्टीफेंस एवं आर.एफ. हॉलैंड (Stephens & Holland) ने सन् 1954 में।
2. रागी (Eleusine coracana) की सबसे प्रसिद्ध ब्लास्ट-प्रतिरोधी किस्म कौन सी है?
GPU-28 (गांधी कृषि विज्ञान केंद्र, बेंगलुरु द्वारा विकसित)।
3. बाजरा के 'Tift 23A' कोशिकाद्रव्य की खोज किस वैज्ञानिक ने की थी?
डॉ. ग्लेन डब्ल्यू. बर्टन (Dr. G.W. Burton, टिफ्टन, जॉर्जिया, अमेरिका) ने।
4. ज्वार की पाँच मूल नस्लों (Harlan & de Wet) में से भारत में कौन सी नस्ल सर्वाधिक प्रचलित है?
दुर्रा (Durra) नस्ल।
5. चारे वाली मीठी सूडान घास संकर की एक प्रसिद्ध किस्म का नाम लिखिए।
SSG 59-3 (मीठी सूडान) एवं Pusa Chari-23।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. ज्वार को 'बहुधा पर-परागित फसल' (Often Cross-Pollinated Crop) क्यों कहा जाता है और प्रजनन में इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
ज्वार में सामान्यतः स्व-परागण होता है किंतु स्पाइकलेट खुलने और हवा द्वारा पराग उड़ने से इसमें औसतन 6% (5–25% तक) प्राकृतिक पर-परागण हो जाता है। इसलिए ज्वार की शुद्धता बनाए रखने हेतु स्व-परागण (बैगिंग) या 200–300 मीटर पृथक्करण दूरी आवश्यक होती है और इसमें शुद्ध वंशक्रम व संकर दोनों विधियाँ सफल हैं।
2. बाजरा में 'स्त्रीपूर्वता' (Protogyny) का संकरण और संकर बीज उत्पादन में क्या लाभ है?
बाजरा की बाली में मादा वर्तिकाग्र पुंकेसर निकलने से 2–3 दिन पहले ही बाहर निकल आते हैं। इस अंतराल में यदि किसी वांछित नर बाली का पराग मादा बाली पर झाड़ दिया जाए तो बिना चिमटी से पुंकेसर निकाले (Without emasculation) ही संकरण हो जाता है तथा खेत में उच्च पर-परागण मिलता है।
3. बाजरा × नेपियर अंतर्विशिष्ट संकरण (Bajra-Napier Hybrid) की आनुवंशिकी समझाइए।
कृष्य बाजरा (Pennisetum glaucum, 2n=2x=14, AA) एक एकवर्षीय उच्च गुणवत्ता वाली फसल है, जबकि नेपियर घास (P. purpureum, 2n=4x=28, A'A'BB) एक बहुवर्षीय कठोर घास है। दोनों के संकरण से बना 'Pusa Giant Napier / CO-3 / NB-21' त्रिगुणित (2n=3x=21, AA'B) होता है जिसमें उच्च चारा उपज व बहुवर्षीय गुण आते हैं और बंध्य होने से इसका प्रसार जड़ टुकड़ों (Root slips) से होता है।
4. रागी (Finger Millet) में 'Indaf' शृंखला की किस्मों का विकास कैसे हुआ?
1970 के दशक में बेंगलुरु में भारतीय रागी किस्मों (जो कम उपज वाली किंतु स्थानीय रूप से अनुकूलित थीं) का अफ्रीकी जननद्रव्यों (जो मोटे तने, बड़े ईयरहेड और उच्च उपज वाले थे) के साथ संकरण ('Indian × African = Indaf') कराया गया, जिससे Indaf-1, Indaf-5, Indaf-8 और बाद में GPU-28 जैसी उच्च उपज वाली किस्में बनीं।
5. चारा ज्वार (Forage Sorghum) प्रजनन के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
1. कोंपल अवस्था में कम हाइड्रोसायनिक अम्ल (Low HCN / Dhurrin < 50 ppm) होना ताकि पशुओं को विषाक्तता न हो। 2. तने का रसीला व मीठा होना (Juicy & sweet stalk – 'd' अप्रभावी जीन)। 3. तेजी से पुनर्जनन एवं बहु-कटाई (Multi-cut) क्षमता। 4. पत्ती रोगों के प्रति प्रतिरोध व उच्च पाचनशीलता (IVDMD)।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. ज्वार (Sorghum bicolor) की उत्पत्ति, 5 मूल नस्लों (Harlan & de Wet), पुष्प जीवविज्ञान, प्रजनन उद्देश्यों और संकर प्रजनन (Milo-Kafir प्रणाली) का सविस्तर वर्णन कीजिए।
इथियोपिया उत्पत्ति, 5 नस्लें (Bicolor, Guinea, Caudatum, Kafir, Durra), Sessile एवं Pedicellate स्पाइकलेट्स, 6% पर-परागण, Shoot fly व सूखा प्रतिरोध, HCN कमी तथा Stephens & Holland के Milo-Kafir CMS तंत्र से CSH-1 से CSH-16 और परभणी शक्ति के विकास का वर्णन करें।
2. बाजरा (Pennisetum glaucum) की उत्पत्ति, जीन पूल, पुष्प जीवविज्ञान (Protogyny), CMS स्रोतों और संकर एवं बायोफोर्टिफाइड किस्मों के विकास का विस्तृत वर्णन कीजिए।
पश्चिम अफ्रीका उत्पत्ति, 3 जीन पूल (नेपियर घास सहित), स्त्रीपूर्वता के दोनों चरण, Tift 23A एवं डॉ. अठवाल द्वारा HB-1 का विकास, 1970 की हरित बाली महामारी के बाद नए CMS स्रोत (A4/A5), HHB 67 Improved (प्रथम MAS संकर) और धनशक्ति (71 ppm Fe) का विस्तार से वर्णन करें।
3. रागी / मंडुआ (Eleusine coracana) की उत्पत्ति, गुणसूत्र उद्विकास, पुष्प संरचना, संकरण की संपर्क विधि (Contact Method) और प्रजनन उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
युगांडा उत्पत्ति, Allotetraploid (2n=4x=36, AABB) प्रकृति, पोषण महत्व (344 mg Ca), उँगलीनुमा स्पाइक संरचना, स्व-परागण, बैंगनी वर्णक मार्कर के साथ Contact method और Indaf व GPU-28 किस्मों का सविस्तर विवरण दें।
परीक्षा वन-लाइनर्स
- डॉ. एन.जी.पी. राव (Dr. N.G.P. Rao) को भारत में संकर ज्वार प्रजनन (CSH शृंखला) का जनक माना जाता है।
- ज्वार में तने के रसीलेपन (Juicy stem) का गुण सूखे तने (Pithy stem 'D') पर अप्रभावी ('d') होता है।
- बाजरा की प्रसिद्ध कम्पोजिट किस्म 'WCC-75' (World Composite Cross-75) ICRISAT द्वारा नाइजीरिया के वर्ल्ड कम्पोजिट से विकसित की गई थी।
- बाजरा में संकर बीज उत्पादन के लिए आधार बीज (Foundation seed) की पृथक्करण दूरी सभी अनाजों में सर्वाधिक अर्थात् 1000 मीटर रखी जाती है।
- रागी का प्रत्यक्ष जंगली पूर्वज 'Eleusine coracana subsp. africana' (2n=36) है।
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध GPB 311 Smart Notes।





