AGRON 311 Lecture 14: विभिन्न खाद्यान्न एवं बागवानी फसलों में खरपतवार प्रबंधन, जलीय खरपतवार प्रबंधन एवं फसल प्रणालियों में खरपतवार प्रबंधन | Hindi Notes
AGRO PATH FINDERAGRON 311 · Weed Management
विषय सूची · Quick Navigation
02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)Lecture 14: विभिन्न खाद्यान्न एवं बागवानी फसलों में खरपतवार प्रबंधन, जलीय खरपतवार प्रबंधन एवं फसल प्रणालियों में खरपतवार प्रबंधन
02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)
इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:
- भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसलों (धान — नर्सरी, रोपित व DSR; गेहूँ; मक्का; ज्वार; बाजरा), दलहनी फसलों (चना, अरहर, मूंग, उड़द, मटर), तिलहनी फसलों (सोयाबीन, मूंगफली, सरसों) और नकदी फसलों (गन्ना, कपास) में प्रमुख खरपतवारों, क्रांतिक अवधि और अनुशंसित शाकनाशी अनुसूची (Herbicide, Dose in a.i./ha & Time of application) को कंठस्थ करना।
- प्रमुख बागवानी व सब्जी फसलों (आलू, प्याज, लहसुन, टमाटर, मिर्च, गोभी एवं फल वृक्षों के बाग) के विशिष्ट खरपतवार प्रबंधन पैकेज को समझना।
- जलीय खरपतवारों (Aquatic Weeds) के चारों पारिस्थितिक वर्गों—(1) स्वतंत्र तैरने वाले (जलकुंभी, साल्विनिया, पिस्टिया), (2) जड़युक्त तैरती पत्ती वाले (कमल, कुमुदिनी), (3) जलमग्न (हाइड्रिला, वैलिसनेरिया, पोटामाोजेटोन), और (4) निर्गत/किनारे के (टाइफा/गोंदपूरी, नरकुल)—तथा उनके भौतिक, जैविक व रासायनिक प्रबंधन का अध्ययन करना।
- फसल प्रणालियों (Cropping Systems — धान-गेहूँ अनुक्रमिक प्रणाली तथा मक्का+दलहन और गन्ना+सरसों/दलहन अंतःफसल प्रणाली) में सुरक्षित शाकनाशी चयन एवं अवशेष प्रबंधन (Carryover management) को जानना।
03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)
मूल सामग्री (Core Course Content): पिछले 13 व्याख्यानों में हमने खरपतवार विज्ञान के सभी सैद्धांतिक, पारिस्थितिक, यांत्रिक, जैविक और जैव-रासायनिक पहलुओं का अध्ययन किया। यह अंतिम व्याख्यान 14 (Lecture 14) संपूर्ण पाठ्यक्रम का ‘व्यावहारिक क्षेत्र-अनुप्रयोग संकलन’ (Practical Field Application Master Compendium) है।
किसी भी कृषि अधिकारी, वैज्ञानिक या विद्यार्थी से खेत और प्रतियोगी परीक्षाओं (ICAR-JRF/SRF, ARS, AO, AAO, IFFCO, KRIBHCO एवं विश्वविद्यालयीय परीक्षा) में सबसे अधिक प्रश्न इसी विषय से पूछे जाते हैं कि किस फसल या फसल प्रणाली में कौन-सा शाकनाशी, कितनी मात्रा (a.i./ha) में और किस समय (PPI / PE / PoE) प्रयोग किया जाना चाहिए तथा नहरों व तालाबों के जलीय खरपतवारों को मछली व जल की सुरक्षा करते हुए कैसे नियंत्रित किया जाए।
04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)
05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)
1. विभिन्न खाद्यान्न, दलहनी, तिलहनी, नकदी एवं बागवानी फसलों में खरपतवार प्रबंधन (Crop-Wise Weed Management Schedule)
(A) खाद्यान्न फसलें (Cereal Crops):
- धान (Rice — Oryza sativa):
- प्रमुख खरपतवार: सांवा (Echinochloa colona / E. crus-galli), कोदों, मोथा (Cyperus iria, C. difformis), भृंगराज (Eclipta alba), लुडविगिया, मार्सिलिया (चौंती), जंगली धान।
- रोपित धान (Transplanted Rice): ब्यूटाक्लोर (1.0–1.5 kg a.i./ha) या प्रीटिलाक्लोर (0.5–0.75 kg a.i./ha) या अनिलोफॉस (0.4 kg/ha) या पाइराज़ोसल्फ्यूरॉन-इथाइल (20–25 g/ha) रोपाई के 2–4 दिन बाद (2–4 DAT) खड़े पानी में + बिसपायरीबैक-सोडियम (Nominee Gold @ 20–25 g a.i./ha) या एल्मिक्स (Almix @ 4 g a.i./ha) या फेनॉक्साप्रॉप + एथॉक्सीसल्फ्यूरॉन 15–25 DAT पर + 35 DAT पर कोनो-वीडर।
- सीधी बुवाई वाला धान (Direct Seeded Rice – DSR): पेंडिमेथालिन (1.0 kg a.i./ha PE 1–2 DAS पर) [या अंकुरित बीज में प्रीटिलाक्लोर + फेनक्लोरिम ‘Sofit’ @ 0.5 kg/ha] + 15–20 DAS पर बिसपायरीबैक-सोडियम (25 g/ha) या पेनोक्ससुलम + सायहालोफॉप।
- गेहूँ (Wheat — Triticum aestivum):
- प्रमुख खरपतवार: गेहूँसा (Phalaris minor), जंगली जई (Avena fatua), बथुआ (Chenopodium album), कृष्णनील (Anagallis arvensis), हिरणखुरी (Convolvulus arvensis), जंगली पालक (Rumex dentatus), सेंजी, बटरी।
- शाकनाशी अनुसूची: पेंडिमेथालिन (1.0 kg/ha PE) या बहु-प्रतिरोधी गेहूँसा क्षेत्रों में पाइरोक्सासल्फोन (Pyroxasulfone @ 127.5 g a.i./ha PE); खड़ी फसल में 30–35 DAS पर:
• केवल चौड़ी पत्ती हेतु: 2,4-D (0.5 kg a.i./ha) या मेटसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (4 g a.i./ha) या कारफेंट्राजोन-इथाइल (20 g a.i./ha — मालवा व हिरणखुरी हेतु भी)।
• केवल संकरी पत्ती (गेहूँसा/जई) हेतु: क्लोडिनाफॉप-प्रोपार्जिल (60 g a.i./ha) या फिनोक्साप्रॉप-p-इथाइल (100–120 g/ha) या पिनोक्साडेन (Axial @ 40–50 g/ha)।
• मिश्रित खरपतवार (संकरी + चौड़ी दोनों) हेतु: सल्फोसलफ्यूरॉन (25 g/ha) या रेडी-मिक्स सल्फोसलफ्यूरॉन + मेटसल्फ्यूरॉन (‘Total’ @ 32 g a.i./ha) या मेसोसल्फ्यूरॉन + आयोडोसल्फ्यूरॉन (‘Atlantis’ @ 14.4 g a.i./ha)।
- मक्का, ज्वार एवं बाजरा (Maize, Sorghum & Pearl Millet):
- प्रमुख खरपतवार: पत्थरचट्टा / साठी (Trianthema portulacastrum), मकरा घास (Dactyloctenium), सांवा, जंगली चौलाई, हजारदाना, स्ट्राइगा (ज्वार-बाजरा में जड़ परजीवी)।
- शाकनाशी अनुसूची: बुवाई के 0–2 दिन बाद एट्राजिन (Atrazine @ 0.5–1.0 kg a.i./ha PE — बाजरा में कम मात्रा 0.5 kg/ha); खड़ी मक्का में 15–25 DAS पर टेम्बोट्रियोन (Tembotrione — ‘Laudis’ @ 120 g a.i./ha) या टोप्राजोन (Topramezone @ 25.2 g/ha) या हैलोज़ल्फ्यूरॉन-मिथाइल (Halosulfuron @ 67.5 g/ha — मोथा नियंत्रण हेतु विशेष) + 30–35 DAS पर एक गुड़ाई।
(B) दलहनी एवं तिलहनी फसलें (Pulses & Oilseed Crops):
- सोयाबीन एवं मूंगफली (Soybean & Groundnut):
- पेंडिमेथालिन (1.0 kg a.i./ha PE) या डाइक्लोसुलम (Diclosulam @ 22–26 g a.i./ha PE) या सल्फेंट्राजोन (Sulfentrazone @ 360 g/ha PE); खड़ी फसल में 15–20 DAS पर इमेजेथापायर (Imazethapyr @ 75–100 g a.i./ha) या इमेजेथापायर + इमाज़ामॉक्स (‘Odyssey’ @ 70 g/ha) या केवल घासों हेतु क्विज़ालोफॉप-इथाइल (Quizalofop-ethyl @ 50 g a.i./ha) + 35 DAS पर एक बखरनी/गुड़ाई।
- चना, मटर, मसूर, अरहर, मूंग एवं उड़द (Pulses):
- पेंडिमेथालिन (0.75–1.0 kg a.i./ha PE) या रेडी-मिक्स पेंडिमेथालिन + इमेजेथापायर (‘Valor-32’ @ 1.0 kg/ha PE); खड़ी खरीफ दलहन (मूंग, उड़द, अरहर) में 15–20 DAS पर इमेजेथापायर (50–75 g a.i./ha) तथा रबी चना/मटर में केवल घासों हेतु क्विज़ालोफॉप-इथाइल (40–50 g/ha) + 30–35 DAS पर एक गुड़ाई।
- सरसों एवं राई (Mustard & Rapeseed):
- पेंडिमेथालिन (0.75–1.0 kg a.i./ha PE) या ऑक्सीफ्लोरफेन (0.15–0.20 kg a.i./ha PE)। परजीवी खरपतवार आज्ञा / ओरोबैंकी (Orobanche aegyptiaca) के नियंत्रण हेतु बुवाई के 25 और 50 दिन बाद ग्लाइफोसेट की अति-सूक्ष्म सब-लीथल मात्रा (25 और 50 g a.i./ha) का सावधानीपूर्वक छिड़काव।
(C) नकदी एवं बागवानी/सब्जी फसलें (Cash & Horticultural Crops):
- गन्ना (Sugarcane): अंधी गुड़ाई (15–20 DAS) + सूखी पत्ती मल्चिंग + एट्राजिन (1.0–2.0 kg a.i./ha PE) या मेट्रीब्यूजिन (Metribuzin @ 1.0–1.4 kg a.i./ha PE) + मोथा व चौड़ी पत्ती हेतु 30–45 DAS पर 2,4-D (1.0 kg/ha) + हेलोसल्फ्यूरॉन (67.5 g/ha)।
- कपास (Cotton): पेंडिमेथालिन (1.0 kg/ha PE) या ड्यूरॉन (Diuron @ 0.5–0.75 kg/ha PE) + 20–25 DAS पर पाइरिथियोबैक-सोडियम (Pyrithiobac-sodium — ‘Hitweed’ @ 62.5 g a.i./ha) + क्विज़ालोफॉप-इथाइल (50 g/ha) + 45 DAS पर हुड लगाकर कतारों के बीच पैराक्वाट/ग्लाइफोसेट का निदेशित स्प्रे।
- आलू एवं टमाटर (Potato & Tomato — Solanaceae): बुवाई/रोपाई के बाद मेट्रीब्यूजिन (Metribuzin — ‘Sencor’ @ 0.35–0.50 kg a.i./ha PE) या आलू के 5% अंकुरण पर उगे खरपतवारों पर पैराक्वाट (0.5 kg a.i./ha Early PoE)।
- प्याज एवं लहसुन (Onion & Garlic): उथली जड़ व बिना छाया वाली फसल होने से खरपतवारों के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील; रोपाई के 2–3 दिन बाद ऑक्सीफ्लोरफेन (Oxyfluorfen — ‘Goal’ @ 0.15–0.25 kg a.i./ha PE/Early PoE) या पेंडिमेथालिन (1.0 kg/ha PE) + 30–35 DAT पर एक गुड़ाई।
2. जलीय खरपतवार प्रबंधन (Aquatic Weed Management)
(A) आवास के अनुसार जलीय खरपतवारों के 4 पारिस्थितिक वर्ग:
1. स्वतंत्र तैरने वाले (Free-Floating Weeds)
पानी की सतह पर बिना मिट्टी में जड़ जमाए तैरते हैं। उदाहरण: जलकुंभी (Eichhornia crassipes — ‘बंगाल का आतंक’), साल्विनिया / जलीय फर्न (Salvinia molesta), जल सलाद / पिस्टिया (Pistia stratiotes), लेम्ना (Duckweed)।
2. जड़युक्त तैरती पत्ती वाले (Rooted Floating-Leaved)
जड़ें तालाब के तल की मिट्टी में धँसी होती हैं किंतु पत्तियाँ और फूल पानी की सतह पर तैरते हैं। उदाहरण: कमल (Nelumbo nucifera), कुमुदिनी / वाटर लिली (Nymphaea stellata), जussiaea।
3. पूर्णतः जलमग्न (Submerged Weeds)
पूरा पौधा पानी की सतह के नीचे डूबा रहता है; नहरों के जल प्रवाह को सर्वाधिक रोकते हैं। उदाहरण: हाइड्रिला (Hydrilla verticillata), वैलिसनेरिया (Vallisneria spiralis — Eel grass), पोटामाोजेटोन (Potamogeton), सिरेटोफिलम (Ceratophyllum), शैवाल (Chara, Nitella)।
4. निर्गत / दलदली किनारे के (Emergent / Marginal Weeds)
जड़ें उथले पानी की कीचड़ में होती हैं और तना व पत्तियाँ पानी से काफी ऊपर हवा में निकली रहती हैं। उदाहरण: टाइफा / एलीफेंट ग्रास / गोंदपूरी (Typha angustata), नरकुल (Phragmites karka), पॉलीगोनम, साइपरस।
(B) जलीय खरपतवारों के एकीकृत प्रबंधन की विधियाँ:
- 1. भौतिक एवं यांत्रिक विधियाँ: हाथ या जाल से निकालना, ड्रेजिंग (Dredging), चैनिंग (Chaining), अंडरवाटर मोइंग/वीड हार्वेस्टर नाव, नहरों को गर्मी में सुखाना (Drying/Desiccation) और जलकुंभी का बायोगैस, वर्मीकंपोस्ट व हैंडमेड पेपर बनाने में उपयोग (Control through utilization)।
- 2. जैविक नियंत्रण (Biological Control — सबसे सुरक्षित):
- जलकुंभी हेतु: एक्सोटिक घुन Neochetina eichhorniae एवं Neochetina bruchi तथा माइट Orthogalumna terebrantis।
- साल्विनिया फर्न हेतु: घुन Cyrtobagous salviniae।
- जलमग्न खरपतवारों (हाइड्रिला, वैलिसनेरिया) हेतु: शाकाहारी मछली ‘चीनी ग्रास कार्प / व्हाइट अमूर’ (Ctenopharyngodon idella @ 100–200 मछलियाँ/ha)।
- 3. रासायनिक नियंत्रण (Chemical Control):
- जलकुंभी व पिस्टिया हेतु: 2,4-D सोडियम/अमीन लवण (1.5–2.0 kg a.i./ha) या ग्लाइफोसेट (1.5–2.0 kg/ha) या पैराक्वाट (0.6–1.0 kg/ha) का पत्तियों पर स्प्रे।
- टाइफा (Typha) व नरकुल हेतु: फूल आने की अवस्था पर ग्लाइफोसेट (1.0–1.5% घोल) या दालापॉन (Dalapon) का छिड़काव।
- शैवाल (Algal bloom — Chara, Nitella, Spirogyra) हेतु: कॉपर सल्फेट (Copper sulphate — @ 0.5–1.0 ppm)।
3. फसल प्रणालियों में खरपतवार प्रबंधन (Weed Management in Cropping Systems)
भारत में एकल फसल के बजाय अंतःफसल प्रणाली (Intercropping) और अनुक्रमिक फसल प्रणाली (Sequential Cropping) अपनाई जाती है, जिनमें शाकनाशी का चुनाव पूरे सिस्टम को ध्यान में रखकर किया जाता है:
- 1. अंतःफसल प्रणाली (Intercropping Systems — जैसे मक्का/ज्वार/बाजरा/गन्ना + मूंग/उड़द/लोबिया/सोयाबीन):
- यहाँ एक फसल एकबीजपत्री (Cereal) और दूसरी द्विबीजपत्री (Legume) होती है। अतः इसमें एट्राजिन या 2,4-D का प्रयोग पूर्णतः वर्जित है क्योंकि वे दलहन को मार देंगे।
- अनुशंसित सुरक्षित प्री-इमर्जेंस शाकनाशी: पेंडिमेथालिन (Pendimethalin @ 0.75–1.0 kg a.i./ha PE) या एलाक्लोर (Alachlor @ 1.0–1.5 kg/ha PE) या ऑक्सीफ्लोरफेन (0.15 kg/ha PE) जो दोनों फसलों के लिए पूर्णतः सुरक्षित हैं।
- 2. अनुक्रमिक फसल प्रणाली (Sequential Cropping — जैसे धान-गेहूँ, मक्का-चना/सरसों, कपास-गेहूँ):
- मृदा अवशेष कैरी-ओवर से बचाव: यदि खरीफ मक्का में एट्राजिन की उच्च मात्रा () दी गई हो तो रबी में चना, मटर या सरसों के अंकुरण पर विषाक्त प्रभाव पड़ सकता है। इसी प्रकार यदि रबी गेहूँ में सल्फोसलफ्यूरॉन का प्रयोग देर से किया गया हो और मृदा pH क्षारीय () हो, तो अगली खरीफ में ज्वार और मक्का (Sorghum & Maize) में गंभीर अवशेष क्षति हो सकती है।
- रोटेशनल खरपतवार नियंत्रण: धान-गेहूँ प्रणाली में लगातार एक ही चक्र के कारण पनपे गेहूँसा और जंगली धान को तोड़ने के लिए हर तीसरे वर्ष रबी में बरसीम या सरसों और ग्रीष्म में मूंग (Summer Moong) को शामिल करना चाहिए।
06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)
फसल एवं पारिस्थितिकी के अनुसार शाकनाशी चयन का त्वरित वर्गीकरण:
- सार्वभौमिक प्री-इमर्जेंस (अंतःफसल सहित लगभग सभी फसलों में सुरक्षित): पेंडिमेथालिन (0.75–1.0 kg a.i./ha)।
- विशिष्ट फसल-युग्म शाकनाशी: धान → ब्यूटाक्लोर/प्रीटिलाक्लोर/बिसपायरीबैक; गेहूँ → सल्फोसलफ्यूरॉन/क्लोडिनाफॉप/पाइरोक्सासल्फोन; मक्का/गन्ना → एट्राजिन/टेम्बोट्रियोन; सोयाबीन/दलहन → इमेजेथापायर; आलू/टमाटर/गन्ना → मेट्रीब्यूजिन; प्याज/लहसुन → ऑक्सीफ्लोरफेन; कपास → पाइरिथियोबैक-सोडियम।
07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)
- प्रणाली-आधारित खरपतवार प्रबंधन का सिद्धांत (Principle of System-Based Weed Management): किसी एक ऋतु की फसल में खरपतवार प्रबंधन केवल उस फसल की उपज बचाने के लिए नहीं, बल्कि अगली ऋतु की फसल के लिए मृदा बीज बैंक को घटाने और किसी भी हानिकारक शाकनाशी अवशेष (Residue carryover) को छोड़ने से बचने के लिए किया जाना चाहिए।
08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)
हल किया गया संख्यात्मक उदाहरण: तालाब में शैवाल नियंत्रण हेतु कॉपर सल्फेट (ppm) की मात्रा गणना
प्रश्न: एक मछली तालाब की लंबाई , चौड़ाई और औसत गहराई है। तालाब में शैवाल (Chara एवं Nitella) के नियंत्रण हेतु (mg/L) की दर से कितने किलोग्राम कॉपर सल्फेट () की आवश्यकता होगी?
हल (Solution):
- तालाब में जल का कुल आयतन ()
- चूँकि (या जल), अतः कुल जल ( जल)।
- का अर्थ है प्रति दस लाख () भाग जल में भाग रसायन (अर्थात् ):
$$
09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)
तुलनात्मक सारणी 14.1: भारत की प्रमुख खाद्यान्न, दलहनी, तिलहनी, नकदी एवं बागवानी फसलों की मास्टर शाकनाशी अनुसूची
| फसल का नाम | अंकुरण-पूर्व (Pre-Emergence: 0–3 DAS/DAT) एवं मात्रा (a.i./ha) | अंकुरण-पश्चात (Post-Emergence: 15–35 DAS/DAT) एवं मात्रा (a.i./ha) |
|---|---|---|
| 1. धान (Rice) | ब्यूटाक्लोर (1.25 kg) या प्रीटिलाक्लोर (0.75 kg) या पेंडिमेथालिन (1.0 kg – DSR) | बिसपायरीबैक-सोडियम (20–25 g) या एल्मिक्स (4 g) या 2,4-D (0.5 kg) |
| 2. गेहूँ (Wheat) | पेंडिमेथालिन (1.0 kg) या पाइरोक्सासल्फोन (127.5 g) | सल्फोसलफ्यूरॉन (25 g) या क्लोडिनाफॉप (60 g) या 2,4-D (0.5 kg) या मेटसल्फ्यूरॉन (4 g) |
| 3. मक्का एवं ज्वार | एट्राजिन (0.5–1.0 kg) या पेंडिमेथालिन (1.0 kg) | टेम्बोट्रियोन (120 g – मक्का) या टोप्राजोन (25.2 g) या 2,4-D (0.5 kg) |
| 4. सोयाबीन एवं मूंगफली | पेंडिमेथालिन (1.0 kg) या डाइक्लोसुलम (24 g) | इमेजेथापायर (75–100 g at 15–20 DAS) या ओडिसी (70 g) या क्विज़ालोफॉप (50 g) |
| 5. चना, मटर, अरहर, मूंग | पेंडिमेथालिन (0.75–1.0 kg) या पेंडिमेथालिन+इमेजेथापायर (Valor-32) | इमेजेथापायर (50–75 g – खरीफ दलहन में) या क्विज़ालोफॉप-इथाइल (40–50 g) |
| 6. सरसों (Mustard) | पेंडिमेथालिन (0.75–1.0 kg) या ऑक्सीफ्लोरफेन (0.15–0.20 kg) | क्विज़ालोफॉप-इथाइल (50 g — घासों हेतु); ओरोबैंकी हेतु ग्लाइफोसेट (25–50 g) |
| 7. गन्ना (Sugarcane) | एट्राजिन (1.0–2.0 kg) या मेट्रीब्यूजिन (1.0–1.4 kg) | 2,4-D (1.0 kg) + हेलोसल्फ्यूरॉन-मिथाइल (67.5 g — मोथा हेतु) |
| 8. कपास (Cotton) | पेंडिमेथालिन (1.0 kg) या ड्यूरॉन (0.5–0.75 kg) | पाइरिथियोबैक-सोडियम (62.5 g) + क्विज़ालोफॉप (50 g) या हुल्डेड पैराक्वाट |
| 9. आलू एवं टमाटर | मेट्रीब्यूजिन (0.35–0.50 kg) या पेंडिमेथालिन (1.0 kg) | पैराक्वाट (0.5 kg — आलू में 5% अंकुरण पर संपर्क स्प्रे) |
| 10. प्याज एवं लहसुन | ऑक्सीफ्लोरफेन (0.15–0.25 kg) या पेंडिमेथालिन (1.0 kg) | ऑक्सीफ्लोरफेन (0.15 kg at 15–20 DAT) या प्रोपाक्विज़ाफॉप (घासों हेतु) |
10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)
जलीय खरपतवार प्रबंधन में ppm गणना का सूत्र
- जलाशय में आवश्यक रसायन की मात्रा (Herbicide Quantity for Aquatic Bodies in ppm):
$$
(क्योंकि ; अतः जल में सांद्रता के लिए ठीक सक्रिय तत्व की आवश्यकता होती है।)
11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)
- धान: ब्यूटाक्लोर/प्रीटिलाक्लोर (PE) + बिसपायरीबैक/एल्मिक्स (PoE)
- गेहूँ: पेंडिमेथालिन/पाइरोक्सासल्फोन (PE) + सल्फोसलफ्यूरॉन/क्लोडिनाफॉप/2,4-D
- मक्का/गन्ना: एट्राजिन (PE) + टेम्बोट्रियोन/हेलोसल्फ्यूरॉन (PoE)
- कपास: पेंडिमेथालिन/ड्यूरॉन (PE) + पाइरिथियोबैक-सोडियम (PoE)
- सोयाबीन, मूंगफली, मूंग, उड़द: पेंडिमेथालिन (PE) + इमेजेथापायर (15-20 DAS)
- आलू एवं टमाटर: मेट्रीब्यूजिन (Sencor @ 0.35-0.5 kg/ha)
- प्याज एवं लहसुन: ऑक्सीफ्लोरफेन (Goal @ 0.15-0.25 kg/ha)
- सरसों: पेंडिमेथालिन/ऑक्सीफ्लोरफेन (PE)
- स्वतंत्र तैरने वाले: जलकुंभी (Neochetina + 2,4-D), साल्विनिया (Cyrtobagous)
- जलमग्न: हाइड्रिला, वैलिसनेरिया (ग्रास कार्प मछली Ctenopharyngodon idella)
- निर्गत/किनारे के: टाइफा, नरकुल (ग्लाइफोसेट / दालापॉन)
- शैवाल (Chara/Nitella): कॉपर सल्फेट (CuSO4 @ 0.5-1.0 ppm)
- अंतःफसल (मक्का/गन्ना + दलहन): पेंडिमेथालिन या एलाक्लोर (PE) सर्वश्रेष्ठ
- अंतःफसल में एट्राजिन व 2,4-D पूर्णतः वर्जित (दलहन को क्षति)
- अनुक्रमिक प्रणाली: गेहूँ में सल्फोसलफ्यूरॉन का ज्वार/मक्का पर अवशेष प्रभाव
- धान-गेहूँ में गेहूँसा तोड़ने हेतु बरसीम/सरसों का रोटेशन
12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)
13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)
- अनाज + दलहन अंतःफसल प्रणाली (जैसे मक्का + लोबिया/मूंग या ज्वार + अरहर) के लिए सर्वाधिक सुरक्षित और सार्वभौमिक प्री-इमर्जेंस शाकनाशी ‘पेंडिमेथालिन’ (Pendimethalin @ 0.75–1.0 kg a.i./ha) और ‘एलाक्लोर’ हैं।
- आलू, टमाटर और गन्ने के लिए सबसे विशिष्ट प्री-इमर्जेंस/अर्ली पोस्ट-इमर्जेंस शाकनाशी ‘मेट्रीब्यूजिन’ (Metribuzin — Sencor) है, जबकि प्याज और लहसुन के लिए ‘ऑक्सीफ्लोरफेन’ (Oxyfluorfen — Goal) है।
- कपास की खड़ी फसल (20–25 DAS) में चौड़ी पत्ती के खरपतवारों को नियंत्रित करने वाला विशिष्ट वरणात्मक शाकनाशी ‘पाइरिथियोबैक-सोडियम’ (Pyrithiobac-sodium — Hitweed) है।
- मक्का और गन्ने में बहुवर्षीय ‘मोथा’ (Cyperus rotundus) को खड़ी फसल में जड़ से मारने वाला विशिष्ट सल्फोनिलयूरिया शाकनाशी ‘हेलोसल्फ्यूरॉन-मिथाइल’ (Halosulfuron-methyl — Sempra @ 67.5 g a.i./ha) है।
- जलीय खरपतवारों में जलकुंभी व साल्विनिया ‘स्वतंत्र तैरने वाले’ (Free-floating), हाइड्रिला व वैलिसनेरिया ‘जलमग्न’ (Submerged) और टाइफा व नरकुल ‘निर्गत’ (Emergent) खरपतवार हैं।
14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)
त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary):
- धान: ब्यूटाक्लोर/प्रीटिलाक्लोर (PE) + बिसपायरीबैक-सोडियम/एल्मिक्स (PoE)।
- गेहूँ: पेंडिमेथालिन/पाइरोक्सासल्फोन (PE) + सल्फोसलफ्यूरॉन/क्लोडिनाफॉप/मेटसल्फ्यूरॉन/2,4-D (PoE)।
- मक्का/गन्ना: एट्राजिन (PE) + टेम्बोट्रियोन/टोप्राजोन/हेलोसल्फ्यूरॉन (PoE)।
- दलहन व सोयाबीन/मूंगफली: पेंडिमेथालिन (PE) + इमेजेथापायर/ओडिसी/क्विज़ालोफॉप (PoE)।
- बागवानी विशेष: आलू व टमाटर → मेट्रीब्यूजिन; प्याज व लहसुन → ऑक्सीफ्लोरफेन; कपास → पाइरिथियोबैक-सोडियम।
- जलीय खरपतवार: जलकुंभी (2,4-D + Neochetina), साल्विनिया (Cyrtobagous), हाइड्रिला (ग्रास कार्प मछली), शैवाल ()।
15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)
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16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)
- अनाज + दलहन अंतःफसल प्रणाली (जैसे मक्का + मूंग/लोबिया) के लिए सर्वाधिक सुरक्षित शाकनाशी ‘पेंडिमेथालिन’ (PE) है।
- प्याज और लहसुन के लिए ‘ऑक्सीफ्लोरफेन’ तथा आलू और टमाटर के लिए ‘मेट्रीब्यूजिन’ सर्वाधिक उपयुक्त शाकनाशी हैं।
- कपास की खड़ी फसल में चौड़ी पत्ती नियंत्रण हेतु ‘पाइरिथियोबैक-सोडियम’ तथा मक्का/गन्ने में मोथा नियंत्रण हेतु ‘हेलोसल्फ्यूरॉन-मिथाइल’ प्रयुक्त होता है।
- हाइड्रिला और वैलिसनेरिया ‘पूर्णतः जलमग्न’ जलीय खरपतवार हैं जिनका जैविक नियंत्रण ‘ग्रास कार्प मछली’ (Ctenopharyngodon idella) से किया जाता है।
- जलाशयों में शैवाल (Chara, Nitella) नियंत्रण हेतु ‘कॉपर सल्फेट’ (CuSO4 @ 0.5–1.0 ppm) का प्रयोग किया जाता है।
(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)
(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)
(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGRON 311 notes।





