AGRON 311 Lecture 05: खरपतवार प्रबंधन की अवधारणाएँ: भौतिक, कर्षण, रासायनिक एवं जैविक सिद्धांत और विधियाँ | Hindi Notes
AGRO PATH FINDERAGRON 311 · Weed Management
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02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)Lecture 05: खरपतवार प्रबंधन की अवधारणाएँ: भौतिक, कर्षण, रासायनिक एवं जैविक सिद्धांत और विधियाँ
02 अध्ययन उद्देश्य (Learning Objectives)
इस व्याख्यान के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सक्षम होंगे:
- खरपतवार प्रबंधन के तीन मूलभूत सिद्धांतों—निवारण/रोकथाम (Prevention), उन्मूलन (Eradication) और नियंत्रण/प्रबंधन (Control/Management)—के बीच अंतर को समझना।
- भौतिक एवं यांत्रिक विधियों (हाथ से निराई, गुड़ाई, ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई, कटाई/Mowing, जलमग्न करना/Flooding, फ्लेमिंग, मल्चिंग, मृदा सौरीकरण व ड्रेजिंग/चैनिंग) का अध्ययन करना।
- कर्षण / सस्य विधियों (Cultural / Ecological methods — फसल चक्र, अंतःफसल, स्मदर फसलें, स्टेल सीडबेड, बुवाई समय व घनत्व, उर्वरक व सिंचाई प्रबंधन) की भूमिका समझना।
- जैविक नियंत्रण (Biological Control) के दोनों उपागमों—शास्त्रीय जैविक नियंत्रण (कीट बायो-एजेंट्स: गाजर घास, जलकुंभी, लैंटाना, साल्विनिया व नागफनी के विशिष्ट कीट) और बायो-शाकनाशी / माइको-हर्बिसाइड्स (DeVine, Collego, BioMal, Lubao-2, Bipolaris)—को कंठस्थ करना।
- रासायनिक खरपतवार नियंत्रण (Chemical method) के सिद्धांत, लाभ और सीमाओं का विश्लेषण करना।
03 प्रस्तावना एवं विषय प्रवेश (Introduction)
मूल सामग्री (Core Course Content): खरपतवार विज्ञान में आधुनिक दृष्टिकोण ‘खरपतवार नियंत्रण’ (Weed Control) से आगे बढ़कर ‘खरपतवार प्रबंधन’ (Weed Management) बन चुका है। इसका उद्देश्य खेत से हर एक खरपतवार पौधे को 100% जड़ से मिटाना (जो आर्थिक और पारिस्थितिक रूप से असंभव है) नहीं, बल्कि खरपतवारों की जनसंख्या को ‘आर्थिक दहलीज स्तर’ (Economic Threshold Level – ETL) से नीचे रखना है ताकि फसल की उपज में आर्थिक हानि न हो। इसके लिए तीन मूलभूत सिद्धांतों (रोकथाम, उन्मूलन व नियंत्रण) तथा चार मुख्य विधियों—भौतिक (Physical), कर्षण/सस्य (Cultural), रासायनिक (Chemical) और जैविक (Biological)—का प्रयोग किया जाता है।
04 प्रमुख वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)
05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)
1. भौतिक एवं यांत्रिक विधियाँ (Physical and Mechanical Methods)
- 1. हाथ से उखाड़ना एवं खुरपी से निराई (Hand pulling & Hand weeding): सबसे प्राचीन, सुरक्षित और प्रभावी विधि (किंतु श्रमसाध्य और महँगी)।
- 2. गुड़ाई एवं अंतर-कर्षण (Hoeing & Inter-cultivation): हैंड हो, व्हील हो, ब्लेड हैरो (बखर) या कल्टीवेटर द्वारा कतारों के बीच की मिट्टी को ढीला करना और खरपतवार काटना।
- 3. ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई (Summer Deep Tillage): मई-जून में मोल्डबोर्ड हल से गहरी जुताई करने पर बहुवर्षीय खरपतवारों—जैसे मोथा (Cyperus rotundus), दूब घास (Cynodon dactylon) और काँस (Saccharum spontaneum)—के भूमिगत कंद और प्रकंद उखड़कर 45°C+ की तेज धूप में सूखकर नष्ट (Desiccation) हो जाते हैं।
- 4. कटाई / मोंइंग एवं सिकलिंग (Mowing & Sickling): चारागाहों, बागानों और सड़कों के किनारे खरपतवारों को फूल व बीज बनने (Seed setting) से पहले ही दरांती या लॉन-मूवर से ऊपर से काट देना।
- 5. जलमग्न करना (Flooding / Submergence): खेत के चारों ओर मेड़ बनाकर 15–30 cm गहरा पानी 3 से 6 सप्ताह तक भर देने से ऑक्सीजन के अभाव (Asphyxiation) में हिरणखुरी (Convolvulus arvensis), मोथा और दूब जैसे स्थलीय खरपतवार मर जाते हैं। धान में रोपाई के बाद 5 cm पानी भरकर रखना सर्वोत्तम खरपतवार नियंत्रण है।
- 6. जलाना एवं फ्लेमिंग (Burning & Flame Weeding): बंजर भूमि पर सूखे खरपतवार जलाना अथवा कपास, गन्ना व मक्का की कतारों के बीच एलपीजी फ्लेम थ्रोअर से कोमल खरपतवारों की कोशिकाओं को उच्च ताप () से झुलसाना (Thermal weeding)।
- 7. मल्चिंग एवं मृदा सौरीकरण (Mulching & Soil Solarization): काली पॉलीथीन शीट या फसल अवशेषों की मल्च प्रकाश रोककर प्रकाश-संश्लेषण बंद कर देती है; जबकि गर्मियों में 4–6 सप्ताह तक पारदर्शी पॉलीथीन से मृदा सौरीकरण करने पर तापमान 10–12°C बढ़कर ऊपरी 10–15 cm के खरपतवार बीज नष्ट कर देता है।
2. कर्षण / सस्य विधियाँ (Cultural / Ecological Methods — ‘Good Crop is the Best Weed Killer’)
- फसल चक्र (Crop Rotation): यह फसल-संबद्ध और परजीवी खरपतवारों को तोड़ने का सबसे अचूक उपाय है:
- गेहूँ के खेत में गेहूँसा (Phalaris minor) नियंत्रण हेतु: गेहूँ के स्थान पर 2–3 वर्ष तक बरसीम (Berseem), सरसों, आलू या गन्ना उगाने से गेहूँसा स्वतः समाप्त हो जाता है (क्योंकि बरसीम की बार-बार कटाई के साथ गेहूँसा बीज बनने से पहले ही कट जाता है)।
- सरसों में ओरूबैंकी (Orobanche) और ज्वार में स्ट्राइगा (Striga) नियंत्रण हेतु: गैर-परपोषी या ट्रैप फसलों (कपास, लोबिया, सूरजमुखी, मूंगफली) का फसल चक्र अपनाना।
- अंतःफसल एवं स्मदर फसलें (Intercropping & Smother Crops): मक्का, ज्वार, कपास या गन्ने की चौड़ी कतारों के बीच तेजी से बढ़कर जमीन ढकने वाली दलहनी फसलें—जैसे लोबिया (Cowpea), मूंग, उड़द, सोयाबीन या सनई (Sunnhemp)—उगाने से खरपतवार दब (Smother) जाते हैं।
- स्टेल सीडबेड (Stale Seedbed): बुवाई पूर्व सिंचाई कर उगे खरपतवारों को नष्ट करना।
- बुवाई का समय, संकरी कतार दूरी एवं बीज दर: गेहूँ की अगेती बुवाई (अक्टूबर अंत) करने पर कम तापमान न मिलने से गेहूँसा कम उगता है; सामान्य से 20–25% अधिक बीज दर और संकरी कतार दूरी खरपतवारों को दबाती है।
- ग्रीष्मकालीन हरी खाद: ढैंचा (Sesbania) या सनई की घनी बुवाई खरपतवारों को उगने नहीं देती।
3. जैविक खरपतवार नियंत्रण (Biological Weed Control — Classical Bio-agents & Mycoherbicides)
जैविक नियंत्रण में खरपतवारों के प्राकृतिक शत्रुओं (कीट, कवक, मछली, घोंघे) का उपयोग किया जाता है। इसके दो मुख्य दृष्टिकोण हैं:
(A) शास्त्रीय जैविक नियंत्रण: प्रमुख कीट बायो-एजेंट्स (Classical Insect Bio-agents)
1. गाजर घास (Parthenium hysterophorus): मैक्सिकन भृंग Zygogramma bicolorata (1983 में मेक्सिको से भारत लाया गया — पत्तियाँ खाता है)।
2. जलकुंभी (Eichhornia crassipes): दक्षिण अमेरिकी घुन/वीविल Neochetina eichhorniae एवं Neochetina bruchi तथा माइट Orthogalumna terebrantis।
3. लैंटाना (Lantana camara): लेस बग Teleonemia scrupulosa, फ्लाई Ophiomyia lantanae एवं Crocidosema lantana।
4. नागफनी (Opuntia spp. – Prickly pear): स्केल कीट Dactylopius tomentosus / D. opuntiae (1926 में भारत में प्रथम सफल जैविक नियंत्रण) एवं शलभ Cactoblastis cactorum (ऑस्ट्रेलिया में)।
5. जलीय फर्न साल्विनिया (Salvinia molesta): केरल में घुन/वीविल Cyrtobagous salviniae एवं घास कार्प मछली (Grass carp — Ctenopharyngodon idella)।
(B) बायो-शाकनाशी / माइको-हर्बिसाइड्स (Commercial Mycoherbicides)
1. DeVine (डिवाइन — 1981, विश्व का प्रथम माइको-हर्बिसाइड): कवक Phytophthora palmivora ➔ नींबू के बागों में Morrenia odorata (Milkweed vine) के नियंत्रण हेतु।
2. Collego (कॉलेगो — 1982): कवक Colletotrichum gloeosporioides f. sp. aeschynomene ➔ धान व सोयाबीन में Aeschynomene virginica (Northern jointvetch) हेतु।
3. BioMal (बायोमैल): कवक Colletotrichum gloeosporioides f. sp. malvae ➔ Malva pusilla (Round-leaved mallow) हेतु।
4. Lubao-2 (लुबाओ-2 — चीन): कवक Colletotrichum gloeosporioides f. sp. cuscutae ➔ अमरबेल (Cuscuta) के नियंत्रण हेतु।
5. Bipolaris (बाइपोलरिस): कवक Bipolaris sorghicola ➔ बरू / जॉनसन घास (Sorghum halepense) हेतु।
6. ABG-5003 / Cercospora rodmanii: जलकुंभी (Eichhornia) हेतु।
06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)
खरपतवार प्रबंधन के सिद्धांतों एवं विधियों का वर्गीकरण:
- 3 सिद्धांत (Principles): (1) Prevention (रोकथाम), (2) Eradication (उन्मूलन), और (3) Control/Management (नियंत्रण/प्रबंधन)।
- 4 विधियाँ (Methods): (1) Physical/Mechanical (भौतिक/यांत्रिक), (2) Cultural/Ecological (कर्षण/सस्य), (3) Biological (जैविक), और (4) Chemical (रासायनिक शाकनाशी)।
07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं अवधारणाएँ (Important Principles & Concepts)
- जैविक नियंत्रण का ‘परपोषी-विशिष्टता’ सिद्धांत (Principle of Host-Specificity in Biocontrol): किसी भी विदेशी कीट बायो-एजेंट को देश में छोड़ने से पहले उसका कड़ा ‘स्टार्वेशन टेस्ट’ (Starvation test) किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो कि वह कीट केवल लक्षित खरपतवार को ही खाएगा और किसी भी आर्थिक फसल को नुकसान नहीं पहुँचाएगा (हालाँकि Zygogramma bicolorata कभी-कभी सूरजमुखी की पत्तियों पर भी देखा गया था, जो बाद में सुरक्षित पाया गया)।
08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व केस स्टडी (Scientific & Practical Examples)
व्यावहारिक उदाहरण: धान-बरसीम फसल चक्र द्वारा गेहूँसा (Phalaris minor) का सस्य नियंत्रण
पंजाब और हरियाणा के जिन खेतों में गेहूँसा (Phalaris minor) में शाकनाशी प्रतिरोध आ गया है, वहाँ किसान यदि रबी में गेहूँ के स्थान पर 2–3 वर्षों तक बरसीम (Trifolium alexandrinum) उगाते हैं, तो बरसीम के साथ उगने वाला गेहूँसा हर 25–30 दिन में चारे की कटाई (Mowing/Cutting) के साथ बीज बनने से पहले ही कट जाता है। इस प्रकार बिना किसी महँगे शाकनाशी के 3 वर्षों में खेत का गेहूँसा बीज बैंक 95% से अधिक समाप्त हो जाता है।
09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)
तुलनात्मक सारणी 5.1: प्रमुख खरपतवार एवं उनके सफल जैविक नियंत्रक कीट (Bio-agents) व माइको-हर्बिसाइड्स
| लक्षित खरपतवार (Target Weed) | जैविक अभिकर्ता / बायो-शाकनाशी का नाम | जीव का प्रकार (Type of Agent) |
|---|---|---|
| 1. गाजर घास (Parthenium hysterophorus) | Zygogramma bicolorata (मैक्सिकन बीटल) | पर्ण-भक्षी भृंग (Leaf-feeding beetle, 1983) |
| 2. जलकुंभी (Eichhornia crassipes) | Neochetina eichhorniae एवं N. bruchi | मॉटल्ड व शेवरॉन जलकुंभी घुन (Weevils) |
| 3. लैंटाना (Lantana camara) | Teleonemia scrupulosa एवं Ophiomyia lantanae | लैंटाना लेस बग (Lace bug) व सीड फ्लाई |
| 4. जलीय फर्न (Salvinia molesta) | Cyrtobagous salviniae एवं Ctenopharyngodon idella | साल्विनिया घुन (Weevil) एवं ग्रास कार्प मछली |
| 5. नागफनी (Opuntia spp.) | Dactylopius tomentosus एवं Cactoblastis cactorum | कोचीनियल स्केल कीट (भारत, 1926) व शलभ |
| 6. मिल्कवीड वाइन (Morrenia odorata) | DeVine (Phytophthora palmivora) | विश्व का प्रथम व्यावसायिक माइको-हर्बिसाइड (1981) |
| 7. जॉइंटवेच (Aeschynomene virginica) | Collego (Colletotrichum gloeosporioides) | धान व सोयाबीन में प्रयुक्त माइको-हर्बिसाइड |
| 8. अमरबेल (Cuscuta spp.) | Lubao-2 (C. gloeosporioides f. sp. cuscutae) | अमरबेल नियंत्रक कवक शाकनाशी |
10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणितीय गणनाएँ (Formulas and Calculations)
महत्वपूर्ण जैविक नियंत्रण मील के पत्थर (Key Biocontrol Milestones)
- भारत में प्रथम सफल जैविक खरपतवार नियंत्रण (1926): नागफनी (Opuntia dillenii) का Dactylopius tomentosus (कोचीनियल कीट) द्वारा नियंत्रण।
- विश्व का प्रथम पंजीकृत माइको-हर्बिसाइड (1981, USA): DeVine (कवक: Phytophthora palmivora का तरल संरूपण)।
- जलीय खरपतवार भक्षी मछली (Herbivorous Fish): व्हाइट अमूर / ग्रास कार्प (Ctenopharyngodon idella) — अपने शरीर के भार के बराबर जलीय खरपतवार प्रतिदिन खाती है।
11 लेक्चर माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)
Lecture 05 Mind Map: खरपतवार प्रबंधन के सिद्धांत एवं भौतिक, सस्य, जैविक व रासायनिक विधियाँ
- खरपतवार प्रबंधन की अवधारणाएँ एवं विधियाँ (Concepts & Methods of Weed Management)
- 3 मूलभूत सिद्धांत (3 Basic Principles)
- Prevention (रोकथाम): प्रमाणित बीज, सड़ी FYM, संगरोध कानून | Eradication (उन्मूलन): 100% विनाश | Control/Management: ETL से नीचे रखना
- भौतिक एवं सस्य विधियाँ (Physical & Cultural Methods)
- भौतिक: Hand weeding, Hoeing, ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई, Mowing, Flooding, मल्चिंग, मृदा सौरीकरण, Dredging & Chaining
- सस्य (Cultural): फसल चक्र (गेहूँसा हेतु बरसीम), स्मदर फसलें (लोबिया/सनई), स्टेल सीडबेड, संकरी कतार व बैंड उर्वरक
- जैविक एवं रासायनिक विधियाँ (Biological & Chemical Methods)
- कीट बायो-एजेंट्स: गाजर घास (Zygogramma bicolorata), जलकुंभी (Neochetina), लैंटाना (Teleonemia), साल्विनिया (Cyrtobagous), नागफनी (Dactylopius)
- माइको-हर्बिसाइड्स: DeVine (Phytophthora), Collego, BioMal, Lubao-2 (Cuscuta हेतु), Bipolaris (बरू घास हेतु)
- 3 मूलभूत सिद्धांत (3 Basic Principles)
12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts and Diagrams)
प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): खरपतवार प्रबंधन की चतुर्भुजीय रणनीति
(स्वच्छ बीज, सड़ी खाद, साफ नहरें) ➔ 2. सस्य अनुकूलन (Cultural)
(स्टेल सीडबेड, फसल चक्र, लोबिया अंतःफसल) ➔ 3. भौतिक हस्तक्षेप (Physical)
(गहरी जुताई, मल्चिंग, गुड़ाई) ➔ 4. जैविक एवं रासायनिक नियंत्रण
(बायो-एजेंट्स / माइको-हर्बिसाइड्स / शाकनाशी)
13 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य एवं टिप्स (Important Facts & Exam Tips)
- परीक्षा के लिए पाँच सबसे महत्वपूर्ण जैविक कीट (Bio-agents) कंठस्थ कर लें: (1) गाजर घास (Parthenium) = Zygogramma bicolorata, (2) जलकुंभी (Eichhornia) = Neochetina eichhorniae / N. bruchi, (3) लैंटाना (Lantana) = Teleonemia scrupulosa, (4) साल्विनिया (Salvinia) = Cyrtobagous salviniae, और (5) नागफनी (Opuntia) = Dactylopius tomentosus एवं Cactoblastis cactorum।
- विश्व का पहला व्यावसायिक माइको-हर्बिसाइड (Mycoherbicide) ‘DeVine’ (1981, Phytophthora palmivora) है और दूसरा ‘Collego’ (Colletotrichum gloeosporioides) है।
- अमरबेल (Cuscuta) के जैविक नियंत्रण के लिए प्रयुक्त माइको-हर्बिसाइड ‘Lubao-2’ है और बरू घास (Sorghum halepense) के लिए ‘Bipolaris’ है।
- जलीय खरपतवारों के जैविक नियंत्रण के लिए प्रयुक्त शाकाहारी मछली ‘ग्रास कार्प / व्हाइट अमूर’ (Ctenopharyngodon idella) है।
- गेहूँ के खेत में गेहूँसा (Phalaris minor) के सस्य नियंत्रण के लिए सबसे प्रभावी फसल चक्र रबी में ‘बरसीम’ (Berseem) उगाना है।
14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Summary)
- 3 Principles: Prevention (निवारण), Eradication (100% उन्मूलन), Management (प्रबंधन)।
- Bio-agents: Parthenium = Zygogramma bicolorata | Eichhornia = Neochetina spp. | Lantana = Teleonemia scrupulosa | Salvinia = Cyrtobagous salviniae | Opuntia = Dactylopius / Cactoblastis।
- Mycoherbicides: DeVine, Collego, BioMal, Lubao-2 (Cuscuta), Bipolaris (Sorghum halepense)।
15 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी — 10 MCQs (With Answers & Explanations)
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16 संपूर्ण परीक्षा प्रश्न बैंक (One-Liners, VSA, SA & Long Answer Questions)
(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (5 Important One-Liners)
- गाजर घास का जैविक नियंत्रण मैक्सिकन भृंग ‘Zygogramma bicolorata’ द्वारा और जलकुंभी का ‘Neochetina eichhorniae/bruchi’ द्वारा किया जाता है।
- लैंटाना का जैविक नियंत्रण ‘Teleonemia scrupulosa’ से और जलीय फर्न साल्विनिया का ‘Cyrtobagous salviniae’ घुन से होता है।
- विश्व का प्रथम व्यावसायिक माइको-हर्बिसाइड ‘DeVine’ (Phytophthora palmivora) तथा दूसरा ‘Collego’ है।
- अमरबेल (Cuscuta) के लिए ‘Lubao-2’ और बरू घास के लिए ‘Bipolaris’ माइको-हर्बिसाइड प्रयुक्त होता है।
- जलीय खरपतवारों के जैविक नियंत्रण के लिए प्रयुक्त शाकाहारी मछली ‘ग्रास कार्प / व्हाइट अमूर’ (Ctenopharyngodon idella) है।
(B) 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions — VSA)
(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions — SA)
(D) 3 दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (3 Long Answer Questions — LA)
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGRON 311 notes।





